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इटली सहित देश-विदेश से कान्हा की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचे थे, मुक्की गेट पर पर्यटकों और मजिस्ट्रेट के बीच विवाद

बालाघाट विश्व प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बालाघाट अंतर्गत मुक्की गेट में शनिवार की सुबह बैहर सिविल न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) और पर्यटकों के बीच ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ हो गया। ये ड्रामा लगभग तीन घंटे तक चला। इटली, गोवा, फ्रांस सहित देश-विदेश से कान्हा की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचे थे। मुक्की गेट पर 170 से अधिक पर्यटकों और न्यायिक मजिस्ट्रेट के बीच तीखी बहस हो गई। हालात बिगड़ते देख वन विभाग, कान्हा प्रबंधन और बैहर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दरअसल, मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट दयाल सिंह सूर्यवंशी मुक्की गेट में पर्यटकों की गाड़ियों की चेकिंग से जुड़ा है। सुबह-सुबह जांच करने पहुंच गए पर्यटक सुबह करीब 5.30 बजे सूर्यवंशी मुक्की गेट पहुंचे और कान्हा के अंदर जाने वालीं जिप्सियों के दस्तावेज और लाइसेंस की चेकिंग शुरू कर दी। इस पर जिप्सी चालकों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को गाड़ी के वैध दस्तावेज कान्हा प्रबंधन के पास होने तथा परमिट होने की जानकारी दी। इसके बाद भी मजिस्ट्रेट चेकिंग की जिद पर अड़े रहे। इस दौरान देश-विदेश से आए पर्यटक सफारी का समय निकलने तथा सफारी के बाद गाड़ियों की चेकिंग का गुजारिश करते रहे, लेकिन मजिस्ट्रेट की जिद कम नहीं हुई। इसके बाद पर्यटक न्यायिक मजिस्ट्रेट पर भड़क गए और उन्होंने सूर्यवंशी को घेर लिया। पर्यटकों ने सूर्यवंशी से चेकिंग से जुड़ा आदेश दिखाने कहा। पर्यटकों ने मजिस्ट्रेट पर ‘देख लेने’ की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। बात करने पर बिजी मिले मजिस्ट्रेट इस संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट दयाल सिंह सूर्यवंशी से उनकी प्रतिक्रिया जानने फोन पर संपर्क किया। उन्होंने ‘अभी कोर्ट टाइम है। अभी लाइव कोर्ट चल रही है…’ कहकर फोन रख दिया। कान्हा के फील्ड डायरेक्टर पुणित गोयल ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद समझाइश देकर पर्यटकों को शांत कराया गया है। पर्यटकों को वाहनों से कान्हा भ्रमण के लिए रवाना किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदापुरम से 100 दिवसीय नि-क्षय अभियान का शुभारंभ किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नर्मदापुरम से “100 दिवसीय नि-क्षय अभियान” का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने की दिशा में यह “100 दिवसीय निक्षय अभियान” एक सकारात्मक पहल है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए इसे जन-आंदोलन बनाना जरूरी है। समाज के सभी वर्गों के सहयोग से इस अभियान को सफल बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष-2018 में देश को वर्ष-2025 तक टी.बी. अर्थात क्षय रोग से मुक्त कराने का संकल्प लिया था। यह अभियान उसमें एक सार्थक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जिंदगी बचाने के लिए आज शुरू हुआ यह अभियान देश के 347 जिलों में प्रारंभ हो रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के 23 जिले भी शामिल हैं। इस अभियान का उद्देश्य टी.बी. प्रकरणों की पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए टी.बी. प्रकरणों में कमी लाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नि-क्षय मित्र पहल के तहत हम टी.बी. मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। इसमें हम टी.बी. के मरीजों को प्रतिमाह पूरक खाद्य बास्केट प्रदान करते हैं, जिससे उनके शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी ताकत मिल सके। उन्होंने कहा कि अब टी.बी लाइलाज बीमारी नहीं है, टी.बी. का इलाज संभव है, टी.बी. से डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार सभी देशों ने वर्ष-2030 तक टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, लेकिन केन्द्र सरकार ने इससे पहले वर्ष-2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष-2015 से 2023 तक भारत में टी.बी. के मामलों में 17.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह दर वैश्विक गिरावट 8.3 प्रतिशत से दोगुना से भी अधिक है। उन्होंने यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है कि वर्ष 2015 में भारत में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर टी.बी. के प्रकरण 237 थे, जो वर्ष-2023 में घटकर 195 रह गए हैं। मध्यप्रदेश ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में टी.बी. से होने वाली मृत्यु दर प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 28 थी, जो वर्ष 2023 में घटकर 22 हो गई है। वर्ष 2025 तक इसे घटाकर मात्र 3 तक लाने का लक्ष्य हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में लगातार विकास हो रहा है। प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेज के साथ पीपीपी मोड पर भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज की सुविधा नागरिकों को उपलब्ध हो। इस दिशा में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से की अपील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों, और सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों से अपील की कि वे इस 100 दिवसीय नि-क्षय अभियान का हिस्सा बनकर टी.बी. मरीजों की मदद करें और उन्हें बताए कि “अब टी.बी. लाइलाज बीमारी नहीं है, इसका इलाज संभव है।”  

प्रदेश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का बना नया रिकॉर्ड: एक दिन में 3360 लाख यूनिट की हुई खपत: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र ने फिर एक नया इतिहास रच दिया है। 6 दिसंबर को मध्यप्रदेश में किसी एक दिन सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति कर बिजली कंपनियों ने  एक नया रिकॉर्ड बनाया। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने प्रदेश के ऊर्जा विभाग के  सभी कार्मिकों की सराहना करते हुए इस उपलब्धि पर बधाई दी है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि 6 दिसंबर को  प्रदेश में   बिना किसी व्यवधान के  3360 लाख यूनिट बिजली आपूर्ति   की गई ,जो किसी भी एक दिन में सर्वाधिक आपूर्ति करने का प्रदेश में रिकॉर्ड है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 18077 मेगावाट विद्युत डिमांड को पूरा करने में सफलता प्राप्त की थी। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि 6 दिसंबर को पश्चिम क्षेत्र में 1259 लाख यूनिट, पूर्व क्षेत्र में 929 लाख यूनिट तथा मध्य क्षेत्र में 1070 लाख यूनिट तथा अन्य  क्षेत्र में 102 लाख यूनिट विद्युत आपूर्ति की गई।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर सैनिक कल्याण के लिए प्रदान की सहयोग राशि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर मुख्यमंत्री निवास पुहंचकर सैनिक कल्याण संचालनालय के अधिकारियों ने ध्वज लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सशस्त्र सेना झण्डा दिवस सशस्त्र सेना के प्रति राष्ट्रवासियों की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सैनिक कल्याण कोष के लिए सहयोग राशि भी प्रदान की। इस अवसर पर कर्नल संजय प्रधान (सेना मेडल) और कैप्टन आर एन सिंह तोमर उपस्थित थे।  

हाई कोर्ट ने शासन से पूछा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया

जबलपुर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन से पूछा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस सिलसिले में सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस संस्था ने जनहित याचिका दायर कर ओबीसी वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह व राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह व अमित सेठ ने पक्ष रखा। 10 दिन के स्थान पर एक माह का समय दिया शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार से पूछा कि क्यों न ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का अंतरिम आदेश देकर समस्त याचिकाओं पर अंतिम फैसला इसके अधीन कर दिया जाए। इस पर सरकार की ओर से आपत्ति पेश की गई और कहा गया कि इन मामलों में सालिसिटर जरल तुषार मेहता पक्ष रखेंगे। पांच भागों में बांटें प्रकरण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को निर्देश दिए कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को पांच भागों में वर्गीकृत करें। पहली वो याचिकाएं जो ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के विरोध में हैं और दूसरी वो जो इसके समर्थन में हैं। एक वर्ग में उन मामलों को रखा जाए जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग तथा महाधिवक्ता के अभिमत के अनुसार 87:13 प्रतिशत फार्मूले को चुनौती दी गई है। एक वर्ग में उन याचिकाओं को रखा जाए जिनमें अभ्यर्थियों की नियुक्ति होल्ड करने को चुनौती दी गई है। वहीं पांचवें वर्ग में ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग वाला याचिकाओं को शामिल किया जाए। मंदिर की भूमि बेचने पर 20 दिसंबर तक मांगा जवाब हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मंदिर की भूमि बेचे जाने के रवैये पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन, प्रमुख सचिव, टीकमगढ़ के कलेक्टर, एसडीएम व व टीआई सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। अगली सुनवाई 20 दिसंबर को नियत की गई है। जनहित याचिकाकर्ता खेमचंद अहिरवार की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि ग्राम बगौरा जिला टीकमगढ़ में ग्रामवासियों के सहयोग से हनुमान मंदिर की स्थापना की गई थी। हनुमान मंदिर शासकीय जमीन पर बनाया गया था। मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है और बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

7 बच्चे और एक टीचर की स्कूल में खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत, कलेक्टर और एसपी पहुंचे अस्पताल, जाना बच्चों का हाल

सिंगरौली सिंगरौली जिले के शासकीय पिपरा झांपी पूर्व माध्यमिक विद्यालय के 17 बच्चे और एक टीचर दोपहर के बाद अचानक बीमार हो गए। सभी बच्चे शरीर में दर्द और अजीब हरकत की शिकायत करने लगे। जिसके बाद उन्हें जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया है। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर सहित कलेक्टर और एसपी अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हाल-चाल लिया। फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि, दोपहर के बाद सूचना आई थी कि पिपरा झांपी स्कूल के कई बच्चे अचानक बीमार हो गए हैं। सभी बीमार 17 बच्चों को बैढ़न के ट्रामा सेंटर लाया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। सभी बच्चे ठीक हैं। जानकारी के अनुसार किसी अज्ञात डर की वजह से बच्चों की हालत खराब हुई है। वहीं इस मामले पर बच्चों के परिजन का कहना है कि, बच्चों को उन्होंने सुबह स्कूल भेजा था। अब बच्चे बता रहे हैं कि किसी महिला का उन्हें हाथ दिखा। जिसकी वजह से वह डर गए। वहीं कई बच्चियों तो यह कह रही है कि खाना खाने के बाद उनके शरीर पर अचानक दर्द होने लगा। बहरहाल देर शाम 5:00 तक 17 बच्चे और एक टीचर को अस्पताल लाया जा चुका है। और सभी का उपचार किया जा रहा है। लेकिन बच्चों के बीमार होने की असली वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है। यह कोई अंधविश्वास है या कोई और वजह यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी कलेक्टर के अलावा स्थानीय विधायक और भारी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के बाहर मौजूद हैं।

खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी सम्मानित

खजुराहो खजुराहो मे चल रहे 10 अंतरराष्ट्रिय फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मांगुभाईपटेल ने खजुराहो क्षेत्र के सांसद विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय विधायक अरविंद पटेरिया की उपस्थिति मे किया! इस शुभ अवसर के  दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी दीपक , अभिनेता दीपक परासर, मुकेश खन्ना, गायिका संजीवनी को सम्मानित किया गया! महापुरुषो के सोर्य को फिल्म मे दिखाने की बात कही. हजारों वर्ष पुराना खजुराहो के इतिहास से अपने संबोधन का प्रारम्भ किया! पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी जो खासकर खजुराहो , पन्ना सहित अन्य जगह से मिलने वाले इतिहासिक तत्वों की पड़ताल मे अपने कार्यो को निरंतरता प्रदान कर रहे! पन्ना जिला सहित आस पास के अन्य जिलों मे लगातार विश्वधरोहर को सुरक्षित करने के प्रयास के साथ हजारों वर्ष से छिपे तथ्यो को उजागर करने मे लगे हुए है! जल्द ही कोई नया अध्याय मध्य प्रदेश ही नही अपितु विश्व के सामने रख सकते है.

US Parliament तक पहुंचा भोपाल गैस त्रासदी का मामला, ये प्रस्ताव हुआ पेश

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी के अवसर पर अमेरिकी संसद में 3 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव सीनेटर जेफ मर्कले और प्रतिनिधि सभा की सदस्य प्रमिला जयपाल और रशीदा तलैब द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव में 2001 में हुए भारत-अमेरिका समझौते का जिक्र किया गया है, जिसमें न्याय के लिए सहयोग की बात कही गई थी। यूनियन कार्बाइड के मालिक डॉव इंक से न्यायिक जिम्मेदारियों को पूरा करने की अपील भी की गई।   सुरक्षा की अनदेखी का खामियाजा सीनेटर जेफ मर्कले ने कहा, रासायनिक आपदाएं अक्सर कंपनियों द्वारा सुरक्षा की अनदेखी और मुनाफे को प्राथमिकता देने का नतीजा होती हैं। भोपाल त्रासदी ने लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया और इसका असर आज भी महसूस किया जा रहा है। यूनियन कार्बाइड की लापरवाही प्रस्ताव में यूनियन कार्बाइड और उसके सीईओ वॉरेन एंडरसन पर गैर-इरादतन हत्या के आरोपों का जिक्र किया गया। भारतीय अदालत में चल रही कार्यवाही के बावजूद, कंपनी और उसके प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुए।   मुआवजे की मांग प्रमिला जयपाल ने कहा कि यूनियन कार्बाइड और डाउ केमिकल को पीड़ितों को मुआवजा देना चाहिए। रशीदा तलैब ने कहा, डाउ ने यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण करते वक्त त्रासदी की जिम्मेदारी ली थी। 40 साल बाद भी पीड़ित न्याय की आस लगाए बैठे हैं। अब डाउ को नुकसान की भरपाई करनी ही होगी।   जागरूकता दिवस का उद्देश्य वहीं सांसदों ने त्रासदी पीड़ितों के संघर्षों की सराहना की और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। इस पहल का उद्देश्य रासायनिक आपदाओं के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना और मानवाधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देना है। यह अमेरिका की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है। भोपाल गैस त्रासदी पर एक नजर     भारतीय इतिहास में 2-3 दिसंबर 1984 की रात एक ऐसी भयावह घटना के रूप में दर्ज है, जिसे भुला पाना मुश्किल है। यह घटना भोपाल गैस त्रासदी थी, जिसने मानवता पर अमिट छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कीटनाशक संयंत्र से लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली और लाखों लोगों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंचाई। इस औद्योगिक दुर्घटना को दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना में करीब 30 हजार लोग मारे गए भोपाल गैस त्रासदी के तत्काल प्रभाव से एक लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए थे। हालांकि, इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या पर अभी भी विवाद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में लगभग 30  हजार लोग तत्काल मारे गए थे। जबकि अन्य मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा थी। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 8 हजार से 10 हजार बताई गई है। गैस के प्रभाव से न केवल मौतें हुईं, बल्कि हजारों लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए। इनमें से कई लोग शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हुए और आज भी पीड़ित हैं। जब हम दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करते हैं तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। त्रासदी के बाद लंबे समय तक कई लोग सांस की बीमारियों, कैंसर, आँखों में जलन, त्वचा के घावों और मानसिक विकारों से पीड़ित रहे। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं ने विकलांग बच्चों को जन्म दिया और अजन्मे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ा।

प्रदेश में 20 दिसंबर से 22 दिन कोल्ड वेव के साथ घने कोहरे की भी स्थिति बन सकती

भोपाल मध्य प्रदेश में आज शनिवार को मौसम के दो रुप देखने को मिलेगें। एक तरफ ठंडी हवाओं के असर से तापमान में उतार चढ़ाव के साथ ठंड का असर तेज होगा और दूसरी तरफ पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने से उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी बारिश होगी, जिसकेअसर से मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बादल छाने के साथ बूंदाबांदी होने का अनुमान है। एमपी मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले 48 घंटे में जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश के आसार हैं। वही उत्तर-पश्चिमी हवाओं के आने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में रात का पारा गिरेगा और सर्दी बढ़ेगी।हालांकि पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में तापमान में बदलाव होगा। वर्तमान में उत्तर भारत के ऊपर जेट स्ट्रीम और पूर्व-मध्य अरब सागर में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में मौजूद है। हवाओं का रुख उत्तर-पूर्व की तरफ बना हुआ है, जिससे मध्य प्रदेश के तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है और कुछ जिलों में बादल छाए रहने के साथ बारिश की स्थिति बनी हुई है।प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर 20 दिसंबर से शुरू होगा, जो जनवरी तक बना रहेगा।इन 40 दिनों में 20 से 22 दिन कोल्ड वेव यानी, सर्द हवाओं के साथ घने कोहरे की भी स्थिति बन सकती है।  ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में सुबह से हल्की धुंध के साथ ही बर्फीली हवाओं का दौर देखने को मिला है. प्रदेश के पांच बड़े शहरों में ग्वालियर का रात का न्यूनतम तापमान सबसे कम 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा. इसके अलावा जबलपुर में 12.6 डिग्री, भोपाल में 14 डिग्री, उज्जैन में 16 डिग्री और इंदौर में 16.6 डिग्री दर्ज हुआ. कुछ दिनों तक ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम इसी प्रकार बना रहेगा और तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. वहीं 20 दिसंबर के बाद पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो जाएगी. बता दें, पिछले 24 घंटो के दौरान प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा है. इन शहरों का तापमान सबसे कम प्रदेश के पांच सबसे कम न्यूनतम तापमान वाले शहरों की बात करें तो पिपरसमा (शिवपुरी) में 8.2 डिग्री, ग्वालियर में 8.5 डिग्री, नौगांव (छतरपुर) में 8.6 डिग्री, कल्याणपुर (शहडोल) में 9.2 डिग्री और रीवा व उमरिया में 10.4 डिग्री दर्ज किया गया. ग्वालियर में दिन का पारा सबसे कम प्रदेश के पांच बड़े शहरों की बात करें तो शुक्रवार को ग्वालियर में दिन के अधिकतम तापमान में गिरावट देखने को मिली. यहां तापमान सबसे कम 27.7 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा जबलपुर में 27.8 डिग्री, भोपाल व उज्जैन में 28 डिग्री और इंदौर में 28.8 डिग्री दर्ज हुआ. पिछले 24 घंटे के MP के मौसम का हाल     पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा।     भोपाल, उज्जैन संभागों में अधिकतम तापमान में वृद्धि हुई।     भोपाल, नर्मदापुरम, शहडोल संभाग , जबलपुर संभागों के जिलों में पारा सामान्य से अधिक रहा।     न्यूनतम तापमानों में सभी संभागों के जिलों में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। हालांकि     इंदौर, उज्जैन, रीवा संभागों , नर्मदापुरम, जबलपुर, शहडोल संभागों में सामान्य से अधिक रहा।     पिपरसमा (शिवपुरी) में 8.2 डिग्री, ग्वालियर में 8.5 डिग्री, नौगांव (छतरपुर) में 8.6 डिग्री, कल्याणपुर (शहडोल) में 9.2 डिग्री और रीवा व उमरिया में 10.4 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।     ग्वालियर में दिन का अधिकतम तापमान 27.7 डिग्री, जबलपुर में 27.8 डिग्री, भोपाल व उज्जैन में 28 डिग्री और इंदौर में 28.8 डिग्री दर्ज हुआ।

राज्यपाल पटेल को ध्वज लगाया, राजभवन में सशस्त्र झंडा दिवस मना

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल को राजभवन में सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर ध्वज लगाया गया। राज्यपाल पटेल को सैनिक कल्याण संचालनालय मध्यप्रदेश के अतिरिक्त संचालक, सेवानिवृत्त कर्नल संजय प्रधान ने ध्वज लगाया। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर सशस्त्र सेना कल्याण निधि के लिए सहयोग राशि प्रदान की। राज्यपाल पटेल ने नागरिकों से अपील की है कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर अपनी क्षमता से बढ़कर अशंदान के भाव और भावनाओं के साथ अधिक से अधिक राशि का अशंदान करें। सशस्त्र सेना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता के प्रदार्शन में सहभागी बनें।  

वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में “गणित, विज्ञान और भाषाविज्ञान के अंतर्विषयी परिप्रेक्ष्य” पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

भोपाल आज दिनांक 5 दिसम्बर 2024 को वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में “गणित, विज्ञान और भाषाविज्ञान के अंतर्विषयी परिप्रेक्ष्य” पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राकेश आर्य, मुख्य वैज्ञानिक एवं पूर्व महानिदेशक, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् उपस्थित रहे। सत्र की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ. अक्षरा मकड़ारिया ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. देबाशीष अधिकारी, डीन, फैकल्टी अफेयर्स ने अभिनंदन भाषण दिया। रजिस्ट्रार के.के. नायर ने सभा को संबोधित किया। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सेंथिल कुमार अरुमुगम ने अपना संबोधन देते हुए वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से हुए विकास की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि 7 वर्षों की छोटी अवधि में वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के उद्धरणों की कुल संख्या 12000 से अधिक है। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों द्वारा अब तक कुल 2020 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए गए हैं। उन्होंने 28 पुस्तकें प्रकाशित की हैं और 48 पेटेंट/डिज़ाइन पंजीकरण प्राप्त किए हैं। वीआईटी भोपाल मध्य भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक है और यह अपने भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रमों और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से सर्वोत्तम तकनीकी शिक्षा प्रदान करता है। अपना उद्घाटन भाषण देते हुए मुख्य अतिथि डॉ. राकेश आर्य, मुख्य वैज्ञानिक, पूर्व महानिदेशक, मध्य प्रदेश कॉउन्सिल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और इसके माध्यम से अंडरग्रेजुएट्स को भी अनुसंधान के अवसर प्रदान करने की सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि यह पीढ़ी, जो कि जेन जी कही जाती है, देश को अगले स्तर पर ले जाएगा और वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय उन्हें आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय में तैयार हो रहे ऐसे उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन से प्रदेश लाभान्वित हो रहा है। उन्होंने कहा कि गणित, विज्ञान और भाषाविज्ञान को जोड़ने वाले इस सम्मेलन का अनूठा विषय छात्रों और प्रतिभागियों को “एसटीईएम” (STEM) के इस अज्ञात लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्र को समझने और योगदान करने का अवसर प्रदान करेगा। उद्घाटन समारोह में संयोजक डॉ. अनंत कांत शुक्ला, डॉ. शरद चंद्र त्रिपाठी, डॉ. सौम्य शंकर घोष, डीन, निदेशक, शिक्षक गण, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 8 मुख्य वार्ताएँ, 9 आमंत्रित वार्ताएँ, 50 शोध पत्र आगामी दिनों में प्रस्तुत किए जाएंगे और स्प्रिंगर प्रकाशन द्वारा ये शोध पत्र प्रकाशित किए जाएंगे। यह सम्मेलन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, डीएसटी, भारत सरकार तथा तकनीकी रूप से मध्य प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल, मध्य प्रदेश द्वारा प्रायोजित है और स्प्रिंगर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का हुआ शुभारम्भ, पीएम एवं सीएम के वर्चुअल कार्यक्रम को देखने की रही व्यवस्था

टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने सामुदायिक सहयोग जरूरी-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी.सी. गुप्ता टीबी रोग का ईलाज साध्य व निःशुल्क है लाभ उठाएं-जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का हुआ शुभारम्भ, पीएम एवं सीएम के वर्चुअल कार्यक्रम को देखने की रही व्यवस्था अनूपपुर  क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर की पहल सराहनीय है। इस पहल में सभी के सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है। सभी के सद्प्रयासों से ही हम टीबी के विरुद्ध जंग जीत सकते हैं। पूर्व में पोलियो के मुक्ति के लिए भी इसी तरह के प्रयास सुनिश्चित किए गए हैं। उक्ताशय के विचार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी.सी. गुप्ता ने जिला चिकित्सालय अनूपपुर के स्वसहायता भवन में आयोजित नि-क्षय शिविर के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व जिला न्यायाधीश श्रीमती मोनिका आध्या, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती पार्वती राठौर, संयुक्त कलेक्टर दिलीप पाण्डेय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीमती एस.बी. अवधिया, महिला बाल विकास विभाग की सहायक संचालक श्रीमती मंजूषा शर्मा, पिछड़ा वर्ग विभाग की सहायक संचालक श्रीमती मंजुला सेन्द्रे, जिला क्षय अधिकारी डॉ. एस.सी. राय, जिला विधिक सहायता अधिकारी दिलावर सिंह सहित चिकित्सक, हितग्राही, गणमान्य नागरिक, पत्रकारगण, स्वास्थ्य अमला उपस्थित रहे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी.सी. गुप्ता ने कहा कि नि-क्षय शिविर के 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत आधुनिक चलित इकाई द्वारा जो सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उसका सदुपयोग कर निश्चित समय सीमा के पूर्व ही जिले में क्षय रोग का उन्मूलन सुनिश्चित हो, यह प्रयास किया जाए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह ने कहा कि टीबी जिसे कभी लाईलाज माना जाता था। अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। उन्होंने कहा कि 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देगा और जनजागरूकता को बढ़ावा देगा। उन्होंने रोगियों से अभियान का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने आम जन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, ताकि समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित हो। कार्यक्रम को जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती पार्वती बाल्मिीकी राठौर ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी के सद्प्रयासों से टीबी उन्मूलन का समय आ गया है। उन्होंने सभी को टीबी के संबंध में जनजागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। कार्यक्रम के उद्देश्यों के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीमती एस.बी. अवधिया तथा जिला क्षय अधिकारी डॉ. एस.सी. राय ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर टीबी चैम्पियन संत कुमार दाहिया तथा दुर्गा कुशवाहा ने अपने टीबी उन्मूलन की सफलता की गाथा का बखान किया। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा अन्य अतिथिगणों द्वारा वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया गया। जिसे देखने एवं सुनने की व्यवस्था जिला स्तरीय कार्यक्रम में की गई थी। कार्यक्रम का संचालन डॉ शिवेंद्र  द्विवेदी ने किया इस अवसर पर नि-क्षय पोषण किट का वितरण अतिथियों द्वारा हितग्राहियों को किया गया। टीबी मुक्त भारत बनाने की दिलाई गई शपथ 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के शुभारम्भ कार्यक्रम के अवसर पर उपस्थित जनों को टीबी मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई गई। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह ने शपथ दिलाई, जिसे उपस्थित जनों द्वारा दोहराया गया। इस अवसर पर टीबी हारेगा, देश जीतेगा का उद्घोष किया गया। नि-क्षय वाहन को अतिथियों ने हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के शुभारम्भ कार्यक्रम के अवसर पर क्षय रोग की जांच संबंधी चलित नि-क्षय वाहन को अतिथियों द्वारा हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। यह वाहन जिले के दूरदराज क्षेत्रों में अभियान की जनजागरूकता बढ़ाने तथा जांच कर रोगियों के चिन्हांकन आदि का प्रभावी कार्य करेगा।

Indore में 50 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी चार्जिंग स्टेशन पड़ गए कम, डिपो में धूल खा रही बसें

इंदौर इंदौर की सड़कों पर जल्दी ही 50 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएगी, लेकिन शहरवासियों को थोड़ा इंतजार करना होगा,क्योकि खरीदी हुई बसें डिपों में धूल खा रही है। उनके लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन शहर के अलग-अलग हिस्सों में नहीं है। अब एआईसीटीएसएल स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर फोकस कर रहा है, ताकि 50 करोड़ की लागत से खरीद गई बसों का उपयोग हो सके। पचास में से दस बसें पिछले दिनों शुरू की गई। यह बसें भंवरकुआ, तेजाजी नगर रुट पर चल रही है। शहर में डीजल इंजन से चलने वाली बसों को हटाकर अटल इंदौर सिटी बस कंपनी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर रही है। बीआरटीएस लेन में ज्यादातर डीजल बसें बंद कर दी गई है। इंदौर को अमृत प्रोजेक्ट के तहत नई बसें मिली। उनके लिए 30 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन बनना थे, लेकिन उतने नहीं बन पाए। इस कारण सभी बसों को उपयोग नहीं हो पा रहा है। फिलहाल विजय नगर, राजीव गांधी चौराहा, सिटी बस दफ्तर सहित अन्य पंद्रह स्थानों पर बसों की चार्जिंग की व्यवस्था है। नई बसों का संचालन लगातार अलग-अलग रुटों पर होना है, लेकिन उन्हें चार्जिंग के लिए इंतजार न करना पड़े, इसके लिए शहर में 50 से ज्यादा नए चार्जिंग स्टेशनों की जरुरत है। नगर निगम शहर में दोपहिया वाहनों के चार्जिंग स्टेशन भी बन रहा है। छह घंटे में होती है एक बस चार्ज जो नई सिटी बसे त्रिची से इंदौर आई है। उनके पूरी तरह चार्ज होने में छह घंटे का समय लगता है। यदि डबल चार्जर से चार्ज किया जाए तो तीन घंटे में बैटरी चार्ज हो जाती है। एक बार की चार्जिंग में 300 से 350 किलोमीटर का सफर एक बस द्वारा तय होता है। फिलहाल जिन दस बसों का संचालन हो रहा है। उन्हें राजीव गांधी चौराहा के बस स्टेशन से चार्ज किया जा रहा है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि सिटी बसों व दोपहिया वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने का काम चल रहा है। हाल ही में विश्राम बाग में नया स्टेशन शुरू हुअा है। जहां दोपहिया, तीन पहिया व चार पहिया वाहनों की बैटरी चार्ज करने की सुविधी शहरवासियों को दी जा रही है।

एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज ज्योति रात्रे अब अंटार्कटिका जाएंगी माउंट विंसन चोटी पर करेंगी चढ़ाई

भोपाल 55 वर्षीय ज्योति रात्रे, जिन्होंने इस साल 19 मई 2024 को माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की थी। वह अब अपनी अगली चुनौती के लिए तैयार हैं। वह 14 दिसंबर को अंटार्कटिका के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट विन्सन, जिसकी ऊंचाई (4892 मीटर) को फतह करने रवाना होंगी। यह उनकी “7 समिट्स मिशन” की छठी चोटी होगी। ज्योति रात्रे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली सबसे उम्र दराज भारतीय महिला हैं। इस अभियान के तहत वह 15 दिसंबर को चिली के पंटो अरेना पहुंचेंगी और 18 दिसंबर को यूनियन ग्लेशियर के लिए प्रस्थान करेंगी। उनका यह अभियान 12 दिनों तक चलेगा, उनका लक्ष्य 7 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फ़तह करना है। बता दें कि ज्योति माउंट विन्सन पर जाने वाली मध्य प्रदेश से पहली महिला हैं, ज्योति 15 दिसंबर को चिली के पंटो अरेना पहुंचेंगी और वहां से 18 दिसंबर को यूनियन ग्लेशियर की ओर प्रस्थान करेंगी। भीषण मौसम सबसे बड़ी चुनौती ज्योती रात्रे ने बताया अंटार्कटिका के लिए बहुत सारे चैलेंज हैं, सबको लगता है कि एवरेस्ट हो गया तो सब हो जाएगा, पर ऐसा होता नहीं है। अंटार्कटिका के दो सबसे बड़े चैलेंज यह है कि एक तो इस वक्त वहां 24 घंटे दिन यानी रोशनी होगी। दूसरा वहां का मौसम जो कि -30 से -60 तक चला जाता है। कोई भरोसा नहीं होता है कि कभी भी आंधी आ सकती है, कभी भी स्नो फॉल हो सकता है। कई बार टेम्परेचर माइनस में होता है लेकिन अगर बेहद तेज धूप है तो आप उसको सहन कर सकते हैं। वहीं अगर मौसम भी खराब हो और टेम्परेचर भी डाउन हो तो फिर बहुत मुश्किलें होती हैं। यहां बर्फीली आंधियां व तूफ़ान पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं। इस मौसम में शरीर को गर्म और सुरक्षित रखना किसी जंग से कम नहीं होता। ऐसे कर रहीं प्रैक्टिस अंटार्कटिका जाने की अपनी तैयारी को लेकर उन्होंने बताया- वहां पर हमें अपना पूरा सामान स्लेश से खींचना है। उसकी प्रैक्टिस के लिए मैंने एक जुगाड़ निकाला है। मैं टायर में पत्थर रख कर उसका वजन करीब 15-20 किलो करके मनुआभान टेकरी पर प्रैक्टिस कर रही हूं। एक दिन छोड़कर 2-3 राउंड मैं लगा रही हूं। अंटार्कटिका में हमें टेंट और खाना लेकर लगभग 30-35 किलो का सामान लेकर चलना है। लेकिन मैं अभी फिलहाल 15-20 किलो के सामान के साथ ही प्रैक्टिस कर रही हूं। सड़क पर होने के कारण 15-20 किलो भारी हो रहा है लेकिन वहां बर्फ पर मुझे लगता है कि थोड़ा आसान रहेगा। यहां यह भी चुनौती एवरेस्ट पर तो हमारे साथ शेरपा होते हैं लेकिन यहां बस जिस कंपनी के द्वारा हम जाते हैं, उनका गाइड होता है। जो अक्सर रास्ता दिखाने का काम करता है। वहां ऑक्सीजन नहीं लगती है, फिर भी अगर किसी क्लाइंबर को जरुरत महसूस होती है तो वह ऑक्सीजन लगा लेता है। 90% मामलों में हम बिना ऑक्सीजन के माउंट विंसन फतेह कर लेते हैं।

Kaun Banega Crorepati में अमिताभ बच्चन ने एमपी के मोबाइल ऐप को लेकर पूछा गया सवाल

 भोपाल चर्चित टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में शुक्रवार को होस्ट अमिताभ बच्चन ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से विकसित ‘लोकपथ’ ऐप से जुड़ा सवाल पूछा. इस पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने अमिताभ बच्चन का आभार व्यक्त किया है. दरअसल, लोकपथ मध्य प्रदेश सरकार द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विकसित किया गया एक ऐप है. ये प्रतिभागी मप्र के नरसिंहपुर जिले के रचित बेल्थरिया थे, जिन्होंने इस सवाल का सही जवाब दिया। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने केबीसी में मप्र के नवाचार को स्थान देने के लिए फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को धन्यवाद दिया हैं। उन्होंने कहा कि महज 6 महीने में इस एप्लीकेशन ने प्रदेश के साथ-साथ देश स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर ली है। इससे मप्र की सड़कों की गुणवत्ता ओर अच्छी हुई है। क्योंकि आम लोग भी सड़क पर गड्ढा देखते ही उसकी रिपोर्ट सीधे विभाग को भेज सकते हैं। केबीसी में पूछा गया लोकपथ ऐप से जुड़ा सवाल पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि ‘मध्य प्रदेश का लोकपथ ऐप अब राष्ट्रीय पहचान बन चुका है. हाल ही में इस ऐप का उल्लेख देश के सबसे प्रतिष्ठित टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हुआ. इस कार्यक्रम के होस्ट और मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन ने लोकपथ ऐप से जुड़ा सवाल प्रतिभागी से पूछा जो न केवल मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश में सड़कों के रखरखाव और सुधार के लिए किए गए नवाचारों को भी राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है’. ‘सिर्फ 6 महीने में ऐप ने बनाई राष्ट्रीय पहचान’ राकेश सिंह ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में मध्य प्रदेश के नवाचार को स्थान देने के लिए एमपी सरकार की ओर से अमिताभ बच्चन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सिर्फ 6 महीने में इस ऐप ने प्रदेश से निकलकर राष्ट्र स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की है. लोकपथ ऐप प्रदेश की जनता के लिए एक बड़ा नवाचार है, जो सड़कों को गुणवत्तापूर्ण , सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने में सहायक है.’ लोकपथ ऐप पर अब तक मिलीं 4536 से अधिक शिकायतें उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोकार्पित लोकपथ ऐप, लोक निर्माण विभाग की एक अनूठी पहल है जिसका उद्देश्य प्रदेश की सड़कों से जुड़ी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना है. नागरिक इस ऐप के माध्यम से क्षतिग्रस्त सड़कों की रिपोर्ट सीधे विभाग को भेज सकते हैं, जिससे समस्याओं का शीघ्र समाधान हो रहा है’ सरकार के मुताबिक लॉन्च होने से लेकर अब तक लोकपथ ऐप पर 4536 से अधिक शिकायतें प्राप्त की गई हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण 7 दिनों के भीतर किया गया.  

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