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स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी और जन-सुलभ बनाने समय-सीमा में पूर्ण करें कार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में की विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए : उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वृहद समीक्षा की। बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी और उप सचिव श्रीमती शुचिस्मिता सक्सेना मौजूद रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 454 स्वास्थ्य संस्थाओं में स्वीकृत पदों को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड से भर्ती किये जाने की प्रक्रिया की समीक्षा की और औपचारिकताओं को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने रीवा मेडिकल कॉलेज में कैथलैब के कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, जिससे क्षेत्रीय मरीजों को उन्नत उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही रीवा और सतना मेडिकल कॉलेज, एमवाई हॉस्पिटल इंदौर में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कैबिनेट के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन और नवीन जिलों के जिला अस्पतालों में पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव पर चर्चा की गयी। उन्होंने प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नियमों और निर्देशों में अपेक्षित सुधार किए जाने की कार्रवाई के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में आउटसोर्स पदों पर नियुक्ति के लिए मानकों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिये। बैठक में वर्षों से निलंबित डॉक्टर्स के प्रकरण में विचार के लिए गठित विशेष समिति की बैठक आयोजित कर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कहा। बॉन्ड अवधि पूरी कर चुके डॉक्टर्स को एनओसी जारी करने और उनके दस्तावेज लौटाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के विषय पर विमर्श किया और प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिये।  

रावत ने उपचुनाव में हार के बाद दिया इस्तीफा, पूर्व वन मंत्री नागर सिंह चौहान बोले- मुख्यमंत्री कहेंगे तो मैं वन मंत्री का पद संभालने को तैयार

 भोपाल विजयपुर विधानसभा उप चुनाव हारे प्रदेश के वन मंत्री रामनिवास रावत के त्यागपत्र के बाद इस कुर्सी पर कुछ मंत्रियों और विधायकों की नजर है। वह अपने-अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास भी कर रहे हैं। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव से भेंट की है। भूपेंद्र यादव विधानसभा चुनाव में प्रदेश के प्रभारी भी रहे हैं। पिछली सरकार में शाह के पास वन विभाग था। उधर, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने भी दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भेंट की है। रावत के पहले वन विभाग भी नागर सिंह चौहान के पास ही था। रावत जुलाई में बने थे मंत्री, हार के बाद दिया इस्तीफा     आठ जुलाई को मंत्री बनाए गए रामनिवास रावत यह विभाग दे दिया गया था। इस पर नागर सिंह ने नाराजगी भी जताई थी। इन भेंट-वार्ताओं को भी वन मंत्री पद की दौड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।     उधर, बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में संगठन पर्व की कार्यशाला में शामिल होने आए नागर सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, किसे कौन सा विभाग देना है यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। अगर वह वन विभाग देते हैं तो हम संभालने के लिए तैयार हूं।     बता दें, विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने 2023 मध्य प्रदेश में विधानसभा में कांग्रेस में रहते हुए जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। ‘अपनों ने हराया’ के प्रश्न पर रावत बोले- क्षेत्र में जाकर देख लो चुनाव हारने के बाद राम निवास रावत पहली बार भोपाल आए। यहां उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और अन्य पार्टी पदाधिकारियों से भेंटकर हार के कारणों पर चर्चा की। मीडिया ने उनसे पूछा- ‘आपने कहा था, अपनों ने हराया’, इस पर रावत ने कहा- क्षेत्र में जाकर देख लो। हालांकि, आगे उन्होंने कहा समय और भाग्य से कोई नहीं लड़ सकता। आगे पार्टी की द्वारा नई जिम्मेदारी दिए जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा- प्रदेश अध्यक्ष से किसी जिम्मेदारी के संबंध में नहीं बल्कि सौजन्य भेंट हुई है। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा। विदेश से लौटने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी भेंट करूंगा।

ईव्हीएम एफएलसी कार्य का प्रेक्षक ने किया अवलोकन

अनूपपुर पंचायत एवं नगरीय उप निर्वाचन 2024 हेतु उपयोग में लाए जाने वाले ईव्हीएम मशीनों की ईव्हीएम वेयर हाऊस में संचालित एफएलसी (फर्स्ट लेवल चेकिंग) का निरीक्षण मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक श्री शैलेन्द्र कियावत द्वारा किया गया। इस अवसर पर राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। एफएलसी का कार्य राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर श्री अजय जैन एवं डॉ. कौशलेन्द्र सिंह की उपस्थिति में किया जा रहा है।

एमपी में केस डायरी ऑनलाइन जाएगी कोर्ट, 5 जिलों में शुरू हुई व्यवस्था, बेल मैनेजमेंट सिस्टम बनाने वाला पहला राज्य बना

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब पुलिस केस डायरी कोर्ट में ऑनलाइन पहुँचेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच जिलों में इसे शुरू किया गया है। सफल रहा तो सभी जिलों में लागू होगा। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि मध्य प्रदेश बेल एप्लीकेशन मैनेजमेंट सिस्टम बनाने वाला देश का पहला राज्य है। यह सिस्टम जमानत के आवेदनों को ऑनलाइन मैनेज करेगा। इससे समय और पैसा दोनों बचेगा। पुलिस मुख्यालय ने हाई कोर्ट के सुझाव पर इस सिस्टम का सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इससे केस डायरी कोर्ट पहुंचने में होने वाली देरी कम होगी। पहले ई-समन लागू करने वाला भी मध्य प्रदेश पहला राज्य बना था। अब यह नया सिस्टम भी न्यायिक प्रक्रिया को और तेज़ और आसान बनाएगा। इन जिलों में शुरू हुआ काम बेल एप्लीकेशन मैनेजमेंट सिस्टम अभी इंदौर, राजगढ़, देवास, सागर और भोपाल में शुरू हुआ है। पहले जमानत के लिए हाई कोर्ट, एसपी को पत्र लिखकर केस डायरी मांगता था। फिर एसपी थाने को सूचित करते थे। इसके बाद विवेचना अधिकारी डायरी तैयार करता था। इस पूरी प्रक्रिया में बहुत समय लगता था। नए सिस्टम से यह सब ऑनलाइन हो जाएगा। इससे आईओ का समय बचेगा, पुलिस का समय बचेगा और कोर्ट का समय भी बचेगा। इस तरह से काम करेगी प्रक्रिया मान लीजिए भोपाल में किसी पर केस दर्ज हुआ है। अब आरोपी जमानत के लिए हाई कोर्ट में आवेदन देता है। हाई कोर्ट अब सीधे ऑनलाइन सिस्टम के जरिए केस डायरी मंगा सकता है। आईओ डायरी ऑनलाइन अपलोड करेगा। इससे कागजी कार्रवाई और उसमें लगने वाला समय बचेगा। पुलिसकर्मियों का कीमती समय बचेगा इससे पुलिसकर्मियों को बार-बार कोर्ट आना-जाना नहीं पड़ेगा। उनका कीमती समय बचेगा, जिसका इस्तेमाल वे दूसरे जरूरी कामों में कर सकेंगे। इस तकनीकी बदलाव से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। सभी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। आने वाले समय में अगर यह सिस्टम सफल रहता है, तो इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जाएगा। इससे राज्य में न्याय व्यवस्था और मजबूत होगी।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर 11 जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों के तबादले कर दिए

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने देर रात आदेश जारी कर 11 जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों के तबादले कर दिए हैं। इसके साथ ही साथ जजों के फैमिली कोर्ट के खाली पदों में भी ट्रांसफर हुए हैं। यह तबादला भारत के संविधान के अनुच्छेद 235 और मध्य प्रदेश सिविल कोर्ट अधिनियम, 1958 की धारा 8 की उपधारा (1) के तहत दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए किया गया है। इस आदेश के तहत कुल 18 जजों का तबादला किया गया है। इन जजों को मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रिक्त पदों पर पदस्थापित किया गया है, जिसमें 11 डिस्ट्रिक्ट जज और 7 फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज शामिल हैं। जिला सेशन कोर्ट में इन जजों का हुआ तबादला     अयाज मोहम्मद, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पन्ना को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर तबादला किया गया।     नवीर अहमद खान, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल, भोपाल को VIII जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, हरदा नियुक्त किया गया।     सुरेखा मिश्रा, XIII जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर से III जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, विदिशा बनाई गईं।     रघुवेंद्र सिंह चौहान, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अमरपतन (सतना) को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सोनकच्छ (देवास) भेजा गया।     शिप्रा पटेल, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अस्था (सीहोर) को XXI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर के रिक्त पद का दायित्व सौंपा गया।     शिवलाल केवट, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सांवर (इंदौर) को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जैसिंहनगर (शहडोल) बनाया गया।     उषा तिवारी, अतिरिक्त न्यायाधीश, प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जावरा (रतलाम) के न्यायालय से जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, नसरुल्लागंज (सीहोर) भेजा गया।     उमेश कुमार पटेल, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अस्था (सीहोर) अब XXX जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर कोर्ट संभालेंगे।     कपिल सोनी, IV जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, खरगोन (मंडलेश्वर) से XV जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर बने हैं।     श्वेता तिवारी, XXI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जबलपुर को V जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश,के प्रभार के साथ रतलाम भेजा गया।     विजय कुमार पांडेय (जूनियर), III जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, शहडोल अब II जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सिरोंज (विदिशा) बनाए गए हैं। फैमिली कोर्ट में रिक्त पदों पर 7 प्रिंसिपल जजों की पदस्थापना की गई है     रामा जयंत मित्तल, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (पी.ए.) अधिनियम, सीधी अब माया विश्वालाल की जगह अतिरिक्त प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, इंदौर होंगी।     मनोज कुमार लढिया, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, निवास, जिला मंडला अब फैमिली कोर्ट, अनूपपुर के प्रिंसिपल जज होंगे।     अरविंद कुमार (जैन) जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, छतरपुर को फैमिली कोर्ट, रायसेन का प्रिंसिपल जज बनाया गया है।     अरुण प्रताप सिंह, XVI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जबलपुर अब फैमिली कोर्ट, उमरिया के प्रिंसिपल जज होंगे।     रामा जयंत मित्तल, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, इंदौर को प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, इंदौर बनाया गया है।     अवधेश कुमार (गुप्ता), प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, डिंडोरी अब प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, शाजापुर होगा।     मुन्नालाल राठौर को जिला सेशन जज निवारी टीकमगढ़ से डिंडोरी फैमिली कोर्ट का प्रिंसिपल जज बनाया गया है।

अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर सख्त कार्रवाई हेतु पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित

अनूपपुर जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए पुलिस और खनिज विभाग की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक का आयोजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक अनूपपुर, श्री मोती उर रहमान ने की। बैठक में संचालक खनि प्रशासन श्रीमती आशालता वैद्य, खनिज निरीक्षक श्रीमती ईशा वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री इसरार मंसूरी, एसडीओपी अनूपपुर श्री सुमित किरकेट्टा और जिले के सभी थाना प्रभारी उपस्थित रहे।  बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय  – 1 . संयुक्त कार्रवाई: पुलिस और खनिज विभाग आपसी समन्वय के साथ अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए लगातार संयुक्त कार्रवाई करेंगे। सभी थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया कि अवैध उत्खनन के संभावित घाटों एवं स्थान पर रात्रि में पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी भेजी जाएगी  जो ऐसे स्थान पर सतत निगरानी रख कार्रवाई करेंगे। 2. आदतन आरोपियों पर निगरानी: अवैध रेत चोरी और परिवहन में संलिप्त आदतन आरोपियों की जानकारी साझा कर उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी। 3. छत्तीसगढ़ से जारी ISTP के दुरुपयोग  की जांच: ई-खनिज पोर्टल से जारी ISTP (इंटर स्टेट ट्रांजिट पास) के दुरुपयोग की जांच होगी। खासतौर पर छत्तीसगढ़  की ISTP का मध्यप्रदेश में अवैध परिवहन के लिए दुरुपयोग पाए जाने पर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। 4. अवैध खदानों पर विशेष निगरानी: जिले में बिना स्वीकृति वाली खदानों की निगरानी के लिए विशेष दल गठित किया जाएगा ताकि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक लग सके। 5. जिला बदर कार्रवाई: अवैध रेत उत्खनन और परिवहन करने वाले आरोपियों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। 6. समन्वित जानकारी: पुलिस द्वारा अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के प्रकरण दर्ज करने पर समय पर खनिज विभाग को सूचित किया जाएगा ताकि खनिज विभाग भी आवश्यक कार्रवाई कर सके।    सख्त निर्देश जारी: पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि उनके थाना क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए विशेष टीम गठित की जाए और प्रतिदिन कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  बैठक में उपस्थित अधिकारी: थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन, थाना प्रभारी जैतहरी प्रकाश कोल , थाना प्रभारी कोतमा सुंदरेश मरावी, थाना प्रभारी बिजुरी विकास सिंह, थाना प्रभारी भालूमाड़ा राकेश सिंह , थाना प्रभारी रामनगर अमर वर्मा, चौकी प्रभारी वेंकटनगर उपनिरीक्षक अमरलाल यादव, और चौकी प्रभारी फुनगा सुमित कौशिक। पुलिस और खनिज विभाग की इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर पूर्णतः रोक लगाना है।

इंदौर में दो मरीजों को मिला नया जीवन, मध्यप्रदेश में पहली बार हुआ इंटर हॉस्पिटल किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट

इंदौर कई बार परिवार में डोनर नहीं मिलने के कारण सही समय पर किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाती है, जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है। लेकिन शहर में इंटर अस्पताल किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट से दो मरीजों को नया जीवन मिल पाया है। इसमें दो महिलाओं ने किडनी देकर एक-दूजे का सुहाग बचाया है। ऐसी सफलता दो अलग-अलग अस्पतालों के डॉक्टरों की पहल से मिली। नेफ्रोलाजिस्ट डॉ. संदीप सक्सेना और डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में 31 वर्षीय मरीज का ब्लड ग्रुप उनकी पत्नी से मैच नहीं हो रहा था। मरीज का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है, जबकि उनकी पत्नी का बी पॉजिटिव है। वहीं एक अन्य अस्पताल में 47 वर्षीय मरीज लंबे समय से बीमारी है, उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं। मां की उम्र अधिक होने से डोरनर नहीं बनाया डोनर के रूप में पहले उनकी मां सामने आई परंतु उनकी उम्र अधिक होने के कारण उन्हें डोनर नहीं बनाया जा सकता था। इसके बाद उनकी पत्नी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था। ऐसे में दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे के पति को किडनी दी। डॉक्टरों का दावा है कि इंटर अस्पताल किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट प्रदेश में पहली बार हुआ है। सोटो से ली अनुमति डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) से मंजूरी लेनी होती है। हमने रिपोर्ट और दस्तावेज सोटो के हेड डॉ. संजय दीक्षित के सामने प्रस्तुत किए। जांच करने के बाद हमें ट्रांसप्लांट की मंजूरी दी। शर्त थी कि दोनों अस्पतालों में एक साथ एक ही समय पर दोनों ट्रांसप्लांट शुरू करने होंगे, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी या विवाद न हो। हमने कोऑर्डिनेशन करते हुए एक ही समय पर सफलतापूर्वक यह ट्रांसप्लांट किया गया।

प्यार का पंचनामा फेम सोनाली सहगल ने दिया बेटी को जन्म, बनीं मां

मुंबई प्यार का पंचनामा में नजर आईं एक्ट्रेस सोनाली सहगल मां बन गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाली ने बेबी गर्ल को जन्म दिया है। हालांकि, अभी तक सोनाली और उनके पति आशीष सजनानी की ओर से अभी कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोनाली ने बुधवार शाम को सांताक्रूज के सूर्या अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। उनकी डिलीवरी नॉर्मल थी। मां और बेटी दोनों ही ठीक हैं। 2023 में सोनाली और आशीष की हुई थी शादी सोनाली सहगल ने जून 2023 में आशीष सजनानी से शादी की थी। इस साल अगस्त में एक्ट्रेस ने अपनी प्रेग्नेंसी अनाउंस की थी। इन फिल्मों में सोनाली आ चुकी हैं नजर सोनाली ने 2006 में मिस इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टॉप 12 में शामिल हुई थीं। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2011 में प्यार का पंचनामा से हुई थी। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन भी नजर आए थे। इस फिल्म का निर्देशन लव रंजन ने किया था। इसके बाद सोनाली को प्यार का पंचनामा 2 और वेडिंग पुलाव जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं। गूगल पर लगातार ट्रेंड कर रही हैं सोनाली सहगल प्यार का पंचनामा में नजर आईं एक्ट्रेस सोनाली सहगल को गूगल पर खूब सर्च किया जा रहा है। पिछले 30 दिनों के गूगल ट्रेंड्स को देखें तो साफ है कि सोनाली को सर्च करने का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।

बैतूल में इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के कर्मचारी ने सैलरी ना बढ़ने से नाराज होकर 18 लाख रुपये के सामान को नुकसान पहुंचाया

बैतूल  बैतूल से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक शॉपिंग मॉल के कर्मचारी ने सैलरी ना बढ़ाने पर इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में रखे सामान को भारी नुकसान पहुंचाया. उसने करीब 18 लाख रुपये के इलेक्ट्रॉनिक सामान को क्षतिग्रस्त कर दिया. मॉल के इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन में लगे CCTV फुटेज में पूरी घटना कैद हुई है. यह घटना 2 नवंबर की बताई जा रही है. CCTV फुटेज में दिख रहा है कि मॉल का कर्मचारी कमल पवार स्टील के कड़े से डिस्प्ले पर लगे 11 एलईडी टीवी की स्क्रीन को खरोंच रहा है. इसके बाद वह रेफ्रिजरेटर सेक्शन में जाकर 71 फ्रिज को डेंट मारकर डैमेज कर देता है. घटना का पता तब चला जब अन्य कर्मचारियों ने इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन को चेक किया. वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी अपने कड़े से टीवी स्क्रीन और फ्रीज को डैमज कर रहा है. सैलरी ना बढ़ने पर गुस्साए कर्मचारी ने सामान को नुकसान पहुंचाया बताया जा रहा है कि दीपावली से पहले कमल पवार ने मॉल के मालिक से सैलरी बढ़ाने की मांग की थी. जब इसे नजरअंदाज कर दिया गया, तो उसने गुस्से में आकर तीन दिन की छुट्टी ली. काम पर लौटने के बाद उसने सामान को नुकसान पहुंचाया. शोरूम के मैनेजर संजय गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उनका कहना है कि हमने कभी सोचा नहीं था कि हमारा खुद का कर्मचारी इतना बड़ा नुकसान कर देगा. अब इन सामानों को कैसे बेचें, यह हमारे लिए बड़ी समस्या है. पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, मिली जमानत पुलिस ने आरोपी कमल पवार के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया. हालांकि, आरोपी ने खुद को मानसिक रोगी बताते हुए जमानत ले ली. टीआई रविकांत डेहरिया ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की हरकतों के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है.

रेड रिबन और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने शुरू किया एड्स जागरूकता अभियान

सिवनी मालवा शासकीय कन्या महाविद्यालय सिवनी मालवा में रेड रिबन क्लब एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वाधान में एड्स जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 28/11/2024 को एचआईवी एड्स पर मानव श्रृंखला बनाकर एचआईवी एड्स की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया।आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.उमेश कुमार धुर्वे के मार्गदर्शन में किया गया। सर्वप्रथम महाविद्यालय में छात्राओं को एड्स जागरूकता की शपथ दिलाई गई तथा छात्राओं ने स्लोगन के माध्यम से एड्स के बचाव से संबंधित संदेश दिए।राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रेड रिबन प्रभारी श्रीमती काजल रतन ने छात्राओं को एड्स जागरूकता सप्ताह में होने वाली विभिन्न गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी प्रदान की।वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.बाऊ पटेल ने एड्स सम्बन्धी भ्रांतियों पर प्रकाश डाला व एड्स पीड़ितों के प्रति मानवीय संवेदना रखने का आव्हान किया साथ ही बचाव सम्बन्धी सुझावों से सभी को जागरूक किया।आयोजन में महाविद्यालय के डॉ.धर्मेंद्र सिंह,श्री रजनीश जाटव,डॉ.सतीश बालापुरे,डॉ.दुर्गा मीना समस्त स्टाफ एवं छात्राएं उपस्थित रही।

मध्य प्रदेश में अब सिर्फ तीन नक्सली बचे, इन्हें पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब सिर्फ 3 नक्सली बचे हैं. ये तीनों नक्सली बालाघाट और मंडला जिले में एक्टिव हैं और इनके खात्मे के लिए राज्य में 7500 से ज्यादा सुरक्षा बल तैनात है. पुलिस के मुताबिक ये तीनों बालाघाट और मंडला में एक्टिव हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इन तीनों को पकड़ने और खत्म करने के लिए 7 हजार 500 से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया है। हालांकि, ये अभी भी सुरक्षा बलों की पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं। इन नक्सलियों को खत्म करने के लिए दो जिलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 3 बटालियन समेत 7 हजार 500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात हैं। बता दें कि इस मिशन में एक आईजी, एक डीआईजी और 6 एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की दो और बटालियन मांगी हैं ताकि इन तीनों नक्सलियों को पकड़ा जा सके। 24 साल से गिरफ्तार नहीं     अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस पिछले 24 सालों में इन 3 नक्सलियों में से एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आखिरी बार साल 2000 में एक नक्सली पकड़ा गया था, उसे भी 2004 में रिहा कर दिया गया था। अफसरों का कहना है कि इन नक्सलियों का ग्रामीण इलाकों में मजबूत नेटवर्क है। ये छापेमारी से पहले ही फरार हो जाते हैं। पुलिस का ये भी कहना है कि यहां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 60 नक्सलियों का मूवमेंट है, इसलिए भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। केवल बालाघाट में 6 हजार जवान तैनात बता दें कि अकेले बालाघाट में 6 हजार पुलिस जवान तैनात हैं। जबकि मंडला में 1 हजार 500 पुलिस बल हैं। इन जवानों को तैनात करने की वजह यह बताई जा रही है कि बालाघाट में दूसरे राज्यों यानी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से करीब 60 नक्सलियों का मूवमेंट रहता है। इनके साथ मुठभेड़ होती रहती है, जिसके चलते यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसकी कितनी टीमें तैनात     सीआरपीएफ – 3 बटालियन     एसएएफ – 1 बटालियन     हॉक फोर्स – 1 बटालियन     कोबरा – 1 कंपनी     स्टेट आईबी टीम 1     जिला पुलिस बल 2500 ये हैं तीन नक्सली जिन तीन नक्सलियों की तलाश पूरी पुलिस फोर्स कर रही है उनमें पहला नाम दीपक उर्फ ​​सुधाकर का है, जिसकी उम्र 50 साल है। उस पर 29 लाख का इनाम घोषित है। बताया जा रहा है कि वो बालाघाट के ग्राम पालागोंदी चौकी सोनावाली थाना रूपझर का रहने वाला है। दीपक पर बालाघाट में 125 मामले दर्ज हैं। दूसरी नक्सली जिसकी पुलिस तलाश कर रही है उसका नाम संगीता उर्फ ​​सेवंती पंद्रे है, जिसकी उम्र 38 साल है। इस पर 14 लाख का इनाम है। तीसरे का नाम राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता है, जिसकी उम्र 60 साल है। पुलिस ने उस पर भी 14 लाख का इनाम रखा है। वो 1991 से सक्रिय है। उस पर करीब 60 मामले दर्ज हैं। राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता को 2000 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन 2004 में उसे छोड़ दिया गया था। तीन नक्सली को पकड़ने में 70 करोड़ रुपए खर्च मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तीनों नक्सलियों को पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। यह खर्च नक्सल इलाकों में कैंप, हथियार, वाहन, पेट्रोलिंग, ट्रेनिंग, डीजल-पेट्रोल, बिजली-पानी आदि पर होता है। मुखबिरों का खर्च भी इसमें शामिल है। सीआरपीएफ की 3 बटालियन और दूसरे बलों के वेतन और भर्तियों पर होने वाला खर्च अलग है।

साउथ सिनेमा के फेमस एक्टर डायरेक्टर धनुष और उनकी पत्नी ऐश्वर्या रजनीकांत ने 2022 में अलग होने का ऐलान किया

मुंबई साउथ सिनेमा के फेमस एक्टर डायरेक्टर धनुष और उनकी पत्नी ऐश्वर्या रजनीकांत ने 2022 में अलग होने का ऐलान किया था। 17 जनवरी 2022 को, धनुष और ऐश्वर्या ने एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर अपने अलग होने का ऐलान किया था। उन्होंने लिखा था- ’18 साल की दोस्ती, पति-पत्नी और माता-पिता के रूप में एक साथ बिताए गए समय के बाद, हम दोनों ने अपने रास्ते अलग करने का फैसला किया है।’ इसके बाद उन्होंने परिवार न्यायालय का रुख किया और आपसी सहमति से तलाक की अपील की। वहीं अब फाइनली दोनों की राहें अलग हो गई हैं। जी हां,धनुष और ऐश्वर्या के तलाक को अब कोर्ट की भी मंजूरी मिल गई है। 27 नवंबर 2024 को चेन्नई फैमिली कोर्ट ने इस तलाक को मंजूरी दे दी। शादी के 20  साल  बाद दोनों ने अलग होने का फैसला लिया। 21 नवंबर को फैमिली कोर्ट की जज सुभादेवी ने धनुष और ऐश्वर्या से उनके फैसले के बारे में पूछा। उन्होंने अलग होने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद न्यायाधीश ने घोषणा की कि अंतिम फैसला 27 नवंबर को सुनाया जाएगा। वहीं, कोर्ट ने अब अपना फैसला सुना दिया है। जज सुभादेवी ने धनुष और ऐश्वर्या रजनीकांत के तलाक को मंजूरी दे दी है। इस तरह धनुष और ऐश्वर्या रजनीकांत अब आधिकारिक तौर पर अलग हो गए हैं। धनुष और ऐश्वर्या रजनीकांत ने शादी के कई साल बाद 2022 में अलग होने की घोषणा की थी और जनवरी 2022 में तलाक के लिए अर्जी दी थी। हालांकि, दोनों ने कोर्ट की सुनवाई में तीन बार भाग नहीं लिया लेकिन 21 नवंबर को दोनों ने चेन्नई कोर्ट में इन-कैमरा कार्यवाही में भाग लिया। नवंबर 21 को वे जस्टिस सुभादेवी के सामने पेश हुए, जिन्होंने बंद कमरे में सुनवाई की। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों अलग होने पर अड़े रहे और फाइनली जज ने बुधवार को उनके बीच तलाक को मंजूरी दे दी। जहां ऐश्वर्या, रजनीकांत और लता रजनीकांत की बेटी हैं। वहीं धनुष निर्देशक कस्तूरी राजा और विजयलक्ष्मी के बेटे हैं। फिल्म निर्देशक कस्तूरीराजा के बेटे धनुष और सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या ने 18 नवंबर 2004 को शादी रचाई थी और दोनों परिवारों के आशीर्वाद से विवाह किया था। ऐश्वर्या और धनुष ने 2004 में चेन्नई में एक भव्य शादी की थी। उनकी शादी में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीतिक दिग्गजों की उपस्थिति देखी गई थी। इनके दो बेटे यात्रा और लिंगा हैं।

नाबालिग छात्रों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने के विरुद्ध कोतवाली अनूपपुर पुलिस की सख्त कार्रवाई

अनूपपुर जिले में नाबालिग छात्रों द्वारा तेज गति और लापरवाही से दोपहिया वाहन चलाने की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अनूपपुर, श्री मोती उर रहमान ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। गुरुवार सुबह थाना कोतवाली प्रभारी अरविंद जैन के नेतृत्व में सहायक उपनिरीक्षक गोविंद पनिका, प्रधान आरक्षक शिवशंकर प्रजापति, आरक्षक गोपाल यादव, राजेश बड़ोले और गिरीश चौहान की टीम ने भारत ज्योति स्कूल के पास वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान छह नाबालिग छात्रों को बिना वैध लाइसेंस और नियमों के उल्लंघन करते हुए दोपहिया वाहन चलाते पाया गया। इनके वाहन विवरण निम्नलिखित हैं: 1. होंडा लीवो (एमपी 65 एमबी 9289) 2. टीवीएस ज्यूपिटर (एमपी 65 एस 3014) 3. होंडा मोटरसाइकिल (एमपी 65 एमडी 8664) 4. हीरो सुपर स्प्लेंडर (एमपी 65 एमई 6615) 5. मोटरसाइकिल (एमपी 65 एमडी 0639) 6. बिना नंबर की एक्टिवा मोपेड इन वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जप्त कर चालान की कार्रवाई की गई है।  पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर की अपील: पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें। ऐसा करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी अभिभावकों से कानून का कड़ाई से पालन करने का अनुरोध किया गया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाओं को रोकने के लिए चेकिंग और कार्रवाई जारी रहेगी।  

मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर निकली 14 वर्षीय बालिका को कोतवाली पुलिस ने सुरक्षित परिजनों को सौंपा

अनूपपुर  बुधवार की रात, अनूपपुर रेलवे स्टेशन रोड पर एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका को अकेले सड़क पर भटकते देख कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया। टी. आई कोतवाली अरविन्द जैन , आरक्षक दीपक बुंदेला, कपिल सोलंकी और महिला आरक्षक जानकी बैगा ने बालिका से पूछताछ की। बालिका ने बताया कि वह राजेन्द्रग्राम थाना क्षेत्र के एक गांव की निवासी है और मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर अनूपपुर आ गई थी। वह ट्रेन पकड़कर कहीं दूर जाने की योजना बना रही थी।  पुलिस की सराहनीय कार्रवाई: बालिका को सुरक्षित महिला डेस्क लाकर भोजन की व्यवस्था की गई और उसे भावनात्मक रूप से संभाला गया। तत्पश्चात, राजेन्द्रग्राम थाना क्षेत्र में उसके परिजनों से संपर्क किया गया और उन्हें थाना बुलाया गया। पुलिस ने बालिका को समझाइश देकर उसे सुरक्षित उसके माता-पिता को सौंप दिया। परिजनों ने पुलिस विभाग की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया। कोतवाली पुलिस की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।  पुलिस का संदेश: पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों के साथ संवाद और देखभाल में धैर्य रखें, ताकि ऐसी स्थितियों से बचा जा सके। पुलिस विभाग समाज की सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है।

पिपरईगांव से चंदेरी-ललितपुर रेल लाईन की सर्वे स्वीकृत, 12 साल पहले केंद्र सरकार ने की थी ललितपुर-चंदेरी रेल लाइन की घोषणा

 अशोकनगर रेल मंत्रालय ने अशोकनगरवासियों की बड़ी  सौगात दी है. दरअसल, ललितपुर से चंदेरी होते हुए पिपरई ब्रॉड गेज रेल लाइन के अंतिम स्थल सर्वे के लिए रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है. 2 करोड़ की लागत से होने वाले इस अंतिम स्थल सर्वे कार्य के लिए बीते दिनों चंदेरी के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को पत्र लिखा था. 12 साल पहले केंद्र सरकार ने की थी ललितपुर-चंदेरी रेल लाइन की घोषणा बता दें कि अशोकनगर जिले की पर्यटक नगरी चंदेरी में पिछले 15 वर्षों से रेल लाइन की मांग उठ रही थी. इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र चंदेरी को सीधे ट्रेन रूट से जोड़ना है. वहीं करीब 12 साल पहले केंद्र सरकार ने इस रेल लाइन की घोषणा की थी, जिसके बाद रेलवे स्टेशन बनाने की भी चर्चा हुई थी, लेकिन इसके बाद रेल लाइन के निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली. इसमें उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और उक्त ब्रॉड गेज रेल लाइन के डलने से रेलवे को होने वाले आर्थिक फायदे सहित यातायात की दृष्टि से क्षेत्र को मिलने वाली सुविधा से अवगत कराया गया‌ था। साथ ही क्षेत्र के नागरिकों को रेल विभाग की मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा की भी जानकारी दी थी। सिंधिया ने पत्र के साथ अपनी ओर से अनुशंसा पत्र रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था। रेल मंत्रालय ने सिंधिया के पत्र पर तत्काल कार्रवाई करते हुए रेल अधिकारियों को पत्र लिखकर उक्त 80 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेल लाइन के लिए अंतिम स्थल सर्वे की स्वीकृति प्रदान करते हुए 2 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है। उल्लेखनीय है कि, उक्त रेलवे लाइन की लंबे समय से क्षेत्र की जनता द्वारा मांग की जाती रही, जिसे अब जाकर श्री सिंधिया के प्रयासों से पूर्ण होने की उम्मीद जगी है। उक्त लाइन का शीघ्र कार्य प्रारंभ होगा। पूर्व में भी हुए प्रयास बता दें कि, पूर्व में भी इस लाइन का सर्वे निरस्त कर दिया गया था। लेकिन, केंद्रीय मंत्री सिंधिया लगातार इसे स्वीकृत कराने के लिए प्रयास कर रहे थे। इस लाइन के निर्माण से चंदेरी के पर्यटन और कपड़ा उद्योग से साथ आस-पास के क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को लाभ प्राप्त होगा। स्वीकृति मिलने पर अशोकनगर चंदेरी के जनप्रतिनिधि और नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया का आभार माना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था पत्र सामाजिक कार्यकर्ता योगेश मिश्रा ने केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और उक्त ब्रॉड गेज रेल लाइन के निर्माण से रेलवे को होने वाले आर्थिक फायदे सहित क्षेत्र को मिलने वाली सुविधा से अवगत कराया था. साथ ही क्षेत्र के नागरिकों को रेल विभाग की मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा की भी जानकारी दी थी, जिसके बाद सिंधिया ने उक्त पत्र के साथ अपनी ओर से अनुशंसा पत्र रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था. वहीं रेल मंत्रालय ने रेल अधिकारियों को पत्र लिखकर उक्त 80 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेल लाइन के लिए अंतिम स्थल सर्वे की स्वीकृति प्रदान कर दी है. वहीं इसके लिए 2 करोड़ रुपये की राशि का भी प्रावधान किया है.  

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