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कलेक्टर, IG, SSP और कमिश्नर ‘मुन्नी बदनाम हुई…’ गाने पर ठुमके लगाते नजर

रायपुर राजधानी में शांतीपूर्ण होली का त्यौहार पूरा होने के बाद आज पुलिस परिवार होली का जश्न मना रहे हैं. इस दौरान कलेक्टर गौरव कुमार सिंह, IG, SSP और कमिश्नर ‘मुन्नी बदनाम हुई…’ गाने पर ठुमके लगाते नजर आए. सभी पुलिस कर्मचारियों के साथ अधिकारियों ने भी नगाड़ा बजाया और रंगों में सराबोर होकर होली का आनंद लिया. बता दें, होली के दिन जब शहर के लोग अपने घरों में होली खेल रहे थे, तब पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे. कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने कहा, “पिछले 72 घंटों से पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी पर थे, जिनकी मुस्तैदी के कारण रायपुर में शांतिपूर्ण तरीके से होली मनाई गई. रायपुर वासियों की जागरूकता और भाईचारे की वजह से इस बार की होली में कोई अव्यवस्था नहीं हुई.” कलेक्टर ने आगे कहा, “इनकी जिम्मेदारी निभाने के बाद अब होली मना रहे हैं, और इनका हौसला बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है. इसलिए आज हम सब मिलकर होली खेल रहे हैं.”

तेज रफ़्तार कार डिवाइडर से टकराकर पलटी, बीजेपी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष की बेटी की मौत

दुर्ग होली के दिन दुर्ग-राजनांदगांव बायपास रोड पर भीषण सड़क हादसे में बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष स्वीटी कौशिक की बेटी ऋचा कौशिक (23) की मौत हो गई, जबकि उसके तीन दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा सोमवार दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जब ऋचा अपने दोस्तों के साथ दुर्ग बायपास स्थित एक ढाबे में खाना खाने जा रही थी। उनकी तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऋचा को गंभीर चोटें आईं। आनन-फानन में उसे राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। कार का एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई, लेकिन कार पलटने और सिर पर गहरी चोट लगने के कारण ऋचा की मौत हो गई। हादसे में घायल तीन युवकों की पहचान मयंक यादव (क्राइम ASI गुप्तेश्वर यादव का बेटा, कोहका निवासी), आयुष यादव (25, निवासी औद्योगिक क्षेत्र हाउसिंग बोर्ड) और हर्ष यादव (24, कोहका, भिलाई निवासी) के रूप में हुई। तीनों का इलाज आरोग्यम अस्पताल में चल रहा है। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता शोक व्यक्त करने पहुंचे। दुर्ग सांसद विजय बघेल, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय, भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन, नेता प्रतिपक्ष भोजराम सिन्हा, उप नेता प्रतिपक्ष दया सिंह, पार्षद विनोद सिंह और पूर्व भाजपा अध्यक्ष बृजेश बिचपुरिया समेत कई नेताओं ने ऋचा को श्रद्धांजलि दी। आज ऋचा के शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का बड़ा सरेंडर: 16 महिला सहित 64 नक्सलियों ने डाला हथियार

रायपुर छत्तीसगढ़ के 64 नक्सलियों ने आज तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. ये नक्सली बस्तर संभाग के सुकमा और बीजापुर जिलों के अलग-अलग बटालियन के सदस्य थे. आत्मसमर्पित नक्सलियों में से 16 महिलाएं हैं. इन सभी माओवादियों ने आज एक साथ समाज के मुख्यमार्ग पर लौटने का फैसला किया है. सभी ने पुलिस मुख्यालय में ऑपरेशन कार्यक्रम के हिस्से के रूप में मल्टी जोन-1 आईजीपी चंद्रशेखर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण किया है. बता दें, माओवादी पार्टी के नाम पर, आदिवासी क्षेत्रों के विकास को रोकने की कोशिश की जाती है. इससे तंग आकर बीते 3 महीनों में 122 माओवादी सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया है. डवीसीएम, एसीएम, मिलीशिया सदस्य, पार्टी सदस्य, पीपीसीएम की 16 महिलाओं सहित कुल 64 नक्सलियों ने आज सामाज से जुड़ कर विकास में सहयोग देने के उद्देश्य से आत्मसमर्पण किया है. इनके पुनर्वास के लिये सरकार ने राज्यों में पुनर्वास योजना के तहत उन्हें नई जिंदगी जीने का एक मौका देती है. तेलंगाना पुलिस ने आज आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 25- 25 हजार रुपये नकद प्रोत्साहन राशि दी है. इस दौरान रेंज आईजी चंद्रशेखर रेड्डी , एसपी रोहित राज, अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे.

हसदेव ताप विद्युत् संयंत्र के ITS ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग

कोरबा छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित हसदेव ताप विद्युत् संयंत्र के ITS ट्रांसफार्मर में आज सुबह-सुबह भीषण आग लग गई. आग इतनी भयावह थी कि कई फीट ऊपर तक आग की लपटें दिखाई दे रही थी. सूचना मिलने पर दमकल की 5 टीमें पहुंची और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल सका है. इस मामले में जांच की जा रही है. बता दें, आगजनी की यह घटना दर्री स्थित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के हसदेव ताप विद्युत संयंत्र ( HTPS) के स्विच यार्ड में हुई है. आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते आग ने स्विचयार्ड के प्लांट के ICT (इंटर कनेक्टिंग) ट्रांसफार्मर समेत 2 अन्य ट्रांसफार्मर को चपेट में ले लिया. जानकार सूत्र ने बताया कि प्लांट में बनने वाली बिजली को यह ICT ट्रांसफार्मर ग्रिड में भेजने के लिए उपयुक्त करेंट में बदलता है. ऐसे में प्लांट की 210 मेगावाट वाली यूनिट 3,4 से उत्पादन बंद करना पड़ा.

चैतन्य बघेल से पूछताछ को लेकर पूर्व सीएम बघेल का बड़ा बयान, बोले – नहीं मिला कोई भी नोटिस

रायपुर छत्तीसगढ़ में चैतन्य बघेल से प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ मामले पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल का बड़ा बयान सामने आया है. दरअसल, बीते दिनों पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर पर ईडी ने दबिश दी थी. जिसके बाद से राजनीतिक माहौल गर्म है. कार्रवाई में भूपेश बघेल के घर से कैश और दस्तावेज मिले थे. खबरों के मुताबिक इस दस्तवेजों की जानकारी के संबंध में ईडी आज चैतन्य बघेल से पूछताछ करने वाली थी. पूरे मामले पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईडी की ओर से किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया गया है. वहीं उन्होंने केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय पर मीडिया हाइप क्रिएट करने का गंभीर आरोप लगाया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को बदनाम करने का ये भाजपा का षड्यंत्र है. 14 ठिकानों पर ईडी की टीम ने दी दबिश बता दें कि भूपेश बघेल के निवास पर ED की टीम ने 10 मार्च को छापा मारा था. ED की टीम ने भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास सहित चैतन्य बघेल के घर और प्रदेशभर में कुल 14 ठिकानों पर दबिश दिया था. कई महत्वपूर्ण दस्तावेज किए गए जब्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर से 6 अलग-अलग मोबाइल फोन के डिटेल्स खंगाले गए थे. इसके अलावा डिजिटल ट्रांजेक्शन के हिसाब भी ईडी के अफसर निकाला था. साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का जब्त भी किया था. बता दें कि ईडी की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री के घर से 33 लाख रुपए जब्त किए थे. जिसका खुलासा खुद भूपेश बघेल ने किया था.

भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शराब घोटाला मामले में आज ईडी दफ्तर में होंगे पेश

रायपुर  पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल आज ईडी दफ्तर में पेश होंगे. वे ईडी को सोमवार को की गई छापेमारी में मिले दस्तावेजों की जानकारी देंगे. बता दें, 10 मार्च को ईडी ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के निवास सहित एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी. रेड कार्रवाई में मिले 33 लाख रुपये और कुछ दस्तावेज, जिसमें मंतूराम केस की पेन ड्राइव भी शामिल है, ईडी अपने साथ ले गई. इसके बाद छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी ने चैतन्य बघेल को समन भेजा था. क्या है शराब घोटाला? तत्कालीन भूपेश सरकार में पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और CM सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत, अवैध दलाली के बेहिसाब पैसे का खेल चल रहा है। इसमें रायपुर महापौर रहे एजाज ढेबर का भाई अनवर ढेबर अवैध वसूली करता है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर ED ने 18 नवंबर, 2022 को PMLA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। आयकर विभाग से मिले दस्तावेजों के आधार पर ED ने जांच के बाद 2161 करोड़ के घोटाले की बात का कोर्ट में पेश चार्जशीट में जिक्र किया था। ED ने अपनी चार्जशीट में बताया कि किस तरह एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के ज़रिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। ED ने चार्जशीट में कहा कि 2017 में आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL के ज़रिए शराब बेचने का प्रावधान किया गया, लेकिन 2019 के बाद शराब घोटाले के किंगपिन अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का MD नियुक्त कराया। उसके बाद अधिकारियों, कारोबारियों और राजनैतिक रसूख वाले लोगों के सिंडिकेट के ज़रिए भ्रष्टाचार किया गया, जिससे 2161 करोड़ का घोटाला हुआ। इस मामले में ED ने 15 जनवरी को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था।

चैतन्य बघेल आज ED के सामने पेश होंगे? एजेंसी ने भेजा समन, शराब घोटाला मामले में होगी पूछताछ

रायपुर. पूर्व CM के बेटे चैतन्य आज ईडी दफ्तर आ सकते हैं. दरअसल, ईडी ने चैतन्य को पूछताछ के लिए समन भेजा था. माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में उनसे पूछताछ की जा सकती है. मालूम हो कि 10 मार्च को भूपेश बघेल के आवास पर ED ने छापा मारा था. इस दौरान टीम को कैश के साथ कई दस्तावेज मिले थे. बताया जा रहा है कि सोमवार को हुई छापेमारी में मिले दस्तावेज और कैश की जानकारी चैतन्य से ईडी मांग सकती है. मालूम हो कि 10 मार्च यानी सोमवार को ईडी की टीम ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल और उनके बेटे के 10 से ज्यादा ठिकानों पर रेड की थी. पूरी कार्रवाई को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है. मालूम हो कि इसी शराब घोटले को लेकर कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पहले से जेल में हैं. इतना ही नहीं इस केस में कई अधिकारियों और शराब से जुड़े कारोबारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. ईडी ने दुर्ग जिले में 14 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें भूपेश बघेल और उनके बेटे के परिसर भी शामिल थे। आठ घंटे तक चली छापेमारी के दौरान, एजेंसी और सीआरपीएफ की एक टीम ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, दस्तावेज और लगभग 30 लाख रुपये जब्त किए। पूर्व सीएम के कथित करीबी सहयोगी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ ​​पप्पू बंसल और अन्य के परिसरों की भी तलाशी ली गई। भिलाई के जिस आवास पर ईडी ने छापा मारा था, उसमें चैतन्य अपने पिता के साथ रहते हैं। ईडी ने पूर्व में कहा था कि छत्तीसगढ़ शराब ‘घोटाले’ के कारण राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ और अपराध से प्राप्त 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबों में गई। ईडी ने इस मामले में राज्य सरकार के नौकरशाहों और व्यापारियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच किया गया था और तब छत्तीसगढ़ में बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। इस मामले में ईडी ने जनवरी में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा के अलावा रायपुर के महापौर और कांग्रेस नेता ऐजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, भारतीय दूरसंचार सेवा (आईटीएस) अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और कुछ अन्य को गिरफ्तार किया था। जांच के तहत ईडी ने अब तक विभिन्न आरोपियों की लगभग 205 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। कौन हैं चैतन्य बघेल? चैतन्य बघेल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे हैं. उनको बिट्टू के नाम से भी जाना जाता है. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चैतन्य विक्टर पुरम नाम से अपार्टमेंट बनाते और बेचते हैं. ये काफी लग्जरी अपार्टमेंट्स होते हैं. चैतन्य बघेल रियल स्टेट बिजनेस से जुड़े हुए हैं. बताया जाता है कि वे करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक हैं. क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ईडी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 तक कथित तौर पर शराब का घोटाला किया गया था. इस शराब घोटाले में राज्य के खजाने से करीब 2161 करोड़ रुपये का घोटाला किया था. ईडी ने 2023 में शिकायत दर्ज कराई थी. इसमें रायपुर के पूर्व मेयर एजाज ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टूटेजा और छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाणी सहित कई लोगों के नाम शामिल थे. एजेंसी का दावा था कि इन लोगों ने ही घोटाले में अहम भूमिका निभाई है.

ग्राम बगिया में ग्रामीणों संग हर्षोल्लास से मुख्यमंत्री साय ने मनाई होली

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने होली के रंगों में सराबोर अपने गृह ग्राम बगिया में ग्रामीणों के साथ आत्मीयता से होली का पर्व मनाया। मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने और होली की शुभकामनाएं देने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया, गुलाल लगाया और पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द्र और आपसी मेलजोल का उत्सव है। यह पर्व हमें हर भेदभाव भूलाकर एकता और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं पर भी चर्चा की। होली के इस उल्लासमय अवसर पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के साथ खुशियों के रंग बांटे, पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया और इस पर्व को सामाजिक सौहार्द्र और उल्लास के साथ मनाया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नितेश कच्छप और उनकी टीम ने होली के पारंपरिक लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे पूरा माहौल रंगीन और संगीतमय हो गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण, पत्रकार बंधु और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ। इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर श्री हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर श्री सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई श्री वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी। इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं। ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया। समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला। राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया। वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

पावन अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, आनंद और परस्पर प्रेम की कामना की : CM साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रंगों और उल्लास के महापर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, आनंद और परस्पर प्रेम की कामना की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला पर्व है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जीवन में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के रंग सबसे अनमोल हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली का त्यौहार सदियों से भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है, जहां भेदभाव मिट जाते हैं, और लोग आपसी स्नेह, उल्लास और उमंग के रंगों में घुल-मिल जाते हैं। यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम की जीत और समाज में सौहार्द्र को और मजबूत करने का संदेश देता है। मुख्यमंत्री साय ने सभी प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि हम सभी होली के पावन पर्व को प्रेम, सौहार्द और आनंद के साथ मनाएं, एक-दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भरें और छत्तीसगढ़ की समरसता और एकता को और अधिक सशक्त बनाएं।

महाकाल कॉरिडोर की तरह ऐतिहासिक महादेव घाट के शिव मंदिर और नदी का होगा कायाकल्प

रायपुर महाकाल कॉरिडोर की तरह ऐतिहासिक महादेव घाट के शिव मंदिर और नदी का वह तट जो मंदिर के ठीक पीछे से रायपुरा पुल की ओर जाता है, इसी प्रकार मुक्तिधाम को छोड़ भाठागांव बायपास रोड की ओर जहां आजू-बाजू दुकानें हैं उस एरिया को भी व्यवस्थित किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में नगर निगम के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं. इसका दूसरा चरण सिंचाई और पर्यटन विभाग विकसित करेगा. पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश मूणत ने बताया कि इस कॉरिडोर की तैयारी लंबे समय से चल रही थी. महादेव घाट के महत्व को शासन ने माना और इसे एक नये पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में स्वीकृत देकर राशि जारी कर दी. इसके बाद विसर्जन कुंड से होते हुए टाटीबंध के आगे चंदनीडीह की ओर एक डबल लेन रोड का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है. इस पर भी अगले महीने से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) सर्वे करेगा. श्री मूणत ने बताया कि इस रोड के बनने से आधे से अधिक ट्रैफिक डायवर्ट हो जाएगा. लोगों का भिलाई-दुर्ग की ओर भाठागांव, रायपुरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आना-जाना आसान हो जाएगा. इस रोड बनने के साथ ही हम पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सघन वृक्षारोपण जिसमें मौसमी फलों के वृक्ष लगाकर ऐसे फलों के व्यापार को आगे बढ़ाने का काम करेंगे. चौक से शुरू हो जाएगी व्यवस्था महादेव घाट प्रोजेक्ट का काम रायपुरा का चौक जहां से एक ओर पुल की ओर दूसरा रास्ता सीधे मंदिर में जाता है, इसी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते से शुरू होगा. इसके बाद ब्रम्हविद् स्कूल की ओर जाने वाली रोड का लगभग 50 से 100 मीटर हिस्सा भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा. मंदिर के आसपास दुकानें होंगी व्यवस्थित इस प्रोजेक्ट के संबंध में अधिकारियों ने कहा कि महादेव घाट कॉरिडोर योजना में मंदिर के आसपास की दुकानों को भी व्यवस्थित किया जाएगा. हम इन दुकानों को वहां से हटाने के बजाय उनके लिए आकर्षक व्यवस्था करने की दिशा में काम करेंगे. इससे मंदिर का स्वरूप जो अभी दूर से नहीं दिखता, लोगों को रोड से स्पष्ट दिखाई देगा.

बलरामपुर -रामानुजगंज जिले में 17 मार्च से प्रारंभ होगी 5वीं एवं 8वीं की परीक्षा

बलरामपुर राज्य में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की केन्द्रीकृत वार्षिक परीक्षाएं 17 मार्च से 03 अप्रैल 2025 तक आयोजित होंगी। परीक्षाओं के लिए कक्षा 5वीं हेतु प्रातः 09 बजे से 11 बजे तक तथा कक्षा 8वीं हेतु प्रातः 09 बजे से 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। बलरामपुर -रामानुजगंज जिले में कलेक्टर  राजेन्द्र कटारा के निर्देशन एवं जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। जिले में कुल 2277 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं। परीक्षा के सफल संचालन एवं आवश्यक व्यवस्था हेतु कलेक्टर श्री कटारा के द्वारा डिप्टी कलेक्टर  इंदिरा मिश्रा, मोबाईल नम्बर 70001-61300 को नोडल अधिकारी व जिला शिक्षा अधिकारी डी.एन. मिश्रा मोबाइल नंबर 94255-85069 को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। परीक्षा केन्द्रों के सघन निरीक्षण के लिए उड़नदस्ता दल नियुक्त परीक्षा के सघन निरीक्षण एवं अनुचित साधनों को रोकने के लिए कलेक्टर  राजेन्द्र कटारा के द्वारा जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन भी किया गया है। जिसमें अनुभाग बलरामपुर के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी बलरामपुर को दल प्रभारी एवं परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बलरामपुर को दल सदस्य नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार जिसमें अनुभाग रामानुजगंज के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी रामानुजगंज को दल प्रभारी एवं परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी रामानुजगंज को दल सदस्य, अनुभाग वाड्रफनगर के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी वाड्रफनगर को दल प्रभारी एवं परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी वाड्रफनगर को दल सदस्य, अनुभाग राजपुर के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी राजपुर को दल प्रभारी एवं परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी राजपुर को दल सदस्य, अनुभाग कुसमी के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी कुसमी को दल प्रभारी एवं परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कुसमी को दल सदस्य तथा अनुभाग शंकरगढ़ के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी शंकरगढ़ को दल प्रभारी एवं खाद्य निरीक्षक व वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी शंकरगढ़ को दल सदस्य नियुक्त किया गया है।  

26 मार्च को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के लिए साक्षात्कार: 114 आवेदनकर्ताओं ने आवेदन किया प्रस्तुत, 33 लोगों को किया आमंत्रित

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 26 मार्च को साक्षात्कार बुलाया गया है. अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 114 आवेदनकर्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत किया है. सर्च समिति ने आवेदनों की प्रारंभिक स्क्रूटनी के बाद 33 लोगों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया है. उच्चतम न्यायालय द्वारा 7 जनवरी 2025 को जारी निर्देश के अनुसार, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए प्राप्त आवेदनों के संबंध में मापदण्ड तय कर परीक्षण कर अनुशंसा देने के लिए गठित सर्च कमेटी की 5 मार्च को बैठक हुई. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में हुई बैठक में निहारिका बारिक, सोनमणि बोरा और अविनाश चम्पावत उपस्थित हुए. बैठक में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 114 आवेदनकर्ताओं से प्राप्त आवेदन की प्रारंभिक स्क्रूटनी की गई. समिति ने आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण विधि विज्ञान और प्रोद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन और शासन में 30 वर्ष या उससे अधिक अनुभव वाले 65 वर्ष से कम आयु के आवेदनकर्ताओं को ही 26 मार्च को नवा रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में साक्षात्कार के लिए आमंत्रित करना का फैसला लिया. साक्षात्कार के लिए जिन्हें आमंत्रित किया आलोक चंद्रवंशी, अमिताभ जैन, अमृत, आनंद ए वर्गिस, अशोक जुनेजा, धनवेन्द्र जयसवाल, दुर्गेश माधव अवस्थी, घनाराम साहू, केदार नाथ शर्मा, ललित कुमार सोनी, मनोज राय, नरेंद्र बंगाले, नरेन्द्र कुमार शुक्ल, प्रदीप शर्मा, प्रह्लाद कुमार निषाद, प्रमोद ब्रह्मभट्ट, राजेंद्र प्रसाद मंडल, राजेश कुमार सिंह, राजेश कुमार श्रीवास्तव, रजनीश चंद्राकर, रूद्र अवस्थी, संदीप कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार पांडे, संजय कुमार अलंग, संजय पिल्ले, संतोष कुमार शर्मा, सरनजीत कौर, सुरेंद्र कुमार पांडे, सुरेंद्र कुमार, त्रिलोक चंद महावर, उमेश कुमार अग्रवाल, विवेक लांडे, विवेक वार्ष्णेय

इस गांव के लोग आज भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित

खैरागढ़ भारत जहां एक तरफ लगातार विकास की सीढ़ियां चढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ का एक गांव आजादी के 75 साल बाद भी रौशनी और मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. यह गांव  मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है. यहां ग्रामीण पहले नक्सलियों के दहशत के साये में जीते रहे. आईटीबीपी कैंप की स्थापना के बाद यहां लोगों को सुरक्षा तो मिली, लेकिन सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहे हैं. वहीं सड़क बनाने के नाम पर ठकेदारों ने अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर केवल मिट्टी पाटी और सरकारी पैसे गबन कर लिए. बता दें, घने जंगलों के बीच स्थित होने के कारण कतेमा गांव पहले नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, लेकिन आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) कैंप स्थापित होने के बाद नक्सल गतिविधियों पर बहुत हद तक लगाम लगी है. इसके बावजूद सरकारी योजनाएं इस गांव तक पहुंचने में नाकाम साबित हो रही हैं. आजादी के 75 साल बाद भी अंधेरे में ग्रामीणों का जीवन देश में चंद्रयान से लेकर बुलेट ट्रेन तक की चर्चा हो रही है, लेकिन कटेमा के लोगों को आज तक बिजली तक नसीब नहीं हुई. यहां 27 परिवारों में 156 लोग निवास करते हैं, लेकिन आज भी वे लालटेन और लकड़ी जलाकर रातें गुजारने को मजबूर हैं. बिजली के अभाव में टीवी, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं यहां सपना ही लगती हैं. कुछ साल पहले गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे लेकिन अब वो भी जर्जर हो चुके हैं.यहाँ के ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन है. राशन लेने के लिए 16 किलोमीटर जंगल के रास्ते पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि यहां कोई दुकान या राशन केंद्र नहीं है. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति दयनीय गांव में सिर्फ 5वीं तक की पढ़ाई की सुविधा है, इसके आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 40 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र जाना पड़ता है. स्वास्थ्य सेवाओं का भी यही हाल है, गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है, जिससे ग्रामीणों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. कई बार बीमारों को जंगल के रास्ते खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है. आईटीबीपी कैंप खुलने के बाद से प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तो कैंप में मिल जाती है लेकिन बड़ी बीमारी के इलाज के लिए आज भी लोग भटकते रहते हैं. सड़क निर्माण में घोटाला, आधा पैसा खा गए ठेकेदार-अधिकारी सरकार ने कटेमा से घाघरा तक 11 किलोमीटर सड़क बनाने की योजना तैयार की थी, लेकिन यह भी भ्रष्टाचार का शिकार हो गई. आधा भुगतान पहले ही कर दिया गया, लेकिन सड़क का एक इंच भी निर्माण नहीं हुआ. ठेकेदार और अधिकारियों ने मिलीभगत करके सिर्फ जंगल की मिट्टी खोदकर सड़क पर डाल दी और सरकारी राशि हड़प ली. इतना ही नहीं, सड़क निर्माण में काम करने वाले मजदूरों को उनकी मजदूरी तक नहीं दी गई. गांव वालों का कहना है कि अगर यह सड़क ठीक से बन जाए, तो उनके लिए राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं थोड़ी सुलभ हो सकती हैं. लेकिन, अधिकारियों और ठेकेदारों की लूट ने उनके इस छोटे-से सपने को भी तोड़ दिया. आईटीबीपी कैंप के बाद सुरक्षा सुधरी, लेकिन सुविधाएं जस की तस एक साल पहले कटेमा में आईटीबीपी कैंप की स्थापना की गई थी, जिससे गांव में नक्सली गतिविधियां कम हुई हैं. अब ग्रामीण पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण उनका जीवन अब भी कठिन बना हुआ है. सरकार हर गांव तक विकास पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन कटेमा की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. क्या सरकार और प्रशासन इस गांव की सुध लेंगे, या कटेमा के लोग हमेशा की तरह अपने हक के लिए तरसते रहेंगे? जानिए क्या कहते हैं जिम्मेदार: इस मामले में  खैरागढ़ के उप वनमंडलाधिकारी मोना माहेश्वरी ने लल्लूराम डॉट कॉम को बताया कि सड़क निर्माण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है, इसकी जांच कराई जा रही है जल्दी ही कार्रवाई की जाएगी. वहीं सरपंच कमलेश वर्मा ने बताया कि लंबी घाटी और पहाड़ी के चलते अब तक कटेमा में बिजली नहीं पहुंच पाई है, लेकिन सरकार ने बिजली पहुचाने की पूरी तैयारी अब कर ली है जल्दी ही कटेमा में बिजली की व्यवस्था हो जाएगी. कटेमा, लक्षना ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है सड़क भी पिछले पंचवर्षीय योजना में बनी थी, लेकिन अब जर्जर हो गई हैं. इसका भी काम जल्द किया जाएगा. बड़ी पहाड़ियों और खराब रास्तो के चलते अब तक यहां का विकास रुका हुआ था, लेकिन अब जल्दी ही कटेमा में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो जाएगी.

छत्‍तीसगढ़ की परंपरा : गांव में सुख-षांति स्थापित हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है

सुकमा गांव में सुख-षांति स्थापित हो और सभी के दुख-दर्द दूर हो इसलिए गांव वाले होलीका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते है। और देवी कृपा मानते हुए उनके पैरों में कोई भी निषान नहीं होता है। उसके बाद दूसरे दिन उसी राख से होली खेलते है। ये परंपरा पिछले 800 सालों से निभाई जा रही है। साथ ही होली के तीन-चार दिन पहले से ही वहां के युवा और बुर्जुग घेर (डांडिया) खेलते हैं। 800 साल पुरानी है परंपरा     जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी. दूर स्थित पेंदलनार गांव जहां आदिवासी और यादव समाज के करीब 800 लोग निवासरत है।     कुछ साल पहले गांव में नक्सलियों का दखल था लेकिन वर्तमान में गांव तक पक्की सड़क बन गई है।     ये गांव अनोखी होली मनाने के नाम से प्रसिद्ध है यहां आज भी 800 साल पुरानी परंपराओं को निभाया जा रहा है।     गांव के युवा रमेश यादव ने बताया कि होली से ठीक तीन-चार दिन पहले से शाम होते ही युवा और बुजुर्ग घेर (डांडिया) आपस में खेलते हैं।     इसके पीछे बुजुर्गो का कहना है कि गांव के युवा और वरिष्ठजनों के बीच आपस में अच्छा तालमेल हो और नाराजगी दूर करने का मकसद है।     उसके बाद होली के दिन यहां दहन के बाद गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग लोग धधकती आग पर चलते हैं। दूसरे दिन राख की होली     पुरानी मान्यताओं के मुताबिक होलिका दहन के बाद दूसरे दिन राख के ढेर से लोग होली खेलते हैं।     ऐसा करने के पीछे भी मान्यताएं है कि होलिका दहन के बाद वो राख पवित्र हो जाती है।     पूरे शरीर में लगाने से चर्म रोग नहीं होता है। और भी इसके पीछे मान्यताऐं हैं।     हालांकि वर्तमान में गांव के युवा होली के दिन रंग-गुलाल जरूर लाते हैं लेकिन पंरपराओं को भी निभाया जा रहा है।  

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