LATEST NEWS

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

मां बगलामुखी मंदिर विवाद: एसडीएम की तानाशाही से भड़के पंडित, हवन बंद कर प्रशासन को झुकाया

Maa Baglamukhi Temple Dispute: Pandits enraged by SDM’s dictatorship, stopped havan and forced the administration to bow down संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर के पंडितों का आरोप है कि सुसनेर के एसडीएम ने लगातार मंदिर के धार्मिक कार्यों में अनावश्यक दखल दिया, बिना किसी समन्वय के आदेश थोपे और पूजा-पद्धति को बाधित किया। पंडितों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण रहा और उन्होंने बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर पंडितों और मंदिर प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे, जिससे भय और असंतोष का माहौल बना। इस रवैये से आक्रोशित होकर पंडितों ने हवन-अनुष्ठान बंद कर दिया और खुली चेतावनी दी कि यदि एसडीएम को तत्काल नहीं हटाया गया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ा जाएगा। स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद एडीएम ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से मंदिर से जुड़े सभी कार्यों से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई को पंडितों ने प्रशासन की मजबूरी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि यदि समय रहते एसडीएम को नहीं रोका जाता तो मंदिर की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचता।

श्रद्धांजलि सभा में गौ-सेवा की दिखी अनूठी मिसाल ।

A unique example of cow service was seen in the condolence meeting. हरिप्रसाद गोहे आमला। देवगांव (काजली): ग्राम पंचायत देवगांव में स्व. तुलसी बाई खातरकर की श्रद्धांजलि सभा एक प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुई। इस दुखद अवसर पर भी परिवार ने समाज सेवा और जीव दया का उदाहरण प्रस्तुत किया। गौशाला परिवार के विशेष आग्रह पर क्षेत्र के प्रमुख गौ-सेवक—मनोज विश्वकर्मा, देवेंद्र राजपूत, बाला जैन, और यशवंत चढ़ोकर, कार्यक्रम में उपस्थित हुए। सभी ने स्व. तुलसी बाई खातरकर के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर स्व. खातरकर की स्मृति में अनिल खातरकर, विजय खातरकर और सुरेश खातरकर ने गौशाला समिति को ₹1100 की राशि भेंट की। उन्होंने यह दान मूक पशुओं की सेवा के लिए समर्पित किया और कामना की कि परिवार पर गौ माता का आशीर्वाद सदैव बना रहे। इस पुनीत कार्य की उपस्थित जनों ने सराहना की।

Indore Water Contamination: CAG ने 6 साल पहले चेताया था, सरकार सोती रही और 15 मौतें हो गईं; बोले नेता प्रतिपक्ष सिंघार

Indore Water Contamination: इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल और इंदौर की जल आपूर्ति को लेकर कैग (CAG) ने 2019 में ही गंदे पानी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। पढ़ें पूरी खबर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 2019 में ही गंभीर चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने न रिपोर्ट को गंभीरता से लिया और न ही सुधार किए। उमंग सिंघार ने ट्वीट कर कहा कि गंदे पानी की वजह से जानें जाना किसी हादसे का नतीजा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है। ADB से कर्ज, फिर भी साफ पानी नसीब नहींनेता प्रतिपक्ष ने याद दिलाया कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के जल प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (तब करीब 906 करोड़ रुपये) का कर्ज लिया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य हर नागरिक को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन कर्ज लेने के करीब 15 साल बाद 2019 में आई CAG रिपोर्ट ने इस पूरे प्रोजेक्ट को असफल और भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताया। कैग (CAG) रिपोर्ट, सिस्टम फेल होने की कहानीनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में केवल 4 जोन और भोपाल में सिर्फ 5 जोन में रोज पानी की सप्लाई हो रही थी।दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से महज 5.30 लाख को ही नल कनेक्शन मिल सके। इपलाइन लीकेज की शिकायतों पर नगर निगम 22 से 182 दिन तक लगाता रहा। 2013 से 2018 के बीच लिए गए 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए, लेकिन इन पर की गई कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लाखों लोगों तक पहुंचा गंदा पानीनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG की स्वतंत्र जांच में 54 में से 10 पानी के नमूने दूषित पाए गए, जिनमें गंदगी और मल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद था। इसके चलते भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख कुल 8.95 लाख लोगों को गंदा पानी सप्लाई हुआ। इसी अवधि में स्वास्थ्य विभाग ने 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले दर्ज किए। पानी गायब, जवाबदेही नदारदनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि गैर-राजस्व पानी (Non-Revenue Water) 30 से 70 प्रतिशत तक है, यानी इतना पानी कहां जा रहा है—किसी को पता नहीं। नियमित जल ऑडिट नहीं होने से बर्बादी और चोरी पर लगाम नहीं लग पाई। इसके अलावा दोनों शहरों में पानी के टैरिफ की वसूली भी नहीं हो सकी और नगर निगम पर 470 करोड़ रुपये का बकाया चढ़ गया। जरूरत से बहुत कम पानी मिल रहानेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CAG के मुताबिक, भोपाल में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन केवल 9 से 20 लीटर और इंदौर में 36 से 62 लीटर पानी की आपूर्ति हो रही थी, जो तय मानकों से काफी कम है। वहीं, ओवरहेड टैंकों की नियमित सफाई भी नहीं की जा रही थी। सरकार बिना मौत के नहीं जागतीउमंग सिंघार ने कहा कि CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न दोषियों पर कार्रवाई हुई और न व्यवस्था सुधारी गई। अब जब इंदौर में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, तब सरकार हरकत में आई है।उन्होंने सवाल उठाया जब रिपोर्ट पहले से थी, चेतावनी पहले से थी, तो सुधार क्यों नहीं किए गए? क्या सरकार हर बार त्रासदी के बाद ही जागेगी?

श्रमिक नेता राजेश आर रावत का जन्मदिन वनग्राम के बच्चों को गर्म कपड़े भेंट कर मनाया गया।

Labour leader Rajesh R Rawat’s birthday was celebrated by gifting warm clothes to the children of Vangram. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला क्षेत्र में “वैष्णव जन तो तेने कहिए,जे पीर पराई जाने रे” को चरितार्थ करने वाले समाजसेवी और नैशनल रेलवे मज़दूर यूनियन के रेलवे के श्रमिक नेता – राजेश आर रावत, वैसे तो रेल विभाग के कर्मचारी के रूप में अजनी (नागपुर) में पदस्थ हैं, लेकिन अपनी मातृभूमि आमला में आयोजित विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक गतिविधियों से भी सतत् जुड़े रहते हैं। श्रमिक नेता राजेश आर रावत के दोस्तों ने राजेश भाई के अपनी जन्मभूमि आमला के प्रति समर्पण को देखते हुए, इस बार उनके जन्मदिन को एक वनग्राम में मासूम बच्चों को ठंड से बचने के लिए गर्म वस्त्र और मिठाई बांटकर मनाया। इस अवसर पर राजेश आर रावत ने कहा कि आमला की पुण्य भूमि और यहां के लोगों ने मुझे और मेरे परिवार को भरपूर स्नेह और आशीर्वाद दिया है, इसलिए यह मेरा भी कर्तव्य है कि मैं उनके प्रति सदैव कृतज्ञ और समर्पित रहुं।

संरक्षण बनाम विकास: टाइगर कॉरिडोर के पास खनन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर सख्त शर्तों के साथ मंजूरी

Conservation vs. development: Mining and infrastructure near tiger corridors approved with strict conditions भोपाल। मध्यप्रदेश के बाघ आवास क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप में तीन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सतना जिले के आरक्षित वन क्षेत्र में एक चूना पत्थर खदान को सैद्धांतिक स्वीकृति देने की सिफारिश भी की गई है। समिति के अनुसार, पन्ना टाइगर रिज़र्व की टाइगर संरक्षण योजना के अंतर्गत स्वीकृत वन्यजीव कॉरिडोर के भीतर और आसपास की 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे पर दी जाएगी। यह कॉरिडोर पन्ना–बांधवगढ़–संजय टाइगर रिज़र्व के प्रमुख आवास क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है और बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा संजय डबरी और रातापानी टाइगर रिज़र्व में भूमिगत जल पाइपलाइन और बरना बांध से जुड़े ढांचागत कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सीमा से सटे मंडला जिले के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को सिफारिशी मंजूरी प्रदान की गई है। समिति ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं भले ही कोर या बफर ज़ोन में नहीं आतीं, लेकिन संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर के निकट होने के कारण यहां कड़े पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य होगा। कॉरिडोर के पास सख्ती जरूरीसमिति ने साफ किया कि प्रस्तावित खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के भीतर नहीं हैं, लेकिन पन्ना–बांधवगढ़ और कान्हा–अचानकमार जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित हैं। ऐसे में वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की प्राकृतिक आवाजाही पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए विशेष प्रबंधन और सतत निगरानी आवश्यक होगी। अक्टूबर माह में 266.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले AAA रिसोर्स लिमिटेड के चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, संबंधित प्राधिकरण और मध्यप्रदेश वन विभाग की संयुक्त समिति ने किया था। निरीक्षण में पाया गया कि पट्टे का दक्षिणी हिस्सा घने वनों से जुड़ा हुआ है और बाघों की आवाजाही के लिए उपयुक्त है, जबकि उत्तरी हिस्सा अपेक्षाकृत खंडित है। खनन सीमित, संरक्षण पर जोरसमिति ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शर्त रखी है कि दक्षिणी कॉरिडोर को हर हाल में सुरक्षित और मजबूत रखा जाए, खनन गतिविधियां सीमित दायरे में हों और आवास सुधार से जुड़े उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं। उद्देश्य साफ है—विकास परियोजनाओं के साथ-साथ बाघ संरक्षण और जैव-विविधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अंदर जनप्रतिनिधियों से मिल रहे थे साहब, बाहर जनता करती रहीं इंतजार, अनदेखी दिखी तो लोगों ने जमीन पर बैठकर किया प्रदर्शन।

Inside, the sir was meeting the public representatives, outside the public kept waiting, when they saw neglect, the people sat on the ground and protested. हरिप्रसाद गोहे आमला। बुधवार मध्य रेल महाप्रबंधक आमला जक्शन वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे थे। जिनसे मिलने क्षेत्र के गणमान्य जनप्रतिनिधि भी पहुंचे थे। इसके अलावा आमला नगर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न संगठनों के संगठन प्रमुखों के अलावा क्षेत्र कि जनता भी बड़ी संख्या में आमला रेल्वे स्टेशन में व्याप्त समस्याओं को जी एम के समक्ष रखने रेल्वे स्टेशन पहुंचे थे। बताया गया जी एम से मिलने के लिए बाकायदा लोगों द्वारा समय भी मांगा गया था। बावजूद जीएम से मुलाकात करने रेल्वे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का आलम दिखाई दिया। इतना ही नहीं क्या आम क्या खास लोगों के अलावा मीडिया कर्मी भी सुरक्षा में तैनात पुलीस कर्मियों के हस्ते धक्का मुक्की के शिकार होते दिखाई दिए। जिस बात से न खुश लोगों ने यात्री प्रतीक्षालय के गेट के समाने बैठकर जी एम से मिलने अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। बाद रेल अधिकारियों की समझाइश के बाद लोगों ने महाप्रबंधक से मुलाकात कर ज्ञापन प्रेषित कर रेल समस्या रखी। इस दौरान खास बात यह देखी गई स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य, आमला व्यापारी संघ अध्यक्ष, विभिन्न संगठन प्रमुखों सहित अन्य लोग साहब से मिलने खासे परेशान दिखाई दिए। उम्र दराज लोग भी हाथों में गुलदस्ता लेकर मिलने का इंतजार करते दिखाई दिए। जिस बात लोगों में खासी नाराजगी दिखाई दी।जिस बात की दिन भर शहर चर्चा रही। इन्होंने क्या कहा  मंडल स्तर के अधिकारियों को जी एम से मिलने का व्यवस्थित समय निर्धारण करना चाहिए जिसकी कमी देखी गई। पंडित राजेंद्र उपाध्याय वरिष्ठ अधिवक्ता,स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य मध्य रेल आमला।। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जी को चाहिए था कि वे व्यापारियों एवं हम लोगों को साथ ले जाकर महाप्रबंधक से मिलते उन्होंने मीडिया ओर हमसे मिलना  उचित नहीं समझा।  यशवंत चढ़ोकार स्टेशन सलाहकार समिति आमला।। हम जनता की समस्या बताने गए थे अ व्यवस्थाओं से एवं मिलने से रोके जाने से आत्म सम्मान को ठेस पहुंचती है। जिन अधिकारियों ने हमें मिलने के लिए बुलाया था वे प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर पाए। अनिल सोनी अध्यक्ष प्रगतिशील व्यापारी कल्याण संघ आमला।।

रेल्वे महाप्रबंधक ने किया आमला स्टेशन का वार्षिक निरीक्षण, सुनी आमजन कि समस्याएं।

Railway General Manager conducted annual inspection of Amla station, listened to the problems of the common people. हरिप्रसाद गोहे  आमला। मध्य रेल महाप्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता वार्षिक निरीक्षण करने आमला पहुंचे थे। जिन्होंने निरीक्षण के दौरान रेल्वे स्टेशन, रेल्वे अस्पताल एवं नव निर्मित रेल्वे कॉलोनी के साथ आमजन की समस्याएं सुन समस्या निराकरण करने बात कही। निरीक्षण के दौरान उनके साथ मंडल रेल प्रबंधक नागपुर विनायक गर्ग सहित रेल अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद रेल्वे स्टेशन स्थित यात्री प्रतीक्षालय में बैठकर महाप्रबंधक ने आमजन कि समस्याएं सुन ज्ञापन लेकर समस्या निराकरण करने बात कहीं। इस मौके पर नगर के विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों ने पहुंच कर अपनी, अपनी समस्याएं ज्ञापन के माध्यम जी एम गुप्ता के समक्ष रखी। इस दौरान रेल्वे कॉलोनी आमला आंबेडकर वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद ओमवती विश्वकर्मा ने रेल्वे कॉलोनी में व्याप्त समस्याओं पर ध्यानाकर्षण करा कालोनी की सुविधाओं में विस्तार करने ज्ञापन के माध्यम से बात कही। वहीं प्रगतिशील व्यापारी कल्याण संघ आमला के अध्यक्षा अनिल सोनी ने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ पहुंच क्षेत्रवासियों की अति महत्वपूर्ण मांग रेल्वे की रिक्त पड़ी भूमि पर रेल्वे की नई परियोजना ईकाई स्थापित करने विभिन्न बिंदुवार ज्ञापन प्रस्तुत कर समस्या निराकरण करने जी एम से मांग की। इस मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी रेल अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

वर्कर एजुकेशन, सेफ्टी सेमिनार का मंडल स्तरीय हुआ आयोजन, महामंत्री वेणुपी नायर का जोरदार स्वागत।

Worker Education and Safety Seminar was organised at the divisional level. General Secretary Venupi Nair was given a warm welcome. हरिप्रसाद गोहेआमला/ नागपुर। नागपुर में मंडल स्तरीय वर्कर एजुकेशन, सेफ्टी सेमिनार का एक दिवसीय खंड स्तरीय आयोजन आयोजित किया गया था।इस मौके पर नैशनल रेल्वे मजदूर यूनियन,कोकन रेल्वे के माननीय महामंत्री कामरेड वेणुपी नायर मौजूद रहे। माननीय महामंत्री का नागपुर मंडल परिषद् के पदाधिकारियों एवं कामरेड साथियों ने ढोल बाजे के साथ , इंकलाब जिंदाबाद के बुलंद नारे लगाकर भव्य स्वागत किया गया। मिली जानकारी अनुसार आयोजित कार्यक्रम के दौरान नैशनल रेल्वे मजदूर यूनियन की सर्व धर्म संभाव कि विचार धारा से प्रभावित होकर उपस्थित नए कमरेडो ने नैशनल रेल्वे मजदूर यूनियन में जाहिर प्रवेश लिया। वहीं मंडल सचिव कामरेड मनोजचोईथानी ने महामंत्री जी को अवगत कराते हुए बताया अभी तो यह शुरुआत है आप जब भी आओगे हर बार नए कामरेडो का जाहिर प्रवेश होंगा।

मध्य प्रदेश में ठेके पर चलेगा मंत्रालय!, जीतू पटवारी का बड़ा दावा

Ministry will be run on contract in Madhya Pradesh! Jitu Patwari makes a big claim भोपाल ! मध्य प्रदेश में धार और बैतूल में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप) मॉडल पर दो नए मेडिकल कॉलेज और खुलने जा रहे हैं. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इसकी आधारशिला रख रहे हैं. प्रदेश के जिला अस्पतालों से संबद्ध कर मेडिकल कॉलेज खोलने का कांग्रेस ने विरोध जताया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा जिलों में खोले गए सरकारी अस्पतालों को सरकार ठेके पर दे रही है. सरकार ऐसी संस्थाओं को यह जिला अस्पताल ठेके पर दे रही है, जिसके पास कोई अनुभव ही नहीं है. बिना अनुभव वाली संस्थान पर मेहरबानी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि “जिला अस्पतालों से निजी मेडिकल कॉलेज को संबद्ध किए जाने के लिए सरकार ने टेंडर में शर्त रखी थी कि कम से कम 5 साल का मेडिकल कॉलेज को अनुभव होने चाहिए, लेकिन सरकार ने एक ही संस्था को 4 जिला अस्पताल सौंप दिया. इनका कोई अनुभव ही नहीं है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ भाषण और ताली बजाने से कुछ नहीं होगा. उन्हें पूछना चाहिए कि आखिर इससे प्रदेश का क्या भला होगा. कांग्रेस करेगी निजी मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान शर्त रखी गई थी कि मेडिकल कॉलेजों में 100 बेड मुफ्त चलने चाहिए. एक भी ऐसा मेडिकल कॉलेज सरकार बता दे, जहां गरीबों से एक भी पैसा नहीं लिया जाता हो और उनका मुफ्त इलाज किया जा रहा हो. कांग्रेस अब अभियान शुरू करने जा रही है. 8 दिन चलने वाले अभियान के दौरान कांग्रेस एक-एक मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी और देखेगी कि किस निजी मेडिकल कॉलेज में 100 बेड पर निजी मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया. सरकार ने इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया. इसके उलट अब सरकारी अस्पताल ठेके पर देकर सरकार उत्सव मना रही है.” मंत्रालय भी ठेके पर दे देगी क्या सरकार ? जीतू पटवारी ने कहा कि “प्रदेश में करीबन 3 हजार पंचायतें ठेके पर चल रही हैं. संस्थाएं सरपंच को साल भर का पैसा देकर पूरी पंचायत ठेके पर लेकर चला रही हैं. पंचायत के बाद अब इसी तरह जिला अस्पताल ठेके पर जा रही है. ऐसा न हो कि कहीं सरकार मंत्रालय भी ठेके पर चलने लगे. मंत्री नागर सिंह के भाई द्वारा सेल्समेन से मारपीट को लेकर जीतू पटवारी ने कहा कि इस घटना से यह प्रमाण मिलता है कि प्रदेश में खाद की कमी है, इसीलिए मंत्री के भाई ने मारपीट की. प्रदेश में पर्याप्त खाद के सरकार के दावे को इस घटना ने सामने ला दिया है. सरकार को कार्रवाई तो करनी ही चाहिए, लेकिन मंत्री के भाई का धन्यवाद कि उन्होंने सरकार को आइना दिखा दिया है.”

अरावली हमारी धरोहर है उसे…यमुना एक्सप्रेसवे पर 6 जिलों की महापंचायत में राकेश टिकैत ने भरी हुंकार

Aravalli is our heritage, Rakesh Tikait roared at the Mahapanchayat of 6 districts on Yamuna Expressway. जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से नाराज चल रहे किसानों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर बड़ी संख्या में किसान एकजुट हुए और अधिकारियों को साफ कहा कि अब वादों से काम नहीं चलेगा, अब हमें ठोस फैसला चाहिए। भारतीय किसान यूनियन की इस महापंचायत में छह जिलों से किसान शामिल हुए। सभी किसानों ने एक सुर में मुआवजे और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं इस महापंचायत में राकेश टिकैत की मौजूदगी ने माहौल को और गर्मा दिया। इसी दौरान राकेश टिकैत ने सराकार को समाधान के लिए 14 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है और अरावली विवाद पर भी बयान देते हुए चेतावनी दी है। पांच घंटों तक चली महापंचायतसोमवार सुबह यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा और आगरा जिले के किसान बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए। किसानों की यह महापंचायत पांच घंटों तक चली, जिसमें इकट्ठे हुए सभी किसानों ने अपनी मांगें खुलकर रखीं। किसानों का कहना था कि अधिकारियों ने विकास के नाम पर उनसे जमीन तो ले ली, लेकिन उसके बदले उन्हें जो हक मिलना चाहिए था, वह अभी तक अधूरे हैं। इसी नाराजगी की वजह से किसानों ने प्रशासन और प्राधिकरणों के खिलाफ आवाज उठाई। किसानों ने क्या-क्या मांगें रखीं?महापंचायत में किसानों ने साफ कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण इलाके में जिन किसानों की जमीन ली गई है, उन किसानों को 64.7% ज्यादा मुआवजा दिया जाए और जमीन के प्राइस यानी सर्किल रेट भी बढ़ाए जाएं। साथ ही किसानों ने यह भी मांग की कि जिन लोगों ने नोएडा एयरपोर्ट और फैक्ट्रियों के लिए जमीन दी, उनके बच्चों को पढ़ाई और योग्यता के हिसाब से पक्की नौकरी भी दी जाए। इसके साथ ही 10% विकसित भूखंड देने, आबादी निस्तारण जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया। किसानों ने इन मुद्दों का प्राथमिकता के साथ हल किए जाने की मांग की। राकेश टिकैत ने दी चेतावनी और कहा अरावली हमारी धरोहर हैराकेश टिकैत ने सरकार और प्राधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों को सालों से सिर्फ आस्वासन ही दिया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर 14 जनवरी तक समाधान नहीं होगा, तो किसान लखनऊ कूच करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन देने वाले किसानों को नौकरी और बसने का पूरा हक मिलना चाहिए।इतना ही नहीं, हाल ही में अरावली को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है और मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर भी उन्होंने बयान दिया और कहा कि अरावली हमारी धरोहर है और अगर इसे किसी को भी नष्ट नहीं करने देंगे। अगर फिर भी किसी ने कोशिश की, तो हम इसे बचाएंगे और जरूरत पड़ी तो प्रदर्शन करेंगे और वहीं जाकर बैठ जाएंगे। अधिकारियों ने किसानों से की बातचीतमहापंचायत के दौरान जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरणों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और किसानों से सीधे बातचीत की। एडीएम एलए बच्चू सिंह, यमुना प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी ने वहा किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी। अधिकारियों ने कहा कि किसानों से जुड़े मामलों का समाधान एक प्रक्रिया के अनुसार चल रहा है। सर्किल रेट बढ़ाने को लेकर भी काम चल रहा है और इस पर नए साल में फैसला किया जा सकता है। राकेश टिकैत ने किया ऐलानअधिकारियों से बातचीत के दौरान रोकेश टिकैत ने साफ कहा कि नोएडा एयरपोर्ट लगभग तैयार हो चुका है और उन्हें अभी तक न तो उन्हें 64.7% मुआवजा दिया गया है और न ही नौकरी या मकान बनाने के लिए जमीन के बदले कोई हक दिया गया है। उनका मानना है कि एक बार एयरपोर्ट चालू हो गया तो किसानों की आवाजें और कम कर दी जाएंगी, इसलिए अब चुप बैठने का समय नहीं है। टिकैत ने ऐलान किया कि सराकर ने मांगे नहीं मानी तो 22 जनवरी के बाद लखनऊ की तरफ ट्रैक्टर मार्च किया जाएगा।इस मार्च में एक ट्रैक्टर और करीब 10 लोग शामिल होंगे। आगे उन्होेंने कहा कि किसान 15 दिन का राशन लेकर जाएंगे और वहीं डेरा लगाएंगे। उन्होंने कहा कि जनवरी में प्रयागराज में होने वाले शिविर में आंदोलन की आगे की प्लानिंग की जाएगी।

आदिवासी विरोधी नीतियों की पोषक और कार्पोरेट परस्त है सरकार’, जंगल कटाई के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन

‘”The government is a promoter of anti-tribal policies and pro-corporate,” Congress protests against deforestation. Congress Protest : मध्य प्रदेश में जंगलों की बढ़ती कटाई के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को धार में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि, एक ओर पीएम मोदी मां के नाम एक पेड़ अभियान चला रहे हैं, वहीं प्रदेश में हजारों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि, भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। ये सरकार कार्पोरेट परस्त है और आदिवासी विरोधी नीतियों की पोषक है। कांग्रेस द्वारा सिंगरोली में कोयला खदान के लिए उद्योगपति अडानी की कंपनी को जंगल भूमि देने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। आरोप है कि हजारों की संख्या में जंगलों में पेड़ काटे जा रहे हैं। नेता व कार्यकर्ताओं ने हाथों में आरी लेकर सांकेतिक रूप से जंगल कटाई का रूपांतरण किया। प्रदर्शन के दौरान जंगल बचाओ-आदिवासी बचाओ और सिंगरोली बचाओ-जंगल बचाओ जैसी तख्तियां कांग्रेसियों ने थामी थी। नारेबाजी के बाद अड़ानी का पुतला भी फूंका गया। इस मौके पर मीडिया से चर्चा में सिंघार ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने को लेकर कहा कि भाजपा इस योजना को बंद करना चाहती है। इसमें केन्द्र ने राज्य का अंश बढ़ा दिया है। राज्यों के पास पहले ही पैसा नहीं है। यह स्थितियां बताती हैं कि यह योजना बंद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने नाम बदलने के अलावा क्या किया है। इसके पूर्व भी कई योजनाओं के नाम बदल चुके हैं। SIR में नाम जोड़ने-घटाने पर कांग्रेस की नजर नेता प्रतिपक्ष सिंघार जिला समन्वय समिति की बैठक में शामिल होने के लिए धार पहुंचे थे। उन्होंने बैठक में कार्यकर्ताओं को संबो​धित करते हुए एसआइआर सर्वे का जिक्र किया है। सिंघार ने कहा कि आगामी एक माह महत्वपूर्ण है। प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता सूची में नए नाम जोडऩे व घटाने की कार्रवाई पर कांग्रेस की नजर रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सजग होकर जुटने के लिए कहा है।

कब्रिस्तान बताई गई जीवाजी यूनिवर्सिटी की जमीन, प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मचा हंगामा

Jiwaji University land declared a graveyard, sparking commotion during administrative action ग्वालियर। सिटी सेंटर स्थित अल्कापुरी के सामने जीवाजी यूनिवर्सिटी को आवंटित 15 बिस्वा जमीन का कब्जा दिलाने पहुंची प्रशासन की टीम के साथ विवाद हो गया। यहां जेयू के अधिकारी व प्रशासन की टीम जब पहुंची तो कुछ युवक आ गए। इसमें शामिल मुस्लिम युवक ने कहा कि यह कब्रिस्तान की जमीन है, जिसके बाद प्रशासन ने दस्तावेज दिखाने को कहा तो नहीं दिखा पाए। मौके पर और युवकों को बुलवा लिया गया और विवाद बढ़ने लगा। यह देख प्रशासनिक अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी थाना पुलिस का फोर्स बुलवा लिया जिसके बाद उत्पात मचाने वालो के तेवर ढ़ीले पड़ गए। विवाद करने वालों पर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज कराने की तैयारी की गई लेकिन विरोध करने वाले फिर पीछे हट गए। इसके बाद कब्जा दिलाने की कार्रवाई पूरी की गई। सिटी सेंटर वृत्त के नायब तहसीलदार शिवदत्त कटारे ने बताया कि जीवाजी यूनिवर्सिटी की ओर से प्रबंधन को आवंटित जमीन का कब्जा दिलाने के लिए आवेदन आया था। यह जमीन पूर्व में आवंटित की गई और सीमांकन भी हो चुका है। यह जीवाजी यूनिवर्सिटी का विवेकानंद परिसर कहा जाता है। जेयू के कुल सचिव डॉ राजीव मिश्रा सहित अधिकारी कब्जा लेने के लिए मौके पर आए। इसी दौरान शाहरूख खान नाम का युवक कुछ साथियों के साथ आ गया जो जमीन को कब्रिस्तान की बताने लगा। मौके पर पुराने रिकॉर्ड भी दिखाए गए और बताया कि यह जमीन जीवाजी यूनिवर्सिटी को आवंटित है। उल्लेखनीय है कि जीवाजी विश्वविद्यालय को पीएम-उषा योजना के अंतर्गत दो शैक्षणिक विभागों और एक छात्रावास के विस्तार के लिए अनुदान प्राप्त हुआ है। इसी के तहत इंजीनियरिंग अध्ययनशाला के विस्तार का कार्य प्रस्तावित है। बीते कुछ दिनों से अतिक्रमण की आशंका के चलते निर्माण कार्य में लगातार व्यवधान उत्पन्न हो रहा था। मौके पर विवाद खत्म होने के बाद निर्माण शुरू कराया गया। मुआवजा भी मांग रहे थे युवक मौके पर आए युवक कुछ कागजात दिखाते हुए यह भी कह रहे थे कि इस जमीन का हमें मुआवजा नहीं मिला है। जब अधिकारियों ने कहा कि जमीन आपकी है इसके दस्तावेज दिखाएं फिर मुआवजा की बात होगी। इस दौरान प्रशासन ने वीडियो रिकार्डिंग भी की। जेयू को आवंटित जमीन का कब्जा दिलाने के दौरान कुछ लोग इसे कब्रिस्तान की जगह बता रहे थे लेकिन उनके पास कोई दस्तावेज नहीं थे। पुलिस के सहयोग से कार्रवाई पूरी कर कब्जा दिलाया गया। शिवदत्त कटारे, नायब तहसीलदार

‘200 लोग लाओ, दो करोड़ के प्रस्ताव पास कराओ’, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पार्षदों को सीएम से मिलाने का भी दिया ऑफर

“Bring 200 people, get a proposal worth two crore rupees passed,” Minister in charge Tulsiram Silawat also offered to introduce the councillors to the Chief Minister. ग्वालियर। जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आगामी 25 दिसंबर को ग्वालियर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर भाजपा पार्षद दल की बैठक ली। बाल भवन के नवीन टीएलसी कक्ष में आयोजित बैठक में प्रभारी मंत्री ने सभी पार्षदों को लक्ष्य दिया कि कार्यक्रम में 200-200 लोगों को लेकर पहुंचना है। वाहनों की चिंता नहीं करें। वो सारी व्यवस्था हम कराएंगे। पार्षदों के दो-दो करोड़ रुपये के काम कराए जाएंगेप्रभारी मंत्री तुलसीराम ने कहा कि इसके अलावा पार्षदों के दो-दो करोड़ रुपये के काम कराए जाएंगे, जिसके प्रस्ताव तैयार कराए जाएं। क्योंकि अब आप लोगों का कार्यकाल खत्म होने में डेढ़ साल ही रह गया है। इस पर पार्षदों ने पूछा कि ये कार्य किस वित्तीय वर्ष में कराए जाएंगे, तो प्रभारी मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि आप लोगों का कार्यकाल खत्म होने से पहले काम हो जाएंगे। सीएम मोहन यादव से मिलवाने का किया वादाप्रभारी मंत्री ने पार्षदों से यह भी कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन होने के बाद आप सभी को मैं इंदौर लेकर चलूंगा। आपको इंदौर घुमाया जाएगा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समय लेकर उनसे मुलाकात भी कराई जाएगी। बैठक की शुरुआत में प्रभारी मंत्री ने कहा कि अटलजी राष्ट्र के गौरव होने के साथ ही ग्वालियर के लाडले सपूत थे। उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को भव्य व ऐतिहासिक बनाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। परिषद की बैठक भी हुई स्थगितवहीं सोमवार को नगर निगम परिषद की बैठक को सभापति मनोज सिंह तोमर ने कोरम के अभाव में स्थगित कर दिया। दरअसल, 25 दिसंबर को वीआइपी आगमन के चलते नगर निगम के अधिकतर अधिकारी व्यस्त थे। इसके अलावा जिले में प्रभारी मंत्री द्वारा बैठकें आयोजित की जा रही थीं। ऐसे में परिषद में पार्षद पूरी संख्या में नहीं पहुंचे थे। हालांकि पिछली बैठक में जिन 15 प्रश्नों के उत्तर न आने के कारण हंगामा हुआ था, वो सारी जानकारी सदन में आ गई थी, लेकिन कोरम के अभाव के चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया। वार्ड स्तर पर भी लीं बैठकेंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार के सफल दो वर्ष पूर्ण होने एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर सोमवार को शहर के सभी वार्डों में भाजपा की बैठकें आयोजित हुईं। वार्ड 19 में आयोजित बैठक में प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट व भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया मुख्य अतिथि के रूप शामिल हुए। वहीं वार्डों की बैठकों में भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वार्ड 19 की श्रीकृष्ण वाटिका में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि अटल स्मृति वर्ष की स्मृति को बनाए रखने के लिए 25 दिसंबर को स्मृति के रूप में आप सबके अमूल्य योगदान के कारण जाना जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 25 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में हर बूथ से कार्यकर्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो।

25 करोड़ के दावों पर सवाल: सरकार की नाक के नीचे सबसे बड़ी गौशाला में गोवंशों की दुर्दशा

ग्वालियर। Madhya Pradesh Largest Gaushala: मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला का तमगा पाने वाली लाल टिपारा स्थित आदर्श गौशाला आज खुद सवालों के घेरे में है। जिस गौशाला को सरकार और नगर निगम अपनी उपलब्धि बताकर पेश करते रहे, वहीं अब गोवंश की बदहाल तस्वीर ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। गौशाला परिसर में करीब 15 गोवंशों के शवों का ढेर मिलना न केवल संवेदनहीनता को उजागर करता है, बल्कि करोड़ों रुपए के खर्च पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हैरानी की बात यह है कि इस गौशाला के संचालन पर हर साल करीब 25 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में 10 हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। इसके बावजूद गोवंशों की मौत और शवों की ऐसी दुर्दशा साफ इशारा करती है कि जमीनी हकीकत कागजी दावों से बिल्कुल अलग है। मामला उजागर होने के बाद नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने जांच के आदेश तो दे दिए, लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर लापरवाही आखिर कब से चल रही थी और जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे? क्या 25 करोड़ का बजट सिर्फ फाइलों और आंकड़ों में ही खर्च हो रहा है? निरीक्षण के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने इसे बीमारी और दुर्घटना से हुई मौत बताकर स्थिति को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन स्वस्थ गोवंश की मौत न होने का दावा आमजन को रास नहीं आ रहा। अगर इंतजाम इतने ही “मजबूत” थे, तो गौशाला में शवों का ढेर आखिर कैसे लगा? यह घटना सरकार और नगर निगम के गौ-कल्याण के दावों पर सीधा तमाचा है। सवाल उठता है कि जब प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला का यह हाल है, तो बाकी गौशालाओं की स्थिति क्या होगी? अब जनता यह जानना चाहती है कि क्या सिर्फ जांच के आदेश देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी और गोवंश के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपयों का हिसाब भी तय किया जाएगा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live