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सरकार की बड़ी सौगात- जल्द ही डिलीवरी बॉय को भी मिलेगी पेंशन!, कंपनियां भी तैयार

नई दिल्ली जोमैटो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ काम कर रहे लाखों डिलीवरी पार्टनर्स और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जल्द ही इन गिग वर्कर्स को भी पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो ओला, उबर और अमेजन सहित कई कंपनियों ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और इसे अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है। कौन हैं गिग वर्कर्स? गिग वर्कर्स वो श्रमिक होते हैं जो किसी स्थायी नौकरी की बजाय अस्थायी या अनुबंध आधारित कार्य करते हैं। इनमें फ्रीलांसर, डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर, कंटेंट क्रिएटर, और कई ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स शामिल हैं। ये कर्मचारी “पे-पर-टास्क” मॉडल पर काम करते हैं और परंपरागत कर्मचारियों की तरह उन्हें पेंशन, मेडिकल या अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। क्या है सरकार की योजना? सरकार की योजना के मुताबिक, इन अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक पेंशन स्कीम लागू की जा सकती है, जिसमें कंपनियां EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के माध्यम से एक तय राशि जमा करेंगी। गिग वर्कर्स के पास दो विकल्प होंगे—या तो वो खुद भी अंशदान करें या केवल कंपनी के अंशदान के आधार पर पेंशन प्राप्त करें। क्यों है यह जरूरी? देश में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि गिग वर्कर्स को भी पारंपरिक कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा दी जाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस साल के आम बजट में गिग वर्कर्स के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य उनके डेटा को संकलित करना और उन्हें स्वास्थ्य बीमा, बीमा कवर और अब पेंशन जैसी सुविधाएं देना है। आगे क्या? अब यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने पर एक बड़ी श्रेणी के गिग वर्कर्स को पहली बार संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने लगेगा। अगर यह स्कीम लागू हो जाती है, तो यह भारत के श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।  

पाक के साथ टेंशन के बीच चीन का एक जासूसी जहाज़ भारत के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंचा, जानकारी इकट्ठा करना उद्देश्य

बीजिंग भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के माहौल में चीन का एक जासूसी जहाज़ ‘दा यांग यी हाओ’ भारत के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच रहा है। यह जानकारी ओपन-सोर्स खुफिया विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने दी है। इस जहाज़ को चीन “वैज्ञानिक अनुसंधान पोत” बताता है, लेकिन भारत और अन्य देशों का मानना है कि इसका असली उद्देश्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना  है। यह जहाज़ समुद्र की सतह को स्कैन करने,  मिसाइल टेस्ट ट्रैक करने और पनडुब्बियों की गतिविधियों की निगरानी  करने में सक्षम है। इसकी गतिविधियाँ अक्सर सामान्य वैज्ञानिक अभियानों की आड़ में की जाती हैं। कहां से आया यह जहाज़? डेमियन साइमन द्वारा साझा किए गए नक्शे के अनुसार, यह जहाज़ मलक्का जलडमरूमध्य  से होकर भारत के दक्षिण में श्रीलंका के पास  पहुंच रहा है।इस तरह के जहाज़ आमतौर पर भारत के मिसाइल परीक्षणों और समुद्री सैन्य गतिविधियों के दौरान आसपास देखे जाते हैं।   वैज्ञानिक जहाज़ या जासूस? पिछले साल भी ‘Xiang Yang Hong 01’ नामक एक अन्य चीनी जासूसी जहाज़ भारत के अग्नि-5 मिसाइल परीक्षण** के समय क्षेत्र में देखा गया था।इसके अलावा, कुछ जहाज़ भारतीय पनडुब्बियों की ध्वनि पहचानने और ITR परीक्षण स्थल (एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप) पर हो रही गतिविधियों की निगरानी करते पाए गए हैं। यह जानकारी बाद में  चीनी उपग्रहों को भेजी जाती है जिससे वह विस्तृत जासूसी कर सकें। अंडरवाटर निगरानी भारत के लिए  खतरे की घंटी इन जहाज़ों में मौजूद मानवरहित जल-नीचे वाहनों (UUVs)  के ज़रिए समुद्र के भीतर मौजूद रक्षा तंत्र,  सी माइंस** और अन्य सैन्य ढांचों  की भी निगरानी की जाती है। साल 2021 में एक और चीनी जहाज़ ‘Da Yang Hao’ को  पलाऊ के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में बिना अनुमति घुसने पर रोका गया था। उस समय रिपोर्ट में कहा गया था कि वह क्षेत्र भविष्य के पनडुब्बी युद्ध संचालन  के लिहाज़ से रणनीतिक रूप से अहम है। भारत के पड़ोस में चीन के इस तरह के जहाज़ों की मौजूदगी सिर्फ वैज्ञानिक उद्देश्य नहीं, बल्कि  सैन्य जासूसी  और  रणनीतिक निगरानी का हिस्सा मानी जा रही है। यह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है।

DRDO की कानपुर स्थित लैब ने समंदर से मीठा पानी निकालने वाली देसी तकनीक तैयार, 8 महीने में कर दिया कमाल

नई दिल्ली ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए DRDO ने ऐसा कमाल कर दिखाया है जो देश के तटीय इलाकों और रक्षा क्षेत्र दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। DRDO की कानपुर स्थित लैब ने महज 8 महीने में एक नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमर मेम्ब्रेन तकनीक विकसित की है, जो खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकती है। यह तकनीक खास तौर पर भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों के लिए तैयार की गई है। तटरक्षक जहाजों पर सफल ट्रायल इस स्वदेशी तकनीक को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल (OPV) पर ट्रायल के लिए लगाया गया है। शुरुआती सुरक्षा और परफॉर्मेंस टेस्ट में यह पूरी तरह सफल रही है। अब 500 घंटे की ऑपरेशनल टेस्टिंग के बाद इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। जल संकट दूर करने में भी कारगार दरअसल, समुद्री पानी में मौजूद क्लोराइड आयन सामान्य झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन DRDO की यह नई तकनीक इस असर से पूरी तरह सुरक्षित है। यह तकनीक ना सिर्फ भारतीय तटरक्षक बल के लिए उपयोगी है, बल्कि यह भविष्य में भारत के उन इलाकों के लिए जल जीवन मिशन जैसा वरदान साबित हो सकती है, जहां पानी की भारी किल्लत है। आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम DRDO पहले ही तेजस लड़ाकू विमान, अग्नि-पृथ्वी मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस जैसे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्माण में अग्रणी रहा है। अब यह नई मेम्ब्रेन तकनीक जल सुरक्षा में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नया आयाम जोड़ेगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी

नई दिल्ली भारत और तुर्की के बीच वर्षों से चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक संबंध अब एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन, मेट्रो रेल और आईटी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय तुर्की की कंपनियों की भूमिका को दोबारा परखा जा रहा है। यह कदम तुर्की के कश्मीर मुद्दे पर बार-बार टिप्पणी और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती निकटता के मद्देनजर उठाया गया है। भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-तुर्की के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक भारत में तुर्की से कुल 240.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया है, जिससे तुर्की एफडीआई इक्विटी फ्लो में 45वें स्थान पर रहा। इन निवेशों का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों तक है। मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, और एयरपोर्ट सेवाओं से लेकर शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और साझेदारियां की गई थीं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में अटल टनल के इलेक्ट्रोमैकेनिकल हिस्से का कार्य एक तुर्की कंपनी को सौंपा गया था, जबकि 2024 में रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मेट्रो परियोजना के लिए एक तुर्की कंपनी के साथ समझौता किया। तुर्की के ऑपरेटरों ने की पाकिस्तान की मदद लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद की घटनाओं ने भारत सरकार को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सामने आया कि तुर्की के ऑपरेटरों ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सहायता की। यह प्रमुख वजह है कि अब सभी तुर्की कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सरकार सभी तुर्की परियोजनाओं और समझौतों को फिर से जांच रही है, भले ही वे समाप्त हो चुके हों। हर सौदे और परियोजना का पूरा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।” सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण तुर्की का लगातार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी करना और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां हैं। भले ही अब तक किसी भी परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं- भारत अपनी विदेश नीति में ‘जरूरी बदलाव’ की ओर बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया, “कुछ दीर्घकालिक समझौते तत्काल प्रभाव से प्रभावित नहीं हो सकते, लेकिन ताजा परिस्थितियां और तुर्की का रवैया भविष्य के निवेश और साझेदारियों को प्रभावित कर सकता है।” कई परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार भारत में तुर्की की मौजूदगी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लखनऊ, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार हैं। गुजरात में एक संयुक्त उद्यम के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इसके अलावा, एक प्रमुख तुर्की विमानन कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रदान कर रही है। तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन भारत के आठ प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग जैसे हाई-सिक्योरिटी कार्यों में शामिल है। इनमें हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल हैं। इस लिहाज से पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ऑपरेटरों के शामिल होने के खुलासे ने भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी को देखते हुए, भारत सरकार इन सौदों की गहन जांच कर सकती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कम शोर, सख्त संदेश 2017 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मीडिया, शिक्षा और कूटनीतिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए थे। लेकिन आठ साल बाद अब ये समझौते कागजों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति कम शोर, सख्त संदेश वाली प्रतीत हो रही है। फिलहाल किसी परियोजना को आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, लेकिन अंदरखाने एक ठोस बदलाव की तैयारी चल रही है। भारत अब अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे व्यापारिक रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा है जो देश की विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों से मेल नहीं खाते। तुर्की का हर मोर्चे पर बहिष्कार जारी अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने फिल्म शूटिंग और सांस्कृतिक सहयोग के लिए तुर्की का “पूर्ण बहिष्कार” करने की घोषणा की है। AICWA ने X पर कहा, “तुर्की में तत्काल प्रभाव से कोई भी बॉलीवुड या भारतीय फिल्म प्रोजेक्ट शूट नहीं किया जाएगा। किसी भी भारतीय निर्माता, प्रोडक्शन हाउस, निर्देशक या फाइनेंसर को तुर्की में कोई भी फिल्म, टेलीविजन या डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” 

जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे, तब तुर्की ने ही पाक की मदद की थी, अमेरिका का डबल गेम!

वॉशिंगटन अमेरिका ने तुर्की को 304 मिलियन डॉलर की मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह कदम नाटो सहयोगी व्यापार और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाल के समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे, तब तुर्की ने ही पाकिस्तान की मदद की थी। न सिर्फ उसने 350 से ज्यादा तुर्की ड्रोन पाकिस्तान को दिए थे, बल्कि उन्हें ऑपरेट करने के लिए मिलिट्री ऑपरेटिव को भी भेजा था। इसके बाद से ही तुर्की और भारत के संबंध भी खराब होने लगे हैं और भारत की जनता उसे एक ‘दुश्मन’ देश की तरह मानने लगी है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका डबल गेम खेल रहा है। एक ओर वह भारत से अच्छे रिश्ते की बात करता है तो दूसरी ओर पाकिस्तान की मदद करने वाले तुर्की को भी हथियार देने से भी पीछे नहीं हटता। अमेरिका और तुर्की के बीच हथियारों का यह सौदा ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो गुरुवार को नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए तुर्की गए थे। हालांकि, अभी इस सौदे में अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत है। रुबियो के अगले दिन युद्ध विराम के बारे में रूसी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच संभावित वार्ता के लिए इस्तांबुल जाने की उम्मीद है। रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बताया है कि तुर्की ने 225 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत से 53 एडवाइंस मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और 79.1 मिलियन डॉलर की लागत से 60 ब्लॉक II मिसाइलों का अनुरोध किया है। आरटीएक्स कॉर्पोरेशन बिक्री के लिए मुख्य ठेकेदार होगा। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोगन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बैठक का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अंकारा द्वारा रूसी मिसाइल-रक्षा प्रणाली की खरीद और सीरियाई कुर्द मिलिशिया के लिए वॉशिंगटन के समर्थन से उत्पन्न तनावपूर्ण संबंधों को फिर से बेहतर किया जा सके। तुर्की और अमेरिका अमेरिका समर्थित कुर्द बलों, जिनके संबंध अलगाववादी तुर्की समूह पीकेके से हैं, को नई सीरियाई सेना में शामिल करने पर बातचीत कर रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में पीकेके ने घोषणा की कि वह तुर्की के खिलाफ स्वायत्तता के लिए 40 साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अपने हथियार डाल देगा। अमेरिका और तुर्की के पास नाटो में दो सबसे बड़ी सेनाएं हैं। अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट्स भी खरीदना चाहता है तुर्की इतना ही नहीं, तुर्की ने बार-बार हथियार खरीद में अमेरिका के F-35 फाइटर जेट्स को शामिल करने का इरादा जताया है। हालांकि इसके लिए अमेरिका को अंकारा पर रूसी S-400 मिसाइल-रक्षा प्रणाली के अधिग्रहण के बाद लगाए गए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को खरीदने पर प्रतिबंध हटाना होगा। तुर्की द्वारा रूसी S-400 की खरीद के परिणामस्वरूप वॉशिंगटन के साथ गतिरोध पैदा हो गया था, जिसके कारण बाद में अमेरिका ने CAATSA के रूप में जाने जाने वाले प्रतिबंध लगाए। हालांकि, अंकारा ने वॉशिंगटन की मांग के अनुसार एस-400 को त्यागने से इनकार कर दिया है, लेकिन उसे उम्मीद है कि ट्रंप CAATSA में संशोधन करने के लिए सहमत हो सकते हैं, जिससे तुर्की लॉकहीड मार्टिन कॉर्प द्वारा निर्मित एफ-35 जेट खरीद सकेगा।

बलूचिस्तान हिंदुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यहां हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है: सीएम सरमा

बलूचिस्तान भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच बलूचिस्तान की आजादी की मांग तेज हो गई है। इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने वहां स्थित एक हिंदू मंदिर का जिक्र करते हुए इसे सनातन धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बताया है। सरमा ने गुरुवार को कहा कि बलूचिस्तान हिंदुओं के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यहां हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है जो 51 पवित्र शक्तिपीठों में से एक है। यहां पाकिस्तान का सबसे बड़े हिंदू उत्सव हिंगलाज यात्रा मनाया जाता है। हिंगलाज माता का प्राचीन गुफा मंदिर देश के उन कुछ हिंदू स्थलों में से एक है, जहां हर साल बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। आपको बता दें कि मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में 44 लाख हिंदू रहते हैं, जो कि कुल आबादी का सिर्फ 2.14 प्रतिशत है। भक्तगण ज्वालामुखी के शिखर तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ते हैं या चट्टानों से होते हुए यात्रा करते हैं। यहां मौजूद गड्ढे में नारियल और गुलाब की पंखुड़ियां फेंकते हैं और हिंगलाज माता के दर्शन के लिए दैवीय अनुमति मांगते हैं। यहां तीन दिवसीय मेला लगता है। मंदिर के सबसे वरिष्ठ पुजारी महाराज गोपाल बताते हैं कि लोग यहां क्यों आते हैं। वह कहते हैं, “यह हिंदू धर्म में सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। जो कोई भी इन तीन दिनों के दौरान मंदिर में आता है और पूजा करता है, उसके सभी पाप क्षमा हो जाते हैं।” हिमंत सरमा ने क्या कहा? मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह मंदिर हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित है और ऐसा माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां देवी सती का शीश गिरा था। इस कारण यह स्थान देवी शक्ति के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘सिंधी, भावसर और चरण समुदायों’’ के श्रद्धालु सदियों से रेगिस्तानी रास्तों को पार करते हुए इस मंदिर में दर्शन के लिए कठिन यात्राएं करते आ रहे हैं। हिंगोल नेशनल पार्क के बीहड़ इलाकों में बसे इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां देवी सती का सिर गिरा था, जो इसे शक्तिपीठ के सबसे पवित्र स्थलों में से एक बनाता है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि धार्मिक महत्व से परे, बलूचिस्तान इस क्षेत्र में उपमहाद्वीप के विभाजन से पहले तक हिंदुओं की प्राचीन सांस्कृतिक उपस्थिति का भी गवाह रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तीर्थ स्थल को बलूच समुदाय भी गहरे सम्मान से ‘नानी मंदिर’ कहकर संबोधित करते है, जो विभिन्न समुदायों के बीच साझा विरासत और पारस्परिक श्रद्धा की दुर्लभ मिसाल है।

आतंकी रहे अहमद अल-शारा से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की दुनिया भर में चर्चा, प्रतिबंध हटाने का हुआ ऐलान

दमिश्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम नेता अहमद अल-शारा से मुलाकात की थी। इसके अलावा अमेरिकी नेता ने सीरिया से प्रतिबंध हटाने का भी ऐलान किया है। कभी आतंकी रहे अहमद अल-शारा से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की दुनिया भर में चर्चा है। कई देशों और मीडिया की तरफ से आलोचना भी हो रही है। लेकिन सीरिया में जश्न जैसा माहौल है। बुधवार रात को ही सीरिया में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ये लोग नाच रहे हैं और डोनाल्ड ट्रंप की तारीफें कर रहे हैं। आज उनके लिए वही अमेरिका दोस्त बन गया है, जिसे कभी वे ‘जानी दुश्मन’ मानते थे। इस तरह एक झटके में सीरिया में माहौल बदल गया है। सीरिया के लोगों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद अब उनके देश का आर्थिक विकास हो सकेगा। अब हम भी दुनिया की मुख्यधारा में आएंगे। जश्न मना रहे कई लोगों ने तो कहा कि यह सीरिया के नए जन्म जैसा है। इन लोगों का कहना है कि यह हमारे लिए कई दशक से चली आ रही तबाही से उबरने का एक रास्ता होगा। अब हमारे देश में भी निवेश आएगा और आर्थिक प्रगति की राह खुलेगी। वहीं अहमद अल शारा का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप का फैसला बहुत साहस भरा है। उन्होंने कहा कि अब एक नया और आधुनिक सीरिया खड़ा होगा। यह तो सीरिया के लिए पुनर्जन्म जैसा है। टीवी पर देश को संबोधित करते हुए अहमद अल-शारा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का फैसला ऐतिहासिक और साहसी है। इससे सीरिया के लोगों की पीड़ा कम होगी। अब हम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में अपना योगदान दे सकेंगे। दरअसल सीरिया लंबे समय से गृह युद्ध की मार झेल रहा है। फिर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने कब्जा जमा लिया था। लंबे समय तक बशर अल असद और उनके परिवार की देश में तानाशाही रही। इसके चलते सीरिया की 90 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। अब सीरिया के लोगों को लगता है कि यह विकास की नई सुबह होगी। गुरुवार को सुबह ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। रात को भी जश्न चला। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें दिखता है कि लोग झंडे लहराते हुए झूम रहे हैं। दमिश्क के मशहूर उम्मैद स्क्वेयर पर हजारों लोगों का जमावड़ा दिखाई दिया। बैकग्राउंड में म्यूजिक बज रहा था और सीरिया के झंडे लहरा रहे थे। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार जिहाद यजीगी नाम के एक शख्स ने कहा कि अब सरकार कोई बहाना नहीं कर पाएगी कि हमारे ऊपर अमेरिकी प्रतिबंध हैं। वह सीरिया रिपोर्ट के एडिटर भी हैं। वहीं एक अन्य शख्स हाजेम अल-लोदा ने कहा कि असद सरकार से निपटने के लिए अमेरिका ने पाबंदिया लगाई थीं, लेकिन इसे भुगत तो हमारे जैसे आम लोग ही रहे थे।

मुझे टिम कुक के प्लान से दिक्कत, मैंने उन्हें साफ कर दिया है कि भारत में ही इतने ज्यादा प्लांट लगाने की क्या जरूरत: डोनाल्ड ट्रंप

दोहा, ब्लूमबर्ग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ऐपल के सीईओ टिम कुक से कहा है कि वे आईफोन की प्रोडक्शन यूनिट्स भारत में न बनाएं। उन्होंने कहा कि मुझे टिम कुक के इस प्लान से दिक्कत है और मैंने उन्हें साफ कर दिया है कि भारत में ही इतने ज्यादा प्लांट लगाने की क्या जरूरत है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार कतर में अपने आधिकारिक दौरे पर गए ट्रंप ने वहां के ऐपल के सीईओ से बातचीत में यह बात कही। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि टिम कुक पूरे भारत में प्रोडक्शन यूनिट्स लगा रहे हैं। मैं नहीं चाहता कि इस तरह से भारत में विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि अब मेरे कहने के बाद ऐपल की ओर से अमेरिका में आईफोन का प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा। अपने इस ऐतराज की वजह भी डोनाल्ड ट्रंप ने साफ की है। उनका कहना है कि भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला मुल्क है, लेकिन वहां हमारे लिए अपने उत्पादों को बेचना सबसे कठिन है। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटाने की बात कही है और वह ट्रेड डील करना चाहता है। इसके साथ ही अपने उत्पादों पर भी एग्रीमेंट चाहता है। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीन से बाहर भारत में ऐपल की ओर से प्रोडक्शन यूनिट्स लगाई जा रही हैं। दरअसल ऐपल की यह रणनीति है कि सप्लाई चेन में अकेले चीन पर ही निर्भरता न रहे, इसलिए भारत में भी फैक्ट्रियां लगाई जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को उसके इसी प्लान पर आपत्ति है। दरअसल अब तक आईफोन का ज्यादातर प्रोडक्शन चीन में ही होता रहा है और अमेरिका में कोई उत्पादन नहीं होता था। अब ट्रंप चाहते हैं कि आईफोन की फैक्ट्रियां भारत में लगाने की बजाय अमेरिका में ही लगें। दरअसल कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगे थे तो बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। ऐसी स्थिति में ऐपल ने सप्लाई चेन को अलग-अलग देशों में विस्तृत करने की योजना तैयार की थी। इसी के तहत कई जगहों पर ऐपल के आईफोन के प्रोडक्शन की तैयारियां हो रही हैं। भारत में ज्यादातर आईफोन दक्षिण भारत में फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप की ओर से बनाए जा रहे हैं।

सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने में भारत को ‘स्पष्ट बढ़त’ हासिल थी – न्यूयॉर्क टाइम्स

नई दिल्ली अमेरिका के अंग्रेजी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सैटेलाइट से मिली तस्वीरों के हवाले से कहा है कि ऐसा लगता है कि चार दिनों तक चले हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने में भारत को बढ़त हासिल थी. रिपोर्ट के अनुसार, हमलों से पहले और बाद की सैटेलाइट से मिली हाई-रिजॉल्यूशन की तस्वीरों में भारतीय हमलों से पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को नुकसान दिखाई देता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चला सैन्य संघर्ष दो परमाणु संपन्न देशों के बीच आधी सदी में सबसे व्यापक लड़ाई थी. चूंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की एयर डिफेंस का टेस्ट करने और सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया, इसलिए उन्होंने गंभीर नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया. पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को पहुंचा नुकसान इसमें कहा गया है कि सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से संकेत मिलता है कि हमले व्यापक थे, लेकिन नुकसान दावे के मुकाबले कहीं ज्यादा सीमित था. खबर में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि ज्यादातर नुकसान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को पहुंचाया. इसमें कहा गया है कि हाई-टेक युद्ध के नए युग में, तस्वीर में सत्यापित दोनों पक्षों के किए गए हमले सटीक रूप से टारगेटेड प्रतीत होते हैं. पाकिस्तान पर भारत की बढ़त रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्रों को निशाना बनाने में स्पष्ट बढ़त मिली है, क्योंकि लड़ाई का दूसरा चरण एक-दूसरे की डिफेंस क्षमताओं पर हमलों में बदल गया. भारत के रक्षा अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के बंदरगाह शहर कराची से 100 मील से भी कम दूरी पर स्थित भोलारी एयर बेस पर एक विमान हैंगर पर सटीक हमला किया है. नूर खान एयर बेस पर हमला रिपोर्ट के मुताबिक तस्वीरों में हैंगर जैसी दिखने वाली चीज को साफ नुकसान दिखाई दे रहा है. इसके अलावा नूर खान एयर बेस शायद सबसे संवेदनशील सैन्य लक्ष्य था जिस पर भारत ने हमला किया. नूर खान एयर बेस पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय और देश के प्रधानमंत्री के कार्यालय से लगभग 15 मील की दूरी पर है और पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख और सुरक्षा करने वाली यूनिट से भी यह थोड़ी ही दूरी पर स्थित है. सैटेलाइट की तस्वीरों से खुली पोल भारतीय सेना ने कहा कि उसने विशेष रूप से पाकिस्तान के कुछ प्रमुख हवाई अड्डों पर रनवे और अन्य सुविधाओं को निशाना बनाया था और इस रिपोर्ट में भी कहा गया है कि सैटेलाइटसे मिली तस्वीरों से नुकसान दिखा. इसमें कहा गया है कि इसके मद्देनजर 10 मई को पाकिस्तान ने रहीम यार खान हवाई अड्डे के लिए एक नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि रनवे क्रियाशील नहीं है. सरगोधा एयरपोर्ट रनवे के दो हिस्सों पर हमला भारतीय सेना ने कहा कि उसने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा हवाई अड्डे पर रनवे के दो हिस्सों पर हमला करने के लिए सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया था. रिपोर्ट में कहा गया है, जिन स्थानों पर पाकिस्तान ने हमला करने का दावा किया है, उसकी सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरें सीमित हैं और अभी तक पाकिस्तानी हमलों से हुए नुकसान को स्पष्ट रूप से नहीं दिखा पा रही हैं, यहां तक कि उन ठिकानों पर भी जहां सैन्य कार्रवाई के पुख्ता सबूत थे. पाकिस्तान के दावे गलत पाकिस्तानी अधिकारियों के इस दावे पर कि उनकी सेना ने भारत के उधमपुर एयर बेस को नष्ट कर दिया है, रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 मई की तस्वीर में नुकसान नहीं दिख रहा है. भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में सात मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादी बुनियादी ढांचे पर सटीक हमले किए थे. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे. पाकिस्तान के पसरूर और सियालकोट स्थित एयर बेस के रडार स्थलों को भी सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया, जिससे भारी क्षति हुई. भारत रहा हावी- रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि सैटेलाइट तस्वीरों से साफ़ पता चलता है कि भले ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर नुकसान पहुंचाने का दावा किया, लेकिन असली और प्रमुख नुकसान भारत द्वारा पाकिस्तान को ही पहुंचाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिक युद्ध प्रणाली और सटीक हथियारों के इस युग में दोनों देशों ने अपने हमलों को रणनीतिक रूप से अंजाम दिया, लेकिन भारत ने खासतौर पर पाकिस्तान की वायुसेना की क्षमताओं और एयरफील्ड्स को निशाना बनाया. भोलारी एयरबेस पर हमला सबसे महत्वपूर्ण हमलों में से एक कराची के निकट भोलारी एयर बेस पर किया गया हमला था, जहां सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में विमान हैंगर को पहुंचा नुकसान साफ दिख रहा है. पाकिस्तान के कराची से करीब 100 मील दूर स्थित भोलारी एयरबेस पर भारत ने एयरक्राफ्ट हैंगर को टारगेट किया.   नूर खान एयरबेस: सबसे संवेदनशील लक्ष्य रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सबसे संवेदनशील हमला नूर खान एयरबेस पर था, जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास स्थित है और सेना के मुख्यालय व प्रधानमंत्री कार्यालय के करीब है. यही यूनिट पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा देखती है. यहां की सुविधाओं को भारत ने सटीक हथियारों से नुकसान पहुंचाया. सरगोधा और रहीम यार खान एयरबेस पर हमले भारत ने यह भी दावा किया कि उसने पाकिस्तान के प्रमुख हवाई अड्डों को निशाना बनाया है, जिसमें रहीम यार खान और सरगोधा बेस के रनवे सेक्शन भी शामिल हैं.  सैटेलाइट इमेज ने इन दावों का समर्थन किया , जिसमें प्रभावित बुनियादी ढांचे को दिखाया गया है.   पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस की दो रनवे स्ट्रिप्स को भी भारतीय सेना ने सटीक हथियारों से निशाना बनाया. भारतीय सेना ने कहा कि उसने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा हवाई अड्डे पर रनवे के दो हिस्सों पर हमला करने के लिए सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया था. वहीं रहीम यार खान में पाकिस्तान ने खुद 10 मई को नोटिस जारी किया कि रनवे अब “ऑपरेशनल नहीं” है. इसके अलावा पसरूर और सियालकोट एविएशन बेस पर मौजूद रडार सिस्टम को भी निशाना बनाया गया जिससे पाक … Read more

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को भविष्य के विकास का केंद्र बताया

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने में पूर्वोत्तर राज्यों की अहम भूमिका होगी। ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम “हमारे अद्भुत ‘अष्ट लक्ष्मी’- आठ राज्यों को प्रदर्शित करेगा।” प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प और प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करते हैं कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य में विकास का प्रमुख केंद्र बने केंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प, प्रतिबद्धता और उनका विजन यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य के विकास और भारत के भविष्य के मार्ग का केंद्र बने, क्योंकि देश 2047 तक विकसित भारत के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।” पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था, आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है सिंधिया ने कहा कि सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) का 10 प्रतिशत (लगभग एक लाख करोड़ रुपए) प्रति वर्ष पूर्वोत्तर को दिया जाता है। इसने रीजन के विकास में अहम भूमिका निभाई है। पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था। आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है। आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों का भंडार और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति ने इस क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली प्रवेश द्वार में बदल दिया है।” उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों के प्रतिबद्ध निवेश, बुनियादी ढांचे पर प्रधानमंत्री के पिछले 10 वर्षों के संकल्प, स्वास्थ्य देखभाल, पनडुब्बी केबल पर शिक्षा ने आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।” 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा।शिखर सम्मेलन का फोकस पर्यटन और आतिथ्य, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और उससे जुड़े हुए क्षेत्र, कपड़ा, हथकरघा और हस्तशिल्प, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास, आईटी/आईटीईएस, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स, एनर्जी और मनोरंजन एवं खेल पर होगा।

तुर्किए में शांति वार्ता आज राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक से बनाई दूरी

अंकारा  व्लादिमीर पुतिन ने जब हाल ही में तुर्की में वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर अपनी सहमति दी तो दुनिया को लगा कि रूस और यूक्रेन के बीच वर्षों से जारी संघर्ष का अंत हो सकता है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वह परेशान करने वाली है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने तुर्की में प्रस्तावित यूक्रेन-रूस शांति वार्ता में फिलहाल शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जब तक पुतिन नहीं आते हैं तो वह भी इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे। पुतिन के इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस वार्ता में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो वह इसका श्रेय लेने की कोशिश करते। सूत्रों का मानना है कि पुतिन ट्रंप को कूटनीतिक स्तर पर किसी भी तरह की बढ़त नहीं देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने न केवल खुद को इस वार्ता से दूर रखा, बल्कि अपने वरिष्ठ राजनयिकों को भी वार्ता में शामिल नहीं होने दिया। हालांकि, डिप्टी स्तर के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को जरूर भेजने की बात कही है। 14 मई को क्रेमलिन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रूस ने शांति वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इसमें ना तो पुतिन शामिल हो रहे हैं और ना ही विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। रूसे ने किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी इसमें भेजना का फैसला टाल दिया है। हालांकि एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात जरूर कही है। जिसमें राष्ट्रपति के सलाहकार और प्रचार रणनीतिकार व्लादिमीर मेडिंस्की, उप विदेश मंत्री मिखाइल गैलुजिन, सैन्य खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव और उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन शामिल होंगे। पुतिन के अलावा किसी से बात नहीं करेंगे जेलेंस्की पुतिन के इस फैसल पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने तुर्की में व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठक से पहले यह कहकर दांव बढ़ा दिया कि वह राष्ट्रपति के अलावा किसी अन्य रूसी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन से मिलने के आग्रह के बाद ही तुर्की की यात्रा करेंगे। सीएनएन ने जब उनसे बैठक के एजेंडे के बारे में पूछा तो जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम समझौते के अलावा कुछ भी विफल ही साबित होगा। ऐसे में अगर दोनों देशों के प्रमुख के बगैर यह वार्ता होती भी है तो इसका खास संदेश नहीं जाएगा। यह भी एक कारण हालांकि एक तर्क भी दिया जा रहा है कि पुतिन द्वारा स्वयं को वार्ता से दूर रखना इस बात का संकेत हो सकता है कि रूस फिलहाल वार्ता को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में देख रहा है, ना कि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम है। 2022 वाली वार्ता फिर से होगी शुरू? पुतिन ने युद्ध विराम के आह्वान को अस्वीकार करा और युद्ध विराम लागू होने से पहले शांति वार्ता शुरू करने पर दोर दिया है. वहीं जवाब में, ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए तुर्की जाएंगे और उन्होंने पुतिन को वहां मिलने के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन पुतिन आज तुर्की नहीं जा रहे हैं. रूस ने कहा है कि 15 मई की वार्ता, फरवरी 2022 में यूक्रेन के खिलाफ रूस के पूर्ण पैमाने पर युद्ध की शुरुआत के समय तुर्की में आयोजित 2022 शांति वार्ता की बहाली होगी. जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव की वजह से यूक्रेन पीछे हट गया था. क्या थी 2022 की डील? लीक हुए 2022 शांति मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक दोनों पक्ष क्रीमिया को संधि से बाहर करने पर सहमत हुए, जिससे वह रूसी कब्जे में रहेगा और यूक्रेन उस पर रूसी संप्रभुता को मान्यता नहीं देगा. अन्य रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति का निर्णय बाद में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में किया जाना था. इस संधि के तहत यूक्रेन कथित तौर पर नाटो या किसी अन्य सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आकांक्षाओं को त्याग देगा, लेकिन यूरोपीय संघ में प्रवेश की अनुमति देगा. रूस ने सभी प्रतिबंधों को हटाने, कीव के भाषा और राष्ट्रीय पहचान से संबंधित कानूनों को निरस्त करने और यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को सीमित करने की भी मांग की थी.

PM शरीफ ने टैंक के ऊपर ही असीम मुनीर और एयर मार्शल बाबर की पीठ ठोकी, तो सेना के अधिकारी उन्हें सैल्यूट दागे

इस्लामाबाद  भारतीय सशस्त्र बलों के हाथों चार दिनों तक लगातार पिटाई के बाद अब पाकिस्तान डींगे मार रहा है। ये तब है जब पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा है कि भारत ने किस तरह से पाकिस्तान में घुसकर उसे नुकसान पहुंचाया है। कई दिनों के बाद अब अमेरिकी अखबारों ने भी सैटेलाइट तस्वीरों को छापकर बता दिया है कि किस तरह भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। बावजूद इसके पाकिस्तानी नेता इसे अपनी जीत बता रहे हैं। हद तो तब हो गई जह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बुधवार को कह दिया कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के हाथों हार का बदला ले लिया है। शहबाज शरीफ ने ये बात सियालकोट स्थित पसरूर छावनी परिसर में कही है। ये वही छावनी है, जिसे भारत ने जवाबी कार्रवाई के दौरान निशाना बनाया था। इस दौरान अपने संबोधन में शहबाज ने पाकिस्तानी सैनिकों से कहा, आपने 1971 की जंग का बदला ले लिया है। अब पूरा देश आपके साथ खड़ा है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने भारत को गीदड़भभकी दी तो कश्मीर और पानी विवाद पर बातचीत की पेशकश भी कर डाली। भारत को गीदड़भभकी शहबाज शरीफ ने पीएम मोदी को गीदड़भभकी देते हुए कहा, ‘अगर आप हम पर फिर से हमला करेंगे, तो आप सब कुछ खो देंगे…” उन्होंने कहा, ‘हम युद्ध और बातचीत के लिए तैयार हैं। अब चुनाव आपका है।’ शहबाज ने पीएम मोदी के हालिया संबोधन के संदर्भ में कहा, पानी हमारी लाल रेखा है। हमारे पानी को मोड़ने के बारे में सोचना भी मत। हां, पानी और खून एक साथ नहीं बहते। आपने हमारी नीलम-झेलम जल परियोजना को भी नुकसान पहुंचाया है। कश्मीर और जल संधि पर बातचीत की पेशकश इस दौरान शहबाज ने पीएम मोदी से मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत की पेशकश की। उन्होंने कहा, आइए हम इस आग को बुझाएं। आइए हम कश्मीर और पानी पर बात करने के लिए एक साथ बैठें। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। 1960 में हुई संधि के तहत पाकिस्तान को तीन नदियों का पानी मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत पानी रोकता है तो पाकिस्तान में हाहाकार मच सकता है। मोदी की नकल करने निकले शहबाज पाकिस्तानी पीएम का पसरूर दौरा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल था। पीएम मोदी ने आदमपुर एयरबेस का दौरा किया था, जिसे पाकिस्तान ने निशाना बनाने का दावा किया था। इस दौरान पीएम मोदी के पीछे ही एस-400 एयर डिफेंस और राफेल विमान खड़ा नजर आया, जो पाकिस्तान के दावों की पोल खोलने के लिए काफी था। इसके उलट जब शहबाज शरीफ पसरूर सैन्य अड्डे पर पहुंचे तो एयरबेस के हिस्से को दिखाया ही नहीं गया, ताकि पाकिस्तान की रही सही इज्जत भी न जाने पाए।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और अन्य चालक दल की अंतरिक्ष यात्रा स्थगित, मिशन को 29 मई को प्रक्षेपित किया जाना था

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य चालक दल के सदस्यों द्वारा संचालित अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्सिओम-4 मिशन में देरी हो गई है और अब इसे 8 जून को शाम 6:41 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा. पहले इस मिशन को 29 मई को प्रक्षेपित किया जाना था. इसकी घोषणा अमेरिका स्थित वाणिज्यिक मानव अंतरिक्ष उड़ान फर्म Axiom Space और NASA द्वारा की गई. NASA ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि “@Space_Station की उड़ान अनुसूची की समीक्षा करने के बाद, NASA और उसके साझेदार कई आगामी मिशनों के लिए लॉन्च के अवसरों को बदल रहे हैं. नए लक्षित नो-अर्लिअर-देन-लॉन्च अवसर, परिचालन तत्परता के अधीन, ये हैं: Axiom Mission 4: 9:11 पूर्वाह्न EDT, रविवार, 8 जून.” SpaceX के ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर सवार शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा, 1984 में रूस के सोयूज अंतरिक्ष यान पर सवार राकेश शर्मा की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष उड़ान के चार दशक बाद हो रही है. शुक्ला के अलावा, एक्स-4 चालक दल में पोलैंड और हंगरी के सदस्य भी शामिल हैं, जो इतिहास में प्रत्येक देश का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए पहला मिशन है और 40 वर्षों में दूसरा सरकार प्रायोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है. शुक्ला अंतरिक्ष में सात प्रयोग करेंगे, जिनका उद्देश्य भारत में सूक्ष्मगुरुत्व अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है. भारत की आशा है कि वह 2035 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा और 2047 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजेगा. इसरो ने आईएसएस पर प्रयोग करने के लिए भारत-केंद्रित भोजन पर ध्यान केंद्रित करने की योजना तैयार की है, जिसमें सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में मेथी और मूंग को अंकुरित करना भी शामिल है. एक्सिओम-4 (एक्स-4) मिशन में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) परियोजना के अंतरिक्ष यात्री स्लावोज़ उज़्नान्स्की भी शामिल होंगे, जो 1978 के बाद से दूसरे पोलिश अंतरिक्ष यात्री होंगे. टिबोर कापू 1980 के बाद से दूसरे राष्ट्रीय हंगरी अंतरिक्ष यात्री होंगे. पैगी व्हिटसन अपने दूसरे वाणिज्यिक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन का नेतृत्व करेंगी, जो किसी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री द्वारा अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने के उनके मौजूदा रिकॉर्ड में शामिल होगा. एक्स-4 चालक दल स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्षयान पर सवार होकर अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना होगा तथा परिक्रमारत प्रयोगशाला में 14 दिन तक का समय व्यतीत करेगा. Ax-4 मिशन का दल और उद्देश्य Ax-4 मिशन में चार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। शुक्ला के साथ इस मिशन में अमेरिका की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन (कमांडर), पोलैंड के स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के तिबोर कपु शामिल होंगे। यह टीम स्पेसएक्स के ड्रैगन यान में फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में जाएगी और लगभग 14 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेगी। इस दौरान वैज्ञानिक रिसर्च, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और शैक्षणिक/सार्वजनिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां की जाएंगी। भारत के ‘गगनयान’ मिशन से जुड़े प्रयोग भी होंगे शुभांशु शुक्ला इस मिशन के दौरान भारत के आगामी ‘गगनयान’ मानव अंतरिक्ष मिशन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रयोग भी करेंगे। इनमें मांसपेशियों की क्षति, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में शरीर का अनुकूलन और अंतरिक्ष में जैविक खेती जैसे विषयों पर अध्ययन शामिल हैं। कौन हैं शुभांशु शुक्ला? लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 10 अक्टूबर 1985 को जन्मे शुक्ला भारतीय वायु सेना के एक अनुभवी टेस्ट पायलट हैं, जिन्होंने सु-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एन-32 जैसे विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव हासिल किया है। 2019 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के लिए चुने गए शुक्ला ने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (2026 में प्रस्तावित) के लिए भी प्रमुख अंतरिक्ष यात्री हैं। उनका यह मिशन भारत की वैश्विक मानव अंतरिक्ष उड़ान में सक्रिय भागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ISRO और Axiom Space का भरोसा हालांकि लॉन्च में कुछ दिन की देरी हुई है, लेकिन ISRO और Axiom Space दोनों ने मिशन की विश्वसनीयता और तैयारियों पर पूर्ण विश्वास जताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीकी देरी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और मिशन की सफलता में कोई बाधा नहीं बनेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का श्रीनगर दौरा, चिनार एयरबेस पर जवानों से मिलेंगे और मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे

श्रीनगर भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के पांच दिन बाद, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को श्रीनगर पहुंचे. एयरपोर्ट पर उनके साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी थे. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रक्षा मंत्री का स्वागत किया. इसके बाद, सिंह ने बादामी बाग छावनी का दौरा किया, जहां उन्होंने कुछ समय पहले गिराए गए पाकिस्तानी गोले का निरीक्षण किया. वहीं, रक्षा मंत्री चिनार एयरबेस पर भी जवानों से मिलेंगे और मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे. जम्मू-कश्मीर में तनावपूर्ण माहौल गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पिछले कुछ समय से अशांत रहा है. 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद 7 मई को भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया था. इन घटनाओं के बाद, राज्य में तनाव का माहौल व्याप्त है. ऐसे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, जो न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि घाटी में शांति बहाली के प्रयासों को भी गति देगा. सामान्य स्थिति की वापसी के संकेत ‘ऑपरेशन सद्भावना’ और भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौते के बाद जम्मू-कश्मीर में जीवन सामान्य होने लगा है. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जम्मू में स्कूल शिक्षा निदेशालय ने घोषणा की है कि जम्मू और कश्मीर के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में स्कूल 15 मई को फिर से खुलेंगे. यह छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता के कारण जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जिलों के कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए थे. जम्मू जिले में चौकी चौरा, भलवाल, डंसाल और गांधी नगर क्षेत्रों के स्कूल फिर से खुलेंगे. कठुआ जिले में बरनोटी, लखनपुर, सलान और घगवाल क्षेत्रों में स्कूल खुलेंगे. राजौरी जिले में पीरी, कालाकोट, थानामंडी, मोघला, कोटरंका, खवास, लोअर हथल और दरहल क्षेत्रों में स्कूलों को फिर से खोला जाएगा. पुंछ जिले में सुरनकोट और बफलियाज़ क्षेत्रों में स्कूल खुलेंगे. शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलना क्षेत्र में सामान्य स्थिति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शिक्षा के महत्व को दर्शाता है और स्थानीय समुदायों में विश्वास पैदा करेगा. हेलीकॉप्टर सेवा का पुन: आरम्भ एक सकारात्मक संकेत के रूप में, कटरा से श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं एक सप्ताह के निलंबन के बाद बुधवार को फिर से शुरू हुईं. भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता के कारण यह निलंबन किया गया था. हेलीकॉप्टर सेवाओं की बहाली से तीर्थयात्रियों को राहत मिलेगी और इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. आतंकवादी विरोधी अभियान तेज पहलगाम में हाल ही में हुए हमले के जवाब में, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है. मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां में एक मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े तीन आतंकवादी मारे गए. सूत्रों के अनुसार, मारे गए आतंकवादियों में से एक की पहचान शाहिद कुट्टे के रूप में हुई है, जो 8 अप्रैल, 2024 को श्रीनगर में डेनिश रिसॉर्ट में गोलीबारी की घटना में शामिल था, जिसमें दो जर्मन पर्यटक और एक ड्राइवर घायल हो गए थे. सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों को खत्म करने के लिए की गई त्वरित कार्रवाई क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. यह कार्रवाई दिखाती है कि भारतीय सेना आतंकवाद को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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