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राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग की समीक्षा बैठक, राजस्थान फार्मर रजिस्ट्री में देश में अव्वल : राजस्व मंत्री

जयपुर, राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमन्त मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में फार्मर रजिस्ट्री में पीएम किसान के 81 प्रतिशत पात्र लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन कर राजस्थान ने देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने  विभागीय अधिकारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सफल प्रयासों का ही परिणाम है कि फार्मर रजिस्ट्री में प्रदेश के 73 लाख से अधिक किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाबद्ध रूप से कार्य कर फार्मर रजिस्ट्री के शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने के निर्देश दिए। मीणा बुधवार को शासन सचिवालय में वीसी के माध्यम से राजस्व तथा उपनिवेशन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को सीमाज्ञान, आपसी सहमति से बंटवारा, भू-रूपांतरण के लंबित प्रकरणों की प्रभावी मॉनिटरिंग कर त्वरित निस्तारण करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सीमाज्ञान के लिए संचालित ई-धरती पोर्टल में आवश्यक संशोधन कर इसे और अधिक बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करें। राजस्व मंत्री ने कहा कि राजस्व से संबंधित लंबित प्रकरणों का व्यवस्थित और समयबद्ध निस्तारण कर अधिकारी जीरो पेंडेंसी पर कार्य करना सुनिश्चित करें। बैठक में मीणा ने राजस्व मंडल एवं अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों, संभागीय आयुक्त न्यायालयों, जिला कलक्टर न्यायालयों के लंबित वादों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि 10 से अधिक वर्षों से लंबित राजस्व वादों का प्रत्येक न्यायालय चिन्हित कर प्राथमिकता से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। मीणा ने कहा कि राइजिंग राजस्थान में किए गए एमओयू प्रदेश के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने समस्त जिला कलेक्टर्स को राजनिवेश पोर्टल के माध्यम से राइजिंग राजस्थान के भू-आवंटन, नामांतरण दर्ज करने, संपरिवर्तन आदि प्रकरणों की जांच कर गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने उपनिवेशन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की भी समीक्षा की। प्रमुख शासन सचिव, राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग श्री दिनेश कुमार ने कहा कि प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री में रजिस्ट्रेशन के लिए जिला कलेक्टर पटवार मंडल स्तरों पर डोर-टू-डोर रजिस्ट्रेशन चालू रखें, जिससे फार्मर रजिस्ट्री के शत प्रतिशत लक्ष्य को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को भू रूपांतरण के प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश प्रदान किए। बैठक में राजस्व मंडल अध्यक्ष हेमन्त कुमार गेरा ने मंडल द्वारा किये गए नवाचारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राजस्व मंडल में प्रतिदिन 15 सबसे पुराने मामलों की सुनवाई अनिवार्य की गई है। इसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। मंडल अध्यक्ष ने बताया कि न्यायिक कार्य के लिए दो पारियों की शुरुआत की गई है, इससे राजस्व न्यायालयों की कार्यकुशलता तथा राजस्व प्रकरणों के निस्तारण प्रतिशत में सकारात्मक वृद्धि हुई है। साथ ही, विचाराधीन वाद जिसमें सरकार पक्षकार है, इनका प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। बैठक में समस्त संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स एवं आयुक्त, उपनिवेशन वीसी के माध्यम से तथा निबंधक, राजस्व मंडल, भू प्रबन्ध आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उदयपुर पुलिस ने लूट करने वाले चार आरोपी को किया गिरफ्तार

उदयपुर उदयपुर पुलिस ने मोबाइल और नकदी लूटने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और दो विधि से संघर्षरत बाल अपचारियों को निरुद्ध किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों ने 45 से अधिक वारदातें करने की बात स्वीकार की है। उनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं। पुलिस कार्रवाई और जांच पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल के निर्देशानुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और वृत्ताधिकारी सूर्यवीर सिंह राठौड़ के सुपरविजन में थानाधिकारी दिलीप सिंह झाला के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। पुलिस ने घटनास्थलों के आसपास 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले और पूर्व में अपराधों में शामिल अभियुक्तों पर नजर रखी। इस दौरान आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अपराधियों का खुलासा गिरफ्तार अभियुक्तों में राहुल मीणा, प्रभु मीणा, अनिल मीणा और रोशन मीणा शामिल हैं, जबकि दो अन्य नाबालिग हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने 45 से अधिक मोबाइल लूट की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूली। लूट के बाद वे मोबाइल को सस्ते दामों पर बेचकर उस पैसे से मौज-मस्ती और नशा करते थे। प्रमुख घटनाएं     11 जनवरी 2025: खरपीणा पुलिया के पास एक व्यक्ति से चाकू व तलवार दिखाकर नगदी लूटी गई।     19 मार्च 2025: सेक्टर 14 में एक महिला की बेटी से मोबाइल छीनकर बदमाश फरार हो गए।     23 मार्च 2025: मिराज मोर्निंग रोड पर एक युवक से मोबाइल लूटा गया।     18 मार्च 2025: परसाद कस्बे में एक दुकानदार से चाकू की नोक पर मोबाइल और नगदी लूटी गई।     4 मार्च 2025: लक्ष्मी मंदिर के पास दिल्ली निवासी एक व्यक्ति से झपट्टा मारकर मोबाइल छीना गया।     20 मार्च 2025: उम्मेद विला होटल के पास राहगीर से मोबाइल लूटा गया।  

ये बिल अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए लाया गया : पूर्व सीएम गहलोत

जयपुर वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हो गया। 288 सांसदों ने पक्ष में तो 232 ने विपक्ष में वोट डाला। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे पेश किया था। किरेन रिजिजू ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है। इसे लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर है। इसी कड़ी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, शेयर बाजार में गिरावट और रुपये के अवमूल्यन जैसे अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार अल्पसंख्यक समुदाय को निशाने पर लेने वाले कानून बनाए जा रहे हैं।     ऐसा लगता है कि भारत सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शेयर मार्केट में चल रही गिरावट, रुपये के अवमूल्यन जैसे जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार अल्पसंख्यक वर्ग को निशाने पर लेने वाले कानून बनाती है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दौरान भी ऐसा देखा गया। उन्होंने कहा, “यह कानून 2020 में बना, लेकिन इसके नियम 2024 में बनाए गए। फिर भी, राजनीतिक लाभ लेने के लिए इसे बार-बार उछाला गया और देश में तनाव पैदा किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने वक्फ को लेकर बनाए गए नए कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन इसे बहुसंख्यक समुदाय का ध्यान जरूरी मुद्दों से हटाने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए लाया गया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह कानून दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा करने का एक माध्यम बन सकता है।  

आसाराम को फिलहाल राहत नहीं, अटक गया रोड़ा, तरिम जमानत बढ़ाने को लेकर दायर याचिका पर हुई सुनवाई, लगा झटका

जोधपुर यौन उत्पीड़न के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। उनकी अंतरिम जमानत बढ़ाने को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई, लेकिन मामला अधूरा रह गया। अब इस पर अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी। इधर, बीते मंगलवार को अंतरिम जमानत अवधि खत्म होने के बाद दोपहर में आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया था। यहां करीब 10 घंटे रुकने के बाद रात 11:30 बजे पाली रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल (आरोग्यम) में शिफ्ट किया गया था। बताया जा रहा है कि आसाराम की तबियत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया है। कोर्ट में पीड़िता ने जताई आपत्ति दरअसल, हाईकोर्ट ने आसाराम और पीड़िता, दोनों से एफिडेविट मांगा है। पीड़िता के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि आसाराम ने पहले भी अदालत की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए उसकी अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाना सही नहीं होगा। कोर्ट ने आसाराम के वकील से पूछा कि क्या उन्होंने प्रवचन देकर सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन किया है? इस पर कोर्ट ने शपथ पत्र (अफिडेविट) देने के निर्देश दिए। जस्टिस दिनेश मेहता और विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। 31 मार्च को खत्म हुई थी जमानत गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी 2025 को आसाराम को अंतरिम जमानत दी थी, जिसे जोधपुर हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2025 तक के लिए बढ़ा दिया था। अब जब यह अवधि समाप्त हो गई है, तो उनकी ओर से इसे और आगे बढ़ाने के लिए याचिका दाखिल की गई थी। इससे पहले, गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत रेप केस में आसाराम को तीन महीने की अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि, जब तक राजस्थान हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिलती, तब तक वह जेल से बाहर नहीं आ सकते। दो मामलों में आजीवन कारावास आसाराम पर दो गंभीर यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज हैं, जिनमें उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पहला मामला जोधपुर का है, जहां 2013 में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। दूसरा मामला गुजरात का है, जहां सूरत की एक महिला ने उन पर गांधीनगर आश्रम में बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। जनवरी 2023 में इस मामले में भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

अवैध बजरी खननकर्ता की कुर्क होगी संपत्ति, पुलिस ने कोर्ट में दायर किया इस्तगासा

जोधपुर जिला पश्चिमी पुलिस टीम ने अवैध बजरी खनन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ 107 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई को लेकर कोर्ट में इस्तगासा पेश किया है। इस संबंध में पुलिस की विशेष टीम ने आसूचना एकत्रित की, जिसके आधार पर फिंच गांव के हमीर नगर निवासी अमराराम की अवैध बजरी खनन से अर्जित संपत्ति की जानकारी निकाली गई, जिसमें एक डंपर, एक जेसीबी, एक कैंपर और एक मोटर साइकिल के अलावा मकान और बैंक बैलेंस मिलाकर कुल 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई। इस पर अमराराम के खिलाफ 107 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा कोर्ट में पेश किया गया है। आगे की कार्रवाई कोर्ट की ओर से की जाएगी। अवैध खनन करने वालों पर संभवतया प्रदेश में इस तरह की यह पहली कार्रवाई है। चार इंस्टाग्राम आईडी भी बंद करवाई डीसीपी वेस्ट राजर्षि राज वर्मा ने बताया कि अवैध बजरी खनन करते हुए रील्स बनाने वालों के अकाउंट चिन्हित किए गए हैं और इनमें 6 लोगों के खिलाफ कोर्ट में 107 बीएनएसएस और दो के खिलाफ 126 /135 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा तैयार किया गया है। इनमें से चार की इंस्टाग्राम आईडी बंद करवाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में दिखाई दे रहे वाहनों को चिन्हित करते हुए उन पर भी कार्रवाई की गई है। पुलिस कमिश्नर राजेंद्र सिंह एवं डीसीपी पश्चिम राजर्षि राज वर्मा के निर्देश पर एडीसीपी पश्चिम निशांत भारद्वाज और एसीपी बोरानाडा आनंद सिंह राजपुरोहित के सुपरविजन में लुणी थाना अधिकारी हनुमत सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में गठित टीम ने यह कार्रवाई की। गौरतलब है कि अवैध बजरी खनन को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं और पुलिस भी इस संबंध में लगातार कार्रवाई कर रही है लेकिन अवैध बजरी खनन करने वाले की संपत्ति कुर्क किए जाने संबंधी संभवतया यह पहली कार्रवाई है।

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का आयोजन आज उदयपुर के सिटी पैलेस में हुआ, मेवाड़ राजपरिवार की परंपरा जारी

उदयपुर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का आयोजन आज उदयपुर के सिटी पैलेस में हो रहा है। यह परंपरा उनके पिता, अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद निभाई जा रही है। इस आयोजन में हवन, अश्व पूजन और मंदिर दर्शन जैसी धार्मिक रस्में पूरी की जा रही हैं। मेवाड़ राजपरिवार की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का आयोजन आज (बुधवार) उदयपुर के सिटी पैलेस में किया जा रहा है। यह परंपरा उनके पिता, अरविंद सिंह मेवाड़ के 16 मार्च 2025 को हुए निधन के बाद निभाई जा रही है। सुबह 9:30 बजे इस पवित्र आयोजन की शुरुआत हवन-पूजन से हुई, जिसका नेतृत्व कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी कर रहे हैं। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री और लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के ससुर कनकवर्धन सिंह, प्रसिद्ध कवि और अभिनेता शैलेश लोढ़ा सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने।   परंपरा और रीति-रिवाजों का सम्मान यह समारोह सिटी पैलेस स्थित नौ चौकी महल के राय आंगन में हो रहा है। परंपरा के अनुसार, सभी उपस्थित लोग सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं, जिसमें डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ भी शामिल हैं। इस दौरान उनके पुत्र हरितराज सिंह मेवाड़ ने संतों का आशीर्वाद लिया। दोपहर 3 बजे अश्व पूजन की रस्म दोपहर 3 बजे परंपरागत अश्व पूजन किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:20 बजे लक्ष्यराज सिंह कैलाशपुरी स्थित श्री एकलिंगनाथजी मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। इसके बाद शाम 7 बजे हाथीपोल द्वार का पूजन होगा और रात 8:15 बजे भाईपा व सरदारों की रंगपलटाई रस्म निभाई जाएगी।   रात 9 बजे जगदीश मंदिर के दर्शन रात 9 बजे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ जगदीश मंदिर में दर्शन करेंगे और परंपराओं का निर्वहन करेंगे। मेवाड़ राजपरिवार की शाही विरासत गौरतलब है कि अरविंद सिंह मेवाड़ के बड़े भाई महेंद्र सिंह मेवाड़ का 10 नवंबर 2024 को निधन हो गया था। इसके बाद उनके पुत्र और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ का राजतिलक चित्तौड़गढ़ किले में संपन्न हुआ था। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का गद्दी उत्सव केवल एक रस्म नहीं, बल्कि मेवाड़ की शाही परंपराओं और गौरवशाली विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है।  

राजस्थान में बीपीएल परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने सरकार की नई योजना

जयपुर राजस्थान में बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार योजना से जोड़ने के लिए राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना लेकर आई है। पहले चरण में यह योजना प्रदेश के सर्वाधिक वंचित 5 हजार गांवों में लागू होगी, जिस पर इस साल 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके तहत केन्द्र और राज्य सरकार की 102 योजनाओं के जरिए बीपीएल यानी गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे परिवारों को एपीएल यानी गरीबी रेखा से ऊपर लाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस बार वित्त और विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रदेश को गरीबी मुक्त बनाने के लिए इस योजना को लागू करने की घोषणा की थी। पंचायत राज व ग्रामीण विकास विभाग ने इस योजना को लागू करने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और एक अप्रैल यानी मंगलवार से यह योजना प्रदेश भर में लागू कर दी गई है। योजना में सबसे पहले उन गांवों का चुना जाएगा, जहां बीपीएल परिवारों की संख्या कम है। बीपीएल जनगणना के अनुसार प्रदेश में अभी करीब 22 लाख परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। राज्य सरकार गरीबी मुक्त गांव योजना के जरिए इन परिवारों को गरीबी से ऊपर लेकर आएगी। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार की आजीविका सृजन व रोजगार की 14, महिला सशिक्तकरण की 16, वित्तीय समावेशन की 13 और सामाजिक सुरक्षा की 49 योजनाओं का सहारा लिया जाएगा। हर परिवार पर लाख रुपए होंगे खर्च योजना के तहत राज्य सरकार चिन्हित गांवों के बीपीएल परिवारों पर एक-एक लाख रुपए खर्च कर उन्हें स्वरोजगार और आजीविका उपार्जन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ेगी। ऐसे परिवारों की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को 15 हजार रुपए तक की वर्किंग कैपिटल भी दी जाएगी, ताकि ये परिवार खुद का कोई रोजगार कर आर्थिक रूप से सक्षम बन सकें। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत पक्का मकान, शौचालय, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर, बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां आदि योजनाओं से इन परिवारों को प्राथमिकता से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही कोशिश यह रहेगी कि केन्द्र व राज्य सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना से बीपीएल परिवार वंचित ना रहे। हर तीन महीने में लेंगे फीडबैक योजना का हर तीन महीने में फीडबैक लिया जाएगा। साथ ही यह देखा जाएगा कि धरातल पर इस योजना का कितना असर आ रहा है। प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं से जोड़े गए बीपीएल परिवारों के जीवन में इससे क्या परिवर्तन आया है। इस इम्पेक्ट स्टडी के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि इस परिवार को आगे और किस तरह की जरूरत है और उसे कैसे पूरा किया जा सकता है। 21 हजार रुपये के साथ मिलेगा आत्मनिर्भर परिवार कार्ड बीपीएल परिवार के लिए तय किए सामजिक और आर्थिक पैरामीटर्स में 15 पैरामीटर्स पूरे कर गरीबी रेखा से ऊपर आए परिवारों को सरकार की ओर से आत्मनिर्भर परिवार कार्ड दिया जाएगा और साथ में 21 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। हालांकि इन परिवारों को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा और जिन योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा था, वह जारी रहेगा। परियोजना निदेशक और पदेन उपसचिव ओमकारेश्वर शर्मा का कहना है कि जिला कलेक्टरों द्वारा गांवों और परिवारों के सर्वे का काम इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा। योजना का उद्देश्य बीपीएल परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और यदि वे किसी भी सरकारी योजना से वंचित हैं, उन्हें  प्राथमिकता से उस योजना से जोड़ना है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

कुख्यात बदमाश को पकड़ने गई पुलिस पर हमला, 11 घायल, एक दर्जन से ज्यादा बदमाशों को दबोचा

सीकर जिले के अजीतगढ़ क्षेत्र के गढ़टकनेत की डाला वाली ढाणी में कुख्यात बदमाश को पकड़ने गई पुलिस पर वहां मौजूद आरोपी और अन्य लोगों ने हमला कर दिया। हमले में अजीतगढ़ थाने के एसएचओ मुकेश सेपट और खंडेला थाने के एसएचओ इंद्रजीत यादव सहित 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। बदमाशों ने पुलिस की तीन गाड़ियों को भी तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार पुलिस जब बदमाश महिपाल को पकड़ने डाला वाली ढाणी पहुंची तो वहां आरोपी के परिचित के यहां शादी समारोह चल रहा था, इसी दौरान समारोह में मौजूद आरोपी और अन्य लोगों ने पुलिस को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की, इसके बाद मौके पर पहुंची खंडेला पुलिस के साथ भी मारपीट की गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को बदमाशों के चंगुल से छुड़वाया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद से पुलिस ने पूरे इलाके में दबिश देना शुरू कर दिया। रातभर चली कार्रवाई के बाद पुलिस बदमाशों को काबू करने में सफल रही। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी भुवन भूषण यादव भी रातभर मोर्चा संभाले रहे और पुलिस की कार्रवाई की निगरानी करते रहे। पुलिस ने इलाके में सख्त रुख अपनाया और एक दर्जन से अधिक बदमाशों को हिरासत में लिया है। घटना के बाद से गढ़टकनेत की डाला वाली ढाणी पुलिस छावनी में तब्दील हो गई है और पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए जुटी हुई है और अब मुख्य आरोपी महिपाल और उसके साथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

उदयपुर के राजमहल में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का गद्दी उत्सव

उदयपुर उदयपुर के राजमहल में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का कार्यक्रम पूरे शाही अंदाज में सिटी पैलेस में प्रारंभ हो चुका है। उत्सव का शुभारंभ नौ चौकी महल के बाहर स्थित राय आंगन में हुआ, जो मेवाड़ राजपरिवार के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। परंपरा के अनुसार यही वह स्थान है, जहां बरसों से मेवाड़ के नए महाराणाओं का राजतिलक किया जाता रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत पंडितों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ अनुष्ठान के साथ हुई। गद्दी उत्सव की रस्मों को निभाने के लिए विशेष रूप से प्रतिष्ठित पुरोहितों को आमंत्रित किया गया है, जो पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन संपन्न करा रहे हैं। आयोजन शुरू होने के कुछ ही देर में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ यज्ञ पांडाल में पहुंचे, जहां उन्होंने सफेद रंग के शाही वस्त्र धारण कर विधिवत अनुष्ठान में भाग लिया। धूणी के सामने होगा गद्दी पर विराजने का आयोजन सिटी पैलेस के राय आंगन में स्थित धूणी के सामने गद्दी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इतिहास के अनुसार यह धूणी महाराणा उदयसिंह के समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि साधु प्रेम गिरि महाराज ने महाराणा उदयसिंह को उदयपुर को राजधानी बनाने का आशीर्वाद दिया था और उनके निर्देश पर इसी स्थान पर सिटी पैलेस की नींव रखी गई थी। गद्दी पर विराजने की यह ऐतिहासिक परंपरा मेवाड़ के कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी द्वारा संपन्न कराई जाएगी। गद्दी उत्सव में भाग लेने के लिए राजपरिवार के सदस्य, वीवीआईपी मेहमान और साधु-संत सिटी पैलेस पहुंच चुके हैं। कुलगुरु की अगुवाई में शाही परिवार के सदस्य परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं। गद्दी उत्सव से संबंधित और अधिक जानकारी अपडेट की जा रही है।

राजस्थान: हाईकोर्ट ने सरकार से 6,759 ग्राम पंचायतों के चुनावों के स्थगन पर लगाई फटकार

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने भजनलाल सरकार से 6,759 ग्राम पंचायतों के चुनावों के स्थगन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि राज्य में पंचायत चुनाव आखिर कब कराए जाएंगे? जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।  दरअसल, जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि 4 फरवरी 2025 के आदेश की पालना करते हुए पंचायत चुनाव का स्पष्ट शेड्यूल प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 अप्रैल 2025 तय की है। याचिकाकर्ता ने सरकार के जवाब को बताया अपूर्ण याचिकाकर्ता गिरिराज सिंह देवंदा की ओर से पेश अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत में आपत्ति जताई कि सरकार ने पिछले आदेशों के बावजूद पंचायत चुनावों की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की है। उन्होंने कहा कि सरकार को कोर्ट के आदेश का अनुपालन करना चाहिए था, लेकिन इसके हलफनामे में किसी निश्चित चुनाव कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया गया। सरकार ने चुनाव स्थगित करने के लिए दिए तीन तर्क राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत अपने जवाब में चुनाव स्थगन को उचित ठहराने के लिए तीन प्रमुख कारण बताए हैं। पहला तो ये कि प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो यह अध्ययन करेगी कि एक साथ चुनाव कराने से धन, श्रम और समय की कितनी बचत होगी और इससे स्थानीय निकायों को कैसे सशक्त किया जा सकता है। वहीं, दूसरा तर्क बताया कि पिछली सरकार ने कई नए जिले बनाए थे, जिनमें से 9 जिलों को वर्तमान सरकार ने समाप्त कर दिया। अब पूरे प्रदेश में पंचायतों का पुनर्गठन और नगरीय निकायों का परिसीमन किया जा रहा है, इसलिए चुनावों को अभी स्थगित किया गया है। इसके अलावा सरकार का कहना है कि उसने राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1994 की धारा 95 के तहत प्रशासकों की नियुक्ति की है। यह प्रावधान वैकल्पिक है, जिससे सरकार यह तय कर सकती है कि प्रशासकों की नियुक्ति कैसे की जाए। बताते चलें कि हाईकोर्ट का रुख अब और सख्त हो सकता है, क्योंकि सरकार ने पूर्व आदेशों का स्पष्ट अनुपालन नहीं किया है। यदि अगली सुनवाई 7 अप्रैल को सरकार चुनावों की कोई निश्चित तिथि प्रस्तुत नहीं करती, तो कोर्ट द्वारा कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का आरोप- संविधान का उल्लंघन याचिकाकर्ताओं के वकील प्रेमचंद देवंदा का कहना है कि राज्य सरकार ने 16 जनवरी 2025 को एक अधिसूचना जारी कर 6,759 पंचायतों के चुनाव स्थगित कर दिए, जो संविधान के अनुच्छेद 243ई, 243के और राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 17 का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई और ग्रामीण संस्थाओं को अस्थिर कर दिया है और राज्य में ग्राम पंचायतों के चुनाव रोककर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। सरपंचों को प्रशासक बनाने का फैसला विवादों में सरकार ने जनवरी में चुनाव कराने की जगह मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। पंचायतों में प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरपंचों की सहायता हेतु एक प्रशासकीय समिति गठित की गई, जिसमें उप सरपंच और वार्ड पंच सदस्य शामिल होंगे। यह मॉडल भाजपा शासित मध्य प्रदेश की तर्ज पर लागू किया गया है, जहां पहले भी इसी तरह से सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। हालांकि, इस फैसले के बाद विपक्ष और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का हो रहा सुदृढ़ीकरण

जयपुर महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय, समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) द्वारा  महिला पर्यवेक्षक के  416 पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी किये गए हैं। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। विभाग में कार्मिकों की कमी नहीं होने से कार्य सुगमता से होंगे जिससे महिला एवं बाल विकास की योजनाओं से आमजन सरलता और सुगमता से लाभान्वित हो सकेंगे। निदेशक आईसीडीएस ओ. पी. बुनकर ने बताया कि विभाग में 416 कार्मिकों को पोस्टिंग मिली है। इसमें से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से 216 कार्यकर्ताओं की और सीधी भर्ती से 200 महिला पर्यवेक्षकों की भर्ती की गई है। निदेशक ने बताया कि इससे विभाग के कार्य संपादन और मॉनिटरिंग में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि  विभाग को नवीन कार्मिक मिलने से उसकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। उक्त कैडर के 20 प्रतिशत से अधिक कार्मिकों का मिलना  विभागीय कार्यों के संपादन में उपयोगी होगा। निदेशक आईसीडीएस ने बताया कि राज्य की बाल विकास परियोजनाओं में कार्यरत सभी सीडीपीओ  को निर्देशित किया है कि उक्त आदेश में दिए गए निर्देशानुसार कार्मिकों की पर्सनल फाइल का संधारण सुव्यवस्थित ढ़ंग से किया जाए और कार्मिकों की सर्विस बुक भी को समय पर बनाकर उसमें तथ्यात्मक सूचनाएं सावधानी से सुस्पष्टता से भरी जाए। अधूरी सर्विस बुक बाद में समस्या का कारण बनती है। उन्होंने कार्मिकों की फोटो, हस्ताक्षर , अँगुली और अंगूठे के निशान, शैक्षणिक योग्यता इत्यादि सभी एंट्री पूर्ण सावधानी से करने के निर्देश दिए। निदेशक ओ.पी. बुनकर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से भर्ती हुई कार्यकर्ता से विभाग द्वारा आवंटित फोन तथा समस्त रिकार्ड अन्य कार्यकर्ता/ सहायिका जिसको भी चार्ज दिया जा रहा है, को सुपुर्द करने के उपरांत ही कार्यमुक्त आदेश जारी करने के सीडीपीओ को निर्देश दिए।  उन्होंने सीडीपीओ को उक्त कार्मिकों को कार्यमुक्ति आदेश के साथ नियुक्ति आदेश भी जारी करने और निर्देशानुसार फोटो युक्त अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी किया करने और इनका संधारण कार्मिक की पर्सनल फाइल में करने के निर्देश दिए।

दिल्ली स्थित बीमा विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में सेवानिवृत्त होने वाले राज्यकर्मियों के बीमा परिपक्वता राशि के पत्र जारी किए

जयपुर  राजस्थान सरकार के दिल्ली स्थित राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग ने 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की 01 अप्रेल,2025 को परिपक्व होने वाली बीमा पॉलिसियों परिपक्वता राशि के रूप में तीन करोड़ तिरानवे लाख सत्रह हजार नौ सौ छप्पन रुपये का भुगतान ऑनलाइन जारी कर इस कार्य में शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर सराहनीय कार्य किया। नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में मंगलवार को अतिरिक्त आवासीय आयुक्त श्रीमती अंजू ओमप्रकाश ने एसआईपीएफ पोर्टल के माध्यम से सिंगल क्लिक कर डिजिटल तरीके से ऑनलाइन भुगतान प्राधिकार पत्र जारी किये। इस अवसर पर राज्य बीमा विभाग की संयुक्त निदेशक श्रीमती संजू शर्मा भी उपस्थित थी। श्रीमती संजू शर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025—26 में सेवानिवृत होने वाले दिल्ली स्थित राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 33 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को परिपक्वता राशि के रूप में तीन करोड़ तिरानवे लाख सत्रह हजार नौ सौ छप्पन रुपये के भुगतान हेतु प्राधिकार पत्र जारी किये गये। उन्होंने बताया कि बीमा विभाग के दिल्ली कार्यालय द्वारा संबंधित कर्मचारियों के बीमा परिपक्वता अधिकारों के भुगतान के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके तहत 1 अप्रैल, 2025 को राज्य बीमा पॉलिसी की परिपक्वता अवधि पूर्ण करने वाले बीमित व्यक्तियों का बीमा परिपक्वता अधिकारों के भुगतान के लिए आवेदन के अनुसार भुगतान पत्र जारी किये गये। उन्होंने कार्यालय पर्यवेक्षक श्रीमती बीना नायर तथा वरिष्ठ सहायक श्रीमती मीनाक्षी दमाथिया सहित अन्य सभी कर्मचारियों को इस कार्य को शत प्रतिशत सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए बधाई दी।

खरीफ-2024 में वितरित अल्पकालीन फसली ऋणों की भुगतान तिथि बढ़ाई, किसानों को बड़ी राहत

जयपुर राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खरीफ-2024 में वितरित अल्पकालीन ब्याजमुक्त फसली ऋणों की अदायगी तिथि आगे बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। राज्य सरकार के इस निर्णय से 2.19 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम कुमार दक ने बताया कि इस संबंध में वित्त विभाग से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा पैक्स/लैम्प्स के माध्यम से खरीफ-2024 में ऋण प्राप्त करने वाले किसान अब 30 जून, 2025 अथवा ऋण लेने की दिनांक से 12 माह, जो भी पहले हो, ऋण राशि चुका सकेंगे। पूर्व में ऋण चुकाने की अवधि 31 मार्च, 2025 निर्धारित थी, जिसे आगे बढ़ाने की मांग की जा रही थी। राज्य सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। श्री दक ने बताया कि तिथि आगे नहीं बढ़ाये जाने पर लगभग 2.19 लाख किसानों पर बकाया लगभग 778 करोड़ रुपये का ऋण अवधिपार हो जाता। ऐसी स्थिति में इन किसानों को शून्य ब्याज दर पर फसली ऋण सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। साथ ही, ऋण अवधिपार होने की स्थिति में उन्हें 2 प्रतिशत पेनल्टी का भुगतान भी करना पड़ता।

मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के स्तर पर 4 हजार 719 बैठकें आयोजित

जयपुर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने देश भर में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ व्यापक एवं योजनाबद्ध तरीके से संपर्क स्थापित किया है। बीते 25 दिनों की अवधि में 31 मार्च तक विभिन्न स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ कुल 4 हजार 719 बैठकें आयोजित की गईं हैं. इनमें मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 40 बैठकें, जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 800 बैठकें और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा 3,879 बैठकें शामिल हैं, जिनमें देश भर में राजनीतिक दलों के 28 हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी द्वारा 4-5 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान जारी किए गए निर्देशों के अनुसार ये बैठकें आयोजित की गई। आयोग की ओर से इस विशेष संपर्क अभियान का उद्देश्य संबंधित सक्षम प्राधिकारी, यानी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी या मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े किसी लंबित मुद्दे को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960, चुनाव संचालन नियम, 1961 और समय-समय पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मैनुअल, दिशानिर्देशों और निर्देशों के अनुरूप मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर हल करना है। इस क्रम में अग्रिम आंकलन के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है। यदि मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर कोई मुद्दा अनसुलझा रहता है, तो आयोग के स्तर पर उसका निस्तारण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विभिन्न राजनीतिक दलों से भी इस सम्पर्क अभियान को भरपूर सराहना मिली है। इस दौरान विधानसभा क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राजनीतिक प्रतिनिधियों की सक्रिय और उत्साही भागीदारी रही है। देश भर में हुई बैठकों की तस्वीरें भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर देखी जा सकती है।

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में 66 करोड़ से अधिक की लागत से करवाए जाएंगे विभिन्न विकास कार्य: भजनलाल शर्मा

जयपुर प्रदेश की कृषि मंडियों में आधारभूत सुविधाएं सुदृ़ढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार निरन्तर महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की विभिन्न कृषि उपज मंडी समितियों के मंडी यार्ड में विद्युत, मरम्मत, नवीन निर्माण कार्यों एवं संपर्क रोड के निर्माण के लिए 66 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की है। मुख्यमंत्री श्री शर्मा के इस निर्णय से भादरा, टिब्बी, रावतसर, गोलूवाला, इटावा, जैतसर, सादुलशहर एवं श्रीकरणपुर कृषि उपज मंडियों में लगभग 12 करोड़ 4 लाख रुपये की लागत से विभिन्न यार्ड विकास के कार्य किए जाएंगे। कोटपूतली, सुमेरपुर, सूरतगढ़, कोटा (अनाज), श्रीगंगानगर (अनाज), नागौर और गोलूवाला मंडियों में लगभग 39 करोड़ 98 लाख रुपये की लागत से संपर्क सड़कों का निर्माण करवाया जाएगा। इसी प्रकार सादुलपुर, सुमेरपुर, श्रीगंगानगर (अनाज) मंडियों के कृषि यार्ड में लगभग 7 करोड़ 80 लाख रुपये से विद्युत संबंधी कार्य, उदयपुर (अनाज) और हनुमानगढ़ मंडियों में लगभग 6 करोड़ 11 लाख के निर्माण एवं विद्युत संबंधी कार्य करवाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त खेरली मंडी में एक ऑयल टेस्टिंग मशीन की खरीद पर 16 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इन कार्यों से मंडी प्रांगण में आधारभूत संरचनाएं सुदृढ़ होने के साथ ही, किसानों एवं मजदूरों के लिए सुविधाओं में भी बढ़ोतरी होगी।

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