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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर किया स्मरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर उनका स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा, गरीब कल्याण और कमजोर वर्ग के उत्थान के प्रति डॉ. जाकिर हुसैन का समर्पण सदैव याद किया जाएगा।  

शहडोल को विकास की सौगात, जैतपुर नगर परिषद घोषित, धनपुरी वाटर पार्क का उद्घाटन

शहडोल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शहडोल में धनपुरी वाटर पार्क का फीता काटकर शुभारंभ किया। सीएम ने कहा कि इससे क्षेत्र के पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने जैतपुर नगर को नगर परिषद का दर्जा देने की घोषणा की। सीएम ने कहा- बहनों को आगे बढाना है। विधायक जी ने कुछ मांगा है तो हम मना कैसे कर सकते हैं। 2300 करोड़ की सिंचाई योजना देने की घोषणा करता हूं। जैतपुर में महाविद्यालय का भवन बनेगा। शहडोल में नए महाविद्यालय की शुरूआत किया जाएगा। अब अगली बार भी आना है शेष बात हम बाद में करेंगे। सीएम ने लोगों की मांग पर जैतपुर को नगर पंचायत देने की घोषणा करता हूं।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुझे धनपुरी के अंदर इतना बढिया स्विमिंग पुल देखकर इंदौर, उज्जैन जैसे बड़े नगर की याद आ गई। जब मैं जय जयकार कराता हूं तो कांग्रेस वालों की पार्टी पर सांप लोट जाते हैं। हम भगवान श्रीराम की जयकार करने वाले लोग हैं। माता शबरी ने वर्षों तक राम का इंतजार किया। भगवान राम प्रेम के वशीभूत होकर शबरी माता के पास पहुंचे। श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए। मनुष्य से मनुष्य का प्रेम यह है सनातन संस्कृति की विशेषता। हम जब पूरे शहडोल की तरफ देखते हैं तो देखते हैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कितना काम यहां हुआ है। किसानों के हित का पूरा ध्यान रखा। मोदी जी का पूरा जीवन देश के विकास के लिए ही है। भारत का मान सम्मान बढाने के लिए सशक्त बनाने के लिए हम देश के प्रधानमंत्री का जोरदार अभिनंदन करें। धनपुरी धन्य हो गई आज धनपुरी में जो सौगात मिली है वह जंगल में मंगल हो गया है। धनपुरी धन्य हो गई। नगरपालिका अध्यक्ष को बधाई इतनी अच्छी सौगात इस क्षेत्र को मिली है। सभी क्षेत्र में काम करते हुए आज मप्र सबसे आगे बढ रहा है। हम लगातार काम कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण का काम किया गया है। बहुत जल्दी युवाओं को सभी तरह के कल कारखाने की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की ओर ध्यान नहीं दिया। हमारी सरकारों के काम करने का तरीका ही अलग है। सांसद बोलीं, मुख्यमंत्री जी छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे शहडोल में हुए कार्यक्रम मंच से नगर पालिका धनपुरी की अध्यक्ष रविंद्र कौर छाबड़ा ने विकास कार्य का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। क्षेत्रीय विधायक जयसिंह मरावी ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मांग पत्र पढ़कर सुनाया। सांसद हिमाद्रि सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मंच भरा पूरा है और समय की सीमा है। आप सबको राम राम करती हूं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश व प्रदेश विकास कर रहा है। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आपके समक्ष जो मांगें विधायक जयसिंह मरावी ने रखी हैं, उनको पूरा करेंगे और छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे। माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण इसके बाद मुख्यमंत्री गंधिया जनपद पंचायत जयसिंह नगर के लिए प्रस्थान कर स्थानीय कार्यक्रम में सहभागिता निभाएंगे। वह यहां पर सीतामढ़ी धाम में स्थापित की गई माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। प्रवास के दौरान शहडोल जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण, भूमि पूजन एवं योजनाओं के लाभांवित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे।  

न्यू आईडल स्कूल ने धूमधाम से मनाया शाला का वार्षिक उत्सव,बच्चों ने दी एक से बढ़कर एक प्रस्तुति।

New Ideal School celebrated its annual function with great pomp and show, children gave one better than the other presentation. हरिप्रसाद गोहे आमला। नगर के गोविंद कालोनी क्षेत्र स्थित न्यू आईडल हाई स्कूल ने स्कूल का वार्षिक उत्सव यहां स्थित भवानी लॉन में धूमधाम एवं हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन को लेकर शाला परिवार द्वारा बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थी। वार्षिक उत्सव आयोजन के लिए सजाए गए सार्वजनिक मंच से न्यू आइडियल स्कूल के विद्यार्थियों ने शानदार देश भक्ति गीत संगीत नृत्य, नाटक की प्रस्तुति देकर उपस्थित जन समुदाय का मन मोहा। साथ ही पूर्व में शाला में अध्ययनरत विद्यार्थी सुमित महातकर ने अपनी सुरीली आवाज में मेरे देश की धरती सोना ऊगले,उगले हीरे मोती देश भक्ति गीत गाकर मंच को देश भक्ति के रंग में रंग दिया। शानदार प्रस्तुति का वहां उपस्थित लोगों जमकर तालिया बजा उत्साहवर्धन किया। इस मौके पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, शाला स्टाफ सहित स्कूली बच्चे मौजूद रहे। आयोजित कार्यक्रम का सफल मंच संचालन दीपिका सोनी ओर कविता साहू ने किया। वहीं आभार शाला प्राचार्य किरण लता देशमुख ने व्यक्त किया।

सीएम मोहन यादव के दौरे से पहले शहडोल गरमाया, विरोध के बीच किसान व कांग्रेसी हिरासत में

शहडोल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन से पहले ही जिले में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट से प्रभावित किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। प्रशासन ने दोनों ही समूहों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। रामपुर बटूरा प्रोजेक्ट से प्रभावित करीब 10 गांवों के किसान लंबे समय से एसईसीएल (SECL) प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कोयला उत्खनन के कारण उनके घरों में दरारें पड़ रही हैं, स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गए हैं और तीन साल बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें स्थायी रोजगार मिला और न ही उचित पुनर्वास।मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे किसानों को बुढार पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि समाजसेवी भूपेश शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए थे।   जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल ने भी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी और ब्लॉक अध्यक्ष अंकित सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी धनपुरी में वाटर पार्क के उद्घाटन को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए काले झंडे दिखाने की तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका में भ्रष्टाचार, अवैध कोयला उत्खनन, रोजगार में स्थानीय लोगों की अनदेखी, कानून-व्यवस्था की स्थिति, दूषित पेयजल और खाद संकट जैसे मुद्दे उठाए। नारेबाजी के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर शहडोल भेज दिया। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही जिला प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाने और विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल मुख्यमंत्री के शहडोल पहुंचने से पहले ही जिले में विरोध के हालात बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अलग-अलग समूह भी विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं, जिस पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी विवाद: माफी मांगते वक्त भी नहीं छुपी मंत्री की मुस्कान

भोपाल अपने ही गैर-जिम्मेदाराना और विवादित बयानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह अब तक चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। 13 मई 2025, 14 मई 2025, फिर 23 मई 2025 और अब 07 फरवरी 2026, एक ही बयान और एक ही विषय पर इतनी बार माफी मांगने का रिकॉर्ड शायद ही किसी मंत्री के नाम दर्ज हो। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो या नहीं, लेकिन सियासी शर्मनाक घटनाओं की सूची में जरूर दर्ज किया जाना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि शनिवार को इंदौर के रेसिडेंसी क्षेत्र में जब मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया को लेकर माफीनामा पढ़ रहे थे, तो वह भी बिना तैयारी के नहीं, बल्कि पूरी लिखित स्क्रिप्ट के साथ।   मीडिया के सवालों के दौरान शाह का रवैया भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता नजर आया। माफी मांगने आए मंत्री जी के हाव भाव ऐसे थे मानों वह किसी गंभीर गलती पर पछतावा जताने नहीं, बल्कि सिर्फ औपचारिकता निभाने आए हों। “बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है।” अगर वास्तव में उन्हें अपने बयान पर जरा भी मलाल या आत्मग्लानि होती, तो वह मीडिया से चर्चा से पहले कैमरों के सामने इस तरह बेशर्मी भरी मुस्कान के साथ खड़े नजर नहीं आते। उनके चेहरे पर न पश्चाताप था, न संकोच और न ही शब्दों की जिम्मेदारी का कोई भार। औपचारिकता निभाने आए थे? पूरा घटनाक्रम यही संकेत देता है कि शाह इंदौर केवल औपचारिकता निभाने आए थे, न कि अपने बयान की गंभीरता को समझने। कैमरों के सामने मुस्कुराते रहना और माफी को एक मजबूरी की तरह पेश करना, यह साफ दर्शाता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में लिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह वही गंभीरता है, जिसकी उम्मीद जनता एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से करती है, या फिर अब माफी भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह गई है? सवाल यह है कि क्या अब मंत्री को माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ने लगी है? क्या शब्द इतने अविश्वसनीय हो चुके हैं कि बिना कागज के बोलना भी जोखिम भरा हो गया है? 11 मई को दिया था विवादित बयान बीते वर्ष 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा दिया गया विवादित और आपत्तिजनक बयान अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है। कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन आतंकियों ने लोगों को मारा, उन्होंने कपड़े उतरवाए और हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा था कि “प्रधानमंत्री ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई।” मंत्री द्वारा सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया। 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश मंत्री विजय शाह को यह बयान देना अब भारी पड़ रहा है। हाईकोर्ट जबलपुर के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हुई और इंदौर जिले के मानपुर थाने में शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। चूंकि आपत्तिजनक बयान मानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया था, इसलिए मूल प्रकरण यहीं दर्ज किया गया था । मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे।

ग्वालियर में हवा में आलू की खेती, वैज्ञानिकों ने 1KG बीज से 400 किलो आलू उगाया, बीमारी मुक्त खेती का कारनामा

ग्वालियर  राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने 2 साल पहले रिसर्च के लिए खेती की एक नई तकनीक शुरू की थी. ये ऐरोपोनिक तकनीक थी, जिसके जरिए वैज्ञानिकों ने हवा में आलू उगाने का प्रयास शुरू किया था. ये प्रयास अब रंग ला चुका है और दो साल की शोध के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने आलू के ऐसे बीज तैयार कर लिए हैं जो ना सिर्फ रोग रहित हैं बल्कि इसका प्रोडक्शन 50 गुना तक है. इनसे पैदा होने वाली आलू की फसल 400 गुना तक मिलती है. ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कमाल देश में कृषि क्षेत्र रिसर्च के बलबूते नए आयाम स्थापित करने में जुटा हुआ है. किसान की लागत कैसे बढ़े और कैसे नवाचार का फायदा किसानों को मिले, इस ओर ग्वालियर का राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय भी अपना योगदान दे रहा है. कृषि यूनिवर्सिटी ने अपनी ऐरोपोनिक्स यूनिट में पानी के जरिए हवा में आलू उगाये जा रहे हैं. जो जल्द ही किसानों की किस्मत बदलने को तैयार हो जायेंगे. असल में ये आलू ऐरोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उगाए गए हैं. या कहें आलू के बीज तैयार किये गए हैं. कृषि वैज्ञानिकों की भाषा में इस यूनिट में आलू के 20 वेराइटी के मिनी ट्यूबर तैयार किए जा रहे हैं, जो प्रोसेस होने के बाद किसानों के खेतों में फसल बनकर फायदा देंगे. टिशू कल्चर तकनीक से लैब में तैयार होता है पौधा एरोपोनिक प्रोजेक्ट की इंचार्ज डॉ. सुषमा तिवारी ने बातचीत में बताया कि, ”एयरोपौनिक तकनीक में पौधे टिशू कल्चर के माध्यम से लैब में तैयार किए जाते हैं, जब ये पौधे एरोपोनिक यूनिट में ट्रांसप्लांट करने होते हैं तब एक महीने पहले इन पौधों की हार्डनिंग की जाती है. इसके बाद इन्हें ट्रांसप्लांट किया जाता है. पूरे मध्य प्रदेश में ये पहल राजमाता कृषि विश्व विद्यालय द्वारा की गई है.” रोग फ्री होता है एरोपोनिक तकनीक से उगा बीज इन पौधों में न्यूट्रिएंट देने के लिए फोगिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है. ऐसे में जो आलू के बीज यानी मिनी ट्यूबर बनते हैं वे उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं और रोग मुक्त होते हैं. जिसका मतलब है खेत में उगने वाले आलू में रोग या वायरस का असर फसल पर पड़ता है, लेकिन इन आलुओं में ऐसी कोई बीमारी नहीं होती. एरोपोनिक में तैयार पौधे बीमारी फ्री होते हैं. ये हेल्दी पौधे होते हैं जिसकी वजह बीज अच्छी क्वालिटी का बनता है और प्रोडक्शन भी कई गुना ज़्यादा होता है.”  उद्देश्य के अनुसार मिलेगा आलू, किसानों के पास होंगे विकल्प मध्य प्रदेश की इस शोध यूनिट का बड़ा फायदा किसानों को भी मिलने वाला है, क्योंकि जब अच्छी गुणवत्ता का बीज किसानों को मिलेगा, जब बीज में कोई बीमारी नहीं होगी तो उनका प्रोडक्शन भी अच्छा होगा. ऊपर से अभी जब किसान आलू के बीज लेते हैं तो उनके पास ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं. लेकिन विश्वविद्यालय 20 प्रजातियों के बीज तैयार कर रहा है, जिसमें किसानों के उद्देश्य के अनुसार वे आलू उगा सकेंगे. उदाहरण के लिए फ्रेंच फ्राई के लिए फ़्राइओम है, चिप्स के लिए चिपसोना आलू है. इस तरह उनके पास जरूरत के हिसाब से विकल्प भी होंगे.  ऐरोपोनिक से बीज की कितनी उत्पादकता? डॉ. सुषमा तिवारी ने बताया कि, ”एरोपोनिक तकनीक से उगाए गए बीज का वजन बेहद कम होता है. ये मिनी ट्यूबर 2-3 ग्राम वजन का होता है. दो साल पहले जब इसकी शुरुआत के समय डेमॉन्स्ट्रेशन यूनिट लगायी थी तब एक किलो बीज पैदा किया था. जिससे 400 किलो नार्मल आलू मिला था. लेकिन ये किसानों को जी-2 प्रोसेस के बाद ही दिए जाते हैं. जिससे वे इन्हें फील्ड में उगा सके. दो साल पहले जो प्रोसेस शुरू हुआ था उसका बीज अब तैयार हो चुका है और जल्द ही इनमें से कुछ बीज किसानों को जल्द मिलेंगे.”  किसान से पहले 3 चरणों से गुजरता है बीज एरोपोनिक तकनीक में बीज तीन चरणों में तैयार होता है. सबसे पहले चरण को जी-जीरो कहा जाता है. जिसमे कल्चर प्रोसेस से बीज को बोकर लैब में तैयार किया जाता है. इसके बाद ऐरोपोनिक यूनिट में मिनी ट्यूबर उगाए जाते हैं. दूसरा चरण जी-1 कहलाता है जिसमें ये मिनी ट्यूबर नेट हाउस यानी खास ग्रीन हाउस में लगाये जाते हैं. यह प्रोसेस पूरा होने के बाद जी-2 चरण शुरू होता है. जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा तैयार फील्ड में इन बीजों की बोवनी कर इनसे सॉइल बेस्ड बीज तैयार किए जाते हैं, जो किसानों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार होते हैं.  2 साल बाद बड़े स्तर पर तैयार होंगे बीज कृषि विज्ञानी सुषमा तिवारी कहती हैं कि, ”हम किसानों को बीज उपलब्ध कराने वाले हैं क्योंकि पुरानी खेप तैयार है हालांकि ये सीमित हैं, लेकिन अब से दो साल बाद हमारे पास बहुतायत में अलग अलग वेराइटी के बीज उपलब्ध होंगे और ये किसानों के लिए तैयार होंगे.” पोषक तत्वों के लिए अलग से होती व्यवस्था पोषक तत्वों की कमी इन बीजों में ना हो इसके लिए एरोपोनिक यूनिट में दो टैंक बनाये गए हैं. जिनमें माइक्रो न्यूट्रिएंट्स घोले जाते हैं, इसका इलेक्ट्रिक कंडक्टिविटी मेंटेन किया जाता है, जितना मात्र में इसे दिया जाना है. टैंक में बड़े बड़े पाइप लगाए गए हैं. साथ ही फोगिंग सिस्टम लगाया गया है. इनके जरिए कंट्रोल पैनल में इसकी प्रोग्रामोंग सेट की जाती है, इसमें जरूरत के अनुसार, तीस सेकंड तक फोग चलाया जाता है और इसी के जरिए पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं. किसानों के लिए व्यवसायिक विकल्प बन सकती है एरोपोनिक यूनिट किसानों के लिए भी एरोपोनिक तकनीक फायदे का सौदा है क्योंकि यह यूनिट महज 70 से 75 लाख रुपये में तैयार हो जाती है. ये उनके लिए व्यावसायिक रास्ते भी खोलता है क्योंकि किसान अपनी यूनिट तैयार कर ख़ुद उच्च गुणवत्ता के बीज तैयार कर सकते है और फिर उन बीज को बेच सकते हैं. एक बार यूनिट लगने के बाद इसे 5 से 7 साल तक उपयोग में लिया जा सकता है. इसमें छोटी मोटी रिपेयर मेंटेनेस होती है लेकिन फायदा भी बड़ा होता है. पंजाब हिमाचल के कुछ किसान इसका उपयोग कर भी रहे हैं.

मध्य प्रदेश की 50% सब्सिडी स्कीम से बकरी पालन बनेगा किसानों का सुपरहिट बिजनेस, नोटों की बारिश

छिंदवाड़ा  किसानों के लिए एक ऐसी योजना आई है जो 50% सब्सिडी के साथ मालामाल कर सकती है. इसके लिए आधी रकम किसानों को लगाना होता है तो आधा सरकार खर्च उठाती है. कुछ ऐसा ही किया है बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने. जिन्होंने एक करोड़ रुपए का बकरी फॉर्म खोलकर खेती को फायदा का सौदा बनाया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन से हो जाएंगे मालामाल छिंदवाड़ा के बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने बताया कि, ”पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन एनएलएम योजना का लाभ लेकर बकरी पालन शुरू किया है और फायदे का व्यापार साबित किया है. सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है.” उन्होंने बताया कि, ”एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं. फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है. इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे एक्स्ट्रा इन्कम हो रही है.” 1 करोड़ की लागत में आधी सब्सिडी उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि, ”बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. योजना के अंतर्गत पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि नवीन रघुवंशी को प्रदान की जा चुकी है. इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है. पोषण, ब्रीडिंग और तकनीक पर विशेष ध्यान बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है. दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं. ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत करीब 2 लाख रुपये है. बेहतर पोषण और मैनेजमेंट के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन अच्छा हो रहा है. खेती में डिजिटल टेक्निक का उपयोग देश-विदेश तक पहचान नवीन रघुवंशी के बेटे मंथन रघुवंशी बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दे रहे हैं. वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों जानकारी के वीडियो भी शेयर कर रहे हैं. कुछ दिन पहले उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस. पक्षवार, एपीसी ग्रुप एवं एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा के साथ एनएलएम योजना के अंतर्गत संचालित इस बकरी फार्म के संचालन की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे. निरीक्षण दल में उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जितेन्द्र कुमार सिंह, उप संचालक उद्यानिकी विभाग एम.एल. उइके, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. झाड़े, डॉ. अलवा तथा कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के प्रमुख डॉ. आर.एल. राउत पहुंचे थे.

लाल सड़क पर लगा ग्रहण, जानवरों की सुरक्षा को खतरा, चोर चोरी कर रहे एलईडी साइन बोर्ड और वायर फेंसिंग

जबलपुर  नेशनल हाईवे-12 वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए की गई रेड कलर की टेबल टॉप रेड मार्किंग की वजह से चर्चा में है. देश के कई इलाकों से इस तरह के सड़क बनाने के लिए जबलपुर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास इंक्वारी भी आई है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी का कहना है कि, उनका यह प्रयोग सफल रहा है, लेकिन वे अब चोरों से परेशान हैं, क्योंकि चोर सड़क पर लगे एलईडी साइन बोर्ड चुरा रहे हैं. सड़क किनारे लगी लोहे की जाली को भी कई जगह चुरा लिया गया है. एक बार फिर चर्चाओं में लाल सड़क जबलपुर से भोपाल तक के लिए नेशनल हाईवे 12 बनाया गया है. यह सड़क लगभग 300 किलोमीटर लंबी है. इस हाईवे का लगभग 12 किलोमीटर का क्षेत्र नौरादेही टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है. इसी में से लगभग 2 किलोमीटर इलाके में टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है, जिसकी वजह से यह सड़क चर्चा में बनी हुई है. इस 2 किलोमीटर इलाके में लाल कलर के बड़े-बड़े निशाना बनाए गए हैं. यह लगभग 2 मिलीमीटर मोटे हैं. देश के कई इलाकों से आई इंक्वायरी नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी अमृतलाल साहू का कहना है, “हमारा यह प्रयोग पूरे भारत में सराहा जा रहा है. इस सड़क के बनने के बाद देश के कई इलाकों से इसी तरह की सड़क बनाने के लिए जानकारियां मांगी गईं हैं. चेन्नई और पंजाब के सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य की जानकारी ली है. वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए पहला प्रयोग अमृतलाल साहू ने बताया, “यह आइडिया पूरी दुनिया में नया है. हालांकि, सड़कों पर लाल कलर कई जगह पर लगाया जाता है. दुबई में कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहनों की गति धीमी करने के लिए पूरी सड़क को ही लाल कर दिया जाता है. हालांकि, यह लंबाई मात्र 100 मीटर तक होती है. इसी तरह साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सड़क लाल की जाती है, लेकिन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सड़क पर टेबल टॉप रेड मार्किंग पहली बार की गई.” बीते 1 साल में एक भी जानवर की नहीं हुई मौत अमृतलाल साहू ने बताया कि “हमारा यह प्रयोग सफल रहा है. सड़क पर केवल लाल कलर के निशान ही नहीं बनाए गए हैं, बल्कि इस सड़क में जंगल के पूरे इलाके में तार की फेंसिंग भी की गई है. 25 जगह पर जानवरों को सड़क पार करने के लिए अंडरपास भी बनाए गए हैं. जब इस सड़क पर यह सभी सुविधाएं नहीं थी, तो 2 साल में लगभग 300 जानवरों की एक्सीडेंट से मौत हुई थी, लेकिन इस कार्य के पूरे हो जाने के बाद बीते 1 साल में कोई भी जानवर सड़क दुर्घटना से इस क्षेत्र में नहीं मरा है.” चोरों से परेशान नेशनल हाईवे अथॉरिटी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने इस सड़क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से तैयार किया था, इसलिए सड़क पर कई जगह पर एलईडी साइन बोर्ड लगाए गए थे. टेबल टॉप रेड मार्किंग पर लगे उपकरणों की वजह से जानवरों की मौतों में बहुत गिरावट आई है, लेकिन अब ये उपकरण चोरों के निशाने पर हैं. अमृतलाल साहू ने बताया कि “वे चोरों से बहुत परेशान हैं. हाईवे से कई एलईडी साइन बोर्ड चोरी कर लिए गए, कुछ जगह पर वायर फेसिंग भी चोरी हो गई. इस सड़क पर हमने रखवाली के लिए पेट्रोलिंग गाड़ी रखी है, लेकिन इतनी लंबी सड़क की पूरे समय सुरक्षा नहीं की जा सकती. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने चोरों के खिलाफ थाने में शिकायत भी करवाई है.”

इंदौर की बेटी आंकाक्षा ने 19,000 फीट ऊंची किलिमंजारो चोटी पर चढ़ाई, साड़ी पहन तिरंगा फहराया

इंदौर  इंदौर की पर्वतारोही आकांक्षा शर्मा कुटुम्बले ने 19341 फीट की ऊंचाई पर स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले उन्होंने पिछले वर्ष सितंबर माह में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर भी चढ़ाई की थी। ये दोनों चोटियां विश्व की प्रतिष्ठित सेवन समिट्स में शामिल हैं।  पेशे से सिविल इंजीनियर आकांक्षा दोनों शिखरों पर चढ़ाई करने वाली इंदौर की संभवतः पहली पर्वतारोही हैं। साथ ही वे ऐसा करने वाली मध्य भारत की चुनिंदा पर्वतारोहियों में भी शामिल हो गई हैं। माउंट किलिमंजारो पर्वत की ऊंचाई बेस से शिखर तक की ऊंचाई के लिहाज से  दुनिया की किसी भी अन्य पर्वत चोटी से अधिक है। भूमध्य रेखा के समीप स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक परिस्थितियां अन्य पर्वत श्रृंखलाओं से अलग हैं, जिसके चलते शिखर पर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।आकांक्षा को भी चढ़ाई के दौरान ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा। उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और एक-एक कदम बढ़ाना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और विषम परिस्थितियों में भी चढ़ाई पूरी की। चढ़ाई के दौरान तापमान 12 डिग्री था और हवा 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी।   चोटी पर पहुंचने के बाद आकांक्षा ने कश्मीरी कानी साड़ी पहनकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया। उन्होंने बताया कि यह परिधान उन्हें अपने भारतीय होने का एहसास कराता है और कश्मीर से उनका विशेष लगाव है। वे अक्सर कश्मीर जाती रहती हैं।आकांक्षा ने कहा कि पर्वतारोहण के लिए उनकी कर्मभूमि कश्मीर रही है। उन्होंने माउंटेनियरिंग के बेसिक और एडवांस कोर्स वहीं से किए हैं और कश्मीर की कई चोटियों पर अभ्यास भी किया है। इसी कारण उन्होंने निर्णय लिया कि किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचने के बाद वे कश्मीर से लाई गई कानी साड़ी पहनेंगी। उन्होंने यह साड़ी टी-शर्ट और लोअर के ऊपर पहनी, जिसे उन्होंने एक अत्यंत सुखद अनुभव बताया।   यह अभियान आकांक्षा ने सफारी टच तंजानिया कंपनी के साथ पूरा किया। इस अभियान में वे अपने समूह की एकमात्र पर्वतारोही थीं। विश्व के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को सेवन समिट्स कहा जाता है। पर्वतारोहण की दुनिया में इन सभी चोटियों पर चढ़ाई करना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इसमें यूरोप की माउंट एलब्रुस और अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो भी शामिल हैं।  आकांक्षा ने बताया कि माउंट किलिमंजारो की तैयारी के लिए उन्होंने नियमित रूप से रनिंग की, जिम में  ट्रेनिंग की और सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने का अभ्यास किया। वे पांचवीं मंजिल पर रहती हैं और बिल्डिंग के बाहर की सीढ़ियों पर अभ्यास करने से उन्हें विशेष लाभ मिला। इसके अलावा उन्होंने प्राणायाम का अभ्यास भी किया, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।

मुख्यमंत्री का शहडोल दौरा आज, कमिश्नर और कलेक्टर ने की व्यवस्थाओं की जांच

शहडोल प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज 8 फरवरी को शहडोल जिले के धनपुरी और गधिया क्षेत्र का दौरा प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी कड़ी में संभागायुक्त शहडोल सुरभि गुप्ता ने लालपुर हवाई पट्टी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लालपुर हवाई पट्टी पर उतरेगा, जहां से वे सड़क मार्ग से धनपुरी के लिए रवाना होंगे। संभागायुक्त ने हवाई पट्टी पर सुरक्षा, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और आपात व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। इसी क्रम में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने जयसिंहनगर के गधिया पहुंचकर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने मंच, बैठक व्यवस्था, बिजली, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाने में कोई कोताही नहीं बरती जाए। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले धनपुरी पहुंचेंगे, जहां विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वे गधिया के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पुलिस विभाग भी सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति, एसडीएम सोहागपुर अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और सभी विभाग निर्धारित समय सीमा में तैयारियां पूरी करने में जुटे हुए हैं।   

बांधवगढ़ की बाघिन का राजस्थान में रिश्ता, हेलीकॉप्टर से विदाई, बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए मुकुंदरा हिल रिजर्व में शिफ्ट

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बाघिन का रेस्क्यू सफल रहा. इस बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की योजना है. फिलहाल बाघिन को ऑब्जरवेशन में रखा गया है. राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के सामने मध्य प्रदेश से 3 टाइगर की डिमांड रखी थी. राजस्थान को एक ऐसी बाघिन की तलाश है, जो मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में कुनबा बढ़ा सके. एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी बाघिन बांधवगढ़ की बाघिन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी. यहां से उसकी दुल्हन की तरह धूमधाम से विदाई होगी. इसकी तैयारी के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर का ट्रायल लैंडिंग भी हो चुका है. कुछ दिन पहले पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को इसी तरह एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व शिफ्ट किया गया था. रेस्क्यू के बाद बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया “बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने कक्ष क्रमांक RF-327, के दमना बीट के ताला परिक्षेत्र से एक बाघिन का रेस्क्यू किया है, जिसकी उम्र 3 से 4 वर्ष है. अब बाघिन के हर मूवमेंट पर नजर रहेगी. रेस्क्यू करने के बाद उसके स्वास्थ्य की जांच की गई है और रेडियो कॉलर पहनाया गया.” बाघिन को अंडर ऑब्ज़र्वेशन रखने के लिए आगामी कुछ दिनों के लिए मगधी परिक्षेत्र के बहेरहा स्थित बाड़े में सुरक्षित रूप से रखा गया है. योजना के अनुसार सभी तरह की परमिशन मिलने के बाद बाघिन को राजस्थान भेजा जाएगा. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की शान बनेगी बाघिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में भेजने की योजना है. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. इसी के तहत इस बाघिन का रेस्क्यू किया गया है. राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व को एक एडल्ट बाघिन चाहिए, जो बाघों का कुनबा बढ़ा सके. ऐसी बाघिन की उम्र 3 से 5 साल तक के बीच होनीचाहिए, जो प्रजनन करने योग्य हो. इस बारे में राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के माध्यम से परमिशन लेकर मध्य प्रदेश से 03 टाइगर और महाराष्ट्र से 02 टाइगर मांगे हैं. इसी कड़ी में पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान जा चुकी है. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघिन ले जाने की तैयारी है. 

सिंहस्थ महाकुंभ के लिए फूलों की खेती: 4200 हेक्टेयर में बनेगा विशेष क्लस्टर, केंद्र से मंजूरी की उम्मीद

उज्जैन  उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण धार्मिक दृष्टि से अहम इंदौर जिले में अब फूलों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इंदौर सहित कुछ जिलों को चिह्नित करते हुए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना बनाई है। इस योजना के तहत इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। 110 हेक्टेयर में सिर्फ गुलाब की खेती का लक्ष्य योजना के पहले चरण में 83.87 हेक्टेयर भूमि पर 142 हितग्राही किसानों को चयनित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे 110 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल गुलाब की खेती की जाए। इससे धार्मिक आयोजनों में फूलों की बढ़ती मांग को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा। मुख्य सचिव करेंगे प्रोजेक्ट की निगरानी इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस योजना पर चर्चा के बाद उद्यानिकी विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप संचालक उद्यान को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन के लिए बड़ा प्लान सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के लिए भी बड़ी योजना बनाई गई है। यहां 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत सरकार से विशेष प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होगी। इंदौर में रोज 8 से 12 टन फूलों की आवक इंदौर फूल बाजार एसोसिएशन के अनुसार शहर में प्रतिदिन 8 से 12 टन फूलों की आवक होती है। त्योहारी और पीक सीजन में यह मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्रि, दीपावली और विवाह आयोजनों के दौरान आवक 30 से 70 टन तक पहुंच जाती है। बाजार में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब और सेवंती की आपूर्ति होती है। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही फूलों की खेती प्रदेश में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है और मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। गेंदा सबसे अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है, इसके बाद गुलाब, क्रिसैंथेमम, ग्लैडियोलस, ट्यूबरोज और अन्य मौसमी फूलों की खेती होती है। राज्य में लगभग 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 5.12 लाख टन से अधिक फूलों का उत्पादन हुआ। धार्मिक स्थलों के कारण बढ़ी मांग उज्जैन, ओंकारेश्वर के अलावा देवास, सलकनपुर, नीमच, मंदसौर, महेश्वर, नलखेड़ा, परशुराम लोक सहित कई धार्मिक और तीर्थ स्थल इस क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से यहां फूलों की खेती पर विशेष फोकस किया जा रहा है। मंत्री बोले, बाहर से फूल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने हाल ही में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि उज्जैन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। सिंहस्थ मेले के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सरकार की योजना है कि स्थानीय किसानों से ही फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।   

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर कार्यशाला, नई श्रमिक संहिताओं पर चर्चा

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का भी होगा विमोचन भोपाल  श्रम विभाग ने 9 फरवरी को ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा। पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष ‘वेदा पहल’ की शुरुआत की है। कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।  

‘विक्रमोत्सव’ का भव्य आगाज 12 फरवरी से, उज्जैन में 139 दिनों तक चलेगा, महानाट्य और विज्ञान का संगम

उज्जैन  उज्जैन में 12 फरवरी से 30 जून तक 139 दिन का विक्रमोत्सव होगा। इसमें कलश यात्रा, नाटक मंचन, वैचारिक समागम, शोध संगोष्ठी, फिल्मों के प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और सूर्योपासना के आयोजन होंगे। प्रदेश के नगरों में विक्रमादित्य महानाट्य मंचन व शिक्षण संस्थाओं में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता की जाएंगी। 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने शुक्रवार को विक्रमोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसकी रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पक्ष को भी प्रचारित किया जाएगा। विज्ञान सम्मत कार्यों के संबंध में विज्ञान महाविद्यालयों, अभियांत्रिकी महाविद्यालयों और पालिटेक्निक को जोड़कर अभिनव कार्यक्रम किए जाएंगे। 15 फरवरी को प्रदेश में महादेव की कलाओं के शिवार्चन, कलश यात्रा, बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और विक्रम व्यापार मेले का आयोजन होगा। 16 से 20 फरवरी तक शिव पुराण, 16 से 25 फरवरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां और 26 से 28 फरवरी तक इतिहास समागम, पुतुल समारोह और अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी जैसी गतिविधियां होंगी। कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर कार्यक्रम वैचारिक समागम, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, विभिन्न भाषाओं और बोलियों में लोकरंजन के तहत कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के रामघाट (दत्त अखाड़ा) पर सूर्य उपासना का कार्यक्रम होगा। उज्जयिनी गौरव दिवस अंतर्गत शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण और विक्रम पंचांग 2082-83 और आर्ष भारत के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण होगा। महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य और पार्श्व गायकों द्वाराT सांगीतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। 15 फरवरी को शुभारंभ, 25 फरवरी तक नाट्य प्रस्तुतियां सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत ‘शिवोहम’ संगीतमय प्रस्तुति के उद्घाटन के साथ किया जाएगा. इसके बाद विक्रम थिएटर महोत्सव के अंतर्गत 16 से 25 फरवरी के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिसमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटक होंगे. कठपुतली महोत्सव, बौद्धिक सम्मेलन और फिर कवि सम्मेलन 26 से 28 फरवरी के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन प्रस्तावित है. वहीं, सम्राट विक्रमादित्य के युग में न्याय व्यवस्था और शासन प्रणाली पर केंद्रित एक बौद्धिक सम्मेलन 28 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित किया जाएगा. इसके पश्चात 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध कवि भाग लेंगे. पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विक्रमोत्सव के तहत अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में 20 से अधिक देशों की प्रविष्टियों के साथ पौराणिक फिल्मों का एक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी तथा गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा शामिल हैं. यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक विमर्श का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा. कार्यक्रम के अंतिम दिन, 19 मार्च को, वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर ‘उज्जयिनी गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा. सरकार के अनुसार, इस दिन शिप्रा नदी के तट पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, ‘अर्शा भारत’ के दूसरे संस्करण का लोकार्पण तथा नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘महादेव की नदी कथा’ प्रमुख आकर्षण होंगे. CM मोहन यादव का अधिकारियों को निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और कृतित्व के सभी आयामों की प्रभावी और व्यापक प्रस्तुति सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है. सीएम मोहन यादव ने यह भी निर्देश दिए कि विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को विक्रमोत्सव से जोड़ा जाए, ताकि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कालगणना, खगोल विज्ञान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को उजागर करने वाले विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें.   

उज्जैन में 500 हेक्टेयर में बनेंगे वन्य जीव केंद्र और रेस्क्यू सेंटर, वनतारा की तर्ज पर

 उज्जैन   उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाइल्ड लाइफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर पूरा अनुभव दें। इस वाइल्ड लाइफ सेंटर को करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हेक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केंद्र में शामिल कर लिया जाए। यह एक अनोखा वन्य जीव केंद्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केंद्रों से भिन्न हो। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  वन विभाग की समीक्षा में कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। कंसल्टेंट भी नियुक्त किए डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में दो नए वन्य जीव केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष में उज्जैन के वन्य जीव केंद्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केंद्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फारेस्ट टूरिज्म स्पाट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके। केंद्र ऐसे करें तैयार कि देशी और विदेशी सभी प्रजाति का दिन और रात कर विजिटर्स ले सकें आनंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केंद्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केंद्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव केंद्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केंद्र के रूप में तैयार किया जाए। देश-दुनिया के 11 जंगलों का कराया जाएगा अनुभव नियुक्त कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने बताया कि वन्य जीव केंद्र में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। वन्य जीव केंद्र का निर्माण कुल छह चरणों में किया जाएगा। इसमें दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केंद्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में कराया जाएगा।

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