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देवबंद में शुद्धीकरण यज्ञ के बाद अपनाए हिंदू नाम, 10 मुस्लिमों ने इस्लाम छोड़ सनातन धर्म में की घर वापसी

देवबंद यूपी के देवबंद में योग साधना यशवीर आश्रम बघरा में गुरुवार को सहारनपुर जनपद के देवबंद के ही रहने वाले दस मुस्लिमों ने इस्लाम धर्म को छोड़कर सनातन धर्म में घर वापसी की। परिवार गुरुवार सुबह के समय बघरा स्थित स्वामी यशवीर जी मे आश्रम पहुंचे और स्वामी यशवीर महाराज से शुद्धिकरण यज्ञ करके सनातन धर्म में वापसी की बात कही। यज्ञ के बाद उन्होंने अपने हिंदू नाम रखे हैं। अपनी मर्जी से उन्होंने धर्म बदलने की बात कही है। परिवार ने बताया कि वे अपने पूर्वजों के सनातन धर्म में लौटना चाहते हैं, जिसे उनके परिवार र के के बड़े बड़े सदस्यों ने करीब चालीस पचास वर्ष पूर्व किसी कारण वश सनातन धर्म छोड़ छोड़ मुस्लिम इस्लाम धर्म अपना लिया था। आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज और आचार्य मृगेन्द्र ब्रह्मचारी ने वेद मंत्रों के साथ शुद्धिकरण यज्ञ संपन्न कराया। जिसके बाद मुस्लिम धर्म के परिवार ने श्रद्धा और आस्था के साथ घी और सामग्री की आहुतियां दी और परिवार के सभी दस सदस्यों ने अपने मुस्लिम नाम त्यागकर हिंदू नाम अपनाए। परिवार की मुखिया राजकुमारी कश्यप और मुखिया राजकुमाराव उनके बेटे बेटे बृजेश कश्यप ने इस घर वापसी पर प्रसन्नता जताई। यज्ञ के बाद सदस्यों पर पुष्प वर्षा की गई और उनका सनातन धर्म अपनाने पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान स्वामी यशवीर महाराज ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी मुसलमान पहले हिंदू थे। इस्लामिक हुकूमत में उनके पूर्वजों पर अत्याचार हुए या फिर किसी लालच में आकर उन्होंने सनातन धर्म छोड़ा था। उन्होंने सभी ऐसे लोगो व परिवारों से जो सनातन धर्म छोड़ कर इस्लाम धर्म अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब देश में किसी भी तरह का भय का माहौल नहीं है। सरकार अच्छा काम कर रही है।

शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद ने रोचक मोड़ लिया, नहीं मान सकते मस्जिद, मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली मथुरा की शाही ईदगाह को मस्जिद के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसकी वजह है कि यह भारतीय पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित स्थान है। हिंदू पक्ष ने यह दलील दी है, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस तरह मथुरा के शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद ने रोचक मोड़ ले लिया है। इस पर शीर्ष अदालत का कहना है कि वह इस बात का परीक्षण करेगी कि आखिर इस दावे की क्या वैधता है। दरअसल हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की दलील के बाद इस मामले में ASI को भी पार्टी बनाने को कहा था। मुस्लिम पक्ष की याचिका सुनते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने हिंदू पक्ष को नोटिस जारी किया है। मुस्लिम पक्ष की अपील सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जहां तक यह सवाल है कि क्या एएसआई संरक्षित स्थान का इस्तेमाल मस्जिद के तौर पर किया जा सकता है। इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। आपने इस बारे में हाई कोर्ट को भी कुछ नहीं कहा। इस मामले को मेरिट के आधार पर ही सुना जाएगा।’ यही नहीं अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष को अपनी याचिका में संशोधन करने की परमिशन दी है, जो पहली नजर में सही फैसला लगता है। हिंदू पक्ष ने हाई कोर्ट में कहा था कि ASI द्वारा संरक्षित किसी स्मारक को मस्जिद के तौर पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसके अलावा हिंदू पक्ष की दलील है कि ASI संरक्षित स्मारक होने के कारण यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट भी लागू नहीं होता। अदालत ने कहा- दूसरी अर्जियों के साथ ही इसकी भी होगी सुनवाई बेंच ने कहा कि आपके पास अधिकार है कि अपनी अर्जी में संशोधन करें। अदालत ने कहा कि हिंदू पक्ष अपनी याचिका में संशोधन कर सकता है और उसमें यह दावा हो सकता है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट लागू नहीं होता। अदालत ने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। हम नई अर्जी को भी पहले से दायर मामलों के साथ ही सुनेंगे। अब इस मामले में 8 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होगी। दरअसल हिंदू पक्ष ने इस मामले में हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि एएसआई को भी इस केस में पार्टी बनाया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि शाही ईदगाह मस्जिद का संरक्षण वही करता है। इसलिए उसे भी पक्षकार बनाने के बाद ही मामले को आगे बढ़ाया जाए।

हाईकोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को वीडी सावरकर मानहानि मामले में राहत देने से इनकार किया

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को वीडी सावरकर मानहानि मामले में राहत देने से इनकार किया, जो लखनऊ में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित है।गांधी ने पिछले साल दिसंबर में उन्हें आरोपी के तौर पर समन करने के अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में गांधी ने सेशन कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें शिकायतकर्ता एडवोकेट नृपेंद्र पांडे द्वारा जून 2023 में उनकी शिकायत खारिज किए जाने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को अनुमति दी गई। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि गांधी के पास CrPC की धारा 397 (BNSS की धारा 438) के तहत सेशन जज के समक्ष जाने का उपाय उपलब्ध है। इसे देखते हुए न्यायालय ने उनकी याचिका का निपटारा किया। जैसा कि बताया गया, गांधी को पिछले साल दिसंबर में अभियुक्त के रूप में अदालत ने तलब किया, जिसमें पाया गया कि गांधी ने अपने भाषण के माध्यम से और प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाषण से पहले विचलित करने वाले पर्चे के माध्यम से समाज में नफरत और दुर्भावना फैलाई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि सावरकर अंग्रेजों के सेवक थे और उन्होंने अंग्रेजों से पेंशन ली। एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिविजन)/एसीजेएम, लखनऊ, आलोक वर्मा ने दिसंबर में पारित अपने आदेश में कहा, “प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले से छपे पर्चे और पर्चे बांटना दर्शाता है कि राहुल गांधी ने समाज में नफरत और दुश्मनी फैलाकर राष्ट्र की बुनियादी विशेषताओं को कमजोर और अपमानित किया।” यह आदेश एडवोकेट पांडे द्वारा दायर शिकायत मामले पर पारित किया गया, जिसमें दावा किया गया कि गांधी ने समाज में नफरत फैलाने के इरादे से राष्ट्रवादी विनायक दामोदर सावरकर को अंग्रेजों का सेवक कहा, और कहा कि उन्होंने अंग्रेजों से पेंशन ली थी। याचिका में कहा गया, “राष्ट्रवादी विचारधारा के महान नेता कांतिवीर दामोदर स्वतंत्रता के इतिहास में निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारत माता को उनकी गुलामी से मुक्त कराने के लिए अंग्रेजों के अमानवीय अत्याचारों को सहन किया और गांधी जी ने सावरकर जी के प्रति हीन भावना फैलाने के लिए अभद्र शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया और घृणास्पद बातें कहीं।”  

जुमे की नमाज को लेकर मुरादाबाद मंडल में पुलिस गश्त तेज

संभल संभल जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल के बाद से लगातार शहर में चौकसी बरती जा रही है। जुमा नमाज के दौरान अतिरिक्त फोर्स शहर में लगाया गया है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि संभल शहर में पुलिस के अलावा पीएसी और आरआरएफ के जवान लगाए गए हैं। सभी अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर निगरानी की जा रही है। यदि कोई माहौल खराब करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर वक्फ संशोधन बिल को लेकर पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। जामा मस्जिद के सदर की दूसरी अंतरिम जमानत अर्जी खारिज संभल की जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट की नियमित जमानत अर्जी पर केस डायरी न होने के कारण चार अप्रैल की तिथि सुनवाई के लिए नियत कर दी है। जबकि दोबारा से लगाई गई अंतरिम जमानत अर्जी न्यायालय ने खारिज कर दी। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट दंगे भड़काने के आरोप में 23 मार्च से जेल में हैं। बुधवार को जफर अली एडवोकेट की नियमित जमानत अर्जी की सुनवाई अपर जनपद न्यायाधीश (एमपी एमएलए सेशन कोर्ट) निर्भय नारायण राय के न्यायालय में हुई। जफर अली के अधिवक्ता ने केस डायरी न आने के कारण दोबारा से अंतरिम जमानत अर्जी के लिए भी प्रार्थनापत्र लगाया। जिस पर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बहस की। बताया कि न्यायालय से एक अंतरिम जमानत अर्जी खारिज की जा चुकी है। गंभीर अपराध है। ऐसे आपराधिक व्यक्ति को अंतरिम या नियमित कोई भी जमानत दिया जाना न्याय हित में नहीं है। न्यायालय ने अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। जबकि नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख नियत कर दी।  

वक्फ संशोधन बिल पर बसपा सुप्रीमो मायावती बोली – दुरुपयोग होने पर मुसलमानों का साथ देंगे

लखनऊ वक्फ संशोधन बिल पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि केंद्र सरकार इस बिल को जल्दबाजी में लाई है। अगर इस बिल को समझने के लिए जनता को और समय दिया जाता तो अच्छा होता। एक्स पर जारी किए गए बयान में उन्होंने कहा कि संसद में वक्फ संशोधन बिल पर सत्ता पक्ष व विपक्ष को सुनने के बाद, निष्कार्ष यही निकलता है कि केन्द्र सरकार यदि जनता को इस बिल को समझने के लिए कुछ और समय दे देती तथा उनके सभी सन्देहों को भी दूर करके जब इस बिल को लाती तो यह बेहतर होता। उन्होंने कहा कि दुःख की बात यह है कि सरकार ने इस बिल को बहुत जल्दबाजी में लाकर इसे पास कराया है। यह उचित नहीं और अब इस बिल के पास हो जाने पर यदि सरकारें इसका दुरुपयोग करती हैं तो फिर पार्टी मुस्लिम समाज का पूरा साथ देगी अर्थात् ऐसे में इस बिल से पार्टी सहमत नहीं है। लेकिन दुःख की बात यह है कि सरकार ने इस बिल को बहुत जल्दबाज़ी में लाकर जो इसे पास कराया है यह उचित नहीं और अब इस बिल के पास हो जाने पर यदि सरकारें इसका दुरुपयोग करती हैं तो फिर पार्टी मुस्लिम समाज का पूरा साथ देगी अर्थात् ऐसे में इस बिल से पार्टी सहमत नहीं है। बता दें कि वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा और राज्यसभा में पास कर दिया गया है अब जल्द ही मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।

वक्फ संशोधन बिल पास होते ही योगी सरकार ने वक्फ बोर्ड की अवैध रूप से घोषित संपत्तियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया शुरू कर दिया

लखनऊ वक्फ संशोधन बिल पास होते ही योगी सरकार ने वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से घोषित संपत्तियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया शुरू कर दिया है. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अभियान चलाकर ऐसी वक्फ संपत्तियों की पहचान करें जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं और जिन्हें नियमों के विरुद्ध वक्फ घोषित किया गया है. इन संपत्तियों को चिन्हित कर आगे जब्ती की कार्रवाई की जाएगी. राजस्व विभाग के अनुसार, यूपी में वक्फ बोर्ड की ओर से जिन संपत्तियों का दावा किया गया है, उनमें से अधिकांश का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. राजस्व अभिलेखों के अनुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड की केवल 2,533 संपत्तियां दर्ज हैं. वहीं शिया वक्फ बोर्ड की 430 संपत्तियां ही अधिकृत रूप से पंजीकृत हैं. जबकि वक्फ बोर्ड द्वारा घोषित आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं. सुन्नी वक्फ बोर्ड  की 1,24,355 संपत्तियां और शिया वक्फ बोर्ड की  7,785 संपत्तियां हैं. अधिकारियों ने किया स्पष्ट बताया जा रहा है बड़े पैमाने पर तालाब, पोखर, खलिहान और ग्राम समाज की जमीनों को भी वक्फ घोषित किया गया है, जिसे सरकार ने पूरी तरह अवैध माना है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन, ग्राम समाज की जमीन और सार्वजनिक संपत्तियां किसी भी सूरत में वक्फ घोषित नहीं की जा सकतीं. केवल उन्हीं संपत्तियों को वक्फ माना जाएगा जो किसी व्यक्ति द्वारा स्पष्ट रूप से दान की गई हों. दोषियों पर भी होगी कार्रवाई  सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में तालाब, चारागाह, खलिहान और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को वक्फ घोषित कर कब्जा कर लिया गया था. अब ऐसे मामलों में कड़ी जांच के बाद जमीन को सरकार की संपत्ति घोषित कर वापसी की जाएगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि अवैध तरीके से वक्फ घोषित की गई हर संपत्ति पर कानून सम्मत कार्रवाई होगी, और दोषियों पर भी जिम्मेदारी तय की जाएगी. ऑडिट की बात अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमारा ध्यान सभी नियमों को लागू करना है और उनमें से अधिकांश पहले भी उपलब्ध रहे हैं। ऑडिट का भी प्रावधान था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब नए संशोधन के बाद ऑडिट को अनिवार्य किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘1.25 लाख वक्फ संपत्तियों की कीमत अनुमानित 1.25 लाख करोड़ रुपये है, जिसके जरिए हर साल 1200 करोड़ रुपये का राजस्व आना चाहिए। हालांकि, अभी तक सिर्फ वक्फ बोर्ड हर साल सिर्फ 150 करोड़ रुपये का राजस्व बना रहा है। इसमें करीब 1100 करोड़ रुपये का फर्क है और यह पैसा जा कहां रहा है?’ अंसारी ने कहा, ‘अगर 1100 करोड़ रुपये हर साल वक्फ के पास आ रहे होते, तो 800 स्कूल या कॉलेज खुल गए होते, जो गरीब मुसलमानों की मदद करते। करीब 200 अस्पताल खुल जाते, जो गरीबों के लिए मददगार होते। साथ ही कई कौशल केंद्र भी खोले जा सकते थे। मुझे वक्फ बोर्ड के जरिए हर साल 1100 करोड़ रुपये के गबन का संदेह हो रहा है।’ ‘खास बनाम आम मुसलमान’ उन्होंने कहा, ‘यह जंग खास बनाम आम मुसलमान की है। जो लोग बिल का विरोध कर रहे हैं, इसमें उनका निजी स्वार्थ है। उन्होंने पिछड़े मुसलमानों के कल्याण से कोई लेना देना नहीं है।’ यूपी में कहां हैं वक्फ की सबसे ज्यादा संपत्तियां बाराबंकी- 4 हजार 927 सदन में ऐसे पास हुआ बिल गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल को 95 के मुकाबले 128 मतों से मंजूरी दे दी। इस विधेयक के बारे में सरकार ने दावा किया कि इसके कारण देश के गरीब एवं पसमांदा मुसलमानों एवं इस समुदाय की महिलाओं की स्थिति में सुधाार लाने में काफी मदद मिलेगी। विधेयक पर तेरह घंटे से अधिक हुई चर्चा का जवाब देते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि 2006 में 4.9 लाख वक्फ संपत्ति देश में थीं और इनसे कुल आय मात्र 163 करोड़ रुपये की हुई, वहीं 2013 में बदलाव करने के बाद भी आय महज तीन करोड़ रुपये बढ़ी। उन्होंने कहा कि आज देश में कुल 8.72 लाख वक्फ संपत्ति हैं। प्रयागराज में भी गरजे थे योगी गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ प्रयागराज में निषाद राजा गुह्य की जयंती समारोह में  वक्फ बिल और महाकुंभ पर बोलते हुए तीखी टिप्पणी की थी. सीएम योगी ने वक्फ बोर्ड पर तीखा हमला करते हुए उस पर भूमि अतिक्रमण का आरोप लगाया और कहा कि सार्वजनिक और ऐतिहासिक स्थलों पर उसके “मनमाने दावे” अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. प्रयागराज में एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, “वक्फ बोर्ड शहरों में भूमि पर निराधार दावे करता रहा है. कुंभ मेले की तैयारियों के दौरान भी उन्होंने घोषणा की कि आयोजन की भूमि उनकी है. तब हमें पूछना पड़ा – क्या वक्फ बोर्ड भू-माफिया बन गया है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार के तहत इस तरह के अतिक्रमण हटाए गए हैं और माफियाओं को उत्तर प्रदेश से बाहर कर दिया गया है. बकौल सीएम योगी, “वक्फ के नाम पर निषाद राज से जुड़ी पवित्र भूमि सहित कई जगहों पर अतिक्रमण किया गया. लेकिन इसे जारी नहीं रहने दिया जाएगा. उनकी आपत्तियों के बावजूद एक भव्य और दिव्य कुंभ मेले का आयोजन किया गया. सीएम ने वक्फ बोर्ड की कथित अनियमितताओं के खिलाफ विधायी कार्रवाई करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी सराहना की. उन्होंने कहा, हम प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के आभारी हैं कि उन्होंने वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगाई.  इस मुद्दे को संबोधित करने वाला एक महत्वपूर्ण अधिनियम पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका है और अब इसे राज्यसभा में मंजूरी मिल जाएगी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि राज्य अब अवैध दावों को बर्दाश्त नहीं करेगा और राष्ट्रीय हित को पहले स्थान पर रखना चाहिए. उन्होंने कहा, जो लोग राष्ट्र के प्रति वफादार हैं, वे हमेशा अपना रास्ता खोज लेंगे.  

नोएडा के दंपत्ति ने पॉर्न रैकेट से कमाए ₹22 करोड़, 400+ लड़कियों से उतरवाए कपड़े, रूस से सीखकर आया था धंधा

नोएडा नोएडा के सेक्टर 105 की एक कोठी से पोर्न वीडियो स्ट्रीमिंग करके करोड़ों रुपये कमाने वाला उज्ज्वल किशोर पूरा धंधा रूस से सीखकर आया था। पिछले दिनों जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम कोठी पर पहुंची तो 3 मॉडल्स को स्टूडियो में बिठाकर उनका जिस्म विदेशी दर्शकों के सामने परोसा जा रहा था। उज्ज्वल अपनी पत्नी नीलू के साथ यह कारोबार चला रहा था। पता चला है कि उज्जवल रूस में भी ऐसे ही एक पोर्न कारोबार में काफी समय तक काम कर चुका था। वहां उसने देखा कि इस धंधे में कितना पैसा है। उसने वहां इस कारोबार को अच्छे से समझा और फिर भारत आकर अपना काम शुरू करने का फैसला किया। उसने भारत आकर पत्नी के साथ इस गोरखधंधे को शुरू कर दिया। दोनों ने सबडिजी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी बनाई थी और इसके जरिए विदेशी पोर्न वेबसाइट्स को कंटेंट उपलब्ध करा रहा था। जांच में पता चला है कि दंपति ने माडलों की भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म का खुलकर इस्तेमाल किया। उन्होंने फेसबुक पर भी एक पेज बनाया और उसमें आकर्षक वेतन के वादे के साथ युवतियों को माडलिंग का ऑफर दिया जाता था। मॉडलिंग की प्रतियोगिता के लिए नोएडा स्थित फ्लैट पर पहुंचीं लड़कियों को पोर्न वीडियो में शामिल होने पर एक से दो लाख रुपये प्रति महीने कमाने का लालच दिया जाता था। खुद उज्ज्वल और उसकी पत्नी की 22 करोड़ से अधिक कमाई का पता चल चुका है। ईडी को पता चला है कि कंपनी और डायरेक्टर के खातों में विदेशों से 15.66 करोड़ रुपए आए, जबकि विदेश में मौजूद एक खाते में भी 7 करोड़ रुपए आए थे। इस रकम की कैश के रूप में निकासी की जा चुकी है। 75-25 का था फॉर्मूला ईडी को फ्लैट में एक वेबकैम स्टूडियो मिला था, जो अश्लील प्लेटफार्म पर मिलने वाले कंटेंट को को प्रसारित करता था। यहां मॉडल्स के साथ न्यूड वीडियो शूट किए जाते थे। मॉडल्स ने वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान कितने कपड़े उतारे उस आधार पर उन्हें पैसा दिया जाता था। पोर्न वीडियो के लिए मॉडल्स को आधा, कम और पूरी अश्लीलता के लिए अलग-अलग पैकेज देते थे, जिसमें 75 प्रतिशत दंपती के पास और 25 प्रतिशत रकम मॉडल को देते थे।

यूपी में सरकारी कर्मचारियों को इस माह मिल सकता है 2% बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता

लखनऊ राज्य कर्मचारियों को उनके महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत वृद्धि का लाभ जल्द मिल जाने की उम्मीद है। अप्रैल माह का वेतन जो मई में कर्मचारियों को मिलेगा उसके साथ बढ़े दर से महंगाई भत्ता दिए जाने का आदेश जारी हो सकता है। दो प्रतिशत वृद्धि के साथ ही महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत हो जाएगा। अभी महंगाई भत्ते की दर 53 प्रतिशत है। गौरतलब है कि कुछ दिनों ही पूर्व केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को दो प्रतिशत बढ़े दर से मंहगाई भत्ता दिए जाने का आदेश जारी किया था। केंद्र सरकार द्वारा बढ़े दर से महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद ही राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को इस वृद्धि का लाभ देती है। जल्द मिलेगा महंगाई भत्ता राज्यकर्मियों को बढ़े दर से महंगाई भत्ता दिए जाने का प्रस्ताव बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता की दर में वृद्धि का फैसला लिए जाने पर इससे 16 लाख राज्य कर्मचारी लाभान्वित होंगे। लगभग 12 लाख पेंशनरों की महंगाई राहत की दर भी दो प्रतिशत बढ़ेगी। बढ़े महंगाई भत्ता का लाभ कर्मचारियों को जनवरी से मिलेगा। पिछले महीनों का एरियर सरकार कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों के साथ ही राष्ट्रीय बचत पत्रों के माध्यम से देगी।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परिणाम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, इससे छात्रों में गहरा असंतोष

मेरठ चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की ओर से घोषित सेमेस्टर परीक्षाओं के आनलाइन परिणामों में व्यापक स्तर पर विसंगतियां सामने आई हैं। इससे छात्रों में गहरा असंतोष है। एक चौंकाने वाले मामले में, एक छात्र के पूर्व में जारी परिणाम में एक विषय में बाहरी परीक्षा में 26 और आंतरिक मूल्यांकन में 10 अंक दर्शाए गए थे, जिसके कुल 36 अंकों के साथ उसे उत्तीर्ण घोषित किया गया था। वहीं, हाल ही में जारी संशोधित परिणाम में उसी सेमेस्टर और विषय कोड के लिए अन्य छात्र को बाहरी परीक्षा में 23 और आंतरिक मूल्यांकन में 10 अंक दिए गए हैं, जिससे उसके कुल प्राप्तांक 33 हो गए हैं और उसे अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है। पीजी सेमेस्टर परिणामों में भी गड़बड़ी इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सेमेस्टर के परिणामों में भी गड़बड़ी देखने को मिली है। एक छात्र को थ्योरी परीक्षा में 17 अंक प्राप्त होने पर फेल कर दिया गया है, जबकि उसी परीक्षा में दूसरे छात्र को मात्र 11 अंक प्राप्त होने पर उत्तीर्ण घोषित किया गया है।   इसके अतिरिक्त, एक अन्य अनियमितता में, एक छात्र के पूर्व में घोषित परिणाम में उल्लिखित विषय कोड को नई एजेंसी की ओर से जारी परिणाम में पूरी तरह से बदल दिया गया है। इस तरह की गलतियां विश्वविद्यालय के बहुत से छात्रों के परीक्षा परिणामों में की है जिससे उनकी शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। 20 फरवरी को जारी रिजल्ट में एक छात्र के सभी विषयों में पास दिखाते हुए फाइनेंसियल एकाउंटिंग में 26 प्लस 10 को मिलाकर कुल 36 अंक मिले। अब दोबारा परिणाम निकालने पर उसी छात्र के फाइनेंसियल एकाउंटिंग के अंक 23 प्लस 10 अंक मिलाकर 33 अंक दिख रहा और फेल दिखाया गया है। छात्रों ने इन अनियमितताओं पर कड़ी आपत्ति जताई है।   उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और परीक्षा परिणाम के लिए अधिकृत एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों के अनुसार इस प्रकार की लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इन त्रुटियों को तुरंत सुधारना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने जानबूझकर किए कृत्य की आशंका से निष्पक्ष जांच कराने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की है।

वक्फ का सरकारी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों पर भी गलत तरीके से उनका दावा और कब्जा होता गया: जांच रिपोर्ट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड जहां मुस्लिम समाज के गरीब लोगों की मदद के लिए वक्फ की गई बेशकीमती जमीनों की हेराफेरी करने का माध्यम बन गए, वहीं, सरकारी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों पर भी गलत तरीके से उनका दावा और कब्जा होता गया। प्रदेश में दोनो वक्फ बोर्ड में कुल 1.32 लाख संपत्तियां दर्ज हैं। शासन स्तर से करायी गयी एक जांच की रिपोर्ट के अनुसार इसमें भी करीब 11712 एकड़ की 57792 संपत्तियां सरकारी हैं। हालांकि वक्फ काउंसिल के रिकार्ड की मानें तो संपत्तियों के पंजीकरण में भी दोनों वक्फ बोर्ड ने गोलमाल किया है। काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार दोनों वक्फ बोर्ड के पास 1.32 लाख नहीं, 2.15 लाख संपत्तियां पंजीकृत हैं। उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर गलत तरीके से अवैध वक्फ के मामले की जांच पिछले साल करायी गयी थी। पिछले साल संसद में पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक के बाद गठित हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जब लखनऊ पहुंची तो यह रिपोर्ट साझा की गई थी।   इस रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि और शत्रु संपत्ति पर अवैध तरीके से वक्फ बोर्ड अपना दावा कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 40 ऐसे जिले हैँ जिनकी सैकड़ों संपत्तियां शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में तो दर्ज हैं नहीं, लेकिन तहसील रिकार्ड में उनका नामांतरण नहीं किया गया है। इन जिलों में फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, अयोध्या, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, जालौन, ललितपुर, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, हरदोई, रायबरेली, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़,बलिया, बदायूं, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, भदोही, मीरजापुर, सोनभद्र, बिजनौर,कौशांबी, प्रयागराज, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी और महोबा शामिल हैं। वक्फ के रिकार्ड में भी हेराफेरी उत्तर प्रदेश में दोनों वक्फ बोर्ड के पास पंजीकृत संपत्तियों को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 1.24 लाख और शिया वक्फ बोर्ड के पास आठ हजार संपत्तियां पंजीकृत हैं। वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास दो लाख और शिया वक्फ बोर्ड में 15 हजार संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसकी पुष्टि शासन स्तर से हुई जांच की रिपोर्ट करती है। वक्फ बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक महोबा में एक भी संपत्ति दर्ज नहीं है। वहीं सोनभद्र में एक संपत्ति दर्ज है। जिलास्तर के गजट के अनुसार महोबा में 245 और सोनभद्र में 171 वक्फ संपत्तियां हैँ। दोनों वक्फ बोर्ड की दर्ज सपंत्तियों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराने के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी ने पूरा डाटा ही फीड नहीं किया है। नहीं हो पा रहा आडिट वक्फ बोर्ड की कार्यशैली को लेकर पहले भी सवाल उठे हैँ। वर्ष 1976 में केंद्र की कांग्रेस की सरकार ने वक्फ संपत्तियों की जांच करायी थी, जिसमें मुतव्वली को अनावश्यक रूप से अधिक अधिकार को लेकर सवाल उठाए थे। वर्ष 2005 में सच्चर कमेटी ने भी वक्फ संपत्तियों का आडिट कराने की सिफारिश की थी। वर्ष 2017 में मेरठ-दिल्ली रोड पर अब्दुल्लापुर और कंकरखेड़ा में वक्फ की डेढ़ लाख बीघा जमीन को गलत तरीके से बेच दिया गया था। तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने तब इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने के साथ वक्फ बोर्ड की सीएजी जांच कराने के लिए पत्र लिखा था। उस पर सीएजी की ओर से प्रदेश के दोनों वक्फ बोर्ड को आडिट में सहयोग करने के लिए बार-बार पत्र भेजे गए। हालांकि दोनों वक्फ बोर्ड ने आडिट में सहयोग ही नहीं किया।

धन वर्षा के नाम पर 200 लड़कियों के साथ गंदा खेल, प्राइवेट पार्ट की करते थे पूजा, फिर बनाते थे अश्लील वीडियो

संभल यूपी के संभल में गिरफ्तार अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य धन वर्षा के नाम पर लड़कियों से गंदा खेल करते थे। इसके पास 200 लड़कियों के अश्लील वीडियो मिले हैं। दरअसल, यह गिरोह लोगों को धन वर्षा कराने के नाम पर फंसाकर ठगी करते थे। धनवर्षा गिरोह गरीब लड़कियों के परिवारों को झांसे में लेकर तंत्र क्रिया करता था। तंत्र क्रिया के दौरान परिवार के लोगों को बाहर कर दिया जाता था और तंत्र क्रिया के दौरान लड़कियों के प्राइवेट पार्ट की पहले पूजा कर, फिर तंत्र क्रिया शुरू होती थी। तंत्र क्रिया के बाद लड़कियों के साथ क्या होता था, उन्हें खुद भी जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि उनका वीडियो बना लिया जाता था। इन वीडियो को पोर्न साइट को बेचने का भी शक है। गिरोह का खुलासा तब हुआ जब राजपाल नामक युवक के अपहरण और तंत्र क्रिया कर उसे मारने के प्रयास की सूचना थाना धनारी पुलिस को मिली। गिरोह लोगों को नकदी की बारिश कराने का लालच देता है। गरीब परिवार को शिकार बनाते थे। वे किसी दुर्लभ वस्तु (जैसे- 20 नख का कछुआ, दो मुंहा सांप, उल्लू, विशेष नंबर के नोट) पर तांत्रिक क्रिया की बात करते थे। युवतियों को टीटी (कोड भाषा) कहा जाता था और इन्हें तांत्रिक क्रिया के लिए तैयार किया जाता था। गिरोह के सदस्य गरीब परिवारों को यह कहकर फंसाते थे कि उनकी लड़की विशेष गुणों वाली है और उसके ऊपर तांत्रिक क्रिया करने से धन की बारिश होगी। इसके बाद लड़़कियों के साथ गंदा खेल करते थे। तंत्र-मंत्र की आड़ में तस्करी गिरोह तंत्र क्रिया से धनवर्षा का झांसा देकर गरीब लड़के-लड़कियों की तस्करी कर यौन शोषण करता था और दुर्लभ वन्य जीवों की अवैध तस्करी में भी शामिल था। गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान में फैला हुआ था। यह लोग किसी विशेष वस्तु (जिसे आर्टिकल कहा जाता था) पर तंत्र क्रिया के नाम पर लोगों को ठगते थे। वर्तमान में आगरा में गिरोह का नेटवर्क तेजी से फल फूल रहा था। जहां से पुलिस ने इन सभी आरोपियों को पकड़ा है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी पकड़ने में जुटी है। गिरोह सात से आठ साल से सक्रिय हैं और सैकड़ों लोगों को शिकार बना चुके हैं। गिरोह से ये चीजें हुईं बरामद गिरोह से पुलिस ने मोबाइल फोन, तांत्रिक विधाओं में प्रयुक्त सामग्री, दुर्लभ कछुआ और अवैध हथियार बरामद किए हैं। गिरोह के मोबाइल फोन से 200 अश्लील वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिनसे इनके काले कारनामों का खुलासा हुआ है। गिरोह के 14 सदस्य हो चुके हैं गिरफ्तार पुलिस ने इस गिरोह के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें तीन गुरु (कारीगर) और बाकी गिरोह के अन्य सदस्य शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में आगरा के यमुना ब्रिज का स्टेशन मास्टर रघुवीर पुत्र बाबूराम निवासी श्याम बिहार कॉलोनी ट्रांस यमुना आगरा भी शामिल है। इनमें गुरु राघवेंद्र पुत्र स्व. देवी दयाल भास्कर निवासी अमर बिहार कालोनी ट्रांस यमुना आगरा, सोनू उर्फ अन्ना पुत्र बलराम निवासी गांव व थाना भरतना इटावा फिरोजाबाद, पप्पू पुत्र छोटे लाल निवासी ग्राम जलालपुर फतेहाबाद आगरा है। इसके अलावा रिंकू पुत्र हरिओम निवासी लहरा नगंला श्याम थाना जुनावई संभल, अजय सिंह पुत्र जमुना सिंह निवासी चमरपुरा थाना रजपुरा संभल, दुर्जन पुत्र स्वं बलवन्त सिंह निवासी मो. करम घरम नरौरा थाना नरौरा बुलन्दशहर, संतोष पुत्र मुलायम सिंह निवासी नगंला मदिहा थाना कोतवाली देहात एटा जिला एटा, राघवेन्द्र पुत्र स्व देवी दयाल भास्कर निवासी अमर विहार कालोनी थाना ट्रांस यमुना जनपद आगरा, आकाश पुत्र शीलेन्द्र सिंह निवासी गढी कल्याण थाना नारकी जिला फिरोजाबाद, कप्तान सिंह पुत्र गुलाबसिंह निवासी विघापुरम थाना ट्रांस यमुना जनपद आगरा, संजय चौहान पुत्र एल एस चौहान पुत्र निवासी न्यू आगरा थाना न्यू आगरा, डी.एन त्रिपाठी पुत्र रामललित निवासी शास्त्रित्त् पुरम थाना सिकन्दरा जिला आगरा, जयप्रकाश भारद्वाज पुत्र पूरनन्द निवासी सेक्टर 07 बधूला थाना जगदीशपुरा जिला आगरा, लाल सिंह पुत्र रामबीर निवासी ग्राम धौर्रा थाना अहमदपुर जिला आगरा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

प्रदेश के दक्षिणी-पूर्वी और बुंदेलखंड के इलाकों में तेज हवा संग हल्की बौछारें पड़ने की संभावना

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम लगातार बदल रहा है। बुधवार को दिन में दक्षिणी यूपी व बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में बादलों का डेरा रहा। अब मौसम विभाग ने बुधवार से शुक्रवार के बीच प्रदेश के दक्षिणी-पूर्वी और बुंदेलखंड के इलाकों में तेज हवा संग हल्की बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। इसके असर से इन इलाकों में तात्कालिक तौर पर अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट के आसार हैं। इसके बाद प्रदेश में फिर से पारे में उछाल देखने को मिलेगा। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक शुक्रवार तक प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों और बुंदेलखंड के इलाकों में गरज-चमक के साथ मामूली बूंदाबांदी की संभावना है। इस बीच कहीं-कहीं वज्रपात के भी आसार हैं। जहां बूंदाबांदी के संकेत हैं, वहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। इन इलाकों में वज्रपात की चेतावनी बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, गाजीपुर, बलिया, कानपुर , मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर व आसपास के इलाकों में।

शाहजहांपुर में दो वर्ष पहले जेंडर बदलवाने वाले शरद सिंह के घर बेटे का जन्म हुआ

शाहजहांपुर यूपी के शाहजहांपुर में दो वर्ष पहले जेंडर बदलवाने वाले शरद सिंह के घर बेटे का जन्म हुआ है. उनकी पत्नी ने निजी अस्पताल में ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया है. शरद सिंह का कहना है कि पिता बनने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है. जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. विषम परिस्थितियों से निकलकर आज जो खुशी मिली है वह शब्दों में बयां नहीं हो सकती. आपको बता दें कि काकोरी ट्रेन एक्शन के बलिदानी ठाकुर रोशन सिंह की प्रपौत्री सरिता सिंह ने वर्ष 2021-22 में जेंडर बदलवाने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी. दरअसल, लड़की होने के बाद भी वह लड़कों की तरह थी. ऐसे में उन्होंने लखनऊ में हार्मोन थेरेपी करवाई, जिससे उनके चेहरे पर दाढ़ी उग आई थी. आवाज भी भारी हो गई थी. वर्ष 2023 की शुरुआत में उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में सर्जरी करा कर जेंडर बदलवा लिया था. वहीं, 27 जून 2023 को तत्कालीन डीएम उमेश प्रताप सिंह ने उन्हें जेंडर बदलवाने का प्रमाण पत्र शरद सिंह के नाम से दिया था. इसके बाद खुदागंज के नवादा दारोबस्त गांव के निवासी शरद सिंह ने 23 नवंबर 2023 को पीलीभीत के देवहा गांव निवासी महिला मित्र सविता सिंह से शादी कर ली थी. कल यानी बुधवार को सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सविता सिंह को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाम को ऑपरेशन से उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया. सरिता से शरद बनने का सफर सरिता, जो जन्म से महिला थीं, ने हमेशा खुद को पुरुष की तरह महसूस किया। लड़कों की तरह कपड़े पहनना और उनका हावभाव भी पुरुषों जैसा था। वर्ष 2022 में उन्होंने अपने इस आत्मबोध को अपनाने का निर्णय लिया और लखनऊ में हार्मोन थेरेपी कराई। धीरे-धीरे उनके चेहरे पर दाढ़ी उगने लगी और आवाज भारी हो गई। 2023 में उन्होंने मध्यप्रदेश के इंदौर में सर्जरी कराई और आधिकारिक रूप से पुरुष बन गए। 27 जून 2023 को तत्कालीन जिला अधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने उन्हें लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र दिया और सरिता की नई पहचान शरद रोशन सिंह के रूप में स्थापित हुई। इसके बाद, 23 नवंबर 2023 को उन्होंने पीलीभीत निवासी अपनी महिला मित्र सविता से विवाह कर लिया। बेटे के जन्म से बढ़ी खुशियां बुधवार सुबह, सविता को प्रसव पीड़ा होने पर शाहजहांपुर के जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाम 5 बजे उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। पिता बनने की खुशी जाहिर करते हुए शरद ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे सुखद पल है। चिकित्सा विज्ञान की सफलता बरेली के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में महिला और पुरुष दोनों के लक्षण हों तो मेडिकल साइंस की मदद से लिंग परिवर्तन संभव है। इसमें हार्मोनल थेरेपी और सर्जरी के जरिए व्यक्ति की शारीरिक विशेषताएं बदली जा सकती हैं, जिससे वे अपनी इच्छानुसार नया जीवन अपना सकते हैं। सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक हैं शरद शरद रोशन सिंह का घर शाहजहांपुर के नवादा दरोवस्त गांव में है और वे एक सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता बनने की खबर से परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह घटना समाज के लिए एक नई सोच और प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। सरिता सिंह से शरद सिंह तक का सफर शरद सिंह ने बताया कि मेरी पत्नी सविता सिंह ने 10 से 15 साल पहले खुली आंखों से जो सपना देखा था, आज वह सकार हुआ है. शरद के मुताबिक, उनके परिवार में 26 साल बाद पुत्र का जन्म हुआ है. हर इंसान का सपना होता है कि उसे संतान का सुख की प्राप्ति हो लेकिन जिन परिस्थितियों से निकलकर पिता बनने का सुख मिला है वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है. शरद फिलहाल विकासखंड ददरौल के प्राथमिक विद्यालय सतवा खुर्द में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं. शुरू से लड़का बनने की थी तमन्ना सरिता से शरद बने टीचर हमेशा से लड़के की वेशभूषा में रहते थे. जिसके चलते उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लोगों के ताने भी सुनने पड़े. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में सर्जरी कराकर अपना जेंडर चेंज करवा लिया. इसके बाद जिला अधिकारी के यहां आवेदन किया और लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र और पहचान पत्र हासिल कर लिया.  

गेहूं खरीदने किसानों के घर तक जाएगी सरकार, खरीद की धीमी रफ्तार को तेज करने की कसरत

लखनऊ गेहूं की सरकारी खरीद की धीमी रफ्तार से परेशान सरकार अब किसानों के घर पर दस्तक देगी। इसके लिए स्थायी केंद्रों के साथ मोबाइल क्रय केंद्र की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। ये मोबाइल केंद्र गांव-गांव जाकर किसान से सीधी खरीद करेंगे। यह व्यवस्था विशेष तौर पर उन क्षेत्रों के लिए की जा रही है, जहां के स्थायी केंद्रों पर पूर्व के वर्षों में किसानों की आमद कम रही है। 17 जनवरी से शुरू हुई गेहूं खरीद प्रदेश में गेहूूं खरीद की प्रक्रिया बीते 17 जनवरी से शुरू हुई है। 15 जून तक 2425 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली इस खरीद के लिए 6500 केंद्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 5690 केंद्र का संचालन शुरू हो चुका है, परंतु खरीद की गति नहीं बढ़ रही है। 60 लाख टन गेहूं खरीद का रखा गया लक्ष्य इस बार प्रदेश में 60 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया है और बुधवार शाम पांच बजे तक पूरे प्रदेश में सरकारी क्रय केंद्रों पर 2903 किसानों से 17.18 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी थी। वर्तमान स्थिति के हिसाब से लक्ष्य से बहुत पीछे रह जाने की आशंका खड़ी हो गई है। मोबाइल क्रय केंद्रों का उपाय निकला ऐसे में मोबाइल क्रय केंद्रों का उपाय आजमाया जा रहा है। इसके लिए डीएम से उनके जिलों के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को चिन्हित कराया जा रहा है, जहां गेहूं के भाव अपेक्षाकृत कम होते हैं या फिर जहां से स्थायी केंद्रों तक आने में किसानों को समस्या होती है। किसानों से नहीं लिया जाएगा अतिरिक्त शुल्क ऐसी जगहों पर गेहूं खरीद की मात्रा बढ़ाने के लिए डीएम अपने जिले में खोले गए क्रय केंद्रों में से किसी को भी मोबाइल क्रय केंद्र के रूप में अधिकृत कर सकते हैं। कुछ जिलों में इन मोबाइल केंद्राें की शुरुआत भी कर दी गई है। इनके माध्यम के खरीद के बाद उपज के परिवहन को लेकर किसानों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। खरीद की हो रही निगरानी मोबाइल क्रय केंद्रों से गेहूं खरीद की निगरानी का जिम्मा संबंधित डीएम पर होगा। इन केंद्रोें और स्थायी केंद्रों में उपज की ढुलाई के लिए लगाए गए वाहनों में ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाया गया है, जिसके माध्यम से उनकी ट्रैकिंग की जा रही है।

वाराणसी के प्रसिद्ध नमो घाट पर अचानक जमीन धंसी, जमीन के साथ ही दुकानें भी एक तरफ लुढ़क गईं

वाराणसी वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध नमो घाट पर बुधवार की शाम जमीन धंसने से हड़कंप मच गया। जिस जगह पर जमीन धंसी वहां कई दुकानें भी लगीं थीं। जमीन के साथ ही दुकानें भी एक तरफ लुढ़क गईं। इससे दुकानदार और ग्राहक भाग खड़े हुए। अचानक हुए हादसे से अफरातफरी मच गई। फिलहाल वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने रस्सी की बैरिकेडिंग लगाकर लोगों का आना-जाना बंद कर दिया है। हादसे की जानकारी मिलते ही कार्यदायी संस्था और नगर निगम के अधिकारी भी घटना का जायजा लेने के लिए रवाना हो गए हैं। इस समय वाराणसी में पर्यटकों को सबसे ज्यादा नमो घाट ही लुभा रहा है। बनारस के किसी भी घाट पर जाना हो तो वीवीआईपी भी इसी घाट से स्टीमर और क्रूज की सवारी करते हैं। यही एकमात्र घाट है जहां गंगा के सबसे करीब तक वाहन आ जा सकते हैं। घाट पर है दर्जनों कारों और दो पहिया वाहनों के लिए पार्किग भी बनाई गई है। यहां बने नमस्ते वाले स्कल्पचर काशी के सबसे बड़े सेल्फी प्वाइंट भी हैं। देश-विदेश से बनारस आने वाले पर्यटक इस घाट का नजारा लेने जरूर आते हैं। यहां से सुबह-ए-बनारस का अलौकिक नजारा देखने को मिलता है। यह बनारस का इकलौता घाट है जहां पर हेलीपैड भी बनाया गया है। बहुत जल्द यहां से अयोध्या और अन्य जिलों के लिए हेलीकाफ्टर सेवा भी शुरू करने की योजना है।

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