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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बिस्मिल जी का पुण्य स्मरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां भारती की परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, श्रद्धेय रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की जयंती पर उन्हें नमन् किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काकोरी केस सहित विभिन्न प्रयासों से बिस्मिल जी ने दमनकारी हुकूमत की जड़ें हिला दीं और असंख्य देशवासियों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता सेनानी बिस्मिल जी  का योगदान स्मरणीय रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रख्यात साहित्यकार प्रो. हाशमी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रतलाम निवासी प्रख्यात साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। प्रो. अजहर हाशमी का कल रतलाम में निधन हो गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में श्री हाशमी ने निरंतर कार्य किया। वे विभिन्न धर्म ग्रंथों के अध्ययन में भी रुचि रखते थे। उनके निधन से मध्यप्रदेश ने एक शीर्ष और प्रतिष्ठित साहित्यकार खो दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. हाशमी की आत्मा की शांति और उनके शोकाकुल परिजन को यह दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।  

मंत्री शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है

भोपाल जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है। ग्रामीण सांस्कृति की धड़कन है वाद्ययंत्र मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कोल जनजाति का मुख्य जीविकोपार्जन वनोपज संग्रहण, कृषि और मजदूरी पर आधारित है। प्रकृति की पूजा करने वाली यह जनजाति जंगल, नदियों और पहाड़ों से गहरा नाता रखती है। कोल समाज के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है। सरकार और समाज मिलकर कोल जनजाति के उत्थान और सम्मान के लिये कार्य कर रहे है। सरकार द्वारा जनजातियों के विकास के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से और औद्योगिकरण के विकास से कोल जनजाति भी विकास की और अग्रसर है। शिक्षा और रोजगार पर शासन का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजाति वर्ग के चहुँमुखी उत्थान के लिये राज्य और केन्द्र सरकार के द्वारा छात्र-छात्राओं के विकास के लिये किये जा रहे समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि कोल जनजाति के छात्र-छात्राएँ आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है। राज्य शासन द्वारा म.प्र. प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों को देय राशि प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 40 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 60 हजार एवं साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 50 हजार की राशि प्रदान की जाती है। इसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता के लिए आय सीमा का बंधन नहीं है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले जनजातीय वर्ग के सफल अभ्यार्थी जिनके माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 8 लाख से अधिक न हो को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 25 हजार की राशि प्रदान की जाती है। दूसरी बार सफलता प्राप्त करने पर अभ्यर्थी को उपरोक्त उल्लेखित राशि की 50 प्रतिशत राशि एवं तीसरी बार योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाता। अंगेजी हुकुमत के विरूद्ध हुआ कोल विद्रोह मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में कोल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकुमत के अन्याय के विरूद्ध 1831 में अंग्रेजों से लोहा लिया, जिसे कोल विद्रोह के रूप में याद किया जाता है। बुधू भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में कोल विद्रोह असमानता, शोषण और अत्याचार के विरूद्ध अन्य जनजातियों के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना। कोल विद्रोह से प्रभावित होकर इसका अनुसरण करते हुए अन्य कई जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।  

राज्यपाल ने कहा वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी

लक्ष्य को समय सीमा से पहले पूरा करने का भाव जरूरी : राज्यपाल मंगुभाई पटेल सिकल सेल मिशन के कार्य मानवता की सेवा का माध्यम : राज्यपाल राज्यपाल ने कहा वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी राजभवन में सिकल सेल समीक्षा बैठक हुई भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति के साथ रोग उन्मूलन की प्रतिबद्धता जरूरी है। कार्य का भाव लक्ष्य को समय सीमा से पूर्व पूरा करने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल मिशन के कार्य मानवता की सेवा के माध्यम है। ईश्वरीय कृपा के भागी होने का यह बड़ा अवसर है। राज्यपाल पटेल राजभवन में सिकल सेल मिशन के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी उपस्थित थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के द्वारा सिकल सेल उपचार, प्रबंधन और नियंत्रण प्रयासों की जानकारी प्राप्त की। उनको बताया गया कि मिशन के अंतर्गत 19 जून से 3 जुलाई तक समस्त ग्राम पंचायतों, एकलव्य आवासीय स्कूलों एवं छात्रावासों में मेगा शिविर आयोजित होंगे। अधिक से अधिक स्क्रीनिंग जांच की जाएगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से लेकर जिला चिकित्सालयों में पीओसी किट  के द्वारा स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रतिदिन स्क्रीनिंग जांच का डेटा पोर्टल में दर्ज होगा। जेनेटिक काउंसलिंग की जाएगी। जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड प्रदान किए जाएंगे। ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर चिह्नित सिकल सेल रोगियों के लिए शिविर लगेंगे। उन्हें विशेषज्ञों की परामर्श सेवायें उपलब्ध कराई जाएगी। सिकल सेल रोगियों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यू.डी.आई.डी. कार्ड प्रदान कर पेंशन की सुविधा प्रदान की जाएगी। आयुष विभाग द्वारा बताया गया कि विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में जनजातीय बहुल 20 जिलों में संचालित 78 आयुष औषधालयों में शिविर का आयोजन किया जाएगा। सिकल सेल उपचार में सहायक आयुर्वेद दवाओं की किट का वितरण होगा। रोग उपचार में सहायक स्थानीय वनस्पति के संरक्षण, संवर्धन के प्रति जन जागरूकता के कार्य होंगे। सिकल सेल एनीमिया प्रभावित प्रत्येक ग्राम में जनजागृति के लिए प्रभात फेरी, योगाभ्यास, ग्राम-सभा आदि के आयोजन किए जाएंगे। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, सचिव जनजातीय प्रकोष्ठ श्रीमती जमुना भिड़े, संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सुसलोनी सिडाना, आयुक्त आयुष संजय मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

जबलपुर में गंदगी फैलाने वालों पर अब लगेगा 50000 रुपए तक का जुर्माना

जबलपुर  जबलपुर नगर निगम में शहर में गंदगी फैलाने वाले के खिलाफ अब कड़ा रुख अख्तियार किया है, शहर में गंदगी फैलाने वाले पर नगर निगम ने 50000 रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। सदन की बैठक में इस बात का निर्णय लिया कि जो लोग बार-बार शहर की व्यवस्था बिगाड़ने पर उतारू है उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। यही वजह है कि निगम ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया गया है। जिसमें कहा गया है कि सड़क में कचरा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ 1000 से लेकर 50000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने पर नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति   सदन की बैठक में कचरा फैलाने वालों पर 50 हजार रुपए तक की जुर्माने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष रमेश मिश्रा ने भारी विरोध किया, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोगों के घरों तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो रहा है, सफाई व्यवस्था भ्रष्टाचार है ऐसे में कचरा फैलाने पर जुर्माना लगाना कहीं से भी उचित नहीं है। निगम की बैठक में मुआवजा राशि, महापुरुषों के नाम के मार्गों का नामकरण, आउटसोर्स श्रमिकों को समय वृद्धि एवं एक राष्ट्र एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पारित किए गए। खास बात यह रही कि सदन की इस बैठक में 18 मिनट में 18 प्रस्ताव सर्व सम्मति से पास किए गए।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने निर्देशित किया है कि डाटा अपडेशन में देरी पर संबंधित डीडीओ की जिम्मेदारी तय की जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों के डाटा को समय पर अपडेट करने के निर्देश जिम्मेदार अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि डाटा अपडेशन में देरी पर संबंधित डीडीओ की जिम्मेदारी तय की जाए। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि डाटा क्लीनिंग एक्सरसाइज एक सतत् प्रक्रिया है, जिससे सेवानिवृत्त होने वाले, प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले कर्मचारियों, मृत कर्मचारियों एवं अन्य विभिन्न स्थितियों में अन्य स्थानों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का डाटा अपडेट किया जाता है।  उन्होंने बताया कि प्रदेश के कर्मचारियों का डाटा सत्यापन किया गया है और अभी तक कोई भी कर्मचारी संदिग्ध नहीं पाया गया है अर्थात किसी भी कर्मचारी को किसी भी प्रकार से कोई भी आर्थिक लाभ नियमों के विपरीत नहीं मिला है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि डाटा क्लीन करने की प्रक्रिया के बाद IFMIS NEXT GEN मे Data Migration करना सुविधाजनक होगा। इससे शुद्ध डाटा की फीडिंग हो सकेगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि प्रदेश में आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा गठित स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) द्वारा विभिन्न डाटा सेट्स का परीक्षण तथा विश्लेषण निरंतर हो रहा है। सरकार द्वारा सुशासन के दृष्टिगत की जाने वाली कार्यवाही में IFMIS डाटा से संज्ञान में आया कि प्रदेश में 36 हजार 26 नियमित, 8 हजार 784 गैर नियमित कुल मिलाकर 44 हजार 810 कर्मचारियों का वेतन आहरित नहीं किया गया है। शासन स्तर से वेतन आहरण नहीं होने के कारणों का पता लगाने के लिये निर्देश जारी किये गये। संभावित कारणों की पड़ताल होने पर जांच में सामने आया कि त्यागपत्र देने वाले कर्मचारी, सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी, प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले कर्मचारी,बगैर एम्पलाई कोड वाले कर्मचारी और मृत कर्मचारियों का डाटा समय पर अपडेट नहीं होने से कर्मचारियों का डाटा मिसमेच हुआ है। शासन स्तर से इनकी वास्तविक संख्या ज्ञात करते हुए IFMIS में DDO तथा कोषालय अधिकारी स्तर से डेटाबेस में आवश्यक अपडेट कराने के उद्देश्य से समस्त DDO से जानकारी कोषालय अधिकारियों के माध्यम से एकत्रित कर भविष्य में सभी प्रविष्टियां समय पर करने के निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त कोष एवं लेखा ने बताया है कि इस सन्दर्भ में ऐसे नियमित एवं गैर नियमित कर्मचारियों की डाटा सम्बन्धी जानकारी प्राप्त की गई है, जिनका वेतन IFMIS  कोषालय प्रणाली से आहरित नहीं हुआ है, (यह अन्य किसी प्रणाली से आहरित हो सकता है यथा प्रतिनियुक्ति, स्थानीय निकाय आदि)। इसके साथ अन्य संभावित कारणों को DDO के माध्यम से एकत्रित किया गया है। आयुक्त कोष एवं लेखा ने बताया कि प्रथम दृष्टया DDO से सत्यापन उपरांत जानकारी विश्लेषण करने पर अभी तक कोई संदिग्ध कर्मचारी परिलक्षित नहीं हुआ है। समस्त DDO को एम्पलाई कोड के समक्ष उपयुक्त flagging करने तथा एग्जिट एंट्री इत्यादि के माध्यम से डेटाबेस अद्यतन करने के निर्देश दिये गये हैं।

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को सौगात देने जा रही मोहन यादव सरकार, पदोन्नति में आरक्षण का नियम जल्द होगा लागू

भोपाल  पिछले 9 सालों से पदोन्नति का रास्ता देख रहे मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को राज्य सरकार जल्द ही बड़ी राहत देने जा रही है. प्रदेश सरकार पदोन्नति में आरक्षण का नियम जल्द ही लागू करने की तैयारी करने जा रही है. इसके प्रारूप को देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सभी मंत्रियों ने इसमें अपनी सहमति दे दी है. नए प्रारूप में तय किया गया है कि पहले जिनकी पदोन्नति हो चुकी है, उन्हें न तो रिवर्ट किया जाएगा और न ही रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. पदोन्नति में आरक्षण के लाभ के लिए सबसे पहले एससी के 16 फीसदी और एसटी के 20 फीसदी पद भरे जाएंगे. इसके बाद बाकी वर्गों को इसका फायदा मिलेगा. माना जा रहा है कि जून माह के अंतिम सप्ताह में इस प्रारूप पर कैबिनेट अपनी मुहर लगा देगी. 9 साल से देख रहे पदोन्नति की राह मध्य प्रदेश में पदोन्नति का मामला पिछले 9 सालों से उलझा हुआ है. इन 9 सालों के दौरान हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर्ड हो गए और बड़ी संख्या में कर्मचारी पदोन्नति का रास्ता देख रहे हैं, लेकिन अब इसका रास्ता खुलने जा रहा है. राज्य सरकार ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है. इस प्रारूप को दो बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी देख चुके हैं. मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में सभी मंत्रियों के साथ इसका प्रजेंटेशन दिया. अब माना जा रहा है कि अगली कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए लाया जा सकता है. इस तरह मिलेगा पदोन्नति का आरक्षण का लाभ     प्रारूप में तय किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण का सबसे पहले जनजातीय वर्ग को लाभ दिया जाएगा. इसमें जनजातीय वर्ग के खाली पदों को भरा जाएगा. इसके बाद अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जाएगा. यदि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षिण पद पर कोई पात्र व्यक्ति नहीं मिलता तो दूसरे वर्ग के कर्मचारी को इसका लाभ नहीं दिया जाएगा. यह पद खाली रखे जाएंगे.     पदोन्नति के लिए जितने भी पद खाली होंगे, उससे दो गुना के साथ 4 अतिरिक्त नाम बुलाए जाएंगे. इस तरह यदि 10 पद खाली हैं तो उसके लिए 20 और 4 अतिरिक्त यानी 24 लोग बुलाए जाएंगे.     पदोन्नति के लिए हर साल सितंबर से लेकर नवंबर के बीच डीपीसी की जाएगी. इसके अलावा 31 दिसंबर को रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों की पात्रता का निर्धारण किया जाएगा. हर साल 1 जनवरी को रिक्त होने वाले पदों पर पात्र लोगों को प्रमोशन का लाभ मिलता जाएगा.     पदोन्नति के लिए दो तरह की लिस्ट तैयार होंगी. इसमें क्लास वन अधिकारियों को पदोन्नति का आधार मैरिट कम सीनियेरिटी को बनाया जाएगा. वहीं क्लास 2 के लिए नीचे के पदों के लिए सीनियेरिटी कम मैरिट के आधार पर लिस्ट तैयार की जाएगी. इससे सभी वर्गों को फायदा पहुंचेगा. प्रक्रिया दो आधारों पर होगी निर्धारित क्लास-1 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए “मेरिट कम सीनियरिटी” का फार्मूला लागू होगा। क्लास-2 व उससे नीचे के पदों के लिए “सीनियरिटी कम मेरिट” का आधार अपनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह संतुलित व्यवस्था आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के हितों का ध्यान रखेगी। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी की पदावनति (रिवर्ट) नहीं की जाएगी और पूर्व में सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था उस दिन से लागू मानी जाएगी जिस दिन इसका औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होगा। पात्रता की अंतिम तिथि 31 दिसंबर सरकार ने निर्णय लिया है कि पदोन्नति की प्रक्रिया हर साल सितंबर से नवंबर के बीच संपन्न होगी। पात्रता का निर्धारण 31 दिसंबर तक किया जाएगा और 1 जनवरी से पद रिक्तियों के अनुसार योग्य अधिकारियों को पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति की रिक्तियों की संख्या के दोगुना दावेदारों के साथ चार अतिरिक्त अभ्यर्थियों को सूची में शामिल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि 6 पद रिक्त हैं, तो 12 (दोगुना) + 4 अतिरिक्त = कुल 16 लोगों को प्रमोशन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। पिछले कई वर्षों से प्रमोशन पर लगी रोक के कारण लगभग एक लाख कर्मचारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार अब इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति देने की दिशा में कार्य कर रही है। 

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में तबादले,100 से अधिक चिकित्सा विशेषज्ञों को इधर से उधर किया पदस्थापना आदेश जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में लगातार तबादला आदेश जारी होने का सिलसिला चल रहा है, सभी विभाग अपने यहाँ की ट्रांसफर लिस्ट जरी कर रहे हैं, इसी क्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सूची जारी की है इस लिस्ट में 100 से अधिक चिकित्सा विशेषज्ञों के नाम हैं जिनके तबादले किये गए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग थोकबंद तबादले किये हैं, इसके लिए कई ट्रांसफर लिस्ट एक एक बाद एक जारी की गई , जिसमें मेडिकल ऑफिसर, चिकित्सा विशेषज्ञ के नाम है, इन डॉक्टर्स को आदेश दिया गया है कि वे निर्धारित समयावधि में नई पदस्थापना वाली जगह ज्वाइन करें और शासन की सूचित करें। Transfer आदेश eHRMS पोर्टल के माध्यम से जारी  आदेश में कहा गया है कि यह ट्रांसफर आदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा eHRMS पोर्टल के माध्यम से डिजिटली रूप से जारी किया गया है, जो विभागीय कार्यप्रणाली एवं शासन की ई-गवर्नेस प्रणाली के अंतर्गत विधिसम्मत माना जाएगा। अतः संबंधित शासकीय सेवक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन कार्यमुक्ति (Relieving) एवं नवीन पदस्थापना पर कार्यग्रहण (Joining) की प्रक्रिया पूर्ण करे। किसी अन्य माध्यम से की गई कार्यवाही अमान्य मानी जाएगी। अधिकारियों के ये दिए आदेश  आदेशित किया गया है कि संबंधित कार्यालय प्रमुख एवं आहरण-संवितरण अधिकारी (DDO) यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरित शासकीय सेवक की कार्यमुक्ति निर्धारित समयावधि में विधिवत संपन्न की जाए, तथा eHRMS पोर्टल पर उसकी सेवा पुस्तिका (Service Book) एवं अन्य वैधानिक प्रविष्टियाँ यथासमय अपडेट की जाए।  

10 हजार रिश्वत लेते धराया ग्राम पंचायत सचिव, शिकायत पर लोकायुक्त टीम ने दबोचा

उज्जैन  लोकायुक्त की टीम ने पंचायत सचिव को 10 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा है। सचिव ने मुख्यमंत्री आवास योजना की दूसरी किश्त जारी करने के लिए रुपयों की मांग की थी। रिश्वत की राशि देने के लिए उसने वृद्ध महिला के नाती को अपने घर बुलाया था। लोकायुक्त ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया है। लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया कि महिदुपर तहसील के ग्राम बेलखेड़ा में रहने वाले अशोक डाबी ने 6 जून को कार्यालय आकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी नानी कंचनबाई के नाम से ग्राम जगोटी में मुख्यमंत्री आवास स्वीकृत हुआ है। पहली किश्त की राशि 25 हजार रुपए नानी के खाते में आ चुकी थी। दूसरी किश्त 40 हजार रुपए जारी करने के लिए पंचायत सचिव दिलीप शर्मा 10 हजार रुपए मांग रहा है। लोकायुक्त ने शिकायत पुष्टि वाइस रिकार्डिंग के माध्यम से की। इसके बाद पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई। पंचायत सचिव ने अशोक डाबी को रिश्वत के 10 हजार रुपए लेकर अपने घर ग्राम महुडीपुरा बुलाया। लोकायुक्त की टीम भी पंचायत सचिव के गांव पहुंच गई। अशोक डाबी को रुपए लेकर घर में भेजा गया। पंचायत सचिव ने रुपए लेकर अपनी जेब में रख लिए थे। अशोक ने बाहर आकर इशारा किया, उसी दौरान लोकायुक्त टीम घर में पहुंची और सचिव दिलीप शर्मा को रंगेहाथ पकड़ा। उसकी पेंट की जेब में रखे 10 हजार रुपए जब्त किए गए और प्रक्रिया स्वरूप सचिव के हाथ धुलवाए गए। रिश्वत का रंग सामने आते ही उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की और पेंट को जब्त कर मामला दर्ज किया। पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ने की कार्रवाई में निरीक्षक राजेंद्र वर्मा, प्रधान आरक्षक हितेश, आरक्षक नीरज, श्याम, कुनाल मौजूद थे।

लंबे समय से जमे पुलिसकर्मी हटाए जाएंगे, पुलिसकर्मियों की थानों में पोस्टिंग को लेकर PHQ का आदेश

भोपाल  लंबे समय से एक ही थानों में जमे आरक्षक से उपनिरीक्षक तक के कर्मचारियों के तबादले की कार्रवाई शुरू हो गई। उनका रिकॉर्ड निकालकर समीक्षा की जाएगी। हर जिले से 16 जून तक प्रतिवेदन भेजना होगा। उसके बाद लंबे समय से जमे ये पुलिसकर्मी हटाए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी पुलिस आयुक्त (इंदौर/भोपाल) और जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी करते हुए थानों में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों के तबादले सुनिश्चित करने को कहा है। जारी आदेश के अनुसार, किसी भी आरक्षक से लेकर उपनिरीक्षक स्तर के कर्मचारी को एक थाने में अधिकतम 4 वर्ष (और विशेष परिस्थिति में 5 वर्ष) से अधिक नहीं रखा जाएगा। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी कर्मचारी को पदावधि पूर्ण होने के बाद दोबारा उसी थाने में उसी पद पर पदस्थ नहीं किया जाए। यदि किसी को अलग पद पर फिर उसी थाने में लाना हो, तो कम से कम 3 वर्षों का अंतराल जरूरी होगा। इसके अलावा एक ही अनुविभाग में विभिन्न पदों पर किसी कर्मचारी की कुल पदस्थापना अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अटैचमेंट की अवधि भी सेवाकाल में शामिल मानी जाएगी।

रीवा के सरकारी अस्पताल में नाबालिग से गैंगरेप, अस्पताल में भर्ती थी मां, बेटी के साथ ज्यादती

रीवा  रीवा जिले के शासकीय श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी स्मृति चिकित्सालय के ईएनटी विभाग परिसर में एक नाबालिग किशोरी के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। हालांकि, अभी तक न तो पीड़िता पुलिस के पास गई है और न ही उसके परिजन। शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन भी इस मामले को छिपाने का प्रयास करता रहा, लेकिन तूल पकड़ने के बाद अब अपनी सफाई दे रहा है। मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने अपील की है कि यदि पीड़िता के साथ कोई घटना हुई है तो वह सामने आए, जिससे दोषियों को सजा मिल सके। इस घटना से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।  रीवा एसपी विवेक सिंह ने कहा कि अपुष्ट सूत्रों से वारदात की जानकारी मिली है। इस संबंध में अभी पीड़िता की ओर से पुलिस को शिकायत नहीं मिली है। पुलिस पीड़िता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पीड़िता के पिता बोले- मेरी बेटी के साथ गलत हुआ वहीं, पीड़िता के पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि मेरी बेटी के साथ गलत हुआ है। मैं आरोपी महेंद्र पर कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग करता हूं। पुलिस सुबह घर पर पूछताछ के लिए आई थी। अब रात में गोविंदगढ़ रेस्टहाउस में बयान के लिए बुला रही है। कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जेल भेजा जाए पीड़िता के पिता ने कहा कि मैं घर से बाहर छत्तीसगढ़ में हूं। मेरी बेटी के साथ इस तरह का दुष्कृत्य किया गया। मुझे अभी तक अस्पताल के एक ही कर्मचारी का नाम मालूम है, जिसका नाम महेंद्र तिवारी है। उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जेल भेजा जाए। कोई भी अगर अस्पताल में इलाज के लिए आएगा तो किसी और की बहन बेटी इस तरह की घटना का शिकार न बने। अगर सरकार और प्रशासन सजा नहीं दे पा रहे हैं तो आरोपियों को मेरे हवाले कर दें। मैं खुद सजा दूंगा। मैं भी छत्तीसगढ़ से रीवा आ रहा हूं। अस्पताल अधीक्षक बोले- मां के साथ आई थी अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि 2 लोगों द्वारा घटना करने की जानकारी मिली है। लड़की को इलाज के लिए अस्पताल के गायनी वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। हालत ठीक नहीं थी तो तत्काल उपचार दिया गया। बाद में लड़की अस्पताल से कहीं चली गई। हमने पुलिस को सारे साक्ष्य सौंप दिए हैं। हम भी मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं। स्ट्रेचर पर ले जाते CCTV फुटेज सामने आया इसी दौरान स्ट्रेचर पर ले जाते हुए एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि स्ट्रेचर पर वही पीड़िता लेटी है और उसे ले जा रहे लोग आरोपी ही हैं, जो उसे अस्पताल के ही एक अन्य विभाग के सामने छोड़कर मौके से फरार हो गए। पटवारी बोले-मामले को दबाने का प्रयास कर रहे इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- रीवा जिले के सरकारी अस्पताल में नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की खबर ने एक बार फिर मध्यप्रदेश के जंगलराज की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के ही 3 कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर के गलियारे में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है। पटवारी ने आगे लिखा- यह प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला है। स्वास्थ्य विभाग के मंत्री भी राजेंद्र शुक्ल ही हैं और जिस अस्पताल में गैंगरेप की वारदात हुई है, उस अस्पताल का अधीक्षक राजेंद्र शुक्ल का भांजा राहुल मिश्रा है। उप मुख्यमंत्री पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

कृषि उपज मंडी में किसानों के साथ करोड़ों की ठगी करने वाला इनामी आरोपी कल्याण यादव आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया

ग्वालियर ग्वालियर कृषि उपज मंडी ग्वालियर में किसानों के साथ सात करोड़ की ठगी करने वाला इनामी आरोपी कल्याण यादव आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उस पर दस हजार रुपये का इनाम रखा गया था। आरोपी को पुलिस ने रजिस्ट्रार दफ्तर से पकड़ा। ग्वालियर की लक्ष्मी गंज मंडी में किसानों के साथ धान की फसल की खरीदकर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने कल्याण सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया है। ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव ने बताया आरोपी की संस्था ने मंडी कर्मचारियों की सांठ गांठ से 7 करोड़ से अधिक की ठगी की थी। जिस पर मंडी सचिव आलोक कुमार वर्मा ने जनकगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। सभी आरोपियों पर चार जून को एसएसपी धर्मवीर सिंह ने 10 हजार का इनाम घोषित किया था आरोपी कल्याण सिंह कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री लाखन सिंह का रिश्ते में भांजा बताया गया है। वर्तमान मंडी सचिव ने मंडी व्यापारियों से किसानों ने धान की खरीद कर उसकी राशि हड़पने की शिकायत पुलिस से की थी, जिसको लेकर दुर्गा देवी ट्रेडिंग कंपनी की कल्याण सिंह यादव, जय गुरुदेव ट्रेडिंग कंपनी के नरेश रावत, द्वारकाधीश ट्रेडिंग कंपनी के भूपेंद्र सिंह एवं मंडी कर्मचारी कदम सिंह जाटव, महेश कौशल, अमित गुप्ता, सूची गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस पर से पुलिस द्वारा कल्याण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किया जा रहे हैं।

विशाल ने किया पहला वार, फिर लाश खाई में फेंकी… पति राजा की मौत का जश्न मनाती रही सोनम!

राजा को शादी के बाद सोनम ने छूने तक नहीं दिया, बोली थी कामाख्या में दर्शन के बाद ही करीब आएंगे सोनम का घातक इश्क, साजिश को प्यार समझता रहा राजा… जो-जो सोनम कहती गई चुपचाप करता गया विशाल ने किया पहला वार, फिर लाश खाई में फेंकी… पति राजा की मौत का जश्न मनाती रही सोनम!  इंदौर  राजा रघुवंशी की शादी को चंद दिन ही हुए थे. प्यार में भरोसा था, अपनापन था, लेकिन एक अजीब सी दूरी भी थी. जो उसकी पत्नी सोनम ने खुद बनाई थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोनम ने शादी के बाद राजा से साफ कह दिया था कि वह तब तक उसके पास नहीं आएगी जब तक वे दोनों कामाख्या देवी के दर्शन नहीं कर लेते. सोनम ने तो शादी के बाद राजा को छूने तक नहीं दिया था. राजा अपनी पत्नी की हर बात को आस्था और सम्मान का विषय समझता रहा, उसकी इस बात को भी मान गया.  मायके से बनी हत्या की साजिश राजा की हत्या की पूरी योजना सोनम ने अपने मायके से रहते हुए बनाई थी. 15 मई को वह मायके चली गई और वहीं रहकर गुवाहाटी की टिकट बुक करवाई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोनम फोन पर अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ लगातार संपर्क में थी. सोनम और राज ने मिलकर प्लान तैयार किया कि राजा को मेघालय ले जाकर रास्ते से हटा दिया जाएगा. राजा को नहीं मार पाए तो मैं खुद धक्का दे दूंगी क्राइम ब्रांच को मिले इनपुट्स के मुताबिक, सोनम ने राज कुशवाहा से कहा था कि अगर उसके दोस्त विशाल, आनंद और आकाश राजा को नहीं मार पाए तो वह खुद ही फोटो खींचने के बहाने राजा को खाई में धक्का दे देगी. इतना ही नहीं, अगर साजिश खुल जाती है तो वे नेपाल भागने की भी योजना बना चुके थे. कामाख्या से मेघालय की ओर सोनम ने राजा को कामाख्या मंदिर ले जाने के बाद मेघालय घूमने का सुझाव दिया. राजा को पहाड़ पसंद नहीं थे, लेकिन पत्नी के कहने पर वह चल पड़ा. सोनम ने न सिर्फ गंतव्य तय किया, बल्कि ट्रैवल प्लान से लेकर रहने की व्यवस्था तक खुद की. इंदौर क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, सोनम ने राजा की हत्या की पूरी योजना शादी के बाद के एक हफ्ते में तैयार कर ली थी. जब मेघालय पुलिस ने इंदौर में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ शुरू की तो इंदौर पुलिस ने कुछ इनपुट साझा करते हुए दावा किया कि सोनम ने पहले ही ठान लिया था कि उसे राजा को हर हाल में मारना है. वारदात का दिन 23 मई को राजा और सोनम मेघालय के नोंगरीहाट गांव के पास पहुंचे. सोनम के कहने पर राजा को सुनसान रास्ते पर ले जाया गया. वहीं पर तीनों आरोपियों  विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने उस पर हमला किया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, राजा के सिर पर दो धारदार हथियार से वार किए गए एक आगे से और एक पीछे से. हत्या के बाद सोनम हुई गायब हत्या के बाद सोनम लापता हो गई. लेकिन अब खुलासा हुआ है कि 25 से 27 मई तक वह इंदौर के देवास नाका इलाके में एक किराए के फ्लैट में छिपी रही. मंगलवार को पुलिस ने यह भी बताया कि हत्याकांड में शामिल आरोपी विशाल के घर से उसके खून लगे कपड़े बरामद किए गए हैं, जिन्हें अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. सोनम का घातक इश्क, साजिश को प्यार समझता रहा राजा…  सोनम और राजा की नई-नई शादी हुई थी. रिश्ते में नयापन था, भरोसा था, और था ऐसा प्यार जिसमें ना शब्द की कोई जगह नहीं थी. पत्नी जो-जो कहती गई, वही राजा की दुनिया बनता गया. राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम की हर बात बिना किसी सवाल के मानता चला गया. और शायद यही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा या कहें अंतिम फैसला साबित हुआ. हनीमून पर कब जाना है, कौन-सा रास्ता चुनना है, क्या पहनना है, कितने पैसे साथ ले जाने हैं हर फैसला सोनम लेती रही और राजा सिर झुकाकर मंजूरी देता रहा. लेकिन राजा को क्या पता था कि उसकी पत्नी क्यों हर बात में उससे हां करवा रही है.सोनम तो एक ऐसी साजिश रच रही थी, जो उसे सीधा मौत की घाटी तक ले जाने वाली थी.  रिश्ता जो परिचय पुस्तिका से शुरू हुआ राजा रघुवंशी इंदौर का ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर का था. उसके परिवार में माता-पिता और दो भाई और भाभी हैं. सोनम का परिवार इंदौर के ही कुशवाह नगर में रहता है, जहां पिता का प्लायवुड का कारोबार है. राजा और सोनम का रिश्ता रघुवंशी समाज की परिचय पुस्तिका में दर्ज विवरणों से जुड़ा था. फिर दोनों परिवारों में संपर्क हुआ और रिश्ता तय हुआ. राजा  के घर वाले बकायदा सोनम के घर जाकर उसे पसंद कर आए थे. इसके बाद शादी तय हुई.  राजा की मां उमा रघुवंशी बताती हैं कि हमने अपनी बहू को बहुत स्नेह से स्वीकार किया था. उनकी मां से बातें होती रहती थीं, सब ठीक लग रहा था. शादी, और 4 दिन बाद विदाई 11 मई 2025 को राजा और सोनम की शादी पूरे समाज की उपस्थिति में धूमधाम से हुई. उसी रात सोनम अपने ससुराल पहुंच गई. लेकिन मात्र चार दिन बाद वह अपने मायके लौट गई. उस वक्त जेठ का महीना चल रहा था, इसलिए पगफेरे की रस्म भी नहीं हुई थी. उमा रघुवंशी कहती हैं, हमने कहा था कि बहू को बुला लें, लेकिन उनकी मां ने कहा – जून में बुलाएंगे. सोनम की कौन कौन सी बात मानता गया राजा  राजा का मन हनीमून पर जाने का नहीं था. परिवार ने बताया कि पगफेरे के बाद जून में जाने की योजना थी. लेकिन सोनम ने फोन पर जिद की शिलांग चलते हैं. राजा मान गया. उसने किसी से कुछ नहीं कहा. यह पहला संकेत था कि सोनम की बात राजा टाल नहीं पाता था. परिवार वालों के मुताबिक, राजा को पहाड़ पसंद नहीं थे, लेकिन सोनम ने उसे शिलांग की हरियाली और वादियों का सपना दिखाया. वह तैयार हो गया. इसके बाद हनीमून ट्रिप का प्लान बना, और 20 मई को दोनों मेघालय के लिए रवाना हो गए. … Read more

कहां ठहर गया मानसून? मौसम विभाग ने जारी किया नया अपडेट, ग्वालियर समेत 15 जिलों में लू का अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में जून में सूरज के तीखे तेवर है। पिछले 3 दिन से नौतपा जैसी गर्मी है। मंगलवार को 28 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार रहा, जबकि नौगांव में सबसे ज्यादा 46.1 डिग्री पहुंच गया। बुधवार को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, नीमच और मंदसौर में हीट वेव यानी, लू चलने की संभावना है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई शहरों में तेज गर्मी रहेगी। दूसरी ओर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर और शहडोल में आंधी-बारिश होने का अलर्ट है। नौगांव में पारा 46.1 डिग्री पहुंचा प्रदेश में मंगलवार को छतरपुर जिले का नौगांव में पारा सबसे ज्यादा 46.1 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। वहीं, नर्मदापुरम, गुना, खजुराहो, टीकमगढ़ और सागर में तापमान 45 डिग्री या इससे अधिक रहा। मंगलवार को प्रदेश के 28 शहरों में तापमान 40 डिग्री या इससे ज्यादा रहा। बड़े 5 शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 43.4 डिग्री, उज्जैन में 43 डिग्री, जबलपुर में 42.5 डिग्री और इंदौर में 40.4 डिग्री रहा। नौगांव के बाद नर्मदापुरम में पारा सबसे ज्यादा 45.9 डिग्री रहा। गुना-खजुराहो में 45.4 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सागर में 45 डिग्री दर्ज किया गया। शिवपुरी में 44 डिग्री रहा। दमोह, शाजापुर, सतना और रतलाम में 43 डिग्री के पार तापमान पहुंच गया। बाकी शहरों में पारा 40 डिग्री से ज्यादा ही रहा। सिर्फ पचमढ़ी में सबसे कम 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक दिन के ब्रेक के बाद फिर बारिश इस बार भीषण गर्मी में भी आंधी-बारिश वाला मौसम रहा। प्रदेश में 26 अप्रैल से आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया था, जो 7 जून को भी जारी रहा। यानी, लगातार 43 दिन से प्रदेश के किसी न किसी जिले में पानी गिरा या आंधी चली। 44वें दिन रविवार को आंधी-बारिश का दौर थमा रहा, लेकिन अगले ही दिन इंदौर, खरगोन, बालाघाट और डिंडौरी में हल्की बारिश हुई। मंगलवार को भी बालाघाट, डिंडौरी, इंदौर, उज्जैन, शहडोल, अनूपपुर, मंडला में मौसम बदला। यहां गरज-चमक और बूंदाबांदी हुई। अगले 2 दिन लू का अलर्ट मौसम विभाग ने अगले 2 दिन यानी, 11 और 12 जून को ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग के जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। 13 जून से फिर से बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। हालांकि, जिन जिलों में बारिश नहीं होगी, वहां गर्मी का असर बना रहेगा। मानसून की एंट्री 15 जून के बाद पिछले 13 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा है। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री लेट हो रही है। अगले 3 से 4 दिन तक मानसून के आगे बढ़ने की संभावना कम ही है। यानी, मानसून 15 जून तक प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मध्यप्रदेश में गर्मी अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। नौतपा बीतने के एक हफ्ते बाद भीषण गर्मी ने दस्तक दी है। इतनी गर्मी तो 25 मई से 3 जून तक चले नौतपा में भी नहीं हुई। राजधानी भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, छतरपुर जैसे कई जिलों में सूरज ने तीखे तेवर दिखाए हैं। प्रदेश में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। मंगलवार को छतरपुर जिले का नौगांव में अधिकतम तापमान 46.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। ये जिले रहे सबसे गर्म नौगांव के बाद नर्मदापुरम में पारा सबसे ज्यादा 45.9 डिग्री रहा। नर्मदापुरम, गुना, खजुराहो, टीकमगढ़ और सागर में तापमान 45 डिग्री या इससे अधिक रहा। इस सीजन में ऐसा पहली बार हुआ है, जबकि तापमान एक साथ इतने शहरों में रिकॉर्ड हुआ हो। प्रदेश के 28 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक दर्ज हुआ। MP Weather: किस जिले में कितना रहा तापमान प्रमुख जिलों का तापमान देखें तो ग्वालियर में 44.6 डिग्री सेल्सियस, भोपाल में 43.4 डिग्री, उज्जैन में 43 डिग्री, जबलपुर में 42.5 डिग्री, इंदौर में 40.4, खजुराहो—गुना में 45.4 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सागर में 45 डिग्री, शिवपुरी में 44 डिग्री, दमोह, शाजापुर, सतना और रतलाम में 43 डिग्री के पार तापमान पहुंच गया। बाकी शहरों में पारा 40 डिग्री से ज्यादा ही रहा। हिल स्टेशन पचमढ़ी में सबसे कम 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लू की चेतावनी मौसम विशेषज्ञों ने बुधवार और गुरुवार को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। हालांकि 12 जून से बारिश होने का अनुमान भी जताया गया है। इसलिए बढ़ी गर्मी दरअसल, पिछले 12 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में थम गया है। मानसून जितनी तेजी से आया, उसी रफ्तार से अटक भी गया। इस कारण मध्यप्रदेश में पहुंचने में अभी देर दिख रही है। इसके 15 जून को प्रदेश में प्रवेश करने का अनुमान है। आंधी तूफान से कंटेनर पुल से गिरा मौसम का एक अलग रंग धार जिले में दिखाई दिया। जहां आंधी तूफान के बीच एक अजीब हादसा हो गया। खलघाट में दोपहर अचानक आए तेज हवा-आंधी और तूफान के कारण एक मारुति गाड़ियों से भरा कंटेनर संजय सेतु पुल से असंतुलित होकर नीचे नर्मदा नदी में जा गिरा। तेज रफ्तार हवा के झोंकों के कारण कंटेनर गिर गया। इस साल मई में टूटे रिकॉर्ड, गर्मी की बजाय आंधी-बारिश पूरे मई महीने में आंधी, बारिश और ओले वाला मौसम रहा। एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब प्रदेश के किसी न किसी जिले में आंधी-बारिश न हुई हो। एमपी में ऐसा पहली बार हुआ। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत कुल 53 जिले भीग गए। सिर्फ निवाड़ी ही ऐसा जिला रहा, जहां बूंदाबांदी तो हुई, लेकिन दर्ज नहीं हो सकी। दूसरी ओर, मई महीने में बारिश के कई रिकॉर्ड भी टूटे। इंदौर में 139 साल में सबसे ज्यादा 4.6 इंच पानी गिरा। वहीं, उज्जैन में सबसे ज्यादा बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना। इससे पहले इंदौर में साल 1886 के मई महीने में 107.7 मिमी यानी, 4.2 इंच पानी गिरा था, जबकि इस बार 114.8 मिमी यानी, 4.6 इंच पानी गिर गया है। इस तरह 139 साल में इंदौर का रिकॉर्ड टूट गया है। उज्जैन में मई की बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना है। इस बार 111.8 मिमी यानी, 4.3 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। साल 2021 में कुल मासिक बारिश 65 … Read more

न हनीमून की फोटो, न वीडियो कॉल… सास की मांग को बार-बार ठुकरा रही थी वेबफ़ा सोनम

इंदौर मेघालय में हनीमून के दौरान इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी की बिहार में एंट्री सोमवार को रात करीब 12 बजे बक्सर से हुई। बक्सर के आदर्श नगर थाने में मेघालय पुलिस टीम आधे घंटे तक रुकी। सिक्योरिटी को लेकर अफसरों से बात हुई। फिर वहां से मेघालय पुलिस की गाड़ी को बिहार पुलिस ने एस्कॉर्ट करना शुरू किया। इसके बाद पटना एयरपोर्ट तक एस्कॉर्ट मिलती रही। अहले सुबह करीब तीन-साढ़े तीन बजे सोनम रघुवंशी को पटना के फुलवारी शरीफ थाने में लाया गया। फिर यहां से कोलकाता और फिर शिलॉन्ग लेकर मेघालय पुलिस पहुंचेगी। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। ये पूरी घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें प्यार, शादी, हनीमून और फिर एक खौफनाक साजिश शामिल है। गाजीपुर से पटना: रात भर जागती रही सोनम 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार सोनम रघुवंशी को मेघालय पुलिस की पांच सदस्यीय टीम सड़क मार्ग से पटना लेकर पहुंची। बताया जा रहा है कि गाजीपुर से रात में शुरू हुई ये यात्रा सोनम के लिए तनाव भरी रही। बक्सर के आदर्श नगर थाने में लगभग आधे घंटे के ठहराव के दौरान भी सोनम ने न तो कुछ खाया और न ही किसी से बात की। वो पूरी रात चुपचाप जागती रही, जैसा कि ड्राइवर ज्ञानंजय कुमार ने मीडिया को बताया। सोनम ने सिरदर्द की शिकायत की, लेकिन भोजन से इनकार कर दिया और लगातार पानी मांगती रही। पटना में भोजन और हवाई अड्डे तक एस्कॉर्ट सुबह करीब तीन-साढ़े तीन बजे सोनम को पटना के फुलवारी शरीफ पुलिस थाने लाया गया, जो हवाई अड्डे के पास स्थित है। यहां उसे भोजन कराया गया और थोड़ी देर आराम करने का मौका मिला। इस दौरान सोनम रघुवंशी टेबल पर माथा रखकर कुछ देर के लिए सो गई। ये सबकुछ बिहार पुलिस और मेघालय पुलिस की संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था में हुई। बक्सर के बाद मेघालय पुलिस वाहनों से अलग हो गई, जबकि बिहार पुलिस ने एस्कॉर्ट किया। ये सुनिश्चित किया गया कि सोनम कड़ी निगरानी में रहे। गुवाहाटी होते हुए शिलॉन्ग के लिए उड़ान फुलवारी शरीफ थाने से सुबह करीब 11:30 बजे सोनम को पटना हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया। मेघालय पुलिस की टीम उसे 12:40 बजे की फ्लाइट से गुवाहाटी होते हुए शिलॉन्ग ले जाना चाह रही थी। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोनम का टिकट अभी तक कन्फर्म नहीं था और समय-सारणी में बदलाव की संभावना बनी हुई थी। यात्रा के दौरान सोनम की निगरानी में मेघालय से बिहार पुलिस तक संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था रही, और गाजीपुर से बक्सर सीमा तक यूपी पुलिस एस्कॉर्ट में थी। राजा की हत्या के बाद सोनम ने इंदौर जाकर राज के साथ बिताया था वक्त इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्याकांड में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि सोनम ने अपने सामने ही राजा की हत्या कराई थी। सोनम राज को फोटो शूट के बहाने पहाड़ी पर ले गई जहां सुपारी किलर्स ने राजा को मौत के घाट उतारकर खाई में फेंक दिया गया। यह भी पता चला है कि वारदात वाली जगह पर खुद सोनम भी मौजूद थी और उसने आरोपियों से कहा- इसे मार डालो। इस बीच शिलॉन्ग के एसपी ने बताया है कि राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर भी गई थी। शिलॉन्ग के एसपी विवेक श्याइम ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि राजा हत्याकांड को अंजाम देने वालों को दबोचने के लिए पूरे ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन हनीमून’ नाम दिया था, जिसमें 120 पुलिसकर्मी शामिल थे। उन्होंने बताया कि 3 बड़ी टीमों को इस काम में लगाया गया था। उन्होंने बताया कि 3-4 दिन की तहकीकात के बाद ही उन्हें पता चल गया था कि इस पूरे कांड में सोनम शामिल है। सभी तथ्यों को वेरिफाई करने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की गई। हत्या के बाद इंदौर गई थी सोनम: SP एसपी ने बताया कि राजा की हत्या के बाद सोनम की आरोपियों के साथ होम स्टे के पास मुलाकात भी हुई थी, जोकि घटना स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मेघालय पुलिस के अधिकारियों के हवाले से बताया कि राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर भी गई थी। वह सिलीगुड़ी के रास्ते ट्रेन से इंदौर गई थी। वह वहां एक किराये के कमरे में रही। सोनम की इंदौर में राज से भी मुलाकात हुई थी। फिर वह एक किराये की गाड़ी से इंदौर से गाजीपुर गई थी जहां उसने सरेंडर किया। मेघालय पुलिस से सोनम के इस दावे का भी खंडन हो गया है जिसमें उसने कहा था कि उसे अपहरण कर लिया गया था और आरोपी गाजीपुर में उसे छोड़कर फरार हो गए। सोनम ने गाजीपुर पुलिस के साथ पूछताछ में यह भी कहा कि आरोपियों ने गहनों की लूट के लिए राजा की हत्या की थी। गौरतलब है कि 11 मई को शादी के बाद राजा और सोनम हनीमून के लिए शिलॉन्ग गए थे। यहां दोनों अचानक लापता हो गए। बाद में पता चला कि राजा की हत्या कर दी गई है। हत्या के आरोप में राजा की पत्नी सोनम और उसके कथित प्रेमी राज समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ट्रांजिट रिमांड और विस्तृत पूछताछ की तैयारी मेघालय पुलिस को सोनम की 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली है। इस दौरान पुलिस सोनम से गहन पूछताछ करेगी और पति राजा की हत्या की साजिश के हर पहलू को उजागर करने की कोशिश करेगी। इसी दौरान, मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपी- राज कुशवाहा, आकाश राजपूत और विशाल सिंह चौहान को भी शिलॉन्ग लाकर उनसे पूछताछ की तैयारी है। पुलिस हत्या स्थल, हथियारों की आपूर्ति और पूरी साजिश के नेटवर्क जैसी जानकारियों को जुटाने का प्रयास करेगी। राजा के भाई का आरोप: और भी लोग शामिल राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इस मामले में और भी लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस साजिश में पांच से ज्यादा आरोपी हैं और सोनम ने खुद को केवल मोहरा बना कर रखा है। विपिन ने दावा किया है … Read more

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