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भारतीय राजनयिक ने कहा- पाकिस्तान आज भी जेहादी अंतकवाद का केंद्र बना हुआ है, WHO में PAK कर रहा था चालाकी

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तान की निंदा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए भारत सरकार लगातार पाकिस्तान को पोल खोलने में जुटी है। इसी बीच भारत ने विश्व स्वाथ्य संगठन के मंच से भी भारत ने पाकिस्तान की क्लास लगा दी। पाकिस्तान आज भी जेहादी अंतकवाद का केंद्र बना हुआ: भारत भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर हमला बोलेते हुए कहा कि पाकिस्तान आज भी जेहादी अंतकवाद का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को पालता है। जो देश आतंकवाद को जन्म देता है। वो पीड़ित होने का दिखावा नहीं कर सकता। दरअसल, पाकिस्तान अंततराष्ट्रीय मंचों पर घड़ियाली आंसू बहाता है कि उसका देश आतंकवाद से पीड़ित है। हालांकि, दुनिया जानती है कि आतंकवाद का जन्मदाता है। आतंकियों की कार्रवाई से बौखला उठा पाकिस्तान 22 अप्रैल को पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। इस घटना के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। आतंकियों के मारे जाने से पाकिस्तान बौखला उठा। शहबाज सरकार ने भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। 8 और 9 मई की रात को पाकिस्तान की ओर से 400 से ज्यादा ड्रोन दागे गए। हालांकि, भारतीय एअर डिफेंस सिस्टम ने सभी ड्रोन को मार गिराया। इसके बाद भारतीय सेना ने जवाबी हमलों में पाकिस्तान के कई सैन्य एअर बेस तबाह कर दिए। वहीं, पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया। सैन्य तनाव खत्म होने के बाद भी भारत लगातार पाकिस्तान की पोल खोलने में जुटा है। ‘टीम इंडिया’ खोलेगी पाकिस्तान की पोल वहीं, भारत सरकार ने फैसला किया है कि दुनिया को पाकिस्तान की सच्चाई बताई जाएगी। भारत सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से 51 नेताओं और 85 राजदूत, 32 अलग-अलग देशों में 7 डेलिगेशन को भेज रहा है। यह डेलिगेशन दुनिया को बताएगी कि कैसे पाकिस्तान आतंकवाद को पोषित करता है फिर उसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता है।

पाकिस्तान आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, इसे छुपाने के लिए वह अक्सर भारत पर आरोप लगाता रहता है: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर बलूचिस्तान की घटनाओं के संबंध में पाकिस्तान के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया। मंत्रालय द्वारा जारी संक्षिप्त बयान में कहा गया है, “खुजदार में हुई घटना में पाकिस्तान भारत पर आरोप लगा रहा है। भारत सरकार इस आधारहीन आरोप का खंडन करती है और इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करती है। पाकिस्तान आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, इसे छुपाने के लिए वह अक्सर भारत पर आरोप लगाता रहता है। दुनिया को धोखा देने वाला यह प्रयास असफल होने वाला है।” पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में एक स्कूल बस को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया। इस घटना में तीन बच्चे और दो वयस्क मारे गए हैं और 38 से अधिक घायल हैं। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए भारत को दोषी ठहराया है। भारत ने पाकिस्तान के इस आधारहीन आरोप को खारिज कर दिया है। इस घटना की जिम्मेदारी फिलहाल किसी संगठन ने नहीं ली है लेकिन शक बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) पर है, जो पूर्व में भी ऐसी घटनाओं को अंजाम देता रहा है। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में जवाबी कार्रवाई की थी और आतंकवादियों के नौ ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा भारत के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइलों से हमले के जवाब में भारत ने उसके एयर डिफेंस सिस्टम और 11 एयरबेस तबाह कर दिए। पाकिस्तान अपने बड़े नुकसान को स्वीकार करने की बजाय भारत के मिसाइलों और राफेल विमानों को गिराने की झूठी कहानी अपने लोगों और दुनिया को सुना रहा है। पाकिस्तान की इसी झूठ का पर्दाफाश करने के लिए भारत सरकार ने सांसदों का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाया है जो विदेशों में जाकर सबूत सहित पाकिस्तान को हुए नुकसान को बताएगा और उसकी पोल खोलेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने एक करोड़ के इनामी समेत 27 नक्सलियों के ढेर होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताई

नई दिल्ली छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों के एक करोड़ के इनामी समेत 27 नक्सलियों के ढेर किए जाने को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तीन दशकों में यह पहली बार हुआ है, जब इतना बड़ा नक्सली मारा गया है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि। आज, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक ऑपरेशन में हमारे सुरक्षा बलों ने 27 खूंखार नक्सलियों को ढेर कर दिया है, जिनमें सीपीआई-माओवादी का महासचिव शीर्ष नेता और नक्सल आंदोलन की रीढ़, नम्बाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू भी शामिल है। नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के तीन दशकों में यह पहली बार है कि किसी महासचिव स्तर के नेता को हमारी सेना ने मार गिराया है। मैं इस बड़ी सफलता के लिए हमारे बहादुर सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सराहना करता हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “मुझे यह बताते हुए भी खुशी हो रही है कि ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। मोदी सरकार 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए संकल्पबद्ध है।” वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जारी है विजय का शंखनाद, खत्म हो रहा नक्सलवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्च 2026 तक देश-प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे के संकल्प को मजबूती प्रदान करते हुए सुरक्षाबल के जवान निरंतर सफलता हासिल कर लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नारायणपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की डीआरजी यूनिट के द्वारा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बावजूद, वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ इस निर्णायक अभियान को पूरी प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया जा रहा है। इसका परिणाम है कि अब तक 27 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कुख्यात नक्सल लीडर नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू के खात्मे की भी पुष्टि हुई है।” उन्होंने आगे लिखा, “जवानों को मिली यह कामयाबी सराहनीय है, उनकी वीरता को नमन करता हूं। ऑपरेशन के दौरान डीआरजी के एक जवान के वीरगति को प्राप्त होने और कुछ जवानों के घायल होने की दु:खद सूचना प्राप्त हुई है। घायल जवानों के त्वरित इलाज के निर्देश दिए हैं। ईश्वर से शहीद जवान की आत्मा की शांति और घायल जवानों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” बता दें कि सुरक्षाबलों ने बुधवार को नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में मुठभेड़ में 27 नक्सलियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक करोड़ के इनामी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को भी मार गिराया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भारत ने दिया करारा जवाब, पाक प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया हो एकजुट : राघव चड्ढा

सियोल/नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने सियोल में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एशियन लीडरशिप कॉन्फ्रेंस- 2025’ में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बोलते हुए कहा कि भारत अब आतंकवादी हमलों पर केवल दुख व्यक्त नहीं करता, बल्कि अब वह सटीक और निर्णायक सैन्य कार्रवाई के जरिए जवाब भी देता है, जैसा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किया गया। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में चोसुन मीडिया और सेंटर फॉर एशिया लीडरशिप के सहयोग से आयोजित ‘पूर्व का दावोस’ नाम से मशहूर प्रतिष्ठित एशियन लीडरशिप कॉन्फ्रेंस (एएलसी 2025) में सांसद राघव चड्ढा ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि अगर हमारे देश की शांति से खिलवाड़ किया गया, तो हम आतंक के ढांचे को जमींदोज कर देंगे, चाहे वो देश की सीमा के भीतर हों या बाहर।” सांसद राघव चड्ढा ने दुनिया के सामने भारत की नई रणनीति पर बोलते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित कर दिया कि भारत अब एक नई सैन्य और कूटनीतिक नीति के तहत काम कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम केवल आतंकी हमलों की प्रतिक्रिया नहीं करते, बल्कि अब हम आतंक के मूल ढांचे को जड़ से खत्म करते हैं।” सांसद राघव चड्ढा ने आगे कहा, ”भारत अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की भूमि से आता है, लेकिन साथ ही इस भूमि पर भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी भी पैदा हुए हैं। हम शांति में विश्वास करते हैं, लेकिन आतंकवाद का समर्थन करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।” सियोल में आयोजित एशियन लीडरशिप कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने भारत की तरफ से एक निर्णायक, आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से मजबूत राष्ट्र की छवि को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंच से एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में भारत एक निर्णायक और दृढ़ राष्ट्र के रूप में उभरा है और यह बताया है कि हम आतंकवाद, आतंकी ढांचे और दुष्ट राष्ट्रों के साथ कैसे निपटते हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में भारत सरकार और हमारी भारतीय सेना ने यह साफ कर दिया कि हम शांति के पक्षधर हैं, लेकिन अगर कोई हमारे देश की शांति को भंग करता है और हमारे लोगों को नुकसान पहुंचाता है, तो हम आतंकी ढांचे को बख्शेंगे नहीं, चाहे वह कहीं भी हो। नतीजतन, सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए सटीक सैन्य कार्रवाई की गई। राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम करता है। उन्होंने कहा, “आज का भारत वह नहीं है जो हमलों को चुपचाप सह लेता था। हम अब हमला सहते नहीं, बल्कि सीमा पार जाकर आतंक के ठिकानों को खत्म करते हैं। भारत अब आतंक के खिलाफ सिर्फ कूटनीतिक बयान नहीं देता, बल्कि जमीन पर कार्रवाई करता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। भारत अब न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा करता है, बल्कि दुनिया को भी आतंक मुक्त बनाने में अपना योगदान देने को तैयार है।” इस बार की एशियन लीडरशिप कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोंपियो, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट, नेटफ्लिक्स के सीईओ रीड हेस्टिंग्स, ब्लैकस्टोन के सीईओ स्टीव श्वार्जमैन और हार्वर्ड सेंटर फॉर पब्लिक लीडरशिप के डीन विलियम्स जैसे ग्लोबल लीडर्स के साथ मंच साझा किया।

सॉलिसिटर जनरल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा- ट्रस्ट की जमीन को सरकार सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित करना चाहती है

नई दिल्ली वक्फ कानून में संसद द्वारा किए गए हालिया संशोधनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बुधवार को सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ट्रस्ट की जमीन को सरकार सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित करना चाहती है। तुषार मेहता ने कहा, वक्फ कानून 2013 के संशोधन से पहले अधिनियम के सभी संस्करणों में कहा गया था कि केवल मुसलमान ही अपनी संपत्ति वक्फ कर सकते हैं। लेकिन 2013 के आम चुनाव से ठीक पहले एक संशोधन किया गया था, जिसके मुताबिक कोई भी अपनी संपत्ति वक्फ कर सकता है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “वक्फ का अर्थ है कि उपयोग के अनुसार संपत्ति किसी और की है। आपने निरंतर उपयोग करके अधिकार अर्जित किया है। इसलिए जरूरी है कि निजी/सरकारी संपत्ति का उपयोग लंबे समय तक किया जाए। अगर कोई इमारत है जो सरकारी संपत्ति हो सकती है, तो क्या सरकार यह जांच नहीं कर सकती कि संपत्ति सरकार की है या नहीं? इसका प्रावधान 3(सी) में है। ट्रस्ट की जमीन सरकार सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित करना चाहती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा, “वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वालों का कहना है कि वक्फ प्रॉपर्टी के विवाद की स्थिति में सरकार अपना ही मामला खुद ही सुनवाई कर तय करेगी।” इस पर तुषार मेहता ने कहा, “राजस्व अधिकारी तय करते हैं कि यह सरकारी भूमि है या नहीं, लेकिन यह केवल राजस्व रिकॉर्ड के उद्देश्य से है। वह विवाद तय नहीं कर सकते। उनका निर्णय अंतिम नहीं है। उनकी जांच पर कलेक्टर निर्णय लेंगे, जबकि यहां उठाई गई आपत्ति यह है कि कलेक्टर अपने मामले में न्यायाधीश होंगे। इसलिए जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) ने सुझाव दिया कि कलेक्टर के अलावा किसी और को इसमें नामित अधिकारी बनाया जाए।” सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ का मतलब अनिवार्य रूप से यह है कि आप किसी और की संपत्ति का भी उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को यह क्यों नहीं जांचना चाहिए कि संपत्ति सरकार की है या नहीं। परामर्श के दौरान आपत्ति उठाई गई थी कि कलेक्टर को यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए कि भूमि सरकारी भूमि है या नहीं, इसके लिए हमने नामित अधिकारी को बदल दिया।” उन्होंने अदालत में दावा किया कि वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में झूठी और काल्पनिक कहानी गढ़ी जा रही है कि उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे या वक्फ पर सामूहिक कब्जा कर लिया जाएगा। वक्फ कोई मौलिक अधिकार नहीं है और इसे कानून द्वारा मान्यता दी गई है। एक फैसले के मुताबिक, अगर कोई अधिकार कानून के तहत प्रदान किया जाता है, तो उसे कानून के तहत लिया भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का एक अनिवार्य अंग नहीं है। दान हर धर्म का हिस्सा है और यह ईसाई के लिए भी हो सकता है। हिंदुओं में दान की एक प्रणाली है। सिखों में भी यह मौजूद है। इस्लाम में वक्फ कुछ और नहीं बल्कि दान है। वक्फ बोर्ड केवल धर्मनिरपेक्ष कार्य करता है – वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करना, हिसाब-किताब सही रखना, खातों का ऑडिट रखना आदि। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वक्फ बोर्ड में अधिकतम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से कोई बदलाव नहीं आएगा। ये लोग किसी भी धार्मिक गतिविधि को प्रभावित नहीं करते। हिंदू बंदोबस्ती आयुक्त मंदिर के अंदर जा सकते हैं, मंदिरों में पुजारी का निर्णय भी राज्य सरकार कर रही है, यहां वक्फ बोर्ड धार्मिक गतिविधि में बिल्कुल दखल नहीं देता है। धर्म में धर्मनिरपेक्ष प्रथाओं को नियंत्रित करने की शक्ति होती है। संपत्ति का प्रशासन कानून के अनुसार ही होना चाहिए।

नहर निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मोटरवे बाईपास सड़क को अवरुद्ध कर दिया, हालात तनावपूर्ण

सिंध पाकिस्तान के सिंध प्रांत में नहर विरोधी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज और कथित तौर पर गोलीबारी किए जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। सिंध के नौशहरो फिरोज जिले के मोरो शहर में प्रस्तावित नहर निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मोटरवे बाईपास सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने यातायात बहाल करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर बल का इस्तेमाल किया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान गोली चली, जिससे प्रदर्शन और अधिक उग्र हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और स्थानीय प्रशासन हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंधी राष्ट्रवादी संगठन ‘सिंध सभा’ ने हैदराबाद प्रेस क्लब के पास एक बैठक रखी थी लेकिन भारी सुरक्षा और सड़कों पर लगे बैरिकेड्स की वजह से यह बैठक नहीं हो सकी। पुलिस ने कई लोगों को पकड़ा और सिंध सभा के कुछ नेताओं को कॉन्फ्रेंस हॉल में ही रोक लिया गया। बाद में संगठन ने बताया कि वकीलों की एक टीम ने बीच में आकर मदद की और उनके नेताओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सिंध सभा काफी समय से सिंधी राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के जबरन गायब होने के खिलाफ आवाज उठा रही है। यह सम्मेलन “आइए मिलकर अपनी धरती सिंध को बचाने के लिए कदम उठाएं” विषय पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद शरीफ सरकार द्वारा सिंध के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के खिलाफ मिलकर कोई योजना बनाना था। इसके लिए अलग-अलग राष्ट्रवादी पार्टियों को एक जगह इकट्ठा किया गया था। स्थानीय मीडिया डॉन के मुताबिक, अशफाक मलिक के नेतृत्व में सिंध सभा पार्टी के करीब पचास कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम किया। वे कॉरपोरेट खेती और चोलिस्तान परियोजना के तहत नहरें बनाने का विरोध कर रहे थे। 15 फरवरी को शुरू की गई चोलिस्तान सिंचाई योजना से सिंध में लोग नाराज हैं। वहां के लोगों को डर है कि इस योजना के तहत सिंधु नदी का कीमती पानी मोड़कर दक्षिण पंजाब की खेती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मार्च में सिंध विधानसभा ने इस योजना का विरोध करते हुए एकमत से प्रस्ताव पास किया था। यह प्रस्ताव लोगों की लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय चिंताओं को दिखाता है। पिछले कुछ महीनों में पीपीपी समेत सत्ताधारी गठबंधन के कई राजनीतिक दलों ने इस योजना को रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं। कई लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार सिंध के पानी के हक को नजरअंदाज कर रही है, जिस वजह से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ गया है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं। इस हमले में चार आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों को मार डाला था। इसके बाद, भारत ने पाकिस्तान द्वारा समर्थन प्राप्त सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया के तौर पर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को रोक दिया था। बढ़ते दबाव के बीच, शरीफ सरकार ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह तब तक नहरों का निर्माण रोकेगी, जब तक सामान्य हितों की परिषद के माध्यम से सभी पक्षों की सहमति नहीं बन जाती। सिंध के वकीलों ने चोलिस्तान परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।

पाकिस्तान ने फिर दिखाई अकड़, पिछले महीने भारत के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया, एक महीने और बढ़ाया

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को एक महीने और बंद रखने का फैसला किया है। बुधवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद नयी दिल्ली द्वारा उठाए गए कदमों के बाद पाकिस्तान ने पिछले महीने भारत के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध 23 मई तक एक महीने के लिए लगाया गया था, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के नियमों के अनुसार हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध एक बार में एक महीने से अधिक अवधि के लिए नहीं लगाया जा सकता है। जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रतिबंध को बढ़ाने का निर्णय बुधवार या बृहस्पतिवार को घोषित किये जाने की उम्मीद है।

अब भारत के कई शहरों में कोविड-19 के नए केस सामने आने लगे, बढ़ा संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा

नई दिल्ली हांगकांग और सिंगापुर सहित एशिया के कई हिस्सों के बाद अब भारत के भी कई शहरों में कोविड-19 के नए केस सामने आने लगे हैं। इसके बाद देश का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। कोरोना संक्रमण के उभरने पर लगातार नजर रखी जा रही है और जहाँ नए केस दर्ज किए गए हैं वहाँ संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल भारत में मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र में बढ़े केस, पुणे में 50 बेड आरक्षित महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अकेले मुंबई में ही मई के महीने में कोविड-19 के 95 नए केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग 16 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और अधिकांश को मुंबई केईएम अस्पताल से सेवेन हिल्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। इसी के साथ जनवरी से अब तक राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल केसों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है। कोविड-19 के बढ़ते केसों के मद्देनजर यहाँ इन्फ्लूएंजा और सांस संबंधी संक्रमण वाले सभी रोगियों की एहतियातन कोरोना की जाँच कराई जा रही है। महाराष्ट्र में कोरोना के नए केस बढ़ने के बाद पुणे के स्थानीय निकाय अलर्ट मोड पर हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मई में 87 वर्षीय एक व्यक्ति में कोविड-19 का संक्रमण पाया गया था वो अब ठीक हो चुका है। फिलहाल पुणे में कोविड का कोई सक्रिय मामला नहीं है लेकिन एहतियातन नायडू अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों के लिए 50 बिस्तर आरक्षित रखे गए हैं। पुणे नगर निगम की स्वास्थ्य प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने जानकारी दी कि फिलहाल सिविल अस्पतालों में कोविड टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं इसके लिए दिशानिर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। पुडुचेरी, कर्नाटक और गुजरात में भी नए मामले केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में भी 12 नए केस सामने आए हैं। चेन्नई के चिकित्सकों के मुताबिक पहले बुखार वाले जिन रोगियों को इन्फ्लूएंजा का मरीज माना जाता था कोविड के नए केस आने के बाद उनकी कोविड जाँच कराई जा रही है। कुछ अस्पतालों में तो हार्ट और अंग प्रत्यारोपण जैसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन को भी टाला जा रहा है। वहीं पब्लिक हेल्थ डायरेक्टर डॉ. टी.एस. सेल्वाविनायगम ने लोगों से घबराने की बजाय भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क लगाने जैसे उपाय करने की सलाह दी है। कर्नाटक और गुजरात में भी कोरोना के नए मामले दर्ज किए गए हैं। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने अपने एक बयान में बताया है कि कर्नाटक में कोविड-19 के 16 सक्रिय केस हैं। जबकि गुजरात के अहमदाबाद में एक ही दिन में सात नए केस सामने आने के बाद अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है। सभी रोगी अपने घरों में आइसोलेशन में हैं। अधिकारियों ने इनके सैंपल को जेनॉमिक परीक्षण के लिए भेजे हैं। बता दें कि एक साल से हर महीने अहमदाबाद में औसतन एक कोविड केस आ रहा था लेकिन अचानक 7 मामले आने के बाद अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों के मुताबिक इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मई 2023 में कोरोना महामारी के खत्म होने की घोषणा कर दी थी लेकिन कम संख्या में ही सही लगातार इसके केस सामने आ रहे थे। भारत में अभी तक सामने आए केस हल्के हैं और गंभीर प्रकृति के नहीं हैं। फिर भी बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना चाहिए। साथ ही घर से बाहर की चीजों को छूने के बाद हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए और इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी करा लेना चाहिए।

कभी चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उनके समर्थक उन्हें उपहार में हमेशा चावल दे देते हैं: जापान कृषि मंत्री

टोक्यो जापान के कृषि मंत्री तकु एतो ने चावल खरीदने पर अपनी अनुचित टिप्पणी के कारण बुधवार को इस्तीफा दे दिया। देश की जनता पारंपरिक मुख्य भोजन की ऊंची कीमतों से परेशान है। सागा प्रान्त में रविवार को एक सेमिनार के दौरान एतो ने कहा था कि उन्हें कभी चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उनके समर्थक उन्हें उपहार में हमेशा चावल दे देते हैं। उनकी यह टिप्पणी देश में चावल की महंगाई से परेशान लोगों के प्रति असंवेदनशील मानी गई। इस्तीफे के बाद एतो ने कहा, “जब उपभोक्ता चावल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तब मेरी टिप्पणी अत्यंत अनुचित थी। मैंने प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।” उन्होंने जनता से माफी मांगी और बयान वापस लेते हुए कहा कि वह खुद चावल खरीदते हैं। मीडिया की खबरों के अनुसार, एतो की जगह पूर्व पर्यावरण मंत्री शिंजिरो कोइजुमी को नियुक्त किया जा सकता है। चावल की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्षी दलों ने एतो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी थी। जापान में चावल की किल्लत की शुरुआत अगस्त 2024 में तब हुई जब सरकार ने भूकंप की चेतावनी के बाद नागरिकों से तैयारी करने को कहा। इससे घबराकर लोगों ने भारी मात्रा में चावल खरीद लिया। शरद ऋतु की फसल के बाद थोड़ी राहत मिली, लेकिन 2025 की शुरुआत में फिर से किल्लत बढ़ी और कीमतों में तेजी आई। अधिकारियों ने इसके लिए 2023 की गर्मी में खराब फसल, उर्वरक और उत्पादन लागत में वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया। कुछ विशेषज्ञ सरकार की दीर्घकालिक चावल उत्पादन नीति को भी इसके लिए दोषी मानते हैं।    

गाजा में 48 घंटों में मानवीय सहायता नहीं पहुंची तो 14,000 बच्चों की जान जा सकती है: संयुक्त राष्ट्र

गाजा गाजा पट्टी में हालात हर घंटे बिगड़ते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है  कि अगर अगले  48 घंटों में मानवीय सहायता नहीं पहुंचाई गई तो करीब 14,000 बच्चों की जान  जा सकती है। मार्च 2025 से इज़राइल की ओर से जारी पूरी नाकेबंदी ने गाजा को भुखमरी और कुपोषण की आग में झोंक दिया है।मार्च में इज़राइली सरकार ने गाजा में भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी थी। अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते हाल ही में कुछ राहत ट्रकों को अंदर जाने की अनुमति मिली है, लेकिन जहां गाजा को रोज़ाना 500 ट्रकों की ज़रूरत है वहां सिर्फ 5 से 10 ट्रक भेजे जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर गाजा की सरकार के मुताबिक करीब 3 लाख बच्चे भुखमरी के कगार पर हैं जबकि  11 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं । हर पांचवां वयस्क भी भूखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ ‘भूख’ नहीं, बल्कि वह तीन-चरणीय भुखमरी  है जिसमें शरीर धीरे-धीरे  मांसपेशियों और हड्डियों को खाकर जीवित रहने की कोशिश करता है। ‘खुली जेल’ में तब्दील हुआ गाजा गाजा एक 40 किलोमीटर लंबा क्षेत्र है, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर लगभग 6000 लोग  रहते हैं। 2007 में हमास के सत्ता में आने के बाद से ही इज़राइल और मिस्र ने इस क्षेत्र की सीमाएं सील कर दीं, जिसे संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने ‘ओपन एयर प्रिज़न’ (खुली जेल) करार दिया।   क्या UN और ICJ सिर्फ चेतावनी देंगे? इस भीषण मानवीय संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) इस स्थिति में सिर्फ चेतावनी जारी करते रहेंगे या इज़राइल पर युद्ध अपराधों को लेकर कोई कठोर कदम उठाएंगे ?अब तक इस संघर्ष में इज़राइल में 1,726 और गाज़ा में 57,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।   अंतर्राष्ट्रीय कानून   जनसंख्या को जानबूझकर भोजन, पानी और दवा से वंचित रखना अंतरराष्ट्रीय कानून में ‘वॉर क्राइम’ की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद, ICJ और UN जैसे संगठनों की कार्रवाई केवल ‘अपील’ और ‘चेतावनी’ तक सीमित नजर आती है। गाजा में मानवीय त्रासदी अब अलार्मिंग मोड से आगे निकल चुकी है । बच्चों की भूख से मौतें, बंद सीमाएं और नाकाफी राहत सब एक साथ मिलकर इंसानियत को शर्मसार कर रही हैं।अब सवाल यह है कि क्या दुनिया की बड़ी ताकतें सिर्फ रिपोर्ट पढ़ती रहेंगी, या कुछ करेंगी भी?

केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट: बेसिक सैलरी ₹40,000 से ₹1 लाख! जानिए कब बढ़ेगा वेतन

नई दिल्ली सरकारी नौकरी करने वालों के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से जिस घोषणा का इंतजार किया जा रहा था, वह अब जल्द पूरी हो सकती है। केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर अहम ऐलान करने की तैयारी में है। इससे देशभर के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, आयोग के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अगर सब कुछ तयशुदा योजना के अनुसार चला, तो यह आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। क्या है फिटमेंट फैक्टर और कैसे तय होगी सैलरी? वेतन बढ़ोतरी की गणना के लिए सबसे अहम भूमिका निभाता है फिटमेंट फैक्टर। यह एक तय गुणांक (Multiplier) होता है, जो सभी कर्मचारियों के वेतन को एक समान आधार पर बढ़ाने में मदद करता है। इस बार फिटमेंट फैक्टर के 1.90 से लेकर 2.50 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह 2.5 तक पहुंचता है, तो कर्मचारियों के वेतन में 40% तक की वृद्धि हो सकती है।  कैसे बढ़ेगा वेतन? एक उदाहरण से समझिए: मान लीजिए किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन है ₹40,000 प्रति माह। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो संशोधित वेतन कुछ ऐसा हो सकता है: पेंशनर्स को भी मिलेगा बड़ा फायदा सिर्फ काम कर रहे कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड पेंशनभोगियों को भी इस आयोग से अच्छी-खासी राहत मिलने की उम्मीद है। पहले की तरह पेंशन में भी फिटमेंट फैक्टर के अनुसार संशोधन किया जाएगा, जिससे न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी संभव है। क्या नई स्वास्थ्य सुविधाएं भी जुड़ेंगी? पिछले 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम की शुरुआत की थी। ऐसे में इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्वास्थ्य और अन्य भत्तों को लेकर कुछ नई सुविधाएं जोड़ सकती है।

कश्मीर के मैदानी इलाकों में तापमान में वृद्धि होने की संभावना, लोगों की चिंता बढ़ा दी, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

श्रीनगर जम्मू और कश्मीर मौसम विभाग की तरफ से मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू कश्मीर में अगले कुछ दिनों में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खासतौर पर गुरुवार और शुक्रवार को तापमान असामान्य रूप से ऊंचा रहने की संभावना है। आमतौर पर ठंडे माने जाने वाले इस क्षेत्र में तेज गर्मी की भविष्यवाणी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कश्मीर के मैदानी इलाकों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है – यह बेमौसम उछाल है जो साल के इस समय के कई रिकॉर्ड तोड़ सकता है। मौसम विज्ञानियों ने संभावित गर्मी के तनाव की चेतावनी जारी की है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए। बढ़ते तापमान ने किसानों और बागवानों के बीच चिंता पैदा कर दी है, उन्हें डर है कि अगर यह मौसम लंबा चला तो गर्मी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कश्मीर में मई में ऐसा मौसम आमतौर पर नहीं होता। अगले कुछ दिनों में जो तापमान रहेगा, वह आमतौर पर जुलाई की गर्मियों में देखा जाता है।” विभाग ने लोगों को हाइड्रेटेड रहने, पीक आवर्स के दौरान सीधे धूप में जाने से बचने और हीटवेव के प्रभाव को कम करने के लिए निवारक उपाय करने की सलाह दी है। जम्मू में इस मौसम में पहले से ही उच्च तापमान की आदत है, लेकिन कश्मीर घाटी में असामान्य गर्मी ने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है, जो पारंपरिक रूप से बहुत ठंडी होती है। अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और लोगों से आने वाले दिनों में आधिकारिक मौसम अपडेट और सुरक्षा सलाह का पालन करने का आग्रह किया है।

अमेरिका ने कहा- रूस अगर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने ठोस कदम नहीं उठाता, तो उस पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे

वाशिंगटन अमेरिका ने रूस को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए शांति वार्ता की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो उस पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे । यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री  मार्को रुबियो  ने सीनेट की विदेश मामलों की समिति के समक्ष दिया। रुबियो ने कहा, “हमें संकेत मिले हैं कि रूस युद्धविराम के लिए अपनी शर्तों को लिखित रूप में तैयार कर रहा है, जिससे आगे की बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हम उन प्रस्तावों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पुतिन के असली इरादे सामने आ सकें।” रूस अगर टाल-मटोल करेगा तो कार्रवाई तय जब रुबियो से पूछा गया कि अगर रूस शांति प्रक्रिया को नजरअंदाज करता है तो क्या अमेरिका उस पर और प्रतिबंध लगाएगा, उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अगर यह साबित हो गया कि रूस सिर्फ युद्ध जारी रखना चाहता है और वार्ता में रुचि नहीं है, तो नए प्रतिबंध ही हमारा अगला कदम होंगे।”  राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल संयम बरत रहे रुबियो ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी किसी भी तरह की प्रतिबंध की धमकी से बचना चाहते हैं, ताकि  कूटनीतिक वार्ता पर असर न पड़े। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति मानते हैं कि अगर हम पहले ही धमकी देना शुरू करें, तो रूस वार्ता से पीछे हट सकता है।” पुतिन-ट्रंप की दो घंटे की अहम बातचीत रुबियो ने खुलासा किया कि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन के बीच  दो घंटे लंबी फोन कॉल  हुई है। इस बातचीत के बाद रूस और यूक्रेन ने तत्काल युद्धविराम और शांति वार्ता शुरू करने पर सहमति  जताई है। वेटिकन करेगा शांति वार्ता की मेज़बानी इस बीच वेटिकन ने नई पहल करते हुए कहा है कि वह इन संभावित वार्ताओं की मेज़बानी करने को तैयार है। नव-निर्वाचित पोप लियो XIV  इसके लिए तैयार हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब इस्तांबुल में पिछली वार्ता असफल  रही थी, हालांकि रूस और यूक्रेन ने कैदियों की अदला-बदली पर समझौता कर लिया था।  नजरें पुतिन के अगले कदम पर अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुतिन वास्तव में शांति के प्रस्तावों को आगे बढ़ाते हैं या युद्ध को खींचते हैं। अमेरिका ने संकेत दे दिया है  *अगर शांति की दिशा में ईमानदारी नहीं दिखाई गई, तो दबाव और बढ़ेगा।

BJP विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज- ‘महिला को इंजेक्शन देकर पहले गैंगरेप फिर चेहरे पर किया पेशाब’

बेंगलुरु बेंगलुरु की एक 40 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने एक वर्तमान बीजेपी विधायक और उनके तीन सहयोगियों पर जून 2023 में सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। यह शिकायत इस सप्ताह दर्ज की गई है, जिसमें आरआर नगर के विधायक मुनीअर्तना नायडू और उनके तीन सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। महिला ने आरोप लगाया कि उस समूह ने उसे कंधे में एक अज्ञात पदार्थ का इंजेक्शन लगाने के बाद शारीरिक उत्पीड़न किया। इसके अलावा, उसने यह भी दावा किया कि इस घटना के बाद से वह एक स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रही है। उसकी शिकायत के अनुसार, हमले के दौरान आरोपियों ने उसके चेहरे पर पेशाब किया और धमकी दी कि अगर उसने विरोध किया या आवाज उठाई, तो वे उसके बेटे को मार डालेंगे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाएंगे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कहा है कि जांच जारी है। अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पाकिस्तान में पानी के लिए बहा खून! प्रदर्शनकारियों ने मंत्री का घर फूंका, पुलिस ने चलाई गोलियां

 सिंध प्रांत पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा मुश्किलों से घिरा है जहां एक तरफ बलूचिस्तान में अस्थिरता है तो दूसरी तरफ उसका सिंध प्रांत भी जल रहा है. सिंध में लोग विवादित छह-नहर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. इसी प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के नौशहरो फिरोज जिले में स्थित आवास पर धावा बोल दिया और आग लगा दी. प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति की तोड़फोड़ की और घर के सामान को आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे के पास मोरो शहर में स्थित मंत्री के आवास को निशाना बनाया और पास में खड़े दो ट्रेलरों को भी आग के हवाले कर दिया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और एक डीएसपी और छह अन्य पुलिसकर्मियों सहित एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए. चोलिस्तान नहर का मुद्दा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सिंध सरकार और केंद्र की शहबाज शरीफ सरकार के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है. पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार चोलिस्तान रेगिस्तान की सिंचाई के लिए सिंधु नदी पर छह नहरों के निर्माण की प्लानिंग कर रही थी. लेकिन पीपीपी और सिंध प्रांत के अन्य राजनीतिक दल इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, चोलिस्तान कैनल सिस्टम की अनुमानित लागत 211.4 अरब रुपये है और इस प्रोजेक्ट के जरिए हजारों एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य जमीन में बदलना था. प्रोजेक्ट के तहत 400,000 एकड़ जमीन पर खेती की योजना थी. लेकिन सिंध में इस प्रोजेक्ट का भारी विरोध हो रहा था जिसमें राजनीतिक दल, धार्मिक संगठन, एक्टिविस्ट्स और वकील शामिल थे. प्रोजेक्ट के खिलाफ पूरे सिंध में रैलियां और धरना प्रदर्शन किए गए. इसे देखते हुए पिछले महीने इस प्रोजेक्ट को कॉमन इंटरेस्ट्स काउंसिल (CCI) ने अस्वीकार कर दिया. सीसीआई की बैठक के बाद पाकिस्तान के पीएमओ की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, ‘सभी प्रांतों के बीच आपसी समझ और आम सहमति के बिना कोई भी नई नहर नहीं बनाई जाएगी… जब तक प्रांतों के बीच व्यापक समझौता नहीं हो जाता, तब तक केंद्र किसी भी योजना पर आगे नहीं बढ़ेगा.’ सीसीआई के निर्णय के बावजूद, सिंध में प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहा और सरकार ने प्रदर्शनकारियों से इसे समाप्त करने का आग्रह किया. पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो मंत्री के आवास पर हमले को लेकर क्या बोले? पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने मंत्री के आवास पर हमले की कड़ी निंदा की है और इसे “आतंकवादी कृत्य” बताया है. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा फैलाने वालों ने अपनी दुर्भावनापूर्ण मंशा उजागर कर दी है. बिलावल भुट्टो ने सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया. गृह मंत्री के घर घुसे प्रदर्शनकारी वहीं मौत की जानकारी मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर हिंसक रूप धारण कर लिया और दो ट्रेलरों में आग लगा दी। उन्होंने सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के घर में भी घुसकर तोड़फोड़ की और उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी, जबकि कुछ मोटरसाइकिलों को भी आग लगा दी गई।  

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