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खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से ट्रूडो का भारत से पंगा कनाडा की अर्थव्यवस्था पड़ेगा भारी !

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच  कूटनीतिक विवाद का असर  अब आर्थिक मोर्चे पर भी असर डालने लगा है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से शुरू हुए इस विवाद के चलते उन कनाडाई कंपनियों और फंड्स की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्होंने भारतीय कंपनियों में भारी निवेश किया है। खासकर कनाडाई पेंशन फंड (CPPIB) ने भारत के बैंकिंग से लेकर टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़ा इन्वेस्टमेंट किया हुआ है। जानकारी के अनुसार  भारत और कनाडा के बीच करीब 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक व्यापार होता है (वित्त वर्ष 2023-24), जिसमें ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स, पेपर और मिनरल्स जैसी वस्तुओं का लेन-देन शामिल है। इस विवाद से 600 से अधिक कनाडाई कंपनियां जो भारत में व्यापार कर रही हैं, और 30+ भारतीय कंपनियां जो कनाडा में मौजूद हैं, सीधे प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार में शामिल कई कंपनियां भी इस तनाव का शिकार हो सकती हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8.3 अरब डॉलर का था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.4 अरब डॉलर हो गया। इसमें भारत का कनाडा से आयात 4.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जबकि निर्यात 3.8 अरब डॉलर पर आ गया है। कनाडाई पेंशन फंड का भारत में निवेश कनाडाई पेंशन फंड CPPIB (Canada Pension Plan Investment Board) ने भारत की कई बड़ी कंपनियों में निवेश कर रखा है। इसमें कोटक महिंद्रा बैंक (6141.6 करोड़ रुपये), जोमैटो (2778.1 करोड़ रुपये) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जोमैटो में CPPIB की हिस्सेदारी करीब 1.15% है। इसके अलावा Delhivery, FSN E-Commerce Ventures (Nykaa), और Paytm जैसी कंपनियों में भी भारी निवेश किया गया है। अन्य प्रमुख सेक्टर्स में निवेश कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ी पूंजी लगाई है। रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज में भी फंड का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। 2013 से 2023 तक, कनाडाई फंड्स ने भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में लगभग 3.8 अरब कैनेडियन डॉलर और फाइनेंशियल सर्विसेज में 3 अरब कैनेडियन डॉलर का निवेश किया। इसी प्रकार, इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्टेशन में 2.6 अरब कैनेडियन डॉलर का निवेश किया गया है। कंपनियों पर क्या होगा असर? कनाडाई फंड्स फिलहाल भारत में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए के मूल्य की घरेलू इक्विटी के मालिक हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में आई खटास के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि कनाडाई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कोई बड़ा बदलाव करेंगे या नहीं। बीते एक साल में, CPPIB ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी कुछ हद तक कम की है, लेकिन अब तक वे भारत से पूरी तरह से बाहर निकलने की जल्दी में नहीं दिख रहे। भारतीय कंपनियों का भी कनाडा में महत्वपूर्ण निवेश लगभग 600 कनाडाई कंपनियां भारत में अपने व्यवसाय चला रही हैं। इनमें मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल एस्टेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ ही, 30 से अधिक भारतीय कंपनियों का भी कनाडा में महत्वपूर्ण निवेश है, जिसका कुल मूल्य करीब 40,446 करोड़ रुपए है। इन कंपनियों के माध्यम से कनाडा में लगभग 17,000 लोगों को रोजगार मिला है। भारत से कनाडा को मुख्य रूप से रत्न, ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, रेडीमेड गार्मेंट्स और मेकैनिकल अप्लायंसेस का निर्यात किया जाता है। वहीं, कनाडा से भारत कागज, लकड़ी का गूदा, पोटाश, आयरन स्क्रैप, कॉपर और इंडस्ट्रियल केमिकल्स का आयात करता है।

याह्या सिनवार की मौत से भी संघर्ष रुकता नहीं दिख रहा, मोहम्मद सिनवार अब गाजा में हमास पर करेंगा कंट्रोल

तेल अवीव  इजरायल ने हमास के चीफ याह्या सिनवार को मार दिया है। 7 अक्तूबर 2023 के हमले का यह मास्टरमाइंड था। ‘गाजा का लादेन’ के नाम से मशहूर इजरायल का यह सबसे बड़ा दुश्मन था। इजरायल इसे मारने के लिए लंबे समय से खोज रहा था। लेकिन इजरायल की मुश्किलें अभी भी कम नहीं होने वाली हैं। एक एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि याह्या सिनवार का भाई हमास का नेतृत्व संभाल सकता है। अगर ऐसा होता है तो वह याह्या से भी ज्यादा आतंक ला सकता है। याह्या सिनवार को बुधवार को इजरायल ने मार डाला था। अब पूरा फोकस इसके भाई मोहम्मद सिनवार पर है। मोहम्मद सिनवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन संभावित रूप से खतरनाक है। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक मोहम्मद सिनवार अगर पावर में आता है तो वह एक बड़े खतरे को भी साथ लाएगा। अपने भाई के समर्थन से मोहम्मद सिनवार गाजा में हमास का दूसरे नंबर का कमांडर बन गया। मोहम्मद याह्या का खास था। वह उन कुछ लोगों में था, जो जानते थे कि हमास का चीफ कहां छिपा है। भाई की ले सकता है जगह अपने पारिवारिक संबंधों के कारण उसे हमास के अंदर किसी भी विश्वासघात के संदेह का सामना नहीं करना पड़ा। इसी कारण उसे हमास के टॉप पर पहुंचने में आसानी हुई। पूर्व वरिष्ठ इजरायली सैन्य अधिकारी और फिलिस्तीनी मामलों के एक्सपर्ट ग्रिशा याकूबोविच ने बताया कि मोहम्मद सिनवार को ताकत मिलना किस तरह खतरनाक हो सकता है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद सिनवार अपने भाई जितना ही कट्टरपंथी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वही हमास के चीफ-ऑफ-स्टाफ का पद संभालेगा। दोनों भाइयों ने हमास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। क्या है मोहम्मद सिनवार से खतरा याकूबोविच ने कहा कि मोहम्मद सिनवार का नेतृत्व इजरायल के साथ और भी अधिक हिंसक टकराव शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि याह्या अपनी गतिविधियों के कारण सुर्खियों में बना रहा। वहीं 49 साल का मोहम्मद एकदम सीक्रेट तरीके से अपना काम करता है। इसके बावजूद उसका हमास पर प्रभाव है। इजरायल को इस बात की चिंता है कि मोहम्मद का नेतृत्व स्थिति को गंभीर बना सकता है। मोहम्मद को याह्या की तुलना में पहुत कम व्यावहारिक बताया जाता है। वह ज्यादा हिंसा करता है और समझौता न करने वाली रणनीति से लड़ता है। इसके लिए वह नागरिकों को भी जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटेगा। कौन है मोहम्मद सिनवार? मोहम्मद सिनवार का जन्म खान यूनिस में हुआ था। कम उम्र में ही वह हमास में शामिल हो गया। इजरायल की जेल में 9 महीने और फिलिस्तीनी प्राधिकरण की कैद में वह तीन साल रहा। सन 2000 में वह जेल से भागने में कामयाब रहा। पहली बार मोहम्मद सिनवार की भागीदारी 2005 में सामने आई। तब हमास ने 2005 में IDF बलों के खिलाफ हमला करने वाले अपने सात कमांडरों की पहचान जारी की। सिनवार का नाम भी 7 में से था। तीन बार इजरायल इसे मारने की कोशिश कर चुका है। एक बार स्नाइपर, एक बार एयर स्ट्राइक और एक बार उसकी दीवार में लगे बम से मारने की कोशिश की गई, जिसे उसने खोज लिया था।

साइबर सेल में शिकायत कर ब्लैकमेलर को आप दिला सकते हैं सजा

नई दिल्ली  सोशल मीडिया के इस दौर में अपनी जानकारी बचा के रख पाना काफी मुश्किल काम हो जाता है. लोग न चाहते हुए भी कई बार इस तरह की गलतियों कर देते हैं. जो उनके लिए काफी मुश्किल खड़ी कर देती है. कई बार लोग अपनी इस प्राइवेट तस्वीर खींच कर अपने फोन में रख लेते हैं. या फिर किसी को भेज देते हैं. लेकिन फिर कई बार लोगों की प्राइवेच तस्वीरों का गलत इस्तेमाल हो जाता है. कई लोग ऐसे में प्राइवेट तस्वीर दिखाकर लोगों से पैसे मांगते हैं. उन्हें ब्लैकमेल करते हैं. ऐसे में बहुत से लोग अपनी इज्जत बचाने के लिए ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाते है. लेकिन आपको इस तरह की सिचुएशन में घबराना नहीं चाहिए और न ही खुद को ब्लैकमेल होने देना चाहिए. आप ब्लैकमेलर की शिकायत कर सकते हैं.  उसे कानून के हाथों सजा दिलवा सकते हैं. साइबर सेल में कर सकते हैं शिकायत अगर कोई आपके प्राइवेट फोटो इस्तेमाल करके आपको ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है. तो ऐसी स्थिति में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आपको सबसे पहले तुरंत साइबर सेल में ब्लैकमेलिंग के बारे में शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए आप चाहें तो ऑनलाइन  https://cybercrime.gov.in/  पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. या फिर आप चाहें तो ऑफलाइन साइबर सेल की ऑफिस जाकर के भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. वहां जाकर आपको घटना की पूरी जानकारी देनी होती है. जिसमें काॅल डिटेल्स, मैसेज, और भी जो चीजें ब्लैकमेलर को ट्रेस करने में सहायक हो सकें. पुलिस करेगी कार्रवाई भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 384 के तहत ब्लैकमेलिंग एक सीरियस ऑफेंस है. यानी अगर कोई आपको प्राइवेट फोटो का डर दिखाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है. ऐसे में आप साइबर सेल में शिकायत करते हैं. तो फिर पुलिस अपराधी को ट्रेस करने की कोशिश करती है. और फिर उस पर कार्रवाई करती है. इस मामले में IPC की धारा 384 के तहत 3 साल तक की सजा हो सकती है. वहीं इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 503 के तगत भी इसके अलावा धारा 503 के तहत 2 साल तक की सजा हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता के हित में बड़ा और सार्थक कदम उठाया, कोर्ट की सुनवाई को लाइव देख सकेगें

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता के हित में बड़ा और सार्थक कदम उठाया है। अब कोई भी आम आदमी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लाइव देख सकेगा। इसके लिए तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। अब से, आप सभी अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर देख पाएंगे। इससे पहले तक, सुप्रीम कोर्ट सिर्फ संविधान पीठ और राष्ट्रीय महत्व के अन्य मामलों की सुनवाई को ही यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम करता था। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में स्वप्निल त्रिपाठी मामले में अपने फैसले में महत्वपूर्ण मामलों में कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का समर्थन किया था।  इसके बाद, देश के कोने-कोने के नागरिकों को शीर्ष अदालत की कार्यवाही देखने का मौका मिले, इसलिए पूरे न्यायालय ने संविधान पीठों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने का फैसला किया। इसके अलावा, महत्वपूर्ण सुनवाई का लाइव ट्रांसक्रिप्शन तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग तकनीक का भी उपयोग किया जाता है। हाल ही में, नीट-यूजी मामले और आरजीकर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लोगों ने काफ़ी संख्या में ऑनलाइन देखा। पिछले साल अगस्त में, संविधान के अनुच्छेद 370 पर संविधान पीठ की सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश डी।वाई। चंद्रचूड़ ने कहा था कि शीर्ष अदालत देश भर की सभी निचली अदालतों में वर्चुअल सुनवाई को सक्षम बनाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए अपना खुद का क्लाउड सॉफ्टवेयर स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा था कि ईकोर्ट्स (प्रोजेक्ट) के तीसरे चरण में, हमारे पास एक बड़ा बजट है, इसलिए हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए अपना खुद का क्लाउड सॉफ्टवेयर स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। मुख्य न्यायाधीश ने बताया था कि महामारी के दौरान, भारत भर की अदालतों ने वर्चुअल माध्यम से 43 मिलियन सुनवाई कीं। औपनिवेशिक छाप और पारंपरिक विशेषताओं को त्यागते हुए एक अन्य पहल में, सीजेआई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के जजों के पुस्तकालय में लेडी जस्टिस की मूर्ति अब एक तलवार के बजाय भारतीय संविधान की एक प्रति रखी है, और उसकी आंखों से पट्टी हटा दी गई है। परंपरागत रूप से, आंखों पर बंधी पट्टी कानून के समक्ष समानता का सुझाव देती थी, जिसका अर्थ है कि न्याय का वितरण पक्षकारों की स्थिति, धन या शक्ति से प्रभावित नहीं होना चाहिए। तलवार ऐतिहासिक रूप से अधिकार और अन्याय को दंडित करने की क्षमता का प्रतीक थी। हालांकि, लेडी जस्टिस के दाहिने हाथ में न्याय के तराजू को बरकरार रखा गया है, जो सामाजिक संतुलन और फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों के तथ्यों और तर्कों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के महत्व का प्रतीक है।  

साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, हर तीन मिनट में एक जान गई

नई दिल्ली साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यानी हर दिन औसतन 474 और हर तीन मिनट में एक जान गई। ये आंकड़े राज्यों ने केंद्र सरकार को दिए हैं। जब से केंद्र सरकार ने सड़क हादसों के कारणों और उनकी गंभीरता को समझने के लिए आंकड़े जमा करने शुरू किए हैं, तब से लेकर अब तक सबसे ज्यादा मौतें इसी साल हुई हैं। डरा रहे हैं ये आंकड़े पिछले साल सड़क हादसों में करीब 4.63 लाख लोग घायल हुए थे। यह 2022 के मुकाबले 4% ज्यादा है। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क हादसों में घायल होने वालों की संख्या बढ़ रही है। साल 2022 में सड़क हादसों में 1.68 लाख लोगों की मौत हुई थी। यह जानकारी सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में दी गई थी। वहीं एनसीआरबी के मुताबिक 2022 में सड़क हादसों में 1.71 लाख लोगों की जान गई थी। इन दोनों ही एजेंसियों ने अभी 2023 के लिए अपने आंकड़े जारी नहीं किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम और तेलंगाना समेत कम से कम 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 के मुकाबले 2023 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। हालांकि आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, केरल और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में मामूली गिरावट आई है। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा यूपी में मौतें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। यहां पिछले साल सड़क हादसों में 23,652 लोगों की जान गई। इसके बाद तमिलनाडु में 18,347, महाराष्ट्र में 15,366, मध्य प्रदेश में 13,798 और कर्नाटक में 12,321 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। हालांकि सड़क हादसों में घायल होने वालों की लिस्ट में तमिलनाडु सबसे ऊपर है। यहां 72,292 लोग सड़क हादसों में घायल हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 55,769 और केरल में 54,320 लोग सड़क हादसों का शिकार हुए। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल मरने वाले करीब 44% लोग (करीब 76,000) दोपहिया वाहन सवार थे। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल मरने वाले करीब 70 फीसदी दोपहिया सवारों ने हेलमेट नहीं पहना था। सड़क सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें दोपहिया सवारों की मौतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं। शहरों और गांवों में ज्यादातर लोग आने-जाने के लिए दोपहिया वाहनों का ही इस्तेमाल करते हैं।

बिश्नोई समाज में हिन्दूओं कि तरह अग्नि दाग नहीं होता, मृतक के शव को जमीन में कच्ची कब्र खोदकर मिट्टी डालकर दफनाया

जयपुर  काला हिरण , सलमान खान , बाबा सिद्दीकी,  लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज पिछले कुछ दिन से इन कुछ शब्दों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है ।‌बिश्नोई समाज से जुड़ा हुआ लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान को मारने की धमकी दे चुका है और बाबा सिद्दीकी के मर्डर का जिम्मा ले चुका है । कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं , कई अभी भी फरार हैं।  दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में हड़कंप मचा हुआ है । राजस्थान से भी बिश्नोई समाज के बड़े नेता लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं । बिश्नोई समाज का ना शमशान घाट ना  कब्रिस्तान और ना ही मोक्ष धाम हम सभी जानते हैं बिश्नोई समाज पेड़ , पौधे और जीव जंतुओं के  संरक्षण के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है, लेकिन समाज से जुड़े कुछ ऐसे नियम है जो बिल्कुल अलग और हैरान करने वाले हैं । उनमें सबसे ज्यादा अलग प्रथम अंतिम संस्कार की है।  बिश्नोई समाज के पास खुद के शमशान घाट,  कब्रिस्तान या मोक्ष धाम नहीं है , फिर वे लोग कैसे अंतिम संस्कार करते हैं । 29 नियमों का पालन करता है बिश्नोई समाज बिश्नोई समाज, जो प्राकृतिक संरक्षण और वन्य जीवों के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाना जाता है, अपने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए भी विशिष्ट पहचान रखता है। इस समाज के लोग गुरु जम्भेश्वर के 29 नियमों का पालन करते हैं, जिनमें वन और जीव संरक्षण पर जोर दिया गया है। अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती बिश्नोई समाज में अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती। इसके बजाय, मृतक को दफनाने की परंपरा है, जिसे “मिट्टी लगाना” कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत, शव को पैतृक भूमि पर गड्ढा खोदकर दफनाया जाता है। समाज का मानना है कि शव को जलाने से लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है, जिससे हरे पेड़ों की कटाई होती है और पर्यावरण को हानि पहुंचती है। शव को गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता जब किसी सदस्य का निधन होता है, तो शव को जमीन पर रखा जाता है और उसे छने पानी में गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता है। फिर, शव को कफन पहनाया जाता है, जिसमें पुरुषों के लिए सफेद और महिलाओं के लिए लाल या काले कपड़े का उपयोग किया जाता है। शव को अर्थी पर नहीं ले जाया जाता; इसके बजाय, मृतक के बेटे या भाई शव को कांधे पर लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक जाते हैं। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता गड्ढा खोदने की प्रक्रिया में, शव को घर में ही दफनाया जाता है। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता है, और मृतक के बेटे द्वारा कहा जाता है, “यह आपका घर है।” इसके बाद, शव को मिट्टी से ढक दिया जाता है। अंतिम संस्कार के बाद, गड्ढे के ऊपर पानी डालकर बाजरी बरसाई जाती है। शव को कंधा देने वाले लोग उस स्थान पर स्नान करते हैं, जिससे शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी होती है। इस अनोखे अंतिम संस्कार के जरिए बिश्नोई समाज अपने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग बिश्नोई समाज की मौजूदगी की बात करें तो पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग रह रहे हैं । इनमें सबसे ज्यादा 9 लाख राजस्थान में और करीब 2 लाख हरियाणा में रह रहे हैं । उसके बाद अन्य राज्यों का नंबर आता है।  

त्योहारी सीजन में फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े, आखिर क्यों बढ़ रहे ऐसे केस

नई दिल्ली बीते 14 अक्टूबर यानी सोमवार को मुंबई से न्यूयॉर्क स्थित JFK एयरपोर्ट के लिए एयर इंडिया की एक फ्लाइट ने उड़ान भरी। ये बोइंग 777 विमान लगभग 130 टन जेट फ्यूल के साथ 16 घंटे की नॉन-स्टॉप यात्रा के लिए न्यूयॉर्क रवाना हुआ। उड़ान भरने के तुरंत बाद, एयरलाइन को एक कॉल आई जिसमें कहा गया कि फ्लाइट में बम है। JFK एयरपोर्ट जा रहे AI 119 को तुरंत डायवर्ट किया गया। उड़ान भरने के दो घंटे में ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इसमें एक समस्या थी। फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े एक वरिष्ठ पायलट ने बताया कि B777 (बोइंग 777) का अधिकतम लैंडिंग वजन 250 टन है। इस तरह की पूरी उड़ान का वजन यात्रियों, सामान और कार्गो के साथ उड़ान भरने पर लगभग 340-350 टन होता है। दो घंटे के भीतर उतरने का मतलब है लगभग 100 टन ईंधन बर्बाद करना। लगभग एक लाख रुपये प्रति टन पर, अकेले ईंधन की बर्बादी की लागत 1 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें IGI एयरपोर्ट पर अप्रत्याशित लैंडिंग और पार्किंग शुल्क जैसे अन्य खर्च, दिल्ली के होटलों में 200 से अधिक यात्रियों और क्रू मेंबर्स को रखना, छूटे हुए कनेक्शन के लिए बाद में उन्हें मुआवजा देना जैसे खर्च शामिल हैं। झूठी अफवाह से 3 करोड़ का नुकसान झूठी अफवाह पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग फिर पूरी तरह से जांच के बाद विमान को सेवा में वापस सेवा में लाने से पहले ऑपरेटिंग क्रू की नई जोड़ी की व्यवस्था करना शामिल होता है। अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेटिंग क्रू, फ्लाइट के JFK एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचने से यात्रियों को परेशानी होती है। इसके साथ इस एक फर्जी धमकी से एयरलाइन कंपनी को करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। पिछले रविवार से ऐसा लग रहा फर्जी धमकियों की बाढ़ आ गई है। गुरुवार देर रात तक करीब 40 धमकी भरी अफवाहों के चलते का एयरलाइंस पर भारी वित्तीय प्रभाव पड़ा है। एयरलाइन अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त खर्च लगभग 60-80 करोड़ रुपये है।   एअर इंडिया के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग एअर इंडिया B777 (VT-ALM) का मामला लें, जिसने इस मंगलवार (15 अक्टूबर) को दिल्ली से शिकागो के लिए उड़ान भरी थी। बारह घंटे बाद, 200 से अधिक यात्रियों के साथ फ्लाइट बम की धमकी के चलते कनाडा के दूर-दराज वाले शहर इकालुइट में उतर गया। विमान 15 अक्टूबर को सुबह 5.21 बजे वहां उतरा। इस विमान की अगली व्यावसायिक उड़ान साढ़े तीन दिन बाद हुई। पहले यह एक फेरी फ्लाइट के रूप में इकालुइट से शिकागो पहुंचा। उस समय इसमें कोई यात्री नहीं थे। ऐसा इसलिए क्योंकि फंसे हुए यात्रियों को पहले ही कनाडाई वायु सेना A330 से शिकागो ले जाया गया था। इसके लिए एअर इंडिया भुगतान करेगा। और फिर विमान ने 18 अक्टूबर को शाम 5.15 बजे दिल्ली के लिए एक व्यावसायिक उड़ान के रूप में उड़ान भरी।   बोइंग 777 का एक दिन का खर्च जानिए B777 का औसत मासिक किराया 400,000 डॉलर और 600,000 डॉलर के बीच है। यह लगभग 17,000 डॉलर के औसत डेली किराए पर काम करता है। उड़ान न भरने का मतलब है हर दिन 17,000 डॉलर का नुकसान। अब, अगर झठी धमकी नहीं दी गई होती, तो ये विमान शिकागो पहुंच जाता और फिर कुछ घंटों के बाद, एक नियमित उड़ान के रूप में दिल्ली के लिए रवाना हो जाता। लेकिन शिकागो नहीं पहुंचने का मतलब था कि इकालुइट में 200 से अधिक यात्री और क्रू मेंबर्स फंसे हुए थे। इनके लिए एक दूरदराज के शहर में रहना, खाना और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की व्यवस्था करना पड़ा।   एयरलाइन के साथ यात्रियों को होती है परेशानी फिर इस फ्लाइट के यात्रियों को कनाडा वायुसेना के विमान से शिकागो ले जाना पड़ा। इस बीच, शिकागो के ओ’हारे हवाई अड्डे में दिल्ली जाने वाले यात्रियों को मुश्किलें हुईं। उनसे एयरपोर्ट कर्मियों को निपटना पड़ा, जिनका विमान इसलिए नजर नहीं आया क्योंकि वह इकालुइट में फंसा हुआ था। इस एक धमकी की कुल लागत 15-20 करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिसमें इतने लंबे समय तक बोइंग 777 को रोकने की लागत भी शामिल है।   त्योहारी सीजन में बढ़े धमकी भरे कॉल के मामले पिछले कुछ दिनों में इन धमकियों का शिकार बनी किसी भी बड़ी एयरलाइन ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह त्योहारों की भीड़ का पीक सीजन है और हम यात्रियों के बीच डर पैदा नहीं करना चाहते हैं। इतना कहना पर्याप्त है कि यह एयरलाइंस के खिलाफ एक तरह का वित्तीय आतंकवाद है और इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।   लगातार आ रही ऐसी शिकायतें इंडिगो को भी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की कई उड़ानों के लिए धमकियां मिली हैं। बहुत बार जब किसी उड़ान को धमकी का संदेश मिलता है और उसे डायवर्ट नहीं किया जाता। डेस्टिनेशन एयरपोर्ट उसे होल्ड करने या मंडराने के लिए कहता है। लंदन में एअर इंडिया, सिंगापुर में AI एक्सप्रेस और शायद दूसरों के साथ भी ऐसा हुआ है। एक पायलट ने बताया कि बोइंग 777 हर घंटे 7-8 टन ईंधन जलाता है और एक A320 2.5 टन। 1 लाख रुपये प्रति टन और दो घंटे के होवरिंग पर, अकेले ईंधन जलने की लागत सभी प्रभावित एयरलाइंस के लिए कई करोड़ से अधिक है।   धमकियों को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते एक बड़ी एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हवा में बिताए गए अतिरिक्त समय के कारण, बहुत बार वही क्रू मेंबर्स अगली उड़ान संचालित नहीं कर सकता है। वहीं ये फ्लाइट सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जांच के बाद क्लीयर होने पर ही उड़ान के लिए संचालित होगा। उन्हें आराम करने और उस शहर के होटल में रहने की सुविधा देने की आवश्यकता होगी। हालांकि यह हमारे नियंत्रण से परे एक अप्रत्याशित घटना है, लेकिन कई यात्री जो विमान में देरी होने पर अपने कनेक्शन मिस कर जाते हैं वे हमें अदालत में घसीटने की धमकी देते हैं। ऐसे में हमें अंततः हर्जाना देकर समझौता करना होता है।   कैसे लगे लगाम इस मामले को और भी बदतर बनाने वाली बात यह है … Read more

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा- लाखों नागरिकों के जीवन को सरल बनाने में मदद कर रहा डिजिलॉकर

नई दिल्ली सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि प्रमुख ई-गवर्नेंस प्लेटफार्म डिजिलॉकर लाखों नागरिकों का जीवन सरल बनाते हुए उन्हें डिजिटल उपकरणों से सशक्त बना रहा है। आईटी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एनईजीडी) द्वारा एक साप्ताहिक लाइव कार्यक्रम से देश भर के लाखों लोग जुड़े। इस कार्यक्रम को डिजिटल इंडिया के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने सीधे सवाल पूछे और डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। मंत्रालय के अनुसार, विशेषज्ञों ने एक व्यापक प्रस्तुति दी और डिजिलॉकर की कार्यक्षमताओं और लाभों के बारे में गहन चर्चा की। इस कार्यक्रम में लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम में 9 ऐसे प्रतिभागियों को चुना गया, जिन्होंने डिजिलॉकर को लेकर बेहद काम के सवाल पूछे। इन प्रतिभागियों को ‘डिजिटल इंडिया प्रश्न निंजा’ के रूप में मान्यता दी गई। मंत्रालय ने कहा कि इस सीरीज का उद्देश्य ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के तहत प्रमुख परियोजनाओं के बारे में बताना है और लोगों को इन परिवर्तनकारी कार्यक्रमों का प्रबंधन और संचालन करने वाले विशेषज्ञों से सीधे तौर जुड़ने का मौका देना है। सरकार ने हाल ही में उमंग ऐप को देश के डिजिटल वॉलेट डिजिलॉकर के साथ इंटीग्रेट करने की घोषणा की है, जिससे यूजर्स मल्टिपल सर्विस को एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म से मैनेज कर सकेंगे। एनईजीडी के अनुसार, इस सहयोग का उद्देश्य नागरिकों को अधिक सुविधा प्रदान करते हुए सरकार की अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं तक पहुंच प्रदान करना है। गौरतलब है क‍ि डिजिलॉकर स्टोरेज के लिए एक सुरक्षित क्लाउड बेस्ड प्लेटफॉर्म है, जिसके साथ यूजर्स को उनके डॉक्यूमेंट वेरीफाई और शेयर करने की सुविधा मिलती है। डिजिलॉकर वर्तमान में 30 करोड़ यूजर्स को करीब 6.75 अरब डॉक्युमेंट स्टोर करने की सुविधा दे रहा है।

योग्य युवाओं को रोजगार देकर भाजपा सरकार ने हजारों परिवारों को दिवाली का नायाब तोहफा देने का काम किया: रणबीर गंगवा

चंडीगढ़ कैबिनेट मंत्री  रणबीर गंगवा ने कहा कि बिना खर्ची, बिना पर्ची के योग्य युवाओं को रोजगार देकर भाजपा सरकार ने हजारों परिवारों को दिवाली का नायाब तोहफा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सीएम श्री नायब सैनी जुबान के धनी हैं, जिन्होंने सीएम बनते ही पहली कलम से करीब 25 हजार युवाओं को नौकरी दी है, उसी प्रकार जनता के साथ किए गए एक एक वायदे को पूरा किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा आज हिसार के बरवाला में किसान रेस्ट हाउस में प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक को और कैथल में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।  कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार सेवा, सुशासन, समानता, समृद्धि और गरीब कल्याण के लिए समर्पित रहेगी। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में गत 10 वर्षों में हरियाणा एक हरियाणवी एक के सिद्धांत पर सरकार ने जो काम किया, उसे निरंतर जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि बरवाला हलके में विकास कार्यों को करवाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

विधानसभा के पहले सेशन और साल के पहले सेशन में राज्यपाल का संबोधन होना जरुरी होता: रामनारायण यादव

चंडीगढ़ हरियाणा में 15वीं विधानसभा के गठन और कैबिनेट के शपथ ग्रहण के बाद अब विधायकों की शपथ और विधानसभा सेशन का तारीख को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में हरियाणा विधानसभा से स्पेशल सचिव के पद से सेवानिवृत और संविधान के जानकार रामनारायण यादव ने नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा सत्र को लेकर कुछ रोचक जानकारी सांझा की है। बंसीलाल ने दिलाई थी 54 दिन बाद शपथ यादव ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर कई समय सीमा तय नहीं है। पूर्व में हरियाणा विधानसभा में नई सरकार के गठन के बाद 3 से 54 दिन बाद तक भी शपथ ग्रहण का रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि 1968 में चौधरी बंसीलाल ने दिल्ली में सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में शपथ ली थी। उसके 54 दिन के बाद विधायकों का शपथ ग्रहण हुआ था। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 15 दिन बाद शपथ ली थी। एक दिन का सत्र बुलाकर कर सकते हैं स्थगित रामनारायण यादव ने बताया कि विधानसभा के पहले सेशन और साल के पहले सेशन में राज्यपाल का संबोधन होना जरुरी होता है। यह एक संवैधानिक बाध्यता है। एक दिन का सेशन बुलाकर स्पीकर का चयन करने के बाद राज्यपाल विधानसभा में संबोधित करते हैं, जिस पर धन्यवाद प्रस्ताव पास करना होता है। इसके बाद स्पीकर की ओर से सेशन की अगली तारीख में अधिकतम 15 दिन का अंतर डाला जा सकता है। ऐसे में एक दिन का सेशन बुलाकर उसे आगे के लिए स्थगित किया जा सकता है, लेकिन इस दौरान सेशन की अगली तारीख बतानी होती है, जब फिर से सेशन की शुरूआत होगी। एक दिन का सेशन बुलाकर उसे स्थगित कर कुछ दिनों का अंतर डालकर फिर से बुलाए गए सेशन को एक ही माना जाएगा। रामनारायण यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री जब विधानसभा का सत्र बुलाते हैं। नई सरकार का कार्यकाल उसी के अनुसार तय होता है। विधानसभा सेशन के पहले दिन से ही सरकार का कार्यकाल शुरू माना जाता है, जबकि विधानसभा के सदस्यों के भत्ते उससे पहले ही शुरू हो जाते हैं।

लुधियाना में 25 फर्मो के मालिकों के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन, पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की

लुधियाना सरकार को वित्तिय नुकसान पहुंचाने व धोखाधड़ी करने के आरोप में थाना डिवीजन नंबर 5 की पुलिस ने 25 फर्मो के मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उक्त फर्मो के खिलाफ ए.ई.टी.सी-1 की शिकायत पर कार्रवाई की है। जीएसटी विभाग की तरफ से पुलिस को इन फर्मो के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अलग अलग 25 लैटर लिखे। जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। विभाग के अनुसार विभाग के अलग अलग वार्डो में स्थित  इन फर्मो की पंजाब वैट एक्ट 2005 के सैकशन 29 के अधीन फर्मो की पिछले सालों की एसैसमैंट निर्धारित की गई।  इस दौरान विभाग की तरफ से इन फर्मो की अतिरिक्त डिमांड निकाली गई। लेकिन बार बार नोटिस भेजने के बाद भी इन फर्मो  के मालिक विभाग के सामने पेश नहीं हुए और ना ही कोई दस्तावेज जमा करवाए गए। बार बार कहने पर जब किसी भी फर्म का मालिक पेश नहीं हुआ तो सरकार की तरफ से अतिरिक्त डिमांड निकाल का राशि जमा करवाने के लिए कहा गया।  लेकिन फिर भी फर्मो की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। उसके बाद पंजाब वैट एक्ट 2005 के अधीन रिकवरी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। उसके बाद ही उक्त फर्मो के खिलाफ कानूनी कारवाई की गई। पुलिस ने विभाग के अधिकारियों की तरफ से भेजे गए 25 पत्रों के बाद जांच कर मामला दर्ज किया गया है। इन फर्मो के मालिकों के खिलाफ अमानत में खयानत करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार  चंदर भूषण जैन, जय कुमार सिंह, सतीश कुमार, मुनीष बांसल, मलकीत सिंह, सागर गुप्ता, गुरचरण दास, प्रीतम सिंह, जगमोहन सिंह, मुकेश कुमार, गिरधारी लाल, अविंदरपाल सिंह, बलजीत सिंह, अशोक पुरी, वितेश वशिष्ठ, रणधीर सिंह, सुरेंदर शर्मा, प्रितपल सिंह, रोहित कपूर, जसंवत राए, विकास कुमार, दविंदर अरोड़ा, कुलविदर सिंह व अनुज अरोड़ा के रूप में की है। मामले की कार्रवाई कर रहे अधिकारी ने बताया कि नामजद किए गए आरोपियों की तलाश में रेड की जा रही है ।  

जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़ताल खत्‍म करने की अपील, आमरण अनशन वापस ले लें: ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य सचिव मनोज पंत के मोबाइल फोन पर जूनियर डॉक्टरों से अपील की कि वे आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के विरोध में अपनी मांगों के समर्थन में आमरण अनशन वापस ले लें। पंत, गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और कोलकाता पुलिस की केंद्रीय संभाग की उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के साथ अचानक मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड में सात जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के मंच पर पहुंच गए। वहां मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क किया और मुख्‍यमंत्री ने स्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़तान खत्‍म करने की अपील की। बनर्जी ने कहा, “मैं आपसे भूख हड़ताल वापस लेने का अनुरोध करती हूं। कृपया चर्चा के लिए आएं। आपकी अधिकांश मांगें पहले ही पूरी हो चुकी हैं। कृपया मुझे तीन से चार महीने का समय दें। मैं सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विभिन्न परिषदों के लिए चुनाव कराने की व्यवस्था करूंगी। कृपया भूख हड़ताल वापस लें।” स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाने की जूनियर डॉक्टरों की मांग पर उन्होंने कहा कि यदि एक महत्वपूर्ण विभाग के सभी प्रमुख अधिकारियों को एक ही समय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो प्रशासनिक कठिनाइयां आएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने पहले ही कोलकाता पुलिस आयुक्त और कुछ अन्य अधिकारियों को हटा दिया है।” उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं नहीं मिलती हैं, तो वे खुद को असहाय महसूस करते हैं। मैं मानवता के पक्ष में हूं। मैं भी न्याय चाहती हूं। लेकिन साथ ही आम लोगों का इलाज भी सुनिश्चित करना होगा। इसलिए मैं आपसे फिर से अनुरोध करती हूं कि आप भूख हड़ताल खत्‍म कर दें और काम पर वापस लौट आएं। शुक्रवार रात को ही जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे अगले मंगलवार से पूर्ण रूप से काम बंद कर देंगे। मुख्यमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अपनी सहकर्मी के साथ हुए बलात्कार और हत्या के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों के एक समूह का आमरण अनशन 15वें दिन में प्रवेश कर गया है।  

दहेज के लिए परेशान करने के आरोप में ने उसके आरोपी पति रोहित शर्मा सहित 3 के खिलाफ मामला दर्ज

फगवाड़ा पुलिस ने एक विवाहित महिला को शादी के बाद दहेज के लिए कथित तौर पर परेशान करने के आरोप में उसके पति सहित ससुराल परिवार के 3 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार चांदनी पुत्री राम कृष्ण निवासी बंगा रोड फगवाड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि शादी के बाद उसके पति रोहित शर्मा पुत्र हरीश शर्मा, सास मीनाक्षी शर्मा पत्नी हरीश शर्मा और राहुल शर्मा पुत्र हरीश शर्मा निवासी फगवाड़ा गली नंबर 5, मोहल्ला सुखचैन नगर, फगवाड़ा के लोग उसे परेशान करते हैं। चांदनी की शिकायत पर पुलिस ने उसके आरोपी पति रोहित शर्मा, सास मीनाक्षी शर्मा और देवर राहुल शर्मा के खिलाफ दहेज की मांग कर प्रताड़ित करने का मामला दर्ज कर लिया है. समाचार लिखे जाने तक तीनों आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

भारतीय पत्रकारों की ट्रूडो करवा रहे जासूसी ! फाइव आईज नेटवर्क का लिया सहारा , सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ी नजर

कनाडा भारत और कनाडा तनाव के बीच एक नई और गंभीर घटना सामने आई है। कनाडा की ट्रूडो सरकार ने भारतीय पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए उनकी पोस्ट्स का एक विस्तृत डोजियर तैयार किया है। यह जानकारी कनाडा के विदेशी हस्तक्षेप आयोग की वेबसाइट पर जारी किए गए एक दस्तावेज से सामने आई है। कनाडा का मानना है कि कुछ भारतीय पत्रकारों और मीडिया आउटलेट्स की पोस्ट्स से ‘कनाडाई मामलों में भारतीय हस्तक्षेप’ हो सकता है। कनाडा की ट्रूडो सरकार ने भारतीय पत्रकारों और मीडिया आउटलेट्स की सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ी नज़र रखनी शुरू कर दी है। विदेशी हस्तक्षेप आयोग द्वारा जारी दस्तावेज में कुछ प्रमुख भारतीय पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सोशल मीडिया गतिविधियों की सूची दी गई है। कनाडा का दावा है कि यह पोस्ट्स कनाडा की छवि खराब करने और उसकी नीतियों को प्रभावित करने के लिए की जा रही हैं। यह डोजियर इस बात पर केंद्रित है कि कैसे भारतीय पत्रकार कनाडाई मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे हैं। कनाडा ने भारतीय हस्तक्षेप पर नजर रखने के लिए Five Eyes नेटवर्क का सहारा लिया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय खुफिया साझेदारी है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा शामिल हैं। इस नेटवर्क का उद्देश्य विभिन्न देशों की खुफिया जानकारी साझा करना और निगरानी बढ़ाना है। कनाडा इसे भारत पर दबाव बनाने के लिए एक साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। भारत और कनाडा के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण थे, और हाल की घटनाओं ने इन रिश्तों को और अधिक खराब कर दिया है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त को ‘संदिग्ध’ बताया था। इसके बाद भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए अपने छह डिप्लोमेट्स को कनाडा से वापस बुला लिया। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा कि वियना संधि का उल्लंघन करने वाले किसी भी राजनयिक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भारत से आए राजनयिकों को भी नोटिस पर रखा गया है।

नेतन्याहू का खात्मा चाहता था तेहरान, इजरायली PM के घर पर हुए हमले में ईरान शामिल

इजराइल इजरायली पीएम नेतन्याहू के निजी आवास पर शनिवार को ड्रोन से हुए हमले में ईरान लेबनान के साथ-साथ ईरान का भी हाथ शामिल था। इस हमले को लेकर इजरायल की स्थानीय न्यूज चैनल की तरफ से कहा गया कि यह हमला लेबनान की तरफ से किया गया था, जबकि इसका मास्टरमाइंड ईरान था। रिपोर्ट में कहा गया कि इस हमले के जरिए हिजबुल्लाह के साथ मिलकर तेहरान ने इजरायली पीएम नेतन्याहू को खत्म करने की कोशिश की है। स्थानीय न्यूज चैनल 12 ने एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया कि नेतन्याहू को खत्म करने की कोशिश करते हुए ईरान ने हिजबुल्लाह की तरफ से यह हमला करवाया था। चैनल के सोशल मीडिया पोस्ट में पहली बार हिजबुल्लाह द्वारा इजरायली पीएम के आवास पर किए गए हमले के बाद पहली बार तेहरान का नाम सामने आया है। निजी आवास पर हुए हमले के बाद नेतन्याहू ने कहा कि वह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सेना ने दो दिन पहले ही हमने आतंकवादी हमास चीफ याह्या सिनवार को मार गिराया था। आतंकवाद के खिलाफ हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हमला हो या कुछ और कोई भी चीज मुझे अपने देश की रक्षा से रोक नहीं सकती। हमले के बाद इजरायली पीएम के ऑफिस से जारी बयान में कहा गया कि इस हमले के दौरान इजरायली पीएम और उनकी पत्नी कैसरिया मौके पर मौजूद नहीं थी। उनमें से किसी को भी कोई चोट नहीं आई है। इस हमले को लेकर इजरायली सेना ने दावा किया कि लेबनान की तरफ से आए इस ड्रोन के जरिए एक इमारत में विस्फोट किया गया। इसके अलावा दो और ड्रोन्स भी इस इलाके में मिले थे जिनको इजरायली सेना ने नष्ट कर दिया। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच में लगातार लड़ाई जारी है। शुक्रवार को ही हिजबुल्लाह ने कहा था कि वह इजरायले के ऊपर गाइडेड मिसाइलों से हमले करेगा। हमास चीफ सिनवार और हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह की मौत के बाद ईरान और हिजबुल्लाह दोनों ही बौखलाए हुए हैं। इजरायल भी लगातार किए जा रहे इन हमलों के जवाब में लेबनान में हवाई हमले कर रहा है। पिछले महीने ही इजरायल ने लेबनान की जमीन पर अपनी सेना भी उतार दी थी, जो कि अभी भी लगातार हिजबुल्लाह के लड़ाकों से सीधी जंग लड़ रही है। शु्क्रवार को इजरायली सेना की तरफ से कहा गया कि उसने हवाई हमले के जरिए हिजबुल्लाह के क्षेत्रीय कमांड सेंटरों को नष्ट कर दिया है।

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