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छात्रों के बैग से 14 पुस्तकें बरामद, जशपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षक ने बांटे बाइबिल

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केरसई में नियमों की अनदेखी कर छात्रों को बाइबिल बांटने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय के एक व्याख्याता ने कक्षा में बाइबिल की प्रतियां वितरित की, जिसके बाद विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी को व्याख्याता दीपक तिग्गा विलंब से विद्यालय पहुंचे और बिना प्राचार्य को सूचित किए सीधे कक्षा में चले गए, जहां विद्यार्थियों के बीच उन्होंने बाइबिल की पुस्तिकाएं वितरित की। मामला सामने आने के बाद छात्रों के बैग की जांच की गई, जिसमें बाइबिल की 14 प्रतियां बरामद होने की बात कही जा रही है। प्राचार्य ने इसे गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन मानते हुए संबंधित व्याख्याता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। व्याख्याता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई है। साथ ही आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। फिलहाल प्रकरण की जांच की जा रही है। वहीं व्याख्याता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

दो की मौत और एक गंभीर, तेज रफ्तार पिकअप ने 3 लाेगाें को रौंदा

जशपुर. सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर गम्हरिया में गुरुवार सुबह लगभग 6 बजे एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना ने क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। मॉर्निंग वॉक पर निकले स्थानीय नागरिकों को एक तेज रफ्तार पिकअप ने निर्ममता से कुचल दिया। इस भीषण हादसे में दो लाेगों की घटना स्थल पर ही माैत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया है। मृतकों की शिनाख्त गम्हरिया निवासी लकड़ा मिस्त्री एवं हिरा मिस्त्री के रूप में की गई है। दोनों पेशे से वाहन मिस्त्री बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिकअप वाहन की रफ्तार बहुत तेज थी। चालक ने नियंत्रण खोते हुए पैदल चल रहे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन सहित घटना स्थल से फरार हो गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। हादसे की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस दल मौके पर पहुंचा और पंचनामा कार्रवाई उपरांत शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने अज्ञात पिकअप चालक के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध कर लिया है। आरोपी की धरपकड़ के लिए विशेष टीम गठित की गई है। साथ ही घटना की तह तक पहुंचने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शीघ्र ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कांम्बिंग गश्त में 300 जवानों ने संभाला मोर्चा, 126 वारंटी और 11 फरार आरोपी पकड़े

बिलासपुर. जिले में अपराध नियंत्रण और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए बिलासपुर पुलिस ने रात में व्यापक कांबिंग गश्त अभियान चलाया। पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई इस कार्रवाई में लगभग 300 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। अभियान के दौरान पुलिस ने 126 वारंटियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 50 स्थायी वारंटी और 76 गिरफ्तारी वारंट शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न गंभीर अपराधों में लंबे समय से फरार चल रहे 11 आरोपियों को भी दबोच लिया गया। सभी आरोपियों को न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए अभिरक्षा में लिया गया है। पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों, संदिग्ध स्थानों, होटल-ढाबों और सार्वजनिक स्थलों पर सघन जांच की। निगरानी सूची में दर्ज 41 गुंडा/बदमाशों की विधिवत चेकिंग कर उनकी गतिविधियों का सत्यापन किया गया और आवश्यक वैधानिक चेतावनी दी गई। वहीं संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए 10 व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। एक मामले में आरोपी के कब्जे से धारदार हथियार बरामद होने पर आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया। साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत पिछले एक सप्ताह में 105 शराबी वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पूरे अभियान में थाना प्रभारियों, विवेचना अधिकारियों, पेट्रोलिंग स्टाफ और विशेष टीमों ने समन्वित एवं योजनाबद्ध ढंग से कार्रवाई की।

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित….

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित…. बिलासपुर  भाजपा मंडल बिलासपुर  में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तेलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री एवं भारतीय जनसंघ के शीर्ष नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत ‘एकात्म मानव दर्शन’ के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी की विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न होकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य को उन्होंने विकास का केंद्र बिंदु माना। उनके अनुसार आर्थिक नीतियों का उद्देश्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे। भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को अंत्योदय और एकात्म मानववाद का प्रणेता बताते हुए कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का वास्तविक मापदंड है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी के विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। भाजपा मंडल बिलासपुर के महामंत्री ने भी उन्हें निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण की मजबूत बुनियाद है। राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी भाजपा मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी मंडल महामंत्री विनायक तिवारी उपाध्यक्ष रवि शंकर सोनी,विजय सोनी,गोविंद सोनी,बच्चू सोनी,किश्शू महार एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रार्थना सभा में सच की आवाज़: अख़बार की सुर्खियाँ होंगी शामिल

शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड की अभिनव पहल रायपुर,  छात्रों के लिए प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ना एक लाभकारी आदत है। इससे उन्हें समसामयिक घटनाओं, महत्वपूर्ण मुद्दों और विविध विचारों से अवगत होने का अवसर मिलता है। यह आदत गुणवत्तापूर्ण भाषा और सुव्यवस्थित सामग्री के संपर्क में आने से उनकी पढ़ने और लिखने की क्षमताओं को बढ़ाती है। शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे जीवन से जोड़ने की दिशा में सरगुजा जिला के विकासखंड प्रेमनगर के शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड में एक सराहनीय एवं अभिनव पहल की गई है। विद्यालय में विद्यार्थियों की दैनिक दिनचर्या में अखबार वाचन को शामिल किया गया है। इस प्रयास से परीक्षा-केंद्रित शिक्षा को ज्ञान-केंद्रित शिक्षा में परिवर्तित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने, तर्क करने और प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना है। सहायक शिक्षक श्री राजेन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में पठन संस्कृति कमजोर होती जा रही है। ऐसे में समाचार पत्र वाचन शिक्षा सुधार का एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। नई व्यवस्था के तहत विद्यालय की प्रार्थना सभा अब केवल अनुशासनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जागरूकता की पाठशाला के रूप में विकसित होगी। छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अखबार की प्रमुख सुर्खियां पढ़ेंगे और देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं से अवगत होंगे। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों को किसी संपादकीय विषय पर मौलिक लेखन एवं समूह चर्चा के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे बच्चों में विचार-विमर्श, संवाद कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता तथा नैतिक मूल्यों का विकास होगा। विद्यालय की इस नवाचारपूर्ण पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना की जा रही है। यह प्रयास निश्चित रूप से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उप अभियंताओं को राहत: हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

रायपुर ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा की वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध बताते हुए रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 3 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने भर्ती को अवैध करार देते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था, जबकि कई चयनित अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा बाद में प्राप्त किया। ऐसे में उनकी नियुक्तियां प्रारंभ से ही अवैध मानी गईं। कोर्ट ने यह भी पाया कि 275 पदों के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जो सेवा कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। सुनवाई के दौरान नियुक्त उप अभियंताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे करीब 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती। इसके बाद कोर्ट ने क्वो वारंटो का रिट जारी करते हुए नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली का रुख किया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य को नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश पारित किया है। यह प्रकरण लगभग 60 शासकीय कर्मचारियों की सामूहिक सेवा-समाप्ति से संबंधित है, जिन्हें प्रारंभिक रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में उप अभियंता (सिविल) के पद पर नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया था कि संबंधित अभ्यर्थियों के पास भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक अर्हता उपलब्ध नहीं थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता अब सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। मामले में याचिकाकर्ताओं एवं निजी प्रत्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमेश्वर के. तथा गौरव अग्रवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा, चंद्रशेखर ए. चकलाब्बी (AOR) और सुधांशु प्रकाश (AOR) भी उपस्थित रहे।

भूपेश ने बताया- मोदी और शाह ने BJP में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, मना करने पर दबाव का सामना करना पड़ा

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में कहा कि मुझे भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। जब कमिटमेंट नहीं दिया तो मेरे यहां लगातार छापे पड़ने लगे। भूपेश बघेल ने कहा कि एक-दो बार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मिलने के लिए बुलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। शुरुआत में समझ नहीं आया कि किस मकसद से बुलाया जा रहा है। बाद में एहसास हुआ कि जब-जब वे इन मुलाकातों से लौटते थे, उसके कुछ दिनों के भीतर छापा पड़ जाता था। भूपेश बोले- मदद का दिया ऑफर भूपेश बघेल ने कहा कि मुलाकात के दौरान पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना होता है, जिसे वे निभाते रहेंगे। इसके बावजूद मदद की बात सुनकर उन्हें हैरानी होती थी। 8-10 दिन अंदर फिर से पड़ता था छापा पूर्व सीएम ने कहा कि वे अपनी बात कहकर लौट आते थे, लेकिन करीब आठ-दस दिन के भीतर फिर से छापा पड़ जाता था। एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन मेरे यहां तो छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे। ज्ञात हो कि कई बड़े मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता कपिल सिब्बल यू ट्यूब में दिल से विद कपिल सिब्बल नाम का एक शो संचालित करते हैं. अपने इस शो में उन्होंने देश की कई नामचीन हस्तियों से बातचीत की है. अभी चंद दिनों पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी अपने शो में आमंत्रित किया था. इस शो में जब कपिल सिब्बल ने बघेल से पूछा कि क्या मोदी और शाह ने कभी भाजपा में शामिल होने के लिए कोई दबाव डाला था तो जवाब में बघेल ने कहा कि एक-दो बार मुझे गृहमंत्री अमित शाह ने बुलाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आमंत्रित किया था. जब दोनों नेताओं ने मुझे बुलाया तो मैं यह समझ नहीं पाया कि मुझे किसलिए बुलाया गया है, लेकिन उनका इशारा बाद में समझ में आया. जब मैं उनसे मिलकर आता था तो उसके बाद और ज्यादा छापा पड़ता था…फिर वे पूछते थे कि आपको कैसे मदद करें. उनकी लाइन यहीं होती थी कि आपके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं ? कौन-कौन से अधिकारी आपके विश्वसनीय है. बघेल ने कपिल सिब्बल को बताया कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें इस बात का सुखद आश्चर्य भी होता था कि विपक्ष में होने के बावजूद दोनों नेता उनकी मदद के लिए तत्पर है. इंटरव्यूह में बघेल यह कहते हुए भी दिखाई देते है कि- जब-जब मैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलता था तो यह जरूर कहता था कि मैं विपक्ष में हूं और विपक्ष का धर्म है कि आपकी आलोचना करुं…बावजूद इसके आप सहयोग करना चाहते हैं. बस…इतना कहकर जाता था और आठवें दिन फिर से  छापा पड़ जाता था. एक बार मैंने प्रधानमंत्री को फोन पर कहा कि आपने तो मदद करने को कहा था, लेकिन इधर तो रेड डलवा दी आपने. प्रधानमंत्री का जवाब था-मैं अधिकारियों से बात करता हूं. बघेल के इस बयान के बाद राजनीति के गलियारों में हलचल मची हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि देश के कई अन्य नेताओं की तरह बघेल भी भाजपा की वाशिंग मशीन में प्रवेश लेते तो उन पर और उनके पुत्र चैतन्य बघेल पर जबरिया लादे गए प्रकरणों से उन्हें निजात तो मिल जाती, लेकिन उनकी इमेज संकट के समय भी कांग्रेस का साथ न छोड़ने वाले एक प्रतिबद्ध कांग्रेसी नेता के तौर पर बनी हुई है तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बड़ा नुकसान झेलना भी पड़ता. भाजपा में आने का इशारा था- भूपेश भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में समझ नहीं आया कि भाजपा में शामिल होने के लिए बुलाया जा रहा है। कभी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि वे कोई कमिटमेंट देकर नहीं लौटते थे, इसलिए हर चार-पांच दिन में उनके यहां छापे पड़ते थे। भूपेश बोले- मदद का दिया ऑफर भूपेश बघेल ने कहा कि मुलाकात के दौरान पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना होता है, जिसे वे निभाते रहेंगे। इसके बावजूद मदद की बात सुनकर उन्हें हैरानी होती थी। 8-10 दिन के अंदर फिर से पड़ता था छापा पूर्व सीएम ने कहा कि वे अपनी बात कहकर लौट आते थे, लेकिन करीब आठ-दस दिन के भीतर फिर से छापा पड़ जाता था। एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन मेरे यहां तो छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे। भाजपा में आने का इशारा था- भूपेश भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में समझ नहीं आया कि भाजपा में शामिल होने के लिए बुलाया जा रहा है। कभी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि वे कोई कमिटमेंट देकर नहीं लौटते थे, इसलिए हर चार-पांच दिन में उनके यहां छापे पड़ते थे। 18 जुलाई 2025 को ED ने किया था चैतन्य को गिरफ्तार दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था, हालांकि अब उन्हें जमानत मिल गई है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया। साथ ही 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई। हालांकि, शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य को 2 जनवरी हाईकोर्ट से जमानत … Read more

बस से उतरते वक्त हुआ जानलेवा हादसा, प्रधान आरक्षक की मौके पर मौत

दुर्ग जिले के महिला थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक की मौत की खबर सामने आई है. यह घटना दुर्ग बस स्टैंड में हुई. 15 दिन की छुट्टी से वापस लौटे प्रधान आरक्षक बस से उतरते समय फिसल कर नीचे गिर गए. जिससे उन्हें चोंट आई. उन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल ले गया, लेकिन उनकी मौत हो गई. मिली जानकारी के अनुसार, दुर्ग जिले के महिला थाना भिलाई में पदस्थ प्रधान आरक्षक त्रिलोक सिंह (आरक्षक क्रमांक 33) मूलतः मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के निवासी थे. वह 15 दिनों की छुट्टी लेकर अपने पैतृक गांव गए हुए थे. छुट्टी समाप्त होने के बाद वह अपनी बेटी के साथ बस से दुर्ग वापस लौटे. यहां दुर्ग लौटकर उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करना था. दुर्ग बस स्टैंड में बस पहुंचने के बाद वह बस से उतर रहे थे. इस दौरान उनका पैर फिसल गया और अचानक वे असंतुलित होकर जमीन पर गिर पड़े. जमीन पर गिरने से उनकी आंख के नीचे गंभीर चोटें आई. साथ में मौजूद उनकी बेटी और अन्य लोगों ने उन्हें जिला अस्पताल दुर्ग पहुंचाया. जहां परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. गिरने से लगी गंभीर चोट के बाद मौत डॉक्टरों ने मौत की प्रारंभिक वजह बस से उतरने के दौरान गिरने से लगी चोट बताई है. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा. पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है.

कांग्रेस नेताओं पर भारी मामला: 500 करोड़ का मानहानि केस, CM हिमंता ने सवाल उठाए—सबूत दिखाइए

रायपुर   असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के प्रमुख नेताओं पर 500 करोड़ रुपये मानहानि का मुकदमा दायर कर राजनीतिक हलचल मचा दी है. सीएम सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत अन्य नेताओं पर झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने का आरोप लगाया है. यह मुकदमा गुवाहाटी की अदालत में दाखिल किया गया. इस बात से शुरू हुआ विवाद विवाद की जड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस है. उसमें असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी को पता चला कि राज्य भर में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की ओर से लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है. इसके अलावा, AI जनित वीडियो को लेकर भी तनाव बढ़ा है, जिसमें कथित तौर पर सीएम सरमा के खिलाफ गलत सामग्री प्रसारित की गई. वहीं, कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए सरमा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्हें भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जन के आरोप में घेरा गया. 9 फरवरी को शुरू हुई कानूनी कार्रवाई हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को भूपेश बघेल सहित कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि, राजनीतिक असहमति अलग बात है, लेकिन सार्वजनिक मंच से निराधार आरोप लगाना कानून के दायरे में आता है। सीएम सरमा का आरोप है कि, कांग्रेस नेताओं, खासकर भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके खिलाफ ऐसे बयान दिए जो पूरी तरह झूठे और तथ्यहीन हैं। इसी को लेकर उन्होंने सीधे कोर्ट का रुख किया। सरमा ने कांग्रेस नेताओं दावों को पूरी तरह से “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक” करार दिया है। सीएम ने एक्स पर किया पोस्ट सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “आरोप लगाकर भागने वाली राजनीति का दौर खत्म हो चुका है. गांधी परिवार की इस साजिश को अदालत में देखूंगा.” उन्होंने 9 फरवरी को सिविल और क्रिमिनल मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की घोषणा की थी, जो अब अमल में आ गई. भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. गांधी परिवार पर भी हमला मुकदमे के पहले सीएम कह चुके थे कि वह कांग्रेस नेताओं के आरोपों को लेकर लीगल एक्शन लेंगे. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस लीडरशिप पर मिलकर बदनामी करने और पॉलिटिकल ड्रामा करने का भी आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि यह हमला गांधी परिवार के कहने पर किया गया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष को पर्सनल बुराई के बजाय मुद्दों और गवर्नेंस पर फोकस करना चाहिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान बने विवाद की वजह बता दें कि, मामला 4 फरवरी को गुवाहाटी में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता से शुरू हुई। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी की आंतरिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राज्य भर में लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है। सरमा ने इन दावों को पूरी तरह से “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक” करार दिया है। इससे पहले सरमा ने कहा था कि वे गांधी परिवार के गुलामों की ओर से किए जा रहे प्रचार, बदनाम करने की कोशिश या राजनीतिक नाटक से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिट एंड रन राजनीति का दौर खत्म हो चुका है। अगर उनके पास जरा भी साहस या सबूत है तो अदालत में पेश करें। इसी बीच असम की राजनीति में हिमंता सरमा और गौरव गोगोई के बीच टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में आरोप लगाया था कि गौरव गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख से गहरे संबंध हैं और इससे संवेदनशील सूचनाएं पाकिस्तान तक पहुंचने की आशंका जताई थी। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास अपने दावों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है और उन्होंने मानसिक संतुलन खो दिया है।

त्योहार पर रेल सुविधा बढ़ी: छत्तीसगढ़–बिहार के बीच दुर्ग–मधुबनी होली स्पेशल ट्रेन का संचालन

रायपुर मार्च महीने में होली के महापर्व पर घर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने एक बड़ी राहत दी है। रेलवे प्रशासन ने दुर्ग से बिहार के मधुबनी के बीच ‘होली स्पेशल ट्रेन’ चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्टेशनों जैसे रायपुर, बिलासपुर, चांपा और रायगढ़ से होते हुए झारखंड और बंगाल के रास्ते बिहार पहुंचेगी। होली के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे विशेष पहल बता दें कि अक्सर होली के दौरान नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती है, जिससे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को सुलझाने और यात्रियों को सुगम सफर प्रदान करने के लिए रेलवे द्वारा गाड़ी संख्या 08753/08754 का परिचालन किया जा रहा है। ट्रेन की समय-सारणी और रूट 1. दुर्ग-मधुबनी होली स्पेशल (08753): यह ट्रेन 1 मार्च 2026 को दुर्ग से रवाना होगी।     प्रस्थान: दुर्ग से रात 00:30 बजे।     प्रमुख स्टॉपेज: रायपुर (01:20), बिलासपुर (03:30), रायगढ़ (05:28), झारसुगुड़ा (07:15), हटिया (12:10), रांची (12:30), धनबाद (17:00), जसीडीह (20:25), बरौनी (00:40) और दरभंगा (03:15)।     आगमन: मधुबनी स्टेशन पर 2 मार्च को सुबह 04:45 बजे। 2. मधुबनी-दुर्ग होली स्पेशल (08754): वापसी में यह ट्रेन 2 मार्च 2026 को मधुबनी से प्रस्थान करेगी।     प्रस्थान: मधुबनी से सुबह 06:15 बजे।     वापसी का मार्ग: समस्तीपुर (08:40), क्यूल (12:00), चितरंजन (16:05), बोकारो स्टील सिटी (21:35), राउरकेला (03:18) और बिलासपुर (09:50)।     आगमन: रायपुर (11:40) और दुर्ग दोपहर 12:45 बजे (3 मार्च)। कोच संरचना यात्रियों की सुविधा के लिए इस स्पेशल ट्रेन में कुल 18 कोच लगाए गए हैं, जिसका विवरण निम्नानुसार है:     एसी थ्री टायर: 02 कोच     स्लीपर क्लास: 09 कोच     जनरल (सामान्य): 05 कोच     एसटीआरडी (गार्ड एवं दिव्यांग): 02 कोच     यात्रियों के लिए सलाह: रेलवे ने अपील की है कि यात्री अपनी टिकट रेलवे काउंटर या आधिकारिक वेबसाइट www.indianrail.gov.in के माध्यम से समय रहते बुक करा लें ताकि अंतिम समय की अफरा-तफरी से बचा जा सके।

NH-30 पर तेज रफ्तार का तांडव, सड़क हादसे में DRG जवान शहीद

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से सटे आसना क्षेत्र में मंगलवार की रात दर्दनाक सड़क हादसे ने सुरक्षा बल के एक जांबाज को छीन लिया. नेशनल हाइवे 30 पर अज्ञात वाहन ने जगदलपुर की ओर जा रहे डीआरजी जवान भरत भारती की बाइक को जोरदार टक्कर से मारी. हादसा इतना भीषण था कि जवान की मौके पर ही मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, घटना कोतवाली थाना इलाके की है. लोगों की सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पंहुची और शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस हादसे के कारणों और चालक की तलाश में जुट गई है. अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. 2022 में बस्तर फाइटर में हुथा था चयन बताया गया कि वर्ष 2022 में भरत भारती का चयन बस्तर फाइटर में हुआ था, जिसके बाद उनकी पोस्टिंग डीआरजी दस्ते में की गई थी. हादसे के बाद पुलिस महकमे और जवान के साथियों में शोक की लहर है. पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की पड़ताल तेज कर दी है.

साय कैबिनेट की अहम बैठक: किसानों को होली से पहले मिलेगा अंतर की राशि का लाभ

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में किसानों के हित समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय     मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 के लिए राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षाें में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी।

बस्तर ओलंपिक बना ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल, साकार हुआ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सपना

रायपुर नक्सलवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान बन चुका था छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, आज वहां खेल, विश्वास और उम्मीद के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। यह परिवर्तन राज्य के साय सरकार की एक सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि बस्तर के सामाजिक पुनर्जागरण, सांस्कृतिक गौरव और अंचल में शांति स्थापना का व्यापक अभियान है। ऐतिहासिक सहभागिता आया नजर जब पूरा बस्तर मैदान में उतर गया बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति जनता में अभूतपूर्व उत्साह दिखाई दिया।बस्तर संभाग के सातों जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर से 3,91,289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया जिसमें पुरुष खिलाड़ी 1,63,668 और महिला खिलाड़ी 2,27,621 रहे। यह एक आंकड़ा नही बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। वो बस्तर जहाँ कभी भय और अविश्वास का माहौल था वहीं आज महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी यह दर्शाती है कि बस्तर की बेटियों ने भी राज्य सरकार के प्रति भरोसा जताया है और अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने क्रीड़ा को बनाया सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह स्पष्ट मानना है कि “नक्सलवाद का स्थायी समाधान सिर्फ़ सुरक्षा बलों से नहीं बल्कि आम बस्तरिया को अवसर, विश्वास और सकारात्मक मंच देने से होगा।” इसी सोच के साथ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलंपिक को गृह (पुलिस) विभागखेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से आकार दिया और यह आयोजन छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बन गया है। खेलों की विविधता : परंपरा और आधुनिकता का संगम बस्तर ओलंपिक 2025 में शामिल खेलों की सूची यह दर्शाती है कि यह आयोजन समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है, खेलों की लिस्ट में शामिल थे एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल,कराते और वेटलिफ्टिंग लेकिन इन खेलों के साथ ही स्थानीय प्रतिभा को उतना ही सम्मान दिया गया।बस्तर ओलंपिक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मानवीय और संवेदनशील सोच रही। इस आयोजन में विशेष रूप से सम्मिलित हुए आत्मसमर्पित नक्सली (नुवा बाट), माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी, जूनियर वर्ग (14–17 वर्ष), सीनियर वर्ग। 300 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों और 18 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ का बस्तर अब बहिष्कार नहीं, पुनर्वास और पुनर्जन्म की भूमि बन रहा है। तीन स्तरीय प्रतियोगिता बनी पारदर्शिता और अवसरों का खजाना प्रतियोगिताएँ तीन चरणों में आयोजित की गईं— विकासखंड स्तर – 25 अक्टूबर से, जिला स्तर – 5 नवम्बर से और संभाग स्तर – 24 नवम्बर से। विजेताओं को नगद पुरस्कार,मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान किए गए जिनमे नगद पुरस्कार DBT के माध्यम से राशि सीधे खातों में भेजी गई। संभागीय विजेताओं को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया गया। “बस्तर यूथ आइकॉन” बस्तर के युवाओं के लिए एक नई पहचान बन गई है। ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बनी देश के लिए मिसाल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में कहा कि “बस्तर ओलंपिक केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि विकास और खेल का संगम है।”आज बस्तर ओलंपिक पूरे देश में‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर ओलंपिक का शुभंकर वन भैंसा और पहाड़ी मैना बस्तर की आत्मा के प्रतीक बने जिसमे वन भैंसा, सामूहिक शक्ति और साहस और पहाड़ी मैना, संवाद, संस्कृति और जीवंतता का प्रतीक बना। ये शुभंकर बताते हैं कि बस्तर की पहचान उसकी संस्कृति और सामूहिक चेतना ही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे बताया ‘भविष्य की नींव’ समापन समारोह में अमित शाह का वक्तव्य बस्तर के भविष्य का रोडमैप साबित हो रहा है उन्होंने स्पष्ट कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत होगा। बस्तर को पर्यटन और उद्योग का केंद्र बनाया जाएगा और कश्मीर से अधिक पर्यटक बस्तर में लाने का लक्ष्य सफ़ल होगा। केंद्रीय गृह मंत्री का यह विश्वास कि बस्तर का कोई बच्चा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में गोल्ड लाएगा, पूरे देश के लिए प्रेरणा है। बस्तर ओलंपिक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भावनात्मक नेतृत्व प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “यह आयोजन केवल खेल नहीं अपितु बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव है।” उन्होंने माना कि इतनी बड़ी सहभागिता का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण था।सातों जिलों की टीम ने ऐतिहासिक कार्य किया उनके शब्दों में संवेदना, आत्मीयता और आत्मविश्वास झलक थी। आज बस्तर- सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल जैसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।बस्तर ओलंपिक इसी परिवर्तन का एक और जीवंत प्रमाण है।बस्तर की मिट्टी में साहस है, बस्तर के युवाओं में क्षमता है और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिशा भी। बस्तर ओलंपिक केवल एक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बस्तर का जय घोष है जो आज हिंसा नहीं, विकास से पहचाना जा रहा है, जो अब डर नहीं, गर्व का विषय बना हुआ है। जो अतीत नहीं, भविष्य की ओर देख रहा है। वह बस्तर जो आज स्थायी तौर पर बदल चुका है।

लोकतंत्र के रक्षकों को नमन: गौरेला में सीएम साय ने मीसाबंदियों को किया सम्मानित

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास के दौरान गौरेला के मंगली बाजार में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जिले के मीसाबंदियों एवं उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने मीसाबंदी कोमलचन्द जैन एवं शिव कुमार सोनी के निवास पहुंचकर शाल एवं श्रीफल भेंटकर उन्हें नमन किया और विनम्र भाव से कहा, “हम आपका आशीर्वाद लेने आए हैं।” मुख्यमंत्री साय ने आपातकाल के दौरान मीसाबंदियों द्वारा झेली गई पीड़ा और संघर्ष की दास्तां को गंभीरता से सुना और उनके साहस व त्याग को नमन किया। उन्होंने कहा कि मीसाबंदी लोकतंत्र के सच्चे रक्षक हैं, जिन्होंने देश में आपातकाल के कठिन दौर में अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने मीसाबंदियों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सम्मान राशि एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मीसाबंदियों के सम्मान और कल्याण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उनके योगदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा। मीसाबंदियों ने भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा दिया जा रहा सम्मान और सहयोग उनके संघर्ष की सच्ची मान्यता है। इस अवसर पर मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मरवाही विधायक प्रणव मरपच्ची, विधायक धरसींवा अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार खिलारी सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सीएम ने हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जिला प्रवास के दौरान गौरेला स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान हनुमान के समक्ष प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर विकास के लिए प्रार्थना की।मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में आयोजित हवन कार्यक्रम में भी भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम भी जाना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्धि और सर्वांगीण विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है और सभी वर्गों के कल्याण के लिए विभिन्न जनहितकारी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक प्रणव मरपच्ची, विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी, एसपी मनोज कुमार खिलारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। मंदिर समिति ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक रूप से स्वागत किया।

‘हमारे हक की जंग’ से गूंज उठी रैली, हिडमा के गीत पर झूमे लोग, मचा सियासी विवाद

बस्तर बस्तर में आयोजित भूमकाल स्मृति दिवस की रैली उस वक्त चर्चा का विषय बन गई, जब रैली के दौरान सार्वजनिक स्थान पर हिडमा के नाम से जुड़ा गीत बजाया गया. गीत के बोलों पर रैली में शामिल लोग झूमते और तालियां बजाते नजर आए, जबकि मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी भी रही. जानकारी के मुताबिक, यह घटना जगदलपुर शहर के अग्रसेन चौक के पास सामने आई, जहां रैली गुजरने के दौरान तेज आवाज में गीत चलाया गया. गीत के बोलों में “हमारे हक की जंग है हिडमा”, “दिल की बस्ती में हिडमा”, “हमारा झंडा तू ही हिडमा” जैसे शब्द शामिल थे. इतना ही नहीं, गीत में जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानी को भी हिडमा के नाम से जोड़ा गया है. गीत बजते ही रैली में शामिल कई लोग भावनाओं में बहते हुए उस पर झूमते नजर आए. पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही, हालांकि किसी तरह की तत्काल कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है. अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि ऐतिहासिक स्मृति दिवस जैसे कार्यक्रम में इस तरह के गीत का बजना कितना उचित है, और क्या यह कानून-व्यवस्था या सामाजिक संतुलन के लिहाज से सवाल खड़े करता है. अभी भी नक्लवाद की जड़ें बस्तर में समाए हुई : कांग्रेस छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशिल आनंद शुक्ला ने बस्तर में हिड़मा जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की घटना को चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि यह सरकार की विफलता है. मार्च 2026 में नक्सलवाद खत्म करने की घोषणा की गई है, जिसमें अब लगभग 49 दिन बचें हैं. ऐसे में बस्तर में यह नारेबाजी सरकार के दावों के विपरीत हैं. अभी भी बस्तर में नक्सलवाद की जड़ें समाई हुई हैं. सिर्फ झूठी बयानबाजी से नक्लवाद समाप्त नहीं होगा. वायरल वीडियो की जांच जारी : बस्तर रेंज आईजी इस घटनाक्रम को लेकर बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है. यह गाना किसने चलाया और कौन-कौन मौके पर मौजूद था इसकी जांच जारी है, जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी.

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