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यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही : अन्नामलाई

 चेन्नई तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता? पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.  योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि ‘तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.’ इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि ‘हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है. दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी. अन्नामलाई के तर्क अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है. यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.  अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है. अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है. यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है. वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था. 4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो … Read more

सरला मिश्रा केस की फाइल 28 साल बाद फिर खुलेगी, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, दिग्विजय सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? जानें मामला

भोपाल मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला 28 साल बाद फिर से खुलने जा रहा है. 1997 में भोपाल स्थित सरकारी आवास में जलने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में सरला मिश्रा के भाई ने एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भोपाल कोर्ट के आदेश के बाद सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर से खुलने जा रहा है.  अनुराग ने कहा, सियासी अदावत में बहन की हत्या हुई। सरला की मौत की जांच पर शुरू से अंगुलियां उठती रही हैं। आरोप लगे कि भोपाल की टीटी नगर पुलिस की हत्या को आत्महत्या बताया। पीएम करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगे। अब अनुराग ने कहा, उम्मीद है, अब न्याय मिलेगा। जांच के नाम पर कागजी घोड़े : पुलिस ने 7 मार्च 1997 को बयान लिया। एक अन्य बयान 15 फरवरी 2010 को लिया। जांच के आदेश के कोर्ट ने लिखा- पुलिस ने जांच न कर कागजी घोड़े दौड़ाए। सरला जल रही थी, दरवाजे खुले थे: जांच में कहा गया था, जब साक्षी राजीव दुबे घटनास्थल पर पहुंचे तो सरला जल रही है। मकान के दरवाजे खुले थे। कोर्ट ने लिखा है, यह असंभव है। सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए इस मामले में सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल का बहुचर्चित कांड सरला मिश्रा सुर्खियों में रहा है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी बहन सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को संदिग्ध अवस्था में जली हुई पाई गई थीं। इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था पुलिस ने उस समय इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि वो मामला हत्या का था। इसी मामले में दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था। ऐसे आरोप थे कि सरला की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। जब सरला मिश्रा का 1997 को निधन हुआ था, तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में भोपाल के टीटी नगर थाने की ओर से पेश खात्मा रिपोर्ट को न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा की आपत्तियों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक राय ने टीटी नगर पुलिस को मामले की पुन: जांच कर आरोप-पत्र संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। मामला करीब 28 वर्ष पुराना है। 14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थीं। उन्हें इलाज के लिए पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ले जाया गया था, जहां 19 फरवरी 1997 को उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां भोपाल कोर्ट की न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की मेडिकल पुष्टि नहीं की गई। बयान के समर्थन में जो कागज के टुकड़े मिले, उनकी भी स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट भी नहीं लिया गया। परिवार ने इसे हत्या बताया था और कुछ नेताओं पर आरोप भी लगाए थे। साल 2000 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी थी। खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्ष तक कोर्ट में पेश नहीं की गई। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि पहले खात्मा रिपोर्ट में बयान दर्ज हों और फिर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भोपाल कोर्ट में सुनवाई चली और अनुराग के बयान दर्ज हुए। भाई ने कहा- हत्या हुई, पुलिस ने माना सुसाइड अनुराग मिश्रा ने बताया- सरला दीदी मेरी सगी बड़ी बहन थी। हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनकी हत्या हुई है। पुलिस ने संदिग्ध स्थिति में जला मानकर 309 में केस दर्ज कर लिया और कहा था कि इन्होंने आत्महत्या की है। हम उसी समय के जांच अधिकारी से कहते रहे कि इसमें हत्या हुई है। हमनें लिखकर दिया फिर भी उसकी जांच नहीं हुई। घटना स्थल पर सबसे पहले मेरे माता-पिता पहुंचे थे। उन्हें घटना वाले मकान से बाहर करके ताला लगा दिया था। पुलिस ने माता-पिता और मेरी एक और सगी बड़ी बहन के बयान नहीं लिए। जलते हुए कोई कैसे फोन कर सकता है? अनुराग कहते हैं दीदी के पड़ोसी राजीव दुबे का बयान था कि सरला का मेरे घर फोन आया था कि मैं जल रही हूं। आप आकर मुझे बचाओ। उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास से राजीव दुबे और योगीराज शर्मा को फोन पहुंचता है कि सरला मिश्रा का इलाज कराओ। ये दोनों दो घंटे तक उनको लेकर बैठे रहे। अस्पताल लेकर क्यों नहीं गए? डॉ. योगीराज शर्मा का पुलिस रिकॉर्ड में बयान है कि जब मैं घटना वाले घर पहुंचा तो मकान धुला और पोछा हुआ था। उसकी पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। लैंडलाइन फोन की जांच और जब्ती क्यों नहीं की अनुराग मिश्रा ने कहा- बहन के लैंडलाइन की कॉल डिटेल, वह फोन जब्त क्यों नहीं किया? डॉ. सत्पथी ने सारी बातें लिख दीं लेकिन, टेलीफोन का जिक्र ही नहीं किया। पुलिस डायरी में जैसा लिखा कि तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर डॉ. सत्पथी घटना की फोरेंसिक जांच के लिए पहुंच गए थे। ये क्यों नहीं बताया कि मौखिक आदेश में क्या कहा गया था। क्या रिपोर्ट बनाना है? बेड पर मिले कागज की जांच क्यों नहीं की भाई का आरोप है कि घटना के बाद हर्ष शर्मा पहुंचे थे उन्होंने अभिमत दिया था कि सरला मिश्रा के बेड पर एक कागज मिला था। उसकी राइटिंग की जांच इसलिए नहीं की क्योंकि मृत्यु पूर्व बयानों में हस्ताक्षर अलग हो जाते। इसलिए पुलिस ने उनके अभिमत को भी नहीं माना। उस समय विधानसभा सत्र में भाजपा के विधायकों ने इस मामले को उठाया था और सीबीआई जांच की मांग की। उसके बाद हम हाईकोर्ट भी गए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में एक रिट याचिका … Read more

प्रियांक खड़गे ने केंद्र सरकार की नीयत और कार्रवाई पर खड़े किए सवाल, चुनाव के समय गांधी परिवार पर क‍िया जाता है हमला

बेंगलुरु नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 9 अप्रैल को दाखिल चार्जशीट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला। चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के नाम शामिल हैं, जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत दायर किया गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने केंद्र सरकार की नीयत और कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। खड़गे ने कहा कि असली मनी लॉन्ड्रिंग तो चुनावी बॉन्ड्स के जरिए हो रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जब भी बीजेपी के सामने कोई राजनीतिक संकट आता है या फिर उत्तर भारत में कोई चुनाव होता है, तो गांधी परिवार को निशाना बनाया जाता है। कभी रॉबर्ट वाड्रा को घसीटा जाता है, कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ पुराने मामलों को फिर से उछाला जाता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इन मामलों में अब तक क्या साबित हुआ है? पैसा कहां से आया, किस देश में गया, कौन सी एजेंसियां इस काम में शामिल थीं। इन सब बातों का कोई सबूत सरकार ने सार्वजनिक क्यों नहीं किया? प्रियांक खड़गे ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप भाजपा और उससे जुड़ी संस्थाओं पर लगाते हुए कहा कि भाजपा को आखिर 5000 करोड़ रुपये का चंदा कैसे मिला? आरएसएस देशभर में 600 से अधिक जिला कार्यालय बना रहा है और उसका नया हाईटेक कार्यालय 150 करोड़ रुपये में कैसे बना? इसके साथ ही भाजपा को स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के दान की ऑडिट की भी उन्होंने मांग की। उन्होंने कहा कि यह सब केवल एक राजनीतिक हथकंडा है, ताक‍ि मोदी सरकार अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान भटका सके। खड़गे ने कहा कि गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया है और कांग्रेस के लोग सैकड़ों बार जेल गए हैं। हम इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। यह एक मनगढ़ंत मामला है, जो न्यायपालिका में टिक नहीं पाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत में इस मामले की सुनवाई में न्यायपालिका सरकार की असंवैधानिक नीतियों और योजनाओं को पहचान कर सही निर्णय लेगा।

पार्टी कार्यकर्ता भले ही हतोत्साहित, लेकिन केवल उनकी पार्टी ही आरएसएस और भाजपा को हरा सकती है: राहुल गांधी

अहमदाबाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ता भले ही हतोत्साहित दिख रहे हैं, लेकिन केवल उनकी पार्टी ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा को हरा सकती है। गांधी ने अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सीनियर नेता बने घूम रहे हैं, लेकिन कई बूथ नहीं जितवा पाते। कई ऐसे भी लोग हैं, जो बीजेपी के साथ मिले हुए हैं, उनको हमें पहचान कर प्यार से परे करना है। हिंसा से नहीं, नफरत से नहीं, प्यार से। उनसे कहना है कि- भैया.. साइड हो जाइए, दूसरों को आगे जाने दीजिए। एक सप्ताह में गुजरात की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद ने राज्य में संगठन को नया रूप देने के लिए रोडमैप पेश किया और पार्टी के उन नेताओं को हटाने का वादा किया जो या तो निष्क्रिय हैं या भाजपा के लिए काम करते हैं। राहुल गांधी ने कहा, ”बैठक में एक अच्छी बात मुझसे कही गई कि अलग-अलग सीनियर नेता आते हैं तो जादू से हर जिले में लोग दो-तीन दिन के लिए बाहर आ जाते हैं और फिर जाने पर वापस गायब हो जाते हैं। लेकिन इनके पास कोई पकड़ नहीं होती।” राहुल ने सवाल उठाते हुए कहा कि सीनियर नेता बने घूम रहे हैं, लेकिन बूथ नहीं जिता पाते। हम उन लोगों को ताकत देना चाहते हैं, जिनकी पकड़ बूथ से है और लोकल हैं। जो जनता की समस्याओं को उठाते हैं, उन्हें हम ताकत देना और आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा, ”गुजरात में आप कांग्रेस के लिए लड़ते हो, मैं समझता हूं यह आसान नहीं है। शायद पूरे देश में आपको सबसे ज्यादा सहना पड़ता है। आप धमकियां खाते हैं, लाठी खाते हैं, लेकिन कांग्रेस का झंडा नहीं छोड़ते हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि जहां भी जरूरत होगी मेरी, मैं वहां हाजिर होऊंगा। नई जेनरेशन को हमें कांग्रेस पार्टी में लाना है। जो जनता से जुड़े लोग हैं, उन्हें आगे बढ़ाना है।” गुजरात में 2027 के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। एक एआईसीसी पर्यवेक्षक और चार राज्य पर्यवेक्षकों समेत पांच सदस्यों वाली एक समिति गुजरात में पार्टी की 41 जिला इकाइयों (आठ शहरों समेत) में से प्रत्येक के लिए नए प्रमुखों की नियुक्ति की प्रक्रिया की देखरेख करेगी, जिसकी शुरुआत अरवल्ली जिले से होगी। अपने संबोधन में गांधी ने कार्यकर्ताओं से कई वादे किए जैसे कि जिला इकाइयों को अधिक शक्ति एवं धन उपलब्ध कराना, वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का आकलन करना, जमीनी स्तर पर सक्रिय पदाधिकारियों को बढ़ावा देना और उन नेताओं को हटाना जो या तो निष्क्रिय हैं या भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राज्य की स्थिति पर चिंता जताई, दावा किया कि ममता सरकार के दिन गिने-चुने रह गए

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने राज्य में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा, वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध और दंगों को लेकर ममता बनर्जी पर वोट बैंक की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की स्थिति पर चिंता जताई और दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति के कारण कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है। वक्फ कानून, सांप्रदायिक हिंसा और प्रशासन की निष्क्रियता जैसे मुद्दों पर भाजपा ने ममता बनर्जी को कटघरे में खड़ा किया है और आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव होने का संकेत भी दिया है। हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना: भाजपा रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हालिया घटनाएं यह साबित करती हैं कि वहां हिंदू समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के संरक्षण में दंगाइयों को खुली छूट दी गई है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने खास तौर पर मुर्शिदाबाद जिले का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के बाद हिंसा भड़क उठी और कई लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा। पुलिस पर गंभीर आरोप भाजपा नेता ने राज्य पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन की नाक के नीचे दंगाई खुलेआम हिंसा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की राजनीतिक मंशा के कारण पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है। “क्या ममता बनर्जी की सरकार मानवीय मूल्यों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो गई है?” – यह सवाल रविशंकर प्रसाद ने सीधा मुख्यमंत्री से किया।   कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश और केंद्रीय बलों की तैनाती प्रसाद ने कहा कि राज्य के पीड़ितों को इस बात का डर है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर अस्थायी रूप से तैनात किए गए केंद्रीय बलों के हटने के बाद दंगाई दोबारा हमला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य में कानून-व्यवस्था की बदतर स्थिति को दर्शाती है और यह ममता सरकार की विफलता है। “वोट बैंक के लिए कितनी नीचे गिरेंगी ममता?” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी केवल अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण की नीति अपना रही हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नारे “मां, माटी, मानुष” पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब सरकार को न तो मां की चिंता है, न माटी की और न ही आम मानुष की।   वक्फ कानून पर भाजपा का सवाल रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी द्वारा वक्फ (संशोधन) अधिनियम को राज्य में लागू न करने की घोषणा पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या ममता बनर्जी को इस बात से परेशानी है कि इस कानून से मुस्लिम समाज के पसमांदा तबके और महिलाओं को अधिकार मिलने वाले हैं? उन्होंने कहा कि यह कानून धार्मिक संपत्तियों की पारदर्शी व्यवस्था और हकदारों को न्याय दिलाने के लिए लाया गया है, लेकिन ममता बनर्जी इसे भी राजनीति की भेंट चढ़ा रही हैं। “ममता सरकार के दिन गिने-चुने हैं” प्रसाद ने अपने बयान के अंत में कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब ममता सरकार से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है और परिवर्तन की मांग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि “ममता बनर्जी सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं और भाजपा राज्य में लोकतंत्र, कानून और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

नरेन्द्र मोदी जी, आपकी निरंकुश सरकार अपने पाप पर पर्दा डालने के लिए कांग्रेस को निशाना बनाने पर तुली हुई: खरगे

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली ‘‘निरंकुश सरकार” अपने ‘‘पाप” पर पर्दा डालने के लिए उनकी पार्टी को निशाना बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस डरने वाली नहीं है और वह सरकार की नाकामियों को उजागर करती रहेगी। खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी, आपकी निरंकुश सरकार अपने पाप पर पर्दा डालने के लिए कांग्रेस को निशाना बनाने पर तुली हुई है। भाजपा का आर्थिक कुप्रबंधन नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। हताशा बढ़ती जा रही है, कोई दृष्टि नहीं, कोई समाधान नहीं, केवल ध्यान भटकाना।” उन्होंने दावा किया कि व्यापार घाटा तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और ‘टैरिफ’ एवं व्यापार युद्ध पर कोई स्पष्टता नहीं दिख रही है तथा केवल खोखले शब्द और निरर्थक मुलाकातें हो रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा, ‘‘90 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। 80 प्रतिशत से अधिक लोगों का कहना है कि उनका खर्च बढ़ गया, भले ही आय में वृद्धि नहीं हुई।” खरगे ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में एफएमसीजी कंपनियों की राजस्व वृद्धि धीमी होकर केवल पांच प्रतिशत रह गई है। उन्होंने दावा किया, ‘‘मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ईंधन पर कर/शुल्क के रूप में (दिसंबर, 2024 तक) 39 लाख करोड़ रुपये का भारी संग्रह किया। रसोई गैस की कीमतें 50 रुपये तक बढ़ाई गईं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी कोई राहत नहीं मिली।” उन्होंने कहा कि स्नातक बेरोजगारी दर 13 प्रतिशत और युवा बेरोजगारी दर 10.2 प्रतिशत है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 23 आईआईटी में से 22 और 25 आईआईआईटी में से 23 में प्लेसमेंट में गिरावट देखी गई और एनआईटी में प्लेसमेंट में 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। खरगे ने दावा किया, ‘‘एफडीआई में गिरावट से भारत को नुकसान हुआ है। अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक भारत में शुद्ध एफडीआई केवल 1.4 अरब डॉलर से कम थी, जबकि अप्रैल से जनवरी 2012-13 तक यह 19 अरब डॉलर थी।” उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए लोग भाजपा को माफ नहीं करेंगे। हम डरेंगे नहीं। हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे और आपकी नाकामियों को उजागर करते रहेंगे।” 

गैरकानूनी तरीके से षडयंत्र करके सोनिया, राहुल ने नेशनल हेराल्ड की प्रोपर्टीज पर कब्जा क्यों किया : वीडी शर्मा

भोपाल नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम आने से कांग्रेस भड़क गई है, इसे लेकर आज कांग्रेस पूरे देश में प्रदर्शन कर रही है और ईडी दफ्तरों का घेराव कर रही है, उधर कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा हमलावर है , मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया है पूरे देश में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है, बड़े नेता सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक भाजपा और मोदी सरकार पर हमलावर हैं, मध्य प्रदेश कांग्रेस के नताओं के निशाने पर भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है, कमाल्नात्थ, दिग्विजय सिंह,जीतू पटवारी सहित अन्य वरिष्ठ नेता इसे बदले की भावना से की जा रही कार्यवाही कह रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं उधर भाजपा ने भी इसका जवाब दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने आज इसी मुद्दे पर मीडिया से बात की उन्होंने कहा, यह देश किसी एक पार्टी की जागीर नहीं है और न ही सोनिया गांधी या राहुल गांधी कानून से ऊपर हैं। कांग्रेस ने भ्रष्टाचार किया, शेयर की हेराफेरी की और फिर संपत्ति बनाई। गैरकानूनी तरीके से षडयंत्र करके सोनिया, राहुल ने प्रोपर्टीज पर कब्जा क्यों किया है, ये बताया जाये? सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट से भी नहीं मिली है राहत वीडी शर्मा ने कहा सोनिया गांधी, राहुल गांधी जमानत पर हैं, इन्होंने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन इन्हें वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। नेशनल हेराल्ड 1937 में शुरू हुआ जिसमें 5000 शेयर होल्डर्स थे, ये नेहरू खानदान की तब जागीर नहीं थी, इसमें तब बड़े बड़े लोगो ने सहयोग किया। 2008 में नेशनल हेराल्ड बंद हो गया, उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ रुपये फंड इस अखबार को दिया, जिसके बाद नेशनल हेराल्ड ने लोन देने से मना कर दिया, फिर कॉरपोरेट षड्यंत्र करके यंग इंडिया के नाम की कंपनी बनाई गई जिसमें 38-38 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी-राहुल गांधी के थे। हम कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार की भर्त्सना करते हैं भाजपा अध्यक्ष ने कहा जो अखबार आजादी के आंदोलन में लड़ने वाले लोगों की आवाज को मजबूत करने का अखबार था उसको इन लोगों ने अपने प्राइवेट व्यापार में बदल दिया, ATM बना दिया। हम कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार की भर्त्सना करते हैं और ED को जो धमकाने की बात की जा रही है वह दुर्भाग्यपूर्ण है यह देश की कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है, इसे हम उचित नहीं मानते। धरना देने से ED दबाव में नहीं आएगी वीडी शर्मा बोले-  आपने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कहा था हमें फंसाया जा रहा है हाई कोर्ट ने आपकी बात मानी क्या, सुप्रीम कोर्ट ने मानी क्या? प्रदर्शन करने के अधिकार को मैं चुनौती नहीं दूंगा, लेकिन प्रदर्शन किस बात के लिए?प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की सरकार में एजेंसियों को ईमानदारी से काम करने की छूट है और काम होगा। धरना देने से ED दबाव में नहीं आएगी और आनी भी नहीं चाहिए।

ईडी ने राहुल-सोनिया गांधी और सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, 25 अप्रैल को सुनवाई

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी और ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दायर ईडी के आरोपपत्र में सुमन दुबे और अन्य के नाम भी शामिल हैं। अदालत ने मामले में संज्ञान पर बहस के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले ईडी ने इस मामले से जुड़ी संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। राज्यसभा सांसद एवं दिग्गज कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे बदले की राजनीति बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्ति जब्त करना कानून के शासन का मुखौटा पहनकर सरकार प्रायोजित अपराध है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा बदले की राजनीति और धमकी के अलावा कुछ नहीं है। कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप नहीं रहेगा।” राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “मोदी सरकार की एजेंसी ईडी द्वारा कांग्रेस पार्टी और नेशनल हेराल्ड की 661 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कब्जे में लेने की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है। भाजपा सरकार की मंशा है कि ऐसे प्रयासों से वह धीरे-धीरे कांग्रेस को आर्थिक रूप से अक्षम बना दे। लोकसभा चुनाव से पहले आयकर विभाग के जरिए कांग्रेस के बैंक खातों को सील कर ऐसा प्रयास किया गया था। पहले आईटी और अब ईडी की यह कार्रवाई निंदनीय है।” उन्होंने लिखा, “नेशनल हेराल्ड केस को अब पांच साल से भी अधिक का समय हो गया है। ईडी कांग्रेस के खिलाफ तो गैर-कानूनी रूप से कार्रवाई कर रही है, वहीं भाजपा को मिले इलेक्टोरल बॉन्ड्स में साफ तौर पर कंपनियों से अवैध वसूली के सबूत मिले, परंतु ईडी ने किसी भाजपा नेता को एक नोटिस तक नहीं दिया। इसी प्रकार रॉबर्ट वाड्रा को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाकर मीडिया ट्रायल किया जा रहा है। कांग्रेस एक जन आंदोलन की पार्टी है। ऐसी कार्रवाइयों से भाजपा सरकार और ईडी हमारे मनोबल को नहीं तोड़ सकती।” उल्लेखनीय है कि नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इस समाचार पत्र को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था। वर्ष 2008 में वित्तीय संकट के बाद इसे बंद करना पड़ा, जहां से इस विवाद की शुरुआत हुई। साल 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) नाम की कंपनी बनी, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में आरोप लगाया कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एजेएल की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपए में हासिल किया और उन्होंने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया। मामला अदालत में भी गया और बाद में ईडी ने इसकी जांच शुरू की।

भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा- पश्चिम बंगाल में हालात ठीक नहीं, हिंदु पलायन के लिए मजबूर

पुरुलिया पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मालदा और मुर्शिदाबाद के बाद अब दक्षिण 24 परगना जिले में हिंसा देखने को मिली है। पुरुलिया से भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने दक्षिण 24 परगना जिले में हुई हिंसा को लेकर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हालात ठीक नहीं हैं। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “देखिए, भाजपा कई दिनों से कह रही है कि पश्चिम बंगाल में हालात ठीक नहीं हैं। यहां जम्मू-कश्मीर जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जिस तरह से 1990 में कश्मीर में हिंदुओं को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था, उसी तरह मुर्शिदाबाद, मालदा, नदिया और दक्षिण 24 परगना में भी हो रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने पश्चिम बंगाल के हालात के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। मैंने उनसे गुहार लगाई है कि सेंट्रल फोर्स की तैनाती की जाए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को ग्रेटर बांग्लादेश बनाने की योजना बना रही हैं। आप देखेंगे कि हिंसक घटनाएं धीरे-धीरे पुरुलिया तक पहुंच जाएंगी। ममता बनर्जी सिर्फ वोट बैंक के लिए हिंदुओं की मौत की साजिश रच रही हैं। ऐसा करने से नहीं रोका गया तो बंगाल नहीं बचेगा।” उल्लेखनीय है कि संसद से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित होने के बाद मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जो बाद में हिंसक हो गए। बड़ी संख्या में हिंदू वहां से पलायन कर रहे हैं। इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट की एक विशेष डिवीजन बेंच के निर्देश के बाद मुर्शिदाबाद जिले में भड़की हिंसा के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को तैनात किया गया है। कोर्ट ने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल के दिनों में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक अशांति को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय पर्याप्त नहीं थे। बेंच ने यह भी कहा कि अगर पहले सीएपीएफ तैनात किया गया होता, तो स्थिति इतनी गंभीर और अस्थिर नहीं होती।

राज्य के लोग अपने मौलिक अधिकारों के लिए केंद्र से लड़ रहे हैं, हम अपने भाषाई अधिकार की रक्षा कर रहे हैं: स्टालिन

तमिलनाडु राज्यपाल से तनातनी के बीच तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य को स्वायत्त बनाने का प्रस्ताव पेश कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए 75 साल पूरे हो गए हैं। हमारे देश में अलग-अलग भाषा, जाति और संस्कृति के लोग रहते हैं। हम सब मिलजुलकर रहते हैं। डॉ. आंबेडकर ने देश की राजनीति और प्रशासन की प्रणाली को इस तरह बनाया कि सभी के हितों की रक्षा की जा सके। स्टालिन ने कहा कि एक-एक कर राज्यों के अधिकार छीने जा रहे हैं। वहीं राज्य के लोग अपने मौलिक अधिकारों के लिए केंद्र से लड़ रहे हैं। हम किसी तरह अपने भाषाई अधिकार की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में राज्य तभी विका कर सकते हैं तो उनके पास सभी शक्तियां हों। एमके स्टालिन ने कहा कि स्वायत्ता की सिफारिश करने के लिए बनाई जाने वाली कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ करेंगे। इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक वरदान शेट्टी और नागराजन इस कमेटी में शामिल होंगे। कमेटी को जनवरी 2026 तक का समय दिया गया है। इस समय सीमा में कमेटी को अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। वहीं अंतिम रिपोर्ट 2028 तक सौंपनी है। एमके स्टालिन ने विधानसभा में केंद्र सरकार पर नीट को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य खराब करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि किसी की भाषाई स्वतंत्रता बहुत जरूरी है। वहीं नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा नीति के जरिए केंद्र सरकार तमिलनाडु के लोगों पर हिंदी थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू करने से इनकार करने पर केंद्र ने राज्य का 2500 करोड़ का फंड ही रोक दिया।

तेजस्वी यादव पहुंचे दिल्ली, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से कई मुद्दों पर हो रही बातचीत

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर बैठकों का दौर जारी है। तीन दिन पहले पटना में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक हुई। सोमवार को दरभंगा में एनडीए के सभी प्रमुख नेता एकजुट हुए थे। आज दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच बैठक हो रही है। इसमें सीट शेयरिंग समेत कई मुद्दों पर बातचीत हो रही। नेता प्रतिपक्ष और लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से बातचीत कर रहे हैं। तेजस्वी यादव के साथ राजद के वरीय नेता भी मौजूद हैं। सीट बंटवारा समेत कई मुद्दों पर बात राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन पूरी तरह तैयार है। आगामी चुनाव में सीट शेयरिंग समेत कई मुद्दों पर आज की बैठक में चर्चा हो रही है। यह महज एक औपचारिक बैठक है। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच संबंध काफी लंबे समय से हैं। अब चुनाव में करीब छह-सात महीने का समय रह गया है। सूत्र बता रहे हैं कि कांग्रेस इस बार भी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। वामदल भी अपने स्ट्राइक रेट को देखते हुए अधिक सीटों की मांग कर रहा है। और, राजद किसी भी हाल में 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहता है। इसका कारण यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार में राजद के टिकट पर सबसे ज्यादा विधायक जीते थे। सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर आने वाले समय में कोई विवाद न हो, इसलिए राजद आज ही इस मुद्दे पर बात करेगा। क्योंकि राजद पहले ही तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर चुका है। कांग्रेस के तेवर इस बार अलग कांग्रेस का अंदाज इस बार काफी बदला सा लग रहा है। हाल में ही कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया। सवर्ण समाज से आने से वाले अखिलेश सिंह की जगह बिहार की कमान दलित समाज के राजेश कुमार को सौंप दी। कई जिलाध्यक्ष बदल दिए। इसके बाद कन्हैया कुमार ने नेतृत्व में पदयात्रा निकाली। राहुल गांधी भी इसमें शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस का रोल भी बता दिया। इतना ही नहीं अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में जाकर मेहनत करने का निर्देश भी दिया। इन सब बातों से स्पष्ट है कि कांग्रेस बिहार में फिर से बेहतर पोजीशन चाहती है।

भाजपा ने बाबा साहब के विचारों का कभी पालन नहीं किया- दिग्विजय सिहं

इंदौर कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अंबेडकर जयंती पर इंदौर पहुंचे। जहां उन्होंने मीडिया से चर्चा की और कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। दिग्विजय सिंह ने वक्फ बिल के विरोध में पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं गद्दार पोस्टर को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। वहीं बाबा साहेब अंबेडकर जयंती मनाने पर भाजपा को निशाने पर लिया। पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए बीजेपी जिम्मेदार दिग्विजय सिंह ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए बीजेपी और संघ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ऐसे कुछ संगठन जो नफरत फैलाते हैं जो दंगे फसाद करवाते हैं। उन्हें क्यों इजाजत दी जाती है, जुलूस के रूप में डीजे लगाकर मस्जिद के सामने से निकलने की। ऐसे संगठन को प्रशासन मंजूरी क्यों देता है। डबल इंजन सरकार की मानसिकता है नफरत फैलाकर दंगे करवाकर राजनीतिक रोटी सेकना। भाजपा और संघ का धर्म से कोई लेना देना नहीं है। नफरत फैलाकर दंगे फसाद करवाकर उसके आधार पर राजनीति रोटी सेकना बीजेपी और संघ का असली धर्म है। भाजपा ने बाबा साहब के विचारों का कभी पालन नहीं किया- दिग्विजय सिहं दिग्विजय सिंह ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर मीडिया से की चर्चा करते हुए कहा कि मुझे इस बात की प्रशंसा है बीजेपी और संघ आज बाबा साहब आंबेडकर को सम्मान के नजरों से देख रहे हैं। संघ ने तिरंगा जलाया संविधान का विरोध किया। हमेशा बीजेपी ने नफरत के अंदाज में राजनीति की है। बाबा साहब के विचारों का पालन बीजेपी ने कभी नहीं किया। दलितों की जमीन दबंग छीन रहे हैं, बीजेपी मौन है।

मुर्शिदाबाद और मालदा में हालात खराब, ममता सरकार पूरी तरह से फेल : भाजपा नेता अजय आलोक

नई दिल्ली कलकत्ता हाई कोर्ट की एक विशेष डिवीजन बेंच ने मुर्शिदाबाद जिले में भड़की हिंसा के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया है। इस मुद्दे पर भाजपा नेता अजय आलोक ने कहा कि बंगाल में पलायन शुरू हो चुका है और हिंदुओं पर हमले भी हो रहे हैं। भाजपा नेता अजय आलोक ने मिडिया से बातचीत में कहा, “बंगाल की हालत बहुत चिंताजनक है। मुझे लगता है कि बंगाल के हिंदू ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे हुए हैं, जो फटने को तैयार है और रुक-रुक कर फट भी रहा है। पलायन शुरू हो गया है और हिंदुओं पर हमले भी हो रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “1947 में जिस तरीके की हिंसा हुई थी, उस तरीके की एक बार फिर से हिंसा हो रही है और वह दिन याद आ रहे हैं। मुर्शिदाबाद और मालदा में भी कुछ वैसे ही हालात हैं। हालांकि, राज्य सरकार आंख मूंदकर इन सारी घटनाओं को देख रही है और इस्लामी जिहादियों को सरपरस्ती दे रही है, जिससे उनका मनोबल और भी बढ़ रहा है। पुलिस वालों को मारा जा रहा है और कुछ पुलिसकर्मी तो आईसीयू में भर्ती हैं। वहां हालात इतने खराब हो गए हैं कि पुलिस से स्थिति कंट्रोल नहीं हो रही है तो बीएसएफ बुलाई गई है। इस पूरे मामले को केंद्र सरकार से लेकर हाई कोर्ट तक देख रहा है। मैं अपील करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट भी बंगाल की स्थिति का संज्ञान लें। क्या हम एक और विभाजन की इजाजत दे सकते हैं? कानून व्यवस्था के मुद्दे पर ममता सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है।” शनिवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक विशेष डिवीजन बेंच ने मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल के दिनों में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक अशांति को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय पर्याप्त नहीं थे। बेंच ने यह भी कहा कि अगर पहले सीएपीएफ तैनात किया गया होता, तो स्थिति इतनी गंभीर और अस्थिर नहीं होती। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “केंद्रीय सशस्त्र बलों की पहले तैनाती से स्थिति को कम किया जा सकता था, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि समय पर पर्याप्त उपाय नहीं किए गए।” खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिति गंभीर और अस्थिर है। बेंच ने अपराधियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और निर्दोष नागरिकों पर हुए अत्याचारों को रोकने की जरूरत पर बल दिया।

यमुनानगर के 2 बड़े नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष ने निलंबित करने के आदेश जारी किए थे, कांग्रेस हाईकमान ने पलटा आदेश

चंडीगढ़ कांग्रेस हाईकमान के आदेशों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान का एक और आदेश निरस्त कर दिया गया है। दरअसल, 2 मार्च को यमुनानगर के 2 बड़े नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष ने निलंबित करने के आदेश जारी किए थे। इन नेताओं पर निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। अब फिर से प्रदेश अध्यक्ष ने एक और पत्र जारी किया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष की ओर से लिखा गया है कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और हरियाणा में पार्टी मामलों के प्रभारी द्वारा मामले पर पुनर्विचार करने के परिणामस्वरूप, पार्टी से दो नेताओं के निष्कासन के संबंध में दिनांक 2 मार्च, 2025 के कार्यालय आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है। जिन नेताओं का निलंबन रद्द हुआ है उनमें यमुनानगर के पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा और अनिल गोयल का नाम शामिल है। लैटर की कॉपी हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान की ओर से सांसद और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, हरियाणा कांग्रेस प्रभारी बी. के. हरिप्रसाद और यह प्रभारी जितेंद्र बघेल और प्रफुल्ल विनोदराव गुडाधे को भी भेजी गई है। बताया गया कि निलंबन के दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष शर्मा ने दावा किया था कि वे पार्टी के सब्वे सिपाही हैं और उन्होंने पार्टी विरोधी किसी भी गतिविधि में भाग नहीं लिया है। उन्होंने कहा, मैंने हमेशा कांग्रेस पार्टी के लिए ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया है। भविष्य में भी मैं अपनी पार्टी के खिलाफ नहीं जा सकता। मैं अपना पक्ष रखने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलूंगा। वहीं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि यमुनानगर के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष अनिल गोयल तथा राकेश शर्मा काका को किसी की पसंद न पसंद के आधार पर पार्टी से नहीं निकाला जा सकता है। नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी अध्यक्ष द्वारा इन दोनों नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया था और इसी के विरोध में कुमारी शैलजा ने राष्ट्रीय महामंत्री से बात की। शैलजा ने कहा कि राकेश शर्मा तथा अनिल गोयल पहले भी पार्टी में थे और अभी पार्टी में है और पार्टी में ही रहेंगे। शैलजा के इस बयान के लगभग 2 घंटे बाद कांग्रेस हाई कमान द्वारा एक पत्र जारी करके दोनों नेताओं की वापस पार्टी में ले लिया है।

बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच अहम मंत्रालयों को लेकर खींचतान चल रही है, शाह ने खुद संभाला मोर्चा

मुंबई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे के दौरान एनसीपी के वरिष्ठ सांसद और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के निवास पर दोपहर का भोजन किया। इस मुलाकात ने प्रदेश की राजनीतिक हलचलों को एक नई दिशा दे दी है, खासकर जब बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच अहम मंत्रालयों को लेकर खींचतान चल रही है। यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब रायगढ़ और नाशिक जिलों में संरक्षक मंत्री (Guardian Minister) पद को लेकर सहयोगी दलों में तनाव बना हुआ है। इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाशिक और रायगढ़ के लिए बीजेपी के गिरीश महाजन और एनसीपी की अदिति तटकरे (सुनील तटकरे की बेटी) को संरक्षक मंत्री नियुक्त किया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह आदेश रद्द कर दिए गए। जिले पर दावेदारी शिवसेना का दावा है कि रायगढ़ जिले में उसके विधायक अधिक हैं, इसलिए उसे वहां संरक्षक मंत्री पद मिलना चाहिए। साथ ही, पार्टी नाशिक के लिए भी अपने प्रतिनिधि की मांग कर रही है। दूसरी ओर, एनसीपी अपने पक्ष पर कायम है, जिससे गठबंधन के भीतर शक्ति संघर्ष की स्थिति बन गई है। शाह की चुपचाप राजनीतिक चाल? सुनील तटकरे के घर अमित शाह का भोजन केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है, बल्कि गठबंधन की अंदरूनी राजनीति को सुलझाने या नए समीकरण बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे समय पर शाह की यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि बीजेपी संभावित असंतुलन को संतुलित करने की कोशिश में जुटी है।

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