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अरावली हमारी धरोहर है उसे…यमुना एक्सप्रेसवे पर 6 जिलों की महापंचायत में राकेश टिकैत ने भरी हुंकार

Aravalli is our heritage, Rakesh Tikait roared at the Mahapanchayat of 6 districts on Yamuna Expressway. जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से नाराज चल रहे किसानों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आया। यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर बड़ी संख्या में किसान एकजुट हुए और अधिकारियों को साफ कहा कि अब वादों से काम नहीं चलेगा, अब हमें ठोस फैसला चाहिए। भारतीय किसान यूनियन की इस महापंचायत में छह जिलों से किसान शामिल हुए। सभी किसानों ने एक सुर में मुआवजे और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं इस महापंचायत में राकेश टिकैत की मौजूदगी ने माहौल को और गर्मा दिया। इसी दौरान राकेश टिकैत ने सराकार को समाधान के लिए 14 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है और अरावली विवाद पर भी बयान देते हुए चेतावनी दी है। पांच घंटों तक चली महापंचायतसोमवार सुबह यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा और आगरा जिले के किसान बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए। किसानों की यह महापंचायत पांच घंटों तक चली, जिसमें इकट्ठे हुए सभी किसानों ने अपनी मांगें खुलकर रखीं। किसानों का कहना था कि अधिकारियों ने विकास के नाम पर उनसे जमीन तो ले ली, लेकिन उसके बदले उन्हें जो हक मिलना चाहिए था, वह अभी तक अधूरे हैं। इसी नाराजगी की वजह से किसानों ने प्रशासन और प्राधिकरणों के खिलाफ आवाज उठाई। किसानों ने क्या-क्या मांगें रखीं?महापंचायत में किसानों ने साफ कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण इलाके में जिन किसानों की जमीन ली गई है, उन किसानों को 64.7% ज्यादा मुआवजा दिया जाए और जमीन के प्राइस यानी सर्किल रेट भी बढ़ाए जाएं। साथ ही किसानों ने यह भी मांग की कि जिन लोगों ने नोएडा एयरपोर्ट और फैक्ट्रियों के लिए जमीन दी, उनके बच्चों को पढ़ाई और योग्यता के हिसाब से पक्की नौकरी भी दी जाए। इसके साथ ही 10% विकसित भूखंड देने, आबादी निस्तारण जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया। किसानों ने इन मुद्दों का प्राथमिकता के साथ हल किए जाने की मांग की। राकेश टिकैत ने दी चेतावनी और कहा अरावली हमारी धरोहर हैराकेश टिकैत ने सरकार और प्राधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों को सालों से सिर्फ आस्वासन ही दिया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर 14 जनवरी तक समाधान नहीं होगा, तो किसान लखनऊ कूच करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन देने वाले किसानों को नौकरी और बसने का पूरा हक मिलना चाहिए।इतना ही नहीं, हाल ही में अरावली को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है और मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर भी उन्होंने बयान दिया और कहा कि अरावली हमारी धरोहर है और अगर इसे किसी को भी नष्ट नहीं करने देंगे। अगर फिर भी किसी ने कोशिश की, तो हम इसे बचाएंगे और जरूरत पड़ी तो प्रदर्शन करेंगे और वहीं जाकर बैठ जाएंगे। अधिकारियों ने किसानों से की बातचीतमहापंचायत के दौरान जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरणों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और किसानों से सीधे बातचीत की। एडीएम एलए बच्चू सिंह, यमुना प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी ने वहा किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी। अधिकारियों ने कहा कि किसानों से जुड़े मामलों का समाधान एक प्रक्रिया के अनुसार चल रहा है। सर्किल रेट बढ़ाने को लेकर भी काम चल रहा है और इस पर नए साल में फैसला किया जा सकता है। राकेश टिकैत ने किया ऐलानअधिकारियों से बातचीत के दौरान रोकेश टिकैत ने साफ कहा कि नोएडा एयरपोर्ट लगभग तैयार हो चुका है और उन्हें अभी तक न तो उन्हें 64.7% मुआवजा दिया गया है और न ही नौकरी या मकान बनाने के लिए जमीन के बदले कोई हक दिया गया है। उनका मानना है कि एक बार एयरपोर्ट चालू हो गया तो किसानों की आवाजें और कम कर दी जाएंगी, इसलिए अब चुप बैठने का समय नहीं है। टिकैत ने ऐलान किया कि सराकर ने मांगे नहीं मानी तो 22 जनवरी के बाद लखनऊ की तरफ ट्रैक्टर मार्च किया जाएगा।इस मार्च में एक ट्रैक्टर और करीब 10 लोग शामिल होंगे। आगे उन्होेंने कहा कि किसान 15 दिन का राशन लेकर जाएंगे और वहीं डेरा लगाएंगे। उन्होंने कहा कि जनवरी में प्रयागराज में होने वाले शिविर में आंदोलन की आगे की प्लानिंग की जाएगी।

Kakori conspiracy:4600 रुपये की काकोरी ट्रेन लूट का क्या है सच, फांसी पर चढ़ने वाले Ram Prasad Bismil और अश्फाक उल्ला ने क्या देखा था सपना?

Kakori conspiracy: What is the truth behind the Kakori train robbery of Rs 4600? What did the hanged Ram Prasad Bismil and Ashfaqulla dream about? Kakori conspiracy / काकोरी के शहीद : राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) , अशफाक उल्ला खान (Ashfaqulla Khan) और रोशन सिंह की शहादत को 98 साल पूरे हो गए। काकोरी कांड को अंजाम देने के लिए 19 दिसंबर 1927 ((Kakori Kand) को तीन लोगों राम प्रसाद बिस्मिल, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दी गई थी। Ram Prasad Bismil : काकोरी कांड को जोगेशचन्द्र चटर्जी, प्रेमकृष्ण खन्ना, मुकुन्दी लाल, विष्णुशरण दुबलिश, सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य, रामकृष्ण खत्री, मन्मथनाथ गुप्त, राजकुमार सिन्हा, ठाकुर रोशन सिंह, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, गोविन्दचरण कर, रामदुलारे त्रिवेदी, रामनाथ पाण्डे, शचीन्द्रनाथ सान्याल, भूपेन्द्रनाथ सान्याल, और प्रणवेश कुमार चटर्जी ने मिलकर अंजाम दिया। उनपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। नीचे की फोटो में अशफाउल्ला खान (Ashfaqulla Khan) की तस्वीर नहीं है। राजेंद्र लहरी को 17 दिसंबर 1927 को दी गई थी फांसी98 Years of Kakori Kand: राजेंद्र लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई, जबकि दो दिन बाद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह को फांसी की सजा दी गई थी। वहीं चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से लड़ते हुए खुद को गोली मारकर जान दे दी। क्या काकोरी कांड सिर्फ पैसों की लूट था?प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम बताते हैं कि लोग यह गलतबयानी करते हैं कि क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों की आर्थिक हालत खराब हो चुकी थी और उनके पास पहनने तक के साबूत कपड़े भी नहीं बचे थे। वह सुधीर विद्यार्थी के हवाले से कहते हैं, ‘याद रहे सरकारी ख़ज़ाने को लूटने के पीछे का उद्देश्य हथियार व गोला-बारूद खरीदना नहीं था बल्कि एक छापाखाना स्थापित करना था ताकि समाजवादी साहित्य छाप कर नौजवानों, मज़दूरों, किसानों और बुद्धजीविओं के बीच प्रसारित किया जा सके।’ काकोरी ट्रेन कांड को कौन कर रहा था लीड?काकोरी उत्तर प्रदेश में लखनऊ से 17.5 किलोमीटर की दूरी पर एक छोटा सा रेलवे स्टेशन था। राम प्रसाद बिस्मिल ने ट्रेन लूटने की योजना बनाई। उन्होंने इस काम के लिए नौ क्रांतिकारियों का चयन किया। उनके अलावा इस मुहिम में राजेंद्र लाहिड़ी, रोशन सिंह, सचींद्र बख्शी, अशफ़ाक़उल्ला ख़ां, मुकुंदी लाल, मन्मथनाथ गुप्त, मुरारी शर्मा, बनवारी लाल और चंद्रशेखर आज़ाद शामिल थे। 4600 रुपये का मिथक?राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में लिखा, ‘कुली गार्ड के डिब्बे में रखे लोहे के संदूक उतार रहा था। उसमें ना ही जंजीर और ना ही ताले लगे होते हैं। बस उसी दिन मैंने यह तय कर लिया कि इसी को लूटना है। क्रांतिकारियों ने यह तय किया ट्रेन में यात्रा कर रहे किसी यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस काम के लिए क्रातिकारियों ने 8 अगस्त 1925 का दिन मुकर्रर किया, पर वो ट्रेन स्टेशन से छूटने के 10 मिनट बाद स्टेशन पहुंच पाए। 8 डाउन से लूटे थे 4600 रुपये8 अगस्त को योजना में कामयाबी नहीं मिलने के बाद उन्होंने यह तय किया अब इस काम को वे 9 अगस्त को अंजाम देंगे। अगले दिन वे चार माउज़र पिस्तौलें और रिवॉल्वर लेकर ट्रेन में सवार हुए और लखनऊ से शाहजहांपुर रूट पर 8 डाउन में सवार हो गए। काकोरी में ट्रेन की चेन खींची और लोहे का बक्सा उतार लिया। इस बक्शे में सिर्फ 4600 रुपये थे। क्रांतिकारियों पर कौन-कौन सी लगाई गई थीं धाराएंकाकोरी षड्यंत्र के बाद अंग्रेजी सरकार क्रांतिकारियों के पीछे कुत्तों की तरह पीछे लग गई। इस कांड को अंजाम देने वालों पर भारतीय दंड संहिता के तहत 121 A, 120B, 396 की धाराएं लगाई गईं। अंग्रेजी सरकार ने रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र लहरी, रोशन सिंह, और अशफ़ाक़उल्ला ख़ां को राजद्रोह और षड्यंत्र रचने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई। बिस्मिल ने फंदे पर झूलने से पहले कहा था- ‘आई विश डाउनफाल ऑफ ब्रिटिश इम्‍पायर’। उन्होंने ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’ और ‘अंग्रेजी सरकार मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए थे। देश पर जान न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी यह मानते थे कि अंग्रेजी शासन तानशाही के रास्ते पर चल रही है और उन्हें तानाशाही व्यवस्था का अंत करना है। भारतीय कम्युनिस्टों से अश्फाक उल्ला ने की थी ये अपील सुधीर विद्यार्थी अपनी किताब ‘अशफ़ाकुल्लाह और उनका युग’ में लिखते हैं, ‘कम्युनिस्ट ग्रुप से अशफ़ाक़ की गुज़ारिश है कि तुम इस गैर-मुल्क की तहरीक को लेकर जब हिन्दुस्तान में आए हो तो तुम अपने को गैर-मुल्की ही तस्सवुर करते हो, देसी चीज़ों से नफ़रत, विदेशी पोशाक और तर्ज़-ए- मआशरत (जीने का अंदाज़) के दिल दादा हो, इस से काम नहीं चलेगा, अपने असली रंग में आ जाओ। देश के लिए जियो, देश के लिए मरो। मैं तुम से काफ़ी तौर पर मुत्तफ़िक़ (सहमत) हूं और कहूंगा कि मेरा दिल ग़रीब किसानों के लिए और दुखिया मज़दूरों के लिए हमेशा दुखी रहा है।’ किसानों और मजदूरों की हालत पर रोते थे अश्फाक उल्लासुधीर लिखते हैं, ‘मैं ने अपने आयाम-ए-फ़रारी (पुलिस से छुपकर रहने वाला काल) में भी अक्सर इनके हालात देखकर रोया किया हूं क्योंकि मुझे इनके साथ दिन गुज़रने का मौक़ा मिला है। मुझ से पूछो तो मैं कहूंगा कि मेरा बस हो तो मैं दुनिया की हर चीज़ इन के लिए वक़्फ़ (सुरक्षित) कर दूं। हमारे शहरों की रौनक़ इनके दम से है। हमारे कारखाने इन की वजह से आबाद और काम कर रहे हैं। हमारे पम्पों से इनके हाथ ही पानी निकालते हैं। ग़रज़ की दुनिया का हर एक काम इनकी वजह से हुआ करता है। गरीब किसान बरसात के मूसलाधार पानी और जेठ-बैसाख की तपती दोपहर में भी खेतों पर जमा होते हैं और जंगल में मंडराते हुए हमारी खुराक का सामान पैदा करते हैं। यह बिल्कुल सच है कि वह जो पैदा करते हैं, जो वह बनाते हैं, उनमें उनका हिस्सा नहीं होता। वह हमेशा दुखी और मुफ़लिस-उल-हाल (दरिद्र) रहते हैं। मैं इत्तेफ़ाक़ करता हूं कि इन तमाम बातों के ज़िम्मेदार हमारे गोरे आक़ा और उनके एजेंट हैं।’ क्या शहीदों के सपने हुए पूरे? आईआईटी, बंबई में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के पूर्व प्रोफेसर और वर्तमान समय में सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेकुलरिज्म (सीएसएस) की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष राम पुनियानी क्रांतिकारियों के विचारों से सहमति जताते हुए कहते हैं … Read more

Gold Silver Rupee: सोना 7 हफ्ते के हाई पर, चांदी 2 लाख के करीब; रुपया 90.56 के नए निचले स्तर पर फिसला

Gold Silver Rupee: Gold at 7-week high, silver nears 2 lakh; Rupee slips to new low of 90.56 घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सोना साढ़े सात हफ्तों के उच्च स्तर के करीब बना रहा। एमसीएक्स पर फरवरी सोने का वायदा 0.02% की हल्की बढ़त के साथ ₹1,32,496 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यह बढ़त अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती के बाद बने सकारात्मक रुझान का विस्तार है। इसके उलट, मार्च सिल्वर वायदा में रिकॉर्ड स्तरों के पास प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली, और यह 0.54% गिरकर ₹1,97,861 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। चांदी हाल ही में ₹2 लाख प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची थी। बुलियन में यह उतार-चढ़ाव कमजोर डॉलर इंडेक्स, वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अस्थिरता और फेड की नीति के बाद निवेशकों की सोने-चांदी में बढ़ती दिलचस्पी के बीच देखने को मिल रहा है।पिछले सत्र में तेज बढ़तवहीं गुरुवार के कारोबार में सोना और चांदी दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती के साथ बंद हुए। गोल्ड फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 2.06% की बढ़त के साथ ₹1,32,469/10 ग्राम पर सेटल हुआ। सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट 5.41% उछलकर ₹1,98,942 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी ने बनाया नया रिकॉर्डफेड की नीतिगत बैठक के बाद मिले संकेतों खासतौर पर 25 आधार अंकों की कटौती से कीमती धातुओं में मजबूत खरीद देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना रही है, जबकि सोना सात सप्ताह की ऊंचाई पर है।रुपये अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचावहीं शुक्रवार सुबह रुपये में भारी कमजोरी देखने को मिली और यह 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी फंड के लगातार बहिर्वाह ने बाजार भावनाओं को कमजोर किया है।कीमती धातुओं की तेजी को लेकर विशेषज्ञों की रायकीमती धातुओं में हालिया तेजी पर टिप्पणी करते हुए पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि मजबूत फंडामेंटल्स आने वाले सत्रों में भी सोना और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजारों में रुपये की कमजोरी भी बुलियन को समर्थन प्रदान कर रही है। जैन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,040 प्रति औंस और चांदी $57.70 प्रति औंस के मुख्य सपोर्ट स्तरों को बनाए रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आज के सत्र में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। डॉलर इंडेक्स में हलचल, वैश्विक वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार दिशा खोजेगा।घरेलू बाजार में सोने के दामदिल्ली22 कैरेट (स्टैंडर्ड गोल्ड): ₹99,168 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट (शुद्ध सोना): ₹1,06,784 प्रति 8 ग्राममुंबई22 कैरेट: ₹99,160 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट: ₹1,06,720 प्रति 8 ग्राम

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

The government will not give the 21st installment to these farmers, know immediately नई दिल्ली। देश की तमाम राज्य सरकारें अपने नागरिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं। इनमें कई योजनाएं सीधे किसानों के लिए होती हैं। छोटे और सीमांत किसान अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उन्हें सरकारी मदद की जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई है। ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। पीएम-किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 20 किस्तें भेजी जा चुकी हैं। सरकार की ओर से 4 महीनों के अंतराल किस्त की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती रही है। योजना का मकसद छोटे किसानों को आर्थिक राहत देना और उनकी खेती से जुड़ी जीवनशैली में सुधार लाना है। इससे किसान अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। अब कई किसान 21वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सभी इसके पात्र नहीं होंगे। कुछ किसानों के खाते में किस्त नहीं जाएगी। क्योंकि उनके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं हैं। ऐसे किसानों को यह काम करने की जरूरत है। जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके।आपको बता दें 21वीं किस्त का लाभ कई किसानों को नहीं मिलेगा। जिन किसानों ने अब तक ई-केवाईसी और भूसत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। उनके खाते में पैसे नहीं आएंगे। इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है। तभी 21वीं किस्त का लाभ मिल पाएगा। इसलिए जिन किसानों ने अबतक यह काम नहीं करवाया है। उन्हें तुरंत अपने दस्तावेज अपडेट करने की जरूरत है। ई-केवाईसी पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा कर सकते हैं। और अपने भूसत्यापन के लिए भूलेख रिकॉर्ड की वेबसाइट या विभाग जाना होगा। इसके अलावा 21वीं किस्त पाने के लिए जरूरी है कि बैंक खाता, आधार कार्ड और नाम की जानकारी सही हो। अगर कोई जानकारी अधूरी या गलत पाई जाता है तो भुगतान नहीं होगा। अगर आपने भी नहीं करवाया यह काम तो तुरंत करवा लें।

आर्मी चीफ की चेतावनी: इस बार ऐसा जवाब देंगे कि पाकिस्तान का अस्तित्व खत्म हो जाएगा

Army Chief’s warning: This time we will give such a reply that Pakistan will cease to exist. नई दिल्ली। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बीकानेर मिलिट्री स्टेशन सहित सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया। यहां उन्होंने सैनिकों की तत्परता की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी कि ऑपरेशन सिंदूर 1ण्0 में दिखाया गया संयम अब दोहराया नहीं जाएगा।जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस बार हम कुछ ऐसा करेंगे कि पाकिस्तान को सोचना पड़ेगा कि क्या वह नक्शे में बने रहना चाहता है या नहीं। अगर पाकिस्तान नक्शे में बने रहना चाहता है, तो उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद बंद करना होगा। यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा संदेश है।जनरल उपेंद्र द्विवेदी बीकानेर पहुंचे तो सबसे पहले फ ॉरवर्ड एरिया का दौरा किया। यहां उन्होंने सैनिकों की ऑपरेशनल रेडीनेस चेक की। रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी इलाके में काम करने वाले सैनिकों की मुश्किलें जानकर वे प्रभावित हुए। उन्होंने वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, पूर्व सैनिकों, सिविल अधिकारियों और जवानों से बात की।आतंकवाद पर कोई नरमी नहींउन्होंने सभी रैंकों के सैनिकों से कहा कि तकनीक को अपनाओ, ताकि हम हमेशा तैयार रहें। जनरल द्विवेदी ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर 1.0 में भारत ने बहुत संयम दिखाया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस बार हमारा जवाब ऐसा होगा कि पाकिस्तान को अपनी अस्तित्व पर सवाल उठाना पड़ेगा। अगर वह नक्शे में बने रहना चाहता है, तो आतंकवाद तुरंत बंद करेण् यह बयान सीमा पर तनाव को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है। जनरल ने जोर देकर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है। पूर्व सैनिकों को सम्मान: राष्ट्र निर्माण में योगदान की सराहनाजनरल द्विवेदी ने बीकानेर के पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया। उन्होंने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल केहेम सिंह शेखावत, लेफ्टिनेंट कर्नल बीरबल बिश्नोई, रिसालदार भंवर सिंह और हवलदार नाकत सिंह को राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करते हैं। युद्धक्षेत्र में वर्चस्व बनाए रखने में मदद करते हैं।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की योजना अधूरी, बेटियों का बड़ा बजट नहीं हुआ इस्तेमाल

The ‘Save the Girl Child, Educate the Girl Child’ scheme remains incomplete, with a large budget for girls. भोपाल। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना को सरकार पलीता लगा रही है। इस योजना का स्वीकृत फंड का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हुआ। जमीनी क्रियान्वयन और बालिकाओं तक योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा है।बेटियों की कम हो रही संख्या को समान अनुपात में लाने के लिए सरकार की ओर से हर स्तर पर प्रयास किए जाते हैं, लेकिन उनका ग्राउंड जीरो पर असर दिखाई नहीं देता है। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गिरते लिंगानुपात को रोकना, कन्या भ्रूण हत्या पर से लगाना तथा बालिकाओं की शिक्षा और शारीरिक एवं मानसिक विकास से जुड़े कार्यों को गति देना है। यह योजना निश्चित तौर पर बदलाव ला सकती है, लेकिन संचालन के तौर तरीके इस योजना को आगे नहीं बड़ा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस योजना के तहत पिछले ग्यारह वर्षों में स्वीकृत राशि में से करीब एक तिहाई राशि का इस्तेमाल नहीं हो पाया है। वर्ष 2024-25 (31 दिसंबर तक) में तो सबसे कम करीब 13 फीसद राशि ही खर्च हो पाई। ऐसे में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी सफलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। भ्रूण परीक्षण जैसे गैरकानूनी और अनैतिक कृत्य भी तकनीक के दुरुपयोग का ही परिणाम है। देश में लिंगानुपात गड़बड़ाने का एक कारण भ्रूण परीक्षण भी है। हालांकि इस पर कानूनन प्रतिबंध है, लेकिन चोरी-छिपे भ्रूण परीक्षण कराने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं।हमारे समाज की रूढ़िवादी मानसिकता भी इसके लिए जिम्मेदार है। बेटे को प्राथमिकता और बेटियों को परिवार पर बोझ समझने की प्रवृत्ति आज भी मौजूद है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में समाज की इस सोच को बदलने का आह्वान भी शामिल है। इसके क्रियान्वयन में लापरवाही देखी जा रही है। जब इस योजना के तहत स्वीकृत धनराशि का एक बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया जा रहा है, इससे कई बालिकाओं तक इसका लाभ पहुंचा हीं नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले ग्यारह वर्षों में इस योजना के तहत स्वीकृत धनराशि का 100 फीसद इस्तेमाल कभी नहीं हो पाया। जबकि योजना के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने, उनमें खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, पोषण कार्यक्रम, स्वास्थ्य सुविधाएं और शौचालय के निर्माण जैसे कार्यों पर किया जाता है। जिला स्तर पर इस योजना को लागू करने के लिए धनराशि राज्य सरकार के माध्यम से प्रदान की जाती है। हकीकत यह भी सामने आई है कि कई जगह पोस्टर और नारों जैसे कार्यों पर ही अधिक राशि खर्च की गई है, जबकि बालिका शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर वास्तविक खर्च सीमित रहा। इससे साफ है कि इस योजना को जमीन पर उतारने में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए, तभी यह योजना आगे बढ़ पाएगी।

कुतुब मीनार का बंद दरवाज़ा: 1981 की भगदड़ में 45 मौतें, क्यों 44 साल से पर्यटकों के लिए बंद है प्रवेश?

Why are the doors of Qutub Minar closed for 44 years: Read the report नई दिल्ली। Qutub Minar of closed door यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल दक्षिण दिल्ली के महरौली क्षेत्र का कुतुब कॉम्प्लेक्स हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। दुनिया की सबसे ऊँची ईंट से बनी मीनार कहे जाने वाली कुतुब मीनार केवल स्थापत्य कला और ऐतिहासिक वैभव का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि इसके भीतर एक ऐसा दर्दनाक अतीत भी छिपा है, जिसने इसकी पहचान को हमेशा के लिए बदल दिया। 1981 में हुए एक हादसे ने इस स्मारक के दरवाजे जनता के लिए स्थायी रूप से बंद कर दिए। स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व Qutub Minar of closed door कुतुब मीनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में रखी थी, जिसे बाद में इल्तुतमिश और फिर फिरोज शाह तुगलक ने पूरा कराया। करीब 73 मीटर ऊँची यह मीनार पाँच मंज़िलों में बनी है। लाल और पीले बलुआ पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी इसे देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह केवल स्थापत्य का अद्भुत नमूना नहीं, बल्कि दिल्ली सल्तनत के गौरव और उस दौर की तकनीकी क्षमता का प्रमाण भी है। कभी खुला था आम जनता के लिए Qutub Minar of closed door आज यह स्मारक केवल बाहर से निहारा जा सकता है, लेकिन एक समय था जब पर्यटकों को इसके भीतर प्रवेश और संकरी सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने की अनुमति थी। लोग झरोखों से दिल्ली का मनोरम नज़ारा देखते और इस अद्भुत स्मारक का रोमांचक अनुभव अपने साथ ले जाते। स्कूलों और कॉलेजों के बच्चे शैक्षणिक भ्रमण पर यहाँ आना अपनी उपलब्धि मानते थे। 4 दिसंबर 1981: वह काला दिन Qutub Minar of closed door इतिहास के पन्नों में दर्ज यह तारीख कुतुब मीनार के लिए अभिशाप बन गई। उस दिन सुबह से ही मौसम खराब था। आसमान में बादल छाए थे और दोपहर होते-होते बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। संकरी और अंधेरी सीढ़ियों के भीतर लगभग 300 से अधिक लोग मौजूद थे। इसी दौरान अफरातफरी मच गई। बताया जाता है कि किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई और वह घबराकर नीचे की ओर भागी। अंधेरे में किसी ने यह अफवाह फैला दी कि मीनार गिर रही है। घबराहट और भगदड़ का ऐसा माहौल बना कि चीख-पुकार से सीढ़ियाँ गूँज उठीं। त्रासदी का मंजरकुछ ही मिनटों में भगदड़ ने भयावह रूप ले लिया। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, बच्चों और महिलाओं की चीखें दूर तक सुनाई दीं। इस अफरातफरी में 45 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे थे जो पिकनिक के लिए आए थे। कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। दिल्ली के अस्पतालों में उस दिन का नज़ारा किसी युद्ध जैसी त्रासदी से कम नहीं था। स्थायी ताले की शुरुआतहादसे के बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। सुरक्षा कारणों से कुतुब मीनार के भीतर पर्यटकों का प्रवेश हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। तभी से, यानी पिछले 44 सालों से, लाखों लोग केवल बाहर से इस ऐतिहासिक धरोहर को निहारने तक ही सीमित हैं। Read more: ट्रम्प ने फिर उगला जहर, भारत-चीन समेत कई देशों को बताया ड्रग तस्कर कहा- ये खतरनाक केमिकल बना रहे सवाल और सीखइस घटना ने देशभर में स्मारकों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर गहन बहस छेड़ी। सवाल उठे कि क्या पर्याप्त रोशनी और निगरानी होती तो यह हादसा टल सकता था? क्या भीड़ नियंत्रण के उपाय किए जा सकते थे? हालांकि समय के साथ तकनीकी सुविधाएँ काफी बेहतर हो चुकी हैं, पर कुतुब मीनार का दरवाजा अब भी बंद है। आज भी वही कसकदिल्ली घूमने आने वाले पर्यटक जब कुतुब मीनार के पास पहुँचते हैं तो उसकी भव्यता उन्हें रोमांचित करती है। लेकिन भीतर प्रवेश न मिलने पर निराशा भी होती है। बहुत से बुजुर्ग लोग आज भी बताते हैं कि उन्होंने बचपन में कुतुब मीनार की सीढ़ियाँ चढ़ी थीं और ऊपर से दिल्ली का नजारा देखा था। नई पीढ़ी उस अनुभव से वंचित है। कुतुब मीनार सिर्फ एक स्थापत्य धरोहर नहीं, बल्कि हमारे अतीत की चेतावनी भी है। यह याद दिलाती है कि सुरक्षा चूक कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। 1981 की भगदड़ ने न केवल मासूम जिंदगियाँ छीनीं, बल्कि एक अनोखी परंपरा को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया। आज जब हम इसकी सुंदरता को बाहर से निहारते हैं, तो साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि इतिहास केवल गौरवशाली नहीं होता, उसमें वे पीड़ादायक किस्से भी दर्ज रहते हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे।

जनता से 8 साल की देरी का हिसाब कौन देगा? जीएसटी सुधार पर उठे सवाल

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; कानून के अनुपालन को सरल बनाए: किसी छोटे व्यापारी या दुकानदार … Read more

जो खून बहना था वह बह गया, पैसे से लोगों की सोच बदलने गए मोदी : कांग्रेस नेता

The blood that was to be shed has been shed, Modi went to change people’s thinking with money: Congress leader नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर हैं। यह उनका 2023 की जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा है। इस यात्रा को राज्य में शांति और विकास को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने चुराचांदपुर और इंफाल में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। वहीं इस दौरे को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।कांग्रेस बोली-बहुत देर हो चुकी हैCongress leader Udit Raj ने बयान में पीएम मोदी के दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ही कुकी और मैतेई दोनों समूह पीएम के खिलाफ विरोध जता रहे हैं और अब यह यात्रा ‘हीलिंग टचÓ नहीं मानी जाएगी। Congress leader Udit Raj का कहना है कि एक समय था जब पीएम जाकर बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन अब बहुत खून बह चुका है और सिर्फ 3 घंटे की यात्रा से कुछ नहीं होगा। वह भले ही कुछ परियोजनाओं की घोषणा करें लेकिन पैसों से लोगों की सोच नहीं बदली जा सकती। 2023 में भड़की थी जातीय हिंसाबता दें कि 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी, जिसमें कम से कम 260 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। इसके बाद से ही राज्य में तनाव और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. पीएम मोदी का यह दौरा लंबे समय से प्रतीक्षित था और इसे जनता और राजनीतिक दल दोनों करीब से देख रहे हैं। चुराचांदपुर और इंफाल ऐसे इलाके हैं, जहां हिंसा का असर सबसे ज्यादा रहा और अब यहां नए विकास कार्यों के जरिए माहौल को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। दौरे का महत्व और आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा मणिपुर में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ा संदेश है। यह सिर्फ परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं बल्कि राज्य के लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी है. हालांकि विपक्ष इसे ‘बहुत देर से उठाया गया कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि इस यात्रा से क्या सकारात्मक असर होता है और क्या यह मणिपुर में स्थायी शांति और विकास

संसद के परिसीमन 2026 को लेकर एक अनुमानित रिपोर्ट सामने आई है,

An estimated report has come out regarding the delimitation of Parliament 2026, भोपाल। जिसमें देश भर में लोकसभा और राज्यसभा सीटों की संख्या में बदलाव का खाका पेश किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल 800 लोकसभा सीटें और 432 (320+112) राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल मिलाकर 1132 संसद सदस्यों का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह परिसीमन 90% वजन जनसंख्या और 10% क्षेत्रफल के आधार पर किया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 121 लोकसभा सीटें और 47 राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल 168 सांसदों का प्रतिनिधित्व करेंगी। वहीं, बिहार में 61 लोकसभा और 24 राज्यसभा सीटें होंगी, जो कुल 85 सांसदों को जगह देंगी। महाराष्ट्र में 76 लोकसभा और 31 राज्यसभा सीटें होंगी, जिससे कुल 107 सांसद होंगे।क्षेत्रीय आधार पर देखें तो दक्षिण भारत में तमिलनाडु को 48 लोकसभा और 19 राज्यसभा सीटें मिलेंगी, जबकि तेलंगाना में 25 लोकसभा और 10 राज्यसभा सीटें होंगी। पश्चिमी भारत में गुजरात को 42 लोकसभा और 17 राज्यसभा सीटें मिलेंगी। पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल को 57 लोकसभा और 23 राज्यसभा सीटें दी जाएंगी। उत्तरी भारत में राजस्थान को 46 लोकसभा और 18 राज्यसभा सीटें मिलेंगी।रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या में मामूली बदलाव होगा। उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली को 1-1 लोकसभा सीट मिलेगी। इस परिसीमन से क्षेत्रीय और जनसंख्या के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश की गई है।यह अनुमान 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया है, और इसके लागू होने पर संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह अभी केवल एक अनुमान है, और अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित समितियों द्वारा लिया जाएगा

ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसते युवा: कर्ज, लत और तबाही की ओर ले जाते ऐप्स, सरकार की चुप्पी चिंता का कारण

Youth getting caught in the trap of online gaming: Apps leading to debt, addiction and destruction, government’s silence is a cause of concern नई दिल्ली ! देश में ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग और ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, और इसके चपेट में लाखों युवा आ चुके हैं। जल्दी अमीर बनने का सपना, उन्हें एक ऐसे रास्ते पर धकेल रहा है जहाँ लत, कर्ज और कई बार आत्महत्या जैसे खतरनाक परिणाम सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई मामलों में सामने आया है कि युवा बार-बार इन ऐप्स पर पैसा लगाते हैं, हारते हैं, कर्ज लेते हैं और अंततः मानसिक अवसाद में चले जाते हैं। कई युवाओं ने तो कर्ज के बोझ तले आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम तक उठा लिया है। सरकार की नीतियों पर उठते सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”, और “मेक इन इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं को नए भारत का सपना दिखाया था, लेकिन हकीकत यह है कि न नई नौकरियों का ठोस रोडमैप सामने आया, न तकनीकी शिक्षा को लेकर ठोस सुधार। सरकार की ओर से इन ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स को अप्रत्यक्ष रूप से मान्यता मिलने और इन पर किसी भी स्पष्ट नियमन की कमी से हालात और खराब हो रहे हैं। क्या चाहिए ठोस नीति और सख्त नियंत्रण विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि इन ऐप्स को लेकर स्पष्ट और सख्त कानून बनाए जाने चाहिए, ताकि युवा इन लतों से दूर रहें और उनका भविष्य सुरक्षित हो।सवाल यह है कि जब युवाओं को इस देश का भविष्य कहा जाता है, तो फिर सरकार कब इन ऐप्स की लूट पर लगाम लगाएगी? मुख्य बिंदु वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस क़दम नहीं उठाए, तो डिजिटल गैंबलिंग से जुड़ा सामाजिक-आर्थिक संकट और गहराएगा। उद्योग का आकार जितना बड़ा होगा, उतना ही मुश्किल होगा इसे नियंत्रित करना। निष्कर्ष: तेज़ टेक्नोलॉजी और सुस्त नीति के बीच फँसते युवाओं को बचाने के लिए कई मंत्रालयों की समन्वित रणनीति और सख़्त नियम अनिवार्य हैं। वरना “डिजिटल इंडिया” का सपना, कर्ज़ और लत की स्याही से धुँधला हो सकता है।

लीडर वही जो उदाहरण बनकर नेतृत्व करे: आश्रम के बच्चों से लेकर रिकी पोंटिंग तक, समर्पण और चरित्र की प्रेरणादायक कहानियां

leadership inspirational stories discipline : When a papad and Ricky Ponting taught the lesson of dedication and character leadership inspirational stories discipline किसी भी संस्थान की आत्मा उसका नेतृत्व होता है – और एक सच्चा लीडर वही होता है जो अपने आचरण से समर्पण और चरित्र की मिसाल बन जाए। हाल ही में एक पारिवारिक मित्र के साथ अस्थि-विसर्जन के लिए ठाणे के श्री रामदास आश्रम जाने का अवसर मिला, जहाँ एक छोटी-सी घटना ने यह बात और पुख्ता कर दी। आश्रम में थके हुए तीर्थयात्रियों के लिए सादा किंतु आत्मा को तृप्त कर देने वाला भोजन परोसा गया। भोजन के दौरान एक बालक द्वारा माँगे गए एक अतिरिक्त पापड़ को लेकर हुई बातचीत ने मन को छू लिया। एक बड़ा बालक छोटे को समझा रहा था कि ‘तुलना मत करो, वे लोग उपवास पर हैं’। इस उम्र में इतनी परिपक्वता और अनुशासन देखकर मन श्रद्धा से भर गया।इसी दिन, एक और प्रेरक खबर मिली – आईपीएल टीम पंजाब किंग्स के कोच रिकी पोंटिंग की। भारत-पाक संघर्ष की खबर मिलते ही अधिकतर विदेशी खिलाड़ी देश छोड़कर चले गए, लेकिन पोंटिंग ने विमान से उतरने का साहसी निर्णय लिया। न सिर्फ खुद रुके, बल्कि उन्होंने दूसरों को भी लौटने का संदेश दिया, यह दिखाते हुए कि एक सच्चा लीडर मैदान के बाहर भी उतना ही समर्पित होता है। leadership inspirational stories discipline इन दोनों घटनाओं में एक गहरा संदेश है – चाहे वह आश्रम में संस्कार पाते बच्चे हों या विश्वस्तरीय कोच, नेतृत्व वही है जो अपने उदाहरण से दूसरों को दिशा दे। जब लीडर खुद अनुशासित होता है, तभी टीम में चरित्र और समर्पण के बीज पनपते हैं। यही है नेतृत्व का असली मतलब। leadership inspirational stories discipline

सड़क हादसों के घायलों को बड़ी राहत: अब मिलेगा ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, राशि बढ़ाकर ₹2 लाख करने पर विचार

Big relief to road accident victims नई दिल्ली। सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब देशभर में सड़क हादसों में घायल लोगों का ₹1.5 लाख तक इलाज पूरी तरह कैशलेस होगा। यह स्कीम राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की निगरानी में लागू की गई है। सरकार इस योजना की राशि को बढ़ाकर ₹2 लाख करने पर भी विचार कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, यह सुविधा किसी भी सड़क पर हुई दुर्घटना में लागू होगी, चाहे वह राष्ट्रीय राजमार्ग हो या ग्रामीण मार्ग। गोल्डन ऑवर में मिलेगा फ्री इलाज:सड़क हादसे के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ इलाज के लिए सबसे अहम होता है। यही वह समय होता है जब समय पर इलाज न मिलने से कई लोगों की जान चली जाती है। इस योजना का मकसद जान बचाना और तत्काल इलाज सुनिश्चित करना है। इलाज का खर्च और प्रक्रिया: गडकरी की पहल:जनवरी 2024 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क हादसों पर चिंता जताते हुए कहा था कि सरकार कैशलेस इलाज योजना ला रही है। अब यह योजना देशभर में लागू कर दी गई है। हर साल 10 हजार करोड़ का अनुमानित खर्च:भारत में हर साल सड़क हादसों में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की जान जाती है। इलाज पर प्रति व्यक्ति औसतन ₹50,000 से ₹2 लाख का खर्च आता है। सरकार को इस योजना से हर साल करीब ₹10,000 करोड़ का खर्च उठाना पड़ सकता है, लेकिन इससे लाखों जानें बचाई जा सकेंगी।

Ghibli ट्रेंड सिर्फ मजेदार फोटो नहीं, यह आपकी प्राइवेसी के लिए है खतरा?

Ghibli trend is not just a fun photo, is it a threat to your privacy? Ghibli AI ट्रेंड सिर्फ मजेदार इमेजेस नहीं, बल्कि आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा भी बन सकता है। जानें कि AI-Generated Ghibli पोर्ट्रेट्स कैसे आपकी डिजिटल सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं… Ghibli AI Trend: जब से ओपनएआइ ने चैटजीपीटी के घिबली-स्टाइल एआइ इमेज जनरेटर को लॉन्च किया है, तब से इसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। राजनेता हों या मशहूर हस्तियां, हर कोई घिबली के दिग्गज हयाओ मियाज़ाकी की खास शैली में अपने एआइ-जनरेटेड पोर्ट्रेट शेयर करता दिखाई देता है। एक ओर यह ट्रेंड हावी है तो दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स लोगों को इसके जोखिमों से रूबरू कर रहे हैं। उनका दावा है कि ओपनएआइ इस ट्रेंड का उपयोग एआइ प्रशिक्षण के लिए लाखों व्यक्तिगत छवियों को इकट्ठा करने के तरीके के रूप में कर सकता है। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि वे अनजाने में ओपनएआइ को नया फेशियल डेटा सौंप रहे हैं जिससे प्राइवेसी संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं। AI टूल्स के लिए जरूरी सुरक्षा उपायजनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) के तहत, ओपनएआइ को ‘वैध हित’ के कानूनी आधार के तहत इंटरनेट से इमेज-हार्वेस्टिंग (स्क्रेपिंग) का औचित्य सिद्ध करना चाहिए, जिसका अर्थ है कि उन्हें उपयोगकर्ता की गोपनीयता की रक्षा करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। डिजिटल प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स के अनुसार ओपनएआइ या अन्य टूल्स यह प्रदर्शित करें कि डेटा संग्रह आवश्यक है, यह व्यक्तियों के अधिकारों का हनन नहीं करता है, और सख्त पारदर्शिता और जवाबदेही उपायों का पालन किया जाता है। सहमति और स्वतंत्रताएआई, टेक एंड प्राइवेसी एकेडमी की सह-संस्थापक लुइजा जारोव्स्की के अनुसार, जब लोग स्वेच्छा से इन छवियों को अपलोड करते हैं, तो वे ओपनएआइ को उन्हें संसाधित करने के लिए अपनी सहमति देते हैं (जीडीपीआर का अनुच्छेद 6.1.ए)। यह एक अलग कानूनी आधार है जो ओपनएआइ को अधिक स्वतंत्रता देता है, और इस तरह वैध हित संतुलन परीक्षण लागू नहीं होता है। कैसे सुरक्षित रखें अपना बायोमेट्रिक डेटाएआइ द्वारा जनरेट की गई छवियों के लिए व्यक्तिगत फोटो अपलोड करने से पहले दो बार सोचें।ऐसे कर सकते हैं अपनी गोपनीयता की सुरक्षासोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन वाली छवियों को साझा करने से बचें, एआइ प्रशिक्षण, डेटा वर्गीकरण और अन्य अनुप्रयोगों के लिए डेटा हार्वेस्टिंग की तकनीक इमेज-स्क्रेपिंग में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।डिवाइस को अनलॉक करने के लिए चेहरे की पहचान के बजाय पिन या पासवर्ड का उपयोग करें। ऐप्स की कैमरे तक एक्सेस को सीमित करें। समय-समय पर सेटिंग्स में एक्सेस को जांचते रहें।

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