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मोर गांव मोर पानी अभियान से संवरे 45 परिवार, आजीविका और जल उपलब्धता में सुधार

रायपुर. जल संरक्षण की पहल से पांच एकड़ से अधिक भूमि में लहलहाई खेती मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल मोर गांव मोर पानी अभियान आज गांवों में जल आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मुख्तियारपारा में वर्षों से उपेक्षित एक अनुपयोगी स्टापडेम को नया जीवन मिला है। बहते पानी को सहेजने की इस सामूहिक कोशिश ने न सिर्फ जल संकट दूर किया बल्कि खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे दी। जब जर्जर स्टापडेम बना समस्या ग्राम मुख्तियार पारा में कई वर्ष पूर्व एक स्थानीय नाले पर निर्मित स्टापडेम समय के साथ जर्जर हो चुका था। गाद जमाव के कारण इसकी जल धारण क्षमता लगभग समाप्त हो गई थी। सर्दियों के बाद नाले का प्रवाह कम होते ही ग्रामीणों को दैनिक उपयोग तक के लिए पानी नहीं मिल पाता था। खेतों की सिंचाई तो दूर, पशुओं के लिए भी जल का संकट बना रहता था। ग्राम सभा से निकली समाधान की राह गत वित्तीय वर्ष में आयोजित ग्राम सभा में मोर गांव मोर पानी अभियान पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर खराब पड़े स्टापडेम के पुनरुद्धार का प्रस्ताव रखा। सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण एवं भूमि सुधार कार्य को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 4.95 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई और ग्राम पंचायत मुख्तियार पारा को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी निगरानी में यह कार्य समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। जल से समृद्ध हुआ गांव का भविष्य सिल्ट हटने और भूमि सुधार कार्य के बाद स्टापडेम में जल का ठहराव पहले की तुलना में कहीं अधिक हो गया है। इसका सीधा लाभ ग्राम सलका और सिरौली के लगभग 45 परिवारों को मिल रहा है। आज यहां घरेलू उपयोग, पशुपालन और निस्तार के लिए भरपूर जल उपलब्ध है। आसपास के जलस्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस जलसंचय के कारण 8 से 10 परिवारों ने रबी फसल के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी शुरू कर दिया है और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो चुकी है। यह कहानी बताती है कि जब सरकार की योजना, ग्राम सभा की सहभागिता और श्रमशक्ति एक साथ आती है, तो अनुपयोगी संरचनाएं भी समृद्धि का आधार बन जाती हैं। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत किया गया यह कार्य ग्रामीण आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और टिकाऊ विकास की एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बनकर उभरा है।

छत्तीसगढ़ में होगा विकास का नया दौर: 5 मेडिकल हब और रायपुर एयरपोर्ट बनेगा कृषि कार्गो पोर्ट

रायपुर  एक दिवसीय दौरे पर  छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ के विकास के लिए खजाना खोल दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच मेडिकल हब बनेंगे और रायपुर एयरपोर्ट को कृषि कार्गो पोर्ट के तौर पर विकसित किया जाएगा। केंद्रीय ऊर्जा, आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता को संबोधित किया। उन्होंने केंद्रीय बजट को देश के अगले 25 वर्षों का फाइनेंशियल विजन बताया। सरकार के 11 वर्षों के विकास कार्यों का लेखा-जोखा साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट आर्थिक मजबूती, इंफ्रास्ट्रक्चर और गरीब व मध्यम वर्ग के सशक्तीकरण पर केंद्रित है। प्रदेश को मिली बड़ी सौगात केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बजट में छत्तीसगढ़ को कुल 50,427 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें राज्य सरकार को सीधे 9,704 करोड़ रुपये और रेलवे विकास के लिए 7,770 करोड़ रुपये शामिल हैं। रेल नेटवर्क विस्तार के तहत ब्रॉडगेज और रायपुर-दुर्ग सहित कई जिलों में आधुनिक रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा 34 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की घोषणा की गई है। कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर फोकस रायपुर एयरपोर्ट को कृषि कार्गो पोर्ट के रूप में विकसित किए जाने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। अमृत सरोवर योजना के तहत मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्बन कैप्चर स्टोरेज हेतु 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश में एक लाख स्वास्थ्यकर्मी और 1.5 लाख परिचारक तैयार किए जाएंगे। साथ ही पांच मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे। शिक्षा क्षेत्र में देशभर में पांच यूनिवर्सिटी हब विकसित किए जाएंगे। केंद्र की अन्य योजनाएं बजट में 67 हजार करोड़ रुपये मुद्रा लोन के लिए, दो करोड़ आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो करोड़ 80 लाख आवासों की स्वीकृति और स्वच्छ भारत मिशन की राशि दोगुनी की गई है। शहरी स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया है। कोयले के ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम और कार्गो कोस्टल ट्रांसपोर्टेशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से वन अग्नि रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान

रायपुर. नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से वन अग्नि रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान वन अग्नि (दावानल) जंगलों के लिए एक गंभीर समस्या है। आग लगने से केवल सूखी पत्तियाँ ही नहीं जलतीं, बल्कि बीज, छोटे पौधे, झाड़ियाँ, घास और मिट्टी में मौजूद पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। इससे जंगलों का प्राकृतिक पुनरुत्पादन प्रभावित होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पत्तियों और सूखी लकड़ियों के सड़ने-गलने से बनने वाले फंगस और बैक्टीरिया मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जो आग लगने पर नष्ट हो जाते हैं। वन अग्नि से मिट्टी की ऊपरी परत कठोर हो जाती है, जिससे वर्षा का पानी जमीन में नहीं समा पाता और जल स्तर में कमी आती है। औषधीय पौधों के नष्ट होने से वनांचल में रहने वाले लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है। आग के कारण वन्यजीवों का आवास नष्ट होता है, वे भटक जाते हैं और मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की स्थिति बन सकती है। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए वनमंडल अधिकारी, खैरागढ़ द्वारा वन अग्नि की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वन क्षेत्रों में फायर लाइन की कटाई-सफाई, फायर वाचर्स की नियुक्ति तथा आग की सूचना मिलते ही तत्काल नियंत्रण की व्यवस्था हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी की जा रही है। बेहतर प्रबंधन के लिए वनमंडल कार्यालय खैरागढ़ में फॉरेस्ट फायर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। वन अग्नि की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर +91-9301321797 पर देने की अपील आम नागरिकों से की गई है।  इसके साथ ही महुआ वृक्षों की ब्लेजिंग कर कंट्रोल बर्निंग, गाँवों में मुनादी, दीवार लेखन, पोस्टर चस्पा करना, स्कूलों में वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला एवं रंगोली प्रतियोगिताएँ तथा सरपंच एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति अध्यक्षों को पोस्टकार्ड के माध्यम से अपील जैसी नवाचारी पहल भी की जा रही है। जनजागरूकता के तहत  03 फरवरी 2026 से खैरागढ़, छुईखदान, गंडई एवं साल्हेवारा परिक्षेत्र के 36 गाँवों में नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अंचल के प्रसिद्ध कलाकारों की टीम ‘झंकार कला मंच’ पैलीमेटा द्वारा अग्नि सुरक्षा पर आधारित झांकी और प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। 07 फरवरी 2026 को छुईखदान परिक्षेत्र के ग्राम कानीमेरा, हाटबंजा एवं बुढ़ानभाठ में आयोजित कार्यक्रमों में प्रत्येक गाँव से लगभग 200 से 250 ग्रामीणों की सहभागिता रही। झंकार कला मंच के संचालक  प्रकाश वैष्णव ने बताया कि कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को वन अग्नि से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है तथा आग से बचाव और समय पर सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कार्यक्रमों में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा भी ग्रामीणों से वन अग्नि रोकथाम में सहयोग करने की अपील की जा रही है। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की बैठकों में भी अग्नि सुरक्षा विषय पर विशेष चर्चा की जा रही है, ताकि जनसहभागिता से वन संरक्षण को और मजबूत बनाया जा सके।

विकास को मिली नई सौगात: मुड़ापार हेलीपेड में सामुदायिक भवन का उद्घाटन

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने मथुरा माली मरार पटेल समाज को दी 10 लाख के सामुदायिक भवन की सौगात कोरबा नगर विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन ने रविवार को मुड़ापार, हेलीपेड में मथुरा माली मरार पटेल समाज को 10 लाख की लागत से बने सर्व सुविधायुक्त सामुदायिक भवन की सौगात दी। कार्यक्रम में मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत ने समाज के पदाधिकारियों के साथ मां शाकम्भरी देवी की पूजा अर्चना कर प्रदेश और शहर की खुशहाली की कामना की।नवनिर्मित सामुदायिक भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया।  इस अवसर पर मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि सभी समाज की आर्थिक उत्थान और प्रगति के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार सभी समाज के साथ खड़ी है और उनके उत्थान और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। कोरबा विधानसभा में भी सभी समाज की मांग अनुरूप विकास कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। मंत्री  देवांगन ने कहा कि मथुरा माली मरार पटेल समाज का आशीर्वाद मुझे सदैव मिलता रहा है, समाज की सेवा करने का मुझे यह सौभाग्य मिला है। समाज की मांग पर प्रभारी मंत्री मद से 10 लाख की लागत से भवन का निर्माण कराया गया है, आज भवन समाज को समर्पित किया जा रहा है। इसी के साथ-साथ वार्ड क्रमांक 55 सुमेधा नागिन भाटा में समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 10 लाख की स्वीकृति दी गई है, जल्द ही भवन पूर्ण हो जाएगा। मथुरा माली मरार पटेल समाज  के समाज के सभी प्रमुख जनों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि पटेल समाज एक संगठित और सशक्त समाज है।  समाज  एक सशक्त और संगठित समाज की अवधारणा को पूरा करते हुए आगे बढ़ रहा है। पटेल समाज एक मेहनतकश समाज है। कड़ी मेहनत कर धरती को हरा भरा बनाने का कार्य मरार समाज करता है। उन्होंने कहा कि समाज आज खेती किसानी, सब्जी-भाजी के उत्पादन के साथ- साथ हर क्षेत्र में काफी आगे है।  इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एमआइसी सदस्य मती धन कुमारी गर्ग, पार्षद ईश्वर पटेल, पार्षद  नरेंद्र देवांगन, पार्षद  मुकुंद कंवर, कोरबा मंडल अध्यक्ष  योगेश मिश्रा,  रामकृष्ण साहू, मती स्मिता सिंह, मती पूर्णिमा पासवान,  नवनीत शुक्ला,  सुकेश दलाल, मती संगीता साहू,  अनुज यादव व समाज के प्रमुख, वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर महापौर मती संजू देवी राजपूत ने कहा कि माननीय कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन की नेतृत्व में कोरबा शहर विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। शहर के वार्ड, बस्तियों के मूलभूत विकास कार्य की बात हो, या फिर बड़े निर्माण कार्यों की बात हो, और सबसे महत्वपूर्ण सभी समाज को उनके मांग अनुरूप विकास कार्यों की सौगात देने की बात हो। सभी कार्यों के लिए   शासन से राशि की स्वीकृति भी ला रहे हैं, विकास कार्यों को शुरू कर पूर्ण कर सौगात भी दे रहे हैं। समाज ने किया मंत्री और महापौर का अभिनंदन     इस सौगात पर समाज के अध्यक्ष श्  आर डी पटेल,  महादेव पटेल,  लक्ष्मण पटेल, उपाध्यक्ष मती राजकुमारी पटेल, मती संध्या पटेल, मती संगीता पटेल,  राम अवतार पटेल,  चंद्र लाल पटेल,  गोविंद पटेल,  संतोषी पटेल,  राजाराम पटेल के साथ-साथ अधिक संख्या में समाज के पदाधिकारियों ने मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया।

आदिवासी उद्यमिता की मिसाल: एलोवेरा पर्सनल केयर उत्पादों से उभरा दुगली का वन धन केंद्र

रायपुर एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जिला धमतरी के ग्राम दुगली में स्थापित वन- धन विकास केंद्र (VDVK) आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बन गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक आय प्रदान कर रहा है। 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार दुगली वन धन विकास केंद्र के स्व-सहायता समूहों के संघ के रूप में कार्य कर रहा है। एक प्रमुख समूह संचालन की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि अन्य समूह आवश्यकता और ऑर्डर के अनुसार उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं। केंद्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है। केंद्र में वर्तमान में लगभग 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हर्बल पाउडर, स्वास्थ्य पेय और अन्य हर्बल उत्पाद शामिल हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बनाए जाते हैं तथा आयुष और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच विशेष रूप से एलोवेरा से तैयार साबुन, क्रीम, बॉडी वॉश और हैंडवॉश जैसे पर्सनल केयर उत्पादों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी सहायता, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप उत्पाद राज्य स्तरीय मेलों, विभागीय नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र का वार्षिक कारोबार 74 लाख 62 हजार 156 रुपए दर्ज किया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद अब विभिन्न मार्ट, चयनित आउटलेट्स और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं तथा आयुष विभाग और पर्यटन मंडल को नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना किया साकार दुगली वन धन विकास केंद्र आज केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि शासकीय योजनाओं और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान बना बस्तर पंडुम, विजेताओं को मिला सम्मान

रायपुर. अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साह संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली। अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साह केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है। प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।” इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। “बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता 1.     जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा) 2.     जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा) 3.     जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा) 4.     जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव) 5.     जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा) 6.     जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर) 7.     जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर) 8.     जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर) 9.     जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर) 10.     जनजातीय व्यंजन – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा) 11.     आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव) 12.     बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)

‘ऐसा जादू है मेरे बस्तर में’ गीत पर बच्चों की प्रस्तुति ने बांधा समा

रायपुर. बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर  अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया। बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा *मलखंभ प्रदर्शन* भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री  शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।

Census 2027: 33 सवालों में घर की छत, रसोई, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं की होगी गिनती

रायपुर देश की अगली जनगणना सिर्फ जनसंख्या गिनने का अभियान नहीं रह जाएगी, बल्कि यह लोगों के रहन-सहन, सुविधाओं और जीवन स्तर का पूरा सामाजिक एक्स-रे साबित होने जा रही है। जनगणना-2027 के मकान सूचीकरण चरण में हर घर से 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इन सवालों से यह साफ होगा कि देश में कौन पक्के घर में रह रहा है, किसके पास शौचालय है, कौन गैस पर खाना बना रहा है और किस घर तक इंटरनेट पहुंच चुका है। सरकारी तैयारियों के मुताबिक इस बार जनगणना कर्मी टैबलेट आधारित डिजिटल सिस्टम से डाटा दर्ज करेंगे, ताकि योजनाएं कागजी नहीं, जमीनी हकीकत पर बन सकें। सबसे पहले घर की पहचान और बनावट जनगणना टीम घर पहुंचते ही भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद मकान की बुनियादी संरचना पर सवाल होंगे। फर्श किस सामग्री की है, दीवारें कच्ची हैं या पक्की, छत टीन, कंक्रीट या अन्य किस्म की है। मकान रिहायशी है, दुकान है या किसी और उपयोग में यह भी दर्ज होगा। मकान की हालत (अच्छी, रहने लायक या जर्जर) भी लिखी जाएगी। परिवार मुख्य रूप से कौन-सा अनाज खाता है गेहूं, चावल, मक्का या अन्य, यह भी जनगणना में शामिल रहेगा। अंत में एक मोबाइल नंबर लिया जाएगा, जिसका उपयोग केवल जनगणना से जुड़ी आधिकारिक सूचना पहुंचने के लिए किया जाएगा। यही जानकारी भविष्य की आवास योजनाओं की दिशा तय करेगी। परिवार की पूरी प्रोफाइल बनेगी घर के बाद बारी परिवार की होगी। परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या, परिवार क्रमांक और परिवार के मुखिया का नाम दर्ज किया जाएगा। मुखिया का लिंग और यह भी कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से है, यह पूछा जाएगा। घर में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या भी दर्ज होगी, जिससे पारिवारिक संरचना का सामाजिक विश्लेषण हो सके। कमरे कितने, घर किसका मकान का स्वामित्व किसके पास है खुद का, किराये का या अन्य, यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। परिवार के पास रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह भी पूछा जाएगा। यह डाटा भीड़भाड़ और आवासीय घनत्व की वास्तविक स्थिति बताएगा। पानी, बिजली, शौचालय की असली तस्वीर पीने का पानी किस स्रोत से आता है, पानी घर में उपलब्ध है या बाहर से लाना पड़ता है। रोशनी का मुख्य साधन क्या है जैसे बिजली, सोलर या अन्य। शौचालय है या नहीं, है तो किस प्रकार का। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, साथ ही यह भी दर्ज होगा कि घर में स्नानगृह है या नहीं। रसोई का धुआं या गैस की लौ जनगणना कर्मी यह भी पूछेंगे कि घर में अलग रसोई घर है या नहीं। एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं और खाना पकाने में किस ईंधन का उपयोग होता है, लकड़ी, गोबर, कोयला या गैस। यह जानकारी उज्ज्वला जैसी योजनाओं के असर का वास्तविक मूल्यांकन करेगी। इलेक्ट्रानिक और डिजिटल पहुंच भी होगी दर्ज अब जनगणना में यह भी गिना जाएगा कि घर सूचना और तकनीक से कितना जुड़ा है। घर में रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर या लैपटाप है या नहीं, यह पूछा जाएगा। टेलीफोन, मोबाइल या स्मार्ट फोन की उपलब्धता भी दर्ज होगी। यह डाटा बताएगा कि डिजिटल इंडिया की योजनाएं गांव और शहर तक कितनी पहुंची हैं। साइकिल से कार तक की गिनती परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड है या नहीं। कार, जीप या वैन जैसी चार पहिया गाड़ियों की जानकारी भी दर्ज होगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा संकेत मिलेगा। अहम हैं ये 33 सवाल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ डाटा संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले दशक की नीतियों की नींव है। आवास, पेयजल, स्वच्छता, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण की योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होंगी। इस बार जनगणना का मकसद सिर्फ कितने लोग है यह जानना नहीं, बल्कि यह समझना है कि लोग कैसे जी रहे हैं। जानकारी अनुसार जनगणना-2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के पूरा होने के बाद इससे संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी। सीमा स्थिरीकरण लागू सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा या क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। डिजिटल जनगणना की पूरी तैयारी जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित होगी। पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जो मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, घरेलू परिसंपत्तियों और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से जुड़े होंगे। केंद्र सरकार ने इन प्रश्नों को 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी कर दिया है। इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है। जनगणना में इस बार शुरुआत से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है, जिससे हर मकान का डिजिटल मैपिंग आधारित रिकॉर्ड तैयार होगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार प्रक्रिया दो चरणों में होगी। प्रथम चरण (अप्रैल–सितंबर 2026) में मकान सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि द्वितीय चरण (फरवरी 2027) में जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी। देशभर के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है।

पांच साल में विकसित बनेगा बस्तर

रायपुर. बस्तर पंडुम के विजेताओं को किया गया सम्मानित केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है। बस्तर पण्डुम के माध्यम से यहां की संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को छत्तीसगढ़ सरकार ने नए प्राण देने का काम किया। बस्तर पंडुम 2026 के सभी विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री  शाह और मुख्यमंत्री  साय ने  सम्मानित किया। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लोक कलाकारों को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने और सहभोज करने का अवसर भी मिलेगा। केंद्रीय गृहमंत्री  शाह ने जनजातीय कला एवं संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन तथा जनजातीय प्रकृति व परंपरा का उत्सव बस्तर पण्डुम के तीन दिवसीय संभाग स्तरीय आयोजन के समापन अवसर पर आज जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के 07 जिले के 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन्हीं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य बस्तर पण्डुम 2026 के माध्यम से राज्य की सरकार द्वारा किया जा रहा है।   आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना        शाह ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है और इसे प्रभु  राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश के 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की।  शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे। उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।  40 गांवों के स्कूलों में गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती है केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत प्रदेश सरकार लगातार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में रोडमैप तैयार कर सड़क, पुल पुलिया, मोबाईल टॉवर स्थापित करने के साथ-साथ राशन वितरण, शुद्ध पेयजल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित गांवों में लाल आतंक के चलते विकास से कोसों दूर थे, वहां के 40 गांवों में स्कूल फिर से खोले गए। अब वहां गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं।   दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ जिले में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ    शाह ने मंच से जानकारी दी कि बस्तर जिले में 118 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जाएगा तथा पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। वहीं दूरस्थ अंचलों को मुख्यालयों से जोड़ने के लिए रेल परियोजनाओं और नदी जोड़ो परियोजना को विस्तार दिया जाएगा। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, यह बस्तर की पहचान का उत्सव- मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के प्रति गृह मंत्री  अमित शाह के स्नेह और लगाव के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी  शाह की मौजूदगी ने बस्तरवासियों का हौसला बढ़ाया था और आज फिर उनकी उपस्थिति ने कलाकारों और यहां के लोगों में नई ऊर्जा भर रही है। समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम का आयोजन        साय ने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, प्रतिभागियों को बधाईयां। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया और इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया है और बस्तर की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि चित्रकला, वाद्ययंत्र, नाटक की विद्या सहित 12 विद्याओं का प्रदर्शन कलाकारों के द्वारा किया गया। बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया के समक्ष प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया गया। बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुकी है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, किन्तु अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है। बस्तर तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी, लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है।   साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करेंगे।  आत्म समर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। नियद नेल्ला … Read more

विशाखापत्तनम-रायपुर भारतमाला घोटाला: 43 करोड़ की अनियमितता, EOW बाकी खसरा की जांच से क्यों कतरा रही?

रायपुर विशाखापत्तनम-रायपुर भारतमाला इकोनामिक कारिडोर में अभनपुर के आसपास के जिन छह गांवों की जमीन के अधिग्रहण में मुआवजा घोटाले की शिकायत हुई है, उनमें सभी खसरों की जांच नहीं हो पाई है। जबकि 12 खसरों की जांच में ही 43 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। चार वर्ष पूर्व सबसे पहले लगभग 53 खसरों की एक साथ शिकायत की गई थी। पिछले कुछ महीनों में 16 खसरा नंबरों की और शिकायत हुई है। अब गड़बड़ी वाले खसरों की संख्या बढ़कर 69 हो गई है। 12 खसरों की जांच में ही बड़े-बड़े नाम घोटाले में लिप्त पाए गए हैं। अब शेष 63 खसरों में खेल करने वाले अफसरों की भूमिका जांच के घेरे में है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) के अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ाते हुए जल्द ही अन्य खसरों की जांच शुरू की जाएगी। जांच की कछुआ चाल और सिस्टम पर सवाल जुलाई 2022 में पहली बार शिकायत होने के बाद शासन ने जांच के आदेश तो दिए, लेकिन कार्रवाई की गति बेहद संदिग्ध रही। 14 माह की लंबी जांच के बाद भी नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। स्थिति यह है कि ग्राम झांकी में 16 संदिग्ध खसरों में से 12 सरकारी भूमि के हैं, जिनका मुआवजा निजी बताकर उठा लिया गया। इसी तरह ग्राम नायक बांधा में 31 खसरों की शिकायत हुई, लेकिन जांच केवल छह की हुई। यहां जमीन को 247 टुकड़ों में बांटने की शिकायत है, जबकि ग्राम टोकरो के आठ संदिग्ध खसरों में से केवल एक की जांच हो सकी है। अब ईडी की चौखट पर पहुंचा मामला लगातार शिकायतों के बावजूद जब स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो अब मामले की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में की गई है। रिकार्ड बताते हैं कि 38 किलोमीटर के दायरे में आने वाली जमीनों को करीब 561 भागों में बांटा गया है, ताकि मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया जा सके। इसमें सरकारी जमीन को निजी दिखाकर हड़पने का आरोप है। दुर्ग-अभनपुर बायपास : 1,196 खसरों पर खामोशी सिर्फ मुख्य कारिडोर ही नहीं, बल्कि दुर्ग-अभनपुर बायपास में भी भारी अनियमितता की बू आ रही है। यहां 18 गांवों के 1,196 खसरे प्रभावित हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत खसरों में गड़बड़ी की शिकायतें हैं। ग्राम भेलवाडीह में 174, झांकी में 114 और पचेड़ा में 102 खसरे में मुआवजे का खेल हुआ है, लेकिन यहां अभी तक जांच शुरू नहीं हो पाई है। सात आरोपित गिरफ्तार रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनामिक कारिडोर (भारतमाला परियोजना) जमीन अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में अब तक सात मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अप्रैल 2025 में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने सबसे पहले चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनमें मुख्य जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी और उनके पति केदार तिवारी शामिल थे। इसके बाद अक्टूबर 2025 में टीम ने घोटाले में शामिल तीन पटवारियों को गिरफ्तार किया। इनके नाम दिनेश पटेल (नायकबांधा), लेखराम देवांगन (टोकरो) और बसंती घृतलहरे (भेलवाडीह) हैं। ईओडब्ल्यू ने अपनी 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कुल 10 लोगों को आरोपित बनाया है, जिनमें से कई राजस्व अधिकारी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।

माशिमं का बड़ा फैसला: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा फीस बढ़ाई, 5 साल बाद 800 रुपए तय

रायपुर  छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने करीब 5 साल बाद 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के शुल्क में बढ़ोतरी की है। यह बढ़ा हुआ शुल्क शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। नए प्रावधान के तहत नियमित परीक्षार्थियों को अब बोर्ड परीक्षा, अंकसूची और प्रति विषय प्रैक्टिकल शुल्क मिलाकर 800 रुपए चुकाने होंगे, जबकि पहले इसके लिए 460 रुपए देने पड़ते थे। बोर्ड परीक्षा के आवेदन फॉर्म के शुल्क में भी 70 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां आवेदन शुल्क 80 रुपए था, अब इसे बढ़ाकर 150 रुपए कर दिया गया है। हालांकि, प्रवेश पत्र की द्वितीय प्रति के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके लिए पहले की तरह 80 रुपए ही देने होंगे। कार्यपालिका समिति की बैठक में लिया गया फैसला 10वीं और 12वीं परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी का निर्णय माशिमं की कार्यपालिका समिति की बैठक में लिया गया। समिति ने करीब 22 मदों के शुल्क बढ़ाने को मंजूरी दी है। इनमें नामांकन शुल्क, अतिरिक्त विषय, एक विषय या दो विषय (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा), स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क समेत अन्य मद शामिल हैं। स्वाध्यायी छात्रों पर भी पड़ेगा असर प्रदेश के स्वाध्यायी एससी/एसटी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क में भी लगभग डेढ़ गुना वृद्धि की गई है। पहले जहां इसके लिए 560 रुपए देने होते थे, अब 800 रुपए चुकाने होंगे। वहीं, राज्य के नए छात्रों और राज्य से बाहर के छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले यह शुल्क 1,540 रुपए था, जिसे अब बढ़ाकर 2,000 रुपए कर दिया गया है। विषयवार परीक्षा शुल्क में इजाफा एक विषय की परीक्षा: 280 → 400 रुपए दो विषय (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा): 340 → 600 रुपए 2021 में हुई थी पिछली बढ़ोतरी गौरतलब है कि, माशिमं ने इससे पहले साल 2021 में बोर्ड परीक्षा और उससे जुड़े विभिन्न शुल्कों में वृद्धि की थी। पांच साल बाद एक बार फिर परीक्षा शुल्क बढ़ने से छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है।

रिटायरमेंट के बाद GPF वसूली अवैध: हाईकोर्ट ने रिटायर्ड लेक्चरर को राहत देते हुए आदेश निरस्त किया

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी के रिटायरमेंट होने के छह माह बाद सामान्य भविष्य निधि (GPF) की राशि से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक रिटायर्ड लेक्चरर को राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। दरअसल, मामला जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी लक्ष्मीनारायण तिवारी से जुड़ा है। वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ससहा में व्याख्याता के पद पर पदस्थ थे। लक्ष्मीनारायण तिवारी 31 जनवरी 2011 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर रिटायरमेंट हुए थे। रिटायरमेंट के करीब 12 साल बाद महालेखाकार कार्यालय रायपुर ने उनके GPF खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए उनके खिलाफ वसूली आदेश जारी कर दिया। इस आदेश से परेशान होकर लक्ष्मीनारायण तिवारी ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर वसूली आदेश को चुनौती दी। 12 साल बाद की जा रही थी वसूली याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने कोर्ट में तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जबलपुर हाईकोर्ट के रामनारायण शर्मा बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले में यह स्पष्ट किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के डीआर मंडावी बनाम छत्तीसगढ़ शासन और हृदयनारायण शुक्ला बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामलों में भी यही बात कही गई है। इन फैसलों में कहा गया है कि शासकीय कर्मचारी के रिटायरमेंट के 6 माह के भीतर ही देयकों की वसूली की जा सकती है। इसके बाद वसूली करना नियमों के खिलाफ है। पेंशन नियम 65 के तहत 6 माह के भीतर ही वसूली का प्रावधान इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का हवाला देते हुए बताया गया कि यदि किसी शासकीय सेवक के GPF खाते में ऋणात्मक शेष पाया जाता है, तो सेवानिवृत्ति की तिथि से केवल 6 माह की अवधि के भीतर ही वसूली की जा सकती है। निर्धारित समय-सीमा के बाद GPF राशि से किसी भी प्रकार की वसूली कानूनन गलत है। हाईकोर्ट ने किया वसूली आदेश को निरस्त हाईकोर्ट ने प्रस्तुत तर्कों और न्यायिक दृष्टांतों से सहमति जताते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के 12 साल बाद जारी किया गया वसूली आदेश विधि के विपरीत है। इसके बाद न्यायालय ने कार्यालय महालेखाकार रायपुर की ओर से जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया।

नौकरी की तलाश खत्म! 6 दिनों तक चलेगा रोजगार मेला, नामी कंपनियों में आवेदन का मौका

रायपुर प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संभाग स्तरीय रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है। यह रोजगार मेले 12 से 17 फरवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों में आयोजित होंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार 12 एवं 13 फरवरी को बिलासपुर संभाग में रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 14 और 15 फरवरी को दुर्ग संभाग में रोजगार मेले का आयोजन होगा। वहीं 16 एवं 17 फरवरी को सरगुजा और बस्तर संभाग में रोजगार मेले लगाए जाएंगे। इन रोजगार मेलों में निजी क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी। कंपनियों के प्रतिनिधि मौके पर ही अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेकर योग्य उम्मीदवारों का चयन करेंगे, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। रोजगार मेले में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी ई-रोजगार पोर्टल अथवा छत्तीसगढ़ रोजगार मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन और आवेदन कर सकते हैं। पंजीकृत उम्मीदवारों को रोजगार मेले के दौरान साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल होने की सुविधा प्रदान की जाएगी।

आस्था और चमत्कार का संगम: छत्तीसगढ़ का वह शिवलिंग जो साल में तीन बार बदलता है स्वरूप

खरोरा   बेलदार राजा की राजधानी बेलदार सिवनी में एक अद्भुत प्राचीन शिवलिंग है जो साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है, इस प्रतिमा को लोग धरती फोड़ महादेव के नाम से भी जानते हैं।  खरोरा से 5 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित इस गांव की आबादी करीब 5000 है यहां का प्राचीन शिव मंदिर कितना पुराना है इस बारे में तीन पीढ़ी के सियान भी कुछ नहीं बता पाते हैं ।   इस प्राचीन शिवलिंग को स्थानीय लोग ‘धरतीफोड़ महादेव’ के नाम से जानते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है:गर्मी में: प्रतिमा बीच से दो भागों में बंट जाती है, जिससे इसमें अर्धनारीश्वर (आधा शिव, आधा शक्ति) का रूप स्पष्ट दिखाई देता है। इस दौरान यह खुरदुरा भी हो जाता है।सावन (बरसात) में: यह वापस अपनी पूर्ण आकृति में आ जाता है, जिसे लोग ‘जड़-महादेव’ कहते हैं। ठंड में: शिवलिंग का रंग गहरा काला हो जाता है और इसकी सतह चिकनी व तैलीय दिखाई देने लगती है। प्राचीनता: यह मंदिर कितना पुराना है, इसके बारे में गांव के 80 साल के बुजुर्ग भी नहीं बता पाए। यह क्षेत्र कभी बेल्दार राजा की राजधानी हुआ करता था। पवित्र कुंड: मंदिर के चारों ओर लगभग 1000 वर्ग फीट में फैला एक कुंड है। कहा जाता है कि सावन के महीने में इस कुंड की गंदगी और दुर्गंध अपने आप गायब हो जाती है। नशामुक्त गांव: बेल्दारसिवनी अपनी पूर्ण शराबबंदी के लिए भी प्रसिद्ध है। सालों पहले गांव वालों ने कड़ा फैसला लेकर शराब बेचने और पीने वालों पर पाबंदी लगा दी थी जिसकी परंपरा आज भी जारी है।इस कुंड को अब शिव कुंड का नाम दिया गया है और इस कुंड के बीच में लक्ष्मी नारायण भगवान की प्रतिमा स्थापित है चारों ओर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन देखने को मिलते हैं। बेलदार सिवनी के इस धरतीफोड़ महादेव जिसे अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है इस प्रतिमा के बारे में ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गर्मी के दिनों में ढाई फीट ऊंची और 8 इंच विकास की प्रतिमा बीचो-बीच दो भागों में विभक्त हो जाती है तब इस प्रतिभा में अर्धनारीश्वर महादेव की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। सावन के महीने में यह प्रतिमा अपनी पूर्ण आकृति को प्राप्त करती है तब इसे जड़ महादेव के नाम से लोग जानते हैं। ठंड के दिनों में प्रतिमा चिकनी और तेली काले रंग की हो जाती है गर्मी में प्रतिमा खुरदुरा होकर अपना चोला छोड़ती है। इसके बावजूद इस मंदिर की सुरक्षा पर शासन या पुरातत्व विभाग का ध्यान अब तक नहीं गया है ग्रामीण खुद समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार करते हैं। इसी तारतम्य में गांव के पूर्व सरपंच व वर्तमान जनपद सदस्य मुकेश वर्मा ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए संकल्प लिया एवं  बाबा अर्द्धनारीश्वर मंदिर जीर्णोद्धार निर्माण समिति बेलदार सिवनी के अध्यक्ष थनवार वर्मा सहित सदस्यों में उद्योराम वर्मा, मुकेश वर्मा, पन्नालाल वर्मा, कैलाश वर्मा, नारद वर्मा ,बलराम वर्मा,अरुण वर्मा, ईश्वरी वर्मा, दिनेश वर्मा, भूपेंद्र वर्मा, मनहरन वर्मा, छेदु वर्मा, सुनील वर्मा, रामकुमार रातड़े, उमेंद क्षत्रिय, अजय वर्मा, यशवंत क्षत्रिय, मनीराम वर्मा, लोकेश शर्मा, गजानंद वर्मा शामिल हैं।विगत 2 से 3 वर्ष में स्थानीय व क्षेत्रीय दानदाताओं के सहयोग से मंदिर का भव्य स्वरूप का निर्माण कराया |  मंदिर के जीर्णोद्धार से एक मनोहारी मंदिर का निर्माण हो गया है परिसर से लगे कुंड में ही 12 ज्योर्तिलिंग व शिव मंदिर में अन्य देवी देवताओं के प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया जिसमें 5 फरवरी को कलश यात्रा निकाली गई, जिसके बाद 6 फरवरी को द्वितीय दिवस के रूप में वेदी पूजन और आधिवास यज्ञ संपन्न हुआ। 7 फरवरी को प्रातः 10 बजे से भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा, हवन-पूजन, पूर्णाहुति एवं विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया गया । दर्शनार्थियों ने मंदिर परिसर पर बने कुंड में म्यूजिकल फाउंटेन की मांग शासन से की है जिससे मंदिर की भव्यता और बढ़ जाए|मान्यता के अनुसार लोगों मांग भगवान भोलेनाथ जरूर सुनते है और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, एकता एवं सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम भी है। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए , जिसमें स्थानीय और दूर-दराज के  श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जायेगा जिसमें 14 व 15 फरवरी रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा | आयोजक समिति के संरक्षक एवं जनपद सदस्य शिवशंकर वर्मा ने बतलाया कि तीन दिन तक चले इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक श्रीमती अनीता योगेंद्र शर्मा, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, तिल्दा जनपद अध्यक्ष टिकेश्वर मनहरे, तिल्दा जनपद उपाध्यक्ष दुलारी सुरेंद्र वर्मा, संतोष शाह, रविंदर बबलू भाटिया, खूबी डहरिया, प्रवीण अग्रवाल, शेखर अग्रवाल, अनिल कुर्मी, प्रवीन लाटा सहित हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ प्राप्त  कर क्षेत्र में खुशहाली व सम्पन्नता के लिए भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया।  

जिंदा हैं फिर भी कागज़ों में मृत, SDM कार्यालय बुलाकर मांगा गया जीवित होने का सबूत

राजनांदगांव जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण  सर्वे के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड नंबर 10 की रहने वाली 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला नूरजहां को कागजों में ‘मृतक’ घोषित कर दिया गया है। अब इस बीमार बुजुर्ग महिला को खुद के जीवित होने का सुबूत देने के लिए सरकारी दफ्तर की पेशी पर जाना होगा। 96 वर्षीय नूरजहां (पति स्व. रफीक अहमद) का कहना है कि देश की आजादी के समय वह करीब 17 वर्ष की थीं। उन्होंने आजादी के बाद से अब तक हुए लगभग सभी चुनावों में मतदान किया है। नौ फरवरी को एसडीएम कार्यालय में होना होगा उपस्थित उनकी सामाजिक जड़ें और परिवार की कई पीढ़ियां इसी शहर से जुड़ी हैं। इसके बावजूद, किसी अज्ञात द्वेष या लापरवाही के चलते उन्हें मृत बताकर मतदाता सूची से नाम काटने की आपत्ति दर्ज कराई गई है। खराब स्वास्थ्य के बावजूद नूरजहां को नौ फरवरी को एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होकर यह साबित करना होगा कि वह जीवित हैं।   बिना ठोस सुबूत के नाम काटने का अभियान जिले में मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि फॉर्म-सात के जरिए एक वर्ग विशेष और समाज के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। आश्चर्यजनक यह है कि जमुना चौक और टिकरी पारा के कुछ सामान्य नागरिकों द्वारा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके पूर्वज वर्षों से यहीं के निवासी रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि 2003 की मतदाता सूची जैसे पुख्ता दस्तावेज देने के बाद भी उन्हें बार-बार पेशी पर बुलाकर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। कल होगी मामले की पहली सुनवाई प्रशासन ने इस पूरे विवादित मामले में सोमवार (नौ फरवरी) को एसडीएम कार्यालय में पहली सुनवाई निर्धारित की है। नोटिस के अनुसार, शिकायतकर्ता और पीड़ित पक्ष दोनों को अपने दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहना होगा। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शहीद नगरी के नाम से मशहूर इस क्षेत्र में मतदाता सूची के नाम पर भेदभाव का वातावरण तैयार किया जा रहा है। पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल शिकायतकर्ता किसी बड़े पद पर नहीं हैं, फिर भी उनकी थोक में दी गई शिकायतों पर जिस तरह से कार्रवाई हो रही है, उसने पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का दावा है कि यह केवल एक वार्ड का मामला नहीं है, बल्कि पूरे जिले में मतदाता सूची को प्रभावित करने के लिए इसी तरह का खेल चल रहा है। एक ही व्यक्ति द्वारा सैकड़ों लोगों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराना और प्रशासन द्वारा बिना स्थलीय सत्यापन के जीवित लोगों को नोटिस जारी करना गहरी लापरवाही को दर्शाता है।

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