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शमशाबाद का बदला नाम, अब कहलाएगा ‘सूर्य नगर’; किसानों के लिए सिंचाई परियोजनाओं का ऐलान

विदिशा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को विदिशा जिले के शमशाबाद में 163 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने शमशाबाद का नाम बदलकर सूर्य नगर करने की घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संजय सागर और सगढ़ सिंचाई परियोजना के विस्तार को भी मंजूरी दी। इन दोनों परियोजनाओं के विस्तार से शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में लगभग 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत के विकास कार्यों के लिए तीन करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की।

क्षत्रिय कुशवाह समाज द्वारा फाग महोत्सव ओर होली मिलन समारोह

बड़वानी क्षत्रिय कुशवाह समाज युवा संगठन बड़वानी द्वारा फाग महोत्सव एवं होली मिलन समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर रंग-गुलाल के साथ उत्साहपूर्वक होली उत्सव मनाया। कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण बालगोपाल की प्रतिमा पर रंग-बिरंगी गुलाल अर्पित कर समाज की खुशहाली और समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद डीजे की धुन पर समाजजन जमकर थिरके और फाग के पारंपरिक रंग में रंगे नजर आए। पूरे आयोजन में भाईचारे और सामाजिक एकता का वातावरण दिखाई दिया। इस अवसर पर समाज अध्यक्ष नंदराम कुशवाह, संचालक किशोर मोंगर, युवा संगठन अध्यक्ष राजू कुशवाह, कोषाध्यक्ष नवीन कुशवाह, प्रतिनिधि नीरज कुशवाह, शंकर कुशवाह, अजय कुशवाह तथा सुधीर पीपर सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में समाज के पदाधिकारियों ने सभी उपस्थित समाजजनों को फाग महोत्सव एवं होली मिलन की शुभकामनाएं देते हुए समाज में एकता, प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।

कालूहेड़ा बोले- अब सिंहस्थ के कामों में करूंगा सहयोग, BJP विधायक की सीएम हाउस में खिंचाई

भोपाल. मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन की धमकी देने वाले बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के सुर बदल गए हैं। सड़क चौड़ीकरण को लेकर जनता के साथ सड़क पर उतरने का दावा करने वाले विधायक को शुक्रवार देर रात भोपाल बुलाकर मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन ने कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष नेताओं की क्लास के बाद कालूहेड़ा ने अपने बयानों पर खेद जताया और अब सिंहस्थ के कार्यों में पूर्ण सहयोग देने का वादा किया है। सीएम हाउस में लगी स्पेशल क्लास उज्जैन उत्तर के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा द्वारा पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ दिए गए बयानों को सरकार और संगठन ने अनुशासनहीनता माना। शुक्रवार देर रात भोपाल में बड़ी हलचल रही। पहले विधायक ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह से मुलाकात की, जिसके बाद उन्हें सीधे मुख्यमंत्री निवास (CM House) ले जाया गया। यहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में बाधा डालने और सार्वजनिक बयानबाजी करने पर कड़ी नाराजगी जताई। सरकार और संगठन ने विधायक को दो-टूक शब्दों में समझाया कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों में कोई भी बाधा या सार्वजनिक विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा विवाद विवाद की शुरुआत उज्जैन के पिपलीनाका और भैरवगढ़ रोड से हुई। यहाँ सिंहस्थ के मद्देनजर नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 410 घरों को 7 दिन के भीतर खाली करने का नोटिस दिया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि चौड़ीकरण से उनके आशियाने और रोजी-रोटी उजड़ जाएगी। उज्जैन उत्तर से विधायक कालूहेड़ा ने जनता के बीच जाकर वादा किया था कि वे 24 मीटर से ज्यादा सड़क चौड़ी नहीं होने देंगे और अगर बुलडोजर चला तो वे खुद जन आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। जनता का आक्रोश और विधायक की मजबूरी नगर निगम के नोटिस के बाद आक्रोशित जनता ने विधायक कार्यालय का घेराव किया था। लोगों की भावनाओं को देखते हुए विधायक ने अधिकारियों पर मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि वे जनता की भावनाओं का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, संगठन की सख्ती के बाद अब उन्होंने अपने रुख में बदलाव किया है। अब सिंहस्थ के कामों में सहयोगी रहूंगा आलाकमान की सख्ती के बाद विधायक के तेवर ढीले पड़ गए। फटकार के बाद विधायक ने कहा, “मैं अब सिंहस्थ के कामों में सहयोगी रहूंगा। मैंने अपने बयानों पर खेद जताया है। प्रशासन बस इतना ध्यान रखे कि जनता से चर्चा करके ही निर्णय लिए जाएं।” इस बयान के बाद स्पष्ट है कि पिपलीनाका रोड चौड़ीकरण का रास्ता अब साफ हो गया है और सरकार अपने तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ेगी।

MP के शिक्षकों के लिए अल्टीमेटम: 2 साल में TET पास नहीं किया तो छोड़नी पड़ेगी नौकरी

जबलपुर.  प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित अवधि में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यह आदेश संचालक लोक शिक्षण मध्य प्रदेश ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें अगले दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को सेवा छोड़नी पड़ सकती है या उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि उन्हें नियमों के अनुसार मिलने वाले टर्मिनल लाभ प्रदान किए जाएंगे, बशर्ते उन्होंने निर्धारित सेवा अवधि पूरी की हो। विभाग के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई और अगस्त 2026 में संभावित है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो शिक्षक अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, उन्हें परीक्षा में शामिल होने की सूचना देना सुनिश्चित करें। अधूरे बजट से स्कूलों में काम ठप वित्तीय सत्र समाप्त होने के बावजूद प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को अब तक केवल 50 प्रतिशत राशि ही मिली है। मध्य प्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संगठन के प्रांताध्यक्ष राबर्ट मार्टिन ने आरोप लगाया है कि बजट के अभाव में स्कूलों के रखरखाव और अध्यापन कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।  

1400 KM का सफर करेंगी 25 जांबाज बाइकर्स, क्वींस ऑन द व्हील्स 3.0 को CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से ‘नारी सशक्तिकरण’ और ‘साहस’ की एक नई मिसाल पेश की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से ‘क्वींस ऑन द व्हील्स 3.0’ (Queens on The Wheel 3.0) के तहत देश के कोने-कोने से आई 25 महिला सुपर बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। महिला बाइकर्स 7 दिन में 1400 किमी का सफर तय कर एमपी के पर्यटन का प्रचार करेंगी। सांची, चंदेरी, कूनो, ग्वालियर और ओरछा होते हुए खजुराहो जाएंगी। 1400 किलोमीटर की यह रोमांचक बाइक ट्रायल 13 मार्च को भोपाल में समाप्त होगी। 7 दिन और 1400 किलोमीटर का सफर ‘क्वींस ऑन द व्हील्स’ बाइक रैली का यह तीसरा संस्करण एक बड़े उद्देश्य के साथ शुरू हुआ है। 25 सुपर बाइकर्स का यह ग्रुप अगले 7 दिनों तक मध्यप्रदेश की सड़कों पर 1400 किलोमीटर का सफर तय करेगा। यह यात्रा भोपाल से शुरू होकर सांची, चंदेरी, कूनो नेशनल पार्क, ग्वालियर और ओरछा जैसे प्रमुख ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थलों से गुजरते हुए खजुराहो पहुँचेगी। नारी शक्ति और सुरक्षा का संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुपर बाइकर्स को शुभकामनाएं दी, उन्होंने कहा कि “देश का दिल मध्यप्रदेश अजब भी है, गजब भी है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सजग भी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आयोजन केवल एक बाइक रैली नहीं है, बल्कि यह बदलते समाज की सकारात्मक तस्वीर है। यह रैली ‘रिस्पॉन्सिबल ट्रैवल’ (जिम्मेदार पर्यटन) को प्रोत्साहित करेगी और यह दिखाएगी कि प्रदेश की सड़कें महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्वींस ऑन द व्हील 3.0 केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण, साहस और पर्यटन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने का अनूठा अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा- ‘देश का दिल’ मध्य प्रदेश अजब भी है, गजब भी है और महिलाओं के लिए सुरक्षित व सजग भी है। ऐतिहासिक स्थलों का होगा प्रचार-प्रसार इस यात्रा का रूट मैप प्रदेश के समृद्ध इतिहास और वन्यजीवों की झलक दिखाने के लिए तैयार किया गया है। बाइकर्स जहाँ चंदेरी की बुनाई और सांची के स्तूपों को करीब से देखेंगी, वहीं कूनो में चीतों की धरती का अनुभव भी लेंगी। इस साहसिक यात्रा का समापन 13 मार्च को वापस भोपाल में ही होगा।

पत्नी से विवाद के बाद आरोपी ने ससुराल पक्ष पर किया हमला, हत्या के प्रयास में जेल भेजा गया

 अनूपपुर फरियादी राजू सिंह पिता सोभा सिंह पंद्राम उम्र 42 साल निवासी डोड़िया थाना राजेन्द्रग्राम का दिनांक 05.03.26 को रिपोर्ट किया कि मेरी भांजी खेलन बाई नेताम तीन दिन पहले मेरे घर ग्राम मौहारी से मेहमानी में आयी थी । दिनांक 05.03.26 को आरोपी सोहन सिंह निवासी उमरिया थाना जैतहरी का अपनी पत्नी से वाद होने के कारण हत्या करने की नियत से उमरिया थाना जैतहरी से आकर उसकी पत्नी का मामा राजू सिंह गोंड़ ग्राम डोड़िया  के घर आकर हत्या करने की नियत से मारपीट कर सिर में पत्थर पटक कर हत्या करने का प्रयास किया गया रिपोर्ट पर आरोपी के विरूद्ध अपराध धारा 296(a),115(2),351(3),109(1) बीएनएस.कायम कर 24 घण्टे के अन्दर बाद विवेचना आरोपी  माननीय न्यायालय के माध्यम से जिला जेल अनूपपुर दाखिल किया गया । आरोपी गिरफ्तारी में श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर के मार्गदर्शन व श्रीमान् एस.डी.ओ.पी.नवीन तिवारी पुष्पराजगढ़ के निर्देश में थाना प्रभारी पी.सी.कोल , सहा.उपनिरी.आनन्द प्रकाश बेक, सहा.उपनिरी.अवधलाल अहिरवार, प्र.आर.42 राजेन्द्र यादव की सराहनीय भूमिका रही है ।

धार के लाल पक्षाल सेक्रेटरी ने UPSC में 8वीं रैंक के साथ देश में किया नाम रोशन

धार   धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं। माता-पिता का आशीर्वाद पक्षाल सेक्रेटरी का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया। पक्षाल की प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। दिल्ली में रहकर तैयारी पक्षाल वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। प्रयास जारी रहा पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की। तैयारी के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। एक बार इंटरव्यू से एक दिन पहले उनका पैर मुड़ गया था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पक्षाल जैन की इस सफलता से बाग सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा मिली है कि छोटे कस्बों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

22वीं किस्त के लिए इंतजार खत्म! पीएम किसान योजना की घोषणा असम दौरे से हो सकती है

भोपाल   प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त को लेकर किसानों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पीएम मोदी असम दौरे के दौरान पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं। बता दें कि पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। असम दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 मार्च को असम के कोकराझार दौरे पर जाएंगे। यहां वे बोडोलैंड टेरिटोरियल एरियाज डिस्ट्रिक्ट में आयोजित कई सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे तथा एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे। रैली में हो सकती है किस्त जारी करने की घोषणा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कोकराझार में होने वाली इस रैली के दौरान प्रधानमंत्री पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी करने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि अभी इसे लेकर केवल कयास लगाए जा रहे हैं और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। पहले कब जारी हुई थीं किस्तें पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है।     20वीं किस्त 2 अगस्त 2025 को वाराणसी से जारी की गई थी।     21वीं किस्त नवंबर 2025 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से जारी हुई थी। मध्यप्रदेश के 81 लाख से ज्यादा किसान लाभार्थी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में करीब 81 लाख 81 हजार 751 किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं। लेकिन सरकार अपात्र लाभार्थियों की पहचान को लेकर सख्त हो गई है। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के करीब 1.66 लाख किसानों के नाम पात्रता सूची से हटाए जा चुके हैं। किसानों के लिए कई योजनाएं लागू सरकार के अनुसार अब तक करीब 10 करोड़ किसानों को इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक कृषि क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं     एमएसपी सुधारों से किसानों को लागत का डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है।     इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।     प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के दावे निपटाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन प्रयासों से किसानों का जोखिम काफी कम हुआ है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार मिला है।

बड़े तालाब में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा एक्शन, IAS बंगला और 200 अवैध निर्माण चिन्हित

भोपाल  राजधानी भोपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई तेज हो गई है. प्रशासन ने सर्वे के बाद बड़ा तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और 50 मीटर दायरे में बने करीब 200 अवैध निर्माणों को चिन्हित कर लिया है, जिनमें एक आईएएस के बंगले के साथ 150 से अधिक झुग्गियां भी शामिल हैं। अलग से एडिशनल कलेक्टर तैनात करने की मांग बड़े तालाब के सीमांकन के बीच भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने साफ कहा है कि “तालाब क्षेत्र में बने किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह धार्मिक स्थल ही क्यों न हो. उन्होंने तालाब संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के लिए अलग से एडिशनल कलेक्टर तैनात करने की मांग भी की है। ‘प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई’ सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि “भोपाल का बड़ा तालाब इस शहर की जीवनरेखा है. करीब 1100 वर्ष पहले राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और आज भी शहर की आधी से ज्यादा आबादी इसी तालाब के पानी पर निर्भर है. तालाब के एफटीएल क्षेत्र और आसपास किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने भी नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ‘बड़े तालाब को लेकर मुख्यमंत्री से करेंगे चर्चा’ सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि “इस मुद्दे को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से भी चर्चा करेंगे. साथ ही समय-समय पर समीक्षा बैठक कर तालाब संरक्षण की कार्रवाई को तेज किया जाएगा.” उन्होंने कलेक्टर भोपाल से कहा है कि “प्रशासनिक कार्यों के बढ़ते दबाव को देखते हुए तालाब संरक्षण के लिए अलग से एक एडिशनल कलेक्टर की जिम्मेदारी तय की जाए और अतिक्रमण हटाने के लिए अलग दस्ता बनाया जाए। सीमांकन में सामने आए 200 अवैध निर्माण बड़े तालाब की सीमांकन प्रक्रिया इन दिनों लगातार जारी है. संत हिरदाराम नगर तहसील के राजस्व अमले ने गुरुवार को ग्राम लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा में एफटीएल और 50 मीटर दायरे का सीमांकन किया. इस दौरान करीब 150 से अधिक झुग्गियां चिन्हित की गईं, जिन पर अमले ने लाल निशान लगाए. सीमांकन के दौरान कुछ रहवासियों ने विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों ने टीएंडसीपी के नक्शे और एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कार्रवाई पूरी कराई। कई क्षेत्रों में हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार बड़े तालाब के सीमांकन की प्रक्रिया एक सप्ताह पहले वीआइपी रोड क्षेत्र से शुरू हुई थी. होली के अवकाश के कारण इसे बीच में रोका गया था, जिसे अब दोबारा शुरू किया गया है. गुरुवार को राजस्व, वन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने टीएंडसीपी के नक्शे के अनुसार एफटीएल और 50 मीटर दायरे का सीमांकन किया. अमले ने ग्राम बोरवन में करीब 100 झुग्गियों पर लाल निशान लगाए, जबकि ग्राम बेहटा के ओल्ड डेयरी फार्म क्षेत्र में 60 से 70 झुग्गियां चिन्हित की गईं. इसके अलावा वीआइपी रोड, खानूगांव और हलालपुर क्षेत्र में भी कई निर्माण इस दायरे में पाए गए हैं। वीआईपी रोड से गांवों तक अतिक्रमण राजस्व अमले ने वीआईपी रोड, खानूगांव, हलालपुर, लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा में सीमांकन करते हुए करीब 200 निर्माण चिन्हित किए हैं. इनमें केके हाउस, सुपर बिल्डर, कोचिंग सेंटर, शासकीय बंगला, गुलबाग लॉन, एक आईएएस का बंगला, चादर शेड और बड़ी संख्या में झुग्गियां शामिल हैं। संत हिरदाराम नगर एसडीएम रविशंकर राय ने बताया कि “बड़े तालाब की सीमाएं चिन्हित करने की कार्रवाई लगातार जारी है. जिन निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए हैं, उन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

MP में जमीन विवादों के समाधान के लिए नई प्रणाली, संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत, रजिस्ट्री से पहले आपत्ति की जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश में जमीन से जुड़े विवादों के लिए अब आपत्ति दर्ज करवाना आसान हो गया है। राज्य सरकार ने संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा शुरू कर दी है। जिसके तहत कोई भी किसी भी जिले से जमीन पर आनलाइन आपत्ति दर्ज करवा सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को पंजीयन कार्यालय में नहीं जाना पड़ेगा। ऑनलाइन आपत्ति दर्ज होते ही उसका रिकार्ड सब-रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध होगा। भविष्य में यदि उस जमीन की रजिस्ट्री कराने कोई उप-पंजीयक कार्यालय पहुंचेगा, तो सिस्टम में दर्ज आपत्ति दिखाई देगी। इसकी सूचना तत्काल संबंधित पक्षों को दी जाएगी। आपत्ति दर्ज करवाने के लिए यह जरूरी आपत्ति दर्ज कराने के लिए जमीन की यूनीक ID या रजिस्ट्री नंबर देना अनिवार्य होगा। केवल स्थान, कालोनी या जमीन का सामान्य विवरण देने पर शिकायत दर्ज नहीं होगी। पंजीयन विभाग के अनुसार जमीन का सटीक रिकॉर्ड यूनीक आईडी या रजिस्ट्री नंबर से ही खोजा जा सकता है। सब रजिस्ट्रार का निर्णय होगा अंतिम आपत्ति के साथ लगाए गए दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम निर्णय सब-रजिस्ट्रार करेंगे। वे संबंधित अधिनियम के तहत तय करेंगे कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के अनुसार पहले कुछ लोग फर्जी कोर्ट आदेश लगाकर आपत्तियां दर्ज करा देते थे। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और रिकॉर्डेड होने से ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। इनका कहना है     संपदा पोर्टल पर 250 रुपये शुल्क और दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। संपत्ति के घरेलू मामलों में यह महत्वपूर्ण रहेगा, एक पक्ष समझौते के विपरीत जमीन बेचने की कोशिश करता है, तो दूसरा पक्ष पोर्टल पर आपत्ति दर्ज कर सकता है।     -स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल  

सेंट्रल जेल में रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन, 156 बंदियों ने रखा रोज़ा – प्रशासन ने दी विशेष सुविधाएं

Central Jail hosts Roza Iftar party, 156 inmates observe fast – administration provides special facilities विशेष संवाददाता :जितेंद्र श्रीवास्तव /अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में रमजान के पवित्र महीने के दौरान रोज़ा रखने वाले बंदियों के लिए विशेष रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए जिस प्रकार के पकवान और व्यवस्थाएं की गईं, वह सराहनीय रही। शासन की ओर से रोज़ा रखने वाले बंदियों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। जानकारी के अनुसार सेंट्रल जेल में कुल 156 बंदियों ने रोज़ा रखा, जिनके लिए इफ्तार के समय विशेष भोजन और पकवान की व्यवस्था की गई। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि रोज़ा रखने वाले बंदियों को समय पर इफ्तार और सहरी की पूरी सुविधा मिले। यह आयोजन सेंट्रल जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के निर्देशन में किया गया। इस दौरान उप अधीक्षक कमलेश मदन मोहन और जेलर प्रशांत के नेतृत्व में पूरी टीम ने व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया। जेल प्रशासन का कहना है कि रमजान के दौरान बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।

रीवा अमहिया मार्ग चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमणकारियों को नोटिस, सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक होगी कार्रवाई

रीवा रीवा के व्यस्त अमहिया मार्ग को चौड़ा करने की कवायद अब तेज हो गई है। प्रशासन ने सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक चिन्हित किए गए 165 अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। इस मार्ग पर कभी भी अतिक्रमण गिराने की कार्यवाही की जा सकती है। इस मार्ग के चोड़ीकरण के लिए पिछले दिनों सड़क की नापजोख की गई थी और नापजोख के बाद अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। संयुक्त टीम द्वारा राजस्व रिकार्डों के अनुसार की गई। इस नाप में कई जगह 5-6 मीटर तक कब्जा पाया गया है।  राजस्व रिकार्ड के मुताबिक सिरमौर चौराहा से लेकर अमहिया नाले तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर दर्ज है। इसके बाद गोस्वामी एक्सरे से लेकर गुरुद्वारा तक इस सड़क की चौड़ाई राजस्व नक्शे में 22 मीटर से लेकर 28 मीटर तक दर्ज है। इसके अलावा गुरुद्वारा से लेकर अस्पताल चौराहा तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर नक्शे में दर्ज है।  अतिक्रमणकारियों को लेकर विवाद सिरमौर चौराहा से अस्पताल चौराहा तक चिन्हित किये गये अतिक्रमणकारियों की भी समझ में आ चुका है कि अंतत: उन्हें खाली करना ही पड़ेगा। लिहाजा अब अतिक्रमण करने वाले एवं अतिक्रमित जमीन में दुकानों एवं मकानों को खरीदने वाले लोग सूची में अपना नाम होने की पुष्टि करने में लगे हुए हैं।  चिन्हित की गई अतिक्रमण की कई दुकानों को खरीदा एवं बेचा जा चुका हे जिससे अब उन दुकानों के मालिकान मालिकान बदल गये हैं लेकिन सूची में उनका नाम नहीं है। ऐसे लोग अब सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए तहसील एवं नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।  नापजोख के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई दुकानदारों द्वारा 5-6 मीटर तक सड़क की जमीन पर कब्जा किया गया है। नापजोख के दौरान सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के सामने की सभी दुकाने अतिक्रमण में पाई गई है।  छोटी दरगाह परिसर में निर्मित दुकानों भी 5 फिट बढ़ाकर बनाई गई हैं। इसके अलावा अमहिया मोड़ के पास तिराहे में सर्वाधिक अतिक्रमण पाया गया है। कलेक्टर के आदेश पर सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक सड़क विस्तारीकरण के लिए अतिक्रमण टूटना तय हो गया है। 

कुशवाह बने भोपाल के पहले किसान, जिन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती शुरू की

उद्यानिकी स्टोरी:पारंपरिक खेती से प्रगतिशील बागवानी तक का सफर  कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान कुशवाह बने भोपाल के पहले किसान, जिन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती शुरू की भोपाल  भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के  रामसिंह कुशवाह  कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर सीमित आय अर्जित करने वालेकिसान रहे है। आज वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल है।  कुशवाह कहते हैं, “मैं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में एक नई पहचान दी है।”  कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था,जिसमें बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ लेते हुए एक हजार स्क्यायर फिट में पॉली हाउस बनाकर फूलों (गुलाब और जरबेरा) की खेती प्रारंभ की। राज्य योजना में उद्यानिकी विभाग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉली हाउस सरकार के लिए सब्सिड़ी लेते हुए गुलाब, जरबेरा, गेंदा के 30 हजार पौधें रोपे, जिससे  कुशवाह प्रतिदिन 4 हजार कट फ्लावर बेच कर प्रतिदिन 4 से 6 हजार रूपये तक की आमदनी प्राप्त कर रहे है। फूलों का उत्पादन बढ़ाने एवं लागत को कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम अपने पॉली हाउस में स्टॉल करवाया जिसकी लागत 4 लाख रूपये है। इसमें 2 लाख रूपये की सब्सिड़ी सरकार द्वारा प्राप्त हुई है। ऑटोमेशन सिस्टम से एक एकड़ की खेती में पानी, खाद, दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 x 7 बिना किसी मेन्युअल सिस्टम से दी जा रही है। जिससे पानी, खाद के समय एवं लागत की भी बचत हो रही है, वर्तमान में  कुशवाह पारंपरिक खेती से ऑटोमेटिक सिस्टम से बागवानी करने वाले भोपाल के पहले किसान बन गए है। उनके गुलाब, जरबेरा की सप्लाई लखनऊ, दिल्ली, जयपुर तक हो रही है। किसान  कुशवाह ने एक एकड़ में विगत वर्षों में 30 हजार जरबेरा के हाइब्रिड पौधों का रोपण किया तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप वे मात्र एक वर्ष में ही प्रतिदिन 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में विक्रय कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 4 हजार फूल स्पाईक प्राप्त कर प्रतिदिन 4 से 5 हजार रूपये की आमदनी भी प्राप्त कर रहे है। फूलों और फलों की खेती ने  कुशवाह की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना दिया है।  कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।  

MP में किसानों को मिलेगी 25 लाख के लोन पर 33% सब्सिडी, दाल प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई स्थापित करने का अवसर

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को दलहन उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश भर में कुल 55 खाद्य प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग यूनिटें स्थापित की जानी हैं। ग्वालियर जिले के किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए यह खुद का उद्यम शुरू करने का मौका है। क्योंकि दलहन यूनिट की स्थापना के लिए सरकार आर्थिक रूप से बड़ी सहायता प्रदान कर रही है। एक यूनिट लगाने के लिए पात्र आवेदकों को 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस लोन पर सरकार की ओर से 33 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। यानी लगभग 8.25 लाख रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा। यहां बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग में गेहूं, सरसों व धान के अलावा तूअर यनि अरहर, चना जैसी दलहनी फसलों की पैदावार होती है। साथ ही मूंग व उड़द की भी कुछ क्षेत्रों में खेती की जाती है। ऐसे में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के किसान दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाकर खेती के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा चयन पूरे प्रदेश के लिए केवल 55 यूनिटों का लक्ष्य रखा गया है, इसलिए इसमें चयन की प्रक्रिया काफी कड़ी हो सकती है। जिले के जो भी युवा या किसान इस योजना का लाभ उठाकर अपनी दाल प्रसंस्करण इकाई लगाना चाहते हैं, उन्हें बिना देरी किए सबसे पहले आवेदन करना होगा। आवेदन में देरी होने पर यह मौका हाथ से जा सकता है। किसानों को क्या होगा फायदा वर्तमान में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के किसान अपनी दालें जैसे चना, तुअर, मूंग को कच्ची फसल के रूप में मंडी में बेच देते हैं। खुद की पैकेजिंग और प्रसंस्करण यूनिट होने से किसान दालों की सफाई और ग्रेडिंग करके उन्हें ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे। यह इकाई न केवल उद्यमी किसान को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह करना होगा किसानों को यदि कोई किसान इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करना चाहते हैं, तो स्थानीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। योजना के तहत यूनिट लगाने के लिए पात्रता और आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना     दलहन प्रसंस्करण व पैकेजिक इकाई लगाने के लिए किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। जिले में दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाने की अच्छी संभावनाएं हैं। सरकार ने इस योजना में 33 प्रतिशत अनुदान देने की घोषणा की है। इसलिए यह किसानों के लिए खेती के साथ खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना है। चूंकि पूरे प्रदेश का टारगेट 55 इकाई का हैं, इसलिए पहले आवेदन करने वाले किसानों के लिए मौका रहेगा। – टीसी पाटीदार, कार्रकारी इंजीनियर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग  

MP में अवैध खनिज परिवहन पर कड़ी निगरानी, 40 ई-चेक पोस्ट से होगी जांच, गड़बड़ी पर मिलेगा E-Challan

भोपाल  मध्य प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। प्रदेश में 40 ई-चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां से फिलहाल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। इन ई-चेक पोस्ट के माध्यम से खनिज परिवहन में गड़बड़ी पाए जाने पर जल्द ही ऑनलाइन ई-चालान जारी किए जाएंगे। ई-चालान से संबंधित नियम बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। जैसे ही नियम लागू होंगे, ई-चेक पोस्ट पर दर्ज अनियमितताओं के आधार पर संबंधित वाहन मालिक को सीधे मोबाइल पर ई-चालान भेजा जाएगा। आधुनिक कैमरे पहचानेंगे वाहनों में लदा खनिज ई-चेक पोस्ट पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों में लोड खनिज की पहचान करने में सक्षम होंगे। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि वाहन में कौन सा खनिज परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे आधुनिक कैमरों से जोड़ा गया है। इस तकनीक की मदद से खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी और अवैध गतिविधियों को चिन्हित किया जा सकेगा। AI आधारित तकनीक से होगी वाहनों की जांच अवैध परिवहन को रोकने के लिए स्थापित इन ई-चेक पोस्ट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर जैसे उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों की सहायता से खनिज परिवहन में लगे वाहनों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जांच की जाएगी। इससे अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगरानी के लिए बनाए गए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अवैध परिवहन की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर भोपाल में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके अलावा भोपाल और रायसेन में जिला स्तर पर भी कमांड सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ई-चेक पोस्ट से प्राप्त डेटा की निगरानी की जाएगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। प्रदेश में वैध और अवैध रेत खदानों की स्थिति प्रदेश में वर्तमान में 728 रेत खदानें वैध रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि 200 से अधिक अवैध रेत खदानों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है। यही कारण है कि सरकार ने अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अवैध उत्खनन और परिवहन के हजारों मामले दर्ज मध्य प्रदेश में वर्ष 2024-2025 के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन के 10,956 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में फिलहाल केवल जुर्माने की कार्रवाई की गई, जबकि कानून में गंभीर मामलों में सजा का भी प्रावधान है। अप्रैल 2024 से अब तक दर्ज मामलों के अनुसार अवैध उत्खनन के 1565, अवैध परिवहन के 8540 और अवैध भंडारण के 851 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 83 करोड़ 74 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान हमलों की घटनाएं भी सामने आईं अवैध खनन रोकने के दौरान कई बार अधिकारियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में उत्खननकर्ता खनिज विभाग या कार्रवाई करने पहुंचे अमले पर हमला कर देते हैं। पिछले वर्ष भिंड में अवैध उत्खनन रोकने गए एक प्रशिक्षु पुलिस अधिकारी की मौत तक हो चुकी है। CM के निर्देश पर चला था विशेष अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, खरगोन, हरदा और शहडोल सहित प्रदेश के कई जिलों में लगभग 200 प्रकरण दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान डंपर, पोकलेन मशीन और पनडुब्बी जैसे उपकरण जब्त किए गए तथा 1.25 करोड़ रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

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