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3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ की यात्रा, श्रद्धालुओं को ऐसे कराना होगा पंजीयन

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगी। इस बार 5 से 8 चरणों में जत्था जाएगा। इसके लिए पंजीयन की 14 अप्रैल से शुरू हो गई है, जो 31 मई तक चलेगी। पंजीयन हर दिन सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बैंकों में की जा रही है। बैंकों को प्रतिदिन 19 सीट के कोटे के हिसाब से रजिस्ट्रेशन स्लॉट दिया गया है। वहीं पंजीयन कराने वालों की संख्या तीन गुना पहुंच रही है। प्रत्येक सदस्य का रजिस्ट्रेशन शुल्क 150 रुपए है। इस बार 38 दिन की है यात्रा इस बार यात्रा की अवधि 38 दिन की है। दुर्ग-भिलाई से प्रतिवर्ष 5 हजार से ज्यादा भक्त अमरनाथ यात्रा के लिए जाते हैं। इस बार भी उनमें खासा उत्साह है, लेकिन पंजीयन के लिए बैंक की सुविधा दुर्ग-भिलाई में नहीं होने से उनमें निराशा है। इस बार रायपुर में तीन और राजनांदगांव में एक बैंक अधिकृत किया गया है। रायपुर के तीन बैंकों में पीएनबी कटोरा तालाब, जम्मू एंड कश्मीर बैंक जीई रोड, एसबीआई जय स्तंभ चौक शामिल है। राजनांदगांव में पीएनबी का रामदीन मार्ग शामिल है। वेबसाइट से करते हैं आवेदन फार्म डाउनलोड, 31 मई तक रजिस्ट्रेशन नियमित रूप से अमरनाथ यात्रा करने वाले ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने बताया कि वेबसाइट से फार्म डाउनलोड किया जाता है। उसमें मापदंड के अनुसार मेडिकल टेस्ट भी कराना होगा। इसके बाद आधार कार्ड की कॉपी लेकर फॉर्म जमा कराने बैंक जाना होगा है। यहां पर बायोमैट्रिक फिंगर से रजिस्ट्रेशन हो रहा है। अमरनाथ शाइन बोर्ड ने ग्रुप रजिस्ट्रेशन भी शुरू किए हैं, जो कि 31 मई तक होंगे। समूह में प्रति व्यक्ति रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपए है। ग्रुप में रजिस्ट्रेशन में 5 से 30 व्यक्तियों का समूह हो सकता है। अमरनाथ में पहलगांव और बालटाल में आवास, भोजन की निःशुल्क व्यवस्था है। अमरनाथ यात्रा के लिए दुर्ग से पहला जत्था 30 जून और 1 जुलाई को निकलेगा। क्या है रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस? इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से 9 अगस्त 2025 तक चलेगी. यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 14 अप्रैल 2025 से शुरू हो चुके हैं. तीर्थयात्री श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑफलाइन और ऑनलाइल रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के पूरे भारत में 540 से ज्यादा बैंक ब्रांच हैं जहां से आप रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाइए और वहां ‘ऑनलाइन सर्विसेज’ पर क्लिक करें. उसके बाद ड्रॉपडाउन मेन्यू में ‘यात्रा पर्मिट रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करें. सभी दिशा-निर्देशों का ध्यान से पढ़ें, शर्तों से सहमत रहें और रजिस्ट्रेशन के लिए आगे बढ़ें. अपनी निजी जानकारी जैसे नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और अपनी यात्रा की तारीख लिखें. अपनी एक पासपोर्ट साइज फोटो और हेल्थ सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी अपलोड करें. उसके बाद, आपके रजिस्टर्ड नंबर पर आए ओटीपी को बताकर अपना मोबाइल वेरिफाई करवाएं. फिर, 220 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस भरें. पेमेंट हो जाने के बाद आप पोर्टल से अपना यात्रा रजिस्ट्रेशन पर्मिट डाउनलोड कर सकते हैं. ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस अगर तीर्थयात्री ऑफलाइन रजिस्टर करना चाहते हैं तो वो रजिस्ट्रेशन सेंटर या फिर बैंक ब्रांच पर जा सकते हैं. आमतौर पर यात्रा के चुने गए दिन से तीन दिन पहले वैष्णवी धाम, पंचायत भवन और महाजन हॉल जैसे स्थानों पर टोकन पर्चियां बांटी जाती हैं. तीर्थयात्री अगले दिन ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन और मेडिकल जांच के लिए सरस्वती धाम जाएं. तीर्थयात्रियों को जम्मू में विशिष्ट स्थानों से अपने आरएफआईडी कार्ड लेने होंगे. बाबा बर्फानी का महत्व बाबा बर्फानी की महिमा अपरंपार है. बाबा बर्फानी को अमरनाथ और अमरेश्वर भी कहा जाता है. अमरनाथ जी के शरणागत साधकों को शिव लोक में स्थान मिलता है. साथ ही पृथ्वी लोक पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है. हर साल बड़ी संख्या में लाखों श्रद्धालु देश और विदेश से मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन हेतु अमरनाथ यात्रा करते हैं. बाबा बर्फानी, जो अमरनाथ गुफा में विराजमान हैं, एक प्रमुख धार्मिक स्थल हैं. हिंदू धर्म में इसे विशेष महत्व दिया जाता है और एक पवित्र यात्रा माना जाता है. अमरनाथ गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो बर्फ से बनता है और चंद्रमा के चरणों के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है. पौराणिक मान्यतानुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता की कथा इसी गुफा में सुनाई थी, जिससे यह गुफा और भी पवित्र हो गई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बर्फानी के दर्शन करने और अमरनाथ यात्रा करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करके अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की आशा रखते हैं. सनातन शास्त्रों में कहा गया है कि अमरनाथ यात्रा करने से अश्वमेघ यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है. यह भी कहा जाता है कि अमरनाथ की यात्रा करने से व्यक्ति को 23 तीर्थों के दर्शन करने जितना पुण्य प्राप्त होता है.

चीन ने बनाया खतरनाक बम, एल्यूमीनियम भी पिघला दे! क्या चीन के विस्फोटक से घबरा जाएगा अमेरिका?

बीजिंग अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर तनाव चल रहा है. दोनों एक-दूसरे को युद्ध की धमकी भी दे चुके हैं. दोनों देशों का झगड़ा सामान्य तू-तू मैं-मैं से आगे जा चुका है. इसी बीच चीन ने एक नॉन न्यूक्लियर हाइड्रोजन बम तैयार कर लिया है. इसे नॉन न्यूक्लियर बम इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि इसे बनाने के लिए परमाणु मटेरियल का इस्तेमाल नहीं हुआ है. ये खबर सामने आते ही अमेरिका की टेंशन बढ़ना लाजमी है. चीन ने इसका सफलतापूर्वक टेस्ट भी कर लिया चीन ने इस नॉन-न्यूक्लियर हाइड्रोजन बम का सफलतापूर्वक टेस्ट भी कर लिया है. 2 किलो के वजन वाले इस बम ने 1000 डिग्री सेल्सियस की गर्मी वाला आग का गोला बनाया था. ये आग का गोला महज 2 सेकेंड के लिए ही रहा. हालांकि, ये TNT विस्फोटक के मुकाबले काफी ज्यादा गर्म था और इसके कायम रहने का टाइम भी अधिक रहा. TNT का ब्लास्ट तो सिर्फ 0.12 सेकंड में ही सिमट जाता है. ऐसे काम करता है ये हाइड्रोजन बम इस हाइड्रोजन बम को चीन स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन-CSSC के 705 रिसर्च इंस्टीट्यूट शोधकर्ताओं ने मिलकर बनाया है. ये बम मैग्नीशियम हाइड्राइड नाम के केमिकल से बना है, ये दिखने में चांदी जैसा नजर आता है. इसे बनाने वाली टीम में शामिल रहे वैज्ञानिक वांग जुएफेंग ने बताया कि जब मैग्नीशियम हाइड्राइड को विस्फोटक से एक्टिव किया जाता है, तो यह टूटता है और इससे हाइड्रोजन गैस निकलने लगती है. ये तेजी से जलने लगती है और तेज गति के साथ काफी दूर तक फैल जाती है. ये बम बड़े इलाके में तबाही मचा सकता है. क्या है इस बम की खासियत? शोधकर्ताओं ने चीनी भाषा के जर्नल ऑफ प्रोजेक्टाइल्स, रॉकेट्स, मिसाइल्स एंड गाइडेंस में कहा कि ये सक्रिय किए जाने पर मैग्नीशियम हाइड्राइड तेजी से थर्मल अपघटन से गुजरता है, जिससे हाइड्रोजन गैस निकलती है जो लगातार आग में बदल जाती है. सीएसएससी रिसर्च साइंटिस्ट वांग ज़ुएफेंग के नेतृत्व वाली टीम ने कहा, “हाइड्रोजन गैस के विस्फोट नई प्रज्वलन ऊर्जा के साथ प्रज्वलित होते हैं, इनका विस्फोट क्षेत्र व्यापक होता है. साथ ही इनकी लपटें तेजी से बाहर की ओर फैलती हैं. ये कॉम्बिनेशन विस्फोट की तीव्रता सटीक कंट्रोल रखता है, जिससे एक बड़े इलाके में टारगेट का आसानी से विनाश किया जा सकता है.” एल्युमिनियम को पिघलाने की क्षमता रखता है ये बम ये हाइड्रोजन बम लंबे समय तक थर्मल डैमेज कर सकता है क्योंकि इससे बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है. इससे पैदा सफेद गर्म आग का गोला एल्युमिनियम तक को पिघलाने की क्षमता रखता है. ये टीएनटी ब्लास्ट से भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि टीएनटी का आग का गोला 0.12 सेकेंड तक रहता है तो ये हाइड्रोजन बम 2 सेकेंड तक आग का गोला बना रहा. वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका इस्तेमाल बड़े इलाकों में गर्मी पैदा करने या फिर खास तरह के टारगेट को तबाह करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि चीन की सेना किन परिस्थितियों में इस हथियार की तैनाती कर सकती है. एल्यूमीनियम भी पिघल जाता है ऐसा दावा है कि इस बम से जो आग का गोला बना, वह इतना गर्म था कि उससे एल्यूमीनियम भी पिघल जाता है. हालांकि, तकनीक की मदद से विस्फोट की स्पीड को कंट्रोल किया जा सकता है. आधुनिक दौर की जंग में ये बम बेहद कारगर साबित हो सकता है. नॉन-न्यूक्लियर हाइड्रोजन बम की विशेषताएं विस्फोटक शक्ति: यह बम 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाला आग का गोला बनाता है, जो सामान्य TNT विस्फोट की तुलना में 15 गुना अधिक समय तक रहता है. छोटा आकार: इस बम का वजन केवल 2 kg है, जो इसे छोटे आकार में भी जबरदस्त शक्ति प्रदान करता है. स्वच्छ ऊर्जा: यह बम रेडियोधर्मी कचरा नहीं छोड़ता है, जो इसे पारंपरिक न्यूक्लियर बम से अलग बनाता है. वैश्विक सैन्य संतुलन पर प्रभाव नई सैन्य रणनीतियां: यह बम युद्ध की तकनीक में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है, जो पारंपरिक न्यूक्लियर हथियारों पर आधारित रणनीतियों को बदल सकता है. वैश्विक सुरक्षा: इस बम के उपयोग से वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, खासकर अगर यह तकनीक अन्य देशों या संगठनों के हाथ लगती है. चीन के नए हथियार के मायने चीन अपने नए हाइड्रोजन बम के जरिए कई निशाने साधने की कोशिश में है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन नहीं करना. दुश्मन पर बड़ा हमला करने के लिए विकल्प बढ़ाना शामिल है. चीन के फायदे रणनीतिक बढ़त: बिना परमाणु टैग के भी यह हथियार चीन को युद्धक्षेत्र में बढ़त दिलाएगा. प्रतिरोधक क्षमता: यह हथियार दुश्मन देशों के लिए एक नया खतरा होगा, जिसके लिए वे तैयार नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय संधियों से बचाव: चीन अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ा सकता है बिना अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन किए. भारत के लिए खतरा – भारत-चीन सीमा पर पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति है. – चीन इस हथियार का उपयोग सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित हमले के लिए कर सकता है. – भारत को अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ाने और नई रणनीतियों को विकसित करने की आवश्यकता है. भारत-चीन सैन्य तुलना चीन ने अपनी सेना को एआई, ड्रोन स्वार्म, हाइपरसोनिक मिसाइल और नॉन-न्यूक्लियर रणनीतिक हथियारों से लैस करना शुरू कर दिया है. भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं की तुलना चीन से करनी चाहिए. अपनी ताकत बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए.

निशिकांत दुबे के बयान पर बढा विवाद, SC बोला आपको हमारी अनुमति की नहीं, आपको अटॉर्नी जनरल से मंजूरी लेनी होगी

नई दिल्ली बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट पर दिए बयान से बवाल मचा है. सोमवार को दुबे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान वकील ने कहा, इस कोर्ट के बारे में और CJI के खिलाफ बयान दिए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष निशिकांत दुबे के बयानों का भी उल्लेख किया गया. इस पर जस्टिस बीआर गवई ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं? इस पर वकील ने कहा, मैं अवमानना ​​का केस दर्ज करवाना चाहता हूं. जस्टिस गवई ने दोटूक जवाब दिया और कहा, तो आप इसे दाखिल कीजिए. आपको हमारी अनुमति की जरूरत नहीं है. आपको अटॉर्नी जनरल से मंजूरी लेनी होगी. इससे पहले अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा की तरफ से CJI और सुप्रीम कोर्ट के जजों को पत्र लिखा गया था. इस याचिका में निशिकांत के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई थी. पत्र में कहा गया था कि दुबे द्वारा देश के सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिए गए सार्वजनिक बयान अपमानजनक और भड़काऊ हैं. ये बयान झूठे, लापरवाह और दुर्भावनापूर्ण हैं, और ये आपराधिक अवमानना ​​के बराबर हैं. ये बयान न्यायपालिका को डराने, सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़काने और संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को बदनाम करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है. दुबे ने शीर्ष अदालत को निशाना बनाते हुए कहा था कि यदि सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है तो संसद एवं विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना पर निशाना साधते हुए उन्हें देश में ‘सिविल वॉर’ के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि बीजेपी ने दुबे के बयान से खुद को अलग कर लिया। लेकिन कानून के जानकार इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तौर देख रहे हैं। बहरहाल, इस मामले में सुप्रीम का रुख चाहे जो भी हो, लेकिन शीर्ष कोर्ट के अवमानना के मामले पहले भी सामने आए हैं जिसमें कोर्ट ने एक्शन लिया। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के पांच हाई प्रोफाइल मामले कौन से हैं? 1. बाबा रामदेव मामला (2024) बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद ने एलोपैथी और आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ कई विवादित विज्ञापन दिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विज्ञापन और बयान रोकने का आदेश दिया। रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और निगेटिव विज्ञापन देना जारी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी किया। रामदेव और बालकृष्ण ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगने का हलफनामा दाखिल किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। 2. प्रशांत भूषण मामला (2020) सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और सोशल एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने जुलाई 2020 में ट्विटर पर दो ट्वीट किए। एक में उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बिना हेलमेट और मास्क के हार्ले डेविडसन बाइक पर बैठे हुए दिखाया और लिखा कि जब देश में लॉकडाउन था, तब CJI छुट्टी पर हैं। दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि पिछले 6 वर्षों में भारत की शीर्ष कोर्ट ने लोकतंत्र को कमजोर करने में भूमिका निभाई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और प्रशांत भूषण के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्यवाही शुरू की। प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि यह उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को दोषी पाया और ₹1 जुर्माना लगाया। प्रशांत भूषण ने बाद में जुर्माना भर दिया। 3. विजय माल्या मामला (2017) विजय माल्या किंगफिशर एयरलाइंस और कई बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज़ विवाद के बाद भारत से भाग गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि माल्या किसी भी तरह की संपत्ति का हस्तांतरण नहीं करेंगे। इसके बावजूद, माल्या ने अपने बच्चों के बैंक अकाउंट में 40 मिलियन डॉलर ट्रांसफर कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को जानबूझकर आदेश की अवहेलना करने का दोषी माना। कोर्ट ने माल्या को अवमानना का अपराधी करार दिया था। 4. जस्टिस सी. एस. कर्णन मामला (2017) कलकत्ता हाई कोर्ट के तत्कालीन जज सी.एस. कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते हुए सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाए और अदालत के समन को नज़रअंदाज़ किया। सुप्रीम कोर्ट ने सात सीनियर जजों की बेंच गठित कर कर्णन के खिलाफ अवमानना की सुनवाई की। कर्णन लगातार कोर्ट में पेश नहीं हुए और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयान देते रहे। सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने जेल की सजासुनाई। 5. अरुंधति रॉय मामला (2002) प्रसिद्ध लेखिका और सोशल एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के समर्थन में बयान देते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें नर्मदा डैम परियोजना को हरी झंडी दी गई थी। उन्होंने एक लेख और प्रेस वक्तव्य में कहा कि कोर्ट ने गरीबों के अधिकारों की अनदेखी की है। सुप्रीम कोर्ट ने अरुंधति रॉय के बयान को ‘न्यायपालिका की अवमानना’ माना और उन्हें तलब किया। रॉय ने अपने बयान पर खेद नहीं जताया और अपने विचारों को सही बताया। कोर्ट ने अरुंधति रॉय को एक दिन जेल और ₹2000 जुर्माना की सजा दी। पत्र में CJI से बयानों का स्वतः संज्ञान लेने और आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया था.

आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन बोले- विकसित राष्ट्र के लिए भारत को हर साल 80 लाख Jobs पैदा करने की जरूरत

नई दिल्ली भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले 10-12 वर्षों तक प्रति वर्ष कम से कम 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। नागेश्वरन ने  यहां कहा, “हमारा दृष्टिकोण 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करना है। भारत के आकार के अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगले 10-20 वर्षों तक बाहरी वातावरण उतना अनुकूल नहीं रहने वाला है, जितना 1990 के बाद पिछले 30 वर्षों में रहा होगा।” उन्होंने कहा, “लेकिन इस संदर्भ में यह तो तय है कि आप एक सीमा से आगे अपना बाह्य वातावरण नहीं चुन सकते – हमें कम से कम अगले 10 से 12 वर्षों तक प्रति वर्ष 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी और जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा बढ़ाना होगा। हमें यह देखना होगा कि चीन ने विनिर्माण में, खासकर कोविड महामारी के बाद जबरदस्त प्रभुत्व हासिल कर लिया है।” नागेश्वरन कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स’ में भारतीय आर्थिक नीतियों पर ‘दीपक और नीरा राज केंद्र’ द्वारा आयोजित ‘कोलंबिया भारत शिखर सम्मेलन-2025’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी और रोबोटिक्स ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना आज के कुछ विकसित देशों को अपनी वृद्धि यात्रा में नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “…लेकिन भारत को अपने आकार के हिसाब से इस विशाल, जटिल चुनौती से निपटना होगा और इसका कोई आसान जवाब नहीं है। अगर आप उन नौकरियों की संख्या देखें जिन्हें हमें बनाने की ज़रूरत है, तो यह हर साल लगभग 80 लाख नौकरियां हैं। …और शुरुआती स्तर की नौकरियों को खत्म करने में एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है, या कम आईटी-सक्षम सेवाओं वाली नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।”  

फिर विदेशी जमीन से देश के आतंरिक मुद्दों पर बोले राहुल, भड़की भाजपा

 नई दिल्ली अमेरिका के बोस्टन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान और नेशनल हेराल्ड मामले में उनके शामिल होने को लेकर भाजपा हमलावर है। दरअसल, राहुल ने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान भारतीय चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। इसे लेकर सांसद संबित पात्रा ने कहा, ‘विदेशी धरती पर देश का अपमान करना राहुल गांधी की पुरानी आदत है। वे लंबे समय से ऐसा करते आ रहे हैं। ‘देश को लूटने के आरोप में जेल भी जा सकते हैं’ उन्होंने कहा कि ईडी ने अपनी चार्जशीट में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नाम का उल्लेख किया है। वे देश को लूटने के आरोप में जेल भी जा सकते हैं। इस बीच कांग्रेस पार्टी पूरे देश में अशांति का माहौल बना रही है। जो लोग 50,000 रुपये की जमानत पर बाहर हैं, अगर उन्हें लगता है कि वे विदेश जाकर वहां बोलकर इस महान लोकतंत्र की छवि को नष्ट कर सकते हैं, तो वे पूरी तरह गलत हैं। ‘जहां भी वे हारते हैं, वहां कहते हैं कि चुनाव आयोग और ईवीएम गलत है’ राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राहुल गांधी तय करें कि जब वे झारखंड में जीते थे, तब क्या देश में अलग चुनाव आयोग था? जहां भी वे जीतते हैं, वहां कहते हैं कि ईवीएम ठीक है और जहां भी वे हारते हैं, वहां कहते हैं कि चुनाव आयोग और ईवीएम गलत है। ‘भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर निंदनीय हमला’ भाजपा नेता सीआर केसवन ने कहा, ‘राहुल गांधी, सैम पित्रोदा के साथ नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर बाहर हैं। दोनों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है और अब वे भारत को बदनाम करने की यात्रा पर निकल पड़े हैं। भारत को गाली देने की यात्रा, एक बार फिर विदेशी जमीन पर। राहुल गांधी ने एक बार फिर भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर निंदनीय हमला किया है। उन्होंने भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने का असफल प्रयास किया है। राहुल गांधी ने अमेरिका में चुनाव आयोग के बारे में ये बयान दिया है। राहुल गांधी ने क्या कहा था? दरअसल, बोस्टन की ब्राउन यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने कहा, ‘हमारे लिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि चुनाव आयोग ने समझौता कर लिया है और यह बिल्कुल स्पष्ट है कि व्यवस्था में कुछ गड़बड़ है। मैंने यह कई बार कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में वयस्कों की संख्या से ज्यादा लोगों ने मतदान किया। चुनाव आयोग ने हमें शाम 5:30 बजे तक मतदान का आंकड़ा दिया और शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच 65 लाख मतदाताओं ने मतदान किया। ऐसा होना असंभव है। एक मतदाता को मतदान करने में लगभग 3 मिनट लगते हैं और अगर आप गणित करें तो इसका मतलब है कि सुबह 2 बजे तक मतदाताओं की कतारें लगी हुई थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब हमने उनसे वीडियोग्राफी के लिए कहा तो उन्होंने न केवल मना कर दिया बल्कि उन्होंने कानून भी बदल दिया ताकि अब हम वीडियोग्राफी के लिए न कह सकें।’ भाजपा ने घेरा तो देनी पड़ी सफाई राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने आप को या निर्वाचन आयोग को सुधारती क्यों नहीं है? राहुल गांधी ने अपने अध्ययन भाषण के दौरान जो कहा है, उसमें तथ्य दिए हैं, लेकिन क्या यह तथ्य अमेरिका में मालूम नहीं है? जब तक इस देश का चुनाव आयोग निष्पक्ष, स्वतंत्र या किसी दबाव से मुक्त नहीं होगा, तब तक लोकतंत्र कैसे जिंदा रहेगा?

पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष की आयु में निधन, पूरी दुनिया में शोक की लहर

 वेटिकन सिटी पोप फ्रांसिस का वेटिकन सिटी में निधन हो गया है. वे लंबे वक्त से बीमार थे. निमोनिया की शिकायत पर फ्रांसिस पिछले दिनों अस्पताल में भर्ती हुए थे. पॉप फ्रांसिस के मौत की खबर वेटिकन सिटी से दी गई है. फ्रांसिस 88 साल के थे. एक दिन पहले ही उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की थी. उनकी मौत की खबर के बाद पूरी दुनिया 1.4 अरब कैथोलिक शोक में डूब गए हैं. पोप फ्रांसिस के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया,वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स बेसिलिका में पोप फ्रांसिस को आखिरी विदाई दी जाएगी,वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स बेसिलिका में रखा जाएगा पोप फ्रांसिस का पार्थिव शरीर. पोप फ्रांसिस पिछले एक हफ्ते से ब्रोंकाइटिस से पीड़ित थे और उन्हें शुक्रवार, 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन उनकी हालत बिगड़ती गई, क्योंकि डॉक्टरों को ‘जटिल नैदानिक ​​स्थिति” के कारण पोप के श्वसन पथ के संक्रमण के इलाज में बदलाव करना पड़ा और फिर एक्स-रे कराने पर पुष्टि हुई कि वह डबल निमोनिया से पीड़ित थे. वेटिकन ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि वह रोमन कैथोलिक चर्च के पहले लैटिन अमेरिकी धर्मगुरु थे. उनके दोनों फेफड़ों में न्यूमोनिया था, जिसकी वजह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. वह लंबे समय तक अस्पताल में थे वह 38 दिनों तक अस्पताल में रहे थे और हाल में ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे. उनका अपने आवास कासा सेंटा मार्टा (Casa Santa Marta) पर निधन हुआ.  पोप फ्रांसिस ने रविवार को ईस्टर के मौके पर सरप्राइज पब्लिक एपीयरेंस दी थी. उन्होंने सेंट पीटर स्क्वायर से 35000 लोगों की भीड़ का हाथ मिलाकर अभिवादन स्वीकार किया था. वेटिकन के कार्डिनल केविन फेरेल ने बताया कि पोप फ्रांसिस का पूरा जीवन ईश्वर की सेवा में समर्पित रहा.   फ्रांसिस का जन्म 17 दिसंबर 1936 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनका असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोलियो था। वर्ष 2013 में पोप चुने जाने के बाद वे पहले लैटिन अमेरिकी, पहले जेसुइट और पहले गैर-यूरोपीय पोप बने, जिन्होंने आधुनिक युग में चर्च को नई दिशा देने का कार्य किया। अपने पूरे कार्यकाल में पोप फ्रांसिस ने गरीबी, पर्यावरण संरक्षण, आप्रवासी अधिकार, और समानता जैसे विषयों को प्राथमिकता दी। वे अपने सरल जीवन, करुणा और वैश्विक भाईचारे के संदेश के लिए याद किए जाएंगे। उन्होंने बार-बार कहा कि “चर्च को लोगों के पास जाना चाहिए, न कि लोगों को चर्च के पास।” अचानक बिगड़ी तबीयत पोप फ्रांसिस पिछले हफ्ते सेंट पीटर्स स्क्वायर में पारंपरिक रविवार की प्रार्थना और कैथोलिक चर्च के जयंती वर्ष मनाने के लिए सामूहिक प्रार्थना का नेतृत्व नहीं कर पाए थे, क्योंकि उनकी तबियत बेहद खराब थी. उनके स्वास्थ्य की वजह से उनकी पहले तय कई कार्यक्रम भी कैंसिल कर दिए गए थे. क्योंकि डॉक्टरों ने 88 साल के पोप को पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी थी.लेकिन पहले उनकी हालत को ‘स्थिर’ बताए जाने के बावजूद, वेटिकन ने शनिवार शाम को एक अपडेट जारी किया जिसमें कहा गया कि ‘लंबे समय से सांस लेने में तकलीफ’ के बाद उनकी हालत बिगड़ गई है. किसने की निधन की घोषणा? रिपोर्ट के मुताबिक पोप फ्रांसिस के निधन का ऐलान वेटिकन के कैमरलेन्गो कार्डिनल केविन फेरेल ने किया. कैमरलेन्गो कार्डिनल वेटेकिन सिटी में एक प्रशासनिक पद है जिसका काम खजाने की देखरेख करना और शहर में प्रशासनिक काम देखना है.

बादल फटने से तबाही, रामबन में बाढ़, भूस्खलन से इतने लोगों की गई जान, रेस्क्यू जारी

 रामबन जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में रविवार तड़के बादल फटने से मूसलधार बारिश हुई, जिसके चलते फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) और भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं. इस भीषण आपदा में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मकानों, दुकानों और सड़कों को नुकसान पहुंचा. अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. बादल फटने और भूस्खलन की वजह से 250 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया. यह सड़क कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र ऑल-वेदर रास्ता है. नाशरी से बनिहाल के बीच करीब दर्जनभर जगहों पर पहाड़ियों से गिरे मलबे ने रास्ता बंद कर दिया, जिससे सैकड़ों वाहन फंस गए. भारतीय सेना ने संभाला मोर्चा भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के रामबन में बादल फटने के बाद राहत अभियान शुरू किया है. NH-44 पर फंसे यात्रियों को खाना, शेल्टर और मेडिकल हेल्प प्रदान करने के लिए क्यूआरटी तैनात हैं. सेना की आठ टुकड़ियां स्टैंडबाय पर हैं और निकासी अभियान जारी है. शुरुआती आकलन के अनुसार, सड़कों से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने में 48 घंटे तक का समय लग सकता है. बारिश में तीन लोगों की मौत सीरी बगना गांव में बादल फटने की घटना में आकिब अहमद (12), उसका भाई मोहम्मद साकिब (10) और उनके पड़ोसी मुनी राम (65) की मौत हो गई. गांव के एक निवासी मो. हफीज ने बताया, ‘सुबह 4:30 बजे बादल फटने की जोरदार आवाज़ सुनाई दी, उसके बाद तुरंत चीख-पुकार मच गई.’ उन्होंने कहा, ‘हमने दोनों भाइयों को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.’ मौसम ने मचाई भारी तबाही लगातार बारिश के बीच धारमकुंड गांव में आई बाढ़ से करीब 40 मकानों को नुकसान हुआ. इनमें से 10 मकान पूरी तरह तबाह हो गए. पुलिसकर्मियों ने 100 से अधिक फंसे हुए ग्रामीणों को रेस्क्यू किया. उन्हें सरकारी मिडिल स्कूल में शरण दी गई है, जहां प्रशासन की ओर से राशन और जरूरी सहायता मुहैया कराई जा रही है. बिजली गिरने से दो लोगों की जान गई रियासी जिले के अर्नास इलाके में शनिवार देर रात आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक महिला भी शामिल थी, और एक महिला घायल हुई थी. इस प्रकार दो दिन में बारिश से संबंधित घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पूरे रामबन जिले में भारी बारिश, तेज हवाओं, ओलावृष्टि और भूस्खलनों के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, जो NC विधायक अर्जुन सिंह राजू (रामबन) और सजाद शाहीन (बनिहाल) के साथ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे, ने कहा, ‘स्थिति बहुत गंभीर है… मैं लौटकर मुख्यमंत्री को पूरी रिपोर्ट सौंपूंगा.’ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आपदा में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया और कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है. रामबन में सभी स्कूल-कॉलेज बंद रामबन के उपायुक्त बसीर-उल-हक चौधरी ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है और सभी सरकारी एजेंसियां, पुलिस, एसडीआरएफ, सेना, एनजीओ और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर राहत कार्यों में जुटे हैं. उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल को जिले के सभी स्कूल, कॉलेज और तकनीकी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे. कश्मीर घाटी में भी भारी बारिश को देखते हुए सोमवार को सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘यह फैसला छात्रों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखते हुए एहतियातन लिया गया है.’ केंद्र सरकार के मंत्री जितेंद्र सिंह ने रामबन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की और कहा कि जरूरत पड़ने पर सांसद निधि से भी मदद दी जाएगी. नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि रामबन और बनिहाल में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और केंद्र से राहत के लिए सहयोग की मांग की जाएगी.  

बेटे की मौत के बाद सास-ससुर ने बहू की शादी कराकर देश में पेश की मिसाल

अंबाजी समाज में कई किस्से ऐसे बनते हैं, जो मिसाल बन जाते हैं और जिंदगीभर याद रह जाते हैं.  हाल में गुजरात के सबसे बड़े शक्तिपीठ अंबाजी में भी कुछ ऐसा ही हुआ. यहां अपने परिवार के साथ रहने वाले प्रवीणसिंह राणा ने बेटे की मृत्यु के बाद अपनी बहू का विवाह कराकर दुनिया के सामने बेहतर उदाहरण रखा है. दरअसल, प्रवीणसिंह ने कुछ समय पहले अपने बेटे को खो दिया था. बीते साल उनके घर दीवाली का त्यौहार मानो दुःख लेकर आया. त्योहार के दिन बड़े लड़के सिद्धराजसिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई. सिद्धराजसिंह की जब मौत हुई तब उनकी बेटी दीक्षिता महज 6 महीने की थी. सिद्धराजसिंह की पत्नी कृष्णा पर दुखों का पहाड़ गिर गया था. पर अब उनके ससुर ने अपनी बहू को बेटी मानकर फिर से शादी कराकर एक पिता का फर्ज निभाया.  प्रवीणसिंह राणा,अंबाजी के पेट्रोल पंप के पीछे परिवार के साथ रहते थे. उनके बड़े बेटे की मौत के बाद वह अपनी बहू को नया जीवन देना चाहते थे. बही की कम उम्र में जीवनसाथी के बगैर अकेल हो जाना और साथ में छोटी बच्ची होना उसके लिए बड़ा संघर्ष था. ऐसे में प्रवीणसिंह ने समाज की परवाह किए बीना अपनी बहू की फिर से धामधूम से शादी कराकर पिता का फर्ज निभाया. शादी में विदाई के वक्त ससुर पिता की भूमिका में नजर आए और उन्होंने अपनी आंखों से रोते- रोते बहु नहीं बेटी को विदाई दी. शादी करने वाला दुल्हा संजय भी प्रवीणसिंह के बड़े बेटे और बहु का भी दोस्त था. संजय ने बताया कि मैं दोस्त की बेटी ओर बहू को नया जीवन देना चाहता था. ट्रेन से विदाई होते समय छोटी पोती दादा को प्यार करते नजर आए. यह शादी पूरे गुजरात में मिसाल बन गई है.

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस चार दिन के भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे, Vice President ताजमहल और अक्षरधाम मंदिर की करेंगे यात्रा, जानें कहां रुकेंगे

 नई दिल्ली अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति, उनकी पत्नी उषा और उनके तीन बच्चे इवान, विवेक और मीराबेल चार दिवसीय भारत यात्रा पर सोमवार सुबह करीब 10 बजे पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे। उनके साथ अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ सदस्य भी हैं। एयरपोर्ट के बाद वे अक्षरधाम मंदिर जाएंगे। वहां पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प देखने किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी जाएंगे। वे सोमवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी वेंस के साथ व्यापार, शुल्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और समग्र द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों सहित कई प्रमुख मुद्दों पर सोमवार को बातचीत करेंगे। फिर शाम को उनके एवं उनकी पत्नी उषा के लिए रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि पीएम मोदी और वेंस की बैठक में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार संधि के अलावा दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के तरीके पर चर्चा होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारतीय दल का संभवत: हिस्सा होंगे। जेडी वेंस का पूरा शेड्यूल वेंस के यात्रा कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटों बाद वेंस और उनका परिवार स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर जाएगा। फिर वे पारंपरिक भारतीय हस्तनिर्मित सामान बेचने वाले एक ‘शॉपिंग कॉम्प्लेक्स’ भी जा सकते हैं। वेंस के भारत आगमन पर केंद्र का कोई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री पालम एयरबेस पर उनका स्वागत करेगा। वेंस अपने परिवार के साथ दिल्ली के अलावा जयपुर और आगरा की भी यात्रा करेंगे। इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय के अधिकारियों सहित कम से कम पांच वरिष्ठ अधिकारियों के वेंस के साथ भारत आने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को शाम साढ़े छह बजे अपने 7 लोक कल्याण मार्ग निवास पर वेंस और उनके परिवार का स्वागत करेंगे जिसके बाद आधिकारिक वार्ता होगी। अधिकारियों ने बताया कि बैठक में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार संधि साथ-साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के तरीके पर चर्चा होने की संभावना है। कहां रुकेंगे? – अमेरिकी उपराष्ट्रपति और उनका परिवार दिल्ली में आईटीसी मौर्य शेरेटन होटल में ठहरेगा। अधिकारियों ने बताया कि वेंस और उनका परिवार सोमवार रात जयपुर रवाना होगा। वेंस 22 अप्रैल को आमेर किले सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर जाएंगे। यह किला यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) विश्व धरोहर स्थल है। वेंस दोपहर में जयपुर स्थित राजस्थान अंतरराष्ट्रीय केंद्र में एक सभा को संबोधित करेंगे। – वेंस अपने भाषण में अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के शासनकाल में भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक पहलुओं पर बात कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में राजनयिकों, विदेश नीति विशेषज्ञों, भारत सरकार के अधिकारियों और शिक्षाविदों के भाग लेने की संभावना है। – अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति और उनका परिवार संभवत: 23 अप्रैल की सुबह आगरा जाएगा। वे वहां ताजमहल और शिल्पग्राम जाएंगे। शिल्पग्राम विभिन्न भारतीय कलाकृतियों को दर्शाने वाला एक खुला एम्पोरियम है। आगरा की यात्रा के बाद वेंस 23 अप्रैल को जयपुर लौटेंगे। – अधिकारियो ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति और उनका परिवार 24 अप्रैल को जयपुर से अमेरिका रवाना होंगे। जयपुर में वेंस भव्य रामबाग पैलेस में ठहरेंगे, जो एक आलीशान होटल है। कभी शाही लोगों का अतिथि गृह हुआ करता था। वेंस इटली की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद दिल्ली आएंगे।

भारत के हज यात्रियों का बढ़ा कोटा, अब 185,000 हज यात्री जा सकेंगे मक्का

नई दिल्ली निया के सभी धर्मों के कुछ पवित्र धार्मिक स्थल होते हैं. इस्लाम धर्म में हज यात्रा को सबसे पवित्र और अहम माना गया है. हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज यात्रा पर जाते हैं. हज यात्रा सऊदी अरब के मक्का में की जाती है. भारत से भी हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु हज यात्रा पर जाते हैं. आँकड़ों के आधार पर बात की जाए तो हर साल लगभग 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हज यात्रा पर जाते हैं. जिनमें से 1.7 लाख से ज्यादा भारत से होते हैं.  पिछले साल की बात की जाए तो , 1,75,025 भारतीय श्रद्धालुओं ने हज यात्रा की थी. लेकिन आपको बता दें इस साल भारत के हज यात्रियों के लिए सऊदी अरब सरकार ने कोटा बढ़ा दिया है. जानें हज यात्रा के लिए कैसे और कहां करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन? बढ़ाया गया भारत के हज यात्रियों का कोटा भारत से हर साल 175,000 हज यात्रा के लिए सऊदी अरब जाते हैं. जिनमें 1,22,518 हज यात्रियों भारतीय हज समिति के जरिए हज यात्रा पर भेजा जाता है. इसके अलावा बचे हुए 52,000  हज यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिए हज यात्रा पर जाते हैं. लेकिन इस साल सऊदी हज मंत्रालय  की ओर से इस संख्या में इजाफा कर दिया गया है. और इस साल भारत से 175,000 हज यात्रियों की जगह 185,000 हज यात्री जा सकते हैं. क्योंकि सऊदी हज मंत्रालय की ओर से 10,000 एक्सट्रा तीर्थयात्रियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर हामी भर दी है. इस तरह कर सकते हैं हज यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन भारत से हर साल हज यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन हज कमेटी ऑफ इंडिया के जरिए होता है. यह प्रक्रिया अब ऑनलाइन कर दी गई है. रजिस्ट्रेशन के लिए आपको हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर https://hajcommittee.gov.in पर जाकर अप्लाई करना होगा. इसके अलावा आप हज सुविधा (HAJ SUVIDHA) मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जो कि एंड्राइड (Android) और आईओएस (iOS) दोनों के लिए ही उपलब्ध है. रजिस्ट्रेशन के लिए आपको कुछ अहम दस्तावेज चाहिए होंगे. आपको बता दें हज यात्रा के लिए अब ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सर्विस उपलब्ध नहीं है.

वंदे भारत स्लीपर का इंतजार जल्द होगा कम, ट्रेन देश के कई महत्वपूर्ण रूट्स पर शुरू होने जा रही है

नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए खुशखबरी है। जी हां! भारतीय रेलवे एक और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है, जिससे राजधानी एक्सप्रेस और दुरांतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों की बादशाहत को चुनौती मिलने वाली। ऐसा बताया जा रहा है कि जल्द ही दिल्ली से हावड़ा के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रेन देश के कई महत्वपूर्ण रूट्स पर शुरू होने जा रही है, जिसमें दिल्ली-हावड़ा का रूट भी शामिल है। गौरतलब है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सितंबर 2024 में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से परदा उठाया था। दिल्ली से हावड़ा तक की कुल दूरी 1449 किलोमीटर है, जिसे वंदे भारत स्लीपर ट्रेन महज 15 घंटे से भी कम वक्त में तय करेगी। इसकी टॉप स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जो इसे इस रूट की सबसे तेज ट्रेन बना देगी, यहां तक कि राजधानी और दुरांतो एक्सप्रेस से भी आगे। नई दिल्ली-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर का कितना होगा किराया? वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 11 एसी थर्ड टियर, 4 एसी सेकेंड टियर और 1 फर्स्ट क्लास एसी कोच होंगे। किराये की बात करें तो एसी 3-टियर का अनुमानित किराया 3 हजार रुपये, एसी 2-टियर 4 हजार रुपये, और फर्स्ट क्लास एसी 5100 रुपये के आसपास होगा। नई दिल्ली-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर का क्या होगा पड़ाव और टाइम टेबल? दिल्ली से यह ट्रेन शाम 5 बजे (17:00) रवाना होगी और अगली सुबह 8 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वहीं, वापसी में हावड़ा से शाम 5 बजे चलेगी और अगली सुबह 8 बजे दिल्ली पहुंचेगी। इस ट्रेन का रूट भी खास होगा। सफर के दौरान ये ट्रेन कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज जंक्शन, दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, गया, धनबाद और आसनसोल जैसे बड़े स्टेशनों पर रुकेगी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश की लाश खून से सनी हुई हालत में बरामद, घर में मृत पाए गए, हिरासत में पत्नी

कर्नाटक कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश की रविवार को हत्या हो गई। वह अपने घर में मृत पाए गए। पूर्व आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश की लाश खून से सनी हुई हालत में बरामद की गई। इस मामले पर बोलते हुए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने कहा, “कर्नाटक के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश, 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी की बेंगलुरु के एचएसआर लेआउट में हत्या कर दी गई। घटना का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।” मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, पुलिस को शक है कि यह एक सोची-समझी हत्या हो सकती है और इस मामले में उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया कि उनकी मौत स्वाभाविक नहीं लगती और परिस्थितियां संदिग्ध हैं। पुलिस इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। बेंगलुरु सिटी पुलिस का कहना है कि घटना का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत के कारणों की पुष्टि हो सके।

त्रिची: पीने के पानी में सीवेज वॉटर मिलने से 30 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे जबकि दो लोगों की मौत

त्रिची तमिलनाडु के त्रिची शहर के उरयूर क्षेत्र में प्रदूषित पानी पीने से लोग बीमार हो गए। पीने के पानी में सीवेज वॉटर मिलने से 30 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे जबकि दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 58 वर्षीय लता और 4 वर्षीय बच्ची प्रियंका शामिल हैं। यह घटना पणिक्कनकरन स्ट्रीट और मिन्नप्पन स्ट्रीट इलाकों में हुई, जहां पिछले छह महीनों से स्थानीय लोग सीवेज की समस्या की शिकायत कर रहे थे, लेकिन नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवरेज सिस्टम में रुकावट के कारण पीने का पानी दूषित हो गया। इसकी शिकायत कई बार नगर निगम के अधिकारियों, कनिष्ठ सहायक विनोद कुमार सहित अन्य अधिकारियों को दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल की घटना के बाद नगर निगम ने क्षेत्र में सफाई शुरू की है और जल आपूर्ति को कीटाणुरहित करने के साथ पानी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। इसके अलावा, प्रभावित लोगों की मदद के लिए क्षेत्र में एक चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है। नगर निगम आयुक्त सरवनन ने दावा किया कि बच्ची प्रियंका की मौत जल प्रदूषण के बजाय किसी दवा से एलर्जी या फूड पॉइजनिंग से हुई है। हालांकि, स्थानीय लोग इस दावे को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण बच्ची की मौत हो गई। निवासी मुथैया ने कहा, “हमने बार-बार सीवेज और पानी की समस्या की शिकायत की, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अब हम प्रभावित लोगों के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग करते हैं।” वहीं, सतीश कुमार ने नगर निगम की निष्क्रियता पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “हफ्तों से हम सीवेज जाम की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। उनकी लापरवाही से लोगों की जान गई।” स्थानीय लोग मंत्री के.एन. नेहरू, मेयर अनबझगन और वार्ड पार्षद मुथुकुमार की भी आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने इस गंभीर स्थिति में क्षेत्र का दौरा तक नहीं किया। हंगामा बढ़ते देख नगर निगम ने स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति शुरू कर दी। लेकिन स्थानीय निवासी इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रूसी सेना की गोलाबारी और हमले जारी, ईस्टर युद्धविराम एक दिखावा : जेलेंस्की

कीव यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक दिवसीय ‘ईस्टर युद्धविराम’ को दिखावा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन को अग्रिम मोर्चे पर नुकसान पहुंचाने के लिए मॉस्को की कोशिशें रात भर जारी रहीं। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “कुल मिलाकर, ईस्टर की सुबह तक हम कह सकते हैं कि रूसी सेना युद्धविराम की एक सामान्य धारणा बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कुछ जगहों पर इसने आगे बढ़ाना और यूक्रेन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश रोकी नहीं है।” यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि रविवार की सुबह यूक्रेनी सेना ने फ्रंट लाइन पर गोलाबारी की 59 घटनाएं और हमले के पांच प्रयासों की सूचना दी। उन्होंने कहा कि शनिवार शाम को गोलाबारी की सैकड़ों घटनाएं हुईं। यूक्रेन की सेना ने पुष्टि की कि अग्रिम मोर्चे पर गतिविधि कम हुई है, लेकिन लड़ाई बंद नहीं हुई। यूक्रेन के पूर्वी मोर्चे के सैन्य प्रवक्ता विक्टर त्रेहुबोव ने राष्ट्रीय टेलीविजन को बताया, “यह कम हो रहा है, लेकिन गायब नहीं हुआ है। ईमानदारी से कहें तो हमें इस बात की बहुत उम्मीद नहीं थी कि ऐसा वास्तव में होगा।” बता दें रूसी राष्ट्रपति ने शनिवार को यूक्रेन में ईस्टर के मौके पर एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की और रूसी सेना को शनिवार रात 8.30 बजे (आईएसटी) से रविवार के अंत तक युद्ध रोकने का आदेश दिया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यूक्रेन रूस के उदाहरण का अनुसरण करेगा। हालांकि, उन्होंने रूस के जनरल स्टाफ के प्रमुख वालेरी गेरासिमोव को निर्देश दिया कि वे कीव की तरफ से युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन को रोकने के लिए रूसी सैनिकों को स्टैंडबाय पर रखें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्रेमलिन ने एक बैठक में कहा, “मानवीय विचारों के आधार पर, रूसी पक्ष ईस्टर युद्धविराम की घोषणा करता है। मैं इस अवधि के लिए सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने का आदेश देता हूं।” उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि यूक्रेन हमारे उदाहरण का अनुसरण करेगा। हालांकि हमारे सैनिकों को शत्रु की तरफ से युद्धविराम के संभावित उल्लंघन और उकसावे जैसी किसी भी आक्रामक कार्रवाई को नाकाम करने के लिए तैयार रहना चाहिए।” पुतिन का ऐलान वाशिंगटन के उस बयान के बाद आया जिसमें कहा गया था कि अगर मॉस्को और कीव युद्ध रोकने की इच्छा जाहिर नहीं करते तो वह कुछ दिनों के भीतर शांति वार्ता छोड़ सकते हैं।

आरएसएस के प्रमुख ने ‘एक मंदिर, एक कुआं और एक श्मशान घाट’ अपनाने का किया आह्वान, कांग्रेस अध्यक्ष ने किया पलटवार

  नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक एकता पर जोर दिया है। उन्होंने सभी के लिए ‘एक मंदिर, एक कुआं और एक श्मशान घाट’ अपनाने का आह्वान किया है। वहीं, कांग्रेस ने आरएसएस पर समुदायों को बांटने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने वक्फ संशोधन अधिनियम को बीजेपी और आरएसएस की साजिश बताया है। अलीगढ़ दौरे पर हैं मोहन भागवत मोहन भागवत ने अलीगढ़ की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत को शांति को बढ़ावा देने में अपनी वैश्विक भूमिका को साकार करने के लिए सच्ची सामाजिक एकता जरूरी है। उन्होंने एच.बी. इंटर कॉलेज और पंचन नगरी पार्क में दो शाखाओं में स्वयंसेवकों को संबोधित किया। भागवत ने सामाजिक एकता पर दिया जोर भागवत ने हिंदू समाज की नींव के रूप में संस्कार और मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों से परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक अखंडता पर आधारित समुदाय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए त्योहारों को एक साथ मनाने की बात कही। भागवत ने स्वयंसेवकों को समाज के सभी वर्गों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने किया पलटवार वहीं मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी-आरएसएस पर गरीबों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के खिलाफ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वे गरीब, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के खिलाफ हैं। वे समाज की बेहतरी के लिए नहीं सोच सकते, वे जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटने में विश्वास करते हैं।” ‘वक्फ एक्ट बीजेपी-RSS की साजिश’ खरगे ने वक्फ संशोधन विधेयक को बीजेपी और आरएसएस की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि यह समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, ‘संसद द्वारा पारित वक्फ संशोधन विधेयक बीजेपी और संघ की समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की साजिश है।’ यह बयान कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल के उस सवाल के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने पूछा था कि आरएसएस कब किसी दलित, मुस्लिम या महिला को अपना प्रमुख बनाएगा। उन्होंने कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे एक दलित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी जिसमें उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी थी कि अगर समुदाय के लिए उसकी समर्थन सच्चा है तो वह किसी मुस्लिम को कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त करे।

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