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नागपुर हिंसा एक अफवाह से शुरू हुई, सीएम फडणवीस ने अफवाहों को बताया जिम्मेदार, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा पर मंगलवार को विधानसभा में बयान दिया। उन्होंने बताया कि यह हिंसा एक अफवाह से शुरू हुई, जिसमें कहा गया था कि एक प्रतीकात्मक कब्र पर रखी चादर पर धार्मिक चिह्न था, जिसे जलाया गया। शाम को यह अफवाह फैली और देखते ही देखते हालात बिगड़ गए, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। फडणवीस ने कहा कि हिंसा में 12 दोपहिया वाहन तोड़े गए और एक क्रेन, दो जेसीबी तथा कुछ चार-पहिया वाहनों में आग लगा दी गई। घटनास्थल पर 80 से 100 लोग जमा हो गए थे। कुछ लोगों पर तलवार से हमला हुआ। उन्होंने कहा कि हालात तब और गंभीर हो गए, जब एक पुलिसकर्मी पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। इस हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, पांच आम लोगों को भी चोटें आईं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले में पांच अपराध दर्ज किए गए हैं। कानून-व्यवस्था को काबू में करने के लिए 11 थाना क्षेत्रों में लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी लागू की गई है। साथ ही, स्थिति को संभालने के लिए स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स (एसआरपीएफ) की पांच टुकड़ियां तैनात की गई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने तेजी से कदम उठाए और हालात पर काबू पाया। फडणवीस ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले में सख्ती से निपटेगी। उन्होंने कहा, “जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने अच्छा काम किया है और आगे भी कड़ी कार्रवाई होगी।” भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नागपुर में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जो शांतिपूर्ण आंदोलन में खलल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति फिर से हमारे समाज में देखने को न मिले। उन्होंने कहा कि यह हिंसा पूर्वनियोजित थी या नहीं, इस पर वह किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं करेंगे। यह सरकार, गृह विभाग और मुख्यमंत्री ही बता सकते हैं। इस हिंसा में जो भी जिम्मेदार है, उसे सबक सिखाना चाहिए।  

विपक्ष की हटाने की मांग, नागपुर हिंसा को लेकर निशाने पर आए फडणवीस के फायरब्रांड मंत्री

मुंबई नागपुर में भीषण हिंसा भड़क गई। शहर के इतिहास में 98 सालों के बाद ऐसा दंगा भड़का, जिसमें तीन डीसीपी लेवल के पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा कई नागरिक भी जख्मी हुए, जिनमें से एक आईसीयू में है। इस पूरे बवाल के बाद पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज की हैं और 50 लोगों को हिरासत में लिया है। इस बीच मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ। इसके अलावा सदन के बाहर भी विपक्षी दलों के विधायकों ने प्रदर्शन किया। इन लोगों की मांग है कि राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे को पद से हटाया जाए। नितेश राणे फायरब्रांड नेता हैं, जो लगातार बयान देते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि उनके चलते ही शहर में सोमवार को हिंसा भड़की। शहर में उपद्रव के दौरान कल कम से कम 45 वाहनों में तोड़फोड़ की गई। सत्तापक्ष के विभिन्न नेताओं ने नागपुर की घटना की निंदा की है और कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बीच जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा कि अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट की निगरानी की जा रही है। फडणवीस सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने कहा, ‘नागपुर में हुई हिंसा के पीछे महा विकास अघाड़ी का हाथ है… विपक्ष के लोग यह दिखाने में लगे हैं कि वे ही मुसलमानों के साथ खड़े हैं, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं है कि मुसलमान ऐसा नहीं चाहते…।’ शिवसेना विधायक मनीषा कायंदे ने नागपुर हिंसा की निंदा की और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम नागपुर हिंसा की निंदा करते हैं। अफवाह फैलाने वालों को सलाखों के पीछे डाला जाना चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में ऐसी चीज बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ नागपुर के राजघराने के सदस्य राजे मुधोजी भोसले ने कहा, ‘यह बहुत दुखद घटना है। नागपुर के इतिहास में ऐसी घटना कभी नहीं हुई। जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाना चाहिए और प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटना फिर कभी न हो।’ उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इसमें स्थानीय लोग शामिल थे। बाहरी लोगों के साथ कुछ असामाजिक तत्व भी इसमें शामिल रहे होंगे।

ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली रेल दुर्घटनाओं की हालिया घटनाओं के बाद विपक्ष की तरफ से किए गए हमलों के बीच राज्यसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं जबकि अब सरकार की नीतियों के कारण यह संख्या कम होकर प्रति वर्ष केवल 30 दुर्घटनाओं तक रह गई है। पिछले कार्यकालों में कितनी दुर्घटनाएं हुईं? वैष्णव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे (2005-06) तो उस समय कुल 698 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुई थीं। वहीं ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए 395 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुईं। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे के रेल मंत्री बनने पर यह संख्या 38 तक सीमित हो गई थी। उन्होंने कहा, “पहले औसतन प्रतिदिन एक दुर्घटना होती थी लेकिन अब यह संख्या घटकर प्रति वर्ष सिर्फ 30 हो गई है। यदि हम 43 रेल दुर्घटनाओं को भी शामिल करें तो कुल दुर्घटनाएं 73 होती हैं यानी पहले जो आंकड़ा करीब 700 था वह अब 80 से भी कम हो गया है जोकि 90% की कमी को दर्शाता है।”   रेलवे क्षेत्र में सुधार की ओर कदम रेल मंत्री ने कहा कि बिहार के सारण जिले में स्थित मढ़ौरा फैक्ट्री से जल्द ही करीब 100 इंजन निर्यात किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह फैक्ट्री पहले निष्क्रिय थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इसे चालू किया गया। अब ‘मेड इन बिहार’ इंजन दुनिया भर के गंतव्यों तक पहुंचेंगे। रेलवे का वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजना वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी के दौरान अपनी कार्यकुशलता को साबित किया है और अब यात्री और माल ढुलाई दोनों में वृद्धि देखी जा रही है। रेलवे की वित्तीय स्थिति अच्छी है और इसे लगातार सुधारने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि “अच्छे प्रदर्शन के कारण रेलवे अपने खर्चों को अपनी आय से पूरा कर रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि एक किलोमीटर यात्रा की लागत लगभग 1.4 रुपये है लेकिन यात्रियों से सिर्फ 73 पैसे लिए जाते हैं। इस साल भारतीय रेलवे ने 1,400 इंजनों का उत्पादन किया है जो अमेरिका और यूरोप के संयुक्त उत्पादन से अधिक है। नॉन-एसी कोच की संख्या बढ़ाने की योजना रेल मंत्री ने जनरल और नॉन-एसी कोच की संख्या घटाने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जनरल कोचों की संख्या एसी कोचों की तुलना में 2.5 गुना बढ़ाई जा रही है। साथ ही मौजूदा उत्पादन योजना के तहत 17,000 नॉन-एसी कोचों का निर्माण किया जाएगा। वहीं अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में अपने बयान में रेलवे की सुधरी हुई स्थिति, दुर्घटनाओं में कमी और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है और इसे आगे और बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।  

राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ें : अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को लोकसभा में रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों और चर्चा पर जवाब दिया। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय रेल की प्रगति को रेखांकित करते हुए पंक्चुअलिटी, रोजगार, सुरक्षा, निर्यात और इंफ्रा डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रोजगार देने में भी रेलवे सबसे आगे है। उन्होंने देश की प्रगति के लिए सभी से राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।   रेल मंत्री ने सदन में कहा कि रेलवे की पंक्चुअलिटी में बड़ा सुधार हुआ है। इस वर्ष में 68 में से 49 डिवीजन में गाड़ियों की पंक्चुअलिटी 80% से अधिक दर्ज की गई है। उससे भी गौरव की बात ये है कि 12 डिवीजन ऐसे रहे जहां पंक्चुअलिटी 95% तक पहुंच गई है। विश्व के बड़े देशों के बराबर पहुंचने की कोशिश हम कर रहे हैं। ये रेलवे की गुणवत्ता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।   रोजगार सृजन का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल ने पिछले 10 वर्षों में 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वर्तमान में भी 1 लाख लोगों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है।   रेल मंत्री ने कहा कि अब भारतीय रेल में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। लंबे रेल, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, फॉग सेफ्टी डिवाइस जैसे कदमों ने रेल यात्रा को और सुरक्षित बनाया है। 50,000 किलोमीटर पुराने ट्रैक को हटाकर नए ट्रैक बिछाए गए हैं, जिससे सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 34,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं, जो जर्मनी के पूरे रेल नेटवर्क से भी अधिक है। लोकोमोटिव उत्पादन में भी भारत ने बाजी मारी है। रेल मंत्री ने कहा कि देश में 1,400 लोकोमोटिव का उत्पादन हुआ जो अमेरिका और यूरोप के कुल उत्पादन से अधिक है।   भारतीय रेल ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। रेल मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि आज भारत एक बड़ा रेलवे निर्यातक बन चुका है। ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच, यूके, सऊदी अरब और फ्रांस को रेल कोच तथा मैक्सिको,स्पेन,जर्मनी और इटली को ऑपरेशन इक्विपमेंट निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही बिहार में बने लोकोमोटिव का दुनिया में डंका बजेगा और तमिलनाडु में निर्मित पहिए दुनिया के दूसरे देशों की ट्रेनों में भी दौड़ते नजर आएंगे। यह भारत के लिए गर्व का क्षण है।      रेल मंत्री ने कहा कि कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। 1972 से 2014 तक 42 वर्षों में 28 किमी का काम हुआ, जबकि मोदी सरकार के 10 वर्षों में 38 किमी का काम पूरा हुआ। बुलेट ट्रेन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें देश को आगे ले जाना है। बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट्स आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाए जा रहे हैं। रेल मंत्री ने नॉर्थ ईस्ट में रेलवे प्रोजेक्ट्स में अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि सिक्किम में सेवक से रंगपो तक रेल प्रोजेक्ट पहुंच रहा है, असम में नए काम शुरू हुए हैं और त्रिपुरा में आजादी के बाद पहली बार ब्रॉड गेज लाइन शुरू हुई है। केंद्र सरकार ने हर राज्य के लिए रेलवे विकास हेतु ऐतिहासिक बजट आवंटित किया है। उन्होंने कहा कि रेलवे का लक्ष्य हर कोने को रेल नेटवर्क से जोड़ना और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है। भारत में आज विश्व का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोग्राम (अमृत भारत स्टेशन) चलाया जा रहा है।   अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि 2020 के बाद से भारतीय रेल ने यात्री किराया नहीं बढ़ाया है। भारत में रेल किराया दुनिया में सबसे कम है। 350 किमी की यात्रा के लिए भारत में जहां मात्र 121 रुपए का किराया देना होता है, वहीं पाकिस्तान में 436 रुपए, बांग्लादेश में 323 रुपए और श्रीलंका में 413 रुपए देना होता है। यूरोपीय देशों में भारत से करीब 20 गुना अधिक रेल किराया है। रेल मंत्री ने कार्गो परिवहन में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में भारतीय रेल 1.6 बिलियन टन कार्गो ढोकर दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल होगा, जिसमें चीन, अमेरिका और भारत होंगे। यह रेलवे की बढ़ती क्षमता और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।   लोकसभा में रेल मंत्री ने सभी दलों से सांसदों ने अनुरोध करते हुए कहा कि कृपया अपने क्षेत्र में स्टेशनों पर काम की गुणवत्ता पर ध्यान दें। हम गुणवत्ता से समझौता बिल्कुल नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रेल देश की प्रगति का प्रतीक है और यह निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाऊंगा क्योंकि उनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि अपने बेटों की शादी के बाद अब वह वानप्रस्थ आश्रम में जा रहे हैं और अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाएंगे। चौहान ने प्रश्नकाल में सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘आज से मैं गृहस्थ से वानप्रस्थ आश्रम में जा रहा हूं। आज मेरे बेटों की शादी के बाद ‘रिसेप्शन’ है। मैंने सभी को निमंत्रित किया है। कल से मैं वानप्रस्थी हो जाऊंगा और अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाऊंगा क्योंकि उनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है।” उन्होंने फसल बीमा योजना संबंधी पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि मोदी सरकार से पहले फसल के नुकसान के लिए मुआवजे की सबसे छोटी इकाई तहसील होती थी और जब तक पूरी तहसील में फसल बर्बाद नहीं हो, किसानों को मुआवजा नहीं मिलता था। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में गांव को सबसे छोटी इकाई बनाया गया और एक गांव में फसल को नुकसान होने पर भी किसानों को राहत मिलती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि देश का नेता दूरदृष्टा हो तो व्यवस्थाएं अपने आप बदलने लगती हैं। चौहान ने कहा कि किसानों की हालत एक दशक पहले बहुत खराब थी, लेकिन इस सरकार के आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक नहीं, अनेक उपाय किए गए हैं जिसके कारण किसानों की हालत लगातार सुधर रही है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार किसानों की हालत सुधारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के उनके संसदीय क्षेत्र वायनाड (केरल) के संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्न के उत्तर में कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘किसान चाहे केरल का हो या कर्नाटक का, किसान होता है। हम सब भारत मां के लाल हैं और भेदभाव का कोई सवाल नहीं है।” उन्होंने कहा कि जब भी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो नीति आयोग की सिफारिश के अनुसार केंद्र सरकार राज्यों को धन देती है और कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा हो तो केंद्र सरकार विशेष दल भेजकर अतिरिक्त राशि भी देती है। चौहान ने कहा, ‘‘केरल को भी एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा राहत कोष) के तहत 138 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। आपके माध्यम से मैं सदस्य (प्रियंका गांधी) को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कहीं भी संकट आएगा तो केंद्र बिना भेदभाव के राज्य के साथ खड़ा रहेगा।” उन्होंने कहा कि जहां भी किसानों पर प्राकृतिक संकट आएगा, वे चाहे किसी भी राज्य के, गांव के हों.. भारत सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। 

अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है, टूरिज्म इंडस्ट्री चौंकाने वाला दावा

गोवा सोचिए, आप किसी वीकेंड पर रिलैक्स करने का प्लान बना रहे है और आपके सामने दो ऑप्शन हैं – गोवा या दुबई। अब ज़रा चौंकने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि दुबई की ट्रिप अब गोवा से सस्ती पड़ रही है! यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया का कहना है कि भारत में ट्रैवल अब इतना महंगा हो गया है कि लोग विदेश घूमने को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। क्या भारत अपने ही टूरिज्म बूम को खत्म कर रहा है? आइए जानते हैं कि रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट्स के महंगे टैरिफ तक, कैसे भारत का ट्रैवल सेक्टर आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।   एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया ने एक अहम सवाल उठाया है – “क्या भारत अपने ही पर्यटन उद्योग को महंगा बनाकर खुद को बाहर कर रहा है?” उनका कहना है कि अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है। जो कभी एक आम आदमी के लिए किफायती यात्रा विकल्प (affordable travel options) था, वह अब सिर्फ उन लोगों के लिए रह गया है जो ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। लेकिन इसकी वजह सिर्फ ₹400 वाली एयरपोर्ट चाय या महंगे होटल किराए नहीं हैं।   रियल एस्टेट की मार से महंगा हुआ टूरिज्म सुतारिया के अनुसार, बढ़ती रियल एस्टेट कीमतें भारत के पर्यटन सेक्टर को प्रभावित कर रही हैं। पिछले एक दशक में संपत्ति की कीमतें आसमान छू गई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट्स को अपना निवेश निकालने के लिए दरें बढ़ानी पड़ रही हैं। सुतारिया ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए हैं जैसे कि: – पर्यटन केंद्रों में प्रॉपर्टी की कीमतें गैर-पर्यटक इलाकों से 150% ज्यादा हो गई हैं। -अयोध्या में जमीन के दाम कुछ ही सालों में 10 गुना बढ़ चुके हैं। – बेंगलुरु और हैदराबाद में 2019 से अब तक 90% वृद्धि हुई है। -भारत का रियल एस्टेट मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, सुतारिया इसे सिर्फ संकट नहीं मानते, बल्कि स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी देखते हैं। उनका मानना है कि सस्ते ठहरने के विकल्प, ऑफबीट डेस्टिनेशन और बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं इस स्थिति को बदल सकती हैं। उन्होंने आखिर में एक सवाल करते हुए लिखा- “क्या यह बदलाव भारतीय पर्यटन को बेहतर बनाएगा या इसे और महंगा कर देगा?”  

BJP ने बताया मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला- बंगाल में OBC आरक्षण पर बवाल, SC पहुंची ममता सरकार

कोलकाता पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग नए सिरे से जातिगत पिछड़ेपन की समीक्षा कर रहा है और यह प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार की दलील सुनते हुए मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई तीन महीने बाद की जाए, जिसके बाद पीठ ने उनकी बात मान ली। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से ममता सरकार की इस पहल को मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। हाई कोर्ट ने रद्द की थी कई जातियों की ओबीसी सूची यह मामला उस समय गरमाया जब 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2010 से अब तक कई जातियों को दी गई ओबीसी आरक्षण की सूची को अवैध करार दे दिया। कोर्ट ने पाया कि इन जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का आधार केवल धर्म था, जो संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 77 मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करना पूरे मुस्लिम समाज का अपमान है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों को पहले ही आरक्षण का लाभ मिल चुका है या जो सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, उनकी नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीजेपी ने लगाया ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का आरोप वहीं पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा सियासी तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार एक जातिगत सर्वे करा रही है, जिसका मकसद मुस्लिम ओबीसी को फायदा पहुंचाना और हिंदू ओबीसी को पीछे करना है। बीते दिनों बीजेपी महासचिव जगन्नाथ चटर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “टीएमसी सरकार का यह सर्वे केवल राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए है। वे मुस्लिम समुदाय की आर्थिक जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं ताकि सरकारी लाभ उन्हीं को दिया जा सके, जबकि हिंदू ओबीसी को इससे बाहर रखा जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सर्वे के सवालों को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे समुदायों के बीच फूट डाली जा सके। चटर्जी के मुताबिक, “सवालों में यह पूछा गया है कि उनके इलाकों में पानी की सुविधा कैसी है और क्या वे अपने पड़ोसियों के साथ खाना साझा करते हैं। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।” नई जातियों से जुड़ी ठोस जानकारी दीजिए: सुप्रीम कोर्ट वहीं सुप्रीम कोर्ट पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार से यह मांग कर चुका है कि वह ओबीसी सूची में शामिल नई जातियों की सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़ी ठोस जानकारी पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन जातियों को ओबीसी में शामिल करने से पहले किसी तरह की कानूनी सलाह ली गई थी या नहीं। अब जब राज्य सरकार ने तीन महीने में पूरी समीक्षा करने की बात कही है, तो जुलाई में सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ले सकता है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।

पीएम मोदी पिछले जन्म में महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे, लोकसभा में छिड़ा विवाद: भाजपा सांसद

नई दिल्ली संसद में चल रहे बजट सत्र के दौरान ओडिशा के बारगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद प्रदीप पुरोहित ने पीएम मोदी को लेकर एक विवादित दावा किया। सोमवार को अपने संबोधन के दौरान प्रदीप पुरोहित ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले जन्म में मराठा साम्राज्य के संस्थापक और महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया, जहां इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान और उनकी विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर क्या बोल गए भाजपा सांसद? प्रदीप पुरोहित ने अपने भाषण में एक संत से मुलाकात का जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें बताया कि नरेंद्र मोदी का पूर्व जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा, “मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां एक गंधमर्दन पहाड़ी क्षेत्र है। एक गिरिजा बाबा संत वहां रहते हैं। एक दिन बातचीत चल रही थी तो उन्होंने हमें बताया कि देश के आज जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं वे अपने पूर्व जन्म में महाराज छत्रपति शिवाजी थे। इसलिए आज वे भारत को दुनिया में सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की भावना से काम कर रहे हैं।” पुरोहित ने इसे एक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन उनके इस दावे ने तुरंत विवाद को जन्म दे दिया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स प्लेटफॉर्म पर, लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई यूजर्स ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करार दिया। विपक्षी दलों ने इस बयान को हाथोंहाथ लिया और बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का राजनीतिकरण करने का प्रयास बताया। मुंबई की कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने वीडियो शेयर करते हुए मराठी में लिखा, “अखंड भारत के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करने तथा महाराष्ट्र और दुनिया भर के शिव प्रेमियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए भाजपा नेतृत्व द्वारा एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। इन लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की मानद टोपी नरेंद्र मोदी के सिर पर रखकर शिवाजी महाराज का घोर अपमान किया है। और अब इस भाजपा सांसद का यह घिनौना बयान सुनिए… हम शिवाजी का बार-बार अपमान करने के लिए भाजपा की सार्वजनिक रूप से निंदा करते हैं। भाजपा शिव-द्रोही है। हम शिवाजी का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेंद्र मोदी को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और इस सांसद को निलंबित करना चाहिए।” शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “भाजपा के इन बेशर्म चाटुकारों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी की छत्रपति शिवाजी महाराज से तुलना बिल्कुल अस्वीकार्य है।” ऐतिहासिक संदर्भ और विवाद छत्रपति शिवाजी महाराज 17वीं सदी के मराठा शासक थे, जिन्होंने मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ स्वराज की स्थापना की थी। उनकी वीरता, रणनीति और प्रशासनिक कुशलता उन्हें भारतीय इतिहास में एक महान नायक बनाती है, खासकर महाराष्ट्र में, जहां वे एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीक हैं। ऐसे में, उनके नाम को किसी भी समकालीन नेता से जोड़ना स्वाभाविक रूप से संवेदनशील और विवादास्पद हो जाता है। वैसे अब तक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

CM देवेंद्र फडणवीस- छावा मूवी के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हिंसा के बीच बॉलीवुड फिल्म ‘छावा’ का जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस फिल्म के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है। सोमवार को भी औरंगजेब के मकबरे के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अफवाह के चलते हिंसा भड़क गई थी। उन्होंने कहा, ‘छावा मूवी ने औरंगजेब के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़का दिया है। सभी को महाराष्ट्र को शांत रखने की जरूरत है।’ साथ ही उन्होंने नागपुर की हिंसा को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि नागपुर हिंसा के दौरान भीड़ ने कुछ चुनिंदा घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया; यह एक साजिश प्रतीत होती है। हिंसा में कई घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। सीएम फडणवीस ने सदन में कहा, ‘नागपुर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। अफ़वाह फैलाई गई कि धार्मिक सामग्री वाली चीज़ें जला दी गईं….यह एक सुनियोजित हमला लगता है। किसी को भी कानून- व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।’ उन्होंने साफ किया है, ‘पुलिस पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने जानकारी दी है कि हिंसा में 3 डीसीपी समेत 33 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, 5 आम नागरिक घायल हुए हैं और उनमें से एक ICU में है। नागपुर में हिंसा पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धर्मग्रंथ जलाया गया है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। क्या हुई कार्रवाई नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और हिंसा के दौरान 34 पुलिसकर्मी तथा पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने कहा कि हिंसा के दौरान 45 वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और उन्होंने सभी समुदायों के सदस्यों से शहर में शांति बनाए रखने तथा किसी भी असामाजिक तत्व का समर्थन नहीं करने की अपील की। एकनाथ शिंदे क्या बोले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि जो लोग अब भी औरंगजेब की प्रशंसा कर रहे हैं, वे ‘‘देशद्रोही’’ हैं। उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह ने राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की थी और लोगों पर अनेक अत्याचार किए थे। शिंदे ने कहा कि दूसरी ओर, मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज एक ‘‘दैवीय शक्ति’’ थे, जो वीरता, बलिदान और हिंदुत्व की भावना के लिए डटे रहे।

जॉर्ज सोरोस के संगठनों पर ईडी ने मारे छापे, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में खूब उछला था इनका नाम

बेंगलुरु  अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस समर्थित ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (OSF) और उससे जुड़ी कुछ संस्थाओं के खिलाफ बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. दरअसल ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (FEMA) के ‘‘उल्लंघन’’ से संबंधित जांच के सिलसिले में मंगलवार को छापेमारी की कार्रवाई की. सूत्रों ने बताया कि फेमा के तहत ओएसएफ और कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है. उन्होंने कहा कि यह मामला ओएसएफ द्वारा कथित रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने और कुछ लाभार्थियों द्वारा फेमा दिशा-निर्देशों का कथित उल्लंघन कर इन निधियों का उपयोग किए जाने से संबंधित है. ईडी की कार्रवाई पर ओएसएफ की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं मिली है. कौन हैं जॉर्ज सोरोस ज्योजी श्वार्ट्ज उर्फ जॉर्ज सोरोस, हंगरी मूल के मशहूर अमेरिकी कारोबारी हैं. अमेरिका और ब्रिटेन के शेयर बाजारों में जॉर्ज सोरोस एक बड़ा नाम है. सोरोस ने हेज फंड से तगड़ी कमाई की है. साल 1970 में सोरोस फंड मैनेजमेंट की शुरुआत की थी. खास बात है कि जॉर्ज सोरोस को बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने वाला व्यक्ति भी कहा जाता है. क्योंकि, 1992 में उन्होंने ब्रिटिश पाउंड के खिलाफ दांव लगाकर एक ही दिन में 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी. विवाद से घिरे रहते जॉर्ज सोरोस जनवरी 2023 में भी जॉर्ज सोरोस का नाम उस वक्त भारत में चर्चा में आया था जब अडानी ग्रुप के शेयरों में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद भारी बिकवाली हुई थी.  हंगरी-अमेरिकी राजनीतिक कार्यकर्ता सोरोस और उसके संगठन ओएसएफ पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारत के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है. अडानी-हिंडनबर्ग विवाद के दौरान उनके बयानों की भी पार्टी ने आलोचना की थी. बता दें कि जॉर्ज सोरोस फाइनेंशियल समझ के लिए काफी मशहूर हैं. लेकिन, उन्हें अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर करने के लिए भी जाना जाता है. इसके लिए उनकी भारत समेत कई देशों में आलोचना होती रहती है. जॉर्ज सोरोस समर्थित ओएसएफ ने 1999 में भारत में संचालन शुरू किया था.

इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दिया, हमास के ‘The End’ का प्लान!

 गाजा इजरायल की सेना ने सीजफायर को ठेंगा दिखाकर हमास पर आक्रामक रुख अख्तियार किया है. इजरायल के गाजा पर अब तक के भयावह हमले में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. लेकिन इजरायल का गुस्सा शांत नहीं हो रहा. उसने हमास के खात्मे का प्लान बना लिया है. इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दे दिए हैं. इजरायल की मंशा हमास को जड़ से उखाड़ फेंकने की है. 19 जनवरी को इजराइल-हमास में शुरू हुए सीजफायर के बाद इजराइल का गाजा में यह सबसे बड़ा हमला है. इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने यह हमले इसलिए कराए क्योंकि सीजफायर पर हो रही बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी. वहीं, हमास ने इजरायल के इन हमलों को सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इजरायल ने बिना किसी उकसावे के हमले किए हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हमास पर दबाव बनाने के लिए गाजा से मिस्र जाने वाले राफा क्रॉसिंग को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद मरीजों तक इलाज की पहुंच रोकना है. इससे पहले इजराइल ने गाजा में राहत सामग्री, तेल और दूसरी चीजें लेकर जाने वाली गाड़ियों का रास्ता रोक दिया था. मालूम हो कि इजरायल और हमास युद्धविराम समझौते का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया था. इसके बाद से इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी है. इजरायली सेना आईडीएफ का कहना है कि यह हमला हमास के आतंकियों को निशाना बनाने के लिए किया गया था. सीजफायर का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया है. पहले चरण में हमास ने 33 बंधक छोड़े हैं. वहीं इजराइल ने दो हजार से फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया है. इजराइल और हमास में बीच सीजफायर के दूसरे फेज पर अभी तक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है. इस फेज में लगभग 60 बंधकों को रिहा किया जाना था.  

पीएम मोदी ने अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को लिखा पत्र, विलियम्स की सकुशल वापसी की कामना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को पत्र लिखकर भारत आने का न्योता दिया है। सुनीता विलियम्स अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर नौ महीने बिताने के बाद बुधवार को पृथ्वी पर लौटने वाली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स के नाम एक भावपूर्ण पत्र लिखकर उनकी सुरक्षित वापसी की कामना की है। पीएम मोदी की ओर से एक मार्च को ये पत्र लिखा गया, जिसे नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो के माध्यम से सुनीता विलियम्स को भेजा गया है। इस पत्र को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया। सुनीता विलियम्स को पीएम मोदी का पत्र नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मर करीब नौ महीने तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर ‘फंसे’ रहने के बाद आखिरकार धरती पर लौट रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स के नाम एक भावपूर्ण पत्र लिखकर उनकी सुरक्षित वापसी की कामना की है। एक मार्च को प्रधानमंत्री ने लिखा था ये लेटर प्रधानमंत्री की ओर से 1 मार्च को लिखा गया यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें पीएम मोदी ने लिखा है, ‘पूरी दुनिया सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही है। इस महत्वपूर्ण क्षण में पीएम मोदी ने भारत की इस गौरवशाली बेटी के लिए अपनी चिंता और शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।’ हम भारत में आपसे मिलने को उत्सुक हैं- पीएम प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में लिखा, ‘भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिलों के बेहद करीब हैं। भारत के लोग आपके अच्छे स्वास्थ्य और आपके मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। आपकी वापसी के बाद हम भारत में आपसे मिलने को उत्सुक हैं। भारत के लिए अपनी सबसे प्रतिभाशाली बेटियों में से एक की मेजबानी करना खुशी की बात होगी।’ पीएम मोदी ने 2016 में विलियम्स से मुलाकात को किया याद पीएम मोदी ने 2016 में अमेरिका यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्स और उनके दिवंगत पिता दीपक पंड्या से हुई मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में उनकी मुलाकात मैसिमिनो से हुई थी और बातचीत के दौरान विलियम्स का जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी बातचीत के दौरान आपका नाम आया और हमने चर्चा की कि हमें आप पर और आपके काम पर कितना गर्व है। इस बातचीत के बाद, मैं खुद को आपको पत्र लिखने से नहीं रोक सका।’ ‘विलियम्स की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व’ पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्ववर्ती जो बाइडेन से मुलाकात के दौरान सुनीता विलियम्स का कुशलक्षेम पूछा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों को विलियम्स की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर आपके प्रेरणादायी धैर्य और दृढ़ता को दर्शाया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शेयर किया पीएम का लेटर जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो से मुलाकात की थी। उनके माध्यम से यह पत्र सुनीता विलियम्स तक पहुंचाने का अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि सुनीता विलियम्स इस भावनात्मक संदेश से बेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने पीएम मोदी और भारत के प्रति अपना आभार प्रकट किया। पीएम मोदी ने कहा कि विलियम्स की मां बोनी पंड्या उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही होंगी और उन्हें यकीन है कि ‘दीपकभाई’ (विलियम्स के पिता) का आशीर्वाद भी उनके साथ है। प्रधानमंत्री ने पत्र में विलियम्स के पति माइकल विलियम्स को भी अपनी हार्दिक शुभकामनाएं भेजी हैं।

बांग्लादेश ने गबार्ड के बयान को भ्रामक और राष्ट्र की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला करार देते हुए इसे खारिज किया

ढाका बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड द्वारा देश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। बांग्लादेश ने गबार्ड के बयान को “भ्रामक और राष्ट्र की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला” करार देते हुए इसे खारिज कर दिया। अंतरिम सरकार ने कहा, “यह बयान न केवल भ्रामक है, बल्कि बांग्लादेश की छवि और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। बांग्लादेश का पारंपरिक इस्लाम हमेशा समावेशी और शांतिपूर्ण रहा है। देश ने उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ उल्लेखनीय प्रगति की है।” बयान में आगे कहा गया कि गबार्ड की टिप्पणी किसी ठोस सबूत या विशिष्ट आरोपों पर आधारित नहीं है और इससे पूरे राष्ट्र की गलत छवि पेश की गई है। इसने कहा, “बांग्लादेश ने कई अन्य देशों की तरह उग्रवाद की चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन उसने अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर कानून प्रवर्तन, सामाजिक सुधारों और अन्य आतंकवाद-रोधी उपायों को अपनाया है। हम किसी भी प्रयास की निंदा करते हैं, जिसमें बांग्लादेश को ‘इस्लामिक खलीफा’ से जोड़ने की कोशिश की जाए।” सरकार ने गबार्ड को सलाह दी कि वह “संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले फैक्ट पर आधारित जानकारी का उपयोग करें और इस तरह की टिप्पणियों से बचें, जो गलत धारणाओं को बढ़ावा दे सकती हैं।” गौरतलब है कि तुलसी गबार्ड ने इससे पहले भी बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की आलोचना की थी और वैश्विक स्तर पर “इस्लामिक खलीफा” के प्रभाव पर चर्चा की थी। बांग्लादेश की ओर से यह बयान गबार्ड के एक इंटरव्यू के जवाब में आया है। इसमें गबार्ड ने कहा था कि बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यकों का “लंबे समय से दुर्भाग्यपूर्ण उत्पीड़न, हत्या और दुर्व्यवहार” अमेरिकी सरकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए चिंता का प्रमुख क्षेत्र रहा है। गबार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश में “इस्लामी आतंकवादियों का खतरा” एक ऐसी विचारधारा और उद्देश्य में निहित है, जो “इस्लामी खिलाफत के साथ शासन करना चाहता है”। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत शुरू की है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि देश को “इस्लामी खिलाफत” से जोड़ना बांग्लादेशियों और उनके वैश्विक साझेदारों के शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए किए गए कठिन परिश्रम को कमजोर करता है। बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भीड़ द्वारा हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे मानवाधिकार संगठनों और भारत ने चिंता जताई है। यह घटनाएं प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के बीच सामने आई हैं। गबार्ड वर्तमान में भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने नई दिल्ली में यह बयान दिया था।

अजित पवार ने विधानसभा में बताया कि लाडकी बहिन योजना बंद नहीं की जा सकती , लेकिन होगा बड़ा बदलाव

मुंबई महाराष्ट्र में महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने वाली लाडकी बहिन योजना में बड़ा बदलाव होने वाला है। इसके तहत ऐसी लाखों महिलाओं को लिस्ट से बाहर किया जा सकता है, जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है या फिर वे खुद बढ़िया कमा रही हैं। वित्त मंत्री अजित पवार ने विधानसभा में बताया कि इस स्कीम को खत्म नहीं किया जाएगा, लेकिन मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना में बदलाव जरूर किए जाएंगे। इस स्कीम को लेकर कई विधायकों ने चिंता जताई थी, जिसके जवाब में अजित पवार ने बदलाव की बात कही। अजित पवार ने कहा, ‘ऐसे नागरिक जो कमजोर आर्थिक वर्ग से नहीं आते हैं, उन्हें भी इस स्कीम का लाभ मिल रहा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राज्य सरकार जल्दबाजी में स्कीम लाई थी।’ दरअसल चुनाव से पहले ही एकनाथ शिंदे के सीएम रहते हुए यह स्कीम लॉन्च हुई थी। चुनाव के दौरान महायुति ने वादा किया था कि सत्ता में लौटने के बाद इस रकम को बढ़ाकर 2100 किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इस बीच सरकार ने यह ऐलान जरूर कर दिया है कि स्कीम की समीक्षा होगी और अपात्रों को बाहर किया जाएगा। हालांकि अजित पवार ने अपात्र लोगों को भी एक राहत दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से रकम की रिकवरी नहीं की जाएगी, जिन्हें अपात्र होने के बाद भी योजना का लाभ मिला। अजित पवार ने कहा कि हम स्कीम से खुद किसी को बाहर करने से पहले अपील करेंगे कि जो लोग भी आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे इसका लाभ न लें। यह ऐसे ही होगा, जैसे पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी। देवेंद्र फडणवीस ने सीएम बनने के बाद ही कहना था कि इस स्कीम के तहत पात्रों की सूची की समीक्षा की जाएगी। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में अपात्र लोग भी इस सूची में शामिल हैं। अजित पवार का लिस्ट की समीक्षा करने वाला बयान तब आया है, जब कहा जा रहा है कि सरकार के पास फंड की ही कमी है। दरअसल बड़ी राशि लाडकी बहिन योजना में ही खर्च हो रही है। ऐसे में इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं को पीछे धकेलना पड़ रहा है। बीते दिनों सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा था कि सरकार ने 7000 करोड़ रुपये की रकम उनके विभाग से निकालकर लाडकी बहिन योजना के लिए आवंटित की है। बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने इस स्कीम के लिए 46 हजार करोड़ रुपये का फंड रखा था। लेकिन 2025-26 में इसके लिए 36 हजार करोड़ का फंड ही निर्धारित किया गया है।

आए और घर उजाड़ कर चले गए, नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली

नागपुर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में से एक नागपुर जमकर जला। इसका शिकार हंसापुरी, चिटनिस पार्क समेत कई इलाके हुए। कहा जा रहा है कि सुखरावरी तलाव रोड सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इस दौरान उपद्रवियों ने लोगों के वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। वहीं, छोटे दुकानदारों के सामान को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि शहर के कई इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। कैसे भड़की हिंसा पुलिस अधिकारियों ने कहा कि करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धर्मग्रंथ जलाया गया है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। लोगों के घरों पर हुआ पथराव पुलिस के अनुसार, पुराने भंडारा रोड के पास हंसपुरी इलाके में रात साढ़े 10 से साढ़े 11 बजे के बीच एक और झड़प हुई। अनियंत्रित भीड़ ने कई वाहनों को जला दिया और इलाके में घरों तथा एक क्लिनिक में तोड़फोड़ की। ओल्ड हिस्लोप कॉलेज इलाके के रहवासियों ने बताया है कि भीड़ उनके क्षेत्र में शाम करीब 7 बजकर 30 मिनट पर पहुंची और घरों पर पथराव करने लगी थी। साथ ही गली में खड़ी कई कारों में तोड़फोड़ की गई थी। इस दौरान चार कारों में तोड़फोड़ की गई थी और एक बुरी तरह से जल गई थी। रहवासियों का कहना है कि भीड़ ने घरों पर पत्थर फेंके, कारें जला दीं, बाहर रखे कूलर तोड़ दिए और खिड़कियां भी तोड़ दीं। एक रहवासी ने एजेंसी को जानकारी दी कि इलाके में रहने वाले लोगों ने बाद में पानी की व्यवस्था कर आगजनी का शिकार हुए वाहनों पर डाला। स्थानीय लोग हिंसा के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हंसपुरी इलाके के निवासी शरद गुप्ता (50) के घर के सामने खड़े चार दोपहिया वाहनों को जला दिया गया। शरद ने बताया कि रात साढ़े 10 से साढ़े 11 बजे के बीच भीड़ ने हमला बोल दिया, पथराव किया और वाहनों में आगजनी की। गुप्ता हमले में घायल हो गए और उन्होंने बताया कि भीड़ ने एक पड़ोसी की दुकान में भी तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा कि पुलिस एक घंटे बाद पहुंची। गुस्साए निवासियों ने भीड़ के खिलाफ तत्काल पुलिस कार्रवाई की मांग की। ‘पीटीआई-भाषा’ के एक संवाददाता ने रात एक बजकर 20 मिनट पर एक दंपति को अपना घर बंद कर आसपास सुरक्षित स्थान पर जाते देखा। रामनवमी शोभायात्रा के लिए काम कर रहे एक अन्य निवासी चंद्रकांत कावडे ने बताया कि भीड़ ने उनके सभी सजावटी सामान जला दिए और घरों पर पत्थर फेंके। कुछ निवासी अपने गलियारे में बाहर आ गए और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस की एक टुकड़ी को गलियों में मार्च करते देखा गया। हंसपुरी इलाके के एक निवासी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भीड़ ने रात करीब साढ़े 10 बजे उनके घर पर हमला बोल दिया और घर के बाहर खड़ी उनकी गाड़ियों को जला दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने दमकल के आने से पहले अपने घर की पहली मंजिल से पानी डालकर आग बुझाई।’ वहीं, एक अन्य निवासी वंश कवले ने बताया कि भीड़ ने अपने चेहरे ढके हुए थे और सीसीटीवी कैमरा तोड़ दिया। उन्होंने उनके घरों में घुसने की भी कोशिश की। क्लिनिक के सामने चाय की दुकान करने वाले एक अन्य निवासी ने बताया कि भीड़ क्लिनिक (बंडू क्लिनिक) में घुस गई, सभी मेज तोड़ दीं और दवाइयां फेंक दीं। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान में भी तोड़फोड़ की गई।

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