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लाड़ली लक्ष्मी योजना : बालिका सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

लाड़ली लक्ष्मी योजना : बालिका सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना ने राज्य में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके सकारात्मक परिणामों ने अन्य राज्यों को भी इस दिशा में कार्य करने के लिये प्रेरित किया है। इस योजना के सफल कार्यान्वयन और प्रभावी परिणामों ने अन्य प्रदेशों को इस तरह की योजनाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे बालिकाओं की स्थिति में सुधार देखा गया है। मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना राज्य सरकार की एक ऐसी अनूठी पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के जीवन में सुधार लाना और उनके समग्र विकास को प्रोत्साहित करना है। यह योजना बालिकाओं के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 2007 में शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य फोकस लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना है, ताकि वे सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना में वर्ष 2023-24 में 935.8 करोड़ का व्यय हुआ है। योजना में प्रति वर्ष औसतन 1000 करोड़ का व्यय अनुमानित है। वर्तमान प्रावधान अनुसार वर्ष 2027-28 में 21 वर्ष पूर्ण कर रही बालिकाओं के लिए लगभग 1313 करोड़ राशि की आवश्यकता होगी। अब तक लाड़ली लक्ष्मी योजना में लगभग 48 लाख 86 हज़ार 832 बालिकाओं का पंजीयन किया गया है, जिन्हें अब तक 524.91 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जा चुकी हैं। वर्ष 2024-25 में कुल 1 लाख 21 हज़ार 425 बालिकाओं का पंजीयन हुआ है। इस वर्ष अब तक 48.88 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है। वर्तमान प्रावधान अनुसार मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना वर्ष 2027 से 2032 में वित्तीय भार वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई इस योजना में इस वर्ष 40 हज़ार 854 बालिकाओं का पंजीकरण हुआ था। वर्ष 2027-28 में ये बालिकाएँ 21 वर्ष पूर्ण करेंगी। छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि पर 904.49 करोड़, 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर प्रति बालिका को देय राशि 1 लाख के मान से 408.54 करोड़ की राशि, कुल 1313.03 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है। इसी प्रकार वर्ष 2008-09 में कुल 1 लाख 86 हज़ार 803 बालिकाओं का पंजीकरण हुआ, जिन्हें 1209.31 करोड़ की छात्रवृत्ति दी गई। वर्ष 2028-29 में 21 वर्ष पूर्ण होने पर 1868.03 करोड़ की राशि देय होगी यानी कुल 3068.38 करोड़ रुपये की राशि का व्यय अनुमानित है। वर्ष 2009-10 में 2 लाख 13 हज़ार 874 बालिका पंजीकृत हुईं, जिन्हें 1270.97 करोड़ की छात्रवृत्ति बांटी गई। वर्ष 2029-30 में 21 वर्ष पूर्ण होने पर 2138.74 करोड़ की राशि देय होगी। इस पर कुल 3409.71 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित होगा। वर्ष 2010-11 में पंजीकृत 3 लाख 5 हज़ार 228 बालिकाओं को 1291.39 करोड़ की छात्रवृत्तियाँ प्रदान की गई। वर्ष 2030-31 में 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 3052.28 करोड़ रुपये, कुल 4343.87 करोड़ की राशि का व्यय होगा। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना में वर्ष 2011-12 में 3 लाख 80 हज़ार 260 बालिकाओं का पंजीकरण कर 1329.26 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियाँ दी गईं। इन बालिकाओं को वर्ष 2031-32 में 21 वर्ष पूर्ण होने पर 3802.6 करोड़ रुपये दिये जाएंगे। इस पर कुल 5131.80 करोड़ रुपये की राशि का व्यय अनुमानित है। अन्य प्रदेशों पर लाड़ली लक्ष्मी योजना का असर मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना को देखते हुए अन्य राज्यों ने भी बालिकाओं के सशक्तिकरण और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए इसी प्रकार की योजनाओं की शुरुआत की है। दिल्ली दिल्ली सरकार ने लाड़ली योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा के विभिन्न चरणों पर वित्तीय सहायता प्रदान करना और उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार करना है। उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में कन्या सुमंगला योजना चलाई जा रही है, जो लड़कियों की शिक्षा और उनके जन्म से लेकर विवाह तक की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। बिहार बिहार में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। यह योजना लाड़ली लक्ष्मी योजना से प्रेरित है और इसी प्रकार की संरचना का पालन करती है। राज्यों के नीतिगत सुधार कई राज्यों ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की सफलता को देखते हुए बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए अपने नीतिगत ढांचे में बदलाव किए हैं। इन योजनाओं का ध्यान बालिकाओं के जन्म के बाद उन्हें वित्तीय सुरक्षा और शिक्षा में सहायता प्रदान करना है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना ने न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों में भी बेटियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने में मदद की है। समाज में बेटियों को बोझ मानने की धारणा को बदलने में यह योजना महत्वपूर्ण रही है। अन्य राज्यों ने इसे एक उदाहरण के रूप में देखा और समाज में बेटियों के लिए सकारात्मक माहौल बनाने के लिए ऐसी योजनाओं को अपनाया। लिंग अनुपात में सुधार लाड़ली लक्ष्मी योजना का उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के साथ-साथ लिंग अनुपात में सुधार करना भी है। इसकी सफलता ने अन्य प्रदेशों को भी लिंग अनुपात को संतुलित करने की दिशा में प्रेरित किया है। इस तरह की योजनाओं से कई राज्यों में बालिकाओं के जन्म और शिक्षा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ी है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के सफल क्रियान्वयन ने राष्ट्रीय स्तर पर बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि सरकारें और समाज मिलकर बालिकाओं के उत्थान के लिए काम करें, तो यह न केवल महिलाओं, बल्कि पूरे समाज के लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इस योजना के दूरगामी प्रभाव को देखकर यह कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना एक मॉडल के रूप में उभरी है, जिसने देशभर में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अन्य राज्यों को नई दिशा दी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन, प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी पर्व की बधाई

प्रदेश में शस्त्र-पूजन के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा दशहरा पर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव महिला सशक्तिकरण की प्रतीक देवी अहिल्याबाई को समर्पित होगा शस्त्र-पूजन कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन, प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी पर्व की बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे पर्व उमंग और उल्लास के प्रतीक होते हैं। इस वर्ष प्रदेश में दशहरा पर्व सरकार और समाज मिलकर धूमधाम के साथ मनाएंगे और शस्त्र-पूजन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष का दशहरा पर्व महिला सशक्तिकरण और सुशासन की प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्याबाई को समर्पित रहेगा। देवी अहिल्याबाई ने देश भर में जन-कल्याण के अनेक महती कार्य संपन्न करवाए। इन कार्यों की स्मृति और देवी अहिल्याबाई के योगदान से आज की पीढ़ी को अवगत करवाने और उनके सम्मान में दशहरा पर्व पर शस्त्र-पूजन के कार्यक्रम होंगे। मंत्री, सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी करेंगे अपने-अपने क्षेत्रों में शस्त्र-पूजन मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि इस दशहरा पर्व पर भारत की प्राचीन शस्त्र-पूजन परंपरा में सरकार के मंत्रीगण सहित सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में पुलिस शस्त्रागार, कोतवाली और थानों में होने वाले शस्त्र-पूजन एक विभाग तक सीमित न होकर जनता का पर्व बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं देवी अहिल्याबाई की राजधानी रहे शहर महेश्वर और उनकी छावनी रहे इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे। लोकमाता अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती वर्ष मना रहे हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श है। वे एक तपोनिष्ठ, धर्मनिष्ठ,कर्मनिष्ठ शासक एवं प्रशासक रही है। उनसे हम सबको प्रेरणा लेना चाहिये। देवी अहिल्याबाई ने धर्म के साथ शासन व्यवस्था चलाने का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका धर्म तथा राज्य व्यवस्था में विशेष महत्व है। उनका मुख्य ध्येय था कि उनकी प्रजा कभी भी अभावग्रस्त और भूखी नहीं रहे। उनके सुशासन की यशोगाथा पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने समाज-सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। अहिल्याबाई हमेशा अपनी प्रजा और गरीबों की भलाई के बारे में सोचती थी, साथ ही वे सदैव गरीबों और निर्धनों की हरसंभव सहायता के लिए तत्पर रहती थी। उन्होंने समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति पर भी खासा काम किया और उनके लिए उस वक्त बनाए गए कानून में बदलाव भी किया था। शस्त्र-पूजन के लिये मंत्रियों को जिले एवं स्थान आवंटित “दशहरा पर्व” पर प्रदेश में होने वाले शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के लिये राज्य मंत्रि-परिषद के सदस्यों को जिले आवंटित किये गये हैं। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भोपाल, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा, मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह खण्डवा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धार, मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल नरसिंहपुर, मंत्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री करण सिंह वर्मा सीहोर, मंत्री उदय प्रताप सिंह गाडरवाड़ा (नरसिंहपुर), मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके मण्डला, मंत्री तुलसीराम सिलावट इंदौर, मंत्री रामनिवास रावत विजयपुर श्योपुर, मंत्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री सुनिर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री विश्वास सारंग भोपाल, मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ग्वालियर, मंत्री नागर सिंह चौहान सतना, मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री राकेश शुक्ला भिण्ड, मंत्री चैतन्य काश्यप रतलाम, मंत्री इंदर सिंह परमार शाजापुर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर सीहोर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी दमोह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल सीधी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल राजगढ़, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन सिंह पटेल विदिशा, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार रायसेन, राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल बरेली (रायसेन), राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सतना, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार अनूपपुर और राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह सिंगरौली में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन…..

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विजयादशमी पर्व पर महेश्वर और इंदौर में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। शाम को भोपाल में विभिन्न दशहरा कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विजयादशमी पर प्रात: मुख्यमंत्री निवास में शस्त्र-पूजन करेंगे। इसके बाद खरगोन जिले के महेश्वर रवाना होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर में देवी अहिल्याबाई की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर शस्त्र-पूजन और गौ-पूजन भी करेंगे। दशहरा उत्सव कार्यक्रम में होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की शाम को भोपाल के बिट्टन मार्केट दशहरा मैदान, रात्रि में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम कोलार रोड और छोला दशहरा मैदान में आयोजित दशहरा कार्यक्रमों में शामिल होंगे।  

जबलपुर में 13 नवम्‍बर को होगा अग्निवीर महिला सैन्य पुलिस भर्ती रैली का आयोजन

जबलपुर मुख्यालय मध्य भारत एरिया के तत्वावधान में भर्ती कार्यालय के संयोजन में नवंबर में राज्य के 15 जिलों से आने वाले पुरुष अभ्यर्थियों के लिए अग्निवीर (सामान्य ड्यूटी), अग्निवीर (तकनीकी), अग्निवीर क्लर्क स्टोर कीपर (तकनीकी), अग्निवीर ट्रेड्समैन (10वीं पास), अग्निवीर ट्रेड्समैन (8वीं पास) के लिए भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। यह भर्ती मध्य प्रदेश के जबलपुर समेत 15 जिले में होगी, जिसमें अनूपपुर, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, मंडला, मऊगंज, मैहर, रीवा, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और उमरिया शामिल रहेंगे। सभी जिलों की महिला अभ्यर्थियों के लिए अवसर इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी जिलों की महिला अभ्यर्थियों के लिए अग्निवीर महिला मिलिट्री पुलिस (जनरल ड्यूटी) के लिए अग्निवीर सेना भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। शारीरिक शिक्षा विभाग ग्राउंड में रैली महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के लिए भर्ती रैली का आयोजन 6 नवंबर से 14 नवंबर तक रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शारीरिक शिक्षा विभाग ग्राउंड में किया जा रहा है। अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भाग ले सकेंगे अप्रैल और मई 2024 में सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईई) आनलाइन माध्यम से आयोजित की गई थी। आनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईई) उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी ही इस भर्ती रैली में शारीरिक दक्षता सहित अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भाग ले सकेंगे। अभ्यर्थियों की दौड़ रात के 2 बजे से होगी रैली में भाग लेने वाले पात्र अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड 3 अक्टूबर को उनके ई-मेल पर भेज दिया गया है। इन अभ्यर्थियों की दौड़ रात के 2 बजे से शुरू होगी। आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर लाना अनिवार्य भर्ती में भाग लेने के लिए सभी अभ्यर्थी के लिए सेना के जारी किया गए एडमिट कार्ड और रैली नोटिफिकेशन के अनुसार सभी दस्तावेज तथा आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर लाना अनिवार्य है। अग्निवीर बनने के लिए महिला कैंडिडेट्स की हाइट 152 सेंटी मीटर होनी चाहिए। केवल अविवाहित भारतीय पुरुष और महिला उम्मीदवार केवल अविवाहित भारतीय पुरुष और महिला उम्मीदवार ही भारतीय नौसेना में अग्निवीर के रूप में नामांकन के लिए पात्र हैं। उम्मीदवारों को नामांकन के समय ‘अविवाहित’ होने का प्रमाण पत्र देना होगा। अग्निवीरों को भारतीय नौसेना में अपने चार साल के पूरे कार्यकाल के दौरान विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। सशस्त्र बलों में सेवा देने के लिए भर्ती किया जाएगा 17.5 से 21 वर्ष की आयु वर्ग के आवेदक भारतीय सेना अग्निवीर भर्ती 2024 में भाग लेने के लिए पात्र हैं। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना शामिल होगा, और केवल चयनित उम्मीदवारों को अग्निपथ योजना के हिस्से के रूप में सशस्त्र बलों में सेवा देने के लिए भर्ती किया जाएगा। केवल 25% को स्थायी कमीशन के तहत जारी रखने की अनुमति इस योजना के अनुसार, अग्निवीर के नाम से जाने जाने वाले कर्मियों को सेना, नौसेना और वायु सेना में चार साल के अल्पकालिक अनुबंध पर भर्ती किया जाता है। कुल वार्षिक भर्तियों में से केवल 25% को स्थायी कमीशन के तहत जारी रखने की अनुमति है। इन जिलों के प्रतिभागी होंगे शामिल यह भर्ती अनूपपुर, बालाघाट, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, मऊगंज, मैहर, रीवा, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और उमरिया के प्रतिभागी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त मप्र और छग के सभी जिलों की महिला अभ्यर्थियों के लिए अग्निवीर महिला मिलिट्री पुलिस (जनरल ड्यूटी) के लिए अग्निवीर भर्ती रैली होगी। रैली का आयोजन 6 से 14 नवंबर तक रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग ग्राउंड में होगा। सीईई में उत्तीर्ण ही देंगे परीक्षा अप्रेल-मई में सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईई) में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी भर्ती रैली में शारीरिक दक्षता एवं अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेंगे। रैली में भाग लेने वाले प्रतिभागी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड 3 अक्टूबर को ई-मेल पर भेज दिया गया है। भर्ती में भाग लेने के लिए सभी अभ्यर्थी को सेना से जारी एडमिट कार्ड और रैली नोटिफिकेशन के दस्तावेज, आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नबर लाना होगा।

मध्य प्रदेश के वन्यप्राणी क्षेत्रों की सीमा चिन्हित करने के लिए डिजिटल बाउंड्री बनाई जाएगी

भोपाल  मध्य प्रदेश के वन्यप्राणी क्षेत्रों की सीमा चिन्हित करने के लिए डिजिटल बाउंड्री बनाई जाएगी। डिजिटल बाउंड्री राजस्व विभाग द्वारा तैयार की जाएगी, जिसमें वनमंडलों के डीएफओ सहयोग करेंगे। राजस्व विभाग अपने कम्प्यूटरीकृत नक्शों में यह डिजिटल बाउंड्री प्रदर्शित करेगा। जिससे पता चलेगा कि वन्यप्राणी क्षेत्रों की सीमा के पास ईको सेंसेटिव जोन एवं राजस्व भूमि कहां तक है। आगामी दो माह के अंदर यह डिजिटल बाउंड्री नक्शे में बना दी जाएगी। यह होगा लाभ इससे यह लाभ होगा कि वन्यप्राणी क्षेत्रों में पर्यटक आवास, रिसोर्ट आदि गतिविधियां स्थापित करने के लिए राजस्व विभाग के कम्प्यूटरीकृत अभिलेखों में डिजिटल बाउंड्री के जरिए देखा जा सकेगा कि कहां इन गतिविधियों को अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए वन एवं राजस्व विभाग के बीच सहमति हो गई है तथा आगामी दो माह के अंदर यह डिजिटल बाउंड्री राजस्व विभाग को अपने कम्प्यूटरीकृत नक्शों में प्रदर्शित करना है। इसलिए पड़ी जरूरत वन विभाग के अंतर्गत 11 नेशनल पार्क, सात टाइगर रिजर्व और 24 वन्यप्राणी अभयारण्यों में इको सेंसेटिव जोन हैं। वन्यप्राणी क्षेत्रों में खनन एवं निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, जबकि ईको सेंसेटिव जोन में निर्माण रेगुलेटेड यानि विनियमित हैं। विवाद से बचा जा सकेगा राजस्व और वन भूमि के विवाद के बीच आमजन तो प्रभावित होते ही है, साथ ही अधिकारी वर्ग भी न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझ जाते हैं। ऐसे में वन क्षेत्र की सीमा तय होने और इसे नक्शे में दर्ज करने से काफी हद तक विवाद की स्थिति से बचा जा सकेगा। इसके अलावा टाइगर रिजर्व और अभयारण्य के सीमा से लगे इको सेंसेटिव जोन में अवैध गतिविधियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। जंगल की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार सतर्क है। यही वजह है कि कमिश्नर, कलेक्टर को ईको सेंसेटिव जोन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। ईको सेंसेटिव जोन की सीमाएं होंगी तय मध्य प्रदेश के ईको सेंसेटिव जोन की सीमाएं अभी तय नहीं है। टाइगर रिजर्व की बाउंड्री (सीमा) के बाहर कुछ जगह एक किलोमीटर और कई जगह तो एक किलोमीटर के अधिक ईको सेंसेटिव जोन है। कुछ सीमाओं में राजस्व क्षेत्र भी लगा हुआ है। यह सीमाएं राजस्व नक्शे और वन विभाग के नक्शे में भी दर्ज है। चूंकि, अधिकतर कार्य ईको सेंसेटिव जोन में प्रतिबंधित हैं, इस वजह से कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। अब ईको सेंसेटिव जोन की सीमा तय कर उसे नक्शे में दर्ज कर डिजिटल बाउंड्री बनाई जाएगी। इसके लिए सेटेलाइट इमेज की मदद ली जाएगी।

मानसून के विदा होते ही प्रदेश में ठंड का आगमन भी शुरू हो जाएगा.

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून लगभग विदा हो चुका है. प्रदेश के 35 जिलों से बारिश पहले ही विदा हो चुकी थी. आखिरकार मौसम विभाग को प्रदेश के अन्य जिलों में बारिश की संभावना नजर आ रही है. मौसम विभाग के मुताबिक 15 अक्टूबर के बाद प्रदेश से मानसून पूरी तरह विदा हो जाएगा. हालांकि आपको बता दें कि हल्की नमी अभी भी आपके आसपास बनी रहेगी. वहीं 12 अक्टूबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल संभाग, सागर और आसपास के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं. इसके बाद प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा. मानसून के विदा होते ही प्रदेश में ठंड का आगमन भी शुरू हो जाएगा. ग्वालियर-चंबल संभाग में सबसे पहले दस्तक देगी ठंड मौसम विभाग के आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद अगले 5-6 दिनों में हल्की ठंड शुरू हो जाएगी. मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि 20 से 21 अक्टूबर तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की ठंड शुरू हो सकती है. जिससे आप शुरुआती ठंड का मजा ले सकेंगे. बता दें कि सबसे पहले उत्तर भारत के राज्यों में ठंड शुरू होगी उसके बाद इन राज्यों से होते हुए मध्य भारत और फिर दक्षिण भारत में ठंड प्रवेश करेगी. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दिवाली के त्योहार से पहले ही प्रदेश में ठंड दस्तक दे सकती है. वहीं उत्तर भारत के कुछ राज्यों में हल्की ठंड शुरू हो चुकी है.     इस दिन से शुरू होगी गुलाबी ठंड मौसम विभाग के मुताबिक एमपी में बारिश अपने आखिरी दौर में है. पश्चिमी मप्र में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है. यहां अब बारिश की संभावना नहीं है. जबकि पूर्वी मप्र में हल्की गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. प्रदेश में बारिश बंद होते ही कड़ाके की ठंड शुरू हो जाएगी. मौसम विभाग के मुताबिक 20 अक्टूबर से रात के तापमान में गिरावट शुरू होगी और रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे आ सकता है, जबकि दिन का तापमान 33-34 डिग्री के बीच बना रहेगा. दिवाली तक भोपाल समेत पूरे प्रदेश में हल्की ठंड रह सकती है.

खरगोन में हुआ अनोखा गरबा आत्मरक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आयोजन

खरगोन मध्य प्रदेश के खरगोन में 5 साल की बच्चियों से लेकर 60 साल की महिलाएं डांडिया की जगह तलवारबाजी सीख रही हैं। वे जोश और उमंग के साथ शस्त्र गरबा कर रही हैं। यह अनोखा गरबा आत्मरक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। खरगोन के मंडी प्रांगण में हो रहे इस गरबा में 21 फीट ऊंची मां जगदम्बे की प्रतिमा स्थापित की गई है। आयोजक पूर्वा व्यास के अनुसार लगभग 250 महिलाओं और बच्चियों ने एक महीने तक प्रशिक्षक सूरजपाल से तलवारबाजी सीखी है। यह शस्त्र गरबा खरगोन में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। गरबा में सिर्फ महिलाएं और बच्चियां लेती हैं हिस्सा यह गरबा रोज रात 8:30 से 11:30 बजे तक सिर्फ महिलाओं और बच्चियों के लिए होता है। सभी को मर्यादित कपड़े पहनकर आना अनिवार्य है। अनुचित वस्त्र पहनकर आने वालों को वापस भेज दिया जाता है। पूर्वा व्यास ने स्पष्ट किया कि फूहड़ता के लिए हमारे गरबे में कोई जगह नहीं है। मां काली और शस्त्रों की पूजा से शुरूआत गरबा की शुरुआत मां काली और शस्त्रों की पूजा से होती है। केवल धार्मिक गीतों पर ही गरबा किया जाता है। पूर्वा व्यास ने बताया कि काली माता के प्रत्येक स्वरूप की विशेषता के मुताबिक हर दिन गरबे किए जाते हैं। सप्तमी को काली मां के रूप धारण कर प्रत्येक गरबा खेलने वाले आए और उन्होंने परफॉर्म किया। संस्कृति और परंपरा से जुड़ेगी नई पीढ़ी पूर्वा व्यास खुद एक मुस्लिम बाहुल्य वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं। उनका कहना है कि आज के समय में महिलाओं और बच्चियों के लिए आत्मरक्षा बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि बच्चियां घर से ममता भाव सीख जाती हैं लेकिन मां काली उन्हें शस्त्र चलाना सिखाती हैं। साथ ही वह इस गरबे को नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का एक जरिया भी मानती हैं।

केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिये तेज़ी से बढ़ते कदम केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया भोपाल केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर 2024 से ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों का सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर का विकास, बुनियादी ढांचे के सुधार और स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका के क्षेत्र में ठोस प्रगति करना है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय गांवों को इस अभियान का लाभ मिलेगा। यहां 43 जनजातीय समुदायों के 18 लाख 58 हजार परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल 93 लाख 23 हजार आबादी इस अभियान से लाभान्वित होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इन जनजातीय गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं। अभियान के प्रमुख लक्ष्य अभियान में सभी जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पात्र जनजातीय परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना और उनके गांवों में सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं का विस्तार किया जायेगा। अधिक से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) की स्थापना की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसी प्रकार जनजातीय क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्र (टीएमएमसी) शुरू करने के प्रयास किये जायेंगे, जिससे जनजातीय परिवारों को उनकी अपनी कला, संस्कृति, चित्रकारी, वनोपज संग्रहण, शहद, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, महुआ से तैयार उत्पादों, जड़ी-बूटी से प्राकृतिक उपचार ज्ञान कौशल की बेहतर मार्केटिंग हो सकें और जनजातियों की उन्हीं के गांव में ही आमदनी बढ़ाई जा सके। इससे जनजातियां पलायन भी नहीं करेंगी। अभियान में 25 प्रकार की नागरिक सेवाएं/सुविधाएं जनजातीय समुदायों को प्रदान की जाएंगी, जो 18 लाइन मंत्रालयों/विभागों के द्वारा संचालित की जाएंगी। ये मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के लिए विभागीय विकास कार्ययोजना (DAPST) के तहत अपनी बजट राशि से पांच वित्त वर्षों (2024-25 से 2028-29) तक जनजातीय क्षेत्रों में विकासमूलक काम करेंगे। केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास, जल शक्ति, विद्युत, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, दूरसंचार और जनजातीय कार्य मंत्रालय/विभाग इस अभियान में प्रमुख रूप से शामिल होंगे। अभियान के लिय मध्यप्रदेश ने की है बड़ी तैयारी मध्यप्रदेश ने इस अभियान का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए तेजी से तैयारी की है। सितंबर माह में अभियान की रूपरेखा तैयार होते ही राज्य सरकार ने 1226 करोड़ रुपये लागत के कार्य प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिये हैं। इस राशि से जनजातीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, गांव-गांव तक पहुंच रोड और कौशल विकास प्रशिक्षण के जरिये रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग डॉ. ई. रमेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार इस अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में अधिकाधिक मात्रा में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्रों की स्थापना के लिए विशेष प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार के 18 मंत्रालय और विभागों द्वारा जनजातीय समुदायों के लिए विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर और पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन के माध्यम से पात्र गांवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करेगा, जबकि ऊर्जा मंत्रालय अविद्युतीकृत गांवों और बसाहटों में बिजली पहुंचाने का कार्य करेगा। यह अभियान केंद्र सरकार के समग्र विकास के प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें प्राथमिकता के आधार पर जनजातीय समुदायों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में जनजातीय आबादी के समग्र विकास के लिए ठोस कार्य किए जाएंगे। अभियान के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश की जनजातीय आबादी को बुनियादी सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा। इससे इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, जो समग्र राष्ट्रीय विकास में अहम योगदान देगा।  

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे

नवरात्रि पर बेटियों-बहनों के सम्मान का संकल्प लें : शिवराज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आवास पर कन्या भोज का आयोजन किया केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भोपाल स्थित आवास पर नवरात्रि की अष्टमी-नवमी के अवसर पर कन्या भोज का आयोजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ कन्याओं का पूजन किया और उन्हें भोजन कराया। संवाददाताओं से चर्चा करते हुए चौहान ने कहा, “संपूर्ण देश नौ दिन तक श्रद्धा और भक्ति के भाव में डूबा था। हमने देवी मां की पूजा की और आज मां से यही प्रार्थना है कि वह सब पर कृपा और आशीर्वाद की वर्षा सदैव करती रहें।” केंद्रीय कृषि मंत्री ने दुर्गा सप्तशती का उल्लेख करते हुए कहा, “माता कहती हैं कि समस्त बेटियां, स्त्रियां मेरा ही अंश है और इसलिए संपूर्ण देशवासियों से मेरी प्रार्थना है कि बेटी का आदर करें, सम्मान करें।” बीते कुछ दिनों में मासूम बालिकाओं से लेकर महिलाओं के साथ हुई घटनाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा, “कुछ घटनाएं आहत करती हैं, मन को उद्वेलित करती हैं और पूरा समाज शर्मसार हो जाता है। आज संकल्प लेने का समय है कि हम मन, वचन और कर्म से बेटियों की पूजा करेंगे, उनका आदर करेंगे, बहनों का सम्मान करेंगे, समाज में उनका उचित स्थान देंगे।” कृषि मंत्री चौहान ने अपने आवास पर आयोजित कन्या भोज का जिक्र करते हुए कहा, “आज जब बेटियों के साथ आरती की, देवी मां की पूजा की, बेटियों की आरती उतारी, उस समय मुझे और धर्मपत्नी साधना को लग रहा था जैसे हम साक्षात देवी मां की आरती कर रहे हों और बेटियों को भोजन कराया तो लग रहा था जैसे साक्षात मां ही भोजन कर रहीं हो।”    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन, प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी पर्व की बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे भारतीय पर्व उमंग और उल्लास के प्रतीक होते हैं। इस वर्ष प्रदेश में दशहरा पर्व सरकार और समाज मिलकर धूमधाम के साथ मनाएंगे और शस्त्र-पूजन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष का दशहरा पर्व महिला सशक्तिकरण और सुशासन की प्रतीक देवी अहिल्याबाई को समर्पित रहेगा। देवी अहिल्याबाई ने देश भर में जन-कल्याण के अनेक महती कार्य संपन्न करवाए। इन कार्यों की स्मृति और देवी अहिल्याबाई के योगदान से आज की पीढ़ी को अवगत करवाने और उनके सम्मान में दशहरा पर्व पर शस्त्र-पूजन के कार्यक्रम होंगे। मंत्री, सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी करेंगे अपने क्षेत्रों में शस्त्र-पूजन मुख्यमंत्री डॉ.यादन ने कहा कि इस दशहरा पर्व पर भारत की प्राचीन शस्त्र-पूजन परंपरा में सरकार के मंत्रीगण सहित सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में पुलिस शस्त्रागार, कोतवाली और थानों में होने वाले शस्त्र-पूजन एक विभाग तक सीमित न होकर जनता का पर्व बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं देवी अहिल्याबाई की राजधानी रही महेश्वर और उनकी छावनी रही इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे। अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम अहिल्याबाई की 300वीं जयंती का वर्ष मना रहे हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श है। वे एक तपोनिष्ठ, धर्मनिष्ठ और कर्मनिष्ठ शासक, प्रशासक रही है। उनसे हम सबको प्रेरणा लेना चाहिये। देवी अहिल्याबाई ने धर्म के भाव के साथ शासन व्यवस्था चलाने का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका धर्म तथा राज्य व्यवस्था में विशेष महत्व है। उनका मुख्य ध्येय था कि उनकी प्रजा कभी भी अभावग्रस्त और भूखी नहीं रहे। उनके सुशासन की यशोगाथा पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने समाज-सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। अहिल्याबाई हमेशा अपनी प्रजा और गरीबों की भलाई के बारे में सोचती थी, साथ ही वे गरीबों और निर्धनों की हरसंभव मद्द के लिए हमेशा तत्पर रहती थी। उन्होंने समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति पर भी खासा काम किया और उनके लिए उस वक्त बनाए गए कानून में बदलाव भी किया था।  

कार्य में लापरवाही एवं अनियमितता बरतने पर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने 39 आउटसोर्स कर्मचारी किए ब्लैक लिस्ट

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कार्य में लापरवाही और अनियमितता बरतने के चलते कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल ग्रामीण, रायसेन, नर्मदापुरम ग्रामीण, भिंड, गुना एवं शिवपुरी में बाह्यस्त्रोत एजेंसी के माध्यम से कार्यरत 39 आउटसोर्स कार्मिकों को सेवाओं से पृथक करते हुए ब्लैक लिस्ट किया है। कंपनी द्वारा ब्लैक लिस्ट किये गए 39 आउटसोर्स कार्मिक अब कंपनी कार्यक्षेत्र के किसी भी बिजली कार्यालय में कार्य नहीं कर सकेंगे। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल ग्रामीण वृत्त में कार्यरत 3, नर्मदा पुरम ग्रामीण में 3 आउटसोर्स कार्मिकों के साथ ही  भिंड में 6, गुना में 15, रायसेन में 1 तथा शिवपुरी वृत्त में कार्यरत 11 आउटसोर्स कर्मचारियों को लापरवाही और अनियमितता बरतने के कारण सेवा से पृथक कर ब्लैक लिस्ट किया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने सचेत किया है कि कार्य में पारदर्शिता, लगन, निष्ठा और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनी में जीरो टोलरेंस की नीति लागू है और सभी मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ता सेवाओं और कंपनी की उत्तरोत्तर तरक्की के लिए निरन्तर प्रयास करते रहें।

मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन में कन्याओं के पांव पखारे, मातारानी से सभी के लिए मंगलमय और सुखमय जीवन के लिये की प्रार्थना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शारदीय नवरात्र की महानवमी पर मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन और कन्या-भोज की सनातन परंपरा का पालन किया। मातृ-शक्ति के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रदर्शित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज नौ दुर्गा स्वरूपा कुंवारी कन्याओं के पांव पखारे और उनका विधि-विधान से पूजन किया। उन्होंने श्रद्धापूर्वक कन्याओं को चुनरी ओढ़ाई और आरती उतारी। पूजन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्याओं से संवाद कर उन्हें दुलारा भी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या-पूजन के बाद कन्याओं को स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा और उनकी रूचि के अनुरूप मिष्ठान भी खिलाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या भोज के बाद सभी कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोक्षदायिनी मां सिद्धिदात्री के चरणों में शत-शत प्रणाम कर प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मातारानी से सभी को संकल्प सिद्धि के असीम आशीर्वाद के साथ मंगलमय और सुखमय जीवन की प्रार्थना भी की।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजभवन में कन्या-पूजन किया

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजभवन में कन्या-पूजन किया प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल महा नवरात्रि पर्व पर राजभवन के कर्मचारियों के साथ परिसर स्थित मंदिर में कन्या-पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश और देश के विकास और निवासियों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजभवन परिसर स्थित मंदिर में माँ दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की। हवन एवं पूर्णाहूति कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्यपाल पटेल ने कन्याओं को तिलक लगाकर अभिनंदन किया और उपहार भेंट किए। कार्यक्रम में राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।  

मंत्री विजयवर्गीय बोलेआने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है, बंटोगे तो कटोगे

इंदौर इंदौर में गुरुवार रात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है बंटोगे तो कटोगे। आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है। दरअसल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार रात बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती द्वारा आयोजित सादगी गरबा महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि मैं फिर कह रहा हूं आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चो के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है, और जिस प्रकार कुछ राजनीतिक दल तुष्टिकरण की नीति के कारण देश में अशांति फैलाने वाले लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। इसलिए बहुत जरूरी है की हम सनातन धर्म के साथ चले। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है “बंटोगे तो कटोगे” और हरियाणा की जानता ने बता दिया नहीं बाटेंगे। इसलिए आप सब से भी निवेदन हैं, गंभीरता के साथ विचार करें, चिंतन करें हमारे धर्म, हमारी परंपरा, हमारी आध्यात्मिक शक्ति, हमारे धर्म गुरु और हमारे धर्म ग्रंथ विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने आगे कहा कि विश्व को शांति का मार्ग कोई दिखा सकता है तो वह भारत हैं। ये कट्टरवाद ने सारे दुनियां में युद्ध के माध्यम से अशांति और अराजकता फैला दी हैं। दो महीनें पहले कहा था- 30 साल बाद देश में गृहयुद्ध की स्थिति मंत्री विजयवर्गीय ने लगभग 2 महीने पहले सामाजिक समरसता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था की मैं कुछ दिन पहले एक मिलिट्री के रिटायर ऑफिसर के साथ बैठा था, उन्होंने कहा की 30 साल बाद देश के अंदर गृह युद्ध प्रारंभ हो जाएगा। जिस प्रकार से हमारे देश की डेमोग्राफी बदल रही है उस पर हमें विचार करना चाहिए। हिंदू शब्द कैसे मजबूत हो इसके लिए हमें काम करना होगा। होली, दीपावली, राखी, भगवान परशुराम, महाराणा प्रताप हम सब के हैं। महाराणा प्रताप ने हिंदू समाज को बचाने के लिए मुगलों के सामने संघर्ष किया। देश के त्योहार सभी धर्म के त्योहार है, हमे हमारी सोच बदलना होगी। विजयवर्गीय ने आगे कहा था कि अंग्रेजों ने एक ही काम किया है फूट डालो और राज करो। अंग्रेज चले गए लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे है जो अंग्रेजों का प्रतिनिधित्व करते हैं और फूट डालो और राज करो की नीति पर काम करते हैं। वो भी सिर्फ कुर्सी के लिए। उनको कुर्सी चाहिए। आज के समय पर कुछ लोग समाज को जाति के आधार पर बांट रहे हैं। देश ताकतवर बने इसके लिए समाज को ताकतवर बनाना जरूरी है। समाज ताकतवर बने इसके लिए जातिवाद के बंधन से मुक्त होना पड़ेगा।

ट्रांसपोर्ट कंपनी पर कोर्ट ने लगाया एक करोड़ से अधिक राशि का जुर्माना

भोपाल दिसंबर 2018 में इंदौर भोपाल हाईवे पर एक निजी बस ने स्कॉर्पियो गाड़ी को टक्कर मारी थी. इस हादसे में गाड़ी में सवार महिला व बाल विकास परियोजना के अधिकारी रंजीत धर्मराज की मौके पर मौत हो गई थी. जिसके बाद परिजनों ने न्याय के लिए न्यायलय का रुख किया था. अब 5 साल बाद इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है. कंपनी परिजनों को एक करोड़ से अधिक राशि का करें भुगतान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश खंडेलवाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि रंजीत धर्मराज महिला व बाल विकास विभाग में परियोजना अधिकारी के पद पर पदस्थ थे और अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से इंदौर से भोपाल जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में सोनकच्छ के पास वर्मा ट्रेवल्स की बस ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी. इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए परिजनों को एक करोड़ से अधिक की मुआवजा राशि देने के नोटिस जारी किया है. न्यायालय ने कहा कि गलती बस का संचालन कर रही निजी कंपनी की है. इस स्थिति में क्षतिपूर्ति के रूप में बीमा कंपनी परिजनों को भुगतान करें. बिना परमिट इंदौर-भोपाल रूट पर दौड़ रही थी निजी कंपनी की बस बता दें कि जब अधिकारी रंजीत धर्मराज की स्कॉर्पियो गाड़ी को वर्मा बस ने टक्कर मारी थी, उस दौरान बस में परमिट नहीं था और परमिट के इस बस का संचालन किया जा रहा था. इतना ही नहीं रूट परमिट ना होने के बाबजूद ये बस इंदौर-भोपाल रूट पर दौड़ रही थी.

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