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तेहरान में होने वाली वार्ता को गंभीरता और पूरे दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाएगा, वार्ता का दूसरा दौर शुरू

रोम अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर शनिवार को इटली में शुरू हुआ। दोनों पक्ष तेहरान के असैन्य परमाणु कार्यक्रम और देश के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने पर चर्चा करेंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मध्य पूर्व में अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में यह वार्ता रोम स्थित ओमान के दूतावास की ओर से आयोजित की जा रही है। इससे पहले शुक्रवार को मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि तेहरान शनिवार को होने वाली वार्ता को गंभीरता और पूरे दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाएगा, भले ही दूसरे पक्ष के इरादों के बारे में ‘गंभीर संदेह’ हो। उन्होंने कहा, “हम अमेरिकी पक्ष के विचार सुनने का इंतजार कर रहे हैं। अगर पर्याप्त गंभीरता और दृढ़ संकल्प है, तो संभव है कि समझौता हो जाए।” अराघची ने कहा, “हम ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पूरी तरह तैयार हैं, अगर दूसरी तरफ भी ऐसी ही इच्छाशक्ति है और वे अनुचित व अवास्तविक मांगें नहीं करते हैं, तो मेरा मानना ​​है कि समझौता संभव है।” विदेश मंत्री ने ईरान और विश्व शक्तियों के बीच 2015 के परमाणु समझौते में रूस की भूमिका की तरीफ की। उन्होंने उम्मीद जताई कि मॉस्को किसी भी नए समझौते में अपनी सहायक भूमिका जारी रखेगा। इस बीच, शुक्रवार को पेरिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई कि ईरान के साथ बातचीत फलदायी होगी और कुछ परिणाम निकल सकता है। रुबियो ने कहा, “राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि बातचीत जारी रहेगी और इससे कुछ नतीजा निकलेगा। हम सभी शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान चाहते हैं। यह कुछ ऐसा होना चाहिए जो ईरान को न सिर्फ अभी बल्कि भविष्य में परमाणु हथियार रखने से रोके, न कि केवल 10 वर्षों के लिए।” पिछले सप्ताह मस्कट में आयोजित वार्ता के पहले दौर में, अराघची ने ओमानी विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी की मदद से विटकॉफ के साथ ‘अप्रत्यक्ष’ चर्चा की। बातचीत ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की संभावना पर केंद्रित थी। वार्ता का प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रखा था। उन्होंने ईरान को धमकी दी थी कि अगर तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर वाशिंगटन के साथ समझौता नहीं करता है तो उसे बमबारी और द्वितीयक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। ईरान ने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे औपचारिक रूप से ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है। जेसीपीओए को ईरान परमाणु समझौता या ईरान डील के नाम से भी जाना जाता है। इसके तहत प्रतिबंधों में राहत और अन्य प्रावधानों के बदले में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर राजी हुआ था। इस समझौते को 14 जुलाई 2015 को वियना में ईरान, पी5+1 (संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका- प्लस जर्मनी) और यूरोपीय संघ के बीच अंतिम रूप दिया गया। अमेरिका ने 2018 में समझौते से खुद को अलग कर लिया और ‘अधिकतम दबाव’ की नीति के तहत प्रतिबंध लगा दिए। परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।  

कनाडा के हैमिल्टन शहर में हरसिमरत एक बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी, तभी आरोपी ने गोली मारकर की हत्या

कनाडा कनाडा के हैमिल्टन शहर में एक 21 साल की भारतीय छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे भारतीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। छात्रा की पहचान हरसिमरत रंधावा के रूप में की गई है, जो कि हैमिल्टन के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। यह घटना उस समय हुई जब हरसिमरत एक बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी। एक अज्ञात कार सवार ने उस पर गोलीबारी की, जिससे उसकी मौत हो गई। मामला गोलीबारी से जुड़ा हुआ है: स्थानीय पुलिस के मुताबिक, हरसिमरत की हत्या दो कार सवारों के बीच हुई गोलीबारी का शिकार बनी। पुलिस ने बताया कि हरसिमरत सीने में गोली लगने के बाद मौके पर गिर पड़ी थी। इसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गई। पुलिस अभी इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। भारतीय महावाणिज्य दूतावास की संवेदनाएं: टोरंटो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक पोस्ट में इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “हम हैमिल्टन, ओंटारियो में भारतीय छात्रा हरसिमरत रंधावा की दुखद मौत से बहुत दुखी हैं। हम हरसिमरत के परिवार के संपर्क में हैं और इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके साथ हैं।” घटना का समय और स्थान: हैमिल्टन पुलिस ने बताया कि स्थानीय समयानुसार शाम करीब 7.30 बजे उन्हें गोलीबारी की सूचना मिली। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो उसने हरसिमरत को सीने में गोली लगने के साथ पाया। पुलिस ने तत्परता से उसे अस्पताल भेजा, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस की जांच जारी: स्थानीय पुलिस फिलहाल घटना के कारणों और आरोपियों की पहचान में जुटी हुई है। यह हत्या सिर्फ एक युवा छात्रा की दुखद मौत नहीं है, बल्कि यह पूरी भारतीय समुदाय के लिए एक बड़ा आघात है, जो हमेशा कनाडा को सुरक्षित और शांति का प्रतीक मानते थे।  

उत्तर 24 परगना जिले के जेलियाखाली, संदेशखाली में भाजपा और तृणमूल समर्थकों के बीच झड़प के कारण तनाव बढ़ गया

कोलकाता उत्तर 24 परगना जिले के जेलियाखाली, संदेशखाली में भाजपा और तृणमूल समर्थकों के बीच झड़प के कारण तनाव बढ़ गया है। इस झगड़े में तृणमूल और भाजपा के कम से कम 10 कार्यकर्ता घायल हो गए। उनमें से आठ की हालत ऐसी थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। हंगामे और मारपीट के संबंध में संदेशखली-2 ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष दिलीप मल्लिक ने दावा किया कि कुछ भाजपा कार्यकर्ता स्थानीय मस्जिद के इमाम से बात कर रहे थे। उसी समय वहां कुछ तृणमूल कार्यकर्ता पहुंच गए और उन्होंने पूछा कि क्या चर्चा हो रही है तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर अचानक हमला कर दिया। जिसमें छह तृणमूल कार्यकर्ता और समर्थक गंभीर रूप से घायल हो गए। भाजपा कार्यकर्ता पर गोलीबारी का आरोप दिलीप मल्लिक ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर गोलीबारी का भी आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट सांगठनिक जिला अध्यक्ष सुकल्याण वैद्य ने दावा किया कि तृणमूल ने वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में जालियाखाली में विरोध मार्च का आयोजन किया था। तृणमूल के लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जबरन उस जुलूस में ले जाने की कोशिश की। जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने जुलूस में शामिल होने से इन्कार कर दिया तो तृणमूल के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। तभी दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई। आठ लोग अस्पताल में भर्ती उनका दावा है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बिना उकसावे के भाजपा कार्यकर्ताओं की पिटाई की। हंगामे की खबर मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। उन्होंने दोनों पक्षों के आठ घायल लोगों को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। इस अशांति के मद्देनजर संदेशखाली थाने के ओसी बालया घोष ने कहा कि घटना के सिलसिले में दोनों पक्षों के कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

चीन में हाफ मैराथन के दौरान इंसानों के साथ रोबोट ने भी भाग लिया, यह रोबोट की विश्व की पहली ऐसी दौड़ बताई जा रही है

बीजिंग चीन ने शनिवार को हाफ मैराथन का आयोजन किया। यह अपने आप में अनोखा था, क्योंकि इसमें इंसानों के साथ रोबोट ने भी भाग लिया। यह ह्यूमनाइड रोबोट की विश्व की पहली ऐसी दौड़ बताई जा रही है। इस दौरान रोबोटिक्स में बीजिंग की अमेरिका के साथ बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच एआई प्रौद्योगिकियों में प्रगति को प्रदर्शित किया गया। शीर्ष विश्वविद्यालयों और फर्मों के अपने तकनीकी संचालकों के साथ 21 ह्यूमनाइड रोबोट (मानव की तरह दिखने वाले रोबोट) बीजिंग में 21 किलोमीटर की दौड़ में शामिल हुए। 20 टीमों ने लिया हिस्सा इंसानों के साथ दौड़ते इन रोबोटों को देखने के लिए फुटपाथों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। प्रतियोगिता के बाद कई श्रेणियों में पुरस्कार वितरित किए गए। इस दौरान न केवल गति, बल्कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, चलने के तरीके, एथलेटिक प्रदर्शन और इंजीनियरिंग क्षमता आदि को ध्यान रखा गया।   एजेंसी ने एक वीडियो फुटेज भी जारी किया है, जिसमें कई रोबोट प्रतियोगियों के साथ दौड़ रहे हैं, जिनमें से एक रोबोट ने काली टोपी और सफेद दस्ताने पहन रखे हैं। हालांकि, इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट वीडियो से पता चला कि यह एक सहज दौड़ नहीं थी, क्योंकि कुछ रोबोट को शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि वे दुर्घटनाग्रस्त भी हो गए। इस प्रतियोगिता में 20 प्रतिस्पर्धी टीमों ने भाग लिया। इनमें तियांगोंग टीम के तियांगोंग अल्ट्रा ने दो घंटे 40 मिनट के समय के साथ रोबोट के बीच दौड़ जीती। इथियोपिया के एलियास डेस्टा द्वारा इस दौड़ को एक घंटे और दो मिनट में पूरा कर लिया गया, जिन्हें इंसानों की दौड़ का विजेता घोषित किया गया।

‘उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद’ ने 10वीं और 12वीं बोर्ड के परिणाम घोषित किये, जतिन जोशी बने प्रदेश टॉपर

हल्द्वानी ‘उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद’ ने शनिवार को 10वीं और 12वीं बोर्ड के परिणाम घोषित कर दिए हैं। हल्द्वानी के जतिन जोशी 99.20 प्रतिशत अंक प्राप्त करके प्रदेश में टॉप किया है। जतिन की सफलता से परिवार समेत पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। मीडिया से बात करते हुए जतिन ने अपनी सफलता का राज बताया। जतिन कुसुमखेड़ा के हरगोविंद सुयाल इंटर कॉलेज के छात्र हैं। जतिन के प्रदेश टॉपर बनने से न केवल उनके माता-पिता और गुरुजनों को गर्व की अनुभूति हो रही है, बल्कि पूरे विद्यालय और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। मीडिया से बात करते हुए जतिन ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। खास बात यह है कि उनकी बड़ी बहन ने इस बार 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी और उन्होंने प्रदेश स्तर पर 25 वां स्थान हासिल किया है। जतिन ने बताया, “सफलता का पूरा श्रेय स्कूल के अध्यापकों और उनके अभिभावकों को जाता है। मैं घर पर सेल्फ स्टडी किया करता था, कभी भी कोचिंग नहीं गया। मेरे क्लास टीचर गोकुल सर ने मुझे पूरे साल गाइड किया।” अपनी पढ़ाई की स्ट्रेटजी के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया, “मैं रोजाना 3-4 घंटे की पढ़ाई करता था। अगर बच्चे नियमित होकर साल भर पढ़ाई करें तो उन्हें परीक्षा में दबाव लेने की जरूरत नहीं होगी। आगे मुझे जेईई की तैयारी करनी है। मैं इंजीनियर बनना चाहता हूं।” जतिन की बड़ी बहन ने बताया कि उत्तराखंड बोर्ड एग्जाम में 12वीं में पीसीएम स्ट्रीम (फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ) में उनकी 25वीं रैंक आई है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभावकों, स्कूल के अध्यापकों को दिया था। उन्होंने सिविल सर्विसेज में जाने की इच्छा जाहिर। जतिन के पिता ने बेटे की सफलता पर खुशी प्रकट की की। उन्होंने कहा, “हमारे बेटे ने यह मुकाम हासिल किया है, जो बहुत ही गर्व की बात है।” स्कूल के प्रधानाचार्य ने बच्चों की सफलता पर खुशी जताते हुए जतिन के प्रदेश टॉपर बनने को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने बताया, “वर्ष भर हमने प्लानिंग के साथ बच्चों को पढ़ाया। उन्हें मेरिट में कैसे लाया जाए, इसकी कोशिश की। अब हमें उसका परिणाम मिला है। पिछले वर्ष हमने इंटरमीडिएट में स्टेट टॉप किया था, और इस बार हाईस्कूल में।”

जिन लोगों को लगता है कि औरंगजेब एक नायक था उन्हें नेहरू की किताब पढ़ना चाहिए: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज को राष्ट्रीय नायक बताया। औरंगजेब को अपना आदर्श मानने वालों को नसीहत देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि जिन लोगों को लगता है कि औरंगजेब एक नायक था उन्हें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की किताब पढ़ना चाहिए, जिन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब एक क्रूर और कट्टरपंथी शासक था। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में मेवाड़ शासक महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे रक्षा मंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप अतुल्यनीय साहस और देश भक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने अपने स्वाभिमान और अपनी धरती की रक्षा के लिए मुगल सम्राट अकबर को सीधी चुनौती दी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता ने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद वामपंती इतिहासकारों ने महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी दोनों को ही उचित श्रेय नहीं दिया, बल्कि औरंगजेब जैसे क्रूर शासकों का महिमामंडन किया। ऐसा क्रूर और कट्टरपंथी व्यक्ति नायक नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब का भाई दारा शिकोह एक धार्मिक व्यक्ति था। उसने उपनिषदों का अनुवाद किया था और औरंगजेब ने सत्ता के लिए उनकी हत्या कर दी। महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में बात करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा, “अपनी वीरता के अलावा महाराणा प्रताप ने समाज के सभी वर्गों को एकजुट किया था। उनकी सेना में आदिवासी और मुसलमान सभी शामिल थे। हकीम खान सूरी ने हल्दीघाटी में मुगलों से राणा प्रताप के लिए लड़ते हुए अपने जीवन की आहूति दी थी, वहीं एक मुस्लिम युवक छत्रपति शिवाजी महाराज का अंगरक्षक था।” भाजपा नेता ने कहा कि राणा प्रताप और शिवाजी महाराज दोनों ही मुस्लिम विरोधी नहीं थे। न ही वह किसी धर्म को लेकर कट्ट्रर थे। वह सभी का सम्मान करते थे। रक्षा मंत्री ने कहा, “आज हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम देश के युवाओं को बताएं कि महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेरणा के जीवित स्त्रोत हैं।” उन्होंने कहा कि बाबर, तैमूर, औरंगजेब, गौरी, गजनवी का महिमामंडन करने से किसी को भी मुस्लिम वोट नहीं मिलेगा। जो लोग इन लोगों की प्रशंसा करते हैं, वे भारतीय मुसलमानों का अपमान करते हैं। भाजपा के लिए सभी भारतीय समान हैं और वह किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह अपने पूर्वजों से सीखा है।’’

यूनुस से नहीं संभल रहा बांग्लादेश, अमेरिका ने बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र के लिए स्तर 4 की एडवाइजरी जारी की है

ढाका बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हालात काफी खराब हो गए हैं। यूनुस सरकार से स्थिति संभल नहीं रही। आए दिन अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है। अब अमेरिका ने भी अपने लोगों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है। अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए लेवल-3- यात्रा पर पुनर्विचार करें और खासतौर पर चटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र के लिए ‘लेवल 4- यात्रा न करें’ की चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र के लिए स्तर 4 की एडवाइजरी जारी की है, जिसमें हिंसा, अपराध और अपहरण के उच्च जोखिम का हवाला दिया गया है। 18 अप्रैल को अपडेट की गई सलाह में खगराचारी, रंगमती और बंदरबन जिलों (सामूहिक रूप से चटगांव हिल ट्रैक्ट्स के रूप में जाना जाता है) को शामिल किया गया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि इस क्षेत्र में सांप्रदायिक अशांति, आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा की घटनाएं देखी गई हैं, जिसमें IED विस्फोट और सक्रिय गोलीबारी शामिल हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले और व्यक्तिगत विवादों से जुड़े अपहरणों की भी रिपोर्ट किया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को इस क्षेत्र में जाने से रोक दिया गया है और यात्रा के लिए बांग्लादेश के गृह मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। सलाह में कहा गया है, “किसी भी कारण से इन क्षेत्रों की यात्रा न करें।” समय-समय पर समीक्षा के बाद अपडेट की गई सलाह में अमेरिकी नागरिकों से नागरिक अशांति, अपराध और आतंकवाद के कारण बांग्लादेश की यात्रा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया है। जबकि 2024 के मध्य में अंतरिम सरकार के गठन के बाद राजनीतिक अशांति से जुड़ी हिंसा कुछ कम हो गई है, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शन अभी भी बिना किसी चेतावनी के हिंसक हो सकते हैं। एडवाइजरी में कहा गया है, “इन यात्रा प्रतिबंधों, बुनियादी ढांचे की कमी और सीमित मेजबान सरकार के आपातकालीन प्रतिक्रिया संसाधनों के कारण, बांग्लादेश में अमेरिकी नागरिकों को आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने की अमेरिकी सरकार की क्षमता सीमित हो सकती है, विशेष रूप से ढाका के बाहर।” यात्रियों को सतर्क रहने, सभी प्रकार की भीड़-भाड़ से बचने और बांग्लादेश की यात्रा की योजना बनाने से पहले पूरी एडवाइजरी पढ़ने की सलाह दी गई है।

महाराष्ट्र के हित में वह छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाने के लिए तैयार हैं और वे उद्धव ठाकरे के साथ काम कर सकते हैं

मुंबई क्या महाराष्ट्र की राजनीति की दशकों तक धुरी रहे ठाकरे परिवार में एकता होने वाली है? राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता के नाम पर जैसा रुख दिखाया है, उससे ऐसी ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यही नहीं शनिवार को दोनों ने ही अलग-अलग जगहों पर कहा कि महाराष्ट्र और मराठी लोगों के हित में वे अपने मतभेद भुलाकर साथ भी आ सकते हैं। शनिवार का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लीडर राज ठाकरे का एक पॉडकास्ट रिलीज हुआ। इसमें उनसे महेश मांजरेकर ने बात की है, जो मूल रूप से मराठी फिल्ममेकर हैं। मांजरेकर के एक सवाल के जवाब में कहा कि महाराष्ट्र के हित में वह छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाने के लिए तैयार हैं और वे उद्धव ठाकरे के साथ काम कर सकते हैं। इसी पर उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की ट्रेड यूनियन भारतीय कामगार सेना के एक आयोजन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह मराठी और महाराष्ट्र के हित में सारे मतभेद भुलाने के लिए तैयार हैं। लेकिन उद्धव ने एक शर्त भी रख दी कि राज ठाकरे को वादा करना होगा कि वह ऐसे दलों के साथ नहीं जाएंगे, जो महाराष्ट्र विरोधी हैं या फिर ऐसे दलों के साथ काम करते हैं। दरअसल महेश मांजरेकर ने सवाल पूछा था कि क्या दोनों ठाकरे बंधु साथ आ सकते हैं। इस पर राज ठाकरे ने कहा, ‘मेरे लिए महाराष्ट्र का हित सबसे अहम है। उसके बाद ही किसी और चीज का स्थान आता है। उसके लिए मैं किसी भी मतभेद को भुलाने और उद्धव ठाकरे के साथ काम करने के लिए तैयार हूं। बस सवाल इतना ही है कि क्या वह भी इसके लिए राजी होंगे।’ वहीं उद्धव ठाकरे ने तो इसका तुरंत ही जवाब दे दिया। एक कार्य़क्रम में उन्होंने कहा कि मैं साथ आने के लिए तैयार हूं। मराठी और महाराष्ट्र के हित में हम ऐसा करेंगे। लेकिन राज ठाकरे को यह कहना होगा कि वह महाराष्ट्र विरोधी लोगों के साथ नहीं जाएंगे। वह उनके साथ भी नहीं जाएंगे, जो इन लोगों का समर्थन करते हैं। एक बड़ी शर्त रखते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ऐसी शपथ राज ठाकरे को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने लेनी होगी। बता दें कि बीते कुछ समय में कई शादी समारोह एवं आयोजनों में उद्धव और राज ठाकरे आमने-सामने आए हैं। दोनों के बीच इन मौकों पर बातचीत भी हुई है। तभी से दोनों को लेकर कयास लगते रहते हैं कि क्या वे साथ आ सकते हैं।

अमेरिका ने चीन पर 245 फीसदी का टैरिफ लगाया है, जबकि भारत समेत कई देशों को अगले 90 दिनों की मोहलत दी

बीजिंग अमेरिका ने चीन पर 245 फीसदी का टैरिफ लगाया है, जबकि भारत समेत कई देशों को अगले 90 दिनों की मोहलत दी है। इस पर चीन का कहना है कि भले ही अमेरिका ने हमारे ऊपर ही फिलहाल टैरिफ लगाया है, लेकिन इसका भी नुकसान तमाम देशों को होगा। चीन ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका चाहता है कि 70 अन्य देश भी चीन से कारोबार कम करें। उसका कहना है कि ऐसा न हो कि वे चीन से सामान की खरीद करें और फिर अमेरिका को ही निर्यात कर दें। ऐसे में उन्हें चीन से अपने कारोबार को ही कम करना होगा। अमेरिका का कहना है कि चीनी कंपनियों को टैरिफ से बचने के लिए रीलोकेट भी न होने दिया जाए। इसके अलावा सस्ते चीनी माल को भी इन देशों में एंट्री न देने की बात कही है। इसी को आधार बनाते हुए ड्रैगन का कहना है कि यदि चीन के साथ दुनिया के तमाम देशों ने कारोबार बंद किया तो वैश्विक मंदी के हालात पैदा होंगे। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि अमेरिका ने हमारे ऊपर ऊंचा टैरिफ लगाया है, जबकि दूसरे देशों को रियायत दी है। उसकी कोशिश यह है कि ऐसा करने से दुनिया भर से उसका टकराव नहीं होगा और वह अकेले चीन को ही टारगेट करेगा। चीनी अखबार लिखता है, ‘कुछ देश अमेरिका दबाव में टूट सकते हैं, लेकिन कई देशों की तरफ से कारोबार जारी रह सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन का सामान हाइटेक है और उसके उत्पाद सस्ते भी हैं। यदि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को चीन से अलग किया गया तो इससे वैश्विक मंदी के हालात पैदा हो सकते हैं। यही नहीं इससे कई देशों पर बुरा असर होगा।’ चीनी अखबार ने लिखा, ‘भले ही अमेरिका ने अभी अस्थायी तौर पर कई देशों के खिलाफ टैरिफ को रोक दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कदम नहीं उठाएगा। दूसरे देशों पर भी टैरिफ लगाना बस कुछ दिनों की ही बात है। आंकड़े यही कहते हैं कि अमेरिका किसी को नहीं छोड़ेगा।’ चीनी अखबार ने कहा कि अमेरिका को लगा होगा कि उसके ऐक्शन से चीन झुक जाएगा। उसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी कि हमारी तरफ से भी करारा जवाब मिलेगा। ग्लोबाल टाइम्स ने लिखा कि इससे स्पष्ट है कि चीन की स्थिति कमजोर नहीं है। हम भी जवाबी ऐक्शन ले सकते हैं। यदि वैश्विक स्तर पर अमेरिका का मजबूती से विरोध किया जाए तो उसका टैरिफ का एजेंडा फेल हो जाएगा। इसके अलावा उसे कदम भी वापस खींचने पड़ेंगे। ग्लोबाल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी में वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक खबर का भी जिक्र किया है, जिसका शीर्षक है- चीन और अमेरिका में आर्थिक जंग- सभी पर होगा असर। चीन ने कहा कि साफ है कि इस जंग का असर अकेले हमारे ऊपर ही नहीं होगा। चीन ने कहा कि टैरिफ नीति का बड़ा असर दिख रहा है। इससे पूरी दुनिया के ही बाजार गिर रहे हैं और भविष्य में इसके गंभीर नतीजे निकलेंगे। खासतौर पर वर्ल्ड सप्लाई चेन ही यदि टूट जाएगी तो फिर उसका असर हर तरफ खराब दिखेगा।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कहा- वह अल्पसंख्यकों की हिफाजत की जिम्मेदारी से ना भागे और बहानेबाजी बंद करे

ढका बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में हिंदू समुदाय के एक मशहूर नेता भाबेश चंद्र रॉय की बेरहमी से की गई हत्या पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कहा है कि वह अल्पसंख्यकों की हिफाजत की जिम्मेदारी से ना भागे और बहानेबाजी बंद करे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “हम बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक नेता श्री भाबेश चंद्र रॉय के अपहरण और क्रूर हत्या से दुखी हैं। ये घटना बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही सिलसिलेवार जुल्मों की कड़ी का हिस्सा लगती है, जबकि पुराने मामलों के गुनहगार अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।” सुरक्षा की जिम्मेदारी लीजिए: भारत सरकार अपने ट्वीट में जायसवाल लिखते हैं, “हम इस नृशंस हत्या की निंदा करते हैं और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को दोबारा याद दिलाते हैं कि बिना किसी बहाने या भेदभाव के हिंदुओं सहित सभी अल्पसंख्यकों की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी को पूरा करे।” अगवा कर की गई हत्या द डेली स्टार अखबार ने पुलिस और परिवार के सदस्यों के हवाले से बताया कि ढाका से लगभग 330 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में दिनाजपुर के बसुदेबपुर गांव के निवासी भाबेश चंद्र रॉय (58) का शव गुरुवार रात बरामद किया गया। रॉय की पत्नी शांतना ने अखबार को बताया कि उन्हें (रॉय) शाम करीब 4:30 बजे एक फोन आया और उन्होंने (शांतना) दावा किया कि अपराधियों ने घर पर उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए यह फोन किया था। खबर में लिखा गया है, ‘‘लगभग 30 मिनट बाद, दो मोटरसाइकिल पर चार लोग आए और कथित तौर पर भाबेश को परिसर से अगवा कर ले गए।’’ इसमें बताया गया कि रॉय को नाराबारी गांव ले जाया गया, जहां उनके साथ क्रूरता से मारपीट की गई। रॉय बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष और क्षेत्र में हिंदू समुदाय के एक प्रमुख नेता थे। अखबार ने बिराल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अब्दुस सबूर के हवाले से कहा कि मामला दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

जर्नलिस्ट फातिमा ने कहा था कि वह साधारण मौत नहीं मरना चाहती, घर पर इजरायल ने गिरा दिया बम, परिवार सहित मौत

गाजा गाजा की 25 साल की पत्रकार को पता चल गया था कि इस तरह की तबाही में कभी भी उसकी जान जा सकती है। इसीलिए फोटो जर्नलिस्ट फातिमा हासोना ने कहा था कि वह साधारण मौत नहीं मरना चाहती हैं। उन्होंने कहा था कि थोड़े दिन की बची जिंदगी में ऐसा काम कर जाना है कि लोग उनकी मौत को भी याद करें। फातिमा ने गाजा में एक साल तक युद्ध की विभीषिका को अपने कैमरे में कैद किया। यहां तक कि उन्होंने उस मंजर को भी अपने कैमरे में कैद कर लिया जब उनके ही घर पर हमला हुआ और उनके 10 रिश्तेदार मौत की नींद सो गए। हर पल खतरे के बाद भी फातिमा इस तबाही को दुनिया के सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने अपने कैमरे के लेंस से हजारों लोगों को मरते और बेघर होते देखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, मैं शानदार मौत चाहती हूं। मैं यह नहीं चाहती कि उनकी मौत पर केवल ब्रेकिंग न्यूज बने या फिर कई लोगों की मौत के साथ उनका नंबर भी गिन लिया जाए। मैं चाहती हूं कि मेरी मौत के बाद भी दुनिया मुझे याद रखे। मेरी तस्वीरों को दुनिया कभी किसी कब्र में दफना ना पाए। फातिमा की जल्द ही शादी होने वाली थी। इससे पहले उत्तरी गाजा में उनके घर पर बम गिरा और सब तबाह हो गया। फातिमा के साथ उनके परिवार के सारे सदस्य मारे गए। इसमें फातिमा की प्रेग्नेंट बहन भी शामिल थी। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इजरायली बमबारी में अब तक 51 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मरने वालों में आधी संख्या महिलाओं और बच्चों की है। शुक्रवार को भी इजरायली हमले में कम से कम 25 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। फातिमा की मौत से 24 घंटे पहले ही फ्रांस के फिल्म फेस्टिवल में उनके जीवन पर आधारित डॉक्युमेंट्री प्रदर्शित करने का ऐलान किया गया था। गाजा में शुक्रवार को इजराइली हवाई हमलों में बच्चों सहित कम से कम 25 लोग मारे गए। चिकित्सा कर्मियों ने यह जानकारी दी। उधर इजराइल में अमेरिका के नए राजदूत माइक हकाबी ने यरूशलम में पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया। नासिर अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि दक्षिणी शहर खान यूनिस में तीन हमलों में 15 लोग मारे गए, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है। इंडोनेशिन अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों ने बताया कि मृतकों में शामिल 10 लोग जबालिया शरणार्थी शिविर से हैं। इजराइली हमले तेज होने के बाद गाजा में एक दिन पहले कई लोग मारे गए थे। इजराइल में नियुक्त अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी शुक्रवार को ‘वेस्टर्न वाल’ पहुंचे जो यरूशलम के पुराने शहर में यहुदियों का एक प्रमुख प्रार्थना स्थल है।

मैं युवाओं अनुरोध करता हूं कि वे प्रतिदिन अपने शरीर के लिए दो घंटे और अपने दिमाग के लिए छह घंटे की नींद जरूर दें: अमित शाह

 नई दिल्ली विश्व लिवर दिवस पर इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलियरी साइंसेज (ILBS) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार अपनी फिटनेस के राज खोले हैं और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली का मंत्र भी साझा किया है. गृह मंत्री शाह ने कहा, मेरे जीवन में मैंने बहुत बड़ा परिवर्तन किया है. शरीर को जितनी चाहिए- उतनी नींद. शरीर को जितनी चाहिए- उतना पानी और शरीर को जैसा चाहिए, वैसा आहार और नियमित व्यायाम से मैंने मेरे जीवन में बहुत कुछ हासिल किया है. उन्होंने आगे कहा, हमारे देश के युवाओं को अभी अगले 40-50 वर्षों तक जीना है और देश के विकास में योगदान देना है. मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वे प्रतिदिन अपने शरीर के लिए दो घंटे और अपने दिमाग के लिए छह घंटे की नींद जरूर दें. यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी. यह मेरा स्वयं का अनुभव है. आज मैं यहां इसी अनुभव को आपसे साझा करने आया हूं. गृह मंत्री अमित शाह का पूरा बयान…. ”मैं एक मेरे जीवन का अनुभव साझा करने के लिए यहां आया हूं. 2020 के मई महीने से आज तक… मेरे जीवन में मैंने बहुत बड़ा परिवर्तन किया है. शरीर को जितनी चाहिए- उतनी नींद. शरीर को जितनी चाहिए- इतना पानी और शरीर को जैसा चाहिए, वैसा आहार और नियमित व्यायाम से मैंने मेरे जीवन में बहुत कुछ हासिल किया और ये अनुभव को साझा करने के लिए मैं आया हूं. मैं आपको बता सकता हूं कि ये साढ़े चार साल के समय में मैं आज करीब करीब सभी एलोपैथिक दवा और इंसुलिन से मुक्त होकर आपके सामने खड़ा हूं. और आज विश्व यकृत पर भी मैं देशभर के विशेषकर सभी युवाओं को… जिनको अभी 40-50 साल तक अपना जीवन व्यतीत करना है. इस देश के विकास में योगदान देना है. और देश के विकास के माध्यम से हम सब इच्छा करते हैं, ऐसे विश्व का निर्माण करना है, वो युवाओं को मैं जरूर कहना चाहूंगा कि अपने शरीर के लिए दो घंटा और दिमाग के लिए कम से कम छह घंटे की नींद एक बार रिजर्व कर लीजिए… अनेक गुना उपयोगिता इसकी बढ़ जाएगी. और ये मेरा अनुभव है.” ”अगर चार साल पहले डॉक्टर शिव सरीन मुझे यहां बुलाते तो मैं नहीं आता, क्योंकि मैं यहां बात करने लायक ही नहीं होता. महात्मा बुद्ध के जीवन का एक प्रसंग है. एक मां एक बच्चे को लेकर महात्मा बुद्ध के सामने उपस्थित हुई. उसने कहा- महात्मा जी बेटा बहुत गुड़ खाता है तो आप जरा उसको समझाइए. निश्चित मात्रा से ज्यादा कोई भी चीज खाना शरीर के लिए फायदेकारक नहीं होता है. महात्मा बुद्ध ने कहा कि सप्ताह के बाद आइए. एक सप्ताह के बाद मां फिर से आई और बुद्ध ने बेटे को समझाया कि आप ज्यादा गुड़ मत खाइए- इससे हानि होती है. फिर मां से रहा ना गया उसने पूछा कि आपने यही बात एक सप्ताह पहले क्यों नहीं की तो उन्होंने कहा- माता जी मैं स्वयं ही बहुत गुड़ खाता था तो गुड़ छोड़कर बेटे को नसीहत देना चाहता था. मेरी भी स्थिति कुछ ऐसी ही है. मेरे जीवन में डिसिप्लिन लाने का किसी एक महात्मा के आग्रह के कारण मैंने निर्णय किया और ये निर्णय का मुझे बहुत फायदा हुआ है. इसे शेयर करने के लिए मैं आज यहां आया हूं.”  

मोदी सरकार दे रही ₹20 लाख, सस्ती ब्याज दर, गारंटी जरूरी नहीं, जिसकी मदद से लोग अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं, जिसकी मदद से लोग अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भी इसी कैटेगरी की स्कीम है। योजना के तहत बैंक लोगों को सस्ती ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का लोन देते हैं। अहम बात है कि यह लोन कोलेटरल-फ्री होता है। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई, 2024 को केंद्रीय बजट 2024-25 के दौरान लोन लिमिट को बढ़ाकर ₹20 लाख करने की घोषणा की। यह नई सीमा 24 अक्टूबर, 2024 को प्रभावी हुई। चार कैटेगरी की योजना मुद्रा लोन योजना चार कैटेगरी- ‘शिशु’, ‘किशोर’ ‘तरुण’ और ‘तरुण प्लस’ में है। हर कैटेगरी के लिए लोन की रकम अलग-अलग होती है। शिशु: 50,000/- रुपये तक के लोन मिलते हैं। किशोर: 50,000/- रुपये से 5 लाख रुपये तक के लोन मिलते हैं। तरुण: 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन शामिल है। तरुण प्लस: 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक के लोन मिलते हैं। कौन से बैंक देते हैं लोन मुद्रा योजना के अंतर्गत सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) जैसे अनुसूचित कॉमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), लघु वित्त बैंक (एसएफबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) आदि द्वारा 20 लाख रुपये तक के जमानत मुक्त ऋण दिए जाते हैं। 10 साल पहले की योजना बता दें कि यह योजना दस साल पहले की है। मुद्रा योजना ने 52 करोड़ से ज्यादा लोन खाते खोलने में मदद की है, जो उद्यमशीलता की गतिविधियों में लगातार वृद्धि को दर्शाता है। किशोर लोन की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016 के 5.9 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 44.7 प्रतिशत हो गई है।मुद्रा योजना के कुल लाभार्थियों में 68 प्रतिशत महिलाएं हैं। वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2025 के बीच , प्रति महिला प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की वितरण राशि वर्ष दर वर्ष 13 प्रतिशत से बढ़कर 62,679 रुपये तक पहुंच गई।

मुर्शिदाबाद पहुंचे राज्यपाल सीवी आनंद बोस, हिंसा पीड़ितों से की मुलाकात

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस आज मुर्शिदाबाद पहुंचे और हिंसा पीड़ितों से मुलाकात की। राज्यपाल पीड़ितों से मुलाकात के बाद केंद्र सरकार को प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्ट भी भेजेंगे। राज्यपाल के अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी आज मुर्शिदाबाद पहुंची है। हिंसा पीड़ितों से मुलाकात के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि ‘वे (पीड़ित) सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं। पीड़ितों ने जो भी सुझाव या मांग की हैं, उन पर विचार किया जाएगा। मैं इस बारे में केंद्र सरकार को सूचित करूंगा ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। मैंने लोगों को अपना फोन नंबर दिया है और उन्हें जरूरत पड़ने पर फोन करने को कहा है। हम संपर्क में बने रहेंगे।’ मुर्शिदाबाद दौरे पर राज्यपाल एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस शनिवार को मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज के दंगा प्रभावित इलाकों के दौरे पर है। वे प्रभावित लोगों से बातचीत करेंगे। उन्होंने बताया कि बोस इसके बाद जिले के धुलियान, सुती और जंगीपुर में हिंसा प्रभावित अन्य इलाकों का दौरा करेंगे। 8 से 12 अप्रैल तक इन मुस्लिम बहुल इलाकों में वक्फ कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। हिंसा के मामले में 274 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।   महिला आयोग की टीम भी आज मुर्शिदाबाद पहुंची इस बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने भी शनिवार को मुर्शिदाबाद का दौरा शुरू किया। शुक्रवार को कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए रहाटकर ने कहा कि ‘हमें सूचना मिली है कि प्रभावित इलाकों और राहत शिविरों में महिलाओं के साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक जांच समिति गठित की है। हम पीड़ितों से बात करेंगे और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले स्थिति का आकलन करेंगे।’ इसके बाद रविवार को आयोग की टीम, कोलकाता में राज्यपाल, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से भी मुलाकात करेगी। 

महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्द लागू किए जाने की SC की जज नागरत्ना ने जताई आशा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की जज बीवी नागरत्ना ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्द लागू किए जाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने आशा जताई कि यह ऐतिहासिक कदम उनके जीवनकाल में ही साकार हो और यह दिन भारत के संविधान निर्माताओं द्वारा देखे गए वास्तविक समानता के सपने की पूर्णता का प्रतीक बनेगा। जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने जा रही हैं। वह Women Laws – From the Womb to the Tomb नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में बोल रही थीं। यह पुस्तक वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी द्वारा लिखी गई है। पुरुषों की जगह नहीं छीन रहे, बल्कि अपना हक वापस ले रहे उन्होंने कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। मुझे उम्मीद है कि यह कानून हमारे जीवनकाल में लागू होगा। यह दिन महिलाओं द्वारा सदियों से चली आ रही समानता की लड़ाई की परिणति होगा, जिसे हमारे संविधान निर्माताओं ने एक आदर्श लक्ष्य के रूप में देखा था।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि महिलाएं सार्वजनिक जीवन और जिम्मेदारियों में अपनी उचित हिस्सेदारी की हकदार हैं। उन्होंने कहा, “वे पुरुषों की जगह नहीं ले रही हैं, बल्कि उस अधिकार क्षेत्र को वापस ले रही हैं, जिसे पितृसत्तात्मक सोच और भेदभाव ने उनसे छीन लिया था। हम पुरुष विरोधी नहीं हैं, हम महिला समर्थक हैं।” कानून आयोग से की खास अपील उन्होंने हाल ही में कानून आयोग के अध्यक्ष नियुक्त हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज डी. एन. महेश्वरी से अपील की कि वे महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करने वाले सभी कानूनों का अध्ययन करें और केंद्र सरकार को ऐसे सभी कानूनों को संशोधित करने के लिए सिफारिशें भेजें। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं, व्यवहार में भी जरूरी कार्यक्रम में जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि संविधान में समानता का अधिकार केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप में भी दिखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिले।

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