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US ने भारत की 15 कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, जानें क्या है वजह

वाशिंगटन अमेरिका ने रूस के सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों का कथित तौर पर सहयोग करने के आरोप में भारत की 15 कंपनियों समेत 275 लोगों और यूनिट्स पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि चीन, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड और तुर्किए की कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसकी वजह ये है कि ये कंपनियां रूस को एडवांस टेक्नोलॉजी और उपकरण प्रदान कर रही हैं जिनका इस्तेमाल रूस अपने युद्ध तंत्र को चलाने में कर रहा है। अमेरिका ने इन भारतीय कंपनियों पर लगाया है प्रतिबंध वित्त विभाग की तरफ से जारी लिस्ट में भारत की कंपनियों- आभार टेक्नोलॉजीज एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, डेनवास सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, एमसिस्टेक, गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड, ऑर्बिट फिनट्रेड एलएलपी, इनोवियो वेंचर्स, केडीजी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और खुशबू होनिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल हैं। इनके अलावा लोकेश मशीन्स लिमिटेड, पॉइंटर इलेक्ट्रॉनिक्स, आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, शार्पलाइन ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड, शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, श्रीजी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रेया लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी इस लिस्ट में रखा गया है। अमेरिका ने बुधवार को भी की थी कार्रवाई इससे पहले बुधवार को अमेरिका ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को बढ़ावा देने के लिए लगभग 400 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। बयान के मुताबिक, वैश्विक टैक्स चोरी नेटवर्क को बाधित करने के अलावा इस कार्रवाई के तहत रूस के सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए प्रमुख जानकारी और अन्य सामग्री के घरेलू रूसी आयातकों और उत्पादकों पर भी निशाना लगाया गया है। वित्त उपमंत्री वैली अडेयेमो ने कहा,“अमेरिका और हमारे सहयोगी रूस को यूक्रेन के खिलाफ अवैध और अनैतिक युद्ध के लिए जरूरी महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रौद्योगिकियों का प्रवाह रोकने के लिए दुनिया भर में निर्णायक कार्रवाई करना जारी रखेंगे।” संकल्प पर अडिग अमेरिका उन्होंने कहा, “इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि हम रूस की युद्ध मशीनरी को सुसज्जित करने की क्षमता को कम करने और हमारे प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रणों को अनदेखा कर या उनसे बचकर उसकी मदद करने की कोशिश करने वालों को रोकने के अपने संकल्प पर अडिग हैं।”अमेरिकी विदेश विभाग ने तीसरे पक्ष के कई देशों में प्रतिबंधों से बचने और धोखाधड़ी को भी निशाना बनाया है। इनमें चीन स्थित कई कंपनियां शामिल हैं जो दोहरे उपयोग वाले सामान का निर्यात करती हैं जो रूस के सैन्य-औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देती हैं। अमेरिका ने रूसी रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा कंपनियों तथा रूस के भविष्य के ऊर्जा उत्पादन और निर्यात का समर्थन करने वाली कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।

दिवाली के बाद दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों की हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट

नई दिल्ली दिवाली की रात हुई व्यापक आतिशबाजी के बाद दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों की हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट देखी गई है। शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा जहरीली हो गई, और आसमान पर धुंध की मोटी चादर छा गई। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर स्तर तक पहुंच गया, जबकि कुछ क्षेत्रों में AQI 350 से भी अधिक दर्ज किया गया है। गुरुवार रात से ही दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में धुएं का गुबार छाया रहा, जो शुक्रवार सुबह तक और गहराता गया। इस बढ़ते धुंध और प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के इस स्तर पर सांस के रोगों से जूझ रहे लोगों को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है। दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता और लखनऊ जैसे कई बड़े शहरों में भी दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहां भी वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। वायु गुणवत्ता में इस गिरावट को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करने और विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को प्रदूषित क्षेत्रों से बचाने की अपील की है। साथ ही, इस समय में पराली जलने के मामलों में बढ़ोतरी भी प्रदूषण में योगदान दे रही है, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो रही है। प्रदूषण के इस हालात को सुधारने के लिए विशेषज्ञों ने वाहनों का कम उपयोग करने, जलावन को नियंत्रित करने और मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने पर जोर दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने दी जानकारी, रूस में 8,000 उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात

वाशिंगटन अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जानकारी दी है कि रूस ने अपने पश्चिमी फ्रंट लाइन वाले कुर्स्क क्षेत्र में 8,000 उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात किए हैं, और जल्द ही इन सैनिकों को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उतारा जा सकता है। यह खुलासा उन्होंने अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो टे-यूल और रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून के साथ हुई टू-प्लस-टू बैठक में किया। बैठक में उत्तर कोरिया द्वारा किए गए एक नए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पर भी चर्चा हुई, जिससे राष्ट्रपति चुनाव से पहले तनाव बढ़ गया है। ब्लिंकन ने कहा कि रूस में कुल लगभग 10,000 उत्तर कोरियाई सैनिक हैं, जिनमें से अधिकांश कुर्स्क में तैनात हैं। हालांकि ये सैनिक युद्ध में सक्रिय नहीं हुए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में इनकी सहभागिता की संभावना है। ब्लिंकन ने चेतावनी दी कि यदि ये सैनिक यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में शामिल होते हैं, तो वे वैध सैन्य लक्ष्यों में माने जाएंगे। अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जवाबी कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन ने भी उत्तर कोरियाई सैनिकों की भागीदारी को लेकर चिंता जताई। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री किम ने खुलासा किया कि उत्तर कोरिया अब तक रूस को लगभग 1,000 मिसाइलें और कई गोला-बारूद भेज चुका है। ब्लिंकन के अनुसार, रूस, जो यूक्रेन में प्रतिदिन करीब 1,200 सैनिकों की मौत का सामना कर रहा है, अब उत्तर कोरियाई सैनिकों पर निर्भर हो रहा है। ब्लिंकन ने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब रूस ने पिछले 100 वर्षों में किसी विदेशी सेना को अपनी धरती पर बुलाया है। इस बीच, दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री ने बताया कि चीन इस मामले पर मौन है लेकिन स्थिति के बिगड़ने पर अपनी भूमिका निभा सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की

न्यूयॉर्क रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि सत्ता में आने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के साथ साझेदारी को मजबूत करेंगे। ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए लिखा, मुझे उम्मीद है कि रोशनी का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत की ओर ले जाएगा! उन्होंने कहा, मैं हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बर्बर हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं, जिन पर बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा है और लूटपाट की जा रही है, जहां पूरी तरह अराजकता की स्थिति बनी हुई है। साथ ही उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी डेमोक्रेटिक पार्टी उम्मीदवार कमला हैरिस और राष्ट्रपति जो बाइडेन पर दुनिया भर में हिंदुओं की दुर्दशा की अनदेखी करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने हिंदू अमेरिकियों की रक्षा करने का वादा किया। उन्होंने लिखा, मेरे रहते ऐसा कभी नहीं होता। कमला और जो ने दुनिया भर और अमेरिका में हिंदुओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा, हम कट्टरपंथी वामपंथियों के धर्म-विरोधी एजेंडे से हिंदू अमेरिकियों की भी रक्षा करेंगे। हम आपकी आजादी के लिए लड़ेंगे। बता दें कि पूरे अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। मामले में सरकार की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और न ही बाइडेन या हैरिस ने व्यक्तिगत रूप से घटनाओं की निंदा की। उन्होंने कहा, सरकार में आने पर मैं भारत और अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी साझेदारी को भी और मजबूत करूंगा। इसके बाद उन्होंने व्यवसाय करने वाले हिंदू अमेरिकियों को हैरिस प्रशासन से होने वाले खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने एक्स पर ल‍िखा, कमला हैरिस अधिक टैक्स और अधिक नियमों से छोटे व्यवसायों को नष्ट कर देंगी। इसके विपरीत, मैंने करों में कटौती की, विनियमन में कटौती की और इतिहास की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का निर्माण किया। उन्होंने लिखा, हम इसे फिर से करेंगे, पहले से भी अधिक बड़े और बेहतर तरीके से, और हम अमेरिका को फिर से महान बनाएंगे।

देश में इस साल 7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया, मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार ……

8 लाख रुपये तक की इनकम हो सकती है टैक्स फ्री, 9 करोड़ लोग भर सकते हैं आईटीआर  सरकार का 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला! देश में इस साल  7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया, मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार …… नई दिल्ली हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस साल करीब 7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया है और मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार कर सकती है। यदि सरकार 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला लेती है, तो यह आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस छूट की मांग जोर पकड़ रही है और ऐसी संभावना है कि सरकार 60 से 80 साल के वरिष्ठ नागरिकों को यह राहत दे सकती है। 2 करोड़ ज्यादा आईटीआर फाइल होने की संभावना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के आर्थिक विभाग की रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर सरकार असेसमेंट ईयर 2024-25 में आईटीआर की संख्या बढ़ाना चाहती है, तो उसे ऐसे कदम उठाने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों को यह छूट दी जाती है, तो रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस साल करीब 2 करोड़ और आईटीआर फाइल होंगे, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत तक यह संख्या 9 करोड़ को पार कर सकती है। अगले साल यह आंकड़ा 10 करोड़ के पार भी पहुंच सकता है। टीडीएस कटौती और सर्टिफिकेट में बदलाव की सिफारिश रिपोर्ट के अनुसार, असेसमेंट ईयर 2022 में कुल 7.3 करोड़ आईटीआर फाइल किए गए थे, जो असेसमेंट ईयर 2024 में बढ़कर 8.6 करोड़ हो गए। तय तारीख के बाद आईटीआर भरने वालों की संख्या में गिरावट आ रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि लोग समय पर आईटीआर फाइल करने के अनुशासन का पालन कर रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी प्रक्रिया और फॉर्म को आसान बना दिया है, जिससे आईटीआर भरना सरल हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार को टीडीएस कटौती के दायरे में सुधार करना चाहिए और टीडीएस सर्टिफिकेट में भी बदलाव करने चाहिए।  

आईआईसीटी निदेशक ने बताया- भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2024 का आयोजन गुवाहाटी में होगा

हैदराबाद भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) 2024 का आयोजन असम के गुवाहाटी में किया जाएगा। सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के निदेशक डॉ. श्रीनिवास रेड्डी ने यह जानकारी दी। उन्होंने मंगलवार को यहां आईआईएसएफ के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के साथ-साथ 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर अपने स्वागत भाषण में कहा कि कर्टेन रेज़र कार्यक्रम ने 30 नवंबर से 03 दिसंबर तक आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए मंच तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव वैज्ञानिक और गैर-वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को विज्ञान के साथ गहराई से जुड़ने और इसे सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि 2016 से, आयुर्वेद को हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के एक अभिन्न अंग के रूप में बढ़ावा देने के लिए यह दिन पूरे देश में मनाया जाता है। इस वर्ष का थीम ‘वैश्विक स्वास्थ्य एवं नवाचार के लिए आयुर्वेद’ है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को वैश्विक मान्यता चाहिए तो उसे आयुर्वेद पद्धतियों की क्षमता को मान्य करने के लिए साक्ष्य आधारित डेटा प्राप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए। डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि यह विज्ञान को आकर्षक रूप से लोगों के सामने लाने की एक कोशिश है। उन्होंने स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारे पूर्वजों की समग्र जीवन शैली को अपनाने पर भी बल दिया। सीएसआईआर- सेलुलर एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीएसआईआर-सीसीएमबी) के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंदरा देशमुख ने आईआईएसएफ के संदर्भ में अपने संबोधन में आईआईएसएफ के आयोजन में शामिल विभिन्न संगठनों के बारे में बातचीत की, जबकि वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सैबल दास ने आईआईएसएफ और इस वर्ष के विषयगत आयोजनों का परिचय दिया। सीएसआईआर-आईआईसीटी में आयुर्वेद दिवस 2024 समारोह छात्रों के बीच आयुर्वेद को बढ़ावा देने और वैश्विक स्वास्थ्य एवं नवाचार के लिए इसे आधुनिक प्रथाओं के साथ एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक कदम है।  

मणिपुर पड़ाव के दौरान अमूर फॉल्कन को किया जाएगा सैटेलाइट ट्रांसमीटर के साथ टैग

इम्फाल माह की शुरुआत में, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में अमूर फाल्कन पक्षियों को सैटेलाइट ट्रांसमीटर से टैग करेंगे, ताकि इन प्रवासी पक्षियों के रास्तों का अध्ययन किया जा सके। यह जानकारी वन अधिकारियों ने दी है। यह खूबसूरत पक्षी, जिन्हें मणिपुर में ‘अखुआइपुइना’ और नागालैंड में ‘मोलुलम’ के नाम से जाना जाता है, सालाना करीब 22,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ये पूर्वी एशिया से दक्षिण अफ्रीका तक की यात्रा करते हैं और फिर शरद ऋतु में वापस लौटते हैं। फाल्कन परिवार से संबंधित ये छोटे पक्षी, जो आकार में कबूतर से थोड़े छोटे होते हैं, तामेंगलोंग के घने जंगलों वाले इलाके में बड़ी संख्या में पहुंचे हैं प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए मणिपुर के नोनी और तामेंगलोंग जिलों ने किसी भी तरह के शिकार, पकड़ने, मारने और बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। ये जिले असम और नागालैंड से लगे हुए हैं, जो इन पक्षियों की आगे की यात्रा से पहले एक छोटा ठहराव स्थल भी होता है। तामेंगलोंग के वन अधिकारी हिटलर सिंह ने बताया कि देहरादून स्थित डब्ल्यूआईई के वैज्ञानिक, डॉ सुरेश कुमार यूके से मंगवाए गए ट्रांसमीटर के साथ नवंबर के पहले सप्ताह में तामेंगलोंग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पहले कुछ अमूर फाल्कन चुनकर उनकी सेहत का निरीक्षण करेंगे और फिर सबसे स्वस्थ दो पक्षियों को ट्रांसमीटर से टैग करेंगे। सिंह ने बताया कि जैसे ही टैग किए गए पक्षी उड़ान भरेंगे, उनके यात्रा मार्ग और उड़ान पैटर्न का अध्ययन किया जा सकेगा। ट्रांसमीटर एक साल तक काम करता है, जिससे इन पक्षियों की पूरी सालभर की यात्रा का रिकॉर्ड मिल सकेगा। एक मादा बाज को 2018 में तमेंगलोंग में ट्रांसमीटर से टैग किया गया था। उसने लगातार पांच दिन और आठ घंटे उड़ान भरने के बाद 5,700 किलोमीटर की दूरी तय करके सोमालिया में लैंड किया था। इस बीच, जिले के अधिकारियों और जानवर प्रेमियों के समूहों ने इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। वन अधिकारी हिटलर सिंह ने बताया, स्थानीय लोगों को प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए वन विभाग, स्थानीय क्लबों और पशु प्रेमियों के समूहों के समर्थन से, पहले की तरह नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में “अमूर फाल्कन महोत्सव” का आयोजन करेगा। तामेंगलोंग के पशु प्रेमियों का कहना है कि वन अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा अमूर फाल्कन की सुरक्षा के लिए बढ़ाई गई जागरूकता और सुरक्षा के प्रयासों के कारण उनके शिकार की घटनाओं में काफी कमी आई है। एक पशु प्रेमी ने कहा, “हमने अपने जिले में अमूर फाल्कन का स्वागत किया है। हमने देखा है कि कई बाज हमारे जिले में आजादी से उड़ रहे हैं।” राज्य में अमूर फाल्कन की जनसंख्या का पहला सर्वेक्षण पिछले वर्ष तामेंगलोंग के चुलुआन बांस के जंगल में किया गया था, जहां बराक नदी के किनारे 1,41,274 बाज पाए गए थे। नागालैंड में, एक वन अधिकारी ने बताया कि ये राज्य भी इन पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां ये पक्षी शीतकाल में तीन से चार सप्ताह के लिए विश्राम और फिर से तरोताजा होने के लिए रुकते हैं। इन पक्षियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति का पर्यावरणीय महत्व है, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। अमूर बाज को 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत कानूनी संरक्षण दिया गया है। नागालैंड के अधिकारी ने कहा कि इन पक्षियों का शिकार करना या उनके मांस का कब्जा करना गंभीर अपराध है, जिसके चलने तीन साल तक की सजा भी हो सकती है। अमूर फाल्कन और अन्य प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से नागालैंड में पर्यटन को बढ़ावा मिला है।  

चीन में लगातार जन्म दर कम हो रही कमी, जानें भारत समेत दूसरे देशों का क्या है हाल

नईदिल्ली चीन में पिछले कुछ सालों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते चीन में बच्चों के स्कूल माने जाने वाले कई किंडर गार्डन बंद कर दिए गए हैं. ये स्थिति सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि कई देशों के लिए चिंता का विषय है. जहां घटती जन्म को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कई प्रयास कर रही है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर भारत का जन्म दर के मामले में क्या हाल है. चीन में क्यों घट रही जन्म दर? चीन में दशकों तक चली एक-संतान नीति के कारण लोगों में एक बच्चे को जन्म देने की मानसिकता बन गई. जी हां, एक समय ऐसा था जब चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन गया था. जिसके चलते चीन ने दो बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी थी. ऐसे में अब लोग एक ही बच्चे को जन्म देते हैं और उसका पालन पोषण करते हैं. इसके अलावा शहरीकरण के कारण लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है. करियर और जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. वहीं महिलाएं अब शिक्षित और स्वतंत्र हैं. वो करियर बनाने और परिवार नियोजन के फैसले स्वयं ले रही हैं. साथ ही बच्चों की परवरिश में आने वाली लागत लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा चीन की आबादी भी तेजी से बूढ़ी हो रही है. चीन में गिरती जन्मदर के क्या हैं प्रभाव? अब सवाल ये उठता है कि चीन अपनी घटती जनसंख्या से परेशान क्यों हो रहा है? तो बता दें कि कम जन्मदर से श्रम शक्ति कम होगी, जो आर्थिक विकास को प्रभावित करेगी. इसके अलावा बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा. साथ ही कम युवाओं के कारण सैन्य शक्ति कमजोर हो सकती है. भारत में जन्म दर की क्या है स्थिति? भारत में भी पिछले समय के मुकाबले जन्म दर घटी है. अब हमारे देश में दंपत्ति एक या दो बच्चों को ही जन्म देने पर जोर दे रहे हैं. हालांकि चीन के मुकाबले भारत में ये समस्या फिलहाल कम है. वहीं कई ऐसे देश हैं जहां घटती जन्म दर एक बड़ी समस्या है. बता दें जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में भी जन्मदर में गिरावट देखी जा रही है. जिसके लिए सरकार को आगे आकर जन्म दर को बढ़ाने के प्रयास करने पड़ रहे हैं. जी हां, इन देशों में सरकार बच्चे पैदा करने के लिए तरह-तरह के ऑफर देकर लोगों को आकर्षित कर रही है.

शोध में पाया गया कि देश के 65 प्रतिशत हेल्थ प्रोफेशनल सुरक्षित तंबाकू विकल्पों के पक्ष में

नई दिल्ली देश में तंबाकू की बढ़ती महामारी के बीच 10 में से चार घर धूम्रपान की लत से परेशान हैं। शुक्रवार को आई एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 65 फीसदी पेशेवर जीवन बचाने के लिए तंबाकू के सुरक्षित और नए विकल्पों की मांग कर रहे हैं। साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग के सहयोग से डॉक्टर्स अगेंस्ट एडिक्शन (डीएएडी) सर्वेक्षण की रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का पता चला है, जिसमें 65 प्रतिशत डॉक्टर धूम्रपान की लत छुड़ाने के प्रयासों में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और हीट-नॉट-बर्न उत्पादों जैसे सुरक्षित विकल्पों को एकीकृत करने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इन विकल्पों की प्रभावकारिता पर और अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। यह रिपोर्ट तंबाकू की लत के खिलाफ भारत की चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो सालाना 9,30,000 से अधिक मौतों का कारण बनती है।धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के कारण हर दिन 2,500 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता और सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मोहसिन वली ने कहा, “तंबाकू की लत देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। इससे निपटने के लिए हमें तंबाकू छोड़ने के लिए वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के रूप में रोगियों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मार्गदर्शन करना जीवन बचाने और तंबाकू के विनाशकारी प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।” डीएएडी के मुख्य समन्वयक डॉ. मनीष शर्मा ने कहा, “भारत का तम्बाकू संकट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधानों की तत्काल वैधानिक सिफारिशें की जानी चाहिए।” सर्वेक्षण में 300 स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को शामिल किया गया जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक ने लत की गंभीरता और प्रेरणा की कमी का हवाला दिया और 60 प्रतिशत ने छोड़ने के लिए प्रमुख बाधाओं के रूप में लत छोड़ने के संसाधनों की कमी की ओर इशारा किया। इससे पता चला कि अपर्याप्त अनुवर्ती देखभाल और साक्ष्य-आधारित तरीकों के खराब कार्यान्वयन के कारण भारत में धूम्रपान बंद करने में बाधा आ रही है। केवल 7.4 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नियमित रूप से लत छोड़ने के लिए सलाह देते हैं और केवल 56.4 प्रतिशत फॉलोअप कंसल्टेशन की व्यवस्था करते हैं। ये आंकड़े महत्वपूर्ण कमी को इंगित करते हैं। नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पल्मोनरी मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पवन गुप्ता ने कहा, “तम्बाकू की लत से छुटकारा पाने के लिए बहुआयामी समाधानों की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के लिए सुरक्षित और नए वैकल्पिक उत्पादों का उदय हमारी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान करता है। धूम्रपान छोड़ने की इन रणनीतियों को एक जगह उपलब्ध कराकर और इसके बारे में तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म और संसाधनों के बारे में लोगों में जानकारी बढ़ाकर हम अपने उपचार के परिणामों में काफी सुधार कर सकते हैं।”

रूस ने शुरू कर दी न्यूक्लियर हमले की प्रैक्टिस, ऐक्शन से थर्राई दुनिया

मॉस्को बीते दो साल से भी ज्यादा वक्त से रूस-यूक्रेन मोर्चे पर हैं। रूस इस बात पर आमादा है कि वह यूक्रेन को तबाह करके ही मानेगा, वहीं यूक्रेन है कि रूस के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है। अब यह युद्ध सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर गया है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने परमाणु बलों को विशेष अभ्यास शुरू करने का आदेश दिया। यह दो हफ्तों में दूसरी बार है जब पुतिन ने ऐसा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली नाटो गठबंधन अब भी इस बढ़ते तनाव से निपटने के तरीकों को लेकर अनिश्चित हैं। तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें उपलब्ध कराने की योजना बनाई ताकि वह रूस के अंदर गहरे क्षेत्र तक निशाना बना सके। रूस ने पश्चिम को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन ने पश्चिमी समर्थन के साथ इस तरह का कदम उठाया, तो वह अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगा। क्रेमलिन ने अपनी परमाणु नीति को अपडेट किया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पुतिन की स्वीकृति से यह नीति गैर-परमाणु देशों के खिलाफ भी लागू हो सकती है। परमाणु अभ्यास की शुरुआत करते हुए पुतिन ने कहा, “हम परमाणु हथियारों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की कार्रवाई का अभ्यास करेंगे और इसके अंतर्गत बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का जरूरी इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग अत्यंत असाधारण स्थिति में ही किया जाएगा, लेकिन इन्हें हमेशा तत्परता में रखना आवश्यक है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया, “हम एक नई हथियार दौड़ में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन हम अपनी परमाणु ताकत को उचित स्तर पर बनाए रखेंगे।” नाटो ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उत्तर कोरिया द्वारा रूस को यूक्रेन में लड़ने के लिए सैनिक भेजने का मुद्दा शामिल है। पेंटागन ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 10,000 सैनिक भेजे हैं, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का दावा है कि यह संख्या 12,000 से अधिक हो सकती है। पेंटागन की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी सबरीना सिंह ने कहा, “हमें विश्वास है कि डीपीआरके ने कुल मिलाकर लगभग 10,000 सैनिक रूस के पूर्वी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए भेजे हैं। इनमें से कुछ सैनिक यूक्रेन के करीब पहुंच गए हैं और हमें चिंता है कि रूस इन सैनिकों का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा।” पुतिन ने अपने देश की रक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल रूस का आंतरिक मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होने का निर्णय लेता है, तो रूस भी अपनी सुरक्षा को लेकर जो जरूरी होगा, वह करेगा। रूसी सेना ने अपने हालिया अभ्यास के दौरान टीवर क्षेत्र में भी प्रशिक्षण किया, जो मास्को के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस अभ्यास में यार्स इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया, जो अमेरिका के हर कोने तक प्रहार करने में सक्षम हैं। रूस और अमेरिका दुनिया के कुल परमाणु हथियारों के 88% का नियंत्रण रखते हैं। पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहले भी यह चेतावनी दी थी कि यदि रूस और नाटो में सीधा टकराव हुआ, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने भी परमाणु युद्ध के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है। पुतिन ने कहा, “बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और नए बाहरी खतरों के बीच, हमारे पास तैयार और आधुनिक रणनीतिक बलों का होना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने बताया कि रूस नए स्थिर और मोबाइल-आधारित मिसाइल सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिनमें प्रक्षेपण की तैयारी का समय कम है और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकते हैं। वहीं पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि अगर उत्तर कोरिया रूस का समर्थन करने के लिए सैनिक भेजता है, तो अमेरिका यूक्रेन के हथियारों के उपयोग पर कोई नई सीमाएं नहीं लगाएगा।

पराली जलाने पर SC सख्त, पराली जलाने पर CQM से मांगा जवाब

लुधियाना बीते 24 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने के मुद्दे पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से जवाब तलब किया कि पराली जलाना फिर से क्यों शुरू हो गया? सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि ‘सीएक्यूएम एक्ट की धारा-14 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाया गया है।’ अदालत ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की है। दरअसल, सीएक्यूएम की धारा के तहत पराली जलाने पर अधिकारियों, कर्मचारियों को सजा का भी प्रावधान है। सवाल है कि क्या अकारण सर्वोच्च न्यायालय को पराली जलाने पर एक जिम्मेदार संस्थान को फटकार लगानी पड़ी! पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए क्या सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद पराली प्रबंधन विफल हो चुका है? क्या कृषक जन-मन अब भी पूरी तरह से पराली प्रबंधन पर पुरानी परिपाटी से चल रहा है? जाहिर है, कुछ न कुछ कुप्रबंधित जरूर है। सितंबर माह के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पराली जलाने के कुल 75 मामले उजागर हो चुके हैं। हैरत की बात है कि 15-25 सितंबर के बीच पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं पांच से ग्यारह फीसद तक बढ़ी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इसी अवधि में जहां हरियाणा में पराली जलाने के तेरह मामले पाए गए थे, इस बार बढ़ कर 70 हो गए। इसी तरह पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए। हरियाणा में करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर सर्वाधिक प्रभावित जनपद हैं। वहां कुल 70 मामलों में 31 मामले पाए गए। इसी तरह पंजाब के कुल 93 मामलों में से 58 मामले तरनातरन, गुरुदासपुर और अमृतसर में पाए गए। अनवरत पराली दहन से बिगड़ती आबोहवा का खमियाजा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को भुगतना पड़ता है। सर्दियों के शुरुआती दौर में ही दम घुटने-सा लगता है। अभी बीते 24 सितंबर तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 तक दर्ज किया गया। ऐसे हालात में सुप्रीम की फटकार स्वाभाविक है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष निगाह रखी जाती है ऐसा नहीं कि सरकार ने विगत वर्षों में पराली दहन को लेकर कुछ नहीं किया। पर शासन, प्रशासन, सरकारी संस्थाओं और पराली जलाने वाले किसानों के बीच संबंध में जरूर कुछ कमी रह जाती है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के हवाले से केंद्र सरकार ने सूबे की सरकारों को पराली जलाने के दोषी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ न देने का सख्त निर्देश दिया है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष 15 सितंबर तक ‘कंसोर्टियम फार रिसर्च आन एग्रो इकोसिस्टम मानिटरिंग ऐंड माडलिंग फ्राम स्पेस’ (क्रीम्स) द्वारा सेटेलाइट से निगाह रखी जाती है। इससे ‘गूगल लोकेशन’ के साथ पराली जलाने का पता लग जाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पराली जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए ढाई हजार रुपए, दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपए और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंद्रह हजार रुपए तक अर्थदंड का प्रावधान किया है। दुबारा पराली जलाने पर संबंधित किसान के खिलाफ कारावास और अर्थदंड का भी प्रावधान है। इसी तरह धान काटने के यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर में ‘स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम’ (एसएमएस) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना एसएमएस वाले कंबाइन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। विगत वर्षों में विभिन्न सूबों में हजारों किसानों के विरुद्ध पराली जलाने पर एफआइआर भी दर्ज कराई गई है। पराली जलाने से मृदा में मौजूद अनेक लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक एक टन पराली जलने से मृदा में मौजूद 5.5 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो ग्राम फास्फोरस, 25 किलो ग्राम पोटैशियम, 1.2 किलो ग्राम सल्फर समेत अन्य उपयोगी पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की रपट के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में पराली जलाने के कारण तकरीबन दो लाख करोड़ रुपए की आर्थिक हानि होती है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक दिल्ली में पराली प्रदूषण की वजह से ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन’ (एआरआइ) ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा होता है। प्रदूषण का स्तर उच्च होने के कारण दिल्ली वासियों की जीवन प्रत्याशा में लगभग साढ़े छह साल की कमी आई है। पराली जलने से कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, मीथेन, पाली सायक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इन प्रदूषकों के प्रसार से ‘स्माग’ का एक मोटा आवरण निर्मित होता है, जिससे ब्रोंकाइटिस, तंत्रिका और हृदय संबंधी, यहां तक कि कैंसर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या का समाधान केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को जागरूक बनाना होगा। किसान कम अवधि वाली धान की प्रजातियां लगाएं, जिससे पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, और अगली फसल के लिए पराली विघटन को पर्याप्त समय मिल जाए। पिछले वर्ष हरियाणा सरकार ने धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया था, जिससे 30 सितंबर तक वहां की मंडियों में आठ लाख टन धान बिकने आया था। इससे इतर, धान की कम अवधि वाली प्रजातियों, जैसे पीआर-126, पीबी 1509 आदि बोने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। ‘हैप्पी सीडर’ का प्रयोग किया जाए, जिसमें पराली का बंडल बनकर ऊपर आ जाता है, गेहूं की बुवाई हो जाती है और पराली का बंडल पलवार के रूप में खेत पर बिछ जाता है। इसके अलावा ‘पैलेटाइजेशन’ को अपनाया जा सकता है। इसमें पुआल को सुखाकर गुटिका के रूप में बदल दिया जाता है, उसे कोयले के साथ मिलाकर थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों में ईंधन की तरह प्रयोग करते हैं। इससे एक ओर जहां कोयले की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में कटौती होती है। ‘गौठान’ छत्तीसगढ़ का एक नवीन प्रयोग है। इसमें पांच एकड़ सरकारी भूमि में दान की गई पराली एकत्र कर गाय के गोबर और प्राकृतिक एंजाइम मिला कर जैविक खाद बनाई जाती है। पराली को ‘कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट’ (सीबीजीपी) में भेज दिया जाए तो ईंधन तैयार हो जाता है। दिल्ली के … Read more

कमला हैरिस ही बनेंगी अमेरिका की राष्ट्रपति? क्या सच साबित होगी एलन लिक्टमैन की भविष्यवाणी

वाशिंगटन अमेरिकी इतिहास में चुनावी परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार एलन लिक्टमैन ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जो चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है, सवाल यही है कि कया वह सच साबित होगी। दरअसल लिक्टमैन का कहना है कि इस बार राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस विजेता बनकर उभरेंगी। उनके अनुसार, भले ही डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता मजबूत हो, लेकिन कई प्रमुख कारक हैरिस के पक्ष में हैं। 1981 में लिक्टमैन और गणितज्ञ व्लादिमीर केलिस-बोरोक द्वारा विकसित द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली के आधार पर की गई यह भविष्यवाणी अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। लिक्टमैन की द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली में 13 प्रमुख बिंदुओं के आधार पर विश्लेषण किया जाता है जो यह निर्धारित करते हैं कि कौन सी पार्टी चुनाव जीतने की स्थिति में है। इनमें कांग्रेस में पार्टी की स्थिति, अर्थव्यवस्था, घोटाले, सामाजिक अस्थिरता, और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि जैसी बातें शामिल हैं। लिक्टमैन के अनुसार, इस बार के चुनाव में आठ प्रमुख कारक हैरिस के पक्ष में हैं। इस पद्धति ने 1984 से अब तक के दस में से नौ चुनाव परिणामों को सटीकता से भविष्यवाणी की है। हालांकि, इस बार राजनीतिक माहौल असामान्य रूप से चुनौतीपूर्ण है, खासकर जब देश में विभाजन और तनाव बढ़ा हुआ है। कमला हैरिस के पक्ष में अनुकूल कारक लिक्टमैन की भविष्यवाणी में आठ कारक ऐसे हैं, जो कमला हैरिस के पक्ष में माने जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं- अर्थव्यवस्था की स्थिति – लिक्टमैन के अनुसार, आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता है, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी को बढ़त मिल सकती है। सत्ता दल की लोकप्रियता – मौजूदा सरकार को लेकर जनता में सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है। समर्थन में बढ़ोतरी – हैरिस के पक्ष में युवा और महिला मतदाताओं का समर्थन बढ़ रहा है, जिससे उनकी संभावनाएं मजबूत होती हैं। ट्रंप की प्रतिमा – डोनाल्ड ट्रंप की विवादित छवि और उनके कार्यकाल के कुछ फैसले भी हैरिस के पक्ष में जा सकते हैं। लिक्टमैन को आलोचना और धमकियों का करना पड़ रहा सामना भविष्यवाणी के बाद लिक्टमैन को अश्लील और धमकी भरे संदेश प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें पहले से कहीं अधिक शत्रुता और आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि 2024 का चुनाव असामान्य रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि समाज में ध्रुवीकरण और राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। विदेश नीति का चुनावी प्रभाव लिक्टमैन ने कहा कि गाजा संघर्ष जैसे मुद्दों पर बाइडेन प्रशासन की भूमिका इस चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन सकती है। यदि इस मामले पर अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव आता है, तो यह चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद, लिक्टमैन का मानना है कि यह बदलाव ट्रंप की सत्ता में वापसी के लिए पर्याप्त नहीं होगा। क्या कहती है राजनीतिक विशेषज्ञों की राय? लिक्टमैन की भविष्यवाणी पर राजनीतिक विश्लेषकों ने भी अपनी राय दी है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि कमला हैरिस का अमेरिकी राजनीति में प्रभाव बढ़ा है और उनके पक्ष में कई महत्वपूर्ण कारक हैं। लेकिन ट्रंप समर्थक विशेषज्ञ इस भविष्यवाणी से असहमत हैं और कहते हैं कि इस चुनाव में ट्रंप की वापसी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। क्या होगा 2024 का ऐतिहासिक चुनाव परिणाम? यदि लिक्टमैन की यह भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो कमला हैरिस अमेरिका की पहली अश्वेत महिला राष्ट्रपति बनेंगी, जिससे अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आएगा। एलन लिक्टमैन की द कीज टू द व्हाइट हाउस प्रणाली अब तक ज्यादातर सटीक रही है, जिससे उनकी भविष्यवाणी पर लोगों का ध्यान स्वाभाविक है। क्या 2024 का यह चुनाव इस भविष्यवाणी को साकार करेगा और कमला हैरिस को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में स्थापित करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या लिक्टमैन की भविष्यवाणी एक बार फिर सही साबित होती है और अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आता है।    

नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं

महेंद्रगढ़ नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू की गई दो परियोजनाएं क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। विभाग की ओर से 50 वर्ष से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही 30 किलोमीटर क्षेत्र में फैली दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 120 क्यूसिक नहरी पानी छोड़ने की परियोजना तैयार कर ली है। विभाग की ओर से इन दो परियोजनाओं पर कुल 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दौहान नदी क्षेत्र में पानी पहुंचने से 20 से अधिक गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह दो परियोजनाएं होंगी क्षेत्र के लोगों सिंचाई विभाग की ओर से जवाहरलाल नेहरू नहर (जेएलएन) के एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली भूमिगत पाइप लाइन दबाकर गांव माजरा दौहान क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। जुलाई माह में इस परियोजना पर काम शुरू किया गया था जो युद्ध स्तर पर जारी है। 1600 एमएम परिधि वाले सीमेंटेड पाइप की 5.2 किलोमीटर लंबी लाइन से 60 क्यूसिक पानी दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा सकेगा। सिंचाई विभाग इस परियोजना पर 13 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस समय युद्ध स्तर पर इस परियोजना पर काम चल रहा है तथा अंतिम चरण में है। वहीं दूसरी परियोजना के तहत जेएलएन के एमसी-5 व एनबी-1 पंप हाउसों के बीच से गांव भगड़ाना तक कुल 4.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन दबाकर भगड़ाना गांव के दौहान नदी क्षेत्र में 60 क्यूसिक पानी पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना पर सिंचाई विभाग कुल 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस परियोजना के लिए विभाग की ओर से सभी प्रक्रिया पूरी कर एजेंसी को टेंडर अलॉट किया जा चुका है तथा नवंबर माह तक इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार 30 किलोमीटर लंबाई तक फैले दौहान नदी क्षेत्र से गांव डेरोली जाट, देवास, कुकसी, नांगल सिरोही, कौथल कलां, कौथल खुर्द, नानगवास, खातीवास, बेरी, भांडोर ऊंची, जासावास, देवनगर, चितलांग, डुलाना, माजरा खुर्द, माजरा कलां, सिसोठ, भगड़ाना, लावन, झूक, मालड़ा सराय, मालड़ा बास, पाली, जाट, भुरजट, बसई तक 20 से अधिक गांवों के भूजल स्तर में 120 क्यूसिक नहरी पानी रिचार्ज का काम करेगा। डार्क जोन में शामिल महेंद्रगढ़ क्षेत्र के इन गांवों के लिए यह दोनों परियोजनाएं किसी वरदान से कम नहीं हैं। साथ ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही दौहान नदी को भी नया जीवन मिल सकेगा। इस समय जेएलएन को मिलने वाला अतिरिक्त पानी देवास गांव से गुजरने वाले दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। जिले के लिए जीवन रेखा कही जाने वाली जेएलएन कैनाल से पानी ओवरफ्लो होकर हर साल किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थी लेकिन अब इस पानी से क्षेत्र का भूजल स्तर सुधरेगा। – कंवर सिंह यादव, विधायक महेंद्रगढ़। सिंचाई विभाग की ओर से दोनों परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली परियोजना का काम अंतिम चरण में चल रहा है। नवंबर माह तक यह परियोजना पूरी हो जाएगी। इसके शीघ्र बाद ही नवंबर माह में ही भगड़ाना दौहान क्षेत्र में पानी छोड़ने के लिए 4.5 किलोमीटर लंबी 1600 एमएम परिधि की पाइप लाइन दबाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। – दीपक कुमार, कनिष्ठ अभियंता नहर एवं सिंचाई विभाग महेंद्रगढ़

अब घर बैठे भी जीवन प्रमाण बनवा सकते हैं Digital Life Certificate, जाने क्या है तरीका

नई दिल्ली देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन या किसी अन्य सरकारी संगठन के करोड़ों पेंशनर्स हैं। इन पेंशनर्स के लिए अक्टूबर और नवंबर का महीना काफी महत्वपूर्ण होता है। इन दिनों में उन्हें अपने बैंक में जा कर जीवित होने का प्रमाण जमा करना होता है। हालांकि अब सरकार ने कुछ ऐसी व्यवस्था कर दी है कि पेंशनर्स घर बैठे भी जीवन प्रमाण पत्र डिजिटल तरीके से बनवा और जमा कर सकते हैं। हम बता रहे हैं इसका तरीका।     क्या है डिजिटल जीवन प्रमाण?     डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (जीवन प्रमाण पत्र) पेंशनभोगियों के लिए बायोमेट्रिक-सक्षम डिजिटल सेवा है। केंद्र या राज्य सरकार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन या किसी अन्य सरकारी संगठन के पेंशनभोगी जिनकी पेंशन वितरण एजेंसी डीएलसी के लिए सक्रिय है, वे इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।     कौन जारी कर रहा है?     इस समय इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक India Post Payments Bank (IPPB) डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जारी कर रहा है। इसके लिए बैंक ने भारत सरकार के नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर या एनआईसी से हाथ मिलाया है। दरअसल, DLC एनआईसी के अप्लिकेशन पर जारी किया जा रहा है।     कैसे बनवाएं डिजिटल जीवन प्रमाण ?     यदि पेंशनर के पास वक्त हो या वे सक्षम हों तो किसी भी डाकघर में पहुंचें। ऐसा नहीं कर सकते हैं तो अपने पोस्टमैन/ग्रामीण डाक सेवक के माध्यम से दरवाजे पर इन सेवाओं का लाभ उठाएं। डाक सेवक को अपने पेंशन खाते से संबंधित बेसिक जानकारी प्रदान करें, वह आपका डिजिटल जीवन प्रमाण जनरेट करने में मदद करेगा।     डीएलसी जारी करने के लिए कौन से कागजात हैं जरूरी?     यदि आपको डिजिटल जीवन प्रमाण चाहिए तो आपके पास पेंशन भुगतान आदेश या पेंशन पेमेंट आर्डर की मूल कॉपी होनी चाहिए। साथ ही बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर, आधार संख्या भी होना चाहिए।     डीएलसी बनवाने के लिए क्या जानकारी देनी होगी?     पेंशनभोगी को आधार नंबर, नाम, मोबाइल नंबर और स्व-घोषित पेंशन संबंधी जानकारी जैसे पीपीओ नंबर, पेंशन खाता संख्या, बैंक विवरण, पीएसए, पीडीए का नाम आदि देना होगा। पेंशनभोगी को अपनी बायोमेट्रिक्स, या तो आईरिस या फिंगरप्रिंट भी देना होगा। वर्तमान में, केवल फिंगरप्रिंट विकल्प आईपीपीबी के माध्यम से लाइव है।     क्या कोई शुल्क भी देना होगा?     घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आपको महज 70 रुपये का छोटा सा शुल्क चुकाना होगा। इसमें सर्विस टैक्स भी शामिल है।     डीएलसी बन जाने के बाद इसे बैंक या डाकघर जा कर जमा करना होगा‌?     अक्सर पेंशनभोगी सवाल करते हैं कि डीएलसी बनवाने के बाद अपने बैंक/डाकघर आदि में जीवन प्रमाण पत्र या डीएलसी जमा करने की आवश्यकता है? इसका उत्तर है नहीं। पेंशनभोगी को बैंक/डाकघर/पीडीए में डीएलसी जमा करने की आवश्यकता नहीं है। डीएलसी स्वचालित रूप से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से मिल जाएगा।

विवेक रामास्वामी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया स्वरूप सड़क पर कचरा उठाया, दिखाई एकजुटता

न्यूयॉर्क फार्मास्युटिकल उद्योगपति और रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया स्वरूप सड़क पर कचरा उठाया। बाइडेन ने अपने बयान में ट्रंप समर्थकों को “कचरा” कहा था, जिसे लेकर रामास्वामी ने विरोध जताया। उन्होंने उत्तरी कैरोलिना के शार्लोट में एक ट्रंप अभियान कार्यक्रम से पहले कचरा ट्रक के कर्मचारियों के साथ मिलकर सड़कों की सफाई की। रामास्वामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर साझा की जिसमें उन्होंने लिखा, “हम कचरा नहीं हैं, हम वो देशभक्त हैं जो अमेरिकी सपने को फिर से संवार रहे हैं।” उन्होंने कचरा कलेक्टर की जैकेट पहनी और कचरा ट्रक कर्मचारियों से काम के बारे में सीखा। रामास्वामी, जो राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार थे और अब ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं, ने बाइडेन की टिप्पणी की तुलना 2016 में हिलेरी क्लिंटन की टिप्पणी से की, जिसमें उन्होंने ट्रंप समर्थकों को “असभ्य” कहा था। यह टिप्पणी डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ कामकाजी वर्ग के गुस्से का कारण बनी थी। उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसी भी मतदाता को निशाना बनाए जाने के विचार से असहमत हैं।

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