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बगलामुखी मंदिर में चप्पल चोरी, नायब तहसीलदार पर आरोप; एसपी और थाना प्रभारी को शिकायत भेजी

आगर मालवा  जिले के नलखेड़ा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। विश्व प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे एक शासकीय अधिकारी की चप्पल चोरी हो गई। खास बात यह है कि पूरे घटनाक्रम का खुलासा मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है। मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भी की गई है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार 2 मार्च को दोपहर में नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी दर्शन के लिए नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने अपनी चप्पल रसीद काउंटर के पास निर्धारित स्थान पर उतारी थी। करीब दस मिनट बाद जब वे वापस लौटे तो उनकी चप्पल वहां नहीं मिली। इसके बाद मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में एक व्यक्ति चप्पल ले जाते हुए दिखाई दिया। मंदिर प्रबंधन की मदद से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की गई और उससे पूछताछ भी की गई, जिसमें उसने चप्पल ले जाने की बात स्वीकार कर ली। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए भीड़ भी एकत्रित हो गई, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है। नायब तहसीलदार ने पुलिस से भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। नायब तहसीलदार ने बताया कि मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और मंदिर प्रबंधन सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाता है।  

उड़ा अबीर-गुलाल महाकाल की नगरी में, पंडे-पुजारियों ने शिव-पार्वती के संग मनाया उत्सव

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में हर त्योहार विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले ही शहर रंगों और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सान्निध्य में शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्ष से अनोखी होली की परंपरा निभा रहा है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल की नगरी में इस बार होली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया गया. शिप्रा नदी के किनारे नृसिंह घाट स्थित कुमार धर्मशाला में भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते-गाते नजर आए. पूर्णिमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव का आयोजन किया गया। शिव-पार्वती की प्रतीकात्मक उपस्थिति इस भव्य आयोजन का दृश्य उस समय और भी खास हो गया, जब शिव और माता पार्वती प्रतीकात्मक रूप में मंच पर प्रकट हुईं. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी के साथ भक्तों के बीच पधार गए हों. जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजनों की मधुर धुन पर भक्त अपने भावों को रोक नहीं सके. हर चेहरा खिल उठा। गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर सोमवार को संध्या आरती के दौरान मंदिर का गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर नजर आया। पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर उनके साथ होली खेली। जैसे ही पुजारी ने बाबा पर केसरिया और हर्बल गुलाल छिड़का, पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा। यहां मौजूद हर कोई शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका दहन किया गया। महाकाल करते हैं सभी त्योहारों की शुरुआत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल ही समस्त त्योहारों की शुरुआत करते हैं, इसलिए यहां सबसे पहले होलिका प्रज्वलित की जाती है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने विशेष इंतजाम किए थे। गर्भगृह में केवल प्राकृतिक और हर्बल गुलाल के उपयोग की ही अनुमति दी गई, ताकि मंदिर की मर्यादा और गर्भगृह की सुरक्षा बनी रहे। शिवगणों के साथ भक्तों की टोलियां भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में नजर आए. पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे साक्षात शिव की सेना धरती पर उतर आई हो, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच भक्तों की टोलियां नाचते-गाते जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं. हर ओर रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया। ग्रहण के चलते केवल शकर का भोग अर्पित धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर शाम को ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद ही भगवान को भोग अर्पित किया जाएगा। शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के इस ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा। ऐसे होगा महाकाल का पूजन     3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। उसका वेध काल सुबह सूर्योदय से शुरू हो जाएगा।     वेध काल के चलते सुबह की दद्योदक एवं भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।     ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी। कल से ठंडे जल से होगा स्नान महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा। इसलिए ग्रहण का असर नहीं महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इस पर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के चलते न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा। भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल इस दौरान महिला भक्तों ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया. यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और आम श्रद्धालु शामिल होते हैं. आयोजन के दौरान कुछ भक्त चौसर खेलते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर भांग भी तैयार की जा रही थी. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है  

मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग

मुख्यमंत्री निवास पर हुआ भव्य होलिका दहन, गौ-काष्ठ का हुआ उपयोग होलिका दहन में मुख्यमंत्री निवास पर गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक पूजा-अर्चना कर किया होलिका दहन प्रदेशवासियों को होली की दी मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका की विधि-विधान से सपत्नीक पूजा-अर्चना कर होलिका का दहन किया। होलिका में गौ-काष्ठ का उपयोग किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की धर्मपत्नी मती सीमा यादव, अन्य परिजन एवं म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पदस्थ सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को होली की बधाई देकर प्रसादी के रूप में गुझिया वितरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होलिका दहन कर प्रदेशवासियों को रंग पर्व की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली हम सबको रंगों से सराबोर कर देने वाला त्यौहार है। होली हमें एकजुट रहने की सीख देती है। हम सभी को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर होली से रंगपंचमी तक प्रेमपूर्वक यह त्यौहार मनाना चाहिए।  

भारत की बास्केटबॉल टीम दोहा में फंसी, Iran-Israel War के चलते एमपी के तुशाल सिंह समेत खिलाड़ी परेशान

जबलपुर  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी

9 सवारियां और 1 बाइक: मौत से खेलता सफर, वीडियो देखकर पुलिस भी हैरान

कटनी एक मोटर साइकिल में कितने लोग सवार हो सकते हैं- दो, तीन या हद से हद चार… लेकिन क्या कभी 9 सवारी बैठे देखा है? यह नजारा देखकर बाइक निर्माता कंपनी भी अपना माथा पीट लेगी  |  कटनी जिले में एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक मोटरसाइकिल पर 9 लोग सवार हैं. बाइक चालक महिलाओं बच्चों सहित नौ सवारी बैठाकर बाइक चला रहा है. बगैर इस बात की चिंता किए कि जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है  |  जान जोखिम में डालकर बाइक में नौ लोगों को बैठाने का यह नजारा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला है  |  बाइक की नंबर प्लेट में दिए गए नंबर MP 21 ZE 8630 से जाहिर होता है कि यह कटनी जिले के किसी ग्रामीण क्षेत्र का मामला है. बच्चों के हाथ में पिचकारी नजर आ रही है जिससे प्रतीत होता है कि परिवार होली पर्व की खरीददारी कर वापस लौट रहा है  |  एक बाइक पर 9 सवारी देखकर किसी ने इसका वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं  |  वहीं, वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आ गई है. यातायात थाना प्रभारी राहुल पांडे ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी गई है और संबंधित वाहन चालक की पहचान कर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी  | 

मैहर में चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को बंद रहेंगे माँ शारदा के पट, कब खुलेंगे गर्भगृह के द्वार, जानें यहाँ

सतना मैहर जिला में मौजूद त्रिकूट वासिनी माँ शारदा मंदिर में चंद्रग्रहण के अवसर पर मंदिर परंपरा अनुसार दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। मंदिर प्रशासन एवं प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार 3 मार्च को सायं 5:00 बजे माता शारदा की आरती एवं पूजन संपन्न होने के पश्चात गर्भगृह के पट सायं 5:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे। 4 मार्च को अभिषेक के बाद खुलेंगे पट बताया गया है कि 4 मार्च को माता का अभिषेक एवं विधिवत पूजा-अर्चना पूर्ण होने के बाद गर्भगृह के पट पुनः दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए निर्धारित समय से पूर्व मंदिर परिसर पहुंचें तथा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। 3 मार्च को कितने बजे लग रहा चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा. सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक काल लग जाएगा. इस दौरान कोई भी शुभ काम, पूजा-पाठ नहीं होंगे. गर्भवती महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकतीं. सूतक काल लगने के बाद से चंद्रग्रहण तक मंदिरों के पट बंद रहेंगे. एमपी के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी कर दी गई है. ग्रहण के चलते मंदिरों के पट हो जाएंगे बंद 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते मां शारदा मंदिर की दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया गया है. मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और ग्रहण काल के नियमों का पालन करते हुए 3 मार्च की शाम को गर्भगृह के पट निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाएंगे. मंदिर के प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार, श्रद्धालुओं से दर्शन के लिए निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो. 3 मार्च को शाम 5:30 बजे बंद होंगे गर्भगृह के पट मंदिर प्रशासन द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार 3 मार्च को चंद्रग्रहण के दिन शाम 5:00 बजे मां शारदा की सांध्यकालीन आरती व विशेष पूजन किया जाएगा. आरती के बाद ठीक शाम 5:30 बजे गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाएंगे. पट बंद होने के बाद मंदिर के गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश या दर्शन की अनुमति नहीं होगी. इसलिए मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे समय रहते मंदिर पहुंचकर दर्शन कर लें. ग्रहण समाप्ति के बाद 4 मार्च को होगा शुद्धिकरण चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद 4 मार्च को मंदिर के गर्भगृह का विधि-विधान से शुद्धिकरण किया जाएगा. इसके बाद मां शारदा का पवित्र जल से अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी. पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही गर्भगृह के पट दोबारा श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाएंगे. इसके बाद नियमित दर्शन व्यवस्था शुरू हो जाएगी. प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं मैहर मां शारदा मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. विशेष अवसरों और त्योहारों पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. चंद्रग्रहण के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव होने से दूर-दराज से आने वाले भक्तों को पहले से जानकारी देना आवश्यक माना गया है. श्रद्धालुओं से समय का ध्यान रखने की अपील मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो भक्त 3 मार्च को दर्शन के लिए आने वाले हैं, वे शाम 5:30 बजे से पहले मंदिर परिसर पहुंच जाएं. निर्धारित समय के बाद दर्शन संभव नहीं होगा. प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने व प्रशासन का सहयोग करने का भी अनुरोध किया है, ताकि सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन का लाभ मिल सके. परंपराओं के पालन हेतु मंदिर प्रबंधन की अपील मंदिर प्रबंधन ने कहा है कि ग्रहण काल की परंपराओं के पालन हेतु यह व्यवस्था की गई है और सभी भक्तों से समय का विशेष ध्यान रखने का अनुरोध किया गया है।

MP की सड़कों पर टोल वसूली का सवाल, आदेश से पहले करोड़ों वसूले, PWD मंत्री ने दिया स्पष्टीकरण

  भोपाल मध्य प्रदेश में टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है |  कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई |   कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है |     प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है |  सुप्रीम कोर्ट ने मंदसौर पुलिया के टोल प्रकरण में आदेश दिया कि कोई भी निवेशक, लागत उस पर ब्याज तथा रखरखाव के अतिरिक्त टोल नहीं वसूल कर सकता है |  अधिसूचना बाद में, वसूली पहले? कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:- भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019 इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022 सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023 महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’? प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए |  पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है |   

MP में मत्स्यपालकों के लिए नई नीति, सरकार का बड़ा कदम, किसान कल्याण वर्ष में हर अंचल में कैबिनेट बैठक होगी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है।

महाकाल के दरबार में चंद्र ग्रहण का असर नहीं, बाबा महाकाल करेंगे होली खेल, मंदिर के पट रहेंगे खुले

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि “बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा.” 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि “सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि ” ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है.” महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि “पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.

धार भोजशाला परिसर में कब्रों पर विवाद गहराया, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया कोर्ट जाने का निर्णय

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

शिक्षा में बड़ा बदलाव: 2026-27 से MP के हजारों स्कूलों में प्री-प्राइमरी क्लासेस शुरू, नियम तय

भोपाल राज्य सरकार सत्र 2026-27 में प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने जा रही है। नई शिक्षा नीति में पहली कक्षा में प्रवेश से पहले प्री-प्राइमरी में प्रवेश का प्रविधान किया गया है। अभी तक करीब दो हजार स्कूलों में यह व्यवस्था की गई थी। प्रवेश के लिए तीन से साढ़े चार वर्ष की आयु निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तीन से छह वर्ष के बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले खेल-खेल में सीखने का माहौल देने का प्रविधान है। इसके तहत किंडरगार्टन की तर्ज पर प्री-प्राइमरी बालवाटिका कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। सरकार ने इसे चरणबद्ध ढंग से लागू करने का निर्णय लिया था। अब राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रवेश संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु की गणना संबंधित सत्र की 31 जुलाई तथा पहली कक्षा के लिए 30 सितंबर से की जाएगी। कक्षाओं को बनाया जाएगा आकर्षक सरकारी स्कूलों में अब तक सीधे पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाता था, जबकि निजी प्ले स्कूलों में अभिभावक बच्चों को प्री-प्राइमरी में पढ़ाते थे। इससे सरकारी स्कूल के बच्चे पिछड़ जाते थे। अब तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए आकर्षक फर्नीचर, खिलौने और रंगीन दीवारों वाली कक्षाएं तैयार की जाएंगी। जिन परिसरों में पहले से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, वहीं इन कक्षाओं का चयन किया गया है, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में निरंतरता मिल सके। खेल और गतिविधि आधारित पढ़ाई इन कक्षाओं में पढ़ाई का बोझ नहीं होगा। बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा तैयार विशेष पाठ्यक्रम ‘विद्या प्रवेश’ के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। एलईडी स्मार्ट टेलीविजन लगाए जा रहे हैं, जिनके जरिए हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती तथा पूर्व-प्राथमिक गतिविधियां विजुअल टूल्स से सिखाई जाएंगी। पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, कविताएं और कहानी सुनाने जैसी गतिविधियों से सीखने का अवसर मिलेगा। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्राथमिक शिक्षकों को छोटे बच्चों को खेल-खेल में आधुनिक तरीकों से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अतिथि शिक्षकों की भी भर्ती की जाएगी। प्रवेश की आयु सीमा नर्सरी: 3 से 4.5 वर्ष केजी-1: 4 से 5.5 वर्ष केजी-2: 5 से 6.5 वर्ष पहली कक्षा: 6 से 7.5 वर्ष अधिकारियों का क्या कहना डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र का कहना है कि आगामी सत्र से प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन कक्षाओं में बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।

बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी से मजबूत होगी कृषि अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

50 एकड़ में स्थापित होगा आदर्श बीज उत्पादन केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी कृषि एवं विकास योजनाओं की सौगात राजकीय गरिमा के साथ मनाया गया भगोरिया पर्व : जुलवानिया भगोरिया हाट में उड़ा उल्लास और परंपरा का रंग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आनंद में झूमने का पर्व है। पर्व में महिला और पुरुष समान रूप से कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते हैं और पारंपरिक वेशभूषा में लोक संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरते हैं। ताड़ी जैसे पारंपरिक पेय का आनंद भी इस उत्सव का हिस्सा है। जनजातीय संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान और महत्व है। इसी परंपरा को संरक्षित करने के लिये राज्य सरकार ने इस पर्व को राजकीय पर्व का दर्जा देकर इसकी गरिमा को और बढ़ाया गया है। यह बातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले के जुलवानिया में भगोरिया उत्सव में कही। बड़वानी के जुलवानिया में भगोरिया हाट में उस समय उल्लास और उमंग का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय बंधुओं के भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन से पूरा हाट परिसर उत्साह, रंग और पारंपरिक उल्लास से सराबोर हो गया। जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा से सजे इस पारंपरिक पर्व में मांदल की गूंजती थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित नर्तक-नर्तकियों की मनमोहक प्रस्तुतियां तथा गुलाल से रंगीन वातावरण ने भगोरिया को और भी आकर्षक बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कलाकारों के साथ मांदल की थाप पर कदम मिलाकर उनकी कला और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, उत्सवधर्मिता और जीवन के प्रति आनंदमयी दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक मौसम के अनुरूप त्यौहारों की परंपरा रही है, जिससे जीवन में उल्लास और सामूहिकता बनी रहे। पूर्वजों द्वारा स्थापित यह आनंदमयी परंपरा आज भी जीवंत है। सदियों से भगोरिया पर्व इस क्षेत्र में हर्ष, उमंग और लोक जीवन की ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ का क्षेत्र, मां नर्मदा के आशीर्वाद से समृद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल प्रबंधन एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से सूखे खेतों तक पानी पहुंचा है और फसलें लहलहा रही हैं। यहां विविध प्रकार की फसलें, फल और सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। प्राकृतिक खेती को भी किसान उत्साहपूर्वक अपना रहे हैं, जिसके कारण बड़वानी जिले के फल एवं सब्जियों की मांग देश-विदेश में बनी हुई है। अब लक्ष्य है कि फसल को खेत से कारखाने तक पहुंचाया जाए और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगोरिया के आनंद और बड़वानी की उन्नत कृषि को सम्मान देने के उद्देश्य से कृषि कैबिनेट का आयोजन किया गया, जिसमें किसान कल्याण वर्ष की पहली कैबिनेट में 27,500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के निर्णय लिए गए। किसानों के हित में भावांतर भुगतान योजना में सोयाबीन पर 1,500 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। लाड़ली बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कैबिनेट के साथ पहली बार भीलट देव के दर्शन कर मन आनंदित हुआ। निमाड़ महान संत सिंगाजी, दादा धूनिवाले जैसी विभूतियों की पावन भूमि है, जिन्होंने समरसता और सद्भाव का संदेश दिया। आपसी द्वेष और मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ होली का त्यौहार मनाने का संदेश देते हुए अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा अधिक है। इसके विस्तार के लिये कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के साथ आधुनिक सब्जी मंडी की स्थापना की जाएगी। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए पानसेमल एवं वरला माइक्रो सिंचाई उद्वहन परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हैक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और जनजातीय किसानों को सीधा लाभ होगा। खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिये 25 किसानों को अन्य राज्यों में प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ क्षेत्र में आदर्श बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पलसूद बायपास एवं ओझर बायपास का निर्माण कराया जाएगा, जिससे यातायात सुगम होगा और क्षेत्रीय आवागमन को नई सुविधा मिलेगी। साथ ही एबी रोड से भंवरगढ़ स्थित खाज्या नायक स्मारक तक पहुँच मार्ग का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध हो सके। साथ ही दीवानी से जोगवाड़ा पहुँच मार्ग तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी कराया जाएगा। इन सभी कार्यों से क्षेत्र के विकास, व्यापारिक गतिविधियों और आमजन की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।  

देवकरण झोरढ़ बने भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल की सहमति से भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा ने मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। घोषित सूची के अनुसार देवकरण झोरढ़ को किसान मोर्चा का प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। संगठन द्वारा की गई इस नियुक्ति को आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और किसान हित से जुड़े मुद्दों के प्रभावी प्रचार-प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा के साथ ही मोर्चा की आगामी रणनीतियों और कार्यक्रमों को गति देने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। संगठन ने नव नियुक्त पदाधिकारियों से किसान हितों के संरक्षण एवं संगठन के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की है।

रेड अलर्ट ने बढ़ाई परेशानी, दुबई में फंसा MP का परिवार, कथा में शामिल होने गया था

बदनावर दुबई के बर दुबई स्थित ग्रैंड एक्सेसियर होटल में दो से आठ मार्च तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा अंतरराष्ट्रीय हालात और फ्लाइट संचालन प्रभावित होने के कारण फिलहाल अधर में लटक गई है। रेड अलर्ट घोषित होने के बाद सार्वजनिक कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे कथा आयोजन भी स्थगित करना पड़ा। कथा का वाचन मालवा माटी के प्रसिद्ध संत कमलकिशोर नागर के सुपुत्र कथावाचक प्रभुश्री नागर द्वारा किया जाना था। वे एक मार्च को 16 सदस्यीय दल के साथ दुबई के लिए रवाना होने वाले थे, जबकि उनके साथ 100 से अधिक अनुयायियों के पहुंचने की संभावना थी, लेकिन उड़ानें प्रभावित होने के कारण गुरुजी ने दुबई यात्रा निरस्त कर दी।   बदनावर से पहले ही पहुंच गए थे 7 सदस्य धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम सेमलिया निवासी आयोजक गोपाल पुरोहित 28 फरवरी को सुबह 10 बजे इंदौर से सात सदस्यीय दल के साथ दुबई रवाना हुए थे। दल में गोपाल पुरोहित, सोहन पुरोहित, राजेंद्र पुरोहित, सावित्री पुरोहित, जितेंद्र पुरोहित, कौशल्या पुरोहित तथा राजस्थान के पाली निवासी नटवर सिंह पुरोहित शामिल हैं। ये सभी कथावाचक की अगवानी के लिए एक दिन पहले दुबई पहुंच गए थे। गोपाल पुरोहित के अनुसार उनकी फ्लाइट दुबई दोपहर करीब एक बजे उतरी और आधे घंटे बाद ही युद्ध जैसे हालात की घोषणा कर दी गई। यदि यह स्थिति पहले बनती तो फ्लाइट भी वहां नहीं पहुंच पाती। रेड अलर्ट, बाजारों में सन्नाटा और कार्यक्रम निरस्त दुबई में रेड अलर्ट जारी होने के बाद लोगों को बार-बार संदेश भेजकर घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है। बाजारों और सड़कों पर यातायात कम हो गया है तथा सार्वजनिक आयोजन निरस्त कर दिए गए हैं। दल में शामिल सात लोगों में तीन महिलाएं और चार पुरुष हैं। वर्तमान में सभी लोग शारजाह में ठहरे हुए हैं। दुबई निवासी प्रतीक पुरोहित का कहना है कि दुबई में हालात सामान्य तो हैं, लेकिन रेड अलर्ट अभी भी लागू है। होटल और आयोजन की तैयारियां रहीं बेकार कथा आयोजन के लिए होटल, हाल और भोजन व्यवस्था पहले से बुक कर ली गई थी, लेकिन कार्यक्रम स्थगित होने से सारी तैयारियां फिलहाल बेकार चली गईं। आयोजकों के अनुसार कथा के लिए कुछ श्रद्धालु पहले ही पहुंच चुके थे, जबकि कई अन्य बाद में आने वाले थे।   आसमान में जेट फाइटर, गिरते मलबे से दहशत पुरोहित ने बताया कि शारजाह क्षेत्र में सोमवार को दिनभर जेट फाइटर उड़ान भरते नजर आए। हर कुछ समय में विस्फोट जैसी स्थिति बन रही है और गिरते मलबे से लोगों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे भय का माहौल बना हुआ है। हालात सामान्य होने का इंतजार आयोजक गोपाल पुरोहित ने बताया कि फिलहाल कथा आयोजन निरस्त है। परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही आगे की योजना तय की जाएगी और तभी सभी श्रद्धालु वापस लौटेंगे या आयोजन की नई तिथि घोषित की जाएगी।

‘लाइफलाइन’ तालाब पर संकट गहराया, अतिक्रमण हटाने में सुस्ती पर सवाल

भोपाल बड़े तालाब की सीमा में बड़े और पक्के अतिक्रमण सामने आने के बाद भी नगर निगम और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। करीब 10 साल पहले हुए सर्वे में 300 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, लेकिन तब केवल छोटे अतिक्रमण हटाए गए और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद कब्जों की संख्या बढ़ती चली गई। सख्त कार्रवाई नहीं हो रही अब दोबारा सीमांकन कर अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने जलस्रोतों के एफटीएल और 50 मीटर दायरे में आने वाले सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। 23 फरवरी को कलेक्ट्रेट में सांसद आलोक शर्मा ने 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हुए कब्जों को हटाने के लिए पुनः सीमांकन कराने को कहा था। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर 25 फरवरी से संत हिरदाराम नगर वृत्त में वीआईपी रोड राजाभोज प्रतिमा से सीमांकन शुरू हुआ। वीआईपी रोड, खानूगांव और हलालपुर में अतिक्रमण चिह्नित तो किए गए, लेकिन हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। बैठक में राजस्व, पुलिस, नगर निगम और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई तय हुई थी, पर हलालपुर में केवल एक शेडनुमा गोदाम के हिस्से पर बुलडोजर चलाया गया। नियमों का हवाला, कार्रवाई नहीं एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वेटलैंड के एफटीएल और 50 मीटर दायरे में सभी निर्माण ध्वस्त किए जाने चाहिए। टीएंडसीपी के नक्शे से किए गए सीमांकन में पक्के निर्माण पाए गए हैं, फिर भी प्रशासन बुलडोजर चलाने से पीछे हट रहा है। अवैध निर्माण करने वाले नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा से अनुमति और रजिस्ट्री होने का दावा कर रहे हैं, हालांकि मौके पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। खानूगांव से संत हिरदाराम नगर तक कब्जे खानूगांव में रिटेनिंग वॉल बनाकर करीब 40 प्लाटों को कैचमेंट से बाहर किया गया। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसे तोड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप खानूगांव से संत हिरदाराम नगर तक कब्जों की संख्या 300 से अधिक हो गई।

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