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पुलिस आरक्षक का मंदिर में रिश्वत लेने का विडियो वायरल

The viral video depicts a police constable accepting a bribe inside a temple. कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी के न्यायालय परिसर में एक आरक्षक का खुलेआम रिश्वत लेते वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुलिस वर्दी में एक आरक्षक कुछ युवकों से रुपए लेते दिख रहा है। इस दौरान किसी ने यह पूरा वाक्या मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। हालांकि सहारा समाचार इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। मिली जानकारी के अनुसार रिश्वत लेने वाला आरक्षक कुठला थाने में पदस्थ है। बताया जा रहा है कि आरक्षक काफी समय से कुठला थाने से चालानी पेपर लेकर न्यायालय में आ रहा हैं। हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि न्यायालय परिसर में आरक्षक युवकों से किस बात के रुपए ले रहा है। इधर वीडियो सामने आने के बाद इस वायरल वीडियो की जांच की भी पुलिस के द्वारा बात की जा रही है। अगर इसमें अवैध तरिके से आरक्षण पैसा लेते पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी जा सकती है। फिलहाल आरक्षक का पैसे लेते वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।

डॉ भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया

अजाक्स संघ के पदाधिकारी महापरिनिर्वाण मनाते हुए ग्यारसपुर में रविदास धाम पर डॉ भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पण किए और बाबा साहब के विचारों पर प्रकाश डाला एवम उनके विचारों पर चलने का निर्णय लिया जिसमें अजाक्स अधिकारी कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष देवी सिंह अहिरवार ज्ञान सिंह अहिरवार विक्रम सिंह चिड़ार मनोज कुमार चिडार नंदकिशोर रामकृष्ण सिसोदिया मनोज कुमार प्रदीप कुमार बाबूलाल अहिरवार एवं समाज के वरिष्ठ नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी.

इसको लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. वहीं बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी इसको लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों को निमंत्रण भेजा जा रहा है. वहीं खबर है कि कार्यक्रम में मंदिर बनाने वाले श्रमिकों को भी आमंत्रित किया जाएगा.

राष्ट्रीय करणी सेना प्रमुख श्री सुखदेव सिंह गोगामणि की जयपुर में गोलीमार कर हत्या.

National Karni Sena Chief Mr. Sukhdev Singh Gogamani was shot dead in Jaipur. जयपुर। बहुत ही दुखद घटना 05/12/2023 को राष्ट्रीय करणी सेना प्रमुख श्री सुखदेव सिंह गोगामणि की जयपुर में गोलीमार कर हत्या कर दी गई है उनका इस तरह आकस्मिक निधन पूरे राजपूत समाज की अपूरणीय क्षति है पुलिस को सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तब तक आरोपी भाग गए। मामले की पुलिस प्रशासन ने एफआईआर दर्ज की एवं आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। वहीं लोगों ने राज्यशासन और प्रशासन से मांग है कि इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले अपराधियों को फांसी की सजा दी जाए।

भारतीय-संविधान दिवस आत्मचिंतन का पर्व………..

Indian Constitution Day is a day of introspection सलाहकार संपादक,,शीतला शंकर मिश्राहम भारत के लोगों ने 26नवम्बर1949को भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व लोकतंत्रात्मक गण राज्य बनाने के लिए संविधान को अंगीकृत,अधिनियमित व आत्मार्पित किया था।यही संविधान 26जनवरी 1950को लागू किया गया था।विश्व के सबसे बड़े संविधान की 74वीं वर्ष गाँठ का उल्लास स्वाभाविक है, लेकिन निराशा की खाइयाँ ढेर सारी हैं।संविधान दिवस को आत्मचिंतन दिवस के रूप में मनाने की आवश्यकता है। भारत का संविधान किसी क्रांति का परिणाम नहीं है। ब्रिटिश सरकार ने पराजित क़ौम की तरह भारत नहीं छोड़ा था। स्वाधीनता भी ब्रिटिश संसद के भारतीय स्वतंत्रता क़ानून 1947से मिली। भारतीय संविधान में ब्रिटिशसंसद द्वारा पारित 1935 के अधिनियम की ही अधिकांश बातें हैं। भारत ने भारत शासन अधिनियम 1935को आधार बनाकर गलती की थी। यह आरोप मै ही लगा रहा हूँ ऐसा नहीं है उस समय के विचारकों, क़ानून विदों ने भी लगाया था और आरोपों का उत्तर देते हुए डाक्टर अम्बेडकर ने स्पष्टीकारण दिया था कि उनसे इसी अधिनियम के आधार की अपेक्षा की गई है। भारत की संसदीय व्यवस्था, प्रशासनिक तंत्र व प्रधानमंत्री ब्रिटिश व्यवस्था की उधारी है। दुःखद है कि भारत ने अपनी संस्कृति व जन गण मन की भावना के अनुरूप अपनी राजव्यवस्था नहीं गढ़ी।जिसका परिणाम आप सबके समक्ष है।एक सैकड़ा से ऊपर संविधान संशोधनों के पश्चात् भी परिस्थितियों में मूल भूत सुधार नहीं हो सका है। सम्प्रति भारतीय संविधान और गणतंत्र संकट में है। संविधान सभा ने अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में मात्र 63 लाख 96हज़ार रुपए ही खर्च किये। जम कर बहस हुई,2473संशोधनों पर चर्चा हुई। आज संसद और विधान मंडलों के स्थगन शोर शराबे और करोड़ों रुपयों के खर्च विस्मय कारी हैं।संविधान में शतक से अधिक संशोधन हो चुके हैं। संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है।राजनीति भ्रष्ट उद्योग बन गई है। संविधान के शपथी मंत्री, सांसद, विधायक जेल जा रहे हैं। अनेक जेल में रहकर मंत्री पद के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। जेल में रहकर अनेक जन प्रतिनिधि चुनाव लड़ रहे हैं, जीत भी रहे हैं।निराशा की खाईं गहरी है , राष्ट्रीय उत्सव अब उल्लास नहीं पाते। संवैधानिक संस्थाएँ धीरज नहीं देतीं। आम जन हताश और निराश हैं। राजनीतिक अड्डों में ही गण तंत्र के उल्लास का जग मग आकाश है 15-20%लोग ही संविधान के सुख और गणतंत्र के माल से अघाए हैं। शेष अस्सी प्रतिशत लोग भुखमरी में हैं। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था मोदी मय है और राजनीतिक व्यवस्था गणतंत्र विरोधी है।मेरी दृष्टि में संविधान दिवस राष्ट्रीय आत्मचिंतन का पर्व होना चाहिए।जयहिंद

बरसों से चली आ रही परंपरा आज भी जिंदा, कार्यक्रम में सम्मिलित गांव के लोग.

The tradition that has been ongoing for decades is still alive today, with the people from the participating village in the program. Sitaram Kushwahaविदिशा, ग्यारसपुर के औलिजा ग्राम के लोग आज भी वर्षों पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं ग्राम के सभी लोग ठाकुर बाबा के यहां पर पहुंचकर ढाल चढ़ाते हैं । ग्राम के सभी लोग धूमधाम से यह उत्सव मनाते हैं पूरा गांव इस कार्यक्रम में उमड पड़ता है जंगल के बीचो-बीच ठाकुर बाबा का स्थान है जहां पर लोग, आसपास से भी पहुंचते हैं और सैकड़ो लोग अपनी मन्नत लेकर ठाकुर बाबा के स्थान पर पहुंचते हैं और लोगों की यहां से मन्नत पूरी होती है ऐसा मानते हैं कि जो भी ढाल चढ़ते हैं बाबा उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं, गांव की सरपंच प्रतिनिधि किशोर कुशवाहा ने बताया है कि वर्षों से हम इस परंपरा को मनाते आ रहे हैं हमारे पूर्वज भी यहां पर आकर ग्यारस के बाद बारस को चबूतरा पर पहुंचकर पूरी विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं , और सभी ग्रामीण इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर प्रसाद चढ़ाते हैं और सभी के कल्याण की कामना करते हैं । और सभी को प्रसाद वितरण करते हैं ।

धर्म संसद में गाय को गौमाता का राष्ट्रीय दर्जा देने संतों ने उठाई आवाज.

Saints raised their voices in the Parliament of Religion to confer the national status of ‘Gau Mata’ (Mother Cow) on the cow. सरकार से जल्द गौमाता का राष्ट्रीय पशु का दर्जा हटाने की मांग, दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के संतों ने किया आंदोलन, हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने में यह एक अच्छा कदम साबित होगा Udit Narayan दिल्ली। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गौमाता की रक्षा धर्म रक्षा है और गोमाता की हत्या धर्म हत्या है। अगर धर्म का रक्षण और पोषण करना है तो गाय का रक्षण और पोषण करना शुरू कर दें, धर्म का रक्षण और पोषण अपने आप हो जाएगा। जगतगुरु शंकराचार्य सोमवार को रामलीला मैदान में आयोजित गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन के विशाल महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। शंकराचार्य ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि गोमाता के प्रति हमारी भावना को सत्ता में बैठे लोग नहीं समझ रहे है। एक तरफ देश में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सबको अमृत देने वाली गौमाता की दुर्दशा हो रही है। महासम्मेलन में अलग-अलग राज्यों से गौमाता के लिए समर्पित साधु-संत, गौभक्त, गौशाला संचालक, सामाजिक, धार्मिक और सनातन संस्कृति से संबंधित संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तीन पीठों के शंकराचार्य ने आंदोलन को दिया अपना समर्थन भारतीय गौ क्रांति मंच के संस्थापक और महासम्मेलन के आयोजक गोपालमणि महाराज ने बताया कि अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य ने वीडियो संदेश भेजकर इस आंदोलन को अपना समर्थन और आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि गौमाता का खोया गौरव लौटाने का एकमात्र रास्ता है कि केंद्र सरकार गाय को पशु के दर्जे से हटाए और राष्ट्रमाता का दर्जा दे। गोपालमणि महाराज ने कहा कि गाय हमारे धर्म का हिस्सा है। जबसे हम लोगों ने गाय को धर्म से अलग किया, तभी से गौमाता की दुर्दशा शुरू हो गई है। जो इंसान गौमाता को धर्म की दृष्टि से देखेगा, वही उसकी रक्षा कर सकता है, इसलिए गाय को धर्म की तरह अपनाना होगा। गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवता का वास: देवकीनंदन ठाकुर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवता बसते है। अगर गाय की हत्या होती है तो वह सनातन धर्म की हत्या है। आरएसएस की ममता दास ने कहा कि गौमाता के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकना जरूरी है। इसके लिए हम सबको मिलकर संकल्प लेना होगा। राजस्थान के स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि हमारे जितने भी वैदिक कर्म है, वे सभी गौमाता के बिना संपन्न नहीं होते। हमारी सनानत संस्कृति के अनुसार गाय को माता माना गया है, लेकिन हम गाय का दूध पीने के बाद उसे बाहर निकाल देते हैं, जबकि भगवान ने भी कहा है कि मैं गौ के भीतर रहता हूं। हमारी पूरी संस्कृति और सामाजिक ताना-बाना गौमाता के इर्द गिर्द घूमती है। इसलिए सभी देशवासी गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करवाने के लिए आंदोलन करने के साथ-साथ स्वयं भी गौमाता का सम्मान करें। भाजपा सरकार गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देने में देरी नहीं करेअब देखना यह है कि केंद्र सरकार संतों की मांग गाय को राष्ट्रीय गौमाता का दर्जा देती है या विचार में किसान आंदोलन जैसा स्वरूप लेने के लिए संत महात्माओं को विवश होना पडेगा। कुछ धार्मिक गुरूओं से चर्चा करने के बाद यह कहा जा सकता है कि जैसा कि भाजपा अपने आपको सनातन के प्रति वचनवद्ध है, तो फिर भाजपा सरकार गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देने में देरी नहीं करनी चाहिए। पूर्व में भी भाजपा सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सनातन की रक्षा के लिए अनुकरणीय कदम उठा चुकी है। भाजपा सरकार के लिए यह अच्छा मौका है कि वह गौमाता को राष्ट्रीय दर्जा देती है। जिससे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने में एक अच्छा कदम साबित होगा।

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य का आमरण अनशन 11वें दिन अनवरत जारी।

The fast unto death of the ascetic Chhawni Peethadhishwar Jagatguru Paramhans Acharya continues for the 11th day continuously for the demand of Hindu Rashtra. अन्न जल का परित्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में कर रखा है कैद। समर्थन में उतरे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने गदा भेंट कर किया सम्मान। संतोष सिंह तोमर अयोध्या। भारत देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य को उनके सहयोगियों ने आज अनशन के 11 दिन बीतने पर करीब आधा घंटे के लिए अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान तपस्वी छावनी में मौजूद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय प्रमुख ने संघठन के सदस्यों के साथ आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर को हनुमान जी का गदा भेंट कर उनका सम्मान किया। हम आपको याद दिला दें की विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने विगत 7 नवंबर मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने सुबह 4 बजे से ही अन्न जल का त्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में बंद कर लिया था वह तब से लेकर आज तक अपने आश्रम पर अन्न जल के बिना खुद को कमरे में बंद किए हुए हैं। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन पर जबरन आमरण अनशन तुड़वाने की साजिश करने का आरोप लगाया है। हम आपको बता दें कि परमहंसाचार्य ने हिंदू राष्ट्र घोषित ना होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी बहुत पहले ही दे दी थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी लिख चुके हैं कई पत्र आमरण अनशन से जगतगुरु परमहंसाचार्य एक बार फिर से सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए वह एक लंबे समय से संवैधानिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में घूम- घूमकर हिंदू राष्ट्र की अलख जगाई। हिंदू राष्ट्र की मुहिम से भारत के कई हिंदूवादी संगठनों को भी जोड़ा। उनकी मांग थी कि 6 नवंबर 2023 तक भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। नही तो 7 नवंबर से अन्न जल का त्याग कर वह आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे इसके लिए वह कई बार देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई, जिसके कारण उन्हें भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने हेतु अन्न जल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा है। इससे पूर्व राममंदिर के लिए उन्होंने 16 दिनों तक आमरण- अनशन किया था जो श्रीरामजन्मभूमि के फैसले में निर्णायक भी साबित हुआ था। पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना, भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर उन्होंने सबसे पहले देश में आवाज उठाई और आमरण अनशन किया। आज हिंदू राष्ट्र की मांग पूरे देश की आवाज बन चुका है। विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि हिंदू राष्ट्र सौ करोड़ हिंदुओं की मांग है। जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश दिया गया। जो मुस्लिम राष्ट्र बन चुका है, तो भारत हिंदुराष्ट्र क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि 1947 के बंटवारे से भारत का जो भाग बचा हुआ है। उसको जल्द से जल्द हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म व मानवता को बचाने के लिए भारत संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि देश में लगातार लव जेहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सनातन धर्म को मिटाने की चुनौती दे रहे हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और मानवता को बचाने के लिए भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो इसके लिए हमारी मांग मान ली जाए। नही तो मेरा शरीर छूट जाए कोई बात नहीं एक परमहंस जायेंगे, तो न जानें कितने हजारों-लाखों परमहंस आयेंगे। परमहंसाचार्य के समर्थन में ओजस्वी फाउंडेशन महाराष्ट्र के एकनाथ महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी समेत उनके तमाम समर्थक आमरण अनशन स्थल पर मौजूद रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने दिया है संपूर्ण समर्थन जगतगुरु परमहंस आचार्य के आमरण अनशन को समर्थन देने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी अनशन शुरू होने के साथ ही तपस्वी छावनी पहुंच गए थे। जहां उन्होंने स्पष्ट कर दिया था श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल जगतगुरु परमहंस आचार्य के हिंदू राष्ट्र की मांग के समर्थन में पूरी तरह खड़ा है। यह कोई नाजायज नहीं बल्कि जायज मांग है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैं तपस्वी छावनी पहुंचा तो महाराज श्री एक कमरे में अपने आपको बंद करके आमरण अनशन कर रहे थे। पता चला कि पुलिस प्रशासन उनको उठाने के लिए तपस्वी छावनी पहुंच गया था। आज ग्यारह दिन बाद अनशन पर बैठे आचार्य श्री से निवेदन कर उन्हें अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान हिंदू राष्ट्र के लिए प्रयत्नशील तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री परमहंस आचार्य को हिन्दू राष्ट्र के लिए शुरू की गई इस लड़ाई में विजय हेतु महाबली श्री हनुमान जी का गदा प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट कर उनका सम्मान किया गया। इस बीच करीब तीस मिनट तक आचार्य श्री अनशन कक्ष से बाहर ही रहे लेकिन तीस मिनट के बाद उन्होंने फिर से अपने आपको तालों के बीच कैद कर लिया। भारत का शायद पहला ऐसा आमरण अनशन होगा। जहां पर किसी अनशनकारी ने खुद की सुरक्षा के लिए अपने आपको तालों में बंद कर रखा हो, ऐसा शायद इतिहास में कहीं नहीं मिलेगा। संत के आमरण अनशन से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेश मणि त्रिपाठी ने महाराज जी के इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक जनमानस जिस लिए भाजपा को चुनाव जीताकर यहां पहुंचाया इसका मुख्य आधार इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाया जाना ही था, लेकिन हिंदू राष्ट्र का सपना आम जनमानस का साकार नहीं हुआ। आज एक संत हिंदू राष्ट्र के लिए आमरण आसान कर … Read more

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य आमरण अनशन पर बैठे।

The ascetic Chhawni Peethadhishwar Jagatguru Paramhans Acharya sat on a fast unto death demanding a Hindu nation. अन्न जल का परित्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में कर लिया कैद। अनशन रत परमहंसाचार्य के समर्थन में उतरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल। संतोष सिंह तोमर अयोध्या। हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। वह अपने आश्रम पर सुबह के 4 बजे से ही अन्नजल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने खुद को आश्रम के एक कमरे में कैद कर लिया। है। साथ ही जिला प्रशासन पर जबरन आमरण अनशन तुड़वाने की साजिश करने का आरोप लगाया है। हम आपको बता दें कि परमहंसाचार्य ने हिंदू राष्ट्र घोषित ना होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी पहले ही दे दी थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी लिख चुके हैं कई पत्र आमरण अनशन से जगतगुरु परमहंसाचार्य एक बार फिर से सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए वह एक लंबे समय से संवैधानिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में घूम- घूमकर हिंदू राष्ट्र की अलख जगाई। हिंदू राष्ट्र की मुहिम से भारत के कई हिंदूवादी संगठनों को भी जोड़ा। उनकी मांग थी कि 6 नवंबर 2023 तक भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। नही तो 7 नवंबर से अनजल का त्याग कर वह आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे इसके लिए वह कई बार देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई, जिसके कारण उन्हें भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने हेतु अन्नजल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा है। राममंदिर के लिए उन्होंने 16 दिनों तक आमरण- अनशन किया था जो श्रीरामजन्मभूमि के फैसले में निर्णायक भी साबित हुआ था। सौ करोड़ हिंदुओं की मांग है हिंदू राष्ट्र हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर उन्होंने सबसे पहले देश में आवाज उठाई और आमरण अनशन किया। आज हिंदू राष्ट्र की मांग पूरे देश की आवाज बन चुका है। जगतगुरु ने कहा कि हिंदू राष्ट्र सौ करोड़ हिंदुओं की मांग है। जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश दिया गया। जो मुस्लिम राष्ट्र बन चुका है, तो भारत हिंदुराष्ट्र क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि 1947 के बंटवारे से शेष जो भाग भारत बचा हुआ है। उसको जल्द से जल्द हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म व मानवता को बचाने के लिए भारत संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बने। एक परमहंस जाएंगे,तो लाखों परमहंस आयेंगे देश में लगातार लव जेहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सनातन धर्म को मिटाने की चुनौती दे रहे हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और मानवता को बचाने के लिए भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो इसके लिए हमारी मांग मान ली जाए। नही तो मेरा शरीर छूट जाए कोई बात नहीं एक परमहंस जायेंगे, तो न जानें कितने हजारों-लाखों परमहंस आयेंगे। परमहंसाचार्य के समर्थन में ओजस्वी फाउंडेशन महाराष्ट्र के एकनाथ महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी समेत सैंकड़ों आमरण अनशन स्थल पर मौजूद रहे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने दिया संपूर्ण समर्थन जगतगुरु परमहंस आचार्य के आमरण अनशन को समर्थन देने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी तपस्वी छावनी पहुंचे। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल जगतगुरु परमहंस आचार्य के हिंदू राष्ट्र की मांग के समर्थन में पूरी तरह खड़ा है। यह कोई नाजायज नहीं बल्कि जायज मांग है। आखिर दुनिया में सबके तो अपने कहने के देश हैं। 85 प्रतिशत हिंदुओं को अपना कहने का कौन सा देश है। भाजपा की केंद्र सरकार से उम्मीद भी यही की जा रही थी कि हिंदू राष्ट्र जल्दी बन जाएगा। लेकिन जिस तरह हिंदू राष्ट्र बनाने में हीलाहवाली हो रही है उससे भाजपा सरकार से विश्वास उठता जा रहा है। अनशन पर बैठे आचार्य ने खुद को किया ताले में कैद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैं तपस्वी छावनी पहुंचा तो महाराज श्री एक कमरे में अपने आपको बंद करके आमरण अनशन कर रहे थे। पता चला कि पुलिस प्रशासन उनको उठाने के लिए तपस्वी छावनी पहुंच चुकी थी। मजबूरी में उन्होंने अपने आपको तालों के बीच कैद कर अपना अनशन जारी रखा है। भारत का शायद पहला ऐसा आमरण अनशन होगा। जहां पर किसी अनशनकारी को खुद की सुरक्षा के लिए अपने को तालों में बंद करना पड़ा। ऐसा शायद इतिहास में कहीं नहीं मिलेगा। यह काम सरकार को खुद करना चाहिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि जो काम सरकार को खुद कर देना चाहिए था। उसके लिए एक संत को आमरण अनशन करना पड़ रहा है और उससे भी बड़ी दुर्भाग्य की बात यह है कि भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या नगरी की पावन धरती पर ऐसा हो रहा है। जबकि भारत सरकार को खुद ही आगे बढ़कर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए। परमहंस आचार्य के आमरण अनशन को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल का पूर्ण समर्थन है और अंत तक रहेगा। जरूरत पड़ी तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल परमहंसाचार्य के समर्थन में अयोध्या की गलियों में भी समर्थन जुटाने के लिए निकलेगी ।

पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्धकर्म की महिमा।

हमारे हिन्दू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष की महिमा विशेष मानी जाती है, और इसे पितरों की पूजा और श्राद्ध का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। हिदू धर्म के अनुसार माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन 16 दिनों के पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष में पितृ देवता अर्थात पंचतत्व में विलीन हो चुके परिजनों की मृतात्माओं को भोजन और जल अर्पित किया जाता है, जिसे तर्पण और श्राध्द कर्म कहा गया है। मान्यता यह है कि पितृपक्ष के 16 दिनों में मृत्यु तिथि अनुसार किये गए तर्पण एवं श्राद्धकर्म से पितृदेवताओं को भोजन और जल प्राप्त होता है। पितृदेवताओं के लिए मनाये जाने वाले 16 दिवसीय पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष का वर्णन हमारे वेद-पुराणों ओर धर्मग्रंथों में भी मिलता है। हिन्दुओं के प्रमुख धर्मग्रंथ श्रीराम चरित मानस से प्राप्त वर्णन के अनुसार स्वयं भगवान श्री राम चन्द्र जी ने भी अपने पिता महाराज दशरथ जी की मृत्यु के बाद उचित समय पर पितृदेवताओं के लिए श्राद्धकर्म एवं तर्पण किया था। इसके साथ ही गरुण पुराण और महाभारत आदि में भी तर्पण और श्राद्धपक्ष का वर्णन मिलता है इसकी महिमा कुछ मुख्य तत्वों पर आधारित होती है। जिसमें से कुछ विशेष कारणों से आपको अवगत कराते हैं। इन कारणों से, पितृपक्ष को हिन्दू समुदाय में एक महत्वपूर्ण और समर्पित त्योहार माना जाता है, जिसके कारण प्रत्येक हिन्दू परिवार में इन 16 दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष को धर्म, और पितरों के स्मरण में बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और सभी को अपने पितृदेवताओं की आत्मतृप्ति के लिए पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्धकर्म अवश्य करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति पितृपक्ष के दौरान, परिवार के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि श्राद्ध के द्वारा पितरों की आत्माओं को शांति मिलती है और वे स्वर्ग में आनंद से रहते हैं। पितृऋण हिन्दू धर्म में, पुत्र या पुत्री का धर्म है कि वे अपने पितरों के ऋण को चुकाएं। पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध करके, यह ऋण चुकाया जाता है। परिवार के महत्व पितृपक्ष एक परिवारी त्योहार होता है जिसमें परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं और अपने पितरों के स्मरण में एकत्र होते हैं। इसके माध्यम से परिवार के बंधन मजबूत होते हैं। धार्मिक महत्व पितृपक्ष का पालन करने से व्यक्ति अपने धर्म के मान्यता और तात्पर्य को दिखाता है। यह धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है और आत्मा के मोक्ष की दिशा में मदद करता है।

महान खेल प्रशासक कै.माधवराव सिंधिया। कैलाशवासी माधवराव सिंधिया जी की 22वी पुण्यतिथि पर विशेष।

कैलाशवासी महाराज माधवराव सिंधिया का नाम देश के सक्रिय राजनेताओं में शुमार है। उन्होंने पांचवी लोकसभा से लेकर तेरहवीं लोकसभा तक लगातार नौ बार सांसद के रूप प्रतिनिधित्व किया। वे भारत सरकार के कई जिम्मेदार विभागों में मंत्री रहे। जिसमें उनके रेलमंत्री के कार्यकाल (1984-1989)को विशेष रूप से याद किया जाता है। नागरिक उड्डयन, पर्यटन व मानव संसाधन एवं विकास जैसे मंत्रालयों का दायित्व भी उन्होंने कुशलतापूर्वक संभाला। माधवराव सिंधिया का जन्म 10 मार्च 1945 ई. को समुद्रमहल, बम्बई (मुंबई), महाराष्ट्र में हुआ था। माधवराव सिंधिया, महाराजा जीवाजीराव सिंधिया एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया के एकमात्र पुत्र थे। माधवराव सिंधिया ने खेलों के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्यों का संपादन किया। उन्होंने खेल प्रशासक के रूप में देश-विदेश में खासी ख्याति प्राप्त की थी। उन्होंने क्रिकेट, हॉकी सहित कई खेलों को अपना प्रत्यक्ष समर्थन दिया। उन्होंने संसद में रहते हुए भी खेलों की आत्मा को जीवित रखा और कई बार संसद की क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। वे स्वयं क्रिकेट, हॉकी, ब्रिज, गोल्फ आदि के अच्छे खिलाड़ी थे। माधवराव सिंधिया को क्रिकेट से अत्यधिक लगाव था, इसी कारण वे क्रिकेट प्रशासनिक बॉडी के सदस्य बने एवं कई बार विभिन्न क्रिकेट संघों के अध्यक्ष भी रहे। 1967 ई. में ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना हुई और 1976 ई. में माधवराव सिंधिया इस एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान माधवराव सिंधिया की कप्तानी में ग्वालियर ने सीनियर डिवीजन क्रिकेट टूर्नामेंट के मुकाबले में उज्जैन को हराया। माधवराव सिंधिया वर्ष 1982-83 ई. में मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने और तब से लगातार 19 वर्षो तक, मृत्युपर्यंत एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर काबिज रहे। इस पद पर रहते उन्होंने एसोसिएशन और प्रदेश के क्रिकेट के विकास में जो महत्वपूर्ण कदम उठाए, वे मील के पत्थर साबित हुए। माधवराव सिंधिया 1991-1993 ई. तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने देश के इस संगठन को विश्व का सबसे धनी क्रिकेट संगठन के रूप में बदल दिया। माधवराव सिंधिया भारत में 1996 ई. में हुए ‘विल्स विश्वकप’ क्रिकेट मैंचों की समिति ‘पिल्कॉम’ के अध्यक्ष रहे। यह विश्वकप भारत, पाकिस्तान एवं श्रीलंका ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। उनके नेतृत्व मेंं विश्वकप का सफल आयोजन हुआ था। माधवराव सिंधिया ने खेल प्रशासक के तौर पर ग्वालियर में क्रिकेट सुविधाओं का विकास पूर्ण मनोयोग से किया। ग्वालियर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट सुविधाएं उपलब्ध करवाईं। ग्वालियर के कैप्टन रूपसिंह क्रिकेट स्टेडियम को अत्याधुनिक एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाया एवं उसमें सभी अत्यावश्यक सुविधाओं का विकास करवाया। ग्वालियर का रूपसिंह क्रिकेट स्टेडियम सेन्ट्रल जोन का पहला और देश का छठवां ऐसा क्रिकेट स्टेडियम है, जहॉं खिलाडियों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। वे रूपसिंह स्टेडियम को इंग्लैण्ड के लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम की तरह भव्य और आकर्षक बनाना चाहते थे। माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए अनेकों कार्य किए। रूपसिंह स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मैच आयोजित हो सकें, इस हेतु 1984 ई. में पिच विशेषज्ञ सीताराम को नियुक्त किया। ग्वालियर स्टेडियम की गैटिंग पिच को निकलवाकर उसकी जगह ‘टर्फ पिच’ बनवायी। रूपसिंह स्टेडियम में 1989 ई. में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय मैच भारत एवं वेस्टइंडीज के बीच हुआ। रूपसिंह स्टेडियम, ग्वालियर में दिन-रात का मैच आयोजित करने के लिए फ्लड लाईट्स लगवाईं। यह फ्लड लाईट्स 1995 ई. में लगकर तैयार हुई और 21 फरवरी 1996 ई. में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूधिया रोशनी में पहला मैच रूपसिंह स्टेडियम में हुआ। रूपसिंह स्टेडियम में 1997 ई. में विश्व में प्रथम बार पांंच दिवसीय दिन-रात का मैच रणजी ट्राफी क्रिकेट प्रतियोगिता के तहत ग्वालियर में खेला गया। माधवराव सिंधिया ने मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन एवं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रहते क्रिकेट खिलाड़ियों की सुख सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा। रेलमंत्री रहते उन्होंने रेलवे में खिलाड़ियों को नौकरी दिलवायी। उनके अध्यक्ष बनने के पहले मध्यप्रदेश के रणजी ट्राफी खिलाड़ियों को द्वितीय श्रेणी में यात्रा करनी पड़ती थी। उनके अध्यक्ष बनने के बाद खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी में यात्रा करने की सुविधा मिलना शुरू हुई। उन्होंने क्रिकेट खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करवायीं। माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर में हॉकी को बढ़ावा देने के लिए भी कई कार्य किए। माधवराव सिंधिया स्वयं भी हॉकी बहुत अच्छी खेला करते थे। उन्हें ग्वालियर की जनता ने प्रत्यक्षत: छतरी मंडी खेल मैदान में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ हॉकी खेलते देखा है। ग्वालियर के सिंधिया शासकों ने हॉकी की लोकप्रियता को देखते हुए 1919 ई. में स्थानीय स्तर पर ‘सिंधिया हॉकी गोल्ड कप’ की शुरुआत करवायी। 1924 ई. में इस प्रतियोगिता को अखिल भारतीय स्तर का दर्जा मिला। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद मध्यभारत हॉकी संघ ने सिंधिया गोल्ड कप हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन कराने की जिम्मेदारी ली। माधवराव सिंधिया ने रेल मंत्री बनते ही 1986 ई. में ग्वालियर में पृथक से ‘रेलवे हॉकी स्टेडियम’ की आधारशिला रखी एवं 1987 ई. में ‘एस्ट्रोटर्फ मैदान’ की व्यवस्था करवायी। इसका उद्घाटन भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टैस्ट मैच के साथ हुआ। इस प्रकार माधवराव सिंधिया ने हॉकी को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवायीं। माधवराव सिंधिया जीवन पर्यन्त खेल एवं खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए कार्य करते रहे। माधवराव सिंधिया की मृत्यु एक विमान दुर्घटना में हुई। जब वे उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रचार हेतु दिल्ली से कानपुर जा रहे थे। 30 सितम्बर, 2001 को हुई इस दुर्घटना के समय उनकी आयु 56 वर्ष, 6 माह, 19 दिन की थी। माधवराव सिंधिया के अचानक निधन से सारा देश स्तब्ध रह गया। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, ‘वज्रपात हो गया! क्या काल भी इतना कू्र हो सकता हैं?’ ऐसे महान नेता एवं पथ प्रदर्शक सदियों में जन्म लेते हैं।

महाकुंभ के नाम पर गुर्जर समाज ने मचाया आतंक।

ग्वालियर। शहर के फूलबाग मैदान पर गुर्जर समाज द्वारा आयोजित गुर्जर महाकुंभ के दौरान गुर्जर युवाओं ने जमकर हंगामा किया। पहले फूलबाग चौराहे पर चक्काजाम किया। पथराव किया। फिर कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर, एसपी, नगर निगम कमिश्नर, एसडीएम समेत 50 से ज्यादा पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की गाड़ियों में तोड़फोड़ दीं। कलेक्ट्रेट में घुसने पर जो सामने आया, उसे पीटा। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में बाहर लगे कांच भी तोड़ दिए। इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भी नहीं बख्शा। हिंसक प्रदर्शन कर रहे युवकों ने पुलिस के अधिकारी सहित कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया गया। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस अधिकारियों ने और फोर्स बुलाकर कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर उपद्रवियों को खदेड़ दिया लेकिन हिंसा और उपद्रव मचाने पर आमादा गुर्जर युवाओं ने मुरार, थाटीपुर आदि कई स्थानों पर भी हंगामा कर बाजार बंद करा दिये। यहां से पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के बाद उपद्रवियों का हुजूम हाइवे पर स्थित सिकरौदा तिराहे पर जा पहुंचा और यहां भी भारी उत्पात मचाते हुए हाइवे से गुजर रहे वाहनों में तोड़फोड़ और लोगों से मारपीट कर हाइवे पर जाम लगा दिया। हाइवे जाम की खबर मिलते ही भारी पुलिस बल के साथ तमाम अधिकारी हाइवे पर जा पहुंचे और बल प्रयोग कर उपद्रवियों को खदेड़ा और जाम खुलवाया। इस घटना के बाद से चिरवाई नाके पर राजा मिहिर भोज की प्रतिमा के आसपास फोर्स तैनात करने के साथ ही पुलिस पूरे इलाके पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस ने 25 संदिग्ध लोगों को पकड़ा है। ये सभी बाइक से आए थे। उन्होंने पास ही के पेट्रोल पंप पर बाइक पार्क की थी। पुलिस ने पेट्रोल पंप पर खड़ी 150 से ज्यादा बाइक जब्त कर ली हैं। फूलबाग मैदान पर आयोजित था गुर्जर महाकुंभ सोमवार को फूलबाग मैदान पर गुर्जर पंचायत के बैनर तले गुर्जर महाकुंभ का आयोजन किया गया था। इसमें अंचल के सभी जिले सहित अन्य प्रदेशों से गुर्जर समाज के लोग आए थे। इसमें पांच प्रमुख मांगों को रखा गया था। सबसे बड़ी मांग गुर्जर सम्राट मिहिर भोज को लेकर है। असल में, ग्वालियर में पिछले दो साल से चिरवाई नाका पर लगी सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को विवाद के चलते टीन शेड से कवर कर दिया गया था। ये कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन और पुलिस ने की थी। इसी को लेकर गुर्जर समुदाय में आक्रोश है। इनकी मांग है कि प्रतिमा के आसपास लगाए गए टीनशेड कवर हटाए जाएं। कलेक्ट्रेट जाना पहले से तय था, पुलिस का इंटेलिजेंस फैल ग्वालियर में सोमवार को गुर्जर समुदाय का गुर्जर महाकुंभ कब उपद्रव में बदल गया पुलिस को पता भी नहीं लगा। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कई बड़े नेताओं के साथ ही अंचल के हजारों गुर्जर युवा महाकुंभ के नाम पर फूलबाग मैदान में जमा थे। पुलिस और प्रशासन को पता ही नहीं चला शांतिपूर्ण आंदोलन कब और कैसे उग्र आंदोलन में बदल गया ? यह सब पहले से तय था, पुलिस चाहती तो इस उपद्रव को रोका जा सकता था, लेकिन पुलिस का इंटेलीजेंस पूरी तरह फेल रहा है। फूलबाग मैदान में चल रहे गुर्जर महाकुंभ में भडकाऊ भाषण के बाद दोपहर 1.30 बजे करीब 800 से 900 युवा फूलबाग चौराहा पर आए और यहां जाम लगाने बैठ गए। यहां जब पुलिस ने उन्हें काबू करना चाहा, तो उपद्रवियों ने सिरोल थाना की मोबाइल (गाड़ी) के कांच तोड़ दिए। इसके बाद किसी तरह पुलिस ने कन्ट्रोल कर लिया। पुलिस को पता था कि यह तो कुछ युवक थे। महाकुंभ में आए सभी सदस्य एक साथ कलेक्ट्रेट जाएंगे। उसके बाद भी पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। पहली घटना के तीन घंटे बाद 4.30 बजे के लगभग गुर्जर युवा कलेक्ट्रेट पहुंचे और यहां उपद्रव मचा दिया। यहां उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त फोर्स नहीं था। पहले से तय था कलेक्ट्रेट का घेराव गुर्जर महाकुंभ का आयोजन पहले से तय था। गुर्जर महाकुंभ के संयोजक दिनेश कंसाना ने दो दिन पहले ही घोषणा की थी कि गुर्जर महाकुंभा में मंच से सभा होने के बाद सभी सदस्य रैली के रूप में कलेक्ट्रेट जाएंगे और यहां कलेक्टर ग्वालियर को अपनी मांगों से अवगत कराने ज्ञापन सौंपा जाएगा। जब यह कार्यक्रम तय था तो पुलिस ने इंतजाम क्यों नहीं किए। जबकी पूर्व में सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार की मूर्ती के मामले में चिरवाई नाका,गोला का मंदिर , दीनदयाल नगर चौराहा सहित अन्य स्थानों पर गुर्जर समाज ने उग्र आंदोलन किये हैं। उपद्रवियों के वाहनों के नंबर से होगी पहचान पुलिस को कलेक्ट्रेट के सामने पेट्रोल पंप पर खड़े लगभग डेढ़ सैकड़ा वाहन मिले हैं। यह वाहन उन लोगों के हैं जो कलेक्ट्रेट में हंगामा करने आए थे। उपद्रवी पुलिस के खदेड़ने के बाद बिना वाहनों के भागे हैं। अब पुलिस ने यह वाहन जब्त कर लिए हैं। अब इनके रजिस्ट्रेशन नंबर से पुलिस एक-एक उपद्रवी का पता लगाकर उनके घर पहुंचेगी। इन मांगों को लेकर अड़ा था गुर्जर समाज *1, गुर्जर समाज को भाजपा-कांग्रेस संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दें। 2, गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के आसपास लगाए गए टीनशेड कवर हटाए जाएं। 3, भिंड में भूरेश्वर मंदिर से हटाया गया गुर्जर बोर्ड वापस लगाया जाए। 4, गुर्जर प्रतिहार वंश की ऐतिहासिकता से छेड़छाड़ बंद की जाए। 5, गुर्जर समाज का निर्दोष सदस्य आकाश गुर्जर के एनकाउंटर पर उसके परिवार को आर्थिक मदद दी जाए 6, जहां-जहां से गुर्जर नाम हटाया गया है वहां उसका उल्लेख वापस किया जाए*

स्लीमनाबाद क्षेत्र में एटीएम कार्ड बदलकर पलक झपकते ही निकले पैसे

शब्द पावर, कटनी। स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के सेंट्रल बैंक एटीएम में रुपए निकालने गए एनटीपीसी के रिटायर्ड मैनेजर का एटीएम कार्ड पलक झपकते एक युवक ने बदलकर खाते से रुपए गायब कर दिए। घटना के संबंध में चर्चा करते हुए एनटीपीसी के रिटायर्ड मैनेजर नरेश कुमार पांडे ने बताया कि 22 सितंबर की शाम लगभग साढ़े सात बजे वे तेवरी स्थित सेंट्रल बैंक के एटीएम में रुपए निकालने गए थे। जब वह एटीएम में रुपए निकालने की कोशिश कर रहे थे तो बार बार रुपए निकालने के बाद भी प्रोसेस नहीं हो रहा था। इसी दौरान पीछे से एक लगभग 25 से 30 वर्षीय युवक आया और उसने कहा कि दीजिए चाचा मैं मदद करता हूं। युवक ने महज 10 सेकंड के भीतर एटीएम कार्ड बदल दिया और वहां से चलता बना। कुछ देर बाद ही खाते से रुपए निकाले जाने के एसएमएस मेरे मोबाइल पर आने लगे। देखते ही देखते खाते से 40 हजार रुपए निकल गए। खाते से पैसे निकालने की शिकायत करते हुए उसने किसी तरह मोबाइल को लॉक कराया और इस घटना की शिकायत पुलिस से की। यह पहला अवसर नहीं है कि जब इस तरह का फ्रॉड जिले में सामने आया हो ऐसे मामले पहले भी हो चुके हैं लेकिन अभी तक ऐसे मामलों में पुलिस के हाथ खाली ही हैं।

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