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मुबारक गुल को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यहां विधानसभा के प्रो टेम स्पीकर के रूप में शपथ दिलाई

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता एवं विधायक मुबारक गुल को शनिवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के प्रो टेम स्पीकर के रूप में शपथ दिलायी गयी। श्री गुल को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यहां विधानसभा के प्रो टेम स्पीकर के रूप में शपथ दिलाई। श्री गुल सदन के नए अध्यक्ष के चयन और पदभार ग्रहण तक अस्थायी अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। वह विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों को सदस्यता की शपथ दिलाएंगें। उसके बाद सदन नये अध्यक्ष का चुनाव करेगा। अधिकारियों के अनुसार, नये सदस्यों को 21 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे यहां विधानसभा भवन में सदस्यता की शपथ दिलाई जाएगी। उपराज्यपाल ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की धारा के तहत गुल को अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया। श्री गुल श्रीनगर जिले के ईदगाह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार छठी बार चुने गए हैं। श्री गुल 1952 में जन्मे श्री गुल विधि स्नातक हैं। इससे पहले, वह 1983, 1986, 2002, 2008 और 2014 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए थे। 1987 में, वह जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के लिये चुने गये थे और 2013 में सर्वसम्मति से विधानसभा के अध्यक्ष चुने गये थे।  

UCC: ‘नियमावली और क्रियान्वयन समिति’ ने आज सचिवालय में मुख्यमंत्री को ड्राफ्ट सौंपा

देहरादून समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम के राज्य में क्रियान्वयन के लिए सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई ‘नियमावली और क्रियान्वयन समिति’ ने आज सचिवालय में मुख्यमंत्री @pushkardhami  को नियमावली का ड्राफ्ट सौंपा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आई.ए.एस.शत्रुघ्न सिंह, सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर पुलिस महानिदेशक अमित सिन्हा और स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा मौजूद रहे। समिति द्वारा समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम की नियमावली का ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2022 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद हमने मंत्री मण्डल की पहली बैठक में निर्णय लिया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देशाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई गई। कमेटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद 07 फरवरी, 2024 को राज्य विधान सभा में पारित किया गया। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता विधेयक 2024 पर महामहिम राष्ट्रपति की सहमति के बाद 12 मार्च, 2024 को समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड, 2024 अधिनियम पारित हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आज समान नागरिक संहिता अधिनियम की नियमावली सौंपी गई है। इस नियमावली में मुख्य रूप से चार भाग है। जिसमें विवाह एवं विवाह-विच्छेद लिव-इन रिलेशनशिप, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण तथा उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों के पंजीकरण सम्बन्धी प्रक्रियाएं उल्लिखित है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मंत्रीमण्डल की बैठक में इस अधिनियम को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की तिथि तय की जायेगी। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन सामान्य की सुलभता के दृष्टिगत इस समान नागरिक संहिता के लिए एक पोर्टल तथा मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जिससे कि पंजीकरण, अपील आदि की समस्त सुविधाएं जन सामान्य को ऑनलाइन माध्यम से सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विधेयक बना है। जल्द इस अधिनियम को धरातल पर उतारा जायेगा। आजादी के बाद उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन जायेगा जिसे समान नागरिक संहिता लागू करने का गौरव प्राप्त होगा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने आज रेंजर्स ग्राउंड देहरादून में आयोजित सरस मेला – 2024 का शुभारंभ किया

देहरादून मुख्यमंत्री ने आज रेंजर्स ग्राउंड देहरादून में आयोजित सरस मेला – 2024 का शुभारंभ किया इस दौरान उन्होंने प्रदेश भर के स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं से वार्ता कर उनके उत्पादों के बारे में जानकारी ली तथा महिलाओं द्वारा निर्मित मंडुवे के बने केक की सराहना की। उन्होंने स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित दीए की खरीददारी कर ऑनलाइन माध्यम से पेमेंट भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस मेले में महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद मातृशक्ति के परिश्रम, नवाचार के प्रतीक हैं। अपने परिश्रम और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से महिलाएं आजीविका चलाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरस मेला हमारे ग्रामीण क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा, कौशल और उद्यमिता को प्रदर्शित करने का भी प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हमारे स्थानीय उत्पादों को सशक्त बनाने के लिए वोकल फॉर लोकल अभियान प्रारंभ किया गया था। यह मेला भी इस अभियान को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि आजीविका मेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को भी साकार करने में सिद्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के तहत राज्य की एक लाख से अधिक महिलाओं ने लखपति बनने का गौरव प्राप्त किया है। हमारा संकल्प वर्ष 2025 तक 1.5 लाख लखपति दीदी बनाने का है। कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण समय में भी सरकार ने मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह योजना के अंतर्गत ₹84 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान कर महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 30 हजार से अधिक समूहों को ब्याज प्रतिपूर्ति के रूप में ₹24 करोड़ की छूट भी दी गई। 159 महिला सीएलएफ को लगभग ₹8 करोड़ का एकमुश्त अनुदान प्रदान किया गया। 43 हजार सक्रिय समूहों के स्वावलंबन हेतु ₹51 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान स्त्री शक्ति स्वयं सहायता समूह से स्वाति नेगी ने बताया कि उन्होंने 2019 में ग्रोथ सेंटर के माध्यम से ट्रेनिंग लेकर 20 महिलाओं के साथ दीपावली में काम आने वाली सजावटी मालाएं बनाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया राज्य सरकार द्वारा सचिवालय से लेकर ग्राम स्तर हर जगह उनके स्टॉल लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया समूह की प्रत्येक महिला महीने में ₹10 से ₹12 हज़ार की आय अर्जित कर रही हैं। कार्यक्रम में लखपति दीदी फरजाना खान ने मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर आउटलेट्स खोले जाने का अनुरोध किया। जिसके उपरांत मुख्यमंत्री ने आयुक्त ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल को प्रत्येक जिले के हर संभव स्थान पर आउटलेट्स खोले जाने हेतु परीक्षण करवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अपनी बहनों को वचन देता हूं कि उनकी हर संभव मदद की जायेगी। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विश्वास डाबर, जोत सिंह बिष्ट, आयुक्त ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल, जिला अधिकारी देहरादून सविन बंसल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम में विभिन्न कार्यों हेतु ₹20 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की

टिहरी मुख्यमंत्री ने जनपद टिहरी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग में टकोली से बगडवालधार मोटर मार्ग का सुधारीकरण एवं डामरीकरण के कार्य हेतु ₹09 करोड़ 65 लाख 44 हजार, जनपद चमोला के विधानसभा क्षेत्र थराली के विकासखण्ड घाट में नंदप्रयाग-घाट-सुतोल-कनोल मोटर मार्ग सुधारीकरण एवं डामरीकरण के कार्य हेतु ₹06 करोड़ 41 लाख 86 हजार की धनराशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम में विभिन्न कार्यों हेतु ₹20 करोड़ की स्वीकृति भी प्रदान की है। मुख्यमंत्री द्वारा जनपद हरिद्वार में विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, रामनगर कॉलोनी, आर्यनगर कॉलोनी, ज्वालापुर में ₹208.13 लाख की धनराशि से सी.सी. मार्ग का निर्माण, विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार में शास्त्रीनगर, मौ0 कडच्छ, मौ0 कोटरवान, मौ0 अहबाबनगर, ज्वालापुर में ₹212.20 लाख की धनराशि से सी.सी. मार्ग का निर्माण तथा विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार में गोविन्दपुरी कॉलोनी में ₹101.60 लाख की धनराशि से सी.सी. मार्ग के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार जनपद हरिद्वार हेतु कुल ₹521.93 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।  

नेपाल : सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में अवैध घुसपैठियों को नागरिकता दिलाए जाने का खुलासा किया गया

नेपाल में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या को नेपाली नागरिकता दिलाने में इस्लामिक संघ सक्रिय  नेपाल में रोहिंग्या मुस्लिमों को अवैध रूप से प्रवेश कराने में स्थानीय इस्लामी संगठनों का हाथ  नेपाल : सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में अवैध घुसपैठियों को नागरिकता दिलाए जाने का खुलासा किया गया काठमांडू  नेपाल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों को अवैध रूप से प्रवेश कराने में स्थानीय इस्लामी संगठनों का हाथ है। सरकार को सौंपी गई सुरक्षा एजेंसियों की एक रिपोर्ट में इन अवैध घुसपैठियों को नेपाल की नागरिकता भी दिलाए जाने का खुलासा किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक ये अप्रवासी मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल से जुड़े नेपाल के पूर्वी हिस्से में काकरभिट्टा सीमा क्षेत्र से प्रवेश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट में बांग्लादेशी मुस्लिमों की मजदूर के रूप में घुसपैठ का भी उल्लेख है। इस रिपोर्ट में नेपाल के इस्लामिक संघ पर मुस्लिम समुदाय को देश में अवैध प्रवेश करवाकर नेपाली नागरिकता दिलाने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक संघ इन बांग्लादेशी मुसलमानों की सूची संकलित करके नेपाल मुस्लिम आयोग और उसके अध्यक्ष को भेजकर इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाता है। आयोग इन व्यक्तियों को बांग्लादेशी नागरिकों के परिवार के सदस्यों के रूप में गलत तरीके से सत्यापित करता है, जिन्होंने पहले ही नेपाली नागरिकता हासिल कर ली है, जिससे उन्हें कानूनी जांच से बचने की अनुमति मिलती है। बांग्लादेश और रोहिंग्या मुसलमानों में से कुछ इस्लामिक संघ की मदद से नेपाली पासपोर्ट प्राप्त करने में सफल रहे हैं, और इनमें से कुछ को हाल ही में पकड़ा गया था। नागरिकता प्राप्त करने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों की बढ़ती संख्या ने मधेस और तराई क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के बारे में चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक नेपाल पुलिस के विशेष ब्यूरो में काम करने वाले नेपाल पुलिस के अवकाश प्राप्त एआईजी पुष्कर कार्की ने बताया कि ये कार्रवाइयां जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान जैसे विदेशी कट्टरपंथी संगठनों के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं, जो कथित तौर पर इस्लामिक संघ नेपाल के साथ सहयोग करते हैं। इन संगठनों का उद्देश्य अवैध आप्रवासन और नागरिकता हेरफेर के माध्यम से बांग्लादेशी मुसलमानों की आबादी बढ़ाकर दक्षिणी नेपाल में जनसांख्यिकीय संतुलन को बदलना है। नेपाल में सुरक्षा मामलों के जानकार डॉ. दीपेश केसी ने बताया कि बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए नागरिकता सुरक्षित करने के अपने प्रयासों के अलावा, इस्लामिक संघ के नेता कथित तौर पर विभिन्न नेपाली राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ नियमित चर्चा में लगे हुए हैं। माना जाता है कि इन बैठकों के दौरान वे नेपाल में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की नागरिकता की स्थिति को वैध बनाने के लिए राजनीतिक हस्तियों पर दबाव डाल रहे हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल भी म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या शरणार्थियों की बढ़ती आमद का सामना कर रहा है और 2017 के बाद से बड़ी संख्या में रोहिंग्या नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। गृह मंत्रालय के पास यह तथ्य है कि नेपाल में रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या अब लगभग 800 तक पहुंच गई है। हालांकि नेपाल आधिकारिक तौर पर उन्हें शरणार्थी के रूप में मान्यता नहीं देता है। यूएनएचसीआर (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त) ने नेपाल में 370 रोहिंग्या व्यक्तियों को पहचान पत्र जारी किए हैं, जबकि अतिरिक्त 123 आवेदन लंबित हैं। इनमें से कई शरणार्थी अब काठमांडू के बाहरी इलाके में जमीन किराए पर लेना चाह रहे हैं, खासकर ललितपुर के टीकाथली और भक्तपुर के बाहरी इलाके में। इससे नेपाल में ही सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सरकार को सौंपी गई ताजा रिपोर्ट में नेपाल में सुरक्षा एजेंसियों ने रोहिंग्या शरणार्थियों सहित अवैध अप्रवासियों की बढ़ती आमद पर चिंता जताई है। यह बढ़ती प्रवृत्ति नेपाल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि अवैध आप्रवासन से देश के सामाजिक, राजनीतिक और जनसांख्यिकीय ताने-बाने के बाधित होने का खतरा है। सरकार की तरफ से सुरक्षा अधिकारियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे मुस्लिम संगठनों द्वारा नेपाल में ऐसे बांग्लादेशी मुसलमानों को बुलाने और उनके रहने की सुविधा प्रदान करने के किसी भी प्रयास को रोककर, सीमा निगरानी को मजबूत करने और अवैध आव्रजन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ शरणार्थी संकट के मानवीय पहलू का प्रबंधन करके इस चुनौती को अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित करें।    

सूडान में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या बढ़कर 8 2 मिलियन हो गई

जेनेवा  सूडान में 18 महीने से जारी संघर्ष ने मानवीय संकट को और भी गहरा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, अब तक लगभग 30 लाख शरणार्थी और वापस लौटे सूडानी लोग अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी देशों की शरण में जा चुके हैं। इनमें अधिकांश लोग मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, मिस्र, इथियोपिया, लीबिया, दक्षिण सूडान और युगांडा में शरण ले रहे हैं।संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने सूडान में लगातार हो रहे विस्थापन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही लगभग 40,000 लोग सूडान के भीतर विस्थापित हुए हैं। पिछले साल अप्रैल में शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक सूडान में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या बढ़कर 8।2 मिलियन हो गई है, जिससे देश के भीतर मानवीय संकट गहरा गया है। दारफुर क्षेत्र में बढ़ते हिंसक संघर्ष के कारण अकेले अक्टूबर के पहले सप्ताह में 25,000 लोग पूर्वी चाड पहुंचे, जो इस वर्ष के किसी एक सप्ताह में पलायन करने वालों की सबसे अधिक संख्या है। चाड में इस समय 681,944 सूडानी शरणार्थी हैं, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा हैं।    

भारत ने कनाडाई बॉर्डर सर्विस एजेंसी के अधिकारी को वॉन्टेड आतंकवादी घोषित किया

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कूटनीतिक विवाद चल रहा है। हाल ही में कनाडा ने भारत के उच्चायुक्त पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद भारत ने कनाडा के राजनायिकों को बाहर का रास्ता दिखाया और अपने उच्चायुक्त को भी वापस बुलाया। इस विवाद के बीच खबर है कि भारत ने कनाडाई बॉर्डर सर्विस एजेंसी (CBSA) के एक अधिकारी संदीप सिंह सिद्धू को वॉन्टेड आतंकवादी घोषित कर दिया है और उसे वापस लाने की मांग की है। कनाडा और भारत के बीच क्या है कूटनीतिक विवाद? कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने इस हफ्ते आरोप लगाया कि भारतीय राजनायिक कनाडा में सिख अलगाववादियों को निशाना बना रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत सरकार को उनके बारे में जानकारी साझा करके उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, शीर्ष भारतीय अधिकारी उस जानकारी को अपराध समूहों को दे रहे हैं जो कनाडा के नागरिक इन कार्यकर्ताओं को ड्राइव-बाय शूटिंग, जबरन वसूली और यहां तक कि हत्या का निशाना बना रहे हैं। दूसरी ओर, भारत ने कनाडा के आरोपों को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को देश से निकाल दिया है। कौन है सीबीएसए का संदीप सिंह सिद्धू? टाइम्स नॉउ की एक रिपोर्ट के अनुसार, संदीप सिंह सिद्धू, सीबीएसए का कर्मचारी है और प्रतिबंधित संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) का सदस्य है। उस पर पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है। कहा जा रहा है कि संदीप सिंह सिद्धू के पाकिस्तान स्थित खालिस्तानी आतंकवादी लखबीर सिंह रोडे और आईएसआई के अन्य गुर्गों के साथ संबंध थे। माना जा रहा है कि 2020 में बलविंदर सिंह संधू की हत्या में उसकी भूमिका थी। क्या सनी टोरंटो ही है संदीप सिंह सिद्धू? बलविंदर सिंह संधू, शौर्य चक्र पुरस्कार से सम्मानित थे। पंजाब के उग्रवाद के दौरान खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ अपने प्रयासों और अमेरिका और कनाडा में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के नेतृत्व में किये गए खालिस्तान जनमत संग्रह का विरोध करने वालों में वो प्रमुख थे। रिपोर्ट के अनुसार, संदीप सिंह सिद्धू को सीबीएसए में अधीक्षक पद पर प्रमोट किया गया था। एनआईए का दावा है कि सनी टोरंटो और पाकिस्तान में रहने वाले आतंकवादी लखबीर सिंह रोडे सहित कनाडा के खालिस्तानी गुर्गों ने संधू की हत्या की योजना बनाई थी। यह अभी भी साफ नहीं है कि सनी टोरंटो संदीप सिंह सिद्धू का ही दूसरा नाम है। यह रिपोर्ट विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची द्वारा पिछले हफ्ते की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने कनाडा से करीब 26 आरोपियों के प्रत्यर्पण की मांग की थी, जिस पर कनाडाई अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने कनाडा सरकार के साथ लॉरेंस बिश्नोई गिरोह सहित गिरोह के सदस्यों के बारे में सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा की थी और उनसे उन्हें (अपराधियों को) गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था … अब तक, हमारे अनुरोध पर कनाडा की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।’

जापान को 2035 तक प्रतिदिन 17.75 मिलियन घंटे का नुकसान होगा : रिपोर्ट

टोक्यो एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जापान को 2035 तक 3.84 मिलियन श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि प्रतिदिन 17.75 मिलियन घंटे का नुकसान होगा। जिजी प्रेस ने पर्सोल रिसर्च एंड कंसल्टिंग कंपनी और चुओ यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में दावा किया है, ”2023 की तुलना में श्रमिकों की कमी 1.85 गुना बढ़ने का अनुमान है, ऐसा इसलिए क्योंकि देश में कामगारों के पक्ष में कार्यशैली सुधार नीति बनाई गई है। ये कार्य और जीवन के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए किया गया है, इसकी वजह से ही व्यक्तिगत कार्य घंटों में कमी आई है।” समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने जिजी प्रेस के हवाले से बताया कि मजदूरों की जरूरत जो 2023 में 67.47 मिलियन थी वो 2035 में बढ़कर 71.22 मिलियन होने की उम्मीद है। इसमें महिलाएं, बुजुर्ग कर्मचारी और विदेशी नागरिक शामिल होंगे। इसके साथ ही विदेशी श्रमिकों की संख्या में भी वृद्धि होने का अनुमान है और ये 2.05 मिलियन से बढ़कर 3.77 मिलियन हो जाएगा। हालांकि, 2035 तक प्रति व्यक्ति औसत काम के घंटों में 8.8 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण कामगारों की ढलती उम्र और जापानी सरकार द्वारा कार्य शैली सुधार नियम है। श्रमिकों की कमी से निपटने के लिए रिपोर्ट में कार्यशैली सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।  

रूस में आयोजित हो रहा 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पीएम मोदी 22 अक्टूबर जायेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस की अध्यक्षता में कज़ान में आयोजित हो रहे 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 22-23 अक्टूबर तक रूस की यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर रूस की यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी रूस की अपनी यात्रा के दौरान ब्रिक्स के सदस्य देशों के अपने समकक्षों और कजान में आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। ब्रिक्स के इस साल के शिखर सम्मेलन का विषय ‘‘वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना” है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह सम्मेलन नेताओं को दुनिया के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा यह भविष्य में सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के वास्ते एक मूल्यवान अवसर भी प्रदान करेगा।” 

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं का शुभारंभ, तीन पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

नई दिल्ली राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार ने इस्पात उत्पादन में हरित हाइड्रोजन के उपयोग के लिए तीन पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे पहले नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस पहल के तहत इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने  एक बयान में कहा कि पायलट परियोजनाओं के माध्यम से परियोजना का लक्ष्य इस्पात निर्माण में हरित हाइड्रोजन का उपयोग करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों की पहचान करना है। ये परियोजनाएं हरित हाइड्रोजन आधारित इस्पात निर्माण प्रक्रियाओं के सुरक्षित संचालन को प्रदर्शित कर सकती हैं, तकनीकी व्यवहार्यता और दक्षता स्थापित कर सकती हैं और कम कार्बन वाले लौह एवं इस्पात उत्पादन को सक्षम करने के लिए उनकी आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन कर सकती हैं। प्राप्त प्रस्तावों के मूल्यांकन के आधार पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस्पात क्षेत्र में कुल तीन पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके लिए केंद्र सरकार की कुल वित्तीय सहायता 347 करोड़ रुपये है। इन पायलट परियोजनाओं के अगले 3 वर्षों में चालू होने की संभावना है, जिससे भारत में ऐसी प्रौद्योगिकियों का विस्तार होगा। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन आंदोलन 4 जनवरी 2023 को शुरू किया गया था। वित्त वर्ष 2029-30 तक इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस कदम से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी, डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत को हरित हाइड्रोजन में प्रौद्योगिकी और बाजार का नेतृत्व करने में मदद मिलेगी।  

मंगल ग्रह पर एलियन जीवन के संकेत, सूखे बर्फ की चादर के नीचे, एक नई स्टडी में खुलासा हुआ

नई दिल्ली मंगल ग्रह के बर्फीले हिस्सों में एलियन जीवन हो सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मंगल ग्रह के आइसकैप यानी बर्फ की चादरों के नीचे जीवन होना चाहिए. साइंटिस्ट  ये मानते हैं कि वहां पर फोटोसिंथेसिस जैसी प्रक्रिया हो रही होगी. लेकिन सूखे बर्फ की चादर के नीचे. एक नई स्टडी में यह खुलासा हुआ है. फोटोसिंथेसिस वह प्रक्रिया है, जिसमें पौधे, एल्गी और साइनोबैक्टीरिया केमिकल एनर्जी पैदा करते हैं. इसके लिए चाहिए पानी और सूरज की रोशनी. धरती के वायुमंडल पर सबसे ज्यादा ऑक्सीजन यहीं से पैदा होता है. लेकिन एक नई स्टडी के मुताबिक मंगल ग्रह पर ध्रुवों के पास बर्फ की मोटी चादर बिछी है. जिसके नीचे जीवन हो सकता है. वैज्ञानिक ये मानते हैं कि सूरज के रेडिएशन से बचने के लिए बर्फ की चादरों के नीचे जीवन फोटोसिंथेसिस के जरिए या उसके जैसी किसी प्रक्रिया से पनप रहा होगा. जिसे रेडिएटिव हैबिटेबल जोन्स (Radiative Habitable Zones) कहते हैं. फोटोसिंथेसिस को क्या चाहिए. सटीक मात्रा में रोशनी. इससे यह नहीं पता चलता कि मंगल पर जीवन है. कई स्पेसक्राफ्ट्स के डेटा के आधार पर अनुमान मंगल पर जीवन होने की उम्मीद है. वैज्ञानिक नासा के मार्स ऑर्बिटर, परर्सिवरेंस रोवर, मार्स सैंपल रिटर्न और एक्सोमार्स जैसे स्पेसक्राफ्ट्स से आए डेटा का एनालिसिस कर रहे थे. वैज्ञानिकों की ये हाइपोथिसिस इन स्पेसक्राफ्ट्स से मिले डेटा के आधार पर बनाई गई है. इसकी पुष्टि तो मंगल ग्रह पर जाकर बर्फ के नीचे जांच करने से ही होगी. नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के शोधकर्ता औऱ फेलो आदित्य खुल्लर ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे हैं कि हमने मंगल पर जीवन खोज लिया है. लेकिन हमारा मानना है कि मंगल ग्रह के धूल वाले सूखे बर्फीले चादरों के नीचे जीवन होने की संभावना है. भविष्य में इसकी जांच हो सकती है. धरती VS मंगल… कहां क्या है अंतर? धरती और मंगल ग्रह हैबिटेबल जोन में आता है. यानी सूरज से इनकी दूरी इतनी है कि यहां पर जीवन अच्छे से पनप सकता है. पृथ्वी इस बात का सबूत है. तापमान इतना सही रहता है कि ग्रह पर पानी भी हो सकता है. धरती पर तो है. तरल पानी का समंदर. मंगल ग्रह सूखा है. ज्यादातर हिस्सा लाल और ड्राई. मंगल ग्रह पर गए ज्यादातर स्पेसक्राफ्ट जैसे- क्यूरियोसिटी, परर्सिवरेंस रोवर ने वहां सूखी नदियों के बेसिन, झीलें, नदियों का शाखाएं देखी हैं. हो सकता है कि करोड़ों साल पहले कभी वहां पानी रहा हो. इस बात की पुष्टि तो मंगल के चारों तरफ उड़ान भरने वाले मार्स रीकॉन्सेंस ऑर्बिटर ने भी की है. लेकिन मंगल ग्रह ने अपना पानी खो दिया. मंगल ग्रह पर अल्ट्रावायलेट रेडिएशन बहुत ज्यादा है. जो कि जीवन के लिए खतरनाक है. ऐसे में वहां पर जटिल कोशिकाओं वाले जीवन की संभावना कम है. आदित्य ने बताया कि धरती की तरह मंगल ग्रह पर ओजोन जैसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है. इसलिए वहां पर 30 फीसदी ज्यादा रेडिएशन होता है. कितनी बर्फ है मंगल ग्रह पर? मंगल ग्रह पर बर्फ की चादर बहुत है लेकिन प्रदूषित है. डेटा एनालिसिस से पता चलता है कि मंगल ग्रह पर 2 से 15 इंच तक बर्फ की चादर है. जिसमें 0.1 फीसदी धूल भी मिली है. यानी मार्शियन डस्ट. प्रदूषण मिक्स होने की वजह से बर्फ चादर की मोटाई कहीं-कहीं 7 से 10 फीट भी हो सकती है. ऐसे में इसके नीचे जीवन पनपने की संभावना बढ़ जाती है. क्योंकि यहां पर सूरज के रेडिएशन का असर कम हो जाता है.    

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह की शुरुआत करेंगे

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को ‘कर्मयोगी सप्ताह’ यानी राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह की शुरुआत करेंगे। इसके तहत लोक सेवकों के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक क्षमता विकसित करने की दिशा में नए सिरे से प्रोत्साहन देने की कवायद की जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी। पीएमओ ने बताया कि ‘मिशन कर्मयोगी’ की शुरुआत सितंबर 2020 में की गई थी और तब से इसने पर्याप्त प्रगति की है। इसमें वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ भारतीय लोकाचार में निहित भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा की कल्पना की गई है। बयान में कहा गया राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह लोक सेवकों के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक क्षमता विकास की दिशा में नई गति प्रदान करने वाला, अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन होगा। पीएमओ ने कहा कि यह पहल सीखने और विकास के लिए एक नई प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेगी। राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह का उद्देश्य ‘एक सरकार’ का संदेश देना, सभी को राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना और आजीवन सीखने को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत प्रतिभागियों और मंत्रालयों, विभागों और संगठनों द्वारा जुड़ाव के विभिन्न रूपों के माध्यम से सीखने के लिए समर्पित होगा। इस दौरान, प्रत्येक ‘कर्मयोगी’ कम से कम चार घंटे की योग्यता से जुड़े गुर सीखने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। प्रतिभागी प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा आईजीओटी, वेबिनार (सार्वजनिक व्याख्यान या नीति विशेषज्ञों की कक्षाएं) पर व्यक्तिगत भूमिका-आधारित मॉड्यूल के संयोजन के माध्यम से लक्षित घंटों को पूरा कर सकते हैं। बयान में कहा गया है कि सप्ताह के दौरान, प्रख्यात वक्ता अपनी विशेषज्ञता के विषय पर व्याख्यान देंगे और कर्मयोगियों को अधिक प्रभावी तरीके से नागरिक-केंद्रित वितरण की दिशा में काम करने में मदद करेंगे। सप्ताह के दौरान, मंत्रालय, विभाग और संगठन क्षेत्र विशिष्ट दक्षताओं को बढ़ाने के लिए सम्मेलन और कार्यशालाएं भी आयोजित करेंगे।    

कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ करेंगे, क्या किम जोंग उन कराएंगे तीसरा विश्वयुद्ध?

मॉस्को  रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है। इस बीच एक बड़ी खबर आई है। यूक्रेनी रक्षा खुफिया निदेशालय (GUR) के प्रमुख के मुताबिक लगभग 11,000 उत्तर कोरियाई पैदल सेना के सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए पूर्वी रूस में प्रशिक्षण ले रहे हैं। द वार जोन की रिपोर्ट के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल किरिलो बुडानोव ने कहा, ‘वे 1 नवंबर को यूक्रेन में लड़ने को तैयार होंगे।’ बुडानोव ने कहा कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल करेंगे। 2600 सैनिकों का पहला कैडर कुर्स्क क्षेत्र में भेजा जाएगा, जहां यूक्रेन ने रूस की जमीन को कब्जाया हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी नहीं पता कि बाकी उत्तर कोरियाई सैनिक कहां जाएंगे। बुडानोव की टिप्पणी से कुछ घंटे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि लगभग 10 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक रूस की ओर से यूक्रेन में लड़ने को तैयार हैं। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि जंग में तीसरे देश के शामिल होने से यह संघर्ष ‘विश्वयुद्ध’ में बदल जाएगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसके आगे और जानकारी नहीं दी। मंगलवार को यूक्रेन की मीडिया ने बताया कि लगभग 3000 सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए रूस की ‘स्पेशल ब्यूरैट बटालियन’ का हिस्सा बन रहे हैं। रूस और उत्तर कोरिया में बढ़ा सहयोग इस बात में संदेह नहीं है कि पिछले कुछ महीनों में रूस और उत्तर कोरिया ने अपने सहयोग के स्तर को बढ़ाया है। पिछले सप्ताह पुतिन के जन्मदिन की बधाई के लिए उत्तर कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने संदेश भेजा था। इस संदेश में उन्होंने पुतिन को अपना सबसे करीबी साथी बताया था। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते संबंधों का एक और संकेत देखा गया। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी सैनिक उत्तर कोरिया की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यूक्रेन को टैंक देगा इजरायल इस बीच खबर आई है कि ऑस्ट्रेलिया अपने 49 पुराने एम1ए1 अब्राम्स टैंक यूक्रेन को देगा। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यूक्रेन ने ये टैंक उसे दिए जाने का कुछ महीने पहले अनुरोध किया था। मार्लेस ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया सरकार यूक्रेन को अपने अधिकतर अमेरिका निर्मित एम1ए1 टैंक दे रही है, जिनकी कीमत 24 करोड़ 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (16 करोड़ 30 लाख अमेरिकी डॉलर) है। ऑस्ट्रेलिया में इनका स्थान 75 अगली पीढ़ी के एम1एक2 टैंकों का बेड़ा लेगा। मार्लेस ने फरवरी में कहा था कि यूक्रेन को पुराने हो चुके टैंक देना उनकी सरकार के एजेंडे में नहीं है लेकिन बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि वे इस मदद को अपनी सरकार के पिछले रुख से पीछे हटने के रूप में नहीं देखते। मार्लेस ने ‘ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ से कहा, ‘हम यूक्रेन सरकार से इस मामले में लगातार बात कर रहे हैं कि हम उन्हें किस तरह से सर्वश्रेष्ठ सहायता दे सकते हैं।’

हेलेन और मिल्टन तूफानों की लागत 50 बिलियन डॉलर होने की, US के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक

फ्लोरिडा अमेरिका में हाल में आए मिल्टन तूफान ने काफी तबाही मचाई है। यह अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक तूफान के कारण आई बाढ़ और तेज हवाओं से करीब 34 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। इस तूफान के कारण फ्लोरिडा में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई। साथ ही लोगों को घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। समस्या यह है कि अधिकांश घर तेज हवाओं से होने वाले नुकसान के लिए इंश्योर्ड थे लेकिन उनके पास बाढ़ से हुए नुकसान के लिए कवर नहीं था। मिल्टन से दो हफ्ते पहले आए हरिकेन हेलेन से करीब $47.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। लेकिन मिल्टन अमेरिका में आए 10 सबसे विनाशक तूफानों में शामिल है। इसमें करीब 22 अरब डॉलर का नुकसान तेज हवाओं के कारण हुआ है जबकि बाढ़ के कारण छह अरब डॉलर के नुकसान की आशंका है। हेलेन ने भी फ्लोरिडा के तटीय इलाकों में तबाही मचाई थी। अभी लोग इससे उबर भी नहीं पाए थे कि मिल्टन ने दस्तक दे दी। इससे फ्लोरिडा का इंश्योरेंस मार्केट मुश्किल में आ गया है। फ्लोरिडा में प्रीमियम फ्लोरिडा में इंश्योरेंस प्रीमियम देश के बाकी राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। सरकार के समर्थन वाली नॉन-प्रॉफिट होम इंश्योरेंस कंपनी Citizens Property Insurance Corp के पास 13 लाख पॉलिसीज हैं। अगर यह प्राइवेट कंपनी होती तो डूब चुकी होती। लेकिन सरकारी कंपनी होने के नाते इसके पास प्रीमियम सरचार्ज लगाने का अधिकार है ताकि सभी दावों का भुगतान किया जा सके। लेकिन इससे इंश्योरर्ड लोगों पर बोझ बढ़ेगा। राक्षसी तूफान हेलेन और मिल्टन ने इतनी जटिल तबाही मचाई कि अभी भी नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन सरकारी और निजी विशेषज्ञों का कहना है कि वे संभवतः 50 अरब डॉलर से अधिक की लागत वाले कुख्यात तूफान कैटरीना, सैंडी और हार्वे की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। इससे भी अधिक पीड़ादायक बात यह है कि अधिकांश क्षति – हेलेन के मामले में 95% या उससे अधिक – का बीमा नहीं किया गया था, जिससे पीड़ितों को और अधिक वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। तूफान से होने वाली मौतें समय के साथ कम होती जा रही हैं, हालांकि हेलेन एक अपवाद था। लेकिन मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने पर भी, तीव्र तूफानों से होने वाली क्षति आसमान छू रही है क्योंकि लोग नुकसानदेह तरीके से निर्माण कर रहे हैं, पुनर्निर्माण की लागत मुद्रास्फीति की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है, और मानव-कारण जलवायु परिवर्तन तूफानों को अधिक शक्तिशाली और गीला बना रहा है, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने कहा। “आज के तूफान, आज की घटनाएँ कल की घटनाओं से बिलकुल अलग हैं। हम जो देख रहे हैं, उनमें से एक यह है कि ये सिस्टम जो ऊर्जा बनाए रख सकते हैं, वह पहले की तुलना में काफी अधिक है,” जॉन डिक्सन, एऑन एज इंश्योरेंस एजेंसी के अध्यक्ष, जो बाढ़ कवरेज में विशेषज्ञ हैं, ने कहा। “ऐसा लगता है कि कई मामलों में मौसम इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है कि एक समाज के रूप में हम इसके साथ तालमेल नहीं रख पा रहे हैं।” पिछले 45 वर्षों में, मुद्रास्फीति के हिसाब से समायोजित, राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने 396 मौसमी आपदाओं की गणना की है, जिनसे कम से कम 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इनमें से 63 तूफ़ान या उष्णकटिबंधीय तूफ़ान थे।

ड्रैगन सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% पहुंचा, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा चीन का लोन

नई दिल्ली  चीन की सरकार ने अपनी इकॉनमी में जान फूंकने के लिए अरबों डॉलर के स्टीम्युलस पैकेज की घोषणा की है लेकिन इससे देश का कर्ज संकट हल होता नहीं दिख रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश चीन का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो साल की पहली तिमाही में 366% के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच चुका है। 2008 के वित्तीय संकट के बाद से यह रेश्यो डबल हो चुका है। नॉन-फाइनेंशियल कॉरपोरेट का रेश्यो सबसे ज्यादा 171% है। इसके बाद सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% है। अमेरिका में सरकार का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 125% है। करीब तीन दशक से दुनिया की फैक्ट्री बना चीन अब कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। देश की इकॉनमी डिफ्लेशन के दौर से गुजर रही है। यह वही स्थिति है जिसमें 1990 के दशक से जापान की इकॉनमी फंसी है। अमेरिका के साथ चल रहे तनाव ने चीन की बुरी हालत कर दी है। देश में बेरोजगारी चरम पर है, रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है और लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने में लगे हैं। चीन की हालत का असर दूसरे देशों और विदेशी कंपनियों पर भी दिख रहा है। जापान का एक्सपोर्ट कई महीनों में पहली बार गिरा है। इसकी वजह यह है कि चीन में डिमांड में गिरावट आई है। दुनिया के लिए खतरे की घंटी चीन की इकॉनमी डूबी तो इससे पूरा दुनिया की ग्रोथ प्रभावित होगी। हाल में दुनिया की सबसे बड़ी फैशन कंपनी LMVH के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। इसकी वजह यह रही कि चीन में कंपनी की बिक्री में गिरावट आई है। इसी तरह दुनिया की कई कंपनियों की ग्रोथ में चीन का बड़ा हाथ है। दुनियाभर के बाजार चीन के माल से पटे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो चीन में 2008 जैसी मंदी के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। यही वजह है कि चीन में मंदी की आशंका ग्लोबल इकॉनमी के लिए खतरे की घंटी है। इस बीच तीसरी तिमाही में चीन की ग्रोथ डेढ़ साल में सबसे कम रही। नेशनल ब्यूरो को स्टैटिस्टिक्स के जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तिमाही में चीन की इकॉनमी 4.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी जो पिछली तिमाही में 4.7 परसेंट थी। यह 2023 की शुरुआत से सबसे कम ग्रोथ है। हाल के दिनों में चीन की सरकार ने इकॉनमी में जान फूंकने के लिए कई तरह की घोषणाएं की हैं। इनमें ब्याज दरों में कटौती और घर खरीदने से जुड़े नियमों में ढील शामिल है। लेकिन निवेशकों में इसे लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है।

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