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वन्य-जीव तस्कर वारंटी आरोपी मिश्रीलाल गिरफ्तार ग्वालियर से सीबीआई ने एसटीएसएफ के सहयोग से आरोपी को पकड़ा

भोपाल स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश की शिवपुरी इकाई एवं केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 9 वर्षों से फरार एवं स्थाई वारंटी वन्य-जीव तस्कर आरोपी मिश्रीलाल माहौर पिता ख्याली राम माहौर निवासी गोहद जिला भिण्ड को मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर की परमासीस ईस्ट कॉलोनी के पास से घेराबंदी कर संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बुधवार 11 मार्च को सीबीआई द्वारा भोपाल न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा। स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा चंबल नदी में पाये जाने वाले अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के वन्य-प्राणी टर्टल्स, रेड क्राउन रूफ टर्टल की विदेशों में बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 5 मई, 2017 को वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में कुल 16 आरोपियों को देश के 4 राज्यों से गिरफ्तार किया गया था। इसमें 11 विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इस प्रकरण को सीबीआई को हस्तांतरित किया गया। सीबीआई द्वारा उक्त प्रकरण में कार्रवाई करते हुए 3 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

राज्य स्तरीय NSS शिविर में युवाओं की पहल, स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाया

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग तथा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में पंडित दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट परिसर में आयोजित 7 दिवसीय राज्य स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर के चतुर्थ दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन गतिविधियों से हुई। स्वयंसेवकों ने प्रभात फेरी निकालकर समाज में जागरूकता का संदेश दिया तथा गुरुओं के मार्गदर्शन में योगाभ्यास किया। इसके बाद सरयू धारा सरोवर परिसर, चित्रकूट में श्रमदान एवं वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया जिसमें राज्य राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी  मनोज अग्निहोत्री, शिविर प्रशिक्षक  राहुल सिंह परिहार, शिविर संगठक  अभिमन्यु प्रसाद सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम अधिकारियों ने भी स्वयंसेवकों के साथ मिलकर श्रमदान किया। बौद्धिक सत्र के प्रारंभ में राज्य एनएसएस अधिकारी  मनोज अग्निहोत्री ने अतिथियों का शॉल एवं तिलक लगाकर स्वागत किया। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने युवाओं द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग एवं उसकी सकारात्मक एवं नकारात्मक परिणाम, सायबर ठगी, सायबर फिशिंग और सोशल मीडिया पर चर्चा कि एवं भ्रामक विज्ञापन से सतर्क रहने की बात कही और साथ ही स्वयंसेवकों से उनके सोशल मीडिया के अनुभव सुने और उन्हें मार्गदर्शित किया। अपर कलेक्टर, सतना  शैलेन्द्र कुमार सिंह () ने राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राज्य स्तरीय शिविरों में सहभागिता युवाओं के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने सभी कार्यक्रम समन्वयकों एवं अधिकारियों को मिलमैहर माता मंदिर की चुनरी एवं तस्वीर भेंट की तथा लगभग 600 स्वयंसेवकों को डॉक्यूमेंट फाइल और कैप वितरित किए। आगाज निदेशक  प्रशांत दुबे ने बौद्धिक सत्र की मुख्य थीम बाल संरक्षण पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने बाल अपराध की कानूनी परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि बच्चों को सभी प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं और समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें सही मार्गदर्शन और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। बाल सुरक्षा अधिकारी, यूनिसेफ  गोविंद बेनीवाल ने बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल यौन हिंसा जैसे गंभीर विषयों पर संवादात्मक चर्चा की। उन्होंने बाल श्रम की रोकथाम के लिए पेंसिल पोर्टल तथा आपात स्थिति में सहायता के लिये 1098 हेल्पलाइन की जानकारी दी। साथ ही उपस्थित स्वयंसेवकों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का संकल्प भी दिलाया। वित्त नियंत्रक, एपीएस विश्वविद्यालय आर.डी. चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर युवा स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बौद्धिक सत्र में मुख्य अतिथि की भूमिका स्वयंसेवक  मीत सिंह चंदेल (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर) ने निभाई तथा स्वयंसेविका सु संजना (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर) ने सत्र की अध्यक्षता की। सत्र का संचालन स्वयंसेविका सु श्वेता गौतम एवं स्वयंसेवक  ओम ने किया तथा अंत में डॉ. अशोक बिश्नोई द्वारा आभार व्यक्त किया गया। सायंकालीन सत्र में प्रतिभागी विश्वविद्यालयों के स्वयं सेवकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया।  

स्‍थान रिक्‍त होने वाले दूसरे चरण के लि‍ए 6 अप्रैल से 10 जून तक कर सकेंगे आवेदन

भोपाल  राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शासकीय छात्रावासों में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से विशेष ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका एवं बालक छात्रावासों में विशेष रूप से वंचित वर्ग के बालक-बालिकाओं को उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली प्रारंभ की गई है। संचालक  सिंह ने बताया कि ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण और प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन एवं पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए विकसित किया गया है। ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप-I एवं टाइप-III तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस (एनएससीबी) बालक/बालिका छात्रावासों के पारदर्शी प्रबंधन और उनमें प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है। https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा आवेदन छात्रावासों में कक्षा 6वीं एवं अन्‍य कक्षाओं की रिक्‍त सीटों पर प्रवेश के लि‍ए विद्यार्थी प्रथम चरण में 30 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रथम चरण के बाद सीट्स रिक्त रहने की स्थिति में द्व‍ितीय चरण के आवेदन की प्रक्र‍िया शुरू होगी। यह 06 अप्रैल 2026 से 10 जून 2026 तक चलेगी। छात्रावास में प्रवेश के लिए अभिभावकों, विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेन्टर के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा। इसके साथ ही यदि किसी अभिभावक/पालक/विद्यार्थी को आवेदन फॉर्म भरने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे संबंधित वार्डन के सहयोग से भी आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। छात्रावासों में लक्ष्य के अनुसार 50, 100, 150, 175, 200, 220 तथा 275 सीटें उपलब्ध हैं। कक्षा 6 से 8 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-I) एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिया जाता है। वहीं कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-III) में प्रवेश की पात्रता होती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए निर्धारित हैं, जबकि 25 प्रतिशत सीटें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन-यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें अस्थि बाधित, अनाथ एवं बेसहारा बालिकाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाती है। प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से 8 तक के पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। ये छात्रावास विशेष रूप से शाला अप्रवेशी एवं शाला त्यागी बालकों के लिए संचालित किए जाते हैं। ऐसे बालकों को उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दर्ज कर विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से आवश्यक दक्षताएं विकसित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। छात्रावासों में विशेष रूप से ऐसे बच्चों को प्रवेश दिया जाता है, जो रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड के प्लेटफॉर्म पर रहने वाले, पन्नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्चे, घर से भटके हुए बच्चे, विमुक्त (डिनोटीफाइड ट्राइब्स) एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवारों के बच्चे और वन ग्राम पट्टाधारी परिवारों के बच्चों को आवासीय सुविधाएं प्रदान कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कराई जाती है। प्रदेश में 597 छात्रावास हैं संचालित राज्य शिक्षा केंद्र अंतर्गत प्रदेश में कुल 597 छात्रावास संचालित है। इनमें 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास तथा 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावास शामिल हैं। इन छात्रावासों में ऐसे बालक-बालिकाओं को आवासीय सुविधा प्रदान की जाती है, जो शाला से बाहर हैं या प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं। साथ ही पारिवारिक कारणों से परिवार के साथ रहते हुए शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उन्हें छात्रावास में रखकर प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।  

सहेली बनकर सरकार की योजनाएं हर कदम पर हैं महिलाओं के साथ हटा में 405.58 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां बेटियां जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना मध्यप्रदेश ही है। नारी सदैव पूजनीय हैं। हम अपने देश को भी जननी मानकर भारत माता की जय कहकर पूजते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की योजनाएं महिलाओं के जीवन में हर कदम पर पक्की सहेली बनकर उनके साथ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को दमोह जिले के हटा में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन सह शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण प्रदेश के लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है। साथ ही बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों की प्रगति और आशीर्वाद से ही प्रदेश में समृद्धि आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दमोह जिले के लिए 405 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत के 13 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें लगभग 232 करोड़ रूपए की लागत से हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग (एसएच-55) के 73 किमी मार्ग के टू-लेन रोड के रूप में उन्नयन एवं चौड़ीकरण, 74 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से मडियादो से बर्धा किशनगढ़ सड़क निर्माण और 48 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से मड़ियादो से रजपुरा मार्ग के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास के मूल मंत्र को अपनाते हुए प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्ष बुंदेलखंड क्षेत्र के वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में स्टेट कैबिनेट की मीटिंग कर सरकार ने 27 हजार 500 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल में ही सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हुआ है। उन्होंने सभी माताओं-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 14 वर्ष से अधिक उम्र कीबेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं और दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है, इससे हमारी बेटियों का भविष्य आजीवन सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी वैक्सीन का टीका लगवाने वाली हटा की 8 बेटियों को मंच से प्रमाण पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। हटा अ‍ब बनेगा शिवकाशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए हटा का नाम बदलकर इसे शिवकाशी नाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हटा   1008 देव गौरीशंकर की नगरी है, इसलिए अब इसे शिवकाशी के रूप में ही जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों को और भी कई सौगातें दीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि हटा में नवीन आईटीआई भवन बनाया जाएगा। हटा में सर्वसुविधायुक्त नवीन नगर पालिका भवन एवं भव्य गीता भवन भी निर्मित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कार्य का दायदा बहुत विस्तृत है, इसलिए हटा के महाविद्यालय में अब कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन संकाय/विषय भी पढ़ाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विनती-मड़ियादौ-चौरईया मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा। हटा के शासकीय पीएम महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में इंडोर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेरा में नया महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करते हुए कहा कि मड़ियादो एवं देवरी फतेहपुर में नया हायर सेकेण्डरी भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार नगर परिषद तेंदूखेड़ा में तारादेही तिराहे से चौरई तक मार्ग चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य कराए जाएंगे। नगर परिषद तेंदूखेड़ा में वार्ड क्रमांक 3 में सी.सी. रोड निर्माण कराया जाएगा। गहरा से चौपरा-सिमरी तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के जरिए बुंदेलखंड के हर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। खेतों में फसलें लहलहाएंगी, अब हटा से कोई रोजगार की तलाश में बाहर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब 55 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें 10 लाख हैक्टेयर रकबा तो पिछले 2 साल में ही बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। महिलाओं की खुशहाली में ही प्रदेश की खुशहाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 2 दिन पहले महिला दिवस मनाया है। अब आगे नवरात्रि आ रही है। राज्य सरकार नारी कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह सम्मानपूर्वक 1500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द लोकसभा और विधानसभा में बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। राज्य में नगरीय निकायों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटा विधायिका मती उमादेवी खटीक को जन्मदिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे हटावासियों की दीर्घकाल तक सेवा करती रहें। हटा विधायिका मती खटीक ने स्वागत संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहली बार हटा विधानसभा क्षेत्र आए हैं। साथ में 405 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगातें भी लाये हैं। उन्होंने कहा कि नारी पूरे समाज के विकास की प्रमुख आधारशिला होती है। आज हमारी महिलाएं शिक्षा, सेना और हर क्षेत्र में देश को गौरव दिला रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मजबूती से काम हो रहा है। प्रदेश में हर बेटी का सम्मान और हर महिला को रोजगार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आज दमोह जिले के लिए अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन पूरा हुआ है। इससे इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लगेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री  इंदर सिंह परमार, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र … Read more

हर जनपद पंचायत को 03 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करने का होगा अधिकार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने नई पहल शुरू की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा “सुगम संपर्कता परियोजना की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से गांव, ग्राम पंचायत और 100 से अधिक आबादी वाले मजरा-टोला तथा मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना अंतर्गत चिन्हित बस्तियों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। मनरेगा के तहत होगा सड़क निर्माण परियोजना अंतर्गत सड़कों का निर्माण मनरेगा यानी (VB-G RAM G) योजना के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत को रू. 3 करोड़ तक की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा सभी जनपद पंचायतों को राशि भी आवंटित कर दी गई है। सिपरी सॉफ्टवेयर से स्थान का होगा चयन परियोजना के तहत मजरे-टोले और सांदीपनि विद्यालयों तक बनने वाली सड़कों के लिए स्थान का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही सड़कों की डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर और आरआईएमएस का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन से होगी निगरानी परियोजना अंतर्गत बनने वाली सड़कों की निगरानी ड्रोन तकनीक से की जाएगी। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 28 मार्च तक डीपीआर तैयार करने के निर्देश आयुक्त मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद श्री अवि प्रसाद ने बताया कि परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 तक डीपीआर तैयार कर उसकी तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इस परियोजना के माध्यम से 100 से अधिक आबादी वाले मजरे-टोले तथा सांदीपनि विद्यालयों तक सड़क निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा। 

मुगलिया हाट के सरपंच मारण का दिल्ली में सम्मान, केंद्रीय मंत्री पाटिल ने किया सम्मानित

भोपाल  केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने भोपाल जिले की ग्राम पंचायत मुगलिया हाट के सरपंच  धर्मेन्द्र मारण को जल जीवन अभियान अंतर्गत नल जल योजना के सफल क्रियान्वयन, बेहतर संचालन और संधारण में उत्कृष्ट कार्य के लिए नई दिल्ली मे ‘उत्कृष्ट जल नेतृत्व सरपंच सम्मान’ प्रदान किया। सरपंच  मारण के नेतृत्व में नल जल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सुव्यवस्थित संचालन तथा व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों की समारोह में सराहना के साथ प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ योजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत मुगलिया हाट के सरपंच  धर्मेन्द्र मारण को मिला यह सम्मान मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह उपलब्धि प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। ग्राम स्तर पर जनभागीदारी के साथ योजनाओं का संचालन जल प्रबंधन को स्थायी रूप से सुदृढ़ बना रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके ने इस उपलब्धि पर ग्रामीणों को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नल जल योजनाओं के सफल संचालन और संधारण के लिए ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  पी. नरहरि ने बताया कि सामुदायिक सहभागिता आधारित प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का दीर्घकालिक और प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके। भारत सरकार द्वारा राज्यों से जल जीवन मिशन के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं महिला स्व सहायता समूह की सदस्यों को विभिन्न श्रेणियों में गए चयन के मापदंडों के आधार पर राज्यों से नामांकित सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय के राज्य मंत्री  वी. सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री  राज भूषण चौधरी तथा केन्द्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव  अशोक के के मीणा भी उपस्थित रहे। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से जल जीवन अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों और महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों को चयनित कर सम्मानित किया गया।  

मंत्री सिलावट का निर्देश: निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

भोपाल  जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि विभाग के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ नियत समय अवधि में पूर्ण करें, जिससे जनता को इन कार्यों का समय से पूरा लाभ मिल सके. विभागीय अधिकारी समय-समय पर कार्यों का निरीक्षण करें एवं निरंतर निरीक्षण प्रतिवेदन दें. कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। मंत्री  सिलावट ने बुधवार को मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा की. बैठक में अपर मुख्य सचिव  राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता,  विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री  सिलावट द्वारा प्रमुख रूप से नर्मदा ताप्ती कछार इंदौर, जल संसाधन विभाग उज्जैन एवं नमामि क्षिप्रे परियोजना इकाई उज्जैन में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की गई. उन्होंने आगामी सिंहस्थ- 2028 से संबंधित विभागीय कार्यों कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना, क्षिप्रा नदी के दोनो तटो पर घाट निर्माण की विस्तृत समीक्षा कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और इन सभी कार्यों को समय-सीमा में आगामी सिंहस्थ के पूर्व पूरी गुणवत्ता एवं विभागीय मापदण्ड अनुसार पूर्ण करने के निर्देश दिये। मंत्री  सिलावट द्वारा उज्जैन एवं इंदौर कछार के अंतर्गत निर्माणाधीन 14 वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, झाबुआ, बुरहानपुर एवं धार जिले को लगभग 5 लाख 44 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किये जाने, गुणवत्ता पूर्ण कार्य किये जाने के निर्देश दिये साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को इन परियोजनाओं को स्वीकृत समय सीमा में पूर्ण करने के लिये विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रत्येक 15 दिन में इससे संबंधित समीक्षा किये जाने के भी निर्देश दिए। मंत्री  सिलावट द्वारा चितावद, समाकोटा बैराज, डुंगरिया बैराज, बनीहरवाखेडी बैराज, मॉं रेवा उदवहन सिंचाई परियोजना, हाट पिपलिया सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, कयामपुर सीतामऊ सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, मल्हारगढ़ दाब युक्त सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, रामपुरा मनासा सूक्ष्म वृहर सिंचाई परियोजना, कबूलपुर मध्यम, आहू सिंचाई परियोजना, तलवाड़ा बांध परियोजना, पांगारी, कारम मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई किये जाने के लिये सार्थक प्रयास करने के निर्देश भी दिये गये।    

भारत एआई के क्षेत्र में लहरा रहा है अपना परचम मुख्यमंत्री ने राहतगढ़ और जेसीनगर को दी आधुनिक ग्रंथालय की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में मातृ सत्ता प्रधान संस्कृति है। भारत की छवि विश्व गुरू की रही है। दुनिया में केवल भारतीय संस्कृति है, जिसने अपने मूल्यों के आधार पर ज्ञान की धारा को तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों के माध्यम से विश्व के कोने-कोने में पहुंचाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समय बदला है। अब हमारा देश आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत अपने कौशल के बल पर आधुनिक तकनीक में विश्व में नंबर वन बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महान शिक्षाविद् डॉ. हरि सिंह गौर ने अपनी जमा पूंजी लगाकर बुंदेलखंड के सागर में शिक्षा का नया सूर्योदय किया। श्री गौर के प्रयासों से बुंदेलखंड को केंद्रीय विश्वविद्यालय की सौगात मिली है। यहां विभिन्न कोर्स की पढ़ाई कर निकले विद्यार्थियों ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहतगढ़ और जेसीनगर में श्रमिकों के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सागर में ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्रम में आज सागर में मां सरस्वती की कृपा से शिक्षा का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के रूप में शिक्षा के आधुनिक मंदिर बुंदेलखंड के युवाओं के सामर्थ्य और संकल्पों को नई ऊंचाई देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पहल के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवीर के केवल विश्वविद्यालय का नाम नहीं बल्कि एक बेटे का अपने माता-पिता के चरणों में श्रृद्धा सुमन है। मंत्री श्री राजपूत ने इस संस्थान को अपनी पूज्य माता ज्ञानबाई जी के नाम से ज्ञान और अपने श्रद्धेय पिता वीर सिंह के नाम से वीर शब्द लेकर उन्हें समर्पित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के युवाओं के लिए सपनों के नए द्वार खोलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समय के साथ चलने के लिए युवाओं से कौशल और तकनीक में पारंगत होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने बुंदेलखंड के चहुंमुखी विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्ष 2003 के बाद हुए कार्यों से बुंदेलखंड क्षेत्र का कायाकल्प हो गया है। उसके पहले की सरकारों के कार्यकाल में विकास धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती, श्रद्धेय श्री बाबूलाल गौर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी राज्य सरकार के लिए बुंदेलखंड सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। हमारी सरकार ने पिछले दिनों खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड के विकास के लिए 27 हजार करोड़ रूपये के विशेष पैकेज की मंजूरी दी। इससे क्षेत्र में करोड़ों का निवेश आएगा और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रदेश में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड वीरों और महावीरों की धरती है। बुंदेलखंड की पहचान महाराजा छत्रसाल से भी है। उन्होंने अपने कालखंड में कई लड़ाइयां लड़ीं और बुंदेलखंड की पावन धरा पर सनातन संस्कृति की ध्वजा फहराई। यहां के आल्हा और ऊदल की वीरता की कहानियां आज भी जीवंत हैं। बुंदेलखंड के वीरों ने अपने शौर्य से मातृभूमि की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय टीम के क्रिकेट में विश्व विजेता बनने और होली पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित देश के खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दुनिया में भारत का परचम लहरा रहे हैं। आज विश्व के कई संस्थानों के शीर्ष पदों पर भारतवंशी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं, यह देश की श्रेष्ठतम शिक्षा व्यवस्था का ही परिणाम है। सागर के विकास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का योगदान अविस्मरणीयः मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस दिन को सागर के लिए ऐतिहासिक बताते हुए विकास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को रेखांकित किया। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि आज का दिन बेहद सौभाग्यशाली है। उन्होंने याद दिलाया कि ज्ञानवीर विश्वविद्यालय की फाइल पर डॉ. मोहन यादव ने तभी हस्ताक्षर कर इसकी शुरुआत कराई थी, जब वे प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री थे। सागर अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहाँ केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय (स्टेट यूनिवर्सिटी) और मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष धन्यवाद किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री आदित्य सिंह राजपूत ने स्वागत उदबोधन में विश्वविद्यालय के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, खुरई एवं पूर्व मंत्री विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, देवरी विधायक श्री ब्रज बिहारी पटेरिया, बण्डा विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमति निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत, महापौर नगर निगम सागर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने परखी भविष्य के वकीलों की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन करशैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया, जिसमें विशेष रूप से विधि (Law) के छात्र-छात्राओं के लिए तैयार की गई मूट कोर्ट (Moot Court) आकर्षण का केंद्र रही। मूट कोर्ट एक प्रकार की कृत्रिम या नकली न्यायिक कार्यवाही होती है। इसमें कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र एक काल्पनिक कानूनी मामले पर वास्तविक अदालत की तरह बहस करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वास्तविक अदालती कार्यवाही और प्रोटोकॉल की बारीकियां सिखाना, न्यायिक तर्क और पैरवी की कला में निपुण बनाना, मुकदमेबाजी और कानूनी दस्तावेजीकरण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने बढ़ाया छात्र-छात्राओं का उत्साह मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मूट कोर्ट का अवलोकन करते हुए वहां मौजूद छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान … Read more

फूड सेफ्टी जांच में खुलासा, MP में दो ब्रांड की आइसक्रीम के 4 फ्लेवर फेल

छिंदवाड़ा कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है कि अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में टॉप एंड टाउन ब्रांड और हैवमोर ब्रांड की आइसक्रीम अमानक पाई गई। टॉप एंड टाउन के 3 फ्लेवर और हैवमोर की अल्फोंसो मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम अमानक पाई गई है। संपूर्ण प्रदेश में ‘मिलावट से मुक्ति’ अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में आइसक्रीम एवं कोल्डड्रिंक की अत्यधिक खपत होती है। खास तौर पर बच्चे आइसक्रीम का अधिकतम उपयोग करते हैं। छिंदवाड़ा खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और सैंपलिंग ऐसे में आमजन को बिना मिलावट के आइसक्रीम उपलब्ध हो सके, इस बात की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा शहर के प्रमुख एवं छोटे-बड़े सभी आइसक्रीम विक्रेताओं से आइसक्रीम के नमूने संग्रहीत कर जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं। लिहाजा विभिन्न ब्रांड्स के आइसक्रीम के नमूने पिछले कुछ महीनों में विभाग द्वारा लिए गए थे, जिसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी गोपेश मिश्रा द्वारा शहर में बिक रहे सभी ब्रांड्स के साथ-साथ टॉप एंड टाउन ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता ‘जानहवी फूड्स’ सिवनी रोड से और हैवमोर ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता ‘सरकार डिस्ट्रीब्यूटर्स’ से इन दोनों ही ब्रांड की विभिन्न फ्लेवर्स की आइसक्रीम के नमूने जांच हेतु लिए गए थे। लैब रिपोर्ट में टॉप एंड टाउन और हैवमोर के नमूने अमानक राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार टॉप एंड टाउन के 3 फ्लेवर- मैंगो, बटर स्कॉच, वनीला और हैवमोर की अल्फोंसो मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम अमानक पाई गई है। उपरोक्त मामले में रिपोर्ट्स आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा दोनों ही वितरणकर्ताओं और इन आइसक्रीम के निर्माणकर्ता फर्म को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 46(4) का नोटिस दिया है। इसके अनुसार वितरणकर्ताओं और निर्माणकर्ता फर्म को विभाग में उपलब्ध नमूने के अन्य भागों को केंद्रीय खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजकर जांच कराने का अधिकार होता है। नोटिस अवधि के बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा चालान आगे खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार नोटिस अवधि के पश्चात जांच के अनुसार दोषियों पर नियमानुसार चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

दतिया में तनाव: भीम आर्मी-असपा की यात्रा रोकने पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का प्रयोग

दतिया दतिया में गोराघाट के सिंध पुल के पास बुधवार को आजाद समाज पार्टी की संकल्प यात्रा के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। बिना अनुमति निकाली जा रही यात्रा को रोकने के लिए पुलिस ने बैरीकेट लगाए थे। जानकारी के अनुसार, आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ता संकल्प यात्रा निकालते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। प्रशासन ने पहले ही इस यात्रा की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने पहले समझाइश दी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले समझाइश दी, लेकिन कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। इसके साथ ही वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों को हिरासत में ले लिया पुलिस ने कार्यकर्ताओं को खदेड़ते हुए कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान करीब 100 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। आंदोलन में शामिल आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर सिंह यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।  

मौत का मांझा बना मुसीबत, हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा—अब तक नीति क्यों नहीं?

इंदौर कोर्ट के आदेश के दो माह बाद भी शासन चाइनीज मांझे को लेकर नीति नहीं बना सका। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही स्वत: संज्ञान याचिका में बुधवार को शासन को इस बारे में बनाई गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय मांग लिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मुख्य सचिव ने 12 मार्च को इस संबंध में अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम 25 मार्च तक का समय दे रहे हैं। नीति तैयार कर इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाए। कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि न्यायमित्र द्वारा दिए गए सुझावों को भी नीति में शामिल किया जाए। चाइनीज मांझे मामले में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की है। 11 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर इंदौर और आसपास के सभी जिलों में चाइनीज मांझा बनाने, बेचने, उपयोग करने को प्रतिबंधित कर दिया था। 12 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा था कि वह आदेशों का सख्ती से पालन करें और सुनिश्चित करे कि चाइनीज मांझे की वजह से कोई हादसा न हो, बावजूद इसके मकर संक्रांति के दिन इंदौर और आसपास के जिलों में कई हादसे हुए। 16 जनवरी को मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चाइनीज मांझे की वजह से हुए हादसों को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सख्ती के बावजूद हादसे हुए यह बहुत दुखद है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा था कि वे कोर्ट के आदेश और न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर चाइनीज मांझे को लेकर नीति तैयार करें। बुधवार को शासन को तैयार की गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय ले लिया। सुनवाई के दौरान ये सुझाव आए थे सामने     चाइनीज मांझे से घायल या मौत होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान होना चाहिए।     चाइनीज मांझे के निपटान की नीति तय होना चाहिए।     जब्त चाइनीज मांझे को मालखाने में रखने का कोई मतलब नहीं। इसे भस्मक भेजकर खत्म कराया जाए।     ई-प्लेटफार्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित की जाना चाहिए।     चाइनीज मांझे का ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रांसपोर्टरों का लायसेंस निरस्त किया जाए।     चाइनीज बनाने, बेचने या उपयोग की सूचना देने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रविधान किया जाना चाहिए

महानिदेशक डॉ. कोठारी बोले, सफलता पाने के लिए समय का सही प्रबंधन आवश्यक

सफलता के लिये समय का प्रभावी प्रबंधन आवश्यक : महानिदेशक डॉ. कोठारी मैपकास्ट में एआई आधारित तकनीकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का हुआ समापन युवाओं में नवाचार एवं स्टार्ट-अप संस्कृति को मिला प्रोत्साहन भोपाल मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा है कि विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और समय का प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी विचार को वास्तविकता में बदलने के लिए “आई कैन” की भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। डॉ. कोठारी ने बताया कि परिषद विज्ञान एवं नवाचार के लगभग 18 क्षेत्रों जैसे कृषि, वेटनरी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग एवं आईटी में तकनीकी परामर्श, संस्थागत सहयोग, प्रशिक्षण तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। साथ ही परिषद युवाओं को उद्योगों और संस्थानों से जोड़ने का भी कार्य कर रही है, जिससे उनके नवाचारों को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल सके। डॉ. कोठारी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित तकनीकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। छह सप्ताह तक संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई टूल्स और उद्यमिता कौशल से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच का विकास करते हुए उन्हें स्टार्ट-अप एवं स्व-रोजगार के लिए प्रेरित करना रहा। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव डिजिटल टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में नए अवसर सृजित करने की एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण को उपयोगी बताया। प्रतिभागी श्री प्रतीक बाघरे ने कहा कि मार्केटिंग, इंडिया फर्स्ट की अवधारणा और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर आयोजित सत्र अत्यंत लाभकारी रहे। साथ ही आईआईआईएफआर भोपाल के शैक्षणिक भ्रमण से स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को समझने का भी अवसर प्राप्त हुआ। प्रतिभागी श्री राहुल तिवारी ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार और तकनीक के उपयोग से जुड़े अनेक नए आयाम सीखने को मिले तथा समन्वयकों का मार्गदर्शन सराहनीय रहा। वहीं श्री उदित वर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें स्व-रोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में डॉ. प्रवीण विद्यार्थी, श्री अवनीश शर्मा, सुश्री तन्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कोरेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  

एसीएस स्वास्थ्य की अध्यक्षता में समिति गठित

एसीएस स्वास्थ्य की अध्यक्षता में समिति गठित समग्र स्वास्थ्य योजना का अंतिम प्रारूप का करेगी निर्धारण भोपाल राज्य के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लिए प्रस्तावित समग्र स्वास्थ्य योजना के अंतिम प्रारूप, नीति निर्धारण के साथ ही कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से परामर्श कर योजना को मंत्रि-परिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में अपर मुख्य सचिव वित्त, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग सदस्य जबकि आयुक्त लोक स्वास्थ्य सदस्य-सचिव होंगे। समिति प्रस्तावित योजना के सभी आवश्यक तत्वों जैसे पात्रता, कवरेज, वित्तीय माडल, क्रियान्वयन संरचना तथा हितधारकों के परामर्श को समाहित कर विस्तृत योजना दस्तावेज तैयार करेगी, जिसे मंत्रि-परिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।  

गैस की किल्लत जारी: महीने भर बाद मिलेगा दूसरा सिलेंडर, 25 दिन का नियम फेल

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

अमरीन-आफरीन का ईरानी डेरा कनेक्शन सामने, बनीं सेक्स रैकेट की हेड

भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए हाई प्रोफाइल धर्मांतरण और रेप केस में गिरफ्तार दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन फिलहाल जेल में बंद हैं. इस मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी समय उनके परिवार की नजदीकियां ईरानी डेरे से बढ़ने लगी थीं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ईरानी डेरे के आपराधिक छवि वाले लोगों से इन दोनों बहनों का कोई संपर्क था या नहीं. फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी संभावित सबूतों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। ब्यूटी पार्लर की आड़ में चल रहा था रैकेट पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना रैकेट फैलाया था. पुलिस का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी युवतियां इस जाल का शिकार बनी हैं. जांच एजेंसियां पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच में जुटी  इस मामले में एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कड़ियों की तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से विवेचना जारी है।

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