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श्रावस्ती में तेज रफ्तार XUV ने टैम्पो को मारी टक्कर, पांच लोगों की मौत, 6 गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में कराया भर्ती

श्रावस्ती श्रावस्ती में शनिवार सुबह सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। बौद्ध परिपथ पर मोहनीपुर चौराहे के पास तेज रफ्तार महेंद्रा एक्सीयूवी वाहन ने आगे जा रहे टैम्पो को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद दोनों वाहन सड़क के बगल बने नाले को पार करते हुए करीब 10 फीट गहरे खड्डे में गिर गए। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। बहराइच की ओर से महेंद्रा एक्सीयूवी वाहन में सवार लोग बलरामपुर की ओर जा रहे थे। सड़क पर आगे टैम्पो वाहन जा रहा था। तेज रफ्तार एक्सीयूवी ने अनियंत्रित होकर टैम्पो को टक्कर मार दी। हादसा इतना जोरदार था कि दोनों वाहन सड़क से दूर गहरे खड्डे में गिर गए। हादसे में दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती इस पर सवार इकौना के पांडेयपुरवा निवासी सूबेदार, शिवराम, लल्लन, बहराइच जिले के धरसवां निवासी नागेश्वर प्रसाद, मुरलीधर, पयागपुर के वीरपुर सेनवाहे निवासी शाकिरा बानो, रफीक, बस्ती जिले के नौव्वा गांव निवासी चालक विजय चौधरी, सोहराब व इकौना के बरईपुर निवासी ननके यादव, गिलौला के मोहम्मदपुर निवासी अध्योध्या प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए।   दो घायलों की रास्ते में हो गई मौत वाहनाें के टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्र हुए। मौके पर पहुंचे तो देखा कि लल्लन, रफीक, ननके की मौत हो चुकी थी। अयोध्या प्रसाद व मुरलीधर की सांस चल रही थी। इन दोनों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भिनगा भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही इनकी भी मौत हो गई। चार लोगों को इकौना में कराया गया भर्ती उधर, छह घायलों में से दो का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। चार घायलों को इकौना सीएचसी में भर्ती कराया गया है। एसपी घनश्याम चौरसिया ने टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने सीएचसी पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। सीएमओ डॉ. एपी सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों के हालत की जानकारी ली।

यूपी बार काउंसिल ने प्रदेश भर के वकीलों से से आपराधिक रिकॉर्ड का विवरण मांगा

इटावा इटावा बार काउंसिल उत्तर प्रदेश आपराधिक प्रवृत्ति के अधिवक्ताओं की सूची तैयार कर उन पर कार्यवाही की तैयारी में जुटी है। यूपी बार काउंसिल ने प्रदेश भर के जिला जज, जिला बार, जिलाधिकारी और एसएसपी से विवरण मांगा है। बार काउंसिल ने प्रदेश भर के अधिवक्ताओं के खिलाफ एक से अधिक आपराधिक दर्ज मामलों का विवरण दस दिवस के अंदर मांगा है। ऐसे में इटावा जिला बार से भी अधिवक्ताओं से मुकदमों का विवरण देने का अनुरोध किया गया है। विवरण न देने पर कार्यवाही की भी बात कही है। इटावा यूपी बार काउंसिल के निर्देश पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने जिले के वकीलों को पत्र लिखकर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का विवरण मांगा है।इस संबंध में यूपी बार काउंसिल ने जिला जज, जिला अधिकारी व एसएसपी को भी पत्र लिखा है। इटावा बार में करीब 1400 सौ अधिवक्ता है, जिनमें से 900 ही अधिवक्ताओं का सीओपी जारी हुआ हैं। इनमें महिला अधिवक्ता भी शामिल हैं। बार काउंसिल उत्तर प्रदेश की 29 सितम्बर को सामान्य बैठक हुई। जिसमें यह निर्णय पारित किया गया कि प्रदेश भर के सभी अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों का विवरण प्राप्त कर आपराधिक प्रवृत्ति के अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। इटावा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह गौर ने बताया कि यूपी बार काउंसिल ने सभी जिले के बार अध्यक्षों को पत्र लिखकर जिलों में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों के खिलाफ आपराधिक दर्ज मामलों का विवरण मांगा है। इस संबंध में उन्होने जिले के सभी अधिवक्ताओं को पत्र के माध्यम से सूचना दी है। यदि किसी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है तो वह अपना विवरण दे दें। जिसे यूपी बार काउंसिल को भेजा जा सके। उन्होंने बताया इस पेशे में कई आपराधिक प्रवृत्ति के अधिवक्ता भी शामिल होकर इस काम को बदनाम करने में जुटे हुए हैं। मेरी खुद की जानकारी में इटावा बार में करीब एक दर्जन ऐसे अधिवक्ता हैं, जिनके ऊपर कई-कई मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे अधिवक्ता गैरकानूनी कार्य करने के लिए अधिवक्ता बने हुए हैं। इस पेशे की छवि धूमिल करने में लगे हुए हैं। इसी के तहत बार काउंसिल उत्तर प्रदेश ने पत्राचार करके ऐसे अधिवक्ताओं की जानकारी मांगी है। उम्मीद है आपराधिक प्रवृत्ति के अधिवक्ताओं के खिलाफ जल्द से जल्द बार काउंसिल कोई निर्णय लेगी।  

भीषण सड़क हादसा: कार ने टेंपो को मारी जोरदार टक्कर, खंती में जा गिरे दोनों वाहन, 5 की मौके मौत

श्रावस्ती जिले में भीषण सड़क हादसा हुआ है. जहां तेज रफ्तार कार ने एक टेंपो को जोरदार ठोकर मार दी. हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही 5 लोगों की मौत हो गई. वहीं 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया. मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. बता दें कि पूरी घटना को नेशनल हाइवे-730 के मोहनीपुर तिराहे पर घटी है. जहां एक तेज रफ्तार जायलो कार ने टेंपो को ठोकर मार दी. इस दौरान कार और टेंपो दोनों सड़क के किनारे खंती में जा गिरे. हादसे में दोनों वाहनों की परखच्चे उड़ गए. घटना में 5 लोगों की जान चली गई औऱ 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. वहीं घटना के बाद आसपास के लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी घायलों को इकौना सीएचसी में भर्ती कराया. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

संभल हिंसा में मारे गए लोगों के परिजन को सपा की सौगात, अध्यक्ष अखिलेश ने पांच-पांच लाख रुपये देने का किया ऐलान

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बीती 24 नवंबर को मस्जिद सर्वे के दौरान बवाल हो गया था। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। वहीं कई लोग घायल भी हुए थे। हिंसा में मारे गए लोगों के परिजन को समाजवादी पार्टी पांच-पांच लाख रुपये देगी। इसकी घोषणा खुद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने की है। बता दें कि सहायता राशि परिजन को जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी। ‘मृतकों के परिजन के साथ हमारी संवेदनाएं’ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संभल में मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में मारे गए लोगों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद करने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी ने मृतकों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद प्रदान करने की मांग की है। सपा सांसद रुचि वीरा ने बताया कि मृतकों के परिजन के साथ पार्टी की संवेदनाएं हैं। सपा नेताओं को किया गया नजरबंद साथ ही बताते चलें कि शनिवार सुबह से पुलिस सपा नेताओं के घर के बाहर पहरा दे रही है। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं को पुलिस द्वारा नजरबंद किया गया है। इस लिस्ट में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, लाल बिहारी यादव और प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल सहित कई नेता शामिल हैं। दरअसल, सपा के डेलिगेशन को संभल जाना था। इससे पहले ही नेताओं को उनके घरों में हाउस अरेस्ट कर लिया गया। संभल जाना था सपा का डेलिगेशन बता दें कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में सपा का 15 सदस्यीय डेलिगेशन आज संभल जाने वाला था। सपा नेता संभल में पीड़ितों से मिलकर जानकारी जुटाने वाले थे। जिसकी जानकारी वह सपा मुखिया के साथ साझा करने वाले थे। उनके निकलने से पहले ही पुलिस उनके घरों के बाहर तैनात मिली। सपा नेता को पार्टी मुख्यालय जाना चाहते थे लेकिन उसपर भी रोक लगा दी गई। जिससे नाराज होकर माता प्रसाद पांडेय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए।

सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में होगी पेश, संभल में शाही जामा मस्जिद के आसपास भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात की गई

संभल संभल में शाही जामा मस्जिद के आसपास भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। हालात सामान्य है और सड़कों पर लोग चहलकदमी करते नजर आ रही है। स्कूल खुले हुए हैं लेकिन इंटरनेट सेवा बंद है। जामा मस्जिद के आसपास और गेट के बाहर देर रात अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। संभल थाने के आसपास हर चौराहे पर पुलिस कर्मी दिख रहे हैं। जुम्मे की आज नमाज है और कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। ऐसे में पुलिस हाई अलर्ट पर है। पुलिस ने मोबाइल सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन कैमरों से मिले वीडियो के आधार पर 100 से ज्यादा आरोपियों को चिह्नित किया है, जिनमें से अब तक 31 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस द्वारा हर आने-जाने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि देखे जाने पर पुलिस फौरन कार्रवाई कर रही है। शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश है कि अगर कहीं भी किसी भी प्रकार की संदिग्ध स्थिति देखने को मिले, तो फौरन कार्रवाई की जाए। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने संभल में पिछले दिनों हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। समिति के गठन का आदेश उत्तर प्रदेश के गृह विभाग द्वारा गुरुवार को जारी किया गया था। राज्य के गृह विभाग के आदेश के अनुसार हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यी समिति को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। समिति के दो अन्य सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और पूर्व आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन हैं। समिति को दो महीने के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। 24 नवंबर की सुबह संभल की शाही जामा मस्जिद का सर्वे किया गया था। पुलिस का कहना है कि इस दौरान मस्जिद के पास अराजक तत्वों ने सर्वे टीम पर पथराव कर दिया। देखते ही देखते माहौल बिगड़ता चला गया। पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अराजक तत्वों को चेतावनी भी दी। हिंसा के दौरान कई लोगों की मौत भी हुई।  

उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विजयी उम्मीदवारों को शपथ दिलाई, मोदी-योगी के नेतृत्व पर जताई निष्ठा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के चलते उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल ने उपचुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद शुक्रवार को विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी विजयी उम्मीदवारों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश के विकास और जनता की आस्था की जीत बताया। जिन नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ली उनमें कुंदरकी से रामवीर सिंह, फूलपुर से दीपक पटेल, खैर से सुरेंद्र सिंह, गाजियाबाद से संजीव शर्मा, कटेहरी से धर्मराज निषाद, मझवां से सुचिस्मिता मौर्य और मीरापुर से रालोद की मिथलेश पाल शामिल हैं। इन सभी उम्मीदवारों ने जनता के विश्वास और समर्थन का धन्यवाद करते हुए अपने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। सभी ने एक स्वर में ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को दोहराया, साथ ही मोदी-योगी के नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताई। शपथ ग्रहण समारोह के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य होना गौरव की बात है। जनता की सेवा का अवसर आपको मिला है। मुख्यमंत्री के कार्यों को लेकर अगर जनता के बीच में जाएं तो हर बार जीत आपको मिलेगी। आपके पास ढाई साल का समय है, उसे जनता के बीच ज्यादा से ज्यादा व्यतीत करें। इसके साथ ही आपकी उपस्थिति विधानसभा में भी दिखनी चाहिए। यहां आपकी परफॉर्मेंस ही जनता के बीच आपकी सक्रियता के संदेश के रूप में जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना सहित कई विधायक मौजूद रहे। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया गया है। उनकी सरकार की जनहितकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व सड़क परियोजनाओं ने लोगों का विश्वास मजबूत किया है। इसके अलावा, प्रदेश में अपराध नियंत्रण और धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार जैसे कदमों ने योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को और बढ़ावा दिया है। परिणामस्वरूप यूपी विधानसभा उप चुनाव में भाजपा और सहयोगी दल रालोद के शानदार प्रदर्शन ने पार्टी के उत्साह में गजब का इजाफा किया है। वहीं, उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के तमाम दावे ध्वस्त हो गए। गठबंधन की तमाम कोशिशों और बड़े बड़े दावों के बावजूद, विपक्षी दल अपनी साख बचाने में नाकाम रहे। भाजपा और सहयोगी दलों की इस जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता का भरोसा योगी सरकार पर कायम है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भाजपा ने प्रदेश में अपनी मजबूत स्थिति का प्रमाण दिया है।

फतेहपुर में दो भीषण सड़क हादसों में चाचा-भतीजे समेत 4 लोगों की दर्दनाक मौत, 6 घायल

फतेहपुर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में तड़के दो भीषण सड़क हादसे हो गए। दोनों हादसे शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए हैं। एक हादसा बाइक और कार के बीच हुई भिड़ंत के चलते हुआ है। वहीं दूसरा हादसा हाईवे किनारे खड़े कंटेनर और पिकअप के बीच हुई भिड़ंत से हुआ है। इन हादसों में चाचा-भतीजे समेत 4 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कैसे हुई चाचा-भतीजे की मौत बता दें कि पहला हादसा कानपुर प्रयागराज हाईवे स्थित थरियांव के बिलन्दा पश्चिमी बाईपास के पास हुआ है। गुरूवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे सदर कोतवाली क्षेत्र के मदारीपुर कला गांव निवासी अनिल कुमार (20) अपने 10 वर्षीय भतीजे पुष्पेंद्र के अलावा परिवार के नीरज, आयुष और श्रवण समेत 5 लोग के साथ बाइक से फरीदपुर गांव शादी समारोह में शामिल होने गए थे। सभी लोग एक ही बाइक पर सवार थे। शादी समारोह से वापस लौटते समय बाइक सवार हाईवे के बीच बने अवैध कट से सड़क पार कर रहे थे। तभी अचानक प्रयागराज की ओर से तेज रफ्तार में आ रही सफारी कार ने बाइक में जोरदार टक्कर मारकर दी। इस हादसे में अनिल और उसके भतीजे पुष्पेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि बाइक पर सवार नीरज, आयुष और श्रवण गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद कार सवार लोग उसे वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गए। एक साथ दो शवों को देखकर मचा कोहराम हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। साथ ही शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जिसके बाद पुलिस ने दुर्घटना की जानकारी परिजनों को दी। अस्पताल पहुंचे परिजनों में एक साथ 2 दो शवों को देखकर कोहराम मच गया। कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर हुआ दूसरा हादसा वहीं, दूसरी घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के कानपुर-प्रयागराज हाईवे स्थित नउवाबाग के पास हुई। शुक्रवार सुबह हाईवे किनारे खड़े कंटेनर में एक तेज़ रफ़्तार पिकअप पीछे से घुस गई। इस हादसे में दो दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि 3 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बता दें कि कानपुर नगर के थाना साढ़ के अरन झामी के रहने वाले अनूप (25) अपने 20 वर्षीय दोस्त गोपाल यादव निवासी हृदयखेड़ा थाना नरवल के साथ गुरुवार की रात एक बारात में शामिल होने गए थे। शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे नव्वाबाग के पास उनकी पिकअप अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े कंटेनर में घुस गई। हादसे में घायल सभी लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

संभल जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट तैयार नहीं! अब 8 जनवरी को सुनवाई करेगा कोर्ट

संभल  उत्तर प्रदेश के संभल में हलचल काफी गरम है। संभल कोर्ट में जामा मस्जिद सर्वे रिपोर्ट पेश की जानी थी, लेकिन कोर्ट कमिश्नर के अनुरोध पर सुनवाई को आगे टाल दिया गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 8 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। 19 नवंबर को संभल कोर्ट ने शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर मामले में कोर्ट कमिश्नर की अगुआई में जांच का आदेश दिया था। कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में वकीलों की टीम ने मस्जिद का सर्वे किया। 1875 में शाही जामा मस्जिद का निर्माण कराया गया है। इस सर्वे में गणेश जी प्रतिमा का जिक्र किया गया था। टीले पर बनी इमारत को लेकर दावे किए गए थे। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर हिंदू पक्ष मंदिर पर मस्जिद होने का दावा कर रहा है। हालांकि, अब कोर्ट कमिश्नर का बयान सामने आया है कि आज वे रिपोर्ट पेश नहीं करेंगे। 8 जनवरी को अब अगली सुनवाई शाही जामा मस्जिद सर्वे के मामले में अब अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। चंदौसी कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से कई सवाल किए गए। मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष से शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर बताने के किए जा रहे दावों का साक्ष्य पेश किया जाए। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट की सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अब आगे सर्वे नहीं होगा। संभल में हिंसा के कारण सर्वे रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। मुस्लिम पक्ष के वकील ने दावा किया कि शाही जामा मस्जिद का अब दोबारा सर्वे नहीं होगा। आगे सर्वे लिए कोर्ट से इजाजत लेनी होगी। वहीं, कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से भी मस्जिद को लेकर कागजात की मांग की गई है। वहीं, कोर्ट कमिश्नर रमेश राघव ने कहा कि हिंसा के कारण रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। इस कारण 10 दिन और समय की मांग की गई। रिपोर्ट के लिए मांगेंगे समय संभल कोर्ट कमिश्नर रमेश राघव ने कहा कि चंदौसी कोर्ट में शाही जामा मस्जिद सर्वे की रिपोर्ट पेश नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट से 10 दिनों का समय मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पूरी करने के बाद ही इसे जमा कराया जाएगा। 19 नवंबर को कोर्ट के आदेश के बाद कमिश्नर टीम ने शाही जामा मस्जिद का जायजा लिया था। 2 घंटे जांच की थी। इसके बाद रविवार 24 नवंबर को सर्वे किया गया। इस दौरान संभल में बवाल मच गया। अब कोर्ट कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। एएसआई के वकील पहुंचे कोर्ट एएसआई के वकील विष्णु गुप्ता संभल जिला कोर्ट पहुंच गए हैं। संभल से आ रही जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को कोर्ट में केवल जामा मस्जिद सर्वे के मुद्दे पर सुनवाई होनी है। इसके अलावा कोई कार्य नहीं होना है। सर्वे रिपोर्ट पेश किए जाने के बीच बढ़ी हलचल के बीच संभल डीएम और एसपी भी कोर्ट पहुंचे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि आज रिपोर्ट को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता है। 1875 के सर्वे रिपोर्ट में क्या? यूपी के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के 1875 सर्वे की रिपोर्ट सामने आई है। इसके तहत दावा किया जा रहा है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था। सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर के चारों तरफ भगवान की आकृतियां दिखाई दी। वहां पर एक गणेश जी की प्रतिमा का जिक्र किया गया है, जिसको नष्ट करने का प्रयास किया गया था।

घंटेभर से बाथरूम में थी नई नवेली दुल्‍हन, बंद था दरवाजा; घरवालों ने खोलकर देखा तो रह गए दंग

बरेली  विवाह के पांच दिन बाद विवाहिता की मृत्यु हो गई। स्वजन के अनुसार नहाते वक्त बाथरुम में गैस गीजर फटने से मृत्यु हुई। पुलिस ने मौत का कारण जानने को शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। बुलंदशहर के गांव काले का नगला निवासी सूरजपाल की बेटी दामिनी का विवाह 22 नवंबर को भोजीपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम पीपलसाना निवासी जसवंत सिंह यादव के बेटे दीपक यादव के साथ हुआ था। ससुराल वालों के अनुसार, बुधवार की सुबह दामिनी नहाने के लिए बाथरूम गई थी, लेकिन एक घंटे बाद तक बाहर नहीं निकली। बाथरूम में बेसुध पड़ी थी दाम‍िनी इस पर उन्होंने बाथरूम का दरवाजा तोड़ दिया। बाथरूम के अंदर देखा तो दामिनी बेसुध पड़ी थी। स्वजन उसे उपचार को एसआरएमएस ले गए, जहां डॉक्‍टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। जसवंत सिंह यादव ने बताया कि उनका बेटा दीपक केंद्रीय मंत्रालय दिल्ली में नौकरी करता है। थाना प्रभारी प्रवीण सोलंकी ने बताया कि दोनों पक्षों के स्वजन ने बताया कि गैस गीजर फटने से दामिनी की मृत्यु हुई है, लेकिन मौत के सही कारणों का पता करने को शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। ममेरी बहन की शादी में आ रहे युवक की हादसे में मौत, पत्नी घायल उधर, रामपुर में ममेरी बहन की शादी में दिल्ली से पत्नी के साथ आ रहे युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि पत्नी घायल हो गई। हादसे से मृतक के घर पर मातम छा गया। थाना पटवाई के रहटगंज गांव निवासी हरकिशोर दिल्ली में रहकर मजदूरी करते थे। पिछले साल 28 नवंबर को दिल्ली के संगम विहार की नीलू से शादी हुई थी। वह पत्नी के साथ दिल्ली में ही रह रहा था। ममेरी बहन की शादी है। शादी में शामिल होने वह ट्रेन से पत्नी के साथ तड़के रामपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। ज्वालानगर तक दोनों पैदल गए और वहां से अपने गांव जाने के लिए पिकअप में बैठ गए। अजीतपुर में एआरटीओ कार्यालय के पास तेज रफ्तार डंपर ने पिकअप को टक्कर मार दी, जिससे दंपति झटका लगने से नीचे गिर गए। डंपर का पहिया हरकिशोर के ऊपर से गुजर गया, जिससे मौत हो गई। पत्नी घायल हो गई। हादसे के बाद चालक डंपर लेकर फरार हो गया। खुशी वाले घर में पसरा मातम सिविल लाइंस पुलिस पहुंच गई। घायल महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जानकारी मिलने पर मृतक के स्वजन आ गए। पिता कृष्णपाल ने बताया कि दोनों ममेरी बहन की शादी में शामिल होने आए थे। इसके बाद घर पर सब मिलकर उनकी शादी की सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन यह हादसा हो गया।

स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया, फायर एनओसी नहीं, सिलेंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल

इटावा उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक दर्जन नवजात बच्चों की मौत के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सभी जिलों में फायर डिपार्टमेंट को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सरकारी और गैर सरकारी संस्थान में निरीक्षण व जांच करने के भी निर्देश मिले हैं। इटावा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में अग्निशमन के नाम पर महज फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) के सहारे सारी व्यवस्था चल रही है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया था। जिला अस्पताल में फायर संबंधित उपकरण लगाने के लिए पहले ही शासन से तीन करोड़ के बजट की स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें करीब सवा करोड़ की राशि स्वीकृत भी हो गई है। लेकिन कार्यदायी संस्था इसका काम कब शुरू करेगी, इसको लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। करीब 29 वर्षों से संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय के पास फायर एनओसी नहीं हैं, जबकि यहां प्रतिदिन तीन से पांच हजार मरीजों का आना जाना रहता है। झांसी में हुए अस्पताल में हादसे के बावजूद जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। आग से सुरक्षित रहने के लिए जिला चिकित्सालय सिर्फ फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) पर ही निर्भर है। जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र लगाने और फायर एनओसी लेने के लिए शासन से करीब तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। इसमें से 124 लाख रुपये कार्यदायी संस्था को स्थानांतरित भी कर दिए गए हैं। लेकिन कार्यदायी साथ यूपीसीएल ने अब तक कोई कार्य शुरू नहीं किया है। जिला अस्पताल में वाटर टैंक, हाइड्रेंट प्वाइंट, ऑटोमेटिक मशीन, अलार्म सिस्टम, स्मोक सिस्टम आदि मशीन लगवाई जानी है। संयुक्त जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि अस्पताल में फायर सिस्टम के लिए शासन ने यूपीसीएल को कार्य दिया है। इस कार्य के लिए करीब तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। सीएमएस ने बताया कि झांसी की घटना से एक सप्ताह पहले ही शासन ने कार्यदायी संस्था को 124 लाख का बजट स्थानांतरित कर दिया है। अग्निशमन यंत्र लगाए जाने के लिए कार्यदाई संस्था को पत्र भी लिखा जा चुका हैं। फिलहाल हमारे अस्पताल में जितने फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) होना चाहिए, उससे अधिक मात्रा में लगे हुए है। उन्होंने बताया एसएनसीयू वार्ड के अलावा जिला अस्पताल में संवेदनशील वार्ड और जरूरत वाले स्थानों पर 15 नए अग्निशामन यंत्रों को लगाया गया है। आने वाले समय में इन अग्निशामक यंत्रों को और लगवाया जाएगा।  

UP के पूर्व विधायक शाहनवाज की स्टील फैक्ट्रियों में हो रही थी बिजली चोरी, पुलिस ने किया अरेस्ट

बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर सदर विधानसभा के पूर्व विधायक शाहनवाज राणा को मंसूरपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 14 साल पुराने बिजली चोरी मामले में शाहनवाज के विरुद्ध कोर्ट से गैर -जमानती वारंट जारी किया गया था। वो कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे। शाहनवाज रालोद से जुड़े हैं। शाहनवाज की स्टील फैक्ट्रियों में हो रही थी बिजली चोरी दरअसल, 2010 में ऊर्जा निगम की टीमों ने बिजली चोरी को लेकर फैक्ट्रियों पर चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान शाहनवाज राणा की स्टील फैक्ट्री में बिजली चोरी पकड़ने पर अवर अभियंता ने मंसूरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था, उसमें शाहनवाज राणा नामजद थे। कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे मुकदमे में शाहनवाज को पहले जमानत मिल चुकी है। यह मुकदमा अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चार में विचाराधीन है। कोर्ट से कई बार शाहनवाज के वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वह पेश नहीं हो रहे थे। इस चलते 19 अक्टूबर को कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था। 6 दिसंबर को होगी सुनवाई गुरुवार को मंसूरपुर पुलिस ने मेरठ रोड स्थित आवास से शाहनवाज राणा को गिरफ्तार किया। मेडिकल टेस्ट कराकर उनको कोर्ट में पेश किया गया। उनके वकील आफताब कैसर का कहना है कि कोर्ट ने जमानत पर उनको रिहा किया है। अब मुकदमे में छह दिसंबर को सुनवाई होगी।

मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल में तीन बार बदलाव किया गया, जब बैठक में समय से पहले पहुंच गए सीएम योगी, मची खलबली

चित्रकूट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कलेक्ट्रेट में होने वाली समीक्षा बैठक में कई अधिकारी समय से नहीं पहुंचे हैं। कारण रहा कि उनके प्रोटोकॉल में कई बार परिवर्तन हुआ और मुख्यमंत्री निर्धारित समय से पहले ही कलेक्ट्रेट सभागार पहुंच गए थे, जिससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल में तीन बार बदलाव किया गया। हर बार समय घटता गया। जिससे कई अधिकारियों भी जानकारी नहीं हो पाई और कलेक्ट्रेट में होने वाली समीक्षा में बैठक में मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद पहुंचे, जिससे उनमें डर लगा रहा कि कहीं कार्रवाई न हो जाए। बिना सूची में शामिल नाम के नहीं जाने दिया गया अंदर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा को देखते हुए कलेक्ट्रेट के दोनों गेटों में पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। वह सूची में शामिल नाम वाले अधिकारी को ही अंदर जाने दे रहे थे। बिना सूची में नाम वाले किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया, जिससे कई अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा।

बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी?: अखिलेश यादव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल की हिंसा के बाद सियासी बयानबाजी और पोस्टरवार भी शुरू है। एक तरफ प्रशासन ने घटना में शामिल उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की है। वहीं दूसरी तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर पूछा है जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को संभल हिंसा को लेकर एक तस्वीर जारी की है जिसमें सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन के साथ अन्य लोग भी दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो पहले पहल फसाद की वजह बने, उनकी तस्वीरें कब लगेंगी? दरअसल हिंसा के तीन दिन बाद बुधवार को पुलिस की ओर से जारी किए गए पोस्टरों में अधिकतर उपद्रवी अधिकतर नौजवान दिख रहे हैं। सभी मुंह बांधे हुए हैं। उनके हाथ में ईंट पत्थर भी नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिसमें महिलाएं पत्थर चलाती नजर आ रही है। हालांकि उनके पोस्टर जारी नहीं हुए हैं। बवाल के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी लगातार कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं। सांसद जियाउर्रहमान बर्क को भी 168 का नोटिस तामील कराया गया था। वीडियो, सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज से आरोपियों को चिह्नित किया गया। एसपी ने कहा कि किसी भी निर्दोष को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन जो लोग उपद्रव में शामिल रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। एसपी ने लोगों से उपद्रवियों की सूचना देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें इनाम भी दिया जाएगा। ज्ञात हो कि बीते रविवार को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा मामले में चार लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसवाले घायल हो गए। इसको लेकर पुलिस ने पत्थरबाजी करने वाले की पहचान की है और इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है।  

हटाने गए थे अतिक्रमण, इस दौरान थाना प्रभारी रतन कुमार पांडेय ने एक युवक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मार दिया

देवरिया उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के एक इलाके में अतिक्रमण हटाने के दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब थाना प्रभारी रतन कुमार पांडेय ने एक युवक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मार दिया। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस टीम अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने आई थी और युवक ने विरोध किया था। घटना के अनुसार, पुलिस और प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए शहर के एक व्यस्त इलाके में पहुंची थी। इस दौरान कुछ लोग विरोध करने लगे, और एक युवक ने पुलिस से बहस करना शुरू कर दिया। युवक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही थी, लेकिन युवक ने इसके विरोध में तीखी टिप्पणी की और पुलिस अधिकारियों के आदेशों का पालन करने से इनकार किया। इस पर गुस्साए SHO रतन कुमार पांडेय ने युवक को थप्पड़ मार दिया। वीडियो हुआ वायरल यह घटना मौके पर मौजूद लोगों ने देखी, और जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे जिले में हड़कंप मच गया। वीडियो में साफ तौर पर SHO को युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और SHO के व्यवहार को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोगों ने SHO के व्यवहार की आलोचना की है, तो वहीं कुछ ने इसे परिस्थितियों के तहत उचित कदम माना है।

योगी का चलेगा डंडा सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को वापस करना होगा वेतन

एटा   उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एटा और कासगंज जिलों के कलेक्टर कार्यालय में 1993 और 1995 के बीच फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 24 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है. इन सभी पर राजस्व परिषद के फर्जी आदेश के जरिए नौकरी पाने का आरोप है. 1995 में हुई थी फर्जी नियुक्ति बताया गया है कि 1995 में एटा के तत्कालीन डीएम मेजर आरके दुबे को एक पत्र मिला, जिसमें 24 लोगों की नियुक्ति का आदेश दिया गया था. इस आदेश के आधार पर नियुक्तियां की गईं. कुछ वर्षों बाद शिकायत हुई कि ये आदेश फर्जी था. इसके बाद जांच शुरू हुई और राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था.   फाइलें दबाकर टाल दिया गया था मामला इस मामले में लंबे समय तक फाइलें दबाकर मामले को टालने की कोशिश की गई, लेकिन 2019 में फिर से शिकायत होने पर जांच में बड़ा खुलासा हुआ. जांच के दौरान सामने आया कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिए थे. डीएम की गहन जांच के बाद एसआईटी गठित की गई. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में 30 कर्मचारियों की संलिप्तता पाई, इसमें 19 रिटायर हो चुके थे, जबकि चार अभी भी कार्यरत थे. सरकार ने इन्हें बर्खास्त कर रिटायर हो चुके कर्मचारियों से भी वेतन और अन्य लाभों की रिकवरी के आदेश दिए हैं.  

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