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यूपी बॉर्डर पर रोके गए राहुल गांधी ने पुलिस से कहा- पांच लोगों को संभल जाने दो, बॉर्डर से लौटाया

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बुधवार सुबह संभल के लिए निकले। उनका काफिला यूपी पर गेट से रोक लिया गया। काफी देर तक तनातनी के बाद पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया। अब कांग्रेस नेता दिल्ली वापस लौट रहे हैं। यूपी बॉर्डर पर रोके गए राहुल गांधी ने पुलिस से कहा- पांच लोगों को संभल जाने दो। संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के बाद वहां भड़की हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद से संभल का सियासी माहौल गर्माया हुआ है। मंगलवार को संसद में इस मुद्दे की गूंज हुई। इससे पहले सोमवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय व उनके अन्य नेताओं को पुलिस प्रशासन ने संभल नहीं जाने दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में सपा के प्रतिनिधिमंडल को भी इसी कारण लखनऊ में ही रोक लिया गया। संभल प्रशासन ने यहां बाहरी लोगों के आने पर रोक लगाई हुई है। मैं अकेला जाने को तैयार हूं… पुलिस के साथ जाने को तैयार हूं : राहुल बोले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यहां बुधवार को गाजीपुर बार्डर पर रोके जाने के बाद कहा कि वह पुलिस के साथ अकेले संभल जाने को तैयार हैं लेकिन उन्हें इसकी भी अनुमति नहीं दी जा रही है। साथ ही कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें संभल जाने से रोका जाना लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनके विशेषाधिकारों का हनन है। संभल रवाना होने के बाद दिल्ली. गाजीपुर सीमा पर पुलिस द्वारा रोके जाने के पर राहुल ने संवाददाताओं से कहा, हम संभल जाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर पुलिस मना कर रही है। लोकसभा में नेता विपक्ष के नाते मेरा अधिकार बनता है कि मैं वहां जा सकता हूं। मगर तब भी वह मुझे रोक रहे हैं। यह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के मेरे अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मैंने कहा है कि मैं अकेला जाने को तैयार हूं… पुलिस के साथ जाने को तैयार हूं मगर उन्होंने वह भी बात नहीं मानी और अब कह रहे हैं कि कुछ दिन बाद वह हमें जाने देंगे। राहुल ने संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा, कि यह (संभल जाने से रोका जाना) लोकतंत्र के खिलाफ है। हम संभल जाकर देखना चाहते हैं कि वहां क्या हुआ। हम लोगों से मिलना चाहते हैं लेकिन मेरा जो संवैधानिक अधिकार है, मुझे उससे वंचित किया जा रहा है। यह संविधान को खत्म करने वाला हिंदुस्तान है। अंबेडकर जी के संविधान को खत्म करने वाला हिंदुस्तान है। मगर हम लड़ते रहेंगे।   राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रतिनिधिमंडल के साथ वापस दिल्ली जाएंगे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रतिनिधिमंडल के साथ वापस दिल्ली जाएंगे। पुलिस ने उन्हें संभाल नहीं जाने दिया। राहुल के काफिले को यूपी की सीमा में दाखिल करा कर दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे के अंडरपास से वापस दिल्ली भेजा जाएगा। राहुल के संभल दौरे को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णन ने हमला बोला राहुल के संभल दौरे को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णन ने हमला बोला। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी संभल जा रहे हैं। उनको वहां जाने का शौक है तो एक बार बांग्लादेश भी जाना चाहिए। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है राहुल गांधी संभल जाना चाहते हैं। संभल में पूरी तरह से शांति है। उन्होंने कहा कि संसद में बांग्लादेश का मुद्दा उनको उठाना चाहिए. राहुल गांधी दंगों की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। डीजीपी ने राहुल को जाने से मना कर दिया यूपी गेट पर रोके गए राहुल गांधी ने कहा कि डीजीपी से बात हुई। मैं कहा कि हमें संभल जाने दीजिए, हालांकि डीजीपी ने उन्हें जाने से मना कर दिया।

प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार, 92 लाख में कचौड़ी की दुकान

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 14 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो रही है। इससे पहले प्रशासनिक और सरकार की तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। देश-दुनिया से करीब 40 करोड़ लोगों के महाकुंभ मेला में पहुंचने की उम्मीद है। मेले में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए तमाम व्यवसायी अपनी दुकान वहां लगाने की जुगत में हैं। ऐसे में मेला प्रशासन की ओर से भी दुकानों के आवंटन को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। 30 X 30 फीट के दुकान के किराए को जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एक प्लेट कचौड़ी की कीमत भले ही 30 रुपये हो, लेकिन करीब 900 स्क्वायर फीट की दुकान का किराया 92 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। 13 जनवरी से शुरू होगा महाकुंभ प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। इसको लेकर जमीनों का आवंटन शुरू हुआ है। यहां पर दुकान लगाने के लिए आवंटित होने वाली जमीन की कीमत कई-कई लाख में मिल रही है। प्राइम लोकेशन पर जमीन के किराए की दर काफी महंगी है। कचौड़ी की दुकान में बगल में लड्‌डू की दुकान के लिए जमीन का आवंटन किया गया है। इसका किराया 75 लाख रुपये रखा गया था। महाकुंभ में लगनी वाली दुकानों पर महाकुंभ के डेढ़ महीने ही भीड़ रहेगी। भव्य महाकुंभ की है तैयारी प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार की गई है। 4000 हेक्टेयर यानी 15,840 बीघा क्षेत्र में मेला क्षेत्र को बनाया जाएगा। यहां पर पहली बार 13 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बन रहा है। इसमें 40 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। भव्य आयोजन के कमाई की अपार संभावनाओं को देखते हुए हर व्यापारी यहां दुकान लगाना चाहता है। मेला क्षेत्र में निर्माण के लिए जगह-जगह जेसीबी से जमीन समतल की जा रही है। गंगा पर पांटून पुल (पीपा पुल) बन रहे हैं। सजने लगी हैं दुकानें मेला क्षेत्र में दुकान भी सजने लगे हैं। दुकानों में अब लोगों की भीड़ भी आने लगी है। संगम किनारे निर्धारित दुकानों के किराए सबसे अधिक हैं। कचौरी और लड्‌डू की दुकानें सबसे महंगी हैं। परेड ग्राउंड में महाराज कचौड़ी एवं प्रसाद भोग के नाम से एक दुकान है। 30 X 30 वर्गफीट की इस दुकान का टेंडर 92 लाख रुपए में फाइनल हुआ है। इस दुकान को पवन कुमार मिश्रा ने लिया है। वे कहते हैं कि कचौड़ी और लड्डू बनाने का काम पहले से करते रहे हैं, लेकिन कुंभ में पहली बार दुकान लगाने के बारे में सोचा। पवन मिश्रा ने कहा कि मेला प्रशासन हमें अपनी दुकान से करीब 200 मीटर दूर जगह देगा। वह भी रोड पर स्थित है। 2 महीने हम वहीं दुकान लगाएंगे। उसके बाद वापस इस जगह पर आ जाएंगे। अभी बताया जा रहा है कि जिस जगह हमारी दुकान है, वहां विश्व हिंदू परिषद को जगह दी गई है। पवन कहते हैं कि भले किराया अधिक लगा हो, लेकिन सामग्रियों के दाम नहीं बढ़ाएंगे। 76 लाख में लड्‌डू की दुकान लेटे हुए हनुमान मंदिर पर इस बार लड्डू की दुकानों में इजाफा हुआ है। जय बजरंग भोग नाम की एक दुकान अब यहां पर खुली है। इस लड्डू की दुकान के लिए टेंडर 76 लाख रुपये में खुला। वहीं, परेड ग्राउंड में ही महाकाल प्रसाद भोग एवं कचौड़ी भंडार दुकान 75 लाख रुपये में बकही है। झूंसी साइड और मेला क्षेत्र के अंदर भी दुकानों की बिक्री हो रही है। वहां भी रेट हाई है। गंगा की तराई में कुंभ के दौरान लगने वाली दुकानों का रेट अन्य जगहों के मुकाबले कम है। 10 हजार दुकानों का टारगेट महाकुंभ के आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने 10 हजार दुकानें बेचने का टारगेट रखा गया है। 2019 के कुंभ में कुल 5721 स्टॉल के आवेदन आए थे। 2012 के महाकुंभ में यह संख्या करीब 2000 हजार थी। उस समय ऑफलाइन टेंडर के जरिए आवंटन होता था। 2019 से टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। 13 नवंबर से दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अब तक 2000 से अधिक दुकानों का टेंडर हो चुका है। गंगा तराई में लगने वाली दुकानों का किराया भी तीन से 5 लाख रुपये तक पहुंच रहा है।

नेशनल हाईवे 34 पर हुई जहां तेज रफ्तार टैंकर और ट्रोला के आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत, तीन की मौत

हमीरपुर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में मंगलवार को तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला है, जिसमें ट्रोला और टैंकर के परखच्चे उड़ गए हैं। यह टक्कर मौदहा कोतवाली क्षेत्र के नेशनल हाईवे 34 पर हुई जहां तेज रफ्तार टैंकर और ट्रोला के आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत में परखच्चे उड़ गए। इस भीषण सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, एक युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। मौके पर पहुंची पुलिस ने जैसे-तैसे मृतकों को गाड़ी से निकाला और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक दीक्षा शर्मा ने हादसे में तीन की मौत की पुष्टि की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद हमीरपुर में हुए सड़क हादसे का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि 27 नवंबर को कन्नौज जिले में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर भी भीषण सड़क हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में सैफई मेडिकल कॉलेज के पांच डॉक्टरों की मौत हो गई थी। बताया गया कि सैफई मेडिकल कॉलेज के पांच डॉक्टर अपनी कार से एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। इस दौरान कार एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद कार में चीख-पुकार मच गई, पास से गुजर रहे लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। दुर्घटनाग्रस्त स्कार्पियो आगरा की ओर जा रही थी, चालक को नींद आने के कारण कार डिवाइडर तोड़ कर आगरा से लखनऊ जाने वाली दिशा में पहुंच गई। इसके बाद आगरा की तरफ से आ रहे ट्रक से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में जान गंवाने वाले सभी डॉक्टर पीजी कर रहे थे।  

संभल के भाईचारे को गोली मारी दी, लोकसभा में बोले अखिलेश-अफसरों पर दर्ज हो हत्‍या का मुकदमा

संभल समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा में संभल हिंसा का मामला उठाया। उन्‍होंने कहा कि अचानक ये जो घटना हुई है। ये सोची समझी साजिश के तहत वहां के भाईचारे को गोली मारने का काम हुआ है। देश के कोने-कोने में भाजपा और उनके शुभचिंतक बार-बार खुदाई की जो बात कर रहे हैं, ये खुदाई, हमारे देश का सौहार्द, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब को खो देगा। उन्‍होंने कहा कि यूपी में उपचुनाव की तारीख को 13 से बढ़ाकर 20 नवंबर कर दिया गया। अखिलेश जब संभल पर बोल रहे थे तो लोकसभा में भाजपा सदस्‍यों की ओर से लगातार आपत्ति जताई गई। शोर शराबे के बीच अखिलेश ने अपनी बात जारी रखी। उन्‍होंने संभल हिंसा के लिए याचिका दायर करने वालों के साथ पुलिस-प्रशासन को जिम्‍मेदार ठहराते हुए संबंधित अफसरों को सस्‍पेंड करने और उनके खिलाफ हत्‍या का मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। सपा मुखिया ने कहा कि संभल की शाही जामा मस्जिद के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिविजन के यहां एक याचिका डाली। दूसरे पक्ष को सुने बिना कोर्ट ने उसी दिन सर्वे का आदेश दे दिया और अधिकारी उसी दिन दो घंटे बाद पुलिस बल के साथ सर्वे के लिए जामा मस्जिद पहुंच भी गए। जामा मस्जिद की कमेटी और अन्‍य लोगों ने पूरा सहयोग दिया। संभल के डीएम और एसपी ने ढाई घंटे सर्वे के बाद कहा कि सर्वे पूरा हो चुका है और रिपोर्ट कोर्ट को भेज दी जाएगी। लेकिन 22 नवंबर को जब लोग जुमे की नमाज के लिए पहुंचे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। उसके बाद भी लोगों ने संयम बरतते हुए नमाज अदा की और किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं किया। 29 नवंबर की तारीख को कोर्ट में सुनवाई तय थी। मस्जिद पक्ष के लोग कोर्ट में सुनवाई के लिए तैयारी कर रहे थे लेकिन 23 नवंबर की रात पुलिस प्रशासन ने कहा कि अगली सुबह दोबारा सर्वे किया जाएगा। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि सर्वे तो पूरा हो चुका है। दोबारा सर्वे कराना ही है तो कोर्ट से आदेश लें लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। तानाशाही दिखाते हुए सुबह के वक्‍त से पहले शाही जामा मस्जिद आ गए। अखिलेश ने कहा कि मुस्लिम कम्‍युनिटी के लोगों ने फिर भी धैर्य रखा और दोबारा सर्वे के लिए अंदर ले गए। सर्वे के दौरान करीब डेढ़ घंटे बाद लोग इक्‍ट्ठा हो गए। लोगों ने सर्वे का कारण जानना चाहा तो सर्किल ऑफिसर ने उनके साथ गाली-गलौज की और लाठीचार्ज करवाकर बुरी तरह घायल कर दिया। इसका विरोध करते हुए चंद लोगों ने पत्‍थर चलाए। इसके बदले में सिपाही से लेकर अधिकारियों तक ने अपने सरकारी और प्राइवेट हथियारों से गोलियां चलाईं, जिसका वीडियो रिर्कार्डिग है। दर्जनों लोग घायल हो गए। पांच लोग जो अपने घर से सामान लेने के लिए निकले थे उनकी मृत्‍यु हो गई। संभल का माहौल बिगाड़ने में याचिका दायर करने वाले लोगों के साथ पुलिस और प्रशासन के लोग जिम्‍मेदार हैं। इनको निलंबित करके हत्‍या का मुकदमा चलाना चाहिए। जिससे लोगों को इंसाफ मिल सके और आने वाले दिनों में कोई इस तरह संविधान के खिलाफ और गैरकानूनी घटना को अंजाम न दे सके। अखिलेश ने कहा कि ये लड़ाई दिल्‍ली और लखनऊ की है। वे दिल्‍ली पहुंचे जिस रास्‍ते, लखनऊ वाले भी उसी रास्‍ते दिल्‍ली पहुंचना चाहते हैं। कमेंट पर भड़के अखिलेश यादव मंगलवार को जब लोकसभा में संभल हिंसा पर बोल रहे थे उसी वक्‍त सत्‍ता पक्ष की ओर से किसी ने कोई कमेंट किया जिस पर वह भड़क गए। अखिलेश ने कहा कि ‘हम बनते तो बहुत कुछ हैं।’ इसके बाद वह फिर मुस्‍कुरा दिए और संभल की घटना पर बोलना शुरू कर दिया। लोकसभा में उनके ठीक पीछे की सीट पर संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बैठे हुए थे। गिरिराज सिंह और पीयूष गोयल ने टोका अखिलेश ने संभल हिंसा पर बोलना शुरू किया तो सत्‍ता पक्ष की ओर से भी टोका-टाकी होने लगी। बेगूसराय से भाजपा सांसद गिर‍िराज सिंह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल उन्‍हें टोकने लगे। अखिलेश ने इस टोका-टाकी पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया और संभल पर अपनी बात रखते रहे।

गूगल मैप ने एक बार फिर दिया धोका, शॉर्टकट के चक्कर में नहर में गिरी कार, बाल-बाल बचे युवक

बरेली बरेली में एक बार फिर गूगल मैप दगा दे गया। दरअसल कोहरे के कारण गूगल मैप लगाकर पीलीभीत की ओर जा रहे युवकों की कार शॉर्टकट के चक्कर में नहर में जा गिरी। गनीमत रही कि कार में सवार किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई। उधर, सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने क्रेन मंगाकर कार बाहर निकलवाई। बता दें कि इससे पहले 24 नवंबर को अधूरे पुल से कार गिरने से तीन युवकों की मौत हो गई थी। इज्जतनगर इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि सोमवार रात करीब तीन बजे कानपुर में औरैया निवासी दिव्यांशु पुत्र महेंद्र प्रताप सिंह अपने दो दोस्तों के साथ कार से पीलीभीत जा रहे थे। कोहरा ज्यादा होने के कारण उन लोगों ने गूगल मैप लगा रखा था। इज्जतनगर में कलापुर पुलिया के पास गूगल ने शॉर्टकट दिखाया तो उन लोगों ने कार नहर वाले रास्ते पर मोड़ दी। लेकिन कुछ दूर चलने के बाद ग्राम बरकापुर तिराहा की सड़क का कटान होने की वजह से कार नहर में पलट गई। गनीमत रही कि नहर में पानी नहीं था और कार की रफ्तार तेज नहीं थी, जिसके चलते किसी को चोट नहीं लगी। उन लोगों ने कार निकालने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली तो यूपी 112 को फोन किया। इसके बाद पुलिस क्रेन लेकर पहुंची और उन लोगों की कार बाहर निकलवाई। अधूरे पुल से कार गिरने से तीन युवकों की चली गई थी जान फरीदपुर के खल्लपुर में 24 नवंबर को अधूरे पुल से कार गिरने के कारण तीन युवकों की मौत हो गई थी। तीनों शादी में शामिल होने जा रहे थे और गूगल मैप देखकर निर्माणधीन पुल पर चढ़ गए थे। इस हादसे के 6 दिन बाद बदायूं पुलिस ने गूगल को नोटिस भेजा । साथ ही पुलिस ने गूगल से उस क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक का नाम और पता साझा करने की मांग की है, जहां यह हादसा हुआ था। गूगल से जवाब मिलने के बाद पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।

I am sorry हरदोई एसपी नीरज ने कैमरे पर माफी मांगी, बोले- ऐसा फिर कभी नहीं होगा

हरदोई   उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पुलिस कप्तान ने कुछ ऐसा किया कि लोग कह रहे हैं अधिकारी हो तो ऐसा. दरअसल एक मामले में युवती को असंवदेनशील तरीके से उनके सामने लाया गया. जिसकी वजह से पहले तो उन्होंने पुलिसकर्मियों से नाराजगी जताई और फिर बाद में वीडियो जारी कर माफी मांगी. जानकारी के मुताबिक, एक हादसे में घायल हुए भाई-बहन पुलिस से इंसाफ की मांग कर रहे थे तभी भाई अपनी बहन को लेकर एसपी ऑफिस आया. बहन एक्सीडेंट में इतनी चोटिल हो गई थी कि चलने की स्थिति में नहीं थी तभी वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया और अंदर नहीं आने दिया. इस दौरान चादर के सहारे युवती को एसपी के सामने लाया गया. युवती को इस तरह अपने सामने पेश किए जाने से कप्तान ने भी नाराजगी जताई और पीड़ितों ने भी इसे सही नहीं ठहराया. इसी मामले में एसपी नीरज सिंह जादौन ने वीडियो जारी कर माफी मांगी. हरदोई पुलिस की ओर से जारी वीडियो में एसपी कह रहे हैं, “आज हरदोई पुलिस ऑफिस में एक्सीडेंट में घायल एक महिला को असुविधा का सामना करना पड़ा. इस बात को लेकर मुझे बहुत दुख है. मैं हरदोई पुलिस चीफ या पुलिस कप्तान होने के नाते इस महिला से क्षमा मांगता हूं. साथ ही साथ मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि इस तरह की घटना की रिपीट नहीं होने दी जाएगी. हरदोई पुलिस को अत्यंत संवेदनशील बनाने का पूरा प्रयास करूंगा.” 27 अक्टूबर को हुआ था एक्सीडेंट उन्होंने आगे इस घटना के बारे में बताते हुए कहा कि 27 अक्टूबर को एक एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें 28 अक्टूबर को थाना लोनार में सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया था, इसमें जांच जारी है. आप सभी को फिर आश्वस्त करता हूं कि आज की जो घटना हुई है, इसको लेकर हरदोई पुलिस के बारे में कोई राय नहीं बनाएं. इस तरह की घटना रिपीट नहीं होने दी जाएगी. ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि कोई आईपीएस अधिकारी पुलिसकर्मियों की असंवेदनशीलता के लिए खुद ही आगे बढ़कर माफी मांगे, लेकिन हरदोई के पुलिस कप्तान नीरज कुमार जादौन पुलिसकर्मियों के कृत्य को अपनी गलती मानी और इस पर वीडियो बनाकर पोस्ट किया. ये सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बन गया है.      

महाकुंभ आने वाले श्रद्धालु अब एप के माध्यम से कर सकेंगे ई रिक्शा और ई ऑटो बुक

प्रयागराज. महाकुंभ मेला 2025 में आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा के लिए योगी सरकार कटिबद्ध है। सरकार के इस प्रयास को सार्थक बनाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें सरकारी परिवहन के साथ-साथ निजी परिवहन सेवा प्रदाता भी पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। इसी क्रम में महाकुंभ हेतु प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर लोकल ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने के लिए ओला और उबर की तर्ज पर एप के माध्यम से ऑनलाइन ई रिक्शा और ई ऑटो बुकिंग की सुविधा का भी लाभ मिलने जा रहा है। इन ई व्हीकल्स के ड्राइवर्स पूरी तरह ट्रेंंड और वेल बिहेव्ड होंगे। साथ ही इसमें पिंक टैक्सी की भी सुविधा प्राप्त होगी, जिसमें महिलाएं चालक होंगी। सबसे खास बात कि श्रद्धालुओं को मनमाना किराया वसूलने वाले रिक्शा चालकों से छुटकारा मिलेगा। 15 दिसंबर से श्रद्धालु और पर्यटक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। महाकुंभ से पहले इस तरह की पहल से श्रद्धालुओं को न सिर्फ सुविधाजनक और सस्ती लोकल राइड का लाभ मिलेगा, बल्कि योगी सरकार के ग्रीन महाकुंभ की अवधारणा को भी समर्थन मिलेगा। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। सरकार की ओर से इन श्रद्धालुओं को प्रयागराज लाने के लिए 7,000 से अधिक रोडवेज बसों और 550 शटल बसों के संचालन का निर्णय लिया गया है, जबकि रेलवे भी करीब 1,000 अतिरिक्त ट्रेनों के साथ ही कुल 3 हजार ट्रेनें चलाने जा रहा है। इसी क्रम में प्रयागराज में श्रद्धालुओं को लोकल ट्रांसपोर्ट की कमी न हो, इसके लिए यूपी के स्टार्टअप कॉम्फी ई मोबिलिटी ने ऑनलाइन ई रिक्शा और ई ऑटो बुकिंग की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। 15 दिसंबर से शुरू हो रही इस सेवा में श्रद्धालु लोकल राइड के लिए ई व्हीकल्स को चुन सकेंगे। खास बात ये है कि सभी ड्राइवरों को आगंतुकों से अच्छा व्यवहार करने की ट्रेनिंग दी जाएगी और जिन श्रद्धालुओं को हिंदी या अंग्रेजी भाषा में दिक्कत है, उनकी सुविधा के लिए सभी ड्राइवरों को गूगल वॉइस असिस्टेंस की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। यह ई व्हीकल्स रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, हवाई अड्डा एवं सभी होटलों से उपलब्ध हो सकेंगे। इसमें महिला ड्राइवर के साथ पिंक सेवा का भी प्रावधान है। शुरुआत में 30-40 पिंक टैक्सी सुविधा प्रदान करने के लिए अवेलेबल होंगी। कॉम्फी ई मोबिलिटी की फाउंडर और डायरेक्टर मनु गुप्ता ने बताया कि महाकुंभ मेले में देश और विदेश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को एक सुविधाजनक, सुरक्षित एवं पर्यावरण हितैषी एप आधारित ई रिक्शा टैक्सी सेवा प्रदान की जाएगी। महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को सुविधा देने के साथ ही सस्ती राइड उपलब्ध कराने के लिए किसी भी ड्राइवर से कमीशन नहीं लिया जाएगा। सुरक्षित राइड के लिए प्रत्येक ड्राइवर और व्हीकल के ओनर का वेरिफिकेशन कराया गया है। 300 ई रिक्शा के साथ पूरे प्रयागराज एवं कुंभ मेला में इसकी शुरुआत की जा रही है। सभी ड्राइवरों को आगंतुकों के साथ अच्छे व्यवहार की ट्रेनिंग दी जा रही है। सभी ई रिक्शा और ऑटो जीपीआरएस सिस्टम से ट्रैक किए जाएंगे, जबकि यह पूरी तरह फिट और कवर्ड भी होंगे। इसका किराया ट्रांसपेरेंट होगा, जो प्रति किमी. के हिसाब से निर्धारित किया गया है। इससे ज्यादा किराया वसूलने वाले रिक्शा चालकों से भी मुक्ति मिलेगी। किसी भी तरह की असुविधा होने पर श्रद्धालु कॉल सेंटर पर शिकायत भी कर सकेंगे। सीईओ आरके चौहान ने बताया कि कॉम्फी ई मोबिलिटी स्टार्टअप इंडिया से मान्यता प्राप्त है। हमारा उद्देश्य अर्बन ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्सी के रूप में प्रस्तुत कर वायु प्रदूषण को कम करना और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। प्रयागराज में होने जा रहे महाकुंभ से इसकी शुरुआत की जा रही है, ताकि इस महापर्व को लोगों के लिए एक यादगार अनुभव बनाया जा सके। महाकुंभ 2025 में पूरे विश्व से सनातनियों के अलावा विभिन्न समुदाय के लोग हिंदू धर्म के सबसे बड़े अनुष्ठान को देखने और समझने के लिए प्रयागराज आएंगे। वह यहां महाकुम्भ के मंथन से निकलने वाले पर्यावरण संरक्षण के संदेश, यहां की संस्कृति एवं अनुभव अपने साथ लेकर जाएंगे। इस आयोजन के बाद इस पहल को हम प्रदेश के अन्य शहरों में लेकर जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने साधा निशाना, सपा-कांग्रेस एक सांपनाथ और तो दूसरा नागनाथ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एक सांपनाथ है, तो दूसरा नागनाथ। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा क‍ि सपा और कांग्रेस ने समाज को डसने का काम किया है। दोनों दल मुस्लिमों को हिंदुओं से लड़ाने का काम कर रहे हैं। देश ने तुष्टिकरण की राजनीति की भारी कीमत चुकाई है, अन्यथा भारत एक विकसित देश होता। कांग्रेस ने काफी अड़ंगा लगाया है। उपमुख्यमंत्री केशव ने कहा कि संभल में दंगा नहीं हुआ है, दो अपराधी दंगाई आपस में लड़े हैं। दो लोग आपस में लड़े हैं, तो यह लोग क्यों कूद रहे हैं। संभल में न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई हो रही थी। उसको लेकर सपा के सांसद और विधायक के लोगों ने बवाल किया। जब संभल में माहौल शांत है, तो माहौल क्यों खराब करना चाहते हो। देश में मोदी की और प्रदेश में योगी की सरकार है। इसमें सुशासन, विकास और आगे बढ़ाने की बात होती है। गुंडा और अपराधी मुक्त प्रदेश को लेकर सरकार काम कर रही है। कोई इसके खिलाफ काम करेगा, तो सरकार और कानून अपना काम करेंगे। केशव प्रसाद ने कहा कि किसान की कोई समस्या है, तो सरकार उसे हल करेगी। अगर कोई किसान की आड़ में कोई काम करेगा तो उसका हश्र हरियाणा में कांग्रेस जैसा होगा। उन्होंने कहा कि संभल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हों या विधायक, इस पर ज्यादा बड़बोलापन न दिखाएं। निर्णय का इंतजार करें। संभल में मृतकों परिवारों को पांच पांच लाख रुपये की सहायता देने पर उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की नीति अपनाकर यह लोग मुस्लिम वोटों की मंडी खड़ी करना चाहते हैं। अभी उपचुनाव में सपा का सूपड़ा साफ हुआ, उससे ये लोग उबर नहीं पा रहे हैं। भाजपा के राज्य में संभल सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को रोकना चाहता था। लेक‍िन कामयाब नहीं हो सका। हरियाणा में आप के साथ गठबंधन टूट गया। महाराष्ट्र में गठबंधन करके लड़े और सूपड़ा साफ हो गया। दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी। इंडी गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है। गठबंधन के नेता झूठ बोलने की मशीन राहुल गांधी और गुंडे माफिया के अगुआ फर्जी पीडीए के नेता अखिलेश यादव की पोल खुल चुकी है।

अब संभल में गरजेगा योगी सरकार का बुलडोजर, DM-SP ने दी चेतावनी

चंदौसी. शहर में करीब 15 दिन तक अतिक्रमण पर बुलडोजर चलता रहा। खुद भी लोग नालों के ऊपर या पालिका की जमीन पर किए गए पक्के निर्माण को तोड़ते रहे, लेकिन जैसे ही डिप्टी कलेक्टर विनय मिश्रा का यहां से स्थानांतरण हुआ न सिर्फ बुलडोजर का पंजा रुक गया, बल्कि हथौड़ा और कुदाल भी शांत हो गए। करीब एक सप्ताह से संभल में मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा होने के कारण अफसर उसमें व्यस्त रहे और अतिक्रमण की जद में आने वाले भी शांत होकर बैठ गए। रविवार की शाम अचानक डीएम व एसपी फव्वारा चौक पर पहुंच गए और उन लोगों को जल्द से जल्द दुकानेंं तोड़ने की हिदायत दी, जिन्होंने तोड़फोड़ के कार्य को रोक दिया था। नवंबर में जब यह अभियान शुरू हुआ था, तो इसके लिए डिप्टी कलेक्टर विनय मिश्रा को कमान सौंपी गई थी। उस समय हालत यह थी कि जिधर बुलडोजर का रुख हो रहा था उधर लोगों के कलेजे कांप उठते थे। नालों पर किया निर्माण स्वयं ही तुड़वाने में लोग रात दिन जुटे रहे। चंद दिनों में ही डेढ़ सौ से अधिक मकान व दुकानों को तोड़ दिया गया। कुछ लोगों को बड़ी इमारतें होने के कारण स्वयं ही तोड़ने के लिए समय दे दिया गया। इसमें गरीबों से लेकर अमीरों तक छोटी दुकानों से लेकर बड़े प्रतिष्ठान तक किसी को रियायत नहीं दी गई। सुबह आठ बजे से शुरू होने वाली तोड़फोड़ की कार्रवाई देर शाम तक चल रही थी। फव्वारा के आसपास नालों पर बनी बड़ी इमारतों को लेकर लगातार चर्चा होती रही। अभी भी लोग यही कयास लगा रहे हैं, कि इन इमारतों को प्रशासन नहीं तुड़वाएगा। तमाम तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों की व्यस्तता के कारण अतिक्रमणकारियों ने भी चुप्पी साध ली थी। अब संभल में शांति व्यवस्था बहाल होने के बाद अफसरों को समय मिला तो शाम को जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया औ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई यहां पहुंच गए। कुछ लोगों ने चि‍ह्नित स्थान से कम अतिक्रमण तोड़कर निर्माण शुरू करा दिया था, जिन्हें फिर से तोड़ने के आदेश दिए गए। इसके साथ ही अपनी दुकान को बचाने में शुरू से ही लगे एक मेडिकल मालिक को भी तत्काल दुकान तोड़ने को कहा गया। चेतावनी भी दी गई कि अगर स्वंय अतिकमण में बनी दुकानें व प्रतिष्ठानों को नहीं तोड़ा गया तो बुलडोजर चलवाने के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी। इस दौरान मौके पर मौजूद पालिकाध्यक्ष के पति को भी शहर में पड़ा मलबा हटवाकर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा गया।  

निकाह में दूल्हे को दहेज में मिले 2.5 करोड़, जूता चुराने के 11 लाख

मेरठ. मेरठ में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर एक बड़े रिसोर्ट में आलीशान निकाह समारोह का आयोजन हुआ। इस निकाह समारोह में सूटकेस में भरकर 2 करोड़ 56 लाख रुपये नकद दहेज में दिए गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वैवाहिक कार्यक्रम में 11 लाख रुपये जूते चुराने की रस्म के नाम पर और आठ लाख रुपये अलग से दिए गए हैं। वायरल वीडियो कर लोगों ने कमेंट किया है कि ऐसे ही लोगों के यहां इनकम टैक्स और ईडी की टीम छापा मारती है। सवाल उठाया है कि इतना कैश कहां से आया और इसका हिसाब-किताब कौन लेगा। मेरठ में एनएच-58 पर एक बड़े रिसोर्ट में चार दिन पहले इस निकाह का आयोजन किया गया था। बारात गाजियाबाद से मेरठ आई थी। निकाह के दौरान दहेज में युवती के परिजनों ने 2 करोड़ 56 लाख रुपये की नकद रकम दी। रकम को बड़े-बड़े सूटकेस में भरकर लाया गया और इन्हें दूल्हे के परिवार को सुपुर्द किया गया। इस दौरान कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। वीडियो में 2.56 करोड़ की रकम होने की बात बताई जा रही थी। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि 11 लाख रुपये जूते चुराने की रस्म और आठ लाख रुपये एक धर्मस्थल के नाम पर दिए गए। वायरल वीडियो पर कमेंट्स कर रहे लोग, क्या होगी कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर लगातार कमेंट आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि इस तरह के लोगों के यहां ही इनकम टैक्स और ईडी का छापा पड़ता है। वायरल वीडियो को लेकर सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना कैश देने वालों ने यह रकम कहां से जुटाई। वीडियो अफसरों तक पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि शादी-विवाह परिवार का निजी और पारिवारिक मामला है। यदि किसी पक्ष से कोई शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जा सकती है। शिकायत के आधार पर ही कार्रवाई संभव है।

महाकुंभ: यात्रियों की सुविधा के लिए इटावा रीजन की करीब 489 बसों को भगवा रंग में रंगने की तैयारी में जुट गया

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जनवरी माह में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ के लिए रोडवेज की बसों को भगवा रंग से रंगा जाना शुरू कर दिया गया है। इटावा रीजन की स्पेशल 410 बसें कुंभ आने जाने वाले यात्रियों के लिए लगाई जायेंगी। इटावा रोडवेज परिक्षेत्र के प्रबंधक उमेश सीएस आर्य ने बताया कि इटावा रीजन में कुल 489 बसें हैं। जिसमें करीब 181 बसें पहले से ही भगवा रंग में रंगी हुई है। 50 अतिरिक्त नई बसें साधारण यात्रियों के लिए मुख्यालय से मांग की गई हैं। करीब 20 दिन चलने वाले महाकुंभ के लिए परिवहन निगम युद्ध स्तर से तैयारियों में जुटा हुआ है। इटावा रीजन से महाकुंभ में 229 बसों का किया जा रहा रंग रोगन इटावा में परिवहन निगम जनवरी से होने वाले महाकुंभ के लिए कुंभ जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए इटावा रीजन की करीब 489 बसों को भगवा रंग में रंगने की तैयारी में जुट गया है। परिवहन विभाग ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इटावा रीजन से महाकुंभ में 229 बसों का रंग रोगन किया जा रहा है। इटावा रीजन क्षेत्र में 181 बसे पहले से भगवा रंग में विभिन्न रूटों पर चलाई जा रहीं हैं। इसी के साथ 100 संविदा चालकों की भर्ती की जानी है। उन्होंने बताया कि इस महाकुंभ मेले में जिले से दूसरे चरण में 22 जनवरी से सात फरवरी तक 229 बसें सीधे प्रयागराज के लिए दौड़ेंगी। वर्तमान समय में सभी बसों पर कायाकल्प का कार्य चल रहा है। इटावा रीजन में 181 बसें पहले से भगवा रंग में विभिन्न मार्गों पर दौड रहीं आपको बता दें कि इटावा रीजन में 181 बसें पहले से भगवा रंग में विभिन्न मार्गों पर दौड रहीं हैं। जिनका कायाकल्प दो चरण में किया जा रहा है। कायाकल्प के बाद सभी बसों का भगवा कलर में रंग-रोगन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इटावा रीजन में 8 डिपो लगते हैं, इसमें इटावा समेत सैफई, मैनपुरी, बेबर, छिबरामऊ, फरुर्खाबाद, शिकोहाबाद फिरोजाबाद हैं। इन सभी डिपो से कुंभ मेले में आवश्यकता अनुसार बसें ली जाएगी। इससे अन्य रूटों पर बसों दिक्कत न हो। साथ ही कुंभ स्नान करने वाले इटावा जिले के साथ आसपास जिले के लोगों को सीधी प्रयागराज सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए 100 अतिरिक्त संविदा चालकों की भी भर्ती की जाएगी, जिसके लिए उनका साक्षात्कार करके उनको ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेजा जा रहा है।

न्यायिक आयोग की टीम ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के पास कोट गर्वी इलाके में हिंसा प्रभावित इलाकों का किया दौरा

संभल उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले महीने शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के दो सदस्यों ने रविवार को मस्जिद सहित शहर के हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। आयोग के प्रमुख एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के पास कोट गर्वी इलाके में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। आयोग के तीसरे सदस्य, पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद रविवार के दौरे के दौरान मौजूद नहीं थे। 24 नवंबर को हुई थी हिंसा आयोग के सदस्यों ने हालांकि सुबह के दौरे के दौरान मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनके साथ मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुनिराज, संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार भी थे। मंडलायुक्त ने शनिवार को बताया था कि अरोड़ा और जैन एक दिन पहले ही मुरादाबाद पहुंच गए थे, जबकि प्रसाद के संभल में उनके साथ शामिल होने की उम्मीद थी। संभल में 24 नवंबर को अदालत के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी और अनेक अन्य घायल हो गए थे। सर्वेक्षण का आदेश एक याचिका पर दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद स्थल पर कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। ‘जांच पूरी तरह से घटनाओं की तह तक पहुंचेगी’ आयोग को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस समय सीमा को बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी। आयोग इस बात की जांच करेगा कि क्या पिछली 24 नवंबर को हुई हिंसक झड़पें स्वतःस्फूर्त थी या किसी सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा थीं। साथ ही स्थिति को संभालने में पुलिस और प्रशासन की तैयारियों की भी जांच होगी। आयोग हिंसा के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का भी विश्लेषण करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की सिफारिश करेगा। आयोग के सदस्य जैन ने कहा कि यह जांच पूरी तरह से घटनाओं की तह तक पहुंचेगी। 

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष से मांगी 10 करोड़ की फिरौती!, पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू हुई

बलिया उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक बड़ी वारदात सामने आई है। जहां बेल्थरा रोड नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता को लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से 10 करोड़ रुपए की फिरौती की धमकी मिली है। उन्हें यह धमकी डाक के माध्यम से एक चिट्ठी भेजकर दी गई थी। दिनेश गुप्ता ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की है और पुलिस द्वारा मामले जांच शुरू कर दी गई है। चिट्ठी में मांगी गई 10 करोड़ की फिरौती बलिया के बेल्थरा रोड नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता को दो दिन पहले डाक से एक चिट्ठी प्राप्त हुई थी, जिसमें बिश्नोई गैंग से जुड़े एक व्यक्ति ने उनसे 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। चिट्ठी में यह भी कहा गया था कि यदि वह यह रकम नहीं देंगे तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद, गुप्ता ने उभांव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शुरू की कार्रवाई रसड़ा क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (CO) मोहम्मद फहीम कुरैशी ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि पुलिस ने इस मामले में शिकायत प्राप्त कर ली है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। जानिए, कौन है दिनेश गुप्ता? दिनेश कुमार गुप्ता एक कारोबारी हैं और उनकी पत्नी रेनू गुप्ता वर्तमान में बेल्थरा रोड नगर पंचायत की चेयरमैन हैं। दिनेश गुप्ता खुद भी दो बार इस नगर पंचायत के चेयरमैन रह चुके हैं। दोनों पति-पत्नी को बीजेपी ने नगर पंचायत के पद के लिए समर्थन दिया था। यह मामला बलिया में लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा की गई रंगदारी की एक बड़ी घटना है, जो पुलिस के लिए एक चुनौती बन गई है।

हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था, कोर्ट पंहुचा मामला

संभल यूपी में संभल जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के बाद सर्वे के दौरान हुआ विवाद अभी सुर्खियों में है। इस बीच बदायूं में नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम जामा मस्जिद विवाद भी कोर्ट में पहुंच गया है। यहां हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। यह मामला फिलहाल फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है जहां तीन दिसम्‍बर को सुनवाई होनी है। बदायूं के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमित कुमार की अदालत ने इस मामले में 30 नवंबर को मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्‍ता की बहस सुनी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख दी है। क्‍या है दावा? यह मामला सबसे पहले 2022 में चर्चा में आया था। तब अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया था कि वर्तमान में जिस जगह पर बदायूं की जामा मस्जिद है वहां पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की इजाजत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जबकि मुस्लिम पक्ष बदायूं जामा मस्जिद के 850 साल पुरानी होने का दावा करता है। जामा मस्जिद पक्ष का कहना है कि इस मामले में हिंदू महासभा को ऐसी याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यहां पूजा-अर्चना की इजाजत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शनिवार को न्यायालय में मस्जिद पक्ष की इंतजामिया कमेटी ने अपनी बहस शुरू की। इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता अनवर आलम ने बहस की, जो आगे भी जारी रहेगी। सरकार की ओर से पूरी हो चुकी है बहस इस मामले में सरकारी पक्ष और पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट भी कोर्ट में पूरी हो चुकी है। मामले में शाही मस्जिद कमेटी की तरफ से भी बहस पूरी कर ली गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख तय की है।

जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाला दुनिया का पांचवां देश बनेगा

लखनऊ डीजल इंजन की तुलना में कम प्रदूषण करने वाली हाइड्रोजन ट्रेन देश में चलाने की तैयारियां तेज हैं। हरियाणा के जींद से सोनीपत तक का मार्ग और 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम स्पीड भी तय है। जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन जाएगा। हाइड्रोजन फ्यूल वाली ट्रेन का डिजाइन अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ) लखनऊ ने तैयार किया है। आरडीएसओ के अधिकारी ने बताया, वंदे भारत ट्रेन इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) चेन्नई में तैयार हुई थी, वहीं हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन पर काम चल रहा है। नमो ग्रीन रेल हो सकता है नाम माना जा रहा है कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का नाम नमो ग्रीन रेल हो सकता है, क्योंकि आरडीएसओ द्वारा लांच किए गए मॉडल ट्रेन सेट पर नमो ग्रीन रेल लिखा हुआ है।  हालांकि, हाइड्रोजन ट्रेन का आधिकारिक नाम अभी फाइनल नहीं किया गया है।आरडीएसओ स्टेडियम परिसर में इनो रेल इंडिया 2024 की प्रदर्शनी में ऑस्ट्रिया, जर्मनी, रूस, जापान देशों सहित 150 से अधिक कंपनियों ने स्टॉल सजाया है। इस दौरान उन्नत तकनीक व नवप्रयोगों पर आधारित रेलवे के समृद्ध भविष्य पर भी चर्चा हुई। साथ ही रेल की दक्षता, सुरक्षा व सुंदरता को बढ़ाने के लिए नवीनतम प्रगति पर तीन दिन तक विमर्श करते रहने का सिलसिला शुरू हो गया है।  प्रदर्शनी में हाई-स्पीड रेल, शहरी जन, भारत में बुलेट और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें, यातायात अनुकूलन के लिए आधुनिक तकनीकें, स्मार्ट रोलिंग स्टाक जैसे विषयों पर सेमिनार और तकनीकी चर्चाएं हुई।  हर दो साल पर होने वाले इस आयोजन का पहला संस्करण 2014 में हुआ था, आरडीएसओ के साथ सीआईआई भी इस आयोजन की भागीदार है। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत 400 किलो हाइड्रोजन भरने की क्षमता 375 किलोमीटर की चार फेरे लगेंगे 89 किमी है सोनीपत से जींद की दूरी 08 कोच की ट्रेन दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन होगी 2,638 यात्रियों की क्षमता के साथ चलाया जाएगा 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से किया जाएगा ट्रायल ट्रेनों में इंवेंट रिकॉर्डर करेगा ब्लैक बॉक्स जैसा काम वंदे भारत, मेट्रो सहित अन्य अत्याधुनिक ट्रेनों के दरवाजे स्वचालित हैं। लोकोमोटिव पायलट ट्रेन रोकने को ब्रेक लगाता है, ब्रेक पलक झपकते ही लगता है। ऐसे ही इलेक्ट्रिक ट्रेनों में पेंटोग्राफ (विद्युतग्राही) बिजली लाइन से जोड़ा जाता है, अगला स्टेशन आने आदि का अनाउंस होता है, यह सारी गतिविधि कम्युनिकेशन सिस्टम से होती है।  जर्मनी की कंपनी ड्यूगान ने तो इससे भी एक कदम आगे इंवेंट रिकॉर्डर भी तैयार किया है, जिसमें ट्रेन के पायलट से लेकर कोच आदि की सारी गतिविधि रिकॉर्ड हो जाएगी। ठीक उसी तरह जैसे हवाई जहाज में ब्लैक बॉक्स किसी भी हादसे का सबसे बड़ा गवाह होता है। ड्यूगान के सेल्स व मार्केटिंग उपाध्यक्ष जीवित वशिष्ठ ने बताया कि यह जर्मनी की कंपनी है, जो ट्रेनों व यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नए-नए कम्युनिकेशन सिस्टम तैयार कर रही है।

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