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पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर किया नमन

नई दिल्ली  ‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ का नारा देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शनिवार को 123वीं जयंती है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई नेताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का एक वीडियो पोस्ट किया। पीएम मोदी ने कैप्शन में लिखा, “अपने प्रखर राष्ट्रवादी विचारों से मां भारती को गौरवान्वित करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जन्म-जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। मातृभूमि के लिए उनका समर्पण और त्याग देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।” वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूं। देश की एकता व अखंडता के लिए संघर्ष करने की जब-जब बात आएगी, डॉ मुखर्जी जी जरूर याद आएंगे। चाहे बंगाल को देश का हिस्सा बनाये रखने के लिए उनका संघर्ष हो या ‘एक निशान, एक प्रधान, एक विधान’ के संकल्प के साथ जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान देना हो, देश की अखंडता के उनके अद्वितीय प्रयासों के लिए प्रत्येक भारतीय उनका ऋणी है। जनसंघ की स्थापना से देश को वैचारिक विकल्प प्रदान करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी राष्ट्रप्रथम के पथ पर चिरकाल तक दिग्दर्शक रहेंगे।” इनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा, “श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र प्रथम के सिद्धांतों पर चलकर राष्ट्र के वैभव और सम्प्रभुता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिए। कश्मीर हो या बंगाल, अखंडता के लिए उनके बलिदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा। आज उनकी जयंती पर शत-शत नमन करता हूं। मां भारती के अमर सपूत डॉ. मुखर्जी जी के संघर्ष, समर्पण व देश के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में विराट योगदान सदैव हमें मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।” बता दें कि डॉ. मुखर्जी को एक ही देश में दो झंडे और दो निशान स्वीकार नहीं थे। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने की शुरुआत सबसे पहले उन्होंने ही की थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के अधूरे सपनों को साकार किया।      

मोदी सरकार का बजट 23 जुलाई को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सातवीं बार पेश करेंगी

नई दिल्ली देश में 18वीं लोकसभा के गठन के बाद अब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है. केंद्रीय बजट 2024 की तारीखों का ऐलान भी हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को संसद में बजट पेश करेंगी. दरअसल, 18वीं लोकसभा का पहला सत्र समाप्त हो चुका है. इसमें नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण हुआ और लोकसभा व राज्यसभा की संयुक्त बैठक हुई थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित किया था. अब सबकी निगाहें बजट सत्र पर टिकी हैं. 22 जुलाई से 12 अगस्त तक संसद सत्र चलेगा. 1 फरवरी 2024 को पेश हुआ था अंतरिम बजट इस साल अप्रैल में लोकसभा चुनाव होने थे, लिहाजा सरकार ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का छठा बजट था। इसमें गरीब, महिला, युवा और अन्‍नदाता, यानी किसान फोकस में दिखे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बजट सत्र की जानकारी अपने एक्स हैंडल पर दी. उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “भारत सरकार की संस्तुति पर भारत की माननीय राष्ट्रपति ने बजट सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को 22 जुलाई, 2024 से 12 अगस्त, 2024 तक बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है (संसदीय कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन). केंद्रीय बजट 2024-25, 23 जुलाई, 2024 को लोकसभा में पेश किया जाएगा.” टैक्सपेयर्स को मिल सकती है राहत केंद्रीय बजट 2024 की तारीखें घोषित होने के साथ ही, इस बात की काफी उम्मीदें और अटकलें लगाई जा रही हैं कि वित्त मंत्री मोदी 3.0 सरकार के तहत टैक्सपेयर्स के लिए कुछ लाभों की घोषणा कर सकती हैं. वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार केंद्रीय बजट में ग्रामीण आवास के लिए राज्य सब्सिडी बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगी. निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज होगा अनोखा रिकॉर्ड बता दें कि इस साल दो बार बजट पेश हो रहा है. 1 फरवरी 2024 को अंतरिम बजट पेश किया गया था. लेकिन अब नई सरकार का गठन होने के बाद पूर्ण केंद्रीय बजट पेश होने जा रहा है. इस बार बजट पेश करने के साथ ही वर्तमान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा. कारण, ऐसा करके वह लगातार सात केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी. इस मामले में वह मोरारजी देसाई को पीछे छोड़ देंगी. देसाई ने लगातार छह बजट पेश किए थे.   फुल और अंतरिम बजट होता क्या है? इनमें क्या अंतर है? केंद्रीय बजट देश का सालाना फाइनेंशियल लेखा-जोखा होता है। यूं कहें कि बजट किसी खास वर्ष के लिए सरकार की कमाई और खर्च का अनुमानित विवरण होता है। बजट के जरिए सरकार यह तय करने का प्रयास करती है कि आगामी वित्त वर्ष में वह अपनी कमाई की तुलना में किस हद तक खर्च कर सकती है। सरकार को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में बजट पेश करना होता है। भारत में वित्त वर्ष का पीरियड 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। वहीं अंतरिम बजट सरकार को आम चुनावों का फैसला होने और नई सरकार बनने के बाद फुल बजट की घोषणा करने तक, देश को चलाने के लिए धन उपलब्ध कराता है। अंतरिम बजट शब्द आधिकारिक नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसे वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है।

अबतक150000 से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के किए दर्शन, सावन से पहले ही अदृश्य हुए बाबा बर्फानी

श्रीनगर कश्मीर में अमरनाथ मंदिर में पिछले सात दिनों में 1.50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। वहीं 5 हजार 871 यात्रियों का एक और जत्था शनिवार को कश्मीर के लिए रवाना हुआ।श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि सात दिनों में अब तक 1.50 लाख से अधिक तीर्थयात्री यात्रा कर चुके हैं। एसएएसबी के अधिकारियों ने बताया, “आज 5,871 यात्रियों का एक और जत्था दो सुरक्षा काफिलों के साथ जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से घाटी के लिए रवाना हुआ। इनमें से 2,112 यात्रियों का पहला जत्था 110 वाहनों में सवार होकर सुबह 2:50 बजे उत्तरी कश्मीर के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ, जबकि 3,759 यात्रियों को लेकर 134 वाहनों का दूसरा काफिला सुबह 3:50 बजे दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।” अधिकारियों ने कहा, “यात्रा 29 जून को शुरू होने के बाद से बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चल रही है।” श्रद्धालु या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम गुफा मंदिर मार्ग से यात्रा करते हैं या फिर 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग गुफा मंदिर के अंदर ‘दर्शन’ करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौट आते हैं। दोनों मार्गों पर और पारगमन शिविरों ताथ गुफा मंदिर में 124 से अधिक लंगर (सामुदायिक रसोई) बनाये गए हैं। इस साल की यात्रा के दौरान 7 हजार से ज्यादा सेवादार यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। पहली बार सातवें दिन ही अदृश्य हुए बाबा बर्फानी अमरनाथ गुफा मंदिर  में यात्रा शुरू होने के सातवें ही दिन बाबा बर्फानी अदृश्य हो गए हैं। इससे पहले भी बाबा बर्फानी अदृश्य हो चुके हैं। सावन के महीने में शिवलिंग पिघल जाती है। हालांकि, इस बार सावन का महीना शुरू होने के 16 दिन पहले ही बाबा बर्फानी अदृश्य हो गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि 7 दिनों में ही बाबा बर्फानी गायब हो गए हैं। अब अमरनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा के ही दर्शन होंगे। क्या रहा कारण? अमरनाथ गुफा मंदिर  में शिवलिंग पिघलने की वजह अधिकारियों ने गर्मी बताई है। रोकी गई अमरनाथ यात्रा अमरनाथ में एक तरफ बाबा बर्फानी के गायब होने की वजह से श्रद्धालु नाराज है, तो वहीं दूसरी तरफ बारिश के चलते अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है। बता दें कि जम्मी-कश्मीर में भारी बारिश हो रही है। बारिश की वजह से अमरनाथ यात्रा को अस्‍थायी रूप से रोक दिया गया है। 29 जून को शुरू हुई थी यात्रा इस साल 29 जून 2024 से अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra 2024) की शुरुआत हुई थी। इस बार श्रद्धालु भारी संख्या में वहां पहुंचे हैं। बीते 6 दिनों में बाबा बर्फानी के दर्शन करने आए भक्तों का आंकड़ा 1 लाख को पार कर चुका है। श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा की शुरुआत के बाद से अब तक छह दिनों में 1 लाख 30 हजार 189 लोगों ने पवित्र गुफा बैठे बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इस बार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आई भक्तों की संख्या ने पिछले सारे रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है। पिछले 6 दिनों में 1 लाख से ज्यादा भक्तों ने अपनी यात्रा को पूरा कर लिया है। 7वें दिन कितने श्रद्धालु पहुंचे अमरनाथ? अमरनाथ गुफा मंदिर  में 7वें दिन 6 हजार से ज्यादा यात्री जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से अमरनाथ पवित्र गुफा की ओर रवाना हुए। एक अधिकारी के मुताबिक, गुरुवार को 259 वाहनों में सवार 6919 तीर्थयात्री जम्मू से कश्मीर घाटी की पहलगाम और बालटाल पहुंचे थे। 19 अगस्त को समाप्त होगी यात्रा इस बार 29 जून को अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हुई थी, जो कि 19 अगस्त को समाप्त होगी। पहले भी अदृश्य हो चुके हैं बाबा अमरनाथ गुफा मंदिर (Amarnath Yatra 2024) में पिछले साल बाबा बर्फानी 14 दिन में अदृश्य हो गए थे। वहीं,  साल 2016 में 13 दिन बाद अदृश्य हुए थे। क्या है शिवलिंग पिघलने की वजह? अमरनाथ गुफा मंदिर (Amarnath Yatra 2024) में पिछले कई सालों से पवित्र हिम शिवलिंग पिघलकर गायब हो चुकी है। बीते कई सालों से शिवलिंग लगातार समय से पहले ही पिघल रही है। ये सिलसिला 2006 से जारी है। इसके पीछे की वजह ग्लोबल वार्मिंग बताई गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अमरनाथ गुफा में समय से पहले शिवलिंग के पिघलने का कारण ग्लोबल वार्मिंग माना है। ऐसे होता है शिवलिंग का निर्माण बता दें कि अमरनाथ में ये पवित्र गुफा 90 फीट लंबी और 150 फीट ऊंची है। ऐसा माना जाता है कि गुफा में जल की बूंद टपकती है, उस वजह से ही शिवलिंग बनता है। उसके बाद चंद्रमा के घटने बढ़ने के साथ बर्फ से बने शिवलिंग के आकार में परिवर्तन होता है और अमावस्या तक शिवलिंग धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।

हमास चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौते को अमल में लाने को तैयार, पहले चरण में बंधकों की रिहाई

गाज़ा हमास के खिलाफ इजरायल की जंग आज भी जारी है। हालांकि इसके खत्म होने की आहट सुनाई देने लगी है। हमास के एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से शनिवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि हमास गाजा में नौ महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से किए गए समझौते को अमल में लाने के लिए तैयार हो गया है। पहले चरण के 16 दिन बाद इजरायली बंधकों को रिहा करने के लिए वार्ता शुरू करने के लिए अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। फिलिस्तीनी संगठन ने मांग की है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले इजरायल को पहले एक स्थायी युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। छह सप्ताह के पहले चरण के दौरान इसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। मध्यस्थता के माध्यम से किए गए युद्धविराम प्रयासों में शामिल एक फिलिस्तीनी अधिकारी ने कहा था कि यदि इजरायल सहमत होता है तो यह प्रस्ताव समझौते के रूप में परिणत हो सकता है। इसके साथ ही पिछले साल 7 अक्टूबर को शुरू हुए गाजा युद्ध को समाप्त कर देगा। आपको बता दें कि इस युद्ध मां गाजा में 38000 से अधिक लोग मारे गए हैं। हमास के आतंकवादियों द्वारा हवाई, भूमि और समुद्र के रास्ते दक्षिणी इजरायली शहरों पर हमला करने के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था। उन्होंने लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया जबकि हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए। हमास सूत्र ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव से यह सुनिश्चित होता है कि मध्यस्थ अस्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की आपूर्ति और इजरायली सैनिकों की वापसी की गारंटी देंगे। समझौते के दूसरे चरण को लागू करने के लिए अप्रत्यक्ष वार्ता जारी रहेगी। इजरायली हमले में सात फिलिस्तीनी मारे गए फिलिस्तीन के उत्तरी वेस्ट बैंक में जेनिन शहर और उसके शरणार्थी शिविर में इज़रायली हवाई हमले और गोलीबारी में सात फिलिस्तीनी मारे गए। फिलिस्तीनी सुरक्षा सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। फ़िलिस्तीनी सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि एक इज़रायली ड्रोन ने जेनिन शिविर में युवाओं के एक समूह को निशाना बनाया और इज़रायली सेना ने फ़िलिस्तीनी आतंकवादियों की ओर से की गयी गोलीबारी पर जवाबी कार्रवाई करते हुए जेनिन के पश्चिम में एक घर को घेर लिया। सूत्रों ने बताया कि इसके बाद इज़रायली सेना ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया और फिर घर पर कई ”एनर्जा” ग्रेनेड से हमला किया। जेनिन में रेड क्रिसेंट एम्बुलेंस अधिकारी महमूद अल-सादी ने बताया कि इज़रायली सेना ने इलाके को चारों ओर से घेर लिया है, जिससे एम्बुलेंस चालक दल घेरे हुए घर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।  

पति की हत्या के आरोप में 12 साल से जेल में बंद पत्नी को ओडिशा हाईकोर्ट ने बरी कर दिया

भुवनेश्वर  पति की हत्या के आरोप में 12 साल से जेल में बंद पत्नी को ओडिशा हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। महिला को निचली अदालत ने पति की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसलो को न्याय का दुरुपयोग बताते हुए फैसला पलटा दिया है। हाईकोर्ट ने 64 साल की हो चुकी महिला को बरी कर दिया है। साथ ही निचली अदालत को उसले फैसले पर फटकार भी लगाई है। बता दें कि सुनिता मुंडारी नामक यह महिला 64 साल की हो चुकी हैं। आरोपी पक्ष के अनुसार 28 नवंबर, 2011 को सुंदरगढ़ के झिरपानी गांव में सुनीता ने अपने पति मंगल पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। राउरकेला की एक सत्र अदालत ने 20 दिसंबर, 2014 को उसे दोषी ठहराया था। सुनीता ने उसी साल हाईकोरट में में अपील की थी। गुरुवार को जस्टिस एस के साहू और चित्तरंजन दास की HC बेंच ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी सुनीता के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत को लगाई फटकार बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद हालात यह निष्कर्ष निकालने के लिए पूरी कड़ी नहीं जोड़ते कि महिला ने ही अपराध किया था। बेंच ने कहा कि निचली अदालत के फैसले जायज़ नहीं हैं। अपीलकर्ता के पक्ष में मौजूद बातों को नरअंदाज किया गया है और इस तरह यह न्याय का दुरुपयोग है। महिला की रिहाई के आदेश दिए हाईकोर्ट ने IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत निचली अदालत द्वारा सुनीता को दी गई सज़ा को रद्द करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया। बेंच ने कहा कि निचली अदालत बिना किसी सीधे सबूत के इस नतीजे पर पहुंच गई थी कि सुनीता ने हत्या की है। बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामलों में हमेशा यह खतरा बना रहता है कि अनुमान या संदेह कानूनी सबूत की जगह ले सकते हैं।

ब्रिटेन के 58वें प्रधानमंत्री बने कीर स्टार्मर, 45 वर्षीय रेचेल रीव्स ब्रिटेन की पहली महिला वित्त मंत्री बनीं

 लंदन ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपना नया कैबिनेट नियुक्त कर दिया है। इस कैबिनेट में एंजेला रेनर को डिप्टी पीएम और रेचल रीव्स को देश की पहली महिला चांसलर ऑफ द एक्सचेकर बनाया गया है। स्टारमर के मंत्रिमंडल में 25 सदस्यों की टीम में रिकॉर्ड 11 महिलाएं शामिल हैं। नए कैबिनेट में यवेट कूपर को गृह मंत्री, डेविड लैमी को विदेश मंत्री और जॉन हीली को रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। अन्य नियुक्तियों में शबाना महमूद को न्याय मंत्री, वेस स्ट्रीटिंग को स्वास्थ्य मंत्री, ब्रिजेट फिलिप्सन को शिक्षा मंत्री और एड मिलिबैंड को ऊर्जा मंत्री बनाया गया है। शुक्रवार को डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले भाषण में, स्टारमर ने देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को वापस पटरी पर लाने, ब्रिटिश सीमाओं को सुरक्षित करने और स्कूलों और किफायती घरों की आवश्यकता को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “हमारे देश ने बदलाव और राजनीति को सार्वजनिक सेवा में वापस लाने के लिए निर्णायक रूप से मतदान किया है।” हालांकि, स्टारमर ने कहा कि “देश को बदलना स्विच दबाने जैसा नहीं है”, उन्होंने कहा कि दुनिया “अधिक अस्थिर” हो गई है। उन्होंने कहा कि बदलाव का काम तुरंत शुरू होगा, लेकिन इसमें समय लगेगा। नए प्रधानमंत्री का फोकस उन चीजों पर है, जिनके इर्द-गिर्द देश के कामकाजी वर्ग के परिवार अपना जीवन बना सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैं आपसे अभी पूछूं कि क्या आपको लगता है कि ब्रिटेन आपके बच्चों के लिए बेहतर होगा, तो मैं जानता हूं कि आप में से बहुत से लोग कहेंगे नहीं – और इसलिए मेरी सरकार तब तक लड़ेगी जब तक आप फिर से यह विश्वास नहीं कर लेते कि देश आपके बच्चों के लिए बेहतर होगा।” स्टार्मर ने सुनक की तारीफ की, कहा- अब रीसेट का समय जीत के बाद स्टार्मर ने स्पीच दी। उन्होंने पूर्व पीएम ऋषि सुनक की मेहनत को सलाम किया। लोगों से कहा कि चाहे आपने हमें वोट किया हो या नहीं, मेरी सरकार आप सब के लिए काम करेगी। अब ‘रीसेट’ का समय आ गया है। हालांकि, हालातों को बदलने में समय लगेगा। मैं एक-एक ईंट जोड़कर देश को फिर से बनाऊंगा। पीएम मोदी ने ब्रिटेन के नए PM को दी शुभकामनाएं ब्रिटेन के आम चुनाव में जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि वे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने ऋषि सुनक के नेतृत्व की सराहना की और अपने कार्यकाल के दौरान भारत और ब्रिटेन के संबंधों को प्रगाढ़ करने में उनके ‘सक्रिय योगदान’ के प्रति आभार जताया।

नकली शराब पीने वालों को मुआवजा देने से मना किया जाना चाहिए तथा उन्हें पीड़ित नहीं माना जाना चाहिए, HC में याचिका

चेन्नई तमिलनाडु की सरकार के द्वारा कल्लकुरिची शराब त्रासदी के सभी पीड़ितों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश को रद्द करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। मोहम्मद गौस द्वारा दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मुआवजे की राशि अधिक है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा, “जहरीली शराब के शिकार लोग स्वतंत्रता सेनानी या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थे। उन्होंने आम जनता या समाज के लिए अपनी जान गंवाई नहीं गंवाई है। नकली शराब पीकर अवैध कार्य किया और उनकी जान गई।” गौस के अनुसार, नकली शराब पीना एक अवैध कार्य है। राज्य को उन लोगों पर दया नहीं करनी चाहिए, जिन्होंने नकली शराब पीकर अवैध कार्य किया और उनकी जान चली गई। उन्होंने कहा कि मुआवजा केवल दुर्घटनाओं के पीड़ितों को दिया जाना चाहिए, न कि उन लोगों को जिन्होंने अपने आनंद के लिए अवैध कार्य किया हो। उन्होंने कहा कि नकली और जहरीली शराब त्रासदी के सभी पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश अनुचित और मनमाना है। नकली शराब पीने वालों को मुआवजा देने से मना किया जाना चाहिए तथा उन्हें पीड़ित नहीं माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह स्पष्ट और न्यायसंगत नहीं है कि किस आधार पर राज्य सरकार आग या किसी अन्य दुर्घटना के पीड़ितों को कम मुआवजा दे रही है। और उसी समय जहरीली शराब त्रासदी के पीड़ितों को भारी राशि दे रही है।  

गुजरात में शिक्षा विभाग ने बिना इजाजत स्कूल चलाने के मामले कड़ी कार्रवाई, 6 साल से चल रहा था स्कैम

राजकोट गुजरात में फर्जी सरकारी दफ्तर, आईएएस और आईपीएस अधिकारी के बाद अब फर्जी स्कूल पकड़ा गया है. राजकोट में मलियान के पिपलिया गांव में इस फेक स्कूल का पता चला है. जिला शिक्षा विभाग ने स्कूल को सील कर दिया है और इसे चलाने वाले कपल की तलाश की जा रही है. शिक्षा विभाग ने बिना इजाजत स्कूल चलाने के मामले कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है. स्कूल को लेकर प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर ने कहा कि लिविंग सर्टिफिकेट नहीं देने के संबंध में अंग्रेजी मीडियम के स्कूल के खिलाफ उन्हें शिकायत मिली थी. इसके बाद मामले की जांच की गई और पाया कि मध्य प्रदेश के संदीप तिवारी और उनकी पत्नी कात्यानी तिवारी स्कूल का संचालन कर रहे थे. शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कपल चार दुकानें किराए पर लेकर बिना इजाजत कक्षा एक से दसवीं तक गौरी प्री-प्राइमरी स्कूल नाम से स्कूल चला रहे थे. मान्यता प्राप्त स्कूल से अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे स्टूडेंट्स शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आई. मसलन, इस मामले में शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश के रहने वाले कपल को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. छापेमारी के दौरान स्कूल में कक्षा एक से दसवीं तक के 29 स्टूडेंट्स मिले. विभाग की कोशिश है कि जो स्टूडेंट्स स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनकी शिक्षा प्रभावित न हो. इसलिए वे अपनी आगे की पढ़ाई मान्यता प्राप्त स्कूल से जारी रख सकेंगे. बड़े स्कूल से कमीशन लेकर चलाते थे स्कूल शिक्षा विभाग ने पाया कि मध्य प्रदेश के कपल स्कूल में बच्चों का दाखिला लेते थे और उनसे फीस वसूलते थे. इसके बाद उनका एडमिशन एक मान्यता प्राप्त स्कूल में कराया जाता था. कुछ बड़े मान्यता प्राप्त स्कूल से उनके संपर्क थे, जिसमें फीस की कुछ रकम इनके स्कूल को दी जाती थी. यह स्कैम 2018 से चल रहा था. स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने वाले परिवार क्या बोले?   अपने बच्चे को गौरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने वाले अभिभावक का कहना है कि उनके बच्चे का लिविंग सर्टिफिकेट पिछले दो साल से नहीं दिया गया है. कोरोना काल में स्कूल फीस भरने के लिए दबाव बनाते थे. स्कूल की फीस भरने के बाद भी बेटे को लिविंग सर्टिफिकेट नहीं दिया गया. कई बार कहने के बाद भी स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया. एक परिवार ने कहा, “मेरा बेटा कक्षा एक से छह तक गौरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा. परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र पहले दो बार दिया गया था, लेकिन वो सर्टिफिकेट अलग-अलग स्कूलों से दिए गए थे. हमारे एक बच्चे की मासिक फीस 450 रुपये थी जबकि दूसरे बच्चे की मासिक फीस 550 से 600 रुपये थी. 2019 से यह स्कूल यहां पर चल रहा था लेकिन गांव वालों में शिक्षा का अभाव होने के कारण इस फर्जी स्कूल के बारे में किसी को भनक नहीं लगी. अब इस स्कूल का भंडाफोड़ हुआ है.”  

तूफान बेरिल से कैरेबियन में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित: संयुक्त राष्ट्र

   कैरेबिया  बेरिल तूफान से जमैका और कैरेबिया में तबाही का मंजर बना हुआ है। इस शक्तिशाली तूफान से कई लोगों की मौत हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायतकर्ता राहत कार्य में जुटे हुए है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम कर रहे है। इस बीच UN ने बताया कि कैरीबियाई क्षेत्र में तूफान बेरिल से 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने शुक्रवार को कहा कि सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस में लगभग 40,000 लोग, ग्रेनेडा में 110,000 से अधिक लोग और जमैका में 920,000 लोग प्रभावित हुए हैं। 11 लोगों की गई जान कैटेगरी 4 के तूफान बेरिल ने अब तक कम से कम 11 लोगों की जान ले ली है। सोमवार को ग्रेनेडा और सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस में भारी तबाही मचाई। वहीं, बुधवार को जमैका में भी पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, तूफान फिलहाल बेलीज और मैक्सिको को प्रभावित कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने बताया कि ग्रेनेडा में तूफान ने कैरियाको और पेटिट मार्टीनिक द्वीपों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जहां 70 प्रतिशत और 97 प्रतिशत इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस में यूनियन द्वीप पर 90 प्रतिशत घर प्रभावित हुए, जबकि कैनुआन द्वीप पर लगभग सभी इमारतों को नुकसान पहुंचा। टीमें की गई तैनात, 4 मिलियन डॉलर की सहायता OCHA ने कहा कि उसने कैरेबियाई देशों में उनके प्रतिक्रिया प्रयासों का समर्थन करने के लिए टीमें तैनात की हैं और ग्रेनेडा, जमैका और सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस में मानवीय अभियान शुरू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष से 4 मिलियन डॉलर उपलब्ध कराए गए हैं। OCHA ने आगे बताया कि ‘हम तूफान बेरिल से हुई तबाही का आकलन करने और उससे निपटने के लिए अधिकारियों, कैरेबियन आपदा आपातकालीन एजेंसी और हमारे साझेदारों के साथ मिलकर काम करना और समर्थन करना जारी रखेंगे।’

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी, आज भी स्कूल बंद

 नैनीताल उत्तर भारत के कई राज्यों में शुक्रवार को हुई भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इसमें पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भी शामिल हैं. उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों हुई भारी बारिश से दो लोगों की मौत हो गई. मौसम विभाग ने 6 और 7 जुलाई के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है. भारी बारिश की संभावना के बीच नैनीताल जिले में आज भी स्कूल बंद हैं. इन जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उधम सिंह नगर जिलों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही चमोली और पौडी जिले के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश होने की संभावना है. देहरादून में भी लगातार रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश बता दें कि शुक्रवार को चंपावत जिले के लोहाघाट, बागेश्वर जिले के कपकोट और गढ़वाल के कुछ हिस्सों में काफी बारिश हुई है. देहरादून में पांच साल का बच्चा बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूब गया और एक किशोर हरिद्वार के नाले में डूब गया. देहरादून में भी लगातार रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश से कई सड़कों पर पानी भर गया है. भूस्खलन से नेशनल हाईवे समेत 90 सड़कें बंद पहाड़ी राज्य में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. बारिश के कारण कई जगह भूस्खलन हुए, जिससे बद्रीनाथ की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गईं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने कहा कि भूस्खलन ने 88 ग्रामीण मोटर योग्य सड़कों, दो सीमा सड़कों, एक राज्य राजमार्ग और बद्रीनाथ मंदिर की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है. भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र लामबगड़ में ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गया. रुद्रप्रयाग जिले में शुक्रवार को भूस्खलन के मलबे ने एक पुरानी सुरंग को अवरुद्ध कर दिया. हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.    

पाकिस्तानी दूतावास के स्टॉफ ने भारतीय महिला के साथ की छेड़छाड़, सीनियर राजनयिक ने बचाया

नई दिल्ली नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. आरोप है कि दूतावास में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली एक भारतीय महिला के साथ यहां छेड़छाड़ की घटना हुई है. पुलिस शिकायत दर्ज होने के बाद पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी साद अहमद वाराइच के कर्मचारी को देश छोड़ने के लिए कहा गया है. छेड़छाड़ के आरोप 54 साल के पाकिस्तानी नागरिक मिन्हाज हुसैन पर लगे हैं जो नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी साद अहमद वाराइच के आधिकारिक आवास पर रसोइए के रूप में काम कर रहा था. उसने एक भारतीय महिला से छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी. यह बेचारी महिला साद अहमद के आवास पर घरेलू सहायिका के रूप में काम पर रखी गई थी और वह नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वाराइच के आधिकारिक आवास के सर्वेंट क्वार्टर में रह रही थी. रसोइए ने की थी महिला से छेड़छाड़ खबर के मुताबिक, सर्वेंट क्वार्टर में रहने वाला मिन्हाज हुसैन इसी साल फरवरी में भारत आने के बाद से ही उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहा था और लगातार यौन संबंध बनाने की मांग कर रहा था और अश्लील हरकतें कर रहा था.  मिन्हाज द्वारा महिला के साथ छेड़छाड़ करने के बाद महिला ने इसकी शिकायत साद अहमद से की, लेकिन उसने बकरीद के बहाने मिन्हाज हुसैन को चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया. इसके बाद पाकिस्तान उच्चायोग ने महिला को फोन करके 30 जून तक साद अहमद की नौकरी और घर छोड़ने को कहा. नगरोटा साजिश पर भारत सख्त, पाकिस्तान उच्चायोग के इंचार्ज को तलब किया विधवा महिला को अपने बच्चों के लिए काम करना पड़ता था, लेकिन वह अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार से पूरी तरह टूट गई. उसे तब और भी बुरा लगा, जब मिन्हाज पाकिस्तान से वापस आकर वाराइच के घर में फिर से काम करने लगा. 28 जून को पीड़िता ने दर्ज करवाई FIR इसके बाद वह 28 जून को तिलक मार्ग थाने गई और मिन्हाज हुसैन के अभद्र व्यवहार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर तुरंत मिन्हाज अहमद हुसैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली.  मिन्हाज हुसैन आधिकारिक पासपोर्ट और वीजा पर भारत में रह रहा था. परेशानी को बढ़ता देख मिन्हाज हुसैन को 30 जून को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान उच्चायोग और साद अहमद वाराइच को शर्मसार कर दिया है. यह पहली बार नहीं है जब नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में इस तरह की घटना हुई है, पहले भी इस तरह के मामले आ चुके हैं. पिछले साल जनवरी में पंजाब की एक कॉलेज प्रोफेसर ने दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के वरिष्ठ कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था.  महिला ने आरोप लगाया कि जब वह 2021 में पाकिस्तान की यात्रा करने के लिए वीजा के लिए आवेदन करने दूतावास गई थी, तो कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों ने उसका यौन शोषण करने की कोशिश की थी.    

हृदय शल्य चिकित्सक मसूद पेजेशकियन ईरान के अगले राष्ट्रपति, कट्टरपंथी जलीली की हार

तेहरान ईरान के राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा आ गया है. रिफॉर्मिस्ट मसूद पेजेशकियान ने राष्ट्रपति का चुनाव जीता है. उन्होंने कट्टरपंथी माने जाने वाले उम्मीदवार सईद जलीली को मात दी है. चुनाव में उन्होंने ईरान को पश्चिमी देशों से जोड़ने का वादा किया था, जो दशकों से अमेरिकी नेतृत्व के साथ टकराव में है. चुनाव में सुधारवादी नेता पेजेशकियान को 16.3 मिलियन वोट पड़े हैं, जबकि हार्डलाइनर यानी कट्टरपंथी उम्मीदवार सईद जलीली को 13.5 मिलियन वोट मिले. पेजेशकियान पेशे से एक हार्ट सर्जन हैं और लंबे समय से सांसद रहे हैं. उनके समर्थकों में खुशियों का माहौल है, जिन्होंने देश की सत्ता में बड़े बदलाव का नेतृत्व किया है. वोट काउंटिंग के दौरान ही उनके समर्थक सड़क पर सेलिब्रेशन के लिए उतर आए थे. मसलन, इस चुनाव में ईरान के पूर्व परमाणु निगोशियेटर के रूप में मशहूर सईद जलीली, सुप्रीम लीडर के करीबी माने जाते हैं, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा है. पेजेशकियान की जीत के बाद ईरान में कुछ बहुत बड़ा बदलाव होगा, इसकी उम्मीद कम ही है, क्योंकि खुद पेजेशकियान वादा कर चुके हैं कि उनके कार्यकाल में देश के शिया धर्मतंत्र में कोई आमूलचूल बदलाव नहीं किया जाएगा. ईरान में सुप्रीम लीडर की बात पत्थर की लकीर मानी जाती है. पेजेशकियान भी उन नेताओं में एक हैं, जो सुप्रीम लीडर को देश के सभी मामलों में आखिरी मध्यस्थ मानते हैं. वह पश्चिम के साथ ईरान के बेहतर संबंध की वकालत करते रहे हैं, जिनके प्रतिबंधों से देश का आज खस्ता हाल है. ईरान चुनाव के रनऑफ में पेजेशकियान और जलीली के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी. पेजेशकियान उन कुछ उम्मीदवारों में शामिल थे, जिन्होंने ईरान को दुनिया के लिए खोलने का वादा किया था. मसलन, खासतौर पर पश्चिमी देशों के साथ संबंध को पुनर्स्थापित करने का वादा किया था. हालांकि, जलीली ने ईरान के लिए रूस और चीन को बेहतर बताया था. ईरान राष्ट्रपति चुनाव में मतदाताओं की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई.  पेजेशकियन ने दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की जगह लेने के अपने अभियान के दौरान अन्य उदारवादी और सुधारवादी हस्तियों के साथ गठबंधन किया था। रईसी खमेनेई के कट्टरपंथी अनुयायी थे, जिनकी मई में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके मुख्य अधिवक्ता पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ रहे हैं, जिन्होंने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ ईरान का परमाणु समझौता कराया था, जिसके तहत परमाणु कार्यक्रम में भारी कटौती के बदले में प्रतिबंध हटा दिए गए थे। ईरान के लोग इस उम्मीद में सड़कों पर उतर आए कि इस समझौते से उनका देश आखिरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शामिल हो जाएगा। लेकिन 2018 में, तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एकतरफा तरीके से अमेरिका को समझौते से अलग कर लिया, जिससे पूरे मध्य पूर्व में हमलों की एक श्रृंखला शुरू हो गई। ईरान अब यूरेनियम को हथियार-स्तर के स्तर तक समृद्ध कर रहा है, जबकि उसके पास इतना बड़ा भंडार है कि अगर वह चाहे तो कई बम बना सकता है।

आतंकी समूह का हमला लेबनान-इजराइल सीमा पर महीनों तक चले संघर्ष में सबसे बड़े हमलों में से एक

बेरूत लेबनान के हिजबुल्ला समूह ने वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद नामेह नासिर की मौत के जवाब में इजराइल के कई सैन्य ठिकानों पर रॉकेट और ड्रोन से हमला बोला। हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने एक घंटे में 200 रॉकेट दागे। ईरान समर्थित आतंकी समूह का हमला लेबनान-इजराइल सीमा पर महीनों तक चले संघर्ष में सबसे बड़े हमलों में से एक है। हताहतों की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है। वहीं इजराइल ने जवाबी हमला करते हुए सोनिक बूम की गूंज से पूरा लेबनान सहम गया। हिजबुल्ला ने कहा है कि अगर हमास और इजराइल के बीच संघर्ष विराम होता है तो वह अपने हमले रोक देगा। हिजबुल्ला हमले के बाद इजराइल ने भी दक्षिणी लेबनान के विभिन्न शहरों पर हमला बोला। इजराइली सेना ने कहा कि उसने दक्षिणी सीमावर्ती कस्बों रामयेह और होउला में उसके ठिकानों पर हमला बोला है। लेबनान की सरकारी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने बताया कि इस बीच इजराइली जेट विमानों की सोनिक बूम कई क्षेत्रों में सुनाई दी।इजराइली सरकार के एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि हमास के साथ बंधक रिहाई समझौते पर बातचीत के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया है। हमास द्वारा चरणबद्ध संघर्ष विराम के लिए अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर एक नई प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने के एक दिन बाद आया है। इस बीच, गाजा में संभावित युद्धविराम समझौते पर हमास की नई स्थिति पर चर्चा के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सुरक्षा कैबिनेट बैठक बुलाने वाले हैं। बैठक से पहले वह युद्धविराम वार्ता टीम के साथ परामर्श भी करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा मई के अंत में सार्वजनिक किए गए एक प्रस्ताव पर इजराइल को बुधवार को हमास की ओर से प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें गाजा में रखे गए लगभग 120 बंधकों की रिहाई और फलस्तीनी क्षेत्र में युद्धविराम शामिल होगा। एक फलस्तीनी अधिकारी ने बताया कि हमास ने कुछ मामलों पर लचीलापन दिखाया है, जिससे इजराइल द्वारा मंजूरी मिलने पर एक रूपरेखा समझौते पर पहुंचा जा सकेगा। युद्ध शुरू होने के बाद फलस्तीन में मरने वालों की संख्या 38,000 से अधिक हो गई है, जबकि 87,445 घायल हुए हैं।इजराइल के एंटी-सेटलमेंट निगरानी समूह का कहना है कि सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों में लगभग 5,300 नए घर बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह सरकार द्वारा वेस्ट बैंक पर इजराइल के नियंत्रण को मजबूत करने और भविष्य में फलस्तीनी की स्थापना को रोकने की रणनीति के तहत बस्तियों को मजबूत करने के लिए ताजा कदम है।  

29 महीने से जारी लड़ाई में एक और शहर यूक्रेन के हाथ से निकल गया

कीव  यूक्रेन के डोनेस्क प्रांत का चासिव यार शहर को रूस ने लंबे संघर्ष के बाद जीत लिया है। इस हार के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस शहर से अपनी सेना को वापस बुलाने की घोषणा की है जबकि रूस ने कहा है कि उसने  रात को शहर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। इस प्रकार से करीब 29 महीने से जारी लड़ाई में एक और शहर यूक्रेन के हाथ से निकल गया है। इस युद्ध में रूस अभी तक यूक्रेन के 20 प्रतिशत से ज्यादा भूभाग पर कब्जा कर चुका है। रूसी सेना के कब्जे में आया चासिव यार शहर रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इस शहर के हाथ आने से यूक्रेन के दो महत्वपूर्ण शहरों- क्रैमेटोर्स्क और स्लोवियांस्क पर कब्जे की लड़ाई में रूस को आसानी होगी। यूक्रेन ने कहा है कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए उन्हें वापस बुलाना बेहतर समझा गया, इसलिए चासिव यार को छोड़ने का निर्णय लिया गया। रूस समर्थक यूक्रेन के विद्रोहियों का डोनेस्क के एक हिस्से पर 2014 से कब्जा है। फरवरी 2022 से छिड़े युद्ध के बाद रूसी सेना ने प्रांत में अपना कब्जा बढ़ाया है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उनकी सेना की 14 ब्रिगेड के पास लड़ने के लिए पर्याप्त हथियार नहीं है। इसका रूस को लाभ हो रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उनका एस-350 एयर डिफेंस सिस्टम पश्चिमी देशों की मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें आकाश में ही नष्ट करने में सक्षम है।    

पाकिस्तान ने जेट विमानों को परमाणु मिसाइलों से लैस किया ?भारत के लिए नई मुसीबत !

नई दिल्ली पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने फाइटर जेट JF-17 Thunder में न्यूक्लियर क्रूज मिसाइल Ra’ad लगाया है. हवा से लॉन्च की जाने वाली यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. पाकिस्तान ने अपने पुराने मिराज फाइटर जेट के बजाय चीन से मिले नए JF-17 फाइटर को अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रही है. पाकिस्तान अपने हवाई परमाणु हथियारों को मजबूत कर रही है. Ra’ad मिसाइल को जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट के विंग्स के नीचे लगाया गया है. यानी अब पाकिस्तान इस नए फाइटर जेट के जरिए किसी भी समय परमाणु हमला कर सकता है. पाकिस्तानी सेना राड मिसाइल को हत्फ-8 के नाम से बुलाती है. यह एक सबसोनिक एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल है. इस मिसाइल को पाकिस्तान ने 2012 में वायुसेना में शामिल किया था. इस मिसाइल की लंबाई 4.85 मीटर है. इसका व्यास 0.5 मीटर है. यह मिसाइल अपने साथ 450 किलोग्राम वजन का पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जा सकती है. इस मिसाइल की रेंज 550 किलोमीटर है.   लंबी दूरी के परमाणु मिशन आसानी से कर सकता है पाकिस्तान यानी पाकिस्तान अब लंबी दूरी के मिशन में परमाणु हमला आसानी से कर सकता है. JF-17 को चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है. इसकी तुलना भारत के एलसीए तेजस से की जाती है. जेएफ-17 फाइटर जेट का नया वैरिएंट यानी ब्लॉक-3 को जे-20 फाइटर जेट की स्टेल्थ टेक्नोलॉजी दी गई है. साथ ही उसे थोड़ा हल्का बनाया गया है. लगातार अपनी मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है पाकिस्तान पाकिस्तान के पास हवा से जमीन पर दागने के लिए हत्फ-8 मिसाइल है. जिसमें परमाणु हथियार लगा सकते हैं. इसके अलावा शाहीन-1 और शाहीन-2 मिसाइलें भी हैं. ये इंटरमीडियट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. इसके अलावा मीडियम रेंज की गौरी मिसाइल है. जमीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल बाबर भी है. भारत के लिए खतरा कितना… ये बता पाना मुश्किल ये सभी मिसाइलें परमाणु हमला करने में सक्षम हैं. इन सबकी अलग-अलग रेंज है. पाकिस्तान लगातार चीन और अन्य देशों की मदद से इन्हें अपग्रेड करता जा रहा है. लेकिन भारत के लिए कितना खतरा है ये बता पाना बेहद मुश्किल है. Ra’ad मिसाइल की अधिकतम स्पीड 980 km/hr की है. यह मिसाइल भौगोलिक स्थिति के अनुसार उड़ान भरने में सक्षम है. कितना बेहतर है पाकिस्तान का JF-17 भारत के राफेल से JF-17 Thunder Block 3 एक अत्याधुनिक, हल्के वजन का, हर मौसम में उड़ान भरने वाला मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है. यह हवा से हवा में और हवा से जमीन पर लड़ाई करने के लिए बनाया गया है. आइए आपको बताते हैं कि भारत के Rafale और JF-17 Thunder Block 3 में क्या खास है… राफेल की कॉम्बैट रेडियस 3800 KM है. कॉम्बैट रेंज 1850 km है. जबकि JF-17 Thunder Block 3 की कुल रेंज 3500 से 3840 km है. लेकिन कॉम्बैट रेंज 1500-1800 km है. कॉम्बैट रेंज राफेल की ज्यादा है. ॉअपने बेस स्टेशन से जितनी दूर विमान जाकर सफलतापूर्वक हमला कर लौट सकता है, उसे कॉम्बैट रेडियस कहते हैं. रेट ऑफ क्लाइंब, स्पीड, तोप, परमाणु मिसाइल, ज्यादा हथियार की क्षमता राफेल हवा में 304.8 मीटर प्रति सेकेंड की गति से ऊपर जाता है. जबकि JF-17 Thunder Block 3 की रेट ऑफ क्लाइंब 300 मीटर प्रति सेकेंड है. राफेल में तीन तरह की मिसाइलें लगेंगी. हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल. हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प मिसाइल. तीसरी है हैमर मिसाइल. राफेल में लगी मीटियोर मिसाइल 150 km, स्कैल्प मिसाइल 300 km तक मार कर सकती है. हैमर का उपयोग कम दूरी के लिए किया जाता है. चीन के JF-17 जेट में 6 तरीके की हवा से हवा में मार करने वाली, 5 तरीके की हवा से जमीन पर मान करने वाली मिसाइल और 5 तरीके की एंटी-शिप मिसाइल लगाई जा सकती है.    भारतीय राफेल की गति 2450 km/hr है. पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट की स्पीड 2450 से 2469 km//hr है. राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है. यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है. इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं. राफेल चारों तरफ निगरानी रखने में सक्षम है. जबकि, पाकिस्तानी जेट मल्टीरोल फाइटर जेट है. यह इन सुविधाओं में कितना ताकतवर है, इसके बारे में किसी तरह की जानकारी पाकिस्तान या चीन की तरफ से साझा नहीं की गई है.   भारतीय Rafale में 1×30 मिमी की GIAT30/M791 ऑटोकैनन तोप लगी है, जो 125 राउंड की मैगजीन के साथ आती है. यह 2500 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग कर सकती है. जबकि JF-17 में 1×23 मिमी की GSg-23-3 मल्टी बैरल गन लगी है. जो 1700 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग करता है. हथियारों के मामले में पाकिस्तानी फाइटर जेट ज्यादा बेहतर, लेकिन हथियार ही नहीं हैं अगर बात करें कि किस फाइटर जेट में ज्यादा बेहतर हथियारों का मिश्रण हो सकता है तो पाकिस्तान का फाइटर जेट जीत जाएगा. लेकिन उसके पास इतनी वैराइटी के हथियार ही नहीं है. वह भले ही 5-6 मिसाइलों का मिश्रण बना ले लेकिन Rafale में लगने वाली हवा से हवा में मार करने वाली MBDA MICA EM और IR, MBDA Meteor, Magic आसमान सुरक्षित कर देंगी. राफेल की हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलें ज्यादा ताकतवर हैं. ये हैं- MBDA Apache, MBDA Storm Shadow/Scalp-EG, AASM-Hammer, GBU-12 Paveway Series, AS-30L, Mark 82. भारतीय राफेल में इसके अलावा दो बेहद खास हथियार लगाए जा सकते हैं. ये हैं MBDA AM 39-Exocet हवा से शिप पर लॉन्च होने वाली मिसाइल. और परमाणु मिसाइल ASMP-A. यानी पाकिस्तानी JF-17 Thunder Block 3 फाइटर जेट को चुटकियों में नेस्तानाबूत करने की क्षमता और ताकत रखता है हमारा राफेल.  

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