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मौत का हाईवे: 7 साल में 1397 हादसे, तेज रफ्तार पर अब तक क्यों नहीं लगाम?

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

छात्रों को राहत! डिप्लोमा धारकों को अब 12वीं के बराबर मिलेगा फायदा

भोपाल स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिल गई है। अब 10वीं के बाद किए डिप्लोमा कोर्स को अब 12वीं कक्षा के समकक्ष मान्यता दर्जा मिलेगा। इससे छात्रों को इंजीनियरिंग, एमबीए कॉलेजों में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा। यह निर्णय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की गुरुवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। साथ ही जबलपुर के प्रतिष्ठित संस्थान टीआइटी जबलपुर और ज्ञानगंगा जबलपुर को ऑटोनोमस (स्वायत्त) का दर्जा प्रदान किया गया। बैठक में शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय हुए। उठाया गया महत्वपूर्ण कदम कुल 23 पीएचडी स्कॉलर्स की डिग्री पर अंतिम मुहर लगाई गई। वहीं 20 शोधार्थियों को यूजीसी पीएचडी फेलोशिप प्रदान करने पर सहमति बनी। इसके अलावा इंजीनियरिंग, एमबीएम सहित अन्य संबद्ध कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता की समीक्षा की गई, जिन्हें निरंतरता देते हुए मान्यता बहाल रखने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह फैसले तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।   छात्रों को यह होगा फायदा     उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान: डिप्लोमा धारक अब 12वीं के समकक्ष पात्र माने जाएंगे।     प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर: कई सरकारी एवं निजी नौकरियों के लिए पात्रता आसान होगी।     बेहतर पाठ्यक्रम: ऑटोनोमस कॉलेज उद्योग आधारित सिलेबस लागू कर सकेंगे।     शोध को बढ़ावा: पीएचडी डिग्री और फेलोशिप से रिसर्च संस्कृति मजबूत होगी।     मान्यता की निरंतरता: संबद्ध कॉलेजों की स्थिरता से छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

जनगणना 2027 अपडेट: घर बैठे भरें डिटेल, एक गणनाकर्मी करेगा 800 लोगों का सर्वे

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने ‘डोर टू डोर’ सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

जनगणना 2027 अपडेट: देश के हर घर की बनेगी यूनिक पहचान, जानिए क्या होगा फायदा

खंडवा देश में हर 10 साल में होने वाली जनगणना इस बार 2027 में होगी। जनगणना से पहले मई 2026 से घरों की गिनती का काम शुरू होगा। हर घर को अलग पहचान एक यूनिक नंबर के रूप में मिलेगी। जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुआ। प्रशिक्षण में कलेक्टर व प्रमुख जनगणना अधिकारी ऋषव गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली जनगणना के कार्य के लिए पूरी गंभीरता से ट्रेनिंग लें। मकानों के नंबरिंग की प्रक्रिया समझाई कलेक्टर ने बताया कि बताया कि जनगणना के लिए 15 से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को उनकी जानकारी जनगणना पोर्टल में स्वयं ही भरने की सुविधा दी जाएगी। जनगणना-2027 के तहत मई-2026 माह में सर्वे कर घरों की लिस्टिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रशिक्षण में मकानों के सूचीकरण तथा नंबरिंग की प्रक्रिया अधिकारियों को समझाई गई। अधिकारियों को बताया गया कि कोई भी मकान सूचीकरण से छूटना नहीं चाहिए। प्रत्येक मकान को देना होगा नंबर प्रत्येक मकान को एक अलग नंबर देना होगा। प्रशिक्षण में बताया गया कि फरवरी 2027 में घर-घर जाकर जनगणना की जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशिक्षणमें अधिकारियों को भारत की जनगणना के संबंध में संक्षिप्त परिचय एवं नीति निर्माण सहित जनगणना-2027 के मुख्य बिंदुओं एवं प्रक्रियाओं के बारे में अवगत कराया गया। 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक कलेक्टर ने बताया कि जनगणना के लिए 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक बनाया जाएगा। एक ब्लॉक पर एक एन्युमेटर की नियुक्ति की जाएगी। छह एन्युमेटर पर एक सुपरवाइजर रहेगा, जो संबंधित चार्ज अधिकारी को रिपोर्ट करेगा। प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के लिए डेटा कलेक्शन और जांच की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया। प्रशिक्षण भोपाल से आए संभाग प्रभारी अभिमन्यु अरोरा और जिले के जनगणना प्रभारी जेएल साकेत द्वारा दिया गया। ट्रेनिंग में जिले के सभी एसडीएम, आयुक्त नगर निगम, तहसीलदार तथा सीएमओ उपस्थित रहे।  

PM राहत योजना से सड़क दुर्घटनाओं में मिलेगा डेढ़ लाख तक का मुफ्त इलाज, जबलपुर के 92 अस्पतालों को मिली मंजूरी

जबलपुर  सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अब सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत और मुफ्त इलाज मिलेगा. एक्सीडेंट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार वहन करेगी. यह खर्च प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दिया जाएगा. इलाज सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में ही होगा. जबलपुर में 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया |  मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता एक्सीडेंट होने के बाद शुरुआती समय किसी भी मरीज को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि एक्सीडेंट के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हो पता क्योंकि निजी अस्पताल इस बात से डरते हैं कि यदि उन्होंने इलाज शुरू कर दिया तो इसका बिल कौन देगा. कई बार मरीज की कोई जानकारी नहीं होती तो वहीं दूसरी समस्या पुलिस की ओर से होती है कि जब तक पुलिस जांच ना कर ले तब तक इलाज शुरू नहीं हो पाता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा |  एक्सीडेंट में घायल व्यक्तियों के लिए पीएम राहत योजना जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि “इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम राहत योजना शुरू की गई है. इसके तहत एक्सीडेंट के तुरंत बाद जब एंबुलेंस से कोई मरीज किसी अस्पताल पहुंचेगा तो इसी शुरुआती गोल्डन ऑवर में अस्पताल को मरीज को इलाज देना होगा. एक्सीडेंट के मामले में शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार उठाएगी. इलाज कैशलेस होगा |  जबलपुर के 92 अस्पताल शामिल इस योजना में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है. जबलपुर में ऐसे 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया है, जहां एक्सीडेंट के तुरंत बाद घायल का इलाज शुरू हो जाएगा. इसमें किसी को भी इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि इसका पैसा कौन देगा. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “भले ही घायल आयुष्मान कार्ड धारी है या नहीं है, इसका भी इस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पैसा पीएम राहत के माध्यम से भुगतान करवाया जाएगा |  पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पुलिस को भी इस मामले की जानकारी हो और यदि पुलिस को कोई कार्रवाई करनी है तो वह भी साथ में होती रहे लेकिन किसी भी स्थिति में घायल का इलाज नहीं रुकेगा |  कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि “रोड एक्सीडेंट के मामले में वाहनों का इंश्योरेंस होता है और शासन जो पैसा खर्च करेगा वह पैसा इंश्योरेंस के माध्यम से वसूला जाएगा. वहीं कुछ ऐसे वाहन जिनका बीमा नहीं होता है और यदि वे एक्सीडेंट करते हैं तो इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी लेकिन इसकी वसूली का काम शासन का होगा |  घायलों के लिए अच्छा कदम जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि “यह बहुत ही अच्छा कदम है आम आदमी को यदि इसकी जानकारी होगी तो बहुत सारे घायलों को बचाया जा सकता है. क्योंकि एक्सीडेंट के मामले में अक्सर लोग मरीजों की मदद करने में डरते हैं कई बार पुलिस परेशान करती है तो कई बार लोगों के पास मदद करने लायक पैसा नहीं होता यदि यह दोनों ही सहूलियत हो जाए तो सड़क पर मरने वालों की संख्या घट सकती है |     

गेहूं खरीद नीति 2026: 2585 रुपये भाव तय, पंजीयन और दस्तावेजों पर सरकार की सख्ती

भोपाल मध्यप्रदेश में इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 2585 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार तैयारियों में जुटी है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पंजीयन कराना जरूरी है। पंजीयन का काम 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया ​कि समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए अब तक एक लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 27175, उज्जैन में 73398, ग्वालियर में 3358, चंबल में 1449, जबलपुर में 12342, नर्मदापुरम में 11698, भोपाल में 41268, रीवा में 3242, शहडोल में 726 और सागर संभाग में 7137 किसानों ने पंजीयन कराया है। उन्होंने बताया कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल एमपी में गेहूं खरीदी के लिए इस बार कुल 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। यह पिछले साल से 160 रूपए अधिक है।   पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्रों और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंदों पर भी निशुल्क पंजीयन किए जा रहे हैं। इधर एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केंद्रों और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफों पर पंजीयन का शुल्क देना होगा।

फूलबाग 132 केवी सब-स्टेशन अपग्रेड, दो नए फीडर से सुधरेगी सप्लाई—लाखों उपभोक्ता होंगे लाभान्वित

ग्वालियर गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए बिजली कंपनी ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फूलबाग स्थित 132 केवी सब-स्टेशन से दो नए फीडर जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन फीडरों के जुडऩे के बाद कुल छह फीडर इस सब-स्टेशन से संचालित होंगे, जिससे करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, अभी तक 132 केवी फूलबाग सब-स्टेशन से 33 केवी के सेवा नगर, रोशनी घर, तानसेन नगर इंडस्ट्रियल एरिया और फूलबाग जोन के फीडरों को जोडक़र चार्ज किया जा चुका है। अब स्टेडियम और सिटी सेंटर फीडर को भी इससे जोडऩे की तैयारी अंतिम चरण में है। जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, संबंधित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति अधिक स्थिर और सुचारू हो जाएगी। एचटी के उपमहाप्रबंधक राज मालवीय ने बताया, विगत वर्षों में गर्मियों के दौरान इन फीडरों का संचालन 220 केवी महलगांव सब-स्टेशन से किया जाता था। मोनो पोल-1, मोनो पोल-2 और स्टेडियम फीडर के माध्यम से सप्लाई दी जाती थी। अधिक लोड के कारण जम्पर और इंसुलेटर के फटने जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं, जिससे बार-बार फॉल्ट होते थे और उपभोक्ताओं को बिजली गुल की परेशानी झेलनी पड़ती थी। वैकल्पिक लाइन से तुरंत सप्लाई शुरू की जा सकेगी अब फूलबाग सब-स्टेशन से सप्लाई शुरू होने पर इन फीडरों का लोड संतुलित हो जाएगा। इससे ओवरलोड की समस्या कम होगी और फॉल्ट की घटनाओं में भी गिरावट आएगी। साथ ही चेंजओवर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी कारणवश एक फीडर बंद हो जाता है तो वैकल्पिक लाइन से तुरंत सप्लाई शुरू की जा सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी। रेलवे ने डेडीकेटेड फीडर की योजना टाली उपमहाप्रबंधक मालवीय ने बताया, पहले रेलवे ने फूलबाग सब-स्टेशन से 2500 केवी का डेडीकेटेड फीडर लेने की मांग की थी और इस संबंध में प्रारंभिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। हालांकि अब रेलवे ने इस प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है और डेडीकेटेड फीडर नहीं लेने का निर्णय लिया है।   बार-बार बिजली गुल की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी गर्मी से पहले विद्युत आपूर्ति को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फूलबाग सब-स्टेशन से छह फीडरों को जोडऩे का काम पूरा होते ही शहर के प्रमुख क्षेत्रों में ओवरलोड और बार-बार बिजली गुल होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

भोपाल में बढ़ेंगे जमीन के सर्किल रेट, 551 प्राइम एरिया में 11% तक महंगाई का प्रस्ताव

भोपाल भोपाल में जमीन और मकान खरीदना अब महंगा होने वाला है। जिला मूल्यांकन समिति ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कलेक्टर गाइडलाइन का नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में शहर की कई प्राइम लोकेशन पर दरों में भारी बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। कलेक्टर गाइडलाइन का नया प्रस्ताव तैयार भोपाल कलेक्ट्रेट में शनिवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर गाइडलाइन का खाका पेश किया गया। पंजीयन अधिकारियों ने जिले भर की प्रॉपर्टी दरों की समीक्षा के बाद अपना प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा।   551 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम प्रस्ताव के अनुसार, जिले में प्रॉपर्टी की दरों में औसत वृद्धि करीब डेढ़ प्रतिशत प्रस्तावित की गई है। हालांकि, भोपाल के शहरी क्षेत्रों की स्थिति इससे अलग है। अधिकारियों ने बताया कि शहर की 551 चुनिंदा लोकेशन ऐसी हैं, जहां विकास और मांग को देखते हुए प्रॉपर्टी की दरों में 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। इन क्षेत्रों में हाल के दिनों में संपत्तियों की रजिस्ट्री और बाजार मूल्यों में बड़ा उछाल देखा गया है।   राजस्व और विकास को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बैठक में कलेक्टर ने पंजीयन अधिकारियों के प्रस्ताव पर चर्चा की और क्षेत्रवार दरों की समीक्षा की। इस वृद्धि के पीछे का मुख्य उद्देश्य बाजार दरों और सरकारी गाइडलाइन के बीच के अंतर को कम करना है। प्रस्तावित गाइडलाइन पर अब आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे शासन के राजस्व में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

घर लौटते परिवार पर काल बनकर टूटा ट्रक, दो मासूमों सहित 3 की मौत, 4 घायल

भिंड नोएडा से गोहद स्थित गृह गांव में होली मनाने आ रहे कार सवार परिवार से आगरा में ट्रक टकरा गया। हादसे में दो बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई। चार लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय रामकुमार पुत्र बांकेलाल जाटव निवासी कीरतपुरा थाना गोहद नोएडा के सेक्टर 93 में परिवार सहित रहते थे। होली मनाने के लिए रामकुमार सोमवार रात कार से गोहद आ रहे थे। ट्रक की टक्कर से कार के उड़े परखच्चे, तीन की मौत मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे आगरा-फतेहाबाद के बीच बाह की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही स्विफ्ट कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कार में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को वाहन काटना पड़ा। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद रामकुमार जाटव, चार वर्षीय बेटे मनदीप के अलावा छह वर्षीय तनु पुत्री भूरे जाटव निवासी कीरतपुरा को मृत घोषित कर दिया। कई लोग गंभीर घायल, ट्रक चालक फरार जबकि 40 वर्षीय भूरे जाटव, उनकी पत्नी 35 वर्षीय चंद्रिका, बेटी आठ वर्षीय अनन्या के अलावा रेखा पत्नी रामकुमार जाटव घायल हैं। भूरे जाटव की गंभीर हालत देखते हुए ग्वालियर में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। आर्थिक तंगी और अस्पताल के बिल ने बढ़ाई परेशानी हादसे के बाद मृतक रामकुमार जाटव के भाई राजकुमार जाटव ने आगरा में न्यू आगरा थाने में आवेदन देकर बताया कि हादसे में उनके भाई सहित भतीजों की मौत हो गई है। जबकि घायल श्री हरि अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि घायलों का बिल 97 हजार रुपये हो गया है। जबकि घायलों के स्वजन मजदूरी करते थे, इसलिए परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। अस्पताल प्रबंधन बिना बिल भरे हुए मरीजों को डिस्चार्ज नहीं कर रहा है।  

सोशल मीडिया पर दी हाइड्रोजन बम की धमकी, पुलिस ने आरोपी को दबोचा

टीकमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह लोधी को इंटरनेट मीडिया पर हाइड्रोजन बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान अर्जुन चढ़ार निवासी खरगापुर के रूप में हुई है। एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि 22 फरवरी को जीडब्ल्यू बृजेंद्र कुशवाहा नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से जिपं अध्यक्ष उमिता सिंह की पोस्ट पर लिखा था हमारे पास हाइड्रोजन बम है, हम बनाना जानते हैं। नेताओं को हम खुद ही मारेंगे। इस कमेंट में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति, पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई थी। साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा मोबाइल पुलिस पूछताछ में आरोपित अर्जुन चढ़ार ने बताया कि घटना वाले दिन उसने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था। नशे की हालत में वीडियो देखते समय अचानक जिपं अध्यक्ष की आइडी सामने आने पर उसने बोलकर यह कमेंट कर दिया था। मामला तूल पकड़ते ही घबरा गया और उसने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना आठ साल पुराना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में भी डाली, लेकिन साइबर सेल ने आइएमइआइ नंबर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसे खरगापुर से दबोच लिया।  

MP के 27 उत्पादों को मिला प्रतिष्ठित GI टैग, देश-दुनिया में बढ़ी ब्रांड वैल्यू

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर “जीआई टैग” प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

स्वास्थ्य अधोसंरचना एवं सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सुनियोजित प्रावधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।

आदिवासी क्षेत्रों में पकड़ बढ़ाने की रणनीति, भाजपा का फोकस मालवा-निमाड़ अंचल पर

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। ‘प्रयोगधर्मी’ नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को ‘कृषि कैबिनेट’ नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच ‘अपना व्यक्ति’ के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के ‘आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल’ नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

आदिवासी वोटरों को लुभाने की तैयारी में मोहन सरकार, बड़वानी बैठक से निकाय चुनावों को लेकर मिले संकेत

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली “कृषि कैबिनेट” की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

त्योहार पर सख्ती: भोपाल में होली के दौरान हर प्रमुख चौराहे पर 108 एंबुलेंस तैनात

भोपाल होली और रंगपंचमी के उल्लास के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति या चिकित्सीय आपातकाल से निपटने के लिए राजधानी का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहर के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ हर थाना क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 108 एंबुलेंस की विशेष तैनाती की गई है। सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों को आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। थाना क्षेत्रों और प्रमुख केंद्रों पर एंबुलेंस की तैनाती 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि एम्स, हमीदिया, जेपी अस्पताल, काटजू अस्पताल और बैरागढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ शहर के सभी 22 थाना क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात रहेगी। ये वाहन जीवन रक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ (ईएमटी) से सुसज्जित होंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, आगजनी या विवाद की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। 104 हेल्पलाइन से घर बैठे लें डॉक्टरी सलाह त्योहार के दौरान यदि किसी को सामान्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार की 104 हेल्थ हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक सक्रिय रहेगी। इसके माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श, मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और नजदीकी ब्लड बैंक या अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। सेहतमंद होली के लिए विशेषज्ञों की सलाह सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शहरवासी केमिकल युक्त रंगों से बचें। रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। आंखों में धुंधलापन, खुजली या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यहाँ उपलब्ध रहेगी तुरंत सहायता प्रमुख केंद्र – एम्स भोपाल, जेपी अस्पताल, हमीदिया, आनंद नगर, कोलार, बैरागढ़। थाना क्षेत्र – एमपी नगर, हबीबगंज, टीटी नगर, अशोका गार्डन, निशातपुरा सहित जिले के सभी ग्रामीण व शहरी थाना क्षेत्र। आपातकालीन नंबर – 108 (एंबुलेंस), 104 (स्वास्थ्य परामर्श)।

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