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रियल एस्टेट सेक्टर में पीई निवेश 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर रहा

मुंबई. भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश 2024 में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग सेक्टर में मांग मजबूत होना है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में पीई निवेश हासिल करने में वेयरहाउसिंग सेक्टर सबसे आगे रहा, जिसकी कुल निवेश में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद कुल निवेश में रेजिडेंशियल सेक्टर की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत और ऑफिस सेक्टर की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में रेजिडेंशियल सेक्टर में निजी इक्विटी निवेश दोगुने से अधिक बढ़ा है। इस दौरान पीई निवेश में 104 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो इस वर्ष 1.2 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि निवेशकों के फोकस और सेक्टर की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। पीई निवेश में वेयरहाउसिंग सेक्टर ने ऑफिस सेक्टर को पीछे छोड़ दिया, जिसकी 2017 से पीई निवेश में उच्चतम हिस्सेदारी थी, जो भारतीय रियल एस्टेट बाजार में वेयरहाउसिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। मुंबई की कुल पीई निवेश में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग में निवेश बढ़ना है। 2024 में देश की आर्थिक राजधानी में 2 अरब डॉलर का पीई निवेश आया है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 2024 में मुंबई में आये कुल पीई निवेश में से 74 प्रतिशत वेयरहाउसिंग सेक्टर में आया है। इसकी वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही है। वहीं, शहर में रेजिडेंशियल सेक्टर में 406 मिलियन डॉलर का पीई निवेश हुआ है। 2024 में बेंगलुरु को कुल 833 मिलियन डॉलर का पीई निवेश प्राप्त हुआ। इनमें से लगभग 52 प्रतिशत या 430 मिलियन डॉलर निवेश ऑफिस सेक्टर में आया है।, जबकि शेष 48 प्रतिशत या 403 मिलियन डॉलर का निवेश रेजिडेंशियल सेक्टर में आया है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, “भारत में पिछले एक दशक में निवेश में बढ़त हुई है। इसकी वजह आर्थिक स्थिरता और लगातार हो रही ग्रोथ है। ई-कॉमर्स और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स में वृद्धि से वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी है। वहीं, बढ़ती हुई कंज्यूमर मांग का फायदा रेजिडेंशियल सेक्टर को मिल रहा है।”

बाजार में कोहराम, भरभराकर ग‍िरा सेंसेक्‍स-न‍िफ्टी; म‍िनटों में 6 लाख करोड़ खाक

मुंबई भारतीय शेयर बाजार को अमेर‍िकी फेड र‍िजर्व की तरफ से ल‍िया गया फैसला रास नहीं आया. इसका असर अमेर‍िकी बाजार के साथ घरेलू स्‍टॉक मार्केट में भी द‍िखाई द‍िया. फेड र‍िजर्व की तरफ से अगले साल ब्‍याज दर में कम कटौती का संकेत द‍िये जाने के बाद दुन‍ियाभर के बाजार में ग‍िरावट देखी गई. इसके बाद आज सुबह सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में टूट गए. बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1100 अंक से ज्‍यादा की गिरावट के साथ 79,029.08 अंक पर आ गया. वहीं एनएसई निफ्टी 328.55 अंक फिसलकर 23,870.30 अंक पर देखा गया. इससे न‍िवेशकों को शुरुआती कुछ ही म‍िनटों में 6 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. वहीं इसका असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में भी देखने को मिल रहा है. Sensex 1100 अंक से ज्‍यादा टूटकर खुला, जबकि निफ्टी 400 अंक से ज्‍यादा टूटकर ओपेन हुआ. हालांकि कुछ देर बाद स्थिति थोड़ी संभली हुई दिखाई दी. सेंसेक्‍स अभी 917 अंक गिरकर 79,238.08 पर कारोबार कर रहा है. वहीं Nifty50 283 अंक गिरकर 23,914.95  पर कारोबार कर रहा है. बैंक न‍िफ्टी में 744 अंक की गिरावट आई है. BSE सेंसेक्‍स के टॉप 30 शेयरों में से दो शेयरों को छोड़कर सभी शेयर गिरावट पर हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट इंफोसिस के शेयरों में 3 फीसदी की आई है. वहीं निफ्टी के 47 शेयर दबाव में कारोबार कर रहे हैं. जबकि 3 शेयर उछाल पर हैं. टाटा कंज्‍यूमर और डॉ. रेड्डी के शेयरों में तेजी देखी जा रही है. इन 10 शेयरों में बड़ी गिरावट एशियन पेंट्स के शेयर (Asian Paints Share) 2 फीसदी से ज्‍यादा टूटकर कारोबार कर रहे हैं. वहीं इंफोसिस (Infosys Share) में 3 फीसदी, टीसीएस, एचसीएल, महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई है. स्‍मॉल और मिड कैप में त्रिवेणी टरबाइन, फाइव स्‍टार बिजनेस, सोनाटा सॉफ्टवेयर, भारती हेक्‍साकॉम, नायका, कोचिन शिपयार्ड के शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरकर कारोबार कर रहे हैं. क्यों टूटा शेयर बाजार? अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने कहा कि रेट कटौती अभी और होने का अनुमान है, जिस कारण बाजार का मूड खराब हुआ और फेड की कमेंट्री से बाजार डर गया. बुधवार की कॉमेंट्री से साल 2025 में सिर्फ 2 बार कटौती के संकेत मिले है. वहीं, महंगाई पर अभी और सख्ती की जरूरत सेंट्रल बैंक ने कही है. जिस कारण भारतीय शेयर बाजार भी दबाव महसूस कर रहा है. निवेशकों को तगड़ा नुकसान कल बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 452 लाख करोड़ रुपये था, जो आज बड़ी गिरावट के बाद घटकर 448 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. यानी मार्केट कैप में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की गिरावट आई है. इसका मतलब है कि निवेशकों के वैल्‍यूवेशन में 4 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है.

हुंडई क्रेटा ईवी 17 जनवरी को भारत मोबिलिटी ग्लोबस एक्सपो 2025 होगी लॉन्च

  नई दिल्ली भारतीयों को जिस एक इलेक्ट्रिक कार का काफी समय से इंतजार है, वह समय अब आने वाला है। जी हां, साल 2025 के पहले महीने जनवरी में भारत में सबसे बड़ा मोटर शो भारत मोबिलिटी ग्लोबस एक्सपो 2025 शुरू होने जा रहा है और इसके पहले दिन 17 जनवरी को हुंडई मोटर अपनी नई क्रेटा ईवी लॉन्च कर सकती है। क्रेटा ईवी हुंडई मोटर के स्टॉल पर प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी आयोनिक 9 ईवी के साथ शोकेस की जा सकती है और इसका दीदार देश-दुनिया के लोग कर सकेंगे। पॉपुलर इलेक्ट्रिक एसयूवी से मुकाबला हुंडई मोटर अपनी आगामी क्रेटा ईवी के जरिये एक ऐसे सेगमेंट में एंट्री करने वाली है, जहां अपार संभावनाएं हैं और वह टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ही जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर देगी। हुंडई क्रेटा ईवी का मुकाबला महिंद्रा बीई 6, टाटा कर्व ईवी, एमजी जेडएस ईवी और मारुति सुजुकी की आगामी ई विटारा जैसी इलेक्ट्रिक एसयूवी से टक्कर होगी। एक्सटीरियर और इंटीरियर में बेहतर बदलाव फिलहाल आपको हुंडई क्रेटा ईवी के बारे में बताएं तो इसका डिजाइन काफी हद तक पेट्रोल-डीजल वाली क्रेटा जैसा ही रहेगा। हालांकि, इसके एक्सटीरियर में नई ग्रिल, बंपर और अलॉय व्हील समेत कुछ और बदलाव दिख सकते हैं। इंटीरियर की बात करें तो इसमें नई स्टीयरिंग व्हील, सेंटर कंसोल और ड्राइव सिलेक्टर के साथ ही कई नए फीचर्स दिखेंगी। कहा जा रहा है कि आगामी क्रेटा ईवी का इंटीरियर हालिया लॉन्च अल्कजार एसयूवी से इंस्पायर्ड होगा। बड़ी स्क्रीन समेत कई खास फीचर्स हुंडई क्रेटा ईवी में इन्फोटेनमेंट और इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए दो बड़ी स्क्रीन दिखेगी। साथ ही कई फिजिकल बटन भी होंगे, जिससे चीजों को कंट्रोल करना आसान होगा। बाद बाकी इसमें इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, कूल्ड सीट्स, ऑटो-होल्ड, 6 एयरबैग्स स्टैंडर्ड, वेंटिलेटेड सीट्स, 360-डिग्री कैमरा समेत काफी सारे और भी फीचर्स होंगे, जो इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को ग्राहकों की फेवरेट बना सकते हैं। पावर और रेंज आगामी हुंडई क्रेटा ईवी की बैटरी-पावर और रेंज के बारे में बताएं तो इसमें 45kWh पावर का बैटरी पैक देखने को मिल सकता है। इसका इलेक्ट्रिक मोटर लगभग 138 एचपी की पावर और 255 न्यूटन मीटर का पिक टॉर्क दे सकता है। बाद बाकी रेंज की बात करें तो क्रेटा ईवी एक बार फुल चार्ज होने पर 400 से 500 किलोमीटर के बीच की रेंज दे सकती है। इतनी हो सकती है शुरुआती संभावित कीमत आपको बता दें कि हुंडई क्रेटा ईवी को 16 लाख रुपये तक की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत में लॉन्च किया जा सकता है। हुंडई मोटर इंडिया हर साल क्रेटा ईवी की लगभग 24,000 यूनिट बनाने की सोच रही है।

होंडा और निसान एक बड़े मर्जर पर कर रहे विचार

नई दिल्ली, जापान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. ऑटोमोबाइल की दुनिया में अपनी अलग और दिग्गज पहचान रखने वाली दो कंपनिया (होंडा और निसान) अब एक साथ हाथ मिलाने की तैयारी में हैं. ग्लोबल मार्केट के अलावा घरेलू बाजार में चीनी और अमेरिकी कंपनियों ख़ास तौर पर टेस्ला और बीवाईडी से मुकाबला करने के लिए होंडा और निसान एक बड़े मर्जर पर विचार कर रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, होंडा और निसान के बीच संबंधों को और भी बेहतर बनाने के लिए लगातार बातचीत चल रही है. दोनों कंपनियां कई अलग-अलग पहलुओं पर विचार कर रही हैं जिसमें एक संभावित विलय भी शामिल है. यदि दोनों कपनियां एक साथ आती हैं तो ये ज्वाइंट वेंचर दुनिया की तीसरी सबसे बड़े ऑटो ग्रुप के रूप में उभर सकता है. यदि होंडा और निसान की ये साझेदारी मूर्तिरूप लेती है तो ज्वाइंट वेंचर ऑटो वर्ल्ड को एक नया स्ट्रक्चर देगा. होंडा और निसान के संयुक्त विलय से 54 बिलियन डॉलर की कंपनी बनेगी, जिसका वार्षिक उत्पादन 7.4 मिलियन वाहनों का होगा. जिससे यह टोयोटा और फॉक्सवैगन के बाद वाहन बिक्री के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबइल ग्रुप बन जाएगा. होंडा और निसान के बीच बातचीत लंबे समय से चल रही है. इसकी पहली रिपोर्ट जापानी अखबार निक्केई ने दी थी. रिपोर्ट के अनुसार दोनों कंपनियां पूर्ण विलय के अलावा मित्सुबिशी मोटर्स के साथ सहयोग करने के तरीकों पर भी विचार कर रही हैं, जिसमें निसान 24% हिस्सेदारी के साथ टॉप शेयर होल्डर होगा. होंडा और निसान के मर्जर की खबरों के सामने आते ही ग्लोबल मार्केट में दोनों कंपनियों के शेयरों में भारी बदलाव देखने को मिला. जहां निसान के शेयरों में तकरीबन 24% तक उछाल देखा गया वहीं होंडा के शेयरों ने 3% का गोता लगाया. बता दें कि, होंडा की मार्केट वैल्यू 43 बिलियन डॉलर है जो कि निसान के मुकाबले चार गुना ज्यादा है. हालांकि अभी इस मामले में होंडा, निसान या मित्सुबिशी की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई ऐलान नहीं किया गया है. होंडा, निसान और मित्सुबिशी ने कहा कि किसी भी कंपनी ने किसी सौदे की घोषणा नहीं की गई है. इसके अलावा फ्रांसीसी वाहन निर्माता रेनॉल्ट (RENA.PA), जो निसान का एक प्रमुख शेयर होल्डर है उसने भी इस बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं किया है.

शेयर बाजार में आज विशाल मेगामार्ट, मोबिक्विक और साई लाइफ साइंसेज के शेयर लिस्ट हो गए, मचाई धूम

मुंबई  शेयर बाजार में आज मेन बोर्ड में तीन कंपिनयों के आईपीओ (IPO Listing Today) लिस्ट हुए। उनमें विशाल मेगामार्ट, मोबिक्विक और साई लाइफ साइंसेज के शेयर थे। इनमें निवेशकों की सबसे ज्यादा कमाई मोबिक्विक के शेयरों में हुई बीएसई में इसके शेयर 58.51 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। विशाल मेगामार्ट के निवेशकों की लिस्टिंग भी ठीक ठाक रही। इसके शेयर बीएसई में 41 फीसदी के रिटर्न के साथ लिस्ट हुए। बीएसई में साई लाइफ साइंसेज के शेयर भी 20 फीसदी के प्रीमियम पर लिस्ट हुए। कैसी रही विशाल मेगामार्ट की लिस्टिंग बीएसई में विशाल मेगामार्ट के शेयर 41 फीसदी के गेन के साथ 110 रुपये पर लिस्ट हुए। इसका शेयर 78 रुपये में अलॉट हुआ था। मतलब कि हर शेयर पर 32 रुपये की बढ़त। लेकिन मुनाफा वसूली के चलते कुछ ही देर में 104.92 रुपये तक गिर गए। उल्लेखनीय है कि सुपरमार्केट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विशाल मेगा मार्ट का 8,000 करोड़ रुपये का आईपीओ बीते 11 दिसंबर को खुला था। कंपनी का आईपीओ 13 दिसंबर को बंद हुआ था। इसमें एंकर निवेशकों ने 10 दिसंबर को बोली लगाई थी। इस आईपीओ में कोई फ्रेश शेयर जारी नहीं किया था। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था। कंपनी की प्रमोटर समयत सर्विसेज एलएलपी द्वारा शेयरों की बिक्री की गई है। उसके पास कंपनी में 96.55% हिस्सेदारी है। कंपनी ने 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले शेयर के लिए प्राइस बैंड 74-78 रुपये तय किया था। मोबिक्विक का क्या रहा हाल BSE में मोबिक्विक का शेयर 442.25 रुपये पर लिस्ट हुआ। यह शेयर निवेशकों केा 279 रुपये में मिला था। मतलब कि निवेशकों की पहले ही दिन 163.25 रुपये या 58.51 फीसदी की कमाई हो गई। उल्लेखनीय है कि वॉलेट और कुछ अन्य सेवाएं देने वाली वन मोबिक्विक सिस्ट्म्स लिमिटेड One Mobikwik Systems Ltd का आईपीओ में बीते 11 दिसंबर से 13 दिसंबर तक निवेशकों को बोली लगाने का मौका मिला था। इस दौरान निवेशकों का भारी रिस्पांस मिला था। मोबिक्विक ने आईपीओ 53 शेयरों के लॉट साइज और ₹265-₹279 के प्राइस बैंड में पेश किया गया। बोली लगाने के अंतिम दिन कंपनी को 1,18,71,696 शेयरों के मुकाबले कुल 1,41,72,86,992 शेयरों के लिए बोली मिली थी। मतलब कि यह आईपीओ 119.38 गुना ओवर सब्सक्राइब हुआ था। साई लाइफ साइंसेज में भी ठीक हुई कमाई स्मॉल मोलिक्यूल न्यू केमिकल इंटीटिज (Small-molecule new chemical entities (NCEs) को डेवलप और मैन्यूफैक्चरिंग करने वाली कंपनी साई लाइफ साइंसेज (Sai Life Sciences) का आईपीओ भी 20 फीसदी के प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ। इसका एक शेयर 549 रुपये में मिला था जबिक यह बीएसई में 660 रुपये में लिस्ट हुआ। मतलब कि इश्यू प्राइस से 20 फीसदी ऊपर। इसका आईपीओ बीते 11 दिसंबर से 13 दिसंबर तक बोली के लिए खुला था। साई लाइफ साइंसेज आईपीओ के जरिये कंपनी ने 3043 करोड़ रुपये जुटाया है। आईपीओ के तहत 3.81 करोड़ शेयरों को ऑफर फोर सेल के जरिये बेचा गया जबिक 900 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू जारी किया गया। साई लाइफ साइंसेज आईपीओ का प्राइस बैंड 522 रुपये से 549 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।

1 जनवरी 2025 से आईटीसी डिमर्जर होगा प्रभावी, जल्द होगा कंपनी की लिस्टिंग

नई दिल्ली Maurya Sheraton के नाम से होटल कारोबार चलाने वाली आईटीसी (ITC) के होटल बिजनेस की नए साल 2025 में लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है. एक जनवरी 2025 से आईटीसी लिमिटेड की होटल कारोबार से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स का डिमर्जर हो जाएगा. कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों के साथ इस जानकारी को साझा किया है. स्टॉक एक्सचेंज के पास रेगुलेटरी फाइलिंग में आईटीसी ने बताया कि आईटीसी होटल्स का डिमर्जर 1 जनवरी 2025 से प्रभावी हो जाएगा. रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया गया कि आईटीसी लिमिटेड और आईटीसी होटल्स लिमिटेड ने डिमर्जर के लिए आपसी सहमति के साथ सभी जरूरी शर्तों को पूरा कर लिया है. कंपनी ने बताया कि उसे एनसीएलएटी के कोलकाता बेंच से 4 अक्टूबर 2024 को आईटीसी लिमिटेड से आईटीसी होटल्स के डिमर्जर की मंजूरी मिल चुकी है. आईटीसी लिमिटेड से होटल कारोबार से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स के डिमर्जर के फैसले पर शेयरधारकों ने अपनी मुहर लगा दी है. आईटीसी को 16 दिसंबर 2024 को NCLT से कॉपी मिल चुका है. आईटीसी ने होटल बिजनेस को अलग करने का ऐलान अगस्त, 2023 में किया था. इसके साथ ही डीमर्जर के बाद आईटीसी के शेयरधारकों को होटल बिजनेस कंपनी के शेयर दिए जाएंगे. ITC होटल्स के शेयर मिलेंगे ITC शेयरहोल्डर्स को इस डीमर्जर स्कीम के तहत सिगरेट से लेकर कई तरह के प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी आईटीसी की आईटीसी होटल्स (ITC Hotels) में 40 फीसदी हिस्सेदारी होगी. आईटीसी होटल्स में 60 फीसदी हिस्सेदारी आईटीसी के शेयरहोल्डर्स को दी जाएगी. इसका फैसला  इस तरह से आईटीसी के शेयरधारकों की आईटीसी होटल्स में भी हिस्सेदारी होगी. बीते वर्ष 14 अगस्त 2023 को कंपनी के बोर्ड की बैठक हुई थी जिसमें स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दी थी जिसमें ये तय किया गया कि आईटीसी के हर शेयरधारकों को पैरेंट कंपनी में 10 शेयर के बदले में होटल्स बिजनेस से जुड़ी कंपनी आईटीसी होटल्स का एक शेयर दिया जाएगा. डिमर्जर के बाद स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलने पर आईटीसी होटल्स की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होगी.

डिजिलॉकर में स्टोर होगा निवेशकों के शेयर्स-म्यूचुअल फंड होल्डिंग डिटेल्स : सेबी

नई दिल्ली शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले किसी भी निवेशक के निधन के बाद उसके नाम पर मौजूद फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रासंफर को आसान बनाने के लिए शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने पर जोर देने की तैयारी में है. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स डिमैट खातों जिसमें शेयर्स के साथ ही म्यूचुअल फंड में मौजूद यूनिट्स को सरकारी डिजिटल स्टरेज सिस्टम डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा.   DigiLocker में स्टोर होगा स्टॉक-म्यूचुअल फंड यूनिट डिटेल्स मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार के डिजिटल स्टोरेज सिस्टम डिजिलॉकर के इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव का मकसद किसी भी निवेशक के निधन होने पर उसके नाम पर मौजूदा फाइनेंशियल एसेट्स के ट्रांसफर को सरल और सुगम बनाया जा सके. निवेशक के नाम पर जो भी फाइनेंशियल एसेट्स मौजूद है वो उसके नॉमिनी या वारिस को आसानी से ट्रांसफर किया जा सके. निवेशकों के फाइनेंशियल एसेट्स में डिमैट अकाउंट्स के स्टेटमेंट जिसमें शेयर्स, डिबेंचर होते हैं. इसके अलावा म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेशकों के नाम पर यूनिट्स भी होता है. निवेशकों के इन सभी फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश का स्टेटमेंट डिजिलॉकर में सुरक्षित स्टोर किया जाएगा. निवेशक के निधन पर नॉमिनी को करेगा नोटिफाई इस प्रस्ताव के मुताबिक निवेशक के निधन के बाद डिजिलॉकर उनके अकाउंट को अपडेट कर उन्हें नोटिफाई करेगा जिन्हें निवेशक ने अपना नॉमिनी या वारिस बनाया है जिससे वो व्यक्ति फाइनेंशियल एसेट्स को मैनेज कर सके. इस तरह जिस निवेशख का निधन हुआ है नॉमिनी उनके फाइनेंशियल एसेट्स डिटेल्स को एक्सेस कर सकेंगे और एसेट्स को ट्रांसफर कर सकेंगे. सेबी का मकसद स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड को अनक्लेम्ड एसेट्स होने से रोकना है और सही वारिस तक एसेट्स को ट्रांसफर करना है. 31 दिसंबर तक दे सकते हैं सुझाव सेबी ने अपने कंसलटेशन पेपर में ये प्रस्ताव दिया है कि है कि डिपॉजिटरीज और म्यूचुअल फंड्स डिमैट और म्यूचुअल फंड होल्डिंग स्टेटमेंट को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराएं. ये भी प्रस्ताव दिया गया है कि केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसीज डिजिलॉकर के साथ निवेशक के निधन की सूचना को शेयर करें. डिजिलॉकर यूजर्स किसी भी व्यक्ति को अकाउंट एक्सेस करने के लिए नॉमिनेट कर सकता है. सेबी ने 31 दिसंबर, 2024 तक लोगों को इसे लेकर सुझाव मांगा है. 

मास्टरकार्ड ने कहा- भारत 2025 में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगा

नई दिल्ली. मास्टरकार्ड इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट (एमईआई) ने सोमवार को अपनी वार्षिक आर्थिक दृष्टिकोण रिपोर्ट में कहा कि मजबूत मध्यम वर्ग और निरंतर निवेश के साथ भारत के 2025 में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है। एमईआई की एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए रिपोर्ट में भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भी उजागर किया गया है, जिसकी अनुमानित जीडीपी वृद्धि 6.6 प्रतिशत और उपभोक्ता खर्च 2025 में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, “मजबूत मध्यम वर्ग और निरंतर निवेश से उत्साहित, भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच लचीला बना हुआ है और 2025 में वैश्विक विकास में शीर्ष योगदानकर्ताओं में से एक होने की संभावना है।” भारत में 25-54 आयु वर्ग की महिलाओं के बीच श्रम बल भागीदारी दर में भी शानदार वृद्धि देखी गई है, जो 2019 से 12 प्रतिशत अधिक है, जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुषों के लिए यह 1 प्रतिशत अंक अधिक है। “द शीकोनॉमी” की वृद्धि ने भारत में महिलाओं की चक्रीय श्रम बल भागीदारी दर को 2019 के स्तर से पूरी तरह से ठीक कर दिया है। एमईआई ने 2024 में 3.1 प्रतिशत की गति के बाद 2025 में 3.2 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। यूरोप और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (एलएसी) के अधिकांश हिस्सों में मामूली विस्तार के साथ अमेरिका, भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद है। मास्टरकार्ड के एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुख्य अर्थशास्त्री डेविड मान ने कहा, “अगर 2024 ‘सामान्य स्थिति में वापस आने’ के बारे में था, तो 2025 सामान्यीकरण के बारे में है क्योंकि अस्थिरता कम हो जाएगी और मौद्रिक नीति को आसान बनाने से उपभोक्ताओं को आर्थिक विकास से लाभ मिल सकेगा। हालांकि, जापान में संभावित ब्याज दर वृद्धि या अमेरिकी टैरिफ जैसे नीतिगत निर्णय इस वृद्धि को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। मान ने कहा कि संभावित व्यापार से जुड़े व्यवधानों के लिए तैयारी करते समय व्यवसायों को उपभोक्ता आशावाद का लाभ उठाना चाहिए। रिपोर्ट ने एशिया प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं के लिए रिमिटैंस की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें टॉप पांच प्राप्तकर्ता देशों में से चार इस क्षेत्र में हैं, जिसमें भारत भी शामिल है। जापान निरंतर मुद्रास्फीति अस्थिरता और येन ऐतिहासिक निम्नतम स्तर पर होने के साथ एक अद्वितीय आर्थिक वातावरण का सामना कर रहा है, जो चल रहे पर्यटन उछाल और उच्च-स्तरीय लक्जरी वस्तुओं पर खर्च में योगदान दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर, जिन्होंने क्षेत्र के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत मुद्रास्फीति के झटके का अनुभव किया है, उन्हें राहत मिलने की संभावना है क्योंकि स्तर लगभग 2-3 प्रतिशत तक गिर जाएगा और केंद्रीय बैंक अपनी संबंधित मौद्रिक नीतियों को आसान बना देंगे। मान ने आगे कहा, “व्यक्तिगत सरकारों की नीतियों का 2025 में काफी प्रभाव पड़ सकता है।”

रिपोर्ट : भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर

 नई दिल्ली भारत ने ग्लोबल लेवल पर अपनी आर्थिक ताकत का मजबूत प्रदर्शन किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. ये भारतीय स्टॉक मार्केट के साथ ही देश के बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत का भी सबूत है. रिपोर्ट के मुताबिक 39 भारतीय कंपनियों ने बीते 20 साल में अपनी बुक वैल्यू में लगातार इजाफा किया है, इनमें 7 कंपनियों का परफॉर्मेंस बेहद शानदार रहा है. भारतीय कंपनियों ने 2008 की ग्लोबल इकोनॉमिक मंदी और कोविड-19 महामारी के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया है. चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों का जोरदार परफोरमेंस रिपोर्ट बताती है कि इन भारतीय कंपनियों ने अपनी मजबूत फाइनेंशियल सेहत और मैनेजमेंट क्षमता के चलते लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनाए रखी है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय से भारतीय कंपनियां इक्विटी पर लगातार 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दे रही हैं. 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों में भी पॉजिटिव बुक वैल्यू दर्ज की है. किसी कंपनी की बुक वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी बताती है कि वो अपने इन्वेस्टर्स को लंबे समय तक हाई रिटर्न देने की क्षमता रखती है. ये रिपोर्ट इस बात का भी संकेत देती है कि भारतीय इकोनॉमी ने 2008 की मंदी और कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों का डटकर सामना किया है. भारतीय शेयर बाजार में भी बेहतर रिटर्न घरेलू शेयर बाजार में कंपनियों के बेहतर परफॉर्मेंस ने भारत को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पोज़िशन में ला खड़ा किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह इसका मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के पास तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार होने के साथ ही किसी भी ग्लोबल संकट से निपटने की ताकत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियों की ये स्टेबिलिटी इन्वेस्टर्स के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के साथ ही देश की आर्थिक तरक्की का भी मजबूत बेस है. भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की मजबूती ने घरेलू स्टॉक मार्केट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. ये रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन ना केवल डोमेस्टिक लेवल पर बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सराहनीय है. मजबूत बुनियाद और फाइनेंशियल सेहत के दम पर भारतीय कंपनियां भविष्य में भी ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाए रखने की ताकत दिखा रही हैं.  

दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद : रिपोर्ट

नईदिल्ली भारत में इंडस्ट्रियल गतिविधियों में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में तेजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह उपभोग में इजाफा और निर्यात में वृद्धि होना एवं महंगाई में कमी आना है। यह जानकारी क्रिसिल द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई।   इस साल हो सकता है ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार रिपोर्ट में कहा गया कि अब तक अधिक महंगाई दर, बढ़ी हुई ब्याज दरों ने क्रेडिट वृद्धि दर को कम किया है। साथ ही इससे उपभोग रिकवरी भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा रिपोर्ट में आगे कहा गया कि खाद्य महंगाई में कमी के संकेत मिले हैं। इसके कारण उपभोग बढ़ने की उम्मीद है और इस साल कृषि उत्पादन अच्छा होने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है। दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों के कारण शहरी अर्थव्यवस्था को कर्ज वृद्धि से मिलने वाले समर्थन में कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से कम व्यय का सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर मध्यम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद है, लेकिन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में विकास दर धीमी रहने की संभावना है। निवेश की गति को बनाए रखने के लिए निजी निवेश में पुनरुद्धार काफी महत्वपूर्ण होगा।  महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल वैश्विक व्यापार बढ़ने की उम्मीद है और इससे निर्यात वृद्धि को सहारा मिलेगा। हालांकि, वैश्विक अस्थिरताओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला में दबाव का जोखिम बना हुआ है। निर्यात अगले साल अमेरिका-चीन टैरिफ वार की संभावना से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित होने की संभावना है। क्रिसिल के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों और राजकोषीय समेकन से वित्त वर्ष 25 में जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो कि पिछले वित्त वर्ष में 8.2 प्रतिशत था।  खाद्य तेल की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि आने वाले हफ्तों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आएगी। दिसंबर में जब खरीफ की फसल बाजार में आती है तो सब्जियों की कीमतें कम हो जाती हैं। पिछले साल का उच्च आधार भी महंगाई को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, खाद्य तेल की कीमतों के दबाव पर नजर रखनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आने के कारण आने वाले महीनों में महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है। हमें उम्मीद है इस वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रह सकती है।  

नए साल से किसानों को बिना गारंटी के मिलेगा ₹2 लाख तक का लोन, आरबीआई ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने किसानों को बड़ी राहत दी है। खेती में बढ़ते खर्च को देखते हुए सेंट्रल बैंक ने किसानों को बिना गारंटी के किसानों को मिलने वाले लोन की सीमा को 2 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है। पहले लिमिट 1.6 लाख रुपये थी। एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री ने शनिवार को जारी किए गए बयान में कहा है कि यह नई लिमिट 1 जनवरी 2025 से प्रभावी रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि इस योजना का फायदा करोड़ों किसानों को मिलेगा। आरबीआई ने कृषि क्षेत्र को बिना गांरटी के लोन देने की शुरुआत 2010 में की थी। तब सेंट्रल बैंक ने एक लाख रुपये बिना गांरटी के देने का ऐलान किया। 2019 में जिसकी सीमा बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये कर दी गई थी। अब एक बार इसमें इजाफा किया गया है। छोटे किसानों को होगा बड़ा फायदा एग्रीकल्चर सेक्टर में बढ़ती महंगाई की वजह से छोटे और मझोले किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जिसकी वजह से उनकी खेती प्रभावित हो रही थी। रिजर्व बैंक ने जो सीमा बढ़ाई है उसका इन किसानों को होगा। खेती किसानी करने वाले लोगों के पास बहुत सीमित संसाधन होते थे। ऐसे में बिना गारंटी के मिलने वाले इस लोन का फायदा किसानों को होगा। कृषि मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है “यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों (क्षेत्र के 86% से अधिक) के लिए लोन पहुंच को बढ़ाता है। ये कम उधार लागत और अतिरिक्त आवश्यकताओं को हटाने से लाभान्वित होते हैं।” सेंट्रल बैंक का यह फैसला संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) जैसी सरकारी कोशिश के अनुरूप है। जोकि किसानों को 3 लाख रुपये के लोन पर 4 प्रतिशत के ब्याज की पेशकश करता है। ये फैसले भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास से किया जा रहा है। सरकार की तरफ से मिलता है डायरेक्ट पैसा किसानों को केंद्र सरकार की तरफ से साल में 2000-2000 रुपये की तीन किश्त मिलती है। कुछ राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी किसानों को इस राशि में कुछ जोड़कर अलग से भुगतान करती हैं। बता दें, इसके अलावा किसानों को सब्सिडी के जरिए सस्ती खाद भी उपलब्ध करवाई जाती है।

एफएमसीजी और कंजप्शन शेयरों में जबरदस्त खरीदारी के चलते सेसेंक्स और निफ्टी में उछाल

मुंबई  भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2,000 अंकों की शानदार रिकवरी के बाद उछाल के साथ बंद हुए हैं। निफ्टी के इंफ्रा, एफएमसीजी और कंजप्शन शेयरों में जबरदस्त खरीदारी के चलते सेसेंक्स और निफ्टी में यह उछाल देखा गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 843.16 अंक या 1.04 प्रतिशत चढ़ने के बाद 82,133.12 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 219.60 अंक या 0.89 प्रतिशत चढ़ने के बाद 24,768.30 पर बंद हुआ। सुबह करीब 10.47 बजे सेंसेक्स 118.85 अंक या 1.38 प्रतिशत की गिरावट के बाद 80,171.11 पर था। वहीं, निफ्टी इसी समय 334.75 अंक या 1.36 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,213.95 स्तर पर कारोबार कर रहा था। बाजार में इस गिरावट की वजह दूसरे एशियाई बाजारों में कमजोरी, मजबूत डॉलर, बढ़ते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और सुस्त चीनी अर्थव्यवस्था की चिंता जैसे कारक थे। जानकारों ने बताया, “घरेलू बाजार ने दिन के निचले स्तर से तेजी से वापसी की और सूचकांक हैवीवेट शेयरों के नेतृत्व में कंसोलिडेशन से बाहर निकल गया। खाद्य मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे कमी और एफएमसीजी कंपनियों द्वारा मूल्य वृद्धि, साथ ही मूल्यांकन में हाल ही में सुधार ने इस क्षेत्र को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की।” बाजार के जानकारों ने आगे कहा कि वर्तमान में, बाजार त्योहारी सीजन और साल के अंत की छुट्टियों के कारण उपभोक्ता खर्च में सुधार की उम्मीद कर रहा है, जिससे सेंटीमेंट्स में वृद्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी खर्च में वृद्धि की उम्मीद आईटी क्षेत्र को आगे बढ़ा रही है। निफ्टी बैंक 367.35 अंक या 0.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,583.80 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 30.15 अंक या 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,991.55 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 59.25 अंक या 0.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,407.30 पर था। एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक दे ने कहा, “भारत में इक्विटी बाजार में सेंसेक्स की साप्ताहिक समाप्ति के दिन उतार-चढ़ाव भरा सत्र देखने को मिला। निचले सिरे पर, निफ्टी को इनवर्स हेड-एंड-शोल्डर्स पैटर्न की नेकलाइन के आसपास सपोर्ट मिला।” उन्होंने आगे कहा कि आज का निचला स्तर भी पिछली रैली के 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर के साथ मेल खाता है। आगे चलकर, यह प्रवृत्ति मजबूत रहने की संभावना है, जिसमें अल्पावधि में 25,000 और उससे अधिक तक पहुंचने की क्षमता है। निचले सिरे पर, सपोर्ट 24,550 पर है। सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी के ऑटो, आईटी, फाइनेंशियल सर्विस, एफएमसीजी, एनर्जी, प्राइवेट बैंक, इंफ्रा, कमोडिटीज, कंजप्शन, पीएसई, सर्विस में खरीदारी रही। वहीं, पीएसयू बैंक, फार्मा, मेटल, रियलिटी, मीडिया और हेल्थकेयर सेक्टर में बिकवाली रही। सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, नेस्ले इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स थे। वहीं, टाटा स्टील, इंडसइंड बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील और बजाज फिनसर्व टॉप लूजर्स थे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 1,835 शेयर हरे और 2,155 लाल निशान में बंद हुए, जबकि 115 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।  

GST ने जोमैटो को दिया 803 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस, शेयर बाजार में क्यों चढ़ गए इसके शेयर?

मुंबई  फूड और ग्रोसरी डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) को वस्तु एवं सेवा कर (GST) डिपार्टमेंट से 803.4 करोड़ रुपये का टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी ने गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज को यह जानकारी दी। इसके एक दिन बाद यानी शुक्रवार को सुबह ही बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरा था। तब भी इसके शेयर एक दिन पहले के बंद भाव के मुकाबले ऊपर ट्रेड हो रहे थे। क्या है माजरा जोमैटो को जीएसटी विभाग से जो टैक्स नोटिस मिला है, उसमें 401.7 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड और इतनी ही राशि का जुर्माना (Penalty) और ब्याज शामिल है। यह डिमांड 29 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2022 की अवधि के लिए बकाया कर से संबंधित है। जोमैटो ने क्या बताया जोमैटो ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया, “हमारा मानना है कि हमारे पास योग्यता के आधार पर एक मजबूत मामला है, जो हमारे बाहरी कानूनी और कर सलाहकारों की राय से समर्थित है। कंपनी उचित प्राधिकारी के समक्ष आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी।” कंपनी को जो टैक्स डिमांड नोटिस मिला है, वह जोमैटो और स्विगी जैसे एग्रीगेटर्स द्वारा एकत्र किए गए डिलीवरी शुल्क पर टैक्स एप्लिकेबिलिटी से संबंधित है। प्लेटफ़ॉर्म ने तर्क दिया है कि गिग वर्कर डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करते हैं और उन्हें ऑर्डर के आधार पर भुगतान किया जाता है। यूजर्स से इस डिलीवरी के लिए शुल्क लिया जाता है, सिवाय लॉयल्टी प्रोग्राम के, जहां प्लेटफ़ॉर्म शुल्क माफ करते हैं। यह डिलीवरी शुल्क गिग वर्कर को दिया जाता है। जीएसटी कानून क्या कहता है जीएसटी कानूनों के तहत, फूड की डिलीवरी एक ऐसी सेवा है जिस पर 18% की दर से टैक्स लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि चूंकि प्लेटफ़ॉर्म सेवा शुल्क एकत्र कर रहे हैं, इसलिए उन्हें टैक्स का भुगतान करना चाहिए। पिछले साल दिसंबर में इस मुद्दे पर जीएसटी अधिकारियों ने ज़ोमैटो को कारण बताओ नोटिस भेजा था। लाभ कमा रही है कंपनी जोमैटो ने बीते जुलाई-सितंबर की तिमाही में 4,799 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया था। इसी महीने कंपनी को 176 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। शेयर बाजार में क्या है शेयर का हाल बीते गुरुवार को, बीएसई पर ज़ोमैटो का शेयर मूल्य 2.4% गिरकर 284.90 रुपये पर बंद हुआ था। लेकिन आज यानी शुक्रवार को सुब 10:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 791 अंक डाउन था। लेकिन उस समय जोमैटो 286.55 रुपये पर ट्रेड हो रहा था। यह कल के बंद के मुकाबले 1.65 रुपये या 0.58% अधिक है।

शेयर बाजार में आज फिर गिरावट, सेंसेक्‍स 1.30 फीसदी टूटकर 80,300 के नीचे कारोबार कर रहा

मुंबई शेयर बाजार में आज फिर गिरावट देखी जा रही है. लगातार छठवें दिन शेयर बाजार में हैवी बिकवाली आई है. सेंसेक्‍स 1000 अंक या 1.30 फीसदी टूटकर 80,300 के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी50 की बात करें तो यह 278 अंक टूटकर 24,270 पर है. वहीं Nifty Bank 783 अंक टूटकर 52532 लेवल पर कारोबार कर रहा है. वहीं मिडकैप, स्‍मॉल कैप और अन्‍य इंडेक्‍स में भी तेज गिरावट जारी है. BSE सेंसेक्‍स के टॉप 30 शेयरों में से 29 शेयर गिरावट पर हैं, जबकि सिर्फ 1 शेयर में मामूली तेजी देखी जा रही है. भारती एयरटेल के शेयर करीब 1 फीसदी तक चढ़े हुए हैं. वहीं सबसे ज्‍यादा गिरावट Tata Steel, JSW Steel और इंडसइंड बैंक में देखी जा रही है. इसके अलावा, हैवीवेट शेयरों में Reliance Industries के शेयर 1.33 फीसदी टूट चुके हैं. एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी और टाइटन जैसे शेयर भी 1 फीसदी गिर चुके हैं. NSE के 50 शेयरों में से 47 शेयर गिरावट पर हैं और 3 शेयर भारती एयरटेल, अडानी एंटरप्राइजेज और अपोलो के शेयर उछाल पर कारोबार कर रहे हैं. 51 शेयरों ने 52 सप्‍ताह का हाई लेवल टच किया है, जबकि 12 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर हैं. 39 शेयरों में अपर सर्किट और 36 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है. ये 10 शेयर गिरावट पर ग्‍लेनमार्क फार्मा के शेयर 5 फीसदी, जुपिटर वैगन के शेयर 4 फीसदी, सैल के शेयर 5 फीसदी, एनएमडीसी के शेयर 4 फीसदी, ओवरसीज बैंक के शेयर 4.30 फीसदी, आईआरएफसी के शेयर 4 फीसदी, यूनियन बैंक के शेयर 3.50 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे हैं. वहीं कोचीन शिपयार्ड और अन्य चर्चित शेयरों में भी गिरावट देखी जा रही है. क्‍यों हो रही गिरावट? शेयर बाजार में आज गिरावट की बड़ी वजह मुनाफावसूली रही है. इसके अलावा, ग्‍लोबल संकेत भी अच्‍छे नहीं रहे हैं. कुछ हैवीवेट शेयर जैसे रिलायंस और टाइटन के शेयर भी 1 फीसदी से ज्‍यादा गिर चुके हैं. इसके अलावा, HDFC बैंक के शेयर में भी दबाव बढ़ रहा है. भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक और वजह चीन में हुए आर्थिक पैकेज ऐलान के बाद विदेशी निवेशकों का रुझान चीन की ओर बढ़ रहा है. वहीं अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने का असर भी शेयर बाजार पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. निवेशकों को तगड़ा नुकसान! शेयर बजार में गिरावट के कारण निवेशकों का भी तगड़ा नुकसान हुआ है. ज्‍यादातर पोर्टफोलियो लाल निशान पर हैं. बीएसई मार्केट कैप के हिसाब से देखें तो आज निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा का नुकसान होता दिख रहा है. बीएसई मार्केट कैप अभी 452 लाख करोड़ रुपये है, जबकि कल बाजार बंद होने पर ये 458 लाख करोड़ रुपये था.

देश में तेजी से बंद कर रहे हैं ATM? अब UPI बन गई ऑलटाइम टेलर मशीन

मुंबई देश में पिछलेबैंकरों ने कहा कि पेमेंट टूल के रूप में यूपीआई और कार्ड के उभरने से नकदी का यूज कम हो गया है। इस कारण एटीएम अव्यावहारिक हो गए हैं। पांच साल में पहली बार एटीएम की संख्या में गिरावट आई है। बैंकों में नकदी निकालने के लिए लगने वाली लंबी कतार से मुक्ति दिलाने वाली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) अब कम होती जा रही है। 2020 में बैंकों के विलय होने से जहां एटीएम की संख्या घट गई। वहीं, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद लोगों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) को हाथों-हाथ लिया।  इसकी बढ़ती लोकप्रियता से भी एटीएम तक लोगों की पहुंच घटने लगी। आलम यह है कि महज 9 साल में प्रदेश में 274 एटीएम कम हो गए। सब्जी, फल, किराना, बिजली व गैस बिल समेत बड़े-छोटे शोरूम में भी यूपीआइ से पेमेंट करने की सुविधा मिली तो लोग ने एटीएम से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे एटीएम पर ट्रांजेक्शन घटे तो बैंकों का मुनाफा कम हुआ और मशीन के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया। बैंकों ने बंद करना शुरू किए ATM नतीजा, बैंकों ने एटीएम बंद करना शुरू कर दिया। यूपीआइ के बढ़ते चलन से जहां नकदी की सुरक्षा संबंधी चिंता बैंकों की कम हो गई, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नकदी लेन-देन के दौरान करेंसी के खराब होने पर दोबारा छापने का खर्च भी कम हो गया। हालांकि कोरोनाकाल में एटीएम की संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन 2019 से इसके कम होने का दौर जारी है। बैंकों का कहना है, एटीएम बंद नहीं कर रहे, नई तकनीक आने पर इसकी शिफ्टिंग कर रहे हैं। हर एटीएम पर इतना खर्च एक एटीएम लगाने में करीब 6-9 लाख रुपए का खर्च आता है। एक मशीन की कीमत 4-8 लाख रुपए और कुछ आंतरिक सज्जा पर खर्च होते हैं। साथ ही हर एटीएम के मेंटेनेंस पर हर माह बैंक को 50 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसमें साफ-सफाई, बिजली, एसी और सुरक्षा गार्ड का खर्च शामिल है। बताते हैं, एक लेनदेन पर करीब 18 से 20 रुपए खर्च होता है। इसलिए घटे एटीएम बैंकों के विलय होने के कारण उनके एटीएम एक हो गए। कम्प्यूटरीकृत सिस्टम में किसी भी बैंक के एटीएम से रुपए निकालने की सुविधा। जिन मशीनों से ट्रांजेक्शन घटे, उन्हें बंद या शिफ्ट कर दिया। यूपीआइ के इस्तेमाल से लोगों की पहुंच एटीएम तक कम हो गई। देश में इस तरह बढ़ रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन 2022-23 में 83,453.79 मिलियन ट्रांजेक्शन 2023-24 में 130831.45 मिलियन ट्रांजेक्शन 2024-25 में 117507.31 मिलियन ट्रांजेक्शन (नवंबर तक) यूपीआई का जलवा चौधरी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में भारत ने फाइनेंशियल इनक्लूजन और डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। जन धन योजना, यूपीआई के प्रसार और मोबाइल इंटरनेट को व्यापक रूप से अपनाने से ऐसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 535 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 13,113 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 (सितंबर तक) में 122 लाख करोड़ रुपये के 8,566 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड किए गए हैं। इतिहास के झरोखे से पहले रुपए निकालने वालों की बैंकों में लंबी कतार लगती थी। इससे छुटकारा दिलाने के लिए एचएसबीसी बैंक ने 1987 में पहली बार मुंबई में एटीएम लगाई तो बैंकिंग में बड़ी क्रांति आई। महज 10 साल में देश में 1500 एटीएम हो गए। अभी देश में 2.50 लाख एटीएम हैं। राजधानी का दायरा बढ़ा, बढ़े एटीएम मध्यप्रदेश में इकलौते भोपाल जिले में एटीएम की संख्या बढ़ी है। राजधानी का दायरा बढऩे से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े और एटीएम की संख्या बढ़ गई। अभी भोपाल जिले में 1079 एटीएम हैं। इनमें 42 ग्रामीण, 15 कस्बों और 1022 एटीएम शहरों में हैं। प्रदेश में एटीएम साल – संख्या 2016 – 9266 2017 – 9263 2018- 9579 2019 – 9345 2020 – 9201 2021 – 9322 2022 – 8812 2023 – 9328 2024 – 8992 (सितंबर तक)

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