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गलत तत्वों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत 32 बोर पिस्तौल व कारतूसों सहित एक काबू, जांच में जुटी पुलिस

मोगा गलत तत्वों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत सी.आई.ए. स्टाफ मोगा ने असले सहित एक युवक को काबू किया है। इस संबंध में सी.आई.ए. स्टाफ मोगा के प्रभारी इंस्पैक्टर दलजीत सिंह ने बताया कि जब सहायक थानेदार वरिन्द्र कुमार पुलिस पार्टी सहित इलाके में गश्त करते हुए देर सायं गांव भिंडरकलां के पास जा रहे थे तो उन्हें गुप्त सूत्रों से जानकारी मिलने पर आरोपी गुरसिमरन सिंह उर्फ सिम्मू निवासी धर्मकोट को काबू करके उसके पास से एक 32 बोर पिस्टल समेत मैगजीन तथा एक कारतूस बरामद किया गया। उसके खिलाफ थाना धर्मकोट में असला एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसे पूछताछ के बाद माननीय अदालत में पेश किया जाएगा। जांच अधिकारी सहायक थानेदार वरिन्द्र कुमार ने कहा कि पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि उक्त पिस्टल वह किस व्यक्ति से लेकर आया था और इसका क्या मकसद था।

दिवाली की रात पंजाब में बड़ी अनहोनी, लड़की की धड़ से अलग हो गई गर्दन

पटियाला दिवाली की रात पटियाला सरहिंद रोड पर भयानक हादसा हो गया। ये हादसा इतना भयानक था कि गाड़ी चला रही 25 साल की लड़की की गर्दन धड़ से अलग हो गई। मृतक लड़की का नाम श्वेता बताया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक श्वेता सरहंद शहर में काम करती थी, जहां से वह काम से छुट्टी लेकर अपने एक सहकर्मी के साथ अपने घर पटियाला लौट रही थी, लेकिन रास्ते में केंद्र सरकार द्वारा पास किए प्रोजेक्ट  के तहत काटे जा रहे एक पेड़ से गाड़ी टकरा गई और यह हादसा हो गया। हादसे में श्वेता की मौके पर ही मौत हो गई। श्वेता की उम्र करीब 25 साल थी और 1 साल पहले ही श्वेता की शादी पटियाला के तफजलपुरा इलाके में सागर नाम के लड़के से हुई थी। पता चला है कि श्वेता की 2 महीने पहले ही नौकरी लगी थी। दिवाली की रात करीब 1 बजे श्वेता काम से घर लौट रही थीं लेकिन रास्ते में हादसा हो गया, जिसमें उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

श्रीनगर में ड्यूटी पर तैनात सेना के जवान की गोली लगने से मौत, मामले की जांच के आदेश दिए

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में शनिवार को रोड ओपनिंग की ड्यूटी पर तैनात सेना के एक जवान की दुर्घटनावश गोली लगने से मौत हो गई। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया, “श्रीनगर शहर के रावलपोरा हाईवे इलाके में रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) के हिस्से के रूप में तैनात एक सेना के जवान की दुर्घटनावश गोली चलने से मौत हो गई। इस घटना की सभी संभावित पहलुओं की जांच के लिए आदेश दिए गए हैं।” पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटनावश गोली चलने का मामला था, जिससे सैनिक की मौत हुई। काजीगुंड-श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर सेना के काफिलों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए सुबह की पहली किरण के साथ आरओपी को तैनात किया जाता है। सेना के काफिले इस राजमार्ग पर दोनों तरफ से हर दिन कम से कम दो बार गुजरते हैं। आतंकवादियों को दूर रखने और किसी भी दुर्घटना को अंजाम देने से रोकने के लिए रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण और स्निफर डॉग्स के साथ सड़कों की सुरक्षा करती है, ताकि काफिले सुरक्षित रूप से गुजर सकें। आतंकवादियों ने सेना, सुरक्षाबलों और पुलिस के काफिलों को नुकसान पहुंचाने के लिए रिमोट-नियंत्रित इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक उपकरणों (आईईडी), ग्रेनेड और ऑटोमेटिक हथियारों से गोलीबारी का इस्तेमाल किया है। इसके अतिरिक्त, राजमार्गों (हाईवे) और सड़कों पर चलने वाले वीआईपी काफिले भी आतंकवादियों के निशाने पर होते हैं। वीआईपी मार्ग को सुरक्षित करने के लिए सीएपीएफ से तैयार आरओपी का इस्तेमाल किया जाता है।  

विधानसभा चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के खर्च पर चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे। पहला निरीक्षण 8-9 नवंबर को होगा, जो उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 4 नवंबर के बाद होगा। इसके बाद 18 नवंबर तक दो और बार जांच की जाएगी। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 12 लाख रुपये बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 28 लाख रुपये थी। उम्मीदवार लंबे समय से खर्च सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। चुनाव खर्च में बड़ा बदलाव कब? चुनाव आयोग ने 2022 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की खर्च सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 90 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी थी। चुनाव खर्च सीमा में आखिरी बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था, जिसे 2020 में 10 प्रतिशत और बढ़ा दिया गया था। 2022 में ही चुनाव आयोग ने लागत फैक्टर और अन्य संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने और उचित सिफारिशें करने के लिए एक समिति का गठन किया था। 2014 में किस आधार पर हुआ था बदलाव? समिति ने राजनीतिक दलों, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए थे। समिति ने पाया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है और 2014 के बाद से लागत मुद्रास्फीति सूचकांक में भी वृद्धि हुई है। इसने प्रचार के बदलते तरीकों पर भी विचार किया, जो धीरे-धीरे वर्चुअल प्रचार की ओर बढ़ रहे हैं। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों को खर्च के रजिस्टर में बदलाव करते समय विवरण जमा करना होगा और अगर कोई उम्मीदवार सीमा से अधिक खर्च करता है, तो नोटिस जारी किए जाएंगे। कैसे तय किया जाता है चुनाव खर्च खर्च प्रकोष्ठ को सौंपे गए खर्चों में गड़बड़ी के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ नोटिस जारी किए जा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए गए थे। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब देने का समय दिया जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर तय समय सीमा के भीतर खर्च का विवरण जमा नहीं किया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी उन वस्तुओं की दरें तय करते हैं जिनका उपयोग उम्मीदवार करेंगे, और वही दर चुनावी खर्च के तहत दिखानी होगी। दरें तय करने से पहले विचार-विमर्श किया जाता है। 10 रुपये की चायआने-जाने के लिए रिक्शा, टेंपो, एसयूवी किराए पर लेने की दरें चुनाव व्यय प्रकोष्ठ की ओर से निर्धारित मूल्य सूची में लिखी गईं हैं। इन दरों के आधार पर चुनावी खर्चों की जांच की जाती है। इसमें चाय की कीमत 10 रुपये और कॉफी की कीमत 15 रुपये तय करने से लेकर स्टॉल लगाने के लिए फर्नीचर और प्रचार सामग्री के उपयोग तक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इन्हीं दरों के आधार पर खर्च दिखा सकते हैं। सभी हितधारकों से चर्चा के बाद दरें तय की जाती हैं। यह चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि पैसे वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ न मिले।

RSS का प्लान सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में वोटरों की गोलबंदी करना और विपक्षी एमवीए को सत्ता में आने से रोकना

मुंबई महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने राज्य में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है. जिस तरह हरियाणा विधानसभा चुनाव में संघ ने पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी वोटरों को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में करने के लिए बड़े पैमाने पर यह कार्यक्रम चलाया जाएगा. आरएसएस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, संगठन, मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य भर में 300,000 से अधिक छोटी बैठकें आयोजित करने वाला है. इस रणनीतिक बदलाव के तहत आरएसएस एक सुव्यवस्थित मशीनरी के रूप में काम करेगा, जो जनमत को प्रभावित करने और चुनावी परिदृश्य को आकार देने के लिए अपने विशाल नेटवर्क का लाभ उठाएगा. पिछले चुनावों में जहां आरएसएस ने मुख्य रूप से मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया था वहीं इस बार इसके उलट कार्यक्रमों को रिजल्ट में तब्दील करने के लिए अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपना रहा है. सूत्रों ने आज को बताया कि आरएसएस अपने अभियान के हिस्से के रूप में तीन बड़े कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है- 1-संविधान सम्मान: कांग्रेस के ‘संविधान बचाओ’ अभियान का जवाब? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) “संविधान सम्मान” नामक एक विशाल अभियान शुरू करने जा रहा है. इसे कांग्रेस पार्टी के “संविधान बचाओ” अभियान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. आरएसएस के इस अभियान का उद्देश्य यह उजागर करना है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने कथित तौर पर बार-बार संविधान का अपमान किया है, साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ़ जाकर बाधाए भी पैदा की हैं. आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कांग्रेस पार्टी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब आप संविधान के मूल के खिलाफ़ जा रहे हैं तो आप संविधान को बचाने की बात कैसे कर सकते हैं?” पदाधिकारी ने इस बात पर भी निराशा व्यक्त की कि कांग्रेस पार्टी ने अपने 70 साल के शासन के दौरान भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का कभी सम्मान नहीं किया. पदाधिकारी ने कहा, “बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ साजिश रचने वाले और उनकी शिक्षाओं के खिलाफ़ जाने वाले लोग यह दावा नहीं कर सकते कि वे भारत के संविधान का सम्मान करते हैं. बहुत से लोग नहीं जानते कि आज भी आरएसएस की सुबह की प्रार्थना में बाबा साहेब अंबेडकर का नाम होता है.” 2- लोकमत परिष्कर यह लोकतंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित एक अभियान होगा. इसमें आरएसएस द्वारा उम्मीदवारों के अच्छे और बुरे पहलुओं को उजागर किया जाएगा और विभिन्न राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों पर चर्चा की जाएगी. 3- सजग बनो ‘सजग बनो’ एक बैठकों की एक सीरीज है, जिसमें आरएसएस लोगों से वोट डालने से पहले सावधानी से सोचने का आग्रह करेगा, लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर देगा. हरियाणा में अपनी सफलता को दोहराने के लिए, आरएसएस ने महाराष्ट्र में अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से 50,000 से अधिक छोटी बैठकें और जनसंपर्क प्रयास शुरू कर दिए हैं. अभियान की सफलता आरएसएस की भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन, महायुति के पक्ष में जनमत करने और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सत्ता हासिल करने के प्रयासों का मुकाबला करने की क्षमता पर निर्भर करेगी.  

ओडिशा के सुंदरगढ़ में दर्दनाक सड़क हादसे में 7 लोगों की मौत

सुंदरगढ़ ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में शनिवार सुबह कोहरे के कारण ट्रेलर में टक्कर लगने से एक भजन मंडली के कम से कम सात सदस्यों की मौत हो गई है। इस हादसे में पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सुंदरगढ़ के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भजन मंडली के गायक शनिवार सुबह अंतिम संस्कार में हिस्सा लेकर अपने-अपने गांव वापस जा रहे थे तभी चालक ने पीछे से खड़े ट्रेलर में टक्कर मार दी जिससे छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे पहले सुंदरगढ़ के कंदाधुडा और समरपिंडा गांवों की भजन मंडली श्राद्ध कर्म के लिए छत्तीसगढ़ के चकबहाल गई थी और सभी एक मारुति वैन में वापस लौट रहे थे। दक्षिण पश्चिमी रेंज के डीआईजी बृजेश राय ने घटना की जानकारी देते हुए कहा, “यह दुर्घटना देर रात लगभग 2 बजे के बीच हुई। वे मारुति वैन में यात्रा कर रहे थे जो एमसीएल-टोपरिया रोड पर खड़े एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि चालक समेत सात लोगों की वहीं मौत हो गई। पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को हेमगिर के एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया है। चालक भजन मंडली को अपने पिता के श्राद्ध समारोह में ले गया था।” फिलहाल मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। दुर्घटना के पीछे का सही कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन संदेह है कि इलाके में कोहरे की वजह से विजन कम था और वैन चालक ट्रेलर को नहीं देख पाया जिसके बाद यह टक्कर हुई।

अक्टूबरने बनाया गर्मी का नया रिकॉर्ड, 1951 के बाद सबसे गर्म रहा महीना

नई दिल्ली  गुलाबी ठंड आमतौर पर अक्टूबर में शुरू होती है, लेकिन इस साल इस महीने में एक खास रिकॉर्ड बना। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने शुक्रवार (1 नवंबर, 2024) को घोषणा की कि इस साल अक्टूबर देश के इतिहास का सबसे गर्म महीना था। मध्य भारत (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों) में अक्टूबर का सबसे गर्म औसत तापमान रिकॉर्ड किया गया , और उत्तर पश्चिम भारत ने 1901 के बाद से अपना दूसरा सबसे गर्म महीना अनुभव किया है। मौसम विभाग के अनुसार यह महीना 1901 के बाद से भारत का सबसे गर्म अक्टूबर था। इस महीने औसत तापमान सामान्य से 1.23 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अक्टूबर में औसत तापमान 26.92 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 1901 के बाद से सबसे अधिक है, जबकि सामान्य तापमान 25.69 डिग्री सेल्सियस था। सबसे गर्म महीना रहा अक्टूबर देशभर में सामान्य तापमान 20.01 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले न्यूनतम तापमान भी 21.85 डिग्री सेल्सियस मापा गया। दिल्ली की बात करें तो अक्टूबर की गर्मी ने पिछले 73 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिल्ली के सफदरजंग मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक इस साल अक्टूबर 1951 के बाद सबसे गर्म महीना था। इस साल अक्टूबर में राजधानी का अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस था। 1951 की शुरुआत में, उच्चतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। दिन के साथ रात भी रही गर्म बता दें कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)  ने कहा है कि नवंबर के पहले दो हफ्ते में देश के बहुत से हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान का दौर जारी रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही दूसरे सप्ताह में मामूली गिरावट और महीने के बाकी दिनों में तापमान में धीरे-धीरे गिरावट होने की संभावना है। आखिर ठंड न आने का क्या है कारण IMD का कहना है कि ठंड न आने का कारण ला नीना का न बनना है। हलांकि यह मध्य और पूर्व-मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के समय-समय पर ठंडा होने से जुड़ी एक जलवायु घटना है, जो अभी तक कुछ खास विकसित नहीं हुई है। उम्मीद है कि नवंबर के लास्ट और दिसंबर की शुरुआत में ला नीना बन सकती है। अगर होगा तो आगे (दिसंबर-फरवरी) कड़ाके की सर्दी पड़ने की उम्मीद है। वायु गुणवत्ता की चुनौती: दिल्ली की मौजूदा मौसम की स्थिति के साथ-साथ, शहर में वायु प्रदूषण भी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शनिवार सुबह 7:30 बजे औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 294 दर्ज किया गया, जो अलार्मिंग स्तर पर है. दिल्ली एनसीआर के अन्य शहरों में AQI भी कम नहीं है. फरीदाबाद में 165, गुरुग्राम में 219, गाजियाबाद में 308, ग्रेटर नोएडा में 202 और नोएडा में 250 अंक दर्ज किए गए हैं. दिल्ली के 18 इलाकों में AQI स्तर 300 से ऊपर और 400 के बीच बना हुआ है. उदाहरण के लिए, आनंद विहार में AQI 380, IGI एयरपोर्ट पर 341, जबकि रोहिणी में 304 अंक दर्ज किया गया है. दूसरी ओर, दिल्ली के 19 इलाकों में AQI स्तर 200 से ऊपर 300 के बीच है. नतीजतन, यह प्रदूषण का स्तर न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि लोगों की सामान्य दिनचर्या पर भी प्रभाव डाल रहा है.

अब छह माह तक मां गंगा मुखीमठ में मुखबा स्थित गंगा मंदिर में श्रद्धालुओं काे देंगी दर्शन

उत्तराखंड में गंगाेत्री धाम के कपाट बंद, शीतकालीन पड़ाव के लिए निकली मां गंगा की उत्सव डोली गंगाेत्री  :इस वर्ष यात्रा काल में आठ लाख 11 हजार 542 तीर्थयात्रियाें ने गंगोत्री धाम में नवाए शीश  अब छह माह तक मां गंगा मुखीमठ में मुखबा स्थित गंगा मंदिर में श्रद्धालुओं काे देंगी दर्शन उत्तरकाशी जगविख्यात गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व पर विधि-विधान पूर्वक शनिवार काे दाेपहर 12:14 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद हाेने के बाद अब छह माह तक मां गंगा अपने मायके मुखीमठ में मुखबा स्थित गंगा मंदिर में श्रद्धालुओं काे दर्शन देंगी। मां गंगा की उत्सव डोली शनिवार काे मुखीमठ के लिए रवाना हो गई है, जाे शीतकालीन पड़ाव मुखबा पहुंचेगी। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के मौके पर धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। हर-हर गंगे… जय मां गंगे के जयकारों से गंगाेत्री धाम गूंज उठा। पंच गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि शुक्रवार को दीपोत्सव के साथ मां भगवती गंगा के गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। उन्हाेंने कहा कि मां गंगा की उत्सवडोली शनिवार काे मुखीमठ के लिए रवाना हो गई है। मां गंगा की डोली मुखीमठ से तीन किलोमीटर पहले मारकंडे मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी। तीन नवंबर रविवार को भैया दूज पर मां गंगा की डोली मुखीमठ गांव पहुंचेगी, फिर मां गंगा की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ शीतकालीन पड़ाव मुखबा लाया जाएगा। ऐस ेमें अब शीतकाल तक श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन उनके मायके मुखीमठ में कर सकेंगे। यहां छह माह तक मां गंगा की पूजा होगी। उल्लेखनीय है कि इस बार चारधाम यात्रा पर आए आठ लाख 11 हजार 542 तीर्थयात्रियाें ने गंगोत्री धाम के दर्शन कर पुण्य अर्जित किए। इस माैके पर हर्षिल राजपुताना रेजीमेंट की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारा का आयोजन किया। इस दौरान श्रीपंच मंदिर समिति गंगोत्री के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल, उपाध्यक्ष अनुज, कोषाध्यक्ष सुशील, सह सचिव जय कृष्ण, सदस्य चंडी प्रसाद, सतीश, अभिषेक, संतोष, प्रेमदेव, प्रदीप, सुनील, रावल रविंद्र सेमवाल, राजेश, क्षेत्रीय विधायक सुरेश चौहान, ब्लॉक प्रमुख विनीता रावत, जगमोहन सिंह रावत, राजेंद्र, विजय प्रताप समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।      

Parliament Winter Session की तारीख का एलान, जानें कब से शुरू होगा?

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होगा. यह 20 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान कई अहम बिलों पर चर्चा होगी. शीतकालीन सत्र के दौरान वन नेशन-वन इलेक्शन और वक्फ विधेयक बिल पर भारी हंगामा होने के आसार है. वन नेशन-वन इलेक्शन पर रिपोर्ट को कैबिनेट से मंजूरी के बाद बिल को शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. बता दें कि विपक्षी दल वन नेशन-वन इलेक्शन का विरोध कर रहे हैं और देश में एक साथ चुनाव के पक्ष में नहीं हैं. इसके अलावा वक्फ विधेयक पर गठित जेपीसी संसद के शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है. इस पर भी हंमामे के आसार हैं. बता दें कि हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर बोलते हुए कहा था कि यह विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किया जाएगा. संसद के शीतकालीन सत्र में वन नेशन वन इलेक्शन और वक्फ विधेयक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इन दोनों मुद्दों को लेकर सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। वन नेशन वन इलेक्शन पर कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, अब इस बिल को शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के लिए यह बिल पास कराना काफी मुश्किल होगा। शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होगा, जिसमें विशेष संयुक्त बैठक संविधान सदन (पुरानी संसद भवन) के केंद्रीय हॉल में आयोजित होने की सकती है. इसी स्थान पर 1949 में संविधान को अंगीकृत किया गया था. संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।पहले, 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन 2015 में मोदी सरकार ने इसे संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती को याद किया गया। सूत्रों ने बताया कि संविधान के महत्व को रेखांकित करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है, जिसमें डॉक्यूमेंट्री बनाना, संविधान सभा की बहसों का लगभग दो दर्जन भाषाओं में अनुवाद करना, और सार्वजनिक मार्च का आयोजन शामिल है।एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों ही खुद को संविधान के “रक्षक और अनुयायी” के रूप में प्रस्तुत करने की राजनीति में लगे हुए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन पर संविधान और संवैधानिक मूल्यों को “नष्ट” करने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगी कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं. इस साल जुलाई में सरकार ने आपातकाल की याद में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में अधिसूचित किया था।

हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता अब भी ‘खराब’ श्रेणी में

चंडीगढ़  हरियाणा और पंजाब के कई स्थानों पर शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का प्रति घंटा अपडेट देने वाले ‘समीर’ ऐप के अनुसार, दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में रहा। हरियाणा के गुरुग्राम, जींद, अंबाला और कुरुक्षेत्र समेत कुछ जगहों पर वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार तो हुआ, लेकिन तब भी यह ‘खराब’ श्रेणी में ही दर्ज किया गया। दिवाली के अगले दिन यानी शुक्रवार को इन जगहों पर एक्यूआई ‘बहुत खराब’ श्रेणी में था। शनिवार सुबह नौ बजे गुरुग्राम में एक्यूआई 212, जींद में 285, अंबाला में 224 और कुरुक्षेत्र में 262 दर्ज किया गया, जबकि 24 घंटे पहले यह क्रमश: 344, 340, 308 और 304 था। हरियाणा के अन्य स्थानों जैसे बहादुरगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 218, भिवानी में 224, चरखी दादरी में 229, फतेहाबाद में 224, हिसार में 204, करनाल में 277, सिरसा में 251 और यमुनानगर में 243 दर्ज किया गया। हरियाणा के सोनीपत में एक्यूआई 324 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच को ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’, 401 से 450 के बीच ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर एक्यूआई को ‘बेहद गंभीर’ माना जाता है। चंडीगढ़ में शनिवार को एक्यूआई 289 रहा जबकि शुक्रवार को यह 303 था। पंजाब के अमृतसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। यह शुक्रवार सुबह नौ बजे 314 से बिगड़कर शनिवार को 346 पर पहुंच गया है। हालांकि, मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई 24 घंटे में सुधरकर 206 रहा जबकि शुक्रवार को यह 331 था। जालंधर में एक्यूआई 239, खन्ना में 206, लुधियाना में 291 और पटियाला में 231 दर्ज किया गया। पंजाब में शुक्रवार को पराली जलाने के कुल 587 मामले दर्ज किए गए, जो इस मौसम में सबसे अधिक है।  

LAC पर मिठाई ने दूर की भारत-चीन सेना के बीच की खटास, एक दूसरे को बांटी गई मिठाइयां

नईदिल्ली पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले दो बिंदुओं से भारतीय और चीनी सैनिकों की पूरी तरह वापसी के कुछ दिन बाद भारतीय सेना ने शुक्रवार को डेमचोक में गश्त शुरू कर दी। सेना के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देपसांग में गश्त जल्द ही फिर शुरू हो सकती है। सेना के सूत्रों ने बुधवार को बताया था कि भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध वाले दो स्थानों-डेमचोक और देपसांग में सैनिकों की वापसी पूरी हो गई है और जल्द ही इन जगहों पर गश्त शुरू कर दी जाएगी। इसके एक दिन बाद दिवाली के मौके पर एलएसी पर कई सीमा बिंदुओं पर भारत और चीन के सैनिकों ने मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। मिठाइयों के परंपरागत आदान-प्रदान से एक दिन पहले दोनों देशों के सैनिकों ने टकराव वाले दोनों बिंदुओं से वापसी की प्रक्रिया पूरी की थी जिसे चीन-भारत संबंधों में नये सकारात्मक आयाम के रूप में देखा जा रहा है। सेना के सूत्रों ने बताया कि डेमचोक में गश्त शुरू हो गई है। सूत्रों ने पहले कहा था कि क्षेत्रों और गश्त का स्तर अप्रैल 2020 के पहले के स्तर पर पहुंच सकता है। सूत्रों ने बुधवार को कहा था कि सैनिकों के पीछे हटने के बाद सत्यापन प्रक्रिया जारी है और कमांडरों के बीच गश्त के तौर-तरीकों पर फैसला किया जाना है। सूत्रों ने कहा था, ‘‘स्थानीय कमांडर स्तर पर बातचीत जारी रहेगी।’’ विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में कहा कि पिछले कई हफ्तों की बातचीत के बाद भारत और चीन के बीच एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है और इससे 2020 में उपजे मुद्दों का समाधान निकलेगा। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए दोनों देशों के बीच बनी सहमति को चार साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद से पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध बरकरार था और भारत-चीन संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे। सैनिकों की वापसी हुई, जल्द शुरू होगी गश्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 23 अक्टूबर को रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई मुलाकात में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध वाले शेष स्थानों से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर भारत-चीन में बनी सहमति का स्वागत किया था. दोनों नेताओं ने विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्र को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए थे. वहीं आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तवांग में सरदार वल्लभभाई पटेल की एक प्रतिमा का अनावरण किया और मेजर रालेंगनाओ ‘बॉब’ खटिंग वीरता संग्रहालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) पर कुछ क्षेत्रों में विवादों का समाधान करने के लिए भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सैन्य, दोनों ही स्थर पर  बातचीत होती रही है. रक्षा मंत्री ने कहा कि अभी हाल की बातचीत के बाद, जमीनी हालात को रिस्टोर करने के लिए, आपस में व्यापक सहमति हुई है. यह सहमति, समानता और पारस्परिक सुरक्षा के आधार पर विकसित हुई है. जो सहमति बनी है, उसके अंतर्गत पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त और ग्रेजिंग का अधिकार भी शामिल है. रिश्तों को बेहतर करने में मिलेगी मदद भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कल उम्मीद जताई थी कि पूर्वी लद्दाख से लगती भारत-चीन सीमा से दोनों देशों के सैनिकों की वापसी पूरी होने से रिश्तों को बेहतर करने और आने वाले दिनों में दोनों पड़ोसियों के बीच बेहतर समझ बनाने में मदद मिलेगी. चीनी राजनयिक ने यहां ‘मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (एमसीसीआई) द्वारा आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई हालिया बैठक ‘‘बहुत महत्वपूर्ण” थी.

मोदी ने यूनान के प्रधानमंत्री से व्यापार, रक्षा और शिपिंग में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनान के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस के साथ फोन पर बातचीत की तथा व्यापार, रक्षा और शिपिंग में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। श्री मोदी ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा, “कल प्रधानमंत्री मित्सोताकिस के साथ सार्थक बातचीत हुई। भारत-यूनान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जतायी गयी। हमारा लक्ष्य व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी में अपने सहयोग को गहरा करना है। यूनान यूरोपीय संघ के भीतर भी भारत के लिए एक मूल्यवान भागीदार है।” यूनान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि श्री मित्सोताकिस ने निकट भविष्य में भारत में मुंबई और बैंगलोर में अपने देश द्वारा दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने पर चर्चा की। उन्होंने 2025-2026 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में ग्रीस के कार्यकाल के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग पर भी चर्चा की।  

इजरायल ने हमास के एक और कमंडर को मारा, इजरायली हमलों में गाजा में 25, लेबनान में 13 लोग मारे गए

बेरूत मिडिल ईस्ट में हमास और हिजबुल्लाह के खात्मे की कसम खाने के बाद इजरायल कई मोर्चे पर जंग लड़ रहा है। इस बीच शुक्रवार को गाजा और लेबनान पर इजरायल का कहर एक साथ टूटा। ताजा हमलों में दोनों जगहों पर दर्जनों नागरिकों की मौत हो गई है। इजरायल ने लेबनान के उत्तरपूर्वी गांवों को निशाना बनाया जिनमें कम से कम 52 लोग मारे गए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। वहीं उत्तरी गाजा में लोगों के घरों को निशाना बना कर किए गए हमलों में 84 लोगों के मारे जाने की खबर है। गाजा के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को गाजा में मारे गए लोगों में 50 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इन हमलों में जबालिया शरणार्थी शिविर में कई लोग मारे गए हैं। इस बीच लेबनान में इजरायल ने कई बिल्डिंगों को निशाना बनाया जिसके बाद कई लोग देश छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से लेबनान में 2,897 से अधिक लोग मारे गए हैं और 13,150 घायल हुए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों में एक चौथाई महिलाएं और बच्चे थे। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का अनुमान है कि लेबनान पर इजरायल के आक्रमण के बाद 1.4 मिलियन लोग विस्थापित हो चुके हैं। हमास का एक और वरिष्ठ अधिकारी ढेर इजरायली सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने खान यूनिस में हवाई हमले में हमास के वरिष्ठ अधिकारी इज अल-दीन कसाब को मार डाला। फिलिस्तीनी समूह ने एक बयान में कसाब की मौत पर शोक व्यक्त किया, और कहा कि वह एन्क्लेव में उनकी कार पर एक इजरायली हमले में अयमान आयश नामक शख्स हमास के एक अन्य अधिकारी के साथ मारा गया था। हमास के सूत्रों ने रॉयटर को बताया कि कसाब गाजा में एक स्थानीय समूह का अधिकारी था, लेकिन उसके निर्णय लेने वाले राजनीतिक कार्यालय का सदस्य नहीं था। वहीं इजरायल ने कहा है कि उसने हमास के बुनियादी ढांचे और नुसेरात शरणार्थी शिविर के पास सक्रिय एक आतंकवादी को निशाना बनाया है। एक अलग घोषणा में इजरायली सेना ने कहा कि गाजा के दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक वाहन पर हवाई हमले में हमास के राजनीतिक ब्यूरो के एक बड़े नेता इज़ अल-दीन कसाब और उनके सहायक अयमान अयेश की मौत हो गई। हमास ने अपने नेता की मौत की पुष्टि की है। गौरतलब है कि अयमान अयेश हमास के आखिरी बचे हुए बड़े नेताओं में से एक था।

हिंदुओं का बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा , सड़कों पर उतरे हजारों, उठाई ये मांग

ढाका बांग्लादेश में लगातार हो रहे हमलों और उत्पीड़न के विरोध में एक बार फिर बड़ी संख्या में हिंदू सड़क पर उतरे। इस दौरान हिंदुओं ने बड़ी रैली निकाली। करीब 30 हजार से अधिक हिंदुओं ने चटगांव में एक चौराहे पर अधिकारों की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान हिंदुओं ने कहा कि अंतरिम सरकार उनको सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रही है। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने कहा कि चार अगस्त से हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उन्हें पर्याप्त रूप से सुरक्षा नहीं दी है। हसीना के सत्ता से हटने के बाद से कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। वहीं अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस का कहना है कि हमलों के आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। बता दें कि देश की लगभग 17 करोड़ आबादी में हिंदू लगभग 8 प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम लगभग 91% हैं। इससे पहले 26 अक्तूबर को  अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर सनातन जागरण मंच ने चटगांव में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। आठ प्रमुख मांगों को लेकर हिंदू अल्पसंख्यकों ने आवाज बुलंद की थी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक बांग्लादेश की सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगी, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। बांग्लादेश में क्या हुआ? नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया था, जो बाद में हिंसा में बदल गया। बढ़ती हिंसा को देखते हुए पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया था और भारत चली गई थीं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया। हालांकि, अंतरिम सरकार बनने के बाद भी अल्पसंख्यकों के घरों और धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया।   बांग्लादेश में हजारों हिंदू सड़कों पर उतरे हैं ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के हजारों सदस्यों ने शनिवार को रैली निकालकर अंतरिम सरकार से सिलसिलेवार हमलों व उत्पीड़न से सुरक्षा देने और इस समुदाय के नेताओं के खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामलों को रद्द करने की मांग की। लगभग 30,000 हिंदुओं ने दक्षिण-पूर्वी शहर चटगांव के एक प्रमुख चौराहे पर रैली करते हुए नारे लगाए। देश में अन्य जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन होने की सूचना मिली। हिंदू समूहों का कहना है कि अगस्त की शुरुआत में प्रधानमंत्री शेख हसीना की धर्मनिरपेक्ष सरकार के बेदखल होने और हसीना के देश छोड़कर चले जाने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हजारों हमले हुए हैं। हसीना की सरकार के पतन के बाद नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। छात्रों का आंदोलन हिंसक होने के बाद शेख हसीना देश छोड़कर चली गई थीं। बांग्लदेश की आबादी लगभग 17 करोड़ है, जिनमें हिंदुओं की आबादी करीब आठ प्रतिशत है जबकि 91 प्रतिशत आबादी मुसलमान है। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। हिंदू नेताओं पर देशद्रोह का केस शहर में 25 अक्टूबर की रैली को लेकर प्रमुख पुजारी चंदन कुमार धर समेत 19 हिंदू नेताओं के खिलाफ बुधवार को राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ शुक्रवार को चटगांव में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। दो नेताओं की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय के लोग नाराज हैं।  

अनंतनाग में सुरक्षाबलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए, श्रीनगर में भी मुठभेड़ जारी

अनंतनाग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार को मठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस ने यह जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले के शांगस-लारनू इलाके में हलकान गली के पास यह मुठभेड़ हुई। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए हैं, जिनसें से एक स्थानीय और दूसरा विदेशी नागरिक है। अभी इस बात का पता नहीं चल पाया है कि वे किस आतंकवादी समूह के सदस्य थे। अधिकारी ने बताया कि इलाके में अब भी अभियान जारी है तथा आगे की जानकारी का इंतजार है।अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर के खानयार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच एक और मुठभेड़ जारी है, अब तक दोनों ओर से किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं है। आधिकारिक प्रवक्ता के मुताबिक आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ने पुराने श्रीनगर के खानयार इलाके में शुक्रवार की रात संयुक्त घेराबंदी और तलाश अभियान शुरू किया । इसी दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। इसके अलावा बांदीपोरा जिले में कल रात गोलीबारी के बाद बड़े पैमाने पर तलाश अभियान जारी है।उन्होंने बताया कि बांदीपोरा के पनार इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखी गयी। जब आतंकवादियों को ललकारा गया तो उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और जंगल में भाग गए। दिवाली के मौके पर आतंकवादी घाटी को दहलाने की साजिश कर रहे थे लेकिन खुफिया एजेंसियों और सुरक्षाबलों की सतर्कता की वजह से साजिश नाकाम हो गई। कश्मीर घाटी में सेना के अभियान की वजह से लगातार आतंकियों का सफाया किया जा रहा है। ऐसे में बौखलाए आतंकवादी अब प्रवासी मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। शुक्रवार को आतंकियों ने यूपी के दो प्रवासी मजदूरों को गोली मार दी थी। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

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