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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज एक पेड़ माँ के नाम अभियान का शुभारंभ करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विश्व पर्यावरण दिवस आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागृह भोपाल में इस वर्ष के “एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन पोर्टल लांच करेंगे। साथ ही पीएचडी छात्रवृत्ति एवं मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस “प्लास्टिक प्रदूषण उन्मूलन’’ विषय पर आधारित होगा। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार विशेष अतिथि रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण द्वारा तैयार प्रदेश के वेटलैण्ड एटलस का विमोचन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इकाइयों और संस्थानों को “मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण’’ पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री नवनीत मोहन कोठारी, एप्को के कार्यपालिक संचालक श्री श्रीमन शुक्ला, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री अच्युतानंद मिश्रा, पर्यावरणविद्, इकाइयों, संस्थानों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

माँ नर्मदा के उत्तर तटीय ग्रामों में नर्मदा सेवा समितियों का गठन, बांटे गये केसीसी कार्ड

भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश भर में 30 जून तक निरंतर जारी रहेगा। प्रदेश के नर्मदा नदी से सटे जिलों में नर्मदा पथ सर्वेक्षण यात्रा निरंतर जारी है। यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को नर्मदा नदी के किनारों को पर्यावरण सरंक्षण के उद्देश्य से साफ सफाई की शपथ दिलाई जा रही है। इसी के साथ जिलों में तालाबों को चिन्हित कर मछली पालन के जरिये किसानों की आमदनी बढ़ाये जाने के अवसरों की तलाश की जा रही है। स्वच्छता अभियान चलाया गया डिण्डौरी जिले में विकासखंड बजाग की ग्राम पंचायत गीधा स्थित संगम गोमती नर्मदा घाट पर मां नर्मदा पथ सर्वेक्षण एवं जन जागरण यात्रा का विधिवत शुभारंभ नर्मदाष्टक एवं मां नर्मदा की आरती के साथ किया गया। इस अवसर पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत घाट परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। जिले में चल रही यात्रा का उद्देश्य मां नर्मदा के पथ पर जन जागरूकता फैलाना, जल स्रोतों का संरक्षण करना एवं स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस दौरान ग्रामीणों को जल की महत्ता के प्रति जागरूक किया गया और उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के सतत सद्उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने नर्मदा सेवा के संकल्प को दोहराते हुए पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। माँ नर्मदा के उत्तर तटीय ग्रामों में नर्मदा सेवा समितियों का गठन  प्रदेश के 16 जिलों के 51 विकासखंडों में चिन्हित 335 पंचायतों में माँ नर्मदा सर्वेक्षण एवं जनजागरण यात्रा निकाली जा रही है। मंडला जिले में उत्तर तट की प्रत्येक नर्मदा तटीय ग्राम पंचायत में नर्मदा पथ सर्वेक्षण यात्रा पहुँच रही है। यात्रा के दौरान सार्वजनिक चौपालों के माध्यम से नर्मदा सेवा समितियों का गठन भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में यात्रा ग्राम बड़ी खैरी से प्रारंभ होकर ग्राम, खुड़िया, पटपरा और छपरी ग्राम में समाप्त हुई। प्रत्येक स्थानों में सभी ग्रामीणजनों के समक्ष पतित पावनी मां के प्रवाह पर वर्तमान समय में किस तरह के दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं इससे अवगत कराया गया। चौपालों में सर्वे प्रपत्र की जानकारी भरवाई गई एवं जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत ग्रामवासियों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान बांटे गये केसीसी कार्ड बालाघाट जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान निरंतर जारी है। जिले में पेयजल स्त्रों की सफाई का कार्य सामूहिक भागीदारी से किया जा रहा है। जिले में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये जिले में उपलब्ध तालाबों में मछली पालन की और अधिक संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत हर दिन विकासखंडों के 2-2 गांवो में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य विभाग के अमले द्वारा कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से सम्बंधित विभागों द्वारा कृषि की उन्नत तकनीकों के साथ ही आवश्यक योजनाओँ के हितलाभ भी देने के प्रयास जारी है। बिरसा जनपद के कचनारी में कार्यशाला हुई। जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि ग्राम कचनारी में रौबदाभाटा की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों को केसीसी कार्ड प्रदान किये गए है। समिति में शामिल 23 सदस्यों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण प्राप्त करने वाले कार्ड का वितरण किया गया है।  समिति के सदस्य कचनारी सिंचाई तालाब में मछली पालन करते है। समिति के सदस्य एक सीजन में करीब 10 टन मछली का विक्रय करते है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत होगा वृहद वृक्षारोपण भोपाल संभाग आयुक्त संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों द्वारा बनाई गई कार्य योजना के अनुसार भोपाल नगर में वृहद वृक्षारोपण किया जाएगा। इसकी शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से की जाएगी। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से नगर के विभिन्न बाग बगीचे एवं हरित क्षेत्र में वृक्षारोपण करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्य ऐसा हो कि अधिक से अधिक पौधे जीवित रहे। संभाग आयुक्त ने निर्देश दिए कि नगर के सभी बाग बगीचों की मैपिंग और जियो टैगिंग करा ली जाए जिसमें बगीचे का नाम, एरिया, नगर निगम के जोन एवं वार्ड का नाम, सिंचाई के लिए पानी का स्रोत, देखभाल करने वाले अधिकारी /कर्मचारी का नाम एवं मोबाइल नंबर आदि जानकारियां हों। नगर निगम सीमा के बाहर के नगरीय क्षेत्र में भी कार्य योजना बनाकर वृक्षारोपण कराया जाए। आयुक्त नगर निगम ने बताया कि भोपाल नगर में नगर निगम के 157 पार्क हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी, राजधानी परियोजना एवं वन विभाग के बाग बगीचे हैं। नगर में कालिया सोत, खानू गांव सहित पांच क्षेत्रों का चयन किया गया है जहां व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा। संभाग आयुक्त सिंह ने निर्देश दिए कि नगर के विभिन्न जल स्रोतों से प्रदूषण हटाने का कार्य भी निरंतर किया जाए. नगर निगम के अधिकारी द्वारा बताया गया कि भोपाल नगर में कुल 12 तालाब है, जिनमें से किसी भी तालाब में उद्योगों का प्रदूषित पानी नहीं मिलता है।  

कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर गया, कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर 5 सालों से नहीं रुक रही ट्रेन

खंडवा जिले का एक ऐसा रेलवे स्टेशन जो सालों से खामोश पड़ा है. यहां अब एक भी ट्रेन नहीं रुकती है, कई सालों से स्टेशन पर न कदमों की आहट सुनाई देती है और न बच्चों की हंसी. अब वो बुजुर्ग भी नजर नहीं आते हैं जो कभी स्टेशन की बेंच पर बैठकर चाय की चुस्कियां लिया करते थे. सैकड़ों लोगों की जिंदगी हो रही प्रभावित खंडवा शहर से कुछ ही दूर पर कोहदाड़ रेलवे स्टेशन मौजूद है. जहां कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर सा गया है. इससे पहले स्टेशन गुलजार था. कटनी-भुसावल जाने वाली पैसेंजर गाड़ी में सैकड़ों की संख्या में लोग सफर करते थे. किसान अपनी फसल लेकर बेचने जाते थे, तो वहीं छात्र शहर की ओर पढ़ाई करने और युवा नौकरी की तलाश में निकलते थे. खंडहर बना रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बिछी पटरी से सिर्फ रेलगाड़ी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सपने गुजरते थे. लेकिन, आज कोहदाड़ रेलवे स्टेशन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. यहां रुकने वाली कटनी-भुसावल पैसेंजर ट्रेन को एक्सप्रेस कर दिया गया है, जिसके चलते अब नहीं रुकती है. हालांकि, दूसरी पैसेंजर ट्रेन भी लगभग 5 सालों से कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर नहीं रुक रही है. कई मायनों में खास है कोहदाड़ स्टेशन टाकलीकला निवासी रामनारायण दशोरे ने कहा, ” कोहदाड़ स्टेशन बहुत पुराना है. स्टेशन के पास नदी है. उस पर बने ब्रिज से ट्रेन अब भी गुजरती है. साल 1960-61 में जब भारी जल संकट था. पीने के लिए पानी नहीं था. उस समय कोयले से ट्रेन चला करती थी. तब कोहदाड़ स्टेशन ही था जिसने रेलवे को पानी पिलाया था.” कोहदाड़ स्टेशन के करीब रहने वाले लतीफ खान ने कहा, ” ट्रेन से ग्रामीणों के सब्जी का रोजगार जुड़ा हुआ था. नेपानगर में सप्ताह में दो दिन बाजार लगती है, यहां ग्रामीण ट्रेन से जाते थे और सब्जी बेचकर शाम तक लौट जाते थे. खंडवा शहर में सब्जी बेचने और खरीदारी करने के लिए ट्रेन मात्र एक सहारा थी. ट्रेन बंद होने के चलते लोगों का रोजगार ठप हो गया.”

NHAI 152KM लम्बे फोरलेन पर 215 करोड़ की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा, हदसों से मिलेगी मुक्ति

सागर.  राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के सालों पुराने चिन्हित ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने अंडरब्रिज का निर्माण कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 152 किलोमीटर लंबाई के फोरलेन पर 215 करोड़ रुपए की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा है। इसकी शुरूआत देवरी की ओर से की गई थी, जिसमें से 4 अंडरब्रिज का काम पूरा भी कर लिया गया है, वहीं बाकी के 10 अंडरब्रिज निर्माणाधीन है। कुछ समय पहले ही सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आने वाले बम्हौरी चौराहे पर भी अंडरब्रिज का निर्माण शुरू हो गया है। इन अंडरब्रिज के तैयार होने के बाद इस नेशनल हाइवे सफर सुगम होगा तो वहीं हादसों में 70 से 80 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।  दरअसल कश्मीर से कन्याकुमारी को जोडऩे वाले (उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर) देश के इस सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का 152 किलोमीटर लंबा हिस्सा सागर जिले की सीमा में आता है, जो मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर स्थित मालथौन के पास से शुरू होकर देवरी के आगे नरसिंहपुर जिले की सीमा में आने वाले तीतरपानी टोल प्लाजा तक लगता है। – भारी वाहन भी निकल सकेंगे नेशनल लाइवे पर तैयार किए जा रहे इन अंडरब्रिज का आकार 12 वाया 5.5 मीटर रखा गया है, इसमें 12 मीटर की चौड़ाई होगी तो ऊंचाई 5.5 मीटर रहेगी, जिसमें से भारी व बड़े वाहन भी आसानी से निकल सकेंगे। फोरलेन के इन सभी 14 अंडरब्रिज को 6 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। – सागर से देवरी के बीच 10 अंडरब्रिज बनेंगे सागर से देवरी की ओर बम्हौरी चौराहा, समनापुर तिराहा, सुरखी स्टार्टिंग बायपास व सुरखी ऐंडिंग बायपास, गौरझामर-केसली चौराहा, गौरझामर एंडिंग बायपास, देवरी स्टार्टिंग बायपास, देवरी-दमोह मार्ग, देवरी एंडिंग बायपास व महाराजपुर में अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं। – सागर से मालथौन के बीच 4 अंडरब्रिज सागर से मालथौन की ओर बाछलोन, मोठी गांव के पास, झीकनी गांव और बरोदियाकलां में अंडरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। – फैक्ट फाइल 152 किमी लंबा हाइवे जिले की सीमा में 14 ब्लैक स्पॉट पर बन रहे अंडरब्रिज 4 अंडरब्रिज बनकर हो चुके तैयार 215 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की लागत 12 मीटर चौड़ा, 5.5 मीटर होगी ऊंचाई 6 मार्च 2026 तक पूरा करना है काम – सफर सुगम व सुरक्षित होगा जिले से निकले फोरलेन के ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर 14 अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें 4 का काम पूरा हो गया है, शेष प्रगतिरत हैं। मार्च 2026 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद फोरलेन का सफर सुगम व सुरक्षित होगा। संदीप जीआर, कलेक्टर

कार्य़शाला का उद्देश्य भू-प्रबंधन औऱ प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाना

भोपाल केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) द्वारा संयुक्त रूप से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 5 और 6 जून 2025 को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भौरी भोपाल में किया जाएगा। कार्यशाला में देशभर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और भू-प्रबंधन से जुड़े पेशेवर भाग लेंगे। ‘नक्शा’ वेब-जीआईएस सॉल्यूशन पर आधारित इस कार्यशाला में इस प्लेटफॉर्म की क्षमताओं का शहरी संपत्ति सर्वेक्षण और भू-स्थानिक डाटा प्रबंधन में उपयोग पर प्रकाश डाला जायेगा। कार्य़शाला का उद्देश्य भू-प्रबंधन औऱ प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाना है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय भूमि संसाधन विभाग के निदेशक श्याम कुमार, केन्द्रीय भूमि संसाधन संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी, एसीएस विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग संजय दुबे, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग विवेक पोरवाल, एसीएस नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय शुक्ला और राजस्व सचिव एवं भू-अभिलेख आयुक्त सुअनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला के पहले दिन ‘नक्शा’ प्लेटफॉर्म की विशेषताओं और इसके शहरी संपत्ति सर्वेक्षण में वास्तविक उपयोग के संदर्भ में टेक्नीकल प्रेजेंटेशन और लाइव डेमो प्रस्तुत किये जायेंगे। सर्वे ऑफ इंडिया और एमपीएसईडीसी के विशेषज्ञ ड्रोन आधारित इमेज ऐनालिसिस, फीचर एक्सट्रैक्शन और ग्राउंड लेवल सर्वे की विधियों पर प्रशिक्षण देंगे। प्रतिभागियों को सांची के फील्ड विज़िट के दौरान मोबाइल-आधारित ‘नक्शा’ ऐप के माध्यम से रियल-टाइम सर्वेक्षण जैसे भूखंड मूल्यांकन, बहु-स्वामित्व संरचना और अभिलेख अपडेट बनाए रखनी की प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला में दूसरे दिन पूर्व में कराए गए फील्ड सर्वे के परिणाम प्रस्तुत किए जाएंगे। टीमों द्वारा जुटाए गए डाटा का ‘नक्शा’ प्लेटफॉर्म पर एकीकरण, विभाजन-विलयन (स्प्लिट-मर्ज) की प्रक्रिया, तथा अभिलेखों को अपडेट बनाए रखने की तकनीक पर चर्चा की जाएगी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में केरल, कर्नाटक, असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में शहरी सर्वेक्षण की श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य़शाला के समापन सत्र में केन्द्रीय भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा होगी। इसमें विभिन्न राज्यों की आवश्यकताओं एवं ‘नक्शा’ के देश भर में क्रियान्वयन की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि यह कार्यशाला देश में स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आधुनिक, पारदर्शी और कुशल शहरी भू-अधिकार प्रबंधन एवं प्रशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी।  

प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर अब सैटेलाइट से नजर रखने सरकार ने सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली की विकसित

भोपाल प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर अब सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। सरकार ने सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली विकसित की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश की समस्त खदानों को जियो टैग किया गया है। सैटेलाइट से नजर रखने के लिए एक पोर्टल भी विकसित किया गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, खनिज उमाकांत उमराव की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टरों को सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली का जिले में तत्परता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। साथ ही अवैध उत्खनन पाए जाने पर परिवहन एवं भंडारण नियम के अंतर्गत कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए हैं। अलर्ट मैप पर चिह्नित किए जाएगें स्थान बता दें कि इस पोर्टल से सैटेलाइट के माध्यम से अवैध उत्खनन की पहचान कर अलर्ट जारी किया जाएगा। जिसे पोर्टल पर जिला कलेक्टर एवं जिला खनिज अधिकारी द्वारा लॉग-इन कर देखा जा सकेगा। जिला कलेक्टर एवं खनिज अधिकारी को अलर्ट की जानकारी एसएमएस द्वारा प्रत्येक माह पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी। जिले के अंतर्गत जारी किए गए अलर्ट मैप पर चिह्नित रहेंगे, जिनका अन्य स्थापित खदानों, जियोलॉजिकल लेयर एवं खसरेकी जानकारी के आधार पर परीक्षण किया जा सकेगा। मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा वेरीफाई बता दें कि जारी किए गए अलर्ट को खनिज अधिकारी द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन कर मोबाइल एप के माध्यम से वेरीफाई किया जाएगा। फील्ड वेरिफिकेशन के बाद अवैध उत्खनन पाए जाने पर अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण नियम-2022 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल के संबंध में वीसी के माध्यम से समस्त जिला कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

महू से मुख्तियारा के बीच रेल लाइन बिछाने में कटने वाले पेड़ों के बदले रेलवे दस गुना पौधे लगाएगा

इंदौर  महू-सनावद ब्रॉड गेज के तहत महू से मुख्तियारा बलवाड़ा के बीच पटरी बिछाई जाएगी। इसके लिए इंदौर-खरगोन वन मंडलों की 454 हेक्टेयर वनभूमि का अधिग्रहण होना है। वनमंडल स्तर पर इसका सर्वे पूरा हो गया है। पटरी बिछाने के लिए पूरे प्रोजेक्ट में करीब एक लाख 55 हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान इंदौर वनमंडल को होगा। प्रक्रिया में चार-पांच महीने लग सकते हैं वनमंडल स्तर पर रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) कार्यालय को भेजी गई है। प्रोजेक्ट का आकलन करने के बाद वन विभाग मुख्यालय को देंगे। फिर पर्यावरण समिति की समीक्षा के बाद अनुमति के लिए वन व पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में चार-पांच महीने लग सकते हैं। सिंगल लाइन के हिसाब से पटरियां बिछेगी महू-मुख्तियारा बलवाड़ा के बीच 56 किमी की पटरियां बिछाई जाएंगी। यहां ब्रॉड गेज का काम अलग-अलग कारणों के चलते तीन वर्षों से अटका है। ट्रेन की स्पीड बढ़ाने के लिए पश्चिम रेलवे ने पहले अलाइनमेंट बदला। इसके बाद डबल लाइन को लेकर सर्वे किया। इंदौर वनमंडल की 407 और खरगोन वनमंडल की 46 हेक्टेयर वनभूमि अधिग्रहित होगी। महू वनक्षेत्र से एक लाख 40 हजार और बड़वाह वनक्षेत्र से 15 हजार पेड़ कटेंगे। अधिकारियों के मुताबिक भले ही पश्चिम रेलवे डबल लाइन के लिए सर्वे करवा रही है, लेकिन अभी सिंगल लाइन के हिसाब से पटरियां बिछाई जाएंगी। प्रोजेक्ट में 20 करोड़ रुपये दिए जाएंगे इंदौर-खरगोन वनमंडल के पेड़ों को काटकर लकड़ी डिपो भिजवाने का काम वन विभाग करेगा। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। प्रोजेक्ट में 20 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को अनुमति मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करना होगी। जमीन नहीं, लेंगे पैसा ब्रॉड गेज के लिए भले ही पश्चिम रेलवे से जमीन नहीं लेंगे। मगर इन्हें जमीन का मूल्य जरूर देना होगा। प्रोजेक्ट में 454 हेक्टेयर वनक्षेत्र आएगा। इतनी ही जमीन का मूल्य पश्चिम रेलवे को जमा करना होगा। 13 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से रेलवे को 59 करोड़ 20 लाख रुपये वन विभाग को देना है। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे केंद्र की परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। वनक्षेत्र के बदले रेलवे को जमीन नहीं देना है। बल्कि इंदौर-खरगोन वनमंडल से कटने वाले पेड़ों के बदले रेलवे दस गुना पौधे लगाएगा। यह काम भले ही वन विभाग करेगा, मगर पौधारोपण का खर्च रेलवे उठाएगा। पौधे लगाने के लिए धार-झाबुआ वनमंडल में वनक्षेत्र को चुना गया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सर्वे रिपोर्ट भेज दी इंदौर वनमंडल के डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि महू-सनावद ब्राडगेज प्रोजेक्ट को लेकर इंदौर वनमंडल से सर्वे का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट सीसीएफ कार्यालय को भेज दी। रेलवे लाइन बिछाने के लिए पेड़ों को काटा जाएगा। इन्हें चिह्नित कर लिया गया है।

अमर नाथ यात्रा में लगेगा इंदौर का लंगर, 100 क्विंटल खाद्य सामग्री रवाना

इंदौर  अपने स्वाद के लिए मशहूर इंदौर अब अमरनाथ यात्रा मार्ग पर अपना जायका परोसने जा रहा है. अमरनाथ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को मालवा की फेमस डिशेज भंडारे और लंगर में परोसी जाएंगी. इसमें इंदौरी पोहा, जलेबी से लेकर मुंह में पानी ला देने वाली दाल बाटी भी शामिल होगी. दरअसल, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने पहली बार मध्य प्रदेश के मनकामेश्वर मंदिर समिति को यात्रा मार्ग में लंगर चलाने की अनुमति दी है. अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से होने जा रही है और इसका समापन 9 अगस्त तक होगा, लिहाजा 1 महीने तक चलने वाली यात्रा के दौरान अमरनाथ यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को तरह-तरह के इंदौरी व्यंजन परोसे जाएंगे. बालटाल क्षेत्र से मिलेगा इंदौरी जायका अमरनाथ श्राइन बोर्ड से मिली अनुमति के मुताबिक इंदौर की मनकामेश्वर मंदिर समिति द्वारा अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बालटाल क्षेत्र से लंगर परोसा जा सकेगा. अमरनाथ यात्रियों को इंदौरी जायके से रूबरू कराने के लिए इंदौर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. शहर के मनकामेश्वर कांटा फोड़ शिव मंदिर से जितने भी व्यवसायी और श्रद्धालु जुड़े हुए हैं, वे अपने-अपने स्तर पर योगदान कर तैयारियों में जुड़ गए हैं. बालटाल में इंदौर का लंगर चलाया जा सके, इसके लिए 20 हलवाई की टीम तैयार की गई है. इसके अलावा मुख्य हलवाई के साथ सहयोगी अलग होंगे. 70 लोगों का जत्था पहुंचेगा बालटाल मनकामेश्वर मंदिर समिति से जुड़े 70 लोगों को लंगर चलाने की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट की ओर से दी गई है. इसके तहत 8 जुलाई को 70 सदस्य तमाम व्यवस्थाओं के लिए बालटाल रवाना होंगे. उनके टिकट और यात्रा की तैयारी हो गई है. समिति से जुड़े लोग बारी-बारी से लंगर में अपनी सेवाएं देंगे. 20 साल से इस तरह दे रहे थे सेवा मनकामेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य परमानंद वालरेचा के मुताबिक, ” अमरनाथ यात्रा के दौरान यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को चाय नाश्ता और अन्य सामग्री परोसने का काम अब तक मंदिर समिति लुधियाना के लंगर के साथ करती थी. 2 दशकों के भरोसे और स्वादिष्ट भोजन प्रसादी उपलब्ध कराने के अनुभव के बाद अमरनाथ यात्रा साइन बोर्ड ने इंदौर के मनकामेश्वर मंदिर समिति को अपना लंगर खुद चलाने की लिखित अनुमति भेज दी है.” यहां लगेंगे लंगर अमरनाथ बर्फानी सेवा दल के सहयोग से बालटाल और पंचतरणी दोनों स्थानों पर लंगर सेवा के साथ ही मालवांचल एवं इंदौर से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए तीन दिनों तक आवास एवं भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी. व्यापारी कर रहे सहयोग कांटाफोड़ मंदिर की भक्त मंडली के सदस्यों की ओर से छावनी क्षेत्र में व्यापारियों के सहयोग से अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों के लिए राशन सामग्री का संग्रहण किया जा रहा है. इस पुनीत कार्य में क्षेत्र के व्यापारी तन, मन, धन से सहयोग कर रहे हैं, यही कारण है कि इस साल भी बड़ी मात्रा खाद्य सामग्री एकत्रित की गई है. यह सामान किया रवाना मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु बिंदल ने बताया कि टीकमचंद गर्ग, संयोजक बीके सहित अन्य लोगों को मदद से जो सामग्री पहुंचाई गई है. उसमें शुद्ध घी के 15 डिब्बे, 75 डिब्बे खाद्य तेल, 4 क्विंटल मिल्क पावडर, 25 बोरी आटा, 30 क्विंटल सभी तरह की दाल, 5 क्विंटल मैदा, रवा और सूजी, 15 किलो मसाले, 30 बोरी पोहा, 10 क्विंटल इडली सांभर का आटा, 2 क्विंटल पापड़ की कतरन, 2 क्विंटल टॉफी-बिस्किट, एक मा क्विटंल चायपत्ती एवं 25 क्विंटल मे शकर आदि खाद्य सामग्री शामिल है.

गंगा दशहरा एवं पर्यावरण दिवस पर जनभागीदारी की अभिनव पहल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल गंगा सवर्धन अभियान के लक्ष्य ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों के संरक्षण’ के संकल्प को साकार करते हुए जन अभियान परिषद् द्वारा गंगा दशहरा एवं विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी अंचलो में विकासखण्ड स्तर पर चिन्हांकित 116 ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण बावडियों के आस-पास जन-सहभागिता से “बावडी उत्सव” मनाया जायेगा। इस उत्सव का उद्देश्य प्राचीन, ऐतिहासिक, जल संरक्षण संरचनाओं के महत्व के प्रति जन समुदाय को प्रेरित, प्रोत्साहित करना और जन-सहभागिता से ही इनके संरक्षण संवर्धन की पहल करना है। राज्य शासन के जनभागीदारी से जल स्त्रोतों को सहेजने के उत्सव “जल गंगा संवर्धन अभियान” अंतर्गत जनभागीदारी से म.प्र. जन अभियान परिषद् समुदाय के साथ मिलकर भागीरथी प्रयासों का साक्षी बन रहा है। परिषद् ने अपनी बहुआयामी गतिविधियों से इस वर्ष बावडी के प्रति संवेदना और संरक्षण को रखा गया है। परिषद् ने प्रदेश की अनेक मृतप्राय और विलुप्त होती बावडियों को सफाई से जीवन्त किया है। म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा “बावडी उत्सव” के अन्तर्गत बावड़ी के आस-पास होने वाले इन लोक उत्सवों के माध्यम से लोकजीवन में पारंपरिक जल स्त्रोतों के महत्व और उनके संरक्षण को आमजन तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास किया गया है। यह उल्लास जल-स्त्रोतों के संरक्षण में जनभागीदारी का मूल मंत्र बने, इस दृष्टि से बावड़ी उत्सव आयोजित किया जा रहा है। म.प्र. जनअभियान परिषद ने जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बावडी संरक्षण के साथ-साथ बावड़ियों के दस्तावेजीकरण के क्रम में परिषद द्वारा प्रदेश की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व की बावडियों पर आधारित प्रकाशन- “बूंद सहेजे बावडी” तैयार किया गया है। बावडी उत्सव के अंतर्गत जन सहभागिता से बावडियों की सफाई, रंग-रोगन, साज-सज्जा, रोशनी एवं परम्परागत पूजा-अर्चना के साथ जल संरक्षण संगोष्ठी, स्थानीय कलाकारों द्वारा काव्य और संगीत की प्रस्तुतियां, बच्चों के लिये जल संरक्षण विषयक प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार वितरण, जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले स्थानीयजनों का सम्मान, ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी इत्यादि का आयोजन म.प्र. जन अभियान परिषद अपनी प्रस्फुटन समितियों, नवांकुर संस्थाओं, सीएमसीएलडीपी परामर्शदाता और छात्र एवं गांव-गांव तक फैले अपने नेटवर्क के माध्यम से कर रहा है  

नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के जानकार समझाएंगे पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना

भोपाल  नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के विशेषज्ञ इंदौर में बिजली अधिकारियों, कर्मचारियों को ट्रेनिंग देकर पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके लिए विधिवत रूप से दो सत्रों में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्मिकों के लिए ट्रेनिंग देंगे। पहले चरण में 5 व 6 जून को पोलोग्राउंड इंदौर स्थित सभागार में 40 इंजीनियरों, लाइनमेनों परीक्षण सहाय़कों को पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली य़ोजना की बारीकियां समझाई जाएगी। दूसरे चरण में 9, 10 जून को 40 अन्य कार्मिकों को ट्रेनिंग दी जाएगी।  

विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून को प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट), भोपाल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून को प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। परिषद के नेतृत्व में प्रदेश की 35 से अधिक सहयोगी संस्थाएं इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। परिषद परिसर, विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टेम एजुकेशन” के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण आधारित हैंड्स ऑन टेक्निकल शो आयोजित किया जाएगा। साथ ही “आओ करके देखें” गतिविधि के अंतर्गत इको फ्रेंडली माटी शिल्प उत्पाद निर्माण पर कार्यशाला भी होगी। इस विशेष आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण चेतना का प्रसार करना एवं नवाचार आधारित वैज्ञानिक समाधानों के प्रति रुचि उत्पन्न करना है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों हेतु कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें STEM शो, ग्लोबल वार्मिंग पर इंटरैक्टिव वर्कशॉप, पर्यावरणीय नवाचारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, हैंड्स-ऑन गतिविधियाँ एवं पर्यावरण अनुकूल पॉटरी उत्पाद निर्माण पर प्रशिक्षण शामिल हैं। पॉटरी निर्माण सत्र आम नागरिकों के लिए भी खुला रहेगा। कार्यक्रम 5 जून को प्रातः 10 बजे से आरंभ होगा। इच्छुक विद्यार्थी एवं नागरिक https://tinyurl.com/CCLWED2025 लिंक या QR कोड के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।  

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भोपाल में टेन्ट में किया रात्रि विश्राम

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पर्यावरण सुरक्षा के अपने संकल्प के तहत मंगलवार की रात भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास के समीप पार्क में टेन्ट में रात्रि विश्राम किया। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंगलवार को संकल्प अनुसार टेन्ट में रात्रि विश्राम किया। उन्होंने कहा कि यह संकल्प केवल प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति एक जीवंत प्रतिबद्धता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर सभी को यह संदेश देना है कि हमारे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े परिणाम ला सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जब विचार और व्यवहार में सामंजस्य होता है, तभी संकल्पों की सार्थकता पूर्ण होती है।  

सिंगरौली-48 वर्षीय महिला का शव उसी के घर के बाहर मिला

सिंगरौली सिंगरौली-48 वर्षीय महिला का शव उसी के घर के बाहर मिला, जानकारी लगते ही क्षेत्र में फैली सनसनी, घटना की सूचना मिलते ही मोरवा निरीक्षक उमेश प्रताप सिंह सदल बल घटनास्थल पहुंचे, उन्होंने एफएसएल टीम को बुलवाकर घटनास्थल का बारीकी से कराया निरीक्षण, शव का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजा जिला अस्पताल, पुलिस कुछ संदेहियों से कर रही पूछताछ मोरवा थाना क्षेत्र के ग्राम चकरिया की घटना

नगरीय क्षेत्रों में एक करोड़ पौध-रोपण का लक्ष्य, विशेष पौधरोपण अभियान 5 जून से

भोपाल  आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने 5 जून से प्रारंभ हो रहे विशेष पौध-रोपण अभियान की भोपाल में हुई बैठक में समीक्षा की। आयुक्त श्री भोंडवे ने बताया कि अमृत योजना के अंतर्गत “वूमन फॉर ट्री” अभियान के तहत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में सघन पौध-रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान में एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे सभी नगरीय निकायों के सहयोग से पूर्ण किया जाएगा। आयुक्त ने नगर वनों के निर्माण, जल संरचनाओं के किनारों पर 8 फीट ऊंचे पौधो के रोपण और थीम आधारित उद्यानों की स्थापना जैसे लक्ष्यों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिये वृक्षारोपण प्रभावी उपाय है। पौध-रोपण गतिविधियों की सतत निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर पर “अमृत वृक्ष योजना मॉनिटरिंग सेल” का गठन किया जाएगा। भोपाल में इस अभियान से संबंधित एक राज्य स्तरीय वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा। बैठक में आयुक्त श्री भोंडवे ने निर्देश दिये कि बिल्डिंग परमिशन के नियमों में पौध-रोपण को अनिवार्य किया जाए तथा निकायों में डीजल वाहनों की जगह ईवी वाहनों को प्राथमिकता दी जाए। अभियान के अंतर्गत “सक्सेसफुल प्लांट लोकेशन” की श्रेणी में श्रेष्ठ कार्य करने वाले निकायों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। आयुक्त ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि इस अभियान को जन-सहभागिता से एक व्यापक हरित आंदोलन के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में अपर आयुक्त श्री कैलाश वानखेडे सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा सघन पौध-रोपण कार्यक्रम नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर विशेष सघन पौध-रोपण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री संकेत भोंडवे के निर्देशन में सभी 13 इकाइयों के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इस संबंध में कम्पनी के प्रमुख अभियंता श्री आनंद सिंह ने समस्त परियोजना प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र की इकाइयों में स्थित जल शोधन संयंत्र परिसर, मल-जल शोधन संयंत्र परिसर, तथा ओवरहेड टैंक परिसरों में पौध-रोपण सुनिश्चित करें। 5 जून को नगरीय निकायों में पौध-रोपण प्रदेश में 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी नगरीय निकायों की कचरा प्रसंस्करण इकाइयों पर कम से कम 5 नीम के पौधे लगाये जायें। इस मौके पर स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाये। यह कार्यक्रम प्रात: 10 बजे सभी निकायों में आयोजित होगा। पौध-रोपण के बाद जन-सामान्य को प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करने की शपथ दिलायी जायेगी।  

आरडीएसएस अंतर्गत इंदौर जिले में 10वां बिजली ग्रिड ऊर्जीकृत

भोपाल  आरडीएसएस अंतर्गत इंदौर जिले में तैयार 10वां बिजली ग्रिड बुधवार को प्रोटोकॉल के साथ ऊर्जीकृत किया गया। 33/11 केवी का यह ग्रिड देपालपुर क्षेत्र के लिम्बोदा गारी में 2.94 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। इससे हजारों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी, वोल्टेज उतार चढ़ाव संबंधी परेशानी नहीं होगी। आरडीएसएस अंतर्गत देश का पहला ग्रिड इंदौर के अरविंदो अस्पताल के पास ईमलीखेड़ा में तैयार हुआ था। इसके अलावा इंदौर शहर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पास, देवास नाका, रसोमा, बिलावली तालाब के पास, पंचकुईया के पास , बड़ियाकिमा बिचौली के पास, राजोदा, गंगाडेम कम्पेल में आरडीएएस अंतर्गत 33/11 केवी के 5-5 एमवीए क्षमता के ग्रिड तैयार हुए हैं। इस तरह आरडीएसएस से बने इन ग्रिडों से इंदौर जिले की बिजली वितरण क्षमता में 50 एमवीए की बढ़ोत्तरी हुई है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी क्षेत्र में आरडीएसए से 71 ग्रिड तैयार हो चुके हैं। इनमें से सबसे ज्यादा ग्रिड इंदौर और उज्जैन जिले में 10, 10 बने हैं। शाजापुर जिले में 8, खंडवा में 7, रतलाम में 6 खरगोन, बुरहानपुर, देवास जिले में 5-5 ग्रिड बने हैं।  

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