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बंदूकधारियों ने गोलियां मारकर कर दी ISI के मददगार और कुलभूषण जाधव को अगवा करवाने वाले मुफ्ती शाह मीर की हत्या

बलूचिस्तान  कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा करने में पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी (ISI) की मदद करने वाले मुफ्ती शाह मीर की हत्या कर दी गई है। हमलावरों ने उसे कई गोलियां मारीं। इसके बाद शाह मीर को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ISI ने कुलभूषण जाधव को साल 2016 में ईरान से अगवा किया था। इस काम में मुफ्ती शाह मीर ने पाक खूफिया एजेंसी की मदद की थी। शाह मीर बलूचिस्तान के एक प्रमुख मुफ्ती था। मुफ्ती पर पहले भी दो बार जानलेवा हमले किए जा चुके थे। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार रात की नमाज के बाद तुर्बत में एक स्थानीय मस्जिद से निकलते समय मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया। उन्हें नजदीक से गोलियां मारी गई और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। ISI का मददगार शाह मीर कट्टरपंथी पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) का सदस्य था। वह मुफ्ती होने की आड़ में हथियार और मानव तस्कर के रूप में काम करता था। वह ISI का भी मददगार था। उसके अकसर पाकिस्तान के उन आतंकी शिविरों में जाने की भी खबरें मिलती रही हैं, जहां भारत विरोधी योजनाएं तैयार की जाती रही हैं। कुलभूषण जाधव मामला भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने के बाद ईरान के चाबहार में व्यवसाय कर रहे थे। साल 2016 में उन्हें ईरान-पाकिस्तान सीमा के पास से अगवा कर लिया गया था। ISI ने इस मिशन को अंजाम दिया था और इस काम में मुफ्ती शाह मीर ने पाक खूफिया एजेंसी की मदद भी की थी। इसके बाद जाधव को पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया गया था। वह अभी भी पाकिस्तानी जेल में हैं। साल 2017 में उन्हें पाकिस्तान की एक कोर्ट फांसी की सजा सुना चुकी है।

भारत-पाक सीमा से दूर रहने और उस इलाके में यात्रा ना करने की अमेरिका ने जारी कर दी एडवाइजरी

नई दिल्ली अमेरिका ने अपने नागरिकों को भारत-पाक सीमा से दूर रहने और उस इलाके में यात्रा ना करने की एडवाइजरी जारी की है। आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष की आशंका से भारत-पाकिस्तान सीमा और नियंत्रण रेखा के आसपास के क्षेत्रों तथा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों की यात्रा न करने की चेतावनी देते हुए एक परामर्श जारी किया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियां और सशस्त्र संघर्ष हो सकते हैं, इसलिए लोगों को पाकिस्तान की यात्रा पर पुनर्विचार करना चाहिए। यात्रा परामर्श में अमेरिकियों से आतंकवाद के कारण बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की यात्रा न करने को भी कहा गया है। अमेरिका ने कहा कि इन इलाकों में आतंकवादी संगठनों के ऐक्टिव होने की जानकारी है। इसके अलावा सीमा पर भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सेना की भी बड़ी तैनाती है। बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी संगठन लगातार कई हमले कर चुके हैं। शुक्रवार को भी पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंसा की घटना सामने आई है। केच जिले के तुरबत कस्बे में कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने शुक्रवार देर रात बलूचिस्तान के प्रमुख मौलवी मुफ्ती शाह मीर की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। उसने बताया कि हथियारबंद लोगों ने धार्मिक विद्वान को उस समय निशाना बनाया जब वह रात की नमाज अदा करके बाहर आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार हथियारबंद लोगों ने मुफ्ती शाह मीर पर गोलियां चला दीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें तुरंत तुरबत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, मौलवी मीर को कई गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौत हो गई। मुफ़्ती शाह मीर जेयूआई-एफ के करीबी थे। इससे पहले भी दो बार उन पर जानलेवा हमला किया गया था। यह हमला खुजदार में जेयूआई-एफ के दो नेताओं की गोली मारकर हत्या के कुछ दिनों बाद हुआ है।

भावनगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज दो प्रशिक्षु छात्रों की पिटाई, आरोपी बैचमेट और सीनियर पर मामले दर्ज

भावनगर गुजरात के भावनगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज के दो प्रशिक्षु छात्रों को सोशल मीडिया पर चुटकुले साझा करना भारी पड़ गया। दरअसल प्रशिक्षु छात्रों के वरिष्ठों और बैच के साथियों ने दोनों को बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज लिया है। वहीं कॉलेज प्रशासन ने इस घटना को रैगिंग मानते हुए चारों आरोपी छात्रों तो तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।   पीड़ित इंटर्न्स इशान कोटक और अमन जोशी ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी वरिष्ठ छात्र और बैचमेट, मेडिकल कॉलेज में दीक्षांत समारोह के आयोज में हुई खेल गतिविधियों से भी खुश नहीं थे। 

सीरिया से लेबनान भाग रहे लोग, 2 दिनों में 1000 लोगों की मौत, महिलाओं को नंगा कर घुमाया

  सीरिया सीरिया में गुरुवार को हुए हिंसक संघर्षों में 1000 से अधिक लोग मारे गए हैं। सुरक्षा बलों और पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों के बीच संघर्ष के दौरान हिसा हुई थी। एसोसिएटेड प्रेस ने इसकी जानकारी दी है। यह हिंसा तब शुरू हुई जब वर्तमान सरकार के पक्ष में गोलियां चलाने वाले बंदूकधारियों ने पूर्व राष्ट्रपति असद के प्रति वफादार अलावित अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बदले की भावना से हत्या की शुरुआत की। अब हिंसा कुछ हद तक रुक गई है और सरकार ने अधिकांश इलाकों पर नियंत्रण पुनः स्थापित कर लिया है। अधिकारियों ने स्थिरता बहाल करने के लिए तटीय क्षेत्र की ओर जाने वाली सभी सड़कें बंद कर दी हैं, जहां हिंसा का केंद्र था। सीरियाई मानवाधिकार वेधशाला ने कहा कि संघर्षों में 745 नागरिक मारे गए, जिनमें से अधिकांश को नजदीक से गोलियों से मारा गया था। इसके अलावा, 125 सरकारी सुरक्षा बलों के सदस्य और असद से जुड़े सशस्त्र समूहों के 148 उग्रवादी भी मारे गए हैं। अलावित समुदाय पर हमले असद शासन के दौरान अलावितों को सेना और अन्य उच्च पदों पर प्रमुख स्थान मिला था। हालांकि, तीन महीने पहले नए शासन की शुरुआत के साथअलावित समुदाय को बार-बार उनके पूर्व राष्ट्रपति से जुड़े होने के कारण निशाना बनाया गया है। बिजली और पानी की कटौती ब्रिटेन स्थित सीरियाई मानवाधिकार वेधशाला ने कहा कि हिंसा के साथ-साथ कई अलावित बहुल क्षेत्रों में बिजली और पीने का पानी भी काट दिया गया है। अलावित गांवों के लोगों ने एपी को बताया कि समुदाय के कई घरों को लूटा गया और फिर आग लगा दी गई। लेबनानी राजनेता की चिंता लेबनान के राजनेता हैदर नासिर अपने देश की संसद में अलावित समुदाय के लिए निर्धारित दो सीटों में से एक पर बैठते हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए सीरिया से लेबनान भाग रहे हैं। महिलाओं पर हमले गवाहों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि महिलाओं को कथित तौर पर निर्वस्त्र करके सड़कों पर घुमाया गया और फिर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस भयावह दृश्य ने हिंसा को और भड़का दिया। बानियास में हाहाकार बानियास शहर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। वहां सड़कों पर शव पड़े हुए थे। इमारतों की छतों पर भी लाशें देखी गईं। बंदूकधारियों ने नागरिकों को शवों को दफनाने से रोक रखा था। एक निवासी ने बताया, “यह बहुत बुरा था। शव सड़कों पर थे। लोग अपने शहर से भाग रहे थे। बंदूकधारी बिना किसी कारण के गोलियां चला रहे थे। घरों और कारों को भी जलाया जा रहा था।”

देर रात बेचैनी और सीने में दर्द के चलते उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एम्स में कराया भर्ती

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को बेचैनी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद एम्स में भर्ती कराया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई को सूत्रों ने बताया कि 73 वर्षीय धनखड़ को बीते शनिवार रात अस्पताल लाया गया।  उनकी हालत स्थिर है और और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। बताया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति को देर रात को बेचैनी और सीने में दर्द हुआ। जिसके बाद उन्हें देर रात करीब 2 बजे अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उपराष्ट्रपति की हालत स्थिर है और उन्हें क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में निगरानी में रखा गया है। धनखड़ को एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग की देखरेख में क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती कराया गया। सूत्र ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का एक ग्रुप उनकी स्थिति पर नजर रख रहा है।

Youtube की बड़ी कार्रवाई: 48 लाख चैनल्स सहित 29 लाख वीडियो हटाए

 नई दिल्ली Youtube अपनी पॉलिसी को लेकर काफी सख्त है। अभी कंपनी की तरफ से ऐसे चैनल और क्रिएटर्स पर कार्रवाई भी की जा रही है जो पॉलिसी का पालन नहीं कर रहे हैं। YouTube ने कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले वीडियो पर सख्त कार्रवाई करते हुए अक्टूबर से दिसंबर 2023 के बीच 29 लाख वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा दिए हैं। यह संख्या दुनिया के किसी भी देश में हटाए गए वीडियो में सबसे अधिक है। YouTube की हालिया रिपोर्ट बताती है, यह पिछले तिमाही की तुलना में करीब 32% ज्यादा है। 2020 के बाद से भारत में हटाए जा रहे वीडियो की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इस मामले में ब्राजील दूसरे स्थान पर है। YouTube का ऑटोमैटेड सिस्टम कर रहा निगरानी Youtube की तरफ से ऑटोमैटेड कंटेंट मॉडरेशन टूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी मदद से वीडियो की पहचान की जाती है। साथ ही पॉलिसी का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। रिपोर्ट पर नजर मारें तो पता चलता है कि 99.7% वीडियो इसी सिस्टम द्वारा फ्लैग किए गए हैं। भारत समेत दुनियाभर में YouTube ने स्पैम, स्कैम और गलत जानकारी देने वाले 81.7% वीडियो डिलीट किए हैं। इसके अलावा, 6.6% वीडियो उत्पीड़न, 5.9% बच्चों की सुरक्षा, और 3.7% हिंसा से जुड़े होने के कारण हटाए गए। न केवल वीडियो, बल्कि YouTube ने अक्टूबर से दिसंबर 2023 के बीच लगभग 48 लाख चैनल्स पर भी कार्रवाई की है। साथ ही, 130 करोड़ से ज्यादा ऐसे कमेंट्स भी डिलीट कर दिए हैं जो पॉलिसी को ब्रेक कर रहे थे। ये एक बड़ी कार्रवाई है। क्योंकि बीते कई महीनों से ऐसे वीडियो पर कार्रवाई की बात हो रही थी, लेकिन अब साफ हो गया है कि ऐसे वीडियो को हटा दिया गया है। ऑनलाइन गैंबलिंग को प्रमोट करने वालों पर होगी कार्रवाई Google ने अभी एक नई पॉलिसी बनाई है। इसमें ऐसे क्रिएटर्स पर भी कार्रवाई हो सकती है जो गैंबलिंग साइट्स या ऐप्स को प्रमोट करते हैं। इस पॉलिसी को नहीं माननें पर क्रिएटर्स के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है और ऐसे चैनल्स को ब्लॉक किया जा सकता है। दरअसल इसमें भी कुछ टर्म एंड कंडीशन को जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी ऐप को प्रमोट नहीं किया जा सकता है जो गूगल अप्रूव्ड नहीं है। अगर ऐसे किसी का भी इस्तेमाल किया जाता है तो ये खतरनाक साबित हो सकता है।

फ्रांस ने ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाते हुए दुनिया में सबसे बड़े हाइड्रोजन भंडार को खोजने की ऐलान किया

पेरिस फ्रांस ने ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाते हुए दुनिया में सबसे बड़े हाइड्रोजन भंडार को खोजने की ऐलान किया है। यह भंडार मोसेल क्षेत्र में फोल्सविलर की मिट्टी के नीचे दबा है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस प्राकृतिक हाइड्रोजन भंडार की कुल मात्रा 46 मिलियन टन है। वर्तमान में इस हाइड्रोजन भंडार की कीमत 92 ट्रिलियन डॉलर है, जो समय के साथ कई गुना ज्यादा हो सकती है। इसे फ्रांस के लिए एक छिपा हुआ खजाना माना जा रहा है, जो ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इस हाइड्रोजन भंडार की खोज को जियोरिसोर्सेज प्रयोगशाला और सीएनआरएस के शोधकर्ताओं ने अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि यह खोज पूरी तरह से अप्रत्याशित थी। वैज्ञानिक शुरू में मीथेन की खोज कर रहे थे, लेकिन इसके बजाय उन्हें 1,250 मीटर भूमिगत प्राकृतिक हाइड्रोजन का एक विशाल भंडार मिला। यह खोज दुनिया के सालाना ग्रे हाइड्रोजन उत्पादन के आधे से अधिक का प्रतिनिधित्व करती है, लेकिन इसके साथ आने वाले कार्बन उत्सर्जन के बिना। सफेद हाइड्रोजन दूसरों से अलग कैसे यह सफेद हाइड्रोजन अपने प्रसिद्ध हरे और ग्रे समकक्षों से अलग है। इसके लिए जटिल औद्योगिक उत्पादन की आवश्यकता नहीं होती है, न ही यह CO2 उत्सर्जन उत्पन्न करता है। इसके बजाय, यह पृथ्वी की सतह के नीचे स्वाभाविक रूप से मौजूद है, जिसका दोहन किया जाना बाकी है। यदि इसका सही तरीके से दोहन किया जाए, तो यह संसाधन दुनिया भर में ऊर्जा के उत्पादन और उपभोग के तरीके को फिर से परिभाषित कर सकता है। सफेद हाइड्रोजन: स्वच्छ ऊर्जा का सबसे बड़ा सोर्स वर्षों से, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था दो प्रमुख बाधाओं से पीछे रह गई है। पहली है ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत और जटिलता, जिसके लिए बड़ी मात्रा में नवीकरणीय बिजली की आवश्यकता होती है। दूसरा है ग्रे हाइड्रोजन से जुड़ा प्रदूषण, जो जीवाश्म ईंधन से प्राप्त होता है। सफेद हाइड्रोजन इन चुनौतियों को एक झटके में खत्म कर सकता है। यह पहले से ही मौजूद है, निकाले जाने के लिए तैयार है, जो एक स्वच्छ, कम लागत वाला और अत्यधिक कुशल विकल्प प्रदान करता है। कोई ऊर्जा इलेक्ट्रोलिसिस नहीं, कोई जीवाश्म ईंधन निर्भरता नहीं – बस बिजली का एक प्राकृतिक स्रोत है जिसे अनलॉक किए जाने का इंतजार है। स्वच्छ ईंधन स्रोत से दुनिया को होगा फायदा इसकी क्षमता बहुत अधिक है। यदि इसी तरह की भूवैज्ञानिक संरचनाएं कहीं और मौजूद हैं, तो यह सस्टिनेबल एनर्जी प्रोडक्शन में वैश्विक क्रांति का द्वार खोल सकता है। दुनिया भर के देशों को अचानक से स्वच्छ ईंधन स्रोत तक पहुंच मिल सकती है, वो भी बिना महंगे हाइड्रोजन उत्पादन बुनियादी ढांचे में निवेश किए। हाइड्रोजन की दौड़ में फ्रांस का रणनीतिक लाभ ऊर्जा नवाचार के बारे में सोचते समय लोरेन शायद पहली जगह न हो, लेकिन यह खोज इस क्षेत्र को सुर्खियों में ला सकती है। फ्रांस के लोरेन की बदल जाएगी सूरत कभी कोयला और इस्पात उद्योगों का केंद्र रहे लोरेन के पास अब हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बनने का सुनहरा अवसर है। इसके निहितार्थ बहुत बड़े हैं। निष्कर्षण से लेकर हाइड्रोजन आधारित उद्योगों तक, रोजगार सृजन में उछाल आ सकता है। स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का पुनरुद्धार संभव है, परित्यक्त खनन क्षेत्रों को ऊर्जा केंद्रों में बदलना संभव है। राष्ट्रीय स्तर पर, फ्रांस यूरोप की ऊर्जा स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर सकता है। यदि फ्रांस तेजी से आगे बढ़ता है, तो यह सफेद हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी हो सकता है, अपनी विशेषज्ञता का निर्यात कर सकता है और इस उभरते क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान स्थापित कर सकता है।

ममता के मंत्री को बांग्लादेश से मिली धमकी, शिक्षा मंत्री को अविलंब अपने पद से इस्तीफा देने को भी कहा

कोलकाता कोलकाता के जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) परिसर में गत एक मार्च को हुई अशांति की घटना को लेकर बांग्लादेश के तीन छात्र संगठनों ने बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को अविलंब अपने पद से इस्तीफा देने को भी कहा है। कोलकाता पुलिस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है, हालांकि इन छात्र संगठनों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है। तीनों संगठन बांग्लादेश की राजधानी ढाका-आधारित बताए गए हैं। शिक्षा मंत्री की सुरक्षा बढ़ाई गई पता चला है कि शिक्षा मंत्री के आवास के आसपास धमकी भरे पोस्टर चस्पे मिले हैं। इसे देखते हुए शिक्षा मंत्री की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस को आशंका है कि बांग्लादेशी छात्र संगठनों के सदस्य कोलकाता आकर वामपंथी छात्र संगठनों को अशांति फैलाने के लिए उकसा सकते हैं। मालूम हो कि शिक्षा मंत्री जेयू के प्रोफेसरों के संगठन की बैठक में भाग लेने वहां गए थे। बैठक के बाद जेयू परिसर से निकलते वक्त माकपा के छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्यों ने उनकी गाड़ी रोककर जेयू में छात्र संघ का चुनाव जल्द कराने की मांग की। उसी दौरान शिक्षा मंत्री व उनके काफिले की कुछ गाड़ियों में तोडफोड़ की गई, जिसमें ब्रात्य बसु को भी चोटें आई थीं। दूसरी तरफ एसएफआई ने शिक्षा मंत्री पर अपनी कार से उसके कई सदस्यों को कुचलकर घायल करने का आरोप लगाया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- मैं पाकिस्तान से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह हमें पीओके वापस कर देगा

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह पाकिस्तान से यह उम्मीद नहीं करते कि वह पीओके को भारत के हवाले कर देगा। राजनाथ सिंह का मानना है कि पीओके के लोग खुद ही यह मांग करेंगे कि उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया जाए और जम्मू-कश्मीर के साथ एकीकृत कर लिया जाए। रक्षा मंत्री ने बातचीत करते हुए कहा कि मैं पाकिस्तान से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह हमें पीओके वापस कर देगा। मेरा तो यह मानना है कि पीओके के लोग ही यह मांग उठाएंगे कि हमें भारत में शामिल कर दिया जाए, उन्हें जम्मू-कश्मीर के साथ जोड़ दिया जाए। क्योंकि जिस तरह से भारत का आर्थिक विकास लगातार आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है, उसे देखते हुए पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों को भी यह महसूस होने लगा है कि यदि हम अपना विकास चाहते हैं, तो भारत जैसे देश के साथ जुड़कर ही अब अपने क्षेत्र का विकास कर सकते हैं। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि पीओके को मैं देश नहीं कहता, उसे क्षेत्र कहता हूं। मुझे लगता है कि पीओके के लोग भारत में शामिल होने की मांग करेंगे तो पाकिस्तान मजबूर हो जाएगा। मुझे यह भी लगता है कि पीओके को पाकिस्तान की सहमति की जरूरत भी क्यों पड़ेगी? मैं ऐसा मानता हूं। वहीं, बांग्लादेश की स्थिति को लेकर सवाल किए जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है, बांग्लादेश भी हमारा पड़ोसी देश है। हम अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि हमारे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते। यही वजह है कि हम अपने पड़ोसी बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहेंगे।

सर्वे के अनुसार-अमेरिकी प्रशासन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जेलेंस्की की अप्रवल रेटिंग में हुआ इजाफा

कीव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति के लिए देश में समर्थन बढ़ा है। जारी एक सर्वे के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जेलेंस्की की अप्रवल रेटिंग में इजाफा हुआ है। कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी (केआईआईएस) के सर्वे में पाया गया कि मार्च की शुरुआत में जेलेंस्की की अप्रूवल रेटिंग बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई, जो एक महीने पहले 57 प्रतिशत थी। इस बीच, उनकी डिसअप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत से गिरकर 27 प्रतिशत हो गई। सर्वे के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए, केआईआईएस के कार्यकारी निदेशक एंटोन ह्रुशेत्स्की ने कहा, “यूक्रेन के लोग नई अमेरिकी सरकार की बयानबाजी को पूरे यूक्रेन और सभी यूक्रेनवासियों पर हमला मानते हैं।” 28 फरवरी को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ जेलेंस्की की बैठक एक तीखी बहस में बदल गई। दो देशों के नेताओं के बीच बहस को पूरी दुनिया ने देखा। इस घटनाक्रम के कारण निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस और एक प्रत्याशित द्विपक्षीय कच्चे माल समझौते को रद्द करना पड़ा। ट्रंप प्रशासन लगातार यूक्रेन पर रूस के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने का दबाव डाल रहा है। अमेरिका ने अब सैटेलाइट तस्वीरों तक यूक्रेन की पहुंच को रोक दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी एयरोस्पेस फर्म मैक्सार द्वारा ली गई युद्ध के मैदान की तस्वीरें अब यूक्रेन के लिए उपलब्ध नहीं होंगी। कीव इन तस्वीरों का इस्तेमाल रूसी सेना की गतिविधियों पर नजर रखने और हवाई हमलों के बाद नुकसान का आकलन करने के लिए कर रहा था। मैक्सार ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा के अनुरूप, अब यूक्रेन में यूजर्स के लिए इन तस्वीरों तक पहुंच को ब्लॉक किया जा रहा है। अंतरिक्ष से प्राप्त तस्वीरें कीव के टूलबॉक्स में एक महत्वपूर्ण हथियार रही हैं। इनका इस्तेमाल टोही ड्रोन मिशन की योजना बनाने, टैंकों-वाहनों के रूसी भंडार को खोजने और रूसी नियंत्रित क्षेत्रों में हमलों के परिणामों का आकलन करने के लिए किया जाता है। अमेरिका यूक्रेन को पहले ही सैन्य सहायता रोक चुका है और फिर उसने खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया। कीव को दी जाने वाली महत्वपूर्ण सहायता में इस नवीनतम कटौती को यूक्रेन पर रूस के साथ शांति वार्ता के लिए दबाव बनाने के एक और प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में दी जानकारी, पुलिस के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी, कानून व्यवस्था का बुरा हाल

ढाका बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई। देश की मीडिया ने शनिवार को पुलिस रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी। आंकड़ों से पता चला कि बांग्लादेशी पुलिसकर्मी भीड़ के हमलों का शिकार हो रहे हैं। देश में पिछले छह महीनों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर 225 हमले हुए। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस पर सितंबर 2024 में 24, अक्टूबर में 34, नवंबर में 49, दिसंबर में 43, जनवरी में 38 और फरवरी 2025 में 37 हमले हुए। इसके अलावा, स्थानीय पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से सड़कों पर अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली दैनिक ‘प्रोथोम अलो’ ने शनिवार को बताया कि आरोपियों को छुड़ाने के लिए पुलिस पर हमले की भी कई खबरें हैं। पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेशी सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए है जिसमें छात्र कार्यकर्ता और असामाजिक तत्व ढाका समेत पूरे देश में पुलिसकर्मियों की पिटाई करते दिख रहे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, एक बांग्लादेशी पुलिस सब-इंस्पेक्टर का वीडियो व्यापक रूप से वायरल हुआ। इसमें सब-इंस्पेक्टर को 10-15 लोग पीट रहे थे। पुलिसकर्मी ने पुलिस चौकी पर मोटरसाइकिल सवारों को रुकने का संकेत दिया था। हमलावरों ने न केवल असहाय एसआई के कपड़े फाड़ दिए, बल्कि उसका बटुआ, मोबाइल और सरकारी वॉकी-टॉकी भी छीन लिया। अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं आम बात हो गई हैं। देश में अराजकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका खामियाजा अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं समेत कई पुलिसकर्मियों को भी भुगतना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश में हिंसक भीड़ ने ‘बदले की हिंसा के गंभीर कृत्यों’ में भाग लिया, [खासकर अगस्त 2024 से] जिसमें हत्याएं, पुलिस और अवामी लीग के अधिकारियों को निशाना बनाना शामिल है। हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पूरे बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई। भीड़ ने न केवल अवामी लीग के कार्यालयों पर हमला किया और उन्हें जला दिया, बल्कि कई पुलिस स्टेशन में भी आग लगा दी। बांग्लादेश पुलिस के आंकड़ों से पता चला है कि हसीना के सत्ता से हटने के बाद, 639 पुलिस स्टेशनों में से 450 नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए। कई मामलों में, पुलिस अधिकारी भाग गए या उन्हें उनके वरिष्ठों ने जाने दिया। कुछ अधिकारियों को पीट-पीटकर मार डाला गया या किसी और तरह से मार दिया गया। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक ‘डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक कई पुलिस अधिकारी काम पर आने से डरते थे, और पुलिस ने कई जगहों पर प्रभावी रूप से काम करना बंद कर दिया।

आइसक्रीम खोली, तो उसकी रूह कांप गई, अंदर एक असली सांप जमी हुई हालत में मौजूद था, सोशल मीडिया पर खौफ

थाईलैंड आइसक्रीम खाना किसे पसंद नहीं? बच्चे हों या बड़े, गर्मी में ठंडी मिठास का मजा सब लेना चाहते हैं। लेकिन सोचिए, अगर आपकी आइसक्रीम में ठंडे-ठंडे क्रीम और फ्लेवर के साथ एक सांप भी हो तो? सुनकर ही रूह कांप जाए, लेकिन थाईलैंड में एक युवक के साथ सच में ऐसा हुआ। थाईलैंड के मुवांग रट्चाबुरी इलाके के रहने वाले रेबान नक्लियांगबून नामक युवक ने एक दुकान से ब्लैक बीन आइस फ्रूट खरीदी, जो वहां के लोगों में बेहद मशहूर है। लेकिन जब उसने अपनी आइसक्रीम खोली, तो उसकी रूह कांप गई। अंदर एक असली सांप जमी हुई हालत में मौजूद था। ये कोई साधारण सांप नहीं था, बल्कि गोल्डन ट्री स्नेक था, जिसकी लंबाई आमतौर पर 70 से 130 सेंटीमीटर तक होती है। हालांकि, आइसक्रीम में जमी हुई इस सांप की लंबाई 20 से 40 सेंटीमीटर ही थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई सांप का बच्चा होगा। सोशल मीडिया पर जब इस घटना की तस्वीरें वायरल हुईं, तो लोग दंग रह गए। वायरल हो रही तस्वीर पर लोग जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ ने इसे फ्री प्रोटीन सप्लीमेंट बताया, तो कुछ ने सड़क किनारे मिलने वाले खाने को लेकर चेतावनी दी। एक यूजर ने मज़ाक में कहा, “चिंता मत करो, सांप पहले ही जम चुका होगा!”

कठुआ में जलाशय में मिले 3 शव, दो दिन से थे लापता, घटना आतंकवाद प्रभावित इलाके की बताई जा रही है, मचा हड़कंप

कठुआ जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में तीन लोगों के शव जलाशय में मिलने से हड़कंप मच गया। ये दो दिन पहले लापता हुए थे। मृतकों में 14 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। यह घटना आतंकवाद प्रभावित इलाके की बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि योगेश सिंह, दर्शन सिंह और नाबालिग लड़का वरुण सिंह बुधवार शाम को बिल्लावर इलाके में शादी समारोह में शामिल होने निकले थे। इसके बाद से ही उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। तीनों के लापता होने की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों की ओर से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद लोहाई मल्हार इलाके के पास एक जलाशय में तीनों लोगों के शव मिले। सूत्रों ने बताया कि इस इलाके में आतंकवादियों की भारी मौजूदगी है। पिछले 2 साल में यहां कई आतंकी हमले हो चुके हैं। पिछले महीने भी इसी इलाके से दो नागरिकों के शव बरामद किए गए थे। आतंकवादियों के 2 मददगार हिरासत में दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के कठुआ और रामबन जिलों में कड़े सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत आतंकवादियों के 2 मददगारों को हिरासत में लिया गया है। PSA एक प्रशासनिक कानून है जो कुछ मामलों में बिना आरोप या सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि कठुआ की बिलावर तहसील के धनोपरोले निवासी भुट्टू को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया और उधमपुर जिला जेल में बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरोपी एक कट्टर ओजीडब्ल्यू था जो पिछले कुछ वर्षों से अवैध गतिविधियों में शामिल था। रामबन के दलवाह-गुल निवासी मंजूर अहमद उर्फ ​​फुरकान को भी राष्ट्र विरोधी और असामाजिक गतिविधियों में संलिप्तता के लिए पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है। पिछले वर्ष अगस्त में पीएसए के तहत हिरासत में लेने के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त होने के बाद से अहमद गिरफ्तारी से बच रहा था।

अब ट्रंप सरकार के एक मंत्री ने भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने पर भी आपत्ति जताई

नई दिल्ली टैरिफ को लेकर अमेरिका का कई देशों से विवाद चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने पर अड़े हुए हैं। इसके चलते कई देशों से संबंधों में खटास आई है। उन्होंने भारत के साथ भी खुलकर टैरिफ को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। अब ट्रंप सरकार के एक मंत्री ने भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने पर भी आपत्ति जता दी है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने भारत से रूसी सैन्य हथियारों पर अपनी निर्भरता समाप्त करने को कहा है और तर्क दिया है कि ऐसा कदम भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए जरूरी है। बातचीत में लुटनिक ने कहा, “भारत ने ऐतिहासिक रूप से रूस से अपने सैन्य उपकरणों की काफी अधिक मात्रा खरीदी है और हमें लगता है कि यह ऐसी चीज है जिसे खत्म करने की जरूरत है।” उल्लेखनीय है कि भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है और भारत पेट्रोलियम के साथ-साथ हथियारों की भी खरीद करता रहता है। लुटनिक ने कहा कि अमेरिका विकल्प के तौर पर मॉर्डर हथियार भारत को देने के लिए तैयार है। इससे साफ है कि अमेरिका चाहता है कि भारत रूस के बजाए उससे हथियार खरीदे। इतना ही नहीं, ब्रिक्स में भारत की मौजूदगी पर भी अमेरिकी मंत्री ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स डॉलर के विकल्प के रूप में वैश्विक मुद्रा बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी ब्रिक्स (BRICS) में I भारत है। यह अमेरिका-भारत संबंधों को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, ”इस तरह की चीजें प्यार और स्नेह पैदा नहीं करती हैं। हम चाहते हैं कि ये चीजें खत्म हो जाएं। हम चाहते हैं कि व्यापार अधिक निष्पक्ष हो।” वहीं, रूस से हथियारों को खरीदना अमेरिका को काफी समय से पसंद नहीं आ रहा है। ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में पीएम मोदी से फोन पर बातचीत के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद जब पीएम वॉशिंगटन दौरे पर गए, तब भी यह मुद्दा उठा था। ट्रंप ने भारत को फाइटर जेट एफ-35 भी खरीदने का ऑफर दिया है। भारत शुल्क में कटौती करने पर सहमत हुआ: ट्रंप इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत अपने शुल्क में ‘पर्याप्त’ कटौती करने के लिए सहमत हो गया है, क्योंकि भारत अमेरिका पर बहुत अधिक शुल्क लगाता है, जिससे वहां उत्पाद बेचना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। ट्रंप ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय) से दिए बयान में कहा, ”आर्थिक, वित्तीय और व्यापारिक दृष्टिकोण से हमारे देश को दुनिया के लगभग हर देश ने पूरी तरह से ठगा है।” उन्होंने कहा, ”कनाडा, मेक्सिको और फिर आप सीधे लाइन में चले जाइए। भारत हम पर बहुत ज्यादा शुल्क लगाता है, बहुत ज्यादा। आप भारत में कुछ भी नहीं बेच सकते। यह लगभग, यह लगभग प्रतिबंधात्मक है। यह प्रतिबंधात्मक है। हम अंदर बहुत कम व्यापार करते हैं।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही कैबिनेट विस्तार की घोषणा कर सकते हैं, बड़ा फेरबदल तय

उत्तराखंड उत्तराखंड की राजनीति में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में लंबे समय से कैबिनेट में रिक्त चार पदों को भरने की चर्चा चल रही थी और अब यह तय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही कैबिनेट विस्तार की घोषणा कर सकते हैं। इसके साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया उत्तराखंड दौरे के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी का दिल्ली दौरा इस बात की पुष्टि कर रहा है कि जल्द ही मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के ताजा बयानों से भी संकेत मिल रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। प्रेमचंद अग्रवाल की कुर्सी पर संकट कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ समय पहले उन्होंने विधानसभा में पहाड़वासियों के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था, जिससे राज्यभर में नाराजगी देखी गई। इस बयान के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और जनता के गुस्से को देखते हुए उनके मंत्री पद से हटने की संभावना जताई जा रही है। पीएम मोदी के दौरे से पहले ही मिल चुके थे संकेत प्रधानमंत्री मोदी जब हाल ही में उत्तरकाशी दौरे पर आए थे, तब प्रेमचंद अग्रवाल की गैरमौजूदगी ने और भी ज्यादा अटकलों को हवा दे दी थी। वह न तो प्रधानमंत्री के साथ दून में मिले और न ही हर्षिल में हुई सभा में मंच पर दिखे। इससे यह साफ हो गया कि मामला पीएम तक पहले ही पहुंच चुका था और अब उनके खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। क्या कह रहे हैं भाजपा नेता? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि कैबिनेट विस्तार होना तय है और सीएम धामी जल्द ही इसकी घोषणा कर सकते हैं। वहीं, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने भी कहा है कि वह प्रेमचंद अग्रवाल प्रकरण को पार्टी फोरम के समक्ष रख चुके हैं। इससे यह साफ है कि भाजपा इस मामले को गंभीरता से ले रही है और मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को हटाने पर विचार किया जा रहा है।

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