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इजरायली सेना की कार्रवाई के खिलाफ खड़ा हुआ भारत, लेबनान में दो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक घायल

नई दिल्ली इजरायल-लेबनान सीमा पर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त करने के एक दिन बाद भारत लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) में सेना का योगदान देने वाले देशों में शामिल हो गया। साथ ही इजरायली सेना की कार्रवाई के खिलाफ खड़ा हो गया। आपको बता दें कि लेबनान में दो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक घायल हो गए हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: “एक प्रमुख सैन्य योगदानकर्ता देश के रूप में भारत 34 यूएनआईएफआईएल सैन्य योगदानकर्ता देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के साथ पूरी तरह से खड़ा है। शांति सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसे मौजूदा यूएनएससी प्रस्तावों के अनुसार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।” इजरायल की सेना ने कहा कि शुक्रवार को दक्षिण लेबनान के नकौरा में उनके वॉचटावर के पास एक इजरायली हमले में श्रीलंका के दो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक घायल हो गए। 48 घंटों में दूसरी बार इस क्षेत्र में शांति सैनिकों के मुख्य बेस पर विस्फोट हुए। यूनिफिल बल ने इसे गंभीर घटनाक्रम बताया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र कर्मियों और संपत्ति की सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए। बल में दर्जनों देशों के 10,000 से अधिक शांति सैनिक हैं। इसमें भारतीय सैनिकों की संख्या दूसरी सबसे बड़ी है। भारत के लगभग 900 सैनिक इसमें शामिल हैं। यह बयान संयुक्त राष्ट्र बलों को निशाना बनाने वाली इजरायल की कार्रवाइयों पर भारत की बेचैनी को भी दर्शाता है। आपको बता दें कि पिछले एक साल में हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाइयों पर भारत ने संतुलनकारी रुख अपनाया हुआ था। लेकिन अब भारत ने इजरायल के खिलाफ स्टैंड ले लिया है। शुक्रवार को भारत ने दक्षिणी लेबनान में लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के फंसने की खबरों और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम ब्लू लाइन पर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति से चिंतित हैं। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।” 120 किलोमीटर की ब्लू लाइन संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सीमांकन रेखा है जो दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी को दर्शाती है। यह लेबनान को इजरायल और गोलान हाइट्स से अलग करती है, लेकिन यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र परिसर की अखंडता का सभी को सम्मान करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा और उनके जनादेश की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए।” इजरायली सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने शुक्रवार को कहा कि हिजबुल्लाह शांति सैनिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हुए यूनिफिल चौकियों के करीब इजरायल पर गोलीबारी कर रहा है। इजरायल संयुक्त राष्ट्र बलों की सुरक्षा के लिए कदम उठाना जारी रखेगा और उनकी सुरक्षा के लिए सभी जिम्मेदार देशों के साथ आवश्यक कदमों का समन्वय करेगा।

चीन अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने अगले तीन महीने में 27 लाख करोड़ रुपये से जान फूंकेगा

बीजिंग चीन ने भारत समेत दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए फिर से चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चीन ने  325 बिलियन डॉलर (करीब 27 लाख करोड़ रुपये) के विशेष पैकेज की घोषणा की। चीन ने कहा कि वह इस रकम को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खर्च करेगा। ऐसे में सोमवार को फिर से भारतीय शेयर मार्केट में गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ समय पहले चीन ने विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। इसके बाद विदेशी निवेशक भारतीय शेयर मार्केट से पैसा निकालकर चीन की ओर चले गए थे। इससे भारतीय शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट आई थी। पिछले पूरे हफ्ते मार्केट में गिरावट बनी रही। इस गिरावट के कारण निवेशकों के 16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए थे। वहीं इस हफ्ते भी मार्केट में सिर्फ एक दिन ही तेजी देखने को मिली। चीन की इस नई घोषणा से शेयर मार्केट में फिर से गिरावट आ सकती है।   क्या है चीन का नया आर्थिक पैकेज? चीन अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने पर लगा है। इसी कड़ी में चीन इतनी बड़ी रकम अपनी अर्थव्यवस्था में लगाएगा। इस नए पैकेज से बैंकों को मजबूत करने, प्रॉपर्टी मार्केट को मजबूत करने और वित्तीय संकट से उबरने में मदद मिलेगी। कुछ हफ्ते पहले चीन ने जिस प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी, उसमें ब्याज दरों में कटौती और बैंकों के लिए तरलता शामिल थी। क्या है 3 महीने का ड्रैगन का प्लान?     चीन के वित्त मंत्री लैन फोआन ने कहा कि वे अतिरिक्त राजकोषीय बांडों के उपयोग में तेजी ला रहे हैं। साथ ही और उपयोग के लिए अल्ट्रा लॉन्ग टर्म स्पेशल ट्रेजरी बॉन्ड भी जारी किए जा रहे हैं।     फोआन ने कहा कि अगले तीन महीनों में विभिन्न स्थानों पर इस्तेमाल के लिए स्पेशल बॉन्ड फंड की व्यवस्था की जा सकती है।     बैंकों की पूंजी की भरपाई करने और लोन देने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विशेष सरकारी बॉन्ड जारी किए जाएंगे।     सरकार पर जो कर्ज है, उसे भी कम किया जाएगा ताकि सरकार बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च कर सके और नौकरियों की रक्षा में मदद कर सके। भारत पर क्या पड़ेगा असर? चीन के इस पैकेज का असर भारत में साफ दिखाई देगा। सोमवार को जब शेयर मार्केट खुलेगी तो इसमें गिरावट दिखाई दे सकती है। वहीं चीन जिस तरह से अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने में लगा है, इससे निवेशकों में भरोसा पैदा होगा और वह चीन की ओर रुख करेंगे। विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से पैसा निकालकर चीनी मार्केट में निवेश कर सकते हैं। इससे शेयर मार्केट में गिरावट आएगी।

लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया का खाना पर्यावरण के लिए प्रतिकूल

 नई दिल्ली      लेटेस्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट की ओर से एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न दुनिया के सभी जी 20 देशों में सबसे ज्यादा स्थाई और पर्यावरण के अनुकूल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2050 तक कई देश भारत की ही तरह खाद्य उत्पादन और उपभोग का समर्थन करते हैं, तो यह पृथ्वी और पृथ्वी के जलवायु के लिए सबसे कम नुकसानदायक होगा. वहीं, इंडोनेशिया और चीन जी 20 अर्थव्यवस्थाओं में दूसरे स्थान पर हैं,  जिनका डाइट पैटर्न पर्यावरण के मुताबिक है. रिपोर्ट में अमेरिका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के डाइट पैटर्न को सबसे खराब रैंकिंग दी गई है.  इन देशों में अत्यधिक मात्रा में फैटी और शुगरी फूड्स का सेवन जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए बताया गया है कि तो इन देशों में लगभग ढाई अरब लोग ओवरवेट हैं. वहीं, 890 मिलियन लोग मोटापे के शिकार हैं. इस रिपोर्ट में भारत में मिलेट्स के प्रति लोगों को जिस प्रकार से जागरुक किया जा रहा है, उसका भी जिक्र किया गया. मिलेट्स का सेवन भारत में लंबे समय से किया जाता रहा है. मिलेट्स का सेवन करने के लिए भारत में कई कैंपेन भी चलाए जा रहे हैं जिसमें लोगों को इसके फायदों के बारे में बताया जा रहा है. इन  कैंपेन को भारत में मिलेट्स की खपत बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ ही जलवायु के लिए भी अच्छे हैं. भारत मिलेट्स का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 41% हिस्सा है . मिलेट्स की खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई पहल की गई हैं, जिनमें राष्ट्रीय मिलेट अभियान, मिलेट मिशन, और ड्राउट मिटिगेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं . भारतीय भोजन की बात करें तो यहां पर वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन खाने का मिक्सचर मिलता है. यहां पर नॉर्थ साइड पर दाल और गेहूं की रोटी के साथ ही मीट बेस्ड चीजें खाई जाती हैं. वहीं, अगर साउथ की बात करें तो यहां पर चावल और इससे संबंधित फर्मेंटेड फूड्स का सेवन ज्यादा किया जाता है जैसे इडली, डोसा और सांभर आदि. इसके अलावा यहां बहुत से लोग मछली और मीट का भी सेवन करते हैं. देश के पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में मौसमी उपलब्ध मछली को चावल के साथ मुख्य भोजन के रूप में खाया जाता है. वहीं लोग यहां मिलेट्स जैसे जौ, बाजरा, रागी, सोरघम, पर्ल मिलेट, बकव्हीट, चौलाई और दलिया या टूटे हुए गेहूं का भी सेवन करते हैं. इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अगर 2050 तक दुनिया के सभी देश भारत की ही तरह डाइट पैटर्न को अपनाते हैं तो इससे जलवायु परिवर्तन में वृद्धि नहीं होगी, जैव विविधता की हानि नहीं होगी, प्राकृतिक संसाधनों में कमी नहीं आएगी और भोजन की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ेगी. रिपोर्ट में मुख्य रूप से इस बात पर फोकस किया गया है कि स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए. प्रोसेस्ड फूड्स का कम से कम सेवन किया जाए, शाकाहारी और वीगन डाइट ली जाए और खाने की बर्बादी कम से कम की जाए.

देश कैसे तय करते हैं कि युद्ध करना है या नहीं? क्या ये देश शुरू कर चुके हैं तीसरा World War?

नईदिल्ली इन दिनों इजरायल चौथरफा युद्ध लड़ रहा है वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जता रहे हैं, लेकिन इसे लेकर भी कई सवाल उठते हैं कि क्या सच में तीसरा विश्व युद्ध होना इतना आसान है? क्या विश्व युद्ध में कई देश आपस में लड़ते हैं तभी शुरु माना जाता है और विश्व युद्ध होने की परिस्थितियां क्या होती हैं. चलिए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं. क्या होते हैं विश्व युद्ध के कारण? विश्व युद्ध कई कारणों से शुरू हो सकते हैं. जैसे राष्ट्रवाद यानी अपने देश के प्रति अत्यधिक लगाव और अन्य देशों के प्रति घृणा. जब राष्ट्रवाद चरम पर पहुंच जाता है तो युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. या फिर एक शक्तिशाली देश दूसरे देशों पर अपना अधिकार जमाना चाहता है, तो इससे युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी युद्ध का कारण बन सकती है. साथ ही धार्मिक मतभेद भी युद्ध का कारण बन सकते हैं और किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता होने पर पड़ोसी देशों में भी अशांति फैल सकती है और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. क्या विश्व युद्ध में हर देश को भाग लेना होता है? नहीं, हर देश को विश्व युद्ध में भाग लेना जरूरी नहीं होता है. कई बार देश तटस्थ रहने का फैसला करते हैं, लेकिन अगर कोई देश किसी युद्ध में शामिल हो जाता है तो उसके पड़ोसी देशों पर भी युद्ध का असर पड़ सकता है. विश्व युद्ध के होते हैं ये भयानक परिणाम विश्व युद्ध के परिणाम बहुत ही विनाशकारी होते हैं. इसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. युद्ध से देशों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है. साथ ही युद्ध से समाज में अस्थिरता फैल जाती है और युद्ध के बाद देशों के राजनीतिक नक्शे में बदलाव आ सकता है.         अगर नाटो-यूक्रेन हमला करते हैं तो रूस क्या करेगा? तो रूस के पास क्या-क्या विकल्प हैं. – रूस मार्शल लॉ लगाकर अपने टारगेट्स को यूक्रेन तक पहुंचा दे. इसके बाद यूक्रेन के कई शहर गाजा की तरह दिखने लगेंगे. इसके लिए रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन यानी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. – यमन के हूती और अन्य विद्रोही-आतंकी संगठनों को एडवांस हथियार देकर जंग में शामिल करे. इन लड़ाकों के जरिए रूस यूक्रेन और नाटो की सेना पर हमला करे. इससे यूक्रेन और नाटो के बीच Chaos पैदा होगा. – तीसरा रास्ता है रूस के ऊपर घूम रहे दुश्मन के सैटेलाइट्स को मार गिराया जाए. जिसमें अमेरिकी रईस एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी हैं. – चौथा रास्ता है कि रूस नाटो के बाल्टिक और रोमानिया में मौजूद हथियार डिपो और लॉजिस्टिक्स पर हमला करके उसे बर्बाद कर दे. एक तरीका हो सकता है साइबरअटैक का. जिससे नाटो और यूक्रेन परेशान हो सकते हैं. परमाणु परीक्षण कर सकता है रूस ये भी सुनने में आ रहा है कि रूस इस समय एक परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है. ये परीक्षण उसकी अपनी जमीन पर होगा. लेकिन कहां और कब इसका खुलासा नहीं हुआ है. यह परीक्षण किसी भी समय हो सकता है. यह पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका है, ताकि जंग को रोका जा सके. अमेरिका में मौजूद रूस के एंबेसडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ये दूसरा विश्व युद्ध नहीं है कि अमेरिकी पनडुब्बियां पानी के अंदर से आकर अचानक हमला कर देंगी. न उसमें छिप पाएंगी. हम हर जगह से नजर रखे हुए हैं. अगर अमेरिका या नाटो ने हमला किया तो हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. रूस समंदर के अंदर खोज रहा है इंटरनेट केबल नाटो ने कहा है कि रूस इस समय समंदर के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल्स को खोज रहा है. नाटो को लगता है कि रूस इन केबल्स पर हमला करना चाहता है. अगर रूस इन केबल्स को काटता है तो इसका असर पश्चिमी देशों समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.     इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान शांत बैठा है लेकिन वह अपने समर्थन वाले आतंकी समूहों से इजरायल पर ताकतवर हमला करवा रहा है.  ईरान और अमेरिका के तनाव ने मध्य पूर्व में शांति को खतरे में डाल दिया है. उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियां उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइलों की ताकत बढ़ा रहा है. उनके परीक्षण कर रहा है. उसे चीन और रूस का समर्थन हासिल है. वह भी यूक्रेन को हराने में रूस का साथ दे रहा है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सीधे तौर पर रूस के साथ खड़ा होगा. रूस के दुश्मन से जंग लड़ने को तैयार है. अक्सर ही तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलों की धमकी देता रहता है. चीन ताइवान पर घुसपैठ की तैयारी में लगा चीन ताइवान से सिर्फ 350 किलोमीटर दूर एक बड़े पैमाने का एंफिबियस ऑपरेशन कर रहा है. मकसद है ताइवान पर घुसपैठ. इसमें चीन की सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान शामिल हैं. फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स, जंगी जहाज, टैंक्स, बख्तरबंद गाड़ियां और सिविलियन नावें भी शामिल की गई हैं. इस मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से इलाके में तनाव है.

हिजुबल्ला ने इस्राइली नागरिकों से सेना के ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी

बेरूत  लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला ने इस्राइली नागरिकों को चेतावनी जारी की है। हिजुबल्ला ने इस्राइली नागरिकों से इस्राइली सेना के ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है। हिजबुल्ला ने आरोप लगाया है कि इस्राइली सेना उत्तरी सीमा पर रिहायशी इलाकों में अपने बेस बनाकर तैनात है। ऐसे में हिजबुल्ला ने इस्राइली नागरिकों को रिहायशी इलाकों में कथित तौर पर मौजूद फौजी ठिकानों से दूर रहने को कहा है ताकि वे सुरक्षित रहें। हिजबुल्ला ने अरबी और हिब्रू भाषा में जारी किए बयान में कहा कि ‘इस्राइली सेना घरों का इस्तेमाल कर रही है और उन्होंने हाइफा, टिबरिस और एक्रे जैसे बड़े शहरों के रिहायशी इलाकों में मिलिट्री बेस बनाए हुए हैं।’ हिजबुल्ला द्वारा इस्राइल पर मिसाइलों और रॉकेट से हमले किए जा रहे हैं। इस्राइल ने भी जारी की लेबनान के लोगों के लिए चेतावनी वहीं इस्राइली सेना ने भी लेबनान के लोगों को चेतावनी जारी की है। इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला जारी रखते हुए लेबनानी नागरिकों को दक्षिणी क्षेत्र में अपने घरों की तरफ न लौटने की चेतावनी दी। गौरतलब है कि इस्राइली सेना द्वारा लगातार बेरूत और उसके आसपास के इलाकों में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं। इस्राइली हमलों में अब तक लेबनान में 1200 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इस्राइली हमले में हिजबुल्ला के दो कमांडर्स ढेर इससे पहले शुक्रवार को इस्राइल ने हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला कर उसके दो कमांडर्स को ढेर कर दिया। जिन कमांडर्स को इस्राइल ने मारा, उनकी पहचान अहमद मुस्तफा और मोहम्मद अली हमदान के रूप में हुई है। हमदान हिजबुल्ला के एंटी टैंक का कमांडर था। इस्राइल ने लेबनान में अपने मिसाइल हमलों में बेरूत के दाहिया में हिजबुल्ला के कई हथियार डिपो भी तबाह कर दिए हैं। इस बीच नेतन्याहू ने लेबनान को चेतावनी देते हुए कहा है कि हिजबुल्ला को रोकें वरना गाजा जैसा हाल करेंगे।    

थरूर की “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाकर की गई थरूर की कथित “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था। थरूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ दायर मानहानि मामले में निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में शिकायतकर्ता भाजपा नेता राजीव बब्बर और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब तलब किया था। न्यायालय की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ थरूर की याचिका पर सुनवाई करेगी। थरूर ने उच्च न्यायालय के 29 अगस्त के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।  थरूर के वकील ने 10 सितंबर को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय से कहा कि शिकायतकर्ता को मामले में पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता और राजनीतिक दल के सदस्यों को भी पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता। वकील ने दलील दी थी कि थरूर की टिप्पणी मानहानि कानून के प्रतिरक्षा खंड के तहत संरक्षित है, जो यह निर्धारित करता है कि अच्छी सोच के साथ दिया गया बयान आपराधिक नहीं है। वकील ने कहा कि थरूर ने टिप्पणी करने से छह साल पहले कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का संदर्भ दिया था। शीर्ष न्यायालय ने हैरानी जताई थी कि 2012 में उस वक्त यह बयान अपमानजनक नहीं था जब आलेख मूल रूप से प्रकाशित हुआ था। न्यायमूर्ति रॉय ने सुनवाई के दौरान कहा था, “आखिरकार यह एक रूपक है। मैंने समझने की कोशिश की है। यह संदर्भित व्यक्ति (मोदी) की अपराजेयता को दर्शाता है। मुझे नहीं पता कि यहां किसी ने आपत्ति क्यों जताई है।” थरूर के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, प्रधानमंत्री के खिलाफ “शिवलिंग पर बिच्छू” जैसे आरोप “घृणित एवं निंदनीय” हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानि की शिकायत में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर 16 अक्टूबर 2020 को रोक लगा दी थी और पक्षकारों को 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि प्रथम दृष्टया, टिप्पणी से प्रधानमंत्री, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ इसके पदाधिकारियों और सदस्यों की मानहानि हुई है।    

अमेरिकी सेना को जल्द ही मिलेंगे अचूक ‘ड्रोन किलर’, मचाएंगे तबाही, बदलेगी जंग की सूरत

वॉशिंगटन  युद्ध में आज के समय ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन में हथियार भर कर उन्हें दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक तरीके से गिराया जा रहा है। ऐसे में इनसे निपटना एक नई चुनौती है। इटली की कंपनी लियोनार्डो की अमेरिकी सब्सिडरी कंपनी लियोनार्डो DRS ने ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए 8X8 स्ट्राइकर हल्के बख्तरबंद वाहन के नए संस्करण का अनावरण किया है। यह वाहन लेजर के साथ-साथ, 70 एमएम एडवांस्ड लेजर गाइडेड रॉकेट, 30 एमएम ऑटोमैटिक तोप और एडांस्ड सेंसर सिस्टम से लैस है। अमेरिकी सेना के लिए शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम के लिए यह महत्वपूर्ण है। नए स्ट्राइकर प्रोटोटाइप पर ब्लूहेलो का 26 किलोवाट लेजर डायरेक्टेड हथियार लगा है। यह अलग-अलग आकार और प्रकार के ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है। लियोनार्डो डीआरएस में बिजनेस डेवलपमेंट के वरिष्ठ निदेशक एड हाउस ने कहा, ‘यह एक डायरेक्ट एनर्जी क्षमता प्रदान करेगा।’ हथियार 600 किग्रा तक के वजन वाले, 18000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले और 460 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाले ड्रोन को तबाह कर सकता है। क्या है ताकत? लेजर हथियार दुश्मन को मारने की क्षमता बढ़ा देता है। पारंपरिक हथियारों की तुलना में इसे बार-बार लोड किए बिना फायर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वाहन में 70 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट के चार गोले लॉन्च करने की सुविधा है। यह स्ट्राइकर वाहन की ड्रोन को तबाह करने की क्षमता को और बढ़ा देते हैं। रॉकेट एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम II (APKWS II) का हिस्सा हैं, जिन्हें खास तौर से ड्रोन को मारने के लिए बनाया गया है। नवंबर में भारत और अमेरिका ने साथ मिलकर एक ऐसा ही हथियार बनाने पर चर्चा की थी, जिसके जरिए सैनिकों को चीन की सीमा पर लाने ले जाने में मदद मिले। इसमें एंटी टैंक हथियार लगाया जाता। मशीनगन भी लगी है स्ट्राइकर पर 7.62 मिमी मशीन गन भी लगी है, ताकि हवाई और जमीनी दोनों खतरों को खत्म किया जा सके। एडवांस्ड हथियारों की मदद के लिए स्ट्राइकर नए अपडेट किए सेंसर से लैस है। इसमें ड्रोन का पता लगाने और ट्रैक करने वाले सेंसर हैं। साथ ही रडार लगा है। वाहन के सेंसर सूट में संभावित खतरों का पता लगाने और उन्हें वर्गीकृत करने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे भी लगे हैं।

शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी, मद्महेश्वर मेला 23 नंवबर को होगा आयोजित

उखीमठ/मक्कूमठ पंचकेदार में प्रतिष्ठित द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 20 नवंबर को शुभ लग्नानुसार प्रात: काल और तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे तुला लग्न में बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद मद्महेश्वर भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। मद्महेश्वर मेला 23 नवम्बर को आयोजित होगा। मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में आज दशहरे के शुभ अवसर पर पंचांग गणना पश्चात घोषित हुई। मद्महेश्वर मेला और देव डोलियों के शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचने का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली 20 नवंबर को प्रथम पड़ाव गौडार गांव, 21 नवंबर को दूसरे पड़ाव रांसी, 22 नवंबर गिरिया और 23 नवम्बर को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। 23 नवंबर को मद्महेश्वर मेला संपन्न होगा। कपाट बंद होने की तिथि तय करने के अवसर पर पुजारी बागेश लिंग, वेदपाठी यशोधर मैठाणी, नवीन मैठाणी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण, प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी, देवानंद गैरोला, जेई सूरज मलासी, प्रेम सिंह रावत, वीरेश्वर भट्ट, नवीन शैव, वर्ध जमलोकी, सत्यप्रसाद सेमवाल, शंकर स्वामी, पंच गौंडार से मदन पंवार (भंडारी) ब्राह्मण खोली पंडितगण सहित पंचगाई हक हकूहकधारी आदि मौजूद थे। इसी तरह तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट तुला लग्न में सोमवार 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे को बंद होंगे। कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में तय हुई।  इस अवसर पर मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी, पुजारी भारत मैठाणी, मुकेश मैठाणी, उमादत्त, विनोदमैठाणी, आचार्य रविंद्र मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद, शांति प्रसाद, शेखर चंद्र, क्षेत्र पंचायत सदस्य जयबीर नेगी, दिलवर नेगी और हक-हकूकधारी आदि मौजूद रहे। लाखों तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ प्रभारी/प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी और प्रबंधक बलबीर नेगी ने संयुक्त बयान में बताया कि इस यात्रा वर्ष 13372 श्रद्धालु द्वितीय केदार मद्महेश्वर पहुंचे और 140322 से अधिक तीर्थयात्रियों ने तृतीय केदार तुंगनाथ के दर्शन किये। कपाट बंद होने के बाद तृतीय केदार तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली 4 नवंबर को प्रथम पड़ाव चोपता पहुंचेगी‌। इसके बाद पांच नवंबर को भनकुन गुफा, 06 नवंबर को भी भनकुन प्रवास करेगी और गुरुवार 07 नवंबर को शीतकाल गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ मंदिर गर्भ गृह में शीतकाल के लिए विराजमान हो जाएगी।  

13 अक्टूबर की सुबह तक मध्य अरब सागर पर दबाव में तब्दील, कई राज्यों में मौसम में बदलाव होगा और जबरदस्त बारिश होगी

नई दिल्ली पूर्व मध्य अरब सागर पर बना कम दबाव का क्षेत्र के पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है और आज 13 अक्टूबर की सुबह तक मध्य अरब सागर पर दबाव में तब्दील हो जाएगा। इसकी वजह से कई राज्यों में मौसम में बदलाव होगा और जबरदस्त बारिश होगी। दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक, केरल, माहे, तमिलनाडु में अगले पांच से छह दिनों तक भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 14-16 अक्टूबर के बीच भारी बरसात होने की संभावना है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, उत्तरी इंटीरियर कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, असम, मेघलय, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, अरुणाचल प्रदेश, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में मॉनसून की वापसी के आसार बन रहे हैं। कैसा रहेगा दक्षिण भारत का मौसम? मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 14-16 अक्टूबर के बीच बहुत भारी बरसात होगी। इसके अलावा, केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 12, 13 और 17 अक्टूबर, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 14-17 अक्टूबर, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में 12-16 अक्टूबर के बीच तेज बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, अंडमान और निकोबार द्वीप में 12 अक्टूबर को तेज बारिश की संभावना है। पश्चिमी और मध्य भारत के राज्यों की बात करें तो कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में बारिश का अलर्ट है। इसमें से मध्य महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर, गुजरात में 12, 13, पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 12 अक्टूबर को तेज बारिश होने वाली है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत में इस हफ्ते तक बारिश नहीं होने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में 6 वर्षों में ग्रामीण व शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ

नई दिल्ली  देश में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर फोर्स में काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 साल में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बेरोजगारी दर में 50 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 वर्षों में ग्रामीण हो या शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है। दोगुने से ज्यादा हुई मुस्लिम महिलाओं की संख्या जॉब करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी 6 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में सिर्फ 9 फीसदी मुस्लिम महिलाएं नौकरी करती थीं। अब इसमें 2.3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यानी अब 20.7 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जॉब करती हैं। मुस्लिम महिलाओं के बाद सिख महिलाओं के जॉब करने की संख्या में तेजी आई है। 6 वर्षों में यह 11 सिर्फ से बढ़कर 24.6 फीसदी हो गया है। इसमें 124 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद हिंदू महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है। इसमें करीब 84 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन 6 वर्षों में यह आंकड़ा 17.6 फीसदी से बढ़कर 32.3 फीसदी हो गया है। क्रिश्चियन महिलाओं की संख्या 80 फीसदी बढ़ी है। 6 साल पहले 20.2 फीसदी क्रिश्चियन महिलाएं जॉब करती थीं। अब यह आंकड़ा 36.3 फीसदी है। एसटी वर्ग की महिलाएं सबसे आगे सबसे ज्यादा जॉब अनुसूचित जनजाति महिला की महिलाएं करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या 46 फीसदी है। अनपेड जॉब करने वाले भी कम नहीं रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो बिना सैलरी या भत्ते के नौकरी करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन 6 वर्षों में 16 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं यानी 2.8 करोड़ हर साल। इनमें से सालाना एक करोड़ ऐसी नौकरियां हैं जो परिवार के बिजनस से जुड़ी हैं। या फिर ऐसे लोग हैं जो सेल्फ एम्प्लॉइड हैं। इनमें काम करने वालों को कोई सैलरी नहीं मिलती। यानी ये अनपेड जॉब करते हैं।

दोस्त रूस ने अत्‍याधुनिक आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना, चीन को दिया झटका

मास्‍को यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच रूस को भारत से भी जमकर मदद मिली है। भारत ने रूस से बहुत बड़े पैमाने पर तेल खरीदा है। वह भी त‍ब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच रूस ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है। रूस ने अत्‍याधुनिक गैर परमाणु आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना है। रूस ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि आर्कट‍िक क्षेत्र में नादर्न सी रूट का विकास किया जाए और पश्चिमी देशों के लगाए हुए प्रतिबंधों को मात दी जाए। इस समुद्री रास्‍ते के लिए भी रूस ने भारत को ऑफर दिया है। रूस के इस ऑफर से न केवल दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में मजबूती आएगी बल्कि इससे भारत आर्कटिक क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। भारत सरकार दो जहाज बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि गैर परमाणु आइसब्रेकर को तैयार किया जा सके। इस पूरे सौदे की कीमत 6000 करोड़ रुपये होगी। इस पूरे सौदे को रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्‍टोम का भी साथ म‍िल रहा है। रूसी कंपनी अच्‍छे माहौल वाली और क्षमता से लैस भारतीय कंपनी की तलाश कर रही है। वह भी तब जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। नादर्न सी रूट से क्‍या होगा फायदा ? यूरेशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2023 में रूस ने खुलासा किया था कि उसने भारत को गैर परमाणु आइसब्रेकर बनाने का प्रस्‍ताव दिया है। इनका संयुक्‍त उत्‍पादन किया जाना है। दरअसल, रूस चाहता है कि जहाजों के जरिए होने वाले वैश्विक व्‍यापार के लिए नादर्न सी रूट को विकसित किया जाए जो एक वैकल्पिक रास्‍ता होगा। इससे स्‍वेज नहर की तुलना में उत्‍तरी यूरोप और पूर्वी एशिया के देशों को ज्‍यादा जल्‍दी से सामान पहुंचाया जा सकेगा। रूस का लक्ष्‍य है कि इस रास्‍ते से कम से कम 15 करोड़ टन कच्‍चा तेल, एलएनजी, कोयला और अन्‍य सामान साल 2030 तक हर साल पहुंचाए जाएं। रूस चाहता है कि इसके लिए कम से कम 50 आइसब्रेकर और बर्फ में चलने वाले जहाज इस रास्‍ते में तैनात किए जाएं। साथ ही नए बंदरगाहों, टर्मिनल और आपातकालीन जहाज बनाए जाएं। आर्कटिक का समुद्री इलाका 6 महीने बर्फ में ढंका रहता है। यही वजह है कि आइसब्रेकर की आगे बहुत जरूरत पड़ेगी। पुतिन और पीएम मोदी के बीच मुलाकात में जहाजों के निर्माण को लेकर सहमति बनी थी। असल में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यूरोपीय शिपयार्ड रूस के लिए जहाज नहीं बना पा रहे हैं। वहीं चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के शिपयार्ड कम से कम साल 2028 तक के लिए बुक हैं। चीन की चाल को मात देगा भारत इसी वजह से रूस को अब विकल्‍प के रूप में भारत की मदद लेनी पड़ रही है जो उसका भरोसेमंद पार्टनर है। वहीं विश्‍लेषकों का कहना है कि रूस भारत के साथ दोस्‍ती बढ़ाकर चीन को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस बुरी तरह से चीन पर निर्भर हो गया है। चीन चाहता है कि नादर्न सी रूट पर उसकी पकड़ बढ़े और वह रूस के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहा है। वह इसे बीआरआई का हिस्‍सा बता रहा है। वहीं यह पूरा इलाका तेल और गैस से भरा हुआ है जिससे आने वाले समय में व्‍यापार बहुत ज्‍यादा बढ़ने की संभावना है।

17 नवंबर को रात नाै बजकर सात मिनट पर विधिविधान बदरीनाथ धाम के कपाट साथ बंद होंगे

गोपेश्वर दशहरे के मौके पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है। आगामी 17 नवंबर को रात नाै बजकर सात मिनट पर विधिविधान के कपाट साथ बंद होंगे। इस यात्रा वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार 17 नवंबर रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि कपाट बंद होने की तिथि आज विजय दशमी के अवसर पर श्री बदरीनाथ धाम मंदिर परिसर में पंचाग गणना पश्चात समारोहपूर्वक तय की गयी। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे। सरकार एवं मंदिर समिति के प्रयासों से सभी यात्री सुविधाएं मुहैया हुई है। कुल 38 लाख तीर्थयात्री पहुंचे चारधाम अभी तक 11 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। साढ़े 13 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री केदारनाथ धाम दर्शन को पहुंचे हैं। इस तरह साढ़े 24 लाख तीर्थयात्रियों ने श्री बदरीनाथ -केदारनाथ के दर्शन कर लिए हैं। कुल 38 लाख तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर पहुंचे हैं। मां नवदुर्गा तिला भराड़ी मंदिर में कन्या पूजन के साथ पूजा अर्चना की नवरात्रि के नौवे दिवस के अवसर पर बदरीनाथ मार्ग कंचनगंगा में क्षेत्र की अराध्य देवी मां नवदुर्गा तिला भराड़ी मंदिर में कन्या पूजन तथा मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) उपाध्यक्ष किशोर पंवार सपरिवार माता के मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना में शामिल हुए तथा क्षेत्र के सुख- शांति का आशीर्वाद मांगा। इस अवसर जय मां नंदा समिति अध्यक्ष राजदेव मेहता एवं पदमेंद्र भंडारी ने बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार का शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। माता के मंदिर में जय मां नन्दा समिति बामणी , पांडुकेश्वर के सौजन्य से विशाल भण्डारा का आयोजन किया गया इससे पहले मां दुर्गा की पूजा अर्चना के पश्चात कन्या पूजन तथा प्रसाद वितरण किया गया। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि विजय दशमी के दिन श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर दुर्गा पूजा का यज्ञ हवन के साथ समापन होना है।  इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार सहित अध्यक्ष राजदेव मेहता,पदमेंद्र भंडारी, अमित पंवार , सुधीर मेहता, वीरेंद्र भंडारी, रणजीत भंडारी आदि मौजूद रहे।

महाराष्ट्र में RSS के जुलूस के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर नारेबाजी की, इलाके में तनाव, दो FIR दर्ज

मुंबई दशहरा से एक दिन पहले महाराष्ट्र के रत्नागिरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जुलूस के दौरान तनाव पैदा हो गया। जानकारी के मुताबिक जुलूस के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर नारेबाजी की। इससे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया। रत्नागिरी के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार रात को कोंकण नगर इलाके में यह घटना हुई। इसके बाद पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब दशहरा उत्सव की पूर्व संध्या पर आरएसएस ने इलाके में पथ संचलन किया तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे लगाए। हालांकि कोई हिंसा नहीं हुई। मगर रात को लोगों की भीड़ थाने में जुट गई। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अधिकारी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने शिकायतों के आधार पर दो मामले दर्ज किए हैं। पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उन्हें नोटिस जारी कर दिए हैं। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। भागवत ने विजयादशमी पर क्या कहा? नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधि कियाा। उन्होंने हिंदुओं से एक होने की अपील की। भागवत ने बांग्लादेश का उदाहरण दिया और कहा कि पहली बार हिंदू एकजुट हुए और अपनी रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि जब तक अत्याचार करने की कट्टरपंथी प्रकृति बनी रहेगी तब तक न केवल हिंदू बल्कि सभी अल्पसंख्यक खतरे में रहेंगे। कमजोरी कोई विकल्प नहीं संघ प्रमुख ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह भारत के हिंदुओं के लिए भी सीख है। हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में जो कुछ हुआ? इसके कुछ तात्कालिक कारण हो सकते हैं और जो लोग चिंतित हैं, वे इस पर चर्चा करेंगे। मगर मूल मुद्दा हिंदुओं के खिलाफ बार-बार हो रहा अत्याचार है। भागवत ने आगे कहा कि अगर हम कमजोर हैं तो हम अत्याचार को आमंत्रित कर रहे हैं। हम जहां भी हैं, हमें एकजुट और सशक्त होने की जरूरत है। कमजोरी कोई विकल्प नहीं है। बांग्लादेश पर भड़के भागवत भागवत ने कहा कि बांग्लादेश में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि उन्हें पाकिस्तान का साथ देना चाहिए क्योंकि उसके पास परमाणु शक्ति है और उन्हें भारत से खतरा है। उन्होंने कहा कि जिस देश को उसके निर्माण में पूरा समर्थन मिला, वह अब भारत के खिलाफ इस तरह के बयान को बढ़ावा दे रहा है।

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी, कहा- ’20 सीटों पर हुआ घपला’

नई दिल्ली हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जहां हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान उम्मीदवारों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। ईवीएम की बैटरी पर सवाल एएनआई से बात करते हुए खेड़ा ने कहा, हमने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जिसके बारे में हमारे उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने की लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। यह मुद्दा मतगणना के दिन उठाया गया था, यह एक अजीब संयोग है कि जिन मशीनों में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज दिखाई गई, वे वही मशीनें थीं, जिन पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। 60-70 प्रतिशत बैटरी चार्ज वाली मशीनें वे थीं, जिन पर कांग्रेस जीती। ऐसा क्यों हुआ? आयोग से कार्रवाई करने की मांग कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आयोग इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और उचित निर्देश देगा। पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “9 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायतों से भरा ज्ञापन सौंपा था। इसे आगे बढ़ाते हुए आज हमने हरियाणा के 20 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर और स्पष्ट अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक अद्यतन ज्ञापन दिया है। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा और उचित निर्देश जारी करेगा।” इन 20 सीटों के नाम शामिल हरियाणा के जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों पर कांग्रेस ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है, उनमें नारनौल, करनाल, डबवाली, रेवाड़ी, होडल, कालका, पानीपत सिटी, इंद्री, बड़खल, फरीदाबाद एनआईटी, नलवा, रानिया, पटौदी (एससी), पलवल, बल्लभगढ़, बरवाला, उचाना कलां, घरौंडा, कोसली और बादशाहपुर शामिल हैं। इससे पहले केसी वेणुगोपाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अशोक गहलोत, प्रताप सिंह बाजवा, जयराम रमेश, पवन खेड़ा, अजय माकन और उदय भान सहित कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए चुनाव आयोग से मिलने गया था। मशीनें सील करने की मांग कांग्रेस नेताओं की चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए खेड़ा ने कहा था कि मतगणना के दिन कुछ मशीनें 99 प्रतिशत और अन्य सामान्य मशीनें 60-70 प्रतिशत पर थीं। हमने मांग की कि जांच पूरी होने तक उन मशीनों को सील और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। हमने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि अगले 48 घंटों में हम बाकी शिकायतें भी उनके सामने पेश करेंगे।

माली में बारिश और बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानियों, अब तक 177 लोगों की मौत, 148 घायल

बमाको माली में बारिश के मौसम की शुरुआत से आई बाढ़ से कम से कम 177 लोगों की मौत हो गई है। बारिश और बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को माली के इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी फॉर क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाढ़ की 656 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 148 लोग घायल हुए और 37,999 घर ढह गए। इस बाढ़ से 47,955 परिवारों के 264,646 लोग प्रभावित हुए हैं। माली के शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि 128 पब्लिक स्कूल बाढ़ पीड़ितों के आश्रय के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं। 167 स्कूल पानी में डूबे हुए हैं और 256 स्कूलों की इमारतें ढह गई हैं। देश भर में भारी बारिश जारी है, जिससे नदियां और उनकी सहायक नदियां उफान पर हैं। अधिकारियों ने बार-बार निवासियों से बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों को खाली करने, पैदल, बाइक या कार से बाढ़ वाली सड़कों पर जाने से बचने का आग्रह किया है। साथ ही नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे उफनती नदियों से दूर रहें और भारी बारिश के दौरान घर के अंदर रहें। माली सरकार ने 23 अगस्त को राष्ट्रीय आपदा की घोषणा की थी, जिसके कारण स्कूलों के नए सत्र की शुरुआत 1 अक्टूबर से 4 नवंबर तक स्थगित कर दी गई।

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