LATEST NEWS

राहुल गांधी ने कहा- सभी क्षेत्रवासियों ने मिल कर बहुत प्यार दिया और पूरे हक़ के साथ अपनी समस्याएं बताई

रायबरेली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचे। यहां पर राहुल गांधी कलेक्ट्रेट परिसर में बचत भवन में आयोजित दिशा बैठक (जिला विकास समन्वय व अनुश्रवण समिति) में भी शामिल हुए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इसकी जानकारी दी। राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, “रायबरेली से मेरा रिश्ता चाहे जितना भी पुराना हो, हर बार पहुंच कर और भी गहरा हो जाता है। सभी क्षेत्रवासियों ने मिल कर बहुत प्यार दिया और पूरे हक़ के साथ अपनी समस्याएं बताई।” उन्होंने आगे लिखा, “सांसद के रूप में आज रायबरेली की पहली ‘दिशा’ कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पूरे क्षेत्र की परेशानियों और प्रगति कार्यों पर चर्चा की। साथ ही नवनिर्मित शहीद चौक एवं सड़कों का अनावरण भी किया। रायबरेली ने मुझे अपनी आवाज बनाकर सम्मान दिया है। उनकी जरूरतों की पूर्ति, समृद्धि और समस्याओं को हल करने के लिए हमेशा तत्पर हूं।” बता दें कि राहुल गांधी बैठक में शामिल होने से पहले लखनऊ-रायबरेली सीमा पर बने चुरुवा हनुमान मंदिर पहुंचे थे। जहां उन्होंने हनुमान जी के दर्शन किए। इसके बाद वह बछरावां पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद सुबह 10:45 बजे वह रायबरेली शहर पहुंचे, जहां उन्होंने फिरोज गांधी डिग्री कालेज चौराहा पर बने शहीद चौक का उद्घाटन किया। इसके बाद इसके बाद कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनाई गईं 70.900 किमी की 9 सड़कों का लोकार्पण भी किया। सड़क निर्माण में फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक का उपयोग हुआ है।

योगी आदित्यनाथ बोले- जातियों में ना बंटिए, ऐसा करने पर पत्थरबाज झाड़ू लगाते हुए दिखाई देंगे

झारखंड उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को झारखंड में ताबड़तोड़ रैलियां कीं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदावरों के लिए वोट मांगा। बरकागांव विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने जातियों में ना बंटने की अपील करते हुए जनता से अपनी ताकत का अहसास कराने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर पत्थरबाज झाड़ू लगाते हुए दिखाई देंगे। यूपी के मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में जिस तरह डेमोग्राफी बदली जा रही है, आने वाले समय में लोग अपने घर में शंख और घंटी नहीं बजा पाएंगे। योगी ने कहा कि पत्थरबाज पहले कश्मीर में भी थे। याद करना आज सभी पत्थरबाज राम नाम सत्य है की यात्रा में जा चुके हैं। 2017 के पहले ये यूपी में भी थे। इनका आका उत्तर प्रदेश को लूटते थे, कोई खनन माफिया के रूप में कोई भूमाफिया के रूप में, कोई संगठित माफिया के रूप में लूट मचाते थे। ये पर्व त्योहारों में विघ्न-बाधा डालते थे। पत्थरबाज या तो यूपी छोड़ चुके हैं या जहन्नुम की यात्रा चुके हैं। अन्याय और अत्याचार को जन्नत कहां मिलेगा, उसके लिए तो जहन्नुम की यात्रा ही होनी है। अब उत्तर प्रदेश में पर्व त्योहार में कोई विघ्न बाधा नहीं होती है। योगी ने कहा, ‘ताकत का अहसास कराइए और ताकत का अहसास कराएंगे तो ये पत्थरबाज आपके लिए सड़कों पर झाड़ू लगाकर रास्ता साफ करते हुए दिखाई देंगे। यह बजरंगी पताखा हर घर में दिखाई देगी। इस ताकत का अहसास कराने के लिए ही यह चुनाव आपके पास है। बंटिए मत जातियों में। जाति के नाम पर बांटने वाले लोग वही हैं जो आपको जाति, क्षेत्र और भाषा के रूप में बाटेंगे और जब आप पर संकट आएगा तो कोई आपके साथ खड़ा नहीं होगा। यही कांग्रेस करती आई है लगातार 1947 से, यही कांग्रेस ने देश को जख्म दिए। यह आरजेड़ी ने बिहार और झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड के साथ कर रही है।’ यूपी के सीएम ने ‘कटेंगे तो बटेंगे’ नारे को समझाते हुए एक रहने की अपील की तो बांग्लादेशी घुसपैठ से डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर सतर्क भी किया। उन्होंने कहा, ‘जिस तरह झारखंड में घुसपैठ करा रहे हैं और इसी तरह डेमोग्राफी चेंज होती रही। आज ये लोग यात्रा रोक रहे हैं, आने वाले समय में घरों में घंटी और शंख भी नहीं बजाने देंगे। इसलिए आवश्यकता है कि भाजपा को लाइए। एक रहिए और नेक रहिए। मैं तो बार-बार कहता हूं देश का इतिहास गवाह है, जब भी जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे हैं तो निर्ममता से कटे भी हैं। हम बार-बार इस बात को कहते हैं कि जातियों के नाम पर मत बंटिए। ये बांटने वाले लोग देश को धोखा दे रहे हैं।’ योगी ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार में बेटी और बहन सुरक्षित नहीं है। माफिया हर जगह हावी हैं। कहीं बांग्लादेशी घुसपैठ कहीं रोहिंग्या घुसपैठ। दुस्साहस की पाराकाष्ठा तब होती है जब पर्व और त्योहार में पथराव किया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में भी ऐसा होता था लेकिन अब ना कर्फ्यू ना दंगा, यूपी में सब चंगा।

एकता मर्डर केस में नए खुलासे-मर्डर वाले दिन कातिल जिम ट्रेनर विमल सोनी ने एकता को 9 बार कॉल किया था

कानपुर कानपुर के एकता गुप्ता मर्डर केस में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब जानकारी मिली है कि मर्डर वाले दिन कातिल जिम ट्रेनर विमल सोनी ने एकता को 9 बार कॉल किया था। ये कॉल उसने तड़के 4 से 6 बजे के बीच किए थे। कॉल डिटेल चेक करने पर पता चला है कि विमल सोनी से उस दिन एकता ने बात नहीं की थी। उसने विमल का फोन ही रिसीव नहीं किया था, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि उसके कॉल्स के दबाव में ही वह जिम पहुंची थी। वह उस दिन तब भी जिम गई, जबकि एकता के पति और बच्चों ने मना किया था। फिलहाल पुलिस विमल सोनी से पूछताछ के लिए सीडीआर के आधार पर भी सवाल तैयार कर रही है। इस बीच पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि एकता गुप्ता की हत्या से पहले विमल सोनी ने उसे जोरदार मुक्के भी जड़े थे। उसने एकता के चेहरे पर ऐसे वार किए थे कि नाक से जबड़े के बीच ही 20 फ्रैक्चर हो गए। इसके बाद गला दबाकर उसकी जान ही ले ली। इस तरह विमल सोनी का दावा गलत साबित होता दिख रहा है, जिसका कहना था कि उसने एक मुक्का मारा था, जो एकता के गले पर लगा था। इसी के चलते उसकी जान चली गई। विमल सोनी उस जिम में ट्रेनर था, जहां एकता गुप्ता एक्सरसाइज के लिए जाती थी। इसी दौरान दोनों के बीच अवैध संबंध पनप गया था। फिर जब विमल की शादी तय हुई तो एकता इसका विरोध कर रही थी। विमल सोनी का दावा है कि एकता चाहती थी कि दोनों का रिलेशन चलता रहे और वह शादी भी न करे। इसी के चलते वह छुटकारा पाना चाहता था और अंत में गुस्से में कत्ल ही कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने कहा, ‘यह पता चला है कि उसके नाक के पास कई बार वार किया जाए। इसके चलते नाक से लेकर जबड़े तक उसकी हड्डियों में 20 फ्रैक्चर हैं।’ अब एकता गुप्ता के शव के अंशों को डीएनए रिपोर्ट के लिए भेजने की तैयारी है। इसके अलावा विमल सोनी की पुलिस हिरासत भी अदालत से मांगी जाएगी। पुलिस ने तैयार किए 50 सवाल, रिमांड में पूछे जाएंगे पुलिस ने विमल सोनी को रिमांड में लेकर पूछताछ का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। कुल 50 सवाल विमल सोनी से पूछे जाएंगे। राहुल गुप्ता की पत्नी एकता 24 जून के बाद से ही लापता थी, जो ग्रीन पार्क स्टेडियम में स्थित जिम में गई थी। वहां से निकलने के बाद वह घर नहीं पहुंची थी। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पति राहुल ने दर्ज करा दी थी, जिसकी लंबी पड़ताल चली। अंत में 26 अक्टूबर को सोनी ने कबूला की उसने ही एकता को मारा था। फिर उसके ही कहने पर पुलिस ने शव को ऑफिसर्स क्लब के पास एक प्लॉट से बरामद किया, जिसे उसने गाड़ दिया था।

प्रेम प्रसंग के चलते बदायूं की नर्स का अपहरण, पीटने के बाद आरोपियों ने कार से फेंका, पुलिस ने की रिपोर्ट दर्ज

बरेली एक मेडिकल कॉलेज में तैनात नर्स के साथ चलती कार में उसके प्रेमी ने दोस्त के साथ मिलकर पहले पीटा फिर रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या करने की कोशिश की। जब नर्स ने विरोध किया तो टोल प्लाजा के आगे चलती कार से उसे नीचे फेंक दिया…आरोपी मौके से फरार हो गया है। नर्स को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। वहीं नर्स की बहन की शिकायत पर पुलिस ने प्रेमी और दोस्त के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। पूरे मामले की जांच पड़ताल शुरू की है। बता दें कि बदायूं के उझानी क्षेत्र की रहने वाली नर्स बरेली के इज्जत नगर  क्षेत्र में एक किराए के कमरे में बहन के साथ रहती है। पीड़िता भोजीपुरा क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज में नर्स है। नर्स का पिछले 6 साल से बदायूं के ही कादरचौक के रहने वाले अभय प्रताप से प्रेम प्रसंग चल रहा था। अभय ने शादी का वादा कर नर्स के साथ कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए। वही देर रात अभय प्रताप अपने दोस्त मीनू के साथ कार में उससे मिलने के लिए मेडिकल कॉलेज के पास पहुंचा था। जिसके बाद आरोपी ने पीड़िता को जबरन अपनी कार में बिठा लिया इसके बाद भोजीपुरा टोल प्लाजा के आगे ले जाकर उसके साथ जमकर मारपीट की। विरोध करने पर नर्स को गंदी-गंदी गालियां दीं। इतना ही नहीं रस्सी से उसका गला दबाकर हत्या की कोशिश की। जब नर्स ने विरोध किया तो चलती कार से उसे नीचे फेंक दिया। नर्स को गंभीर चोटें आई हैं और वह बेहोश हो गई। राहगीरों ने घायल हालत में पड़ा देख पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है। जहां उसका इलाज चल रहा है।

एक ही परिवार के 4 लोगों की सामूहिक हत्या, वाराणसी में दिल दहलाने वाली घटना

वाराणसी वाराणसी में भेलूपुर के भदैनी इलाके में तांत्रिक के कहने पर शराब कारोबारी राजेंद्र गुप्ता ने अपने पूरे परिवार का खात्मा कर दिया है। पत्नी नीतू गुप्ता (42), बेटा नवनेंद्र (20) और सुबेंद्र (15), बेटी गौरांगी (16) की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस कारोबारी की तलाश कर ही रही थी कि उसकी भी लाश दूसरे घर के पास मिल गई। बगल में पिस्टल भी मिला है। माना जा रहा है कि उसने आत्महत्या कर ली है। जघन्य हत्याकांड की जानकारी मिलते ही सनसनी फेल गई। बताया जाता है कि इस घर में इससे पहले भी पांच हत्याएं हो चुकी हैं। पिता, दो गार्ड, भाई और उसकी पत्नी की भी हत्या हुई थी। पड़ोसियों की मानें तो हत्या में कारोबारी जेल भी गया था। पुलिस अब उस तांत्रिक की तलाश कर रही है जिसके कहने पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया है। पड़ोसियों के अनुसार तांत्रिक ने कारोबारी से कहा था कि उसकी पत्नी कारोबार में बाधा है। इस कारण वह दूसरी शादी के चक्कर में भी पड़ा था। अक्सर इसे लेकर पति-पत्नी में झगड़ा होता था। घर में कारोबारी की मां भी थी लेकिन काफी बुजुर्ग होने के चलते वह ठीक से न तो बोल पा रहीं और न चल-फिर पाती हैं। अब वह ही अकेली बची हैं। कारोबारी राजेंद्र गुप्ता को पैसे की कोई कमी नहीं थी। उसके पास शहर में कुल चार घर हैं। दो घर तो 50-50 कमरों के हैं। जिस घर में हत्यकांड को अंजाम दिया गया है उसमें 20 कमरे का किराया 80 हजार आता था। 30 कमरों का रेंट दो लाख से ज्यादा था। इसके अलावा भदैनी में ही दूसरे घर से भी करीब दो लाख से ज्यादा रेंट मिलता था। इसके अलावा उसके पास देसी शराब के ठेके और रिक्शा का गैराज है। 100 रिक्शा से ज्यादा है। जघन्य वारदात का पता मंगलवार की दोपहर तब लगा जब नौकरानी रेनू वर्मा घर पर काम करने के लिए आई। नौकरानी ने बताया कि मैं यहां 5 साल से काम कर रही हूं। सबकुछ अच्छा चल रहा था। सोमवार शाम को मैं खाने बनाने आई तो घर में सिर्फ दो बच्चे थे। मैं खाना बनाकर करीब 6.30 बजे चली गई। इसके बाद सबरे सबसे पहले सफाई करने वाली रीता पहुंची। उसने आवाज दी लेकिन किसी का जवाब नहीं मिलने पर उसने दरवाजा खटखटाया। हल्के से धक्के में दरवाजा खुल गया। देखा तो कमरे में चारों लोगों की लाश पड़ी है। आसपास खून बिखरा था। यह देखते ही रीता बेहोश हो गई। तत्काल पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। बताया जाता है कि मारा गया बड़ा बेटा नवनेंद्र बेंगलुरु में मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर था। वह दिवाली पर छुट्‌टी लेकर घर आया था। घर पर छठ मनाने की तैयारियां चल रही थीं। छोटा बेटा और बेटी डीपीएस में पढ़ते थे।

UP मदरसा एक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मान्यता, जानें अहम फैसले के मायने

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें अदालत ने मदरसा एक्ट को संविधान के खिलाफ बताया था. मदरसा एक्ट पर यह फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनाया है. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला ठीक नहीं था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मदरसा एक्ट को भी सही बताया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के 16 हजार मदरसों को राहत मिल गई है. यानी अब यूपी में मदरसे चलते रहेंगे. यूपी प्रदेश में मदरसों की कुल संख्या लगभग 23,500 है. इनमें 16,513 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं. यानी ये सभी रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा करीब 8000 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं. मान्यता प्राप्त मदरसों में 560 ऐसे हैं, जो एडेड हैं. यानी 560 मदरसों का संचालन सरकारी पैसों से होता है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि फाजिल और कामिल के तहत डिग्री देना राज्य के दायरे में नहीं है. यह यूजीसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है. HC ने क्यों रद्द किया था कानून? मदरसा बोर्ड कानून के खिलाफ अंशुमान सिंह राठौड़ नाम के शख्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. राठौड़ ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी. इसी पर हाईकोर्ट ने 22 मार्च को फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 ‘असंवैधानिक’ है और इससे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है. साथ ही राज्य सरकार को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सामान्य स्कूलिंग सिस्टम में शामिल करने का आदेश दिया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था, ‘मदरसा कानून 2004 धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है, जो भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है.’ अदालत ने ये भी कहा था कि सरकार के पास धार्मिक शिक्षा के लिए बोर्ड बनाने या किसी विशेष धर्म के लिए स्कूली शिक्षा के लिए बोर्ड बनाने का अधिकार नहीं है. क्या है मदरसा एक्ट? उत्तर प्रदेश में 2004 में ये कानून बनाया गया था. इसके तहत मदरसा बोर्ड का गठन किया गया था. इसका मकसद मदरसा शिक्षा को सुव्यवस्थित करना था. इसमें अरबी, उर्दू, फारसी, इस्लामिक स्टडीज, तिब्ब (ट्रेडिशनल मेडिसिन), फिलोसॉफी जैसी शिक्षा को परिभाषित किया गया है. यूपी में 25 हजार मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16 हजार को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा से मान्यता मिली हुई है. साढ़े आठ हजार मदरसे ऐसे हैं, जिन्हें मदरसा बोर्ड ने मान्यता नहीं दी है. मदरसा बोर्ड ‘कामिल’ नाम से अंडर ग्रेजुएशन और ‘फाजिल’ नाम से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री देता है. इसके तहत डिप्लोमा भी किया जाता है, जिसे ‘कारी’ कहा जाता है. बोर्ड हर साल मुंशी और मौलवी (10वीं क्लास) और आलिम (12वीं क्लास) के एग्जाम भी करवाता है.  

उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक पद पर तैनाती के लिए नई नियमावली बना दी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर तैनाती के लिए नई नियमावली बना दी गई है। इसे सोमवार को कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई है। अब डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक मनोनयन समिति का प्रावधान किया गया है। समिति के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर न्यायाधीश होंगे। साथ ही समिति में प्रदेश के मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग और यूपी लोक सेवा आयोग से नामित एक-एक व्यक्ति, अपर मुख्य सचिव गृह और एक रिटायर डीजीपी भी होंगे। न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष का रहेगा नियमावली में तय किया गया है कि डीजीपी पर उसी अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी जिनकी सेवा अवधि कम से कम छह महीने अवश्य शेष हो। इसके साथ ही डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल तक होना चाहिए। डीजीपी की नियुक्ति होने पर उन्हें कम से कम दो साल तक कार्यकाल जरूर प्रदान किया जाए। अगर तैनाती के बाद उनकी सेवा अवधि छह महीने ही शेष है तो सेवा अवधि को बढ़ाया जा सकता है। अगर नियुक्त डीजीपी किसी अपराधिक मामले या भ्रष्टाचार अथवा अपने कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम साबित हुए तो सरकार उन्हें दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा सकती है। डीजीपी को उनके पद से हटाने के लिए संबंधित प्रावधानों में भी हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी होगा। नियमावली के मुताबिक डीजीपी पद पर वे ही अधिकारी चुने जाएंगे जो वेतन मैट्रिक्स के स्तर 16 में पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हो। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में अधिनियम बनाने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका प्रकाश सिंह व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य के मामले में 22 सितम्बर, 2006 में राज्य सरकारों से एक नया पुलिस अधिनियम बनाने को कहा था जिससे पुलिस व्यवस्था को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा जाए। नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और विधि का शासन स्थापित करने में यह व्यवस्था सक्षम साबित हो सके। हाईकोर्ट ने भी आशा की है कि नई नियमावली से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी न हो। नियुक्ति नियमावली-2024 का उद्देश्य यूपी के डीजीपी पद पर उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति हेतु चयन के लिए स्वतंत्र व पारदर्शी तंत्र स्थापित करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उक्त चयन राजनीतिक या कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त है। यूपी में अभी अधिकारी कैसे बनते हैं डीजीपी?   डीजीपी के चयन में अब तक प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार संघ लोक सेवा आयोग को DG पद के सभी अफसर का नाम भेजती है. संघ लोक सेवा आयोग से पहले केंद्र का डिपार्मेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग यानी डीओपीटी तीन सीनियर मोस्ट अधिकारियों का पैनल बनाकर भेजता है, जिनके पास काम से कम 2 साल का कार्यकाल हो. राज्य सरकार की तरफ से उन DG पद के अफसर का नाम नहीं भेजा जाता जिनका 6 महीने या उससे कम वक्त में रिटायरमेंट होना हो. संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा भेजे गए तीन अफसरों के नाम में एक अफसर को डीजीपी बनाया जाता है.   योगी सरकार ने क्यों किया ये बदलाव? उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो कानून व्यवस्था को संभालने की जिस नीति पर सरकार काम कर रही थी उस मानक पर खरा उतरने वाले अफसरों की लगातार कमी महसूस की जा रही थी. सरकार के भरोसेमंद अफसर जूनियर थे जिनको डीजीपी बनाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग के मानक आड़े आते थे. अब कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद संघ लोक सेवा आयोग का दखल खत्म हो जाएगा.   HC के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनी कमेटी चुनेगी DGP अब उत्तर प्रदेश के डीजीपी का चयन हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी. इस कमेटी में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज अध्यक्ष होंगे. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा नामित एक व्यक्ति, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या नामित व्यक्ति, प्रमुख सचिव गृह, एक रिटायर्ड DGP जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस में काम किया हो, यह कमेटी स्थायी डीजीपी का चयन करेगी. कैबिनेट से पारित प्रस्ताव के अनुसार, नई व्यवस्था में बनाए गए डीजीपी का कार्यकाल 2 साल का होगा.

कानुपर में हॉस्पिटल संचालक ने नर्स से की दरिंदगी, मुंह में कपड़ा ठूसा, दुष्कर्म किया

कानपुर यूपी के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहां कल्याणपुर में सोमवार को प्राइवेट अस्पताल संचालक ने नर्सिंग छात्रा के साथ रेप किया। पीड़िता नाइट शिफ्ट में ड्यूटी कर रही थी। घर पहुंचकर पीड़िता ने इसकी तहरीर थाने में दी। जिसके बाद पुलिस एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सचेंडी की रहने वाली एक युवती यहां नर्सिंग कॉलेज में जेएनएम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही है। वह नाना के यहां रहती है। करीब दो महीने से वह पनकी रोड पुलिस चौकी के पास एक निजी अस्पताल में ट्रेनिंग कर रही है। रविवार रात उसकी अस्पताल में ड्यूटी थी। सुबह चार बजे नींद आने पर वह अस्पताल के रेस्ट रूम में लेट गई। इसी दौरान शिवराजपुर निवासी अस्पताल संचालक इम्तियाज वहां पहुंचा। छात्रा को अकेला देख इम्तियाज ने कमरा बंद कर लिया और उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। सोमवार सुबह पीड़िता ने कल्याणपुर थाने जाकर पुलिस से शिकायत की। कल्याणपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार के मुताबिक, पीड़िता की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर रेप के आरोपी इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, पीड़ित छात्रा का मेडिकल करा दिया गया है। इम्तियाज खुद को बताता था सीटू कल्याणपुर में अस्पताल चलाने वाला इम्तियाज इलाके में खुद का नाम सीटू बताता था। बताया जा रहा है कि उसका चाल-चलन अच्छा नहीं था इसलिए वह पहचान छुपाए रखता था। इसकी भी जांच की जा रही है। समझौते का दबाव बनाने का आरोप सूत्रों की मुताबिक पीड़िता ने सुबह थाने जाकर मामले की शिकायत की थी तो पुलिस तत्काल आरोपी को हिरासत में लेकर थाने आ गई। आरोप है कि दिनभर थाने में अस्पताल संचालक और नर्सिंग छात्रा के बीच समझौते की बात चलती रही। पुलिस पर काफी समय तक आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी न करने का आरोप है। हालांकि कल्याणपुर इंस्पेक्टर का कहना है कि तहरीर मिलने के तुरंत बाद ही रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की गई है।

‘ अगर हिंदू जाति में बंटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’, वाराणसी में BJP युवा मोर्चा ने लगाए पोस्टर तो मचा हंगामा

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान “बंटेंगे तो कटेंगे” पर लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य द्वार के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने एक विशाल बैनर लगाया है। इस बैनर पर लिखा है, “हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे… फैसला आपका।” बैनर लगाने वाले ने अपनी तस्वीर और नाम भी इसमें शामिल किया है। विवेक सिंह भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी महानगर अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस बैनर के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अगर हिंदू लोग जातियों में बंटते हैं, तो इसका परिणाम देश के लिए गंभीर हो सकता है। विवेक सिंह ने बैनर के माध्यम से कहा कि हमें एकजुट रहना होगा, अन्यथा हम अपने ही देश में बांग्लादेश जैसे हालात का सामना कर सकते हैं। विवेक सिंह ने कहा कि इस बैनर के माध्यम से वह यह संदेश देना चाहते हैं कि एकजुटता में ही शक्ति है। उनका मानना है कि अगर हिंदू समाज जातियों में विभाजित होता है, तो यह देश के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “हमें सभी हिंदुओं को एकजुट करना चाहिए, ताकि हम किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से बच सकें।” इस बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवेक सिंह की तस्वीर भी लगाई गई है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” वाले बयान के बाद से इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी राज्यों और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर इस नारे के विभिन्न वर्जन दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। भाजपा के इस बैनर ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि यह मुद्दा देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। वहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सियासी हलचल बढ़ चुकी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर पोस्टर वार किए जा रहे हैं।    

UP में 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की तैयारी !

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 27 हजार बेसिक स्कूलों के जल्द बंद होने की खबरों ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अब सरकार की ओर से इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की बाते कहीं जा रही है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि इस संबंध में ऐसी कोई प्रक्रिया गतिमान नहीं है।  बेसिक शिक्षा विभाग के एक्स पर इस संबंध में कई पोस्ट किए गए हैं। पोस्ट के जरिये बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया कि मीडिया में ऐसी खबरें चल रही है। इसमें 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में विलय करते हुए बंद करने की बात की गई है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। साथ ही यह भी साफ किया गया कि किसी भी विद्यालय को बंद किए जाने की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है। ड्राप आउट दर कम करने की कोशिश जारी वहीं विभाग की ओर से बताया गया कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग विद्यालयों में मानव संसाधन और आधारभूत सुविधाओं के विकास, शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने पोस्ट के जरिये बताया कि छात्रों विशेषकर बालिकाओं के ड्राप आउट दर को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयत्नशील है। इसको लेकर समय-समय पर विभिन्न अध्ययन भी किए जाते रहे हैं। इसके साथ ही विभाग ने बताया कि बीते सालों में प्रदेश के विद्यालयों में कायाकल्प, निपुण, प्रेरणा आदि योजनाओं के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और सुधार हुए हैं। विभाग के लिए प्रदेश के छात्रों का हित सर्वोपरि है। बता दें, 50 से कम बच्चों वाले प्राथमिक स्कूलों को बंद कर नजदीकी स्कूलों में मर्ज किये जाने की खबरे चल रही थी। फिलहाल इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। एक्स पर पूछा जा रहा ये सवाल आपके द्वारा जारी खंडन को झूठा करार देते हुए यह कागज वायरल हो रहा है। कागज 13 और 14 नवंबर को आयोजित बैठक को लेकर जारी विस्तृत एजेंडा का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप विद्यालयों को मर्ज करने की विस्तृत रूपरेखा स्पष्ट की गई थी। कुछ कहना चाहेंगे?

उपचुनावों में पूरी तरह योगी की चल रही, मोदी-नड्डा से मुलाकात, मोहन भागवत संग बंद कमरे में चर्चा

लखनऊ  लोकसभा चुनाव 2024 में झटका खाने वाली बीजेपी के लिए यूपी का उपचुनाव प्रतिष्‍ठा का सवाल बन चुका है। 9 सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ स्‍वयं उपचुनाव को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस बार बीजेपी आलाकमान ने योगी आदित्‍यनाथ को खुली छूट दी है। प्रत्‍याशियों के चयन से लेकर तमाम अहम रणनीतिक फैसले योगी के मुताबिक लिए गए हैं। ऐसे में ये उपचुनाव असल मायने में मुख्‍यमंत्री योगी के लिए भी अग्नि परीक्षा जैसी होगी। अचानक दिल्‍ली पहुंच मोदी और नड्डा से मिले एक दिन पहले योगी आदित्‍यनाथ अचानक दिल्‍ली पहुंचे। वह यहां बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मिले। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक उपचुनाव से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होती रही। इसके बाद योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंचे। करीब एक घंटे की बातचीत में चुनावी चर्चा के अलावा महाकुंभ 2025 और 69 हजार शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई। संघ के शीर्ष नेताओं से 45 मिनट तक चली बैठक इससे पहले पिछले हफ्ते मथुरा में राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ यहां संघ के शीर्ष नेताओं से मिलने पहुंचे। करीब 45 मिनट तक इनके बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हरियाणा विधानसभा चुनावों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संघ ने यूपी उपचुनावों को लेकर भी योगी को कई सुझाव दिए। मोहन भागवत से इन मुद्दों पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर उपचुनाव की तैयारियों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि उपचुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने, बूथ प्रबंधन सभी वर्गों के वोटरों को एकजुट करने सहित कई मुद्दों पर दोनों के बीच वार्ता हुई है। लोकसभा चुनाव में अनुकूल प्रदर्शन होने के बाद हरियाणा की सफलता में संघ की अहम भूमिका रही। वहां छोटे समूहों में बैठकें कर लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाई। साथ ही बूथ प्रबंधन में संघ ने अहम भूमिका निभाई। डोर-टू-डोर अभियान चलाकर बीजेपी के लिए माहौल बनाया। अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी तरह का कुछ माहौल यूपी में बनाने को लेकर चर्चा हुई। इन 9 सीटों पर होने हैं उपचुनाव करहल, सीसामऊ, कुंदरकी, गाजियाबाद, फूलपुर, मझवां, कटेहरी, खैर और मीरापुर में 13 नवंबर को उपचुनाव हैं। अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर सीट पर भी उपचुनाव होना है, लेकिन अभी उसकी डेट नहीं घोषित की गई है। इन 10 सीटों में पांच पर सपा का कब्‍जा था। तीन बीजेपी के पास थी। एक निषाद पार्टी और एक रालोद के पास थी। लोकसभा की 80 में मात्र 33 सीटें जीत पाई थी बीजेपी इस साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी यूपी की 80 में से केवल 33 सीटें जीत पाई। साथ ही उसका वोट शेयर भी घटकर 41 फीसदी तक रह गया। ऐसे में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के सामने उपचुनाव जीतने को लेकर बड़ी चुनौतियां हैं। जिस तरह बेहतर प्रदर्शन करते हुए सपा ने 37 सीटों पर जीत हासिल की है, इससे उपचुनाव में भी उसका दावा मजबूत माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के आगरा में बड़ा हादसा: वायुसेना का विमान क्रैश, पायलट समेत 2 लोगों ने खेत में कूदकर बचाई जान

आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में बड़ा हादसा हो गया है. आगरा के कागारौल के सोनिगा गांव के पास वायुसेना का विमान क्रैश हो गया. विमान खाली खेतों में गिरा था. जमीन पर गिरते ही विमान में भयंकर आग लग गई. विमान में पायलट समेत 2 लोग मौजूद थे. गनीमत है कि हादसे में जानमाल का नुकसान नहीं हुआ.   पायलट समेत 2 लोगों ने खेत में कूदकर बचाई जान रक्षा अधिकारियों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के पायलट समेत दो लोगों ने खेत में कूदकर जान बचाई. उन्होंने बताया कि मिग-29 लड़ाकू विमान में आग लगी थी. विमान ने पंजाब के आदमपुर से उड़ान भरी थी और अभ्यास के लिए आगरा जा रहा था, तभी यह हादसा हुआ. घटनास्थल से मिली तस्वीरों में जलते हुए फाइटर जेट के पास लोगों की भीड़ देखी जा सकती है.अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं. वायुसेना ने दिए जांच के आदेश इस घटना को लेकर भारतीय वायुसेना (IAF) का बयान भी सामने आ गया है. IAF ने कहा कि मिग-29 विमान आज नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान सिस्टम में खराबी आने के बाद आगरा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पायलट ने ये सुनिश्चित किया कि जमीन पर जान-माल को कोई नुकसान न पहुंचे. दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना ने जांच के आदेश दिए हैं. पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि मिग-29 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. 2 सितंबर को राजस्थान के बाड़मेर में एक मिग-29 लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. दुर्घटना से पहले पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में कामयाब रहा था. वहीं, बाड़मेर सेक्टर में वायुसेना के अड्डे से प्रशिक्षण पर निकले लड़ाकू विमान में खराबी आ गई और बाड़मेर के उत्तरलाई के पास एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त होने के तुरंत बाद उसमें आग लग गई थी, यह इलाका आबादी से दूर है.

मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक, कुल 27 प्रस्तावों को दी गई मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज के शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर निर्णय लिया गया। शिक्षक अब पांच वर्ष की न्यूनतम सेवा की जगह सिर्फ तीन साल बाद ही स्थानांतरण करवा सकेंगे। बैठक में कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। बैठक में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में पैरावेट के लिए डिप्लोमा व सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों के लिए भी नीति को मंजूरी मिल गई है। प्रदेश सरकार ने नई शीरा नीति को मंजूरी दे दी है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछली बार की तरह देसी मदिरा के लिए 19 फीसद शीरा मुहैया कराया जाएगा। चीनी मिलों को 20 रुपए कुंतल विनियामक शुल्क देना होगा। लघु उद्योगों को भी शीरा मुहैया कराने की व्यवस्था है।

धरने पर बैठे अधिवक्ता: गाजियाबाद ही नहीं झांसी में भी विरोध प्रदर्शन, CM के नाम सौंपा ज्ञापन

गाजियाबाद गाजियाबाद कोर्ट में वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के बाद प्रदेश के सभी जिलों के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। गाजियाबाद में जिला बार एसोसिएशन का मुख्य गेट धरना स्थल बनाया गया है। जहां पर सभी धरना दे रहे हैं। कोर्ट की तरफ आने वाले सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। गाजियाबाद की जिला जज कोर्ट से दूसरे कोर्ट में केस ट्रांसफर के आमला को लेकर हुऐ विवाद के वाद वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में दोषी अफसरों पर करवाई की मांग को लेकर आज जिला अधिवक्ता संघ ने काम बंद कर हड़ताल पर हैं। इतना ही नहीं जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट में प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। गाजियाबाद की जिला कोर्ट में वकीलों पर हुए लाठीचार्ज कार्रवाई के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल शुरू हो गई है। बार सभागार में अधिवक्ता धरने पर बैठ गए हैं।

विद्यालयों में बच्चों की कम संख्या को लेकर विद्यालय बंद करने की बात पर गरमाई सियासत, माया- प्रियंका ने सरकार पर साधा निशाना

लखनऊ प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की कम होती संख्या को लेकर ऐसे विद्यालयों का पास के विद्यालयों में संविलियन (मर्ज) कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत 50 से कम नामांकन वाले विद्यालयों को चिह्नित कर उनके पास के विद्यालय में भेजने को लेकर सभी जिलों में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। वहीं जर्जर विद्यालयों को भी एक महीने में ध्वस्त कराने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। इस तरह के निर्देशों के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। बसपा सुप्रीमों मायावती और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है। प्रियंका ने कहा कि यह दलित और पिछड़ों के खिलाफ फैसला उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने 27,764 प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। यह कदम शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित तबकों के बच्चों के खिलाफ है। यूपीए सरकार शिक्षा का अधिकार कानून लाई थी जिसके तहत व्यवस्था की गई थी कि हर एक किलोमीटर की परिधि में एक प्राइमरी विद्यालय हो ताकि हर तबके के बच्चों के लिए स्कूल सुलभ हो।कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं का मकसद मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जनता का कल्याण करना है। भाजपा नहीं चाहती कि कमजोर तबके के बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ हो। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा 50 से कम छात्राें वाले बदहाल 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने का फैसला उचित नहीं है। ऐसे में गरीब बच्चे आखिर कहां और कैसे पढ़ेंगे। राज्य सरकार को दूसरे स्कूलों में उनका विलय करने के बजाय उनमें जरूरी सुधार करके बेहतर बनाने के उपाय करने चाहिए। बसपा सुप्रीमो ने रविवार को सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यूपी व देश के अधिकतर राज्यों में खासकर प्राइमरी व सेकंडरी शिक्षा का बुरा हाल है। इसकी वजह से गरीब परिवारों के करोड़ों बच्चे अच्छी शिक्षा से दूर होने के साथ सही शिक्षा से भी वंचित हैं। ओडिसा सरकार द्वारा कम छात्राें वाले स्कूलों को बंद करने का फैसला भी अनुचित है। सरकारों की इसी गरीब व जनविरोधी नीतियों का परिणाम है कि लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं। जैसा कि सर्वे से स्पष्ट है, लेकिन सरकार द्वारा शिक्षा पर समुचित धन व ध्यान देकर इनमें जरूरी सुधार करने के बजाय इनका बंद करना ठीक नहीं है। बैठक में दी गई है यह जानकारी हाल ही में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बेसिक शिक्षा अधिकारियों की बैठक में यह जानकारी दी गई कि इस सत्र में बच्चों की संख्या 1.49 करोड़ है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा विद्यालयों को पूर्ण रूप से क्रियाशील व औचित्यपूर्ण बनाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र ने अपेक्षा की है कि कम नामांकन वाले विद्यालयों का पास के अन्य विद्यालयों में संविलियन (मर्ज) करने की सम्भावना देख ली जाए। 50 से कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ी प्रक्रिया प्राथमिकता पर पूरी की जाए। इसे ध्यान में रखकर कार्ययोजना तैयार की जाए कि उस ग्राम पंचायत में मानक विद्यालय है या नहीं। किस विद्यालय को पास के अन्य विद्यालय में मर्ज किया जा सकता है। बच्चों को कितनी दूरी तय करनी होगी, भवन व शिक्षकों, परिवहन की उपलब्धता, नहर, नाला, सड़क या हाईवे आदि को देखते हुए हर विद्यालय के लिए रिपोर्ट तैयार की जाए।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet