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50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

नई दिल्ली. आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था। घरेलू एलपीजी के रेट भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है। बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं। 2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था। 2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के। 2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था। 2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब ‘खतरनाक’ सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक ‘टेस्ट केस’ साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 ‘Felon’: रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया ‘स्टेज 2’ इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और ‘आत्मनिर्भर भारत’ भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल ‘खरीदने’ में नहीं, बल्कि ‘भारत में बनाने’ और ‘पूर्ण तकनीक’ प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो ‘Felon’ भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

सफलता का नया मतलब: इंजीनियर ने बीमारी के चलते Google छोड़ दी जॉब, कहानी सोशल मीडिया पर छाई

 नई दिल्ली जिंदगी में हर इंसान की तलाश क्या होती है. जल्द से जल्द पैसा कमाना, खुद को एक इनसेक्योर जोन से सेक्योर जोन में ले जाना, लेकिन असल जिंदगी की प्राथमिकता क्या है. रेस में सबसे आगे जाना या फिर जिंदगी की बुनियादी जरूरत वो सेहत है,जिसे दरकिनार कर दिया जाता है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली की कहानी भी इन्हीं दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली (Tia Lee) ने 2020 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (Michigan State University) से ग्रेजुएशन किया और तभी तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक चीज चाहिए जितना हो सके उतना पैसा कमाना. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी करियर जर्नी शुरू की, लेकिन तीन साल बाद यही रेस उनकी सेहत पर इतना भारी पड़ी कि आज वह सफलता को पूरी तरह नए नजरिए से देखती हैं. पैसा या सेहत-जिंदगी में क्या है अहमियत 2023 के अंत तक टिया एक साथ तीन भूमिकाएं निभा रही थीं.कैलिफोर्निया में Google की Technical Program Manager, फ्रीलांस वेबसाइट डिजाइनर और अपनी क्लोदिंग लाइन की मालिक. लगातार काम और अलग-अलग शहरों की यात्राओं ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया. उन्होंने CNBC Make It को बताया कि वह लगभग हर दूसरे महीने बीमार पड़ने लगी थीं. कैलिफोर्निया, मिशिगन और टेक्सास के बीच लगातार यात्रा करते-करते उन्हें लगने लगा कि बीमारी सिर्फ ट्रैवल की वजह से होती है. लेकिन कई महीनों तक यूं ही बीमार रहने के बाद डॉक्टर ने इशारा किया कि असली वजह तनाव हो सकता है. इसी बात ने टिया को सोचने पर मजबूर किया कि शायद बहुत सारी जिम्मेदारियां ही उनकी सेहत को खराब कर रही हैं. तभी उन्होंने अपने करियर को रोकने का फैसला किया. भागदौड़ में खो गई थीं… टिया ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए. फ्रीलांस काम कम किया, खर्चों में कटौती की और इतना पैसा बचाया कि वे सालों तक बिना नौकरी के रह सकें. वह मिशिगन में अपने माता-पिता के घर वापस आ गईं. उन्होंने अपनी Tesla कार बेचकर एक सस्ती Chevrolet ले ली ताकि खर्च और कम हो सके. यहां तक कि उन्होंने एक निजी शेफ से यह समझौता किया कि वह उसका वेबसाइट बना दें और इसके बदले शेफ हफ्तेभर का मील प्रेप दे दे.इससे उनका किराना खर्च भी खत्म हो गया. इन बदलावों ने टिया के लिए सफलता की परिभाषा बदल दी. उन्होंने बताया कि पहले उनके लिए कामयाबी का मतलब था पैसा, प्रमोशन और काम में पहचान, लेकिन अब सफलता का मतलब है अपनी सेहत और समय पर पूरा नियंत्रण. Google छोड़ने के बाद उन्होंने जून में नौकरी से इस्तीफा दिया और ब्रूक्लिन, न्यूयॉर्क में शिफ्ट होकर एक धीमी, संतुलित जीवनशैली अपनाई, जिसमें अच्छा खाना और खुद के साथ समय बिताना शामिल है. फिलहाल उनका कॉर्पोरेट दुनिया में वापस लौटने का कोई प्लान नहीं है.

नेतन्याहू भारत आ रहे, दिल्ली में अरब देशों के साथ बैठक तय; जयशंकर का मिडिल ईस्ट गेम चर्चा में

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

एपस्टीन फाइल्स अपडेट: रशियन लड़कियों और निजी जीवन से जुड़े बिल गेट्स के चौंकाने वाले राज

वॉशिंगटन: अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने जेफ्री एपस्टीन के नए सीक्रेट दस्तावेज पब्लिक कर दिए हैं. कुख्यात जेफ्री एपस्टीन प्रकरण में रिलीज की गई 30 लाख से ज्यादा फाइलों में फिर से एक बड़े नाम को लेकर चौंकाने वाले राज खुले हैं. ये बड़ा नाम ‘माइक्रोसॉफ्ट का मसीहा’ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का है. लीक किए गए सीक्रेट ईमेल्स की मानें तो गेट्स को एक जानलेवा गुप्त रोग (STD) लग गया था, जिसे दुनिया से छिपाने के लिए वे तड़प रहे थे. ईमेल में उन रशियन लड़कियों का भी जिक्र है, जो गेट्स के इस घिनौने सच की सबसे बड़ी गवाह थीं. बिल गेट्स के ईमेल्स में खुला शॉकिंग राज गेट्स से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में खुलासा हुआ है कि उन्हें यौन संचारित रोग हो गया था. चौंकाने वाली बात तो यह है कि उन्होंने इस लाइलाज बीमारी के सबूत मिटाने के लिए कुख्यात अपराधी जेफ्री एपस्टीन को सरेआम धमकियां तक दे डाली थीं. इन ईमेल्स में बिल गेट्स ने रशियन लड़कियों का भी जिक्र किया था. जुलाई 2013 में जेफ्री एपस्टीन ने खुद को एक लंबा ईमेल भेजा था. यह ईमेल उस वक्त का है जब बिल गेट्स ने एपस्टीन से दूरी बनानी शुरू कर दी थी. एपस्टीन ने इस ईमेल में गुस्से और बदले की आग में वो राज उगल दिए जिन्हें गेट्स शायद दुनिया से हमेशा के लिए छिपाना चाहते थे. एपस्टीन ने लिखा था कि गेट्स ने उससे विनती की थी कि वह उनके STD (यौन संचारित रोग/गुप्त रोग) से जुड़े ईमेल डिलीट कर दे. एपस्टीन ने अपनी इस ‘धमकी’ में साफ लिखा था कि उसके पास गेट्स के रशियन लड़कियों के साथ संबंधों और उसके बाद पैदा हुई बीमारियों का पूरा कच्चा चिट्ठा मौजूद है. मेलिंडा के साथ वो ‘खतरनाक’ धोखा! इन दस्तावेजों में बिल गेट्स की पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स से जुड़ा एक भयानक किस्सा भी है. दस्तावेजों के मुताबिक, गेट्स ने रशियन लड़कियों के साथ संबंध बनाने के बाद एक गुप्त रोग (STD) पकड़ लिया था. पकड़े जाने के डर से, गेट्स ने कथित तौर पर एपस्टीन से ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं जिन्हें वे चुपके से मेलिंडा को दे सकें. उद्देश्य यह था कि मेलिंडा को बिना बताए उनका इलाज हो जाए और उन्हें कभी पता ही न चले कि उनके पति ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया था. रशियन लड़कियां और राइट हैंड का कबूलनामा इन फाइलों में गेट्स के पूर्व सलाहकार बोरिस निकोलिक के नाम से लिखे गए ड्रॉफ्ट ईमेल भी मिले हैं. निकोलिक, जो गेट्स के सबसे भरोसेमंद ‘राइट हैंड’ माने जाते थे, उन्होंने अपने इस्तीफे के ड्रॉफ्ट में लिखा था कि उन्हें ऐसी चीजों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया जो न केवल अनैतिक थीं, बल्कि गैरकानूनी भी थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने गेट्स के लिए रशियन लड़कियों का इंतजाम करने, नशीली दवाएं पहुंचाने और यहां तक कि अवैध ट्रस्ट बनाने में मदद की थी. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि गेट्स ब्रिज टूर्नामेंट्स के दौरान अपनी दिमागी क्षमता बढ़ाने के लिए ‘एडेरॉल’ जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल करते थे. मेलिंडा का तलाक: अब जुड़ीं सारी कड़ियां जब 2021 में बिल और मेलिंडा का तलाक हुआ, तो दुनिया हैरान थी. मेलिंडा ने सिर्फ इतना कहा था कि बिल की एपस्टीन के साथ दोस्ती और उनके अफेयर्स ने शादी को खोखला कर दिया. लेकिन अब सामने आई इन कड़ियों से साफ है कि मेलिंडा 2019 से ही तलाक की प्लानिंग कर रही थीं. जैसे ही वॉल स्ट्रीट जर्नल में बिल और एपस्टीन की आधी रात की मुलाकातों की खबरें आईं, मेलिंडा समझ गई थीं कि जिस इंसान के साथ वे सालों से रह रही हैं, उसकी सच्चाई कुछ और ही है. एपस्टीन के साथ बिल की मुलाकातों में मिस स्वीडन जैसी खूबसूरत महिलाओं का शामिल होना और देर रात तक उनके घर पर रुकना, मेलिंडा के लिए बर्दाश्त से बाहर था. बिल गेट्स के झूठ और एपस्टीन की ‘जादुई’ दुनिया बिल गेट्स ने हमेशा मीडिया के सामने यही कहा कि उनकी एपस्टीन के साथ कोई दोस्ती नहीं थी, वे कभी उनके निजी विमान (Lolita Express) में नहीं बैठे और न ही उनके किसी घर पर गए. लेकिन सच इसके उलट है. फ्लाइट मैनिफेस्ट बताते हैं कि मार्च 2013 में गेट्स ने एपस्टीन के प्राइवेट जेट में सफर किया था. एपस्टीन के मैनहट्टन टाउनहाउस में वे कई बार देर रात तक रुके थे. गेट्स ने खुद एक ईमेल में लिखा था कि एपस्टीन का लाइफस्टाइल बहुत ‘अलग और दिलचस्प’ है. एपस्टीन की मौत और अधूरे राज जेफ्री एपस्टीन ने 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली थी, लेकिन उसके पास मौजूद ‘ब्लैक बुक’ और ईमेल आज भी दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की रातों की नींद उड़ा रहे हैं. बिल गेट्स का नाम इन दस्तावेजों में बार-बार आना यह साबित करता है कि परोपकार की आड़ में कहीं न कहीं कुछ बहुत बड़ा और काला छिपा हुआ था. हालांकि गेट्स के प्रवक्ताओं ने इन दावों को खारिज किया है, लेकिन DOJ द्वारा जारी किए गए हजारों पन्नों के ये ईमेल झूठ नहीं बोलते.

महंगाई का नया वार: 1 फरवरी से पान-मसाला और सिगरेट हुए महंगे, नियम बदले

नई दिल्ली जनवरी का महीना खत्म होने वाला है और कल से नए फरवरी महीने की शुरुआत हो जाएगा. हर महीने की तरह ये महीना भी कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st February) के साथ शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) से लेकर टोल टैक्स पर फास्टैग से जुड़े नियम (FASTag Rule Change) तक शामिल हैं. वहीं सबसे बड़ा शॉक पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को लगने वाला है. जी हां, 1 फरवरी 2026 से इन तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ (Pan-Masala Cigarette Price Hike) सकती हैं, क्योंकि सरकार इन पर लागू टैक्स में इजाफा करने वाली है.  साल की शुरुआत में की थी तैयारी इस साल की शुरुआत में ही सरकार की ओर से GST क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर एक नया उत्पाद शुल्क और उपकर अधिसूचित किया गया था. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत देश में 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अधिक टैक्स का प्रावधान किया गया है. अधिसूचना को देखें, तो तंबाकू और पान मसाला पर नए शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगाए जाएंगे. जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 को भी अधिसूचित किया. ये नियम चबाने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से उत्पादन क्षमता का आकलन करने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं. रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा दो विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया, जो पान मसाला निर्माण पर नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.   कीमतों पर दिखेगा टैक्स इफेक्ट  सरकार द्वारा संशोधित टैक्स स्ट्रक्चर के तहत 1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लंबी, प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी. बदलाव के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो फरवरी  पहली तारीख से प्रभावी होगा. ध्यान रहे कि यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा.  टैक्स की मार के चलते इन तंबाकू प्रोडक्ट्स को बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होगा और ऐसे में कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं. सीधे शब्दों में कहें तो सिगरेट, पान-मसाला, गुटखा महंगे हो जाएंगे और इनके शौकीनों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी.  Crisil ने इसे लेकर क्या कहा?  क्रिसिल की एक रिपोर्ट को देखें, तो सिगरेट उद्योग को शुल्क में बढ़ोतरी से बिक्री में गिरावट का सामना भी करना पड़ सकता है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के क्षतिपूर्ति उपकर भी लगते हैं, लेकिन 1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटा दिया जाएगा और सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल ने Tax Hike से घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है. 

दुश्मन के लिए खौफनाक हथियार: राफेल से बड़ी डील, ब्रह्मास्त्र जो पानी में आग लगा सकता है

नई दिल्ली भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 70,000 से 72,000 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट-75(I) पनडुब्बी निर्माण समझौते पर मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है. यह सबमरीन डील अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा. बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सूत्रों के मुताबिक इसे हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में भारत यात्रा के दौरान निर्णायक गति मिली. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) का उद्देश्य इंडियन नेवी के पुराने हो चुके पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एवं डेटरेंस कैपेबिलिटी (प्रतिरोध की क्षमता) को मजबूत करना है. ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, भारत के लिए अल्‍ट्रा मॉडर्न सबमरीन की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. P-75I प्रोजेक्‍ट के तहत छह उन्नत पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन का निर्माण किया जाएगा. शॉर्टलिस्‍ट किए गए टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन सबमरीन फ्यूल सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे वे कई हफ्तों तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती हैं. इससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग का जोखिम काफी कम हो जाता है और नौसेना की सीक्रेट ऑपरेशन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है. चीन और पाकिस्‍तान ने खासतौर पर अरब सागर के साथ ही हिन्‍द महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को काफी बढ़ावा दिया है. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश होने लगी हैं. यही वजह है कि भारत सबमरीन फ्लीट को अपग्रेड करने के साथ ही उसे बढ़ा भी रहा है. क्‍या है सबमरीन डील? oइस परियोजना में जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ साझेदारी में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) देश में ही इन पनडुब्बियों का निर्माण करेगी. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 45 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी. प्रस्तावित समझौते में पनडुब्बी निर्माण से जुड़ी अहम टेक्‍नोलॉजिकल ट्रांसफर का भी प्रावधान होने की संभावना है, जो भारत की लॉन्‍ग टर्म रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है. भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब एक दर्जन रूसी मूल की पनडुब्बियां और छह फ्रांसीसी निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की आधुनिक पनडुब्बियां हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते सामरिक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर भारत को अपनी पनडुब्बी क्षमता में और विस्तार की जरूरत है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर 2014 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने प्रोजेक्ट-75(I) के तहत 6 नई पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दी थी, जबकि जुलाई 2021 में औपचारिक अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी किया गया. राफेल फाइटर जेट से भी बड़ी डील यह प्रोजेक्‍ट केवल नेवी की युद्ध क्षमता को ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि देश के जहाज निर्माण और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी. इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसर पैदा होंगे और पनडुब्बी प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स तथा उपकरणों के निर्माण से जुड़ा एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा. जर्मनी के साथ सबमरीन करार भारत के लिए अभी तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील साबित होगी. यह साल 2016 में की गई राफेल फाइटर जेट खरीद समझौते से भी बड़ा है. भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट ₹58000 में खरीदा था, जबकि जर्मनी के साथ सबमरीन डील ₹72000 करोड़ की है. नेवी के लिए 51 वॉरशिप सरकार हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण रोडमैप 2015–2030 को तेजी से लागू कर रही है. इसके तहत देश में 51 बड़े युद्धपोतों का निर्माण जारी है, जिनकी कुल लागत करीब 90,000 करोड़ रुपये है. वर्ष 2014 से अब तक भारतीय शिपयार्ड्स नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंप चुके हैं, और बीते एक वर्ष में औसतन हर 40 दिन में एक नया पोत नौसेना में शामिल हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत-जर्मनी के बीच होने वाला यह पनडुब्बी सौदा न केवल रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय समुद्री शक्ति संतुलन में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने में मदद करेगा.

10 राज्य जो सबसे ज्यादा कर्ज़ में डूबे हैं, पंजाब से पश्चिम बंगाल तक की पूरी लिस्ट

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो… पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.  पंजाब-बिहार दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.  केरल-तमिलनाडु केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.  हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.  MP-कर्नाटक लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा. 

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल: वेनेजुएला संकट पर मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक राष्ट्रपति ट्रंप को भेंट किया

International political turmoil: Machado presents his Nobel Peace Prize medal to President Trump over the Venezuelan crisis वॉशिंगटन/कराकास। वेनेजुएला में गहराते राजनीतिक संकट के बीच विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में हुई अहम मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। यह बैठक न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि इससे वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन को लेकर वैश्विक रणनीति के संकेत भी मिल रहे हैं। मचाडो ने दावा किया है कि उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक राष्ट्रपति ट्रंप को भेंट किया, जिसे वे वेनेजुएला की आजादी की लड़ाई में अमेरिका के समर्थन के प्रति अपने विश्वास का प्रतीक बता रही हैं। इस मुलाकात में एक घंटे से अधिक समय तक वेनेजुएला की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, मानवाधिकार उल्लंघन, आर्थिक बदहाली और दमनकारी शासन को समाप्त करने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली, स्वतंत्र चुनाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई। व्हाइट हाउस से बाहर निकलते समय मचाडो के हाथ में ट्रंप के हस्ताक्षर वाला एक विशेष उपहार बैग देखा गया, जिसने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकी और रणनीतिक साझेदारी की अटकलों को और मजबूत कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात वेनेजुएला संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से केंद्र में ला सकती है। वहीं, लैटिन अमेरिका और यूरोप के कई देशों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि अमेरिका आगे कौन-से ठोस कदम उठाता है। कुल मिलाकर, मचाडो–ट्रंप की यह मुलाकात न केवल वेनेजुएला की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है, बल्कि वैश्विक कूटनीति के समीकरणों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

भारत ने तेजी से कार्रवाई की और पाकिस्तान को सोचने का मौका ही नहीं दिया: उप प्रधानमंत्री डार

कराची  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारत के मिसाइल पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बना रहे थे. तो उस वक्त सऊदी अरब ने पाकिस्तान के कहने पर भारत को मनाने की खूब कोशिश की थी. ये दावा पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान किया है. इशाक डार ने यह भी माना है कि हम भारत को जवाब देने की कोशिश कर ही रहे थे कि इससे पहले इंडिया ने नूर खान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस पर हमला कर दिया था.  भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई की रात को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस हमले में दहशतगर्दों ने 26 निर्दोष सैलानियों की हत्या कर दी थी.  जिओ न्यूज के एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा कि नूर खान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस पर भारत का हमला तब हुआ जब पाकिस्तान जवाबी अटैक करने ही जा रहा था.  इसका मतलब ये था कि भारत ने तेजी से कार्रवाई की और पाकिस्तान को सोचने का मौका ही नहीं दिया. इतनी तेजी से किए गए हमले से पाकिस्तान का शासन-प्रशासन अचंभित था.  ‘ब्रदर आप बात कर सकते हैं’ उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस इंटरव्यू में कहा कि, ‘भारत के हमले के बाद प्रधानमंत्री ने आर्म्ड फोर्सेज को जवाबी एक्शन के लिए अधिकृत कर दिया, डिटेल तय हो गई कि हमें क्या रोल आउट करना है, और हमने चार बजे के बाद शुरू किया, लेकिन मैं बदकिस्मती कहूंगा कि इंडिया ने ढाई बजे फिर वही हरकत कर दी, नूर खान एयरबेस पर, शोरकोट एयर बेस पर उन्होंने फिर अटैक किया, उसी रात को.” इस जंग में सऊदी अरब के रोल पर इशाक डार ने कहा कि, ‘इस हमले के 45 मिनट बाद ही मुझे सऊदी प्रिंस फैसल साहब का फोन आया और उन्होंने मुझे कहा कि ब्रदर मुझे समझ में आ रहा है कि आपकी बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई है और क्या मैं जयशंकर से बात करने के लिए अधिकृत हूं कि आप रुकने के लिए तैयार हैं अगर वो रुक जाएं.’ डिप्टी पीएम इशाक डार ने आगे कहा कि उन्होंने सऊदी प्रिंस से कहा कि हां पाकिस्तान इसके लिए तैयार हैं और ब्रदर आप सऊदी प्रिंस से बात कर सकते हैं. इशाक डार ने आगे बताया कि सऊदी प्रिंस ने बाद में उन्हें फिर से फोन किया और कहा कि उन्होंने जयशंकर को ये बात कह दी है.  इससे पता चलता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की कोशिश में सऊदी ने एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डार ने कहा कि इस्लामाबाद ने इस उम्मीद में संयुक्त राज्य अमेरिका से भी संपर्क किया कि भारत इस मामले में सैन्य तनाव को और न बढ़ाए. डार का कबूलनामा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा पहले किए गए दावों का भी खंडन करता है, जिन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान ने भारत को कड़ा जवाब दिया है. दरअसल पाकिस्तान भारत को जवाब देना तो दूर उसका पूरा फोकस भारत के आक्रमण से बचने में था. पाकिस्तान ने इसके लिए अमेरिका, सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से कूटनीतिक सहायता मांगी.  शहबाज भी मान चुके हैं- भारत ने पहले हमला कर दिया पहले बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी बाद में स्वीकार किया है कि भारत ने रावलपिंडी हवाई अड्डे सहित कई क्षेत्रों को निशाना बनाकर ब्रह्मोस मिसाइल से हमले किए शरीफ ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा, “भारत ने फिर से ब्रह्मोस मिसाइल हमले किए और रावलपिंडी हवाई अड्डे और अन्य स्थानों सहित पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों को निशाना बनाया.” शहबाज शरीफ ने माना कि पाकिस्तान ने 10 मई को तड़के फजर की नमाज के बाद 4:30 बजे जवाबी हमला करने की योजना बनाई थी, लेकिन 9-10 मई की रात को भारत ने इससे पहले ही पाकिस्तान के कई एयरबेस को तहस-नहस कर दिया.  इससे पता चलता है कि भारतीय सेना ने न केवल पहले हमला किया, बल्कि भारत ने पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई को भी सफलतापूर्वक विफल कर दिया.  ऑपरेशन सिंदूर  भारत ने 7 मई से पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों और सैन्य ठिकानों पर कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए.  भारत के हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य स्थलों पर हमला करने की नाकाम कोशिश की. हालांकि भारत ने और भी शक्तिशाली जवाबी हमले किए, उसके सैन्य ठिकानों पर हमला किया और पाकिस्तान की योजनाओं को विफल कर दिया.  चार दिनों तक बढ़ते तनाव और सीमा पार हमलों के बाद पाकिस्तान की गुहार पर भारत 10 मई को युद्धविराम पर सहमत हुआ.   

ईरान के अटैक का डर, अमेरिका ने मध्य पूर्व के सबसे बड़े सैन्य अड्डे से हटाए 40 मिलिट्री जेट, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

दोहा  इजरायल पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद अब अमेरिका को मध्य पूर्व में अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा का डर सताने लगा है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, कतर के एक प्रमुख अमेरिकी एयरबेस से पिछले दो सप्ताह में करीब 40 अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट गायब हो गए हैं। संभावना है कि उन्हें ईरानी हमलों से बचाने के लिए हटाया गया है। प्लैनेट लैब्स पीबीसी की 5 जून से 19 जून के बीच की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि कभी खचाखच भरा मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा एयरबेस पर लगभग पूरी तरह खाली हो गया है। कतर के अल उदीद एयरबेस पर 5 जून को C-130 हरक्यूलिस परिवहन विमानों और उन्नत टोही जेट समेत लगभग 40 विमान खुलेआम खड़े थे। 19 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में केवल तीन ही बचे दिखाई दे रहे हैं। कतर में अमेरिकी दूतावास ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि बेस तक पहुंच अत्यधिक सावधानी और चल रही क्षेत्रीय शत्रुता के मद्देनजर सीमित होगी। इसके साथ भी बेस कर्मियों से अधिक सतर्कता बरतने का आग्रह किया। ट्रंप ने अभी तक नहीं लिया फैसला इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ है। 19 जून को वॉइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले दो सप्ताह में इस बारे में फैसला लेंगे। एएफपी ने विमानों पर नजर रखने वाले ओपेन-सोर्स डेटा के विश्लेषण से बताया है कि कम से कम 27 सैन्य ईंधन भरने वाले विमान- केसी-46ए पेगासस और केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर विमान- 15 से 18 जून के बीच अमेरिका से यूरोप की यात्रा पर गए। अमेरिका ने शुरू कर दी तैयारी उनमें से केवल दो विमान ही अमेरिका लौटे, जबकि 25 विमान बुधवार देर रात तक यूरोप में थे। हवा में ईंधन भरने वाले विमान लंबी दूरी के हवाई अभियानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह इस बात का संकेत हो सकता है कि अमेरिका लंबे मिशनों के लिए तैयारी कर रहा है। अमेरिका को किस बात का डर? अमेरिकी सेना में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और रैंड कॉरपोरेशन में डिफेंस रिसर्चर मार्क श्वार्ट्ज ने एएफपी को बताया कि ईरान के बेहद नजदीक होने के कारण अल-उदीद में विमान बेहद असुरक्षित होंगे। मध्य पूर्व में सेवा दे चुके श्वार्ट्ज ने कहा कि छर्रे भी विमान को मिशन के लिए अयोग्य बना सकते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा करके (विमानों को हटाकर) अमेरिकी सेना, कर्मियों और उपकरणों दोनों के लिए जोखिम को कम करना चाहती है। अमेरिका के 40000 सैनिक तैनात इजरायल और ईरान में जंग के बीच मध्य पूर्व में अमेरिकी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में लगभग 40,000 सैनिक तैनात है। जबकि सामान्य तौर पर यहां 30,000 की तैनाती रहती है। अक्टूबर में इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान और लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमले के समय यह संख्या कुछ समय के लिए बढ़कर 43,000 हो गई थी।

8th Pay Commission: इस दिन से बढ़ जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी! सैलरी-पेंशन का स्ट्रक्चर, NPS और CGHS योगदान पर क्या होगा असर

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को हरी झंडी दे दी , जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. इससे देश के 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.  8वें वेतन आयोग से सैलरी और पेंशन में कितनी होगी बढ़ोतरी? 8वें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा.आइए जानते हैं कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं. इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लिए ये बदलाव क्यों खास माना जा रहा है. बेसिक सैलरी और पेंशन में भारी इजाफा इस आयोग में सबसे अहम बात फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है, जिसकी मदद से नई बेसिक सैलरी  और पेंशन  (Salary and Pension Hike)  तय होती है. 7वें वेतन आयोग में ये फैक्टर 2.57 था, लेकिन अब इसे 2.86 तक बढ़ाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 51,480 रुपये हो सकती है. वहीं, पेंशन 9,000 से बढ़कर करीब 25,740 रुपये हो सकती है.इस तरह सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 8वें वेतन आयोग में क्या होगा बदलाव? 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में कई बड़े बदलाव ला सकता है। बेसिक सैलरी के अलावा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी बदलाव की उम्मीद है। यह इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी की पोस्टिंग किस शहर में है और उसका काम किस तरह का है। मतलब कि उन्हें दफ्तर में काम करना रहता है, या काम के सिलसिले में भागदौड़ करनी रहती है। इस वजह से, एक ही वेतन ग्रेड के दो कर्मचारी भी अलग-अलग कुल वेतन (Total Salary) पा सकते हैं, क्योंकि उनके भत्ते अलग-अलग होंगे। NPS और CGHS योगदान पर असर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 10 प्रतिशत योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14 प्रतिशत योगदान देती है। 8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने के बाद, ये दोनों योगदान राशि भी बढ़ेंगी। केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS): CGHS की सदस्यता शुल्क सैलरी स्लैब पर आधारित होती है। जैसे ही बेसिक सैलरी बढ़ेगी, CGHS के शुल्क भी नए सैलरी स्ट्रक्चरके अनुसार रिवाइज होंगे। किस ग्रेड में कितनी बढ़ेगी सैलरी? प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 2.86 के आधार पर ग्रेड के हिसाब से सैलरी में इजाफा भी अलग-अलग हो सकता है। आइए समझते हैं कि रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर कैसा दिख सकता है: ग्रेड 2000 (लेवल 3): इस ग्रेड में बेसिक सैलरी ₹57,456 तक बढ़ सकती है। HRA और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों को मिलाकर, कुल मासिक वेतन (ग्रॉस सैलरी) करीब ₹74,845 हो सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद अनुमानित इन-हैंड सैलरी लगभग ₹68,849 रहने की संभावना है। ग्रेड 4200 (लेवल 6): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹93,708 तक हो सकता है। कुल ग्रॉस सैलरी, भत्तों सहित, ₹1,19,798 के आसपास हो सकती है। डिडक्शन के बाद अनुमानित नेट मासिक सैलरी करीब ₹1,09,977 हो सकती है। ग्रेड 5400 (लेवल 9): इस वेतन ग्रेड में बेसिक वेतन ₹1,40,220 तक बढ़ सकता है। भत्तों को जोड़ने पर कुल वेतन ₹1,81,073 तक जा सकता है। कटौतियों के बाद इन-हैंड वेतन करीब ₹1,66,401 होने की संभावना है। ग्रेड 6600 (लेवल 11): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹1,84,452 हो सकता है। सभी भत्तों को मिलाकर, मासिक कुल आय ₹2,35,920 तक हो सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद इन-हैंड सैलरी करीब ₹2,16,825 हो सकती है। अलग-अलग लेवल पर कितनी बढ़ेगी सैलरी? 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग पे लेवल पर कितनी सैलरी मिल सकती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं:     लेवल 3 (ग्रेड पे 2000): बेसिक सैलरी लगभग 57,456 रुपये, कुल सैलरी 74,845 रुपये, डिडक्शन के बाद इनहैंड सैलरी करीब 68,849 रुपये     लेवल 6 (ग्रेड पे 4200): बेसिक सैलरी करीब 93,708 रुपये, कुल सैलरी 1,19,798 रुपये, इनहैंड सैलरी लगभग 1,09,977 रुपये     लेवल 9 (ग्रेड पे 5400): बेसिक सैलरी 1,40,220 रुपये, कुल सैलरी 1,81,073 रुपये, इनहैंड करीब 1,66,401 रुपये     लेवल 11 (ग्रेड पे 6600): बेसिक 1,84,452 रुपये, कुल सैलरी 2,35,920 रुपये, इनहैंड सैलरी करीब 2,16,825 रुपये अलाउंस में भी होगा बदलाव बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी इजाफा होगा. ये इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी किस लोकेशन में पोस्टेड हैं और उनका ट्रैवल कितना होता है. इसी वजह से एक ही ग्रेड के दो कर्मचारियों की कुल सैलरी अलग-अलग हो सकती है. NPS और CGHS में कितना बढ़ेगा कॉन्ट्रीब्यूशन? नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 10% योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14% देती है. बेसिक सैलरी बढ़ने से ये योगदान भी बढ़ेगा. सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की फीस भी सैलरी के स्लैब से जुड़ी होती है. ऐसे में बेसिक सैलरी में इजाफा होने से CGHS की मासिक कटौती भी बढ़ सकती है. क्यों खास है ये बदलाव? 8वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने का काम नहीं करेगा, बल्कि इससे जुड़े सभी खर्चों, सुविधाओं और कर्मचारियों की आर्थिक प्लानिंग पर भी असर पड़ेगा. खासकर रिटायरमेंट प्लानिंग, होम लोन EMI, टैक्स सेविंग और इंश्योरेंस जैसे मामलों में ये बढ़ी हुई सैलरी लोगों को नई राहत दे सकती है.

पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के नियम, जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें

पुरी  हर साल ओडिशा में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में देश भर से लोग पहुंचते हैं. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा शुरुआत 27 जून से होने जा रही है. पुरी में होने वाले इस उत्सव का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृितक विरासत को दिखाता है, जो टूरिस्टों के आकर्षक का भी केंद्र हैं. अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो जानिए यहां कैसे जाएं?  हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 27 जून सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा. रथ यात्रा नौ दिनों तक चलेगी और 5 जुलाई 2025 को समाप्त होगी. कैसे जाएं पुरी अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन जाना होगा, जो देश के करीब सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. वहीं यात्रा के दौरान कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं. पुरी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 2 किलोमीटर के करीब है. यहां से आप ऑटो या रिक्शा लेकर जा सकते हैं. अगर आपको हवाई सफर करना है, तो करीबी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है. जो पुरी से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. एयरपोर्ट से आप बस या टैक्सी की मदद से पुरी तक जा सकते हैं.  पुरी में होटल और धर्मशाला के कई ऑप्शन मौजूद हैं, मंदिर के आसपास कई होटल हैं, जिनका बजट एक हजार से शुरू होता है. वहीं 500 रुपये में आपको धर्मशाला मिल जाएगा. मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात के 9 बजे तक का है. दिन में साढ़े 11 बजे से एक बजे तक भोग और विशेष पूजा के लिए दर्शन बंद रहता है. मंदिर में अगर भीड़ हो तो दर्शन करने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है. जून और जुलाई के महीने में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर से भक्त यहां आते हैं. रथ यात्रा से 15 दिन पहले मंदिर में दर्शन बंद हो जाता है.   रथ यात्रा के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कई इंतजाम किए जाते हैं. पुरी रेलवे स्टेशन के बाहर निशुल्क कैंप भी लगाए जाते हैं जहां तीर्थयात्री रह सकते हैं.  कैसे पहुंचें पुरी? जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचना होगा। पुरी उड़ीसा में स्थित है। आप हवाई मार्ग से सफर कर रहे हैं तो पुरी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है। भुवनेश्वर का बीजू पटनाटक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के कई शहरों से सीधी उड़ान के माध्यम से जुड़ा है। आप भुवनेश्वर एयरपोर्ट पहुंचकर टैक्सी या बस के जरिए 60 किमी की दूरी तय करके पुरी पहुंच सकते हैं।  बजट में सफर के लिए रेल यात्रा का विकल्प भी अपना सकते हैं। पुरी रेलवे स्टेशन देशभर से जुड़ा हुआ है। पुरी रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा स्थल की दूरी लगभग ढाई से तीन किमी है। सड़क मार्ग से यात्रा के लिए भुवनेश्वर और कोणार्क से पुरी के लिए नियमित सरकारी और निजी बसें मिलती हैं। NH-316 द्वारा सड़क मार्ग भी सरल है। पुरी रथ यात्रा के लिए टिप्स पहले से बुकिंग रथ यात्रा में भारत ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। रथ यात्रा के दौरान काफी भीड़ होती है और मंदिर के पास के होटल बुक हो जाते हैं। ऐसे में पहले से परिवहन यानी ट्रेन या फ्लाइट का टिकट बुक कर लें। साथ ही होटल या धर्मशाला की बुकिंग भी पहले से ही कर लें ताकि आपको वहां पहुंचने या रहने में असुविधा न हो। मौसम समझें  जून के अंत में पुरी में गर्मी और बारिश दोनों हो सकते हैं। मौसम का पता लगाकर उसके अनुसार ही आरामदायक कपड़े और छाता साथ रखें।  सावधान रहें रथ यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर स्वास्थ्य समस्या है तो दूर से यात्रा देखें। इसके साथ ही अपनी कीमती सामान की देखरेख भी करें।  मोबाइल ऐप का उपयोग रथ यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी Shree Jagannatha Dham ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इस ऐप से आप दर्शन, लाइन स्थिति, आवास और महाप्रसाद की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है? पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने पुरी नगर दर्शन की इच्छा जताई. तब भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया और रास्ते में वे अपनी मौसी के घर भी कुछ दिन ठहरे. तभी से यह परंपरा हर साल रथ यात्रा के रूप में निभाई जाती है. रथ यात्रा का महत्व ऐसा माना जाता है कि रथ यात्रा में शामिल होने या इसका साक्षात दर्शन करने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है. जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। इस साल यह यात्रा 27 जून से शुरू होगी। 9 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 5 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि जब भगवान जगन्नाथम बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमा को रथ में बैठाकर यात्रा निकाली जाती है, तो इसे भक्त खींचते हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा में रथ खींचने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप भी अगर इस साल भगवान जगन्नाथ जी का रथ खींचना चाहते हैं, तो आपको रथ खींचने से जुड़े नियम जरूर जान लेने चाहिए। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा कहां से निकलती है तीन रथों को मोटी रस्सियों से खींचा जाता है। यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है। रथों को खींचकर चार किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। हर व्यक्ति को रथ खींचने का अवसर मिलता है। कुछ … Read more

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात कर कई मुद्दों पर की चर्चा

सेंट पीटर्सबर्ग केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात की और ट्रांसपोर्ट, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेयर अर्थ मेटल जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देश के दिग्गज लीडर्स के बीच यह मुलाकात रूस के सबसे बड़े शहरों में एक सेंट पीटर्सबर्ग में हुई है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,”रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात की। ट्रांसपोर्ट, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेयर अर्थ मेटल सहित सहयोग के प्रमुख मुद्दों को लेकर चर्चा की।” सेंट पीटर्सबर्ग में भारत की कॉन्सुलेट जनरल की ओर से की गई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ 2025) में भाग लेने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे हैं। एसपीआईईएफ 2025, 18 जून को शुरू हो चुकी है और यह 21 जून तक चलेगी। रूस जाने से पहले रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 जून को हरियाणा के मानेसर में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड प्लांट में देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया था। मारुति सुजुकी के प्लांट में नया गति शक्ति कार्गो टर्मिनल ऑटोमोबाइल परिवहन की लॉजिस्टिक्स दक्षता को काफी हद तक बढ़ाता है। मानेसर प्लांट 10 किलोमीटर के रेल लिंक के माध्यम से पाटली रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है, जो हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआरआईडीसी) द्वारा विकसित किए जा रहे 121.7 किलोमीटर लंबे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। इस 10 किलोमीटर के लिंक के निर्माण के लिए 800 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें एचआरआईडीसी ने 684 करोड़ रुपए का योगदान दिया और शेष राशि मारुति सुजुकी द्वारा दी गई। इस गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की लोडिंग क्षमता 4.5 लाख ऑटोमोबाइल प्रति वर्ष के साथ भारत में सबसे अधिक है। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे में बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले भारतीय रेलवे का वार्षिक बजट 24,000 से 25,000 करोड़ रुपए था, जो कि बढ़कर अब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने अमेरिका को इजरायल को सीधे सैन्य सहायता देने के खिलाफ चेतावनी दी

मॉस्को इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग में रूस की भी एंट्री हो गई है। रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए अमेरिका को खुली धमकी दे डाली है। रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने अमेरिका को इजरायल को सीधे सैन्य सहायता देने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हम वॉशिंगटन को इस तरह के काल्पनिक विकल्पों के खिलाफ भी चेतावनी देते हैं। यह एक ऐसा कदम होगा जो पूरी स्थिति को पूरी तरह से अस्थिर कर देगा।” रूस ने कहा कि यह कदम अत्यंत खतरनाक होगा। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचे पर इजरायली हमलों का मतलब है कि दुनिया तबाही से मिलीमीटर दूर है। वहीं, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को इस संभावना पर चर्चा करने से इनकार कर दिया कि इजरायल और अमेरिका ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार देंगे और कहा कि ईरानी लोग तेहरान में नेतृत्व के इर्द-गिर्द एकजुट हो रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुले तौर पर अनुमान लगाया है कि इजरायल के सैन्य हमलों के परिणामस्वरूप ईरान में शासन परिवर्तन हो सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका जानता है कि खामेनेई कहां छिपे हैं, लेकिन वॉशिंगटन उन्हें अभी नहीं मारने जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि अगर इजरायल अमेरिका की सहायता से खामेनेई को मार देता है, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी, पुतिन ने कहा, “मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता। मैं नहीं करना चाहता।” पुतिन ने कहा कि इजरायल ने मॉस्को को आश्वासन दिया है कि ईरान में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दो और रिएक्टर बनाने में मदद करने वाले रूसी विशेषज्ञों को हवाई हमलों में कोई नुकसान नहीं होगा। पुतिन ने कहा कि मॉस्को के ईरान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और रूस परमाणु ऊर्जा में ईरान के हितों को सुनिश्चित कर सकता है। पुतिन ने कहा कि वह ट्रंप और नेतन्याहू के संपर्क में थे, और उन्होंने संघर्ष को हल करने के लिए मॉस्को के विचारों से अवगत कराया था।  

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