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मुख्यमंत्री ने 266 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

सीमा की रक्षा करने वाले जवानों और अन्न पैदा करने वाले किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 65 करोड़ रुपए की लागत से होगा बेड़िया मंडी का विकास मुख्यमंत्री ने 266 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन मुख्यमंत्री की घोषणा – लाड़ली बहनों को दीवाली से मिलेगी 1500 रुपए की राशि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार देश की सीमा पर जान की बाजी लगाने वाले और सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों तथा खेतों में कड़ी मेहनत कर अन्न पैदा करने वाले किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है। हमारी सरकार कमजोर और गरीब वर्ग की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खरगोन जिले के बेड़िया में विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत अम्बा-रोडिया माइक्रो उदवहन सिंचाई योजना का लोकार्पण सहित 266 करोड़ रुपए की लागत के 24 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने सिकलसेल के मरीजों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृति के प्रमाण-पत्र तथा हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर तरक्की कर रहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर तरक्की कर रहा है और विश्व में देश का नाम हो रहा है। हमारी सरकार किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं की जिंदगी बदलने और उन्हें खुशहाल बनाने का काम कर रही है। निमाड़ क्षेत्र में मां नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है और इससे खेतों में फसले लहलहा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को सम्मान निधि देने की योजना बनाई है और किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां गेहूं पर किसानों को प्रति क्विंटल 2600 रुपए दिए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार कृषि को प्रोत्साहन दे रही है और किसानों को उद्यमी बनने के लिए काम कर रही है। प्रदेश सरकार कपास से धागा बनाने, उससे कपड़ा बनाने और रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री लगाने का अभियान चला रही है। प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम कर रही है और किसानों को अनुदान पर सोलर पैनल कनेक्शन दिया जाएगा इससे किसानों की आय बढ़ेगी और वह अपने संयंत्र में पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली प्रदेश सरकार को बेच भी सकेंगे। प्रदेश सरकार ने मूंग और उड़द के समर्थन मूल्य पर खरीदी के इंतजाम किए हैं। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। देश में दूध उत्पादन में मध्य प्रदेश की भागीदारी अभी 09 प्रतिशत है इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों को गाय भैंस पालन के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। राज्य सरकार के समग्र प्रयासों से अब प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रूपये से बढ़कर एक लाख 52 हजार रूपये हो गई है। दीवाली से लाड़ली बहनों को हर माह मिलेंगे 1500 रुपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि देगी और अक्टूबर में दीवाली से लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की राशि नियमित दी जाएगी। इस राशि को बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। गरीबों और जरूरतमंद की जान बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने एयर एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र लोग अपना आयुष्मान कार्ड बनवा लें, जिससे गंभीर बीमारी के समय जान बचाने के लिए उन्हें बड़े शहरों के अच्छे अस्पतालों में उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर विमान या हेलीकॉप्टर से प्रदेश सरकार मरीजों को उपचार के लिए भी भेजती है। उन्होंने कहा कि अभी तक दुर्घटना में सड़कों पर घायलों को अस्पताल पहुंचने में लोग डरते थे अब सरकार ने राह-वीर योजना लागू की है। यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है और उसकी जान बचाता है तो उसे 25 हजार रुपए का इनाम प्रदेश सरकार देगी। शासकीय सेवकों के प्रमोशन होने के बाद 2 लाख पद होंगे रिक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवकों के 9 सालों से रुके प्रमोशन के मामले को हल कर दिया है और अब अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य वर्ग के शासकीय सेवकों के प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया है। प्रमोशन होने से 2 लाख पद रिक्त होंगे और इससे नए लोगों की भर्ती का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार शासकीय सेवाओं में भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देगी। आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। भगवान राम प्रदेश में जिन स्थानों से गुजरे थे उन स्थानों पर बनेंगे राम पथ गमन मार्ग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 19 धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री बंद कर दी है। प्रदेश में खुले में मांस की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। नगरीय क्षेत्र में गीता भवन बनाए जाएंगे। भगवान राम प्रदेश में जिन स्थानों से गुजरे थे उन पर राम पथ गमन मार्ग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 100वींग जन्म शताब्दी के अवसर पर ग्वालियर में कैबिनेट की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। संदीपनी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों के तर्ज पर पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव-गांव तक बस सेवा शुरू करने जा रही है इससे ग्रामीण जनता को आवागमन की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि बेड़ियां मिर्च मंडी के विकास के लिए 65 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। इसी प्रकार खनगांव से खेड़ीखुर्द मार्ग पर 05 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण किया जाएगा। बांसवा से घोसला मार्ग पर सिड़कुई नदी पर 06 करोड़ रुपए के लागत से पुल बनाया जाएगा। भीकनगांव से झिरन्या तक सड़क निर्माण के लिए 38 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। बेड़ियां एवं बासवा बायपास निर्माण के लिए 21 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जाएंगे। बेड़ियां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में … Read more

मंत्री प्रहलाद पटेल : जल के संरक्षण के साथ जल देने वाले कॅुओं, तालाब और नदी को साफ सुथरा रखें

जब तक नदियां बारहमासी नहीं होगी तब तक बड़ी नदियों का अस्तित्व बचा पाना चुनौती : पंचायत मंत्री पटेल गंगा जल संर्वधन अभियान के तहत तेंदूखेड़ा के ग्राम इमलीडोल में हुआ कार्यक्रम भोपाल मध्यप्रदेश को नदियों को मायका कहा जाता है, 247 से अधिक नदियों का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश में है, भारत के किसी भी राज्य में इतनी नदियों का उद्गम नहीं है, हमारी नदियों का पानी मॉ नर्मदा, गंगा, गोदावरी के बेसिन में जाता है। हम सभी सौभाग्यशाली है कि यहॉ गौरेया नदी का उद्गम है। इस स्थल पर फैंसिंग कर पौधे लगाये-जायेंगे और वहॉ कुंडी भी बनाई जायेगी जिससे लगे कि यह गौरेया नदी का उद्गम स्थल है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने तेंदूखेड़ा के ग्राम इमलीडोल में गंगा जल संवर्धन अभियान के तहत गुरूवार को समारोह को संबोधित किया। मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि जल ही जीवन है, जल है तो कल है, इसे संरक्षित और सहेज कर रखें क्योंकि जल के बिना प्राणियों का जीवन असंभव है इसलिए जल के संरक्षण के साथ जल देने वाले कॅुओं, तालाब और नदी को साफ सुथरा रखें और उन्हें संरक्षित करें। उन्होंने कहा कि जब तक नदियां बारहमासी नहीं होगी तब तक बड़ी नदियों का अस्तित्व बचा पाना चुनौती है। मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि “एक पेड़ मां के नाम” अवश्य लगाये। उन्होंने सभी से पेड़ लगाने का आहवान करते हुए कहा कि ग्राम के लोग यहां पर पेड़ जरूर लगाएं। मॉ नर्मदा के परम भक्त दादा गुरू जी ने भी समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम में जनसामान्य के अलावा जन-प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।  

जलसंरचनाओं के संरक्षण के लिये देश में पहली बार एकजुट हो रही 200 से अधिक हस्तियां

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शाम 6 बजे भारत भवन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सदानीरा समागम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। समागम का आरंभ ऋषिकेश पांडे द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘सदानीरा’ के लोकार्पण से होगा। मुख्य्मंत्री डॉ. यादव वीर भारत न्यास, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् तथा मध्यप्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों सदानीरा, पृथ्वी  पानी का देश है…, अमृत जलधारा (चार खंड) व ‘जल धरा’ का विमोचन भी करेंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन, संस्कृति और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।  मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्या‍सी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि ‘सदानीरा समागम’ देश में ऐसा अकेला समारोह है जो नदियों, जलस्रोतों, जल संरचनाओं को संवर्धित एवं संरक्षित करने के लिए विविध गतिविधियों से भरा है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब साहित्य, कला व विज्ञान सहित अनेक माध्यमों के लगभग 200 से अधिक वैज्ञानिक, पुरातत्वविद, साहित्‍यकार, लेखक, पत्रकार, सिने अभिनेता व नाट्य कलाकार सहभागी बनेंगे। न्यासी सचिव ने बताया कि सदानीरा समागम केवल एक उत्सव नहीं, अपितु हमारी नदियों, जलसंस्कृति और जीवनदायिनी जलधाराओं के प्रति कृतज्ञता और जागरूकता का एक समवेत प्रयास है। आयोजन नदियों को मात्र भौतिक जलस्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर, आध्यात्मिक आधार और लोकचेतना के रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त संदेश देगा। आयोजन में प्रदर्शनी, संगीत, नृत्य, संवाद और साहित्य के माध्यम से नदी और जल जीवन का भाव जागृत किया गया है। समागम में सात पुस्तकों के लोकार्पण के साथ ही मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा निर्मित एवं राजेन्द्र जांगले द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रागा ऑफ रिवर नर्मदा’ का प्रदर्शन भी होगा। समागम के पहले दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्मिता नागदेव एवं राहुल शर्मा द्वारा संगीत और कविता पर केन्द्रित ‘साउंड ऑफ रिवर’ की सांगीतिक प्रस्तुति तथा विदुषी शर्मा भाटे, पुणे द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका ‘हम नवा’ का मंचन होगा।  प्राचीन जलस्रोतों पर एकाग्र प्रदर्शनी मध्यप्रदेश जनसंपर्क द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान पर प्रदर्शनी आयोजित होगी। मध्यप्रदेश के प्राचीन जलस्रोतों पर एकाग्र पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा समय-समय पर किये गये जलस्रोत संवर्धन कार्यों पर केन्द्रित छायाचित्रों की प्रदर्शनी और बावडि़याँ  इस समागम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। सदानीरा समागम में जलीय जीवन पर आधारित प्रदर्शनी जलचर भी आयोजित की गयी  है। यह प्रदर्शनी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय एवं क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, भोपाल के सहयोग से निर्मित किया गया है। वरिष्ठ छायाकार राजेन्द्र जांगले की नर्मदा परिक्रमा पर आधारित छायाचित्रों की प्रदर्शनी अमृतस्य नर्मदा भी आयोजित है। 

म.प्र. लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 के संबंध में कैवियट दायर

भोपाल  सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 म.प्र. राजपत्र में 19 जून 2025 को अधिसूचित किया गया है। इस संभावना के दृष्टिगत राज्य के किसी संघ या शासकीय सेवक द्वारा म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 नियम अथवा नियम के किसी भी प्रावधान पर स्थगन लेने के लिए उच्च न्यायालय, मुख्य खंडपीठ जबलपुर / खंडपीठ इंदौर / खंडपीठ ग्वालियर में रिट याचिका दायर की जा सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि यदि मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 या उसके किसी भी प्रावधान को चुनौती दी जाती है तो उसकी अग्रिम प्रति महाधिवक्ता कार्यालय जबलपुर / इंदौर / ग्वालियर को उपलब्ध कराई जाये। उक्त आशय की जानकारी देते हुए उप सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि उच्च न्यायालय मुख्य खंडपीठ जबलपुर / खंडपीठ इंदौर / खंडपीठ ग्वालियर में मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल द्वारा कैवियट दायर की जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी त्रियंबिका गौड़ को जन्मदिन की शुभकामनाएं

इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को इंदौर स्थित ग्रैंड सेरेटन होटल पहुंचे, जहाँ उन्होंने विधायक श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ की पौत्री त्रियंबिका एकलव्य सिंह गौड़ के जन्मदिन समारोह में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालिका त्रियंबिका को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।  

मप्र-महाराष्ट्र सीमा पर डेढ़ किमी का जमीनी विवाद सुलझा, जानें कैसे…

भोपाल  मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर एक रास्ता काफी लंबे समय से बंद था। जिसके 40 सालों बाद मामला अब जाकर सुलझ गया है। यह रास्ता कहीं और से नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के लोनी गांव और महाराष्ट्र के जलगांव जिले की रावेर तहसील के चोरवड़ गांव को आपस में जोड़ता है। क्या है पूरा मामला दोनों राज्यों के किसानों ने 4-4 फीट जमीन पर फसल लगाकर रास्ता रोक लिया था। जिसके चलते डेढ़-दो किलोमीटर के करीब का रास्ता बंद हो गया था। इसी को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई में एक किसान की शिकायत के बाद बुरहानपुर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया। ऐसे ही जलगांव कलेक्टर के द्वारा भी मामला संज्ञान में लिया गया। बुरहानपुर तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने बताया कि महाराष्ट्र से ग्राम लोनी की सीमा लगी है। जबकि महाराष्ट्र के रावेर तहसील के ग्राम चोरवड़ की सीमा शुरू होती है।दोनों राज्यों के किसानों के आवागमन के लिए शासकीय रिकॉर्ड में दो किमी का रास्ता था, लेकिन अतिक्रमण होने के कारण किसानों को कृषि उपकरण एवं वाहन ले जाने में परेशानियां हो रही थी। जिसके बाद बुरहानपुर कलेक्टर और जलगांव कलेक्टर के निर्देश पर बुरहानपुर तहसीलदार प्रवीण ओहरिया और रावेर तहसीलदार बंडु कापसे लोनी गांव पहुंचे और किसानों से मामले पर चर्चा की। दोनों राज्यों की राजस्व टीम ने पहुंचकर सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर खेतों की नपती करते हुए रास्ते पर पाए गए अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाने की कार्रवाई की। जिससे दोनों राज्यों के करीब 50 किसानों को खेतों में ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रक सहित कृषि उपकरण ले जाने में आसानी होगी। विवाद की स्थिति न हो इसलिए दोनों राज्यों की पुलिस बल भी शामिल किया गया। जिसके बाद आपसी सहमति के बाद एक किसान के द्वारा स्वयं से ही केले की फसल को जेसीबी से हटवा दिया। किसान सुनील महाजन ने कहा कि शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण होने से फसल तक लगाई जा रही थी। जिसको लेकर कही बाद शिकायतें होने के बाद भी निराकरण नहीं हो रहा था। खेतों तक वाहन नहीं जाने से मजबूरी में अधिक मजदूरों के माध्यम से उपज बाहर लाने से चार गुना अधिक मजदूरी चुकानी पड़ रही थी। रास्ता साफ होने से खेतों तक ट्रक ,ट्रेक्टर ट्रॉली वाहन आसानी से पहुंचेंगे जिससे किसानों को फायदा होगा।

उच्च न्यायालय ने पत्नी की बिना सहमति ली गई व्हाट्सएप चैट साक्ष्य के रूप में मंजूर

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को पारिवारिक मामलों में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। भले ही ये बातचीत बिना किसी एक पार्टनर की मर्जी के हासिल की गई हो। जस्टिस आशीष श्रोती ने ये फैसला एक महिला की याचिका पर दिया। महिला ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने महिला के पति को तलाक के मामले में व्हाट्सएप चैट पेश करने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक मामलों को सुलझाने के लिए किसी भी सबूत को माना जा सकता है, भले ही वो भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य न हो। ये है मामला ये मामला एक पति-पत्नी से जुड़ा है। उनकी शादी दिसंबर 2016 में हुई थी और अक्टूबर 2017 में उनकी एक बेटी हुई। बाद में पति ने तलाक के लिए अर्जी दी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की और उसका किसी और के साथ संबंध है। अपने आरोपों को साबित करने के लिए, पति ने व्हाट्सएप मैसेज पेश किए। उसने बताया कि ये मैसेज उसने पत्नी के फोन में एक हिडन एप्लीकेशन के जरिए निकाले थे। इन चैट से लग रहा था कि पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है। पत्नी ने लगाई थी याचिका इसके जवाब में, पत्नी ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 9 के तहत याचिका दायर की। उसने कहा कि वो अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसने व्हाट्सएप चैट के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। पत्नी का कहना था कि ये चैट उसकी प्राइवेसी का उल्लंघन है, जो उसे आर्टिकल 21 के तहत मिली है। उसने ये भी कहा कि ये सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का भी उल्लंघन है। पत्नी के वकील ने कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कोर्ट ने गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए पर्सनल कम्युनिकेशन को सबूत के तौर पर मानने से इनकार कर दिया था। पत्नी की आपत्तियों को किया खारिज लेकिन हाई कोर्ट ने पत्नी की आपत्तियों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 के तहत, कोर्ट किसी भी ऐसे मटेरियल को स्वीकार कर सकते हैं जो पारिवारिक विवादों को सुलझाने में मदद करे। भले ही वो भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य न हो। जस्टिस श्रोती ने कहा कि फैमिली कोर्ट सबूतों के नियमों में थोड़ी ढील देते हैं। क्योंकि पारिवारिक मामले निजी और संवेदनशील होते हैं। वहीं, जस्टिस श्रोती ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई सबूत गैरकानूनी तरीके से भी हासिल किया गया है, तो भी उसे माना जा सकता है अगर वो मामला से जुड़ा हुआ है और असली है। कोर्ट ने माना कि प्राइवेसी का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन ये पूरी तरह से नहीं है। इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के साथ संतुलित करना होगा। जस्टिस श्रोती ने कहा कि जब आर्टिकल 21 के तहत दो अधिकार आपस में टकराते हैं- प्राइवेसी और निष्पक्ष सुनवाई- तो निष्पक्ष सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आर्टिकल 122 का भी जिक्र किया कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 का भी जिक्र किया। ये धारा आम तौर पर पति-पत्नी के बीच बातचीत को सुरक्षित रखती है, लेकिन अगर पति-पत्नी के बीच कानूनी विवाद है तो ये लागू नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली, बॉम्बे और राजस्थान जैसे कई हाई कोर्ट ने पारिवारिक मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल का समर्थन किया है। सबूत की अभी जांच होगी जस्टिस श्रोती ने ये भी साफ किया कि सबूत को स्वीकार करने का मतलब ये नहीं है कि वो साबित हो गया है। सबूत को अभी भी वेरिफाई करना होगा। उन्होंने फैमिली कोर्ट को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी। जैसे कि सबूत की सच्चाई की पुष्टि करना, जरूरत पड़ने पर इन-कैमरा सुनवाई करना और मर्यादा बनाए रखना। कोर्ट ने ये भी कहा कि गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए सबूत को स्वीकार करने से उस व्यक्ति को सिविल या क्रिमिनल कार्रवाई से सुरक्षा नहीं मिलती है। फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के अप्रैल 2023 के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि सबूत को स्वीकार करने के लिए ये जरूरी है कि वो मामला से जुड़ा हुआ हो, न कि उसे कैसे हासिल किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सबूत को रोकने से फैमिली कोर्ट एक्ट के मकसद के खिलाफ होगा।

योग दिवस की थीम एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिक्षण संस्थाओं में होगा सामूहिक योग 21 जून के लिये लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किये दिशा निर्देश योग दिवस की थीम एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग भोपाल  प्रदेश में ग्यारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून 2025 को प्रदेश की शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक योग प्रदर्शन के लिये लोक शिक्षण संचालनालय ने दिशा निर्देश जारी किये है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की इस वर्ष की थीम “एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग” रखी गई है। दिये गये निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक योग प्रदर्शन के लिये आयुष मंत्रालय के कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन किया जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2025 के आयोजन से संबंधित अतिरिक्त जानकारी, जिसमें ब्रांडिंग किट, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित आवश्यक सहायक सामग्री, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 10 प्रमुख कार्यक्रमों से संबंधित व्यापक पाठ्य सूचना और लिंक की जानकारी दिशा निर्देश के साथ भेजी गयी है। संपूर्ण प्रदेश में योग कार्यक्रम के लिये निर्धारित पल प्रतिपल समय सारणी के अनुसार आयोजित किया जायेगा।  मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के उद्बोधन कार्यक्रमों का सीधा प्रसार प्रसारण एनआईसी द्वारा प्रदाय लिंक के माध्यम से किया जायेगा। दिशा निर्देश में कहा गया है कि योग के मूल सिद्धांतों और इसके लाभों को बताने के लिये विद्यालयों में कार्यक्रम स्थल पर योग विशेषज्ञों को आमंत्रित कर योग व्याख्यान करायें। स्कूल शिक्षा विभाग के सामूहिक योग कार्यक्रम के ‍लिये राज्य नोडल अधिकारी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण श्री एचएन नेमा को बनाया गया है। उनका मोबाईल नबंर 9406952232 है।  

सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई

पीएम जनमन अभियान छिंदवाड़ा में 1067 भारिया परिवारों को मिले पक्के आवास जनजाति वर्ग का समग्र उत्थान मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई  सामग्री की सामूहिक खरीद पर भी की एक करोड़ की बचत भोपाल  प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में निवासरत 1067 भारिया जनजाति के परिवारों को पक्के आवास आवंटित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजाति संवर्ग के उत्थान के लिये प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इस योजना को मध्यप्रदेश में शत प्रतिशत मूर्तरूप दिया जायेगा। जिला प्रशासन द्वारा आवास आवंटन के साथ ही सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई है। प्रधानमंत्री जनमन अभियान के तहत छिन्दवाड़ा को कुल 5825 आवासों का लक्ष्य प्रदान किया गया था, जिसके अंतर्गत चौरई, हर्रई, तामिया, अमरवाड़ा, जुन्नारदेव एवं परासिया जनपद के दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत भारिया हितग्राहियों को योजना का लाभ देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। ग्रामों की दूर-दराज़ स्थिति (जिला मुख्यालय से 100-125 कि.मी.) के कारण स्थानीय भवन सामग्री विक्रेताओं द्वारा महंगे दाम और कम गुणवत्ता वाली सामग्री हितग्राहियों को दिये जाने से भी आवास निर्माण में बाधा थी। इससे कई परिवारों ने आवास निर्माण में रुचि ही लेना बंद कर दिया था। इस स्थिति पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह ने अधिकारियों के साथ स्वयं मौका स्थल का भ्रमण कर हितग्राहियों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया। उन्होंने जनपद पंचायतों के अमले, सहायक यंत्री, और ग्राम पंचायतों के सरपंच आदि से सामूहिक चर्चा की जिसमें ग्रामवासियों और सामग्री विक्रेताओं के साथ संवाद स्थापित कर कम दर पर उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई। नवाचार से हुई एक करोड़ की बचत जिला प्रशासन द्वारा जनपद स्तर पर थोक विक्रेताओं से संपर्क कर भवन निर्माण सामग्री की दरों को भी पूर्व निर्धारित किया गया। सीमेंट, ईंट, गिट्टी, सरिया, सेंटरिंग आदि निर्माण सामग्री स्थानीय दरों से 2 से 55 रूपये तक सस्ती दरों पर हितग्राहियों के ग्रामों में ही थोक में पहुँचाई गई। इस नवाचार से न केवल परिवहन लागत बची, बल्कि समय पर सामग्री मिलने से अधिकांश हितग्राहियों ने 2 माह से भी कम समय में अपने पक्के आवास तैयार कर लिए। इस पहल से 1067 परिवारों को 99,21,443 रूपये की सीधी बचत हुई, यानी प्रति परिवार लगभग 9,298 रूपये की औसत बचत हुई। साथ ही 1052 आवासों का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है और शेष 508 आवास शीघ्र पूर्ण होने की स्थिति में है। बिचौलियों से मिली मुक्ति नवाचार न केवल योजनांर्गत लक्ष्य प्राप्ति में सहायक बना, बल्कि इससे हितग्राहियों को ठगने वाले बिचौलियों से भी मुक्ति दिलाई गई। अब जिले के अन्य नवीन स्वीकृत आवासों में भी इसी मॉडल को अपनाने की योजना है।  

प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, दस दिन में शुरू होगी डीपीसी प्रक्रिया

भोपाल   कैबिनेट से पदोन्नति नियम 2025 को मंजूरी मिलने से नौ वर्ष बाद अब अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति की तैयारी प्रारंभ हो गई है। सबसे पहले मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत किए जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग वरिष्ठता के हिसाब से सूची तैयार कर रहा है। प्रयास यही है कि जून में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। डेढ़ साल में दो बार पदोन्नति करने की तैयारी है। एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू होंगे नियम पदोन्नति नियम एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू कर दिए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चूंकि नियम हमने तैयार किए हैं, इसलिए सबसे पहले इनका क्रियान्वयन भी हम ही कर रहे हैं। इससे सभी विभागों को प्रक्रिया भी समझ आ जाएगी। मंत्रालयीन सेवा संवर्ग में हर स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति होगी। लगभग सभी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति बनाई जाएगी। वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी दस पद हैं तो कुल 24 लोगों की एक जनवरी 2025 की स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी। सेवा अभिलेख के आधार पर नए नियम से पात्रता निर्धारित कर पदोन्नति दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कर्मचारी पदोन्नत पदों का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इसमें कोई परेशानी भी नहीं होगी। पदोन्नति के लिए पदों की गणना संवर्ग के हिसाब से होगी। पदोन्नति भी पहले आरक्षित पदों के लिए होगी सबसे पहले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत पद अलग किए जाएंगे। पहले पदोन्नति भी आरक्षित पदों के लिए होगी। इसके बाद अनारक्षित पदों पर पदोन्नति की जाएगी। इसमें सभी कर्मचारी शामिल होंगे। प्रथम श्रेणी के पदों पर योग्यता सह वरिष्ठता और शेष पदों पर वरिष्ठता सह उपयुक्तता का फार्मूला रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन होगी पदोन्नति प्रक्रिया नई डीपीसी प्रक्रिया को सशर्त माना जाएगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। जीएडी का कहना है कि कोर्ट में रिवर्ट के मामलों को लेकर भी सरकार अपना पक्ष रखेगी और कैविएट दाखिल करेगी, ताकि भविष्य में कोई निर्णय बिना पक्ष सुने न हो। सभी विभागों को दी जाएगी ट्रेनिंग जीएडी के अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले सामान्य प्रशासन विभाग अपनी डीपीसी करेगा। इसके बाद अन्य विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें निम्न बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। पदों की गणना कैसे हो, नये नियमों के पैरा की व्याख्या, वर्गवार आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन और मेरिट और सीनियरिटी के नियम के बारे में बताया जाएगा। आरक्षित वर्ग को कैसे मिलेगा लाभ अनुसूचित जाति (अजा) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (अजजा) को 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कैडर स्तर पर लागू होगा। यदि आरक्षित कोटे के पद भरे जा चुके हैं, तब पात्र अजा/अजजा वर्ग के व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी में स्थान मिल सकता है। भविष्य की डीपीसी में उस पद को आरक्षित कोटा में ही गिना जाएगा। अनारक्षित वर्ग के लिए चयन प्रक्रिया प्रत्येक पद के लिए दो गुना + 4 अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे। जैसे 10 पद खाली हैं तो 24 लोग चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे। पद भरने की प्राथमिकता में पहले अजजा, फिर अजा और अंत में अनारक्षित वर्ग को लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति नियमों को अंतिम रूप देने से पहले 27 ड्राफ्ट तैयार किए गए थे। अंततः मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से चर्चा कर कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियम को अधिसूचित किया जाएगा। जीएडी का दावा है कि यह नया नियम सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करता है। आरक्षित पदों की संख्या हो जाएगी कम नए नियम में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है। सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को प्रदेश में शासकीय सेवाओं में जो आरक्षण निर्धारित है, वह पदोन्नति में भी मिलेगा यानी 36 प्रतिशत। शेष पद अनारक्षित वर्ग के रहेंगे। इसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहता है। आरक्षित वर्ग के पद भरने के बाद अनारक्षित वर्ग में सभी शामिल होंगे। आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी को अनारक्षित श्रेणी से पदोन्नति मिलने पर आगे संवर्ग की गणना में उन्हें आरक्षित कोटे का ही माना जाएगा और आगे चलकर उनकी संख्या कोटे में कम हो जाएगी। पदोन्नति देने के लिए होगा प्रशिक्षण ‘पदोन्नति की प्रक्रिया के संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, नए नियमों में कई प्रविधान किए गए हैं, जिसके बारे में सभी को बारी-बारी से बताया जाएगा। हम प्रयास कर रहे हैं कि जून में ही मंत्रालय संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति कर दी जाएगी। सितंबर-अक्टूबर में वर्ष 2026 के लिए फिर पदोन्नत करेंगे। इस प्रकार डेढ़ वर्ष में दो बार पदोन्नति हो जाएगी।’ – संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल

दमोह में किसान प्रहलाद पटेल ने हिमाचल के सेब की खेती कर लोगों को हैरत में डाल दिया

टीकमगढ़  बुंदेलखंड के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने एक ऐसा सेब का पौधा विकसित किया है जो 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज से बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदल गई है। उन्हें इस उपलब्धि के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया है। हरमन 99 सेब की किस्म बुंदेलखंड के कई जिलों में खूब पैदा हो रही है। किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 50 डिग्री सेल्सियस में देता है फल हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने कई सालों की मेहनत के बाद एक खास किस्म के सेब के पौधे को विकसित किया। यह पौधा 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज के लिए भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान दिया। फिर 2024-25 में पद्मश्री से सम्मानित किया। बुंदेलखंड में हरमन 99 सेब की किस्म अब खूब पैदा हो रही है। इन जिलों में हो रहा उत्पादन बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हरमन 99 सेब का उत्पादन हो रहा है। टीकमगढ़ के किसान सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने 2021 में ऑनलाइन इस पौधे को मंगाया था। पिछले 3 सालों से उनके पेड़ लगातार फल दे रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग की मदद से सेब का उत्पादन शुरू किया था। हर साल उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। 22 पेड़ से की शुरुआत सुरेंद्र राजपूत ने 22 पेड़ ऑनलाइन मंगाए थे। आज वे सभी 22 पेड़ जिंदा हैं और उनमें फल लग रहे हैं। बुंदेलखंड में तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। लेकिन इस पौधे पर इसका कोई असर नहीं होता। इसका उत्पादन अच्छा होता है। उन्होंने बताया कि एक पेड़ में करीब 25 से 30 किलो सेब का उत्पादन होता है। यह फल मई के आखिर और जून के पहले हफ्ते में आता है। उस समय कश्मीर का सेब आना बंद हो जाता है। इसलिए बुंदेलखंड में सेब का अच्छा दाम मिलता है। इस मौसम में सेब की कीमत 250-300 रुपए किलो है। जनवरी में सूख जाता है पेड़ सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि जनवरी में पेड़ सूख जाता है। इसके बाद उसकी कटाई की जाती है। जितनी अच्छी कटाई होगी, उतना ही फल पेड़ में लगेगा। इसके बाद फूलों की क्रॉसिंग कराई जाती है। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी करना पड़ता है। वे पिछले 3 सालों से लगातार सेब का उत्पादन कर रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। थोक में 200 रुपए किलो बिकता किसान सुरेंद्र राजपूत बताते हैं कि जब कश्मीर का सेब बाजार में आना बंद हो जाता है, तो बुंदेलखंड का सेब सबसे ज्यादा दिखता है। गर्मियों में होने वाले सेब का स्वाद मीठा होता है और रंग भी अच्छा होता है। इसलिए इसका थोक रेट ₹200 तक बिक जाता है। बुंदेलखंड में उत्पादन होने से बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है। यह सेब ताजा होता है। कश्मीर से आने में समय लगता है। गर्मियों में यह सेब तुरंत बाजार में पहुंच जाता है। इसलिए इसका मुनाफा भी अच्छा होता है। इन बातों का रखना होगा ध्यान सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि बुंदेलखंड में सेब का उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। अगर कोई किसान इसकी खेती करना चाहता है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। पौधा लगाते समय ध्यान रखना जरूरी है कि उसे कम मात्रा में पानी दें। कीटनाशक दवा का छिड़काव करें, ताकि दीमक न लगे। 2 साल बाद फल देने लगता है। जब पेड़ बड़ा हो जाए और जनवरी में सूख जाए, तो उसकी डालियों की कटाई करें। अगर मधुमक्खी नहीं है, तो फूलों की क्रॉसिंग भी एक दूसरे फूल से करनी पड़ती है। इससे फल का उत्पादन अच्छा होता है। हिमाचल के हरमन शर्मा ने किया है रिसर्च हिमाचल के बिलासपुर जिले के रहने वाले हरमन शर्मा ने कई सालों तक रिसर्च के बाद एक ऐसा पौधा बनाया जो 60 डिग्री के तापमान पर भी पैदा होता है और फल देता है। जब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह सेब सफल हुआ, तो भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया। इस पौधे का नाम भी उन्हीं के नाम पर है, हरमन 99। इसके बाद वर्ष 2024-25 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके द्वारा रिसर्च किए गए इस पौधे ने अब बुंदेलखंड के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदल दी है।

मंत्री राजपूत ने किया दीक्षांत समारोह स्थल का निरीक्षण

भोपाल  डाॅ.सर हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में 33वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शामिल होंगें। जिसको लेकर आयोजन की पूर्व संध्या पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद राजपूत ने विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता तथा विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ दीक्षांत समारोह स्थल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि हमारा यह सौभाग्य है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रथम बार सागर पधार रहे हैं। जिसको लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बहुत अच्छी तैयारियां की है। साथ ही हम सभी लोगों ने भी श्री गडकरी के स्वागत के लिए तैयार की है। मंत्री श्री राजपूत ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर संतुष्टि प्रकट करते हुए दीक्षांत समारोह स्थल तथा विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता डाॅ. सुखदेव मिश्रा, वीरेंद्र पाठक, नेवी जैन सहित विश्वविद्यालय प्रबंधन कमेटी अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

5वीं और 8वीं पुन: परीक्षा के परिणाम 20 जून को होंगे घोषित, विद्यार्थी दोपहर 3 बजे से देख सकेंगे परिणाम

भोपाल प्रदेश में राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड पेटर्न पुन: परीक्षा के परिणाम शुक्रवार 20 जून को दोपहर 3 बजे पोर्टल पर घोषित होंगे। विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण परिणाम राज्य शिक्षा केन्द्र के वेबपोर्टल https://www.rskmp.in/result.aspx पर रोल नम्बर प्रविष्ट कर देख सकते हैं। इसी पोर्टल पर शिक्षक, संस्था प्रमुख अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम भी देख सकेंगे। उल्लेखनीय है कि उक्त परीक्षाओं का संचालन विगत 2 से 9 जून के मध्य किया गया था। इनमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 86 हज़ार से अधिक तथा कक्षा 8वीं के एक लाख 24 हज़ार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए कुल 322 केन्द्र बनाये गए थे, जहाँ से 22 हज़ार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई।  

शासकीय-अशासकीय भवनों में जल संग्रहण के लिये वॉटर हार्वेस्टिग को प्राथमिकता

भोपाल प्रदेश मेंजल गंगा संवर्धन अभियान में 30 मार्च से शुरू किये गये कार्य लगभग पूरे किये जा चुके है। जिला प्रशासन द्वारा किये गये कार्यों की समीक्षा की जा रही है। प्रदेशव्यापी अभियान 30 जून को संपन्न हो जायेगा। जिलों में जल स्त्रोतों के आसपास व्यापक पौधरोपण योजना तैयार की जा रही है। जल संरक्षण के लिये शासकीय-अशासकीय भवनों में वॉटर हार्वेस्टिग को प्राथमिकता दी गई है। न्यायालय परिसर में रैन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम अशोक नगर में जल गंगा संवर्धन अभियान में संविधान वाटिका एवं पिपलेश्वर महादेव मंदिर न्यायालय परिसर में जल संरक्षण के लिये रैन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम का निर्माण किया गया है। यह कार्य जिला न्यायाधीश श्री संजीव सिंघल के मार्गदर्शन में किया गया। वर्षा काल के दौरान जल को संरक्षित करने के लिए वॉटर हार्वेस्टिंग का निर्माण किया गया है। संविधान वाटिका एवं पिपलेश्वर महादेव मंदिर न्यायालय परिसर में सोखते गड्ढो का निर्माण किया गया है। “जल संवाद” कार्यशाला खंडवा जिले में गिरते भू-जल स्तर को रोकने और वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिये जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के सभी शासकीय और निजी भवनों पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर स्थापित किए जा रहे हैं। इस पहल में जिला प्रशासन, नगरीय और ग्रामीण स्थानीय निकायों, उद्योगों, स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, गृहस्वामियों, पंचायतों और समुदाय आधारित संगठनों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। खंडवा में इस विषय को लेकर जल संवाद कार्यशाल हुई। कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को पानी की बचत की शपथ दिलाई गई। कार्यशाला को कलेक्टर श्री ऋषभ गुप्ता ने संबोधित किया। जल सहेजने के उद्देश्य से हो रहे दीवार लेखन नरसिंहपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्रामीण अंचल में जल सहेजने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद की विभिन्न समितियों द्वारा दीवार लेखन का कार्य किया जा रहा है। दीवार लेखन के माध्यम से विभिन्न प्रेरक स्लोग के जरिये लोगों को प्रेरित कर जल संरक्षण व संवर्धन का संदेश दिया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड चीचली के ग्राम रहमा- बेलखेड़ी में जल संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से दीवार लेखन का कार्य किया गया। जल संरक्षण की शपथ पांढुर्णा जिले में कलेक्टर श्री अजय देव शर्मा के निर्देश पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक और उनकी टीम ने अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने के लिये जल यात्रा निकाली। विकासखंड पांढुर्णा के ग्राम उमरीखुर्द में जल चौपाल लगाकर जनसमुदाय को जल की महत्ता बताई गई। ग्रामीणों को क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधरोपण करने के लिए भी प्रेरित किया गया। ग्रामीणों को जल संरक्षण व संवर्धन की शपथ दिलाई गई। स्वच्छ जल, सुरक्षित भविष्य  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में “जल गंगा सवंर्धन अभियान” 30 मार्च से प्रारंभ किया है जो कि 30 जून तक चलेगा। शहडोल जिले में अभियान में निरंतर गतिविधियाँ चल रही है। अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नये तालाब बनाये जा रहे, वहीं दूसरी ओर पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णाद्धार किया जा रहा है। नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। जनपद पंचायत गोहपारू के  ग्राम पंचायत धनगंवा मं नवीन खेत तालाब निर्माण के कार्य सामूहिक भागीदारी से किये गए। केन्द्रीय दल के समक्ष महिलाओं द्वारा वाटर सेम्पल टेस्ट आगर-मालवा जिले में जल शक्ति अभियान, केच द रेन के तहत केंद्रीय नोडल अधिकारी सुश्री गरिमा श्रीवास्तव के समक्ष प्रशिक्षित महिला देवबाई, जस्सूबाई रेखाबाई और संतोष बाई ने पानी का पी. एच. मान का टेस्ट लगा कर पानी की गुणवात्ता जांची। केन्द्रीय दल द्वारा महिलाओं के कार्य की प्रशंसा की गई। जिले में प्राचीन बावड़ियों की पहचान कर उनके महत्व की जानकारी ग्रामीणों को दी गई। ग्रामीणों को जल स्त्रोंतो की साफ-सफाई निरंतर किये जाने की शपथ दिलाई गयी। जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा डिंडौरी जिले में कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या ने जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की समीक्षा की।  जिले में 2200 खेत तालाब बनाये जा रहे है। इनमें से अंधिकाश पूरे हो चुके है। जिले में  1500 कुओं का जल स्तर बढाने के लिये रिचार्ज संरचनाएं बनाई जा रही है।  जिले के जनपद पंचायत में 187 सार्वजनिक तालाब का निर्माण किया जा रहा है। कलेक्टर ने सभी कार्य गुणवत्ता के साथ आगामी 7 दिन में पूरा करने के निर्देश दिये।    

प्रदेश में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, 12 ट्रेड में दिया गया प्रशिक्षण

भोपाल  प्रदेश के 2383 सरकारी स्कूलों में कक्षा-9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी कौशल विकास के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा व्यावसायिक शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। पिछले शैक्षणिक सत्र में 12 ट्रेड्स में करीब 4 लाख 5 हजार विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिलाया गया। 12 ट्रेड में एग्रीकल्चर, अपेरल, ऑटोमोटिव, ब्यूटी एण्ड वेलनेस, बैंकिंग एण्ड फायनेंस सर्विसेस, इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड हार्डवेयर, हेल्थ केयर, रिटेल, फिजिकल एजुकेशन, टूरिज्म एण्ड हॉस्पिटेलिटी, प्लम्बर और आईटी विधाओं से जुड़े हैं। इस शैक्षणिक सत्र में भी व्यावसायिक शिक्षा के और नये ट्रेड्स शुरू किये जाने पर स्कूल शिक्षा विभाग योजना तैयार कर रहा है।  

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