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108 एम्बुलेंस सेवा ने किया कमाल, समय रहते पहुंचकर हजारों मरीजों की जान बचाई

“108 एम्बुलेंस बनी जीवन रक्षक – समय पर पहुंचकर हजारों मरीजों की बचाई जान” दो महीनों में 13,977 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया, गोल्डन आवर में मिली चिकित्सा सहायता भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 108 एम्बुलेंस सेवा घायलों के लिए एक सच्ची जीवन रक्षक सेवा बनकर सामने आई है। आपातकालीन कॉल मिलते ही तेज़ी से घटनास्थल पर पहुंचकर 108 एम्बुलेंस की टीम न केवल घायलों को अस्पताल पहुंचा रही है बल्कि मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर कई गंभीर मामलों में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान प्रदेशभर में 13,977 सड़क दुर्घटना (रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट) मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। इसमें जनवरी 2026 में 7,335 और फरवरी 2026 में 6,642 दुर्घटना पीड़ितों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। विशेष बात यह है कि इन मामलों में औसतन हर दिन 230 से अधिक घायलों को 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है। समय पर एम्बुलेंस पहुंचने के कारण कई गंभीर घायलों की जान बच पाई। गोल्डन आवर में जीवन रक्षक साबित हो रही 108 सेवा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय के भीतर यदि मरीज को प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए तो जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 108 एम्बुलेंस सेवा इसी गोल्डन आवर में तेजी से पहुंचकर घायलों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रही है, जिससे यह सेवा आम नागरिकों के लिए “जीवन रेखा” साबित हो रही है। प्रशिक्षित टीम मौके पर देती है प्राथमिक उपचार 108 एम्बुलेंस में तैनात प्रशिक्षित ईएमटी (Emergency Medical Technician) और पायलट की टीम घटनास्थल पर पहुंचते ही मरीज की स्थिति का आकलन कर प्राथमिक उपचार प्रदान करती है। कई मामलों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को मौके पर ही ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लीडिंग कंट्रोल और बेसिक लाइफ सपोर्ट देकर उनकी स्थिति को स्थिर किया जाता है, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। इन जिलों में सबसे अधिक दुर्घटना मामले प्रदेश के कई जिलों में दुर्घटनाओं के मामले अधिक दर्ज किए गए। इनमें सागर में 844, इंदौर में 591, भोपाल में 576, जबलपुर में 510, रीवा में 499 और सतना में 451 मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इसके अलावा धार, छिंदवाड़ा, खरगोन, सीधी, उज्जैन और विदिशा सहित कई जिलों में भी बड़ी संख्या में एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान की गईं। 15 से 20 मिनट में पहुंच रही एम्बुलेंस आपातकालीन कॉल प्राप्त होने के बाद 108 एम्बुलेंस की टीम औसतन 15 से 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच रही है। तेज़ प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय के कारण दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार मिल पा रहा है। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए यातायात नियमों का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, तेज गति से वाहन न चलाना और मोबाइल फोन का उपयोग न करना बेहद जरूरी है। आंकड़ों में 108 एम्बुलेंस सेवा ▪ जनवरी 2026 – 7,335 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ फरवरी 2026 – 6,642 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ दो महीनों में कुल – 13,977 दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया ▪ औसतन प्रतिदिन – 230 से अधिक घायलों को मिली त्वरित सहायता ▪ औसत रिस्पॉन्स टाइम – 15 से 18 मिनट में घटनास्थल पर पहुंची एम्बुलेंस सबसे अधिक दुर्घटना मामले वाले जिले ▪ सागर – 844 ▪ इंदौर – 591 ▪ भोपाल – 576 ▪ जबलपुर – 510 ▪ रीवा – 499 ▪ सतना – 451 जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं 108 एम्बुलेंस मध्यप्रदेश में संचालित 108 एम्बुलेंस अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह परिहार ने बताया कि प्रदेशभर में संचालित सभी एम्बुलेंस में आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और एम्बुलेंस स्टाफ पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है। एम्बुलेंस में अम्बुवैग, ब्लड प्रेशर मापने की मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर (शुगर जांच उपकरण), थर्मोमीटर तथा जीवन रक्षक ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था रहती है। इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति में उपयोग होने वाली आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध रहती हैं, जिनका उपयोग प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में किया जाता है। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में निजी वाहन के बजाय एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एम्बुलेंस में जीवन रक्षक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ मौजूद होता है, जो रास्ते में ही मरीज को प्राथमिक उपचार प्रदान कर उसकी स्थिति को स्थिर करने में मदद करता है।उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल करें। हमारी संस्था और एम्बुलेंस कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों की सेवा में सदैव तत्पर हैं।

मुख्यमंत्री मोहन का ऐतिहासिक कदम, हटा का नाम बदला, 405 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन

सागर   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां बेटियां जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना मध्यप्रदेश ही है। नारी सदैव पूजनीय हैं। हम अपने देश को भी जननी मानकर भारत माता की जय कहकर पूजते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की योजनाएं महिलाओं के जीवन में हर कदम पर पक्की सहेली बनकर उनके साथ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को दमोह जिले के हटा में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन सह शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण प्रदेश के लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है। साथ ही बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों की प्रगति और आशीर्वाद से ही प्रदेश में समृद्धि आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दमोह जिले के लिए 405 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत के 13 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें लगभग 232 करोड़ रूपए की लागत से हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग (एसएच-55) के 73 किमी मार्ग के टू-लेन रोड के रूप में उन्नयन एवं चौड़ीकरण, 74 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से मडियादो से बर्धा किशनगढ़ सड़क निर्माण और 48 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से मड़ियादो से रजपुरा मार्ग के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास के मूल मंत्र को अपनाते हुए प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्ष बुंदेलखंड क्षेत्र के वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में स्टेट कैबिनेट की मीटिंग कर सरकार ने 27 हजार 500 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल में ही सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हुआ है। उन्होंने सभी माताओं-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 14 वर्ष से अधिक उम्र कीबेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं और दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है, इससे हमारी बेटियों का भविष्य आजीवन सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी वैक्सीन का टीका लगवाने वाली हटा की 8 बेटियों को मंच से प्रमाण पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।     हटा अ‍ब बनेगा शिवकाशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए हटा का नाम बदलकर इसे शिवकाशी नाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हटा श्री श्री 1008 देवश्री गौरीशंकर की नगरी है, इसलिए अब इसे शिवकाशी के रूप में ही जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों को और भी कई सौगातें दीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि हटा में नवीन आईटीआई भवन बनाया जाएगा। हटा में सर्वसुविधायुक्त नवीन नगर पालिका भवन एवं भव्य गीता भवन भी निर्मित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कार्य का दायदा बहुत विस्तृत है, इसलिए हटा के महाविद्यालय में अब कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन संकाय/विषय भी पढ़ाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विनती-मड़ियादौ-चौरईया मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा। हटा के शासकीय पीएमश्री महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में इंडोर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेरा में नया महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करते हुए कहा कि मड़ियादो एवं देवरी फतेहपुर में नया हायर सेकेण्डरी भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार नगर परिषद तेंदूखेड़ा में तारादेही तिराहे से चौरई तक मार्ग चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य कराए जाएंगे। नगर परिषद तेंदूखेड़ा में वार्ड क्रमांक 3 में सी.सी. रोड निर्माण कराया जाएगा। गहरा से चौपरा-सिमरी तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के जरिए बुंदेलखंड के हर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। खेतों में फसलें लहलहाएंगी, अब हटा से कोई रोजगार की तलाश में बाहर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब 55 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें 10 लाख हैक्टेयर रकबा तो पिछले 2 साल में ही बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। महिलाओं की खुशहाली में ही प्रदेश की खुशहाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 2 दिन पहले महिला दिवस मनाया है। अब आगे नवरात्रि आ रही है। राज्य सरकार नारी कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह सम्मानपूर्वक 1500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द लोकसभा और विधानसभा में बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। राज्य में नगरीय निकायों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटा विधायिका उमादेवी खटीक को जन्मदिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे हटावासियों की दीर्घकाल तक सेवा करती रहें।  हटा विधायिका खटीक ने स्वागत संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहली बार हटा विधानसभा क्षेत्र आए हैं। साथ में 405 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगातें भी लाये हैं। उन्होंने कहा कि नारी पूरे समाज के विकास की प्रमुख आधारशिला होती है। आज हमारी महिलाएं शिक्षा, सेना और हर क्षेत्र में देश को गौरव दिला रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मजबूती से काम हो रहा है। प्रदेश में हर बेटी का सम्मान और हर महिला को रोजगार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आज दमोह जिले के लिए अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन पूरा हुआ है। इससे इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लगेंगे।  कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) … Read more

अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल की धोखाधड़ी के कारण आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से निलंबन, जांच जारी

अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भोपाल अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी मामले में आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना से निलंबित राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा की जा रही है सतत निगरानी भोपाल  राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना अंतर्गत पात्र एवं जरूरतमंद हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने तथा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से सतत निगरानी की जा रही है। भोपाल के अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी के मामले पर संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना से निलंबित किया गया है। एजेंसी ने परीक्षण में पाया गया कि संबंधित चिकित्सालय द्वारा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपलब्ध पैकेजों का दुरुपयोग किया गया, अनाधिकृत आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया तथा मरीजों को अनावश्यक रूप से अधिक दिनों तक भर्ती रखकर योजना का अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार क्लेम प्रस्तुत न करने जैसी गंभीर कमियाँ भी सामने आईं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इस चिकित्सालय पर 69,800 रूपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जा चुका है। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद अनियमितताओं की पुनरावृत्ति किए जाने पर व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना से निलंबित किया गया है। साथ ही संबंधित चिकित्सालय को योजना से असम्बद्ध किए जाने की कार्रवाई भी की जाएगी। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना में पात्र हितग्राहियों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

तमिलनाडु में 24 बंधुआ श्रमिकों का रेस्क्यू, बैतूल और हरदा के 24 श्रमिक सुरक्षित घर लौटे

तमिलनाडु में बंधुआ बनाए गए 24 श्रमिकों का प्रशासन ने कराया सफल रेस्क्यू बैतूल के 20 श्रमिक और हरदा के 4 श्रमिकों की सुरक्षित हुई घर वापसी सभी ने राज्य सरकार का माना आभार प्रत्येक को मिलेगी 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बैतूल रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर एवं एसपी ने किया श्रमिकों का आत्मीय स्वागत भोपाल मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों के कल्याण के कार्य निरंतर कर रही हैं। तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए बैतूल जिले के 20 और हरदा के 4 श्रमिकों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन तथा वनवासी कल्याण आश्रम  के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। सभी श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय कलेक्टर  नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक  वीरेंद्र जैन ने आत्मीय स्वागत किया। वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष  महेश्वर भलावी, जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्टेशन पर सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई। कलेक्टर  सूर्यवंशी ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनके सुरक्षित घर पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग निरंतर उनके संपर्क में रहेंगे। साथ ही श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं। रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई तथा भोजन की भी व्यवस्था की गई।सुरक्षित वापसी पर श्रमिकों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन  आभार व्यक्त किया। जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत ने बताया कि उक्त श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  प्रकाश ऊईके माध्यम से मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को पुनः व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन द्वारा उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है। उन्होंने बताया कि कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले तथा 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई। उक्त कार्य में समाजसेवी  प्रवीण ढोलके ओर विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई ।  

बिजली चोरी के लंबित प्रकरणों का समाधान, लोक अदालत में 10 लाख तक के मामले तय होंगे

लोक अदालत में बिजली चोरी के 10 लाख रूपए तक के लंबित प्रकरणों के होंगे समझौते नेशनल लोक अदालत 14 मार्च को भोपाल  आगामी 14 मार्च को आयोजित नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने हेतु अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  लिटिगेशन स्तर पर  कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आकलित सिविल दायित्‍व राशि रू. 10 लाख तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 14 मार्च 2026 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।  

46 अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी, मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने जारी किए नियुक्ति पत्र

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने चयनित 46 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश किए जारी भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य की विद्युत उत्पादन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सीधी भर्ती प्रक्रिया में चयनित 46 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट https://www.mppgcl.mp.gov.in के कैरियर अनुभाग में अपलोड कर दिए गए हैं। राज्य की विद्युत कंपनियों में सीधी भर्ती के माध्यम से नियमित अंतराल पर रिक्त पदों की पूर्ति की जा रही है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा दिनांक 7 जुलाई 2025 को वर्ग-2, वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के अंतर्गत 18 विभिन्न पदों की पूर्ति के लिये भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। इसके अंतर्गत कंप्यूटर आधारित परीक्षा का आयोजन 3 से 5 नवंबर 2025 के बीच राज्य के विभिन्न शहरों में स्थित परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इसके पूर्व पिछले माह कंपनी द्वारा दस्तावेज सत्यापन तथा निर्धारित पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षण की प्रक्रिया पूर्ण उपरांत 180 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई थी। जारी नियुक्ति आदेशों के अनुसार वर्ग-2 के पदों के लिए चयनित 46 अभ्यर्थियों में सहायक अभियंता (यांत्रिकी) प्रशिक्षु 8, सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) प्रशिक्षु 5, सहायक अभियंता (इलेक्ट्रॉनिक्स) प्रशिक्षु 7, सहायक अभियंता (सिविल) प्रशिक्षु 16, पाली (शिफ्ट) रसायनज्ञ प्रशिक्षु 8 और कार्मिक अधिकारी प्रशिक्षु 2 अभ्यर्थी शामिल हैं। नियुक्ति आदेश पत्रों में अभ्यर्थियों के लिए पदस्थापना स्थल, रिपोर्टिंग की तिथि, समय-सीमा तथा आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। सभी चयनित अभ्यर्थियों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्देशों का अवलोकन कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करें। वर्ग-3 व वर्ग-4 के पद जिनमें कनिष्ठ अभियंता संयंत्र – अभियांत्रिकी, कनिष्ठ अभियंता संयंत्र–इलेक्ट्रिकल, कनिष्ठ अभियंता संयंत्र – इलेक्ट्रॉनिक्स, कनिष्ठ अभियंता सिविल, संयंत्र सहायक अभियांत्रिकी, संयंत्र सहायक इलेक्ट्रिकल, कार्यालय सहायक श्रेणी-3, भंडार सहायक, कनिष्ठ शीघ्रलेखक, अग्निशामक, सुरक्षा सैनिक, वार्ड बॉय शामिल हैं, के आदेश भी पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा शीघ्र जारी किए जाएंगे।  

MP शिक्षा विभाग का बड़ा कदम, 800 प्रोफेसरों का डिमोशन, संस्थानों में भारी प्रतिक्रिया

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी करते ही प्रदेश के कॉलेज प्रोफेसरों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने यह सूची 1 अप्रैल 2012 की स्थिति के आधार पर विषयवार प्रकाशित की है। सूची जारी होने के बाद सामने आया कि इसमें करीब 800 ऐसे प्रोफेसरों के नाम असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दर्ज कर दिए गए क है, जिन्हें वर्ष 2006, 2007 और 2009 में ही प्रोफेसर का पदनाम दिया जा चुका था। सूची में सामने आई गड़बड़ियां वरिष्ठता सूची के अनुसार ये सभी नाम सहायक प्राध्यापक की श्रेणी में दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इनमें से कई शिक्षकों को वर्षों पहले प्रोफेसर का पदनाम मिल चुका है। इतना ही नहीं, इन प्रोफेसरों में से कई वर्तमान में उच्च पदों पर भी कार्यरत है। कुछ लोग अतिरिक्त संचालक (एडी), विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार और यहां तक कि कुलपति जैसे पदों पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके है। 15 दिनों के भीतर दर्ज करा सकते है आपत्ति विभाग ने सूची जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह लोक सेवकों की अंतरिम वरिष्ठता सूची है। यदि किसी को इसमें त्रुटि या आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपने दावे-आपत्तियों के साथ अभ्यावेदन उचित माध्यम से आयुक्त, उच्च शिक्षा, मध्यप्रदेश को भेज सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले अभ्यावेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। तालमेल की कमी- प्रांताध्यक्ष विभाग और राज्य शासन के बीच तालमेल की कमी है। इस तरह की स्थिति कई मामलों में बनती है। यह स्थिति ठीक नहीं है। यह कोर्ट केस की स्थिति बनती है तो इससे न्यायलय में शासन का पक्ष कमजोर होगा।- डॉ. आनंद शर्मा, प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक 

भवानी चौक पर 14 मार्च को कवि सम्मेलन, रात 8 बजे से रंगीन कार्यक्रम में होंगे हास्य और व्यंग्य के प्रदर्शन

भोपाल  होली और रंगपंचमी के उत्सव के बीच राजधानी में साहित्यिक रंग भी घुलेंगे। शहर के सोमवारा स्थित भवानी चौक में 14 मार्च शनिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। रात 8 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को वीर रस, हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियां सुनाएंगे। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू उत्सव समिति भोपाल द्वारा किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि होली और रंगपंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और साहित्यिक अभिव्यक्ति का भी उत्सव है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष की तरह इस बार भी कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। ये कवि पहुंचेंगे भोपाल कवि सम्मेलन का संचालन सबरस कवि शशिकांत यादव ‘शशि’ (देवास) करेंगे। मंच पर कविता तिवारी (लखनऊ), राम भदावर (जयपुर) और सूर्यकांत चतुर्वेदी (भोपाल) वीर रस की रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। वहीं हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुति से दिनेश ‘देसी घी’ (शाजापुर), मुन्ना बैट्री (मंदसौर) और अमित शुक्ला (प्रयागराज) माहौल को हल्का और रोचक बनाएंगे। कार्यक्रम के संयोजक हिंदू उत्सव समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल चौधरी होंगे, जो आयोजन की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। समिति ने शहर के साहित्य प्रेमियों और नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होकर कवि सम्मेलन का आनंद लेने की अपील की है।

PWD की योजना: MP में 3 नई सड़कें और 50 अतिक्रमणों पर कड़ा एक्शन

ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने तीन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। कुल 5.80 किलोमीटर लंबाई वाली इन सड़कों पर करीब 7 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत आएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अप्रैल माह से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही हैं। निर्माण कार्य के दौरान सडक़ों पर मौजूद करीब 50 अतिक्रमणों को चिह्नित कर हटाया जाएगा, जिससे सड़कें चौड़ी और सुरक्षित बन सकें। ये हैं प्रस्तावित तीन सड़कें नयागांव रायरू बायपास से रेडियो रूम तक लंबाई: 0.50 किमी अनुमानित लागत: 104.95 लाख रुपए सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी चौराहा मार्ग (नाला निर्माण सहित) लंबाई: 1.30 किमी अनुमानित लागत: 232.95 लाख रुपए रायरू गांव से बॉडन का पुरा होते हुए जोर वाले बाबा गंगापुर वाया प्यारा सिंह का पुरा तक लंबाई: 4.00 किमी अनुमानित लागत: 362.55 लाख रुपए कुल लंबाई 5.80 किमी और कुल अनुमानित लागत 7.17 करोड़ रुपए है। यातायात और जल निकासी में सुधार इन सड़कों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियों, स्कूल-कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। विशेष रूप से सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी मार्ग पर नाला निर्माण से जल निकासी की समस्या भी दूर होगी। 5.80 किमी लंबाई वाली तीन सड़कों को सात करोड़ से ज्यादा की लागत से बनाया जाएगा। अभी सड़कों को लेकर टेंडर लगाए जा चुके हैं, टेंडर ओपन होते ही अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होगा। – देवेंद्र भदौरिया, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी  

सरकार का कदम: संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी, योजनाओं के फीडबैक के लिए हजारों युवाओं को लगाया मैदान में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 33,000 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विभागों की योजनाओं को निरंतरता दी गई। इस बड़े वित्तीय आवंटन के माध्यम से प्रदेश में जारी विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार भूमि स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क खुद वहन करेगी, जिससे सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। कैबिनेट ने प्रदेश में योजनाओं के जमीनी फीडबैक के लिए सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम शुरू करने का फैसला भी किया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा। इसके लिए हर विकास खंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से होगी। कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा     हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन होगा     कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति होगी     युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलेगा एक साल के अनुबंध पर नियुक्ति होगी इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं का फीडबैक और जमीनी रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च होंगे। भूमि स्वामित्व योजना क्या है     भूमि स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 2020 में की थी।     ड्रोन सर्वे के जरिए गांवों की जमीन का सीमांकन किया जाता है।     ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं।     इससे भूमि विवाद कम होते हैं।     बैंक से लोन लेना आसान होता है। अनुबंध पर रखे जाएंगे युवा चयनित युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा और एक साल के अनुबंध पर सेवा में रखा जाएगा। कुल 4865 युवाओं का चयन होगा और इस कार्यक्रम पर तीन साल में करीब 170 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति और फीडबैक की रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए डैशबोर्ड और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार भूमि स्वामित्व योजना में प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों को जमीन का स्वामित्व मिलेगा। इस योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने वर्ष 2020 में की थी। ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी की जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड (कानूनी स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से ऋण लेना भी आसान होता है। सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसमें महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस, दिव्यांगों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है। स्वास्थ्य केंद्रों में 51 पदों पर भर्ती मंत्री काश्यप ने बताया कि मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती की जाएगी। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। एक जिला-एक उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग संयुक्त कार्ययोजना के तहत काम करेंगे।                          

MP में नया फोरलेन मार्ग: 50 से ज्यादा गांवों से गुजरेगा, PM मोदी ने दी हरी झंडी

भोपाल  मोदी कैबिनेट ने मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। मोदी कैबिनेट की बैठक में बदनावर-पेटलावाद-थंदला-तिमारवानी खंड से 80.45 किलोमीटर लंबे चार लेन के कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,839.42 करोड़ रुपये है। स्वीकृत कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। इस खंड को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिस पर गति 80-100 किमी प्रति घंटा होगी। 50 गांवों से होकर 80 किमी लंबा फोरलेन बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज नया फोरलेन 80.45 किमी लंबा है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 3839.42 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो साल में इस प्रोजेक्ट का काम पूरा होगा। शासन-प्रशासन स्तर पर तैयारियां चल रही है। यह फोरलेन करीब 50 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। जिनमें बदनावर क्षेत्र के 14 गांव भी शामिल हैं। इस फोरलेन रोड के बनने के बाद यात्रा का समय करीब एक घंटे तक कम होने की उम्मीद है। प्रशासनिक सर्वे पूरा, जल्द अवॉर्ड मिलेगा बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज फोरलेन निर्माण में कई जगह सरकारी जमीन के साथ ही निजी जमीन का उपयोग होना है। इसके लिए सभी सरकारी विभागों द्वारा एक ज्वाइंट सर्वे किया गया है।  बदनावर एसडीएम प्रियंका मिमरोट द्वारा सभी विभागों के साथ एक मीटिंग की गई है। इसमें सर्वे पर विस्तृत चर्चा हुई। तहसीलदार सुरेश नागर ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में सभी शासकीय और निजी जमीन का अधिग्रहण होना है। किस गांव में कितनी जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। इसकी रिपोर्ट बनाई गई है। किसानों के खेत, कुएं, पेड़-पौधों के साथ बोरिंग आदि की जानकारी जुटाई गई है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा और दावे-आपत्ति बुलाए जाएंगे। ये होगा फायदा     यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर स्थित टिमरवानी इंटरचेंज से सीधे जोड़ेगा।     इस फोरलेन के बनने से यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आने की उम्मीद है।     यह मार्ग धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।     इस कॉरिडोर के अपग्रेडेशन से अप्रैल-2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।

मेंटल हेल्थ को बढ़ावा देने के लिए शक्ति संवाद कार्यक्रम में हुआ अहम एमओयू

भोपाल  वो शक्ति हैं, सशक्त हैं, वो भारत की नारी हैं… न कम हैं, न ज़्यादा हैं, वो सब में बराबरी की अधिकारी हैं।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस विचार को उद्धृत करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष  विजया रहाटकर ने कहा कि आज का भारत महिलाओं की शक्ति, क्षमता और नेतृत्व से नई दिशा प्राप्त कर रहा है।  रहाटकर भोपाल में आज रवीन्द्र भवन में “शक्ति संवाद” कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहीं थी। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण, सरकारी नीतियों, सामाजिक पहलों और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य व समग्र कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।  विजया रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए देशभर में “आयोग आपके द्वार” के तहत जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, ताकि किसी भी महिला को न्याय मिलने में देरी न हो। उन्होंने बताया कि इस पहल की पहली जनसुनवाई भोपाल से प्रारंभ हुई थी और आज सौवीं जनसुनवाई भी भोपाल में आयोजित होना इस शहर के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की बदलती तस्वीर में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह परिवर्तन केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीतिगत और योजनाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने के लिए किए गए कानूनी सुधारों का भी उल्लेख किया।  रहाटकर ने बताया कि हाल के वर्षों में 4 नए श्रम कानून लागू किए गए हैं, जिनमें महिलाओं के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें महिलाएँ सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट कार्य भी कर सकती हैं। साथ ही समान वेतन की भी हकदार होंगी। साथ ही लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए “शक्ति वंदन” अधिनियम के माध्यम से लगभग 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।  रहाटकर ने तकनीक और नवाचार की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सकारात्मक उपयोग महिलाओं के कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महिलाओं के लिए विशेष एआई आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय और लक्ष्यों को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकें। राष्ट्रीय महिला आयोग विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही महिलाओं को एआई प्रशिक्षण देकर सशक्त किया जा रहा है। आयुक्त महिला एवं बाल विकास विभाग  निधि निवेदिता ने कहा कि भारत का संविधान महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, महिला सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी कि इन योजनाओं से महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। महिला सुरक्षा शाखा के स्पेशल डीजी  अनिल कुमार ने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और जब परिवार में मनमुटाव या असंतुलन उत्पन्न होता है तो परिस्थितियाँ गंभीर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि समाज में कई बार लोग गलत को गलत कहना बंद कर देते हैं, जिससे समस्याएँ बढ़ती हैं। शिकायत यदि सही समय पर और सही स्थान पर की जाए तो सत्य स्वयं सामने आ जाता है और न्याय त्वरित मिलता है। कार्यक्रम में सैनिक परिवारों के कल्याण से जुड़े विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ मिलकर आर्मी पर्सनल की पत्नियों और वीर नारियों के लिए आर्थिक और सामाजिक सहयोग की योजनाएँ संचालित करने की पहल की है। इसके अंतर्गत आर्मी कैंट क्षेत्र में “तेरे मेरे सपने” केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जहाँ सैनिक परिवारों की महिलाओं के लिए कौशल विकास, सामाजिक सहयोग और वित्तीय समन्वय से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। राज्य महिला आयोग के सचिव  सुरेश तोमर ने बताया कि जल्द ही झाबुआ में सायबर वेलबीइंग सेन्टर खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि समाज में फैली कुप्रथाओं को चिन्हांकित कर इसके समाधान और कानून के लिए लॉ यूनिवर्सिटी के साथ कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर महिलाओं और बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा साइको-सोशल वेलबीइंग को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और स्काई सोशल संस्था के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके माध्यम से राज्य में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, परामर्श और सहायता से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।  

वन्य-जीव तस्कर वारंटी आरोपी मिश्रीलाल गिरफ्तार ग्वालियर से सीबीआई ने एसटीएसएफ के सहयोग से आरोपी को पकड़ा

भोपाल स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश की शिवपुरी इकाई एवं केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 9 वर्षों से फरार एवं स्थाई वारंटी वन्य-जीव तस्कर आरोपी मिश्रीलाल माहौर पिता ख्याली राम माहौर निवासी गोहद जिला भिण्ड को मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर की परमासीस ईस्ट कॉलोनी के पास से घेराबंदी कर संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बुधवार 11 मार्च को सीबीआई द्वारा भोपाल न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा। स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा चंबल नदी में पाये जाने वाले अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के वन्य-प्राणी टर्टल्स, रेड क्राउन रूफ टर्टल की विदेशों में बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 5 मई, 2017 को वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में कुल 16 आरोपियों को देश के 4 राज्यों से गिरफ्तार किया गया था। इसमें 11 विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इस प्रकरण को सीबीआई को हस्तांतरित किया गया। सीबीआई द्वारा उक्त प्रकरण में कार्रवाई करते हुए 3 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

राज्य स्तरीय NSS शिविर में युवाओं की पहल, स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाया

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग तथा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में पंडित दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट परिसर में आयोजित 7 दिवसीय राज्य स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर के चतुर्थ दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन गतिविधियों से हुई। स्वयंसेवकों ने प्रभात फेरी निकालकर समाज में जागरूकता का संदेश दिया तथा गुरुओं के मार्गदर्शन में योगाभ्यास किया। इसके बाद सरयू धारा सरोवर परिसर, चित्रकूट में श्रमदान एवं वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया जिसमें राज्य राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी  मनोज अग्निहोत्री, शिविर प्रशिक्षक  राहुल सिंह परिहार, शिविर संगठक  अभिमन्यु प्रसाद सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम अधिकारियों ने भी स्वयंसेवकों के साथ मिलकर श्रमदान किया। बौद्धिक सत्र के प्रारंभ में राज्य एनएसएस अधिकारी  मनोज अग्निहोत्री ने अतिथियों का शॉल एवं तिलक लगाकर स्वागत किया। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने युवाओं द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग एवं उसकी सकारात्मक एवं नकारात्मक परिणाम, सायबर ठगी, सायबर फिशिंग और सोशल मीडिया पर चर्चा कि एवं भ्रामक विज्ञापन से सतर्क रहने की बात कही और साथ ही स्वयंसेवकों से उनके सोशल मीडिया के अनुभव सुने और उन्हें मार्गदर्शित किया। अपर कलेक्टर, सतना  शैलेन्द्र कुमार सिंह () ने राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राज्य स्तरीय शिविरों में सहभागिता युवाओं के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने सभी कार्यक्रम समन्वयकों एवं अधिकारियों को मिलमैहर माता मंदिर की चुनरी एवं तस्वीर भेंट की तथा लगभग 600 स्वयंसेवकों को डॉक्यूमेंट फाइल और कैप वितरित किए। आगाज निदेशक  प्रशांत दुबे ने बौद्धिक सत्र की मुख्य थीम बाल संरक्षण पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने बाल अपराध की कानूनी परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि बच्चों को सभी प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं और समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें सही मार्गदर्शन और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। बाल सुरक्षा अधिकारी, यूनिसेफ  गोविंद बेनीवाल ने बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल यौन हिंसा जैसे गंभीर विषयों पर संवादात्मक चर्चा की। उन्होंने बाल श्रम की रोकथाम के लिए पेंसिल पोर्टल तथा आपात स्थिति में सहायता के लिये 1098 हेल्पलाइन की जानकारी दी। साथ ही उपस्थित स्वयंसेवकों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का संकल्प भी दिलाया। वित्त नियंत्रक, एपीएस विश्वविद्यालय आर.डी. चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर युवा स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बौद्धिक सत्र में मुख्य अतिथि की भूमिका स्वयंसेवक  मीत सिंह चंदेल (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर) ने निभाई तथा स्वयंसेविका सु संजना (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर) ने सत्र की अध्यक्षता की। सत्र का संचालन स्वयंसेविका सु श्वेता गौतम एवं स्वयंसेवक  ओम ने किया तथा अंत में डॉ. अशोक बिश्नोई द्वारा आभार व्यक्त किया गया। सायंकालीन सत्र में प्रतिभागी विश्वविद्यालयों के स्वयं सेवकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया।  

स्‍थान रिक्‍त होने वाले दूसरे चरण के लि‍ए 6 अप्रैल से 10 जून तक कर सकेंगे आवेदन

भोपाल  राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शासकीय छात्रावासों में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से विशेष ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका एवं बालक छात्रावासों में विशेष रूप से वंचित वर्ग के बालक-बालिकाओं को उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली प्रारंभ की गई है। संचालक  सिंह ने बताया कि ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण और प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन एवं पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए विकसित किया गया है। ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप-I एवं टाइप-III तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस (एनएससीबी) बालक/बालिका छात्रावासों के पारदर्शी प्रबंधन और उनमें प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है। https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा आवेदन छात्रावासों में कक्षा 6वीं एवं अन्‍य कक्षाओं की रिक्‍त सीटों पर प्रवेश के लि‍ए विद्यार्थी प्रथम चरण में 30 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रथम चरण के बाद सीट्स रिक्त रहने की स्थिति में द्व‍ितीय चरण के आवेदन की प्रक्र‍िया शुरू होगी। यह 06 अप्रैल 2026 से 10 जून 2026 तक चलेगी। छात्रावास में प्रवेश के लिए अभिभावकों, विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेन्टर के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा। इसके साथ ही यदि किसी अभिभावक/पालक/विद्यार्थी को आवेदन फॉर्म भरने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे संबंधित वार्डन के सहयोग से भी आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। छात्रावासों में लक्ष्य के अनुसार 50, 100, 150, 175, 200, 220 तथा 275 सीटें उपलब्ध हैं। कक्षा 6 से 8 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-I) एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिया जाता है। वहीं कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-III) में प्रवेश की पात्रता होती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए निर्धारित हैं, जबकि 25 प्रतिशत सीटें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन-यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें अस्थि बाधित, अनाथ एवं बेसहारा बालिकाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाती है। प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से 8 तक के पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। ये छात्रावास विशेष रूप से शाला अप्रवेशी एवं शाला त्यागी बालकों के लिए संचालित किए जाते हैं। ऐसे बालकों को उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दर्ज कर विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से आवश्यक दक्षताएं विकसित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। छात्रावासों में विशेष रूप से ऐसे बच्चों को प्रवेश दिया जाता है, जो रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड के प्लेटफॉर्म पर रहने वाले, पन्नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्चे, घर से भटके हुए बच्चे, विमुक्त (डिनोटीफाइड ट्राइब्स) एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवारों के बच्चे और वन ग्राम पट्टाधारी परिवारों के बच्चों को आवासीय सुविधाएं प्रदान कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कराई जाती है। प्रदेश में 597 छात्रावास हैं संचालित राज्य शिक्षा केंद्र अंतर्गत प्रदेश में कुल 597 छात्रावास संचालित है। इनमें 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास तथा 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावास शामिल हैं। इन छात्रावासों में ऐसे बालक-बालिकाओं को आवासीय सुविधा प्रदान की जाती है, जो शाला से बाहर हैं या प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं। साथ ही पारिवारिक कारणों से परिवार के साथ रहते हुए शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उन्हें छात्रावास में रखकर प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।  

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