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अब चाइना की नई चाल, CPEC का विस्तार होगा अफगानिस्तान तक

बीजिंग/इस्लामाबाद चीन ने भारत के साथ तालिबान की बढ़ती करीबी को देखते हुए पाकिस्तान के साथ मिलकर नया दांव चला है। बीजिंग में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग के बाद चीन ने ऐलान किया है कि अब चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का विस्तार अफगानिस्तान तक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि पाकिस्तान के साथ भी अफगानिस्तान के रिश्तों को सुधारा जा सके। इसके अलावा अफगानिस्तान को भारत से दूर करने की कोशिश की जाए, जो आमतौर पर पाकिस्तान से दूरी बनाकर चलता रहा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होने के बाद उम्मीद रखी थी कि उसका दखल बढ़ेगा, लेकिन तालिबान के राज में उसे झटका ही लगा है। ऐसे में अब चीन ने कमान संभाली है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार, चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अफगानिस्तानी समकक्ष आमिर खान मुत्ताकी की मीटिंग थी। इस दौरान तय हुआ कि CPEC का विस्तार अफगानिस्तान तक होगा। इसके अलावा अब तीनों देशों की अगली मीटिंग भी अफगानिस्तान में ही करने का फैसला लिया गया है। तीन दिन के चीन दौरे पर गए पाकिस्तान के नेता ने इस दौरान भारत की ओर से चले ऑपरेशन सिंदूर के बारे में भी चीन को जानकारी दी। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए गए। भारतीय सेना का कहना है कि इस ऐक्शन में करीब 100 आतंकी मारे गए हैं। इशाक अहमद डार ने चीन और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ तस्वीर साझा की है। इसके साथ ही लिखा कि चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए साथ खड़े हैं। माना जा रहा है कि CPEC के विस्तार की एक वजह यह है कि अफगानिस्तान ने पिछले कुछ दिनों में चाबहार पोर्ट में दिलचस्पी दिखाई है। इस बंदरगाह का विकास भारत ने ईरान के साथ मिलकर किया है। ऐसे में अफगानिस्तान की भारत के साथ करीबी न बढ़े, इसके लिए चीन ने यह दांव चला है। तालिबान को मान्यता देने वाले देशों में अग्रणी था चीन गौरतलब है कि अफगानिस्तान पर तालिबान की सत्ता को मान्यता देने वाले देशों में चीन सबसे आगे था। लेकिन भारत के साथ तालिबान के रिश्ते सुधरने के बाद से चीन ने फिर से करीबी बढ़ाई है। बता दें कि CPEC का एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है, जिस पर भारत को आपत्ति है। इसी के चलते भारत ने चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव में शामिल होने से इनकार किया था। उसकी BRI योजना का ही एक हिस्सा CPEC भी है।

वक्फ इस्लाम का गैर जरूरी हिस्सा! सिर्फ दान है, सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ पर बहस के दौरान एक अहम बात कही। सरकार ने कहा कि वक्फ, जो कि एक इस्लामिक अवधारणा है, इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है। इसलिए इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार के तौर पर नहीं माना जा सकता। सरकार वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में यह बात कह रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि वक्फ इस्लाम का जरूरी हिस्सा है, तब तक बाकी तर्क बेकार हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वक्फ को मौलिक अधिकार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि वक्फ इस्लाम का एक जरूरी हिस्सा है, तब तक इस पर कोई दावा नहीं किया जा सकता। लाइव लॉ के अनुसार, मेहता ने कहा, ‘वक्फ एक इस्लामिक अवधारणा है, इस पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन जब तक यह नहीं दिखाया जाता कि वक्फ इस्लाम का एक अनिवार्य हिस्सा है, तब तक बाकी सभी तर्क बेकार हैं।’ मेहता ने अधिनियम का बचाव करते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सरकारी जमीन पर दावा करने का अधिकार नहीं है। भले ही उसे ‘वक्फ बाय यूजर’ सिद्धांत के तहत वक्फ के रूप में कैटगराइज किया गया हो। ‘वक्फ बाय यूजर’ का मतलब है कि अगर कोई जमीन लंबे समय से धार्मिक या दान के काम के लिए इस्तेमाल हो रही है, तो उसे वक्फ घोषित कर दिया जाता है। मेहता ने साफ कहा, ‘किसी को भी सरकारी जमीन पर अधिकार नहीं है।’ उन्होंने एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई संपत्ति सरकार की है और उसे वक्फ घोषित कर दिया गया है, तो सरकार उसे बचा सकती है। सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा, ‘वक्फ बाय यूजर मौलिक अधिकार नहीं है, इसे कानून द्वारा मान्यता दी गई थी। फैसले में कहा गया है कि अगर कोई अधिकार विधायी नीति के रूप में दिया गया है, तो उस अधिकार को हमेशा वापस लिया जा सकता है।’ मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने दलीलें दीं. आज केंद्र का पक्ष रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने एसजी तुषार मेहता ने याचिकाकर्ताओं की उस आपत्ति पर जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि नया वक्फ कानून संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार एसजी तुषार मेहता ने कहा, ‘जब तक मैंने रिसर्च नहीं की थी तब तक मुझे इस्लाम धर्म के इस हिस्से के बारे में नहीं पता था कि वक्फ इस्लामिक अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है.’ उन्होंने कहा कि चैरिटी का कॉन्सेप्ट हर धर्म में मौजूद है. ईसाई धर्म में भी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट कहता है कि किसी के लिए भी यह जरूरी नहीं है. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हिंदुओं में भी दान देने जैसी चीजें हैं और सिख धर्म में भी ऐसा ही है, लेकिन किसी भी धर्म में इसे जरूरी नहीं बताया गया है. एसजी मेहता ने कहा कि अगर मान लें कि मुस्लिम समुदाय के ज्यादातर लोगों की फाइनेंशियल स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है और वह वक्फ नहीं कर पाते हैं, तो क्या वह मुस्लिम नहीं होंगे. यह सुप्रीम कोर्ट की ओर से किया गया एक परीक्षण है, ये निर्धारित करने के लिए कि कोई प्रथा आवश्यक धार्मिक प्रथा है या नहीं. उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म में चैरिटी करना जरूरी नहीं है, इसी तरह इस्लाम में वक्फ है. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ बाय यूजर मौलिक अधिकार नहीं है. इसे 1954 में कानून द्वारा मान्यता दी गई थी और उससे पहले बंगाल एक्ट में. उन्होंने एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई अधिकार विधायी नीति के रूप में कानून द्वारा प्रदान किया गया है, तो उसे राज्य द्वारा हमेशा के लिए छीना जा सकता है.

लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए वकीलों पर गंभीर आरोप लगाए, काम वकील नहीं करना चाहते, दोष हम पर आता है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली बीते 14 मई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस बी आर गवई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए वकीलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। CJI गवई ने कहा है कि वकील छुट्टियों के दौरान काम नहीं करना चाहते हैं, लेकिन लंबित मामलों के लिए कोर्ट को दोषी ठहराया जाता है। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ उस समय भड़क गई, जब एक वकील ने याचिका को गर्मी की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध करने की अपील की। इस दौरान CJI गवई ने कहा, “पांच न्यायाधीश छुट्टियों के दौरान बैठ रहे हैं और काम करना जारी रख रहे हैं, फिर भी लंबित मामलों के लिए हमें दोषी ठहराया जाता है। असल में वकील ही छुट्टियों के दौरान काम नहीं करना चाहते हैं।” गौरतलब है कि हाल ही में शीर्ष अदालत ने एक अधिसूचना जारी की है जिसके तहत जजों की पीठ आगामी ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान काम भी करेंगी। 26 मई से 13 जुलाई तक चलने वाली अवधि को “पार्शियल कोर्ट वर्किंग डेज” का नाम दिया गया है। इन आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान दो से पांच वेकेशन बेंच बैठेंगी। वहीं मुख्य न्यायधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष पांच जज भी इस अवधि के दौरान अदालतें लगाएंगे। 26 मई से 1 जून तक सीजेआई गवई, जरिए सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस बी वी नागरत्ना क्रमशः पांच पीठों का नेतृत्व करेंगे। इस अवधि के दौरान शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी। रजिस्ट्री सभी शनिवार (12 जुलाई को छोड़कर), रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर बंद रहेगी। बता दें कि पहले की प्रथा के मुताबिक ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सिर्फ दो अवकाश पीठ ही हुआ करती थीं और वरिष्ठ न्यायाधीशों की अदालतें नहीं लगती थीं।

पाक के बलूचिस्तान प्रांत में आत्मघाती बम धमाका, पाक ने स्कूल बस अटैक में उलटे भारत पर लगा दिया आरोप, 5 की मौत

क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आत्मघाती बम धमाका हुआ है। यह हमला एक मिलिट्री स्कूल की बस को टारगेट करके किया गया, जिसमें तीन मासूम बच्चों समेत 5 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 38 जख्मी हैं। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बीते कई सालों से हिंसा का दौर जारी है। यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें स्कूल बस जैसी चीज को टारगेट किया गया है। अब तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है। वहीं ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने से बौखलाए पाकिस्तान ने इसका ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट आईएसपीआर ने इस हमले में भारत का हाथ बता दिया। आईएसपीआर ने अपने देश के आंतरिक संघर्ष में भारत का नाम घसीटने की नापाक कोशिश करते हुए कहा, ‘एक बार फिर से कायराना हमला हुआ है, जो भारत और उसके समर्थकों ने बलूचिस्तान में किया है। इस हमले में मासूम बच्चों को ले जा रही स्कूल बस को टारगेट किया है।’ यह हमला बलूचिस्तान के खुजदार में हुआ है। बता दें कि बलूचिस्तान में लंबे समय से विद्रोह की स्थिति है। यहां पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी समेत कई ऐसे संगठन सक्रिय हैं, जो हिंसक संघर्ष कर रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि बलूचिस्तान को एक अलग मुल्क बनना चाहिए और पाकिस्तान ने उन पर कब्जा किया हुआ है। इसी कड़ी में यह नया हमला हुआ है, जबकि अकसर हमले होते रहे हैं। यह हमारा पाकिस्तानी सेना से जुड़े एक स्कूल की बस में हुआ है। आमतौर पर बलूच विद्रोही महिलाओं और बच्चों को टारगेट करने से बचते रहे हैं। लेकिन आर्मी स्कूल की बस होने के चलते शायद इसे टारगेट किया गया है। इसके जरिए पाकिस्तान की सेना को संदेश देने की कोशिश की गई है। अब तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, पाकिस्तानी सूत्रों का दावा है कि इसमें बलूच आर्मी का ही हाथ लग रहा है। बता दें कि इससे पहले पेशावर में 2014 में पाक तालिबान ने खूंखार हमला किया था। इसमें 154 मासूम बच्चों समेत 168 लोग मारे गए थे। गौरतलब है कि बलूचिस्तान के साथ ही पाकिस्तान में सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी अलगाववाद के सुर सुनाई देते हैं।

लेखिका बानू मुश्ताक ने रचा इतिहास, ‘हार्ट लैंप’ के लिए जीता इंटरनेशनल बुकर प्राइज

 नई दिल्ली   भारतीय लेखिका, वकील और एक्टिविस्ट बानू मुश्ताक ने अपनी किताब ‘हार्ट लैंप’ के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीता है। बानू मुश्ताक कर्नाटक कीर रहने वाली हैं। बानू मुश्ताक को उनकी कन्नड़ कहानी संग्रह हार्ट लैंप के लिए साल 2025 का प्रतिष्ठित बुकर प्राइज मिला है। यह पहली बार है, जब कन्नड़ भाषा में लिखी किसी किताब को बुकर प्राइज मिला है। उन्होंने ये किताब जीतकर इतिहास रच दिया। दीपा भष्ठी ने इस किताब का कन्नड़ से अंग्रेजी में अनुवाद किया था। कब और कहां हुआ पुरस्कार का एलान? पेशे से वकील और पत्रकार, बानू मुश्ताक ने कहानीकार, कवि, उपन्यासकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। 20 मई लंदन के टेट मॉडर्न में आयोजित एक समारोह में इस पुरस्कार का एलान किया गया। 12 कहानियों का संग्रह है बता दें कि 2025 के निर्णायक मंडल की अध्यक्षता करने वाले लेखक मैक्स पोर्टर ने हार्ट लैंप को विजेता के रूप में घोषित किया। पोर्टर ने कहा, कई साल बाद ‘हार्ट लैंप’ अंग्रेजी पाठकों के लिए कुछ नया है ।यह अनुवाद की हमारी समझ को चुनौती देता है और उसे अच्छा करना में बेहतर करता है। बानू मुश्ताक उनकी 12 शॉर्ट स्टोरीज यानी लघु कहानियों का एक संग्रह है। उन्हें इस किताब को लिखने में लगभग 30 साल लगे। बानू मुश्ताक ने पुरस्कार जीतने के बाद वहां बैठे लोगों से कहा, वैश्विक दर्शकों के लिए कन्नड़ को और अधिक पेश करने की जरूरत है। दुनिया भर के पाठकों के लिए अधिक से अधिक कन्नड़ साहित्य लाने की आवश्यकता है। क्या है हार्ट लैंप में हार्ट लैंप में 12 कहानियां हैं। ये कहानियां 1990 से 2023 के बीच लिखी गईं। ये पितृसत्तात्मक दक्षिण भारतीय समुदायों में रहने वाली आम महिलाओं की हिम्मत, प्रतिरोध, हास्य और बहनचारे की कहानियां हैं। ये कहानियां कन्नड़ संस्कृति की मौखिक परंपराओं से प्रेरित हैं। हार्ट लैंप- कहानियां और उनका प्रभाव जजों ने हार्ट लैंप को ‘हास्यपूर्ण, जीवंत, बोलचाल की भाषा में, मार्मिक और तीखा बताया। इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2025 के जजों के अध्यक्ष मैक्स पोर्टर ने इसे ‘अंग्रेजी पाठकों के लिए कुछ नया’ कहा। उन्होंने किताब के अनुवाद को ‘एक कट्टरपंथी अनुवाद’ बताया। उन्होंने कहा कि यह अनुवाद भाषा को बदलता है और अंग्रेजी में नए रूप बनाता है। यह अनुवाद की समझ को चुनौती देता है और बढ़ाता है। पोर्टर ने आगे कहा, ‘यह वह किताब थी जिसे जजों ने पहली बार पढ़ने से ही पसंद किया था। जूरी के अलग-अलग नजरियों से इन कहानियों की सराहना सुनना बहुत खुशी की बात थी। उन्होंने महिलाओं के अनुभवों, प्रजनन अधिकारों, आस्था, जाति, शक्ति संरचनाओं और उत्पीड़न पर कहानियों के बारे में बताया। क्या बोलीं बानू मुश्ताक बानू मुश्ताक ने खुद कहा, ‘यह किताब इस विश्वास से पैदा हुई है कि कोई भी कहानी छोटी नहीं होती, कि मानव अनुभव के ताने-बाने में हर धागे का अपना महत्व होता है।’ उन्होंने साहित्य की लोगों को जोड़ने की शक्ति पर विचार किया। उन्होंने कहा कि एक ऐसी दुनिया में जो अक्सर हमें बांटने की कोशिश करती है, साहित्य उन पवित्र जगहों में से एक है जहां हम एक-दूसरे के दिमाग में जी सकते हैं, भले ही कुछ पन्नों के लिए ही सही। 2022 के बाद यह दूसरा भारतीय पुरस्कार है। उस साल गीतांजलि श्री और डेज़ी रॉकवेल को टॉम्ब ऑफ सैंड के लिए पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार जीतने वाला पहला हिंदी उपन्यास था। पेरुमल मुरुगन का तमिल उपन्यास पायरे 2023 में लंबी सूची में था।  

चंडोला में गरजा बुलडोजर, 8500 घरों को तबाह करने का वीडियो आया सामने

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में चंडोला तालाब के किनारे एक साथ गरजे करीब 50 बुलडोजरों ने एक ही दिन में करीब 8500 मकानों/ढांचों को पत्थर-पत्थर कर डाला। अब कुछ धार्मिक ढांचे ही बचे हैं। पुलिस का कहना है कि इन्हें सम्मान के साथ हटाया जाएगा। अहमदाबाद नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण को हटाकर 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन खाली कराई है। अहमदाबाद के जॉइंट कमिश्नर (क्राइम ब्रान्च, सेक्टर 2) जयपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि कल चंडोला तालाब के किनारे अवैध अतिक्रमण को हटाने का दूसरे चरण का काम शुरू हुआ था। जितना अतिक्रमण हटाना था, उसमें से 99.9 फीसदी ध्वस्तीकरण पूरा हो चुका है। 2.25 लाख वर्ग मीटर जमीन खाली करा ली गई है। अब कुछ धार्मिक ढांचे ही बचे हैं जिन्हें सम्मान के साथ हटाया जाएगा। हमारी अपील है कि कोई अफवाह पर ध्यान ना दें। नगर निगम की नीति के मुताबिक जिन्हें मकान मिलना है उनके फॉर्म लिए जा चुके हैं। सरकारी जमीन पर निर्माण अहमदाबाद पुलिस आयुक्त जी एस मलिक के अनुसार नगर निगम ने चंदोला झील के आसपास 2.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र से अवैध निर्माणों को हटाने का फैसला किया है। पिछले महीने 1.25 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के घरों समेत अतिक्रमण को हटाया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने बताया कि दूसरे और अंतिम चरण में एएमसी पुलिस की मदद से शेष भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराएगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मियों और राज्य रिजर्व पुलिस (एसआरपी) के जवानों को तैनात किया गया है। सिंघल ने कहा कि पहले चरण में हमारा मुख्य लक्ष्य असामाजिक तत्व और अवैध बांग्लादेशी निवासी थे, जो यहां रह रहे हैं। हमने अतिक्रमण विरोधी अभियान के पहले चरण से पूर्व यहां अवैध रूप से रह रहे 202 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। दूसरे चरण में हम शेष अवैध अतिक्रमण को हटा देंगे। जब तक सभी अवैध ढांचे हटा नहीं दिए जाते, तब तक अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी रहेगा। ड्रोन से हुआ अवैध निर्माण का सर्वेक्षण संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि यह अभियान शुरू करने से पहले एएमसी ने एक सर्वेक्षण किया और पाया कि झील के आसपास का लगभग 2.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र पर अब भी अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन सर्वेक्षण से पुष्टि हुई है कि इस विशाल भूमि पर लगभग 8,000 मकान अवैध रूप से बनाए गए हैं। सिंघल ने बताया कि एएमसी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 2010 या उससे पहले से यहां रहने वाले लोग वैकल्पिक आवास के लिए पात्र होंगे और कई लोग पहले ही अपना घरेलू सामान वहां ले जा चुके हैं। उन्होंने कहा एएमसी के कम से कम 50 दलों ने सुबह अपना काम शुरू कर दिया है और दोपहर तक 30 प्रतिशत क्षेत्र को साफ कर दिया गया है। हमने क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखने के लिए 50 ड्रोन तैनात किए हैं। पहलगाम हमले के बाद अहमदाबाद में यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिये पकड़े गए थे। 29 और 30 अप्रैल को अहमदाबाद नगर निगम ने पहले चरण के बुलडोजर ऐक्शन में बड़ी संख्या में ढांचों को गिरा दिया था। 20 मई से शुरू हुए दूसरे चरण में नगर निगम की 50 टीमों को सात जोन में बांटकर काम पर लगाया गया था। 350 स्टाफ सदस्यों के साथ सुबह 7 बजे ही ध्वीस्तीकरण का काम शुरू हुआ जो देर शाम तक जारी रहा। 50 से ज्यादा बुलडोजर/अर्थमूवर से अवैध ढांचों को मिट्टी में मिला दिया गया। कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए 3000 पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया था। तालाब किनारे एक बेहद सघन बस्ती थी। जॉइंट पुलिस कमिश्नर शरद सिंघल ने मंगलवार को पीटीआई को बताया था कि पहले चरण में हमारा मुख्य लक्ष्य असामाजिक तत्व और अवैध बांग्लादेशी निवासी थे जो यहां रह रहे हैं। हमने अतिक्रमण विरोधी अभियान के पहले चरण से पूर्व यहां अवैध रूप से रह रहे 202 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। दूसरे चरण में हम शेष अवैध अतिक्रमण को हटा देंगे। जब तक सभी अवैध ढांचे हटा नहीं दिए जाते, तब तक अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी रहेगा। किन्हें मिलेगा घर अहमदाबाद नगर निगम ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 2010 या उससे पहले से यहां रहने वाले लोग वैकल्पिक आवास के लिए पात्र होंगे और कई लोग पहले ही अपना घरेलू सामान वहां ले जा चुके थे।

पाकिस्तान खाद्य सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक हालात, खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 0.3 % रह गई

कराची पाकिस्तान अपने मुल्क में आतंकियों को पनाह देता है और यह बात पूरी दुनिया जानती है. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया. इसस पहले पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया गया और पड़ोसी मुल्क के साथ कारोबार पूरी तरह से रोक दिया गया. ऐसे में पहले से ही खस्ताहाल मुल्क पाकिस्तान की हालत और भी बिगड़ गई है और वहां अकाल जैसे हालात बन गए हैं. भुखमरी जैसे हालात पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान खाद्य सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक हालात का सामना कर रहा है. दिसंबर 2024 तक खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई, जो वर्ष की शुरुआत में दोहरे अंकों से कम थी, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी, भोजन तक सबकी पहुंच में सबसे बड़ी बाधा बन रही है. साल 2022 की बाढ़ ने पाकिस्तान पर गहरे निशान छोड़े हैं. साल 2023 और 2024 में बेमौसम की घटनाओं ने आजीविका को खत्म कर दिया, खासकर ग्रामीण बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में संकट ज्यादा गहरा है. इन क्षेत्रों में जलस्तर लगातार घटता जा रहा है, जिससे कृषि घाटा बढ़ रहा है और उसपर निर्भर किसान गहरे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं. कुपोषण बना चिंता का विषय रिपोर्ट में  ताजा आकलन के मुताबिक बताया गया कि पाकिस्तान में 11 मिलियन लोग IPC फेस 3 संकट या उससे भी बदतर हालात में हैं, जबकि 2.2 मिलियन लोगों के सामने इमरजेंसी जैसी स्थिति है. सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में कुपोषण का लगातार बढ़ना चिंताजनक है, जहां कम वजन वाले बच्चों की बड़ी संख्या जन्म लेती है और डायरिया और फेफड़ों से संबंधित इंफेक्शन बढ़ा है. इंडीग्रेटिड फूट सिक्योरिटी फेस क्लासिफिकेशन फेस-3 का मतलब है कि आजीविका को बचाने, खाद्य संकट दूर करने और कुपोषण से लड़ने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. इन चुनौतियों को ज्यादा जटिल बनाने वाली बात है मानवीय आधार पर मिलने वाले वैश्विक निवेश का घटना, जिसने खाद्य सहायता कार्यक्रमों को कम कर दिया है. वैश्विक संस्थाओं से पाकिस्तान को मानवीय आधार पर मिलने वाली आर्थिक मदद कम हुई है, जिससे वहां खाद्य सुरक्षा, कुपोषण जैसे चुनौतियों से निपटने के लिए चल रहे कार्यक्रम कमजोड़ पड़े हैं. आतंकियों का मददगार PAK डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल नीतियों में बदलाव की जरूरत है. केंद्र और प्रांतों को अपना सोशल सिक्योरिटी नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत है. साथ ही माताओं और बच्चों के लिए पोषण सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए और कृषि में ज्यादा निवेश करना चाहिए. निर्णायक कार्रवाई के बिना, पाकिस्तान पर भूख और गरीबी के पुराने चंगुल में फिर से फंसने का खतरा मंडरा रहा है. पाकिस्तान की सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा से ज्यादा खर्च आतंकियों पर कर रही है. हाल ही में शहबाज सरकार ने आतंकी मसूद अजहर को 14 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. जब तक वहां की सरकार आतंकियों को पालेगी और उनकी मदद करेगी तब तक आम नागरिकों के हितों की रक्षा होना बहुत मुश्किल है.  

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के काम ने पकड़ी तेजी, 300 किलोमीटर लंबा पुल तैयार, 27 कास्टिंग यार्ड फाइनल

मुंबई गुजरात के सूरत में 40 मीटर लंबे गर्डर के बनने के साथ ही बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के 300 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा हो गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने  यह जानकारी दी। एनएचएसआरसीएल ने बताया कि 300 किलोमीटर लंबे सुपरस्ट्रक्चर में से 257 किलोमीटर पुल का निर्माण फुल स्पैन लॉन्चिंग मैथड से की गई है। अभी क्या है काम की स्थिति एनएचएसआरसीएल के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अभी तक नदियों पर 14 ब्रिज बनाए गए हैं। 37 किलोमीटर लंबा पुल स्पैन बाय स्पैन तकनीक से बनाया गया है। 0.9 किलोमीटर लंबा स्टील का पुल बनाया गया है और 1.2 किलोमीटर लंबा पीएससी पुल बनाया गया है। साथ ही 2.7 किलोमीटर में स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण हुआ है। 300 किलोमीटर के अलावा 401 किलोमीटर में नींव का काम और 326 किलोमीटर में गर्डर कास्टिंग का काम पूरा हो चुका है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में तेजी आई है। खासकर फुल स्पैन लॉन्चिंग मैथड से इसमें उल्लेखनीय विकास हुआ है। रेल मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का कितने किमी लंबा ट्रैक तैयार हो गया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘300 किमी वायडक्ट पूरा हुआ।’ इसका मतलब है कि बुलेट ट्रेन के रास्ते का 300 किलोमीटर का हिस्सा अब खंभों पर बन चुका है। वायडक्ट का मतलब है, पुल जैसा ढांचा जिस पर ट्रेन चलेगी। मुंबई स्टेशन का कितना काम पूरा? मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बन रहा है। यह स्टेशन जमीन के नीचे होगा। यहाँ पर 76 प्रतिशत खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एक खबर के अनुसार, 14.2 लाख क्यूबिक मीटर खुदाई हो चुकी है। कुल 18.7 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी वहां से निकालनी है। यानी मिट्टी निकालने का करीब आधा काम पूरा हो गया है। साइट पर कंक्रीट लैब साइट पर 120 cum/hr क्षमता के तीन बैचिंग प्लांट लगाए गए हैं। बैचिंग प्लांट का मतलब है, वह जगह जहां कंक्रीट (सीमेंट, रेत, गिट्टी का मिश्रण) बनाया जाता है। बैचिंग प्लांट में आइस प्लांट और चिलर प्लांट भी हैं। ये कंक्रीट के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। गर्मी में कंक्रीट जल्दी सूख जाता है। इसलिए उसे ठंडा रखना जरूरी है। साइट पर एक आधुनिक कंक्रीट लैब भी है। यहां पानी की पारगम्यता और रैपिड क्लोराइड पेनिट्रेशन टेस्ट जैसी सुविधाएं हैं। इन टेस्ट से कंक्रीट की क्वालिटी पता चलती है। सारे कंक्रीट टेस्ट साइट पर ही होते हैं। कुछ सैंपल अच्छे लैब में भी भेजे जाते हैं। क्या होगा स्टेशन में खास?     प्लेटफॉर्म जमीन से लगभग 26 मीटर नीचे होगा।     यह लगभग 10 मंजिला इमारत जितना गहरा है।     स्टेशन में तीन फ्लोर होंगे: प्लेटफॉर्म, कॉनकोर्स (प्रतीक्षालय) और सर्विस फ्लोर।     खुदाई का काम लगभग 32 मीटर (100 फीट) की गहराई तक किया जा रहा है।     स्टेशन में छह प्लेटफॉर्म होंगे। हर प्लेटफॉर्म लगभग 415 मीटर लंबा होगा। यह 16 कोच वाली बुलेट ट्रेन के लिए काफी है। स्टेशन मेट्रो और सड़क से भी जुड़ा होगा।     स्टेशन में दो एंट्री/एग्जिट पॉइंट होंगे। इससे लोगों को स्टेशन में आने-जाने में आसानी होगी। स्काईलाइट होगी प्राकृतिक रोशनी के लिए एक स्काईलाइट भी बनाई गई है। स्काईलाइट से दिन में स्टेशन में सूरज की रोशनी आएगी। इससे बिजली की बचत होगी और स्टेशन सुंदर भी दिखेगा। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे देश में यातायात और तेज होगा। स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का हो रहा इस्तेमाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 27 कास्टिंग यार्ड बनाए गए हैं। स्टील ब्रिज के लिए सात वर्कशॉप स्थापित की गई हैं, जिनमें से तीन गुजरात में और एक उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में स्थापित की गई हैं। एजेंसी ने बताया कि पुल पर तीन लाख से ज्यादा आवाज अवरोधक लगाए गए हैं। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत बुलेट ट्रेन स्टेशनों की सड़क और रेल मार्ग से कनेक्टिविटी बनाई जा रही है ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से भारत की रेल तकनीक में बढ़ती क्षमताओं का भी प्रदर्शन हो रहा है। मुंबई अहमदाबाद रेल प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है, इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी और पांच-पांच हजार करोड़ रुपये गुजरात और महाराष्ट्र सरकार देंगी। वहीं बाकी जापान की सरकार कर्ज के रूप में देगी। 

भारत ओआईसी देशों को सीमा पार आतंकवाद की समस्याओं को लेकर एक बार फिर जानकारी देगा, मित्र देशों से नहीं होगी कोई बात

नई दिल्ली भारतीय सांसदों की टीम अगले कुछ दिनों तक 33 देशों का दौरा करेगी। वहां के सांसदों, सरकार के प्रतिनिधियों, मीडिया और थिंक टैंकों व आम जनों से मिलकर ना सिर्फ पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के बारे में उन्हें जानकारी देगी, बल्कि पाकिस्तान के आतंकी चेहरे का भी पर्दाफाश करेगी। विदेश जाने वाली टीम में कौन-कौन होगा? इस टीम में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा विदेश मंत्रालय के कुछ पुराने व अनुभवी राजनयिक भी हैं। टीम कब से कब तक करेगी दौरा? सात हिस्सों में बंटी इस टीम का दौरा 23 मई से शुरू होगा और तीन जून, 2025 को समाप्त होगा। टीम कहां-कहां जाएगी? टीम कहां-कहां जाएगी, इसका फैसला करने के समय इस बात का ख्याल रखा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की मदद करने वाले किसी भी देश का दौरा नहीं किया जाए। यानी भारतीय टीम तुर्की, चीन, अजरबैजान नहीं जा रही। विदेश मंत्रालय की तरफ से जो जानकारी दी गई है, उससे यह भी पता चलता है कि उन देशों को खास तौर पर तवज्जो दी गई है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्य हैं। देखा जाए तो यूएनएससी के पांच स्थाई सदस्यों में से चीन को छोड़कर अन्य चारों देश अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस का दौरा भारतीय प्रतिनिधिमंडल करेगा। इसी तरह से 10 अस्थाई सदस्यों में से पाकिस्तान और सोमालिया को छोड़कर मौजूदा अन्य आठ अस्थाई सदस्य देश अल्जीरिया, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, सिएरा लियोन, गुयाना, पनामा, स्लोवेनिया और ग्रीस की यात्रा पर भारतीय टीम जाएगी। बता दें कि पहलगाम हमले के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन के अलावा यूएनएससी के अन्य स्थाई सदस्यों के प्रमुखों से टेलीफोन पर बात की थी। जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 10 अस्थाई सदस्यों में पाकिस्तान को छोड़ कर अन्य नौ सदस्यों के विदेश मंत्रियों के साथ विमर्श किया था। इन सभी को भारत में सीमा पर आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर पाक के समर्थन में चल रही गतिविधियों के बारे में बताया गया था। किन देशों में नहीं जाएगी टीम? विदेश मंत्रालय मानता है कि जिस तरह से तुर्की व चीन ने पूरे मामले में भारत के विचारों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है, उसे देखते हुए इन्हें अपने पक्ष के बारे में अब जानकारी देने का कोई मतलब नहीं है। बहरहाल, भारतीय दल इस्लामिक देशों के संगठन (ओआईसी ) के कई सदस्य देशों की यात्रा करने वाला है, जिनमें कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, मलेशिया, यूएई, कतर और मिस्र हैं। इनमें से कई देशों के साथ भारत के बेहद पारंपरिक रिश्ते है। बता दें कि जब पहलगाम हमला हुआ था, तब पीएम मोदी सऊदी अरब की यात्रा पर थे। सऊदी अरब पाकिस्तान का भी मित्र देश है, लेकिन तब सऊदी अरब ने ना सिर्फ इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को मदद की पेशकश भी की थी। इसके बाद में ओआईसी की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ एक बयान भी जारी हुआ था। ऐसे में भारत ओआईसी देशों को सीमा पार आतंकवाद की समस्याओं को लेकर एक बार फिर जानकारी देगा।

रिपोर्ट: भारत से तुर्की और अजरबैजान के लिए वीजा आवेदनों में 42 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई

नई दिल्ली भारत से तुर्की और अजरबैजान के लिए वीजा आवेदनों में 42 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। हालिया भारत-पाक संघर्ष में दोनों ही देशों ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, जिसके चलते भारतीयों की ओर से इस तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है। वीजा प्रॉसेसिंग प्लेटफॉर्म एटलिस से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, केवल 36 घंटों के भीतर, वीजा आवेदन प्रक्रिया को बीच में ही छोड़ने वाले यूजर्स की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एटलिस के संस्थापक और सीईओ मोहक नाहटा ने कहा, “प्रतिक्रिया तीव्र और व्यवहारिक थी। लोगों को कुछ गंतव्यों से बचने के लिए कहने की आवश्यकता नहीं थी। वे सहज ज्ञान, जानकारी और विकल्पों तक पहुंच के आधार पर आगे बढ़े। यह मॉडर्न ट्रैवल को दिखाता है।” उन्होंने आगे कहा, “इसी भावना में हमने भारत के साथ खड़े होकर और राष्ट्रीय भावना के साथ एकजुटता दिखाते हुए तुर्की और अजरबैजान के लिए सभी मार्केटिंग प्रयासों को भी रोक दिया।” दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से आने वाले यात्रियों ने तुर्की जाने के लिए आवेदनों में 53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करवाई, जबकि इंदौर और जयपुर जैसे टियर 2 शहरों से आने वाले यात्रियों की रुचि अधिक मजबूत रही, जो केवल 20 प्रतिशत कम रही। अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने वाले यात्रियों की प्रकृति में भी बदलाव आया। पारिवारिक यात्राओं सहित ग्रुप वीजा रिक्वेस्ट में लगभग 49 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोलो और कपल रिक्वेस्ट में 27 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पता चलता है कि ग्रुप ट्रैवलर्स, जो अक्सर पहले से योजना बनाते हैं और राजनीतिक भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, व्यक्तिगत यात्रियों की तुलना में अधिक निर्णायक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं। एटलिस डेटा ने उम्र और इरादे के बारे में शुरुआती संकेत भी प्रकट किए। 25 से 34 वर्ष की आयु के यात्रियों के जल्दी से अपना रास्ता बदलने की संभावना सबसे अधिक थी, जिन्होंने तुर्की के लिए मिड-प्रोसेस एप्लिकेशन गिरावट में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया। दिलचस्प बात यह है कि महिला यात्रियों के गंतव्य को पूरी तरह से बदलने की संभावना अधिक थी, जिसमें वियतनाम या थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए आवेदन फिर से शुरू करने की प्रवृत्ति 2.3 गुना अधिक थी। जब तुर्की और अजरबैजान का रुझान कम हुआ, तो वैकल्पिक गंतव्यों की लोकप्रियता में उछाल आया। आंकड़ों से पता चला कि इसके बाद के दिनों में वियतनाम, इंडोनेशिया और मिस्र के लिए आवेदनों में 31 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई।

उत्तराखंड के मदरसों में गूंजेगा सेना का पराक्रम, ऑपरेशन सिंदूर की कहानी, मौलाना की जुबानी

देहरादून  पाकिस्तान की कायराना हरकत के जवाब में भारतीय सेना का पराक्रम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सबने देखा। अब उत्तराखंड की धामी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मदरसों में अब छात्र-छात्राओं को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में पढ़ाया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने यह फैसला लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे सेना के पराक्रम की कहानियों से परिचित हों। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। उत्तराखंड में कुल 451 मदरसे हैं, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे पढ़ते हैं। मुफ्ती शमून कासमी ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उनके साथ कुछ शिक्षाविद और बुद्धिजीवी भी मौजूद थे। उन्होंने रक्षा मंत्री को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के लिए बधाई दी। कासमी ने बताया कि उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सशस्त्र बलों ने बेजोड़ शौर्य का परिचय दिया। इसका मतलब है कि उत्तराखंड वीरों की धरती है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमारी सेना ने अद्भुत बहादुरी दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता ने सेना के शौर्य को सराहा है। कासमी ने आगे कहा कि मदरसों के बच्चों को भी सैनिकों की बहादुरी के बारे में बताया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चैप्टर शामिल किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही पाठ्यक्रम समिति की बैठक बुलाई जाएगी। रक्षा मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कई लोग शामिल थे। इनमें रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा, इस्लामिक सेंटर के पूर्व अध्यक्ष सिराज कुरैशी और आईसीएफए के अध्यक्ष एमजे खान जैसे लोग मौजूद थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण अभियान था। इसकी सफलता की कहानी अब मदरसों के बच्चों को पढ़ाई जाएगी। इससे बच्चों को देश के सैनिकों के बलिदान और शौर्य के बारे में पता चलेगा। यह फैसला उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे देश के इतिहास और सेना के पराक्रम से परिचित हों। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने तबाह किए आतंकी ठिकाने भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने स्पष्ट करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात को एक साहसिक सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के कुल 9 ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए. ये सभी ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे. इस सुनियोजित और रणनीतिक कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया. यह सभी आतंकी गुट भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे और इन्हीं ठिकानों से उन्हें प्रशिक्षण, हथियार और दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे. भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर इन ठिकानों की पहचान की गई थी, जिसके बाद सेना ने सटीक लक्ष्य साधकर ऑपरेशन को अंजाम दिया. भारत के सैन्य इतिहास में गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा ऑपरेशन सिंदूर ऑपरेशन सिंदूर की सबसे खास बात यह रही कि इस पूरे अभियान में भारत ने सिर्फ और सिर्फ आतंकी अड्डों को ही निशाना बनाया. पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान या नागरिक ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया. यह ऑपरेशन न केवल भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और सटीकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ‘नो टॉलरेंस’ नीति पर पूरी मजबूती से कायम है. ऑपरेशन सिंदूर, भारत के सैन्य इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है. इस अध्याय के बारे में उत्तराखंड के मदरसों के छात्र विस्तार से पढ़ेंगे. उत्तराखंड में कितने मदरसे हैं? BBC की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 451 मदरसे मदरसा शिक्षा परिषद (मदरसा बोर्ड) से पंजीकृत हैं, लेकिन करीब 500 मदरसे बिना पंजीकरण के चल रहे हैं.

जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे:UK-फ्रांस-कनाडा

 गाजा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शपथ ली है कि वे पूरे गाजा को ‘नियंत्रण’ में लेकर रहेंगे. लेकिन नेतान्याहू के प्लान पर ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने आंखें तरेर ली है. बेंजामिन नेतान्याहू की सेना ने कहा है कि उन्होंने पूरे गाजा शहर को कॉम्बैट जोन घोषित कर दिया है. इस बीच गाजा में एयरस्ट्राइक में 60 लोग मारे गए हैं. इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मॉट्रिच ने कहा कि इजरायल की सेना फिलिस्तीनी गाजा के बचे हुए हिस्से को “समाप्त” कर देगी. इस बीच  ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने सोमवार को कहा है कि, “जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे. अगर इजरायल ने नए सिरे से सैन्य हमले बंद नहीं किए और मानवीय सहायता पर अपने प्रतिबंध नहीं हटाए, तो हम जवाब में और ठोस कदम उठाएंगे.” नेतन्याहू का टोटल कंट्रोल का प्लान क्या है? इजरायल की गाजा पर पूर्ण नियंत्रण की योजना में सैन्य कब्जा, हमास को खत्म करना, बंधकों की रिहाई, और पूरे क्षेत्र को इजरायल के लिए सुरक्षित बनाना शामिल है. यह योजना सैन्य अभियानों, मानवीय सहायता पर नियंत्रण, और संभावित विस्थापन नीतियों के माध्यम से लागू की जा रही है. बता दें कि इजरायली संसद और सुरक्षा कैबिनेट ने मई 2025 में गाजा पट्टी पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का उद्देश्य हमास को सैन्य और प्रशासनिक रूप से पूरी तरह से खत्म करना और गाजा में बंधकों को रिहा कराना है. इजरायल पहले से ही गाजा के लगभग 50% हिस्से पर नियंत्रण रखता है, और इस योजना के तहत पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की रणनीति बनाई गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इजरायल पूरे गाजा पर कंट्रोल करेगा. शुक्रवार को एक नए ऑपरेशन की शुरुआत की घोषणा करने वाली इजरायली सेना ने सोमवार को दक्षिणी शहर खान यूनिस के निवासियों को तुरंत समुद्री तट पर जाने की चेतावनी दी, क्योंकि वह “अभूतपूर्व हमले” की तैयारी कर रही है. इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियानों को तेज करने का फैसला किया है, जिसमें हवाई हमले, जमीनी ऑपरेशन, और हमास के ठिकानों को निशाना बनाना शामिल है.  मार्च 2025 में युद्धविराम टूटने के बाद से इजरायली सेना ने सैकड़ों लोगों को मार गिराया है और बड़े भूभाग पर कब्जा किया है. प्रतिबंधों, मौतों और बमबारी से सिसक रहा है गाजा गाजा की स्थिति बहुत दयनीय है. गाजा की स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा है कि सोमवार सुबह तक 72 घंटों में इजरायली बमबारी में 300 से अधिक लोग मारे गए है. दक्षिणी शहर खान यूनिस में हवाई हमलों की एक सीरीज में मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं. यह हमला तब हुआ जब नेतन्याहू ने कहा था कि उनकी सेना अकाल के जोखिम से बचने के लिए सीमित मात्रा में भोजन की अनुमति देगी. इजरायल ने हमास के कब्जे से 58 बंधंकों की रिहाई के लिए लगातार दबाव बना रहा है. इजरायल इसके लिए सारे उपाय अपना रहा है. इजरायल ने गाजा में खाद्य, पानी, ईंधन, और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति को रोक दिया है. इस नाकेबंदी के कारण गाजा में भयावह मानवीय संकट पैदा हो गया है, और भुखमरी का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, मई 2025 में इजरायल ने सीमित मात्रा में मानवीय सहायता की अनुमति देने का फैसला किया, लेकिन यह सहायता आतंकवादियों तक न पहुंचे, इसके लिए सख्त निगरानी की योजना है. कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस की एंट्री ने इजरायल को उलझाया इजरायल के इस प्लान पर यूरोप के बड़े देशों और पश्चिमी लॉबी ने घोर असंतोष जताया है. ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने इजरायल के युद्ध विस्तार को असंगत बताया है. इन्होंने गाजा की स्थिति को “असहनीय” बताया और धमकी दी कि यदि इजरायल का अभियान जारी रहा तो “ठोस” जवाब दिया जाएगा. “जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे. अगर इजरायल ने नए सिरे से सैन्य आक्रमण बंद नहीं किया और मानवीय सहायता पर अपने प्रतिबंध नहीं हटाए, तो हम जवाब में और ठोस कदम उठाएंगे.” ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने गाजा में अनाज न आने देने के फैसले की तीखी आलोचना की है. इन देशों ने कहा है कि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. इसके अलावा, इन देशों ने इजरायली सरकार के कुछ मंत्रियों द्वारा गाजा की नागरिक आबादी के “जबरन विस्थापन” की धमकी देने वाले बयानों की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया. प्रतिबंध की धमकी पर नेतन्याहू का जवाब ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के बयानों पर इजरायल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लंदन, ओटोवा और पेरिस के नेता 7 अक्टूबर को इज़रायल पर नरसंहार हमले के लिए एक बड़ा इनाम दे रहे हैं. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्वीट कर कहा, “हमारी सीमा पर हमास आतंकवादियों के नष्ट होने से पहले हमारे अस्तित्व के लिए किए जा रहे रक्षात्मक युद्ध को समाप्त करने के लिए इज़रायल से अनुरोध करके और फ़िलिस्तीनी राज्य की मांग करके, लंदन, ओटोवा और पेरिस के नेता 7 अक्टूबर को इज़राइल पर नरसंहार हमले के लिए एक बड़ा इनाम दे रहे हैं, ऐसा करके ये देश इस तरह के और अधिक अत्याचारों को आमंत्रित कर रहे हैं.” नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध 7 अक्टूबर को शुरू हुआ जब फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने हमारी सीमाओं पर हमला किया, 1,200 निर्दोष लोगों की हत्या की और 250 से अधिक निर्दोष लोगों को किडनैप कर गाजा की काल कोठरी में ले गए. नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि यूरोप के नेता भी ऐसा ही विचार रखें. युद्ध कल समाप्त हो सकता है यदि शेष बंधकों को रिहा कर दिया जाए, हमास अपने हथियार डाल दे, उसके हत्यारे नेताओं को निर्वासित कर दिया जाए और गाजा को सैन्य विहीन कर दिया जाए. उन्होंने खरी-खरी कहा कि किसी भी देश से इससे कम कुछ भी स्वीकार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है और इज़रायल निश्चित रूप से ऐसा नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यह बर्बरता पर सभ्यता का युद्ध है. इजरायल तब तक न्यायपूर्ण तरीकों से अपना बचाव करना जारी रखेगा जब तक कि पूर्ण विजय प्राप्त नहीं … Read more

पाक सेना की एयरस्ट्राइक में एक ही परिवार के चार मासूमों ने गंवाई जान, 5 लोग घायल, शोक में डूबा परिवार

इस्लामाबाद पाकिस्तान में सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर आम नागरिकों को अपनी चपेट में ले लिया है। पाकिस्तानी एयरफोर्स ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले के मीर अली स्थित हुरमुज़ गांव में ड्रोन से बम गिराते हुए एयरस्ट्राइक की। इस एयरस्ट्राइक में एक ही परिवार के चार मासूम बच्चों की मौत हो गई। जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। एक ही परिवार के चार मासूमों ने गंवाई जान इस दुर्भाग्यपूर्ण एयरस्ट्राइक में हुरमुज़ गांव में एक ही परिवार के चार मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। जिस समय पाकिस्तानी एयरफोर्स ने ड्रोन से बम गिराए उस समय ये बच्चे खेल रहे थे जिसकी वजह से वे सीधे हमले की चपेट में आ गए। 5 लोग घायल, स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा इस हवाई हमले में 5 अन्य लोग भी घायल हुए हैं जिनमें बच्चे और एक महिला भी शामिल हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए मीर अली के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पाकिस्तानी एयरफोर्स की इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। हादसे के बाद गांव के लोगों ने एक जगह इकट्ठा होकर पाकिस्तानी सेना की इस बर्बरता के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बलूच नेता ने की एयरस्ट्राइक की निंदा बलूच नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तानी एयरफोर्स की इस क्रूर कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। बलूच ने भावुक होते हुए कहा, “इन बच्चों के पास पढ़ने के लिए अपने दोस्तों और परिवार के साथ खेलने के लिए हंसने के लिए जीने के लिए सपने थे लेकिन पाकिस्तान की कट्टरपंथी सेना ने उन्हें बेरहमी से मार डाला।” बलूच ने पश्तून लोगों के साथ एकजुटता में खड़े रहने की बात कही है। यह घटना पाकिस्तान के अशांत क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और आम नागरिकों पर इसके प्रभाव पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।  

फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी जानकारी, गाजा में इजराइल का भीषण हमला, 60 लोगों की मौत

इजराइल इजराइल ने गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ अपने युद्ध को और तेज कर दिया है जिसके परिणामस्वरूप रात भर हुए हमलों में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई। फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय निंदा के बावजूद इजराइल ने हाल के दिनों में इस क्षेत्र में कई बड़े हमले किए हैं। इजराइल का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हमास द्वारा बंधक बनाए गए कई लोगों को वापस लाने के लिए उस पर दबाव डालना और समूह को पूरी तरह से नष्ट करना है। हमले की शुरुआत से अब तक 300 से ज्यादा मौतें इस हमले की शुरुआत से अब तक गाजा पट्टी में 300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इजराइल का कहना है कि उसका लक्ष्य गाजा पर कब्जा करना, वहां के कुछ इलाकों पर नियंत्रण करना, हजारों लोगों को विस्थापित करना और सुरक्षित सहायता वितरण सुनिश्चित करना है। सीमित सहायता की अनुमति लेकिन नाकाबंदी जारी नए हमले तेज होने के बीच इजराइल ने युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र में ढाई महीने की नाकाबंदी के बाद सीमित मात्रा में सहायता की अनुमति देने पर सहमति जताई। इस नाकाबंदी के कारण क्षेत्र में भोजन, दवा और ईंधन के साथ-साथ अन्य आवश्यक सामान की पहुंच बाधित हो गयी थी। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने सहयोगियों के दबाव के बाद न्यूनतम सहायता देने का निर्णय लिया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि अब तक केवल कुछ ही ट्रक गाजा भेजे गए हैं जो भारी जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस साल की शुरुआत में युद्ध विराम के दौरान प्रतिदिन लगभग 600 ट्रक गाजा में दाखिल हुए थे। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सोमवार को इजराइल के आचरण की आलोचना तब और तेज हो गई जब उसके सहयोगी कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन ने प्रतिबंधों सहित देश के खिलाफ “ठोस कार्रवाई” की धमकी दी। उन्होंने इजराइल से गाजा में अपनी नई सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का भी आह्वान किया। हालांकि नेतन्याहू ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले का “सबसे बड़ा जवाब” है। हमलों का विवरण गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार उत्तरी गाजा में दो हमलों में एक परिवार के मकान और आश्रय स्थल के रूप में काम कर रहे एक स्कूल को निशाना बनाया गया जिसमें कम से कम 22 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे थे। अल-अक्सा शहीद अस्पताल के अनुसार मध्य शहर दीर अल-बलाह में एक हमले में 13 लोग मारे गए और पास के नुसेरात शरणार्थी शिविर में एक और हमले में 15 लोग मारे गए। नासेर अस्पताल के अनुसार दक्षिणी शहर खान यूनिस में दो हमलों में 10 लोग मारे गए। इजराइल की सेना ने इस बारे में तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। इजराइली सेना का कहना है कि वह केवल आतंकवादियों को निशाना बनाती है और नागरिकों की मौत के लिए हमास को दोषी ठहराती है क्योंकि यह समूह घनी आबादी वाले क्षेत्रों में काम करता है। गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति और बढ़ते हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।  

अंकिता हत्याकांडः दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाने के लिए 30 मई की तारीख निर्धारित की

कोटद्वार कोटद्वार की एक स्थानीय अदालत में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले की सुनवाई पूरी हो गई और फैसला 30 मई को सुनाया जाएगा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच आखिरी बहस सुनी। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अनुज पुंडीर ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाने के लिए 30 मई की तारीख निर्धारित की है। मामले की सुनवाई दो साल और आठ माह चली और इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विवेचना अधिकारी सहित 47 गवाह पेश किए गए। पौड़ी जिले के यमकेश्वर में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीया अंकिता की 18 सितंबर 2022 को कथित तौर पर रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार किसी बात को लेकर अंकिता और पुलकित में विवाद हो गया था। जिसके बाद पुलकित ने भास्कर और गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता को ऋषिकेश की चीला नहर में कथित तौर पर धक्का दे दिया था। नहर से अंकिता का शव मिलने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया था। पुलकित, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन नेता विनोद आर्य का पुत्र है। मामला सामने आते ही पार्टी ने आर्य को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। मामले के प्रकाश में आने के बाद स्थानीय लोग सड़क पर उतर गए और लोगों को शांत करने के वास्ते राज्य सरकार को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करना पड़ा। साथ ही सरकार ने आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का भी ऐलान किया था।  

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