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बिलासपुर में मेडिकल और सर्जिकल सामान की सप्लाई का झांसा देकर 3 करोड़ की ठगी

बिलासपुर तिफरा की आर्या कॉलोनी में रहने वाले व्यवसायी को दवाइयां और सर्जिकल सामान की सप्लाई का झांसा देकर 3 करोड़ 15 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। व्यवसायी की शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है। तिफरा के आर्या कॉलोनी में रहने वाले राकेश खरे दवाई और सर्जिकल आयटम के सप्लायर हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 2021 में असम के गुवाहाटी में रहने वाले नरेंद्र सिन्हा से मुलाकात हुई थी। उसने खुद को दिमा हसाओ के काउंसिल का मेंबर बताया। साथ ही व्यापार में राकेश की मदद करने की बात कही। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज उसी साल मई में नरेंद्र ने दिमा हसाओ से फेस मास्क, पीपीई किट, ग्लब्स के ऑर्डर की कॉपी भेजी। यह ऑर्डर 14 करोड़ का था। उसने गुवाहाटी में विवेक फुकान, हिरेंद्र सिन्हा से मुलाकात कराते हुए उन्हें फेस मास्क, पीपीई किट, ग्लब्स का सप्लायर बताया। इनसे खरीदी करने के लिए एडवांस देने के लिए कहा। बड़ा ऑर्डर मिलने की उम्मीद पर राकेश ने विवेक फुकान और हिरेंद्र सिन्हा की फर्म को अलग-अलग कर 3 करोड़ 15 लाख रुपये एडवांस भुगतान कर दिया। इधर व्यवसायी को न तो दिया हसाओ से कोई ऑर्डर मिला, न ही उन्हें सामान की सप्लाई की गई। व्यवसायी ने जब अपने रुपये वापस मांगे तो टालमटोल की गई। करीब चार साल बाद व्यवसायी ने इसकी शिकायत सिरगिट्टी थाने में की है। इस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ में सरकारी छात्रावास और आश्रमों की मरम्मत के नाम पर बिना काम किए ही 2.90 करोड़ रुपये कर दिया भुगतान

कोरबा जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) घोटाले में जेल में बंद छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक अधिकारी माया वारियर का एक और घोटाला सामने आया है। कांग्रेस शासन के दौरान वारियर कोरबा जिले में आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ थीं। 33 सरकारी छात्रावास और आश्रमों की मरम्मत के नाम पर बिना काम किए ही उन्होंने चार ठेकेदारों को 2.90 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र के विकास कार्य के लिए छह करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृत दी थी। 4.36 करोड़ रुपये से कोरबा जिले में संचालित सरकारी छात्रावास व आश्रमों की मरम्मत के कार्य का स्टीमेट तैयार किया गया। एकीकृत आदिवासी विकास विभाग परियोजना कोरबा ने चार कंपनी साईं कृपा बिल्डर्स, बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर, एसएस कंस्ट्रक्शन और साईं इंफोटेक को जर्जर छत की मरम्मत, टूटे खिड़की दरवाजों को बदलने समेत अन्य सिविल वर्क का काम दिया गया था।  

इंटक नेता और वेलफेयर बोर्ड के मेंबर की बेटी ने पंखे से लटक करे कर ली आत्महत्या

कोरबा एसईसीएल गेवरा में इंटक नेता और वेलफेयर बोर्ड के मेंबर सीताराम साहू की बेटी रोशनी साहू (29) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव उसके कमरे में पंखे से लटका मिला। घटना के समय रोशनी घर पर अकेली थी, जबकि उसेके पिता किसी काम से बाहर गए हुए थे। जानकारी के मुताबिक, 11 मार्च मंगलवार को घटना के दिन दोपहर करीब 3 बजे पिता-बेटी के बीच मोबाइल पर बातचीत हुई थी। शाम को जब सीताराम साहू घर लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। अनहोनी की आशंका के चलते उन्होंने पड़ोसियों की मदद से घर के पिछले दरवाजे से प्रवेश किया, जहां कमरे में रोशनी का शव फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही श्रमिक नेता के घर बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित हो गई। घटना की सूचना दीपका पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शव को उतारकर एनसीएच अस्पताल गेवरा के मर्चुरी भेज दिया। इस घटना से कॉलोनी में शोक का माहौल है। बताया जा रहा है कि रोशनी की शादी करीब तीन-चार साल पहले हुई थी। शादी के एक साल बाद रोशनी साहू अपने ससुराल से मायके आ गई थी और माता-पिता के साथ रहती थी। बताया जा रहा है कि रोशनी को उसके ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे और वह परेशान रहती थी। कई बार घर वालों ने पारिवारिक बैठक करके समझने की भी कोशिश की। लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद से वह अपने माता-पिता के साथ रहती थी। वहीं इस घटना के बाद से रोशनी काफी परेशान रहा करती थी। घटना के बाद परीजनों का रो-रो कर बुरा हाल है रोशनी ने कब कैसे और किन परिस्थितियों में यह आत्महत्या कदम उठाया है। यह उनके भी समझ से परे है। दीपका थाना प्रभारी प्रेम साहू ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच कार्रवाई शुरू की गई। वहीं, परिजनों का बयान दर्ज किया गया। आगे की जांच कार्रवाई की जा रही है।

तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज़ गर्मी

रायपुर छत्तीसगढ़ में इन दिनों लगातार तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। दिन और रात का पारा बढ़ने से गर्मी भी बढ़ती जा रही है। आज बुधवार को प्रदेशभर में आसमान साफ रहेगा और मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा। इन दिनों बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे दिन के समय तेज गर्मी पड़ सकती है। वहीं सबसे गर्म दंतेवाड़ा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। इराक के ऊपर 3.1 किमी से 9.6 किमी की ऊंचाई तक फैला पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 13 मार्च तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। इस दौरान प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। बीते दिनों मंगलवार को दंतेवाड़ा में प्रदेश का सबसे अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान भी यहीं 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा। आज अधिकतम तापमान 39 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री रहने की संभावना है।    

हजारों श्रद्धालुओं द्वारा उच्चारित ॐ ध्वनि से तरंगित हो उठा राजधानी रायपुर का साइंस कॉलेज मैदान

रायपुर : श्रीरविशंकर और उनके संस्थान के परोपकार और मानवता के कल्याण के कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय श्रीरविशंकर द्वारा नक्सल विचारधारा से प्रभावित युवाओं से विकास की मुख्यधारा में शामिल होने का आव्हान मुख्यमंत्री शंखनाद महासत्संग में हुए शामिल हजारों श्रद्धालुओं द्वारा उच्चारित ॐ ध्वनि से तरंगित हो उठा राजधानी रायपुर का साइंस कॉलेज मैदान रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में श्रीरविशंकर के शंखनाद महासत्संग कार्यक्रम में शामिल हुए । उन्होंने श्रीरविशंकर जी से प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद ग्रहण किया । इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीरविशंकर परोपकार और मानवता की सेवा का ऐसा कार्य कर रहे हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने श्रीरविशंकर महाराज का प्रदेश की जनता की ओर से छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनका संस्थान योग, ध्यान और मानवता के कल्याण का अच्छा कार्य कर रहा है। सुदर्शन क्रिया के माध्यम से देश दुनिया में करोड़ों निराश लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ध्यान और मेडिटेशन को हम भूलते जा रहे थे। आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से फिर से इसे स्थापित किया जा है।  उन्होंने बताया कि आज छत्तीसगढ़ राज्य और आर्ट ऑफ लिविंग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं जिसके तहत प्रदेश के गांव-गांव में जल संरक्षण, कृषि संवर्धन, शिक्षा, आजीविका – रोजगार, महिला सशक्तिकरण और नशा मुक्ति के कार्य उनकी संस्था द्वारा किया जाएगा। नया रायपुर में आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र के लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है। श्रीरविशंकर और मुख्यमंत्री साय ने आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शिलान्यास किया। यह केंद्र योग, ध्यान, कौशल विकास, आत्म विकास और सामुदायिक विकास को समर्पित रहेगा। यह महा सत्संग ज्ञान, ध्यान और सनातन संस्कृति का अनूठा संगम रहा है। आध्यात्मिक गुरु श्रीरविशंकर महाराज ने आर्ट ऑफ लिविंग के सिद्धांतों की सारगर्भित जानकारी अपने संबोधन में दी। उन्होंने उपस्थित लोगों को ध्यान कराया। ध्यान के दौरान हजारों श्रद्धालुओं द्वारा उच्चारित ॐ ध्वनि से रायपुर का साइंस कॉलेज मैदान तरंगित हो उठा। नक्सलवाद से प्रभावित युवाओं से मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान श्रीरविशंकर ने नक्सलवाद से प्रभावित युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आप विकास की मुख्य धारा में आएं, हम आपके साथ खड़े हैं, हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को उत्तम और भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे। जहां सभी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो। गरीबों के उत्थान के कार्यों हों। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में शांति और समृद्धि आवश्यक है। जब शांति होगी तो समृद्धि आएगी। आप जब हमारे साथ आएंगे तो आपको भी समता ,समृद्धि और न्याय मिलेगा। बंदूक से कोई काम नहीं बनता। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य है। विविध फल फूल और प्राकृतिक संपदा भरपूर है। यह प्रदेश दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन सकता है। अब यह समय आ गया है कि हम सभी मिलकर प्रदेश को उत्तम और भारत को श्रेष्ठ बनने के लिए काम करें । आर्ट ऑफ लिविंग के संबंध में उन्होंने बताया कि हमारे जीवन में शक्ति, भक्ति, युक्ति और मुक्ति होनी चाहिए। विपरीत और अनुकूल परिस्थितियों में मन का समभाव बना रहे । जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करें। दूसरों के विचारों को प्रेरणा लें, लेकिन उनसे पूरी तरह प्रभावित न हो और वर्तमान में जिएं। हमारे जीवन में प्रेम हो, प्रेम का अर्थ है कि कोई हमारे लिए गैर नहीं है । उन्होंने लोगों से गुरु दक्षिणा मांगते हुए कहा कि यहां आए सभी लोग अपनी परेशानी, दुख – दर्द यहां छोड़ कर जाएं, यही मेरी गुरु दक्षिणा है । ईश्वर पर भरोसा रखें । कार्यक्रम के अंत में भजन की धुन पर पूरा मैदान झूम उठा। श्रीरविशंकर रैंप पर चलकर लोगों के पास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुलता उसेंडी, विधायक किरण सिंहदेव, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

पूरे देश में विख्यात है बालोद मेला, कदंब के वृक्ष की अनोखी लीला

बालोद छत्तीसगढ के बालोद व दुर्ग जिले की सीमा पर बसा एक गांव है ओटेबंद बगीचा, जो बालोद जिले में गुंडरदेही ब्लॉक में आता है। ओटेबंद के विष्णुधाम मंदिर में मेला लगाता है। इस गांव के मंदिर की अपनी विशेष पहचान है। यहां एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान विष्णु क्षीरसागर की मुद्रा में विराजमान हैं। यहां फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष को मेला आयोजित होता है। 11 दिन से यहां मेला लगा हुआ है और इसकी शुरुआत वर्ष 1961 से हुई थी। यहां पूरे देश भर से साधु-संत आते हैं और यहां एक ऐसा कदंब का वृक्ष है, यहां श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी होती है। आइए जानते है इस मंदिर की विशेषता और इस मेले का महत्व। बालोद और दुर्ग जिले में यह एकलौता मंदिर है। जहां पर भगवान विष्णु शयन और लक्ष्मी के पैर दबाते क्षीरसागर में आराम की मुद्रा को दिखाया गया है। इस गांव के मंदिर में आप वृहद रूप से एक बड़े क्षेत्र पर बने इस मूर्तियों की श्रृंखला को देखकर आश्चर्य रह जाएंगे कि इसकी बनावट बहुत ही सुंदर है। हर कोई जब इस मंदिर में जाता है तो इस क्षीरसागर रुपी मुद्रा को देखने के लिए आतुर होता है। और यहां पहुंच कर लोग भगवान विष्णु लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करते है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष में लगता है मेला मंदिर समिति के सदस्य एवं स्थानीय जनपद अध्यक्ष पुरुषोत्तम लाल चंद्राकर ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष में यह मेला लगता है और यह मेले के पूर्णाहुति का समय है। 1961 से यहां 11 दिनों तक महायज्ञ का आयोजन होता है। मंदिर की स्थापना 1993 से शुरू हुई थी, 1996 में पूरी हुई और सनातन हिन्दू महर्षि करपात्री महराज यहां आए। उन्होंने इस तीर्थ को तपोभूमि की संज्ञा दी और यहां चार शंकराचार्य का आगमन भी हो चुका है। कदंब के वृक्ष की अनोखी लीला मंदिर समिति के संस्थापक सदस्य वीरेंद्र कुमार दिल्लीबार ने बताया कि यहां सबसे बड़ी मान्यता है कि कदंब के वृक्ष पर सच्ची आस्था से मांगी गई श्रद्धालु की हर मन्नत पूरी होती है। उन्होंने कहा कि इंदौर का एक परिवार जिनके कोई संतान नहीं थे उन्होंने यहां पर मन्नत मांगी और एक वर्ष के भीतर उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई। एक व्यक्ति जिसका ट्रक घर से गायब हो गया था, उसने इस जगह पर मन्नत मांगी और उसका ट्रक दो दिनों के भीतर मिल गया। उन्होंने कहा जिन्हें मन्नत मांगना होता है, वह इस कदंब की वृक्ष में जहां पर राधा रानी विराजमान हैं, श्री कृष्णा विराजमान हैं, वहां नारियल बांधते हैं। लगता है विराट मेला यहां पर भगवान विष्णु महायज्ञ का आयोजन होता है, जो कि अनवरत 11 दिनों तक चलता है और अभी हम मेला समापन की ओर हैं और इस मेले की सबसे खास बात यह है कि पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश के कोने-कोने से लोग यहां पर आते हैं। 

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान विश्व धरोहर की दौड़ में शामिल

 रायपुर अपनी समृद्ध जैव विविधता और जीव जंतुओं की दुर्लभ प्रजातियों के आवास के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर के  कांगेर घाटी नेशनल पार्क को यूनेस्को ने  2025 की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की तदर्थ  सूची में शामिल कर लिया है। अब वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा हासिल करने के लिए राज्य सरकार को  एक साल में अपना दावा पूरे तथ्यों के साथ पेश करना होगा। कांगेर घाटी को टेंटेटिव लिस्ट में भी शामिल किया जाना भी बड़ी उपलब्धि  है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी साइट को यह मौका मिला है। 200 वर्ग किमी में फैला कांगेर घाटी नेशनल पार्क कई वजहों से खास है। करीब दो साल पहले कांगेर घाटी नेशनल पार्क के तत्कालीन डायरेक्टर गणवीर धम्मशील ने करीब साल भर की तैयारी और रिसर्च, पुरातत्व विभाग समेत कई विभागों की शोध के आधार पर वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए नेशनल पार्क का प्रस्ताव  यूनेस्को को भेजा था। यूनेस्को किसी जगह को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा तीन श्रेणियों में देता है। पहली श्रेणी प्राकृतिक धरोहर है, दूसरी सांस्कृतिक और तीसरी मिश्रित । आवेदन  पहली  श्रेणी के लिए  भेजा  गया था, जिसे  तदर्थ सूची  में  शामिल कर  लिया गया है, जो बड़ी  उपलब्धि है। यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर इस  आशय की  घोषणा कर दी है। अब इसके  समर्थन  में  एक  साल  के  भीतर  तथ्यात्मक  जानकारी देनी होगी। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की खासियत * पार्क की जैवविविधता इसको बेहद खास बनाती है। ये पहाड़ी मैना का प्राकृतिक आवास भी है, जो इंसानों की तरह बोल सकती है। * पार्क में कोटमसर समेत लाइम स्टोन की 16 प्राकृतिक गुफाएं हैं। * ये गुफाएं लाखों साल पुरानी हैं और खास बात ये है कि ये अभी भी जिंदा हैं। यही चीज इन गुफाओं को देश के बाकी हिस्सों की गुफाओं से अलग बनाती हैं। चूना पत्थरों की नई संरचनाओं का निर्माण जारी है। इस गुफाओं में अंधी मछलियों से लेकर बहुत तरह के जीव जंतु * पार्क की एक और खासियत यहां के धुरवा आदिवासी हैं, जो अपने साथ हजारों सालों की सभ्यता समेटे हुए हैं और जंगल को संरक्षित करने में योगदान दे रहे हैं।

साय कैबिनेट की बैठक आज, हो सकते है कई महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक आज शाम को होगी। होली पर्व से पहले इस बैठक में प्रदेशवासियों को खुशखबरी मिल सकती है। कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज बुधवार को शाम 6 बजे मंत्रिपरिषद की बैठक सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होगी।  

762 राजस्व न्यायालयों के लिए 163 करोड़ 22 लाख रुपए तथा मुख्यमंत्री डिजिटल सशक्तिकरण योजना के तहत 25 करोड़ 85 लाख रुपए का नवीन मद

रायपुर : राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के विभागों के लिए 3890 करोड़ 67 लाख से अधिक की अनुदान मांगे पारित दीनदयाल भूमिहीन कृषि कल्याण योजना के तहत 5 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित 762 राजस्व न्यायालयों के लिए 163 करोड़ 22 लाख रुपए तथा मुख्यमंत्री डिजिटल सशक्तिकरण योजना के तहत 25 करोड़ 85 लाख रुपए का नवीन मद राहत और आपदा प्रबंधन हेतु 1552 करोड़ 69 लाख से अधिक का आबंटन खेल एवं युवा कल्याण के लिए 190 करोड़ 51 लाख रुपए का प्रावधान स्वारायपुर मित्व योजना: 55 हज़ार से अधिक स्वामित्व कार्ड का वितरण रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 3890 करोड़  67 लाख 95 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गई।इसमें भू-राजस्व तथा जिला प्रशासन विभाग के लिए 2158 करोड़ 65 लाख 81 हज़ार रुपए,राजस्व विभाग से संबंधित व्यय के लिए 26 करोड़ 49 लाख 65 हज़ार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत पर व्यय के लिए 1552 करोड़ 69 लाख 39 हज़ार रुपए और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के लिए 152 करोड़ 83 लाख 10 हज़ार रुपए शामिल हैं।      भू-राजस्व तथा जिला प्रशासन,राजस्व विभाग से संबंधित व्यय, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत पर व्यय और खेल एवं युवा कल्याण विभाग से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में विधायकगण सर्वअजय चंद्राकर, रामकुमार यादव, अम्बिका मरकाम,प्रबोध मिंज,कुंवर सिंह निषाद,रिकेश सेन और धर्मजीत सिंह ने भाग लिया।       राजस्व मंत्री ने बजट प्रस्ताव पर वर्तमान की उपलब्धियां एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि  राजस्व ऐसा विभाग है जिसमें सर्वस्व समाहित है, अर्थात शासन की अधिकांश योजनाओं का क्रियान्वयन राजस्व विभाग के माध्यम से ही होता है। राजस्व विभाग आमजनों को त्वरित बेहतर प्रमाणिक भू-अभिलेख दस्तावेज उनकी आवश्यकता पर उन्हें सहज एवं सरल ढंग से उपलब्ध हों सके और इसके लिए विभागीय प्रक्रियाओं, नियमों एवं विभाग द्वारा प्रकाशित अधिनियमों में सुधार एवं उन्नयन की प्रक्रिया को अपना रहें है। इसके लिए भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए इस बजट में 2158 करोड़ 65 लाख 81 हजार रुपए का प्रावधान किया है। वहीं शासकीय मुद्राणालय के लिए 26 करोड़ 49 लाख 75 हजार रूपये की राशि प्रावधानित है। इस बजट में पुर्नवास के लिए 2 करोड़ 86 लाख 38 हजार रूपये की व्यवस्था की गई है वहीं राहत कार्य के लिए 1552 करोड 59 लाख 39 हजार की राशि बजट में रखा है। इस प्रकार कुल 3740 करोड़ 86 लाख 59 हजार रुपए का मांग प्रस्ताव विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए रखा है।       इस दौरान उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा स्वामित्व योजना के तहत स्वामित्व कार्ड वितरण का कार्य  विभाग द्वारा जनवरी 2025 को किया जा रहा है। इस योजना में 55 हजार से अधिक प्रापर्टी कार्डस वितरण किया गया। दीनदयाल भूमिहीन कृषि कल्याण योजना  के तहत वर्ष 2024-25 में  कुल 05 लाख 62 हजार 112 पात्र परिवारों में से 05 लाख परिवारों को 500 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा की गई। शेष पात्र परिवारों को भी  योजना का लाभ अतिशीघ्र देने हेतु सरकार संकल्पित है। राजस्व विभाग द्वारा डिजीटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्य किया जा रहा है। सर्वेक्षण का कार्य क्रमशः पूर्णतः की ओर अग्रसर है। पटवारी नक्शों का जियो रेफ्रेसिंग के माध्यम से सीमांकन, नामांतरण, बटवारा, बंदोबस्त, त्रुटि सुधार सहित अनेक सेवाओं को आमजनता को उपलब्ध करा रहें है। इसी तरह डिजीटल क्राप सर्वें का कार्य राज्य के 26 जिलों के 13 हजार 313 ग्रामों में किया गया है। राजस्व विभाग की आय को समृद्ध करने के लिए वार्षिक भू-भाटक की 15 वर्ष की राशि एक साथ जमा करने पर आगामी 15 वर्षों के लिए भुगतान में छुट दी जा रही है। राजस्व वसूली के अंतर्गत राजस्व विभाग को 606.29 करोड़ की राशि प्राप्त हुई। विभागीय कार्यालयों के रख-रखाव के लिए 40 करोड़ का नवीन मद, तहसील कार्यालय बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा एवं खैरागढ़ में नवीन तहसील कार्यालय भवन निर्माण हेतु प्रत्येक तहसील के लिए 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इसी तरह प्रदेश में कम्प्यूटर फर्नीचर एवं अन्य उपकरणों के लिए 11 करोड़ 21 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। राज्य के 762 राजस्व न्यायालयों के लिए विभाग ने 163 करोड 22 लाख का नवीन मद रखा है, वहीं मुख्यमंत्री डिजीटल सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत 25 करोड़ 85 लाख का नवीन मद में प्रावधान किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिला कार्यालय एवं तहसील कार्यालय में स्थापित नकल शाखा के दस्तावेजों के डिजीटाइजेशन हेतु 05 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है।     मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राज्य आपदा मोचन (एस.डी.आर.एफ.) के लिए 533.60 करोड़ रुपए एवं राष्ट्रीय आपदा मोचन (एन.डी.आर.एफ.) के लिए 50 करोड़ रुपए, राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (एस.डी.एम.एफ.) के रूप में 133.40 करोड़ रुपए, निर्देशन और प्रशासन हेतु  3.26 करोड़ रुपए, आपदाओें का विश्लेषण एवं योजना तैयार करने हेतु रूपये 0.58 करोड़ तथा ऋण हेतु रूपये 0.20 करोड़ वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रावधान किया गया है। इसी तरह विभाग के माध्यम से पुर्नवास के तहत आयुक्त कार्यालय स्थापना व्यय हेतु इस वर्ष 62.30 लाख रूपये प्रावधानित किया है वहीं कार्यालय कमाण्डेंट माना शिविर जिला रायपुर हेतु    213 लाख का बजट प्रावधानित किया गया है।     मंत्री टंक राम वर्मा ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़िया क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 50 करोड़ रूपए की राशि प्रावधानित की गई है। इस वर्ष बजट में खेल अकादमी के लिए 13 करोड 47 लाख रूपए की राशि प्रस्तावित की गई है। सरकार परंपरागत और अन्य खेलों को समान रूप से महत्व देते हुए राष्ट्रीय खेलों के साथ-साथ स्थानीय खेलों को भी खेल के मानचित्र पर स्थापित किया जा रहा है। पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया गया था। सरकार और खेल  विभाग के इस प्रयास को बस्तर में एक नये युग के आंरभ का संकेत कहा है। बस्तर के सुदूर अंचल में रहने वाले वनवासियों ने इस प्रतियोगिता में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज की। बस्तर में खेलों के विकास के लिए एक नया वातावरण बना है। बस्तर ओलंपिक की सफलता को ध्यान में रखते हुए बजट में इस वर्ष 05 … Read more

CM साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में  छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।   बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिषद की पहली बैठक में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजाति समुदाय की जनसंख्या 32% है, और उनका समग्र विकास हमारे राज्य की प्राथमिकता है। यह परिषद केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय-क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण संवैधानिक इकाई है।उन्होंने बैठक में रखे गए सभी बहुमूल्य सुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और अधिकारियों से कहा कि जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी त्रुटियों के निवारण हेतु विस्तृत अध्ययन कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास हेतु देवगुड़ी के साथ-साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा में सुधार हेतु आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या को शीघ्रता से हल किया जाए। जनजातीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रभावी अमल किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो। कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद, सरकार और जनजातीय समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है। हम सभी सदस्य प्रदेश के एक-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम शासन की योजनाओं को प्रभावी रूप से समुदाय तक पहुँचाएँ।उन्होंने परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को नीति-निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल करने का आश्वासन दिया। बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, आजीविका, सामाजिक-आर्थिक विकास और प्रशासनिक सुधार को लेकर ठोस सुझाव दिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी प्रस्तावों पर त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए एवं अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नीतिगत सुधारों का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुँचे। यह बैठक जनजातीय समाज के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। बैठक में परिषद के सदस्यों ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें जनजातीय बालिकाओं के लिए छात्रावासों की संख्या एवं सुविधाओं में वृद्धि, जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता एवं जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना,जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ लागू करना शामिल है। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन दिया और परिषद के समक्ष विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक सुलता उसेण्डी, श्रीमती शंकुतला सिंह पोर्ते, श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा, श्रीमती रायमुनी भगत, श्रीमती गोमती साय, विधायक रामकुमार टोप्पो, प्रणव कुमार मरपच्ची, विक्रम उसेण्डी, आशाराम नेताम, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, चैतराम अटामी सहित मनोनित सदस्य रघुराज सिंह उईके एवं कृष्ण कुमार वैष्णव उपस्थित थे। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया , सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त पदुम सिंह एल्मा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए रविशंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से  मुख्यमंत्री निवास में आध्यात्मिक गुरु एवं द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक रविशंकर ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए रविशंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकस्वरूप, जशपुर जिले में स्थित विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग – मधेश्वर पहाड़ का छायाचित्र एवं बस्तर आर्ट शैली में निर्मित नंदी की प्रतिकृति भेंट कर रविशंकर का अभिनंदन किया। रविशंकर ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि इस बार वे अपने साथ 1000 वर्ष पुराने सोमनाथ मंदिर के खंडित शिवलिंग के अवशेष लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक शिवलिंग के अवशेष को सदियों से एक अग्निहोत्री परिवार द्वारा सुरक्षित रखा गया था। अब वे इसे पूरे देश में दर्शनार्थ श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का पावन कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सहित उपस्थित गणमान्य लोगों ने खंडित शिवलिंग के दर्शन किए और आस्था प्रकट की। पूर्व में केबिनेट में लिए गए निर्णय अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रविशंकर के मध्य छत्तीसगढ़ सरकार एवं व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया (द आर्ट ऑफ लिविंग) के बीच हुए एमओयू को लेकर भी चर्चा हुई।  एमओयू का उद्देश्य आजीविका सृजन और ग्रामीण छत्तीसगढ़ के समग्र कल्याण सहित ग्रामीण विकास के विविध  पहलुओं से जुड़ा है, जिसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया। शंखनाद महासत्संग का न्योता रविशंकर ने मुख्यमंत्री साय को राजधानी रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘शंखनाद महासत्संग’ कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण के लिए रविशंकर जी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव डॉ. बसवराजू एस., पी. दयानंद, राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त रवि मित्तल, मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय सहित परिवार के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

रायपुर : सूरजपुर जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के कई मामले में अर्थदंड अधिरोपित

रायपुर सूरजपुर जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा उत्खनन वाले ईलाकों में सतत् निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से पुल-पुलिया व एनीकट के आसपास अवैध खनिज उत्खनन पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। खनिज विभाग की टीम ने रामानुजनगर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मदनेश्वरपुर एवं पवनपुर में अवैध रूप से खनिज मिट्टी के उत्खनन के दो मामलों में कार्यवाही करते हुए 1,23,450 रुपये का अर्थदंड वसूला। इसी क्रम में, 06 मार्च को वाहनों की जांच के दौरान प्रेमनगर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम ब्रम्हपुर में खनिज मिट्टी के एक मामले में 14,596 रुपये तथा 07 मार्च को ग्राम नमदगिरी एवं छठ घाट सूरजपुर में खनिज ईंट के अवैध परिवहन के दो मामलों में 27,350 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इन तीनों मामलों में कुल 41,946 रुपये का जुर्माना वसूल कर खनिज मद में जमा कराया गया। इसके अलावा, रामानुजनगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत नकना में अवैध रूप से खनिज मिट्टी का उत्खनन कर ईंट निर्माण का मामला पकड़ा गया। इस मामले में श्री टीपनारायण साहू, श्री ठाकुरदयाल साहू, श्री प्रवीण साहू एवं श्री प्रमोद कुमार राजवाड़े के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर भट्ठे को जब्त कर लिया गया है। साथ ही, मौके पर ईंट पकाने के लिए डंप किए गए खनिज कोयले के वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

रायपुर : दंतेवाड़ा के जैविक कृषक अपनाएंगे एआई तकनीक

रायपुर : दंतेवाड़ा के जैविक कृषक अपनाएंगे एआई तकनीक कृषि क्षेत्र में आएगा क्रांतिकारी बदलाव रायपुर दंतेवाड़ा जिले के जैविक किसान अब अपनी खेती में आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर खेती को अधिक उत्पादक और कुशल बनाएंगे। जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और कृषि अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस कार्यशाला में फसल निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन तक में एआई तकनीक के उपयोग के महत्व पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘सैटेलाइट इमेजिंग’ और ‘ड्रोन एआई’ तकनीक के माध्यम से फसल की स्वास्थ्य स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता और पानी की आवश्यकता का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। दंतेवाड़ा जिले में एआई तकनीक का यह प्रयोग न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मील का पत्थर साबित होगा। एआई आधारित मॉडल के माध्यम से फसलों में रोग और कीटों की पहचान कर समय पर समाधान किया जा सकेगा। एआई आधारित सिस्टम मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति के आधार पर स्वचालित सिंचाई को नियंत्रित करेगा, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यील्ड प्रेडिक्शन एआई मॉडल’ के माध्यम से ऐतिहासिक डेटा और मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर फसल उत्पादन का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। एआई बाजार की मांग और कीमतों का विश्लेषण कर किसानों को फसल बिक्री के लिए बेहतर मार्गदर्शन देगा। बुवाई, निराई, कटाई और छंटाई जैसे कार्यों में एआई आधारित ‘रोबोट्स’ का उपयोग श्रम लागत को कम करने में सहायक होगा। एआई के जरिये पशुओं के स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी कर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। कार्यशाला में बताया गया कि एआई तकनीक जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी कारगर है, जिससे बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं का पूर्वानुमान लगाकर किसानों को समय पर सतर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर जिला प्रशासन से अलका महोबिया, सूरज पंसारी (उपसंचालक, कृषि), आकाश बढ़वे (भूमगादी संचालक), मीना मंडावी (सहायक संचालक, उद्यान), केवीके के सहायक संचालक धीरज बघेल, भोले लाल पैकरा सहित 150 से अधिक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि मित्र, जैविक कार्यकर्ता एवं प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।

समूह की महिलाओं ने साझा किया सृजनात्मक कार्यों का अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विकासखण्ड भानुप्रतापपुर के ग्राम भानबेड़ा में महिला शक्ति संकुल संगठन द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मंडावी उपस्थित थीं। उक्त कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने उपस्थित समूह के महिला सदस्यों से चर्चा करते हुए ज्यादा से ज्यादा लखपति दीदी बनने एवं सशक्तिकरण पर विशेष प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने ज्योति स्वसहायता समूह की सक्रिय सदस्य श्रीमती दुलेश्वरी गौर से उनकी आजीविका संबंधी गतिविधि की जानकारी ली। समूह के सदस्य ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद सिलाई का कार्य व मुर्गीपालन का कार्य कर आजीविका प्राप्त कर रही हैं। भानबेड़ा की सुरभि स्व-सहायता समूह के सदस्य सविता कदम ने बताया कि वे समूह से जुड़ने के पश्चात् सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, साथ ही कृषि व लाख उत्पादन जैसे गतिविधि कर आजीविका उपार्जन कर रही है। इसी तरह ग्राम भैंसाकन्हार से मछलीपालन कर रही सरस्वती दीदी से चर्चा की। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ से सी.एल.एफ. के पदाधिकारी द्वारा भवन की मांग की गई, जिस पर उन्होंने भवन की मांग को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। साथ ही समूहों को सशक्त बनाने विशेष रूप से प्रयास करने की बात कही। इस अवसर पर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हेमन्त ध्रुव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती झरना ध्रुव, स्थानीय सरपंच श्रीमती ममता ठाकुर सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में हुई जनजाति सलाहकार परिषद की पहली बैठक, लिए कई अहम फैसले

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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