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छुट्टी कैंसल हुई तो ड्यूटी पर लौट रहा था जवान, हुआ भीषण सड़क हादसा, रास्ते में ही पत्नी की मौत, 3 साल की बेटी भी घायल

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान युद्ध की आशंका के बीच सेना ने सभी अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। इसी क्रम में ड्यूटी पर लौट रहे दिल्ली निवासी मेजर विक्रम गुप्ता की कार का टायर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर फट गया, इस दौरान भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में उनकी पत्नी वैशाली वाजपेई की मोके पर मौत हो गई, जबकि 3 साल की बेटी रिहाना गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसका इलाज अलवर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। हेड कॉन्स्टेबल फकरुद्दीन ने बताया की दिल्ली मुंबई हाइवे पर छूट्टी काटकर ड्यूटी पर लौट रहे मेजर की गाड़ी का टायर फट जाने से उनकी पत्नी की मौत हो गई जबकि बेटी गंभीर रुप से घायल हो गई जिनका इलाज अलवर जिला अस्पताल में चल रहा है। मेजर विक्रम गुप्ता दिल्ली के दिलशाद गार्डन के पास रहते हैं और हाल ही में कोटा में रिश्तेदारी में पत्नी और बेटी के साथ गए हुए थे। इसी दौरान उन्हें सेना मुख्यालय से छुट्टियां रद्द होने की सूचना मिली, जिसके बाद वह परिवार के साथ दिल्ली लौट रहे थे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर नौगांवा थाना क्षेत्र स्थित 82 नंबर पुलिया के पास अचानक कार का टायर फट गया, जिससे कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में कार का गेट खुलने से वैशाली और रिहाना सड़क पर गिर पड़े। राहगीरों की मदद से दोनों को तत्काल अलवर के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने वैशाली को मृत घोषित कर दिया। वहीं रिहाना की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। हादसे के बाद से परिवार और सेना के बीच शोक की लहर है।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर आतंकियों को ढेर करने वाले अग्निवीर मुरली नाइक को अंतिम विदाई, परिवार को मिलेंगे ₹1.65 करोड़!

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान सीमा रेखा (LoC) पर आतंकियों को ढेर करके अग्निवीर मुरली नाइक ने कर्तव्य की राह पर अपने प्राणों की आहुति दे दी. आज जब उनका पार्थिव शरीर गृहनगर गोरंटला मंडल के कल्लिथंडा गांव, आंध्र प्रदेश पहुंचा तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई. देश के लिए मुरली नाइक के सर्वोच्च बलिदान पर नेताओं, अधिकारियों और नागरिकों ने समान रूप से भावभीनी श्रद्धांजलि दी. बचपन से देखा था देश सेवा का सपना अग्निवीर मुरली नाइक, जिनका जन्म 8 अप्रैल 2002 को हुआ, ने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा था. 2022 के दिसंबर में, 20 वर्ष की आयु में, उन्होंने अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को साकार किया. नासिक में 6 महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने असम में 1 साल तक सेवा की और वर्तमान में पंजाब में तैनात थे. आंध्र प्रदेश के शिक्षा और आईटी मंत्री नारा लोकेश ने अग्निवीर मुरली नाइक के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. बेहद भावुक होकर मंत्री ने शहीद जवान के शोकाकुल माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि सरकार इस दुखद समय में उनके साथ खड़ी रहेगी. परिवार से बात करते हुए मंत्री लोकेश ने कहा, “राज्य मुरली नाइक की बहादुरी के सम्मान में नतमस्तक है. राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.”   राज्य के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, मंत्री अनगनी सत्य प्रसाद, वंगालापुडी अनिता और सविता, सांसद बी.के. पार्थसारथी, पूर्व मंत्री पल्ले रघुनाथ रेड्डी और कलावा श्रीनिवासुलु, विधायक पल्ले सिंधुरा रेड्डी, एम.एस. राजू और जे.सी. प्रभाकर रेड्डी समेत कई अन्य जनप्रतिनिधि मुरली नाइक को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. अग्निवीर मुरली नाइक के बलिदान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि उनके परिवार को भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत क्या लाभ मिलेंगे, विशेष रूप से, क्या उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा? क्योंकि उनकी मृत्यु जंग के दौरान ड्यूटी करते हुई है. उनके परिवार को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी? आइए जानते हैं. अग्निपथ योजना क्या है? दरअसल, भारत सरकार की अग्निपथ योजना, जो 2022 में शुरू हुई, सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है. इस योजना के तहत भर्ती होने वाले सैनिकों को ‘अग्निवीर’ कहा जाता है. अग्निपथ योजना भारतीय सेना, नौसेना, और वायुसेना में युवाओं को चार साल के लिए भर्ती करने की एक अनूठी स्कीम है, जिसकी शुरुआत 14 जून 2022 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी. अग्निपथ योजना का उद्देश्य इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को युवा, ऊर्जावान, और तकनीक-प्रवीण बनाना है. इस योजना के तहत 17.5 से 23 वर्ष की आयु के युवा ‘अग्निवीर’ के रूप में भर्ती होते हैं. चार साल की सेवा में 6 महीने का कठिन प्रशिक्षण और 3.5 साल की तैनाती शामिल होती है. चार साल बाद, 25% अग्निवीरों को उनकी योग्यता के आधार पर स्थायी सैनिक के रूप में चुना जाता है, जबकि बाकी को ‘सेवा निधि’ पैकेज और स्किल सर्टिफिकेट के साथ समाज में पुनर्वास के लिए तैयार किया जाता है. क्या मुरली नाइक को शहीद का दर्जा मिलेगा? भारत सरकार की नीति के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा नहीं दिया जाता, क्योंकि यह शब्द सरकारी दस्तावेजों में परिभाषित नहीं है. हालांकि, ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान सम्मान और मुआवजा मिलता है. उदाहरण के लिए, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे हालिया संघर्षों में अग्निवीरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उनकी वीरता को सेना द्वारा सराहा गया. ड्यूटी पर वीरगति को प्राप्त होने वाले अग्निवीर जवान मुरली नाइक के मामले में, उनके परिवार को वित्तीय सहायता और सम्मान मिलेगा, भले ही ‘शहीद’ शब्द का औपचारिक उपयोग न हो. ड्यूटी पर मृत्यु होने पर मुरली नाइक के परिवार को क्या मिलेगा? ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले अग्निवीर के परिवार को निम्नलिखित सहायता मिलेगी: बीमा राशि: 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर. अनुग्रह राशि: 44 लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि. सेवा निधि और कॉर्पस फंड: मृत्यु के समय तक जमा कॉर्पस फंड और सेवा निधि, जिसमें ब्याज शामिल है (लगभग 10-12 लाख रुपये). शेष वेतन: चार साल की सेवा के बचे हुए कार्यकाल का पूरा वेतन (लगभग 13 लाख रुपये). अतिरिक्त सहायता: सशस्त्र बल युद्ध हताहत कोष से 8 लाख रुपये और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से 30,000 रुपये. कुल मिलाकर, परिवार को 1.65 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिल सकती है. अग्निवीर को कितनी सैलरी और भत्ते मिलते हैं? वेतन और भत्ते: पहले साल में मासिक वेतन 30,000 रुपये (21,000 रुपये इन-हैंड, 9,000 रुपये कॉर्पस फंड में) होता है, जो चौथे साल में बढ़कर 40,000 रुपये (28,000 रुपये इन-हैंड, 12,000 रुपये कॉर्पस फंड) हो जाता है. इसके अतिरिक्त, जोखिम, कठिनाई, राशन, और यात्रा भत्ते भी मिलते हैं. सेवा निधि पैकेज: चार साल की सेवा के बाद, 11.71 लाख रुपये का टैक्स-मुक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा, जिसमें सरकार और अग्निवीर का कॉर्पस फंड योगदान शामिल है. जीवन बीमा: 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर हर अग्निवीर को प्रदान किया जाता है. स्किल सर्टिफिकेट: सेवा के दौरान मिले प्रशिक्षण को शिक्षा मंत्रालय स्नातक स्तर के क्रेडिट के रूप में मान्यता देता है, और इग्नू के विशेष डिग्री प्रोग्राम के तहत 50% क्रेडिट मिलता है.  

हापुड़ में एक भावुक करने वाला नजारा देखने को मिला, सेना के जवानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया

हापुड़ उत्तर प्रदेश के हापुड़ से देशप्रेम से ओतप्रोत एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है. यहां सेना के जवानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका सम्मान किया. यहां एक ढाबे पर भोजन करने पहुंचे सैनिक जैसे ही रवाना हुए, वहां मौजूद लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच फूल बरसाए. जवानों ने कहा कि वे बॉर्डर पर जा रहे हैं. इस पूरे दृश्य का वीडियो सामने आया है. लोग इन वीर सपूतों को सलाम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक भावुक करने वाला नजारा देखने को मिला. यहां भारतीय सेना के जवानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया. ये जवान यहां एक ढाबे पर भोजन करके निकले थे, उसी दौरान लोगों ने उन पर फूल बरसाए. जवानों ने बताया कि वे बॉर्डर पर जा रहे हैं. इस दौरान लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए. इस दौरान का वीडियो सोशल भी सामने आया है. देशभक्ति से ओतप्रोत यह वीडियो हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के एक ढाबे का है. यहां कुछ लोग भोजन कर रहे थे, तभी भारतीय सेना के जवानों का एक दल ढाबे पर पहुंचा और सभी ने मिलकर भोजन किया. जवान जैसे ही भोजन कर ढाबे से निकलने लगे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें देख ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने शुरू कर दिए और पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया.   इस भावुक क्षण में न केवल जवानों का मनोबल ऊंचा हुआ, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में गर्व और सम्मान की चमक दिखाई दी. जवानों ने लोगों को बताया कि वे ड्यूटी पर जा रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि आम लोग अपने सैनिकों का सम्मान कर रहे हैं. भारतीय सेना के त्याग और समर्पण को दिल से नमन कर रहे हैं. यह वीडियो वायरल हो रहा है, और लोग इन भावुक कर देने वाले पलों को देख गर्व प्रकट कर रहे हैं.  

यदि भारत के साथ बातचीत होती है, तो कश्मीर, सिंधु जल संधि चर्चा का हिस्सा हो सकते: पाक के रक्षा मंत्री

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले खतरनाक सैन्य तनाव के बाद शनिवार को जब सीजफायर की घोषणा हुई, तब दोनों देशों ने राहत की सांस ली. इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रविवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में भारत के साथ बातचीत होती है, तो कश्मीर, सिंधु जल संधि (IWT) और आतंकवाद जैसे बड़े मुद्दे उस चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं. एक टेलीविज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा, “ये तीन अहम मुद्दे हैं जिन पर चर्चा हो सकती है. हम सीजफायर पर कायम रहेंगे. ” उनका इशारा भारत के साथ लंबे समय से चली आ रही विवादित विषयों की ओर था, जिन पर पहले भी कई बार बातचीत हुई लेकिन कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकला. दोनों देशों के बीच हुआ है सीजफायर यह बयान उस वक्त आया है जब भारत और पाकिस्तान ने जमीन, हवा और समुद्र में सभी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रोकने का “समझौता” किया है. हालांकि पाकिस्तान ने इसे सीजफायर समझौता बताया, वहीं भारत ने इसे केवल “आपसी समझ” करार दिया है.   पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर यह सीजफायर स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होता है, तो इसे सकारात्मक संकेत माना जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी कुछ भी कह पाना जल्दबाज़ी होगी. गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी लॉन्चपैड्स पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे. इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. सहयोगी देशों की तारीफ आसिफ ने उम्मीद जताई कि समय के साथ शांति की संभावनाएं बन सकती हैं. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत और खासकर उसकी नेतृत्वकारी राजनीति एक दिन पूरे दक्षिण एशिया के भविष्य को अपने दलगत हितों से ऊपर रखेगी.” पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने उन देशों की भी तारीफ की, जिन्होंने मौजूदा संकट में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की. इनमें चीन, तुर्किये, अज़रबैजान और खाड़ी देशों का विशेष उल्लेख किया गया. भारत की ओर से अभी तक ख्वाजा आसिफ के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की रणनीतिक सोच में एक नरमी और शांति के लिए तैयार दिखाने की कोशिश हो सकती है, खासकर तब जब देश आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जूझ रहा है.

लॉन्च के बाद अलग हुए नोज और बूस्टर, इससे संकेत मिलता है कि ब्रह्मोस सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को निशाना बनाया

बीकाने विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मोस मिसाइल के ये हिस्से-बूस्टर और नोज़ कैप लॉन्च के तुरंत बाद अलग हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं. इस बार ये टुकड़े भारत के ही क्षेत्र में आकर गिरे, जो यह संकेत देता है कि मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक रवाना हुई. राजस्थान के बीकानेर के नजदीक एक खेत में ब्रह्मोस मिसाइल का बूस्टर और नोज कैप मिलने से सनसनी फैल गई.ग्रामीणों ने बताया कि रात में आसमान में तेज रोशनी के साथ जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद यह मलबा खेत में गिरा.  भारत ने ब्राह्मोस मिसाइल को पाकिस्तान के बहावलपुर में अपने लक्ष्य पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया था. जैसे ही मिसाइल को लॉन्च किया गया तो तुरंत ही इसके बूस्टर और नोज कैप बाहर निकल गए. इससे यह संकेत मिलता है कि ब्रह्मोस बहावलपुर में सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम की भी पोल खुल गई जो इतनी तैयारी और समय होने के बावजूद ब्रह्मोस को रोकने में फिर से विफल रहा.   लॉन्च के बाद अलग हो जाते हैं नोज और बूस्टर गांव के लोगों ने रात को एक तेज़ चमक और ज़ोरदार धमाके की आवाज़ देखी-सुनी थी, जिसके बाद अगली सुबह खेत में यह भारी भरकम धातु का सिलेंडरनुमा ढांचा पाया गया. इसके बाद अगले दिन यहां लोगों की भीड़ जुट गई. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मोस मिसाइल के ये हिस्से-बूस्टर और नोज़ कैप लॉन्च के तुरंत बाद अलग हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं. इस बार ये टुकड़े भारत के ही क्षेत्र में आकर गिरे, जो यह संकेत देता है कि मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक रवाना हुई. इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान ब्राह्मोस जैसे हाई-स्पीड, सटीक हथियारों को इंटरसेप्ट करने में पूरी तरह विफल रहा है, चाहे उसके पास तैयारी का समय हो या न हो.

भारतीय वायुसेना ने दिया बड़ा अपडेट, लक्ष्य हासिल लेकिन अब भी जारी है ऑपरेशन सिंदूर

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की युद्ध जैसी स्थिति के बाद शनिवार को सीजफायर का ऐलान कर दिया गया। वहीं भारतीय वायुसेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है। वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किए हैं। राष्ट्र के हित में यह ऑपरेशन बहुत ही आक्रामक ढंग से चलाया गया। हालांकि यह ऑपरेशन अब भी जारी है। आगे इसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। वायुसेना अफवाहों और अप्राणित जानकारी पर विश्वास करने से बचने की सलाह देती है। गौरतलब है कि इस ऑपरेशन के दौरान वायु सेना के प्लेटफार्म और उसके पायलटो के संबंध में अलग अलग तरह की विवादास्पद जानकारियां साझा की जा रही है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा शीर्ष अधिकारियों के साथ रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक सैन्य कार्रवाई रोकने पर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बनने के एक दिन बाद हुई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और सेना के तीनों अंगों के प्रमुख शामिल हुए। भारत ने पाकिस्तान पर सहमति की शर्तों का उल्लंघन करने का शनिवार रात आरोप लगाया था और उससे इस तरह के उल्लंघन से बचने के लिए उचित कदम उठाने तथा स्थिति से ‘‘गंभीरता और जिम्मेदारी’’ के साथ निपटने का आह्वान किया था। स्थिति अब शांत हो गई है लेकिन कई सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग कई दिनों तक जारी रही गोलाबारी और ड्रोन संबंधी घटनाओं के कारण अब भी आशंकित हैं। बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को मासूम पर्यटकों पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में कम से कम 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद पूरे देश में रोष था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनाओं को पूरी छूट दे दी। इसके बाद सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंकियों के 9 ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।  

मोदी सरकारी की युद्ध नीति की सराहना की है, कांग्रेस के वरिष्ठ पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी कर रहे

नई दिल्ली 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद देशभर में बदले और बड़ी सैन्य कार्रवाई की मांग उठने लगी। भारतीय सैनिकों ने पहले आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया। उसके बाद पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ण युद्ध की जगह संतुलित और रणनीतिक तरीके से जवाब दिया है। इसकी तारीफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी कर रहे हैं। उन्होंने एक लेख के जरिए मोदी सरकारी की युद्ध नीति की सराहना की है। पी चिदंबरम लिखते हैं- प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी 16 सितंबर 2022 को रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, “यह युद्ध का युग नहीं है।” यह वक्तव्य वैश्विक स्तर पर सराहा गया और भारत की छवि को एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में मजबूत किया। इसी सोच के तहत भारत ने इस बार भी संयम बरता। 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने सीमित सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कुल 9 ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। इन हमलों में आतंकवादी संगठनों द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बुनियादी ढांचे को नष्ट किया गया। भारत की इस कार्रवाई में किसी नागरिक या पाकिस्तान की सैन्य संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत युद्ध नहीं, परन्तु न्याय चाहता है। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलीबारी के जरिए जवाब मिला। 8 मई को पाकिस्तान ने मिसाइल, ड्रोन और वायुसेना का इस्तेमाल करते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसका भारत ने फिर से मापी गई और प्रभावी प्रतिक्रिया दी। भारत की कार्रवाई के बावजूद यह मानना भूल होगी कि आतंकी संगठन पूरी तरह खत्म हो गए हैं। इन संगठनों का नेतृत्व अभी भी सक्रिय है और पाकिस्तान में उन्हें लगातार समर्थन मिलता रहा है। जब तक पाकिस्तान की सेना और ISI आतंकवाद को बढ़ावा देते रहेंगे, भारत के लिए खतरा बना रहेगा। इस संघर्ष में कुछ भारतीय नागरिकों की जान गई है और कुछ सैन्य नुकसान भी हुआ है। पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमान गिराने के दावे को उसके ही रक्षा मंत्री बीबीसी इंटरव्यू में प्रमाणित नहीं कर सके, जिससे पाकिस्तान की स्थिति हास्यास्पद हो गई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब तक कश्मीर में तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं। उरी, पुलवामा और अब पहलगाम। हर बार सरकार ने सीमित परंतु निर्णायक जवाब दिया है। इस बार सरकार ने नक्शे और वीडियो जारी कर पारदर्शिता का परिचय भी दिया। दो युवा महिला सैन्य अधिकारियों को मीडिया ब्रीफिंग में शामिल करना इस दिशा में एक सराहनीय कदम था। हालांकि, प्रधानमंत्री की ओर से 24 अप्रैल और 7 मई को हुई सर्वदलीय बैठकों में अनुपस्थित रहना और अभी तक पहलगाम या पीड़ित परिवारों का दौरा न करना आलोचना का कारण बन रहा है। इसकी तुलना मणिपुर संकट के दौरान उनकी अनुपस्थिति से की जा रही है। पाकिस्तान की दुविधा अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है। यदि पाकिस्तान तनाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ा तो उसे वैश्विक निंदा झेलनी पड़ सकती है, विशेषकर OIC जैसे मंचों पर। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर युद्ध चाहिए, तो भारत तैयार है। समझदारी इसी में है कि पाकिस्तान अब इस मामले को यहीं समाप्त करे, आतंकियों पर लगाम लगाए और तनावपूर्ण शांति की ओर बढ़े। लेकिन सवाल यही है कि पाकिस्तान में सत्ता वास्तव में किसके हाथ में है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कमजोर सिविल सरकार या सेना और ISI के हाथों की कठपुतली?  

भारतीय होने के नाते मैं चाहता था कि हमारे सैनिकों को 2 से तीन दिन और मिलने चाहिए थे क्योंकि पाकिस्तान घुटनों पर था

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैनिकों ने पराक्रम दिखाया और पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर दिया। 100 से ज्यादा आतंकियों को मार डाला। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप और ठिकानों को बर्बाद कर दिया। पाकिस्तान के कई एयरबेसों को नुकसान पहुंचाया, चार दिनों तक चले संघर्ष में अचानक अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्वीट करते हैं और बयान देते हैं कि हमारी मध्यस्थता से भारत और पाक सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। कुछ देर बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी। इस पूरे घटनाक्रम पर जम्मू कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा- भारतीय होने के नाते मैं चाहता था कि हमारे सैनिकों को 2 से तीन दिन और मिलने चाहिए थे क्योंकि पाकिस्तान घुटनों पर था। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर कई सुर उठ रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारा जीरो टॉलरेंस जारी है। पाकिस्तान की अगली किसी भी हरकत का कड़े से कड़ा जवाब दिया जाएगा। सीजफायर को लेकर भारत में सवाल भी उठ रहे हैं, कि कोई तीसरा देश कैसे सीजफायर का ऐलान कर सकता है? इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा है कि भारत को सैन्य अभियान के लिए कुछ और समय मिलना चाहिए था। वैद ने कहा, “एक भारतीय होने के नाते, मैं मानता हूं कि हमारी सशस्त्र सेनाओं को पाकिस्तान को पूरी तरह सबक सिखाने के लिए 2-3 दिन और चाहिए थे। पाकिस्तान पहले ही घुटनों पर था।” भारतीय कदम की सराहना हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत की राजनीतिक नेतृत्व के पास कुछ ऐसे तथ्य और कूटनीतिक कारण रहे होंगे जो आम जनता को नहीं बताए गए। उन्होंने कहा, “ऐसे कई तथ्य होते हैं जो नेतृत्व जानता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कुछ विशेष परिस्थितियां होती हैं। सरकार को देशहित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने पड़ते हैं। देश केवल अहंकार से नहीं चलता, बल्कि दूरदृष्टि से चलता है।” कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं” ट्रंप ने सीजफायर के बाद फिर ट्वीट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे का भी जल्द समाधान निकलेगा। इस पर वेद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जहां तक कश्मीर मुद्दे का सवाल है, भारत की राजकीय नीति स्पष्ट है — हम किसी तीसरे पक्ष की दखल को स्वीकार नहीं करते। यह शिमला समझौते के अनुसार दो देशों के बीच का मसला है, जिसे आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाना है।” गौरतलब है कि एसपी वैद का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई विश्लेषक और पूर्व सैन्य अधिकारी यह सवाल उठा रहे हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ अभियान को अचानक क्यों रोका गया? वैद ने संतुलन साधते हुए कहा कि भले ही उन्हें लगता है कि कुछ और कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी वृहद राष्ट्रीय हित को देखते हुए निर्णय लेना है। सिब्बल ने उठाई मांग- विशेष सत्र या सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए कपिल सिब्बल ने एएनआई से बातचीत में कहा, “ट्रंप के इस ट्वीट को लेकर कई सवाल खड़े होंगे… भारत-पाकिस्तान के बीच जो समझ बनी, वो कैसे बनी, क्यों बनी, इसकी कोई जानकारी हमें नहीं दी गई है। इसलिए आज हम कोई आलोचना नहीं करेंगे, लेकिन सरकार से एक सीधी मांग जरूर कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर विशेष संसद सत्र और सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। सिब्बल ने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे तब तक सर्वदलीय बैठक में शामिल न हों, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उस बैठक में मौजूद रहेंगे।  

झूठ के बखान में सामने पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर ने कैमरे के सामने कबूल किया कि पुलवामा आतंकी हमला उसने किया था

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर सहमति तो बन गई है, लेकिन भारत की शर्तों पर। पाकिस्तान अपनी हार छिपाने के लिए बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहा है। पाकिस्तानी सेना ने प्रेस कॉफ्रेंस में जमकर झूठ बोला। हालांकि इस झूठ के बखान में उसके पोल भी खुल गई। पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर ने कैमरे के सामने कबूल किया कि पुलवामा आतंकी हमला उसने किया था। बता दें कि पाकिस्तान हमेशा पुलवामा आतंकी हमले में अपनी भूमिका से इनकार करता आया है। पाकिस्तानी सेना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर उनकी ही सरकार की किरकिरी कर रहा है। 2019 के पुलवामा आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपनी भूमिका स्वीकार की है। पाकिस्तान एयरफोर्स के प्रवक्ता एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने पुलवामा में अपनी टैक्टिकल ब्रिलिएंस से उन्हें समझाने की कोशिश की थी…” यह बयान पाकिस्तान की वर्षों से चली आ रही उस रणनीति को पूरी तरह झुठला देता है, जिसमें वह पुलवामा हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार करता रहा है। औरंगजेब अहमद का यह दिखावटी बहादुरी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के सामने आया, जिसमें उनके साथ DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी और नौसेना प्रवक्ता भी मौजूद थे। पाकिस्तान के झूठ की पोल खुली 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आतंकवादी ने सीआरपीएफ के 40 जवानों को शहीद कर दिया था। भारत ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया। अब एयर वाइस मार्शल औरंगजेब के इस बयान ने न केवल पुलवामा हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान का दोहरा चेहरा औरंगजेब ने कहा, “अगर पाकिस्तान की सीमा, जमीन, जल या लोग खतरे में हों, तो कोई समझौता नहीं होगा। पुलवामा में हमने टैक्टिकल ब्रिलिएंस से संदेश देने की कोशिश की थी, अब हमने रणनीतिक स्तर पर भी क्षमता दिखा दी है।” इस बयान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक पाखंड और दोहरे रवैये को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। बालाकोट एयर स्ट्राइक पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया था। इस ऑपरेशन में 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने जैश के सबसे बड़े ठिकाने को तबाह किया था।  

शांति स्थापित होने के बाद अब वह दोनों देशों के साथ व्यापार और कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए मिलकर काम करेंगे: ट्रंप

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर अपनी राय रखी। ट्रंप ने चार दिन की दुश्मनी के बाद संघर्ष विराम के लिए राजी होने के लिए दोनों देशों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आक्रामकता के कारण लाखों लोगों की जान जा सकती थी। शांति स्थापित होने के बाद अब वह दोनों देशों के साथ व्यापार और कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए मिलकर काम करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में घोषणा की थी कि अमेरिकी की मध्यस्थता के बाद दोनों ही देश आपस में सीजफायर करने के लिए तैयार हुए हैं। हालांकि, भारत ने इस मामले पर कहा कि पाकिस्तान के साथ सीधी बातचीत के जरिए संघर्ष विराम पर सहमति बनी है, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमेरिका की मध्यस्थता की बात कही। रविवार की सुबह ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर इस मामले पर बयान दिया। उन्होंने लिखा, “मुझे भारत और पाकिस्तान के मजबूत और अडिग नेतृत्व पर बहुत गर्व है, क्योंकि उनके पास यह जानने और समझने की शक्ति और बुद्धि है कि वर्तमान आक्रामकता को रोकने का वक्त आ गया है। अगर यह संघर्ष चलता रहता तो यह कई लोगों की मौत और विनाश का कारण बन सकता था। इसकी वजह से लाखों अच्छे और निर्दोष लोग मारे जा सकते थे। मुझे गर्व है कि अमेरिका आपको इस ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण निर्णय तक पहुंचने में मदद कर पाया। मैं इन दोनों महान देशों के व्यापार में काफी वृद्धि करने जा रहा हूं।” कश्मीर का हल निकाल सकते हैं: ट्रंप कश्मीर के मुद्दे पर दोनों देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने लिखा, ” मैं आप दोनों के साथ मिलकर कश्मीर के मुद्दे पर भी बात करने के लिए तैयार हूं। हम मिलकर यह देख सकते हैं कि क्या ‘हजार साल’ बाद भी कश्मीर के संबंध में कोई समाधान निकाला जा सकता है। भगवान, भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को अच्छी तरह से काम करने के लिए आशीर्वाद दें।”” भारत-पाकिस्तान समझौता पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच में शुरू हुई लड़ाई को दोनों देशों ने शनिवार को रोकने पर सहमति जताई। भारत की तरफ से बताया गया कि दोनों देशों के बीच में अधिकारी लेवल की बातचीत हुई और फिर दोनों ने इस पर सहमति जताई। हालांकि कुछ ही घंटों बाद, पाकिस्तान ने ड्रोन से भारतीय शहरों के ऊपर हमला करके समझौता तोड़ दिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारतीय सेनाएं पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे सीजफायर उल्लंघन पर उचित कदम उठा रही है। इससे पहले भारत की तरफ से यह साफ किया गया कि दोनों देशों के बीच में हुआ युद्ध विराम में किसी भी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। हालांकि ट्रंप ने भारत की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने से पहले ही सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा कर दी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भी ट्रंप के नैरेटिव को आगे बढ़ाते हुए अपने पोस्ट में ट्रंप को धन्यवाद दिया। आपको बता दें कि कश्मीर के मुद्दे पर शिमला समझौते के बाद से ही भारत की स्थिति पूरी तरह से साफ है। भारत इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता है।  

ऑपरेशन सिंदूर से बेदम पाकिस्तान, भारत ने पहली बार किया ब्रह्मोस का इस्तेमाल

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान के कई प्रमुख सैन्य अड्डों पर सटीक और योजनाबद्ध तरीके से हमले किए। इन हमलों में अत्याधुनिक मिसाइलों और आधुनिक गाइडेड हथियारों का उपयोग किया गया, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, SCALP एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल और HAMMER गाइडेड म्यूनिशन जैसे हथियार शामिल बताए जा रहे हैं। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों से लॉन्च किए गए ये हथियार पाकिस्तानी वायुसेना के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों जैसे कि रफीकी (झंग), मुरिद (चक्कवाल), नूर खान (चकलाला, रावलपिंडी), रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनीयां (कसूर) को निशाना बनाया गया। स्कर्दू, भोलारी, जैकबाबाद और सरगोधा के एयरबेस को भी गंभीर क्षति पहुंची है। वहीं, पस्रूर और सियालकोट में रडार ठिकानों को भी सटीक हथियारों से ध्वस्त किया गया। ब्रह्मोस मिसाइल का पहला युद्ध उपयोग भारत की ओर से ब्रह्मोस मिसाइल के उपयोग की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि यह इस क्रूज मिसाइल की पहली युद्ध उपयोगिता हो सकती है। यह मिसाइल भारतीय वायुसेना और नौसेना के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक मानी जाती है। भारतीय सेना ने केवल सैन्य और तकनीकी ठिकानों को ही निशाना बनाया जैसे कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रडार स्टेशन, यूएवी बेस और हथियार भंडार स्थल। मुरिद एयरबेस पाकिस्तानी ड्रोन और यूएवी गतिविधियों का मुख्य केंद्र है, वहीं रफीकी बेस में उन्नत फाइटर स्क्वॉड्रन तैनात हैं। चकलाला स्थित नूर खान बेस में पाकिस्तानी वायुसेना की भारी परिवहन क्षमता और ईंधन भरने वाले विमानों की तैनाती है। पाकिस्तान की घुसपैठ की कोशिश नाकाम भारतीय सेना ने बताया कि पाकिस्तान ने श्रीनगर से लेकर नलिया तक 26 से अधिक स्थानों पर हवाई घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारतीय वायुसेना ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि “हमने सभी घुसपैठ प्रयासों को निष्क्रिय किया। हालांकि उधमपुर, पठानकोट, आदमपुर और भुज में कुछ उपकरणों और जवानों को सीमित क्षति पहुंची है।” कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि “पाकिस्तान ने श्रीनगर, अवंतीपुर और उधमपुर एयरबेस पर मौजूद स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल परिसर को भी निशाना बनाया, जो स्पष्ट रूप से नागरिक ढांचे पर हमला है।”  

पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर आतंकियों की बात ज्यादा सुनते हैं, काबू में नहीं आसिम मुनीर की सेना?

नई दिल्ली सीजफायर के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान की सेना ने फिर एक बार युद्धविराम का उल्लंघन कर दिया। इसको लेकर जब भारत ने सख्त रुख अपनाया तो शहबाज शरीफ की सरकार ने अपनी सफाई पेश की है। लातों के भूत बातों से नहीं मानते। यह कहावत पाकिस्तान के लिए सही साबित होती है। 10 मई को युद्धविराम की घोषणा के किछ घंटे बाद ही पाकिस्तानी सेना ने गुजरात, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान की सीमा के पास फायरिंग शुरू कर दी। इसे अलावा श्रीनगर में सेना के मुख्यालय के पास ड्रोन की गतिविधियां भी देखी गईं। दरअसल पाकिस्तान की सेना शहबाज शरीफ सरकार के समझौते को मानने को तैयार ही नहीं होती है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर आतंकियों की बात ज्यादा सुनते हैं। ऐसे में वह तनाव कम करने के पक्ष में ही नहीं हैं। वहीं पाकिस्तान की सरकार ने बयान जारी कर सफाई पेश की है। पाकिस्तान की सरकार ने अपने ही सैनिकों के आगे संयम बरतने की मिन्नतें भी की हैं। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि पाकिस्तान की तरफ से एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है। ऐसे में भारत को भी मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा। इसके बाद पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि पाकिस्तान भारत के साथ वफादारी के साथ सीजफायर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उसने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ जगहों पर भारत की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सही तरीके से बातचीत के माध्यम से सीजफायर को लागू करने की जरूरत है। साथ ही पाकिस्तान की सरकार ने अपने सैनिकों से अपील की है कि वे संयम बरतें। चीन ने भी की एनएसए डोभाल से बात चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से बात की और उम्मीद जताई कि भारत एवं पाकिस्तान टकराव की इस स्थिति का बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे और स्थायी युद्धविराम की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिंहुआ’ के मुताबिक बातचीत के दौरान डोभाल ने वांग से कहा कि युद्ध का विकल्प भारत ने नहीं चुना लेकिन पहलगाम हमले के बाद उसे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत थी। वांग ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की निंदा की। इस हमले में पाकिस्तान का हाथ है। इस हमले के बाद से ही भारत तथा पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। ‘शिंहुआ’ की खबर के अनुसार, वांग ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार से भी बात की। पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा मंगलवार देर रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी।  

भारत से की मेजर गौरव आर्या की शिकायत, विदेश मंत्री को ‘सूअर की औलाद’ बताने से नाराज ईरान

ईरान पूर्व सेना अधिकारी मेजर गौरव आर्या द्वारा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी से भारत और ईरान के बीच एक छोटी लेकिन तीव्र राजनयिक खलबली मच गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में आर्या ने अराकची को “सूअर की औलाद” कहा। इसके बाद ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। मेजर आर्या ने यह टिप्पणी उस समय की जब वे अराकची द्वारा भारत से पहले पाकिस्तान की यात्रा करने पर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। अराकची का यह दौरा भारत-पाकिस्तान के बीच अप्रैल 22 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद उपजे तनाव को कथित तौर पर कम करने के इरादे से किया गया था। वीडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, “ईरानी संस्कृति में मेहमानों के प्रति सम्मान एक पुरानी परंपरा है। हम ईरानी अपने मेहमानों को ‘ईश्वर का प्रिय’ मानते हैं। आपके यहां मेहमानों के लिए क्या सोच है?” इस घटनाक्रम के बाद भारत सरकार ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा, “वीडियो में दिख रहे व्यक्ति एक भारतीय नागरिक है। उनके विचार भारत सरकार की आधिकारिक राय नहीं है। भारत सरकार इस तरह की असभ्य भाषा को अनुचित मानती है।” आपको बता दें कि मेजर गौरव आर्या भारतीय मीडिया में एक जानी-मानी हस्ती हैं। उनके एक्स अकाउंट पर 20 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भी उन्हें फॉलो करते हैं। उनका यूट्यूब शो “चाणक्य डायलॉग” के पास 40 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निवास पर एक बड़ी बैठक हो रही है, इसमें एनएसए, रक्षा मंत्री समेत बड़े अधिकारी शामिल

नई दिल्ली पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकता, सीजफायर की घोषणा के तीन घंटे के बाद ही उसने फिर फायरिंग शुरू कर इसका सबूत दे दिया। जवाब में भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी सेना को फिर मुंह की खानी पड़ी। इसके बाद सीमा पर शांति हुई। इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निवास पर एक बड़ी बैठक हो रही है। इसमें एनएसए, रक्षा मंत्री समेत बड़े अधिकारी शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद भी पाकिस्तानी सैनिक लगातार फायरिंग कर रहे थे। इतना ही नहीं पाकिस्तान की ओर से लगातार ड्रोन भी भेजे गए, भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान को जब करारा जवाब दिया तो सीमा पार चुप्पी छा गई। देर रात सीमा से लगे इलाकों में स्थिति सामान्य हो गई। वहीं कहीं से भी ड्रोन या फायरिंग की कोई घटना सामने नहीं आई है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में भी स्थित अब सामान्य है। सेना अलर्ट पर अपनी आदत से मजबूर पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारतीय सेना अब भी सतर्क है। इधर अमृतसर में कलेक्टर ने अब भी रेड अलर्ट जारी किया हुआ है। रहवासियों से रात में घर से बाहर नहीं आने को कहा गया है। इसके साथ ही घर में भी खिड़की-दरवाजों से दूर रहने के लिए कहा गया है। सीजफायर हुआ पर गाइडलाइंस अभी लागू है इधर दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि सीजफायर हो गया है, लेकिन सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइंस अभी लागू हैं। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षा जांच के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है किसी भी जानकारी के लिए वे केवल आधिकारिक साइट्स ही देखें।

4 दिनों तक चले ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान में भारी तबाही, भारत का पलड़ा भारी, दिए गहरे झटके

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले तेज सैन्य टकराव के बाद हुए युद्धविराम ने फिलहाल दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों को एक व्यापक युद्ध की कगार से पीछे खींच लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा 7 मई को आतंकियों के खिलाफ शुरू किए गए जवाबी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमानों और आर्टिलरी के जरिये बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई हुई। हालांकि एलओसी पर पाकिस्तान द्वारा युद्धविराम उल्लंघन की खबरें आ रही हैं, लेकिन कागजी तौर पर यह समझौता तनाव को थामने में सफल रहा है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की आतंकवादी संरचनाओं, वायुसेना ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को गहरे झटके दिए हैं। वहीं पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई को भारतीय सेना ने बड़ी हद तक निष्फल कर दिया। पाकिस्तान को भारी नुकसान ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को तड़के हुई थी। भारत ने 26 मिनट के भीतर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाकर लगभग 100 आतंकियों को मार गिराया। ये शिविर खुफिया सूचनाओं के आधार पर चुने गए थे, जो कई वर्षों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में सक्रिय थे। इनमें से 5 ठिकाने एलओसी से 9 से 30 किलोमीटर भीतर PoK में थे, जबकि बाकी 6 से 100 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के भीतर स्थित थे। हमलों में राफेल लड़ाकू विमानों से लॉन्च किए गए स्कैल्प क्रूज मिसाइल, हैमर स्मार्ट हथियार, M777 हॉवित्जर से दागे गए एक्सकैलिबर गोला और कामिकाजे ड्रोन (लोइटरिंग म्यूनिशन) शामिल थे। पाकिस्तान के एयर डिफेंस को भारी क्षति पाकिस्तान ने जवाब में उत्तर और पश्चिम भारत के 15 शहरों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। इसके बाद भारत ने लाहौर और कराची समेत कई स्थानों पर पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणालियों को तबाह कर दिया। भारतीय सेना ने इन हमलों के दौरान S-400, आकाश और बराक-8 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के अलावा अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक का उपयोग किया। रडार और कमांड सेंटर की नेटवर्क प्रणाली से खतरों की पहचान कर त्वरित प्रतिक्रिया दी गई। 10 मई की रात सबसे भीषण हमला सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान को 10 मई की रात झेलना पड़ा जब भारतीय वायुसेना ने रफीकी, मुरिद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर, चूनियां, पसरूर और सियालकोट में आठ सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ये हमले रातभर चले और इनमें पाकिस्तान की रडार इकाइयों, गोला-बारूद भंडार, कमांड सेंटर्स और तकनीकी संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। पाक सेना की जवाबी कोशिशें बेकार 8-9 मई की रात पाकिस्तान ने 300-400 तुर्की निर्मित ‘सोंगर’ सशस्त्र ड्रोन से भारत के 36 स्थानों पर हमला करने की कोशिश की, जिसमें लद्दाख से लेकर गुजरात के सिर क्रीक तक के ठिकाने शामिल थे। लेकिन अधिकतर ड्रोन भारतीय सेना द्वारा मार गिराए गए। इसके बाद अगले दिन पाकिस्तान ने 26 और ठिकानों पर ड्रोन हमले किए, जिन्हें भारत ने अपने एयर डिफेंस से निष्फल किया। पाक की सैन्य क्षमता को करारा झटका भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा, “स्कर्दू, सर्गोधा, जैकोबाबाद और भोलेरी जैसे महत्वपूर्ण एयरबेसों को भारी नुकसान पहुंचा है। रडार और वायु रक्षा हथियारों की क्षति से पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि एलओसी के पार भी सैन्य ढांचे, लॉजिस्टिक्स और नियंत्रण केंद्रों को सटीक तरीके से निशाना बनाया गया, जिससे पाकिस्तान की न तो रक्षा और न ही आक्रामक क्षमताएं प्रभावी रह गईं।  

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