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रतन टाटा ने Upstox कंपनी में कमाया 23000% प्रॉफिट, यह थी आखिरी डील

नई दिल्ली  टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एमिरेटस रतन टाटा का निधन हो गया है। उन्होंने 86 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है। रतन टाटा 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे। इस दौरान टाटा ग्रुप का प्रॉफिट 51 गुना बढ़ा जबकि उसके मार्केट कैप में 33 गुना तेजी आई। टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटने के बाद उन्होंने कई स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया था। हाल में उन्होंने ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म अपस्टॉक्स में अपनी 0.06% हिस्सेदारी लगभग 20 लाख डॉलर (लगभग 18 करोड़ रुपये) में बेची थी। उन्हें कंपनी में अपने मूल निवेश पर 23,000% रिटर्न मिला। टाटा ने आठ साल पहले अपस्टॉक्स में निवेश किया था। टाटा ने साल 2016 में कंपनी में 1.33% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस शेयर बिक्री के बाद अपस्टॉक्स में टाटा की हिस्सेदारी 1.27% रह गई। अपस्टॉक्स में अब भी उनकी होल्डिंग्स का 95% हिस्सा बचा हुआ है। इस कंपनी के भविष्य में पब्लिक होने की योजना है। अपस्टॉक्स से पहले रतन टाटा ने आईपीओ रूट के माध्यम से बेबी केयर प्लेटफॉर्म फर्स्टक्राई के कुछ शेयर बेचे थे। किस-किसमें था निवेश कई दशक तक टाटा ग्रुप का नेतृत्व करने के बाद रतन टाटा ने कई स्टार्टअप कंपनियों में बतौर एंजेल इनवेस्टर निवेश किया। इनमें आईवियर ब्रांड Lenskart, बेबी प्रॉडक्ट्स ब्रांड Firstcry, सर्विसेज प्लेटफॉर्म Urban Company और बिजनस-टु-बिजनस मार्केटप्लेस Moglix शामिल हैं। पेटीएम, ओला और स्नैपडील में भी उनका निवेश रहा। टाटा ने करीब 50 स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया और इमें से ज्यादातर का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। FirstCry जैसी कंपनियों ने आईपीओ के दौरान शानदार रिटर्न दिया।

उद्योगपति डॉ. नितिन वर्मा के सेंट्रल ग्रुप का शुभारंभ भोपाल में सफलतापूर्वक किया

भोपाल मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित उद्योगपति डॉ. नितिन वर्मा के सेंट्रल ग्रुप का शुभारंभ दिनांक 9 अक्टूबर 2024 को भोपाल शहर में सफलतापूर्वक हुआ। सेंट्रल ग्रुप के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), डॉ. नितिन वर्मा एवं उनकी टीम के इस ग्रुप के अंतर्गत हेल्थ केयर सेक्टर, फार्मास्यूटिकल सेक्टर, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सेक्टर, मीडिया सेक्टर, स्पोर्ट्स सेक्टर, तथा इंश्योरेंस के साथ-साथ विभिन्न सेक्टर्स भी सम्मिलित है। सेंट्रल ग्रुप की जानकारी देते हुए डॉ. वर्मा ने यह बताया कि इस ग्रुप की शुरुआत 2015 में गुजरात से हुई, जिसका विस्तार उन्होंने दिल्ली एवं मध्यप्रदेश में भी किया है। अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने यह बताया है कि हेल्थ केयर सेक्टर में, सेंट्रल ग्रुप ऑफ हॉस्पिटलस, फार्मास्यूटिकल सेक्टर में, सर्कल-एन (CIRCLE-N) फार्मेसी, एजुकेशन सेक्टर में, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स सेक्टर में एस्पायर स्पोर्ट्स (ASPIRE SPORTS), इंश्योरेंस सेक्टर में कोटक हेल्थ एंड लाइफ इंश्योरेंस, मीडिया सेक्टर में, दैनिक राज्यरानी खबर जैसे स्टार्टअप शामिल हैं।

अडानी ने कहा कि भारत ने ‘एक दिग्गज, एक दूरदर्शी व्यक्ति को खो दिया है जिन्होंने आधुनिक भारत के मार्ग को फिर से परिभाषित किया

मुंबई उद्योगपति रतन टाटा नहीं रहे। उन्होंने मुंबई स्थिति अस्पताल में बुधवार को अंतिम सांस ली। रिलायंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने रतन टाटा को भारत के सबसे प्रतिष्ठित और परोपकारी बेटों में से एक बताया। अंबानी के अलावा अरबपति गौतम अडानी और ऑटो क्षेत्र के दिग्गज आनंद महिंद्रा ने भी टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया। अंबानी ने कहा, ‘यह भारत के लिए बहुत दुखद दिन है। रतन टाटा का जाना सिर्फ टाटा समूह ही नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए बहुत बड़ी क्षति है। व्यक्तिगत स्तर पर रतन टाटा के जाने से मैं बेहद दुख में हूं, क्योंकि मैंने अपने एक अच्छे दोस्त को खो दिया है। उनके साथ हुई कई मुलाकातों में हर बार मुझे प्रेरित किया, ऊर्जा दी और उनके अपनाए हुए मूल्यों के प्रति मेरा सम्मान बढ़ाया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘रतन टाटा दूरदर्शी कारोबारी और परोपकारी थे, जो हमेशा समाज की अच्छाई के लिए काम करते थे।’ उन्होंने कहा, ‘रतन टाटा के जाने से भारत ने सबसे पुत्र और दयालु बेटे को खो दिया है। टाटा ने भारत को दुनिया के सामने रखा और दुनिया की अच्छी चीजों को भारत लेकर आए। उन्होंने टाटा घराने को संस्थागत बनाया और साल 1991 में टाटा समूह संभालने के बाद इसे 70 गुना बढ़ा दिया।’ उ्होंने कहा, ‘रिलायंस, नीता और अंबानी परिवार की तरफ से मैं टाटा परिवार के शोकाकुल सदस्यों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। रतन, आप हमेशा मेरे दिल में रहेंगे।’ अडानी ने कहा कि भारत ने ‘एक दिग्गज, एक दूरदर्शी व्यक्ति को खो दिया है जिन्होंने आधुनिक भारत के मार्ग को फिर से परिभाषित किया।’ उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘रतन टाटा सिर्फ एक कारोबारी नेता नहीं थे, उन्होंने ईमानदारी, करुणा और व्यापक भलाई के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता के साथ भारत की भावना को मूर्त रूप दिया। उनके जैसे दिग्गज अमर रहते हैं। ओम शांति।’ आनंद महिंद्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘ऐतिहासिक छलांग’ लगाने के कगार पर है और टाटा के ‘जीवन और कार्य का हमारे इस स्थिति में आने में बहुत बड़ा योगदान है।’

अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर रतन टाटा ने की थी शुरुआत

भारत के जाने-माने बिजनेसमैन और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार देर शाम निधन (Ratan Tata Dies) हो गया. 86 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उन्हें उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. 28 दिसंबर 1937 को पारसी फैमिली में जन्मे रतन टाटा का जीवन लोगों के प्रेरणादायक रहा है और ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. उन्होंने अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर काम किया, तो दूसरी ओर अपने कारोबार से होने वाली आमदनी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दान करके देश के सबसे बड़े दानवीरों में शुमार रहे. यही नहीं उन्होंने अपनी काबिलियत की दम पर जिसे छुआ सोना बना दिया और कई लोगों की किस्मत भी बदली. आइए 10 तस्वीरों में जानते हैं उनके जीवन की झलक…   बचपन में माता-पिता हुए अलग, दादी ने पाला दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था और लेकिन उनका बचपन बहुच अच्छा नहीं बीता, दरअसल बचपन में ही 1948 उनके माता-पिता अलग हो गए थे और इसके बाद रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था.      अमेरिका से ली आर्किटेक्चर की डिग्री शुरुआती शिक्षा के बाद Ratan Tata हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और वहां से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने से पहले उन्होंने करीब 2 साल तक लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय के लिए नौकरी भी की थी. साल 1962 के अंत में दादी नवाजबाई टाटा की तबीयत खराब होने चलते वह नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए थे. विदेश में प्यार, लेकिन नहीं हो सकी शादी रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें कभी किसी से प्यार नहीं हुआ. एक इंटरव्यू के दौरान खुद रतन टाटा ने अपनी लव लाइफ के बारे में विस्तार से बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी में प्यार ने एक नहीं बल्कि चार बार दस्तक दी थी, लेकिन मुश्किल दौर के आगे उनके रिश्ते शादी के मुकाम तक पहुंच नहीं सके. दादी की तबीयत खराब होने के चलते वे अमेरिका से भारत आ गए थे, लेकिन उनकी प्रेमिका भारत नहीं आना चाहती थीं. उसी वक्त भारत-चीन का युद्ध भी छिड़ा हुआ था. आखिर में उनकी प्रेमिका ने अमेरिका में ही किसी और से शादी कर ली. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान टाटा ग्रुप पर लगाया और समूह की कंपनियों को आगे बढ़ाने पर काम किया. टाटा स्टील से ऐसे की शुरुआत अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने पारिवारिक बिजनेस ग्रुप Tata के साथ करियर शुरू किया. लेकिन आपको बता दें कि जिस कंपनी ने Tata Family के सदस्य मालिक की पोजीशन पर थे, उस कंपनी में रतन टाटा ने एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया. इस दौरान उन्होंने टाटा स्टील के प्लांट में चूना पत्थर को भट्ठियों में डालने जैसे काम भी किए और बिजनेस की बारीकियों को सीखीं थी.     Tata Steel में काम करने के बाद साल 1991 में उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान थामी और फिर शुरू हो गया टाटा की कंपनियों के बुलंदियों पर पहुंचने का सिलसिला. उन्होंने कारोबार विस्तार पर फोकस करना शुरू कर दिया. कारोबार के विस्तार पर किया फोकस टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद, उन्होंने वैश्विक विस्तार किया और टाटा टी (Tata Tea), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा स्टील (Tata Steel) जैसी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया. आज इन कंपनियों का कोराबार बहुत बड़ा हो चुका है और ये कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं. JRD Tata के बाद सबसे योग्य उत्तराधिकारी जब Tata Group में जेआरडी का उत्तराधिकारी चुनने की बारी आई, तो उस समय रतन टाटा सबसे योग्य व्यक्ति थे, जो उनकी जगह ले सकते थे और समूह की कमान संभालने के बाद उन्होंने इसे साबित भी किया. हर बड़े फैसले में JRD की राय   JRD Tata के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए उन्होंने टाटा ग्रुप के कारोबार के विस्तार से जुड़े कई अहम फैसले लिए. हालांकि, कमान हाथ में लेने के बाद भी वो जेआरडी टाटा से हर बड़े कदम पर पर राय मशविरा जरूर करते थे. साल 1993 की ये तस्वीर कुछ यही बयां कर रही है.          ऑटो दिग्गज फोर्ड को झुकाया 90 के दशक में ऑटोमोबाइल सेक्टर में फोर्ड (Ford) का बड़ा नाम था, लेकिन टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors के हाल ठीक नहीं थे और रतन टाटा ने इसकी पैसेंजर कार डिविजन को बेचने का मन बनाते हुए फोर्ड के साथ डील की थी. लेकिन अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने डील के दौरान मजाक उड़ाते रतन टाटा का अपमान किया था. इसके बाद उन्होंने बिक्री का प्लान कैंसिल किया और टाटा मोटर्स को आगे बढ़ाने पर फोकस किया, महज 9 साल में बाजी पलटी और फोर्ड के दो लोकप्रिय ब्रांड जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर Bill Ford को झुकने पर मजबूर कर दिया. सरकार से मिला बड़ा सम्मान रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप का कारोबार (Tata Group Business) तेजी से आगे बढ़ा और देश ही नहीं दुनियाभर में TATA का डंका बजा. अपने मेहनत और काबिलियत की दम पर विशान साम्राज्य खड़ा करने वाले रतन टाटा को भारत सरकार की ओर से बड़े सम्मान मिले. साल 2000 में जहां रतन टाटा को पद्म भूषण दिया गया, तो साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्‍मानित किया गया था. देश को दी लखटकिया कार रतन टाटा ने एक ऐसा सपना देखा था, जिसे पूरा करना शायद हर किसी के बस में नहीं होता, लेकिन Ratan Tata ने ये कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं देश की पहली लखटकिया कार Tata Nano के बारे में, भारत के आम आदमी को एक लाख में कार खरीदने का मौका रतन टाटा ने ही दिया था. उन्होंने बाजार में 2008 में टाटा नैनो उतारी, हालांकि यह कार उनकी उम्मीदों के अनुसार बाजार में धमाल नहीं दिखा पाई. रतन टाटा थे बड़े डॉग लवर दिवंगत Ratan Tata को बड़ा बिजनेसमैन, दरियादिल इंसान के … Read more

मोदी सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है

नई दिल्ली  सरकार ड्रोन क्षेत्र के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लाने की योजना बना रही है। यह योजना कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अन्य पहलुओं के संदर्भ में अधिक प्रभावी होगी। नागर विमानन सचिव वुमलुनमंग वुआलनाम ने कहा कि सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है। ड्रोन क्षेत्र के लिए पहली पीएलआई योजना 120 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021 में लाई गई थी। तीन वित्त वर्षों (2021-24) के लिए लाई गई यह योजना अब बंद हो गई है। नागर विमानन सचिव ने स्वीकार किया कि पहली योजना के तहत कुछ प्रक्रियाएं ड्रोन क्षेत्र में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के लिए बोझिल थीं, लेकिन सरकार कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के संदर्भ में अधिक कुशल पीएलआई योजना पर विचार करेगी। वुआलनाम के अनुसार, ड्रोन क्षेत्र को तीन खंडों- नागरिक उपयोग, सुरक्षा/रक्षा बलों द्वारा उपयोग, तथा ड्रोन के अवैध या अनियमित उपयोग में विभाजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें इस बारे में बहुत स्पष्ट होना होगा कि हम इन तीनों क्षेत्रों में कैसे काम करते हैं।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ड्रोन के गलत उपयोग की कुछ घटनाएं युवाओं, स्टार्टअप और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा ड्रोन का अधिक उपयोग किए जाने में बाधा बन सकती हैं। उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि… ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियां विकसित की जा रही हैं।” फिक्की ने एक परिचर्चा पत्र में सुझाव दिया है कि नई योजना के अंतर्गत परिव्यय को बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि स्टार्टअप और नए उद्यमियों को अधिक स्वदेशी कलपुर्जों और उप-प्रणालियों के साथ ड्रोन विकसित करने में सहायता मिल सके। नागर विमानन सचिव ने कहा कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 3,000 और ड्रोन खरीदने के लिए निविदाएं तैयार हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन प्रदान करना है और 15,000 ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले एसएचजी को दिए जाएंगे। वुआलनाम ने कहा कि 1,000 ड्रोन की पहली खेप को हासिल कर लिया गया है और वितरित कर दिया गया है। योजना के तहत 3,000 ड्रोन के लिए निविदाएं तैयार हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा जल्द ही जारी की जाएंगी।    

अडानी की नेटवर्थ में 4.35 अरब डॉलर की तेजी आई, नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई

नई दिल्ली  लगातार छह दिन की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में तेजी लौटी। शुरुआत में मार्केट में भारी उतारचढ़ाव दिख रहा था लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही शेयर मार्केट में तेजी दिखने लगी। इस तेजी से सबसे ज्यादा फायदे में गौतम अडानी रहे। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की नेटवर्थ में  4.35 अरब डॉलर यानी करीब 36,505 करोड़ रुपये की तेजी आई। इसके साथ ही वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दो स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई है। अडानी  एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शख्स रहे। हुआंग की नेटवर्थ में 4.36 अरब डॉलर की तेजी आई। अडानी की नेटवर्थ में इस साल 16.3 अरब डॉलर की तेजी आई है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी  तेजी रही। उनकी नेटवर्थ 2.12 अरब डॉलर की तेजी के साथ 106 अरब डॉलर पहुंच चुकी है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 9.90 अरब डॉलर की तेजी आई है और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर हैं। अंबानी और अडानी की नेटवर्थ में अब केवल 5 अरब डॉलर का फासला रह गया है। कौन-कौन है टॉप 10 में इस बीच एलन मस्क 259 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर बने हुए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 210 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर हैं। जेफ बेजोस ($206 अरब) तीसरे, बर्नार्ड अरनॉल्ट ($191 अरब) चौथे, लैरी एलिसन पांचवें ($185 अरब), बिल गेट्स ($161 अरब) छठे, लैरी पेज ($149 अरब) सातवें, स्टीव बाल्मर ($144 अरब) आठवें, वॉरेन बफे ($143 अरब) नौवें और सर्गेई ब्रिन ($140 अरब) दसवें नंबर पर हैं।

दिवाली से पहले Home Loan लेने वालों को बड़ी राहत, आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने EMI पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली नेशनल डेस्क आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पिछली 9 बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को तीन दिवसीय मीटिंग के बाद भी समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। फरवरी 2023 में आखिरी बार रेपो रेट में संशोधन किया गया था, जब इसे 6.50% पर लाया गया था, और तब से यह दर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट में बदलाव न होने से आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरों में कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो रेट वही दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है, जिससे यह देशभर में उधारी की लागत को प्रभावित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि दरों में कटौती से रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से आयात की लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत भी प्रभावित हो सकती है। ग्रोथ पर रहेगा फोकस RBI का मुख्य फोकस आर्थिक विकास पर है, और दिसंबर या फरवरी में होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समितियों (MPC) में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (BPS) की कटौती की संभावना अधिक है। मौजूदा समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू हुई थी, और आज RBI दरों पर अपना फैसला सुनाएगा। 2023 के बाद से RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि उससे पहले दरों में तेजी से वृद्धि हुई थी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को 7.3 और 7.2 से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उपभोक्ता मांग तथा निवेश बेहतर रहने की संभावना के बीच चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर कायम रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही। पहले इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके अलावा आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के अपने वृद्धि दर के अनुमान को क्रमश: 7.3 और 7.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने अगस्त में अपनी पिछली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के 7.2 प्रतिशत पर रहने का ही अनुमान लगाया था। गवर्नर दास ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि भारत की वृद्धि गाथा कायम है क्योंकि वृद्धि को रफ्तार देने वाले कारक उपभोग तथा निवेश मांग में मजबूती है। उन्होंने कहा, ‘‘कुल मांग में महत्वपूर्ण हिस्सा रखने वाले निजी उपभोग की संभावनाएं बेहतर हैं क्योंकि कृषि परिदृश्य और ग्रामीण मांग की स्थिति बेहतर हुई है। सेवाओं में तेजी से शहरी मांग को भी समर्थन मिलेगा। केंद्र और राज्यों के सरकारी खर्च के बजट अनुमान के अनुरूप तेजी पकड़ने की उम्मीद है।’’ गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता और कारोबारी भरोसे से निवेश गतिविधियों को लाभ होगा। इसके अलावा सरकार निवेश पर जोर दे रही है और बैंकों तथा कॉरपोरेट जगत का बही-खाता भी मजबूत है। उन्होंने कहा, ‘‘ इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी। दूसरी तिमाही में इसके सात प्रतिशत, तीसरी में 7.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।’’   मुद्रास्फीति पर सख्ती से लगाम लगानी होगी, अन्यथा यह फिर बढ़ सकती है: आरबीआई गवर्नर  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बुधवार को 4.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक को कीमतों की स्थिति पर कड़ी नजर रखनी होगी और ‘‘मुद्रास्फीति’’ पर सख्ती से लगाम लगानी होगी, नहीं तो इसमें फिर से तेजी आ सकती है। गवर्नर ने यह भी कहा कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य (एफआईटी) ढांचे को 2016 में लागू किए जाने के बाद से आठ वर्ष पूरे हो गए हैं और यह भारत में 21वीं सदी का एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार है। केंद्रीय बैंक ने एफआईटी के तहत यह सुनिश्चित किया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई ने 2024-25 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को 4.5 प्रतिशत पर कायम रखा है। महंगाई दर के दूसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए मुद्रास्फीति के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। दास ने कहा, ‘‘ प्रतिकूल आधार प्रभाव तथा खाद्य पदार्थों कीमतों में तेजी से सितंबर में महंगाई दर में तेजी देखने को मिल सकती है। अन्य कारकों के अलावा 2023-24 में प्याज, आलू और चना दाल के उत्पादन में कमी इसकी प्रमुख वजह होगी।’’ उन्होंने कहा कि हालांकि अच्छी खरीफ फसल, अनाज के पर्याप्त भंडार और आगामी रबी मौसम में अच्छी फसल की संभावना से इस वर्ष की चौथी तिमाही में कुल मुद्रास्फीति की दर में क्रमिक रूप से नरमी आने का अनुमान है। दास ने कहा कि प्रतिकूल मौसम और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम है। अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। जुलाई और अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह आधार प्रभाव है। दास ने कहा कि खाद्य कीमतों में निकट अवधि में तेजी की आशंका के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमत को लेकर जो स्थितियां बन रही हैं उससे आगे कुल मुद्रास्फीति में कमी आने का संकेत मिलता है।     आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चालू वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें इस प्रकार हैं- * मुख्य नीतिगत दर रेपो लगातार दसवीं बार 6.5 प्रतिशत पर यथावत। * फरवरी 2023 से रेपो दर में बदलाव नहीं। * मौद्रिक नीति रुख को बदलकर ‘तटस्थ’ किया गया। * यह पुनर्गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पहली बैठक थी। * चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान 7.2 प्रतिशत पर बरकरार। * दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 7.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 7.4 प्रतिशत। * चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत पर कायम। * यूपीआई123पे (फीचर फोन के लिए) प्रति लेनदेन सीमा दोगुनी कर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव। * यूपीआई लाइट वॉलेट की सीमा बढ़ाकर 5,000 रुपये और प्रति लेनदेन सीमा बढ़ाकर 1,000 रुपये करने का प्रस्ताव। * एमपीसी की अगली बैठक चार से छह दिसंबर को होगी।      

खुशखबरी – नहीं बढ़ेगी होम लोन की EM , लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 6.5% पर कायम

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की 51वीं एमपीसी बैठक के नतीजे (RBI MPC Meeting Results) आ गए हैं. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) दो दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि इस बार भी नीतिगत दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपके लोन की ईएमआई न बढ़ेगी और न ही घटने वाली है. ये लगातार 10वीं बार है जबकि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके बाद रेपो रेट 6.50% पर बरकरार है. जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर और बैंक रेट 6.75% पर स्थिर रखा गया है. 6 में से 5 सदस्य बदलाव के पक्ष में नहीं RBI गवर्नर ने 7 अक्टूबर को शुरू हुई MPC Meet में लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए कहा कि इस बार एमपीसी में 3 नए सदस्य जुड़े हैं और ग्लोबल हालातों समेत अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद बैठक के दौरान 6 में से 5 सदस्यों ने ब्याज दरों को यथावत रखने पर अपना वोट दिया. इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पॉलिसी का रुख विद्ड्रॉल ऑफ अकमॉन्डेशन से चेंज करते हुए अब Neutral कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बने उतार-चढ़ाव भरे हालातों के बावजूद देश में महंगाई (Inflation) को काबू में रखने में हम कामयाब रहे हैं और इसके साथ ही Economic Growth को भी गति मिली है. Repo Rate का EMI पर असर RBI की MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें शामिल रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास समेत छह सदस्य महंगाई समेत अन्य मुद्दों और बदलावों (Rule Changes) पर चर्चा करते हैं. यहां बता दें कि रेपो रेट का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट (Repo Rate) वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. जब लगातार बढ़ाया गया था रेपो रेट Repo Rate फिलहाल 6.5 फीसदी पर बना हुआ है. इससे पहले जब देश में महंगाई बेकाबू हो गई थी और 7 फीसदी के पार पहुंच गई थी. तब इसे काबू में लाने के लिए RBI ने लगातार रेपो रेट बढ़ाया था. इसमें मई 2022 से फरवरी 2023 तक कई बार बढ़ोतरी की गई थी और ये 2.5 फीसदी बढ़ा था. हालांकि, इसके बाद से ही केंद्रीय बैंक की ओर से किसी भी तरह का कोई बदलाव रेपो रेट में नहीं किया गया था. GDP को लेकर आरबीआई का अनुमान एमपीसी बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने FY2025 की दूसरी तिमाही के लिए GDP अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी करने का ऐलान किया, तो वहीं तीसरी तिमाही के लिए ये 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी करने की जानकारी दी है. चौथी तिमाही के लिए भी जीडीपी ग्रोथ रेट को पहले के 7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी किया गया है. इसके अलावा RBI ने अगले साल 2026 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जाहिर की है. महंगाई को लेकर गवर्नर ने क्या कहा? रेपो रेट को लगातार 10वीं बार स्थिर रखने के ऐलान के साथ ही रिजर्व बैंक के गवर्नर ने FY25 के लिए रिटेल महंगाई के अनुमान के बारे में भी बताया और कहा कि ये 4.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. Q2 के लिए अनुमान 4.1 फीसदी, Q3 के लिए 4.8 फीसदी और Q4 के लिए 4.2 फीसदी रखा गया है. वहीं अगले साल की पहली तिमाही में ये 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है. इधर नतीजों का ऐलान उधर बाजार ने लगाई दौड़ आरबीआई ने लगातार 10वीं बार रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया, तो इस खबर का असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया. मिडिल ईस्ट में तनाव के माहौल के बीच Repo Rate स्थिर रखने का फैसला बाजार को पसंद आया और करीब 150 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा BSE Sensex अचानक दौड़ लगाते हुए 411 अंक चढ़कर 82,046.48 के लेवल पर पहुंच गया. BSE Nifty की बात करें, तो 25,190 के पार निकल गया.  

SpiceJet बेड़े को करेगी बढ़ा, 10 एयरक्राफ्ट जोड़ेगा, पहला विमान इस तारीख को होगा शामिल, जानें पूरी बात

मुंबई घरेलू विमानन कंपनी स्पाइसजेट अगले महीने तक अपने बेड़े में 10 विमान और जोड़ेगी। पहला विमान 10 अक्टूबर को बेड़े में शामिल किया जाएगा। स्पाइसजेट ने  प्रेस विज्ञप्ति में कहा, इनमें से सात विमान पट्टे पर लिए जाएंगे, जबकि बंद खड़े तीन विमानों को पुनः बेड़े में शामिल किया जा रहा है। ‘लाइव एयरक्राफ्ट फ्लीट ट्रैकिंग’ वेबसाइट प्लेनस्पॉटर.नेट के अनुसार, गुरुग्राम मुख्यालय वाली विमानन कंपनी के पास केवल 19 विमान परिचालन में हैं, जबकि आठ अक्टूबर तक उसके 36 विमान बंद खड़े थे। स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा, ‘‘यह अतिरिक्त विमान (10 विमान) महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ अपनी परिचालन क्षमताओं को भी मजबूत कर रहे हैं।’’ यह घोषणा स्पाइसजेट के पिछले महीने पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये 3,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी प्राप्त करने के बाद की गई है।  

इंस्टाग्राम की सर्विस ठप हुई, फ्रीड रिफ्रेश करने में आ रही यूजर्स को परेशानी

नई दिल्ली  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पिछले कुछ समय से डाउन है। इसकी शिकायत यूजर्स ने डाउनडिटेक्टर और एक्स हैंडल पर की है। यूजर्स को फ्रीड रिफ्रेश करने में परेशानी आ रही है। शाम 6 बजे डाउन डिटेक्टर पर 69 रिपोर्ट थीं। अधिकतर यूजर्स ऐसे हैं जिन्हें लॉगइन करने में परेशानी आ रही है। ये परेशानी क्यों आई इस बारे में जानकारी नहीं है। इंस्टाग्राम वेब और फोन दोनों यूजर्स के लिए डाउन है। एक्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई यूजर्स द्वारा जानकारी दी गई है कि इंस्टा ने काम करना बंद कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई रील्स या पोस्ट या स्टोरी ओपन नहीं हो पा रही है और न ही यूजर्स इन्हें अपलोड कर पा रहे हैं। वेब यूजर्स को इंस्टाग्राम ओपन करने पर “Sorry, Something Went Wrong” लिखा देखने को मिल रहा है। साथ ही उस नोटिफिकेशन में जानकारी दी गई है कि इस पर वो काम कर रहे हैं और कुछ ही देर में समस्या का सही कर देंगे। इसके साथ ही बैक पेज पर जाने के लिए कहा जा रहा है।

Sensex पहले धड़ाम… फिर BJP की वापसी पर पकड़ी तूफानी रफ्तार

मुंबई हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के रिजल्ट आने शुरू हो गए हैं. अभी तक के रुझानों पर नजर डालें, तो जहां हरियाणा में शुरुआत में BJP को नुकसान होता नजर आ रहा था, लेकिन अचानक Congress और भाजपा एक रफ्तार बनाए नजर आने लगीं.  वहीं जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस बढ़त बनाए दिख रही है. देश के दो राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजों  का असर शेयर बाजार (Stock Market) पर भी देखने को मिल रहा है और इसकी चाल बदली-बदली नजर आ रही है. मंगलवार को इलेक्शन रिजल्ट वाले दिन Sensex पहले करीब गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुआ और कुछ ही देर में रफ्तार पकड़ते हुए 400 अंक से ज्यादा उछल गया. नतीजों के साथ ही बदली बाजार की चाल सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार (Share Market) में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. सेंसेक्स और निफ्टी की इस बदली-बदली चाल ने निवेशकों को भी हैरान कर दिया है. अगर BSE Sensex की बात करें, तो अपने पिछले बंद 81,050 की तुलना में ये इंडेक्स गिरावट के साथ 80,826.56 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ देर बाद ये गिरावट तेजी में तब्दील हो गई. 10.48 बजे पर खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 433 अंकों की बढ़त लेकर 81,483.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. NSE Nifty भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलता नजर आया और सोमवार के बंद 24,795.75 की तुलना में चढ़कर 24,832.20 के स्तर पर खुला और ये बढ़त के साथ 24,942 पर कारोबार करने लगा. मार्केट खुलने पर 1380 शेयरों में गिरावट शेयर बाजार ने बीते छह दिनों में बड़ी गिरावट देखी और मंगलवार की शुरुआत भी फ्लैट रही. इस बीच जैसे ही शेयर मार्केट में कारोबार शुरू हुआ. लगभग 974 शेयर हरे निशान पर खुले, जबकि 1380 कंपनियों के शेयरों ने गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपनिंग की. इस बीच 144 शेयर ऐसे रहे, जिनकी स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. Nifty पर HUL, M&M, Cipla, Shriram Finance, Trent के शेयरों में तेजी देखने को मिल रही थी. तो वहीं Tata Steel, Hindalco, Tata Motors, Power Grid Corp और JSW Steel के शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. अचानक इन शेयरों ने लगाई छलांग सबसे ज्यादा तेजी के साथ भागने वाले शेयरों की बात करें, तो सुबह 10.40 बजे तक लार्जकैप कंपनियों में शामिल Adani Port Share 2.49%, NTPC Share 2.01%, M&M Share 2%, SBI Share 1.75% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था. वहीं मिडकैप कंपनियों में शामिल Paytm Share 5.49%, BHEL 3.70%, RVNL 3.53%, Mazgaon Dock SHare 3.52%, Indian Hotel Share 3.21% चढ़कर ट्रेड कर रहे थे. स्मालकैप कंपनियों में शामिल शेयरों में Dhani Share 11.32%, जबकि PGEL Share 8.16% चढ़ गया. कल उछलकर धराशायी हुआ था बाजार शेयर मार्केट (Stock Market) में बीते छह कारोबारी दिनों से जारी भारी बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर दिखाई दिया है. इन 6 दिनों में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप बुरी तरह टूटा है (BSE MCap Fall) और इस गिरावट के बीच निवेशकों की दौलत करीब 25 लाख करोड़ रुपये घट गई है. सोमवार को BSE Sensex 638.45 अंक की गिरावट के साथ 81,050 के स्तर पर क्लोज हुआ. बीते छह दिनों से जारी गिरावट में निवेशकों 25 लाख करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है.

वाहनों की बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घटकर 2,75,681

देश में सुस्त मांग के कारण सितंबर में वाहनों की खुदरा बिक्री में गिरावट सितंबर में कुल वाहनों का पंजीकरण घटकर 17,23,330 इकाई रह वाहनों की बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घटकर 2,75,681 नई दिल्ली देश में सुस्त मांग के कारण सितंबर में वाहनों की खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर नौ प्रतिशत की गिरावट आई है। उद्योग संगठन फाडा ने सोमवार को यह जानकारी दी। सितंबर में कुल पंजीकरण घटकर 17,23,330 इकाई रह गया, जो पिछले साल इसी महीने 18,99,192 इकाई था। यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों सहित अधिकतर श्रेणियों में सालाना आधार पर गिरावट देखी गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के अध्यक्ष मनीष सी. एस. विग्नेश्वर ने बयान में कहा, ‘‘गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे त्यौहारों के बावजूद डीलरों ने बताया कि प्रदर्शन काफी हद तक स्थिर रहा है।’’ उन्होंने कहा कि निकट आ रहे बड़े त्यौहारों के मद्देनजर फाडा ओईएम (मूल उपकरण विनिर्माता) से वित्तीय झटके से बचने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया है। यात्री वाहनों की बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घटकर 2,75,681 इकाई रह गई, जो एक वर्ष पूर्व इसी महीने 3,39,543 इकाई थी। विग्नेश्वर ने कहा, ‘‘श्राद्ध और पितृपक्ष के साथ-साथ भारी वर्षा तथा सुस्त अर्थव्यवस्था ने स्थिति को और खराब कर दिया है….’’ वहीं वाणिज्यिक वाहनों का पंजीकरण पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही के 4,80,488 इकाई से मामूली रूप से घटकर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 4,77,381 इकाई रह गया। उद्योग संगठन फाडा ने आंकड़े देश भर के 1,429 आरटीओ में से 1,365 से एकत्रित किए हैं।  

हिताची एनर्जी के भारतीय कारोबार के 75 साल पूरे, 2000 करोड़ के निवेश की योजना

नई दिल्ली  हिताची एनर्जी ने भारतीय कारोबार के 75 साल पूरे होने के अवसर पर देश में स्थायी ऊर्जा भविष्य को बढ़ावा देने के लिए अपनी क्षमता, प्रोडक्ट रेंज और टैलेंट बेस को विस्तार करने पर लगभग 2000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। पिछले 75 सालों में भारत की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में योगदान देते हुए हिंदुस्तान इलेक्ट्रिक से लेकर हिंदुस्तान ब्राउन बॉवेरी, एबीबी पावर ग्रिड्स, हिताची एबीबी पावर ग्रिड्स और अब हिताची एनर्जी बनने तक, इस कंपनी ने 1949 से देश के ऊर्जा क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई है। अपनी इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए, कंपनी “एनर्जी एंड डिजिटल वर्ल्ड 75” नाम से सोमवार से दो दिन का टेक्नोलॉजी इवेंट आयोजित किया है। इसमें भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद करने वाली नई तकनीकों पर चर्चा की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत, हिताची एनर्जी के ग्लोबल सीईओ एंड्रियास शियरेनबेक और हिताची एनर्जी इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ एन वेणु ने किया। इस अवसर पर वेणु ने कहा कि इस खास साल को यादगार बनाने के लिए, हिताची एनर्जी इंडिया लिमिटेड अगले चार से पांच सालों में लगभग 2000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। यह निवेश भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा “नई तकनीक और समाधानों के जरिए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस निवेश का उद्देश्ये भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है और हम स्थानीय व वैश्विक बाजारों के ग्राहकों और साझेदारों के साथ मिलकर इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इसमें डिजिटलीकरण और लंबी अवधि की साझेदारी पर जोर दिया जाएगा। यह मेक इन इंडिया के हमारे लक्ष्य को और मजबूत करता है, जिससे भारत और दुनिया दोनों को फायदा होगा।” हिताची एनर्जी के ग्लोबल सीईओ एंड्रियास शियरेनबेक ने कहा, “ऊर्जा की चुनौती एक कंपनी, टीम या व्यक्ति से कहीं बड़ी है। जैसे-जैसे विद्युतीकरण बढ़ रहा है और रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ रहा है, पावर ग्रिड की क्षमता और जटिलता भी बढ़ रही है। हमारा ध्यान पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के भविष्य पर है। भारत इस मिशन में हमारे लिए बहुत अहम बाजार है। हम पिछले 75 सालों से भारत में लगातार निवेश कर रहे हैं। नए निवेश से हमारी क्षमता, टैलेंट और सप्लाई चेन मजबूत होंगी और 2030 की रणनीति के अनुसार, डिजिटलीकरण के जरिए हमारे काम को और बेहतर किया जाएगा।” वेणु ने कहा कि इस निवेश के मुख्य हिस्सों में बड़े पावर ट्रांसफॉर्मर कारखाने की क्षमता बढ़ाना, छोटे ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री में खास ट्रांसफॉर्मर की टेस्टिंग के लिए एडवांस सुविधाएं जोड़ना और बुशिंग फैक्ट्री का स्थान बदलना शामिल है। ये कदम भारत की ऊर्जा मांगों को पूरा करने और ट्रांसमिशन परियोजनाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं। भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में मदद के लिए ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। यह निवेश हिताची एनर्जी इंडिया की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, नेटवर्क कंट्रोल सॉल्यूशंस से जुड़े प्रोडक्ट्स का विस्तार किया जाएगा, और ग्रिड ईएक्सपैंड और ग्रिड ईइमोशन को स्थानीय रूप से विकसित और निर्मित किया जाएगा। कंपनी अपनी पहली मीडियम वोल्टेज पेशकश आरईएफ 650 भी भारत में लॉन्च करेगी। इसके अलावा, भारत और दुनिया के लिए भारत में सप्लायर बेस को मजबूत करने पर भी काम किया जाएगा। वेणु ने कहा कि हिताची एनर्जी इस कार्यक्रम में ग्रिड-एनश्‍ योर पोर्टफोलियो भी पेश करेगी, जिसमें ग्रिड को अधिक मजबूत, लचीला और स्थिर बनाने के लिए पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत नियंत्रण प्रणालियों पर आधारित समाधान शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत में स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते रुझान के कारण नई टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ी है। कंपनी अपना इकोनिक पोर्टफोलियो पेश करेगी, जिसमें दुनिया का पहला एसएफ6-फ्री 420-किलोवोल्ट गैस-इन्सुलेटेड स्विचगियर शामिल है। यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण को सुरक्षित बनाता है, क्योंकि इसमें सल्फर हेक्साफ्लोराइड का इस्तेमाल नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में ग्रिड ई-मोशन पोर्टफोलियो लॉन्च किया जाएगा, जो इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला सॉल्यूशन है। यह स्मार्ट मोबिलिटी सॉल्यूशन भारत में सुरक्षित, स्थायी और स्मार्ट परिवहन को बढ़ावा देगा, खासकर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक फ्लीट के लिए। ऐसे तकनीकी समाधान देश के नेट-ज़ीरो लक्ष्य को पाने में मदद करेंगे।  

अब अमूल दूध इंडिया ही नहीं, पूरी दुनिया पिएगी, अब यूरोप में अपने पैर जमाने की तैयारी में

नई दिल्ली अमूल दूध पीता है इंडिया… आपने यह लाइन अमूल दूध के विज्ञापन में पढ़ी और सुनी होगी। अब अमूल दूध इंडिया ही नहीं, पूरी दुनिया पिएगी। अमेरिकी मार्केट में सफलता के बाद अमूल दूध यूरोप में भी मिलाना शुरू होगा। इसके लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। ऐसे में अगर आप यूरोप के देशों की सैर पर जाएंगे तो वहां भी अमूल दूध का लुत्फ उठा पाएंगे। अमूल ब्रांड गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड नाम की सहकारी संस्था के प्रबंधन में चलता है। इस संघ के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने कहा कि अमूल दूध कुछ महीने पहले अमेरिका में लॉन्च किया गया था। वहां इसे लोगों ने काफी पसंद किया। कंपनी का यह प्रयोग सफल रहा। उन्होंने कहा कि अमूल दूध अब यूरोप के मार्केट में उतरने के लिए तैयार है। मेहता ने यह जानकारी XLRI की ओर से आयोजित 11वें डॉ. वर्गीज कुरियन मेमोरियल व्याख्यान में कही। मेहता ने कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। साथ ही आने वाले वर्षों में दुनिया के कुल दूध का एक तिहाई प्रोडक्शन करने के लिए तैयार है। 6 महीने में अमेरिका में गाड़े झंडे अमूल में अमेरिका में इसी साल मार्च में एंट्री की थी। यह पहली बार था जब अमूल दूध ने इंडिया से बाहर किसी देश में कदम रखे थे। अमूल ने अमेरिका ने चार तरह के दूध के वेरिएंट लॉन्च किए थे। इनमें अमूल ताजा, अमूल गोल्ड, अमूल शक्ति और अमूल स्लिम एंड ट्रिम थे। इसके लिए अमूल ने Michigan Milk Producers Association (MMPA) के साथ पार्टनरशिप की थी। यह अमेरिका की करीब 108 साल पुरानी डेयरी कॉपरेटिव है। डेयरी सेक्टर का बड़ा योगदान दूध न सिर्फ सेहत बनाता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की भी सेहत बेहतर रखता है। ज्यादातर ग्रामीण लोगों की आय का बड़ा सोर्स दूध का उत्पादन ही है। वहीं देश की अर्थव्यवस्था में डेयरी सेक्टर का योगदान 5 फीसदी है। इससे करीब 8 करोड़ किसान जुड़े हुए हैं। जानकारों के मुताबिक अगले 5 सालों में इसमें 15 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ देखी जा सकती है। डेयरी से जुड़े कई स्टार्टअप भी बेहतरीन काम कर रहे हैं। 80 हजार करोड़ रुपये का कारोबार अमूल अपने प्रोडक्ट की बिक्री से सालाना जबरदस्त कमाई करता है। मार्च 2024 में खत्म हुए वित्त वर्ष में इसका सालाना टर्नओवर करीब 80 हजार करोड़ रुपये था। अमूल के देशभर में 107 डेयरी प्लांट हैं। यह ब्रांड 50 से ज्यादा प्रोडक्ट बेचता है और रोजाना 310 लाख लीटर दूध एकत्र करता है। अमूल के देशभर में सालाना करीब 22 अरब पैकेट बेचे जाते हैं। इससे 35 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं।

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