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जीपीएफ संबंधी समस्या के निराकरण के लिए जबलपुर में लगेगा 16 मार्च को शिविर

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की विभिन्न उत्तरवर्ती कंपनियों से सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के सामान्य भविष्यनिधि भुगतान या अंतिम या अनंतिम आहरण आदि से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के संबंध में एक शिविर का आयोजन 16 मार्च को किया गया है। शिविर का आयोजन विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्तिभवन जबलपुर में स्थित केन्द्रीय पुस्तकालय में प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होगा। शिविर में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व कार्मिकों द्वारा सामान्य भविष्यनिधि के अंतिम भुगतान की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण और जीपीएफ पार्ट फाइनल एवं ऋण (लोन) आहरण के प्रकरण की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। कंपनी ने समस्त उत्तरवर्ती विद्युत कंपनियों के कार्मिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस शिविर का लाभ उठायें।  

सरकारी नौकरी का मौका: एमपी में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के पदों पर भर्ती शुरू

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। बोर्ड ने ‘ग्रुप-5’ के तहत पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में 291 रिक्त पदों को भरा जाएगा। भर्ती का विवरण और पद नोटिफिकेशन के तहत स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) और अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है जो चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहते हैं। पदों की संख्या और आरक्षण का विवरण आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिया गया है, जिसे उम्मीदवार बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता मानदंड) शैक्षणिक योग्यता: आवेदक ने संबंधित विषय में 12वीं (साइंस स्ट्रीम) पास की हो। इसके साथ ही, पद के अनुसार संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा या डिग्री (जैसे- GNM, B.Sc Nursing, B.Pharma, या लैब टेक्नोलॉजी डिप्लोमा) होना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवार का मध्य प्रदेश के संबंधित काउंसिल (जैसे- नर्सिंग या फार्मेसी काउंसिल) में रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। आयु सीमा: आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश के मूल निवासी आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) और महिलाओं को सरकारी नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके। भर्ती के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू होगी। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 मार्च 2026 है। आवेदन शुल्क सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/दिव्यांग) के लिए यह 250 रुपये है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल शुल्क का भुगतान भी करना होगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा के आधार पर होगा। परीक्षा में दो भाग होंगे। सामान्य भाग में सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और रगजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।तकनीकी भाग उम्मीदवार के संबंधित विषय (जिस पद के लिए आवेदन किया है) पर आधारित होगा। परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और अन्य जिला केंद्रों पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें?     सबसे पहले MPESB की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं। 2. ‘Online Form’ सेक्शन में जाकर ‘Group-5 Paramedical & Nursing Recruitment 2026’ के लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन (MP Online Profile) पूरा करें। 4. आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट अपलोड करें। 5. आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

डॉ. यादव के नेतृत्व में जल प्रबंधन अभियान तेज, जनभागीदारी से मिल रहा व्यापक समर्थन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये प्रभावी रूप से जनभागीदारी की पहल की गई है। प्रदेश में “जल महोत्सव-2026” आयोजित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह अभियान केवल पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन के लिये समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाने की अवधारणा को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के चयनित ग्रामों में 8 मार्च से 22 मार्च 2026 के बीच जल महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य उन ग्रामों की उपलब्धियों को सामने लाना है जहाँ हर घर तक नल से जल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है और पेयजल योजनाओं का संचालन, प्रबंधन तथा रख-रखाव ग्राम पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जल महोत्सव ग्रामीण समुदाय को जल प्रबंधन की जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरूक एवं सहभागी बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल जीवन मिशन को एक व्यापक जनभागीदारी आधारित पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जल महोत्सव के माध्यम से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के सुचारु संचालन और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निरंतर उल्लेखनीय कार्य किये जाते रहे है। देश का पहला “जल अर्पण दिवस” राजगढ़ जिले में गोरखपुरा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 23 दिसम्बर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसने जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। जल महोत्सव के लिए ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहाँ हर घर जल की स्थिति सत्यापित हो चुकी है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन प्रभावी रूप से किया जा रहा है। प्रत्येक जिले से ऐसे 2 ग्राम चिन्हित किए गए हैं जहाँ जल जीवन मिशन के मानकों के अनुरूप जल प्रदाय की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इन ग्रामों में कार्यक्रमों का आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से किया जा रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित महोत्सव में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वाल्वमैन, स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सक्रिय सदस्यों को चिन्हित किया जाएगा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर के द्वारा इनका सम्मान किया जाएगा, जिससे समुदाय आधारित जल प्रबंधन के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर उपलब्ध मद से अधिकतम 25 हजार रु. तक की राशि व्यय की जा सकेगी। प्रदेश की विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में यह आयोजन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, नीमच, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, उज्जैन तथा बड़वानी सहित अन्य जिलों के चयनित ग्राम शामिल हैं। जल महोत्सव-2026 के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता की दिशा में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी रूप से संचालित किया जा सके।  

ओरल कैंसर रोकथाम के लिए बड़ा कदम: भोपाल GMC में बनेगा नोडल सेंटर, पूरे MP के डॉक्टरों को ट्रेनिंग

भोपाल  प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में पदस्थ दंत चिकित्सकों (डेंटिस्ट) और चिकित्सा अधिकारियों में मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान के लिए उनकी तकनीकी समझ बढ़ाई जाएगी। इसके लिए भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रदेश भर में मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नोडल ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका दी है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और विशेषज्ञों का प्रशिक्षण अक्सर देखा गया है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य संक्रमण या छाला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देरी के कारण मरीज तब अस्पताल पहुंचता है जब बीमारी एडवांस चरण (थर्ड या फोर्थ स्टेज) में होती है। जीएमसी में होने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान डेंटल और ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डेंटिस्ट और चिकित्सा अधिकारियों को सिखाएंगे कि कैसे मुंह के अंदर होने वाले सफेद दाग (ल्यूकोप्लाकिया), लाल चकत्ते या लंबे समय से न भरने वाले छालों को देखकर कैंसर की आशंका का सटीक पता लगाया जाए। मृत्यु दर में कमी और मास्टर ट्रेनर मॉडल अधिकारियों का कहना है कि इस मुहिम से न केवल प्रदेश में ओरल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि बड़े अस्पतालों पर बढ़ने वाला मरीजों का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। यह प्रशिक्षण ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ मॉडल पर आधारित होगा, यानी यहाँ से सीखकर जाने वाले डॉक्टर अपने जिले के अन्य छोटे केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। रेफरल सिस्टम होगा मजबूत एक बार जब जिलों में पदस्थ डॉक्टर इस स्क्रीनिंग में माहिर हो जाएंगे, तो वे संदिग्ध मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर सकेंगे। इससे मरीजों का समय बचेगा और इलाज की सफलता की दर बढ़ेगी। कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों पर रहेगी नजर सफेद या लाल धब्बे – मुंह के अंदर ऐसे पैच जो रगड़ने पर भी न हटें। असामान्य गांठ – मसूड़ों या गालों के अंदर की तरफ गांठ का महसूस होना। पुराने छाले – ऐसे छाले जो दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा के बाद भी ठीक न हों। जबड़े में जकड़न – मुंह खोलने में परेशानी होना या निगलते समय दर्द होना। विभागाध्यक्ष का वक्तव्य प्रदेश के 51 जिलों के दंत चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ओरल कैंसर के शीघ्र निदान पर है। यदि शुरुआती चरण में ही कैंसर के लक्षणों की पहचान हो जाए, तो मरीज की जान बचाना काफी आसान हो जाता है। – डॉ. अनुज भार्गव, विभागाध्यक्ष, डेंटल सर्जरी विभाग, जीएमसी भोपाल

शहडोल में ‘पुनर्जन्म’ जैसी घटना: 120 जूल इलेक्ट्रिक शॉक से महिला की लौटी धड़कनें

शहडोल जिला अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की तत्परता से एक महिला को नई जिंदगी मिली। दिल की धड़कन रुकने के बाद डिफिब्रिलेटर शॉक देने पर मरीज का हृदय दोबारा धड़कने लगा। इस सफल उपचार के बाद डॉक्टरों और परिजनों ने राहत की सांस ली। गंभीर हालत में भर्ती करवाया गया था सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि हृदय रोग से पीड़ित महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल के फीमेल वार्ड में भर्ती कराया गया था। उस समय मरीज का ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था और उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। डिफिब्रिलेटर शॉक देने का निर्णय मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक डॉ. वसीम खान ने बिना देर किए महिला को आईसीयू में शिफ्ट कर डिफिब्रिलेटर शॉक देने का निर्णय लिया। उपचार शुरू करने से पहले परिजनों को मरीज की स्थिति और संभावित जोखिम के बारे में जानकारी दी गई और लिखित सहमति ली गई। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान महिला को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया और जरूरी इमरजेंसी दवाओं के साथ उसकी लगातार निगरानी की गई। कुछ ही देर बाद डिफिब्रिलेटर शॉक का असर हुआ और मरीज का दिल, जो कुछ समय के लिए रुक गया था, फिर से धड़कने लगा।  

दिनदहाड़े डकैती से दहशत: खंडवा में मजदूरों को बंधक बनाकर बंदूक और नकदी ले गए बदमाश

खंडवा नर्मदानगर थाना क्षेत्र के ग्राम पामाखेड़ी में गुरुवार सुबह दिनदहाड़े डकैती की वारदात से क्षेत्र में दहशत फैल गई। काले रंग की कार से आए सात से आठ नकाबपोश बदमाशों ने जयंती माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललित-वासुदेव सोलंकी के खेत पर बने मकान में धावा बोल दिया। बदमाशों ने घर पर मौजूद तीन मजदूरों को रस्सी से बांधकर कमरे में बंद कर दिया और इत्मीनान से वारदात को अंजाम दिया। बदमाश घर से 12 बोर की लायसेंसी बंदूक और 1.60 लाख रुपये नकदी ले गए। जानकारी के अनुसार घटना सुबह करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच की है।उस समय मकान मालिक ललित सोलंकी अपने परिवार के साथ देवास जिले के सतवास में एक विवाह समारोह में शामिल होने गए हुए थे।घर पर दो खेतीहर मजदूर मौजूद थे।इसी दौरान काले रंग की कार से आए नकाबपोश बदमाशों ने घर में घुसकर मजदूरों को पकड़ लिया और रस्सी से बांध दिया। तीसरा मजदूर तो आया तो उसे बना लिया बंधक इसी बीच ललित सोलंकी का एक नौकर पशुओं का दूध निकालने के लिए वहां पहुंचा तो बदमाशों ने उसे भी पकड़कर बांध दिया। तीनों मजदूरों को मकान के पीछे बने कमरे में बंद कर दिया गया।इसके बाद बदमाशों ने घर के अंदर तलाशी ली और सामान अस्त-व्यस्त कर दिया। बदमाश अपने साथ एक 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक और करीब एक लाख साठ हजार रुपये नकद लेकर फरार हो गए। चौथा मजदूर पहुंचा तब लगी डकैती की सूचना     घटना की जानकारी तब सामने आई जब सोलंकी का एक अन्य मजदूर पशुओं को खोलकर खेत ले जाने के लिए पहुंचा।     उसने बंधे मजदूरों को देखा और तुरंत इसकी सूचना ललित सोलंकी को दी।     इसके बाद सोलंकी ने नर्मदानगर थाने में डकैती की सूचना दी।     सूचना मिलते ही थाना प्रभारी विकास खींची पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।     खंडवा से एफएसएल टीम को भी बुलाया गया है, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए।     पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच कर रही है। सात-आठ माह पहले भी लूट का प्रयास बताया जा रहा है कि ललित सोलंकी अपने खेत में बने मकान में परिवार के साथ रहते हैं। करीब सात-आठ महीने पहले भी अज्ञात बदमाशों ने यहां लूट का असफल प्रयास किया था। सुबह के समय हुई इस डकैती की घटना से पामाखेड़ी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है।पुलिस का कहना है कि आरोपितों की तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही बदमाशों को पकड़ लिया जाएगा।  

पैक्स एवं विपणन सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण हेतु कमेटी गठन के दिए निर्देश

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग की वर्तमान गतिविधियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और विपणन सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी सहकारी संस्थाओं की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर उनके संचालन, संरचना और कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में सुझाव देगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मंत्री  सारंग ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषि कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, ऐसे में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि वर्ष को ध्यान में रखते हुए सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। मंत्री  सारंग ने कहा कि पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत इकाई के रूप में विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए पैक्स की सदस्यता बढ़ाने के उद्देश्य से अप्रैल माह में प्रदेशभर में वृहद सदस्यता अभियान चलाया जाए, जिसके तहत लगभग 10 लाख किसानों को सहकारिता से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को सहकारिता से जोड़ने से ग्रामीण स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और किसानों को संस्थागत सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा। मंत्री  सारंग ने खाद वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि डबल लॉक की स्थिति में नगद भुगतान के माध्यम से पैक्स के जरिए खाद वितरण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बन सकेगी। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता  डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता  मनोज पुष्प सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा की शादी पर घमासान, डायरेक्टर ने कहा — ‘मेरे साथ विश्वासघात, यह लव जिहाद’

खरगोन महाकुंभ में वायरल होने के बाद चर्चा में आई मोनालिसा भोंसले के आज प्रेमी फरमान खान से विवाह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कोई बगावत नहीं बल्कि ‘लव जिहाद’ का मामला है। उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा के करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी, लेकिन घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से आहत कर दिया है। केरल में पुलिस सुरक्षा और मंदिर में शादी अभिनेत्री बनने की राह पर चल रही मोनालिसा ने अपने प्रेमी फरमान खान के साथ केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित थम्पानूर पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिस से मदद मांगी और बाद में मंदिर में जाकर आज उससे शादी कर ली। बताया जा रहा है कि मोनालिसा और फरमान खान के बीच करीब डेढ़ साल पहले फेसबुक के माध्यम से बातचीत शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनका रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया। महाकुंभ से लेकर फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ तक का सफर मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि महाकुंभ के दौरान मोनालिसा का वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने उसकी सादगी और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उसे अपनी फिल्म में अभिनेत्री बनाने का फैसला किया था। उन्होंने बताया कि उस समय देश-दुनिया में इस निर्णय का स्वागत हुआ था। हालांकि, उनके अनुसार कुछ विरोधियों को यह बात पसंद नहीं आई और उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। निर्देशक का संघर्ष और व्यक्तिगत निवेश उन्होंने कहा कि जेल में रहते हुए भी उन्होंने अपनी फिल्म की कहानी लिखी और बाद में फिल्म पूरी की। मिश्रा का दावा है कि मोनालिसा के करियर को बनाने के लिए उन्होंने काफी आर्थिक और व्यक्तिगत प्रयास किए, यहां तक कि फिल्म को पूरा करने के लिए उन्होंने बड़ा कर्ज भी लिया। मिश्रा ने यह भी कहा कि मोनालिसा का पारिवारिक जीवन काफी जटिल रहा है और उसने कई बार अपने निजी संघर्षों के बारे में उनसे चर्चा की थी। उनके अनुसार मोनालिसा अपने परिवार की परिस्थितियों को लेकर भावुक रहती थी और कई बार उसने अपनी भावनाएं उनसे साझा की थीं। विश्वासघात और षड्यंत्र का दावा निर्देशक ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मोनालिसा को उनके प्रभाव से दूर करने की कोशिश की और उसे अलग दिशा में प्रभावित किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को उन्होंने मोनालिसा की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए जोड़ा था, उनमें से कुछ ने बाद में उनके विश्वास को तोड़ा। मिश्रा के अनुसार वर्तमान घटनाक्रम ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जिस लड़की को उन्होंने आगे बढ़ाने की कोशिश की, आज उसी के फैसले ने उन्हें जवाब देने की स्थिति में नहीं छोड़ा है। पारदी समुदाय से इंटरनेट सेंसेशन बनने की कहानी मोनालिसा भोंसले मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर के वार्ड नंबर 9 में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वह पारदी समुदाय से संबंध रखती हैं, जो पारंपरिक रूप से अलग-अलग जगहों पर घूमकर रुद्राक्ष और पत्थर की मालाएं बेचने का काम करता है। इस समुदाय को करीब चार दशक पहले इस वार्ड में बसाया गया था। प्रयागराज के महाकुंभ में रुद्राक्ष की माला बेचते समय उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद वह इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। उनकी लोकप्रियता से प्रभावित होकर फिल्म निर्माता सनोज मिश्रा ने उन्हें अपनी नई फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया। उन्होंने जी-जान लगाकर मोनालिसा को अभिनय सीखने में भी भरपूर मदद की।  

भारत मंडपम में महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम होगा: आयुक्त भोंडवे

महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास के संगम का साक्षी बनेगा भारत मंडपम: आयुक्त  भोंडवे नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित महोत्सव में मध्यप्रदेश की 300 अमृत मित्र महिलाएँ होंगी सम्मिलित केंद्रीय मंत्री  खट्टर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को करेंगे सम्मानित भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि विभाग द्वारा शहरी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1,028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में ‘जल गुणवत्ता परीक्षण’ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये समूह सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के ‘वुमन फॉर ट्रीज़’ कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं उनकी सुरक्षा का दायित्व का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। अमृत मित्र महोत्सव में मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ उत्साहपूर्वक भाग लेंगी। इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों की अमृत मित्र महिलाएँ भी सम्मिलित हो रही हैं। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अमृत 2.0 के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करने के लिये शुक्रवार 3 मार्च को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम’ में “अमृत मित्र महोत्सव” का भव्य आयोजन किया जा रहा है।इस राष्ट्रीय समागम में देशभर से ‘अमृत मित्र’ के रूप में कार्यरत स्व-सहायता समूह की महिलाएँ, नगरीय निकायों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी सहभागिता करेंगे। उत्कृष्टता का सम्मान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल खट्टर अमृत मित्र पहल के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह आयोजन उत्कृष्ट कार्य करने वालों के कार्यों को पहचान दिलाएगा। साथ ही महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि अमृत मित्र पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का एक प्रेरक उदाहरण है। आयुक्त  भोंडवे ने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी। 

मुकेश मल्होत्रा को मिला राहत, HC ने विजयपुर विधायक पद पर अपने फैसले पर लगाया स्टे

श्योपुर  मध्य प्रदेश का श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते 2-3 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है. इसकी वजह है, सोमवार यानि 9 मार्च को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का सुनाया गया फैसला. जहां कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर फैसला सुनाते हुए बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, जबकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य की थी. वहीं हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने ही फैसले पर 15 दिन का स्टे लगा दिया है. जिसके बाद कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अपने ही फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विवेक तंखा ने तुरंत कोर्ट का रूख किया. जहां विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है. जिसका मतलब है कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दिया गया है. यह स्थगन RP एक्ट के प्रावधान अनुसार दिया गया है. यानि तब तक मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से कांग्रेस विधायक रहेंगे. जस्टिस एसजी अहलूवालिया ने मुकेश मल्होत्रा ​​की इस दलील पर सहमति जताई कि अगर फैसले के असर और अमल पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें भारी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि “फैसले के असर और अमल पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने की अर्ज़ी न्याय के हित में है, ताकि प्रतिवादी मुकेश मल्होत्रा ​​सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश ले सकें। जीतू पटवारी ने बताया लोकतांत्रिक लड़ाई जीतू पटवारी ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई बताया है. उन्होंने कहा कि हम राज्यसभा सांसद के साथ मजबूती से लगे हुए हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी दलित, आदिवासी और आरक्षण विरोधी है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में विवेक तंखा और अभिषेक मनु संघवी मामले की पैरवी करेंगे। क्या है मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास का पूरा मामला दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा को जीत मिली थी, जबकि बीजेपी रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था. हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस विधायक ने आपराधिक जानकारी छिपाई है. मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा द्वारा आपराधिक जानकारी छिपाने की बात सही पाई गई, जिसके बाद कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य कर दी और रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया।

दिल्ली में सीएम मोहन यादव ने प्रहलाद के साथ की शिवराज से बैठक, तुअर की फसल सरकार करेगी पूरी तरह खरीद

भोपाल   दिल्ली में हुई एक बड़ी राजनतिक बैठक के बाद मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों के मुद्दों पर चर्चा की, जिसके बाद सरसों और तुअर की खरीद को लेकर बड़ी मंजूरी मिली है। तुअर की 100% सरकारी खरीद को मंजूरी बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को तुअर की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति पत्र सौंपा। इस फैसले बाद मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की पूरी उपज का सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरसों पर भावांतर भुगतान योजना लागू इसके साथ ही सरसों की फसल के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत खरीद को भी केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस योजना के माध्यम से किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की भरपाई की जाएगी। विजयवर्गीय भी दिल्ली में थे मौजूद एमपी के बजट सत्र के दौरान विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और विजयवर्गीय के बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम डॉ मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने एक ही दिन अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बार शिवराज सिंह चौहान से सीएम ने मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ मुलाकात की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन वे एक निजी शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शिवराज-मोहन और प्रहलाद के बीच चर्चा तीनों दिग्गजों के बीच हुई बैठक के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि खेती से जुड़े इन मुद्दों पर चर्चा हुई है।     सरसों उत्पादकों को भावांतर का तोहफा : लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरी झंडी दे दी है। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सीधे खाते में मिलेगी।     तुअर की 100% सरकारी खरीद: शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को स्वयं स्वीकृति पत्र सौंपा, जिसके तहत अब प्रदेश के किसानों की पूरी की पूरी तुअर फसल सरकार खरीदेगी। यह दलहन उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।     2026 किसान कल्याण वर्ष का रोडमैप: वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसे तिलहनों पर भी विशेष फोकस रहेगा। कई योजनाओं पर हुई चर्चा बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और अधिकारियों की मौजूदगी में दलहन–तिलहन मिशन, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्रामीण सड़कों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आवास और ग्रामीण विकास को बढ़ावा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत 2018 की आवास प्लस सूची के सभी पात्र परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर भी सहमति बनी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बचे पात्र परिवारों को भी आवास स्वीकृत करने की दिशा में काम करेंगी। इतना ही नहीं ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और चौड़ाई को लेकर भी समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है।

जीवाजी विश्वविद्यालय में नकल पर कड़ा शिकंजा, सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारी के नेतृत्व में उड़नदस्ता की तैनाती

ग्वालियर  ग्वालियर-चंबल अंचल लंबे समय तक परीक्षाओं में नकल की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। हालांकि स्कूली परीक्षाओं में लगातार सख्ती के कारण नकल पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में अभी भी नकल के मामले सामने आते रहते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय अब स्नातक परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रहा है। इन अधिकारियों को उड़नदस्तों में शामिल कर परीक्षा केंद्रों की निगरानी कराई जाएगी, जिससे नकल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। 26 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं में लागू होगी व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह नई व्यवस्था 26 मार्च से शुरू होने वाली स्नातक परीक्षाओं में लागू की जाएगी। इसके लिए ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उनसे अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जारी है। विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों की मौजूदगी से परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी। चार सेवानिवृत्त अधिकारियों ने दी सहमति अब तक चार सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने उड़नदस्ते में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है। इसके अलावा करीब 10 अन्य सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। आईएएस (सेवानिवृत्त) विनोद शर्मा का कहना है कि उड़नदस्तों में अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल उड़नदस्तों को मजबूती मिलेगी, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर सख्ती भी बढ़ेगी और नकल की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुरैना और भिंड में बढ़ेगी विशेष सख्ती विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के पीछे मुरैना और भिंड जिलों में पहले सामने आती रही नकल की घटनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में उड़नदस्तों की विशेष निगरानी रखी जाएगी। माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जान-पहचान और मेलजोल के कारण कभी-कभी विश्वविद्यालय के अधिकारी अपेक्षित सख्ती नहीं कर पाते, जिससे नकल की घटनाएं सामने आती हैं। साथ ही सूचनाएं लीक होने का भी खतरा बना रहता है। कुलसचिव और कुलगुरु ने बताया सकारात्मक कदम जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा के अनुसार उड़नदस्ते में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और कुलगुरु से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सहायता लेने से परीक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को सहमति दी जाएगी और आगामी परीक्षाओं में इसे लागू किया जाएगा।  

राजधानी दिल्ली में MP की निधि और ज्योति ने पाया सम्मान, देशभर में इन दोनों का नाम हुआ मशहूर

छतरपुर  राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छतरपुर जिले की दो महिला सरपंचों ने सहभागिता कर जिले का प्रतिनिधित्व किया। नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में आयोजित इस कार्यक्रम में सशक्त पंचायत नेत्री अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में छतरपुर जिले की ग्राम पंचायत ईशानगर की सरपंच निधि मिश्रा (बीकन लीडर) और ग्राम पंचायत गोरा की सरपंच ज्योति मिश्रा ने भाग लिया। उनके साथ जनपद पंचायत बड़ामलहरा के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान महिला सरपंचों को सम्मानित किया गया। साथ ही महिला एवं बालिका हितैषी पंचायत के तहत गांवों में किए गए कार्यों और बदलावों पर आधारित शॉर्ट फिल्म दिखाई गई। इस दौरान महिला सरपंचों ने अपनी पंचायतों में महिला और बालिका हित में किए गए कार्यों, सामने आने वाली चुनौतियों और अपने अनुभवों को साझा किया। यह सम्मेलन पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएस) और यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पंचायतों में महिला नेतृत्व को मजबूत करना और उन्हें महिला व बालिका हितैषी ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करना है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से जमीनी लोकतंत्र मजबूत होता है और विकास की प्राथमिकताएं पानी, पोषण, स्वच्छता और शिक्षा जैसे मूलभूत मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। सम्मेलन में पंचायती राज मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने महिला नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब महिलाएं पंचायतों का नेतृत्व करती हैं तो ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती है और निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी बनती है। कार्यक्रम में महिला नेतृत्व की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायतों को सशक्त बनाने पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस चर्चा की अध्यक्षता युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने की। वहीं आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत के विकास विषय पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन ने की।

एमपी में LPG की कमी, केवल इमरजेंसी के लिए 15% गैस, घरेलू सिलेंडर के लिए 5-7 दिन तक इंतजार

भोपाल   मध्य प्रदेश में रसोई गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG का स्टॉक सामान्य से भी काफी कम रह गया है। वहीं कई जिलों में घरेलू गैस सिलेंडर की डिलिवरी के लिए लोगों को 5-7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। सिर्फ 15% स्टॉक, प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा सिलेंडर जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस समय कुल मांग के मुकाबले करीब 15% LPG का स्टॉक ही उपलब्ध है। इसे भी मुख्य रूप से इमरजेंसी जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर घरेलू गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यही कारण है कि फिलहाल औद्योगिक उपयोग और अन्य परियोजनाओं के लिए गैस सप्लाई सीमित कर दी गई है। LPG की कमी की आंच अब किचन तक पहुंच गई है। 3 दिन से प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की वेटिंग भी 5 से 7 दिन की हो गई है। ऑयल कंपनियों ने 15% गैस ही उपलब्ध होने की बात कही है, जो इमरजेंसी सेवा और घरों के लिए ही उपयोग हो सकेगी। ऐसे में गुरुवार से पूरे प्रदेश में गैस का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल, सेना-पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड स्थित भोजनालय को ही मिलेंगे। हालांकि, खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को लिस्ट देना होगी। दूसरी ओर होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल सकेंगे। दोनों ही शहरों में मेट्रो का काम चल रहा है, जिसमें वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है। भोपाल-इंदौर मेट्रो को भी नहीं मिलेगी गैस गैस की कमी (LPG Shortage) का असर राज्य की बड़ी परियोजनाओं पर भी पड़ रहा है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को फिलहाल एलपीजी की सप्लाई नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि जब तक सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती, तब तक गैस का उपयोग सिर्फ जरूरी आवश्यकताओं के लिए ही किया जाएगा। घरेलू सिलेंडर डिलिवरी में देरी गैस एजेंसियों के मुताबिक सप्लाई कम (LPG Shortage) होने की वजह से बुकिंग के बाद सिलेंडर को डिलिवरी में 5-7 दिन तक का समय लग रहा है। कुछ शहरों में यह इंतजार और भी बढ़ सकता है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि जैसे ही गैस की नई खेप पहुंचेगी, डिलीवरी की स्थिति सामान्य होने लगेगी। पहले घरों को गैस, फिर इंडस्ट्री को सप्लाई का संकट (LPG Shortage) देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद ही उद्योग और प्रोजेक्ट्स को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कुछ दिनों में ही सप्लाई आने की उम्मीद है, जिसके बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। स्टॉक इतना कि 48 घंटे तैसे-जैसे निकलेंगे भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में ही डेढ़ हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट हैं। जहां हर रोज 2 से ढाई हजार सिलेंडर उपयोग होते हैं। जिन होटल या रेस्टॉरेंट में स्टॉक है, वहां 48 घंटे ही तैसे-जैसे निकल पाएंगे। इसके बाद होटल और रेस्टॉरेंट बंद हो जाएंगे। सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट और रेहड़ी वालों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाए, लेकिन सरकार ने सिर्फ इमरजेंसी सेवा के लिए गैस देने की बात कही है। मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां प्रदेश में मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां होना हैं। इनमें कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होता है, लेकिन ये 3 दिन से नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में शादियों में भोजन पकाने में दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। भोपाल में 3 हजार आभूषण कारीगर हैं। इन्हें महीने में 9000 हजार सिलेंडर की जरूरत होती है। दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे ईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर भोपाल के बाजारों में भी दिख रहा है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू ने बताया कि दालों में तेजी बनी हुई है। हरी मूंग करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 100 रुपए, चना 150 रुपए, मूंग मोगर लगभग 125 रुपए और चना दाल करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल तक तेज बताई जा रही है। वहीं, तूअर दाल के भाव में भी करीब 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मसालों के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। थोक व्यापारी अनिल कुकरेजा के मुताबिक, मिर्ची लगभग 50 रुपए प्रति किलो और धनिया करीब 40 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। वहीं थोक ड्राई फ्रूट व्यापारी किशोर राजदेव के अनुसार, पिस्ता करीब 250 रुपए प्रति किलो, अंजीर 100 रुपए प्रति किलो, केसर लगभग 20 हजार रुपए प्रति किलो और दाल चीनी करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है। ईरान के रास्ते आती हैं सामग्री भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री के मुताबिक, पिस्ता, अंजीर, दाल, चीनी सहित कई ड्राई फ्रूट्स ईरान के रास्ते भारत आते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर इनके दामों पर पड़ा है। वहीं, भारत से जाने वाले कुछ उत्पादों के दामों में गिरावट भी देखी जा रही है। खोपरा पाउडर करीब 50 रुपए, मखाने 100 रुपए और हरी इलायची लगभग 200 रुपए प्रति किलो तक सस्ती हुई है। पैकेजिंग व्यापार से जुड़े मोतीलाल आडवाणी ने बताया, क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से कच्चा माल महंगा हो गया है, जिसके कारण पैकेजिंग से जुड़े सामानों के रेट में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके चलते प्लास्टिक से बने अधिकांश पैकेजिंग आइटम महंगे हो गए हैं।

राज्य में पारा 40 डिग्री के पार, सीजन की पहली ऐसी गर्मी, तापमान सामान्य से 5-7 डिग्री ज्यादा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग  के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है। बुधवार को कई जिलों में पारा 38 से 40 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जिससे दिन में तेज गर्मी का अहसास होने लगा है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा नर्मदापुरम में 39.9°C और धार में 39.4°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। गुना में 38.1°C और इंदौर में 38°C तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से ज्यादा है।  राजधानी भोपाल में भी बढ़ी गर्मी राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री ज्यादा है। ग्वालियर में 37.7°C और उज्जैन में भी 37.7°C तापमान दर्ज किया गया। वहीं खंडवा, खरगोन और शाजापुर जैसे शहरों में भी तापमान 37 डिग्री के आसपास रहा। महाकौशल और विंध्य में भी चढ़ा पारा पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में भी गर्मी का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दमोह में 37.8°C, खजुराहो में 38.2°C और टीकमगढ़ में 38.4°C तापमान दर्ज किया गया। मंडला में 37.5°C और सागर में 37.4°C पारा रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में भी तापमान सामान्य से 5 से 6 डिग्री ज्यादा है। रात में अभी हल्की ठंड बरकरार दिन में गर्मी बढ़ने के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में रात का तापमान अभी अपेक्षाकृत कम बना हुआ है। भोपाल में न्यूनतम तापमान 16°C और इंदौर में 15.8°C दर्ज किया गया। वहीं कई जिलों में न्यूनतम तापमान 16 से 20 डिग्री के बीच रहा। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है गर्मी मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मार्च में ही गर्मी का असर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अबकी बार अप्रैल और मई में हीट वेव यानी, लू चलेगी। 15 से 20 दिन तक लू चल सकती है, लेकिन मार्च में लू चलने का अलर्ट नहीं है। मार्च के शुरुआती दिनों में पारा बढ़ा हुआ है। मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। 

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