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यूक्रेन युद्ध के चलते रूस में जनसंख्या संकट और बढ़ा, ‘सेक्स मंत्रालय’ बना जन्म दर बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार करना होगा

मॉस्को रूस में जनसंख्या घटने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक बेहद अनोखे कदम पर विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सहयोगी और रूसी संसद की फैमिली प्रोटेक्शन और बाल संरक्षण समिति की अध्यक्ष नीना ओस्तानीना एक ‘सेक्स मंत्रालय’ स्थापित करने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही हैं। इस मंत्रालय का उद्देश्य देश की जन्म दर बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार करना होगा। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब यूक्रेन युद्ध के चलते देश में जनसंख्या संकट और बढ़ गया है। रूसी मैगजीन मोस्कविच के अनुसार, ग्लैवपीआर एजेंसी द्वारा पेश एक याचिका में ‘सेक्स मंत्रालय’ स्थापित करने का सुझाव दिया गया, जो जन्म दर से जुड़ी योजनाओं का नेतृत्व करेगा। मॉस्को की डिप्टी मेयर अनास्तासिया राकोवा ने जोर देकर कहा कि देश में जनसंख्या वृद्धि बेहद जरूरी है। राकोवा ने बताया कि मॉस्को में महिलाओं की प्रजनन क्षमता का परीक्षण करने के लिए एक विशेष तरीका अपनाया जा रहा है, जिससे महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। अजीबोगरीब प्रस्तावों की हो रही चर्चा जन्म दर बढ़ाने के लिए कई अजीबोगरीब प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है। इनमें से एक योजना के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 2 बजे तक इंटरनेट और बिजली बंद करने की बात हो रही है, ताकि लोग इन घंटों में अपने रिश्तों पर ध्यान दें और बच्चे पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ें। इसके अलावा, प्रस्ताव में गृहिणियों को उनके घरेलू कामों के लिए वेतन देने की बात है, जो उनकी पेंशन में गिना जाएगा। इसके अलावा, पहली डेट के लिए सरकार 5,000 रूबल (लगभग 40 पाउंड) की आर्थिक सहायता भी प्रदान कर सकती है, ताकि जोड़े अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकें। यही नहीं, सरकारी खर्च पर जोड़ों के लिए शादी की रात के होटल में ठहरने की सुविधा भी देने का प्रस्ताव है, जिसकी लागत लगभग 26,300 रूबल (लगभग 208 पाउंड) होगी। विभिन्न क्षेत्रों में भी लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के अलग-अलग उपाय लागू किए जा रहे हैं। खबारोवस्क में, 18 से 23 साल की उम्र की महिला छात्रों को बच्चे पैदा करने पर 900 पाउंड तक की राशि दी जा रही है, जबकि चेल्याबिंस्क में पहली संतान के लिए यह राशि 8,500 पाउंड तक है। जनसंख्या बढ़ाने के लिए निजी जीवन की निगरानी मॉस्को में सरकारी अधिकारी महिलाओं के निजी जीवन की गहराई से जांच कर रहे हैं। महिला पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों को उनकी यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े सवालों से भरे विस्तृत प्रश्नावली दिए गए हैं। इस प्रश्नावली में गहरे व्यक्तिगत सवाल पूछे गए हैं, जैसे कि: – आपने यौन सक्रियता कब शुरू की? – क्या आप कंडोम या हार्मोनल गर्भनिरोधक का उपयोग करती हैं? – क्या आपको संभोग के दौरान दर्द या रक्तस्राव का अनुभव होता है? – क्या आप बांझपन का सामना कर चुकी हैं या गर्भधारण हुआ है? अगर हां, तो कितनी बार? – आपके कितने बच्चे हैं, और क्या आप अगले साल में और बच्चे पैदा करने की योजना बना रही हैं? यहां तक कि जिन कर्मचारियों ने इन प्रश्नावली को खाली छोड़ दिया, उन्हें डॉक्टर से मिलने के लिए बुलाया गया, जहां उनसे ये सवाल प्रत्यक्ष रूप में पूछे गए। इन सभी योजनाओं और पहल के बावजूद, जनसंख्या वृद्धि के लिए इस प्रकार के कदम उठाए जाने से देश में एक अलग प्रकार का सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श शुरू हो गया है। क्या रूस में सेक्स मंत्रालय बनाकर जनसंख्या संकट का समाधान ढूंढा जा सकेगा? यह देखना अभी बाकी है, परंतु इतना तय है कि यह पहल पूरे विश्व में चर्चा का विषय बन चुकी है।

अमेरिका थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसा वैध आप्रवासियों की संख्या 2000 में 24.1 मिलियन से बढ़कर 2022 में 36.9 मिलियन हो गई

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में जनवरी 2025 में शपथ लेंगे। ट्रंप को जीत तो मिल गई लेकिन उनके सामने अब चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या अवैध प्रवासियों की अमेरिका में एंट्री है। नए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में हर चौथा प्रवासी अवैध है। भारतीयों सहित अधिक से अधिक लोग अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। आइए इसे आंकड़ों के साथ विस्तार से समझते हैं। अवैध अप्रवासियों की संख्या बढ़ी है अवैध आप्रवासन को लेकर राष्ट्रपति जो बिडेन पर हमला करते हुए, ट्रम्प ने अक्टूबर में कहा था कि उनके राष्ट्रपति रहते पिछले तीन वर्षों में 2 करोड़ 10 लाख लोग आए। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 के बाद से देश में अवैध प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन यह आंकड़ा ट्रम्प के विचार के करीब नहीं है। हर चौथा प्रवासी अवैध है अमेरिका स्थित थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, पूर्ण संख्या में, वैध आप्रवासियों की संख्या 2000 में 24.1 मिलियन से बढ़कर 2022 में 36.9 मिलियन हो गई। सीमाओं पर बड़ा ढेर प्यू ने जुलाई 2024 की एक रिपोर्ट में कहा कि अवैध अप्रवासी आबादी संभवतः पिछले दो वर्षों में बढ़ी है। उस दृष्टिकोण के लिए उद्धृत कारकों में से एक 2022-23 में अमेरिकी सीमाओं पर प्रवासियों के साथ मुठभेड़ों का रिकॉर्ड स्तर है। अधिक भारतीय छिपने की कोशिश कर रहे हैं अक्टूबर 2023 और सितंबर 2024 के बीच, 90,000 से अधिक भारतीय मेक्सिको या कनाडा के साथ इसकी भूमि सीमाओं के पार अमेरिका में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे। तथाकथित डंकी रूट, जिसमें भूमि सीमा का उपयोग करके अवैध रूप से टार्गेट के उद्देश्य से कई देशों से गुजरना शामिल है। यह भारतीयों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिकी सीमा अधिकारियों की ओर से गिरफ्तार किए गए भारतीयों की संख्या 2021 और 2024 के बीच तीन गुना बढ़ गई है।  

मंगल और धरती के बीच रियल टाइम में डाटा और इमेज भेजने में आसानी करेगी मस्क की कंपनी

न्यूयॉर्क एलन मस्क की कंपनी अब मंगल ग्रह से संपर्क में अहम भूमिका निभाने जा रही है। इसको लेकर एक अहम बैठक भी हुई। इसके मुताबिक यह स्टारलिंक की तर्ज पर तैयार किया जाएगा और नासा के मंगल मिशन में मदद करेगा। मीटिंग को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक स्पेसएक्स मंगल की ऑरबिट में कई सैटेलाइट लगाएगा। इन सैटेलाइट्स की मदद से जमीन से मंगल की सतह तक निगरानी बेहद आसान हो जाएगी। यह मंगल के राज खोलने में काफी मददगार होगा। इतना ही नहीं, स्टारलिंक धरती और मंगल के बीच कम्यूनिकेशन और तेजी से डाटा ट्रांसफर के लिए एडवांस सिस्टम भी तैयार करेगा। हाई-स्पीड डेटा रिले सिस्टम 1.5 खगोलीय इकाइयों में 4 एमबीपीएस या उससे अधिक कम्यूनिकेट करने में सक्षम होगा, जो धरती और मंगल के बीच की दूरी है। इस नेटवर्क के जरिए मंगल और धरती के बीच रियल टाइम में डाटा और इमेज भेजने में आसानी होगी। इसके अलावा मंगल ग्रह पर भविष्य में चलने वाले मिशन के लिए भी यह इस्तेमाल किया जा सकेगा। एलन मस्क ने खुद एक्स पर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहाकि इसका असली मकसद इस तरह के काफी दूर स्थित ग्रहों पर डाटा ट्रांसफर की स्पीड को बढ़ाना है। उन्होंने लिखा कि वास्तव में यह पहला कदम है। धरती और मंगल के बीच ट्रांसफर की रफ्तार बढ़ाने के लिए और ज्यादा स्पीड की जरूरत होगी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसकी काफी तारीफ की है। लोगों ने इसे किसी साई-फाई मूवी जैसा बताया है।

लाहौर प्रदूषण में दिल्ली से आगे निकला , AQI 1000 के पार जाते ही प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का ऑर्डर जारी ; लाहौर हाईकोर्ट पहुंची बच्ची

लाहौर पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदूषण से इतना बुरा हाल है कि सांस लेना मुश्किल हो गया है। पाक की पंजाब सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दे दिया है। इसके अलावा संग्रहालय और पार्क भी बंद कर दिए गए हैं। स्मोग इतना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है और वाहन चलना भी मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को लाहौर, गुजरांवाला, फैसलाबाद, मुल्तान, शेखुपुरा, कसूर, ननकाना साहिब, गुजरात, हाफइजाबाद, मंडी बहाउद्दीन, टोबा टेक सिंह, वेहारी और खानेवाल में प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। दक्षिण पंजाब के सबसे बड़े शहर मुल्तान में वायु की गुणवत्ता सुबह 8 से 9 बजे के बीच 2135 के पार चली गई। हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने की वजह से लोगों का स्वास्थ्य खराब होने लगा है। मुल्तान का एक्यूआई रात के 10 बजे 980 के पार चला गया। 300 का स्तर ही खतरनाक की श्रेणी में होता है। मुल्तान के तीन क्वालिटी मॉनिटर कार्यालयों में हवा की गुणवत्ता 2313, 1635 और 1527 बताई गई है। पाकिस्तान के शिक्षा विभाग ने ट्यूशन सेंटर भी बंद करने के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि शुक्रवार को पलूशन की रैंकिंग में पाकिस्तान के सात शहरों की हालत खराब थी। लाहौर और आसपास की जगहों पर हवा की गति 11 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है। ऐसे में प्रदूषण की मात्रा खतरनाक श्रेणी से बी ज्यादा हो गई है। लाहौर में पूरा दिन घने स्मोग की चादर छाई रहती है। यहां प्रशासन ने निर्माण का कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यहां एक्यूआई 784 को पार कर गया है। खतरनाक धुंध की वजह से दैनिक गतिविधियां मुश्कलि हो गई हैं। वहीं लोगों को बाहरी हवा के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी गई है। लोग घरों से बाहर मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।  

कांग्रेस OBC नाम सुनते ही चिढ़ जाती है… PM मोदी ने क्यों किया आंबेडकर के पंचतीर्थ का जिक्र, किसे दी चुनौती

अकोला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि जिस किसी राज्य में कांग्रेस की सरकार बनती है, वह राज्य पार्टी के ‘शाही परिवार’ के लिए एटीएम बन जाता है। मोदी ने 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सिलसिले में अकोला में एक चुनाव प्रचार रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम महाराष्ट्र को कांग्रेस का एटीएम नहीं बनने देंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस के शाही परिवार को चुनौती देता हूं कि वे साबित करें कि उन्होंने कभी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पंचतीर्थ का दौरा किया है।’’ मोदी ने आंबेडकर के जन्म स्थान महू, ब्रिटेन में अध्ययन के दौरान लंदन में उनके रहने की जगह, नागपुर में उनके बौद्ध धर्म अपनाने से संबंधित दीक्षा भूमि, दिल्ली में उनके ‘महापरिनिर्वाण स्थल’ और मुंबई में ‘चैत्य भूमि’ को दर्शाने के लिए ‘पंचतीर्थ’ शब्द का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा के लोगों ने ‘एक हैं तो सेफ हैं’ मंत्र का पालन करते हुए कांग्रेस की साजिश विफल कर दी। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को पता है कि जब देश कमजोर होगा, वह सिर्फ तभी मजबूत हो पाएगी। उस पार्टी की नीति एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर देना है।’’ उन्होंने अकोला में कहा, “कांग्रेस पार्टी जानती है, देश जितना कमजोर होगा, कांग्रेस उतनी मजबूत होगी. इसीलिए अलग-अलग जातियों को लड़ाना, यही कांग्रेस की फितरत है. आजादी के बाद से ही कांग्रेस ने कभी हमारे दलित समाज को एकजुट नहीं होने दिया, कांग्रेस ने हमारे ST समाज को भी अलग अलग जातियों में बांटकर रखा. OBC नाम सुनते ही कांग्रेस चिढ़ जाती है, OBC समाज की अलग से पहचान न बनें, इसलिए कांग्रेस ने तरह-तरह के खेल खेले हैं.”  

मोदी ने दी उत्तराखंड स्थापना दिवस पर बधाई, प्रदेशवासियों और पर्यटकों से किए नौ आग्रह

देहरादून उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को प्रदेशवासियों को संबोधित किया। इस खास मौके पर देवभूमि रजतोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीएम ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ही इस राज्य के गठन का सपना पूरा किया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा, मैं अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करता हूं। जिनके प्रधानमंत्री रहते हुए उत्तराखंड के गठन का सपना पूरा हुआ। उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए हर्ष की बात है कि अटल जी द्वारा पुष्पित और पल्लवित हमारा उत्तराखंड आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश का अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे प्रदेश का चौतरफा विकास हो रहा है। हमारे प्रदेश का इन्फ्रास्ट्रक्चर आज तेजी से मजबूत हो रहा है। आज शहर से लेकर सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। विभिन्न जनपदों में हेलीपैड को विकसित किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “पहाड़ों में रेल पहुंचने का सपना पूरा हो रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के साथ ही सेटेलाइट निर्माण का भी कार्य किया जा रहा है, ताकि उन सभी लोगों तक विकास पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हो सके, जो कि अभी इससे वंचित हैं।” उन्होंने उत्तराखंड की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “आज की तारीख में उत्तराखंड हर क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। आज हम कृषि, बागवानी और उद्योग सहित सभी क्षेत्रों मंं विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। राज्य में वृहद स्तर पर युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर सृजित हो रहे हैं। हमारी सरकार ने औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति सहित अनेक नीतियां बनाकर राज्य में निवेश के अवसर को बढ़ाने का काम किया है।” मोदी ने दी उत्तराखंड स्थापना दिवस पर बधाई, प्रदेशवासियों और पर्यटकों से किए नौ आग्रह  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को उत्तराखंड स्थापना दिवस के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी है और कहा कि आज से ही उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष का शुभारंभ हो रहा है। श्री मोदी ने कहा कि उत्तराखंड अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। हमें अब उज्जवल उत्तराखंड के भविष्य के लिए अगले 25 वर्ष की यात्रा शुरु करनी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में देश के कोने-कोने और विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। उन्होंने कहा कि अभी दो दिन पहले ही प्रवासी उत्तराखंड सम्मेलन का भी सफल आयोजन हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे प्रवासी उत्तराखंड वासी राज्य की विकास यात्रा में ऐसे ही बड़ी भूमिका निभाते रहेंगे। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि उत्तराखंड के आप लोग आने वाले 25 वर्षों के संकल्पों के साथ पूरे राज्य में अलग अलग कार्यक्रम कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए उत्तराखंड के गौरव का प्रसार भी होगा और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य की भी हर प्रदेशवासी तक बात पहुंचेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि नौ का अंक बहुत ही शुभ माना जाता है। उन्होंने प्रदेशवासियों और उत्तराखंड आने वाले यात्रियों-श्रद्धालुओं से नौ आग्रह किए। उन्होंने कहा कि पांच आग्रह उत्तराखंड के लोगों से और चार आग्रह यात्रियों-श्रद्धालुओं से। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी जैसी बोलियां सिखाएं। ये बोलियां उत्तराखंड की पहचान को मजबूत बनाने के लिए भी जरूरी है। दूसरे, ‘एक पेड़ मां के नाम’ आंदोलन को हम सभी को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि देश भर में ये अभियान तेज गति से चल रहा है। उत्तराखंड भी इस दिशा में जितनी तेजी से काम करेगा, उतना ही हम पर्यावरण परिवर्तन की चुनौती से लड़ पाएंगे। श्री मोदी ने कहा, “मेरा तीसरा आग्रह है कि आप सभी नदी, नालों का संरक्षण करें। पानी की स्वच्छता को बढाने वाले अभियानों को गति दें। प्रधानमंत्री ने चौथा आग्रह किया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहें। अपने गांव लगातार जाएं और वहां से संबंध मजबूत रखें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों से मेरा पांचवां आग्रह है कि अपने गांव के पुराने घरों को भी बचाएं। इन्हें आप होम-स्टे बनाकर अपनी आय बढ़ाने का साधन बना सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से भी चार आग्रह किए। उन्होंने अपेक्षा की कि जब भी आप हिमालय की गोद में पहाड़ों पर घूमने जाएं, तो स्वच्छता को सर्वोपरि रखें। वोकल फ़ॉर लोकल के मंत्र को वहां भी याद रखें। उन्होंने कहा, “आपकी यात्रा का जो खर्च होता है, उसमें से कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय लोगों द्वारा उत्पादित प्रोडक्ट खरीदने में खर्च करें। मेरा तीसरा आग्रह है कि आप जब भी पहाड़ पर जाएं तो वहां के ट्रैफिक नियमों का ध्यान जरूर रखें। चौथा और अंतिम आग्रह है कि धार्मिक स्थलों के रीति-रिवाजों, वहां के नियम-कायदों के बारे में यात्रा से पहले जरूर पता कर लें।” श्री मोदी ने कहा कि हमारी सरकार विकास के साथ विरासत को भी सहेजने में जुटी है। देवभूमि की संस्कृति के अनुरूप, केदारनाथ धाम का भव्य और दिव्य पुनर्निर्माण किया जा रहा है। बद्रीनाथ धाम में विकास कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानस खंड मंदिर माला मिशन के तहत, पहले चरण में 16 पौराणिक मंदिर क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हुए हैं। कुछ साल पहले बाबा केदार के दर्शन के बाद उनके चरणों में बैठकर कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तराखंड ने मेरे इस विश्वास को सही साबित किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि के लोग प्रकृति और पर्यावरण के कितने बड़े प्रेमी होते हैं, ये सारा देश जानता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ने हम सभी को, भाजपा को हमेशा खूब सारा प्यार और अपनत्व दिया है। भाजपा भी देवभूमि की सेवा की भावना से उत्तराखंड के विकास कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लंबे समय तक अलग राज्य के लिए प्रयास करना पड़ा था। ये … Read more

स्पेन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 223 से ज्यादा हुई, 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ा

वैलेंसिया स्पेन के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में 29 अक्टूबर को अचानक से मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने प्रभावित क्षेत्रों में तबाही मचा दी। बाढ़ की वजह से प्रभावित इलाकों में हर जगह पानी के साथ ही कीचड़ भी हो गया है। जब बाढ़ आई, तो उसमें कई गाड़ियाँ बह गई, पुल टूट गए, रेलवे की सुरंगें ध्वस्त हो गई जिससे कई जगह की ट्रेनें ठप हो गई , फसलें तबाह हो गई। कई घरों को भी बाढ़ की वजह से काफी नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में घरों की बिजली गुल हो गई। कच्चे घर तो बाढ़ की चपेट में आ गए और बह गए। बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अभी भी बढ़ रही है। मरने वालों की संख्या पहुंची 223 स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अचानक आई इस बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या अब तक 223 पहुंच चुकी है। स्पेन के परिवहन मंत्री की तरफ से यह जानकारी दी गई है। 78 लोग अभी भी लापता बाढ़ की वजह से स्पेन के वैलेंसिया, कैस्टिला-ला मांचा और अंडालूसिया में अभी भी करीब 78 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। बचाव टीम ने अब तक हज़ार से ज़्यादा लापता लोगों को ढूंढ निकाला है। मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है बाढ़ के इतने दिन बाद भी कई लोगों के लापता होने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बचाव टीम ने हज़ारों लोगों को बाढ़ से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

नियंत्रण रेखा की स्थापना के बाद UNMOGIP की उपयोगिता समाप्त हो गई है और यह अप्रासंगिक है: सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र में शांति रक्षा अभियानों पर बहस के दौरान पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर का जिक्र किए जाने पर भारत ने पड़ोसी देश पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की। राज्यसभा सदस्य और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘‘भारत ने पाकिस्तान द्वारा की गईं टिप्पणियों पर जवाब देने के अपने अधिकार को चुना है, जिसने एक बार फिर इस प्रतिष्ठित निकाय को अपने एजेंडे से भटकाने का प्रयास किया है।’’ उन्होंने शुक्रवार को यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की विशेष राजनीतिक एवं वि-उपनिवेशीकरण (चौथी समिति) में शांति रक्षा अभियानों पर चर्चा के दौरान ये टिप्पणियां कीं। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर ‘‘भारत का अभिन्न अंग था, है, और हमेशा रहेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के लोगों ने हाल में अपने लोकतांत्रिक और चुनाव अधिकारों का इस्तेमाल किया तथा एक नई सरकार चुनी। पाकिस्तान को ऐसी बयानबाजी और झूठ से बाज आना चाहिए क्योंकि इससे तथ्य नहीं बदलेंगे।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के इस मंच के प्रतिष्ठित सदस्यों के सम्मान में भारत संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने के पाकिस्तान के किसी भी प्रयास का जवाब देने से परहेज करेगा। उन्होंने भारत की ओर से यह कड़ी प्रतिक्रिया तब दी है जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम पर नजर रखने वाले भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) के बारे में बात की। भारत का कहना है कि शिमला समझौते और उसके परिणामस्वरूप नियंत्रण रेखा की स्थापना के बाद यूएनएमओजीआईपी की उपयोगिता समाप्त हो गई है और यह अप्रासंगिक है। सुंधांशु त्रिवेदी ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि शांति रक्षा अभियानों पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा विषय पर बोलते हुए ‘‘विषय को भटकाने की कोशिश की और अनावश्यक रूप से उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के साथ पाकिस्तान की भागीदारी तब शुरू हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने 1948 में जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में शांति सैनिकों को तैनात किया था।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए’’ उन्होंने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया और ‘‘मंच पर दृढ़तापूर्वक कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है, और हमेशा रहेगा।’’ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में हाल में उचित तरीके से लोकतांत्रिक चुनाव हुआ। इसलिए संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित मंच का इस्तेमाल इन प्रकार के भ्रामक शब्दों का उल्लेख करने में नहीं किया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की ‘‘ठोस विदेश नीतियों के कारण संभव’’ हो सका है। सुंधांशु त्रिवेदी भारत के 12 संसद सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं जो संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न बैठकों के लिए इस विश्व निकाय की यात्रा कर रहा है। इससे पहले, शांति रक्षा अभियानों की व्यापक समीक्षा पर एक बयान देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि हालिया संघर्ष अधिक चुनौतीपूर्ण हैं और अब इसमें आतंकवाद तथा सशस्त्र समूह भी शामिल हैं जो अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में सबसे बड़े सैन्य दल के के रूप में शांतिरक्षा प्रयासों में योगदान देने के प्रयास में सबसे आगे है।’’

बलूचिस्तान :क्वेटा रेलवे स्टेशन पर बड़ा धमाका, 21 से ज्यादा की मौत, 30 घायल

 क्वेटा पाकिस्तान एक बार फिर से बड़े धमाके से दहल (Pakistan Bomb Blast) गया है. क्वेटा में धमाका होने की जानकारी सामने आई है. इस धमाके में 21  से ज्यादा लोगों की मौत और 30  के करीब लोगों के घायल होने की खबर है. पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ये बम धमाका क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास हुआ है. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से कुछ समय पहले ही बम विस्फोट हो गया. धमाके के समय प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भारी भीड़ थी. इस घटना में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने का अंदेशा है. रेलवे स्टेशन के पास धमाका, कई मौतें धमाके की जानकारी मिलते ही पुलिस और बचावकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. बड़ी संख्या में मौतों और घायलों को देखते हुए क्वेटा के अस्पताल में इमरजेंसी लागू कर दी गई है. वहीं डॉक्टर्स के साथ ही एक्स्ट्रा स्टाफ बुलाया गया है.  घायलों का इलाज लगातार जारी है. रेलवे अधिकारियों के हवाले से सामने आई खबर के मुताबिक सुबह 9 बजे जाफर एक्सप्रेस पेशावर के लिए रवाना होनी थी. धमाके की वजह ट्रेन प्लेटफॉर्म पर नहीं पहुंची. पेशावर के लिए रवाना होने वाली थी ट्रेन बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने एक बयान में कहा कि पुलिस और सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. रिंद ने कहा कि विस्फोट की प्रकृति की जांच की जा रही है. बम निरोधक दस्ता घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर रहा है और घटना पर रिपोर्ट मांगी गई है. सरकारी अधिकारी ने कहा कि वहां के अस्पतालों में ‘इमरजेंसी’ लागू कर दी है. उन्होंने कहा कि “घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है.”  घटनास्थल की फुटेज में रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मलबा दिखाई दे रहा है.धमाके के समय एक ट्रेन प्लेटफॉर्म से पेशावर के लिए रवाना होने के लिए तैयार थी. शनिवार की सुबह पाकिस्तान के बलूचिस्तान के क्वेटा शहर के रेलवे स्टेशन पर धमाका हुआ. इस धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 तक पहुंच गई है. साथ ही अभी तक कम से कम 46 लोग घायल भी हुए हैं. अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या में इज़ाफ़े की आशंका भी ज़ाहिर की है. बलूचिस्तान के हेल्थ कोऑर्डिनेटर अधिकारी वसीम बेग ने बीबीसी को घटना की जानकारी देते हुए बताया, “कम से कम चार लोगों के शव सिविल अस्पताल लाए गए हैं.” क्वेटा के एसएसपी आपरेशंस मुहम्मद बलूच ने बीबीसी को बताया, “यह धमाका रेलवे स्टेशन पर उस वक़्त हुआ जब क्वेटा से रावलपिंडी जाने वाली ज़फ़र एक्सप्रेस के यात्री ट्रेन आने का इंतज़ार कर रहे थे. धमाके के वक़्त ज़्यादातर यात्री प्लेटफ़ॉर्म पर ही मौजूद थे.” मुहम्मद बलूच ने कहा कि घायल व्यक्तियों को क्वेटा के सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रेफ़र कर दिया गया है. रेलवे स्टेशन पर हुए इस धमाके के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. धमाके की इस घटना पर बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफ़राज़ बुगती ने क्वेटा रेलवे स्टेशन पर हुए विस्फोट की निंदा करते हुए घटना की जांच के आदेश दे दिये हैं. उन्होंने कहा, “यह घटना आतंकियों के निर्दोष लोगों, बच्चों, मज़दूरों और महिलाओं को निशाना बनाने की एक कड़ी का हिस्सा है.” बलूचिस्तान के सीएम ने कहा, “सूबे में आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी है.” बढ़ सकता है मरने वालों का आंकड़ा घायलों में कई लोगों की हालत गंभीर है.  इसे देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है.पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, धमाका रेलवे स्टेशन के बुकिंग कार्यालय में हुआ. धमाका किस वजह से हुआ इसकी अब तक तोई जानकारी सामने नहीं आई है. धमाका होने के कारण की जांच की जा रही है. पिछले दिनों हुए धमाके में हुई थी 7 की मौत पाकिस्तान में नवंबर की शुरुआत में भी बड़ा धमाका हुआ था.  बलूचिस्तान इलाका एक बड़े बम धमाके से दहल गया था. इस धमाके में 5 स्कूली बच्चों समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 22 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. घायलों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जानकारी के मुताबिक, बम धमाका रिमोट की मदद से किया गया था. एक बार फिर से बम धमाका हुआ है.

प्रधानमंत्री Modi ने रतन टाटा के लिये लिखा भावुक ब्लॉग, कहा- इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं

नई दिल्ली देश के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) के निधन को लगभग एक महीना बीत चुका है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्‍हें याद करते हुए एक लेख लिखा है. उन्‍होंने लिखा कि रतन टाटा जी के हमसे दूर चले जाने की वेदना अभी मन में है. इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है. उन्‍होंने अपनी लेख में कहाकि रतन टाटा के रूप में देश ने एक महान सपूत को खो दिया है… एक अमूल्‍य रत्‍न को खोया है.  आज भी शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक, लोग उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहे हैं. चाहे कोई उद्योगपति हो, उभरता हुआ उद्यमी हो या कोई प्रोफेशनल हो, हर किसी को उनके निधन से दुख हुआ है. पर्यावरण रक्षा से जुड़े लोग…समाज सेवा से जुड़े लोग भी उनके निधन से उतने ही दुखी हैं और ये दुख हम सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया महसूस कर रही है.  ‘कोई लक्ष्‍य नहीं जो हासिल ना हो सके’ अपनी लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए रतन टाटा एक प्रेरणास्रोत थे. उनका जीवन, उनका व्यक्तित्व हमें याद दिलाता है कि कोई सपना ऐसा नहीं जिसे पूरा ना किया जा सके, कोई लक्ष्य ऐसा नहीं जिसे हासिल नहीं किया जा सके. रतन टाटा जी ने सबको सिखाया है कि विनम्र स्वभाव के साथ, दूसरों की मदद करते हुए भी सफलता पाई जा सकती है.  ईमानदारी का प्रतीक बना टाटा ग्रुप  रतन टाटा जी, भारतीय उद्यमशीलता की बेहतरीन परंपराओं के प्रतीक थे. वो विश्वसनीयता, उत्कृष्टता और बेहतरीन सेवा जैसे मूल्यों के अडिग प्रतिनिधि भी थे. उनके लीडरशिप में टाटा समूह दुनिया भर में सम्मान, ईमानदारी और विश्वसनीयता का प्रतीक बनकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा. इसके बावजूद, उन्होंने अपनी उपलब्धियों को पूरी विनम्रता और सहजता के साथ स्वीकार किया.  दूसरों के सपनों के लिए जीते थे रतन टाटा पीएम ने अपनी लेख में आगे लिखा कि रतन टाटा जी दूसरों के सपनों का खुलकर समर्थन करते थे, दूसरों के सपने पूरा करने में सहयोग करना, ये रतन टाटा के सबसे शानदार गुणों में से एक था. हाल के समय में वो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का मार्गदर्शन करने और भविष्य की संभावनाओं से भरे उद्यमों में निवेश करने के लिए जाने लगे. उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर की उम्‍मीदों और आकांक्षाओं को समझा, साथ ही भारत के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता को पहचाना.  युवा पीढ़ी को दिया हौसला  भारत के युवाओं के प्रयासों का सपोर्ट करके, उन्होंने नए सपने देखने वाली नई पीढ़ी को जोखिम लेने और सीमाओं से परे जाने का हौसला दिया. उनके इस कदम ने भारत में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप के कल्‍चर को विकसित करने में बड़ी मदद की है. आने वाले दशकों में हम भारत पर इसका सकारात्मक प्रभाव जरूर देखेंगे.  बेहतरीन क्‍वालिटी के प्रोडक्‍ट पर जोर  पीएम मोदी आगे लिखते हैं कि रतन टाटा जी ने हमेशा बेहतरीन क्वालिटी के प्रॉडक्ट…बेहतरीन क्वालिटी की सर्विस पर जोर दिया और भारतीय उद्यमों को ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने का रास्ता दिखाया. आज जब भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो हम ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करते हुए ही दुनिया में अपना परचम लहरा सकते हैं. मुझे आशा है कि उनका ये विजन हमारे देश की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और भारत वर्ल्ड क्लास क्वालिटी के लिए अपनी पहचान मजबूत करेगा.  जीव-जंतुओं के प्रति करुणा  रतन टाटा की महानता बोर्डरूम या सहयोगियों की मदद करने तक ही सीमित नहीं थी. सभी जीव-जंतुओं के प्रति उनके मन में करुणा थी. जानवरों के प्रति उनका गहरा प्रेम जगजाहिर था और वे पशुओं के कल्याण पर फोकस हर प्रयास को बढ़ावा देते थे. वो अक्सर अपने डॉग्स की तस्वीरें साझा करते थे, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थे. मुझे याद है, जब रतन टाटा जी को लोग आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहे थे…तो उनका डॉग ‘गोवा’ भी वहां नम आंखों के साथ पहुंचा था.  रतन टाटा जी का जीवन इस बात की याद दिलाता है कि लीडरशिप का आकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं किया जाता है, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की उसकी क्षमता से भी किया जाता है.  जब गुजरात में साथ मिलकर किया काम  नरेंद्र मोदी ने बताया कि व्‍यक्तिगत तौर पर मुझे प‍िछले कुछ दशकों में उन्‍हें बेहद करीब से जानने का सौभाग्‍य मिला. हमने गुजरात में साथ मिलकर काम किया. वहां बड़े पैमाने पर निवेश किया गया. इनमें कई ऐसे प्रोजेक्‍ट्स भी शामिल थें, जिसे लेकर वे बेहद  भावुक थे. पीएम ने कहा कि जब वे केंद्र में आए तो ये  घनिष्ठ बातचीत जारी रही और वो हमारे राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में एक प्रतिबद्ध भागीदार बने रहे. स्वच्छ भारत मिशन के प्रति रतन टाटा का उत्साह विशेष रूप से मेरे दिल को छू गया था. अक्टूबर की शुरुआत में स्वच्छ भारत मिशन की दसवीं वर्षगांठ के लिए उनका वीडियो संदेश मुझे अभी भी याद है. यह वीडियो संदेश एक तरह से उनकी अंतिम सार्वजनिक उपस्थितियों में से एक रहा है.  कैंसर के खिलाफ लड़ाई एक और ऐसा लक्ष्य था, जो उनके दिल के करीब था. मुझे दो साल पहले असम का वो कार्यक्रम याद आता है, जहां हमने संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया था. उस अवसर पर अपने संबोधन में, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वो अपने जीवन के आखिरी वर्षों को हेल्थ सेक्टर को समर्पित करना चाहते हैं. स्वास्थ्य सेवा एवं कैंसर संबंधी देखभाल को सुलभ और किफायती बनाने के उनके प्रयास इस बात के प्रमाण हैं कि वो बीमारियों से जूझ रहे लोगों के प्रति कितनी गहरी संवेदना रखते थे. मैं रतन टाटा जी को एक विद्वान व्यक्ति के रूप में भी याद करता हूं – वह अक्सर मुझे विभिन्न मुद्दों पर लिखा करते थे, चाहे वह शासन से जुड़े मामले हों, किसी काम की सराहना करना हो या फिर चुनाव में जीत के बाद बधाई संदेश भेजना हो.  ‘मुझे जब रतन टाटा जी की आई बहुत याद’  अभी कुछ सप्ताह पहले, मैं स्पेन सरकार के राष्ट्रपति पेड्रो सान्चेज के साथ वडोदरा में था और हमने संयुक्त रूप से एक विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया. इस फैक्ट्री में सी-295 विमान भारत में … Read more

ट्रंप की हत्या करने की कोशिश के पीछे ईरान, अमेरिकी न्याय विभाग ने किया बड़ा दावा

मैनहट्टन अमेरिका के न्याय विभाग ने राष्ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप को मारने की साजिश के पीछे ईरान को बताया है. मैनहट्टन में संघीय अदालत में दायर एक आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया कि ईरान के अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड के एक अधिकारी ने सितंबर में एक भाड़े के शूटर को ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना बनाने का निर्देश दिया था. शिकायत में बताया गया है कि फरहाद शकेरी नाम के शख्स को ट्रंप की हत्या का जिम्मा सौंपा गया था, जो कि ईरान का सरकारी कर्मचारी था. शिकायत में कहा गया है कि शकेरी ने ईरान में रहते हुए FBI एजेंटों के साथ रिकॉर्ड की गई फोन पर बातचीत में कथित साजिशों के कुछ डिटेल्स का खुलासा किया. उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसके सहयोग का कथित कारण अमेरिका में सलाखों के पीछे एक सहयोगी की सजा कम कराना है. अफगानी नागरिक को दी गई थी हत्या की सुपारी शकेरी अफगानी नागरिक है, जो बचपन में अमेरिका में आकर बस गया था, लेकिन डकैती के लिए 14 साल जेल में बिताने के बाद उसे निर्वासित कर दिया गया था. अब वह भाड़े पर हत्या की साजिश के लिए तेहरान द्वारा भर्ती किए गए बदमाशों का एक नेटवर्क चलाता है. मैनहट्टन में संघीय अदालत में खोली गई एक आपराधिक शिकायत के अनुसार, शकेरी ने जांचकर्ताओं को फोन पर बताया था कि ईरान के अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड में एक संपर्क ने उसे पिछले सितंबर में निर्देश दिया था कि वह अपने अन्य कामों को अलग रखे और सात दिनों के भीतर ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना बनाए. इसके लिए उसे मोटी रकम की पेशकश की गी थी. चुनाव बाद फिर वारदात को अंजाम देने का था प्लान शकेरी ने बताया कि उन्होंने बहुत सारा पैसा खर्च किया है इस पर. ईरानी अधिकारी ने उससे कहा था कि पैसे की दिक्कत नहीं है. लेकिन अगर वह सात दिन के भीतर कोई योजना नहीं बना पाया तो चुनाव के बाद तक साजिश को रोक दिया जाएगा क्योंकि अधिकारी ने मान लिया था कि ट्रंप हार जाएंगे और तब उन्हें मारना आसान होगा. शिकायत के अनुसार, हालांकि अधिकारियों ने पाया कि उसके द्वारा दी गई कुछ जानकारी झूठी थी, लेकिन ट्रंप की हत्या की साजिश और ईरान द्वारा बड़ी रकम देने की इच्छा के संबंध में उनके बयान सही पाए गए. ईरानी-अमेरिकी पत्रकार को भी मारने की थी साजिश शकेरी फरार है और ईरान में ही है. दो अन्य लोगों को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जिन्होंने आरोप लगाया था कि शकेरी ने उन्हें प्रमुख ईरानी-अमेरिकी पत्रकार मसीह अलीनेजाद का पीछा करने और उनकी हत्या करने के लिए भर्ती किया था. हालांकि साजिश नाकाम कर दी गई. बर्लिन से एसोसिएटेड प्रेस से फोन पर बात करते हुए अलीनेजाद ने कहा, “मैं बहुत हैरान हूं, यह मेरे खिलाफ तीसरा प्रयास है और यह चौंकाने वाला है.” सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “मैं अभिव्यक्ति की आजादी के अपने पहले संशोधन के अधिकार का अभ्यास करने के लिए अमेरिका आई हूं – मैं मरना नहीं चाहती. मैं अत्याचार के खिलाफ़ लड़ना चाहती हूं, और मैं सुरक्षित रहने की हकदार हूं. मेरी सुरक्षा के लिए कानून लागू करने वालों का शुक्रिया, लेकिन मैं अमेरिकी सरकार से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने का आग्रह करती हूं.” 13 जुलाई को भी ट्रंप की रैली के दौरान हुई थी फायरिंग बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए हैं. उन्होंने कमला हैरिस को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. ऐसे में न्याय विभाग द्वारा उन पर हमले की साजिश का खुलासा चौंकाने वाला है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब उनक पर हमले की साजिश रची गई. इसी साल चुनाव प्रचार के दौरान 13 जुलाई को पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में उन पर चुनावी रैली के दौरान फायरिंग हुई थी, इसमें एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी. इस घटना के करीब 64 दिन बाद एक बार फिर उन पर जानलेवा हमले की कोशिश हुई थी. उस वक्त ट्रंप फ्लोरिडा में पाम बीच काउंटी के इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में मौजूद थे.  

विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मजबूत करने RSS ने चलाया महाअभियान, 65 संगठन भी साथ

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने 65 से भी ज्यादा सहयोगी संगठनों के जरिए महाराष्ट्र में ‘सजग रहो’ नाम से एक अभियान चला रहा है। इस अभियान का मकसद सिर्फ विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मजबूत करना ही नहीं है, बल्कि इसे ‘हिंदुओं को बांटने और उन्हें और भी छोटे-छोटे समूहों में विभाजित करने के बड़े प्रयास’ के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई के तौर पर भी देखता है। आरएसएस का मानना है कि इस प्रयास का असर राजनीति से भी आगे तक होगा। यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस दौरान बीजेपी और महायुति को हिंदू वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिशें भी तेज़ होती दिखाई दे रही हैं। आरएसएस का ‘सजग रहो’ अभियान लोकसभा चुनावों और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हाल ही में हुए हमलों के बाद चलाए जा रहे तीन राष्ट्रीय अभियान का सबसे नया हिस्सा है। इस तीन सूत्रीय अभियान के पहले दो सूत्र हैं योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ‘बांटेंगे तो काटेंगे’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी ‘एक है तो सेफ हैं’। पीएम ने धुले में दिया था ये बयान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक है तो सेफ है’ टिप्पणी धुले में की थी, जहां बीजेपी-आरएसएस का कहना है कि मालेगांव में मुस्लिम वोटों के एकजुट होने के कारण लोकसभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र के वाशिम में कहा था ‘एक है तो नेक हैं’। यहां ‘नेक’ का मतलब है कि अगर हिंदुओं को बांटा नहीं गया तो वे नेक बने रहेंगे। उन्हें सिर्फ़ आत्मरक्षा के हिंसा का सहारा लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। “किसी के खिलाफ नहीं है ये अभियान’ हालांकि संघ के सूत्रों ने कहा कि ‘सजग रहो’ और ‘एक है तो सेफ हैं’ किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इनका मकसद हिंदुओं के बीच जाति विभाजन को खत्म करना है। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि आरएसएस के ‘स्वयंसेवकों’ और 65 से ज़्यादा गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बैठकें आयोजित की जा रही हैं। संघ के सूत्रों के मुताबिक, हालांकि इस अभियान का तात्कालिक उद्देश्य महाराष्ट्र चुनाव हैं, लेकिन यह एक बड़ी घटना के जवाब में वैचारिक और बौद्धिक प्रतिक्रिया के उभार को दर्शाता है। यह घटना यह है कि जहां एक तरफ हिंदू जाति के आधार पर बंटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिम अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर वोट बैंक के रूप में उभर रहे हैं और उनका मकसद बीजेपी को सत्ता से बाहर देखना है। इस अभियान में ये शामिल इस अभियान में शामिल समूहों में चाणक्य प्रतिष्ठान, मातंग साहित्य परिषद और रणरागिनी सेवाभावी संस्था शामिल हैं। महाराष्ट्र में संघ की सभी चारों ‘प्रांत’ या क्षेत्रीय इकाइयां- कोंकण (मुंबई और गोवा सहित), देवगिरि (मराठवाड़ा), पश्चिम महाराष्ट्र (जिसमें नासिक और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ हिस्से शामिल हैं) और विदर्भ (जहां RSS का मुख्यालय है) शाखा स्तर पर बैठकें आयोजित करके इस अभियान में शामिल हैं। इस अभियान के मुख्य आकर्षणों में से एक है धुले लोकसभा और मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट के नतीजों का उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल करना। यह उस चीज़ की ओर इशारा करता है जिसे संघ ‘मालेगांव मॉडल’ कहता है और जिसके बारे में उसका कहना है कि इससे ‘बंटे हुए’ हिंदू समुदाय को नुकसान पहुंचा है। आधिकारित तौर पर इस अभियान की जिम्मेदारी नहीं ले रहा आरएसएस आरएसएस आधिकारिक तौर पर संगठन के तौर पर इस अभियान की ज़िम्मेदारी नहीं ले रहा है, बल्कि इसे केवल ‘स्वयंसेवकों की एक पहल’ बता रहा है। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि स्वयंसेवकों ने हिंदू समाज को यह बताने की अगुवाई की है कि उन्हें जाति के आधार पर विभाजित नहीं होना चाहिए, खास तौर पर ऐसे समय में जब राज्य में मराठा-ओबीसी विभाजन गहरा गया है।

डोनाल्ड ट्रंप के एक कदम से चीन की इकॉनमी जापान की तरह भंवर में फंस सकती है

नई दिल्ली चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। इसमें जान फूंकने के लिए सरकार ने हाल में कई घोषणाएं की थीं। आने वाले दिनों में भी कई और उपायों की घोषणा की जा सकती है। लेकिन इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो गई है जो चीनी इकॉनमी की हवा निकालने की फिराक में हैं। ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों में चीनी सामान पर 60 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने का वादा किया था। दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही काफी तनाव चल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश को टेक्नोलॉजी का पावरहाउस बनाना चाहते हैं लेकिन ट्रंप की जीत से उनकी योजना को पलीता लग सकता है। चीन में रियल एस्टेट सेक्टर कई साल से संकट में है। सरकार का कर्ज बढ़ रहा है और बेरोजगारी चरम पर है। खपत में सुस्ती ने चीन की ग्रोथ पर ब्रेक लगा रखा है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीनी सामान पर 25% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई थी। जानकारों का कहना है कि उनके दूसरे कार्यकाल में चीन के लिए परेशानी बढ़ सकती है। आईएमएफ ने पहले ही चीन की इकॉनमी के लिए अपने अनुमान को कम कर दिया है। इस साल देश की इकॉनमी के 4.8% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है जबकि सरकार ने 5% का लक्ष्य तय कर रखा है। अगले साल इसके 4.5% रहने का अनुमान है। चीन की समस्या जानकारों का कहना है कि चीन में भी उसी तरह का ठहराव आ सकता है जिसमें जापान कई दशक से फंसा था। जापान में 1990 के दशक में स्टॉक और प्रॉपर्टी का बुलबुला फूटने के ठहराव आ गया था और वह अब तक इससे उबर नहीं पाया है। जानकारों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए चीन को कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने पर काम करना चाहिए और एक्सपोर्ट और निवेश आधारित ग्रोथ से हटना चाहिए। इससे चीन में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश बाहरी झटकों से बचने से बच सकेगा। चीन कई साल से दुनिया के फैक्ट्री बना हुआ है। वहां बने सस्ते सामान से दुनियाभर के बाजार भरे पड़े हैं। चीन उसी सफलता को हाई-टेक एक्सपोर्ट में भी दोहराना चाहता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वीकल्स और लीथियम आयन बैटरी के मामले में चीन वर्ल्ड लीडर है। लेकिन इसके साथ ही पश्चिमी देशों के साथ चीन का तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले महीने यूरोपीय यूनियन ने चीन में बने ईवी पर टैरिफ बढ़ाकर 45 फीसदी कर दिया था। अब वाइट हाउस में ट्रंप की वापसी से चीन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।

सोशल मीडिया युवाओं को पहुंचा रहा नुकसान, इस पर रोक लगाने की जरूरत: ऑस्ट्रेलियाई पीएम

कैनबरा ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को सरकार के प्रस्तावित सोशल मीडिया कानून पर सहमति व्यक्त की। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कानून है – जो देश में सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए न्यूनतम आयु 16 वर्ष निर्धारित करता है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा, “सोशल मीडिया हमारे ऑस्ट्रेलियाई युवाओं को सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा है और मैं इस पर रोक लगाने की मांग करता हूं। हमारे युवाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मेरी सरकार युवाओं की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी, साथ ही उन माता-पिता और शिक्षकों को भी सहायता प्रदान करेगी जो इन मुद्दों से जूझ रहे हैं।’ अल्बानीज ने कहा, ‘मैं ऑस्ट्रेलियाई माता-पिता को यह बताना चाहता हूं कि हम उनके साथ हैं।” उन्होंने वर्चुअल कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया से यह बात कही। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, “यह कानून स्टेट और टेरिटरी के साथ काफी समय तक व्यापक परामर्श के बाद बनाया गया है, माता-पिता, शिक्षकों, युवाओं के साथ भी परामर्श किया गया। शिक्षाविदों, बाल विकास विशेषज्ञों, उद्योग और नागरिक संगठनों, फर्स्ट नेशन ऑर्गेनाइजेशन, सभी से समय-समय पर परामर्श किया गया क्योंकि यह एक कठिन मुद्दा है और हम इसे सही करना चाहते हैं।” अल्बानीज ने कहा, “आज हमने मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों के साथ कक्षाओं में फोन पर प्रतिबंध लगाने और उससे प्राप्त फीडबैक के बारे में चर्चा की। जब इसे लागू किया गया था, तो कुछ लोगों के लिए यह विवादास्पद था, लेकिन अब यह बहुत सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इस आदेश की वजह से छात्र अपनी कक्षा में चल रही गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और सामाजिक संपर्क में सुधार हो रहा है। बच्चे अपने फोन पर खेलने के बजाय लंच के समय एक-दूसरे के साथ खेल रहे हैं – यह अच्छी बात है।” अल्बानीज सरकार अगले संसदीय सत्र में कानून पेश करेगी, जो शाही स्वीकृति के 12 महीने बाद लागू होगा। यह माता-पिता या युवाओं पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदारी डालता है कि वे बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, “हम अगले सिटिंग वीक में संसद में कानून पेश करेंगे, हमें प्रतिनिधि सभा और सीनेट में उस कानून के लिए समर्थन मिलने की उम्मीद है।” दिलचस्प बात यह है कि अल्बानीज ने खुलासा किया कि तस्मानिया ’14 वर्ष की आयु को प्राथमिकता देता’ है, लेकिन वे राष्ट्रीय एकरूपता के रास्ते में नहीं आना चाहते हैं और एक समान राष्ट्रीय निर्णय और प्रक्रिया प्राप्त करना सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।

12 नवंबर को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इगास पर्व के कारण सरकारी अवकाश, बंद रहेंगे स्कूल, बैंक

नई दिल्ली नवंबर 2024 का महीना छुट्टियों का अवसर लेकर आया है। शुरुआत से ही कई राज्यों में पब्लिक हॉलिडे रहा है, और आने वाले दिनों में भी कई महत्वपूर्ण त्योहारों और अवसरों के कारण छुट्टियां रहेंगी। 12 नवंबर को छुट्टी है या नहीं? 12 नवंबर को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इगास पर्व के कारण सरकारी अवकाश है, जिसे बूढ़ी दिवाली भी कहते हैं। उत्तराखंड में यह लोकपर्व दिवाली के 11 दिन बाद मनाया जाता है, इस मान्यता के साथ कि श्री राम के अयोध्या लौटने की खबर यहां 11वें दिन पहुंची थी। इस मौके पर उत्तराखंड में सभी स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और बैंक बंद रहेंगे। 13 नवंबर को छुट्टी है या नहीं? 13 नवंबर को रायपुर में विधानसभा चुनाव के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस दौरान सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के साथ-साथ बैंकों की भी छुट्टी रहेगी। मतदान केंद्रों के आसपास 12 नवंबर को भी शासकीय और निजी स्कूलों में अवकाश रहेगा। 15 नवंबर को क्यों रहेगी छुट्टी? 15 नवंबर को गुरु नानक देव जी की जयंती के साथ कार्तिक पूर्णिमा और गुरु पर्व मनाया जाएगा, जिस कारण कई राज्यों में पब्लिक हॉलिडे घोषित किया गया है। इस दिन पंजाब, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहेंगे। नवंबर के बाकी दिनों में भी बैंक और संस्थान विशेष अवसरों पर बंद रह सकते हैं, इसलिए अपने शहर की स्थानीय छुट्टियों की जानकारी जरूर लें।  

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