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बीजेपी नेता का टूटा पैर तो अस्पताल को बना दिया पार्टी दफ्तर, बेड के पीछे पोस्टर लगाकर हुई मीटिंग

कानपुर पार्टी विद डिफरेंस के नेता गजब की स्टाइल में सियासत करते हैं और जब सत्ता हो तो अस्पताल का वार्ड भी पार्टी का कार्यालय बन जाता है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां कानपुर महानगर उत्तर में जिला अस्पताल के वार्ड में ही कार्यकर्ताओं की बैठक ले ली गई। कानपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष कौन हैं? कानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपने टूटे पैर के इलाज के दौरान अस्पताल में कार्यकर्ताओं की बैठक की। बैठक के दौरान अस्पताल के बेड के पीछे पार्टी का बैनर टांगा सामने और अगल-बगल वार्ड के कमरे की बेंच पर बेड पर कार्यकर्ताओं को बैठाया गया। 10 मिनट की इस बैठक में नेताजी बेड पर लेटे लेटे कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते रहे। अब इसे आप समर्पण कहें या रुतबा या फिर राजनीतिक तमाशा जहां कैमरा भी बुलाया गया था। अस्पताल में क्यों हुई जिलाध्यक्ष की बैठक? कानपुर के आर्य नगर स्थित मेदांता अस्पताल के वार्ड में हुई इस बैठक में जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने सरकार के 8 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की चर्चा की और वहीं कार्यकर्ताओं में जिम्मेदारी भी बांटी। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने बताया कि पार्टी की तरफ से 14 अप्रैल तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की सूची आई थी। यह उसी के संबंध में बैठक बुलाई गई थी।   निजी अस्पताल के वार्ड में ही पार्टी का झंडा बैनर लगाकर हुई इस बैठक में समर्पण की नेताजी को तारिफ भी मिल सकती है। क्योंकि नेताजी को अपनी चोट से ज्यादा खुशी इस बात पर है कि कार्यकर्ताओं का प्रेम इनको पैर में पेन महसूस ही नहीं होने दे रहा है।

लंबे समय तक लखनऊ के डीएम रहे सीनियर आईएएस अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया गया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है। एक बार फिर सीएम योगी के सख्त तेवर देखने को मिले है। योगी सरकार ने आईएएस अभिषेक प्रकाश पर बहुत बड़ी कार्रवाई कर दी है। जबकि उन्हीं अभिषेक प्रकाश को एक समय पर सीएम योगी का करीबी अधिकारी माना जाने लगा था। आईएएस अभिषेक प्रकाश ने लखनऊ में जिलाधिकारी रहते हुए एलडीए वीसी का भी कार्यभार संभाला है। वो कई जिलों में डीएम रह चुके हैं। आइए जानते है आखिर कौन है अभिषेक प्रकाश, जिन पर गाज गिरी है। अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अधिकारी है। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 में हुआ था। बिहार के रहने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 पास करके आईएएस बने अभिषेक प्रकाश की ऑल इंडिया आठवीं रैंक थी। अभिषेक प्रकाश साल 2011-12 में लखीमपुर खीरी जिले में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रह चुके हैं। वो लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जिले में डीएम और कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।   अभिषेक प्रकाश ने कमीशन निकांत जैन के जरिए बिजनेसमैन से डिमांड की थी। बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने इसकी शिकायत सीएम योगी से की। सीएम ने मामले की STF से जांच कराई थी। इसके बाद एक्शन लिया। सूत्रों के मुताबिक, IAS अभिषेक जहां भी तैनात रहे, वहां पर उन्होंने प्रॉपर्टी बनाई। लखीमपुर और बरेली में 700 बीघा जमीन खरीदी। लखनऊ में कई बंगले बनवाए। उन पर ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री के नाम पर 20 करोड़ के घोटाले का आरोप भी लगा है। अभिषेक औद्योगिक विकास विभाग के सचिव और इन्वेस्ट यूपी के CEO थे। एक्शन के बाद से अंडरग्राउंड हो गए हैं। उनके करीबी बाबू निकांत जैन को STF ने गिरफ्तार किया है। अभिषेक प्रकाश 31 अक्टूबर 2019 से 7 जून 2022 तक लखनऊ के जिलाधिकारी रहे। इसके अलावा, 23 अक्टूबर 2020 से 25 जुलाई 2021 तक उन्होंने LDA के वीसी की जिम्मेदारी भी संभाली। अभिषेक ने कहां-कहां भ्रष्टाचार किया, 6 पाइंट में जानिए.. 1. डिफेंस कॉरिडोर जमीन घोटाला: नियमों को ताक पर रखकर खेल लखनऊ के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन के मामले में भी तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। भू-अधिग्रहण समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने तहसील प्रशासन के साथ मिलकर जमीनों की दरें मनमाने तरीके से तय की। 1984 में एससी वर्ग के लिए आवंटित जमीन को गलत तरीके से विक्रय योग्य बनाया। भूमि खरीद-फरोख्त में दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से 20 करोड़ का मुआवजा उठाया गया। शासन को दी गई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम को जिम्मेदार ठहराया गया है। 2- LDA वीसी रहते हुए धांधली लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष रहते हुए अभिषेक प्रकाश पर कई बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और मनमाने तरीके से सीलिंग व लाइसेंस जारी करने के आरोप लगे। सूत्रों के मुताबिक, LDA वीसी रहते उन्होंने कई अवैध निर्माण गिरवाए, लेकिन अपने करीबी बिल्डरों को लाभ पहुंचाया। आशियाना समेत कई इलाकों में मनपसंद बिल्डर्स को लाइसेंस जारी किए। एलडीए अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल्डरों की फाइलें लटकाने के भी आरोप हैं। 3.भ्रष्टाचार की कड़ी: अलीगढ़, लखीमपुर और हमीरपुर में भ्रष्टाचार के आरोप अभिषेक प्रकाश अलीगढ़, लखीमपुर खीरी और हमीरपुर में डीएम रहे चुके हैं। उनके खिलाफ अलीगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री में धांधली की शिकायतें थीं। लखीमपुर में सरकारी टेंडरों में हेरफेर और हमीरपुर में खनन माफियाओं से साठगांठ के आरोप लगे थे। 4. STF जांच के बाद एक्शन, बचाने की भी हुई थी कोशिश सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की रिपोर्ट कई दिनों तक शासन में घूमती रही। कुछ अधिकारियों ने अभिषेक प्रकाश को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसी तरह की रियायत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद तत्काल सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया गया। 5. आलीशान संपत्तियां और लाइजनिंग सिंडिकेट का नेटवर्क सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक प्रकाश ने लखनऊ में डीएम रहते हुए कई बेशकीमती संपत्तियां जुटाईं। अंसल में एक घर, आशियाना में कोठी और एक सोसाइटी में विला होने की बात सामने आई है। बिचौलिए निकांत जैन और लकी जाफरी से करीबी संबंध थे, जो IAS अधिकारियों के लिए लाइजनिंग करता था। निकांत और जाफरी ने कई बार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की फाइलों को क्लियर कराने के लिए कमीशन डील कराई। 6- दो जिलों में डीएम रहते 700 बीघा जमीन खरीदने के आरोप अभिषेक प्रकाश पर लखीमपुर खीरी और बरेली में 700 बीघा जमीन अपने परिवार के नाम खरीदने के भी आरोप हैं। यह जमीन आईएएस अभिषेक ने अपने परिजन (माता, पिता व भाई के अलावा कुछ फर्जी कंपनियां बनाकर) के नाम खरीदी हैं। इसी तरह बरेली में 400 बीघा जमीन खरीदने का भी आरोप है। दोनों जगहों पर स्टांप ड्यूटी में चोरी के भी आरोप हैं। DOPT ने यूपी सरकार को इस पूरे मामले की जांच के लिए लिखा था।

औरैया की ‘मुस्कान’ ने शादी के 15वें ही दिन मरवा डाला पति… मुंह दिखाई में मिले रुपयों से बुलाए शूटर

औरैया 19 मार्च को खून से लथपथ मिले हाइड्रा चालक को मरवाने की साजिश उसकी पत्नी ने ही रची थी। शादी के 15वें ही दिन प्रेमी से मिलकर भाड़े के शूटरों को सुपारी दे दी। इसके लिए मुंह दिखाई में मिले रुपयों का उपयोग किया गया। सुपारी के बचे रुपयों का लेनदेन करने के दौरान पुलिस ने हत्यारोपी पत्नी, उसके प्रेमी व एक शूटर को धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों के पास से तमंचे, बाइक सहित अन्य सामान बरामद किया है। घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। मैनपुरी के भोगांव थाना के नगला दीपा निवासी हाइड्रा चालक दिलीप कुमार (24) की हत्या के मामले में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी। इसी दौरान सुपारी के रुपयों के लेनदेन की सूचना मिलने पर शनिवार दोपहर पुलिस ने हरपुरा के पास छापा मारा। जहां से सहार थानाध्यक्ष पंकज मिश्रा व स्वाट प्रभारी राजीव कुमार ने दिलीप की पत्नी प्रगति को गिरफ्तार किया। इस शादी से वह नाखुश थी। इसलिए उसने प्रेमी के साथ पति को रास्ते से हटाने के ठान ली थी। उसने दो लाख रुपये में भाड़े के शूटर बुक किए थे। बताया कि शादी में मुंह दिखाई व अन्य रस्मों के दौरान उसे मिले एक लाख रुपये उसने शूटरों को एडवांस में दे दिए। 19 मार्च को पति जब कन्नौज के उमर्दा के पास शाह नगर से हाइड्रा लेकर लौट रहे थे, तभी पलिया गांव के समीप शूटरों ने उस पर हमला किया। शूटरों ने पति के साथ मारपीट की। इसके बाद सिर के पिछले हिस्से में गोली मार दी। बाद में उसे गेहूं के खेत में फेंक दिया। पुलिस उसे अस्पताल पहुंचाया था। 21 मार्च को इलाज के दौरान दिलीप की मौत हो गई। पुलिस अधिकारी ने ये कही बात एसपी अभिजित आर शंकर ने बताया कि दिलीप को गोली किसने मारी यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पकड़े गए आरोपियों को जेल भेजा गया है। शेष आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। लव एंगल सामने आया है। पत्नी शादी से नाखुश थी। प्रेमी से दूरी होने पर उसने ही हत्या की साजिश रची थी। आरोपियों ने साजिश की बात पूछताछ में कबूल कर ली है। खेत में घायल पड़ा मिला था दिलीप 19 मार्च को औरैया के सहार थाना क्षेत्र के पलिया गांव के पास एक युवक गंभीर रूप से घायल हालत में गेहूं के खेत में पड़ा मिला था. उसे गोली मारी गई थी. ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी. मौके पर पहुंचकर पुलिस ने युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत नाजुक होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया. इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई. मृतक युवक की पहचान दिलीप के रूप में हुई थी. पुलिस की गिरफ्त में हत्यारोपी इस मामले की जांच के लिए सहार थाना पुलिस, सर्विलांस टीम और SOG टीम को लगाया गया. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें एक संदिग्ध शख्स प्रगति के पति को बाइक पर बैठाकर ले जाता दिखा. ऐसे में पुलिस ने प्रेमी और प्रगति को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की. जिसपर दोनों ने राज उगल दिया.  जांच में सामने आई ये सच्चाई पुलिस पूछताछ में प्रगति ने पति की हत्या करने की साजिश को कबूल ली. जांच में सामने आया कि प्रगति का प्रेमी अनुराग यादव उसी गांव का रहने वाला था और दोनों का प्रेम संबंध था. परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था, इसलिए प्रगति की शादी अनुराग से नहीं हो पाई थी. हालांकि, शादी के बाद भी प्रगति अनुराग के प्रेम में पागल थी. यही वजह थी कि उसने पति को रास्ते से हटाने के लिए अनुराग के साथ हत्या की साजिश रच डाली. दो लाख में तय हुआ था ‘मौत का सौदा’ प्रगति ने अनुराग को पति की हत्या के लिए एक लाख रुपये दिए, जिसके बाद अनुराग ने अपने साथी रामजी नागर के साथ मिलकर दो लाख रुपये में सौदा तय किया. 19 मार्च को जब प्रगति का पति कन्नौज से लौट रहा था, तब आरोपियों ने उसे नहर के पास एक होटल पर रोककर बहाने से बाइक पर बिठा लिया और सुनसान जगह ले जाकर उसकी हत्या कर दी. आरोपी अरेस्ट, ये सामान हुआ बरामद फिलहाल, पुलिस ने रामजी नागर और अनुराग को गिरफ्तार कर लिया है. उनके पास से 315 बोर के तमंचे और जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं. गहराई से पूछताछ के बाद प्रगति को भी गिरफ्तार कर लिया गया. अब पुलिस इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है. पुलिस ने कही ये बात पुलिस के मुताबिक, उन्हें 19 मार्च को खेत में घायल पड़े एक व्यक्ति के बारे में सूचना मिली थी. उसे बिधूना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया और उसके परिवार के सदस्यों को सूचित किया गया. घायल दिलीप को बाद में सैफई अस्पताल और उसके बाद मध्य प्रदेश के ग्वालियर और फिर आगरा ले जाया गया. उसकी हालत बिगड़ने पर उसके परिवार ने उसे 20 मार्च को औरैया के एक अस्पताल में भर्ती कराया. हालांकि, 21 मार्च की रात को उसकी मौत हो गई. पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर आरोपी 22 वर्षीय प्रगति, उसके प्रेमी अनुराग उर्फ ​​मनोज और हत्यारे रामजी नागर की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया. पुलिस अधीक्षक (औरैया) अभिजीत आर शंकर ने कहा कि प्रगति और अनुराग ने दिलीप को खत्म करने की साजिश रची थी. उन्होंने दिलीप को मारने के लिए 2 लाख रुपये की सुपारी दी थी.  

मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की

 मेरठ मेरठ में क्रूरता से सौरभ राजपूत की हत्‍या करने वाली उसकी पत्‍नी मुस्‍कान और उसका प्रेमी साहिल शुक्‍ला जेल में हैं। मुस्‍कान के बाद अब साहिल ने भी जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की है। इस सनसनीखेज हत्‍याकांड के सामने आने के दोनों के परिवारों ने उनसे पल्‍ला झाड़ लिया है। मुस्‍कान के पिता प्रमोद रस्‍तोगी ने तो यहां तक कहा है कि वह अपनी बेटी से मिलने कभी नहीं जाएंगे। उसके लिए कभी वकील नहीं करेंगे। इतना ही नहीं अपने दामाद को इंसाफ दिलाने के लिए कोर्ट में बेटी के खिलाफ गवाही भी देंगे। अपने माता-पिता के गुस्‍से से वाकिफ मुस्‍कान रस्‍तोगी ने जेल अधीक्षक से मिलकर सरकारी वकील दिलाने की मांग की थी। अब साहिल ने भी ऐसा ही किया है क्‍योंकि उसे भी लग गया है कि परिवार से उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आएगा। सौरभ राजपूत हत्‍याकांड के बाद मुस्‍कान के माता-पिता ने खुलकर अपनी बेटी के खिलाफ बयान दिए थे। उनका दावा है कि मुस्‍कान ने 18 मार्च को जब उन्‍हें अपने गुनाहों की जानकारी दी तो वे ही उसे लेकर थाने गए और पुलिस के हवाले कर दिया। मुस्‍कान के माता-पिता उसके लिए फांसी की मांग कर रहे हैं। वे मुस्‍कान-साहिल के हाथों बेरहमी से कत्‍ल किए गए अपने दामाद सौरभ राजपूत को अपने बेटे की तरह बता रहे हैं। उधर, साहिल के पिता नीरज शुक्ला का भी ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। नीरज शुक्ला भी अपने बेटे साहिल शुक्ला से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। मुस्‍कान या साहिल से जेल में अब तक कोई मिलने भी नहीं आया है। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने मुस्‍कान के लिए सरकारी वकील की व्‍यवस्‍था कराने की बात पहले ही बताई थी। अब साहिल की मांग सामने आने के बाद माना जा रहा है कि जेल प्रशासन दोनों प्रार्थना पत्र जल्‍द ही कोर्ट को भेजेगा। जेल अधिकारियों के अनुसार यदि कोई बंदी सरकारी वकील की मांग करता है तो यह जेल प्रशासन का कर्तव्‍य है कि वह न्‍यायालय के माध्‍यम से उसे सरकारी वकील उपलब्‍ध कराए। जाहिर है मुस्‍कान-साहिल की मांग पर उन्‍हें भी जल्‍द ही सरकारी वकील मुहैया करा दिया जाएगा। एक गलती से खुला सौरभ मर्डर का ड्रम वाला राज मेरठ के खौफनाक सौरभ हत्याकांड केस में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच एक जानकारी यह भी सामने आई है कि मुस्कान और साहिल ने उस ड्रम को हिमाचल से लौटने के बाद फेंकने का प्लान बनाया था, जिसमें उन्होंने शव के 15 टुकड़ों को सीमेंट के साथ मिलाकर भरा था। लेकिन यहीं पर उनसे चूक हो गई। दरअसल जिस नीले ड्रम में सीमेंट के साथ मिलाकर वे सौरभ के शव के टुकड़ों को रख गए थे, वह बहुत भारी हो गया था। मुस्कान और साहिल को इस चीज का शव को छिपाते वक्त अंदाजा नहीं था, लेकिन पूरा ड्रम ही जब सीमेंट से भर गया और उसमें शव के टुकड़े भी थे तो उसका वजन बहुत ज्यादा बढ़ गया। पुलिस की जांच के अनुसार मुस्कान और साहिल ने 3 मार्च की रात को सौरभ को मार डाला था। फिर उसके शव के 15 टुकड़े कर डाले। इन टुकड़ों को गीले सीमेंट में मिला गया और उसे ड्रम में भर दिया गया। मुस्कान और साहिल इसके बाद दो सप्ताह की हिमाचल ट्रिप पर निकल गए। उनका प्लान था कि लौटने के बाद ड्रम को कहीं फेंक देंगे। दोनों इसी इरादे के साथ 17 मार्च को छुट्टियां मनाकर वापस लौटे। इसके लिए उन्होंने अगले कुछ मजदूरों को बुलाया और कहा कि वे ड्रम को उठाकर कहीं फेंक आएं। उन मजदूरों ने ऐसा करने की कोशिश भी की, लेकिन वजन बहुत ज्यादा होने के चलते उठा नहीं सके। ऐसा करने के दौरान ड्रम का ढक्कर जरूर एक तरफ से खुलने लगा। इसके चलते अंदर बंद शव के सड़े हुए टुकड़ों से बदबू बाहर आने लगी। इस पर मजदूरों को भी संदेह हुआ और वे वहां से चले गए। अब उस ड्रम को साहिल और मुस्कान के बस का उठाना नहीं था। अंत में मुस्कान अपने मायके चली गई और साहिल अपने कमरे पर निकल गया। मां-बाप के यहां पहुंची मुस्कान ने शुरुआत में सौरभ के मर्डर का जिम्मा उसकी बहन और बहनोई पर डालने की कोशिश की। लेकिन पूरी कहानी में मुस्कान की मां और पिता को झोल नजर आया। उन्होंने उसे खूब झकझोरा तो उसने बता दिया कि साहिल के साथ मिलकर मैंने ही सौरभ को मार डाला है। एक पड़ोसी ने बताया कि साहिल अकसर मुस्कान के यहां आता था। लेकिन उनका यह भी कहना था कि दोनों मिलकर ऐसा कोई कांड करेंगे। इस बात का दूर-दूर तक कोई अंदेशा नहीं था। उन्होंने कहा कि मुस्कान का व्यवहार काफी सही थी। उसके बर्ताव से किसी तरह का कभी संदेह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को मुस्कान को शांत अकेले ही बैठा देखा था। वह कहते हैं कि अब हमें लगता है कि शायद वह सोच रही थी कि कैसे ड्रम को ठिकाने लगाया जाए। मुझे भी किसी ने बताया कि इसके लिए मजदूर बुलाए थे, लेकिन वे ड्रम को उठा ही नहीं पाए। बता दें कि सौरभ और मुस्कान की 2016 में लव मैरिज हुई थी। मुस्कान ने 2019 में एक बेटी पीहू को जन्म दिया था, लेकिन उसके ठीक बाद से ही दोनों के रिश्ते बिगड़ते गए। इसकी वजह साहिल की मुस्कान की जिंदगी में एंट्री थी। फिर यहीं से सौरभ की जिंदगी की मुस्कान छिनती चली गई।

राणा सांगा पर दिए गए विवादित बयान मामले में आगरा सिविल कोर्ट में सांसद रामजी और अखिलेश पर केस दर्ज

आगरा राणा सांगा पर दिए गए विवादित बयान मामले में आगरा सिविल कोर्ट सीनियर डिवीजन में अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सिविल केस दायर किया है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही चर्चा कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर विवादित बयान दिया है। इसका समर्थन सपा मुखिया अखिलेश यादव भी कर रहे हैं। अधिवक्ता की ओर से सपा मुखिया अखिलेश यादव और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के खिलाफ सिविल केस दायर किया गया है। केस की सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन में हुई व फाइल को अग्रिम आदेश के लिए रख लिया गया। सुनवाई के दाैरान वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश सिकरवार, एसपी सिंह सिकवार, शिव आधार सिंह तोमर, संतोष धाकरे न्यायालय में उपस्थित रहे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद रामजी लाल सुमन के राणा सांगा को लेकर दिए बयान पर बवाल मचा हुआ है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी सपा सांसद के बयान के विरोध में प्रदर्शन किया। सांसद के खिलाफ तहरीर दी। वहीं, सपा सांसद ने भी मामले में सफाई दी थी। सपा सांसद रामजी लाल सुमन का कहना है कि मैं अपने बयान पर कायम हूं। अगर राज्यसभा सभापति को लगता है मैंने कुछ आपत्तिजनक कहा तो सदन की कार्यवाही से मेरे बयान को हटा सकते हैं।

बरेली में सिलिंडर फटने से उड़ा गैस एजेंसी गोदाम

बरेली बरेली से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र में रजऊ परसपुर स्थित महालक्ष्मी गैस एजेंसी में सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सिलिंडर फटने से आग लग गई। आग ने पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। सिलिंडर फटने से लगातार कई धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के साथ पुलिस मौके पर पहुंच गई। आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक सारे सिलिंडर फट गए। गनीमत रही कि कोई हताहात नहीं हुआ है। घटना इतनी विकराल थी कि धमाकों के साथ फटे सिलिंडरों के टुकड़े 500 मीटर तक जाकर खेतों में गिरे, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ट्रक के केबिन में लगी थी आग प्राप्त जानकारी के मुताबिक सोमवार को सिलिंडरों से भरा ट्रक गोदाम पर खड़ा था। ट्रक के केबिन में किसी तरह आग लग गई, जिससे पहले उसमें रखा एक सिलिंडर फटा। फिर ट्रक और गैस एजेंसी गोदाम में आग लग गई। सिलिंडर फटने से काफी देर तक धमाके होते रहे। घटना से गांव रजऊ परसपुर में दहशत फैल गई। ग्रामीण अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। गांव से बाहर आकर देखा तो पता चला कि गैस गोदाम में धमाके हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मोबाइल से घटना के वीडियो बना लिए। जिस गैस एजेंसी गोदाम में आग लगी है, वह सोमवार को बंद रहती है। गोदाम पर चौकीदार और ट्रक चालक ही थे। दोनों ने भागकर अपनी जान बचाई। वहीं गोदाम आबादी से काफी दूर बना है, जिससे जनहानि होने से बच गई। सूचना मिलते ही शहर से अधिकारी मौके पर रवाना हो गए। पुलिस जांच कर रही है।  

रफ्तार का कहर, बेकाबू स्‍कूल बस पलटी, 15 छात्र-छात्राएं घायल

झांसी  यूपी के झांसी में सोमवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां एक स्‍कूल बस में सवार होकर पढ़ने जा रहे बच्‍चे रफ्तार के कहर के शिकार हो गए। इस हादसे में 15 छात्र-छात्राओं के घायल होने की सूचना मिल रही है। बच्‍चों की चीख-पुकार से आसपास का इलाका दहल उठा। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां कई बच्‍चों की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं एसडीएम मोंठ ने जांच के निर्देश दिए हैं। झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में यह दर्दनाक हादसा हुआ है। सोमवार की सुबह गांव कुइया, बरोदा से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही बस बाबई के आगे बेकाबू होकर पलट गई। हादसे में 15 छात्र-छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गए। सोमवार सुबह-सुबह गांव कुइया और बरौदा से छात्र-छात्राओं को लेकर निजी गुरुकुल आश्रम की बस स्कूल जा रही थी। उसमें करीब 30 छात्र-छात्राएं सवार थे। जैसे ही ड्राइवर बाबई-बरोदा सड़क पर पहुंचा, तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, बस बेकाबू होकर पलट गई। हादसे के बाद वहां चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आनन-फानन में राहगीर मदद को दौड़े। सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी पूंछ जेपी पाल ने मौका-मुआयना किया। तुरंत रेस्क्यू कर घायल छात्र-छात्राएं विवेक बेटा अरविंद, अक्षय कुशवाहा बेटा हरिनारायण, अनन्या बेटी रविकांत, पूनम बेटी हरीश, शिवानी बेटी लोक सिंह, मोना बेटी हरि शरण, इशांत बेटा दिनेश वंशकार, राजवीर बेटा संतोष बरार निवासी गांव कुइया, अंकित बेटी चतुर्भुज, नीलम गोस्वामी बेटी गणेश, आभा वर्मा बेटी राजेंद्र प्रसाद, शिखा बेटी देवेश कुमार, शिवानी बेटी देवेश कुमार, वर्षा बेटी रमाकांत गोस्वामी, विशाल गोस्वामी बेटा रमाकांत निवासी गांव बरोदा सहित अन्य को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोंठ में भर्ती कराया गया है। जहां कई बच्‍चों की हालत नाजुक होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज झांसी भेज दिया है। उपजिलाधिकारी मोंठ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। पूंछ थाना प्रभारी जेपी पाल ने बताया बस में करीब 30 बच्चे सवार थे। 15 बच्चे घायल हैं। उन्हें में भर्ती कराया गया। आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

4 अप्रैल तक जारी रहेंगे योगी सरकार के आठ वर्षों का उत्सव

लखनऊ  भाजपा योगी सरकार की 8 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव मनाएगी। सोमवार से 14 अप्रैल तक भाजपा प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार की 8 वर्ष की उपलब्धियों के साथ जनसंवाद करेगी। इस क्रम में जिला स्तर पर कार्यशालाएं होंगी। अभियान के प्रदेश संयोजक व प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह की अगुवाई में ‘उत्तर प्रदेश का उत्कर्ष-भाजपा सरकार के 8 वर्ष’ के संदेश के साथ सरकार की उपलब्धियों को लेकर भाजपा जनमानस तक पहुंचेगी। अभियान के लिए प्रदेश स्तर पर प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल, प्रदेश उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, प्रदेश मंत्री शंकर गिरि, मीना चौबे, अमित वाल्मीकि, बसंत त्यागी और शिवभूषण सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। क्षेत्र व जिला स्तर पर भी संयोजक व सह संयोजक बनाए गए है। अभियान के तहत जिला स्तर पर लाभार्थी मेले आयोजित होंगे। प्रत्येक विधानसभा स्तर पर विकास गोष्ठियां होंगी। युवा मोर्चा जिले में सरकार की उपलब्धियों के उपलक्ष्य में बाइक रैली निकालेगा। जिला स्तर पर प्रबुद्ध वर्ग का संवाद सम्मेलन होगा। ग्राम सभा स्तर पर महिला मोर्चा महिलाओं के साथ संवाद करेगी। डाॅ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर बूथ स्तर पर स्वच्छता कार्यक्रम होंगे। साथ ही, भाजपा सरकार द्वारा सामाजिक न्याय एवं सामाजिक समरसता के लिए हुए कार्यों पर चर्चा होगी।

थाने में खर्राटे मारकर सोया योगेश, मासूमों का हुआ अंतिम संस्कार

सहारनपुर सहारनपुर के सांगाठेड़ा गांव में एक तरफ तीन मासूम श्रद्धा, शिवांश और देवांश की चिता जल रही थी उसी समय उनके कातिल बाप योगेश को गंगोह थाना पुलिस अदालत लेकर पहुंची। गांव में अंतिम संस्कार हो रहा था तो वहीं कातिल बाप की अदालत में पेशी थी। उस समय हर किसी की आंखें नम थीं, जब एक अर्थी पर श्रद्धा और दूसरी अर्थी पर दोनों भाई शिवांश और देवांश को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जा रहे थे। दरअसल, रविवार दोपहर बाद 3:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव गांव में पहुंचे। योगेश के चचेरे भाई अक्षय ने दी तीनों को मुखाग्नि मासूमों के साथ बिताए गए पलों को याद कर परिजनों से लेकर आसपड़ोस में भी चीत्कार मच गया। हर कोई मासूमों को अंतिम बार देखना चाहता था। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था तो वहीं पुरुषों की आंखें भी नम थीं। करीब 4:30 बजे तीनों की शव यात्रा को श्मशान घाट में ले जाया गया। वहां पर तीनों का अलग-अलग चिता में अंतिम संस्कार किया गया। योगेश के चचेरे भाई अक्षय ने तीनों को मुखाग्नि दी।   उधर, अब इसे अजीब इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि जिस समय अंतिम संस्कार हो रहा था उसी समय पुलिस आरोपी योगेश को अदालत में लेकर पहुंची। एक तरफ बच्चों की चिता जल रही थी तो दूसरी तरफ अदालत में आरोपी बाप को लाया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हर कोई आरोपी को कोस रहा था कि आखिर इनका क्या कसूर था। इन्हें क्यों मौत के घाट उतारा गया। इन मासूमों ने तो अभी जी भरकर दुनिया देखी भी नहीं थी। हत्याकांड के बाद पुलिस आरोपी को लेकर थाने पहुंची। वहां जाकर वह पुलिस के सामने एक ही राग अलापता रहा कि पत्नी के अनैतिक संबंध थे। इस वजह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया। बच्चों को मारने पर पूछा तो बताया कि बच्चे मां को सपोर्ट करते थे और हमारे बाद बच्चों का क्या होता। इसलिए बच्चों को मारा। हैरानी की बात यह थी कि इतने जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी ने थाने में कुछ घंटे तक ऐसा दर्शाया कि यह गलत हो गया, लेकिन रात होते ही वह हवालात में ऐसे खर्राटे मारकर सोया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। उसके इस रवैये से पुलिसकर्मी भी अचंभित थे। सुबह उठने के बाद नाश्ता भी बड़े आराम से खाया। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गंगोह के सांगाठेड़ा गांव में दिल दहला देने वाली वारदात हुई। भाजपा नेता योगेश रोहिला ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों के सिर में लाइसेंसी पिस्टल सटाकर गोली मार दी। इसमें श्रद्धा (8), देवांश (7) और शिवांश (4) की मौत हो गई, जबकि पत्नी नेहा (32) मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। योगेश ने खुद फोन करके पुलिस को वारदात की सूचना दी। पुलिस ने घर पहुंच कर उसे गिरफ्तार कर लिया। अभी तक जांच में सामने आया है कि आरोपी को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था, जिसके चलते इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। कमरे से एक के बाद एक कई गोलियों की आवाज आई योगेश रोहिला भाजपा में जिला कार्यसमिति का सदस्य है। दोपहर करीब डेढ़ बजे योगेश बाहर से आया और घर में जाकर कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। करीब दो बजे कमरे से एक के बाद एक कई गोलियों की आवाज सुनाई दी। इस पर उसी मकान के दूसरे हिस्से में रहने वाली योगेश की चाची मीना व अन्य परिजनों ने दरवाजा खटखटाया। ‘मैंने पत्नी और तीनों बच्चों को गोली मार दी’ योगेश ने दरवाजा खोला और तेज आवाज में कहा कि मैंने पत्नी और तीनों बच्चों को गोली मार दी। यह सुनते ही परिजन हैरान रह गए। उन्होंने अंदर जाकर देखा तो वहां चारों खून से लथपथ हालत में पड़े थे। श्रद्धा की मौत हो चुकी थी, जबकि पत्नी और अन्य दोनों बच्चे तड़प रहे थे। सभी के सिर में गोली मारी गई थी। इसी दौरान आरोपी ने एसएसपी, सीओ और कोतवाल को भी फोन कर कहा कि मैंने परिवार को मार दिया है। ‘मैं खुद को भी गोली मार लूंगा, जल्दी आइए’ मैं खुद को भी गोली मार लूंगा, जल्दी आइए। पता चलते ही एसएसपी रोहित सिंह सजवाण और एसपी देहात सागर जैन समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया। लाइसेंसी पिस्टल को भी जब्त कर लिया गया है। घायलों को जिला अस्पताल में लाया गया, जहां शिवांश और देवांश की भी मौत हो गई। नेहा को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। मम्मी का साथ देते थे बच्चे…इसलिए मारा आरोपी ने कहा कि तीनों बच्चे अपनी मम्मी की तरफदारी करते थे। जब भी झगड़ा होता था तब बच्चे कहते थे कि पापा आप गलत हो, मम्मी सही है। इसी वजह से उन्हें भी गोली मार दी। चेहरे पर शिकन तक नहीं पुलिस ने आरोपी को पकड़ा, उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। जांच में पता चला कि योगेश मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पुलिस के मुताबिक, योगेश ने पिस्टल का लाइसेंस 2013 में लिया था। वह दो माह से पत्नी को परेशान कर रहा था। गांव में योगेश ने बड़े नेताओं जैसा रौब गांठ रखा था। वह भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष रह चुका है। उसे कई बार पार्टी से निष्कासित भी किया गया।

पहले कोर्ट में प्रेमिका से कोर्ट मैरिज, रात में परिवार वालों को खुश करने को ‘दूसरी’ संग सात फेरे

गोरखपुर गोरखपुर में रहने वाले एक युवक ने एक ही दिन में दो शादियां कर लीं। प्रेमिका के साथ दिन में कोर्ट मैरेज और रात में घरवालों के कहने पर दूसरी युवती से ब्याह रचा लिया। दूसरी शादी करने के बाद प्रेमिका से किनारा कर लिया। दो दिन बाद प्रेमिका को जब यह पता चला कि युवक ने दूसरी शादी कर ली है तो वह उसके घर पहुंच गई। उसकी बातें सुनने के बाद घरवालों ने उसके चरित्र पर लांछन लगाते हुए घर से भगा दिया। उसकी शिकायत पर एसपी नार्थ ने इलाका पुलिस से जांच कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। हरपुर बुदहट इलाके की युवती का गांव के पास के ही बिरादरी के एक युवक से प्रेम संबंध था। करीब चार वर्ष बाद दोनों ने मंदिर में शादी की और फिर लिवइन में रहने लगे, लेकिन घरवालों को इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच युवक के घरवालों ने उसकी शादी दूसरी जगह तय कर दी। युवक को इसकी जानकारी हुई तो उसने अपनी प्रेमिका से यह बात साझा की और कहा कि घरवालों का दबाव है। उधर, घरवालों ने शादी की तारीख भी तय कर दी। इसकी जानकारी प्रेमिका को हो गई तो युवक ने उसे एक बार फिर झांसे में लिया। उसने कहा, शादी से पहले ही कोर्ट मैरेज कर लेते हैं और इसकी जानकारी घरवालों को देने पर वे हम लोगों के रिश्ते को मानने पर मजबूर हो जाएंगे। कोर्ट मैरेज की तारीख भी वही तय हुई, जिस दिन घरवालों ने उसकी शादी निश्चित की थी। सुबह कोर्ट खुलते ही युवक ने प्रेमिका से कोर्ट मैरेज की और दोनों घर चले आए। इसके बाद वह घरवालों को समझाने की बात कहते हुए युवक प्रेमिका के घर से निकला और शाम को दूसरी शादी करने पहुंच गया। 15 दिन तक प्रेमिका से उसकी बातचीत नहीं हुई। इस पर वह पता करते हुए युवक के घर पहुंच गई और मामला खुलकर सामने आ गया। दो बार गर्भपात कराया, जन्मा बच्चा नर्स को दिया युवती का आरोप है कि दोनों लिव इन में थे। इसी बीच दो बार गर्भपात कराया। तारामंडल स्थित एक नर्सिंगहोम में उसने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन उसे युवक ने नर्स को दे दिया। पूछने पर बताया कि हम लोग अकेले रहते हैं, बच्चे के थोड़ा बड़ा होने पर लेकर आएंगे। वह बच्चा कहां है, यह युवती को नहीं पता है।  

सीएम योगी अफवाह फैलाने वालों और शरारतपूर्ण बयान देने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आदेश दिया

लखनऊ आगामी चैत्र नवरात्रि, रामनवमी, ईद-उल-फितर, बैशाखी जैसे प्रमुख पर्वों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक की. मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए और कहा कि परंपरा के विपरीत कोई भी कार्य न किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़क मार्ग बाधित न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अराजकता फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शोभायात्राएं, मेले और धार्मिक आयोजन होते हैं, जिससे यह समय संवेदनशील हो जाता है. इसलिए सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को चौकसी बढ़ाने और सतत निगरानी रखने की जरूरत है. उन्होंने अफवाह फैलाने वालों और शरारतपूर्ण बयान देने वालों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आदेश दिया. शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर न्यूज एजेंसी की मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के नेतृत्व में सभी धर्म-सम्प्रदायों के पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए हैं. इस क्रम को बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं. उन्होंने निर्देश दिया कि पर्वों के दौरान जनता को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. विशेष रूप से ईद के अवसर पर साफ-सफाई, स्वच्छता, और पेयजल व्यवस्था की पुख्ता तैयारी करने को कहा. साथ ही, अलविदा की नमाज़ के दौरान विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाए. उन्होंने पुलिस फुट पेट्रोलिंग बढ़ाने, पीआरवी 112 को सक्रिय रखने और सोशल मीडिया पर निगरानी रखने के निर्देश दिए. किसी भी प्रकार की अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई करने और जनता को सकारात्मक संदेश देने की अपील की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पीस कमेटी की बैठकें समय रहते आयोजित करने और मीडिया के सहयोग से शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखने को कहा. उन्होंने कहा कि संवाद और त्वरित कार्यवाही अप्रिय घटनाओं को रोकने में सहायक होती है. धर्मगुरुओं और समाज के प्रतिष्ठित लोगों से संवाद करें अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी थाना, सर्किल, जिला, रेंज, जोन और मंडल स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र के धर्मगुरुओं और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संवाद स्थापित करें. उन्होंने कहा कि छोटी-सी अफवाह भी माहौल बिगाड़ सकती है, इसलिए पुलिस और प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहना होगा. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनवमी पर अयोध्या और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मां विंध्यवासिनी धाम, देवीपाटन धाम, सहारनपुर में मां शाकुम्भरी धाम और सीतापुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. ऐसे में सुशासन और सुव्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए. उन्होंने भीड़ प्रबंधन को लेकर बेहतर योजना बनाने के निर्देश दिए.मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख धार्मिक स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया जाए. साथ ही, गर्मी के मद्देनजर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, छाया, मैट आदि की विशेष व्यवस्था की जाए. देवी स्थलों पर महिला पुलिसकर्मियों की विशेष तैनाती के निर्देश भी दिए गए. उन्होंने सभी आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट मोड में रखने, एम्बुलेंस को तैयार रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन और पुलिस विभाग को पूरी तत्परता से कार्य करना होगा ताकि प्रदेश में सभी त्योहार शांति, सौहार्द और उल्लास के साथ संपन्न हो सकें.  

आरटीई : चार चरणों में मिले थे 3.34 लाख आवेदन, आज होगा सीट अलॉटमेंट

लखनऊ प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चल रही प्रवेश प्रक्रिया में सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। अभिभावकों के मोबाइल फोन पर सीट अलॉटमेंट की जानकारी दी जाती है। कई अभिभावक सूचना न मिलने से परेशान हैं। आरटीई के तहत प्रदेश के लिए चार चरणों में आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीन चरणों का सीट अलॉटमेंट कर प्रवेश दिलाया जा रहा है। इसके बावजूद कई अभिभावक भटक रहे हैं। क्योंकि बच्चे को सीट अलॉट हो गई, लेकिन अभिभावक को इसकी जानकारी नहीं हुई। अभिभावकों ने बताया कि आवेदन करते समय साइबर कैफे वाले अपना फोन नंबर डाल देते हैं। इससे मैसेज उनको नहीं मिल पाती है। वहीं, कोई और ऐसा माध्यम नहीं है, जिससे सीट अलॉटमेंट की जानकारी मिल सके। इसके लिए अभिभावक बीएसए कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। तो वहां के कर्मचारी भी यह कहकर टरका देते हैं कि सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन देखने का अधिकार सिर्फ बीएसए को है। जब वह आएंगे तो सीट अलॉटमेंट के बारे में पता चलेगा। इसलिए अभिभावक सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या होने के कारण सीट अलॉटमेंट की सूचना ऑनलाइन नहीं की जाती है। संबंधित अभिभावक या बच्चे अपना परिणाम ही देख सकते हैं। अभिभावकों को मोबाइल फोन पर सीधे मैसेज जाता है। जिला स्तर पर डाटा देखने का अधिकार बीएसए व राज्य स्तर पर हमारे पास है। अगर संबंधित बच्चे को अपनी दूसरी प्राथमिकता पर प्रवेश लेना है तो बीएसए कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आरटीई के तहत अधिकाधिक बच्चों के दाखिले के लिए अभियान चलाया जा रहा है। चार चरणों में मिले 3.34 लाख आवेदन, आज होगा अलॉटमेंट आरटीई के तहत इस साल चार चरणों में आवेदन लिए गए। दिसंबर से अब तक चार चरणों में 3.34 लाख आवेदन मिले हैं। इनमें से तीन चरणों में 2.17 लाख आवेदन स्वीकृत हुए और 1.57 लाख बच्चों को सीट अलॉट की गई है। चौथे चरण के आवेदनों का सत्यापन किया जा रहा है, सीट अलॉटमेंट 24 मार्च को होगा।

साइकिल चलाने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि चरित्र का निर्माण भी होता है: खेल मंत्री मांडविया

लखनऊ केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने यहां ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ के दौरान 500 से अधिक सवारों का नेतृत्व किया। उनके साथ उत्तर प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव, प्रमुख सचिव (खेल) मनीष चौहान और सचिव (खेल) उत्तर प्रदेश सुहास यतिराज भी थे। मोटापे से लड़ने और स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को फैलाते हुए मांडविया ने कहा, “साइकिल चलाने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि चरित्र का निर्माण भी होता है।” मंत्री ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के वरिष्ठ अधिकारियों और माईभारत पहल और फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) के सदस्यों के साथ मरीन ड्राइव (सामाजिक परिवर्तन स्थल) से समता मूलक चौराहा से 1090 चौराहा और वापस 3 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी की। लखनऊ में साई के नेताजी सुभाष क्षेत्रीय केंद्र द्वारा आयोजित इस साइक्लिंग अभियान में युवा लड़के-लड़कियों और स्थानीय राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के 100 से अधिक एथलीटों ने भारी उत्साह दिखाया, जिन्होंने साइक्लिंग अभियान से पहले जुम्बा प्रदर्शन भी किया। साइकिल रैली के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, मांडविया ने नागरिकों को मोटापे से लड़ने और देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में साइक्लिंग को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। “साइकिल चलाने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास बढ़ता है और हमारे देश का भविष्य भी आकार लेता है। यह केवल परिवहन का एक साधन नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साइकिल चलाने को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं, प्रदूषण को कम कर सकते हैं और पर्यावरण को हरा-भरा बनाने में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं प्रत्येक नागरिक से आग्रह करता हूं कि वे साइकिल चलाना न केवल शौक के तौर पर अपनाएं , बल्कि अपने स्वास्थ्य और हमारे ग्रह के लाभ के लिए इसे अपनी जीवनशैली का नियमित हिस्सा बनाएं। आइए हम सभी फिटनेस को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक स्वस्थ युवा ही समृद्ध राज्य और देश की ताकत है।” उत्तर प्रदेश सरकार के खेल और युवा कल्याण राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा, “फिटनेस एक मजबूत और जीवंत समाज की नींव है। हमारे युवाओं को जीवन में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से सफल होने के लिए यह आवश्यक है कि हम अनुशासन, कड़ी मेहनत और फिटनेस के मूल्यों को अपनाएं।” जबकि दिल्ली में, ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ में पेरिस पैरालंपिक पैरा बैडमिंटन पदक विजेता नितेश कुमार और मनीषा रामदास की उपस्थिति देखी गई। एथलीट चल रहे खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में भाग लेने के लिए दिल्ली में थे। खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 के आधिकारिक एक्सेसिबिलिटी पार्टनर, स्वयं के संस्थापक स्मिनू जिंदल भी प्रतिभागियों को प्रेरित करने के लिए मौजूद थे। नितेश, मनीषा और जिंदल ने पेफी द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई और इसमें 600 से अधिक लोगों ने भाग लिया। मुंबई में, एशियाई खेलों के पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी किशोर जेना ने सुरम्य अक्सा बीच पर साइक्लिंग आंदोलन में भाग लिया। अब तक, राष्ट्रव्यापी साइक्लिंग अभियान 5000 स्थानों पर आयोजित किया गया है, जिसमें लगभग 2 लाख से अधिक व्यक्तियों की भागीदारी है। यह आंदोलन देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को भी बढ़ावा देता है। यह पहल कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइक्लिंग के शौकीनों, एथलीटों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों सहित अन्य लोगों की भागीदारी के साथ आयोजित की जा रही है। इससे पहले, साइक्लिंग कार्यक्रम में भारतीय सेना के जवान, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और लवलीना बोरगोहेन, संग्राम सिंह, शैंकी सिंह, नीतू घनघस, स्वीटी बूरा, पेरिस पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता रुबीना फ्रांसिस और सिमरन शर्मा (पैरा विश्व चैंपियन) जैसे प्रमुख खेल सितारों के अलावा राहुल बोस, अमित सियाल और गुल पनाग जैसी हस्तियां भी भाग ले चुकी हैं।

भाजपा नेताओं ने सबसे ज्यादा जमीनों पर कब्जा किया है और वे भूमाफिया बनकर सामने आए हैं: अखिलेश यादव

लखनऊ समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को लोहिया पार्क में डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें नमन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नेताओं ने सबसे ज्यादा जमीनों पर कब्जा किया है और वे भूमाफिया बनकर सामने आए हैं। उन्होंने निलंबित आईएएस अधिकारी को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। सपा प्रमुख ने कहा कि लंबे समय से जमीन का बंटवारा हो रहा था। केवल एक अधिकारी नहीं बल्कि भाजपा के नेता भी भूमाफिया बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहनलालगंज और सरोजनी नगर में सबसे ज्यादा जमीनें भाजपा के नेताओं ने कब्जा की हैं। वे जनसेवक नहीं बल्कि भूमाफिया हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “आगरा में उन्हीं का विधायक क्या आरोप लगा रहा है? गाजियाबाद में उन्हीं का विधायक क्या आरोप लगा रहा है? अधिकारी और सरकार मिलकर जनता को लूट रहे हैं। अयोध्या में एक एसडीएम शिवम यादव पर लगातार दबाव बना रहा था। गाली-गलौज करके पैसे लेना चाहता था। उस एसडीएम के कारण उसकी जान तक चली गई। इसके लिए कौन दोषी है?” समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि सरकार में बैठे हुए लोग भ्रष्ट हैं। एक पड़ोसी राज्य में 50 करोड़ रुपये पकड़े गए थे, उसका आरोप किस आईएएस पर लगा है? उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया ने सप्त क्रांति का आंदोलन, समानता और सबको बराबरी के लिए इकट्ठा करने का रास्ता बनाया था। आज के दिन हम लोग उन्हें तो याद कर ही रहे हैं, इसके साथ सुखदेव राजगुरु और भगत सिंह को भी याद कर रहे हैं।

संभल में अब जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली को पूछताछ के बाद किया गिरफ्तार

संभल पिछले साल 24 नवंबर को संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा मामले में एसआईटी ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस द्वारा पहले नोटिस जारी किए जाने के बाद अब जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। जफर अली एडवोकेट को हिरासत में लेकर पहले कोतवाली लाकर पूछताछ की गई। यहीं पर इनकी गिरफ्तारी हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर कोतवाली में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। एसआईटी मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। एएसपी श्रीश्चन्द्र ने बताया कि एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है। सदर से पूछताछ अभी जारी है। माना जा रहा है कि पूछताछ के बाद जामा मस्जिद के सदर की गिरफ्तारी हो सकती है। सदर के भाई बोले, पुलिस नहीं चाहती कि शहर में शांति रहे जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफ़र अली एडवोकेट के बड़े भाई ताहिर अली एडवोकेट कोतवाली में जफ़र अली से मिलने पहुंचे। सदर से मिलने के बाद उन्होंने बताया कि न्यायिक आयोग में सोमवार को जफ़र अली को अपना बयान देना था, पुलिस चाहती है कि ब्यान नहीं दें, लेकिन वह वही बयान देंगे जो उन्होंने दिया था कि हिंसा के दौरान पुलिस ने ही गोली चलाई थी। जफ़र अली चाहते हैं कि संभल में शांति रहे लेकिन पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि शांति रहे। पुलिस उन्हें जेल भेजने की तैयारी कर रही है। उन्होंने एएसपी से कहा कि आप शहर में तनाव बढ़ाना चाहते हैं। एएसपी श्रीश्चन्द्र ने बताया कि शहर में पूरी तरह शांति है। बुलाने के बाद भी लखनऊ में हाजिर नहीं हुए थे जामा मस्जिद के सदर शाही जामा मस्जिद में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच कर रहे त्रि-सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट, मसूद अली फारूकी एडवोकेट और कासिम जलाल एडवोकेट को 11 मार्च 2025 को लखनऊ में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। इस पर आयोग ने फिर से समन जारी कर 20 मार्च को उपस्थित होकर साक्ष्य अंकित कराने के निर्देश दिए थे। अब तक आयोग ने संभल में चार दौरे पूरे कर 160 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। चौथे दौरे में डीएम, एसडीएम समेत 45 अधिकारियों और लोगों के बयान दर्ज हुए थे। बचे हुए गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए अब लखनऊ में उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। ये है पूरा मामला 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद में दूसरे दौर के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात को काबू में करने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व डीजीपी ए.के. जैन और रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव अमित मोहन सदस्य हैं। आयोग ने अब तक कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं और जल्द ही इस घटना की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है। अब तक की जांच में क्या हुआ? 1 दिसंबर: आयोग ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी ली। 21 जनवरी: टीम ने मस्जिद क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां विदेशी कारतूस भी मिले। इस दौरान 21 पुलिसकर्मियों समेत 60 लोगों के बयान दर्ज किए गए। 30 जनवरी: तीसरी बार आई टीम ने स्वास्थ्य, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज किए, जिनमें एएसपी श्रीशचंद्र और डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू शामिल रहे। 2 मार्च: चौथी बार दो दिवसीय दौरे में आयोग ने डीएम, एसडीएम समेत 45 के बयान दर्ज किए थे। 77 लोगों के वीसी से बयान दर्ज किए।

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