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ज्ञान और विज्ञान का संगम है विज्ञान मेला : मंत्री श्री राजपूत

भोपाल सरस्वती शिशु मंदिर ज्ञान तथा संस्कारों की पाठशाला है। यहां पर बच्चों को ज्ञान तो मिलता ही है साथ ही वह संस्कार भी मिलते हैं जिन संस्कारों के कारण हमारा भारत पूरे विश्व में जाना जाता है। सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित विज्ञान मेला ज्ञान और विज्ञान का संगम है। यह बात खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय पगारा जिला सागर में विद्या भारती मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय विज्ञान मेला में कही। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें एक मंच की आवश्यकता है। यह मंच विज्ञान मेला के रूप में उन्हें उपलब्ध हुआ है। इन बच्चों में कई बड़े वैज्ञानिक बैठे हुए हैं जो आगे चलकर अपने माता-पिता, क्षेत्र तथा देश का नाम पूरे विश्व में रोशन करेंगे। सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चों में शिक्षा और संस्कार इस तरह के होते हैं कि वह जहां भी रहे उनकी अलग पहचान रहती है। स्मार्ट क्लास की सौगात मंत्री श्री राजपूत ने सरस्वती शिशु मंदिर को स्मार्ट क्लास की सौगात देते हुए कहा कि यह स्मार्ट क्लास आप सभी बच्चों के लिए है, जिसमें पढ़ाई करके आप अपने कौशल को और निखार सकते हैं। गौरतलब है कि विद्या भारती मध्य क्षेत्र द्वारा आयोजित विज्ञान मेले में महाकौशल, मध्य भारत, मालवा तथा छत्तीसगढ़ प्रांत की 326 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने वाले छात्र-छात्राओं को मंत्री श्री राजपूत तथा मंचासीन अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, विद्या भारती के पूर्व क्षेत्र के संगठन मंत्री डॉ. आनंद राव, क्षेत्रीय प्रबंधन कारणी चंद्रदेव जी अष्ठाना, क्षेत्रीय विज्ञान प्रमुख संजय मकडारिया, विभाग समन्वयक राजकुमार, प्राचार्य प्रवीण जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन सहित सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य, दीदी एवं छा़त्र छात्रायें उपस्थित रहे।  

ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आईटीआई का दौरा किया

भोपाल मध्यप्रदेश के श्रम, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आईटीआई का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के विभिन्न ट्रेड्स की कक्षाओं का निरीक्षण किया और छात्रों के साथ बातचीत भी की। श्रमोदय मॉडल आईटीआई में छात्रों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान की जा रही है। ‘श्रमोदय आईटीआई’ मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, श्रम विभाग, सेंटर फॉर रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल स्टाफ परफॉर्मेंस (क्रिस्प) और तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश के सहयोगात्मक प्रयास से स्थापित एक अग्रणी संस्थान है। मंत्री श्री पटेल की इस विजिट में क्रिस्प के प्रबंध संचालक डॉ. श्रीकांत पाटिल, क्रिस्प के संचालक, श्री अमोल वैद्य, श्रमोदय आईटीआई के प्रिंसिपल श्री एस. एस. मिश्रा के साथ अन्य स्टॉफ भी मौजूद था। इस दौरान श्रमोदय आईटीआई के विकास कार्यों, गतिविधियों पर आधारित एक लघु-फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। डॉ. श्रीकांत पाटिल ने माननीय मंत्री जी को आईटीआई के बारे में जानकारी देते हुए संस्थान में संचालित सभी ट्रेड्स की जानकारी दी। उन्होंने संस्थान को लेकर भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया व उन्होंने गोकलदास एक्स्पोर्ट्स अचारपुरा और मारुती जैसे संस्थान में छात्रों के प्लेसमेंट की जानकारी भी साझा की। श्रमोदय आईटीआई में विभिन्न ट्रेड्स जैसे टेक्निशियन (मेकाट्रॉनिक्स), इलेक्ट्रिशियन, एडवांस सीएनसी मशीनिंग, फैशन डिजाइन और टेक्नोलॉजी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), वेल्डर, इंटीरियर डिजाइन और डेकोरेशन और सिविल इंजीनियरिंग असिस्टेंट उपलब्ध हैं। इन कोर्सेज़ में छात्रों को इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, कंप्यूटराइज्ड कंट्रोल सिस्टम्स, फैशन ट्रेंड्स, स्मार्ट डिवाइसेस, वेल्डिंग तकनीकों, और इंटीरियर डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण छात्रों को आधुनिक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावसायिक कौशल और विशेषज्ञता प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनने में सक्षम बनाता है। श्री पटेल ने विजिट के दौरान आईटीआई में प्रदेश के विभिन्न जिलों (बलाघाट, छतरपुर, छिंदवाडा, बैतूल, भिंड ग्वालियर, पन्ना व अन्य) से आए अध्ययनरत छात्रों से बातचीत की, जहां उन्होंने छात्रों से उनके ट्रेड्स के अध्ययन और तकनीकी प्रशिक्षण के अनुभव के बारे में विस्तार से चर्चा की। श्री पटेल ने छात्रों से उनके विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे, जैसे कि वे किस प्रकार के उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, वे किस तकनीक पर काम कर रहे हैं, और उनके भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जाना। उन्होंने यह भी जानने का प्रयास किया कि उद्योग जगत में अपनी योग्यता को लेकर छात्र कितने आश्वस्त महसूस करते हैं। छात्रों के साथ संवाद करते समय उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वे अपने कौशल और ज्ञान को कैसे और बेहतर बना सकते हैं और उन्हें सफलता की दिशा में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने इस दौरान छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ावा देने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी। इसके बाद मंत्री श्री पटेल ने संस्थान की अत्याधुनिक और उन्नत सुविधाओं का निरीक्षण किया और उसकी सराहना की। उन्होंने संस्थान में मौजूद उच्च गुणवत्ता के उपकरणों, तकनीकी प्रयोगशालाओं, और प्रशिक्षण सुविधाओं की प्रशंसा की, जो छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और उन्नत तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की आधुनिक सुविधाएं छात्रों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं और उन्हें एक प्रतिस्पर्धी माहौल में सफल होने के लिए सशक्त बनाती हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कैंपस में छात्रों के साथ “अशोक” का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। मंत्री श्री पटेल ने संस्थान के छात्रों और शिक्षकों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उन्हें निरंतर सीखने और अपने कौशल को सुधारने की प्रेरणा दी। उन्होंने शिक्षकों की भी सराहना की, जो छात्रों को नवीनतम तकनीकों और ज्ञान से परिचित कराने के लिए मेहनत कर रहे हैं।  

प्रदेश में खाद की कमी नहीं है, जैसे-जैसे बोवनी होती जा रही है, वैसे-वैसे खाद की आपूर्ति हो रही है,भ्रमित कर रही कांग्रेसः कंषाना

भोपाल प्रदेश में खाद की कमी नहीं है। जैसे-जैसे बोवनी होती जा रही है, वैसे-वैसे खाद की आपूर्ति हो रही है। पूरे रबी सीजन के लिए 42 लाख टन खाद की आवश्यकता है। इसके विरुद्ध अब तक 19 लाख टन खाद आ चुकी है। कांग्रेस केवल किसानों को अपने राजनीति लाभ के लिए भ्रमित कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का काम केवल आरोप लगाना है। कालाबाजारी के यदि कोई प्रमाण है तो हमें उपलब्ध कराएं, कार्रवाई होगी। डीएपी की कुछ कमी अवश्य आई थी, जिसका कारण रूस-यू्क्रेन युद्ध रहा क्योंकि पानी के जहाज को भारत आने में 15 दिन अधिक लग रहे हैं। यह बात प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खाद संकट के लिए सरकार पर लगाए आरोपों का जवाब देते हुए कही। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से चर्चा में उन्होंने दावा किया कि मुरैना सहित प्रदेश के किसी भी जिले में खाद की कमी नहीं है। अभी कुछ ही हिस्से में बोवनी प्रारंभ हुई है। खरीफ सीजन में 32.97 लाख खाद के विरुद्ध 33.69 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध कराया गया था। रबी सीजन के लिए 41.10 लाख मीट्रिक टन खाद लगने का अनुमान है। इसके विरुद्ध 19 लाख टन उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसमें 7.74 लाख टन यूरिया, 5.21 लाख टन डीएपी और 6.05 लाख टन सिंगल सुपर फास्फेट है। भारत सरकार से लगातार खाद मिल रही है। सीजन शुरू होने से पहले 6.55 लाख टन का अग्रिम भंडारण किया गया था ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। चुनाव के समय ही याद आते हैं किसान एदल सिंह कंषाना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को किसान केवल चुनाव के समय ही याद आते हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के दो विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव हैं, इसलिए किसानों को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है पर किसान समझदार हैं।

लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश

भोपाल लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने बैठक लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिये। एसीएस श्री के.सी.गुप्ता,एमडी एमपीआरडीसी श्री अविनाश लवानिया,ईएनसी श्री आर.के.मेहरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में वर्ष 2024-25 के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र की कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री श्री सिंह ने निर्माणाधीन और देरी से चल रही परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से देरी के कारणों का विस्तृत जानकारी लेकर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जा सके। मंत्री श्री सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के तहत चल रही परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया और उनके त्वरित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, रीवा, सागर, उज्जैन और भोपाल में रिंग रोड और बायपास परियोजनाओं के संबंध मैं भी जानकारी प्राप्त की। साथ ही अन्य शहरी क्षेत्रों में नियोजित रिंग रोड परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में भू-अर्जन और वन अनुमतियों में आ रही कठिनाइयों के कारण लंबित परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। श्री सिंह ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि इन समस्याओं का समन्वय पूर्वक समाधान शीघ्र किया जाए, ताकि विकास कार्यों में कोई अवरोध न हो और परियोजनाएं समय पर पूरी की जा सकें। संकल्प पत्र में उल्लेखित छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मंत्री श्री सिंह ने जोर दिया कि सभी परियोजनाओं का कार्य सुचारू रूप से और समयबद्ध ढंग से पूरा हो, जिससे कि राज्य में आधारभूत संरचना के विकास को और अधिक गति मिले।  

टीम बनाकर करें बिजली चोरी प्रकरणों की जांच, ऊर्जा मंत्री ने की पूर्व क्षेत्र विद्युत कंपनी के कार्यों की समीक्षा

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जबलपुर में बिजली चोरी के प्रकरणों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि बड़े बकायादारों एवं बड़े संस्थानों में बड़े घरों में चोरी करते पाये जाने पर कड़ी कार्रवाई करेंगे तो इसका संदेश अच्छा जायेगा। टीम बनाकर बिजली चोरी पकड़ने की कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं करने पर माना जायेगा कि अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। श्री तोमर ने कहा कि जबलपुर की टीम को वे स्वयं सम्मानित करेंगे। श्री तोमर के यह बातें पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यों की समीक्षा के दौरान कही। श्री तोमर ने कहा कि मीटर रीडिंग के आधार पर बिलिंग करें। उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण करें। उन्होंने निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों के निराकरण की सतत समीक्षा करें। भंडार की जांच करायेंगे श्री तोमर ने कहा कि बाहर से टीम भेजकर भंडार की जांच करायेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत की सभी सामग्रियाँ भंडार में उपलब्ध होनी चाहिए। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जहाँ मीटर जप्त किये जाते हैं, वहा पंचनामा बनाकर पैकिंग की जाये। वितरण हानिया कम करें। अच्छा कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें। खराब काम करने वालों का ट्रांसफर नहीं दण्डित करें। बिलिंग क्षमता में वृद्धि करें। सभी ट्रांसफार्मर में लाइटनिंग रेसिस्टेंट लगवायें। समय पर पूरा करें आरडीएसएस के कार्य ऊर्जा मंत्री ने आरडीएसएस के कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना में स्वीकृत सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा करें। समय पर कार्य पूरा नहीं करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करें और की गयी कार्यवाही की जानकारी मुझे दें। उन्होंने स्मार्ट मीटर लगाये जाने सहित अन्य कार्यों की भी समीक्षा की। एमडी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी श्री अनय द्विवेदी ने कहा कि बिजली चोरी पकड़ने के लिये विजिलेंस के साथ ही ओएण्डएम के स्टॉफ को भी जिम्मेदारी दी गयी है। बड़े संस्थानों में चोरी पकड़े जाने पर स्टाफ की भी जिम्मेदारी तय की जायेगी। इस दौरान ऊर्जा विभाग के ओएसडी श्री विजय गौर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री गड़करी करेंगे दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गड़करी शनिवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में “सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों’’ पर दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ करेंगे। सेमिनार में सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। सेमिनार का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग के सहयोग से हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस दो दिवसीय सेमिनार से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सकेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- अयोध्या में रामलला के मंदिर में उपयोग में लाए गए मध्यप्रदेश के मंडला के पत्थर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। इस संपदा के दोहन के लिए प्रयास बढ़ाते हुए खनिज क्षेत्र में नए निवेश को पूरा प्रोत्साहन दिया जाएगा। खनन क्षेत्र के उद्यमियों को राज्य सरकार सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी। प्रदेश की खनिज संपदा का दोहन करते हुए उत्पाद भी प्रदेश में ही हो, ऐसे प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को 2 दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सम्पन्न कॉन्क्लेव में विभिन्न 11 औद्योगिक संस्थानों की ओर से 19,650 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओआईएल (भारत सरकार का उपक्रम) और मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड के मध्य खनिज ब्लॉक से संबंधित “संयुक्त उद्यम समझौता” हस्ताक्षरित भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कॉन्क्लेव को सफल आयोजन बताते हुए कहा कि प्रदेश के खनिज राजस्व में भी 5 गुना वृद्धि का लक्ष्य आने वाले समय में प्राप्त किया जाएगा। उद्यमियों के साथ भू-गर्भ शास्त्री, वैज्ञानिक, खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार के खनिज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी कॉन्क्लेव में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति विश्व में सबसे अलग है। जहां अन्य देश राष्ट्र को पिता मानते हैं, हमारे देश में हम भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं। मातृ प्रधान व्यवस्था को प्राचीन काल से प्रश्रय मिला। हम देश को भी मातृ संस्था मानते हैं। शरीर की रचना भी ब्रम्हांड की तरह होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि इस वसुंधरा की नदियां मनुष्य के रक्त प्रवाह के समान हैं। पृथ्वी में भी प्राण होते हैं और वनस्पति में भी प्राण होते हैं, यह हमारी मान्यता अन्य देशों से काफी पुरानी हैं। प्रकृति के दोहन और शोषण के अंतर को समझने की आवश्यकता है। खनिज संपदा की दृष्ट से ईश्वर की कृपा मध्यप्रदेश पर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्‍व में जेट की गति से बढ़ रहा देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश जेट की गति से आगे बढ़ रहा है। खनिज के क्षेत्र में प्रधानमंत्री की कल्पना के अनुसार भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश भी विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। जहां कृषि के साथ ही पशुपालन और अन्य क्षेत्रों में नए प्रकल्प आ रहे हैं, वहीं खनिज क्षेत्र में मध्यप्रदेश उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करेगा। भारत सरकार द्वारा खनिजों की नीलामी में पुरस्कृत मध्यप्रदेश विविध प्रकार की खनिज संपदा के समुचित दोहन के लिए संकल्पबद्ध है। मध्यप्रदेश सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को भरपूर प्रोत्साहन देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनन क्षेत्र में उद्यमियों को सरकार का पूरा साथ मिलेगा। खनिज क्षेत्र मध्यप्रदेश को प्रगति के नए आयामों को छूने में सहयोगी बनेगा। हर महीने रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही हैं। इस वर्ष अब तक हुई 4 कॉन्क्लेव के फलस्वरूप लगभग 2500 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। आने वाली 23 अक्टूबर को रीवा में “रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव” उद्योग के विभिन्न सेक्टर्स में नए निवेश लाने में सहयोगी होगी। एक ही दिन में दो बड़े आयोजनों में भागीदारी का सौभाग्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को अग्रसर रखने एवं युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की जा रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश की पूरी क्षमता को विकसित करने हमने पर्यटन की भी कॉन्क्लेव की। आज मैं दो कॉन्क्लेव में शामिल हुआ। सुबह पेट्रोकेमिकल एवं फार्मा इंडिया केम मुंबई में शामिल हुआ और अभी माइनिंग कॉन्क्लेव में शामिल हुआ हूँ। विभागवार कॉन्क्लेव की श्रंखला जारी रहेगी। अगले वर्ष फरवरी में जीआईएस का आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश में चहुँमुंखी औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे। अयोध्या के राम मंदिर तक पहुंचा मध्यप्रदेश का पत्थर, हीरे के बाद सोना भी निकालेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही यह गर्व का विषय है कि गोंडवाना अंचल के मंडला जिले में खनन से प्राप्त पत्थर का उपयोग अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के गर्भ गृह में लगाने का सौभाग्य मध्यप्रदेश को मिला। निश्चित ही यह पत्थर गुणवत्ता की दृष्टि से इस योग्य पाया गया कि उसे गर्भगृह में स्थान मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को श्री अनुपम चतुर्वेदी और श्री किशोर ने इस पत्थर का नमूना भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही मध्यप्रदेश खनिजों के मामले में भी अद्वितीय है। भारत की वसुंधरा में मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश होने के साथ रत्न-गर्भा भी है। पन्ना में हीरों का भंडार प्रदेश को अलग पहचान देता है। अब हीरों के साथ सोना भी प्रदेश की धरती से निकलेगा। अन्य खनिजों के खनन के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनन तकनीक में प्रयुक्त हो रहे नवीनतम उपकरणों की भी जानकारी ली। नई खनन मशीन के लोकार्पण के साथ ही खनन उपकरणों की कार्य प्रणाली की भी जानकारी प्राप्त की।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास की विशेष उपलब्धियाँ, मंत्री श्री पटेल ने योजनाओं में प्रगति की जानकारी साझा की

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विभाग में किये जा रहे कल्याणकारी कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश की शत-प्रतिशत पंचायतों में पंचायत भवन बनाये जायेंगे। पंचायत भवन विहीन 1400 ग्राम पंचायतों के लिये पंचायत भवनों की स्वीकृति प्रथम चरण में जारी की जा रही है। साथ ही स्थानीय ग्रामीण समुदाय के लिये सामुदायिक भवनों का निर्माण भी चरणबद्ध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा योजना में श्रम सामग्री का अनुपात अभी तक जिला स्तर पर संधारित होता था। अब इसको जनपद स्तर पर संधारित किया जाएगा। 25 लाख तक के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने के अधिकार सरपंचों को दिए गए हैं। तकनीकी स्वीकृति के लिये सहायक यंत्री को अधिकृत किया गया है। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सहायक यंत्री को तकनीकी स्वीकृति जारी करने के अधिकार की सीमा 15 लाख रूपये से बढ़कर 25 लाख की गई है। महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत कपिलधारा की इकाई लागत राशि तथा पेयजल के लिये बनाने वाले सामुदायिक कूप की लागत राशि में अंतर है। इसको युक्ति युक्त करने का अनुरोध किया गया है, इस पर विचार किया जाएगा। पंचायत राज ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 का दुरुपयोग सरपंच के विरुद्ध ना हो इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। सीएम हेल्पलाइन 181 पर झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले तथा आदतन शिकायतकर्ता के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिये लोक सेवा प्रबंधन विभाग से संवाद हुआ है। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सरपंचों के प्रति अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत से पास करने एवं तीन वर्ष पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान नगरीय निकायों की तरह पंचायत में भी किए जाने का अनुरोध किया गया है, जिसे स्वीकार किया है। रोजगार सहायक एवं सचिव की एसीआर लिखने का अधिकार सरपंच को दिये गये है। जिसमें ग्राम रोजगार सहायक के मूल्यांकन प्रपत्र का स्वीकारकर्ता सरपंच को बनाया गया है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 22 के अंतर्गत सरपंचों को जनपद पंचायत में रोस्टर के हिसाब से 20% प्रतिवर्ष बुलाए जाने के प्रावधान का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।  

मंत्री श्री शुक्ला ने ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष पद का पदभार ग्रहण किया। ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमनवीर सिंह बैंस ने मंत्री श्री शुक्ला को अध्यक्ष का प्रभार सौंपा। इस अवसर पर ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी मौजूद रहे।  

पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास द्वारा मानस भवन में समारोह का हुआ आयोजन, राज्यपाल श्री पटेल हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाना, हमारी संस्कृति का प्रचार है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का भरपूर भंडार है। प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के पास प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधीय पेड़-पौधों के ज्ञान का खजाना मौजूद हैं। उन्होंने सभी से आव्हान किया कि आयुर्वेद के फायदों के बारे में आमजनों को जागरूक करें। राज्यपाल श्री पटेल पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास द्वारा आयोजित शीर्ष आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान और अखिल भारतीय आयुर्वेद पी.जी. निबंध प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। सम्मान समारोह का आयोजन विश्व आयुर्वेद परिषद के सहयोग से मानस भवन भोपाल में किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल ने आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान किया और निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। न्यास की स्मारिका का लोकार्पण भी किया।       राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आयुर्वेद आरोग्य का विज्ञान है। यह मानव के सम्पूर्ण स्वास्थ्य, खान-पान और आचार-विचार पर केन्द्रित है। यह रोगों के इलाज के साथ ही स्वस्थ जीवन शैली पर भी फोकस करता है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आयुष के क्षेत्र में हर्बल मेडिसिन, आयुर्वेद और योग टूरिज्म की असीम संभावनाओं को अवसर में बदलने विशेष प्रयास किए जाए। उन्होंने बच्चों को समझाईश भी दी कि फास्ट फूड्स और कोल्ड ड्रिन्क्स का सेवन नहीं करे। नियमित योग और कसरत करें। पौष्टिक आहार का सेवन करे।   कोविड के बाद आयुर्वेद के हॉलिस्टिक विजन की ओर लौट रहा विश्व       राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आयुर्वेद वेलनेस को प्रमोट करता है। वह उसी व्यक्ति को स्वस्थ मानता है जिसका शरीर संतुलन में हो। जिसकी सभी क्रियाएँ संतुलित हों और मन प्रसन्न हो। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के अनुभव के बाद, सम्पूर्ण विश्व आयुर्वेदिक ज्ञान के हॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रहा है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को विश्व भर में नई पहचान मिल रही हैं। केन्द्र सरकार ने आयुष मंत्रालय बनाने और ऑल इण्डिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद खोलने की पहल की है। जामनगर गुजरात में विश्व का पहला और इकलौता ग्लोबल सेन्टर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिंन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा खोला गया है। सेन्टर फॉर इंटीग्रेटेड मेडिसिन, एम्स द्वारा योग और आयुर्वेद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रिसर्च हो रही है। आयुष रिसर्च पोर्टल पर 40 हजार से अधिक स्टडीज का डेटा भी उपलब्ध हो गया है।      आयुष, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आयुर्वेद एक जीवन पद्धति है। आयुर्वेद का भारतीय ज्ञान परम्परा में महत्वपूर्ण स्थान है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से प्रदेश में भी आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष कार्य किए जा रहे है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्मृति न्यास के अंतर्गत आयुर्वेद लाईब्रेरी स्थापित की जाएगी। इस लाईब्रेरी का स्वरूप डिजिटल भी होगा ताकि विश्व भर के आयुर्वेद चिकित्सकों, छात्रों, शोधार्थियों और आमजनों को भी लाभ मिल सके। सांसद श्री आलोक शर्मा ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों को बधाई दी। आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के विभिन्न आयोजनों के लिए स्मृति न्यास को साधुवाद दिया। भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने आयुर्वेद चिकित्सा के प्रचार-प्रसार में पं. उद्धवदास मेहता के योगदान को याद किया।       राज्यपाल श्री पटेल का पुष्प-गुच्छ से स्वागत और शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास के अध्यक्ष श्री उमाशंकर गुप्ता ने पं. मेहता के व्यक्तित्व और कृत्तिव पर प्रकाश डाला। उन्होंने न्यास के उद्देश्यों, कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ल ने समारोह की रूपरेखा और प्रतिभागियों की जानकारी दी। आभार समारोह के प्रायोजक झन्डु ईमामी के डॉ. आदित्य ने किया। सम्मान समारोह में झन्डु ईमामी के श्री संजय भट्ट, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक, विजेता प्रतिभागी, आयुर्वेद छात्र-छात्राएं, उनके परिजन, विश्व आयुर्वेद परिषद के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।  

आंगनबाड़ी भवन हुए जर्जर, न तो समय पर सफाई होती है और न ही समय पर पुताई की जाती है, नहीं हो रही मरम्मत

भोपाल जिले में आंगनबाड़ी भवनों की हालत सही नहीं है।यह जर्जर हालत में हैं जिनमें नौनिहाल जाने को मजबूर हैं। इनकी न तो समय पर सफाई होती है और न ही समय पर पुताई की जाती है।वहीं इन भवनों पर नजर रखने वाले जिम्मेदार विभाग महिला बाल वकास के जिला अधिकारी सुनील सिंह सोलंकी दो वर्ष से अनुपस्थित है। वह कभी बैठक में शामिल ही नहीं हुए हैं। यह मुद्दा महिला बाल विकास स्थायी समिति की बैठक में शुक्रवार को सभापति चंद्रेश सुरेश राजपूत ने उठाया है। उनकी अध्यक्षता में बैठक जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित की गई। जिसमें जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट, सदस्य रश्मि अवनीश भार्गव, जिला स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। अगली बैठक में नहीं आए तो होगी कार्रवाई चंद्रेश सुरेश राजपूत ने बताया कि जिला अधिकारी सुनील सिंह सोलंकी की दो वर्षों से अनुपस्थित है। इस पर सभापति के साथ अध्यक्षों ने आपत्ति दर्ज करते हुए उपस्थित अधिकारियों को कहा कि अगली बैठक में सुनील सिंह सोलंकी नहीं आए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी की हालत बेहद खराब है । साफ-सफाई, पेयजल सहित अन्य सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाता है। भवन जर्जर हो चुके हैं लेकिन उनकी मरम्मत तक नहीं कराई जाती है। वह जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करेंगी और लापरवाही मिली तो अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी और नर्सिंग अधिकारियों का किया सम्मान बैठक के सचिव सीएमओ डा. प्रभाकर तिवारी ने एंजेडा रखते हुए बताया कि आइपीएएस संस्था द्वारा विकल्प कार्यक्रम में फैमली प्लानिंग विजन 2030 का एक दिवसीय उन्मुखीकरण डाक्टर पंकज मिश्रा द्वारा दिया गया। विकल्प कार्यक्रम के तहत अस्थायी साधनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों,नर्सिंग अधिकारियों को प्रमाण पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

सीए की तैयारी कर रहे छात्र ने बावड़िया ब्रिज से कूदकर दी जान, म्मी-पापा का ध्यान रखना भाई से बोला

भोपाल सीए की तैयारी कर रहे एक छात्र ने गुरूवार-शुक्रवार की दरमियानी रात बावड़िया ब्रिज से कूदकर जान दे दी। छात्र ने यह कदम उठाने से ठीक पहले अपने भाई से फोन पर बात की थी, जिसमें उसने कहा था कि मैं अब जीना नहीं चाहता, आप मम्मी-पापा का ध्यान रखना। भाई घर से भागता हुआ ब्रिज पर पहुंचा तब तक देर हो चुकी थी और छात्र का शव ब्रिज के नीचे सड़क पर पड़ा मिला। सूचना पर पहुंची शाहपुरा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार 19 वर्षीय अनिल ईश्वर नगर में अपने परिवार के साथ रहता था। वह सीए की तैयारी कर रहा था। गुरूवार रात करीब साढ़े 12 बजे अनिल का बड़ा भाई काम से वापस घर पहुंचा तो अनिल अपने कमरे से गायब था। उसने फोन किया तो अनिल ने कहा कि वह जीना नहीं चाहता और बावड़िया ब्रिज से कूदकर जान दे रहा है। भाई ने उसे समझाया और पांच मिनट में घर से ब्रिज पर पहुंचा तो अनिल का शव नीचे सड़क पर पड़ा मिला। स्वजन तुरंते उसे एम्स अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस आत्महत्या के कारण जानने उसके स्वजनों से पूछताछ कर रही है।

जेल में सांस्कृतिक कार्यक्रम, सभी कैदियों के साथ डिप्टी जेलर सीएल प्रजापति ने बुंदेली गीत गाते हुए बरेदी नृत्य किया

दमोह जिला जेल में महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जेल के सभी कैदियों के साथ डिप्टी जेलर सीएल प्रजापति ने बुंदेली गीत गाते हुए बरेदी नृत्य किया। इतना ही नहीं उन्होंने दिवारी गीत भी गाए, जिसका विडियो भी वायरल हुआ है। कार्यक्रम के दौरान कैदी भी भूल गए की वह जेल में हैं और उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दिवाली पर्व पर जिस तरह यादव समाज के लोग दिवारी गीत गाते हुए नृत्य करते हैं उसी तरह का नृत्य इन कैदियों के द्वारा भी किया गया। जिला जेल में वैसे तो विधिक साक्षरता से जुड़े कार्यक्रम आए दिन आयोजित होते रहते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, लेकिन इस बार जिला जेल के सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़े हुए वीडियो सोशल मीडिया पर है। बुंदेली गीतों की प्रस्तुति डिप्टी जेल अधीक्षक सीएल प्रजापति ने बताया कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर जिला जेल में पूजन, अर्चन किया गया और उसके बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जेल के सभी बंदियों ने अपनी सहभागिता निभाई। यहां पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर बुंदेली गीतों की प्रस्तुति की गई जिसमें सभी ने नृत्य किया और गीत भी गाए। इस कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि को याद करते हुए जेल के सभी बंदियों को बताया कि श्रीराम से महान राम का नाम है। स्वच्छता पर जागरूकता सीएल प्रजापति ने इसके बाद उन्होंने स्वच्छता पर बात की। प्रजापति ने कहा कि हमें स्वच्छता बनाए रखना चाहिए। समाज को स्वच्छ रखने की जवाबदारी केवल वाल्मीकि समाज की नहीं है हम सभी को भी अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। हम भी इस साफ सफाई में बराबर के भागीदार बनेंगे तभी हमारा समाज स्वच्छ रहेगा और हम बीमारियों से दूर रहेंगे। उन्होंने कहा कि सब एक जुट होकर एक विचारधारा के साथ काम करेंगे, तो हमारे समाज में भाईचारा बढ़ेगा।

शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में मरम्मत के लिए ASI ने लगाया ताला, लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही हुई बंद

शहडोल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) ने शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में ताला लगा दिया है। बाहर लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद की गई है। इसकी कोई सूचना पहले से नहीं दिए जाने से श्रद्धालुओं में काफी नाराजगी है। किवदंतियों में इस मंदिर को महाभारत कालीन, पांडवों के अज्ञातवास का प्रतीक माना जाता रहा है। मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर ताला लगा दिए जाने से पूजन में व्यवधान होने लगा है। मंदिर की दीवार जर्जर एएसआई , जबलपुर के अधीक्षक डा. शिवकांत वाजपेयी का कहना है कि मंदिर की दीवार का एक हिस्सा जर्जर हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से गर्भगृह में ताला लगाया गया है। इंजीनियर सर्वे करेंगे और जल्द ही मंदिर की मरम्मत कराई जाएगी। इसके बाद गर्भगृह का ताला खोल दिया जाएगा। स्थानीय कर्मचारियों को कहा गया था कि इस संदर्भ में नोटिस चस्पा कर दें, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने। यदि नोटिस नहीं लगा है तो लगवाया जाएगा। इसके अलावा सुबह पूजा के लिए गर्भगृह में पुजारी को जाने दिया जाएगा। बता दें, विराटेश्वर मंदिर सदियों से स्थानीय नागरिकों की आस्था का केंद्र रहा है। गर्भगृह बंद किए जाने का विरोध इधर, हिंदूवादी संगठन गर्भगृह बंद किए जाने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत महाकोशल महामंत्री शक्ति सिंह ने कहा कि मंदिर में ताला बंद करना उचित नहीं है। विराट मंदिर में दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं, लेकिन ताला लगा होने से वे बिना दर्शन व पूजा के वापस हो रहे है। इसका विरोध किया जाएगा। यदि इस ओर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा। गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट की निशानी भगवान शिव को समर्पित विराट मंदिर को कलचुरी राजा युवराज देव द्वितीय ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कलचुरी राजवंश की बेहतरीन वास्तुकलाओं में से एक है। इस मंदिर को खजुराहो के शिव मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। 70 फीट ऊंचे मंदिर को गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट के तौर पर बनवाया गया था। एएसआई की देखरेख में मंदिर मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) के संरक्षण में रखा गया है। गर्भगृह में एक छोटा शिवलिंग है। स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना: मंदिर के बाहर की दीवारों पर दिग्पाल वसु, शिव के विविध रूप, शिव परिवार, विष्णु अवतार, मिथुन दृश्य, और गजशार्दुल की मूर्तियां हैं। मंदिर में नृत्य मुद्रा में महावीर, शिव, और पार्वती की मूर्ति, सरस्वती, गणेश, विष्णु, नृसिंह, व्याल, कांटा निकालती सुंदर युवती, युद्धरत कलाकृतियां देखी जा सकती हैं।

ओरछा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होगा, राम राजा की नगरी को मिलेगी ऐतिहासिक मान्यता

ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में भगवान रामराजा सरकार की नगरी ओरछा (Orchha) को अब प्रदेश की चौथी वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage) बनने का दर्जा मिलने जा रहा है. इसके लिए डोजियर (कम्पाइल्ड डॉक्यूमेंट्स) को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने मंजूरी दे दी है. इसको लेकर ओरछा में खुशी का माहौल है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे ओरछा को नए आयाम मिलेंगे, जिससे यहां के रोजगार में बढ़ोतरी होगी. अभी तक ओरछा यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (वर्ल्ड हेरिटेज साइट की टेम्पररी लिस्ट) में शामिल है. परमानेंट लिस्ट में शामिल करने के लिए डोजियर और डॉक्यूमेंटेशन का काम पिछले साल पूरा किया गया था. डोजियर को केंद्र सरकार ने यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी को सौंपा है. साल 2027 और 2028 के लिए केंद्र सरकार ने ओरछा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करने के लिए रिकमेंडेशन दिया है. हर साल केंद्र सरकार देश की एक धरोहर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नॉमिनेट कराने के लिए यूनेस्को को रिकमेंडेशन देती है. यूनेस्को ऑफिस पेरिस में भारतीय राजदूत विशाल वी शर्मा ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के निदेशक लाजारे एलौंडो असोमो को यह डोजियर सौंपा. यूनेस्को की आधिकारिक घोषणा के बाद ओरछा देश की ऐसी एकमात्र विश्व धरोहर स्थली होगी, जो राज्य संरक्षित है. पांच साल की मेहनत के बाद मिली सफलता मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने ओरछा और भेड़ाघाट को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल कराने के लिए साल 2019 और 2021 में प्रस्ताव तैयार कराया था. इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने योग्य मानते हुए यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को फॉरवर्ड किया और फिर टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करने की घोषणा की गई थी. घोषणा के बाद टूरिज्म बोर्ड ने विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से ओरछा, मांडू, भेड़ाघाट के डोजियर तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा. वहीं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने प्रारंभिक निरीक्षण कर ओरछा के डोजियर को रिकमेंड कर यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को सौंपा. रामराजा मंदिर भारत का  ऐसा मंदिर जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है. यह विश्व का एक मात्र स्थान जहां भगवान को सरकार की ओर से शस्त्र सलामी दी जाती है. यहां भगवान को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भी सलामी दी जाती है. ईश्वरीय सत्ता का अनूठा उदाहरण जहां भगवान राम के लिये करोड़ों रुपये की लागत से भव्य मंदिर बनाया गया, लेकिन भगवान उस मंदिर में विराजमान न होकर महल में विराजे हैं. जानकार बताते हैं कि यह एक मात्र स्थान है जहां रामराजा राजकाज निपटाने और जनता को दर्शन देने के लिये गर्भगृह से बाहर आते हैं. जबकि हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा की गई मूर्ति को हटाया नहीं जाता है. बुंदेला स्थापत्य शैली ओरछा का स्थापत्य बुंदेला शासकों द्वारा विकसित किया गया था, जो अद्वितीय स्थापत्य शैली का प्रतीक है, जिसमें महलों, मंदिरों, और किलों का समावेश है. जहांगीर महल ओरछा का प्रसिद्ध मुगल और राजपूत स्थापत्य कला का अनूठा संगम है. इस महल को मुगल सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए बनवाया गया था. ओरछा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व यह चतुर्भुज मंदिर विशाल और भव्य मंदिर अनूठी वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है. ओरछा का किला परिसर बुंदेलखंड क्षेत्र की शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसमें महल, दरबार हॉल और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं. ओरछा बेतवा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है और इसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के लिए आकर्षक बनाता है. राजशाही छतरियां बेतवा नदी के किनारे स्थित बुंदेला राजाओं की स्मृति में बनवाई गई और शाही वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण हैं. अमर महल और लक्ष्मी नारायण मंदिर इन मंदिरों में की गई भित्ति चित्रकारी और वास्तुकला बुंदेला शासकों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक योगदान को दर्शाती है. यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से ओरछा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता मिलेगी. नामांकन के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने पर ओरछा को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से संरक्षण और विकास के लिए सहयोग मिल सकता है. स्थानीय शिल्प, हस्तकला और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने से ओरछा पर शिक्षा, शोध और अध्ययन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित होगा. यूनेस्को की मान्यता से ओरछा में स्थायी और पर्यावरण संवेदनशील पर्यटन के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लंबे समय तक पर्यटन की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी.

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