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ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय: मंत्री पटेल

भोपाल  राज्य मंत्रि परिषद की गत दिवस हुई बैठक में ‘मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना’ के अंतर्गत 30 हजार 900 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण के लिए 21 हजार 630 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल सुदूर ग्रामीण अंचलों को शहरों से जोड़ेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक प्रगति का सशक्त आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण बस्तियों की मूलभूत सुविधाओं की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो विकास को अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के संकल्प को साकार करेगी। राज्य सरकार ने सुदूर ग्रामीण बसाहटों जैसे मजरा, टोला, धोनी, पुरा आदि को हर मौसम में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। योजना के अंतर्गत कुल 30 हजार 900 किलोमीटर लंबाई के मार्गों का निर्माण किया जाएगा। योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक संचालित होगा। इस व्यापक योजना का कुल आकार 21 हजार 630 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। यह योजना पूर्णतः राज्य मद से क्रियान्वित की जाएगी। योजना से संबंधित निर्णय लेने के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति को अधिकृत किया गया है। ग्राम पंचायतों में अभी भी कई बसाहटें ऐसी हैं, जिनमें मुख्य सड़क मार्ग से ग्राम पंचायतों में पहुँचने के लिए सड़क उपलब्ध नहीं है। ग्रामवासियों को सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” वित्तीय वर्ष 2025- 26 के बजट में प्रस्तावित की गई थी। यह महत्वाकांक्षी योजना प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों को मुख्य सड़कों से जोड़े जाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।  

ऊर्जा मंत्री ने बिजली संबंधी शिकायतों के निपटारे में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली संबंधी शिकायतों के निपटारे पर हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रबंध संचालक से लेकर कार्यपालन स्तर तक के सभी अधिकारी रात्रि के समय क्षेत्रों का भ्रमण कर बिजली की वास्तविक स्थिति का आंकलन करें। साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट मेरे कार्यालय में प्रस्तुत करें। श्री तोमर ने बुधवार को विद्युत आपूर्ति में आ रहे अवरोध एवं कॉल-सेंटर के माध्यम से प्राप्त हो रही शिकायतों के निराकरण की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिये। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिये टीम की संख्या बढ़ायें। उन्होंने कहा कि विद्युत अवरोध एवं उसके निराकरण से संबंधित जानकारी जन-प्रतिनिधियों, स्थानीय मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करें। मैदानी स्तर के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं के फोन अटेंड करना सुनिश्चित हो। विद्युत कनेक्शन में भार वृद्धि के संबंध में जागरूक किया जाये। ऊर्जा मंत्री के कार्यालय में बना कॉल-सेंटर ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि वर्षाकाल में बिजली की शिकायतों के मद्देनजर मेरे कार्यालय में भी आगामी 3 माह के लिये एक अस्थाई कॉल-सेंटर स्थापित किया गया है। कॉल-सेंटर का नम्बर 0755-4344299 है। उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि इस नम्बर पर सम्पर्क करने के पूर्व बिजली कम्पनी के मुख्य कॉल-सेंटर 1912 पर शिकायत जरूर दर्ज करायें और उसका क्रमांक साझा करें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी श्री अवनीश लवानिया, सभी विद्युत कम्पनियों के एमडी, क्षेत्रीय मुख्य अभियंता और मुख्य महाप्रबंधक शामिल हुए। 

नियम विरुद्ध स्वीकृति जारी करने पर सहायक यंत्री लालजी चौहान निलंबित

भोपाल  आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास श्री संकेत भोंडवे ने नगरपालिक निगम भोपाल में पदस्थ सहायक यंत्री लालजी चौहान को नियम विरुद्ध भवन निर्माण की स्वीकृति जारी करने के आरोप में निलंबित किया है। इस संबंध में अपर आयुक्त श्री कैलाश वानखेड़े ने आज आदेश जारी किये हैं। आयुक्त नगर निगम भोपाल द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार लालजी चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान नगर निवेशक के रूप में सौंपे गये दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं अनियमितता बरती। प्रस्ताव में बताया गया कि 31 मार्च, 2025 से 2 मई, 2025 तक नगर निवेशक श्री अनूप गोयल के अर्जित अवकाश अवधि में लालजी चौहान को उनका कार्यभार सौंपा गया था। इस अवधि में लालजी चौहान ने नियम विरुद्ध स्वीकृतियाँ जारी कीं।  

मध्यप्रदेश में बनेंगे कामधेनु निवास, निराश्रित गौवंश के आश्रय का होगा स्थाई समाधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश की आश्रय समस्या के निराकरण के लिए स्थाई समाधान निकाला गया है। अब प्रदेश में कामधेनु निवास (स्वावलंबी गौशाला) स्थापित होगी, जहां बड़ी संख्या में गौवंश की देखभाल की जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा “मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) स्थापना की नीति 2025” को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। इस नीति के तहत प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाएं स्थापित की जाएगी , जिनमें न्यूनतम 5000 गौवंश का पालन अनिवार्य होगा। इनमें से 30 प्रतिशत गौवंश उन्नत दुधारू नस्ल का हो सकता है। सरकार द्वारा अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि के उपयोग के अधिकार गौशाला संचालकों को दिए जाएंगे। इन गौशालाओं में 5000 से अधिक गौवंश होने पर प्रति 1000 गौवंश पर 25 एकड़ अतिरिक्त शासकीय भूमि दी जा सकेगी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग लैंड बैंक तैयार करेगा। भूमि पशुपालन एवं डेयरी विभाग के स्वामित्व में रहेगी तथा विभाग की तरफ से मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड और गोपालक संस्था के मध्य उपयोग अनुबंध निष्पादित किया जाएगा। भूमि जैसी है वैसी के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी। भूमि पर विकास कार्य गोपालक संस्था को करवाना होगा। कामधेनु निवास   की स्थापना के लिए कोई भी पंजीकृत संस्था जैसे कि फर्म, ट्रस्ट, समिति, कंपनी अथवा उनके संघ इस योजना का लाभ ले सकेंगे। संघ अधिकतम पांच संस्थाओं के लिए मान्य होगा, इससे अधिक संख्या वाले संघ को मान्यता नहीं होगी।  इन गौशालाओं में गोपालन के साथ ही पंचगव्य निर्माण, बायोगैस, जैविक खाद, नस्ल सुधार, दुग्ध प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा, बायोगैस आदि व्यावसायिक गतिविधियां की जा सकेंगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2024-25 के अंतर्गत 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिये वर्किंग वुमेन हॉस्टल की सौगात दी है। भारत सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंट ऑफ स्टेटस फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024-25 के अंतर्गत 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि योजना अंतर्गत महिला श्रम बल भागीदारी दर (फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट) को बढ़ाने और महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में 8 वर्किंग वूमेन हॉस्टल की स्वीकृति प्रदान की गई है जिसमें से महिला बाल विकास विभाग द्वारा 4 वर्किंग वूमेन हॉस्टल और शेष 4 हॉस्टल औद्योगिक नीति निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा बनाये जायेंगे। 289 करोड़ रूपये की स्वीकृति हुई जारी मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि महिला बाल विकास विभाग द्वारा देवास, नर्मदापुरम और सिंगरौली में 100 सीटर तथा झाबुआ में 50 सीटर हॉस्टल बनाये जायेंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा उज्जैन में 1554 सीटर, धार में 1776, रायसेन 776 और भिण्ड में 666 सीटर हॉस्टल का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि वर्किंग वूमेन हॉस्टल के निर्माण के लिये 289.72 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 40.59 करोड़ की राशि महिला बाल विकास विभाग व्यय करेगी। वर्किंग वूमेन हॉस्टल का स्वामित्व राज्य सरकार के पास रहेगा और रख-रखाव का काम पीपीपी मोड पर किया जायेगा। हॉस्टल में होंगी आधुनिक सुविधाएँ वर्किंग वूमेन हॉस्टल में आधुनिक सुविधाओं सहित डे केयर सेंटर, जिम, इंडोर स्पोर्टस, लायब्रेरी, वाय-फाई, पर्याप्त पार्किंग, फूड कोर्ट और मनोरंजन गतिविधियां आदि उपलब्ध होंगी। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराये जा रहे हैं, जिससे कामकाजी महिलाओं का जीवन आसान होगा। विशेष रूप से जनजातीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों में महिला श्रमिकों की आवास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह योजना क्रांतिकारी सिद्ध होगी।  

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता को घर-घर तक पहुंचाने की संकल्पना हो रही है पूरी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा का वर्चुअल शुभारंभ किया और क्षेत्रवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकार से समृद्धि की संकल्पना को साकार किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से प्रदेश के घर-घर को सहकारिता से जोड़ने का कार्य हमारी सरकार कर रही है। श्री साय ने कहा कि नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में हमने दुधारू पशु वितरण का शुभारंभ किया है, जिसके अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के 6 जिलों का चयन कर हितग्राहियों को दो-दो दुधारू गाय वितरित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के किसानों और ग्रामीण जनों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की एक बड़ी पहल हमने इस वर्ष पंचायती राज दिवस से प्रारंभ की है। प्रदेश के 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोले गए हैं, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत भवन में ही बैंकिंग सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि अगले पंचायती राज दिवस तक यह सुविधा प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध हो जाएगी, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान सहकारिता के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह ने किसानों को अल्पकालिक ऋण के लिए भारी-भरकम ब्याज दर से मुक्ति दिलाई और ब्याज दरों को लगातार कम कर किसानों को राहत दी। अब किसानों को कृषि कार्यों के लिए बिना किसी ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा खुलने पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि अब किसानों को बैंकिंग सुविधा के लिए 50-60 किलोमीटर दूर पत्थलगांव नहीं जाना पड़ेगा। इस पुनीत पहल के लिए उन्होंने सहकारिता विभाग को साधुवाद दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता का बीजारोपण करने वाले महान विभूतियों को पुण्य स्मरण करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में श्री वामनराव लाखे और ठाकुर प्यारेलाल जैसे पुरोधाओं ने सहकारिता की नींव रखी, जिसका विकसित स्वरूप आज हम सभी देख रहे हैं। यह वर्ष सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष है, और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रयासों से निश्चित रूप से इस क्षेत्र में चमत्कारिक परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के अथक प्रयासों से प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। पूरे देश में वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने प्रति एकड़ 21 क्विंटल और 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता को राज्य के अंतिम गांव तक पहुंचाने का कार्य किया है। अपेक्स बैंक प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपए के टर्नओवर के साथ सबसे शक्तिशाली संगठन है और इसके माध्यम से अब तक 7 हजार 5 सौ करोड़ रुपए का ऋण किसानों को उपलब्ध कराया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से देश के हर एक नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और इसी का परिणाम है कि आज बिना किसी बिचौलिए के शत-प्रतिशत राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं और शत-प्रतिशत किसानों को सहकारिता और अपेक्स बैंक से जोड़ने का काम शीघ्र पूरा करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सत्य साईं हॉस्पिटल को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि सौंपी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में कार्यक्रम में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सीएसआर गतिविधियों के तहत राजधानी रायपुर के सत्य साईं हृदय चिकित्सालय को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। पदभार ग्रहण समारोह में सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, विधायक श्री राजेश मूणत, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री सुब्रत साहू और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पुस्तक केवल पठन नहीं, सोच की नींव होती है : मंत्री टेटवाल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री गौतम टेटवाल ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर जनपद मुख्यालय में विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया। पुस्तक को बच्चों के हाथों तक पहुंचाने की इस पहल को उन्होंने शिक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक, प्रभावी और दूरगामी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की यात्रा तब सार्थक होती है, जब हर विद्यार्थी को समय पर समुचित संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले। “पुस्तक केवल पढ़ने की वस्तु नहीं होती, यह सोचने की आदत, जीवन की दृष्टि और आत्मविश्वास का आधार बनाती है। हम बच्चों को शुरुआती दौर में यह सुविधा दे पाएं, तो उनका भविष्य सशक्त होगा और समाज भी अधिक सजग बनेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि शिक्षा को सुलभ और गरिमामयी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, और इस प्रकार के आयोजन इसी दिशा में सार्थक कदम हैं। जनपद शिक्षा केंद्र एवं समग्र शिक्षा अभियान सारंगपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पुस्तक मेले का मुख्य उद्देश्य अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों, गणवेश, स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री को किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं स्कूल प्रतिनिधि शामिल हुए। बच्चों में किताबें स्वयं चुनने का उत्साह देखा गया, तो वहीं शिक्षकों ने इस पहल को शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने वाला बताया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी पसंद की किताबें खरीदीं और पहली बार शिक्षा को अपनी पसंद के रूप में अपनाने का अनुभव किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इतिहास और सौंदर्य का संगम बन रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी और प्रेरक नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध विरासत को सँजोते हुए देश और दुनिया के एक अनुपम पर्यटन राज्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री की परिकल्पना एक ऐसे मध्य प्रदेश की है जहाँ आधुनिकता और प्राचीनता का सामंजस्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दे। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है, जहाँ धरती से निकलने वाले चमकदार और बेशकीमती रत्नों की तरह ही, यहाँ के रमणीय स्थल भी अपनी आभा बिखेरते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से प्रदेश का हर कोना इतिहास के अलग-अलग कालखंडों को दर्शाता एक विशाल संग्रहालय प्रतीत होता है। मध्यप्रदेश यानि भव्य किले, उत्कृष्ट नक्काशीदार मंदिर, प्राचीन शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण अतीत की जीवंत कहानी कहते हैं। मुख्यमंत्री का प्रयास है कि मध्यप्रदेश न केवल अपनी अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करे, बल्कि उन्हें विश्व पटल पर एक अद्वितीय पहचान दिलाए, जिससे हर पर्यटक यहाँ आकर अपनी आत्मा को सुकून और ज्ञान से परिपूर्ण कर पाए। मध्यप्रदेश जहाँ हर 100 किलोमीटर से भी कम की यात्रा में पुरातात्विक चमत्कारों और प्राचीन इमारतों के बीच आप अपने आपको पाते हैं। यहाँ का हर स्थान इतिहास के अलग-अलग काल को दर्शाने वाला एक विशाल संग्रहालय जैसा है। यहाँ मौजूद भव्य किले, नक्काशीदार मंदिर, ऐतिहासिक शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण इतिहास की कथा कहते हैं। “यूनेस्को की विश्व धरोहर” मध्यप्रदेश के खजुराहो की अलौकिक मूर्तियाँ, सांची का शांति स्तूप और भीमबेटका की ऐतिहासिक कलाकृतियाँ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थायी सूची में सम्मिलित हैं। इन धरोहरों के अतिरिक्त 18 अन्य पर्यटन स्थल भी यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल होने के साथ अब यात्रियों को आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। मध्यप्रदेश अपने मूल मंत्र “अतिथि देवो भव” को गर्व से अपनाते हुए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश महिलाओं के अनुकूल यात्रा गंतव्य के रूप में भी विशेष स्थान हासिल कर चुका है, जो एकल और समूह यात्रियों के लिए समान रूप से आरामदायक और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ आने वाले यात्री प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की उन कहानियों के साक्षी बनेंगे, जो हजारों वर्षों पुराने इतिहास को बयां करती हैं और जो उनको दुनिया की हलचल से दूर सुकून के पलों का आनंद देने के लिए पर्याप्त हैं। अतीत की कहानियों से रूबरू कराता ग्वालियर कल्पना कीजिए एक ऐसे भव्य शहर की, जो देश के बाकी हिस्सों से आवागमन के लिए अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जिसका राजसी किला सुनहरी धूप में किसी मोती की तरह चमकता है। यहाँ का हर पत्थर एक कहानी सुनाता है, हर गली सदियों पहले के राजाओं, कवियों और यात्रियों के पदचिह्नों की गूँज से भरी हुई है। यह वही शहर है, जो गणित में शून्य के पहले लिखित प्रमाण का संरक्षक भी है। यह शहर है ग्वालियर, जो अपने शाही गलियारों में आपका स्वागत करने के लिए आतुर है। मांडू – एक बीते युग के किस्से प्रदेश में मौजूद एक अन्य ऐतिहासिक शहर, जहाँ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के भव्य स्मारक और नाजुक महल, शाही प्रेम कहानियों, चाँदनी रातों के गीतों और प्रेम-स्नेह के उन प्रेरणाओं को संजोए हुए हैं, जिन्होंने कवियों और सपने देखने वालों को प्रेरित किया। यही वह स्थान है, जहाँ ताजमहल निर्माण की कल्पना ने जन्म लिया। मनमोहक मांडू भी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। चंदेरी – छिपे रहस्यों को उजागर करते स्थल चंदेरी एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जहाँ ज़मीन के नीचे भी चमत्कार छिपे हुए हैं। यहाँ की प्राचीन बावड़ियाँ, जिनकी अद्भुत समरूपता और भूलभुलैया जैसी सीढ़ियाँ पर्यटकों को एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाती हैं। यहां की बावड़ियां केवल कहानी ही नहीं सुनाती लोककथा भी कहती है जिनके अनुसार जब तक महासागरों में पानी रहेगा, तब तक ये बावड़ियाँ नहीं सूखेंगी। चंदेरी के किले और बावड़ियाँ पर्यटकों के इंतज़ार में हैं। ठंडी फुहारों का आनंद – जबलपुर एक रोमांचक अनुभव के लिए प्रसिद्ध शहर, जहाँ सफेद संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच नाव की सवारी करते हुए पर्यटक सूरज की रोशनी में चमकते पानी और झरनों की गूँजती ध्वनि का अनुभव कर सकते हैं। यहाँ नर्मदा नदी में चप्पुओं की लयबद्ध आवाज़ और ठंडी फुहारों का आनंद लेने के लिए पर्यटकों के स्वागत के लिए जबलपुर तैयार है।  धामनार – अखंड गुफाओं की कहानियां एक ऐसा स्थान, जहाँ पत्थर की उत्कृष्ट कारीगरी और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ 5वीं-7वीं शताब्दी की कलात्मक और आध्यात्मिक उत्कृष्टता का प्रमाण स्वरूप पहाड़ी में उकेरी गई 51 से अधिक अखंड गुफाएँ मौजूद हैं। गुफाओं के भव्य दरवाजे, ऊँचे पत्थर के स्तंभ और जटिल मूर्तिकला शांति की अनुभूति कराते हैं। धामनार पर्यटकों को बीते युग की यात्रा पर ले जाने के लिए रोज ब रोज तैयार है। बुरहानपुर – एक अद्भुत परंपरा का स्वाद मध्य प्रदेश की यात्रा यहाँ के अद्वितीय स्वादों के अनुभव के बिना अधूरी है! यहाँ की गलियाँ मलाईदार मावा-जलेबी की सुगंध से महकती हैं। यहाँ दाल-चावल की एक साधारण थाली को भी पीली मिर्च के साथ परोसा जाता है और इसके साथ मिलने वाली जंगल के फूलों से बनी तीखी, सुगंधित महुआ चटनी इसका स्वाद और भी अनूठा बना देती है। बुरहानपुर पर्यटकों को ऐसे ही लज़ीज़ व्यंजनों से भरपूर दावत का हर समय अनुभव कराने के लिए तैयार है। मंडला – राजाओं और रानियों की विरासत की दास्तान एक ऐसा शहर, जो चार शताब्दियों तक राजसी रानियों, वीर राजाओं और शक्तिशाली साम्राज्यों का साक्षी रहा है। यहाँ तलवारों की टकराहट और दरबारी फुसफुसाहटें आज भी गलियों में गूँजती सी लगती हैं। 

नगरीय आपदाओं की रोकथाम के लिये नियंत्रण कक्ष

भोपाल आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे के निर्देश पर वर्षा ऋतु में प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में जल-भराव, बाढ़, जर्जर भवनों के गिरने जैसी संभावित आपदाओं से निपटने के लिये भोपाल में राज्य स्तर पर आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। नियंत्रण कक्ष के संचालन एवं समन्वय के लिये एक विशेष दल का गठन किया गया है, जिसमें कार्यपालन यंत्री श्री उपदेश शर्मा, सहायक यंत्री श्री सुनील श्रीवास्तव सहित कुल 8 अधिकारी-कर्मचारी पदस्थ किये गये हैं। यह दल प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों को चिन्हित करने और संबंधित नगरीय निकायों के बीच कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। राज्य स्तरीय आपदा नियंत्रण कक्ष बाढ़ अथवा जल-भराव की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों के विस्थापन, मूलभूत सुविधाओं जैसी उपलब्धता के लिए समन्वय भी सुनिश्चित करेगा। नियंत्रण कक्ष मौसम कार्यालय से समन्वय कर पूर्व सूचना प्राप्त करेगा तथा संभावित रूप से प्रभावित नगरीय निकायों को अलर्ट भी जारी करेगा।  

सीएम यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संबल योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। योजना अन्तर्गत प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 76 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है। योजना में अनुग्रह सहायता अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के लिये 16 हजार रुपये दिये जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है, जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है, जिसे लागू करने का श्रेय प्रदेश की सरकार को है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं, इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, उन्हें 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा हैं।  

खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए तकनीक को खेतों तक पहुंचाना जरूरी – मंत्री टेटवाल

भोपाल राजगढ़ ज़िले के सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बाबड़लया में विकसित कृषि संकल्प अभियान यात्रा में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐसा संकल्प है जिसके माध्यम से हम हर खेत तक तकनीक, प्रशिक्षण और समर्थन पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसान सशक्त नहीं होगा, तब तक देश की प्रगति अधूरी है। सरकार की यह प्राथमिकता है कि आधुनिक तकनीक और योजनाओं की जानकारी सीधे गांव और खेत तक पहुंचे। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसान हैं। खेती को लाभकारी बनाने के लिए नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी हस्तक्षेप समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल खेती को आधुनिक बनाएगा, बल्कि इसे व्यवसाय का रूप देने में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं और पारंपरिक अनुभव के साथ नए प्रयोगों को जोड़कर अपनी उपज और आमदनी दोनों बढ़ाएं। कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किसानों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव तेज़, सटीक और कम लागत वाला होता है। इससे समय की बचत के साथ-साथ कीटनाशकों की खपत भी घटती है। किसानों ने इस तकनीक को लेकर उत्साह दिखाया और कहा कि वे अपने खेतों में इसे ज़रूर आज़माना चाहेंगे। मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण भी इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का सही उपयोग संभव नहीं है। स्वाइल कार्ड के माध्यम से किसान अपनी भूमि की पोषण क्षमता को समझ कर उपयुक्त फसल और उर्वरक का चयन कर सकते हैं। कार्यक्रम में शामिल कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने फसल चक्र, जल संरक्षण, जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों जैसे विषयों पर भी किसानों को प्रशिक्षण दिया। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती योजना और कृषि यंत्र अनुदान योजना की भी जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि इन योजनाओं से न केवल आर्थिक मजबूती मिलती है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से भी सुरक्षा मिलती है। किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह उनके लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रहा। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम मोदी का माना आभार, भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने दी मान्यता

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज विस्तार को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा मान्यता देने पर नागरिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भारत की उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, यह प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सार्वजनिक सेवा और समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का शानदार उदाहरण है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचने और हर नागरिक को सम्मान के साथ मुख्य धारा में शामिल करने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के हर वर्ग के कल्याण और सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी दूरदर्शी सोच के साथ कार्य कर रहे हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए निर्धन-केंद्रित और श्रमिक कल्याण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ- सबका विकास” के विजन से प्रेरित होकर भारत ने समाजिक सुरक्षा कवरेज के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जो वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण विस्तारों में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के आईएलओ स्टेट डेटाबेस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत का सामाजिक सुरक्षा करवरेज 2015 में 19 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो गया है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में भारत अब विश्व में दूसरे स्थान पर है, जो 94 करोड़ से अधिक नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान कर रहा है।

मप्र का पहला रिज़वाँयर फिशरीज़ प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर हलाली में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पीएम मत्स्य संपदा योजना में भोपाल के पास हलाली में बनने वाला मध्यप्रदेश का पहला रिज़वाँयर फिशरीज़ प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर का उ‌द्घाटन 13 जून को इंदौर से होगा। केन्द्रीय मछुआ पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह राष्ट्रीय इनलैंड फिशरीज़ एवं एक्वाकल्चर बैठक में इसका उ‌द्घाटन करेंगे। देश में पीएम मत्स्य संपदा योजना में इस तरह के 17 क्लस्टरों की पहचान केन्द्र सरकार ने की है जो उन क्षेत्रों की मत्स्य पालन की विशेषताओं के आधार पर विकसित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इनलैंड स्टेट में फिशरीज़ से जुड़ी इस तरह की बैठक देश में पहली बार इंदौर में हो रही है। बैठक का उ‌द्देश्य उन इनलैंड राज्यों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं जुड़ती हैं। इस बैठक में सिर्फ उन राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो समुद्र से मत्स्य उत्पादन गतिविधियाँ नही करते हैं। देश के 20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री होंगे शामिल इंदौर में होने वाली इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट में देश के 20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री भाग ले रहे हैं। राष्ट्रीय बैठक में मध्यप्रदेश के मछुआ पालन मंत्री श्री नारायण सिंह पंवार, उत्तर प्रदेश के मछुआ पालन मंत्री श्री संजय कुमार निषाद, बिहार की मछुआ पालन और पशुपालन मंत्री सुश्री रेणु देवी, हरियाणा के पशुपालन, डेरी और मत्स्य पालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, राजस्थान के पशुपालन और मछुआ पालन राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेधम के अलावा अन्य राज्यों के मंत्री भी भाग ले रहे हैं। बैठक में विशेष रूप से केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलाक्ष लिखी और संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा भी उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार देश में मत्स्य उत्पादन में निर्यात को बढ़ावा देने के लिये इंदौर की इस राष्ट्रीय बैठक में भारत के अलग-अलग राज्यों में हो रहे प्रयोगों पर तकनीकी-सत्र भी आयोजित होंगे। इनमें राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ICAR-CIFRI, (CAR-CIFA, NFDB की तरफ से मत्स्य उत्पादन की दिशा में विश्व में अपनाई जा रही नई तकनीकों पर प्रेजेन्टेशन दिये जायेंगे। तकनीकी-सत्रों में जलाशय पट्टा नीति, नदी और तालाबों में आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन और ठंडे पानी में मछली पालन की संभावनाओं जैसे विषय भी शामिल होंगे। केन्द्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह द्वारा लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किये जायेंगे, जिनमें मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा उत्पादक संगठन, मत्स्य पालन स्टार्ट अप्स एवं परंपरागत मछुआरे भी शामिल हैं। मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड और जलीय कृषि बीमा भी उपलब्ध कराया जायेगा। इसका उद्देश्य मछुआरों को बीमा और डिजिटल एक्सेस देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में मछुआरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये जल क्षेत्र के कुशल प्रबंधन पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इसके चलते इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट के अवसर पर इंदौर के ब्रिलियेंट कन्वेंशन सेंटर में एक प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसमें प्रदेश का खूबसूरत एक्वा पार्क एवं मछली पालन की नई तकनीकी-केज कल्चर और आरएएस को प्रदर्शित करते स्टॉल लगाये जायेंगे। प्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य में मछुआरों की आय में वृ‌द्धि हो रही है। साथ ही विज़न 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये मध्यप्रदेश में मछुआ पालन से जुड़ी सभी गतिविधियों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। विशेष तौर पर इनपुट सप्लाई के क्षेत्र में, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, प्रोसेसिंग एवं उत्पादों के निर्यात के लिये भी प्रयास जारी हैं। प्रदेश का सिवनी ज़िला बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट का पुरस्कार पहले भी प्राप्त कर चुका है। साथ ही बालाघाट ज़िले की प्राथमिक मछुआ सहकारी समिति को मछुआरों के सशक्तीकरण की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है।  

विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के सर्वेक्षण पर कार्यशाला हुई

सर्वेक्षण गुणात्मक एवं प्रमाणिकता के साथ करें : उप मुख्यमंत्री देवड़ा सर्वेक्षण 3 माह की तय समय में पूरा करें : राज्यमंत्री श्रीमती गौर विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के सर्वेक्षण पर कार्यशाला हुई भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार विमुक्‍त, घुमन्‍तु एवं अर्द्धघुमन्‍तु जातियों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इन जातियों के कल्याण की गतिविधियों को पावन कार्य बताते हुए कहा कि यह गर्व करने योग्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये इन समुदायों का सर्वेक्षण के माध्यम से डाटा इक्कठा किया जायेगा। इस डाटा के आधार पर कार्यक्रम बनाये जायेगें और राज्य एवं केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से इन समुदायों को लाभांवित किया जायेगा। राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में उप मुख्यमंत्री देवड़ा विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय के सर्वेक्षण-2025 पर बुधवार को हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जन अभियान परिषद और विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के बीच सर्वेक्षण के लिये एमओयू हुआ है। सर्वेक्षण प्रमाणिकता के साथ होगा। उन्होंने कहा कि सर्वे कार्य में लगे कार्य समन्वयक पूरी ईमानदारी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करेंगे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि घुमन्तु समाज के उत्थान का यह पुण्य एवं पवित्र कार्य है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण विभाग के कार्य की सराहना भी की। पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के परिवारों के समेकित विकास के दृष्टिगत सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रदेश के 12 जिलों में सर्वेक्षण का कार्य होगा और यह कार्य तय समय सीमा 3 माह में पूरा किया जायेगा। सितम्बर में सर्वेक्षण का प्रथम चरण पूरा होने के बाद दूसरे चरण में प्रदेश के शेष जिले में सर्वेक्षण होगा। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से इन समुदायों की जानकारी एकत्र की जायेगी और जानकारी के आधार पर इन समुदायों के विकास के लिये कार्यक्रम बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण दल यह सुनिश्चित करें कि सर्वेक्षण से एक भी परिवार नहीं छूटे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सर्वेक्षण के लिये दिये गये प्रस्ताव पर तुरंत सहमति दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। कार्यशाला में क्षेत्रीय प्रमुख घुमन्तु कार्य गौरेलाल ने सर्वेक्षण कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदायों के बीच में पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे है। उन्होंने कार्य के दौरान हुए अनुभवों पर आधारित इन समुदायों की समास्याओं से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाये और कहा कि इन समुदायों के विकास के लिये व्यवस्थित कार्य योजना जरूरी है और सर्वेक्षण का डाटा महत्वपूर्ण होगा। कार्यशाला को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, अध्यक्ष विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास अभिकरण बाबूलाल बंजारा ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में प्रमुख सचिव विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विकास विभाग ई. रमेश कुमार और कार्य पालक निदेशक जन अभियान परिषद डॉ. बकुल लाड ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर जानकारी दी। कार्यशाला में जनअभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड और संचालक विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तुसमुदाय विकास विभाग नीरज वशिष्ठ ने एमओयू का दस्तावेज एक दूसरे को सौंपा। इस अवसर पर विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु समुदाय विभाग द्वारा तैयार किये गये पोस्टर का विमोचन भी किया गया।  

विद्यालयों में भाड़े के शिक्षक रखने वाले पांच शिक्षकों को कलेक्टर संदीप जीआर द्वारा कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया गया

सागर  शासकीय विद्यालयों में भाड़े के शिक्षक रखने वाले पांच शिक्षकों को कलेक्टर संदीप जीआर द्वारा कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया गया है। कलेक्टर के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने यह कार्रवाई की है। कलेक्टर ने बताया कि गत महीनों में  प्रशासन को विभिन्न समाचार माध्यमों से सूचना मिली थी कि जिले के अलग-अलग विद्यालयों में पांच शासकीय शिक्षक अपने स्थान पर भाड़े के शिक्षक रखकर शैक्षणिक कार्य करा रहे हैं। और इन समाचारों को आधार बना कर ऐसे शिक्षकों की जब जांच कराई गई तो यह आरोप सही पाए गए जिसके आधार पर सभी पांच शिक्षकों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई है।  इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि कलेक्टर संदीप जीआर के अनुमोदन के पश्चात् यह कार्रवाई की गई जिसमें सभी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जाकर उन्हें बर्खास्त किया गया है। इन शिक्षकों को किया गया बर्खास्त मामले में अनिल मिश्रा प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा. शा. रहली विकास खण्ड जैसीनगर जिला सागर, जानकी तिवारी प्राथमिक शिक्षक शास.एकी. माध्यमिक शाला बंजरिया विकास खण्ड जैसीनगर, अवतार सिंह ठाकुर प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.शा. कजरई विकास खण्ड खुरई, रूपसिंह चढ़ार प्राथमिक शिक्षक शास. एकी. माध्य. शाला भेलैया विकास खण्ड मालथौन और इन्द्र विक्रम सिंह परमार प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.शा.मंझेरा विकास खण्ड मालथौन पर कार्रवाई की गई है।   इनसे करवाते थे शिक्षण कार्य  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी सेवा समाप्ति आदेश के अनुसार  शिक्षकों की जांच हेतु जांच दल गठित किया गया। जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन का परीक्षण करने पर पाया गया कि शास. प्राथमिक शाला रहली विकास खण्ड जैसीनगर में पदस्थ अनिल मिश्रा प्राथमिक शिक्षक संस्था से अनुपस्थित पाए गए तथा संस्था के छात्रों द्वारा बताया गया कि अनिल मिश्रा सप्ताह में एक बार उपस्थित होते हैं एवं अपने स्थान पर भगवान दास सकवार को शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर रखा गया है। इसी प्रकार शास.एकी. माध्यमिक शाला बंजरिया विकास खण्ड जैसीनगर में पदस्थ जानकी तिवारी ने  गोकल प्रसाद प्रजापति को, शासकीय प्राथमिक शाला कजरई विकास खण्ड खुरई में पदस्थ अवतार सिंह ठाकुर ने  राहुल पंडित को, शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला भेलैया विकास खण्ड मालथौन में पदस्थ रूपसिंह चढ़ार ने  विक्रम सिंह लोधी को एवं शासकीय प्राथमिक शाला मंझेरा विकास खण्ड मालथौन में पदस्थ  इन्द्र विक्रम सिंह परमार ने ममता अहिरवार को अपने स्थान पर विद्यालय में शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर रखा हुआ था। जांच प्रतिवेदन निष्कर्ष अनुसार शासकीय गवाहों, प्रस्तुत अभिलेखों एवं तर्कों के आधार पर यह पाया गया है कि उक्त पांचों शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हैं तथा संस्था में सप्ताह में एक दिन उपस्थित होते हैं एवं अपने स्थान शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर शिक्षकों को रखा है। उक्त शिक्षकों की विभागीय जांच के दौरान भी शासकीय साक्षियों द्वारा अभिलेख सहित पुष्टि की गई। जांचकर्ता अधिकारी के अभिमत अनुसार  उक्त शिक्षकों का यह कृत्य गंभीर कदाचरण, स्वैच्छाचारिता, शासकीय लोक सेवक के प्रतिकूल एवं आपराधिक श्रेणी का है, जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) 1965 के प्रावधानों के विपरीत होकर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियत्रंण तथा अपील) नियम 1966 के तहत दण्डनीय भी है। 

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