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इंदौर को मिलेगा नया शास्त्री ब्रिज, 72 साल पुराने पुल की जगह बनेगा 140 करोड़ का प्रोजेक्ट

इंदौर 72 साल पुराना लालबहादुर शास्त्री ब्रिज तोड़कर इसके स्थान पर रेलवे 140 करोड़ रुपये खर्च कर नया ब्रिज बनाएगा। नए ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान के मुकाबले डेढ़ गुना और ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों ने शास्त्री ब्रिज का दौरा किया। देर शाम सांसद शंकर लालवानी ने अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि ब्रिज निर्माण की लागत तो रेलवे वहन करेगा, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल इत्यादि मूलभूत सुविधाएं नगर निगम जुटाएगा। सांसद के अनुसार नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास खत्म होगा। वर्तमान के मुकाबले इसकी लंबाई 38 मीटर अधिक होगी।   रेलवे तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा आमतौर पर जब भी किसी रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को दोबारा बनाना होता है तो खर्च स्थानीय निकाय को वहन करना होता है, लेकिन नया शास्त्री ब्रिज बनने से रेलवे इंदौर से लक्ष्मीबाई नगर तक तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी, यही वजह है कि रेलवे इस आरओबी को दोबारा बनाने का खर्चा वहन करने को तैयार हो गया है। शास्त्री ब्रिज की बिगड़ती स्थिति और इस पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सांसद शंकर लालवानी ने पिछले दिनों रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा की थी। इसके बाद रेलवे इस ब्रिज का खर्चा वहन करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों के शास्त्री ब्रिज के संयुक्त दौरे में इस बात का आकलन किया गया कि नया ब्रिज बनाने की स्थिति में किन-किन सीवेज लाइन, पानी की लाइन और बिजली के पोल की शिफ्टिंग करनी होगी और इस पर कितना खर्चा आएगा। नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि निगम के इंजीनियरों ने रेलवे के इंजीनियरों को लाइनों की ड्राइंग दे दी है। जल्द ही निगम आर्थिक आकलन तैयार कर लेगा। 12 जनवरी 1953 को हुआ था शुरू वर्तमान शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसे लोकार्पित किया था। यह ब्रिज पिछले 72 वर्ष से पूर्व और पश्चिम इंदौर को जोड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी बना हुआ है। टूटने पर आएगी आवागमन की परेशानी इस ब्रिज से शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन की भारी परेशानी आएगी। एमजी रोड पर मेट्रो अंडर ग्राउंड प्रस्तावित है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी। पिछले दिनों चूहों ने कुतर दिया था वर्ष 1953 में जब यह ब्रिज शुरू हुआ था उस वक्त यह मध्य भारत का पहला टू-टू लेन रेलवे ओवरब्रिज था। हाल ही में शास्त्री ब्रिज को चूहों ने कुतर दिया था। इस वजह से बड़ा गड्ढा हो गया था। जीर्ण-शीर्ण हो चुका है रखरखाव के अभाव में शास्त्री ब्रिज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हालांकि रेलवे ने इसे अब तक अनफिट घोषित नहीं किया है। टेंडर में लगेंगे छह माह, 15 माह में होगा निर्माण रेलवे सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम छह माह लगेंगे। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने इस ब्रिज को 15 माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा है।  

रद्दी अखबारों से बनेगी कला, मन रहेगा हल्का: AIIMS Bhopal में शुरू हुई अनोखी आर्ट थैरेपी पहल

भोपाल चिकित्सा और पढ़ाई के तनावपूर्ण माहौल के बीच एम्स भोपाल ने अपने संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए एक पहल की है। संस्थान का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आगामी 16 से 18 फरवरी तक ‘पेपर माचे’ कला पर कार्यशाला आयोजित करेगा। लोगों को तनावमुक्त करना है टारगेट इसका उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि ‘आर्ट थैरेपी’ के माध्यम से संस्थान से जुड़े लोगों को तनावमुक्त वातावरण और मानसिक शांति प्रदान करना है। ‘पेपर माचे’ एक ऐसी प्राचीन विधा है, जिसमें पुराने अखबारों, गोंद और पानी के मिश्रण का उपयोग कर आकर्षक मूर्तियां, मुखौटे और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं।   एम्स प्रशासन का मानना है कि जब हाथ किसी सृजनात्मक कार्य में व्यस्त होते हैं, तो मस्तिष्क को गहरा विश्राम मिलता है। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने और दैनिक भागदौड़ से इतर कुछ नया रचने का अवसर देगी। एम्स भोपाल इन दिनों अपने कर्मचारियों और छात्रों के समग्र स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान के अनुसार एक स्वस्थ चिकित्सक या कर्मचारी ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकता है। इसी सोच के साथ इस रचनात्मक गतिविधि को डिजाइन किया गया है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पेपर माचे की बारीकियां सिखाई जाएंगी, जिससे प्रतिभागी शून्य लागत में घर की रद्दी से खूबसूरत कृतियां बनाना सीख सकेंगे।

सफर होगा और आरामदायक: महामना एक्सप्रेस समेत इन ट्रेनों में लगेंगे आधुनिक लग्जरी कोच

भोपाल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित सफर को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 22163/22164 भोपाल-खजराहो महामना एक्सप्रेस तथा 22187/22188 रानी कमलापति-आधारताल एक्सप्रेस के पारंपरिक आईसीएफ कोचों को अब आधुनिक एलएचबी कोचों में परिवर्तित किया जा रहा है। भोपाल-खजुराहो-भोपाल महामना एक्सप्रेस आज से तथा रानी कमलापति–आधारताल–रानी कमलापति एक्सप्रेस 16 फरवरी से एलएचबी रैक के साथ संचालित होगी। एलएचबी कोच पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित, आरामदायक और तेज गति के अनुकूल माने जाते हैं। इन कोचों में झटके कम लगते हैं और दुर्घटना की स्थिति में एंटी-टेलिस्कोपिक डिजाइन यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाता है।   दोनों ट्रेनों की संशोधित कोच संरचना में दो एसी चेयरकार, दो थर्ड एसी, नो द्वितीय श्रेणी, छह सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी और एक जनरेटर कार सहित कुल 21 कोच शामिल रहेंगे। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पूर्व कोच संरचना और आरक्षण स्थिति की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि सफर सुगम और सुविधाजनक रहे।

Kisan Credit Card में बदलाव, RBI ने जारी किया 2026 का मास्टर प्लान, किसानों को फायदा

भोपाल  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और ज्यादा आसान, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं। इन बदलावों का मकसद है कि खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए किसानों को एक ही नियम, एक जैसा लोन ढांचा और ज्यादा लचीलापन मिल सके। इस फैसले से देश के करोड़ों किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अब खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए कर्ज लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? RBI के नए ढांचे के तहत ये नियम इन सभी बैंकों पर लागू होंगे: कॉमर्शियल बैंक,स्मॉल फाइनेंस बैंक,रीजनल रूरल बैंक (RRBs),ग्रामीण सहकारी बैंक ,मतलब देश के लगभग हर किसान तक KCC सुविधा की पहुंच और बढ़ेगी। KCC के लिए एक जैसा नियम – देशभर में एक ही सिस्टम अब KCC लोन के लिए Single Framework लागू करने का प्रस्ताव है। इससे: सभी बैंकों के नियम एक जैसे होंगे ,किसानों में कन्फ्यूजन कम होगा,लोन प्रक्रिया तेज और सरल बनेगी। फसल चक्र भी होगा एक जैसा: छोटी अवधि की फसलें: 12 महीने ,लंबी अवधि की फसलें: 18 महीने ,इससे लोन चुकाने की तारीखें पूरे देश में एक समान होंगी। KCC लोन की अवधि बढ़ाकर 6 साल करने का प्रस्ताव अब तक KCC लोन की अवधि कम होने से लंबी अवधि वाली फसल उगाने वाले किसानों को दिक्कत होती थी। लेकिन नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक: KCC लोन अब 6 साल तक के लिए मिल सकता है। इससे बागवानी, गन्ना, फलदार फसलें उगाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। अब खेती की असली लागत के हिसाब से मिलेगा लोन अब किसानों को मिलने वाली KCC ड्रॉइंग लिमिट सरकार द्वारा तय की गई वास्तविक खेती लागत पर आधारित होगी। इससे: कम लोन मिलने की शिकायत खत्म होगी,किसानों को जरूरत के मुताबिक पैसा मिलेगा,महंगाई के असर को भी ध्यान में रखा जाएगा।आधुनिक खेती के लिए भी मिलेगा KCC से पैसा, अब KCC लोन का इस्तेमाल सिर्फ बीज-खाद तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में शामिल: मिट्टी की जांच,मौसम की जानकारी से जुड़ी सेवाएं ,ऑर्गेनिक खेती के सर्टिफिकेट ,आधुनिक खेती के उपकरण ,फसल देखभाल के लिए अतिरिक्त 20% फंड, यानी अब किसान Smart Farming की ओर आसानी से बढ़ सकेंगे। क्यों है यह बदलाव किसानों के लिए गेमचेंजर? आसान नियम, लंबी अवधि तक लोन, सही लागत के अनुसार पैसा, आधुनिक खेती के लिए फंड, सभी बैंकों में एक जैसा सिस्टम RBI का यह कदम KCC योजना को सच में “किसानों का सच्चा साथी” बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

एक मई से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, नागरिकों को 33 सवालों के उत्तर देने होंगे स्वयं

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की एक मांग को जनगणना निदेशालय मान लेता है तो मजरे-टोलों में रहने वालों लोगों की अलग से जानकारी सामने आ जाएगी। इसका लाभ जल जीवन मिशन जैसी कई योजनाओं को लेकर नीति बनाने में होगा। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 को लेकर आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के समक्ष यह बात कही। अनुराग जैन ने कहा कि जनगणना में मजरे-टोलों का कालम अलग से जोड़ दिया जाए तो मध्य प्रदेश ही नहीं आदिवासी बहुल जनसंख्या वाले दूसरे राज्यों को भी उतना ही लाभ होगा। बता दें, प्रदेश में एक लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं। ये अधिकतर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही होते हैं। प्रशिक्षण कार्यशाला को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मृत्युंजय कुमार ने संबोधित किया। अनुराग जैन ने कहा कि जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तभी जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। आमजन भी सही जानकारी दें। कई बार लोगों को लगता है कि संपत्ति संबंधी जानकारी नहीं बताने पर वह लाभ में रहेंगे। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल सकती है, पर ऐसा नहीं है। इनबिल्ड एप गलतियां भी बताएंगे मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी, इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार किया गया है। जनगणना में स्व-गणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध कराया जा रहा है। नागरिक मोबाइल, लैपटाप और डेस्कटाप से जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस बार जातिगत जनगणना भी होगी। जानकारी बहुत सावधानी से अंकित की जाए जिससे किसी तरह की गलती की आशंका नहीं रहे। उन्होंने बताया जनगणना के सॉफ्टवेयर में कुछ इनबिल्ड एप्लीकेशन भी हैं, जो कुछ हद तक फीडिंग की गलतियों से सतर्क करेंगे। दो चरणों में जानकारियां एकत्र की जाएंगी निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करने का कार्य एक से 30 मई के बीच होगा। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों का विवरण प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर एकत्रित किया जाएगा। द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी, 2027 में कराया जाना तय किया गया है। जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी। साथ ही, व्यक्तियों के संबंध में अन्य बिंदु जैसे आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास और संतानों की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह 33 सवाल पूछे जाएंगे भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या), घर संख्या, फर्श की प्रमुख सामग्री, भवन की दीवार की प्रमुख सामग्री, भवन की छत, घर का उपयोग, घर की स्थिति, परिवार संख्या, घर में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, क्या परिवार का मुखिया एससी/एसटी/अन्य से संबंधित है, स्वामित्व की स्थिति, परिवार के स्वामित्व वाले आवासीय कमरों की संख्या, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, पीने के पानी का मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय है या नही, शौचालय का प्रकार, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, रसोई और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, खाना बनाने में मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट तक पहुंच किस तरह है। लैपटाप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन, साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड, कार/जीप/वैन, घर में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज और मोबाइल नंबर।

होली में घर वापसी चुनौतीपूर्ण, कई ट्रेनों में कंफर्म सीटों की समस्या

भोपाल  होली का त्योहार नजदीक आ रहा है। ऐसे में त्योहारी सीजन में अपने घर जाने की इच्छा दूसरे शहरों में रह रहा हर कोई करता है। लेकिन, इस बार आपका ये सफर बड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दिल्ली, मुंबई, बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिल पाना अभी से काफी मुश्किल हो गए हैं। इंदौर-पटना, कर्नाटका और हमसफर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और रिग्रेट की स्थिति बनी हुई है। सीट न मिलने से यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च और परेशानी ज्यादा बढ़ रही है। हर बार त्योहारी दौर में आने लगी समस्या होली हो या दिवाली… अब तो देश में मनाए जाने वाले किसी भी बड़े त्योहार पर ट्रेनों में कंफर्म सीट न मिल पाना अब आम समस्या बन चुकी है। यात्रा की तारीख से करीब एक महीने पहले ही ज्यादातर ट्रेनों में ‘नो रूम’ की स्थिति दिखाई देने लगती है। वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती है और कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल होता जाता है। यात्रियों का कहना है कि, हर साल त्योहारों के समय ऐसे हालात बनते जा रहे हैं। खास बात ये है कि, समस्या के समाधान पर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है। अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है मजबूरी में लोगों को तत्काल टिकट का सहारा लेते हैं। उससे भीड़ और बढ़ जाती है। कई यात्रियों को घर पहुंचने के लिए अन्य माध्यमों जैसे- बस, फ्लाइट या निजी वाहन जैसे महंगे विकल्पों का चुनाव करना पड़ता है। यात्रियों की मांग है कि त्योहारों से पहले रेलवे को अतिरिक्त या स्पेशल ट्रेनों की घोषणा करनी चाहिए, ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही, यात्रियों को कंफर्म सीट मिल सके। होली स्पेशल : भोपाल मंडल से चलेंगी 4 जोड़ी विशेष ट्रेनें होली पर्व पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे द्वारा देशभर में 1410 विशेष ट्रेनों का संचालन किया है, जिनमें पश्चिम मध्य रेल से 43 ट्रेनें शामिल हैं। भोपाल मंडल से रीवा-रानी कमलापति (02192/02191, 02186/02185), भोपाल–रीवा (01704/01703) तथा रानी कमलापति–दानापुर (01667/01668) स्पेशल ट्रेनें निर्धारित तिथियों पर चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों के संचालन से त्योहार के दौरान अतिरिक्त भीड़ कम होगी और यात्रियों को सुगम यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। इन ट्रेनों में ‘रिग्रेट व नो रूम’ की स्थिति -श्रीनगर-शिरड़ी-कालका सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22455) 28 फरवरी से 5 मार्च तक इस ट्रेन में कंफर्म टिकट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को ‘नो रूम’ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। -कर्नाटका एक्सप्रेस (12627) 28 फरवरी से 5 मार्च तक सभी प्रमुख श्रेणियों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। -अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस (19483) 25 फरवरी से 2 मार्च तक स्लीपर, 2एसी और 3एसी श्रेणियों में ‘रिग्रेट’ की स्थिति है। -इंदौर-पटना एक्सप्रेस (19321) 25 फरवरी से 1 मार्च तक स्लीपर, 2एसी और 3एसी में सीटें फुल हैं और रिग्रेट दिखा रहा है। -अहमदाबाद-आसनसोल एक्सप्रेस (19435) 25 फरवरी से 5 मार्च तक सभी प्रमुख श्रेणियों में टिकट उपलब्ध नहीं है। -मंगला लक्षद्वीप सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12618) 26 फरवरी से 2 मार्च तक रिग्रेट की स्थिति बनी हुई है। -हमसफर एक्सप्रेस (19092) 25 फरवरी से 5 मार्च तक टिकट बुकिंग में ‘रिग्रेट’ स्थिति दर्शाई जा रही है।

महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंजा शहर

On Mahashivratri, devotees gathered to have darshan of Baba Mahakal, the city echoed with chants of Jai Shri Mahakal. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उज्जैन में बाबा महाकाल का विशेष भस्मारती समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर के पट रात 2.30 बजे से खोले गए, जो 44 घंटे तक लगातार खुले रहेंगे। महाशिवरात्रि पर मंदिर में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन की उम्मीद है। देशभर में शिवरात्रि की धूम है, लेकिन उज्जैन में इसका विशेष महत्व है। यहां भस्मारती, विशेष श्रृंगार और शिव नवरात्रि जैसे आयोजन होते हैं। इस अवसर पर सेहरे का प्रसाद भी बांटा जाता है, जिसे लोग बहुत शुभ मानते हैं। पंचामृत अभिषेक और भस्मारतीमहाशिवरात्रि के मौके पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 2.30 बजे बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया और भस्मारती की गई। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भस्मारती से पहले बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और खांडसारी शक्कर शामिल थे। इसके बाद बाबा को चंदन का लेप लगाया गया और सुगंधित द्रव्य अर्पित किए गए। बाबा को उनकी प्रिय विजया (भांग) से श्रृंगारित किया गया और श्वेत वस्त्र पहनाए गए। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्मारती संपन्न हुई, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए। सेहरा सजावट और भस्मारतीशिवरात्रि के अगले दिन बाबा का सेहरा सजाया जाता है और दोपहर में भस्म आरती की जाती है। यह साल में केवल एक बार होता है। बाबा के सेहरे को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। लोग इसे बहुत शुभ मानते हैं और सेहरे के फूल-पत्तियों को संभालकर रखते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है। मंदिर में दिनभर की पूजा-अर्चनाभस्मारती उपरांत दद्योदक आरती और भोग आरती के बाद दोपहर 12 बजे उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक संपन्न हुआ। शाम 4 बजे होल्कर और सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन और सायं पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकालेश्वर की नित्य संध्या आरती हुई। रात्रि में 8 बजे से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुण्ड के तट पर विराजित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण और पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के बाद आरती की गई। रात्रि 10.30 बजे से सम्पूर्ण रात्रि भगवान महाकालेश्वर का महाअभिषेक संपन्न हुआ। इसमें 11 ब्राह्मणों द्वारा रूद्रपाठ और विभिन्न मंत्रों के माध्यम से अभिषेक किया गया। भस्म लेपन, पंचामृत पूजन और पांच प्रकार के फलों से अभिषेक के बाद, भगवान को नवीन वस्त्र पहनाए गए और सप्तधान्य अर्पित किया गया। भगवान महाकालेश्वर को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया गया। सेहरा आरती के दौरान भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल और पंच मेवा का भोग अर्पित किया गया। 16 फरवरी 2026 को सुबह सेहरा दर्शन के उपरांत दिन में 12 बजे भस्मारती संपन्न होगी। इसके बाद भोग आरती होगी और शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा।

कोल्ड्रिफ सिरप मामले में विसरा रिपोर्ट ने दिखाया सच, मासूमों की मौतों के पीछे की वजह सामने आई

छिंदवाड़ा  साल 2025 में जहरीला कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. छिंदवाड़ा सहित मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौतें हुईं थी. इस मामले की विसरा रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इस बात की पुष्टि हो गई है कि बच्चों की मौत जहरीले केमिकल डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की वजह से हुई है. इस मामले में पुलिस चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था. सितंबर 2025 में कफ सिरफ से हुई बच्चों की मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. ‘डाई एथिलीन ग्लाइकॉल से खराब हुईं किडनी’ छिंदवाड़ा और बैतूल के बच्चों को मामूली सर्दी जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद परासिया के सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप बच्चों को पिलाने के लिए लिखा था. इस दवा के इस्तेमाल से बच्चों की लगातार मौतें हो रहीं थीं. जांच में पाया गया था कि सिरप में जरूरत से ज्यादा मात्रा में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया था. जिसके बाद मृतक बच्चों की विसरा रिपोर्ट भी जांच के लिए भेजी गई थी. परासिया के एसडीओपी और SIT प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने  बताया कि “बच्चों के आंतरिक अंगों में भी डाई एथिलीन ग्लाइकॉल दवा पाई गई है. जिसकी वजह से किडनी खराब हुईं थी. कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यह ज्यादा मात्रा में पाई गई है.” ‘सप्लीमेंट्री चार्जशीट फिर से की जाएगी पेश’ एसआईटी प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने बताया, “बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साबित हो गया है कि बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई है. इसमें पाया जाने वाला केमिकल खतरनाक था. इस आधार पर सप्लीमेंट्री चार्ज शीट फिर से पेश की जाएगी, जिसमें इन तथ्यों को शामिल कर उन लोगों को आरोपी बनाया जाएगा जो इसमें शामिल हैं.” 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की धीरे-धीरे किडनी खराब हो रही थीं. इसके चलते छिंदवाड़ा और बैतूल के कुल 24 बच्चों की मौत हो गई थी. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार और छिंदवाड़ा पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था. टीम ने कार्रवाई करते हुए कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन सहित कफ सिरप बच्चों को प्रिसक्राइब करने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी, स्टॉकिस्ट और केमिकल एनालिस्ट सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल, सभी आरोपी जेल में हैं. प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं परिजन पीड़ित परिजनों की पैरवी कर रहे एडवोकेट संजय पटेरिया का कहना है, “जिस तरीके से इस मामले की जांच की गई और कुछ लोगों को ही आरोपी बनाया गया है. इस कार्रवाई से पीड़ितों के परिजन नाखुश हैं. इससे नाराज परिजनों ने 17 फरवरी से प्रदर्शन करने की प्रशासन से अनुमति मांगी है.” परिजनों का कहना है कि डॉ. अमन सिद्दीकी और डॉ. अमित ठाकुर ने भी कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों का इलाज किया था. उन दोनों पर मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि पुलिस का कहना है की जांच अभी जारी है, जो भी दोषी होंगे उनको सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल कर आरोपी बनाया जाएगा.

मध्यप्रदेश पुलिस की पिछले तीन दिनों की प्रमुख कार्यवाहियाँ

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, अपराध नियंत्रण एवं जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विगत तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने डकैती, नकबजनी एवं लूट जैसे संगीन अपराधों का सफल खुलासा कर  79 लाख रूपए से अधिक का चोरी व लूट की संपत्ति जब्‍त की है। विदिशा: अरिहंत ज्वैलर्स डकैती कांड में बड़ी सफलता, 15 लाख रूपए की चांदी बरामद थाना कोतवाली, जिला विदिशा क्षेत्रांतर्गत अरिहंत ज्वैलर्स, खरीफाटक रोड पर घटित डकैती के प्रकरण में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रकरण में फरार चल रहे आरोपी को थाना बजरंगगढ़ जिला गुना क्षेत्रांतर्गत ग्राम गड़ला गिर्द के जंगल से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी गया लगभग सवा 5 किलो चांदी का सामान बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रूपए है, साथ ही घटना में प्रयुक्त औजार भी जप्त किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दिनांक 03.01.2026 को फरियादी द्वारा इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में गठित 08 विशेष टीमों द्वारा तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज एवं सतत पतारसी के आधार पर अब तक कुल 03 आरोपी एवं 02 विधि विरुद्ध बालकों की गिरफ्तारी कर लगभग 13 लाख रूपए की संपत्ति बरामद किया था। अलीराजपुर: नकबजनी का खुलासा 10 लाख के सोने के हार एवं औजार जप्त, आरोपी गिरफ्तार थाना जोबट, जिला अलीराजपुर क्षेत्र में घटित नकबजनी की वारदात का सफल पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के दो सोने के हार, अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपए तथा घटना में प्रयुक्त लोहा काटने का कटर जप्त किया है। मुरैना: अम्बाह डकैती कांड का खुलासा, 05 इनामी आरोपी गिरफ्तार, 16 लाख 77 हजार रुपए की संपत्ति जब्त थाना अम्बाह क्षेत्रांतर्गत हुई सनसनीखेज डकैती की घटना का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण एवं तकनीकी जांच के आधार पर 10-10 हजार रुपए के इनामी 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लूटी गई नगदी, सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन एवं घटना में प्रयुक्त कार सहित कुल 16 लाख 77 हजार की संपत्ति जब्त की है। सतना: चित्रकूट पुलिस की बड़ी सफलता, 14 लाख रूपये की चोरी का पर्दाफाश थाना चित्रकूट, जिला सतना पुलिस द्वारा घर में घुसकर चोरी करने वाले 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख 26 हजार रुपए नगद एवं लगभग 4 लाख रुपए के सोने के आभूषण सहित कुल 14 लाख 26 हजार की सामग्री जब्त की  है। दतिया: 12 घंटे में चोरी का खुलासा थाना कोतवाली पुलिस ने मात्र 12 घंटे के भीतर चोरी की घटना का खुलासा करते हुए फरियादी के घर कार्यरत महिला आरोपिया को गिरफ्तार किया। आरोपिया के कब्जे से लगभग 17 लाख रुपए मूल्य के सोने के जेवरात जब्त किए हैं। उज्जैन: लूट गिरोह का भंडाफोड़, 6 लाख रुपए की सामग्री जब्त थाना बिरलाग्राम, नागदा क्षेत्रांतर्गत उज्जैन पुलिस ने चाकू एवं लोहे के पाइप से लूट की वारदात को अंजाम देने वाले 03 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से लगभग 6 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन, हथियार एवं मोटरसाइकिल जप्त की है। मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए नागरिकों में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण सुदृढ़ कर रही है। पुलिस की यह प्रतिबद्धता आने वाले समय में भी प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं अपराधमुक्त बनाए रखने की दिशा में निरंतर जारी रहेगी।

‘वंदे मातरम्’ विवाद: उज्जैन के इमाम की मुस्लिम अभिभावकों से स्कूल बदलने की अपील

उज्जैन वंदे मातरम् वाले स्कूलों से निकाल ले बच्चे; मुसलमानों से उज्जैन ईमाम की अपील केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य करने का निर्णय किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों को खड़ा होना जरूरी होगा। इस फैसले का उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कड़ा विरोध किया है। उनकी दलील है कि वंदे मातरम् इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि इसमें मातृभूमि की पूजा की बात की गई है। उन्होंने मुस्लिमों से अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकालने की अपील की है जहां वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है। इस्लाम नहीं देता इजाजत उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि भारत में हर धर्म और मजहब के लोग रहते हैं। हम किसी को यह नहीं कह सकते हैं कि आप किसी एक खुदा को मानें… हम यह भी किसी से नहीं कह सकते हैं कि आप कई खुदा को मानें। हिन्दुस्तान एक ऐसा चमन है जहां हर तरह के फूल को रखा गया है। यही इसकी ब्यूटी है। वंदे मातरम् में साफ लिखा गया है कि हम इस धरती की पूजा करते हैं। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्लाम का आधार ही एकेश्वरवाद है। हम तो पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी नहीं पूजते मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने आगे कहा कि हम खुदा के साथ किसी को शामिल नहीं कर सकते हैं। हम ना तो हिन्दुस्तान की जमीन को पूज सकते हैं ना ही मक्का और मदीना की जमीन को पूज सकते हैं। हम पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी पूजते नहीं हैं। हम उनकी तालीम पर चलते हैं। इस्लाम एक ही ईश्वर पर आधारित है। हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं। हम हुकूमत से यह गुजारिश करते हैं कि आगे से इस तरह का कोई प्रोग्राम ना चलाए जो किसी धर्म को चोट पहुंचाते हों। जिन स्कूलों में वंदे मातरम् वहां से बच्चों को निकाल लें मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को वापस ले। हम अपने बच्चों को ऐसी किसी भी संस्था में नहीं भेज सकते जहां उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ होता हो। हमारे यहां हिन्दुस्तान की पूजा का कोई जिक्र नहीं है। इस्लाम तो इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता है। हम कहेंगे कि जिन स्कूलों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है, मुसलमान वहां से सभी अपने बच्चों को निकाल लें। कानून नहीं मानने वालों को देश में रहने की कोई जरूरत नहीं मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी के बयान पर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर अतुलेशनन्द ने कहा कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा। यह भारत भूमि है और कानून सबके लिए एक है। इस कानून को जो नहीं मानता या नहीं स्वीकार करता है उसको इस देश में रहने की कोई जरूरत नहीं है। इस देश में रहने वाले कुछ लोग हमारे संविधान को मानते नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए बांग्लादेश या पाकिस्तान के रास्ते खोल देने चाहिए।

बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में गौ कथा का दिव्य समापन, धर्म व गौ संरक्षण का लिया संकल्प

भोपाल . बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में स्थित  रेवासा धाम एवं  वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर परम पूज्य  राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा आयोजित गौ कथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का तीसरा एवं अंतिम दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ कथा श्रवण किया। महाराज  ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पृथ्वी सात स्तंभों पर आधारित है। प्रथम स्तंभ गौ माता हैं, द्वितीय ब्राह्मण, तृतीय वेद, चतुर्थ सती-सावित्री पतिवृता नारियां, पंचम सत्यवादी पुरुष, षष्ठम लोभरहित पुरुष और सप्तम दानशील पुरुष। इन सातों तत्वों के संरक्षण से ही समाज और सृष्टि का संतुलन बना रहता है। चित्रकूट के संत शिरोमणि संकादिक महाराज भी गोकथा में शामिल हुए। मलूक पीठाधीश्वर  राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज की उपस्थिति में बसामन मामा गौधाम परिसर में ऋषिकुलम आवास गृह का भूमिपूजन किया एवं पीपल का पौधा रोपण किया। महाराज  ने कहा कि युग निर्माता ब्राह्मण होता है। जो संपूर्ण समाज की पीड़ा को अनुभव करे, वही सच्चा ब्राह्मण है। धर्माचरण से ही अर्थ और काम रूपी पुरुषार्थ की सिद्धि संभव है। जब अर्थ की प्राप्ति धर्म के अनुशासन और नियंत्रण में होती है, तब वह अर्थ अनर्थ का कारण नहीं बनता, बल्कि लोक कल्याण का साधन बनता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपवित्र धन कभी पवित्र कार्यों में नहीं लगता और जो धन धर्मकार्य में समर्पित होता है, वह स्वयं पवित्र हो जाता है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम सबके लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि पूज्य  राजेंद्रदास जी महाराज के मुखारविंद से अमृतवाणी श्रवण का अवसर प्राप्त हुआ। एक ओर बसामन मामा की पुण्यभूमि, जहाँ दस हजार गौ माताओं के संरक्षण एवं संवर्धन का विशाल प्रकल्प संचालित है, और दूसरी ओर पूज्य महाराज  का दिव्य प्रवचन यह संगम सचमुच त्रिवेणी के समान है, जो दीर्घकाल तक समाज का कल्याण करता रहेगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि गौ माता का सम्मान ही मानवता का सम्मान है। यदि गौ माता का अपमान होगा तो मानव जाति का कल्याण संभव नहीं। उन्होंने कहा कि महाराज  के प्रवचनों से उन्हें गौ संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में और अधिक ऊर्जा एवं संकल्प प्राप्त हुआ है। उन्होंने भावुकता से कहा कि कभी-कभी जब वे किसी कठिन कार्य का दायित्व लेते हैं और वह सहज ही पूर्ण हो जाता है, तो उन्हें अनुभव होता है कि यह सब गौ माता की कृपा और उनकी प्रसन्नता का ही परिणाम है। कार्यक्रम का समापन भक्ति, भाव और संकल्प के साथ हुआ, जिसमें गौ सेवा, धर्माचरण और समाज कल्याण के लिए कार्य करने का संदेश प्रमुख रहा। कथा समापन के बाद बसामन मामा में विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा के समापन दिवस पर सांसद  जनार्दन मिश्र, विधायक सिरमौर  दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, विधायक सिहावल  विश्वामित्र पाठक, पूर्व मंत्री  पुष्पराज सिंह, पूर्व विधायक  केपी त्रिपाठी और बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री ने शिव बाबा रथयात्रा का किया शुभारंभ महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्राम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा रीवा में शिव बाबा रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रजापिता ब्राम्हकुमारी विश्वविद्यालय आश्रम से आरंभ हुई। शिव बाबा रथयात्रा को हरी झण्डी दिखाई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भगवान शिव संहार से साथ-साथ कल्याण के देवता हैं। भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव कालों के महाकाल हैं। प्रजापिता ब्राम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शिव चेतना को जगाने के लिए किये जाने वाले प्रयास सराहनीय हैं। इस संस्थान ने सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़चढ़ कर योगदान दिया है। इस अवसर पर प्रजापिता ब्राम्हकुमारी संस्थान द्वारा उप मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।  

CM का बड़ा ऐलान- केन-बेतवा लिंक से 300 गांवों को मिलेगा पानी

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव और किसान सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले के लिए विकास योजनाओं की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रक्षेत्र, सिंचाई परियोजनाओं और पर्यटन विस्तार से जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, सूखे खेत को पानी मिल जाए तो फसल सोने जैसी हो जाती है और केन-बेतवा लिंक परियोजना दमोह की तस्वीर बदल देगी। चीतों की संख्या 35 हुई सीएम ने बताया कि प्रदेश में चीतों का पुनर्स्थापन देश के लिए उदाहरण बना है। श्योपुर के उद्यान में लाए गए चीतों की संख्या अब बढ़कर 35 हो चुकी है और इसी वर्ष जून से पहले नौरादेही अभयारण्य में भी चीते छोड़े जाएंगे। इससे दमोह क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए घर ठहराव योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है। 600 करोड़ की घोषणा सिंचाई के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने व्यारमा नदी से पानी लिफ्ट कर बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता बढ़ाने और दमोह विधानसभा के 33 गांवों की 14 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लिए 600 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही राजनगर तालाब, सीतानगर और सतधरू बांध पर पर्यटन गतिविधियां तथा जल क्रीड़ा केंद्र विकसित किए जाएंगे। एक नजर में घोषणाएं-:     नौरादेही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापन     गीता भवन निर्माण के लिए 2 करोड़     600 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजना     नवीन जिला जेल के लिए 70 करोड़     तेंदूखेड़ा और हटा में खेल स्टेडियम     राजनगर तालाब व बांधों पर पर्यटन और बोट क्लब     नोहटा को नगर परिषद बनाने पर परीक्षण     व्यारमा नदी पर जल क्रीड़ा केंद्र

ग्वालियर के डॉ. श्रीवास्तव ने किया देहदान प्रदेश सरकार के निर्णय अनुसार दिया गया गार्ड ऑफ़ ऑनर

भोपाल. ग्वालियर के डॉ. अरुण श्रीवास्तव के देहांत के बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में देहदान का फैसला लेने वालों की पार्थिव देह को पुलिस दस्ते के द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है। ग्वालियर में लम्बे समय तक शासकीय चिकित्सक रहे डॉ. अरुण श्रीवास्तव का शुक्रवार की रात लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी इच्छा अनुरूप उनके परिजनों ने उनकी पार्थिव देह को गजराराजा मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने पार्थिव देह को गार्ड ऑफ़ ऑनर देने के लिये आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किये। निर्देशानुसार डॉ. श्रीवास्तव की पार्थिव देह को ग्वालियर के गांधीनगर में गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। गार्ड ऑफ़ ऑनर के बाद दिवंगत डॉ. श्रीवास्तव के परिजनों ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज पहुँचकर देहदान की औपचारिकताएं पूरी की।  

खुश हुईं लाडली बहनें, 33वीं किस्त के तहत 1.25 करोड़ खातों में पहुंचे पैसे

खंडवा सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की 33वीं किस्त के 1500 रुपए उनके खातों में ट्रांसफर कर दिए हैँ। ये राशि मोहन यादव ने एमपी के खंडवा की तहसील पंधाना से भेजे हैं। आपके मोबाइल पर मैसेज भी आया होगा। अगर नहीं तो ladli behna yojana portal पर जाकर आप खाते का अपडेट देख सकती हैं। इस बार इनके नहीं आएंगे 1500 रुपए हालांकि 14 फरवरी को उन लाड़ली बहनों के खाते में पैसे नहीं आएंगे, जिनके नाम से पूरे दस्तावेज नहीं हैं। उनके बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या समग्र आईडी डिलीट हो गई या फिर उनकी आयु 60 से पार हो चुकी है।   255 करोड़ का भूमिपूजन और 354 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण किया 255 करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का भूमि पूजन किया और 354 करोड़ के 11 पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 252 करोड़ की लागत से बनने वाले खंडवा नगर निगम के सीवरेज प्रोजेक्ट के साथ-साथ 2.90 करोड़ की लागत से बनने वाले पंधाना बस स्टैंड, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ‘रैन बसेरा’ के निर्माण का भूमि पूजन किया। क्या है लाडली बहनों के लिए पात्रता?     मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों     विवाहित हो, जिनमें विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिला भी सम्मिलित होंगी     आवेदन के कैलेंडर वर्ष में, 01 जनवरी की स्थिति में 21 वर्ष पूर्ण कर चुकी हों तथा 60 वर्ष की आयु से कम हो।     महिला का स्वयं का बैंक खाता होना अनिवार्य है, संयुक्त खाता मान्य नहीं होगा     महिला के स्वयं के बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी सक्रिय होना चाहिए     समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई होना चाहिए कैसे चेक करें खाता? लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की भुगतान स्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है। पोर्टल पर जाकर ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प चुनें। फिर रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डालें। ओटीपी भरने के बाद नवीनतम स्टेटस दिखाई देगा। लाड़ली बहना योजना के लिए जरूरी हैं ये डॉक्यूमेंट्स     समग्र पोर्टल द्वारा जारी परिवार आईडी अथवा सदस्य आईडी     UIDAI द्वारा जारी फोटो आईडी     समग्र पोर्टल में दर्ज मोबाइल नंबर लाडली बहना योजना के लिए अपात्र हैं ये महिलाएं     जिनके स्वयं/परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो।     जिनके स्वयं/परिवार का कोई भी सदस्‍य आयकरदाता हो।     जिनके स्वयं/परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो। नए रजिस्ट्रेशन कब होंगे शुरू? महिलाओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि लाड़ली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन (Ladli Behna Yojana) कब शुरू होंगे। यहां बता दें कि 2023 से नए फॉर्म भरने की प्रक्रिया बंद है और इस बार भी कोई अपडेट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार नए रजिस्ट्रेशन की योजना फिलहाल शुरू नहीं होगी।

आलीराजपुर में खौफनाक वारदात: चाय में कीटनाशक मिलाकर मां ने ली तीन बच्चों की जान

आलीराजपुर. जिले में शुक्रवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। आंबुआ थाना क्षेत्र के ग्राम अडवाड़ा के माफीदार फलिया में 28 वर्षीय महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों को चाय में कीटनाशक मिलाकर पिला दिया और बाद में स्वयं भी वही चाय पी ली। इस हृदय विदारक घटना में तीनों बच्चों की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नूरीबाई पति मुकेश ने शुक्रवार को अपनी सात वर्षीय बेटी सावित्री, पांच वर्षीय बेटे कार्तिक और तीन वर्षीय बेटी दिव्या को चाय पिलाई। बताया जा रहा है कि चाय में कीटनाशक मिला हुआ था। कुछ ही देर में चारों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्वजन तत्काल उन्हें जिला अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही सावित्री ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने कार्तिक, दिव्या और नूरीबाई की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें गुजरात के दाहोद रेफर किया। दाहोद ले जाते समय रास्ते में कार्तिक और दिव्या ने भी दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आर. जमरा ने बताया कि अस्पताल लाए जाने के समय सभी की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया, लेकिन बच्चों को बचाया नहीं जा सका। MP के अलीराजपुर जिले का बदला नाम, सरकार ने जारी की अधिसूचना, जानें क्या है नया नाम बड़ी बेटी को स्कूल नहीं भेजा, बेटे को खेत से बुलाया ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को बड़ी बेटी सावित्री को स्कूल नहीं भेजा गया था। वहीं दूसरा बेटा कार्तिक, जो अपने दादा के साथ खेत पर गया हुआ था, उसे भी मां ने घर बुला लिया था। इसके बाद दोपहर में चाय के साथ सभी ने जहर पी लिया। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पति जामनगर में करता है मजदूरी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का पति मुकेश गुजरात के जामनगर में मजदूरी करता है। पुलिस द्वारा पूछताछ में मुकेश ने बताया कि 22 जनवरी को वह पत्नी और बच्चों को अडवाड़ा छोड़कर मजदूरी के लिए जामनगर चला गया था। उसने परिजनों से कहा था कि वह मजदूरी कर भगोरिया पर्व तक वापस लौट आएगा। मुकेश के अनुसार परिवार में ऐसा कोई विवाद नहीं था, जिससे उसकी पत्नी को इतना बड़ा कदम उठाना पड़े। महिला की हालत गंभीर, मर्ग कायम आम्बुआ चौकी प्रभारी मोहन डावर ने बताया कि महिला नूरीबाई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज दाहोद में जारी है। मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि महिला ने यह कदम किन कारणों से उठाया। पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार शनिवार को तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार पुलिस की मौजूदगी में किया गया। मासूमों के शव देखकर स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक और सन्नाटा पसरा रहा। घटना की खबर फैलते ही मातम छा गया और हर कोई इस हृदय विदारक घटना से स्तब्ध नजर आया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। महिला के बयान और विस्तृत विवेचना के बाद ही घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।  

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