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रामबन में हुए दुखद भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से बेहद दुखी हूं, राहत और बचाव कार्य तेज करने के दिए निर्देश

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में रविवार सुबह भारी बारिश के बाद सेरी बागना इलाके में बादल फटने की दुखद घटना सामने आई। इसमें जनहानि की भी खबरें आ रही हैं। इस आपदा के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय पुलिस और राहत दलों ने तेजी से मोर्चा संभाला और करीब 100 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “रामबन में हुए दुखद भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से बेहद दुखी हूं, जिससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। मेरी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहां भी जरूरत हो, वहां तत्काल बचाव और राहत कार्य पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि वे जल्द ही बहाली, राहत और मरम्मत योजनाओं की समीक्षा करेंगे। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान जमीनी स्तर पर हालात को संभालने पर है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम और यात्रा संबंधी सलाहों का पालन करें तथा संवेदनशील और जोखिम भरे क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से आवाजाही से बचें। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक 20 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के अधिकांश इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। पूरे दिन आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे, जबकि देर शाम तक कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश या बर्फबारी भी हो सकती है। वहीं, 21 अप्रैल को भी कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश और गर्जन के साथ बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। 22 से 28 अप्रैल के बीच मौसम सामान्य रूप से शुष्क रहेगा, हालांकि 25 अप्रैल को आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग ने सभी संबंधित विभागों और आम जनता से अपील की है कि वे अपने कार्यक्रम मौसम पूर्वानुमान के अनुसार तय करें और प्रशासन या यातायात विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। खासतौर पर किसानों को सलाह दी गई है कि वे 21 अप्रैल तक कोई भी कृषि कार्य स्थगित रखें, ताकि मौसम जनित जोखिम से बचा जा सके।

मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर फारूक अब्दुल्ला का सरकार पर वार,नफरत को बताई हिंसा की वजह

जम्मू कश्मीर जम्मू से नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जान-बूझकर हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत पैदा की जा रही है, जिसकी वजह से यह नफरत अब हिंसा में बदल रही है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मुर्शिदाबाद में जो हुआ वो सिर्फ नफरत का नतीजा है। वहां बुलडोजर चलाए गए। मस्जिदें गिरा दी गईं। स्कूल तबाह कर दिए गए। मुसलमानों के घर ढहा दिए गए।” उन्होंने सवाल किया कि इन लोगों का गुनाह क्या था? क्या कोई आरोप साबित हुआ? उन्होंने खुद ही जवाब दिया इन मामलों में कुछ भी साबित नहीं हुआ। नफरत का नदीजा है बंगाल हिंसा: फारूक अब्दुल्ला पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा, “कोर्ट ने साफ तौर पर बुलडोजर पर रोक लगाई है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई की गई। क्या कानून सिर्फ हमारे लिए अलग है और उनके लिए अलग?” बंगाल हिंसा पर खूब हो रही सियासत गौरतलब है कि बंगाल हिंसा को लेकर सियासत काफी चरम पर है। एक तरफ केंद्र सरकार में काबिज भाजपा लगातार ममता सरकार पर हिंस्सा को आरोप लगा रही है। वहीं ममता सरकार भी हिंसा के पीछे बीजेपी की साजिश बता रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने राज्य में दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार शुरू किया है। ममता ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों को एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए। बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि ये ताकतें उकसावे पर हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल विभाजनकारी राजनीति करने के लिए कर रही हैं। ममता ने लिखा खुला खत उन्होंने एक खुले पत्र में आरोप लगाया, ‘‘पश्चिम बंगाल में भाजपा और उसके सहयोगी अचानक बहुत आक्रामक हो गए हैं। इन सहयोगियों में संघ भी शामिल है। मैंने पहले संघ का नाम नहीं लिया था, लेकिन अब मुझे उसका नाम बताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इन सभी ने मिलकर राज्य में दुष्प्रचार अभियान शुरू किया है।’’

पाकिस्तान में हिंदू राज्य मंत्री पर प्रदर्शनकारियों ने किया हमला, हिंदू मंत्री भी सुरक्षित नहीं, पीएम शहबाज ने की हमले की निंदा

इस्लामाबाद पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ बर्बरता की खबरें लगातार आती रहती हैं। अब तो हिंदू मंत्री भी पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं। पाकिस्तान के सिंध में हिंदू राज्य मंत्री पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। हमलावर सरकार की विवादास्पद सिंचाई नहर परियोजनाओं का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इससे दक्षिणी प्रांत में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण नदियों का बहाव कम हो जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार में धार्मिक मामलों के राज्य मंत्री खील दास कोहिस्तानी शनिवार को प्रांत के थट्टा जिले से गुजर रहे थे, तभी उनके काफिले पर टमाटर और आलू फेंके गए। अधिकारियों ने बताया कि हमले में खील दास को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। प्रधानमंत्री शहबाज ने हमले की कड़ी निंदा की और उन्हें घटना की गहन जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “जनप्रतिनिधियों पर हमला अस्वीकार्य है। घटना में शामिल लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी।” कोहिस्तानी सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सदस्य हैं और प्रदर्शनकारियों ने पार्टी की संघीय सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। संघीय सूचना मंत्री अत्ता तरार ने भी घटना का संज्ञान लिया और इसे हमला घोषित किया। उन्होंने सिंध के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) गुलाम नबी मेमन से घटना का ब्योरा मांगा और संघीय आंतरिक सचिव से रिपोर्ट मांगी। सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने भी इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने हैदराबाद क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक को हमले में शामिल बदमाशों को तुरंत गिरफ्तार करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। नेशनल असेंबली की वेबसाइट पर उपलब्ध व्यक्तिगत विवरण के अनुसार, कोहिस्तानी सिंध के जामशोरो जिले से हैं और वह पहली बार 2018 में पीएमएल-एन के टिकट पर संसद सदस्य चुने गए थे। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद, उन्हें 2024 में फिर से चुना गया और उन्हें राज्य का मंत्री बनाया गया। सरकार ने घोषणा की है कि ग्रीन पाकिस्तान पहल के तहत चोलिस्तान क्षेत्र में भूमि की सिंचाई के लिए पंजाब प्रांत में छह नहरों के निर्माण का प्रस्ताव है। यह एक ऐसी परियोजना है जिसे शक्तिशाली सेना, संघीय सरकार और पंजाब प्रांतीय प्रशासन का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, सिंध में विभिन्न दल और राष्ट्रवादी समूह इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और दलील दे रहे हैं कि नहरों के कारण पानी का बहाव कम हो जाएगा और प्रांत में सिंचाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हमलावर प्रस्तावित नहरों का विरोध कर रहे थे।

बांग्लादेश दक्षिण त्रिपुरा में मुहुरी नदी के पास एक और तटबंध बना रहा है, अब भारत के खिलाफ नई साजिश रच रहा

नई दिल्ली सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बांग्लादेश और भारत के बीच संबंध खराब होते जा रहे हैं। अब बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ एक और साजिश रची है। वह दक्षिण त्रिपुरा में मुहुरी नदी के पास एक और तटबंध बना रहा है। इसकी वजह से सीमा से सटे शहरों में बाढ़ की आशंकाएं बढ़ गई हैं। बेलोनिया के सीपीएम विधायक दीपांकर सेन ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से तुरंत इसमें हस्तक्षेप करने की मांग क है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नदी पर बन रहा यह तटबंध डेढ़ किलोमीटर लंबा और 20 फीट ऊंचा है। सेन ने कहा कि इंदिरा-मुजीब समझौते के अनुसार, किसी भी देश को बॉर्डर के 150 गज के अंदर किसी भी तरह का निर्माण करने की अनुमति नहीं है। इस समझौते के बाद भी बॉर्डर से 50 गज की दूरी और कुछ जगह 10 गज की दूरी पर इस तटबंध का निर्माण किया जा रहा है। इसी समझौते के चलते दक्षिणी त्रिपुरा के इलाकों में बांग्लादेश की आपत्ति के बाद कई प्रोजेक्ट्स भी रोक दिए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि वे इस मामले में रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, एसपी साउथ त्रिपुरा ने कहा, ”हमारे नोटिस में मामला सामने आया है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। फिलहाल अभी कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।” भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास मुहुरी नदी के नजदीक स्थित शहरों में रहने वाले कम से कम 500 परिवारों को इस तटबंध के निर्माण की वजह से मॉनसून में बाढ़ आने का डर है। बता दें कि तटबंध नदी के पानी के बहाव को रोकता है और इसकी वजह से ही बेलोनिया में बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है। भारत के खिलाफ साजिश रच रहा बांग्लादेश शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते खराब हो गए। मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के बिराल उपजिला में भाबेश चंद्र रॉय नामक शख्स को पहले अगवा किया गया और फिर उसे पीट-पीटकर मार डाला गया। इससे दोनों देशों में टेंशन बढ़ गई। भारत ने बांग्लादेश को मुंहतोड़ जवाब दिया। रॉय शतग्राम संघ के अंतर्गत बसुदेबपुर गांव के निवासी थे और बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। स्थानीय हिंदू समुदाय में उनका काफी सम्मान था।

पुलिस ने दी जानकारी, मुर्शिदाबाद में बाप-बेटे की हत्या का मुख्य आरोपी जियाउल शेख गिरफ्तार

कोलकाता पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में एक व्यक्ति और उसके बेटे की हत्या के मुख्य आरोपियों में से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शमशेरगंज के जाफराबाद में दो लोगों की हत्या के मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान जाफराबाद के पड़ोसी गांव सुलिताला पुरबापारा निवासी जियाउल शेख के रूप में की गई है। वह 12 अप्रैल को की गई हत्या की इस वारदात के बाद से फरार था। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शेख को उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा स्थित उसके ठिकाने से शनिवार को गिरफ्तार किया। अधिकारी ने बताया ‘यह व्यक्ति उन मुख्य आरोपियों में से एक है, जिन्होंने साजिश रचकर 12 अप्रैल को हरगोबिंदो दास और उसके बेटे चंदन दास के घर पर तोड़फोड़ करने और उनकी हत्या करने के लिए भीड़ को उकसाया था।’ उन्होंने कहा कि पुलिस के पास 12 अप्रैल को अपराध स्थल पर उसकी मौजूदगी को साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और उसके मोबाइल फोन संबंधी जानकारी समेत कई सबूत हैं। इससे पहले, पुलिस ने दो भाइयों कालू नादर एवं दिलदार के अलावा इंजमाम उल हक नाम के व्यक्ति को पिता-पुत्र की हत्या में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कालू को बीरभूम जिले के मुराराई से गिरफ्तार किया गया जबकि उसके भाई दिलदार को बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से सुती पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में पकड़ा गया। तीसरे आरोपी को जाफराबाद के पड़ोसी गांव सुरीपारा से पकड़ा गया। अधिकारी ने कहा, ‘हमने मुर्शिदाबाद हिंसा के मामलों में 100 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की हैं। हमने इन मामलों में अब तक 276 लोगों को गिरफ्तार किया है।’ वक्फ अधिनियम में संशोधन को लेकर हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी।

यूपी समेत कई राज्यों में आज भी बारिश, आंधी तूफान का अलर्ट, 50 की स्पीड से चलेंगी तेज हवाएं

नई दिल्ली उत्तर भारत के कई राज्यों में आंधी पानी का दौर चल रहा है। यूपी समेत कई राज्यों में आज भी बारिश, आंधी तूफान का अलर्ट किया गया है। पश्चिमी यूपी के इलाकों में बारिश के साथ-साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं भी चलेंगी। वहीं, बिजली कड़कने का भी अलर्ट है। हालांकि, आज के बाद से बारिश से राहत मिलेगी। मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 21 अप्रैल से बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी। विदर्भ में 21-23, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में 22-24, राजस्थान, साउथ हरियाणा में 23 और 24 अप्रैल को हीटवेव का नया दौर आने वाला है। इसके अलावा, 22 अप्रैल से पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश होगी। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तेलंगाना में आंधी तूफान देखा गया। वहीं, जम्मू कश्मीर, ओडिशा, लद्दाख, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तेलंगाना में ओले गिरे। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में भारी बरसात हुई। मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से हिमाचल प्रदेश में 70 की स्पीड से हवाएं चलेंगी और आंधी तूफान का अलर्ट है। वहीं, जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20 और 21 अप्रैल, हिमाचल प्रदेश में 20 अप्रैल, उत्तराखंड में 20 अप्रैल को बारिश, आंधी का अलर्ट है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर, लद्दाख में आज भी तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की बात करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में आज यानी कि 20 अप्रैल को बारिश, आंधी तूफान, बिजली कड़कने और 50 की स्पीड से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में 22-24 अप्रैल, असम, मेघालय में 22 अप्रैल को भारी बरसात होने वाली है। वहीं, दक्षिण भारत की बात करें तो इंटीरियर कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, केरल, माहे में अगले पांच दिनों, तेलंगाना में अगले पांच दिनों, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक में अगले पांच दिनों के दौरान बारिश, आंधी तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, असम, मेघालय में 20 अप्रैल को भारी बरसात होगी। गुजरात में 20 अप्रैल को धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है।

बांग्लादेश में तसलीमा नसरीन का फूटा गुस्सा, यूनुस को हटाओ, तभी हिंदू बचेंगे

ढाका बांग्लादेश में हिंदू नेता भावेश चंद्र रॉय को उनके घर से अगवा कर पीट-पीटकर मार डालने वाली घटना को लेकर बांग्लादेश से लेकर भारत में जबरदस्त आक्रोश है। भारत ने इस घटना को जघन्य बताते हुए बांग्लादेश सरकार को अलसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चेताया है। यूनुस सरकार को चेतावनी दी कि बहाने बनाना बंद कीजिए। इस बीच बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन ने यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें सत्ता से हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू तभी बचेंगे, जब यूनुस की विदाई होगी। मामला क्या है पिछले सप्ताह बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के बिराल उपजिला से हिंदू समुदाय के बड़े नेता भावेश चंद्र को कट्टरपंथियों ने अगवा कर लिया था और बेरहमी से पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी गई। भावेश शतग्राम यूनियन के अंतर्गत बसुदेवपुर गांव के निवासी थे और बिराल यूनिट के बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के उपाध्यक्ष के तौर पर कार्यरत थे। वे स्थानीय हिंदू समुदाय में एक सम्मानित नेता थे।   यूनुस को सत्ता से हटाओ, तभी बचेंगे हिंदू लेखिका तसलीमा नसरीन ने भावेश चंद्र की नृशंस हत्या को लेकर बांग्लादेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हिंदू नेता भावेश चंद्र रॉय को उनके घर से अगवा कर लिया गया और पीट-पीटकर मार डाला गया। हम निश्चित रूप से अनुमान लगा सकते हैं कि हत्यारे कौन हैं? यूनुस हिंदुओं के हत्यारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते। वह प्रचार करते हैं कि हिंदू ठीक-ठाक हैं और हिंदुओं के उत्पीड़न की सभी खबरें झूठी, अफवाह या भारत द्वारा गढ़ी गई हैं। अगर यूनुस सत्ता में और बने रहे, तो देश जल्द ही हिंदुओं से खाली हो जाएगा। हिंदुओं को बचाने के लिए यूनुस को सत्ता से हटाना होगा।’ भारत की भी कड़ी नाराजगी उधर, भारत ने भी भावेश चंद्र की हत्या को लेकर यूनुस सरकार पर निशाना साधा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘यह घटना अंतरिम सरकार के शासन में हिंदू अल्पसंख्यकों के संगठित उत्पीड़न के एक पैटर्न को दर्शाती है, जबकि पहले हुई ऐसी घटनाओं के अपराधी आज भी बिना किसी सजा के खुलेआम घूम रहे हैं। हम इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा करते हैं और एक बार फिर अंतरिम सरकार को यह याद दिलाते हैं कि वह सभी अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाए, बहाने न बनाए और किसी भी प्रकार का भेदभाव न करे।’

रामबन में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, तीन की मौत, 100 से अधिक लोगों को बचाया

जम्मू उधमपुर से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर बताया कि बीती रात रामबन क्षेत्र में भारी ओलों की बारिश, तेज हवाएं और कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ था। इस प्राकृतिक आपदा से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है और दुर्भाग्यवश तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि कुछ परिवारों को संपत्ति का नुकसान हुआ है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वे रामबन के उपायुक्त बसीर-उल-हक चौधरी से संपर्क में हैं और जिला प्रशासन की तत्परता और सराहनीय कार्रवाई की प्रशंसा की, जिसने कई जानें बचाईं। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को सभी प्रकार की सहायता दी जा रही है, चाहे वह आर्थिक हो या कुछ भी हो। यदि जरूरत पड़ी तो सांसद निधि से व्यक्तिगत रूप से भी सहायता प्रदान की जाएगी। जितेंद्र सिंह ने लोगों को डरने की बजाय धैर्य रखने और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस आपदा से पार पाएंगे।   जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में रविवार भारी बारिश से धर्म कुंड गांव सबसे अधिक प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित बचा लिया गया है। नाशरी से बनिहाल तक जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और कीचड़ धंसने (मडस्लाइड) की घटनाएं हुईं, जिससे यातायात दोनों ओर बंद हो गया है। धर्म कुंड गांव में बाढ़ ने लगभग 40 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। बादल और बारिश के बावजूद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और फंसे लोगों को बाहर निकाला। यातायात विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि बारिश अभी भी जारी है, इसलिए यात्रियों से अपील की गई है कि वे रास्ता साफ होने और मौसम सुधरने तक इस मार्ग पर यात्रा न करें। स्थिति पर प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रहे हैं और राहत कार्य जारी है।

खालिस्तानियों ने गुरुद्वारे के अलावा मंदिरों को भी किया टारगेट, यहां भी खालिस्तानी नारे लिखे, गुरुद्वारे ने बैन कर दी एंट्री तो भड़क गए

कनाडा कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी खालिस्तानियों को हौसले बुलंद हैं। यहां वैंकूवर में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने अपने नारे लिख दिए। गुरुद्वारे पर भारत विरोधी नारे भी लिखे गए। खालसा दीवान सोसइटी गुरुद्वारे को रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारा के नाम से भी जानते हैं। खालिस्तानियों की इस हरकत के बाद गुरुद्वारे के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, अलगाववादी सिखों के एक गुट ने हमारे पवित्र गुरुद्वारे की दीवारों को दूषित किया है और उनपर खालिस्तानी नारे लिख दिए हैं। गुरुद्वारे की तरफ से कहा गया कि यह खालसा साजणा दिवस के मौके पर हम एकता की सगंध खाते हैं। एक समूह द्वारा किया गया यह कृत्य निंदनीय है। कट्टरपंथी ताकतें सिखों क बांटना चाहती हैं और यह खौफ पैदा करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा, कट्टरपंथी हमारे बुजुर्गों के बलिदान को नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने विविधता और स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया है। हम उनकी फूट डालने की कोशिश को कामयाब नहीं होने देंगे। बता दें कि यह गुरुद्वारा 1906 में बनाया गया था। बीते रविवार को गुरुद्वारे में नगर कीर्तन और बैसाखी परेड का आयोनज किया गया था। इन कार्यक्रमों में खालिस्तान समर्थकों को शामिल होने से रोक दिया गया था। खालिस्तानियों ने गुरुद्वारे के अलावा सूरी और ब्रिटिश कोलंबिया में मंदिरों को भी टारगेट किया है। यहां भी खालिस्तानी नारे लिखे पाए गए। मंदिर के प्रवक्ता पुरुषोत्तम गयल ने कहा कि कनाडा में हिंदुओं और सिखों में एकता बनाए रखने के लिए लक्ष्मीनारायण मंदिर बढ़-चढ़कर काम करता है। इसीलिए मंदिर को भी निशाना बनाया गया है। यह संयोग नहीं है बल्कि नियोजित तरीके से ये नारे लिखे गए हैं। कुछ लोग हमारे बीच फूट डालने की साजिश कर रहे हैं। बीते साल दिसंबर में रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारे में लगभग हिंदुओं और सिख समुदाय के 60 लोग एकत्रित हुए थे। उन्होंने ऐलान किया था था कि फूट डालने वालों की साजिश को नाकाम किया जाएगा। 2023 और 24 में कनाडा में कई मंदिरों पर हमले किए गए थे। पुलिस अब तक उन उपद्रवियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। लक्ष्मी नारायण मंदिर में भी खालिस्तानियों ने उपद्रव किया था।

देश के 26 राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश के साथ होगी ओलावृष्टि, कहीं ऑरेंज तो कहीं यलो अलर्ट जारी

 नई दिल्ली राजस्थान और मध्य प्रदेश को छोड़कर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पश्चिम हिमालयी क्षेत्र समेत देशभर में अधिकांश क्षेत्रों में शनिवार को आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई और ओले गिरे। उत्तर पश्चिम भारत के पहाड़ी राज्यों में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हुई। मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव से यातायात संबंधी कुछ दुश्वारियां तो बढ़ीं, लेकिन ठंडी हवाओं ने भीषण और उमसभरी गर्मी से बड़ी राहत दिलाई। मौसम विभाग ने रविवार को भी उत्तराखंड समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंधड़, गरज, बिजली गिरने और कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश को लेकर ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को रेड अलर्ट की बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मूसलाधार बारिश हुई। कुछ जगह हिमपात भी हुआ। कश्मीर घाटी के गुरेज में भारी बर्फबारी के चलते 8वीं तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गंगा के तटवर्ती इलाकों में ऑरेंज अलर्ट के बीच तेज हवाएं चलीं और अलग-अलग स्थानों पर ओलावृष्टि और गरज के साथ भारी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा, कोंकण और गोवा और महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र को छोड़कर देश के छत्तीसगढ़ से लेकर कर्नाटक और केरल एवं पूर्वोत्तर के सभी सातों राज्यों में बारिश रिकॉर्ड की गई। पश्चिमी विक्षोभ से बिगड़ेगा मौसम उत्तर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिम झारखंड एवं उत्तर बांग्लादेश और आसपास के इलाकों पर ऊपरी और निचले क्षोभमंडल स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। दक्षिण हरियाणा और आसपास के क्षेत्र से उत्तर बांग्लादेश तक एक ट्रफ रेखा भी बनी हुई है। मौसम संबंधी इन प्रणालियों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल और पूर्वोत्तर के सभी सातों राज्यों के साथ 20 राज्यों में रविवार को आंधी-तूफान, भारी बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और झारखंड के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कश्मीर घाटी में बर्फबारी, कई रास्ते बंद कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश हुई है। सिंथन टॉप में बर्फबारी के कारण अनंतनाग-किश्तवाड़ मार्ग दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। राजदान पास में भी ताजा बर्फबारी के कारण बांदीपोरा-गुरेज मार्ग और गांदरबल जिले के जोजिला पास पर भी यातायात रोक दिया गया है। अफरवट, मच्छिल, पहलगाम के पहाड़ी क्षेत्र, पीर पंजाल की पहाड़ियों और अमरनाथ गुफा के आसपास के इलाके में भी बर्फबारी हुई है। पंजाब में आंधी-बारिश से सैंकड़ों पेड़ गिरे पंजाब के कैथल समेत विभिन्न जिलों में शुक्रवार की रात आंधी और बारिश के चलते सैकड़ों पेड़ गिर गए, लगभग 130 बिजली के खंभे उखड़ गए और गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। कैथल से पाटियाला, सिरटा रोड, करनाल रोड व सौंगल से हरसौला ग्रामीण रुट पर कई स्थानों पर पेड़ भी गिरे, जिससे आवागमन बाधित हुआ। दो डिग्री तापमान बढ़ा तो 52 फीसदी खेतों में घटेगी फसलों की विविधता जलवायु परिवर्तन अब हमारी दैनिक जिंदगी से लेकर वैश्विक खाद्य प्रणाली तक को गहराई से प्रभावित कर रहा है। इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय शोध में यह चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होती है, तो दुनिया की 52 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर फसलों की विविधता में भारी गिरावट आएगी। यह शोध नेचर फूड नामक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है। फिनलैंड की आल्टो यूनिवर्सिटी, जर्मनी की गोएटिंगन यूनिवर्सिटी और स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस शोध को अंजाम दिया है। इसमें वैश्विक तापमान में 1.5 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी के चार परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए 30 प्रमुख फसलों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यदि तापमान 3 डिग्री तक बढ़ता है तो कृषि भूमि का 56 फीसदी हिस्सा फसलों की विविधता खो सकता है। यह गिरावट मुख्यतः भूमध्यरेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में देखने को मिलेगी। विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में, जहां वर्तमान कृषि भूमि का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा प्रभावित हो सकता है। 

सीईटी परीक्षा में प्रवेश से पहले जनेऊ उतारवाने पर बवाल, निलंबित हुए प्रिंसिपल और स्टाफ

बीदर कर्नाटक के बीदर से बड़ी खबर आ रही है। यहां साईं स्फूर्ति पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. चंद्र शेखर बिरादर और स्टाफ सतीश पवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। छात्र सुचिव्रत कुलकर्णी ने दावा किया था कि 17 अप्रैल को बीदर के साईं स्फूर्ति पीयू कॉलेज में कर्नाटक सीईटी परीक्षा केंद्र पर उनसे जनेऊ उतरवाया गया था। दरअसल,  17 अप्रैल को कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी परीक्षा) के दौरान परीक्षा केंद्र पर एक छात्र से जबरन जनेऊ (पवित्र धागा) हटाने की मांग की गई। छात्र बीदर के साईं स्फूर्ति पीयू कॉलेज में परीक्षा देने गया था, लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने कहा कि अगर वह जनेऊ नहीं हटाता, तो उसे परीक्षा देने नहीं दिया जाएगा। छात्र ने धार्मिक प्रतीक बताते हुए जनेऊ हटाने से इनकार किया, जिसके बाद उसे परीक्षा देने से रोक दिया गया और वह वापस घर लौट आया। छात्र सुचिव्रत कुलकर्णी की मां नीता कुलकर्णी ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, ‘मेरे बेटे ने कहा कि वह जनेऊ नहीं हटा सकता, क्योंकि यह धार्मिक मान्यता से जुड़ा हुआ है। फिर भी उसे परीक्षा से बाहर कर दिया गया। ये बहुत गलत हुआ है।’ उन्होंने सरकार से मांग की है कि या तो उनके बेटे के लिए दोबारा परीक्षा कराई जाए, या फिर उसे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलाया जाए, जिसकी फीस सरकार या संबंधित कॉलेज द्वारा दी जाए। आदिचुंचनगिरी पीयू कॉलेज में भी हुआ था विवाद इससे पहले आदिचुंचनगिरी पीयू कॉलेज में भी ऐसा ही विवाद हुआ था। पुलिस ने शनिवार को बताया कि सीईटी परीक्षा केंद्र आदिचुंचनगिरी पीयू कॉलेज के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों से परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले अपने ‘जनिवार’ (ब्राह्मणों द्वारा पहना जाने वाला पवित्र धागा) उतारने के लिए कहा। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर तैनात दो होमगार्डों को इस संबंध में निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने छात्रों से पवित्र धागा उतारने के लिए कहा था। पुलिस ने दर्ज किया मामला कर्नाटक ब्राह्मण सभा के नटराज भागवत की ओर से शुक्रवार को शिकायत दर्ज किए जाने के बाद मामला दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करना), 351 (1) (आपराधिक धमकी), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 3(5) (सामान्य इरादा) शामिल हैं। समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन के संज्ञान में घटना लाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और छात्रों से परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले ‘जनेऊ’ उतारने के लिए कहने से छात्रों के साथ-साथ समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। दो होमगार्ड को निलंबित किया गया जिला प्रभारी मंत्री मधु बंगरप्पा के निर्देश के बाद शिवमोगा के डिप्टी कमिश्नर गुरुदत्त हेगड़े ने दो होमगार्ड को निलंबित कर दिया और सीईटी आयोजित करने वाले कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण को एक रिपोर्ट सौंपी गई है। कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों का चयन करने के लिए आयोजित किया जाता है। क्या है मामला? पुलिस ने बताया कि बुधवार को आदिचुंचनगिरी पीयू कॉलेज परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा कर्मचारियों ने तीन छात्रों से कथित तौर पर ‘जनेऊ’ उतारने के लिए कहा। छात्रों में से एक ने पवित्र धागा उतारने से इनकार कर दिया, फिर भी उसे परीक्षा देने की अनुमति दे दी गई, जबकि दो अन्य ने परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले इसे उतार दिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘प्रारंभिक जांच के अनुसार जब हमने कॉलेज अधिकारियों से पूछताछ की, तो उन्होंने कहा कि उनकी ओर से केवल परीक्षा के लिए भवन दिया गया है और प्रवेश परीक्षा आयोजित करने या सुविधा प्रदान करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है, जबकि परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी छात्र से अपनी शर्ट या जनेऊ उतारने के लिए नहीं कहा। नियम के अनुसार, उन्होंने केवल छात्रों से काशी धारा (कलाई के चारों ओर पहना जाने वाला पवित्र धागा) उतारने के लिए कहा था।’

दिल्ली बीजेपी कार्यालय में बीजेपी की वन नेशन-वन इलेक्शन पर अहम बैठक आज

नई दिल्ली ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ यानी एक देश-एक चुनाव को लेकर बीजेपी आज अहम बैठक करने जा रही है। ये बैठक दिल्ली बीजेपी कार्यालय में रविवार दोपहर 3:30 बजे होगी। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल करेंगे। इस अहम मीटिंग में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी मौजूद रहेंगे। ठक में राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल दिल्ली के विधायकों से ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर चर्चा करेंगे। सुनील बंसल उस हाईपावर कमेटी का हिस्सा हैं, जो ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर पब्लिक ओपिनियन के लिए बनाई गई है। सूत्रों की मानें तो इससे पहले भी कई राज्यों में ऐसी बैठकों में उन्होंने हिस्सा लिया है और दिल्ली में उनकी मौजूदगी उसी श्रृंखला का हिस्सा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह बैठक बहुत अहम है, और ये उन मीटिंग्स का हिस्सा है जो देशभर में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को लेकर हर राज्य में की जा रही हैं। ‘एक देश एक चुनाव’ का विचार पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने से है। इसका मतलब यह है कि पूरे भारत में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे। यानी मतदान एक ही समय के आसपास होगा.वर्तमान में, राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग होते हैं। 17 दिसबंर 2024 को सदन में पेश हुआ था विधेयक बता दें कि संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र एक-देश एक चुनाव से संबंधित विधेयक को 17 दिसंबर को पेश किया गया था। सदन में मत विभाजन के बाद 129वें संविधान संशोधन विधेयक 2024 को फिर से स्थापित किया गया था। विधेयक को पेश किए जाने के पक्ष में 263 वोट, जबकि विरोध में 198 वोट पड़े थे. इस संसोधन पर विपक्षी दलों ने विरोध जताया था और इसे जेपीसी में भेजने की मांग की थी। पीएम मोदी ने भी इस बिल को जेपीसी में भेजने पर सहमति जताई थी। सदन में चर्चा के बाद इस विधेयक पर जेपीसी का गठन किया गया है। बिल पर JPC गठित, समिति में अनुराग-प्रियंका समेत 39 सांसद, राज्यसभा से 12 MP  वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर एक राय बनाने जेपीसी का गठन किया गया है। संसद की संयुक्त समिति में 12 राज्यसभा सासंद सहित सहित 39 सासंदो को शामिल किया गया है। संयुक्त समिति में बीजेपी से 16 और कांग्रेस के 5 सांसद शामिल है। समिति में राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घनश्याम तिवाड़ी, भुनेश्वर कलिता, के लक्ष्मण, कविता पाटीदार, जनता दल (यूनाइटेड) के संजय झा, कांग्रेस से रणदीप सिंह सुरजेवाला, और मुकुल वासनिक, तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले, द्रविड़ मुनेत्र कषगम के पी विल्सन, आप के संजय सिंह, बीजू जनता दल से मानस रंजन मंगराज और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से वी विजय साई रेड्डी हैं। समिति में लोकसभा से 27 सदस्य वन नेशन-वन नेशन इलेक्शन बिल पर बनी संयुक्त समिति कांग्रेस से प्रियंका गांधी वाड्रा , मनीष तिवारी और सुखदेव भगत को शामिल किया है. समाजवादी पार्टी से धर्मेंद्र यादव और छोटेलाल, तृणमूल कांग्रेस से कल्याण बनर्जी, द्रमुक से टी एम सेल्वागणपति, तेलुगु देशम पार्टी से हरीश बालयोगी, शिवसेना (उबाठा) से अनिल देसाई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) से सुप्रिया सुले, शिवसेना से श्रीकांत शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से शांभवी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के के शामिल हैं। राधाकृष्णन, राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान और जन सेना पार्टी के बालाशौरी वल्लभनेनी को इस समिति का हिस्सा होंगे. वहीं भारतीय जनता पार्टी से पीपी चौधरी, सीएम रमेश, बांसुरी स्वराज, पुरुषोत्तम रुपाला, अनुराग ठाकुर, विष्णु दयाल शर्मा, भर्तृहरि महताब, संबित पात्रा, अनिल बलूनी, विष्णु दत्त शर्मा, बैयजंत पांडा और संजय जायसवाल शामिल हैं।

F-1 स्टूडेंट वीज़ा स्टेटस रद्द कर करने के मामले में भारतीय और चीनी छात्रों ने अमेरिकी प्रशासन के किया मुकदमा

वाशिंगटन अमेरिका में पढ़ रहे तीन भारतीय और दो चीनी छात्रों ने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और अन्य इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। छात्रों का आरोप है कि अधिकारियों ने ‘एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से’ उनका F-1 स्टूडेंट वीज़ा स्टेटस रद्द कर दिया, जिससे सैकड़ों नहीं तो हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रभावित हुए हैं। यह मुकदमा अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन की ओर से न्यू हैम्पशायर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया है। याचिका में कहा गया है कि F-1 स्टेटस समाप्त होने के कारण छात्र न केवल अवैध प्रवासी की स्थिति में आ गए हैं, बल्कि उन्हें डिटेंशन, डिपोर्टेशन और गंभीर आर्थिक व शैक्षणिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि अब वे अपनी डिग्री पूरी नहीं कर सकते और ना ही ग्रेजुएशन के बाद मिलने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा ले सकते हैं। कौन हैं ये छात्र ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा कराने वाले छात्रों में भारतीय छात्र लिंकिथ बाबू गोरेला हैं। इनका मास्टर्स प्रोग्राम 20 मई को पूरा होना था। लेकिन F-1 स्टेटस रद्द होने से न वे डिग्री प्राप्त कर सकते हैं, न किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं। इसी तरह थनुज कुमार और मणिकंता पासुला का केवल एक सेमेस्टर बाकी है, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना डिग्री मिलना असंभव लग रहा है। दूसरी ओर चीनी छात्र हैंगरुई झांग की आय का एकमात्र स्रोत रिसर्च असिस्टेंटशिप था, जो अब स्टेटस खत्म होने के चलते रोक दिया गया है। हाओयांग एन को $3.29 लाख डॉलर (लगभग 2.75 करोड़ रुपए) की पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती है। छात्रों के वकीलों का कहना है कि अमेरिकी सरकार ने वीजा स्टेटस खत्म करने से पहले जरूरी नोटिस या सूचना नहीं दी, जो कानूनन देना अनिवार्य है। याचिका में यह भी कहा गया है कि छात्र नियमों का पालन कर रहे थे, उन्होंने पढ़ाई में उल्लेखनीय प्रगति की, किसी भी अवैध रोजगार से जुड़े हुए नहीं हैं और न ही किसी गंभीर अपराध में दोषी नहीं पाए गए हैं।

बाबा बर्फानी यात्रा: श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने हेल्प डेस्क के तहत दो ई-मेल की सेवा श्रद्धालुओं के लिए शुरू की, यात्रा होगी आसान

जम्मू बाबा अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। बाबा अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालु, यात्रा से संबंधित किसी तरह की जानकारी के लिए ई-मेल भेज सकते हैं। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने हेल्प डेस्क के तहत दो ई-मेल की सेवा श्रद्धालुओं के लिए शुरू की हैं। बाबा अमरनाथ की यात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी जो 38 दिन की होगी और 9 अगस्त को रक्षा बंधन वाले दिन संपन्न होगी। यात्रियों के लिए जारी हुआ ई-मेल यात्रा के लिए एडवांस पंजीकरण (Amarnath Yatra Advance Registration) 14 अप्रैल से शुरू हुआ था जो ऑनलाइन व ऑफलाइन तरीके से सुचारू रूप से चल रहा है। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अनुसार आइटी हेल्प डेस्क एसएएसबी में ithelpdesksasb1@gamil.com और आइटी हेल्प डेस्क एसएएसबी 2 में ithelpdesksasb2@gamil.com में किसी एक पर ई-मेल भेज कर यात्रा से संबंधित मुद्दों का समाधान किया जा सकता है। श्रद्धालुओं को उक्त दो ई-मेल से एक मेल करनी होगी। यह बोर्ड के कार्यालय के कामकाज के समय में ही भेजी जाए। श्रद्धालुओं से की गई है ये अपील श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे बार बार ई-मेल न भेंजे। हालांकि यात्रा शुरू होने में अभी समय बाकी है लेकिन श्रद्धालुओं को यात्रा के पंजीकरण से लेकर कोई बात पूछनी हो या कोई अन्य जानकारी की जरूरत हो, तो वे ई-मेल भेज कर जानकारी हासिल कर सकती हैं। बाबा अमरनाथ यात्रा की तैयारियां जोरो पर हैं। संबंधित जिला प्रशासन व विभाग तैयारियों को तेजी दे रहे है। यात्रा के मार्गों पर दुकानें व टेंट लगाने के लिए आवेदन फार्म हासिल कर लिए गए है। अब अलाट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। 120 लंगर संचालकों को मिल चुकी है अनुमति वहीं लंगर वाले संगठन यात्रा के लिए राशन की सामग्री व अन्य आवश्यक वस्तुएं जुटा रहे हैं। अब तक 120 लंगर संचालकों को लंगर लगाने की अनुमति मिल चुकी है। उन्हें बोर्ड की तरफ से ऑफर लेटर जा चुके है लेकिन कई लंगर वाले अभी तक लंगर की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। बाबा बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के प्रधान राजन गुप्ता का कहना है कि बोर्ड के साथ बार बार संपर्क किया जा रहा है। जिन लंगर वालों ने आवेदन किया है, उन्हें लंगर की अनुमति मिलनी चाहिए।

प्रह्लाद जोशी ने की कर्नाटक में छात्रों से पवित्र धागा उतरवाने की न‍िंदा, बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्‍पीड़न पर भी जताई च‍िंता

बेंगलुरु केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक में पवित्र धागे (जनेऊ) को लेकर हुए विवाद और अन्य मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को “छद्म धर्मनिरपेक्ष” करार देते हुए आरोप लगाया कि कुछ स्कूलों में छात्रों से पवित्र धागा उतारने को कहा गया। जोशी ने कहा कि एक मामले में धागे को जब्त कर काटने का आरोप है, जो निंदनीय है। उन्होंने बताया कि इस धागे को न केवल ब्राह्मण, बल्कि ओबीसी, क्षत्रिय, विश्वकर्मा और अन्य समुदाय भी पहनते हैं। जोशी ने कहा कि संबंधित अधिकारी ने माफी मांग ली है, लेकिन जिन छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका गया, उनके लिए सरकार साइक्लोथॉन जैसे आयोजन के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की भी कड़ी निंदा की। जोशी ने कहा कि बांग्लादेश में एक हिंदू नेता का अपहरण और हत्या बेहद निंदनीय है। केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय इस मामले की जांच कर रहे हैं। जोशी ने कर्नाटक में जाति आधारित जनगणना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोई उनके घर सर्वे के लिए नहीं आया, फिर सरकार कैसे दावा कर सकती है कि सर्वे पूरा हो गया? उन्होंने तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही। भाषा नीति पर जोशी ने कहा कि मोदी सरकार ने कभी हिंदी थोपने की कोशिश नहीं की। नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों को स्थानीय भाषाओं में पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद गैर-हिंदी भाषी राज्य से हैं और भाषा के आधार पर विभाजन करने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की आलोचना की। जोशी ने 4 फीसद आरक्षण विधेयक पर भी टिप्पणी की, जो राज्यपाल के अनुसार असंवैधानिक होने के कारण राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति लेंगे। जोशी के बयानों से कर्नाटक में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस तेज हो सकती है। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस सरकार के रवैए और केंद्र-राज्य संबंधों पर सवाल उठाती हैं।

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