LATEST NEWS

पाकिस्तान सरकार ने आतंकी अजहर मसूद को सहायता राशि देने का किया ऐलान, मिल सकते है 14 करोड़ रुपये

इस्लामाबाद पाकिस्तान की सरकार ने भारत के हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। उसकी इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा खूंखार आतंकी अजहर मसूद को ही मिलता दिख रहा है। अजहर मसूद के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय पर भारत ने एयर स्ट्राइक की थी। इन हवाई हमलों में जैश के मुख्यालय को जबरदस्त नुकसान पहुंचा। इसके अलावा उसके परिवार के ही 10 लोग मारे गए थे। 4 अन्य लोग उसके करीबी थे, जो मारे गए। अब इन सभी लोगों की एवज में 14 करोड़ रुपये अजहर मसूद और उसके करीबियों के परिवारों के खाते में जाएंगे। इस तरह पाकिस्तान सरकार की ओर से मदद के नाम पर जारी रकम सीधे तौर पर आतंकियों और उनके परिवारों को मदद देगी। पाकिस्तान पीएमओ की ओर से जारी प्रेस रिलीज में एक करोड़ रुपये की सहायता राशि का ऐलान हुआ था। अब मदद के नाम पर जारी इस रकम का सीधा फायदा मसूद अजहर को ही मिलेगा। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने हाफिज सईद के मुरीदके स्थित ठिकाने और फिर बहावलपुर में जैश के ठिकानों पर जोरदार हमले किए थे। लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित बहावलपुर पर भारत के इस भीषण हमले ने आतंकी आकाओं को भी हिला दिया। जैश के इस मुख्यालय को उस्मान अली परिसर के नाम से भी जाना जाता है। यहीं पर जामिया मस्जिद शुभान अल्लाह भी स्थित है, जिस पर हमले का आरोप पाकिस्तान ने भारत पर लगाया था। यह मस्जिद भी जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय वाले परिसर के भीतर ही स्थित है। मसूद अजहर की ओर से ही जारी बयान में स्वीकार किया गया था कि उसके परिवार के 10 लोग इस अटैक में मारे गए हैं। इन हमलों में उसने अपनी बड़ी बहन और बहनोई के मारे जाने की बात स्वीकारी थी। इसके अलावा एक भतीजे और उसकी पत्नी, भतीजी और 5 बच्चों के मारे जाने की बात कबूल की गई थी। यही नहीं अजहर मसूद ने इसके बाद भी पूरी कट्टरता दिखाते हुए कहा था कि इन लोगों ने शहादत दी और अल्लाह उन्हें जन्नत देगा। अब इन लोगों के मारे जाने के बाद मसूद अजहर ही उनका कानूनी वारिस है। ऐसे में पाक सरकार से मिलने वाली पूरी मदद उसके ही खाते में जा सकती है। इसके अलावा 4 अन्य करीबियों के नाम पर जारी होने वाली मदद भी उसे ही मिलने की संभावना है।

भारत ने चीन के बाद अब तुर्की के प्रोपेगेंडा पर कसी नकेल, TRT वर्ल्ड का सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक

नई दिल्ली भारत ने पाकिस्तान की मदद करने वाले चीन के खिलाफ पहला बड़ा एक्शन लिया है। भारत सरकार ने प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ग्लोबल टाइम्स और शिन्हुआ न्यूज के सोशल मीडिया एकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र शिन्हुआ न्यूज को भी भारत ने ब्लॉक कर दिया है। चीन सिन्हुआ न्यूज कई सालों से भारत के खिलाफ गलत सूचना, फर्जी खबरें और दुष्प्रचार फैलाने में लगा हुआ था। ग्लोबल टाइम्स के बाद शिन्हुआ को भी ब्लॉक कर दिया गया है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान ग्लोबल टाइम्स पूरी बेशर्मी के साथ झूठ फैलाने में लगा था और बीजिंग में भारत के राजदूत ने इसके लिए चीनी मीडिया ऑउटलेट को फटकार भी लगाई थी। ग्लोबल टाइम्स बार बार ये नैरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहा था कि भारत बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा था। इसके अलावा वो भारत के ऑपरेशन सिंदूर को ‘एकतरफा कार्रवाई’ बताने की कोशिश भी कर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार हो रहा है जब यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा देखा जा रहा था कि वो जताने की कोशिश कर रहा था कि भारत एक लंबी युद्ध में नहीं ठहर सकता है और इस बात को आधार बनाकर वो निवेशकों को भड़काने की कोशिश कर रहा था। ग्लोबल टाइम्स, शिन्हुआ न्यूज के एक्स अकाउंट बैन प्रोपेगेंडा फैलाते हुए चीनी मीडिया में पुराने युद्ध के वीडियो एडिट करके लगाए जा रहे थे। ग्लोबल टाइम्स, पाकिस्तान की सेना के हवाले से तमाम फर्जी खबरें चला रहा था। वो भारतीय हथियारों को लेकर भ्रामक जानकारियां फैला रहा था। चीन में भारतीय दूतावास ने तो ग्लोबल टाइम्स को फर्जी खबरें चलाने के लिए फटकार तक लगाई थी। चीन के साथ साथ तुर्की की मीडिया में लिखा जा रहा था कि “पाकिस्तान के JF-17 थंडर की हाइपरसोनिक मिसाइलों ने आदमपुर में भारत के S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया है। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कीमत करीब 1.5 बिलियन डॉलर है।” भारतीय सेना ने जब इन दावों का खंडन कर दिया, फिर भी खबरों को अपडेट नहीं किया गया। इन देशों की मीडिया में भारतीय सेना के बयान नहीं दिखाए जा रहे थे। जाहिर तौर पर चीनी मीडिया में ऐसा इसलिए दिखाया जा रहा था क्योंकि जेएफ-17 चीनी फाइटर जेट है और सरकारी चीनी मीडिया में इस तरह के निराधार दावों से सीधे तौर पर सरकारी चीनी एयरोस्पेस कंपनियों को फायदा होता है। इन रिपोर्टों के बाद, J-17 और J-10C लड़ाकू विमानों के निर्माता एविक चेंगदू एयरक्राफ्ट कंपनी लिमिटेड के शेयरों में शेन्ज़ेन ट्रेडिंग में दो सत्रों में 36 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा तुर्की की मीडिया में भारत को मुस्लिम विरोधी देश दिखाने की कोशिश की गई। डिजिटल तरह से मुस्लिम ब्रदरहुड को बढ़ावा दिया गया। कई संकेतों में चीनी मीडिया ने एक्सपर्ट्स के हवाले से भारत के नागरिकों को डराने की नीयत से ‘टू फ्रंट वॉर’ का नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। भारतीय फाइटर जेट को गिराए जाने के फर्जी वीडियो चीन-समर्थित अकाउंट्स से फैलाए गए। लिहाजा भारत ने सख्त एक्शन लेते हुए चीन के दोनो भोंपू के मुंह को बंद कर दिया है। TRT वर्ल्ड का सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक भारत सरकार ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तुर्की के सरकारी टीवी चैनल टीआरटी वर्ल्ड के सोशल मीडिया हैंडल को भारत में ब्लॉक कर दिया। यह कार्रवाई भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए की गई है। आज ही दिन में भारत ने चीन के सरकारी प्रोपेगेंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स के सोशल मीडिया हैंडल को भी ब्लॉक कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, टीआरटी वर्ल्ड और ग्लोबल टाइम्स पर भारत के खिलाफ भ्रामक और भड़काऊ सामग्री फैलाने का आरोप है। पाकिस्तान समर्थक इन देशों के न्यूज पोर्टल अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए भारत के ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी फर्जी खबरें फैलाते पाए गए। भारत सरकार का कड़ा रुख भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को 8,000 से अधिक खातों को ब्लॉक करने का आदेश दिया, जिनमें अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों और प्रमुख यूजर्स के खाते शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये खाते राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली गलत सूचनाएं फैला रहे थे। टीआरटी वर्ल्ड और ग्लोबल टाइम्स के खाते इस कार्रवाई का हिस्सा हैं। पाकिस्तान समर्थक प्रचार का आरोप ग्लोबल टाइम्स और कुछ अन्य अकाउंट्स पर पाकिस्तान समर्थक प्रचार को बढ़ावा देने का आरोप है। हाल के दिनों में, भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है। तुर्की का टीआरटी वर्ल्ड खुद को वैश्विक समाचार और तुर्की के दृष्टिकोण को पेश करने का दावा करता है। उस पर भी भारत विरोधी कवरेज का आरोप लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत द्वारा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और विदेशी प्रचार को रोकने की दिशा में उठाया गया है। पाकिस्तान का हिमायती है तुर्की ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया, जिससे भारत और तुर्की के बीच तनाव बढ़ गया है। ऑपरेशन सिंदूर 7-8 मई 2025 की रात को शुरू हुआ। यह पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के शिविर शामिल थे। भारत ने इस कार्रवाई को गैर-उत्तेजक और आतंकवाद के खिलाफ एक जिम्मेदार कदम बताया। हालांकि, तुर्की ने इस ऑपरेशन की निंदा करते हुए पाकिस्तान का समर्थन किया। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने 7 मई को एक बयान जारी कर ऑपरेशन सिंदूर को “उकसाने वाला कदम” करार दिया और कहा कि इससे पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ गया है। तुर्की ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन साथ ही पाकिस्तान की मांग का समर्थन करते हुए पहलगाम हमले की जांच की वकालत की। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज … Read more

प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों में 1 जून से 500 मिलीलीटर तक की प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर लगाया बैन

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों में 1 जून से 500 मिलीलीटर तक की प्लास्टिक की पानी की बोतलों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों के उपनिदेशकों को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है, जिसमें पर्यावरण विभाग के हालिया निर्णय को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का यह कदम पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्लास्टिक की छोटी बोतलों, खासकर पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) पानी की बोतलों के बढ़ते उपयोग और उनके पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है। एकल उपयोग वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। अब छात्रों और शिक्षकों को पानी ले जाने के लिए पुन: प्रयोज्य बोतलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

बलूचों ने पाकिस्तानी पंजाबी ट्रक ड्राइवरों को किडनैप कर की हत्या

इस्लामाबाद भारत और पाकिस्तान के बीच भले ही सीजफायर हो गया है, लेकिन बलूचिस्तान में विद्रोही अब भी पड़ोसी देश की नाक में दम किए हुए हैं। पंजाब मूल के 4 ट्रक ड्राइवरों को किडनैप कर बलूचिस्तान में हत्या कर दी गई है। इन लोगों की हत्याओं की जिम्मेदारी फिलहाल बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तानी एजेंसियों का संदेह बलूच विद्रोहियों पर ही है। दरअसल इन ट्रक ड्राइवरों को 9 मई को ही किडनैप कर लिया गया था। इन्हें तब अगवा किया गया था, जब वे ईरान से एलपीजी के ट्रक लेकर आ रहे थे। इन्हें रास्ते में ही बलूच विद्रोहियों ने रोका और फिर उनकी पहचान जानने के बाद अगवा कर लिया। लंबे समय से पंजाबी मूल के पाकिस्तानियों को बलूच विद्रोही टारगेट करते रहे हैं। बीते कुछ सालों में तो ऐसी घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। डॉन की न्यूज के मुताबिक क्वेटा से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अहमदवाल इलाके से इन लोगों को अगवा किया गया था। विद्रोहियों ने पहले ट्रक टायरों को गोलियां मारकर पंचर कर दिया। इसके बाद ड्राइवरों को अगवा कर ले गए। सुरक्षाबलों के मौके पर पहुंचने से पहले ही वे ट्रक ड्राइवरों को लेकर निकल चुके थे। अब उनके शव मंगलवार को बरामद किए गए हैं। ये शव एक सुनसान स्थान पर मिले थे। इनकी जानकारी स्थानीय लोगों की तरफ से ही पुलिस प्रशासन को दी गई थी। इसके बाद इन शवों को नोशकी ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इन सभी लोगों को करीब से गोलियां मारी गई हैं और कई गोलियां लगने से इनकी मौत हुई है। इनमें से दो ड्राइवर मोइन और हुजैफा पाकिस्तानी पंजाब के पाकपट्टन इलाके के रहने वाले हैं। अन्य दो इमरान अली और इरफान अली रहीम यार खान के निवासी थे। इन शवों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके घरों में भेज दिया गया। इस मामले की जांच शुरू हो गई है, लेकिन अब तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पंजाबी मूल के लोगों को ही क्यों बना रहे हैं निशाना दरअसल ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जब बलूच विद्रोहियों ने हाईवे ही जाम कर दिया और फिर पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करके कत्ल किया। इसके अलावा पिछले दिनों जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को भी अगवा किया गया था। इसमें भी पंजाबी मूल के लोगों को ही निशाना बनाया गया था। बलूच विद्रोहियों का कहना है कि पाकिस्तान का उनकी जमीन पर अवैध कब्जा है। इसके अलावा देश के शासन, सेना, राजनीति में पंजाब का ही प्रभुत्व है और बलूचिस्तान को किनारे रखा जाता है।

विदेश मंत्री जयशंकर बुलेटप्रूफ कार में चलेंगे, पाकिस्तान से तनाव के बीच बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को देखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सुरक्षा बढ़ाई गई है। गृह मंत्रालय (MHA) ने उनकी सुरक्षा में इजाफा किया है। यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया गया है। उन्हें एक बुलेटप्रूफ कार दी गई है। दिल्ली में उनके घर के आसपास भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। जयशंकर को पहले से ही सीआरपीएफ कमांडो की जेड-श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। अक्टूबर 2023 में उनकी सुरक्षा Y-श्रेणी से बढ़ाकर Z-श्रेणी कर दी गई थी। जयशंकर के लिए अब बुलेटप्रूफ कार सरकारी सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा बढ़ाई गई है। MHA ने उनकी सुरक्षा में एक बुलेटप्रूफ कार जोड़ी है। दिल्ली में उनके आवास पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जयशंकर को पहले से ही जेड-श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। इस सुरक्षा में सीआरपीएफ कमांडो की तैनाती होती है। केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में पहले से ही 33 कमांडो हमेशा तैनात रहते हैं। इसलिए लिया गया सुरक्षा बढ़ाने का फैसला ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल के दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा है। यही नहीं भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान और पीओके टेरर कैंप्स को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया। भारत-पाकिस्तान तनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने विदेश मंत्री की सिक्योरिटी को लेकर अहम फैसला लिया। क्या होती है जेड-श्रेणी की सुरक्षा दरअसल, जेड-श्रेणी की सुरक्षा भारत में तीसरी सबसे बड़ी सुरक्षा है। इसमें 22 जवान होते हैं। इनमें NSG के 4 से 6 कमांडो और स्थानीय पुलिस शामिल होती है। इसमें एक बुलेटप्रूफ गाड़ी भी होती है। साथ ही, एस्कॉर्ट व्हीकर भी दिए जाते हैं। यह सुरक्षा आमतौर पर बड़े नेताओं और मशहूर हस्तियों को दी जाती है। खासकर उन्हें, जिन पर खतरे की आशंका होती है। अक्टूबर 2023 में जयशंकर की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। पहले उन्हें Y-श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। आईबी की रिपोर्ट के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी ने विदेश मंत्री पर खतरे का आकलन करने के बाद सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की थी। उस समय, सुरक्षा के तौर पर 12 सशस्त्र गार्ड केंद्रीय मंत्री जयशंकर के घर पर तैनात थे। छह पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) भी थे। 12 सशस्त्र एस्कॉर्ट कमांडो तीन शिफ्टों में तैनात थे। तीन वॉचर शिफ्टों में काम करते थे। तीन प्रशिक्षित ड्राइवर हर समय मौजूद रहते थे। अब एस. जयशंकर की सुरक्षा को बढ़ाते हुए एक बुलेटप्रूफ कार भी दी गई है। ये ऐसी कार होगी जिस पर गोलियों का असर नहीं होता।

हिंदू बेटी ने बलूचिस्तान में रचा इतिहास, कौन हैं 25 साल की कशिश.. जो बनीं असिस्टेंट कमिश्नर

बलूचिस्तान महज 25 साल की उम्र में कशिश चौधरी ने इतिहास रच दिया है। पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाली वह बलूचिस्तान प्रांत की पहली महिला बनी हैं, जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया गया है। नियुक्ति के बाद पाक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि महिलाओं और अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण की दिशा में काम करेंगी। बलूचिस्तान के चगाई जिले के नोशकी शहर की रहने वाली कशिश ने बलूचिस्तान पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) की परीक्षा पास कर यह उपलब्धि हासिल की है। यह न सिर्फ उनके व्यक्तिगत जीवन में मील का पत्थर है, बल्कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है। कड़ी मेहनत और अनुशासन से सफलता कशिश ने पाक चैनल समा टीवी से बात करते हुए बताया कि उन्होंने लगातार तीन साल तक हर दिन कम से कम आठ घंटे पढ़ाई की। उन्होंने कहा, “अनुशासन, मेहनत और समाज के लिए कुछ करने की चाहत ने मुझे इस सफर में प्रेरित किया।” उनके पिता गिर्धारीलाल पेशे से व्यापारी हैं। उन्होंने अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, “मेरी बेटी ने जो हासिल किया है, वह उसकी मेहनत और लगन का परिणाम है। यह मेरे लिए गर्व की बात है।” बताया- क्या होंगी प्राथमिकताएं कशिश चौधरी और उनके पिता ने क्वेटा में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती से मुलाकात की। कशिश ने मुख्यमंत्री से कहा कि वह महिलाओं और अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण के साथ-साथ प्रांत के समग्र विकास के लिए काम करेंगी। मुख्यमंत्री बुगती ने कहा, “यह देश और बलूचिस्तान के लिए गर्व की बात है कि हमारे अल्पसंख्यक समुदाय की बेटियां इतनी मेहनत कर अहम पदों तक पहुंच रही हैं। कशिश हमारे लिए गर्व का प्रतीक हैं।” और भी महिलाएं दिखा रहीं दम पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की महिलाएं धीरे-धीरे पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। इससे पहले 2022 में मनीषा रोपेटा कराची की पहली हिंदू महिला एसपी बनीं थीं। वहीं, पुष्पा कुमारी कोहली कराची में सब-इंस्पेक्टर हैं। सुमन पवन बोधनानी 2019 में सिंध के शहादादकोट में सिविल जज बनी थीं।

भारतीय मूल की अनीता आनंद ने रचा इतिहास, गीता पर हाथ रखकर ली मंत्री पद की शपथ… जानिए भारत से क्या है कनेक्शन……

ओटावा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया है. उन्होंने भारतीय मूल की अनीता आनंद (Anita Anand) को विदेश मंत्री नियुक्त किया है. अनीता पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं. अनीता आनंद ने पवित्र हिंदू ग्रंथ गीता पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. उन्होंने कहा कि मैं कनाडा की विदेश मंत्री के तौर पर चुने जाने को लेकर सम्मानित महसूस करती हूं. मैं प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ मिलकर काम करने और एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया बनाने के लिए हमारी टीम के साथ मिलकर काम करने को लेकर आशान्वित हूं. बता दें कि उन्हें मेलोनी जोली की जगह विदेश मंत्री बनाया गया है. जोली को उद्योग मंत्री नियुक्त किया गया है. कार्नी के कैबिनेट में आधी सदस्य महिलाएं हैं. पीएम कार्नी ने कहा कि उनका मंत्रिमंडल कनाडा के लोगों की इच्छा और जरूरत के मुताबिक बदलाव लाने के लिए काम करेगा. अनीता का भारत से क्या है कनेक्शन? अनीता आनंद भारतीय मूल की है. उनके पिता तमिलनाडु से जबकि मां पंजाब से हैं. लेकिन बाद में उनके माता-पिता कनाडा जाकर बस गए. उन्होंने गीता पर हाथ रखकर विदेश मंत्री पद की शपथ ली. वह ट्रूडो सरकार में परिवहन और व्यापार मंत्री भी रह चुकी हैं. अनीता का जन्म 1967 में नोवा स्कोटिया में हुआ था. उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं. अनीता टोरंटो विश्वविद्यालय में लॉ की प्रोफेसर रह चुकी हैं. वह पहली बार 2019 में ओकविल से सांसद चुनी गई थीं. वह 2021 से 2023 तक रक्षा मंत्री और 2023 से 2024 तक ट्रेजरी बोर्ड की अध्यक्ष रही. 2025 के चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और मार्क कार्नी की अल्पमत सरकार में कैबिनेट मंत्री बनीं. वह राजनीति में आने से पहले पेशे से वकील और प्रोफेसर रही हैं. अनीता ने अपनी भारतीय विरासत को बार-बार स्वीकार किया है. उन्होंने प्रवासी भारतीय दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर भारत के साथ अपने संबंधों को उजागर किया है. उन्होंने कनाडा की रक्षा मंत्री के रूप में भारत-कनाडा रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम किया. बता दें कि मार्क कार्नी की अगुवाई में हाल ही में हुए आम चुनाव में लिबरल पार्टी ने 343 में से 169 सीटें जीती थीं. हालांकि, लिबरल पार्टी बहुमत के लिए 172 सीटों से तीन सीटें लाने से चूक गई थी. लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने सरकार बनाई. यह कनाडा में लिबरल पार्टी की चौथी सरकार है. कौन हैं अनीता आनंद पूर्व में कनाडा की रक्षा मंत्री और परिवहन मंत्री जैसे पदों को संभाल चुकी अनीता आनंद का जन्म 20 मई 1967 को कनाडा के केंटविले में एक प्रवासी डॉक्टर परिवार के घर में हुआ था। उनके माता-पिता 1960 के दशक की शुरुआत में भारत से कनाडा चले गए थे। उनकी मां पंजाब से थी, जबकि पिता तमिलनाडु से थे। उनकी दो बहनें गीता और सोनिया हैं। कनाडा की पहली हिंदू मंत्री उन्होंने ओंटारियो से राजनीति विज्ञान में अकादमिक डिग्री हासिल की और न्यायशास्त्र में कला स्नातक किया। उन्होंने डलहौजी और टोरंटो यूनिवर्सिटी से क्रमशः कानून में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की। 1995 में आनंद ने कनाडाई वकील और बिजनेस एग्जीक्यूटिव जॉन नॉल्टन से शादी की। उनके चार बच्चे हैं। साल 2019 में वह कनाडा के संघीय मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली पहली हिंदू बनीं। राजनीति छोड़ने का किया था ऐलान आनंद ने जनवरी में कहा था कि वह राजनीति छोड़कर शिक्षा जगत में लौट रही हैं। लेकिन 2025 के संघीय चुनाव में फिर से चुने जाने के बाद कार्नी ने उन्हें मंत्रिमंडल में वापस आने और विदेश मामलों का मंत्रालय संभालने के लिए राजी कर लिया। वह हाउस ऑफ कॉमन्स में ओकविले ईस्ट राइडिंग का प्रतिनिधित्व करती हैं।  

भारत ने अब पाकिस्तान के साथ खड़े होने वाले तुर्की को आर्थिक मोर्चे पर करारा जवाब देना शुरू

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में तुर्की ने पाक का साथ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की ने पाकिस्तान को वॉर के मिसाइल से ड्रोन तक देने में मदद की। भारत के लोगों को तुर्की का ये रवैया रास नहीं आया है। लिहाजा भारत ने अब पाकिस्तान के साथ खड़े होने वाले तुर्की को आर्थिक मोर्चे पर करारा जवाब देना शुरू कर दिया है। तुर्कीये के खिलाफ भारतीय व्यापारियों (Indian Traders) ने ‘ट्रेड स्ट्राइक’ का ऐलान कर दिया है। पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है। वे अपने देश के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब मंगवा रहे हैं। वहीं उदयपुर में मार्बल कारोबारी भी तुर्की से व्यापार रोकने को ऐलान कर दिया है। महाराष्ट्र के पुणे में व्यापारियों ने तुर्की से आयात होने वाले सेबों की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी है। स्थानीय बाजारों से ये सेब गायब हो गए हैं और ग्राहकों ने भी इसका बहिष्कार कर दिया है। हर साल पुणे के फलों के बाजार में तुर्की सेबों की हिस्सेदारी लगभग ₹1,000 से ₹1,200 करोड़ की होती है, लेकिन अब यह कारोबार ठप हो गया है। पुणे के एपीएमसी (कृषि उत्पन्न बाजार समिति) मार्केट में सेब व्यापारी सय्योग जेंडे ने बताया कि हमने तुर्की से सेब मंगवाना पूरी तरह बंद कर दिया है। अब हम हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान और अन्य स्रोतों से सेब मंगा रहे हैं। तुर्की सेबों की मांग में करीब 50% की गिरावट आई है। दयपुर के व्यापारियों ने तुर्की से मार्बल का आयात बंद किया एशिया के सबसे बड़े मार्बल व्यापार केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले उदयपुर के व्यापारियों ने तुर्किये (तुर्की) से मार्बल का आयात बंद करने का फैसला किया है। उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी के अध्यक्ष कपिल सुराना ने बताया कि कमेटी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि जब तक तुर्किये पाकिस्तान का समर्थन करता रहेगा, तब तक उससे व्यापार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में आयात होने वाले कुल मार्बल का करीब 70% हिस्सा तुर्किये से आता है, लेकिन अब यह आयात बंद किया जा रहा है। ट्रेवल एजेंसियां तुर्की और अजबैजान की बुकिंग बंद की तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों की इकोनॉमी में टूरिज्म का बहुत बड़ा रोल है. इन दोनों के देश की कुल जीडीपी का 10 फीसदी हिस्सा टूरिज्म से ही आता है। अजरबैजान की बात करें तो यहां 70% पर्यटक भारत से ही जाते हैं। भारत-पाक तनाव के बाद भारत के लोगों के बॉयकॉट तुर्की और अजरबैजान कैंपेंन छेड़ दिया जिसका असर दिखना शुरु हो गया। travel booking platforms जैसे Ixigo और EaseMyTrip Turkey के लिए बुकिंग नहीं ले रहे हैं। भारतीयों ने बॉयकॉट तुर्की और अजबैजान कैंपेन चलाया भारत के लोगों तुर्की को बॉयकॉट करना शुरू कर दिया है। अब लोग अजरबैजान की जगह बैंकाक जाने लगे हैं। देश भर के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने इन देशों में जाने का अपना प्लान कैसिंल कर दिया है। अकेले पूर्वांचल से 15000 पर्यटकों ने इन दोनों देशों का प्लान कैंसिल किया है। ऑल इंडिया टूरिस्ट फेडरेशन के मुताबिक दिनों में सिर्फ पूर्वांचल से 15000 से ज़्यादा पर्यटकों ने अपना प्लान और टिकट कैंसिल करा लिया है। पिछले साल 37500 लोगों ने इन दोनों देशों की यात्रा की थी। अभी तो तीन दिन का ही ये आंकड़ा है उम्मीद की जा रही है कि ये संख्या 25 हज़ार से 30 हज़ार के बीच जा सकती है। ट्रैवल कंपनियां भी इसमें लोगों का साथ दे रही है। कॉक्स एन्ड किंग, एसओटीसी और इज़ माय ट्रिप जैसी ट्रैवेल कम्पनियां और एयर इंडिया सहित कई एयरलाइन्स कम्पनी लोगों से कोई कैंसिलेशन चार्ज भी नही ले रही हैं। 2.50 लाख टूरिस्ट इंफोइंडिया के आकड़ों के मुताबिक साल 2024 में भारत से करीब 2.50 लाख टूरिस्ट ने अजरबैजान की यात्रा की। वहीं तुर्की की बात करें तो करीब 3 लाख टूरिस्ट भारत से तुर्की गए थे। यात्रा के दौरान हर यात्री औसतन करीब 1000 अमेरिकी डॉलर यानी 85,000 रुपये खर्चा किया। इस तरह पाकिस्तान को समर्थन देने वाले देशों को पिछले साल करीब 469 करोड़ रुपये की आय हुई।

जस्टिस बीआर गवई आज ली 52वें सीजेआई के रूप में शपथ, दे चुके हैं ये बड़े फैसले

नई दिल्ली जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने आज सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है. वह सुप्रीम कोर्ट के 52वें सीजेआई बन गए हैं. देश के इस अहम पद पर बैठने से पहले उन्होंने अपनी मां का आशीर्वाद लिया. CJI पद की शपथ लेते ही सबसे पहले उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई के पैर छुए. जस्टिस गवई भारत के पहले बौद्ध सीजेआई हैं. आजादी के बाद वह देश में दलित समुदाय से दूसरे सीजेआई हैं.  सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर उनका कार्यकाल छह महीने का होगा.   जस्टिस वीआर गवई के अहम फैसले जानें न्यायधीश रहते जस्टिस वीआर गवई ने कई अहम फैसले दिए, जिनकी खूब चर्चा हुई. उनके मुख्य फैसलों में बुलडोजर जस्टिस, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को बरकरार रखना, डिमोनेटाइजेशन को बरकरार रखना, अनुसूचित जाति कोटे में उप-वर्गीकरण को बरकरार रखना, शराब नीति में के कविता को जमानत देना, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी की दो बार आलोचना करना शामिल हैं. देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस गवई परंपरा के अनुसार, वर्तमान सीजेआई अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करते हैं। जस्टिस गवई वरिष्ठता के क्रम में सबसे आगे थे, जिसके चलते उनके नाम की सिफारिश की गई। कानून मंत्रालय ने सीजेआई जस्टिस खन्ना से उनके उत्तराधिकारी का नाम देने की आधिकारिक अपील की थी। ऐसा रहा करियर 16 मार्च, 1985 को वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में सेवा दी। 17 जनवरी, 2000 को उन्हें नागपुर खंडपीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया। 14 नवंबर, 2003 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 12 नवंबर, 2005 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 24 मई, 2019 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। न्यायमूर्ति गवई सर्वोच्च न्यायालय में कई ऐसी संविधान पीठों में शामिल रहे, जिनके फैसलों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा। दिसंबर 2023 में, उन्होंने पांच जजों की संविधान पीठ में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखा। पिता रहे हैं बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। जस्टिस गवई के पिता दिवंगत आरएस गवई भी एक मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल रहे। जस्टिस गवई देश के दूसरे अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन साल 2010 में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। कई मामलों पर जस्टिस बीआर गवई ने सुनाए ऐतिहासिक फैसले राजीव गांधी हत्याकांड (2022) जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 30 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद दोषियों की रिहाई को मंजूरी दी, यह मानते हुए कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। वणियार आरक्षण (2022) तमिलनाडु सरकार को वणियार समुदाय को विशेष आरक्षण देने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया, क्योंकि यह अन्य पिछड़ा वर्गों के साथ भेदभावपूर्ण था। नोटबंदी (2023) जस्टिस गवई ने 2016 की नोटबंदी योजना को 4:1 बहुमत से वैध ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच परामर्श के बाद लिया गया था और यह “अनुपातिकता की कसौटी” पर खरा उतरता है। ईडी निदेशक का कार्यकाल (2023) जुलाई 2023 में जस्टिस गवई की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया और उन्हें 31 जुलाई 2023 तक पद छोड़ने का निर्देश दिया था। बुलडोजर कार्रवाई (2024) 2024 में, जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि केवल आरोपी या दोषी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को ध्वस्त करना असंवैधानिक है। कार्रवाई बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं कर सकते, अगर होती है तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।   अन्य फैसले     मोदी सरनेम केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दी थी। उन्हें इस केस में दो साल की सजा के बाद लोकसभा से अयोग्य करार दिया गया था।     सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में बीआरएस नेता के कविता को भी जमानत दी। 1985 में की वकालत की शुरुआत नए CJI गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था. उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की. शुरुआती सालों में उन्होंने बार. राजा एस. भोसले (पूर्व महाधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) के साथ 1987 तक कार्य किया. इसके बाद 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की. जस्टिस गवई ने 1990 के बाद मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेचं में प्रैक्टिस की, जिसमें संवैधानिक और प्रशासनिक कानून विशेष क्षेत्र रहे. वह नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील रहे. इसके अलावा, उन्होंने सीकोम, डीसीवीएल जैसी विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं और निगमों, विदर्भ क्षेत्र की कई नगर परिषदों के लिए नियमित रूप से पैरवी की.  

पूरा कोच या पूरी ट्रेन भी बुक करवानी है तो यह है ऑनलाइन तरीका

नई दिल्ली जरूरत बारात ले जाने की हो, तीर्थ यात्रा पर जाने की या फिर किसी खास मौके पर पूरे परिवार और दोस्तों संग सफर करने की ऐसे में एक-दो सीट नहीं बल्कि पूरा कोच या पूरी ट्रेन भी बुक करवानी पड़ती है। हालांकि बहुत कम ही लोग जानते हैं कि ट्रेन के कोच या पूरी ट्रेन को कैसे बुक करवाया जाता है। जी हां, रेलवे की एक खास सुविधा के तहत अब आप अपनी जरूरत और सहूलियत के हिसाब से ट्रेन का पूरा डिब्बा या पूरी ट्रेन रिजर्व कर सकते हैं। यह सुविधा उन यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं जो भीड़भाड़ से दूर, अपनों के साथ एक आरामदायक और निजी सफर का अनुभव चाहते हैं। चलिए जानते हैं कि कैसे आप घर बैठे पूरी की पूरी ट्रेन या एक कोच बुक करवा सकते हैं। कहां और कैसे करें बुकिंग ट्रेन के किसी कोच या पूरी ट्रेन को बुक कराने का काम IRCTC पर उस तरह से नहीं होता जिस तरह से आप एक नॉर्मल टिकट बुक कराते हैं। इसके लिए रेलवे ने IRCTC की वेबसाइट पर ही एक खास सेक्शन बनाया है। ट्रेन कोच या पूरी ट्रेन को बुक करने के लिए www.ftr.irctc.co.in पर जाकर आपको “Full Tariff Rate” के तहत बुकिंग करनी होगी। यह बड़ी संख्या में बुकिंग कराने के लिए IRCTC की ओर से पेश की गई सुविधा है। यहां जाकर आप पूरी ट्रेन या सिर्फ एक या कई कोच बुक कर सकते हैं। बुकिंग के लिए जरूरी डिटेल्स बुकिंग करते समय आपको कुछ जरूरी डिटेल्स तैयार रखनी चाहिए। इन डिटेल्स में आपको बताना होगा कि कहां से कहां तक की यात्रा करनी है, कितने और कौन से कोच आपको चाहिए जैसे कि स्लीपर, एसी आदि, कितने दिन के टूर के लिए आप बुकिंग करवा रहे हैं और कितने यात्रियों के लिए बुकिंग की जा रही है। इन सभी जानकारियों के आधार पर आपको एक अनुमानित किराया दिखाया जाएगा। बुकिंग कराने से पहले ही ये तमाम जानकारियां तैयार रखें ताकि आपकी बुकिंग तेजी से पूरी हो सके। बुकिंग का अमाउंट पूरी ट्रेन या कोच बुक करवाते समय आपको बताई गई अमाउंट का एडवांस में पेमेंट करना होगा। इस अमाउंट का 100% आपको एक साथ देना होगा। इसके साथ ही आपको एक सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करवाना होगा। यह सिक्योरिटी डिपॉजिट आपकी यात्रा के बाद आपको लौटा दिया जाता है। कुछ ध्यान रखने वाली बातें किसी ट्रेन या कोच को बुक करवाते समय यह याद रखना जरूरी है कि बुकिंग कम से कम 30 दिन पहले की जानी चाहिए। अगर आप चाहते हैं कि तुरंत किसी ट्रेन या कोच की बुकिंग करवा पाएं, तो ऐसा नहीं हो सकता। आपको कम से कम 30 दिन का समय एडवांस में लेकर चलना होगा। कोच को कम से कम 1 दिन के लिए बुक कराना होगा। साथ ही सभी यात्रियों की लिस्ट और उनके पहचान पत्र रेलवे को देने होंगे। यह प्रक्रिया भी बुकिंग कराने के लिए बैठने से पहले ही पूरी कर लेनी चाहिए ताकि आपका काम तेजी से हो सके। इस सुविधा का इस्तेमाल कर आप भीड़ से दूर रहते हुए सुविधाजनक तरीके से अपने पूरे ग्रुप के साथ सफर कर सकते हैं।

क्या आप को पता है बच्‍चों का भी बनता है पैन कार्ड, ऐसे करें ऑनलाइन अप्‍लाई

नई दिल्ली पैन कार्ड को लेकर बहुत से लोग यह सोचते हैं कि बड़े होने पर नौकरी लगने के बाद इसकी ज्‍यादा जरूरत पड़ती है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बच्‍चों का पैन कार्ड भी बनाया जाता है। उसे माइनर पैन कार्ड कहते हैं जिसे 18 साल से कम उम्र के बच्‍चों और किशोरों के लिए जारी किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, इसका इस्‍तेमाल मुख्‍य तौर पर आर्थिक लेनदेन के लिए, बच्‍चों का बैंक अकाउंट खाेलने के लिए या फ‍िर उनके नाम पर कोई इन्‍वेस्‍टमेंट करने के लिए किया जाता है। बच्‍चों के पैनकार्ड में कोई फोटो नहीं होती। साइन भी नहीं किए जाते हैं। बच्‍चा जब 18 साल की उम्र पूरी कर लेता है, तो उसी पैन कार्ड को अपग्रेड किया जाता है। अगर आप अपने बच्‍चे का पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो यह काम ऑनलाइन किया जा सकता है। हम इसका तरीका बता रहे हैं। बच्‍चे का पैन कार्ड ऑनलाइन कैसे बनवाएं अगर आप अपने बच्‍चे का पैन कार्ड ऑनलाइन बनवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्‍टेप्‍स को फॉलो करें। अपने फोन या लैपटॉप में Google पर जाकर NSDL की वेबसाइट ढूंढें। सिलेक्‍ट ऐप्‍लिकेशन कैटिगरी में जाकर इंडिविजुअल का ऑप्‍शन चुनना है। इसके बाद बच्‍चे का पूरा नाम, जन्‍मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करनी है। कैप्‍चा कोड डालकर डिटेल सबमिट करनी होंगी। डिटेल सबमिट होने के बाद आपके पास एक टोकन नंबर आएगा। उसके बाद आपको ‘continue with PAN application form’ पर क्लिक करना है। फ‍िर आधार डिटेल्‍स को लिंक करना है। साथ ही पैरंट्स की डिटेल, आय की जानकारी देनी है और मांगे गए डॉक्‍युमेंट्स अपलोड करने हैं। आखिर में जरूरी फीस का भुगतान करना है, जिसके बाद अगले 15 दिनों में पैन कार्ड आपके अड्रेस पर डिलिवर कर दिया जाएगा। पैनकार्ड तैयार होने के बाद उसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। यहां ध्‍यान देने वाली बात है कि पूरा प्रोसेस पैरंट्स की निगरानी में होता है, क्‍योंकि बच्‍चा पैन कार्ड के लिए अप्‍लाई नहीं कर सकता। इन कागजों की होती है जरूरत बच्‍चे का पैन कार्ड बनवाने के लिए मुख्‍य तौर पर उसका आइडेंटिटी प्रूफ, ऐज प्रूफ और अड्रेस प्रूफ चाहिए होता है। आइडेंटिटी प्रूफ में आधार कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड आदि शामिल होते हैं। आधार कार्ड सबसे कॉमन है आप उसे इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अड्रेस प्रूफ के तौर पर भी आधार कार्ड दिया जा सकता है। चाहें तो डोमिसाइल सर्टिफ‍िकेट लगा सकते हैं। अगर बर्थ सर्टिफ‍िकेट मांगा जाए, तो वह भी दे दें। बच्‍चे का पैन कार्ड बनाने में कितना खर्च पैनकार्ड बनवाने में बहुत खर्च नहीं आता है। अगर आप ऑनलाइन अप्‍लाई करते हैं तो करीब 101 रुपये में काम हो जाएगा। बहुत से लोग नजदीकी साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र में जाकर भी यह काम करवाते हैं, वहां भी तकरीबन 200 रुपये में काम हो जाता है। ऐप्‍लिकेशन देने के लगभग 15 दिनों के अंदर पैन कार्ड आपके दिए गए अड्रेस पर‍ डिलिवर हो जाता है।

ई-पासपोर्ट भारत में हुआ लॉन्च, जानें इसकी विशेषताएं

नई दिल्ली भारत ने औपचारिक रूप से ई-पासपोर्ट लागू करना शुरू कर दिया है, जो विदेशी आगंतुकों के लिए पहचान और सुरक्षा में सुधार के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक को पारंपरिक पासपोर्ट डिज़ाइन के साथ जोड़ता है। यह पहल भारतीय पासपोर्ट जारी करने और सत्यापित करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है, और इसे 1 अप्रैल, 2024 को शुरू हुए अपडेटेड पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम (PSP) संस्करण 2.0 के हिस्से के रूप में पेश किया गया था। आप इसे कहां प्राप्त कर सकते हैं नागपुर, रायपुर, भुवनेश्वर, गोवा, जम्मू, अमृतसर, शिमला, जयपुर, चेन्नई, सूरत, हैदराबाद और रांची देश के उन शहरों में शामिल हैं जहां वर्तमान में ई-पासपोर्ट पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। देश भर में इस सेवा का विस्तार करने की योजना पर काम चल रहा है। 3 मार्च, 2025 को, चेन्नई में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने तमिलनाडु में इसका शुभारंभ किया। 22 मार्च, 2025 तक अकेले राज्य में 20,729 ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके थे। ई-पासपोर्ट क्या है? एक भारतीय ई-पासपोर्ट के कवर में एक एंटीना और एक छोटा रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) चिप लगा होता है। यह चिप पासपोर्ट धारक की बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी जमा करता है, जो बेहतर सुरक्षा और तेज़ सत्यापन सुनिश्चित करता है। ई-पासपोर्ट की पहचान करने के लिए बस सामने के कवर के नीचे छपे एक अनोखे सुनहरे रंग के प्रतीक को देखें। इस नवाचार के मूल में पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (PKI) है, जो एक जटिल एन्क्रिप्शन प्रणाली है जो चिप पर संवेदनशील डेटा की सुरक्षा करती है और सत्यापित करती है कि इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें पासपोर्ट धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और जालसाजी के खिलाफ बेहतर बचाव शामिल है, जो सीमा पार करते समय महत्वपूर्ण है। क्या स्विच करना आवश्यक है? हमेशा नहीं। सरकार ने कहा है कि मौजूदा पासपोर्ट उनकी समाप्ति तक वैध रहेंगे। फिलहाल, इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट पर स्विच करना स्वैच्छिक है। भारत द्वारा ई-पासपोर्ट को अपनाना नागरिक सेवाओं के प्रति एक प्रगतिशील दृष्टिकोण को दर्शाता है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय यात्रा अधिक तकनीक-संचालित और सुरक्षा-केंद्रित हो जाती है। यह केवल आव्रजन लाइनों को तेज करने के बारे में नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया में पहचान की रक्षा करने के बारे में है। भारत में ई-पासपोर्ट के लिए आवेदन कैसे करें नागपुर, चेन्नई, जयपुर, हैदराबाद और अन्य जैसे शहरों में, नागरिक अब ऑनलाइन ई-पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसे विशिष्ट पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSKS) या क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (RPOS) से प्राप्त कर सकते हैं। ई-पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए गाइड आवेदन करने के लिए पासपोर्ट सेवा ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करें। अब आपको अपनी पंजीकृत आईडी का उपयोग करके लॉग इन करना होगा। “नए पासपोर्ट के लिए आवेदन करें/पासपोर्ट का पुन: जारी करना” चुनें। यदि आप उस प्रकार के पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं जो आपके पास पहले नहीं था, तो “नया” चुनें। पहले, या “पुन: जारी करें” यदि आपके पास पहले से ही उसी प्रकार का स्वामित्व है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लें और शुल्क का भुगतान करें। अपनी नियुक्ति के दौरान, आप या तो अपनी आवेदन रसीद प्रिंट या सेव कर सकते हैं या केवल एसएमएस पुष्टिकरण प्रस्तुत कर सकते हैं। नियत तारीख पर, मूल दस्तावेज अपने चुने हुए PSK या RPO में लाएं।  

कश्मीर मुद्दा सिर्फ पाकिस्तान की स्थिति नहीं है बल्कि वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त विवाद-विदेश मंत्री डार

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बार फिर से भारत को चेतावनी देने का दुस्साहस किया है। उन्होंने चेतावनी देने के लहजे में कहा है कि “पाकिस्तान की जल आपूर्ति को रोकने या मोड़ने की कोई भी कोशिश युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।” इशाक डार का बयान उस वक्त आया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा था कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते।’ एक्सपर्ट्स ने मोदी के बयान को ‘सिंधु जल समझौता सस्पेंड’ करने के फैसले को जारी रखना माना है। इशाक डार ने सीएनएन से बात करते हुए कहा कि “कभी-कभी राष्ट्रों को बेहद कठिन विकल्प चुनने की आवश्यकता होती है, जैसा कि हमने 9 मई की रात को किया।” इशाक डार ने सीएनएन से बात करते हुए आगे कहा कि “हम चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया दोनों पक्षों के बीच सम्मान के साथ आगे बढ़े।” अमेरिकी मीडिया ऑउटलेट से बात करते हुए इशाक डार ने कहा कि “हम बातचीत के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों को हल करना चाहते हैं, ऐसे मुद्दे जो क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता की नींव रख सकते हैं।” इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने दक्षिण एशिया में शांति का एकमात्र रास्ता कश्मीर समस्या का समाधान बताया। पाकिस्तान ऐसा करके एक बार फिर से कश्मीर को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रहा है और ये दिखाने की कोशिश कर रहा है कि कश्मीर समस्या का समाधान किए बगैर शांति नहीं हो सकती है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री की गीदड़भभकी कश्मीर को लेकर भारत ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि पाकिस्तान से जो भी बात होगी, वो पीओके को लेकर होगी। भारत ने पाकिस्तान से पीओके को खाली करने के लिए कहते हुए पीओके को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। सीएनएन से बात करते हुए इशाक डार ने कश्मीर को इंटरनेशनल मुद्दा बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, “कश्मीर मुद्दा सिर्फ पाकिस्तान की स्थिति नहीं है बल्कि वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त विवाद है।” वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की इच्छा के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए डार ने ट्रंप की पेशकश को “बहुत महत्वपूर्ण” बताया और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को हल करने के लिए अमेरिका सहित तीसरे पक्ष के समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया। यानि पाकिस्तान अब कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता चाह रहा है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर रखा है। कश्मीर पर भारत का रूख साफ है कि वो किसी भी तरह की मध्यस्थता का विरोध करता है। इशाक डार ने भारत के साथ व्यापक बातचीत के लिए पाकिस्तान की तत्परता को दोहराया, लेकिन कहा कि “यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है। आप एक हाथ से ताली नहीं बजा सकते। हम इसे अकेले हल नहीं कर सकते।” उन्होंने बिना देरी के ऐसे मुद्दों को हल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और चेतावनी दी, कि ‘फैसला होने में जितनी देरी होगी, मुश्किलें उतनी ज्यादा बढ़ेंगी।’ पाकिस्तान के नेता लगातार इंटरनेशनल मीडिया के जरिए कश्मीर मुद्दे को इंटरनेशनल मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बात की कोई संभावना नहीं है कि भारत उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया भी दे।

नई दिल्ली ने मॉस्को से एस-400 की और खेप की डिलीवरी की मांग रखी, रूस निकट भविष्य में मंजूरी दे सकता है

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई। इसे देखते हुए भारत ने रूस से इस प्लेटफॉर्म की अतिरिक्त यूनिट्स की अपील की है। नई दिल्ली ने मॉस्को से एस-400 की और खेप की डिलीवरी की मांग रखी है। इस तरह वायु रक्षा क्षमताओं का विस्तार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से यह संकेत मिला कि रूस निकट भविष्य में इस अपील को मंजूरी दे सकता है। रूस में बना S-400 सिस्टम भारतीय सेना में पहले से ही तैनात है। हाल के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रूस का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम विश्व की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है, जिसे विभिन्न हवाई खतरों जैसे विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिस्टम 600 किमी तक टारगेट को ट्रैक और 400 किमी की रेंज में उन्हें नष्ट कर सकता है। इसका अपडेटेड फेज्ड-ऐरे रडार एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों को ट्रैक करता है। S-400 चार प्रकार की मिसाइलें दाग सकता है, जो विभिन्न दूरी और ऊंचाई पर खतरों का मुकाबला करती हैं। भारत ने 2018 में रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर में 5 S-400 यूनिट्स का सौदा किया, जिनमें से पहली 2021 में पंजाब में तैनात की गई। सीमा सुरक्षा के लिए S-400 सिस्टम कितना अहम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने भारत की वायु रक्षा में बेहद खास भूमिका निभाई। पाकिस्तान की ओर से दागी गई मिसाइलों व ड्रोनों को रोकने और विफल करने में इसकी सटीकता काम आई। एस-400 के चलते पाकिस्तानी जेट विमानों और मिसाइलों को मिशन रद्द करने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसी स्थिति में उसके हमले की योजनाओं को गंभीर झटका लगा। S-400 ने पश्चिमी सीमा से आने वाले हवाई खतरों को त्वरित और प्रभावी ढंग से नष्ट किया, जिससे भारत की रक्षा क्षमता मजबूत हुई। इस शानदार प्रदर्शन ने ही भारत को अतिरिक्त S-400 यूनिट्स के लिए रूस से अपील को प्रेरित किया। एस-400 की तैनाती ने न केवल भारत के रक्षा ढांचे को मजबूती दी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दिया।

अपनी पत्नी को गंभीरावस्था में आईसीयू में छोड़कर वापस सीमा पर लौटे जवान की पत्नी ने ICU में तोड़ा दम

ब्रजराजनगर लखनपुर ब्लॉक के तेंगनामाल गांव का युवा सैनिक देवराज गोंड अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए एक माह की छुट्टी पर आया था, लेकिन पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति उत्पन्न होने के बाद उसे वापस सीमा पर लौटने का आदेश आया। इसके बाद उसे अपनी पत्नी को गंभीरावस्था में आईसीयू में छोड़कर वापस सीमा पर लौटना पड़ा। हालांकि, इस बीच उसकी पत्नी लिपि ने 28 अप्रैल को एक शिशु कन्या को झारसुगुड़ा अस्पताल में जन्म दिया और वह स्वस्थ भी थी, लेकिन बाद में प्रसूता की हालत बिगड़ गई। बुरला के मेडिकल कॉलेज में कराया भर्ती लिपि को बेहतर इलाज के लिए बुरला के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 29 अप्रैल को उसे बुरला अस्पताल में लाया गया था। परिस्थिति गंभीर होने पर उसे आईस यू में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उसका पति सेना का जवान देवराज गोंड भी बुरला में ही था और अपनी नन्ही बच्ची को खूब लाड प्यार करता रहा। 10 मई को मिली सीमा पर लौटने का आदेश तभी पाकिस्तान के साथ तनाव उत्पन्न होने के बाद 10 मई को उसे वापस ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश मिला और वो देश सेवा को सर्वोपरि मानते हुए अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी को आईसीयू में छोड़कर अगले ही दिन (11 मई) रविवार को वापस ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए लौट गया। 12 मई को जवान की पत्नी ने तोड़ा दम अगले ही दिन सोमवार यानी 12 मई की देर रात में लिपि ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा उसे बचाने के सारे प्रयास विफल हो गए। उसकी मौत की खबर सुनकर तथा उसके शव के गांव तेंगनामाल पहुंचने के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि जनप्रतिनिधियों तथा इलाके के लोगों ने उसे श्रद्धांजलि दी। स्थानीय विधायक सह राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, झारसुगुड़ा विधायक टंकधर त्रिपाठी, ब्रजराजनगर की पूर्व विधायक अलका महंती, झारसुगुड़ा की पूर्व विधायक दीपाली दास समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने गहरी संवेदना प्रकट की है। उम्मीद की जा रही है कि आज मंगलवार शाम को उसके पति देवराज गोंड के गांव पहुंचने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet